‘मैंने कभी हार नहीं मानी’ – भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह

बचपन से डांस की शौक रखने वाली भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह (Akshara Singh) पटना की है. उन्हें पहला ब्रेक फिल्म ‘सत्यमेव जयते’ (Satyamev Jayate) से मिला, जिसमें उन्होंने अभिनेतारवि किशन के साथ काम किया था. फिल्महिट रही और वह भोजपुरी इंडस्ट्री में रातों रात प्रसिद्ध हो गयी. इसके बाद से उसे पीछे मुड़कर देखना नहीं पड़ा. वह भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री की खूबसूरत अदाकारा है, जिसनेभोजपुरी फिल्मों के हर बड़े कलाकार के साथ काम किया है. अक्षरा स्पष्टभाषी है और अपने जीवन में आये उतार-चढ़ाव को डटकर सामना करती है.अक्षरा के माता- पिता भी अभिनय क्षेत्र से जुड़े होने की वजह से उसेअभिनय विरासत में मिली है, जिसे उन्होंने एक नयी पहचान दी है. वह अपने आपको एक जिम्मेदार नागरिक मानती है, इसलिए आज कोरोना वायरस से परेशान देश के लिए जो भी हो सकता है कर रही है.

पेश हैं उनसे बातचीत के कुछ खास अंश:

प्र. इन दिनों आप क्या करना पसंद कर रही है?

जो काम व्यस्त दिनचर्या की वजह से नहीं कर पायी थी, उसे ही करने की कोशिश कर रही हूं. इसमें योगा, मैडिटेशन, कुकिंग आदि कर रही हूँ. अब तक जो काम मैंने कभी नहीं किया था,मसलन झाड़ू, पोछा, खाना बनाना अब सब कर रही हूं. अबये सब अच्छी तरह से करना आ जायेगा.

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प्र. अभिनय में आने की प्रेरणा कहां से मिली ?

प्रेरणा मुझे मेरे माता-पिता से मिली है. वे दोनों ही थिएटर आर्टिस्ट है. बचपन से ही थिएटर देखते हुए ही बड़ी हुई हूं.

प्र. पहली परफोर्मेंस कब शुरू की?

बचपन से ही मैंने थिएटर करना शुरू कर दिया था. माता-पिता के साथ-साथ थिएटर करती रहती थी. इंडस्ट्री में पहली फिल्म ‘सत्यमेव जयते’ थी, जिसमें मैंने रविकिशन के को स्टार के रूप में काम किया था. इसके बाद काम मिलता गया.

प्र. आप भोजपुरी फिल्मों में काफी लोकप्रिय अभिनेत्री है, हिंदी फिल्मों में न दिखने की वजह क्या है?

मैं भोजपुरी में काफी सफल थी, घर बैठे-बैठे फिल्में मिलती थी, इसलिए इससे अलग कुछ कभी सोचा नहीं. अब थोड़ी सजग हो चुकी हूं और कुछ अलग सोच रही हूं. असल में कभी-कभी जिंदगी की बेवकूफियां खुद से हो जाया करती है. मैं उसमें उलझ गयी और सही निर्णय नहीं ले पायी.

प्र. आप अपनी जर्नी से कितनी संतुष्ट है, क्या कोई रिग्रेट है ?

मैं अपनी जर्नी से संतुष्ट हूं, लेकिन कई बार ऐसा भी हुआ है कि मैं अच्छी हिंदी धारावाहिक और फिल्मों को करने से मना कर दिया. बाद में लगा कि उसे कर लेना चाहिए था, उसका मलाल है.

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प्र. परिवार का सहयोग आप के साथ कितना रहा?

मेरे माता-पिता अभिनय क्षेत्र से होने की वजह से उन्होंने ही मुझे अभिनय करने की सलाह दी, पर मुझे अभिनय में कोई रूचि नहीं थी. मुझे कोरियोग्राफर बनना था. मेरे पिता की इच्छा थी कि मैं अभिनय करूं. मैंने किया और अब तो 50 से भी अधिक फिल्में कर चुकी हूं. मैंने डांस भी सीखा हुआ है जो अभिनय में काम आ रहा है. इसके अलावा गाना भी गाती हूं. हमेशा से मैं कुछ नया और क्रिएटिव काम करना पसंद करती हूं.

