Corona Lockdown में शराब की बहती गंगा 

छत्तीसगढ़ मे कोरोना विषाणु कोविड 19 महामारी के इस समय काल में शराब की  जमीनी स्थिति बेहद चिंताजनक दिखाई दे रही है.  छतीसगढ मे इस भीषण लाॅक डाउन  में भी शराब की गंगा बह रही है! छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार शराबबंदी के मसले पर चारों तरफ से घिर गई है .क्योंकि भूपेश बघेल ने शराबबंदी के मुद्दे पर ही एक तरह से जनादेश हासिल किया था. मगर डेढ़ वर्ष व्यतीत हो जाने के बाद भी प्रदेश में शराब बंदी लागू नहीं की गई है  और जैसी परिस्थितियां दिख रही है ऐसा प्रतीत नहीं होता कि आने वाले समय में भूपेश बघेल सरकार छत्तीसगढ़ में बिहार की तर्ज पर शराबबंदी करेगी.

दृश्य एक-

एक हजार की कीमत का शराब लॉक डाउन के इस समय में तीन हजार में बिक रहा  है.

दृश्य  दो- 

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शराब खत्म हुआ जो 80 रुपये में बिकता था तीन सौ रुपए में गली-गली में बिक रहा  है.

दृश्य तीन-

भले आपको दूध, दही इस कोरोना महामारी के समय में ना मिले मगर शराब आप को बड़ी आसानी से उपलब्ध हो जाती है, कैसे?

कुल मिलाकर यह कहा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में महामारी के इस समय में भी शराब की गंगा बह रही है. जिम्मेदार अधिकारी जिनका काम कोरोना को  रोकना है वे ही शराब बिकवाते पकड़े जा रहे हैं.

भूपेश बघेल की भीष्म  प्रतिज्ञा

छत्तीसगढ़ में कभी शराब के कारण लोगों के बेवजह तबाह हो जाने की खबरें हत्या और लूट की खबरें सुर्खियों में रहती थी.यह कोरोना महामारी के कारण बेहद कम हो गयी है.

लेकिन लॉक डाउन के बाद से  इन विगत 28 दिनों में इस तरह की  घटनाएं सामने नहीं आ रही है.यहां तक कि घरेलू हिंसा के मामलों पर भी लगाम लगी है. लेकिन जैसे-जैसे लॉक डाउन-2 यानि 3 मई2020  की तारीख नजदीक आती जा रही है,  महिलाओं के चेहरे पर चिंता की लकीरें उभर रही हैं- भरी जवानी में जवान पुत्र या पति को खो देने का भय, मासूम खिलखिलाते बचपन को फिर रोज शराबी पिता के शाम को शराब पीकर घर आकर मारपीट करने, घर में कलह होने,राशन ना होने का भय सताने लगा है. और सवाल  यह उठ रहा है कि भूपेश बघेल की भीष्म  प्रतिज्ञा का क्या हुआ जो उन्होंने विधानसभा चुनाव के पूर्व उठाई थी यानी छत्तीसगढ़ में शराबबंदी.

कारण विगत छत्तीसगढ़ में 28 दिनों से शराब दुकानें बंद हैं.इससे प्रदेश के प्रत्येक घर परिवार में खुशहाली का वातावरण नजर आ रहा है. जो शराब पीने से कोसों दूर है वे तो खुश हैं ही लेकिन महिलाओ और कलह के वातावरण में जीवन बिताने वाले बच्चों के जीवन मे कोरोना कुछ दिनों के लिए एक नया खुशियों का सबेरा लाया हैं.इन सबका मानना है कि प्रदेश में हमेशा के लिए शराबबंदी हो जाए , जिससे शराब पर होने वाला खर्च बच्चों के बेहतर भविष्य के निर्माण में लगे और घर परिवार खुशहाल रहे.एकाएक शराब दुकानें फिर से शुरू होने की खबर से प्रदेश की महिलाएं परेशान हो गई हैं. उन्हें शराब चालू होने के बाद का भय सता रहा है .शराब की वजह से फिर घरेलू हिंसा, कलह, तंगहाली बढ़ेगी। शराब पीने के लिए रुपये की व्यवस्था के लिए महिलाएं मारपीट की शिकार होंगी.

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विगत विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का जन घोषणा पत्र प्रदेश की महिलाओं के लिए गहन अंधकार में “दिए की लौ” की भांति पूर्ण शराबबंदी प्रदेश में किए जाने को लेकर सामने आया.प्रदेश की 22 विधानसभा  सीटों पर महिला मतदाताओं की अधिकता है और पूर्ण शराबबंदी का मुद्दा ही कांग्रेस को आशातीत सफलता दिलाते हुए सत्ता के मुकाम पर पहुंचा गया. लेकिन आज लगभग डेढ़ बरस बीतने जा रहे हैं।पूर्ण शराबबंदी की चर्चा पर कांग्रेस दाएं-बाएं झांकने  लगती है.

शराब बंदी की जबरदस्त मांग 

हालांकि “लॉकडाउन” ने शराबबंदी के लिए उपयुक्त समय और वातावरण तैयार कर दिया है.  इतने दिनों में शराब की लत को लेकर ना तो किसी की मौत हुई है और नही कोई मरीज अस्पताल में दाखिल हुआ है. शराब पी कर अस्पताल में भर्ती होने या शराब पीकर मरने की खबरें कई बार सुनने को मिली  है लेकिन लॉक डाउन  के दौरान किसी के शराब न पीने से होने वाली किसी भी विवाद या बड़ी घटना की बात सामने नही आई है. लॉकडाउन ने जनहितकारी शराबबंदी के लिए उपयुक्त समय और वातावरण तैयार कर दिया है. शराब की लत से लॉक डाउन के कारण लाखो मुक्ति पा चुके है. घरों में कलह का वातावरण समाप्त हो चुका है.

 छत्तीसगढ़  के हित में है

अगर छत्तीसगढ़ को आगे बढ़ाना है तो दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ शराबबंदी पूर्ण तौर पर लागू करके प्रदेश को नशे से मुक्त करना होगा.चीन अफीम छोड़कर आज आगे बढ़ गया है, तो हम क्यों नहीं जा सकते. इसके लिए सत्ताधारी कांग्रेस को ही सोचना एवं समझना होगा कि बड़ा सामाजिक-आर्थिक बदलाव का कार्य शराबबंदी से होगा.

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दरअसल, छत्तीसगढ़ में शराब पीने वालों की संख्या  कुछ सालों में तेज़ी से बढ़ती चली गई है. राष्ट्रीय वार्षिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण की मानें तो छत्तीसगढ़ के 100 में से 32 लोग शराब पीने के आदी हैं, जो देश में सर्वाधिक है.

यह कौन सा सुशासन है, नीतीश कुमार बताएंगे -प्रशांत किशोर

देश में कोरोना वायरस के बढते कहर के बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर विपक्ष जम कर भड़ास निकाल रहे हैं. ताजा मामला राजस्थान के कोटा में पढ़ रहे बिहार भाजपा के विधायक अनिल सिंह को ले कर है. विपक्ष का आरोप है कि विधायक का एक बेटा जो राजस्थान के कोटा में रह कर पढाई कर रहा है, को लाने के लिए नीतीश सरकार ने पास जारी किया जो लौकडाउन का सरासर उल्लंघन है, वह भी तब जब इस के पूर्व में कोटा में फंसे सैकङों बच्चों को जब वहां की सरकार ने बिहार जाने की अनुमति दे दी थी तब बिहार के सीमा पर इन्हें रोक दिया गया था. बाद में नीतीश कुमार इस शर्त पर इन छात्रों को राज्य में आने देने के लिए राजी हुए कि इन्हें कुछ दिन क्वारंटाइन में रखा जाएगा.

