#coronvirus: 100 साल के बुजुर्गों ने जीती जंग

लेखक- एस. ए. ज़ैदी

जंग अभी जारी है. दुश्मन हावी है. अंतिम जीत दूर कहीं है. सभी सकते में हैं. चौतरफा नुकसान बढ़ता जा रहा है. विश्वभर के वैज्ञानिक सोल्यूशन की खोज में जुटे हैं.

मानव जाति पर न दिखने वाले शत्रु का कहर टूट पड़ा है. इस का असर उम्रदराज लोगों पर ज्यादा हो रहा है. जो बुजुर्ग इस की चपेट में आए, उन में से ज्यादातर जान गंवां बैठे.

इसी बीच, जीवनयात्रा के 100 से ज्यादा सावन देख चुके कुछ ऐसे बुजुर्गों को भी कोरोना ने शिकार बनाया जिन्होंने आखिरकार उस को मात दे ही दी.  ये कुछ बुजुर्ग इटली के रहवासी हैं.

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हालिया दिनों इन इतालवी बुज़ुर्गों की कहानी बड़े शौक़ से पढ़ी और सुनी जा रही है जो 100 साल से अधिक उम्र होने के बावजूद कोरोना को मात देने में सफल रहे जबकि इटली में इस वायरस ने भारी तबाही मचाई है.

ये बुज़ुर्ग इटली के अलगअलग शहरों में रहते हैं. इनमें एक बात समान है कि इनकी याददाश्त मज़बूत है और बहुत मामूली सुविधाओं के साथ भी बहुत ख़ुश रहते हैं. कुछ को अख़बार पढ़ने का शौक़ है, कुछ को टहलने का शौक़ है और कुछ को खेल प्रतियोगिताएं देखने में मज़ा आता है.

इन बुजुर्गों में एक हैं अलबर्टो पिलोशी. ये 101 साल के हैं. इन्होंने दूसरे विश्व युद्ध में भी हिस्सा लिया और जर्मन सैनिकों के हाथों दो बार क़ैदी बने, मगर वहां से भाग निकलने में सफल रहे. ये भी कोरोना से संक्रमित हो गए और रीमीनी शहर के अस्पताल में दो हफ़्ता रहे, मगर कोरोना को भी हराकर अस्पताल से बाहर आ गए.

दूसरी बुजुर्ग हैं आदा ज़ानोसो. इन की उम्र 16 अगस्त, 2020 को 104 साल हो जाएगी. ये दुबली नज़र आती हैं लेकिन इरादे की बड़ी पक्की हैं. ये तूरीनो शहर के क़रीब एक वृद्धाश्रम में रहती हैं. ज़ानोसो विश्व मीडिया के ध्यान का केन्द्र बनी थीं क्योंकि मार्च में कोरोना से संक्रमित होने के बाद ये अस्पताल में भर्ती हुईं और दो सप्ताह में ठीक होकर डिसचार्ज हो गईं. इनके घर वाले कहते हैं कि ये मज़बूत इरादे की मालिक हैं और इनका स्वभाव बहुत अच्छा है. ये हमेशा कुछ न कुछ पढ़ती रहती हैं.

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तीसरी बुजुर्ग हैं इतालीका ग्रोन्डोना. इनको संगीत से लगाव है. ये 102 साल की हैं. मैच देखने में इन्हें बहुत आनंद आता है. ये हर खेल देखती हैं मगर फ़ुटबाल बिल्कुल पसंद नहीं है. इनके परिवार के एक सदस्य ने बताया कि ये खानेपीने की भी बहुत शौक़ीन हैं. इन्हें फ़रवरी में कोरोना हो गया मगर ठीक होकर अस्पताल से बाहर आ गईं.

‌एक अन्य बुजुर्गलुम्बार्डिया के करीमोना शहर के रहने वाले माइकल एंजेलो स्कोटीला हैं. ये 97 साल के हैं. ये भी कोरोना से संक्रमित होने के बाद दो हफ़्ता अस्पताल में रहे और अब ठीक होकर बाहर आ चुके हैं. ये नौसेना में कमांडर रह चुके हैं. इन्हें पढ़ने और टीवी देखने का बहुत शौक़ है.

तांत्रिक दिनेश और कोरोना

लेखक- रंगनाथ द्विवेदी

तांत्रिक दिनेश के पास दो उसके समकक्ष तांत्रिक चेले थे खुर्शीद और संजय यह कभी-कभी अपने तांत्रिक गुरु की भी खाट खड़ी कर देते थे. और इस समय तो कोरोना वायरस जैसी महामारी के चलते इनके–“तांत्रिक खेत की उर्वरता अपने चरम पर थी”. तांत्रिक दिनेश के दोनो चेलो ने इस वायरस की तांत्रिक शुरुआत से पहले की रखी हुई पुरानी इंसानी खोपड़ी व  हाथ की पुरानी हड्डी को फेंक कर कब्रिस्तान से एक मजबूत व नई हड्डी को लाकर धुला-पोछा और तांत्रिक क्रिया के अनुकूल उसका मेकअप कर दिया.

फिर उस गांव की ही एक महिला जो की अक्सर कमीशन पर तांत्रिक दिनेश के संपर्क में रहती थी. वे औरतों को झाड़-फूंक के लिए बहलाने और फूशलाने की जादूगर थी. तांत्रिक दिनेश के दोनों चेलो ने उस महिला से मिलकर तांत्रिक दिनेश की पूरी योजना समझाई व कहा कि वे शाम तलक 10 -12 महिलाओं की व्यवस्था कर उन्हें तांत्रिक दिनेश से मिलवाए और यह बताएं कि वह बहुत पहुंचे हुए तांत्रिक हैं जिन्होंने बड़े-बड़े भूत प्रेत बाधा को न केवल दूर किया, बल्कि उन्होंने उस घर और गांव से उस प्रेत बाधा को हमेशा के लिए खत्म कर दिया. तांत्रिक दिनेश बंगाल, आसाम की तंत्र साधना जानने के अलावा लाल किताब के भी बड़े पहुंचे जानकार है.

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वह एक हफ्ते तक ही गांव में रुकेंगे, फिर इसके बाद एक अनजानी अंधेरी गुफा में  कोरोना के शैतान को मंत्र से बांधने के लिए चले जाएंगे. रात को 9:00 बजे 12 का क्या वे 20 महिलाओं के साथ तांत्रिक दिनेश के आश्रम में आई, उस आश्रम में प्रवेश करते ही जैसे सभी महिलाओं की बुद्धि 50% तांत्रिक दिनेश के वश में हो गई हो. इसका कारण था,  वे अंदर का धुआँ जो कि महिलाएं कह रही थी कि जादू था. तांत्रिक दिनेश भी अपने तंत्र के उस ड्रेस में था, जोकि अक्सर सुपर हिट भुतहे फिल्म के तांत्रिकों की होती हैं.

इतना ही नहीं वे अस्त्र-शस्त्र भी तंत्र साधना के  वहीं मौजूद थे. जैसे आज तांत्रिक दिनेश इस कोरोना वायरस की ऐसी-तैसी कर देगा सिंदूर से खींची लाल सुर्ख आड़ी तिरछी रेखा बड़ी ही डरावनी लग रही थी. उसमें से ऐसी चमक निकल रही थी, मानो वहां कोई रोशनी की गई हो. हड्डी से चारों तरफ सिंदूर के घुमाना चीखना खोपड़ी को स्पर्श करना, तीन नींबू, एक कागज में रखें लौंग, कपूर अगरबत्ती यह कोरोना वायरस को तंत्र-मंत्र और इस देश से भगाने की उठापटक का एक अद्भुत दृश्य था.

तभी उसकी पेटेंट महिला अपने फिक्स तांत्रिक व नाटकीय तरीके से बाल खोले गाली देती सिंदूर वाली घेरे के पास पहुंची और जोर-जोर से अजीब अजीब आवाजें निकालने लगी,  सारी औरतें एकटक अवाक व डरी सी उसको देखने लगीं. तभी वे  उठी और तांत्रिक दिनेश से उलझ गई. तांत्रिक जैसे हवा में कोरोना वायरस रूपी शैतान व उसकी आस -पास के चुड़ैलों को कहने लगा कि, -” जा मेरे मंत्र तंत्र को चैलेंज मत कर, नहीं तो,  तुम्हें नष्ट कर दूंगा. मैं नहीं जाऊंगी, पूरे गांव को निकल जाऊंगी ” इतना कहते ही तांत्रिक दिनेश ने पास में रखी राखी उस पर फेंकी वह हाथ के शमशान वाली हड्डी से उसे पीटा, वह गुर्राते  हुए बेहोश हो गई.

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उसके बेहोश होते ही तांत्रिक दिनेश ने अपने तांत्रिक चेलों से चाकू मांगा फिर उस चाकू से तीनों नींबू में से एक नींबू को काटा तो लाल खून बहने लगा उसने इस औरत के अंदर मौजूद कोरोना के शैतान व उसके साथ की चुड़ैल को काटा हो उस उस खून को उस दिन उसने सिंदूर पर निचोड़ा , फिर दूसरे नींबू को उस औरत के ऊपर काटकर के निचोड़ा तो वे औरत अचानक सकपका कर उठी जैसे ही उठी तो उसने कहा,  मैं कहां हूं? मुझे क्या हुआ? उसके इतना पूछते ही तांत्रिक दिनेश ने झट तीसरा नींबू काटकर उस खोपड़ी पर निचोड़  दिया इतना करते ही वे खोपड़ी और भी खतरनाक और डरावनी दिखने लगी.

फिर उसके चेले पैसे ऐंठने और निकलवाने के अपने हुनर का प्रयोग करने लगे. उन सबको इस कोरोना वायरस की तांत्रिक झाड़-फूंक कराने के लिए प्रेरित किया. फिर सारी औरतें चली गई. क्योंकि तंत्र मत्र के धंधे की सबसे बड़ी ग्राहक व प्रचारक यह औरतें ही हैं फिर आधे घंटे बाद इनकी पेटेंट और फिक्स औरत अपना कमीशन लेने दिनेश के आश्रम पर आई.

अब तक इस गांव से कोरोना वायरस के शैतान को तंत्र मत्र से भगाने के नाम पर तांत्रिक दिनेश ने अपने दोनों तांत्रिक चेलों के व इस फिक्स  महिला के मिलीभगत से ₹80000 आ चुके हैं क्योंकि दिनेश भी अब कोई साधारण तांत्रिक नहीं है. बल्कि अपनी कमाई का कोरोना तांत्रिक हो गया है.

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बौलीवुड एक्टर्स को आया गुस्सा किसी नें मोदी तो किसी नें ट्रंप पर उतारा

इन दिनों अमेरिका में कोरोना के दुनिया भर से ज्यादा मरीज हैं और दिनों-दिन संक्रमितों का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है. अमेरिका में कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है. अमेरिका में कोरोना के संक्रमितों और उससे होने वाली मौतों को रोकनें में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) पूरी तरह से नाकाम नजर आ रहें हैं. अमेरिका में कोरोना के इलाज में मलेरिया के इलाज में काम आने वाली दवा दवाई हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) का बेहतर प्रभाव देखा जा रहा है.