प्र. किस गाने या फिल्म ने आपकी जिंदगी बदल दी?

एक सैड सौंग ने मेरी जिंदगी बदल दी, क्योंकि मैं एक बहुत ही खराब फेज से गुजर रही थी, मैंने इस गाने से अपने आपको स्ट्रोंग महसूस की और उस तनाव भरे जीवन से निकली. इस दौरान मुझे याद आता है मैं एक तरफ और भोजपुरी इंडस्ट्री एक तरफ थी. अभिनेता और सिंगर पवन सिंह मुझे इंडस्ट्री से बाहर निकालने में लगे हुए थे. असल में मैं उसके साथ साल तक रिलेशनशिप में थी. उसने मुझे धोखा दिया और चुपचाप शादी कर ली. मैंने इस बात को अधिक तूल नहीं दिया और चुपचाप काम करती रही और उससे दूरी बनाकर रहने लगी, लेकिन पवन सिंह चाहताथाकि मैं अभी भी उसके साथ इस बेनाम रिश्ते में रहूँ, उन्हें लगा कि मैंउनके बगैर कुछ कर नहीं सकती. इंडस्ट्री से जबलोग मुझसेकिनारा करने लगे, तो मैंने गायिकी को अपनाई, जिसमेंमैं सफल रही गाना हिट हुआ और बहुत सारा प्यार मिला. उसमेंभी उन्होंने सेंध लगाने की कोशिश की, हर कंपनी में जाकर मेरे गाने को रोकने लगा. हर तरीके की कोशिश की मैंने उसपर केस कर दिया.मैंने हार नहीं मानी.मेरे दर्शकों ने मुझे बहुत सहयोग दिया.

प्र. मुश्किल घड़ी में परिवार की प्रतिक्रिया क्या रही?

माता-पिता ने मेरा साथ देकर मेरे मनोबल को बढाया और मुझे लड़ने के लिए हौसला दिया. मैं लड़की हूँ, मैंनेअफेयर किया और लड़ रही हूँ, इसमें उन्होंने साथ दिया. उनकी सोच बहुत अलग है. मेरे पिता ने कह दिया था कि तुम्हे मरना है या लड़ना है. ये खुद निर्णय लेकर आगे बढ़ो. मरने वाले के साथ मैं नहीं, लड़ने वाले के साथ मैं हमेशा रहूँगा, इस बात ने मुझे हिम्मत दी और आज मैं खुश हूँ. मैंने रातोंरात शो कर नाम कमाया.

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प्र. क्या मी टू से ऐसे लोगों का मनोबल टूटेगा? पुरुषों की ऐसी मानसिकता के लिए जिम्मेदार कौन  है?

मनोबल अवश्य टूटेगा और टूटा भी है, लेकिन इन सबके पीछे समाज की मानसिकता है. लड़कियों और औरतों को भी समझने की जरुरत है. हमारी इज्जत हमारे शरीर में है, मन में नहीं. लोगों की नज़रों में इज्जत नहीं है. इन चीजो से सबको अवगत करने के लिए मैं सोशल मीडिया पर भी एक्टिव हूँ. परिवार ही ऐसे लड़कों कीपरवरिश करती है और उसके बाद समाज आता है, जो लड़कों के किसी गलत काम को सपोर्ट करती है.

प्र. आगे क्या है? ड्रीम क्या है?

मुझे काम नहीं मिल रहा था, इस वजह से मैंने एक फिल्म प्रोड्यूस और एक्टिंग की है, जिसका नाम ‘डोली’ है. 70 के दशक की फिल्म है, जो सब नार्मल होने के बाद रिलीज करुँगी. इसके अलावा कुछ अच्छी फिल्में और गाना गाऊंगी.

प्र. भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में किस बात की कमी महसूस करती है?

भोजपुरी फिल्म में अबकाफी बदलाव आया है, लेकिन मेहनताना एक्ट्रेस को कममिलता है. मैंने इसे कम करने की कोशिश की है.