अब नीतीश के कभी काफी करीब रहे और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत कुमार ने सरकार पर निशाना साधा है.

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एक के बाद एक ट्वीट कर प्रशांत किशोर ने कहा,”कोटा में फंसे सैकड़ों बच्चों को नीतीश कुमार ने यह कह कर खारिज कर दिया कि ऐसा करना लौकडाउन की मर्यादा के खिलाफ होगा. अब उन्हीं की सरकार ने बीजेपी के एक एमएलए को कोटा से अपने बेटे को लाने के लिए विशेष अनुमति दे दी. नीतीशजी, अब आप की मर्यादा क्या कहती है?”

बिहार के गरीब मजदूर फंसे पड़े हैं

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इस से पहले भी प्रशांत किशोर ने कई ट्विट कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा था, जब बिहार के प्रवासी मजदूरों को बिहार में प्रवेश को ले कर नीतीश कुमार ने इसे लौकडाउन का उल्लंघन बताया था.

अपने ट्विट में प्रशांत ने कहा था,”देश भर में बिहार के लोग फंसे पङे हैं और नीतीशजी मर्यादा का पाठ पढा रहे हैं. स्थानीय सरकारें कुछ कर भी रही हैं पर, पर नीतीशजी ने संबंधित राज्यों से इस मसले पर बात भी नहीं की. पीएम के साथ मीटिंग में भी उन्होंने इस की चर्चा तक नहीं की.”

प्रशांत किशोर ने अगले ट्विट में लिखा,”नीतीशजी इकलौते ऐसे सीएम हैं जो पिछले 1 महीने से लौकडाउन के नाम पर पटना के अपने आवास से बाहर तक नहीं निकले हैं. साहेब की संवेदनशीलता और व्यस्तता ऐसी है कि कुछ करना तो दूर, दूसरे राज्य में फंसे बिहार के लोगों को लाने के लिए इन्होंने किसी सीएम से बात तक नहीं की.”

कन्नी काट गए मंत्रीजी

बिहार सरकार में जल संसाधन मंत्री और दिल्ली जदयू के प्रभारी संजय झा से जब फोन पर बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा,”देखिए यह तो अधिकारियों के बीच की बात है. सरकार कहीं भी इस मुद्दे को ले कर शामिल नहीं है.”

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यह पूछने पर कि नीतीश सरकार ने बिहार के प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए क्या किया है? उन्होंने गोलमोल जवाब दे कर बताने से इनकार कर दिया.

गरीब मजदूरों की कोई अहमियत नहीं

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इधर दिल्ली में फंसे हजारों दिहाङी मजदूरों को लौकडाउन का हवाला दे कर ‘जहां हैं वहीं रहें’ कहने वाले नीतीश कुमार की आलोचना करते हुए दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता पुष्पेंद श्रीवास्तव ने कहा,”लगता है बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को ले कर नीतीशजी गठबंधन धर्म निभा रहे हैं या फिर वे भाजपा नेताओं के दबाव में हैं.”

उन्होंने कहा,”यह तो बेहद अफसोस की बात है कि एक तरफ जहां बिहार के हजारों प्रवासी मजदूर दिल्ली सहित देश के कई जगहों पर फंसे पङे हैं, तो सिवाय इन के लिए कुछ करने के, बिहार के एक भाजपा एमएलए को कोटा से अपने बेटे को लाने के लिए वीआईपी पास जारी करना मूर्खता है.

“जब नीतीश कुमार प्रवासी मजदूरों को बिहार लाने में असमर्थ थे और लौकडाउन का हवाला दे रहे थे तो इस की सराहना ही हो रही थी पर भाजपा नेता को पास जारी कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि उन की नजरों में गरीब मजदूरों की कोई अहमियत नहीं है. जब कोटा में रह रहे अन्य छात्रों को उन्होंने क्वारंटाइन में रखने को कहा था तो इस बात की क्या गारंटी है कि भाजपा एमएलए के बेटे को कोई संक्रमण नहीं है? क्या इस बात की गारंटी खुद मुख्यमंत्री या राज्य के अधिकारी लेंगे?”

जवाब किसी के पास नहीं

इस मुद्दे को ले कर अब जदयू के पदाधिकारी और विधायक भी कुछ कहने से बचते दिख रहे हैं. दिल्ली प्रदेश जदयू के महासचिव राकेश कुशवाहा ने इस बाबत कुछ कहने से साफ इनकार कर दिया और यहां तक कह दिया कि उन्हें इस की जानकारी तक नहीं है.

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मालूम हो कि बिहार में कोरोना वायरस अब धीरेधीरे अपना पैर पसार चुका है और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक वहां 86 पौजिटिव मामले दर्ज किए गए हैं जबकि 2 लोगों की मौत भी हो चुकी है.

कानून तो हर किसी पर लागू होता है

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मगर इतना तो साफ है कि कोरोना वायरस को ले कर देशभर में लागू लौकडाउन को ले कर जहां नीतीश सरकार की प्रवासी मजदूरों की घर वापसी और ठोस निर्णय न ले पाने की वजह से आलोचना की जा रही थी, वहीं भाजपा के एक एमएलए के बेटे को पास जारी कर सरकार खुद कटघरे में है. बात भी सही है, नीतीश कुमार राज्य के मुखिया हैं और इस नाते राज्य के अमीरगरीब हर नागरिक के प्रति उन की जिम्मेदारी बनती है. आज वे विपक्ष के निशाने पर हैं तो जाहिर है इस कदम से उन की आलोचना होगी ही वह भी तब जब लौकडाउन में हर किसी पर देश का कानून एकसमान लागू होता है.

यहां चल रहा था इंसानी खून का काला कारोबार

पैसा और जल्द अमीर बनने की लालसा इंसान को वह सब करने को मजबूर कर देता है कि एकबारगी यकीन ही नहीं होता कि क्या कोई ऐसा भी कर सकता है? यों अपराध करना और वह भी खुलेआम बिहार में आम बात है मगर पिस्तौल के बल पर आएदिन लोगों को शिकार बनाने वाले अपराधी किस्म के लोगों ने पैसे कमाने का नया तरीका ढूंढ़ा तो जान कर लोग सन्न रह गए.

बिहार के पटना में एक ऐसा ही वाकेआ घटित हुआ और पुलिस के हत्थे चढ़े ऐसे अपराधी जिन की तलाश में पुलिस खाक छान रही थी.

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कमरा छोटा अपराध बड़ा

मामला पटना के जक्कनपुर थाने स्थित पोस्टल पार्क, खासमहाल इलाके की है. यहां एक छोटे से कमरे में चल रहे अपराध की सूचना पुलिस को मिली. पुलिस ने सुनियोजित तरीके से छापा मारा तो चारों तरफ बिखरे खून की छींटे देख कर हैरान रह गई. एकबारगी तो पुलिस ने सोचा कि यहां किसी की हत्या की गई है पर जब पुलिस ने तफ्तीश की और घर में सर्च औपरेशन चलाया तो माजरा समझते देर नहीं लगी.