जिसका भारत के पास पर्याप्त मात्रा में स्टाक उपलब्ध है. क्यों  की भारत में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) का उत्पादन दुनियां भर में सबसे ज्यादा किया जाता है. एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) 20 करोड़ गोलियों का उत्पादन किया जाता है. हाल ही में भारत सरकार ने दो कंपनियों को 10 करोड़ अतिरिक्त गोलियों के उत्पादन का आर्डर दिया है. लेकिन भारत सरकार नें भारत के विशाल जनसंख्या को देखते हुए कोरोना के मरीजों के इलाज में इस्तेमाल हो रही मलेरिया रोधी दवाई हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) के निर्यात पर रोक लगा रखी है.

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इसको लेकर डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) नें भारत सरकार द्वारा लगाई गई रोक को हटाने की मांग की है. जिससे वह हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) की पर्याप्त मात्रा भारत से ले सकें. डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) नें अपने बयान के दौरान यह भी कहा की भारत ने प्रतिबंध नहीं हटाया तो वह इसका जवाब देंगे. डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump Twitter) के दिए इस बयान के बाद  बॉलीवुड एक्टर्स नें अपना गुस्सा जाहिर किया है.

बौलीवुड फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर डायरेक्टर ओनिर (Onir) ने अमेरिका के  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के इस बयान पर अपना गुस्सा दिखाते हुए अपने ट्विटर एकाउंट पर लिखा “तथाकथित दोस्ती के लिए यह बहुत ज्यादा है. ट्रंप अनुग्रह करने में असमर्थ है. वह धमकाते हैं और साथ ही अहंकारी हैं.” So much so to the so called “Friendship “ Trump is incapable of being gracious . He is a bully and arrogance and ignorance supports it. ओनिर (Onir Twitter) द्वारा जाहिर किये गए गुस्से को यूजर्स जायज ठहरा रहें हैं इस पर लोगों की कई तरह की प्रतिक्रियाएं मिल रहीं हैं.

बौलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में एक सफल फ़िल्म निर्देशक, निर्माता, पटकथा लेखक और अभिनेता के रूप में पहचान बनानें वाले अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) नें भी डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान पर अपना गुस्सा जाहिर किया है. और अपने जबाब में ट्विट कर लिखा चाचू की यह हिम्मत कि वो ताऊ बनने की कोशिश करें !!!! पप्पा को ग़ुस्सा आया ना तो बस …..यूजर्स नें डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को लेकर अनुराग कश्यप के इस ट्विट पर खूब भड़ास निकाली हैं कई नें तो भद्दी भद्दी गलियाँ तक लिख डाली है.

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हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) दवा को लेकर डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा दिए गए धमकी पर बॉलीवुड एक्टर विपिन शर्मा (Vipin Sharma) ने ट्वीट किया और लिखा “तो उन सभी पैसों का क्या हुआ जो हमने अपनी गरीब जनता को छुपाने और उनके स्वागत के लिए खर्च किये थे.” So what happened to all the money we spent on hiding our poor population and wasting millions to welcome him.

टीवी एक्ट्रेस कविता कौशिक (Kavita Kaushik) ने भी ट्रम्प के धमकी पर अपना गुस्सा ट्वीट करते हुए निकाला और लिखा  “मैं कह रही हूं, यह ब्रॉकली समोसा के कारण हुआ है. उन्हें निहारी और कोरमा देना चाहिए था, फिर देखते दोस्ती.” Its the broccoli samosas I’m telling you! Should’ve just given him Nihari n korma ,phir dekhte dosti…

इसके अलावा कविता नें एक और ट्विट किया और लिखा “हम बालक व्यस्त थे अपने अपनों को डराने में, कोई बाहर वाला घर के बड़े को ही धमका गया!” इस ट्विट पर कई यूजर्स नें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) पर भी जम कर अपना गुस्सा निकाला है.

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अभिनेत्री पूजा भट्ट (Pooja Bhatt)  हर गलत मुद्दे पर खुल कर बोलनें वालों में शुमार हैं. वह ऐसे मुद्दों पर बोलने और लिखनें से ज़रा भी नहीं हिचकतीं हैं. उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के धमकी भरे बयान के बाद अपना रिएक्शन देते हुए लिखा, “ताकत या ठगी? मझे लगता है कि एक ही सिक्के के दो पहलू. इसके अलावा अन्य देशों को भी किसी चीज के माध्यम से धमकाना ठीक नहीं है. अकेले एक महामारी को छोड़ दो…” Power & thuggery? Two sides of the same coin I guess. Besides,it’s not ok to bully other nations through anything,let alone a pandemic. The US &  @realDonaldTrump  obviously missed that memo at their last power breakfast.

ANI न्यूज़ एजेंसी का डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर ट्विट

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Lockdown के समय पूरी फिल्म इंडस्ट्री आई एक साथ, शौर्ट फिल्म बना कर किया Motivate

इस लौक डाउन में सब कुछ सिमट कर रह गया है सारे कारोबार बंद हैं. सरकारें लोगों से घर से बाहर न निकलनें की अपील कर रहीं हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो किसी की भी बात माननें को तैयार नहीं हैं. ऐसे लोग अनायास ही घर से बाहर निकल आतें हैं और जब पुलिस या अधिकारी इनसे घर के अन्दर रहनें की गुहार करतें हैं तो  ये लोग इन लोगों से बहस पर उतर आते हैं. ऐसे में लॉक डाउन का पालन ना करनें वालों के साथ सुरक्षा कर्मियों द्वारा कड़ाई से पेश आना मजबूरी बन जाती है.

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देश की फिल्म इंडस्ट्री भी लॉक डाउन के प्रभाव से अछूती नहीं हैं. बौलीवुड से लेकर साउथ तक भोजपुरी से लेकर पंजाबी तक और मराठी से लेकर रीजनल लैन्गेवेज बनने वाली सभी भाषाओं के फिल्मों की शूटिंग कैंसिल चल रहीं हैं. जिन फिल्मों के रिलीज की डेट तय थी उसकी रिलीजिंग डेट आगे बढ़ा दी गई है. फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े सभी सेलेब्रेटीज अपनें घरों से बाहर नहीं निकल रहें हैं. देश में कोरोना के केस में जिस तरह से इजाफा हो रहा है इसको लेकर सरकार के साथ-साथ फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग भी चिंतित हैं.

कोरोना के फैलाव को रोकनें के लिए सरकारों के अलावा सेलिब्रिटीज भी अपनें-अपनें तरीकों से जागरूकता फैला रहें हैं. इस कड़ी में वालीवुड और साऊथ के कलाकारों नें कोरोना से बचाव के लिए जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से अपने घरों में रहते हुए ही एक शार्ट मूवी बना डाली है इस शॉर्ट मूवी का नाम फैमिली है. इस शार्ट मूवी में सदी के महानायक अमिताब बच्चन से  लेकर साउथ रजनीकांत, प्रियंका चोपड़ा, चिरंजीवी, आलिया भट्ट और रणबीर कपूर जैसे एक साथ नजर आ रहें हैं. इस शार्ट मूवी को 6 अप्रैल की रात को 9 बजे सोनी टीवी ने रिलीज किया है जिस पर दर्शकों का जबरदस्त रिस्पांस देखनें को मिल रहा है.

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इन कलाकारों नें घर के भीतर से किया है काम

कोरोना से बचाव के लिए जागरूकता फैलानें वाली फैमिली नाम से बनी इस शार्ट मूवी में जिन कलाकारों नें काम  किया है वह लोग इसे फिल्मानें नें के लिए अपनें घरों से बाहर नहीं आये. बल्कि इसे सभी कलाकारों नें अपने घरों के भीतर रहते हुए शूट किया है. फिल्म की शुरुआत अमिताभ बच्चन से होती है जिसमें उनका काला चश्मा नहीं मिल रहा है. इसके बाद उस काले चश्में की खोज शुरू होती है. उस चश्में तक पहुंचते पहुँचते इस शार्ट मूवी में अमिताभ बच्चन, रजनीकांत, प्रियंका चोपड़ा, चिरंजीवी, आलिया भट्ट, मामूथी, दिलजीत दोसांझ, मोहनलाल, रणबीर कपूर, सोनाली कुलकर्णी. शिवा राजकुमार, और प्रोसेनजीत चटर्जी, जैसे सितारों दिखाई पड़ते है. इस फिल्म में कोरोना वायरस को लेकर जागरुकता फैलाने के लिए अलग-अलग फिल्म इंडस्ट्री के ये सितारे साथ नजर आए.

इस शौर्ट फिल्म में खासियत ये है कि इसे सभी ने अपने घरों से शूट किया है.इस शार्ट मूवी में सभी कलाकारों नें ऐसे काम किया है की आपको इन्हें देखकर बिल्कुल नहीं लगेगा कि ये लोग साथ में नहीं हैं. फिल्म के अंत में जब अमिताभ बच्चन का काला चश्मा मिलता है तो अमिताभ बच्चन लोगों से घर से बाहर ना आने की अपील करते हुए दिखाई पड़े.

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फिल्म को बनाने का इनका रहा आईडिया

कोरोना जागरूकता को बनाये गए इस शार्ट मूवी के निर्माण के पीछे पीछे प्रसून पांडे का आइडिया रहा है. उनके साथ इस फिल्म में वालीवुड फिल्म इंडस्ट्री से लेकर माराठी, पंजाबी और साउथ के कलाकारों नें अमिताभ बच्चन का साथ दिया है. माना जा रहा है की यह फिल्म जागरूकता फैलाने के साथ ही लोगों का मनोरंजन भी करेगी.

फिल्म के अंत में अमिताभ नें दिहाड़ी मजदूरों के सहयोग के लिए कही बड़ी बात

फिल्म में होम क्वॉरेंटाइन और साफ़-सफाई से जुड़े सन्देश के साथ ही अमिताभ बच्चन नें दिहाड़ी मजदूरों के सहयोग के लिए बड़ी बात कही. उन्होंने फिल्म के अंत में कहा की “इस फिल्म को बनाने के पीछे का एक और मकसद है. हमारे देश का फिल्म उद्योग एक है हम सब एक परिवार हैं. लेकिन हमारे पीछे एक और बहुत बड़ा परिवार है जो हमारे लिए काम करता है और वह हमारे वर्कर्स और दिहाड़ी मजदूर जो इस लॉक डाउन के वजह से संकट में हैं.  हम सब नें मिल कर स्पांसर्स और टीवी चैनल के साथ मिल कर धनराशि इकट्ठा की है और इस संकट की घड़ी में यह जो धनराशि है देश भर के फिल्म उद्योग के वर्कर्स और दिहाड़ी मजदूरों को राहत के तौर पर देंगे.”