Lockdown के चलते गांव में फंस कर रह गई ये पौपुलर एक्ट्रेस

बिग बौस (Bigg Boss) के सीजन 7 का हिस्सा रह चुकी रतन राजपूत (Ratan Rajput) लौक डाउन (Lockdown) के चलते एक गांव में फंस कर रह गई हैं. जहां उन्हें जुगाड़ के सहारे अपनी दिनचर्या पूरी करनीं पड़ रही है. इस दौरान गांव से वह अपने संघर्ष से लबरेज वीडियो और फोटोज शेयर कर रहीं हैं. लोग उनको मैसेज भेज कर पूछ रहें हैं की वह कहां रुकी हैं क्या कर रहीं.

इसको लेकर उन्होंने एक वीडियो पोस्ट कर कहा की मैंनें खुद को क्वारेंटीन कर रखा है. मै खुद को आइसोलेट करके रख रहीं हूं. लेकिन जगह का नाम इस लिए नहीं बताना चाहती हूं की इससे प्राईवेसी का खतरा है. सोशल डिस्टेंसिंग का खतरा हो सकता है लोग मिलना चाहें, बात करना चाहें तो इससे खतरा बढ़ सकता है. मै जहां हूं वह छोटा सा गांव है जहां लोग इतना ज्यादा आइसोलेशन को तवज्जो नहीं दे रहें हैं. 6 मिनट 3 सेकंड के वीडियो में उन्होंने बचाव के तमाम तरीके बताये. उन्होंने वीडियो के अंत में कहा की मै बिहार के एक गाँव में हूँ जहाँ मै अकेली नहीं हूँ बल्कि हम तीन लोग हैं और एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में यहाँ आये थे लेकिन लॉक डाउन के चलते यहाँ रुक जाना पड़ा है.

उन्हें उस गांव में कई तरह की परेशानियों का सामान करना पड़ रहा हैं. इसको लेकर वह अपने इन्स्टाग्राम और यूट्यूब से लेकर फेसबुक पर तमाम वीडियोज अपलोड कर स्थिति से रूबरू करा रहीं हैं. रतन नें अपने क्वारेंटाइन का वीडियो शेयर कर कहा हैं की गांव में कई सुविधाएं नहीं है. लेकिन जान है तो जहान है इस लिए सुरक्षित रहने के लिए यह सब चलता है.

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एक वीडियो में वह खुद ही कपड़ें साफ़ करती नजर आ रहीं हैं इस वीडियो में उन्होंने कहा है “पार्टी-पार्टी बाद में खेल लेना अभी सब मिलकर देश की सोचो”. वहीँ बर्तन साफ़ करते हुए के वीडियो में उन्होंने कहा की “मै दवाई के खाली पत्ते से बर्तन साफ़ कर रहीं हूँ तो मौजियो मौज बाद में कर लेना, तुम्हारा मौजीपना दुनिया पर भारी पड़ रहा है,जान है तो जहान है.” इसके अलावा वह झाड़ू लगाने, लिखने-पढ़ने, और खाना खाने से जुड़े तमाम वीडियोज भी शेयर कर अपनी स्थिति से रूबरू करा रहीं है.

जुगाड़ के जरिये कर रहीं है वाशरूम और बाथरूम का प्रयोग

रतन राजपूत जिस गांव में रुकी हुई हैं वहां न ही लग्जीरियस वाशरूम है और न ही बाथरूम. इस स्थिति में उन्होंने बाथरूम को जुगाड़ के जरिये अपने उपयोग लायक बनाया है. उन्होंने इस वीडियो के साथ अपने कैप्सन में लिखा है “My luxurious bathroom /washroom Adjustment करें compromise नहीं.”

उन्होंने बाथरूम दिखाते हुए कहा की यह है मेरा बाथरूम जो की लॉक डाउन हैं. और मै जिस चैलेन्ज की बात कर रही थी वह यही जगह है क्यों की यह एक ही जगह है की जहाँ वाटर सप्लाई है. जहाँ पर मुझे कपडे भी धोना होता है और नहाना भी होता है और ब्रस भी यहीं होता है. उन्होंने उस वीडियो में दिखाया की एक ग्रिल वाले कमरे में वाटर सप्लाई लगा है जिस कमरे में ग्रिल की वजह से आर- पार दिख रहा है. इस लिए कमरे में आड़ करने के लिए एक पुराने से कपड़े का पर्दा लगाया गया है.