दरअसल, इस छोटे से कमरे में इंसानी खून का काला कारोबार चलाया जा रहा था. पुलिस ने अपराध का भंडाफोड़ किया तो परत दर परत सचाई खुलती गई.

पुलिस ने गिरोह के सरगना संतोष कुमार और एजेंट सोनू को गिरफ्तार कर सख्ती से पूछताछ की. वहां खून से भरे 4 ब्लड बैग भी बरामद किए गए थे. पहले तो इन अपराधियों ने पुलिस को बरगलाने की कोशिश की पर जब पुलिस ने सख्ती दिखाई तो टूट गए और बताया कि पिछले 6 महीने से दोनों यहां रह कर खून की खरीदबिक्री कर रहे थे.

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अपराध और अपराधी

जक्कनपुर थाना के इंचार्ज मुकेश कुमार वर्मा ने मीडिया को जानकारी दी और बताया,”पुलिस टीम द्वारा की गई पूछताछ में यह बात सामने आई है कि दोनों के तार कई निजी अस्पतालों से जुड़े हैं. छापे के दौरान कई डोनर्स भी पकड़े गए, जिन्हें पैसे का लालच दे कर खून निकलवाने लाया गया था.”

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अब पुलिस मानव खून की खरीदबिक्री में शामिल दूसरे लोगों की तलाश में अलगअलग जगहों पर छापे मार रही है.

एक बार में 2 यूनिट तक खून निकाल लेते थे

खून की खरीदबिक्री का धंधा करने वाले 1 यूनिट खून निकालने की बात कह कर ब्लड डोनर्स को कमरे तक लाते थे. फिर धोखे से 1 की जगह 2 यूनिट खून निकाल लेते थे और उन्हें भनक तक नहीं लग पाती थी. खून लेने के तुरंत बाद सरगना संतोष डोनर को आयरन की कैप्सूल खिला देता था. फिर कुछ ही दिनों बाद वह डोनर दोबारा खून देने पहुंच जाता था. कई बार तो डोनरों की तबीयत तक बिगड़ जाती थी. ये ऐसे डोनर्स होते थे जिन्हें पैसों की सख्त जरूरत होती थी या फिर वे जो लंबे समय से बेरोजगार थे. कई तो नशाखोर भी थे, जो नशे की लत को पूरा करने के लिए ब्लड डोनेट करते और पैसा मिलने के बाद नशा करने चले जाते.

अस्पतालों में बिना जांच खरीद लिए जाते थे खून

कुछ निजी अस्पतालों के मालिक बिना जांच ही ऐसे लोगों से कम दाम पर खून खरीद लेते थे. उन की साठगांठ संतोष और सोनू के साथ थी. दोनों रोज अस्पतालों में खून की सप्लाई करते थे. सूत्रों के मुताबिक, पुलिस टीम उन अस्पतालकर्मियों की तलाश कर रही है, जो अकसर सोनू और संतोष से मिलने यहां आया करते थे. जिन निजी अस्पतालों में खून की खरीदबिक्री करने वाला गैंग सक्रिय था, पुलिस के अनुसार अब वहां भी काररवाई हो सकती है.

हजारों कमाते थे सिर्फ 1 दिन में

पुलिस के मुताबिक, खून खरीदने वाला संतोष डोनर्स को महज 1 हजार रुपए देता था जबकि 1 यूनिट खून से वह 22 सौ रूपए का मुनाफा कमा लेता था. इस तरह 1 डोनर से वह 44 सौ बना लेता था जबकि डोनर्स को वह बताता तक नहीं था कि उस ने 2 यूनिट ब्लड निकाल लिए हैं.

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वहीं सोनू खून देने वालों को रुपए का लालच दे कर अपने अड्डे तक लाता था. 1 डोनर को लाने के बदले उसे कमीशन के रूप में 11 सौ रुपए मिलते थे.

जिस कमरे में खून की खरीदबिक्री का खेल चल रहा था वह बेहद छोटा था. जाहिर है इस में संक्रमण का खतरा भी हो सकता है. सारे नियमकानून को ताक पर रख कर खून निकाले जाते थे. खास बात यह है कि ब्लड बैग तक का इंतजाम सरगना ने कर रखा था, जबकि ब्लड बैग आम आदमी को देने की मनाही है. उसे लाइसैंसी ब्लड बैंक ही ले सकता है.

पुलिस उगलवा रही है सच

अब पुलिसिया तफ्तीश जारी है. इस गैंग को चिह्नित कर पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है. सह भी पता एसएसपी उपेंद्र शर्मा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि पुख्ता सुबूत जुटाने के बाद पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी और यह पता लगाएगी कि इन अपराधियों के तार कहांकहां जुङे हैं.

अरहान ने निकाले रश्मि देसाई के अकाउंट से इतने लाख, फैंस ने लिखा #FraudArhaanKhan

टेलिविजन इंडस्ट्री की जानी मानी एक्ट्रेस रश्मि देसाई (Rashmi Desai) अपने फैंस के बीच काफी पौपुलर हैं. रश्मि देसाई की फैन फौलोविंग शुरूआत से ही काफी अच्छी रही है लेकिन इस फैन फौलोविंग को चार चांद तक लगे जब उन्होनें टेलिविजन इंडस्ट्री के सबसे बड़े रिएलिटी शो बिग बौस सीजन 13 (Bigg Boss 13) में एंट्री ली और सिर्फ एंट्री ही नहीं बल्कि वे इस शो की टौप 5 फाइनलिस्ट (Top 5 Finalist) में से एक रहीं. रश्मि देसाई ने बिग बौस के घर में खूब सुर्खियां बटोरी और फैंस ने भी रश्मि को काफी पसंद किया और साथ ही सपोर्ट भी किया.

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बिग बौस (Bigg Boss) के घर में रश्मि देसाई एक ऐसा इंसिडेंट हुआ जिसे देख सभी घरवालों और दर्शकों की आंखें खुली की खुली रह गई. दरअसल, जब इस शो में रश्मि के खास दोस्त अरहान खान (Arhaan Khan) ने एंट्री मारी तो रश्मि काफी खुश हुईं और उन्हें ऐसा लगा कि उनके सपोर्ट में और उनकी स्टैंड लेने कोई आ गया है. शो के चलते अरहान खान ने नैशलन टी.वी. (National TV) पर सबके सामने रश्मि देसाई को प्रोपोज तक कर दिया.

यह सब देख कर वीकेंड के वौर में इस शो के होस्ट सलमान खान (Salman Khan) ने अरहान खान की ऐसी-ऐसी पोलें खोली कि सभी के होश उड़ गए. दरअसल सलमान खान नहीं चाहते थे कि रश्मि देसाई (Rashmi Desai) अपनी जिंदगी का इतना बड़ा फैसला बिना सच्चाई जाने ही ले लें और तभी सलमान खान ने सभी के सामने अरहान खान की पोल खोली की वे पहले से ही शादीशुदा हैं और इतना ही नहीं बल्कि उनका एक बच्चा भी है.