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आशिक बन गया ब्लैकमेलर

कभी दोस्ती तो कभी तथाकथित प्यार के झांसे में आ कर कई लड़कियां ब्लैकमेलरों के चक्कर में फंस जाती हैं. मतलब शरीर ही नहीं, उन से पैसे भी मांगे जाते हैं.

‘‘तुझे क्या लगता है कि आत्महत्या कर लेने से तेरी समस्या दूर हो जाएगी?’’

‘‘समस्या दूर हो या न हो, लेकिन मैं हमेशा के लिए इस दुनिया से दूर हो जाऊंगी. तू नहीं जानती नेहा मेरा खानापीना, सोना यहां तक कि पढ़ना भी दूभर हो गया है. हर वक्त डर लगा रहता है कि न जाने कब उस का फोन आ जाए और वह मुझे फिर अपने कमरे में बुला कर…’’ कहते हुए रंजना (बदला नाम) सुबक उठी तो उस की रूममेट नेहा का कलेजा मुंह को आने लगा. उसे लगा कि वह अभी ही खुद जा कर उस कमबख्त कलमुंहे मयंक साहू का टेंटुआ दबा कर उस की कहानी हमेशा के लिए खत्म कर दे, जिस ने उस की सहेली की जिंदगी नर्क से बदतर कर दी है.

अभीअभी नेहा ने जो देखा था, वह अकल्पनीय था. रंजना खुदकुशी करने पर आमादा हो आई थी, जिसे उस ने जैसेतैसे रोका था लेकिन साथ ही वह खुद भी घबरा गई थी. उसे इतना जरूर समझ आ गया था कि अगर थोड़ा वक्त रंजना से बातचीत कर गुजार दिया जाए तो उस के सिर से अपनी जिंदगी खत्म कर लेने का खयाल उतर जाएगा. लेकिन उस की इस सोच को कब तक रोका जा सकता है. आज नहीं तो कल रंजना परेशान हो कर फिर यह कदम उठाएगी. वह हर वक्त तो रूम पर रह नहीं सकती.

रंजना को समझाने के लिए वह बड़ेबूढ़ों की तरह बोली, ‘‘इस में तेरी तो कोई गलती नहीं है, फिर क्यों किसी दूसरे के गुनाह की सजा खुद को दे रही है. यह मत सोच कि इस से उस का कुछ बिगड़ेगा, उलटे तेरी इस बुजदिली से उसे शह और छूट ही मिलेगी. फिर वह बेखौफ हो कर न जाने कितनी लड़कियों की जिंदगी बरबाद करेगा, इसलिए हिम्मत कर के उसे सबक सिखा. यह बुजदिली तो कभी भी दिखाई जा सकती है. जरा अंकलआंटी के बारे में सोच, जिन्होंने बड़ी उम्मीदों और ख्वाहिशों से तुझे यहां पढ़ने भेजा है.’’

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रंजना पर नेहा की बातों का वाजिब असर हुआ. उस ने खुद को संभालते हुए कहा, ‘‘फिर क्या रास्ता है, वह कहने भर से मानने वाला होता तो 3 महीने पहले ही मान गया होता. जिस दिन वह तसवीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर देगा, उस दिन मेरी जिंदगी तो खुद ही खत्म हो जाएगी. जिन मम्मीपापा की तू बात कर रही है, उन पर क्या गुजरेगी? वे तो सिर उठा कर चलने लायक तो क्या, कहीं मुंह दिखाने लायक भी नहीं रहेंगे.’’

‘‘एक रास्ता है’’ नेहा ने मुद्दे की बात पर आते हुए कहा, ‘‘बशर्ते तू थोड़ी सी हिम्मत और सब्र से काम ले तो यह परेशानी चुटकियों में हल हो जाएगी.’’ माहौल को हलका बनाने की गरज से नेहा ने सचमुच चुटकी बजा डाली.

‘‘क्या, मुझे तो कुछ नहीं सूझता?’’

‘‘कोड रेड पुलिस. वह तुझे इस चक्रव्यूह से ऐसे निकाल सकती है कि सांप भी मर जाएगा और लाठी भी नहीं टूटेगी.’’

कोड रेड पुलिस के बारे में रंजना ने सुन रखा था कि पुलिस की एक यूनिट है जो खासतौर से लड़कियों की सुरक्षा के लिए बनाई गई है और एक काल पर आ जाती है. ऐसे कई समाचार उस ने पढ़े और सुने थे कि कोड रेड ने मनचलों को सबक सिखाया या फिर मुसीबत में पड़ी लड़की की तुरंत मदद की.

रंजना को नेहा की बातों से आशा की एक किरण दिखी, लेकिन संदेह का धुंधलका अभी भी बरकरार था कि पुलिस वालों पर कितना भरोसा किया जा सकता है और बात ढकीमुंदी रह पाएगी या नहीं. इस से भी ज्यादा अहम बात यह थी कि वे तसवीरें और वीडियो वायरल नहीं होंगे, इस की क्या गारंटी है.

इन सब सवालों का जवाब नेहा ने यह कह कर दिया कि एक बार भरोसा तो करना पड़ेगा, क्योंकि इस के अलावा कोई और रास्ता नहीं है. मयंक दरअसल उस की बेबसी, लाचारगी और डर का फायदा उठा रहा है. एक बार पुलिस के लपेटे में आएगा तो सारी धमाचौकड़ी भूल जाएगा और शराफत से फोटो और वीडियो डिलीट कर देगा, जिन की धौंस दिखा कर वह न केवल रंजना की जवानी से मनमाना खिलवाड़ कर रहा था, बल्कि उस से पैसे भी ऐंठ रहा था.

कलंक बना मयंक

20 वर्षीय रंजना और नेहा के बीच यह बातचीत बीती अप्रैल के तीसरे सप्ताह में हो रही थी. दोनों जबलपुर के मदनमहल इलाके के एक हौस्टल में एक साथ रहती थीं और अच्छी फ्रैंड्स होने के अलावा आपस में कजिंस भी थीं.

रंजना यहां जबलपुर के नजदीक के एक छोटे से शहर से आई थी और प्रतिष्ठित परिवार से थी. आते वक्त खासतौर से मम्मी ने उसे तरहतरह से समझाया था कि लड़कों से दोस्ती करना हर्ज की बात नहीं है, लेकिन उन से तयशुदा दूरी बनाए रखना जरूरी है.

बात केवल दुनिया की ऊंचनीच समझाने की नहीं, बल्कि अपनी बड़ी हो गई नन्हीं परी को आंखों से दूर करते वक्त ढेरों दूसरी नसीहतें देने की भी थी कि अपना खयाल रखना. खूब खानापीना, मन लगा कर पढ़ाई करना और रोज सुबहशाम फोन जरूर करना, जिस से हम लोग बेफिक्र रहें.

यह अच्छी बात थी कि रंजना को बतौर रूममेट नेहा मिली थी, जो उन की रिश्तेदार भी थी. जबलपुर आ कर रंजना ने हौस्टल में अपना बोरियाबिस्तर जमाया और पढ़ाईलिखाई और कालेज में व्यस्त हो गई. मम्मीपापा से रोज बात हो जाने से वह होम सिकनेस का शिकार होने से बची रही. जबलपुर में उस की जैसी हजारों लड़कियां थीं, जो आसपास के इलाकों से पढ़ने आई थीं, उन्हें देख कर भी उसे हिम्मत मिलती थी.

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मम्मी की दी सारी नसीहतें तो उसे याद रहीं लेकिन लड़कों वाली बात वह भूल गई. खाली वक्त में वह भी सोशल मीडिया पर वक्त गुजारने लगी तो देखते ही देखते फेसबुक पर उस के ढेरों फ्रैंड्स बन गए. वाट्सऐप और फेसबुक से भी उसे बोरियत होने लगी तो उस ने इंस्टाग्राम पर भी एकाउंट खोल लिया.

इंस्टाग्राम पर वह कभीकभार अपनी तसवीरें शेयर करती थी, लेकिन जब भी करती थी तब उसे मयंक साहू नाम के युवक से जरूर लाइक और कमेंट मिलता था. इस से रंजना की उत्सुकता उस के प्रति बढ़ी और जल्द ही दोनों में हायहैलो होने लगी. यही हालहैलो होतेहोते दोनों में दोस्ती भी हो गई. बातचीत में मयंक उसे शरीफ घर का महसूस हुआ तो शिष्टाचार और सम्मान का पूरा ध्यान रखता था. दूसरे लड़कों की तरह उस ने उसे प्रपोज नहीं किया था.

मयंक बुनने लगा जाल

20 साल की हो जाने के बाद भी रंजना ने कोई बौयफ्रैंड नहीं बनाया था, लेकिन जाने क्यों मयंक की दोस्ती की पेशकश वह कुबूल कर बैठी, जो हौस्टल के रूम से बाहर जा कर भी विस्तार लेने लगी. मेलमुलाकातों और बातचीत में रंजना को मयंक में किसीतरह का हलकापन नजर नहीं आया. नतीजतन उस के प्रति उस का विश्वास बढ़ता गया और यह धारणा भी खंडित होने लगी कि सभी लड़के छिछोरे टाइप के होते हैं.

मयंक भी जबलपुर के नजदीक गाडरवारा कस्बे से आया था. यह इलाका अरहर की पैदावार के लिए देश भर में मशहूर है. बातों ही बातों में मयंक ने उसे बताया था कि पढ़ाई के साथसाथ वह एक कंपनी में पार्टटाइम जौब भी करता है, जिस से अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठा सके.

अपने इस बौयफ्रैंड का यह स्वाभिमान भी रंजना को रिझा गया था. कैंट इलाके में किराए के कमरे में रहने वाला मयंक कैसे रंजना के इर्दगिर्द जाल बुन रहा था, इस की उसे भनक तक नहीं लगी.

दोस्ती की राह में फूंकफूंक कर कदम रखने वाली रंजना को यह बताने वाला कोई नहीं था कि कभीकभी यूं ही चलतेचलते भी कदम लड़खड़ा जाते हैं. इसी साल होली के दिनों में मयंक ने रंजना को अपने कमरे पर बुलाया तो वह मना नहीं कर पाई.

उस दिन को रंजना शायद ही कभी भूल पाए, जब वह आगेपीछे का बिना कुछ सोचे मयंक के रूम पर चली गई थी. मयंक ने उस का हार्दिक स्वागत किया और दोनों इधरउधर की बातों में मशगूल हो गए. थोड़ी देर बाद मयंक ने उसे कोल्डड्रिंक औफर किया तो रंजना ने सहजता से पी ली.

रंजना को यह पता नहीं चला कि कोल्डड्रिंक में कोई नशीली चीज मिली हुई है, लिहाजा धीरेधीरे वह होश खोती गई और थोड़ी देर बाद बेसुध हो कर बिस्तर पर लुढ़क गई. मयंक हिंदी फिल्मों के विलेन की तरह इसी क्षण का इंतजार कर रहा था. शातिर शिकारी की तरह उस ने रंजना के कपड़े एकएक कर उतारे और फिर उस के संगमरमरी जिस्म पर छा गया.