इस सीरियल से आई थी चर्चा में

रतन राजपूत ने कई चर्चित रोल किये जिसमें उन्हें अपने सीरियल ‘अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो’ में लाली के किरदार से पहचान मिली. इस रोल के वजह से वह वह घर घर मे जानी -पहचानी जाने लगीं थी. वह महाभारत मे वह राजकुमारी अम्बा के रूप में भी चर्चा में रहीं थी.

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वह रियल्टी शो ‘रतन का रिश्ता’ में भी नजर आई थी. इस रियल स्वयंवर में कई लोगों नें रतन का दिल जीतने की कोशिश की थी लेकिन उन्होंने अभिनव शर्मा को चुना था.  रतन राजपूत का यह रिश्ता आगे नहीं बढ़ पाया था. वह बिग बॉस सीजन 7 का भी हिस्सा रह चुकी हैं. वह लम्बे समय तक एंड टीवी के सीरियल ‘जय संतोषी मां’ में भी लीड रोल में नजर आ चुकी हैं जिसमें उनके रोल को काफी सराहा गया था.

फिलहाल रतन राजपूत जिस भी गाँव में रुकी हैं वहां उन्होंने खुद को परिस्थितियों में ढाल रखा है. उन्होंने अपने एक वीडियो में कहा की अभी तक तो वह ऐसे यह सोचकर रह रही थीं कि कुछ ही दिनों की बात है, लेकिन लौकडाउन के कारण लंबा ठहरना पड़ रहा है. इसलिए वह अब इस जगह को अपने रहने लायक बना लिया है.

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यूट्यूब का लिंक जिस पर वह अपने सारे वीडियोज शेयर कर रहीं है –

https://www.youtube.com/channel/UCU0SV3NNGOEWlUi3aJGiYGQ

फेसबुक एकाउंट का लिंक जिस पर वह अपने वीडियोज शेयर कर रहीं है-

https://www.facebook.com/ratan.rajpoot.988

पापियों ने बढ़ाया कोरोना को

लेखक- सुरेश सौरभ

होली में मुझे ससुराल जाना था, इसलिए पत्नी का सख्त आदेश था कि अपनी डेंटिंग-पेंटिंग करा डालूं. लिहाजा होली के एक रोज पहले, उनके हुक्म की तामील करते हुए मैं अपने मोहल्ले की एक नाई की दुकान पर अपनी हजामत कराने के लिए जा पहुंचा. वहां पहले से बैठे अपने मोहल्ले के ग्राहकों की भीड़ से मुझे यह अहसास हुआ कि मेरा सिर नाई के हाथों में बहुत देर से पहुंचेगा.

वहां की भीड़ से मुझे यह भी लग रहा था कि मेरे जैसे ही कई पति अपनी पत्नियों के आदेश का पालन करने के लिए बेहद लाचारी में बैठे हैं और बेचारगी से नाई को बड़ी हसरत से देखते हुए अपने नंबर के आने का इंतजार कर रहें हैं. टाइम काटने की गरज से मैंने वहां आड़ा-तिरछा मुंह बिसूरता पड़ा अखबार का एक पन्ना उठा लिया. तभी कोरोना  पर एक महाज्ञानी ने बात खोद दी-अगर कोरोना से बचना है, तो हल्दी वाला शाम को एक गिलास दूध पीना चाहिए. दूसरे ने ताल ठोंक कर कहा-यहां इतनी जलवायु गरम है कि कोरोना तो क्या उसके बाप का भी कोई असर न होगा.

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नाई के चेहरे की चमक बढ़ रही थी वह यह सोच कर खुश था, चलो मेरे ग्राहक कोरोना की बहस में उलझ कर बैठे रहेंगे, ऊबेंगे नहीं, कहीं जायेंगे नहीं. इसलिए उसने भी एक मुक्तक उछाल कर कहा-ये बात मैंने भी कहीं से सुनी है कि खूब हल्दी खाने वालों के ऊपर कोरोना का असर बिलकुल नहीं होता है. भैया मेरे ऊपर तो कोरोना का बिलकुल असर नहीं होगा. मेरी तो घरवाली सब्जी-दाल में खूब रेलम-पेलम हल्दी मिर्च झोंकती है. भैया हम लोग तो पीने-खाने वाले आदमी हैं. हमें खूब तीखा खाने में मजा भी आता है.’ मेरे सामने ,एक महोदय अखबार का एक पन्ना बांच रहे थे, उसे परे हटा कर अपना सिर खुजाते हुए बोले-साला डेढ़ रुपया वाला फेस मास्क मारकेट में पच्चीस रुपये का.