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सलमान खान के मुंह से अरहान खान की ये बातें सुनकर रश्मि देसाई के तो जैसा होश ही उड़ गए लेकिन रश्मि देसाई शो के दौरान काफी स्ट्रौंग बनी रही जिसकी तारीफ दर्शकों ने खूब की. रश्मि देसाई और अरहान खान का ये विवाद काफी कौंट्रोवर्शियल रहा.

एक बार फिर रश्मि देसाई और अरहान खान सुर्खियों में आ गए हैं और इस बार भी मामला काफी सीरियस दिखाई दे रहा है. दरअसल पिछले कुछ दिनों से रश्मि देसाई की बैंक स्टेटमेंट वायरल हो रही है और खबरों की माने तो उस बैंक स्टेटमेंट में ये साफ साफ नजर आ रहा है कि अरहान खान ने रश्मि देसाई के अकाउंट से काफी ज्यादा पैसे निकाले हैं.

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रश्मि देसाई की बैंक स्टेटमेंट की फोटोज देख रश्मि के फैंस काफी भड़क उठे हैं और अरहान खान को काफी खरी-खोटी सुना रहे हैं. इतना ही नहीं बल्कि रश्मि के फैंस ने सोशल मीडिया पर #FraudArhaanKhan भी ट्रेंड किया. अब इन खबरों में कितनी सच्चाई है इसका खुलासा तो खुद रश्मि देसाई ही कर सकती हैं.

इस Bhojpuri एक्ट्रेस की अदाएं देख उड़ जाएंगे होश, देखें Viral Photos

भोजपुरी (Bhojpuri) फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर एक्ट्रेस आम्रपाली दुबे (Amrapali Dubey) अपने फैंस के बीच काफी पौपुलर हैं. आम्रपाली दुबे की अदाएं देख उनके फैंस तो जैसे होश ही गवा बैठते हैं. आम्रपाली की फैन फौलोविंग इतनी अच्छी है कि उनके फैंस उनकी हर फिल्म, हर वीडियो और यहां तक की हर फोटो को बेहद प्यार देते हैं और साथ ही उन्हें वायरस कर देते हैं.

 

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आम्रपाली दुबे (Amrapali Dubey) सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और समय समय पर अपनी बेहतरीन फोटोज शेयर करती रहती हैं जिसे देख उनके फैंस काफी खुश हो जाते हैं. साफ साफ कहा जाए तो आम्रपाली को अपने फैंस को खुश करना काफी अच्छे से आता है और वे अच्छे से जानती हैं कि उनके फैंस को क्या चाहिए.

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आम्रपाली दुबे (Amrapali Dubey) इतनी खूबसूरत होने के साथ साथ एक बेहतरीन एक्ट्रेस भी हैं. उन्होनें अभी तक कई भोजपुरी फिल्में की हैं. आम्रपाली इस कदर टेलेंटिड है कि उनकी फिल्मों और उनके गानों में एक्सप्रेशन्स देख कोई भी उनका दीवाना बन सकता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि उनके फैंस ना सिर्फ उनकी फोटोज वायरल करते हैं बल्कि वे आम्रपाली को इतना चाहते हैं कि उनके गानों से उनके बेहतरीन एक्सप्रेशन्स वाले स्क्रीन शौट्स निकाल कर वायरल करते रहते हैं.

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ऐसे ही कुछ स्क्रीन शौट्स आजकल सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं तो चलिए आपको भी दिखाते हैं उनके फैंस द्वारा वायरल किए गए उनके हौट एक्सप्रेशन्स वाली फोटोज –

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आम्रपाली दुबे (Amrapali Dubey) भोजपुरी इंडस्ट्री की जानी मानी एक्ट्रेस में से एक है. कई लोगों के दिलों में ये बात बैठ चुकी है कि भोजपुरी सिनेमा (Bhojpuri Cinema) का मतलब सिर्फ बी-ग्रेड (B-Grade) फिल्में ही हैं लेकिन कुछ कलाकारों ने लोगों की इस सोच को बदल कर रख दिया है और उन कलाकारों में से एक नाम आम्रपाली दुबे का भी है.

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सेनेटाइजर ही पिला दिया दबंगों ने, कठघरे में खड़ा दबंग

दबंगों को यह जरा भी रास नहीं आया कि कोई उस की तौहीन कर दे. इसी तौहीन की वजह से दबंगों ने मिल कर एक शख्स की पहले पिटाई की और फिर उस के बाद जबरन उसे सेनेटाइजर पिलाने की घटना सामने आई.

यह ताजा मामला रामपुर जिले के मुतियापुर गांव का है. गांव के प्रधान ने अपने गांव में सैनिटाइजर के छिड़काव के लिए युवक को बुलाया और उसी के मुंह में सैनिटाइजर का स्प्रे कर दिया, जिस से उस युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई.

रामपुर जिले के भोट थाना क्षेत्र में सेनेटाइजर कर रहे एक युवक कुंवर पाल की गांव के ही दूसरे शख्स से झड़प हो गई. जब कुंवर पाल सैनिटाइजर स्प्रे कर रहा था तब पास से गुजर रहे एक शख्स के पैर पर सैनिटाइजर स्प्रे चला गया, जिस के बाद दोनों में झड़प हो गई. दूसरे शख्स ने कुंवर पाल को गालीगलौज देना शुरू कर दी.

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कुछ ही देर में कुछ और लोग वहां पहुंच गए और दूसरे युवक के साथ मिल कर सैनिटाइजर का स्प्रे कुंवर पाल के मुंह में उड़ेल दिया.

हालत बिगड़ने पर वहां मौजूद लोग उसे अस्पताल ले गए, जहां से उसे हायर सेंटर रेफर किया गया. यहां इलाज के दौरान 17 अप्रैल की दोपहर कुंवर पाल की मौत हो गई.

फिलहाल, पुलिस ने एक अज्ञात व 4 अन्य के खिलाफ धारा 147, 323 व 304 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.

मृतक कुंवर पाल के भाई महेश पाल ने आरोप लगाते हुए कहा कि 14 अप्रैल की सुबह 7 बजे पड़ोसी गांव के प्रधान ने हमारे गांव से 2 लड़के दवा छिड़कने के लिए बुलाए थे. दवा छिड़कने के दौरान कुछ दवा पास से गुजर रहे युवक के पैरों पर चली गई जिस के बाद उन की आपस में झड़प हो गई और छिड़काव कर रहे कुंवर पाल के मुंह में सैनिटाइजर स्प्रे कर दिया, जिस से उस की हालत बिगड़ गई.

17 अप्रैल की दोपहर इलाज के दौरान कुंवर पाल की मौत हो गई.

वहीं भोट क्षेत्राधिकारी अशोक पांडे ने बताया कि मुतियापुरा गांव के प्रधान इंद्रपाल हैं. भाई महेश पाल ने कहा कि उस के भाई कुंवर पाल को इंद्रपाल सेनेटाइजर दवा का छिड़काव करने के लिए ले गए थे और छिड़काव करते समय स्प्रे इंद्रपाल के ऊपर पड़ गया.

इंद्रपाल ने जानबूझ कर उस के भाई कुंवर पाल के मुंह में दवा डाल दी. महेश पाल की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया.