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कुछ देर बाद जब रंजना को होश आया तो उसे महसूस हुआ कि कुछ गड़बड़ हुई है. पर क्या हुई है, यह उसे तब समझ में नहीं आया. मयंक ने ऐसा कुछ जाहिर नहीं किया, जिस से उसे लगे कि थोड़ी देर पहले ही उस का दोस्त उसे कली से फूल और लड़की से औरत बना चुका है. दर्द को दबाते हुए लड़खड़ाती रंजना वापस हौस्टल आ कर सो गई.

कुछ दिन ठीकठाक गुजरे, लेकिन जल्द ही मयंक ने अपनी असलियत उजागर कर दी. उस ने एक दिन जब ‘उस दिन’ का वीडियो और तसवीरें रंजना को दिखाईं तो उसे अपने पैरों के नीचे से जमीन खिसकती नजर आई. खुद की ऐसी वीडियो और फोटो देख कर शरीफ और इज्जतदार घर की कोई लड़की शर्म से जमीन में धंस जाने की दुआ मांगने लगती. ऐसा ही कुछ रंजना के साथ हुआ.

दोस्त नहीं, वह निकला ब्लैकमेलर

वह रोई, गिड़गिड़ाई, मयंक के पैरों में लिपट गई कि वह यह सब वीडियो और फोटो डिलीट कर दे. लेकिन मयंक पर उस के रोनेगिड़गिड़ाने का कोई असर नहीं हुआ. तुम आखिर चाहते क्या हो, थकहार कर उस ने सवाल किया तो जवाब में ऐसा लगा मानो सैकड़ों प्राण, अजीत, रंजीत, प्रेम चोपड़ा और शक्ति कपूर धूर्तता से मुसकरा कर कह रहे हों कि हर चीज की एक कीमत होती है जानेमन.

यह कीमत थी मयंक के साथ फिर वही सब अपनी मरजी से करना जो उस दिन हुआ था. इस के अलावा उसे पैसे भी देने थे. अब रंजना को समझ आया कि उस का दोस्त या आशिक जो भी था, ब्लैकमेलिंग पर उतारू हो आया है और उस की बात न मानने का खामियाजा क्याक्या हो सकता है, इस का अंदाजा भी वह लगा चुकी थी.

मरती क्या न करती की तर्ज पर रंजना ने उस की शर्तें मानते हुए उसे शरीर के साथसाथ 10 हजार रुपए भी दे दिए. लेकिन उस ने उस की तसवीरें और वीडियो डिलीट नहीं किए. उलटे अब वह रंजना को कभी भी अपने कमरे पर बुला कर मनमानी करने लगा था. साथ ही वह उस से पैसे भी झटकने लगा था.

रंजना चूंकि जरूरत से ज्यादा झूठ बोल कर मम्मीपापा से पैसे नहीं मांग सकती थी, इसलिए एक बार तो उस ने मम्मी की सोने की चेन चुरा कर ही मयंक को दे दी.

रंजना 3 महीने तक तो चुपचाप मयंक की हवस पूरी कर के उसे पैसे भी देती रही, लेकिन अब उसे लगने लगा था कि वह एक ऐसे चक्रव्यूह में फंस गई है, जिस से निकलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है. ऐसे में उस ने अपनी जिंदगी खत्म करने का फैसला ले लिया.

नेहा अगर वक्त रहते न बचाती तो वह अपने फैसले पर अमल भी कर चुकी होती. लेकिन नेहा ने उसे न केवल बचा लिया, बल्कि मयंक को भी उस के किए का सबक सिखा डाला.

नेहा ने कोड रेड पुलिस टीम को इस ब्लैकमेलिंग के बारे में जब विस्तार से बताया तो टीम ने रंजना को कुछ इस तरह समझाया कि वह आश्वस्त हो गई कि उस की पहचान भी उजागर नहीं होगी और वे फोटो व वीडियो भी हमेशा के लिए डिलीट हो जाएंगे. साथ ही मयंक को उस के जुर्म की सजा भी मिलेगी.

कोड रेड की इंचार्ज एसआई माधुरी वासनिक ने रंजना को पूरी योजना बताई, जिस से मय सबूतों के उसे रंगेहाथों धरा जा सके. इतनी बातचीत के बाद रंजना का खोया आत्मविश्वास भी लौटने लगा था.

योजना के मुताबिक फुल ऐंड फाइनल सेटलमेंट के लिए 26 अप्रैल को रंजना ने मयंक को भंवरताल इलाके में बुलाया. सौदा 20 हजार रुपए में तय हुआ. उस वक्त सुबह के कोई 6 बजे थे, जब मयंक पैसे लेने आया. कोड रेड के अधिकारी पहले ही सादे कपड़ों में चारों तरफ फैल गए थे.

माधुरी वासनिक फोन पर रंजना के संपर्क में थीं. जैसे ही मयंक रंजना के पास पहुंचा तो पुलिस वालों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया. शुरू में तो वह माजरा समझ ही नहीं पाया और दादागिरी दिखाने लगा. लेकिन जैसे ही उसे पता चला कि सादा लिबास में ये लोग पुलिस वाले हैं तो उस के होश फाख्ता हो गए. जल्द ही वह सच सामने आ गया जो मयंक के कैमरे में कैद था.

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मयंक का मोबाइल देखने के बाद जब इस बात की पुष्टि हो गई कि रंजना वाकई ब्लैकमेल हो रही थी तो बहुत देर से उस का इंतजार कर रहे पुलिस वालों ने उस की सड़क पर ही तबीयत से धुनाई कर डाली. पुलिस ने उसे कई तमाचे रंजना से भी पड़वाए, जिन्हें मारते वक्त उस के चेहरे पर प्रतिशोध के भाव साफसाफ दिख रहे थे.

तमाशा देख कर भीड़ इकट्ठी होने लगी तो पुलिस वाले मयंक को जीप में बैठा कर थाने ले गए और उस पर बलात्कार और ब्लैकमेलिंग का मामला दर्ज कर के उसे हवालात भेज दिया.

फिल्म अभी बाकी है

ब्लैकमेलिंग की एक कहानी का यह सुखद अंत हर उस लड़की के नसीब में नहीं होता जो किसी मयंक के जाल में फंसी छटपटा रही होती है और थकहार कर खुदकुशी करने के अलावा उसे कोई रास्ता नजर नहीं आता.

इस मामले से यह तो सबक मिलता है कि लड़कियां अगर हिम्मत से काम लें और पुलिस वालों के साथसाथ घर वालों को भी सच बता दें, तो बड़ी मुसीबत से बच सकती हैं. नेहा की दिलेरी और समझ रंजना के काम आई, इस से लगता है कि सहेलियों को भी भरोसे में ले कर ब्लैकमेलरों को सबक सिखाया जा सकता है.

ऐसी हालत में आत्महत्या करना समस्या का समाधान नहीं है. समाधान है ब्लैकमेलर्स को उन की मंजिल हवालात और अदालत का रास्ता दिखाना. मगर इस के पहले यह भी जरूरी है कि अकेले रह रहे लड़कों पर भरोसा कर के उन से अकेले में न मिला जाए.

एक लाश और Lockdown के इक्कीस दिन

मानपाडा , घोरबंदर रोड , ठाणे, के थोड़ा नए , सुनसान जगह में निम्न वर्ग के लिए  नयी बनी एक आम सी हाउसिंग सोसाइटी , नीलकंठ , की एक बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर के फ्लैट में दो प्लास्टिक की चेयर्स पर बैठे सुमन सिंह  और अजय हेगड़े,बेड पर पड़ी अनिल की लाश को देखते , फिर एक दूसरे को , जैसे कोई महान  काम अंजाम दे दिया हो . सुमन ने कहा ,” अजय , ये जनता कर्फ्यू तो नौ बजे ख़तम हो जायेगा , इसे रात को ठिकाने लगा पाएंगे न ?”

”हाँ , सुमन , कुछ दूरी पर नयी बिल्डिंग बन रही थी , आजकल काम बंद है , वहीँ गड्ढा खोदकर इसे दबा देंगें , बस , अब इसे बड़े सूट केस में भर लेते हैं .” सुमन ने फिर एक बार लाश को देखा , बदन में एक झुरझुरी सी हुई . अनिल के साथ पांच सालों के वैवाहिक जीवन का अंत ऐसे होना था , यह कभी सोचा नहीं था . वह यूँ ही पानी पीने उठ गयी , अजय भी पीछे पीछे उठा , और उसकी कमर में  हाथ डाल दिया ,बोला ,”क्यों परेशान हो रही हो , डिअर ? चार साल से इसी दिन का तो इंतज़ार किया है , हमारे प्यार के बीच कीअब सब दीवार हट चुकी हैं, . ” सुमन पलटी और उसके गले लग गयी . सुमन और अजय फिर भविष्य की योजनाएं बनाते रहे , रिश्तेदारों  और पड़ोसियों को क्या कहना है , रोने की कितनी एक्टिंग करनी है .अनिल बिहार के हाजीपुर से मुंबई आया था , वह और अजय एक आइस फैक्ट्री में काम करते थे , कोरोना के टाइम अनिल के रिश्तेदार बिहार के गावों  से मुंबई आने से रहे , उसके माता  पिता थे नहीं , भाई बहन थे , वे कहाँ आ पायेंगें , इसलिए दोनों ने अनिल को मारने का यही समय चुना था . आजकल लोग कोरोना वायरस के चलते डरे सहमे से थे . बिल्डिंग का जो चौकीदार रहता  , वह भी अपने गांव जा चुका था .

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इस बिल्डिंग में आम से लोग थे जिनकासमय अपनी जरूरतें पूरी करने में ही बीत जाता , वैसे भी ये मुंबई के लोग थे जिनके पास एक दूसरे के जीवन में ताकाझांकी के लिए न समय होता है , न आदत . दोनों ने अनिल की लाश को मिलकर सूटकेस में भर दिया , सुमन बीच बीच में विचलित होती पर अजय उसे बातों में लगा लेता . दोनों फिर थक से गए तो फर्श पर ही लेट गए . दोनों ने फिर चाय , नाश्ता , खाना पीना , प्यार मोहब्बत सब आराम से किया जैसे कुछ हुआ ही न हो . आज के दिन के लिए वे दोनों ही पूर्ण रूप से मानसिक रूप से तैयार थे .नौ बजे अजय ने बाहर झाँका ,कहा ,”बस अब यह बैग लेकर बाहर जाना है , ऑटो मिल जाए अब , और कोई बाहर न मिले .” अजय और सुमन ने इतने में ही आवाजें सुनी , किचन की खिड़की से झाँका , काफी लोग दिन भर रहने के बाद बाहर निकल आये थे , अजय ने अपना सर पकड़ लिया , ”यह तो बड़ी मुश्किल हो गयी , बाहर तो बहुत लोग आ गए .”

