भले ही हम आधुनिक होने के कितने ही दाबे कर लें,मगर दकियानूसी ख्याल और परम्पराओं से हम बाहर नहीं निकल पा रहे हैं. आज भी समाज के एक बड़े तबके में फैली छुआछूत की समस्या कोरोना रोग से कम नहीं है.

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