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वहीं एएसपी अरुण कुमार कहते हैं, ‘मृतक के भाई ने हमें घटना के बारे में सूचना दी. उस ने बताया कि जब मृतक 14 अप्रैल को गांव में सेनेटाइजेशन करने गया था तो कुछ बदमाशों ने उसे पीटा था. लोगों ने युवक को रामपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से डाक्टरों ने रेफर कर दिया. फिर उसे मुरादाबाद जिले के टीएमयू अस्पताल में भर्ती कराया गया. यहां 17 अप्रैल को उस की मौत हो गई.

भाई महेश पाल कुछ भी आरोप लगाए, पर इन दबंगों के खिलाफ मामला तो कोर्ट ही तय करेगा कि गलती किस की है.

जरा सी बात पर दबंगों का इतना बखेड़ा खड़ा करना कि जान ही चली जाए, कोई हैरानी की बात नहीं, पर यह इस बात पर निर्भर है कि इन दबंगों की दबंगई का फैसला कोर्ट किस तरह करती है. क्या ये बाहर निकल पाएंगे या जेल ही इन का भविष्य होंगी, कहना मुश्किल है.

फल, सब्जी के बाद पान उत्पादकों पर भी रोजी रोटी का संकट

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने शुरू किए गए लौक डाउन का असर हर जगह दिखाई दे रहा है. फल, फूल, सब्जी उगाने वाले किसानों के साथ देश के विभिन्न इलाकों में पान की खेती करने वाले किसान भी इससे अछूते नहीं हैं. बिना किसी सुरक्षा उपायों के कोरोना वायरस से लड़ी जा रही इस जंग से गरीब किसान जिंदा बच भी गया तो कर्ज के बोझ और भूख से मर जायेगा.

25 मार्च से पूरे देश में लागू किए गए लौक डाउन में पान की दुकानों के बंद होने से पनवाड़ी के साथ पान पत्तों की खेती से जुड़े किसान परिवार की हालत खराब है. पान के पत्तों की तुड़ाई और बिक्री बंद होने से बरेजों में लगी पान की फसल सड़ने की कगार पर  है. पान उत्पादक किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फिर गया है और उनके समक्ष रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है.

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मध्यप्रदेश में पान की खेती मुख्य रूप से  छतरपुर, टीकमगढ़, ग्वालियर, दतिया, पन्ना, सतना, रीवा, सागर, दमोह, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, मंदसौर, रतलाम, खंण्डवा, होशंगावाद, छिदवाड़ा, सिवनी, मंडला, डिंडौरी सहित 21 जिलों में होती है. वैसे तो प्रदेश में चौरसिया जाति के लोगों का व्यवसाय पान की खेती से जुड़ा हुआ है,लेकिन पान बरेजों में दलित और पिछड़े वर्ग के लोग भी मजदूरी का काम करते हैं. चौरसिया समाज के लोग पान के पत्तों को उगाने के अलावा पान की दुकान पर भी पान और पान मसाला बेचने का धंधा करते हैं.

नरसिंहपुर जिले में करेली तहसील के गांव निवारी, तेंदूखेड़ा तहसील के पीपरवानी और गाडरवारा तहसील के गांव बारहा बड़ा में पान की खेती होती है.

अकेले नरसिंहपुर जिले में चार सौ हेक्टेयर में होने वाली पान की खेती के व्यवसाय से लगभग एक हजार पान उत्पादक किसानों की आजीविका चलती है.पान उत्पादकों द्वारा जिले के बाहर भी अपने पान पत्ते की सप्लाई की जाती है.पिछले एक महीने में इन किसानों की फसल की तुड़ाई और सप्लाई न होने से धीरे धीरे वह सड़ने लगी है.

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निवारी गांव में चौरसिया जाति के एक सौ से अधिक परिवार तीन पीढ़ियों से  पान की खेती कर रहे हैं. गांव के 75 साल के बुजुर्ग खेमचंद चौरसिया अपना दर्द वयां करते हुए कहते हैं -” मेरे दस सदस्यों का परिवार पान की खेती से गुजारा करता है,लेकिन महिने भर से इस लौक डाउन ने खाने पीने को मोहताज कर दिया है”. करेली के साप्ताहिक बाजार में पान की थोक और फुटकर बिक्री करके मिलने वाले रूपयों से रोजमर्रा की चीजों को खरीद कर रोज़ी रोटी चलाते हैं. वे सरकार को कोसते हुए कहते हैं – “ये सरकार की गलत प्लानिंग के कारण हुआ है. जब जनवरी माह में ही दूसरे देशों में कोरोना का अटैक शुरू हो गया था ,तो हमारी सरकार विदेशों में रह रहे अमीर, नौकरशाह और कारपोरेट जगत के लोगों को हवाई जहाज से भारत ला रही थी. यदि उसी समय विदेशों से आवाजाही बंद कर देते तो आज ये दिन न देखने पड़ते”.

बारहा बड़ा के पान उत्पादक ओमप्रकाश  चौरसिया बताते हैं कि पान की फसल नाजुक फसलों में शुमार होती है. पान के पत्तों को तोड़ने के बाद ज्यादा दिनों तक उसे सहेजकर नहीं रखा जा सकता है और पान पत्तों की तुड़ाई भी एक निश्चित अंतराल पर करना होती है.लौक डाउन की वजह से पहले से तोड़ी गई फसल की सप्लाई न होने से सड़ गई है.वे कहते हैं कि उनके पान की सप्लाई छिंदवाड़ा और सागर जिले में तक होता है. मोदी के पहले ही नरसिंहपुर जिले के अफसरों ने 23 मार्च से लौक डाउन कर दिया . इसकी वजह से  पान के रैक नहीं पार्टियों तक न पहुंच कर ट्रांसपोर्ट में ही सड़ गये.अफसरों की सख्ती अब हमें रोजी रोटी को मोहताज रख रही है.

पीपरवानी गांव के औंकार चौरसिया का कहना है कि हमारे गांव के किसानों की आजीविका का इकलौता साधन पान की खेती है. बास की लकड़ी से बने बरेंजो में लगी पान की बेलाओं में  नियमित रूप से पानी देकर सहेजना पड़ता है. कोरोना की महामारी पान उत्पादक किसानों के लिए बहुत बड़ी मुसीबत बनकर आई है. पान की बिक्री न होने और तुड़ाई न कर पाने के कारण हरी भरी फसल सड़ने लगी है.वे  कहते हैं कि सरकार अभी तक किसी प्रकार की मदद के लिए नहीं आगे नहीं है.गांव के अगड़े जाति के लोग तो मोदी के भजन गाने में इतने मस्त हैं कि उन्हें गरीब मजदूर की कोई फ़िक्र ही नहीं है. धर्म का धंधा करने वाले ये लोग कभी थाली, ताली बजाने का फरमान सुनाते हैं तो कभी दिया जलाने का.ये सब नौटंकी न करो तो गांव के लोग शंका की निगाह से देखते हैं.

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निवारी गांव के पढ़े लिखे युवा पंकज चौरसिया बताते हैं कि सप्ताह के अलग-अलग दिनों में जिले के गांव कस्बों में लगने वाले हाट बाजारों में जाकर वे पान की बिक्री से करते हैं और इसी  आमदनी से घर का चूल्हा चौका चलता है . 22 मार्च से पूरा महिना बीतने को है ,पान पत्तों की कोई बिक्री न होने से गुजर बसर मुश्किल हो गई है. पंकज बताते हैं कि उनके पास थोड़ी सी खेती में गेहूं चना की फसल भी हो जाने से राहत है, परन्तु बरेजों में मजदूरी कर रहे लोगों  के परिवार पर रोज़ी रोटी का संकट खड़ा हो गया है.लौक डाउन में सब्जियां बनाने तेल ,मसाले तक नहीं मिल रहे, मजबूरन गर्म पानी में उबालकर नमक मिलाकर काम चला रहे हैं.

