माताश्री के प्रवचनों, भजनों का जादू भक्तों पर खूब चला. उन की त्यागमयी वाणी को वास्तविक समझ मनोज ने उन्हें बैलगाड़ी में सैर कराई, झोंपड़ी में ठहराया और खाने को सूखी रोटी, मूंग की दाल परोसी. फिर क्या हुआ?