सुमन अब घबराई ,” अब क्या करेंगें ?” अजय थोड़ी देर सोचता रहा , फिर बोला ,” मैं कल एक टेम्पो लेकर आऊंगा , फिर यह सूट केस ले जाऊंगा .” सुमन हड़बड़ा गयी ,” तो क्या इसके साथ मैं अकेली रहूं?”

अजय इस समय भी हंस दिया , ” अरे , पांच साल रह ली , एक रात और बिता लो पति के साथ .” सुमन ने गुस्से से घूरा , तो बोला ,”अरे , पड़ा रहने दो बेचारे को एक कोने में , लो , यहाँ रख देता हूँ , दरवाजे के पीछे , तुम्हे अब नहीं दिखेगा . सुमन , आज कितना फ्री फील हो रहा है न ?”सुमन अब भी चिंतित थी ,”तुम यहीं रुक जाओ , अजय .”

”माँ को भी जाकर शकल दिखा दूँ , अकेली परेशान हो रही होंगीं , सुबह से ही यहाँ हूँ , मैं जाकर टेम्पो वाले से भी बात कर लेता हूँ ,” सुमन को किस करके , उसे तसल्ली देकर अजय चला गया . सुमन ने बेड की चादर बदली , बहुत थकान थी , आराम करने लेट तो गयी पर बंद आँखों के आगे अनिल से मिलने से लेकर आज तक की घटनाएं सिलसिलेवार घूमने लगीं .

आइस फैक्ट्री में ही सुमन के चाचा काम करते थे , उन्ही के पास आते जाते उसकी मुलाकात अनिल से हुई थी ,उसका  सरल , गंभीर सा स्वभाव उस समय तो सुमन के मन को छू गया था ,अनाथ सुमन और अनिल के  विवाह पर  किसी को आपत्ति नहीं हुई , विवाह के कुछ ही दिन बाद उसे अनिल के गहरे दोस्त अजय का खिलंदड़ा, मस्त मौला स्वभाव इस कदर भाया कि आज सूटकेस में रखी लाश उसी लगाव की निशानी थी जो दिन पर दिन बढ़ता गया था और दोनों ऐसे दीवाने हो चुके थे कि कई महीनों से अनिल से पीछा छुड़ाने की बात करने लगे थे . अजय अनिल की अनुपस्थिति में खूब आता जाता रहा तो अनिल के घर होने पर भी आता जाता , जिससे किसी देखने वाले को लगे कि यह घर जैसा ही कोई दोस्त है . अजय का विवाह तो हुआ था पर उसका तलाक हो चुका था , वह अपनी माँ के साथ ही ठाणे की ही एक सोसाइटी में रहता था , सुमन अनिल के साथ उसकी माँ से मिलने भी जाती रहती . आज भी पूरी योजना के साथ जब अजय के साथ अनिल ने सुबह बैठ कर सुमन के हाथ का बना नाश्ता किया तो वह अजय पर हमेशा की तरह  स्नेह ही लुटाता रहा था , उसे सपने में भी गुमान नहीं रहा होगा कि आज कैसे वह बेवफा  पत्नी और धोखेबाज  दोस्त के हाथों जान गवाने वाला है .

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सुबह नाश्ते के बाद अनिल और अजय ऐसे ही बेड पर बातें करते रहे तो अनिल के चाय मांगने पर सुमन ने अजय के इशारे पर उसे उसका एक दिन पहले ला कर दिया जहर चाय में मिलाकर देने का इशारा किया , सुमन अजय के प्रेम में इतनी अंधी थी कि उसके हाथ अनिल को जहर वाली चाय देते हुए जरा भी नहीं कांपे. अनिल चाय पीकर तुरंत बेसुध हुआ तो अजय ने उसके मुँह पर तकिया रख दिया , कुछ ही सेकंड तड़पकर अनिल ने आखिरी सांस ली , तो अजय ने उठकर सुमन को गले लगा कर उसे किस किया तो सुमन भी उससे लिपट गयी थी , कोई पछतावा नहीं , बस , दो बहके से इंसान !

इतने में अजय के फ़ोन से सुमन चौंक कर उठी , अजय ने कहा ,” डर तो नहीं लग रहा ?”

”नहीं , तुम साथ हो तो डर कैसा ?”

” तो सोई क्यों नहीं ?”

”ऐसे ही , नींद नहीं आयी .”

”पति की याद आ रही हो तो एक नजर सूट केस पर डाल लेना ,” कहकर अजय जोर से हस दिया तो सुमन ने बनावटी गुस्सा दिखाया ,” पति की इतनी याद आती तो आज वह सूट केस में न होता ,” दोनों हँसे,सुमन ने कहा , अच्छा , टेम्पो वाले से बात हुई ?”

”हाँ , कल रात को लेकर आता हूँ , माँ की तबियत ख़राब है , उन्हें शाम को डॉक्टर को दिखा कर फिर रात को आता हूँ .”

”ठीक है .”

हमेशा वही नहीं हो सकता जैसा इंसान सोचता है , अगले दिन  महामारी को काबू करने के लिए लॉक डाउन की घोषणा हो गयी  तो सुमन बुरी तरह घबराई , उसने अजय को फ़ोन किया कि फौरन आओ , उसने कहा ,”हाँ , माँ को डॉक्टर के पास जल्दी ले जा रहा हूँ , फिर आता हूँ .” पर फिर अजय का फ़ोन आया कि सब बंद होने लगा है , टेम्पो वाले ने तो मना कर दिया है , कोरोना से डरकर सब एकदम बंद होता जा रहा है , कोई ऑटो भी नहीं दिख रही . कैसे आऊंगा ?”

सुमन चिल्लाई ,” मुझे नहीं पता , अजय , कैसे भी आओ , जल्दी आओ . ”

उसके बाद तो सुमन को झटके पर झटके लगते रहे , जब अजय का फ़ोन ही बंद आने लगा . पहले उसने सोचा कि नेटवर्क की प्रॉब्लम होगी फिर समय बीतते बीतते उसे समझ आ गया कि उसका प्रेमी उसे धोखा देकर गायब हो चुका है , उसे इतना गुस्सा आया , सोचा , उसके घर पहुँच जाए , पर उसका घर भी दूर था , और कोई ऑटो सचमुच रोड पर अब नहीं थी . पूरा दिन सुमन भूखी , प्यासी , बेचैन सी इधर से उधर फ्लैट में चक्कर काटती रही , सूट केस पर नजर डालती , क्या होगा अब , कुछ समझ नहीं आ रहा था , फिर अजय को फ़ोन मिलाती , फ़ोन अब बंद ही था . इस समय वह अजय को ढूंढने नहीं निकल सकती थी , बस एक आशा थी मन में कि शायद फ़ोन खराब हो , वह अचानक आ जाए . पर अजय लॉक डाउन की खबर से सचमुच भाग खड़ा हुआ था , वह इस समय किसी मुसीबत में नहीं पड़ना चाहता था , वह फौरन अपनी माँ के साथ नवी मुंबई , अपनी  मौसी के घर चला गया था .

अब दो दिन बीत गए , सुमन को समझ आ गया कि इस लाश का जो भी करना है , उसे ही करना है , उसका शैतानी दिमाग अपने काम पर लग गया था , अब उसे कोई ऐसा इंसान पकड़ना था जो वही करे , जो वह कहेगी . अब उसे अपने ऊपर रहने वाले करीब तीस साल के  राजू की याद आयी , राजू एक फोटोग्राफर के यहाँ फ्रेम बनाने का काम करता था . राजू से वह अक्सर आते जाती मिलती थी तो राजू की नजरों को पढ़कर उसे मन ही मन बहुत हसी आती थी , अनिल के पास भी अक्सर वह आ जाता , चाय पीने के टाइम उसे ही जिन नजरों  से देखता , उन नजरों को वह खूब पहचानती . राजू अपने फ्लैट में अकेला ही रहता . लॉक डाउन के बाद अब सब घर में ही थे . एक सब्जी वाला नीचे आता , सब लेने उतरते, उसने राजू को भी सब्जी लेते देखा तो फौरन उतर गयी , पूरी अदाओं से उसके हाल चाल पूछे , और चलते चलते कहा ,” बोर हो रहे होंगे तुम ?”

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राजू ने हाँ में सर हिलाया , सुमन ने कहा ,” आओ , चाय पीयोगे ?”

”अनिल है ?”

”नहीं .”

राजू को भला क्या आपत्ति होती ,वह तो मन ही मन सुमन के रूप पर फ़िदा था सालों से , उसके पीछे पीछे अंदर गया , सुमन ने बड़ी शराफत से चाय पिलाई ,मासूम सी शकल बना कर बातें करती रही , बता दिया , अनिल बाहर गया है , तुम आते रहना .” और सच में राजू फिर आता ही रहा , तीसरे ही दिन सुमन ने बाकी दूरियां भी ख़तम कर दी तो राजू तो जैसे उसका गुलाम ही हो गया , यही लगा सुमन को , यह सच भी था , राजू दिलो जान से फ़िदा हो गया उसपर , तो सुमन ने सूट केस में रखी लाश का पूरा सच बताकर उससे हेल्प मांगी , सुमन ने इतना ही बताया कि अनिल उसे बहुत मारता था , उसे गुस्सा आया तो उसने अनिल की हत्या कर दी , वह सालों से मार पिटाई की शिकार थी , उसने अपनी कहानी रो रोकर ऐसे सुनाई कि राजू उसकी हेल्प करने के लिए फौरन तैयार हो गया . अनिल का फ़ोन तो सुमन कब का बंद कर चुकी थी जिससे कोई भी संपर्क  करने की कोशिश न करे , उसके पास कोई फ़ोन आया भी तो उसने उठाया नहीं . अब राजू रात में लाश ठिकाने लगाने के लिए तैयार  हो गया , उसने कहा ,” अकेले तो बहुत मुश्किल है , साथ चलोगी ?”

”हाँ .”

दोनों ने सचमुच रात को राजू की बाइक पर छुपते छुपाते  एक बजे सूट केस ले जाकर घोड़बंदर रोड पर ही आगे जाकर खाड़ी में फेंक दिया .सुमन ने राजू को बहुत थैंक्स बोला , दोस्ती अब और पक्की हुई , आना जाना , साथ रहना कुछ और बढ़ा.  लॉक डाउन का टाइम था , रहना तो घर में ही था , घर का सामान राजू ही ले आता , सुमन बीच बीच में अजय का फ़ोन मिला कर देखती , फ़ोन शायद अब बंद ही रहता , अब सुमन सोच रही थी कि लॉक डाउन ख़तम होते ही यह घर बेच कर कहीं और चली जाएगी , यहाँ कोई भी अनिल के बारे में पूछ सकता था . वह आगे की बहुत सी प्लानिंग मन में ही करती रहती , लाश दफ़नाने के पांचवे दिन ही राजू एक लड़के के साथ आया , परिचय हुआ , यह विनय था , थोड़ी देर में ही एक और लड़का आया , राजू ने परिचय करवाया , यह सुनील है . सुमन का माथा ठनका , पर ये मुझसे मिलने क्यों आये हैं ?” राजू ने दुष्टता  से कहा ,ये सब मेरे कुछ  दोस्त हैं , अभी और भी आयेंगें ,इन्होने  अनिल की लाश दफनाने का वीडियो बनाया है ,ये सब उस समय पहले से वहीँ थे . तुम्हे दिखाना चाहते थे .” कहकर सब हँसे, सुमन पसीने पसीने हो गयी , डर गयी, समझ गयी , वह बहुत बुरी तरह फंस चुकी है . ” फिर भी उसने पूछा , राजू , तुमने मुझे धोखा  दिया ? मैंने तुम्हे अपना समझा .”