नामुराद दुकानदार उल्लू बना कर ग्राहकों की गर्दनें काट रहें हैं. ऐसा ही रहा, तो फेस मास्क को नागमणि की तरह खोजना पड़ेगा. एक सज्जन ने उबांसी लेते हुए कहा-पाकिस्तान भारत का जानी दुश्मन है. जब वह भारत से, आतंकवाद से, न जीत सका तो, भारत की अर्थव्यवस्था को खराब करने के लिए साजिशन कोरोना को भारत भेजवा रहा है. तभी उस नाई का  चलता हाथ ग्राहक के सिर पर ठहर गया. वह बीड़ी का लम्बा सुट्टा खींच, पाक को भद्दी गाली देते हुए बोला-साला है, पाकिस्तान बड़ा हरामखोर है. अपनी पर आ जाए तो गिरी से गिरी हद तक जा सकता है.

तभी एक अधेड़ अपनी बड़ी-बड़ी दाढ़ी खुजाते हुए बोला-मेरा तो मानना है कि इस बार होली में होलिका को जलाने के बजाय कोरोना वायरस का पुतला बनाया जाए और किसी बड़े पंडित से मंत्र-वंत्र पढ़ा कर, उसे होलिका दहन की तरह फूंका दिया जाए, इससे राक्षस कोरोना दुम दबाकर भाग जायेगा. एक बैरागी टाइप के आदमी ने कहा-ये सब  बढ़ रहे पापों का नतीजा है. चीन बहुत पापी है. जब कुत्ता, घोड़ा, गदहा सांप चमगादड़ सब खायेंगे तो कोरोना उन्हें नहीं, क्या हमें खायेगा.

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भारत में भी जानवर खाने वाले पापी बढ़ रहे है. अगर ऐसे ही निरन्तर बढ़ते रहे, तो कोरोना हमारे देश में भी आ जायेगा, पर हमें ये सब चिन्ता नहीं करनी चाहिए जब तक मोदी जी इस देश में है तब तक हमारे देश में न तो जानवर खाने वाले पापी बढ़ पायेंगे और न कोरोना राक्षस भारत का कुछ बिगाड़ पायेगा.

कोरोना का साइड इफेक्ट

लेखक- नीरज कुमार मिश्रा

देश में लौकडाऊन अब भी जारी था, और  लोगों के अंदर एक क्षोभ  सा भरा हुआ था. यह कहना कठिन था कि ये गुस्सा किसके प्रति था.

उस देश के खिलाफ जहाँ से ये वायरस आया है या सरकार द्वारा अचानक से लॉकडाऊन ठोंक दिए जाने की नीति पर ,पर सच तो ये था कि एक वायरस ने अचानक कहीं से प्रकट होकर उनकी सामान्य तौर से चलती हुई ज़िंदगी में एक उथलपुथल ज़रूर मचा दी थी .

ऐसी ही कुछ उथलपुथल मोबीना की ज़िंदगी में मच गयी थी. सलीम और सलीम  के दो बेटियां थी ,वैसे तो वह प्रकट रूप से कुछ नहीं कहता था पर एक बेटे की चाह तो उसके मन में बनी ही हुई थी.

सलीम की बेगम मोबीना एक सीधी सादी महिला थी जो मोहल्ले में अपने सद्व्यवहार के लिए जानी जाती थी.

मोबीना मोहल्ले में रमिया चाची को देखने गयी थी क्योंकि जीने पर से फिसलने से उनके घुटनो में थोड़ी चोट आ गयी थी और फिलहाल वो बिस्तर पर ही थी.

रमिया चाची के सिरहाने बैठी मोबीना पंखा झल रही थी कि तभी उसे पता चला कि रमिया चाची का लड़का जो  दुबई में काम करता है ,वो वापिस आ गया है .