लंबे समय से मध्यप्रदेश के पान की खेती करके वाले किसान पान विकास निगम बनाने की मांग कर रहे हैं. विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक आपदायें आने की स्थिति में शासन प्रशासन द्वारा इन कृषकों को समय पर उचित लाभ नहीं मिल पाता हैं, जिस कारण से मजबूर होकर किसानों का इस खेती से मोह भंग भी होने लगा है.

शादी के नाम पर धोखाधड़ी करने वालों से बचकर रहे

13 नवंबर 2019 को मध्यप्रदेश की जबलपुर पुलिस ने एक यैसे मामले का खुलासा किया था , जिसमें कुंवारे लड़को की दूसरे राज्यों की खूबसूरत लड़कियों से शादी कराकर धोखाधड़ी की जाती थी. जबलपुर निवासी संजय सिंह नाम के युवक ने पुलिस को शिकायत में बताया  कि एक बेवसाइट के माध्यम से शादी के लिए रिश्ते की बात आगे बढ़ी तो लड़की ने अपने परिवार की तंगी का रोना रोया. चूंकि लड़की खूबसूरत थी और फोन पर प्यार भरी बातें करती थी, तो संजय ने लड़की के झांसे में आकर शादी का खर्च उठाने के लिए उसके खाते में पांच लाख रुपए डाल दिए.कुछ दिनों बाद जब लड़की का मोबाइल बंद आने लगा तो संजय ने अपने आपको ठगा हुआ महसूस किया. बाद में पुलिस ने मामले की पड़ताल करते हुए बिहार निवासी मनोहरलाल और लड़कियों के बड़े गिरोह को पकड़ा था.

आजकल अपराधियों द्वारा धोखाधड़ी और ठगी के नये नये तरीके ईजाद किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से भोले भाले गांव कस्बों के लोगों के साथ पढे लिखे शहरी युवकों को भी लूटा जा रहा है. शादी विवाह तय कराने, शादी होने के बाद कुछ दिन ससुराल में रहकर सोने चांदी के गहने हड़पकर दुल्हन के गायब होने की घटनाएं आम हो गई हैं.

कहा जाता है कि शादी कोई गुड्डे गुड़ियों का खेल नहीं है.अपने लड़के लड़कियों की‌ शादी तय करने के पहले बिचोलियों की बातों पर भरोसा न कर दोनों पक्षों को एक दूसरे के साथ बैठकर आर्थिक स्थिति के साथ वर बधु की शिक्षा और काम धंधे के बारे में अच्छी तरह से जानकारी जुटा लेना चाहिए. क‌ई वार लोग बढ़ा चढ़ा कर अपनी हैसियत बताते हैं, इसलिए इसकी जानकारी तीसरे पक्ष से जुटाने में भी कोई परहेज़ नहीं करना चाहिए.अपनी लड़की की शादी तय कर लड़के वालों से नगदी रकम और स्वर्ण आभूषण लूटने वालों से सावधान रहने की जरूरत है.

मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के पश्चिम में आखिरी छोर पर बसा एक गांव है सिरसिरी . यह गांव दो जिलों रायसेन और होशंगाबाद की सीमाओं से लगा हुआ है . कल कल बहती नर्मदा नदी और दुधी नदी के संगम पर बसे सिरसिरी गांव की आबादी मुश्किल से दो हजार होगी . आज भी इस गांव में स्वास्थ्य और शिक्षा की अच्छी सुविधायें गांव वालों को नसीब नहीं है .यही कारण है कि इस गांव के लड़कों की शादी मुश्किल से हो पाती है .

पहुंच बिहीन और बुनियादी सुख सुविधाओं से कोसो दूर  खेती किसानी वाली पृष्ठभूमि के इस गांव में शिवनारायण शर्मा का परिवार रहता है . नर्मदा नदी के तटो की उर्वर भूमि में कृषि कार्य करने वाले शिवनारायण के परिवार में एक अविवाहित वेटा रूपेश है ,जिसकी उम्र लगभग 25-26 वर्ष होगी.  रूपेश को गांव वाले प्यार से रूपा के नाम से भी बुलाते हैं, . गांव में कक्षा दसवी तक पढ़ने के लिये एक सरकारी हाई स्कूल है जिसमें केवल एक शिक्षक ही है . यही कारण है कि दसवी कक्षा पास होते ही गांव वाले अपने लड़के लड़कियों की शादी कर देते हैं . गांव देहात के परिवेश के लिहाज से  रूपेश की उम्र अधिक होने एवं दूरस्थ गांव में निवास करने के चलते शादी के लिये रिश्ते तो आते थे ,  परन्तु लड़की वाले गांव के हालात देखकर रिश्ता तय करने से परहेज करते थे . रूपेश की  शादी न होने से शिवनारायण काफी परेशान रहते थे .

दीपावली का त्यौहार बीतते ही रायसेन जिले के बम्हौरी गांव के एक परिचित रिश्तेदार कौशल प्रसाद शर्मा ने रूपेश की शादी के लिए रिश्ते की पेशकश की. कौशल प्रसाद ने शिवनारायण को बताया कि भोपाल के महामाई वाग इलाके में रहने वाले नंदकिशोर शर्मा अपनी वेटी रागिनी के लिये लड़का तलाश रहे हैं.  शिवनारायण ने इसके लिए हामी भर दी तो कुछ दिनों के बाद नंदकिशोर शर्मा रूपेश को देखने सिरसिरी गांव आ ग‌ए.

रिश्ते की बात चली तो घर वालों की खुशी का ठिकाना न रहा . नंदकिशोर शर्मा ने शिवनारायण को बताया  – “मेरी वेटी रागिनी बी ए तक पढ़ी लिखी  है . उसने कम्प्यूटर और ब्यूटी पार्लर का कोर्स भी किया है,परन्तु परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है . इसके चलते रागिनी की शादी नहीं हो पा रही है “.

शिवनारायण  ने भी यह सोचकर कि मुश्किल से वेटे के लिये कोई अच्छा रिश्ता आया है ,हामी भरते हुए कहा – “देखिए हमें दहेज की कोई भूख नहीं है . हमें तो अपने वेटे के लिये सुंदर और सुशील लड़की चाहिये “.

बात आगे बढते ही शिवनारायण रुपेश के लिए लड़की देखने रूपेश और कौशल प्रसाद के साथ भोपाल पहुंच गए. नंदकिशोर ने उनकी खूब खातिरदारी की . जब रागिनी उनके लिए चाय नाश्ता लेकर आई तो शिवनारायण और रूपेश को पहली ही नज़र में रागिनी भा गई.

लड़के लड़की की देखा परखी होते ही जब दोनों पक्षों की रजामंदी हुई तो पंडित को बुला कर सगाई की रस्म भी हो गई. पूरी तैयारी से गये शिवनारायण ने सगाई में पांच तोले सोने से बनी चूड़ियां और एक अंगूठी ,पायल , साड़ी , मिठाई और फल फूल देकर धूमधाम से सगाई की रस्म निभाई .