राजू गुर्राया ,” तुम किसी को अपना समझ ही नहीं सकती , तुम बहुत ही खतरनाक औरत हो .”

सुमन ने पूछा ,” मुझसे क्या चाहते हो ?”

विनय ने उसके पास जाते हुए कहा ,” वही जो हमारे जैसे लड़के एक जवान , सुन्दर औरत से चाह सकते हैं .”

”चले जाओ , यहाँ से , मैं अभी शोर मचाती हूँ .”

” हाँ , बुलाओ सबको , सब वीडियो देख लें .” राजू ने सचमुच सुमन को वीडियो दिखाया , साफ साफ़ दिख रहा था कि वह राजू की हेल्प कर रही है , दोनों सूट केस खाड़ी में मिलकर फेंक रहे हैं .

सुमन सर पकडे बैठी रह गयी , दोनों ने सुमन के साथ जबरदस्ती करनी शुरू की , वह जितना भी रोक सकती थी , रोकने की कोशिश की , पर कोई असर  नहीं , दोनों ने मिलकर सुमन के साथ रेप किया , राजू रेप का वीडियो बनाता रहा , सुमन बेबसी में रोती रह गयी , किसी पडोसी को भी नहीं बता सकती थी , संगीम जुर्म कैमरे में कैद था , जिसके बाहर आने पर भी हालत खराब होनी ही थी , अब भी खराब ही थी . वह हर तरफ से अब मजबूर थी , यह सिलसिला रोज का हो गया ,वह सबका खाना बनाती , थक जाती , फिर उनकी हवस का निशाना बनती , उसे बाद में उनकी बातों से ही पता चला कि राजू तो पहले दिन से उन्हें सब बता रहा था , लॉक डाउन में ये लड़के राजू के फ्लैट पर ही आ चुके थे , और भी तीन दोस्त आसपास की बिल्डिंग में थे , विनय ने एक दिन भद्दा मजाक करते हुए कहा ,” अच्छा हुआ , सुमन , तुमने लॉक डाउन का टाइम चुना , नहीं तो हम तो बहुत बोर हो जाते .” सुमन मन ही मन दिन गिनती कि लॉक डाउन ख़तम हो तो वह यहाँ से भाग जाएगी , लॉक डाउन ख़तम होने में अभी सात दिन और थे , एक दिन एक आदमी राजू के साथ आया , राजू ने कहा ,सुमन , ये हैं तुम्हारे स्पेशल गेस्ट .”विनय ने कहा ,” यही हैं हमारे फोटोग्राफर  रवि साहब , अब तुम्हे इनके लिए मॉडलिंग करनी है , इन्हे तुम्हारा वीडियो बहुत पसंद आया .” राजू को छोड़कर सब लड़के हँसते हुए सुमन के घर से चले गए , राजू ने हँसते हुए कहा ,” सुमन , तुम्हारे लिए लॉक डाउन में भी छुपते छुपते आये हैं , चलो , अपनी अब तक की बेस्ट परफॉरमेंस दो ” रवि दुष्ट सेभाव लिए आगे बढ़ा , सुमन ने  गुस्से में हाथ उठा दिया उस पर , रवि ने उसे कसकर वापस थप्पड़ लगाए , सुमन बेबसी में जोर जोर से रोने लगी . रवि रेप करता रहा , राजू शूट करता रहा . सुमन रोते रोते बेजान सी हो गयी तो  दोनों उसे छोड़ कर रूम से जाने लगे तो राजू ने  हंसकर कहा ,” सुमन , अब आराम करलो , मैं अब रात को आऊंगा , मेरा तो नंबर ही नहीं आ रहा .” उस दिन सुमन बहुत रोई , बहुत पछतायी , बहुत बुरी फंसी थी , किसी को बताने का मतलब था , अनिल की हत्या का पता चलना , न बताने का मतलब था , इतने लड़कों की हवस का शिकार बनते रहना , इनके इशारे पर नाचना , पर कब तक !

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यह जानलेवा सिलसिला चलता जा रहा था , उसकी शकल बिलकुल उजड़ सी गयी थी , रोम रोम दुखता , लॉक डाउन ख़तम होने तक तो उसकी हिम्मत जवाब दे गयी . अब उसके घर की एक चाभी भी राजू ने रख ली थी , अगले दिन जब राजू अंदर आया , खड़े का खड़ा रह गया , सुमन ने किसी टाइम अपनी कलाई काट ली थी , खून भी बहकर सूख चुका था , उसने फौरन उसकी साँसे चैक की , वह जा  चुकी थी . मिनटों में ही सब लड़के गायब हो गए , बहुत  देर बाद लोगों को पता चला कि लॉक डाउन में क्या घट चुका था , आसपास क्या अनहोनी होती रही  , किसी को खबर ही नहीं हुई थी . पुलिस सब लड़कों और अनिल की तलाश में जुट चुकी थी .

Coronavirus: लोगों को इंस्पायर करने के लिए अक्षय कुमार ने बनाया ये VIDEO, मिला बॉलीवुड का साथ

कोरोना की महामारी के चलते दुनियां के लगभग हर देश के लोग सोशल डिस्टेसिन्ग के लिए मजबूर हो गये हैं. भारत में कोरोना के चलते पूरा देश सन्नाटे में है. देश का हर तबका आशंकाओं और निराशा से जूझ रहा है. देश के दिहाड़ी मजदूरों के सामनें खाने का संकट मुहं बाए खडा है. देश को इस स्थिति से ऊबारने के लिए लगाए गए लॉक डाउन से कई लोग घरों से बाहर न निकलने के चलते मानसिक रूप से परेशानियों से जूझ रहें हैं.

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कोरोना संकट से जूझ रहे देशवासियों में आशा की किरण जगाने के लिए बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार नें बॉलीवुड एक्टर्स के साथ ‘मुस्कुराएगा इंडिया’ नाम से एक वीडियो सांग रिलीज किया है. उनके इस वीडियो सांग के जरिये इस महामारी के बीच एकता और एकजुटता को दिखाने की कोशिश की गई है. इस वीडियो सांग (VIDEO SONG) को ‘मुस्कुराएगा इंडिया’ (Muskurayega India ) नाम से जैकी भगनानी की जस्ट म्यूजिक ( JJUST MUSIC) के यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया है. इस वीडयो के कैप्सन में लिखा है “यह वीडियो सभी के चेहरों पर मुस्कान लाने और एकजुटता की भावना को बनाए रखनें के लिए किया गया”.

इस वीडियो सांग में मौजदा दौर के सभी स्टार्स पड़ रहे दिखाई

‘मुस्कुराएगा इंडिया’ वीडियो सांग ( (VIDEO SONG) को बहुत ही भावुक तरीके से फिल्माया गया है. जिसमें मौजूदा दौर के सभी एक्टर्स दिखाई पड़ रहें हैं. इसमें अक्षय कुमार, जैकी भगनानी, कार्तिक आर्यन, टाइगर श्रॉफ, आयुष्मान खुराना, कृति सनोन, भूमि पेडनेकर, राज कुमार राव, विक्की कौशल, कियारा आडवाणी, तापसी पन्नू, सिद्धार्थ मल्होत्रा, रकुल प्रीत सिंह, अनन्या पांडे, आरजे मलिष्का और शिखर धवन का खुबसूरत समन्वय दिखाई पड़ रहा है.

सभी स्टार्स नें अपनें घरों से किया है शूट

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‘मुस्कुराएगा इंडिया’ नाम के वीडियो सांग ( (VIDEO SONG) में जितने भी स्टार्स दिख रहें हैं उन सभी नें लॉक डाउन के नियमों का पालन करते हुए अपने-अपने हिस्से के वीडियो की शूटिंग खुद अपने घरों में की बालकनी, छत, आंगन में आकर की है. आयुष्मान खुराना नें अपने फोन को सेल्फीस्टिक पर लगाकर अपने हिस्से का वीडियो शूट किया है.

गाने में इनकी रही है भूमिका

कोरोना के चलते निराशा में आशा की किरण जगाते इस गानें को अपने स्वर से सजाया है विशाल मिश्रा नें और संगीत भी  विशाल मिश्रा का ही है. इस गीत को लिखा है कौशल किशोर नें गिटार और बास पर भी विशाल मिश्रा विशाल ने धुन सजाई है. इसके निर्माण और व्यवस्था की जिम्मेदारी विशाल मिश्रा मिक्स द्वारा निभाई गई है. संगीत सहायक की भूमिका शुभम श्रीवास्तव, कुमार गौरव सिंह द्वारा निभाई गई है.

गाने के रिलीजिंग के मौके पर अक्षय कुमार नें कही यह बड़ी बात

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इस गाने को लॉन्च करते हुए अक्षय कुमार ने ट्विट कर कहा “यह एक ऐसा समय है जब हमारे दिन अनिश्चिताओं से भरे हुए हैं, हमारी जिंदगी थम सी गई है. ऐसे में उम्मीदों का ये गाना रिलीज किया जा रहा है.” (At a time like this when our days are clouded with uncertainty and life has come to a standstill, bringing you a song of hope. #MuskurayegaIndia song out at 6 PM today.). उन्होंने यह भी कहा की “हम सभी को एकजुट होने की जरूरत है. और फ़िर #MuskurayegaIndia! भारत” All we need is a united stand. Aur phir #MuskurayegaIndia! Flag of India Do share with your family and friendsHeart suit.

भावुक करने वाले सीन्स को किया गया है शामिल

3 मिनट 25 सेकेण्ड के वीडियो सांग ( (VIDEO SONG) की शुरुआत पीएम मोदी के कोरोना से लड़ाई जीतने वाले वीडियो मैसेज के साथ की गई. इस गाने में कोरोना से जंग लड़ रहे देश के डाक्टर्स, पुलिस और स्वास्थ्य कर्मियों को भी दिखाया गया है, जो अपने जिन्दगी परवाह न करते हुए लोगों के लिए दिन रात सेवा में लगे हैं. इनमें कोरोना से जूझ रहे मरीजों, गरीब बच्चों मुस्कराते हुए ग्रामीणों, के साथ ही गाँव के सीन्स भी शामिल किये गए हैं. इस वीडियो सॉंग में लोगों को जीत की ख़ुशी के साथ हँसते गाते भी दिखाया गया है गाने का अंत जनगण मन के धुन से किया गया है जो भावुक कर देता हैं.
इस गाने की सफलता के लिए जो बड़ी बात है वह यह है की इसे प्रधानमन्त्री नें भी ट्विट किया है और लिखा है “फिर मुस्कुराएगा इंडिया… फिर जीत जाएगा इंडिया…” India will fight. India will win! Good initiative by our film fraternity. इसके अलावा कई बड़े चेहरों नें इस गाने को ट्विट किया है और शेयर भी किया है.

