समाज में आज घरेलू हिंसा जैसी वारदात इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि जिसने आज मुझे सोचने पर और लिखने पर मजबूर कर दिया। आज अपनी उसी सोच को सबके सामने जाहिर करना चाहती हूं.......