दोनों पक्षों के रिश्तेदारों की सहमति से 5 दिसम्बर शादी का मुहुर्त चुना गया . साथ ही केटरिंग का खर्चा आधा आधा देने की बात पर सबकी सहमति भी बन गई . नंदकिशोर वोले – “हम भोपाल के अवधपुरी इलाके के मैरिज गार्डन से  शादी समारोह करना चाहते हैं “.

शिवनारायण ने कहा – “ये तो बड़ी खुशी की बात है”.

“लेकिन मेरिज गार्डन में

कैटरिंग का खर्चा लगभग 4 लाख रूपये आयेगा” नंदकिशोर ने माथे पर चिंता की लकीरें बनाते हुए कहा.

शिवनारायण बोले -” आप चिंता न करें आधा खर्च हम दे देंगे”.

शादी समारोह की सहमति बनने के बाद दोनों पक्षों के शादी के आमंत्रण कार्ड भी बंटने लगे .  शादी के करीब एक सप्ताह पहले जब नंदकिशोर निमंत्रण पत्रिका देने सिरसिरी गांव आये तो उन्हे शिवनारायण ने केटरिंग के खर्च के लिये अपने हिस्से के दो लाख रूपये उसी समय यह सोचकर दे दिये कि उन्हें शहर में शादी की व्यवस्थाएं करने में कोई अड़चन न हो .

गांव देहात में प्रचलित परम्पराओं के अनुसार शिवनारायण के घर में मंगलगान होने लगे . 4 दिसम्बर को रूपेश के परिवार द्वारा गांव वालों को भोज में पंगत की जगह डिनर दिया गया . दूसरे दिन वे बड़े ही धूमधाम से अपने रिश्तेदारों और गांव के प्रमुख लोगों के साथ बस में सवार होकर दूल्हे की बारात लेकर शाम को भोपाल पहुच गये .लड़की पक्ष द्वारा कार्ड में दिये गये पते 284 /सी सेक्टर अवधपुरी में एक मैरिज गार्डन के पास जब वारात पहुंची तो वहां कोई इंतजाम न देखकर वारातियों को निराशा हुई . लड़के के पिता को यह तो पता था कि लड़की के परिवार वालों की माली हालत ठीक नहीं है , लेकिन बारात के रूकने के लिये कोई माकूल इंतजाम न पाकर उन्हे भी हैरानी हुई . मैरिज गार्डन में मौजूद कर्मचारी से पूछताछ करने पर पता चला कि इस गार्डन में आज की तारीख में कोई शादी नहीं है ,तो वारातियों के साथ लड़के के पिता का माथा ठनका . लड़की के पिता के मोबाइल नंबर पर बात करने की कोशिश की तो पता चला उनका मोबाइल स्विच आफ बता रहा है . आनन फानन में वारात की बस को सड़क किनारे खड़े करके वे नंदकिशोर के घर महामाई का वाग पहुंचे तो मकान मालिक ताराचंद जैन ने बताया कि वो एक महिना पहले ही मकान छोड़कर चले गये हैं .मकान मालिक ने बताया कि वे यह बताकर भी नहीं गये हैं कि कहां शिफ्ट हो रहे हैं .

अपने वेटे की शादी के अरमान पूरा न होते देख शिवनारायण को बड़ा दुख हुआ .पल भर को उनकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया .होश आते ही उन्हे समझ आ गया था कि वेटे से शादी करने के नाम पर उनसे ठगी की गई है .दुल्हन रागिनी के अपने परिवार के साथ गायब होने से शिवनारायण को समझ नहीं आ रहा था कि वे क्या करें . उन्हे बार बार यही डर सता रहा था कि  समाज में उनकी क्या इज्जत रह जायेगी . जैसे तैसे  शिवनारायण और दूल्हे के परिजनों ने वारातियों से आकर यह कह दिया कि लड़की के परिवार में गमी हो जाने के कारण शादी स्थगित हो गई है , इसलिये अब विवाह कार्यक्रम बाद में होगा . दूल्हे रूपेश को जब दुल्हन के गायब होने की जानकारी दी गई तो रूपेश का दिल कांच की तरह टूट गया . रूपेश ने जो अपनी शादी के लिए जो सपनों का महल बनाया था,वह   ताश के पत्तों की तरह पल भर में विखर चुका था .

किसी तरह साथ में आये वारातियों को बहाना बनाकर वापिस सिरसिरी गांव रवाना कर शिवनारायण अपने ममेरे भाई रमाकांत शुक्ला के साथ भोपाल के ऐशवाग पुलिस थाने पहुंचे .

उस समय पुलिस थाने में अपने कक्ष में मौजूद टी आई अजय नायर किसी जरूरी केस की फाईल पलट रहे थे . शिवनारायण और रमाकांत ने जैसे ही पुलिस थाने के अंदर बने टीआई साहब के कमरे में प्रवेश किया तो उनका ध्यान फाइल से हटा . प्रश्नवाचक निगाहो से घूरते हुये उन्होने पूछा – ‘‘क्या काम है कैसे आये हो’’ ? शिवनारायण ने घबराते हुये कहा – “साब हमारे साथ ठगी हुई है . रिपोर्ट लिखाने आये हैं” . टीआई अजय नायर ने दोनों को सामने पड़ी कुर्सी पर बैठने का इशारा करते हुये कहा – ‘‘ हां , बताइये किसने आपके साथ धोखाधड़ी की  हैं’’ . भरी ठंड में अपने माथे पर उभर आये पसीना को पोंछते हुये शिवनारायण ने एक ही सांस में उनके साथ हुई घटना का ब्यौरा दे दिया . टीआई अजय नायर ने हबलदार को बुलाकर शिवनारायण की रिपोर्ट लिखने का निर्देश दिया और भरोसा भी दिलाया कि उनके साथ न्याय होगा . जल्द ही धोखाधड़ी करने वाले नंदकिशोर को  खोज निकालेंगे .भोपाल के एशवाग पुलिस स्टेशन में अपने साथ हुई ठगी और धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद शिवनारायण दूसरे दिन सुबह जब अपने गांव सिरसिरी पहुंचे तो उनके वेटे की वारात वैरंग आने की खबर पूरे गांव में जंगल की आग की तरह फैल चुकी थी . शिवनारायण के घर में खुशी की जगह मातम जैसा माहोल था .दूल्हा रूपेश और उसकी मां गहरे सदमें में थे . भोपाल के अखवारों में इस धोखाधड़ी की खबर प्रकाशित हुई थी जो सोशल मीडिया में वायरल होकर गांव तक भी पहुंच चुकी थी . सिरसिरी गांव में शिवनारायण के घर उनके शुभचिंतकों का आना जाना शुरू हो गया था .

इस घटनाक्रम को चार महीने का समय हो चुका है , लेकिन भोपाल की ऐशबाग थाने की पुलिस को गायब दुल्हन और इसके परिजनों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है. शिवनारायण को दो लाख नगद, लगभग तीन लाख रुपए के आभूषण, कपड़े और गांव में कराये गये भोज में तीन लाख रुपए सहित लगभग आठ लाख रुपए की चपत लगी है. शादी कराने के नाम पर हुई धोखाधड़ी की यह घटना बताती है कि हमें विवाह संबंध तय करने से पहले अच्छी तरह से तहकीकात पूरी करके आगे के कदम उठाना चाहिए. शादी तय करने में केवल बिचोलियों पर भरोसा कर उतावले होने पर लाखों रुपए लुटने के साथ समाज में किरकिरी भी होती है.

