वृद्ध शर्माजी और सुमेधाजी के आपसी स्नेह और अपनेपन से मालिनी बहुत ही प्रभावित हुई. अत: उस ने दोनों को मिलाने के लिए एक नई पहल की लेकिन डरतेडरते.