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डोनाल्ड ट्रंप की नरेन्द्र मोदी को धमक! : पंचतंत्र की कथा

डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति का इसी वर्ष फरवरी में जब भारत में नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम के दरमियान ऐतिहासिक स्वागत हुआ था तब ऐसा प्रतीत हुआ था मानो भारत और अमेरिका जनम जनम के दोस्त हैं अभिन्न मित्र हैं मगर किसे पता था कि प्रख्यात विष्णु शर्मा  के “पंचतंत्र” के पात्रों की भांति अमेरिका और भारत को भी परीक्षा की घड़ी से गुजरना होगा. अभी ज्यादा दिन नहीं हुए हैं नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम का आगाज हुआ था और चंद दिनों बाद ही जब  कोरोना का हमला हुआ है ऐसे में  इस मित्रता और दोस्ती की हकीकत दुनिया भी सच्चाई के सामने जगजाहिर हो गई. अमेरिका कोरोना कोविड 19 महामारी कि भयावह  स्थितियों से गुजर रहा है ऐसे में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी से बात की और मदद मांगी.

है ना पंचतंत्र की कहानी जैसा कुछ…. जब जंगल का राजा शेर अपने  जंगल के किसी खरगोश, सियार से मदद मांगे और पंचतंत्र में क्या होता है आप याद करें. शायद आप  तो पंचतंत्र की वह एक कहानी भूल गए हैं .खैर….वह फिर  आगे! अभी तथ्यों से दो चार  हों.

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दोस्त दोस्त ना रहा!

और देखिए विधि का प्रारब्ध! एक बार फिर दोस्त दोस्त ना रहा की सच्चाई सामने आती चली गई.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोस्त और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नरेंद्र मोदी से  फोन पर निवेदन किया  और कोरोना  को काबू लाने वाली  हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन  की मांग कर डाली.  अब जैसा कि होना था नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति की इस गंभीर बात को कान नहीं दिया. अंततः डोनाल्ड ट्रंप को, जैसा कि अक्सर गुस्सा आता है, गुस्सा आ ही गया,  और अपने दोस्त मोदी को धमकी दी दी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को धमक भरे भाव में कहा – अगर भारत कोरोना वायरस से लड़ने के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन दवा का निर्यात नहीं करता है तो उसे अमेरिका का रोष झेलना पड़ेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान उस वक्त सामने आया  जब इस घातक वायरस से यूएस में त्राहिमाम मचा हुआ है. कई लाख  लोग कोरोना से  संक्रमित हैं, वहीं नित्य  हजारों लोगों की मौत हो रही  है.  कोरोना  वैक्सीन बनाने  दुनियाभर के वैज्ञानिक रात दिन  एक किये  हुए हैं लेकिन आज तलक किंचित  सफलतानहीं मिल सकी  पाई है.

भाई चारा भूलना !

निसंदेह भारत विश्व का  गुरु रहा है, हमारे वेद,पुराण धार्मिक ग्रंथ सदैव लोगों की मदद की प्रेरणा देते रहें हैं . अगर कोई दुश्मन भी मदद मांगता है तो आड़े वक्त में मदद की जाती है. ऐसे में अमेरिका तो अब भारत का परम मित्र ही बन चुका है. घटनाक्रम कुछ यूं था कि

ट्रम्प ने  विगत शनिवार 4 अप्रेल को कहा था- मैंने मोदी से फोन पर बात की, उनसे हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन दवा की खेप देने को कहा है.

मगर 48 घंटे बीतने के बाद भी भारत मौन था. निसंदेह ऐसे संकट के समय में भारत की सरकार को यह निर्णय लेने में दिक्कत आ रही थी कि आखिर अमेरिका को मदद की जाए या नहीं. इधर यह भी सच्चाई है कि अमेरिका में कोरोना विषाणु को लेकर खतरा बढ़ता जा रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मलेरिया निरोधक  हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन की खेप भेजने की गुहार लगाई थी, लेकिन अब कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने धमकी  दे दी.

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर भारत हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन के निर्यात पर लगा बैन नहीं हटाता अमेरिका को  उसका निर्यात नहीं करता है तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने तल्खी भरे स्वर में कहा कि  कोई कारण नहीं दिखता कि भारत ने अमेरिका के दवा के ऑर्डर को रोककर पर क्यों रखा है?

संबंधों की तल्खी का नुकसान

यह सच है कि कोरोना महामारी आज अपने उफान पर है मगर  यह समय भी निकल जाएगा. भारत को यह नहीं भूलना चाहिए कि इस महामारी के समय में हमें दुनिया से मदद लेनी भी है और मदद देनी भी है. और जब यह सच सामने आ चुका है

की हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन  कोरोना से लड़ने में कारगर है और वह हमारे पास उपलब्ध है तो उसे उपलब्ध नहीं कराना कितनी अनुचित बात हो सकती है. व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प ने कहा था -‘‘मैंने अभी मोदी के फैसले के बारे में नहीं सुना, मैं जानता हूं कि उन्होंने दूसरे देशों में दवा के निर्यात को रोक रखा है. मेरी हाल ही में उनसे अच्छी बात हुई थी.भारत  अमेरिका के रिश्ते काफी बेहतर हैं. अब यह देखना होगा कि वे हमें दवा भेजने की अनुमति देते हैं या नहीं।’’

इधर ट्रम्प से बातचीत के बाद नरेन्द्र  मोदी ने कहा था कि अमेरिका के दवा भेजने के ऑर्डर पर विचार करेंगे.यह दुनिया जानती है कि कोरोना कोविड 19 महामारी कहर बनकर अमेरिका पर टूट पड़ी है दुनिया का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका जिसके पास जाने कितना पैसा और सामरिक अस्त्र शस्त्र हैं आज लाचार हो चुका है.

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इटली और स्पेन के बाद अमेरिका में मौतों का आंकड़ा सबसे अधिक है . ऐसे में अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  का नाराज होना दुनिया ने देखा और अंततः पंचतंत्र की प्राचीन कहानी की भांति वही हुआ जो होना था.डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी के बाद भारत सरकार ने अमेरिका को मानवता के नाते उक्त दवाहाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन को निर्यात करने का आंशिक रूप से फैसला किया है, जो निसंदेह मानवीय दृष्टिकोण से जायज है.

#coronavirus: मां बेटियां कर रहीं मुफ्त मास्क निर्माण

लेखक- राजेश चौरसिया

      • बुंदेलखंड में मातृशक्ति का राष्ट्र को समर्पित कार्य..
      • छतरपुर घर बैठकर मुफ्त में बना रहीं बेटियां मास्क..
      • राष्ट्रहित में धन की जगह श्रमदान कर रहीं महिलायें..
      • माँ बेटियां मिलकर बनातीं हैं रोजाना 1000+ मास्क..

विश्व आपदा, कोरोना महामारी, और लॉग डाउन के चलते देशभर में सम्पन्न लोग जरूरतमंदों को उनकी जरूरतों और अपनी हैसियत के मुताबिक मदद कर रहे हैं जो कि ज़मीनी स्तर पर कारगर साबित हो रही है. जिसके अलग-अलग जगहों से पृथक पृथक परिणाम निकलकर सामने आये हैं. ऐसे ही कई मामले बुंदेलखंड से भी निकलकर आये और देखने को मिले हैं.

मामला मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले का है जहां अर्थ/पैसे से सक्षम न हो पाने के बाबजूद भी लोग राष्ट्रहित में अपना हुनर और श्रम समर्पित कर सहयोग कर रहे हैं. जहां रुपयों पैसों से सहयोग न कर पाने के बदले राष्ट्र और जन हित में अपना हुनर रूपी श्रम की पूंजी न्योछावर कर रहे हैं.

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डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक इस कोरोना वायरस से बचाव ही इसका सबसे बड़ा उपाय और है. जिसके चलते अचानक सैनिटाइज, ग्लब्स, और मास्क की मांग में हजारों गुना उछाल आया है. जिसके चलते इनका सहजता से मिला पाना संभव नहीं हो पा रहा. मास्कों की अचानक बेतहाशा मांग के चलते हा-हा-कार सा मचा हुआ है जिससे इनका मिलना मुश्किल से हो पा रहा है. दूसरी ओर गरीब मजबूर जरूरतमंद लोग इन्हें ख़रीदपाने में भी सक्षम नहीं हैं. जिसके चलते सक्षम और जनसेवी लोगों ने इन्हें लोगों को मुफ्त बांटने का बीड़ा उठाया है.

छतरपुर शहर निवासी मातृशक्ति (रचना नामदेव) और बहनें मानसी, साक्षी, दिव्या मिलकर इस विश्व आपदा और राष्ट्रहित/जनहित के कार्य को अंजाम दे रहीं हैं. छतरपुर शहर के हटवारा मोहल्ला स्थित नामदेव परिवार अपने घर पर माँ अपनी तीन बेटियों के साथ मिलकर मास्क निर्माण के काम में जुटीं हुईं हैं. इनकी मानें तो यह रोजाना 1000 से ऊपर तक मास्क बनाकर तैयार करतीं हैं. और माश्क बनाने का यह काम वे बिल्कुल मुफ्त कर रहीं हैं. यह परिवार अब तक 10,000 (दस हज़ार) से ज़्यादा तक मास्क बना चुका है.

रचना नामदेव की मानें तो वह एक स्व सहायता समूह से जुड़ी हुई है जिसके तहत वह सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, कर अपना और आने परिवार का जीविकोपार्जन करती हैं. उनके साथ उनकी बेटियाँ (मानशी, अंचल, रानू) भी स्कूल और पढ़ाई से फ्री होकर पार्ट टाइम (फ्री-टाईम) में उनका हाथ बाँटवातीं हैं. इस वक्त वैसे भी स्कूल कॉलेज सब बंद हैं तो वह 100 % फ्री ही हैं जो इस समय उनके काम में हाथ बंटा रहीं हैं.