उसे ये जानकर अच्छा भी लगा कि चलो अब कोई तो रमिया चाची को सहारा देने वाला आ गया है.

मोबीना ने भी सुना है कि कोई कीड़ा वाली बीमारी, मने जिसे वायरस वाली बीमारी कहते हैं वो फैल रही है और लोगों की जान ही ले लेती है वो बीमारी ,और इसीलिये देश की सरकार ने सबसे दूर दूर बैठने को कहा है .

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अरे पर आदमी आस पड़ोस में न जायेगा तो फिर ऐसे व्यवहार का क्या अचार डालना है और फिर अगर अच्छे में नहीं गये तो क्या ,कम से कम बीमारी अज़ारी में मिजाजपुर्सी के लिए तो जा ही सकते हैं ना. और फिर हम मेलजोल नहीं रखेंगे तो हमसे मिलने कौन आएगा?

“ये लो भाभी ,कोल्डड्रिंक पी लो ,बहुत गर्मी हो रही है न ,लो अम्मा तुम भी ले लो थोड़ा सा ” चाची के लड़के सुरेश ने कोल्ड ड्रिंक का गिलास पकड़ाते हुए कहा “अरे नहीं भैया ,आप ही पियो  ,हमे नुकसान न कर जाये कहीं ” मोबीना ने कहा

“अरे भाभी ,कुछ नहीं नुकसान करेगा ,हमें देखो अब हमें तो जुकाम है फिर भी हम पी रहे हैं कोल्ड ड्रिंक”कहते हुए कोल्ड ड्रिंक का पूरा गिलास खाली कर दिया सुरेश ने “तो भैया ,कैसे आ पाये दुबई  से तुम ,सुना है कि विदेश में बहुत मारा मारी चल रही है और पुलिस हवाई अड्डे पर ही बहुत जांच करती है तब ही आने देती है “मोबीना ने पुछा

“हाँ …मुश्किल तो बहुत था ..बस किसी तरह आ गए समझ लीजिए” सुरेश अचानक से खों खों करके खासने लगा

“क्या हुआ तबीयत नहीं सही है क्या ?” मोबीना ने पूछा

“पता नहीं जबसे आया है तबसे ही कुछ परेशान सा लग रहा है सुरेश” रमिया चाची ने बताया

मोबीना कुछ देर रमिया चाची के पास बैठने के बाद घर वापिस चली आयी .

घर में मोबीना के ससुर अपने लड़के सलीम के साथ बैठे कुछ चर्चा कर रहे थे

“अरे भाई बीमारी अगर फैली है तो उसका कोई इलाज़ भी तो होगा , अब ये तो कोई बात नहीं न हुई कि भाई बीमारी से डरकर घर से ही निकलना छोड़ दिया जाये ,हाँ ..ये मुमकिन हो सकता है अमीर लोगों के लिए ,पर हमारे जैसे रोज़ कमाने खाने वाले लोगों के लिए  तो ये बड़ी मुश्किल पैदा करने वाली बात है भाई ”

सलीम  खबरें टीवी आदि पर सुनता रहता था इसलिए उसने भी अपना ज्ञान बघारा

“नहीं अब्बू ,इस कम्बखत वायरस का यही इलाज़ है कि लोगों को एक दुसरे से मिलने से रोक दिया जाए तभी इसको रोक जा सकता है वरना ये सबकी जान इसी तरह ले लेगा”

बापबेटे की ये बातें सुनती हुयी मोबीना सीधे किचन में चली आईऔर रोटियां बनाने के लिए आटा लगाने लगी.

एक दो दिन बीतें होंगे ,अचानक से मोहल्ले में कानाफूसी तेज़ हो गयी थी ,मोबीना ने भी जानकारी ली कि माज़रा क्या है तो उसे पता चला कि रमिया चाची का लड़का सुरेश अस्पताल गया था दवाई लेने के लिए ,वहां डॉक्टरों ने कुछ सवाल जवाब किये तो उसमें सुरेश के दुबई से वापिस आने और हवाई अड्डे से बाथरूम जाने का बहाना करके और बिना जांच कर घर आने की बात सामने आयी थी डॉक्टरों ने कुछ जाँचे करी तो सुरेश को कोरोना वायरस से ग्रसित पाया गया और अब उसको क्वारंटीन में रखा गया है.