Lockdown के बीच Hip-Hop डांस करती नजर आईं Disha Patani, Video Viral

बॉलीवुड की खूबसूरत और सफल अभिनेत्रियों में शुमार दिशा पाटनी (Disha Patani) सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहतीं हैं जिस पर वह आये दिन अपनी तस्वीरें और वीडियोज शेयर करती रहतीं हैं.इसी कड़ी में दिशा नें अपने इन्स्टाग्राम एकाउंट पर एक हिप-हॉप डांस का वीडियो शेयर किया है वह इस वीडियो में जिम आउटफिट में नजर आ रहीं हैं जिसमें उन्होंने नें एक सफेद स्पोर्ट्स ब्रा और कार्गो पैंट पहना हुआ है. इस लुक में वह जबरदस्त डांस करती नजर आ रहीं हैं उनके इस  धांसू डांस, मूव्स पर उनके फैन्स पूरी तरह से फिदा हो गएँ हैं. जिस पर उनके तमाम तरह से कमेन्ट आ रहें हैं.

दिशा पाटनी (Disha Patani)  के प्रशंसकों को उनका यह अंदाज खूब पसंद आ रहा है यही कारण है की  इस वीडियो को अभी तक साढ़े 42 लाख 10 हजार  5 सौ 70 बार से ज्यादा बार देखा जा चुका है.

 

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#beyonce❤️ Choreography #brian🌸 #quarantinelife❤️

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इसके पहले भी lockdown के दौरान दिशा पाटनी (Disha Patani)  नें अपने डांस के वीडियो इन्स्टाग्राम पर शेयर किया था. जिसे 38 लाख से ज्यादा बार देखा गया था. इसके अलावा वह अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर अपने हॉट और सेक्सी तस्वीरें भी शेयर करती रहतीं हैं. जो खूब वायरल होती है.

 

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#throwback to fringes and dancing @hvardhankhemka 🌸🌸#mattsteffaninachoreography#bumbumtam

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दिशा पाटनी बॉलीवुड के उन अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं हैं जिसनें अपने कैरियर की शुरुआत दक्षिण की बड़ी फिल्म से किया. दिशा नें साल 2015 में वरुण तेज के साथ तेलुगु फिल्म लोफर के साथ डेब्यू किया था. यह फिल्म 200 मिलियन के बजट में बनी थी लेकिन 106 मिलियन की कमाई के साथ ही इस फिल्म नें बॉक्स ऑफिस पर बेहद खराब प्रदर्शन किया था.

 

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#malangdiaries 🌸

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इसके बाद दिशा पाटनी नें बॉलीवुड फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत और कियारा आडवाणी के साथ  एम॰ एस॰ धोनी द अनटॉल्ड स्टोरी में डेब्यू किया. इस फिल्म में दिशा नें भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की प्रेमिका प्रियंका झा की भूमिका निभाई थी. इसके बाद उन्होंने कुंग फू योगा, वेलकम टू न्यूयॉर्क, बाग़ी २, भारत, मलंग जैसी सफल फिल्मों में लीड रोल किया. उन्हें बाग़ी २ में अभिनय के लिए गोल्डन रोज़ ब्रेकथ्रू ब्यूटी ऑफ़ द इयर के अवार्ड से भी नवाजा गया था.

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अभी हाल ही में दिशा पाटनी की फिल्म ‘मलंग’ रिलीज हुई थी. जिसमें वह आदित्य रॉय कपूर के अपोजिट दिशा नजर आईं थीं. वह इस साल सलमान खान के साथ फिल्म ‘राधे-यॉर मोस्ट वॉन्टेड भाई’ में नजर आने वाली हैं.

New Bhojpuri Song ‘हाई हिल के सेंडिल’ ने मचाया धमाल, देखें Video

इन दिनों भोजपुरी बेल्ट में गायिका अंतरा सिंह प्रियंका ( Antra Singh Priyanka) का जादू सभी के सिर पर चढ़ कर बोल रहा है. भोजपुरी सिनेमा के सभी बड़े गायक अंतरा सिंह प्रियंका के साथ गानें के लिए लालयित रहतें हैं. वह चाहे भोजपुरी सिनेमा के मेगा स्टार खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) हों यह सुपर स्टार रितेश पाण्डेय (Ritesh Pandey). अंतरा सिंह प्रियंका ( Antra Singh Priyanka) के साथ भोजपुरी के जितनें भी गायकों नें गीत गाएं हैं वह सभी गानें सुपर हिट की श्रेणीं में शुमार रहें हैं.

इस लॉक डाउन (Lockdawn ) के बीच एक बार फिर अंतरा सिंह प्रियंका ( Antra Singh Priyanka) और खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) का एक नया भोजपुरी गाना (New Bhojpuri Song) ‘हाई हिल के सेंडिल’ रिलीज किया गया है. जो अपने रिलीज होने के हफ्ते भर के भीतर 7 मिलियन ( 77 लाख ) के ब्युअर की संख्या पार कर गया है.

 

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JALEBI …..

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इस समय अंतरा सिंह प्रियंका ( Antra Singh Priyanka) और खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) के इस गाने ने यूट्यूब पर धूम मचा रखी है. भोजपुरी बेल्ट के दर्शक इसे खूब पसंद कर रहे हैं और इस गाने को बार-बार सुन रहें हैं. इस भोजपुरी गाने को अभी ऑडियो फॉर्मेट में रिलीज किया गया है. लेकिन इस गाने की लोकप्रियता को देखते हुए इसे लॉक डाउन ( Lockdawn ) के बाद वीडियो फॉर्मेट में भी रिलीज किये जाने की तैयारी है.

हाई हील के सेंडिल (High Heel Ke Sandil) नाम के इस भोजपुरी गानें को आदिशक्ति फिल्म्स (Aadishakti Films) के यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया है. अंतरा सिंह प्रियंका ( Antra Singh Priyanka) और खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) द्वारा गाये इस गीत को अखिलेश कश्यप ने लिखा है और इसका संगीत आदिशक्ति फिल्म्स (Aadishakti Films) के श्याम सुंदर नें दिया है . इसको डिजिटल प्लेटफार्म देनें की जिम्मेदारी विक्की यादव नें निभाई है. इस भोजपुरी एल्बम के निर्माता मनोज मिश्रा है और कंपनी का  लेबल दिया है मार्स एंटरटेनमेंट नें.

 

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https://youtu.be/wGlCfgICpXY https://youtu.be/wGlCfgICpXY Thanx for love & support..

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अंतरा सिंह प्रियंका ( Antra Singh Priyanka) और खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) का हाल ही में आया भोजपुरी वीडियो सांग (Bhojpuri Video song) लहंगा लखनऊआ (Lehnga Lakhnauaa) नें सफलता के रिकार्ड तोड़ दिए थे. इसके अलावा अंतरा सिंह प्रियंका ( Antra Singh Priyanka) और खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) ने एक साथ दर्जनों वीडियो सांग (Bhojpuri Video song) में अपनी आवाज दी है जिसे करोड़ों बार देखा जा चुका है.

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