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रचना की मानें तो उनके पास नगर की प्रथम महिला अर्चना गुड्डू सिंह का मास्क बनाने के काम को लेकर ऑफर आया (कि उन्हें मास्क निर्माण कर लोगों में मुफ्त बांटने हैं) जिसको उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया. परंतु साथ ही एक शर्त भी रक्खी कि उनके जनहित के इस कार्य में वह उनके साथ हैं वह रूपये पैसों से तो सक्षम नहीं हैं पर वह अपना हुनर और श्रम देकर राष्ट्र और जनहित के कार्य में शामिल हैं. अर्थात वह उनसे माश्क बनाने के एवज में एक पैसा भी नहीं लेंगीं. मास्क बनाने की सामग्री, कपड़ा, धागा, डोरी, ईलास्टिक के अलावा वह कुछ भी न लेंगीं.

रचना बतातीं हैं कि विश्व आपदा और इस महामारी पर लोग अपनी सक्षमता के हिसाब से सहयोग कर रहे हैं. हम धनबल से तो लोगों की मदद तो नहीं कर सकते क्यों कि वह हमारे पास है ही नहीं तो हम अपने हुनर और मेहनत के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से देश और जनसेवा में मदद कर रहे हैं.

बोलीं अर्चना गुड्डू सिंह..

वहीं जब हमने अर्चना गुड्डू सिंह से बात की तो उन्होंने हमें बताया कि हम इस आपदा में जरूरतमंद लोगों को राजनीति से इतर राशन, पानी से लेकर उनकी हर जरूरत का सामान मुहैया करा रहे हैं इसके साथ हम संक्रमण रोकने में बेहद जरूरी मास्क सेनिटाईज, ग्लब्ज़ बांट रहे हैं. जिसके लिए हम कई स्व सहायता समूह के जरिये इनका निर्माण करवा रहे हैं. इनसे रोजाना निर्मित होने वाले मास्कों को हम वार्ड-वार्ड भ्रमण कर बांटने का काम कर रहे हैं जो पिछले कई दिनों से अनवरत जारी है जो कोरोना और लॉग डाउन समाप्ति तक जारी रहेगा.

मामला चाहे जो भी हो पर विश्व आपदा पर राष्ट्रप्रेम देशभक्ति जनसेवा की इस तरह की मिशाल अब तक कहीं से सामने नहीं आई कि जहां एक ओर खुद जरूरतमंद परिवार मदद के लिये आगे आ रहा है. भले ही वह पैसों से सक्षम अमीर न हों पर दिल से अमीर हैं तभी तो अपना हुनर और श्रम राष्ट्रहित में जनसेवा कर समर्पित कर रहे हैं.

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अर्थात हम ऐसीं मातृ शक्ति माँ-बेटियों को तहेदिल से सलाम करते हैं.. जय हिंद.. जय भारत..”

लौकडाउन जिंदगी

लेखक- पुखराज सोलंकी

गांव से मीलों दूर दिल्ली शहर के इंडस्ट्रीज एरिया की एक फैक्ट्री मे काम कर रहा लीलाधर इस बार शहर आते वक्त अपनी गर्भवती पत्नी रुक्मणी और चार साल की मुनिया से वादा कर के आया था, कि इस बार हमेशा की तुलना में वापस जल्दी ही गांव लौटेगा.

वक्त-वक्त पर पत्नी की खैर खबर के लिए आने वाली आशा दीदी ने भी अप्रैल महिने की ही तारीख़ बताते हुए कहा था कि- ‘ऐसे वक्त में तुम्हारा यहां होना बेहद जरूरी है.

‘जबाब में लीलाधर बोला- ‘मैं तो उससे पहले ही पहुंच जाऊंगा, बस ये मार्च के महीने में काम का कुछ ज्यादा ही दबाव रहता है, जिसके चलते साहब लोग छुट्टी नही देते लेकिन उसके बाद लम्बी छुट्टी पर ही आऊंगा और आते वक्त मुनिया, उसकी मम्मी और नए वाले बाबू के लिए कुछ कपड़े लत्ते भी तो लाने हैं न.’

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लौकडाउन के दौरान उस काट खाने वाले कमरे में छत को घूरते हुए लीलाधर अपने अतीत में खोया यह सब सोच ही रहा था कि कुंडी के खडकने से उसकी तंद्रा टूटी. लुंगी लपेटते हुए दरवाजा खोला तो सामने फैक्ट्री का सुपरवाइजर खड़ा था, वो बाहर खड़े-खड़े ही बोला-

‘कुछ जुगाड़ बिठाया कि नहीं गांव जाने का, फैक्ट्री अभी बंद है और मालिक भी किसकिस को खिलाएगा घर से, ये पकड़ पांच सौ रूपये, मालिक ने भेजें है, और आज शाम तक कमरा खाली कर देना, बाकी का हिसाब वापसी पर ही होगा.’

यह सुनकर लीलाधर को एक बार तो ऐसा लगा जैसे इस वायरस ने उसके भविष्य के सपनों को अभी से ही संक्रमित करना शुरू कर दिया हो. अब कोई और चारा नही था, लिहाजा कमरा खाली करना पड़ा. अब जाए तो जाए कहां ना बस ना ट्रेन जेब में पांच का नोट और कुछ पांच-दस के सिक्के, अब अगर यहां रूका तो जो हैं वो भी खर्च हो जाएंगें.

यही सब कुछ सोचते विचारते आखिर फैसला कर ही लिया और घर रुकमणी को फोन किया- ‘एक दो दिन में कुछ जुगाड़ बिठाकर गांव के निकल जाऊंगा, तुम अपना और मुनियां का ख्याल रखना, हाथ धोते रहना और उसे बाहर मत निकलने देना.’

अपने घर आने की खबर पत्नी को देकर लीलाधर निकल पड़ा नेशनल हाइवे पर, मन ही मन उसने हिसाब भी लगा लिया कि 24 घंटों में अगर 16 घंटे भी लगातार चला सात-आठ दिनों में तो गांव पहुंच ही जाएंगा । उसने ठान लिया था कि अब वो पैदल ही इस सफर को पूरा करेगा, वो खुश था. घर की और बढ़ते कदमों में एक अलग ही उत्साह था. उसे मलाल बस इसी बात का था कि वो मुनिया और नए बाबू के लिए कुछ कपड़े लत्ते और खिलोने नही खरीद नही सका.

सफर तय करते-करते लीलाधर रुकमणी से फोन पर बात करते हुए बोला, ‘मेरे फ़ोन की बैटरी डाउन होने लगी है. बाद में अगर फोन न कर पाऊं तो परेशान मत होना, बस कुछ ही दिनों की बात है, जल्दी ही सफर तय करूंगा.’ बैटरी डाउन की वजह से न चाहते हुए भी उसे फोन काटना पड़ा.

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सफर के दौरान लीलाधर ने रुकमणी को लाॅकडाउन की वजह से शहर में हो रही परेशानियों और पाबंदियों से अवगत तो कराया. लेकिन यह नही बताया कि वह पैदल ही गांव पहुंच रहा है, बताता भी कैसे, उसे डर था कि पत्नी कही मना न कर दें. वह अनवरत चलता रहा, उसके आगे पीछे जो लोग चल रहें थें धीरेधीरे उनकी संख्या कम होती गयी, दिल्ली के आसपास इलाकों वाले लोग अपने गंतव्य तक पहुंच चुके थें. लेकिन उसका चलना जारी था.

उधर चार-पाँच दिन बीतने पर पत्नी को घर से बाहर होने वाली हर आहट पर यही लगता कि शायद अब वो आएं हो. फोन लगना तो कब का बंद हो चूका था. एक तो लाॅकडाउन और ऊपर से ये इन्तजार, वो दोहरी मार झेल रही थी. दिन में तो चलो जैसेतैसे मुनिया और मां बाबा के साथ समय निकल जाता, लेकिन रात होतेहोते उसे बेचैनी सी होने लगती है, बात करने के लिए फोन उठाती लेकिन फोन स्विच ऑफ मिलता.

अगले दिन सुबहसुबह जब घर की कुंडी खड़की तो मुनिया खुशी से चहकी पापा आ गये.. पापा आ गये, घर में मां बाबा सहित सब के चेहरे पर खुशी के भाव साफ दिखने लगे थें. हाथों का काम छोड़कर वो दरवाजे की और दोड़ी, चुन्नी का पल्लू अपने सर पर रख के उसने दरवाजा खोला तो सामने गांव के ही दरोगा साहब थे,

‘लीलाधर का घर यही है ?’
‘जी, यही है.
‘क्या लगते है आप उनके ?’
रुकमणी पास खड़ी मुनिया की और इशारा करते हुए बोली,
‘जी, इसके पापा है.’
‘घर में कोई और है बड़ा.’

बातचीत सुनकर बाबा बाहर की और आएं और बोलें
‘क्या बात है, दरोगा साहब ?, बेटी तुम अंदर जाओ.’
वो मुनिया को लेकर अंदर तो चली गयी लेकिन उसके कानों ने अभी भी दरवाजे पर हो रही गुफ्तगू का पीछा नही छोड़ा.

‘जी, आप कौन ?’
‘मैं उसका बाबा हूं.’
दारोगा ने हाथ में थाम रखा डंडा बगल में दबाकर अपनी टोपी उतारते हुए कहा- ‘बहुत अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है लीलाधर अब इस दुनिया में नही रहा, नेशनल हाइवे पर रात के समय गश्त पर गए पुलिस दस्ते को सड़क पर एक लहू-लुहान हालत में लाश पड़ी मिली, शायद किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी, शिनाख्त के दौरान जेब व बैग में मिलें कुछ कागजों की वजह हम यहां तक पहुंच पाएं. शव फिलहाल मोर्चेरी में है.

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यह सुनते बूढ़े बाबा की टांगों ने जवाब दे दिया था, दरवाजा पकड़कर खड़े रहने की हिम्मत जुटाई क्यूकिं बहु के आगे वे ऐसा करेंगे तो फिर उसको कोन संभालेगा. उधर दारोगा के आते ही रुकमणी को भी कुछ अनहोनी का अंदेशा होने लगा था, वो अंदर थी लेकिन उसके कान आसानी से बातचीत सुन पा रहें थें.

‘हिम्मत रखिये, और बताएं की इतनी रात को आपका बेटा कैसे इतनी दूर निकल गया था, क्या घर में कोई बात हुई थी ?.’ दारोगा ने प्रश्न किया.

‘हमारी किस्मत फूटी थी जो उसे रोजगार के लिए दिल्ली भेजा, वो तो नहीं आया. लेकिन आप…

तभी लीलाधर की माँ चिल्लाई, ‘अरे.. कोई बचाओ, मुनिया की माँ उसे लेकर पानी के कुएं में कूद गयी.

दारोगा साहब अंदर की और दोड़े, पीछे-पीछे बाबा आएं, दारोगा ने बाहर जीप के पास खड़े अपने सहकर्मी को आवाज दी. हड़बड़ाहट में किसी को कुछ नही सुझ रहा था, जब तक रस्सी का इंतेज़ाम हुआ तब तक दोनों लाशें पानी में तैरने लगी थी. लीलाधर और उसके परिवार की जिंदगियां बिना किसी संक्रमण के हमेशा के लिए लाॅकडाउन की भेंट चढ़ चुकी थी.

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