मोबीना ये सब सुनकर परेशान हो उठी क्योंकि टी वी पर देखकर वह इतना तो जान ही गयी थी कि जो व्यक्ति कोरोना वायरस से ग्रसित हो जाता है उसके संपर्क में आने वाले व्यक्ति को भी संक्रमण का खतरा भी रहता है और वह भी तो सुरेश के संपर्क में आयी थी और तो और कोल्ड ड्रिंक भी पिया था .

तो क्या उसे भी संक्रमण हो गया होगा ?

और उसे भी संक्रमण हो गया ,तो क्या वह मर जायेगी ?

कुछ दिन ही बीतें थे कि सलीम के मोहल्ले मे डॉक्टरों की एक टीम आयी ,डॉक्टरों की टीम यह सुनिश्चित कर रही थी कि दुबई से लौटे हुए सुरेश के संपर्क में जो लोग आये थे उन्हें कोई संक्रमण तो नहीं है .

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उन डॉक्टरों की टीम ने अपने आपको पूरी तरह से एक विशेष प्रकार के आवरण से कवर कर रखा था  और अपने मुंह पर मास्क लगाया हुआ था और वे डॉक्टरी उपकरणो से लोगों को चेक कर रहे थे .

डॉक्टरों की टीम ने अभी तक कुल आठ दस लोगों को चिन्हित कर लिया था ,जिन्हें कोरोना पॉजिटिव होने का खतरा लग रहा था .

मोबीना घर में ही दुबक गयी थी उसे डर लग रहा था  ,वह मन ही मन ये सोच रही थी कि कहीं वो भी कोरोना वायरस से संक्रमित न हो पर जब कोई आपदा इतने बड़े स्तर पर फ़ैल कर पूरी मानवता को तबाह करने पर लगी हो तो भला घर में छुपने से काम कहाँ चलता है  .

डॉक्टरों ने मोबीना को भी घर से बुलवाया और उसके भी प्रारंभिक टेस्ट किये ,और टेस्ट के बाद  कुछ लोगों को क्वारंटीन में रहने के लिए साथ में ले गए जिसमे से रमिया चाची के साथ मोबीना भी थी .

मोबीना ने जब क्वारंटीन में जाने का विरोध किये तो उसके शौहर सलीम ने ही उसको समझाया

“अरे तुम घबराओ मत मोबीना ,ये डॉक्टर ,ये जाँचे ये सब हमारे अच्छे के लिए ही है ,तू बेफिक्र होकर जनके साथ जाओ और यहाँ की चिंता छोड़ दे ,हम सब तुम्हारे लौटने की दुआ कर रहें हैं ,उम्म्मीद है तुम जल्दी ही सेहतमंद हो जाओगी ”

“हाँ ..पर मेरी बेटियों का धयान कौन रखेगा ,आपको तो घर का काम काज भी नहीं आता है फिर उनका ध्यान कौन रखेगा ” मोबीना ने रोते हुए चिंता व्यक्त करी

“अरे …हाँ तुम मत घबराओ ,घर के काम काज के लिए मैं यास्मीन को बुला लूंगा

वैसे तो मोबीना बहुत फिक्रमंद हो रही थी पर जब उसने यास्मीन का नाम सुना तो उसके बेचैन मन को थोड़ी राहत मिली ,फिर भी घर से दूर जाने का गम तो उसे सता ही रहा था .

यास्मीन जो मोबीना की छोटी  बहन थी ,वह मोबीना से छह साल छोटी थी .

आम तौर पर गाँव कस्बों मे आसपास के रिश्तेदार आज भी विपत्ति के समय एकदूसरे के काम आते हैं और इसी कारण ऐसे समय सलीम को अपनी साली की याद आयी थी

लौकडाउन में वैसे तो किसी भी काम के घर से निकलना मना था पर एक गाँव से पास के गाँव में खेती किसानी के काम के बहाने चोरी छुपे जाया जा सकता था .

इसी बहाने का सहारा लेकर यास्मीन को उसके घर से लिवा लाया था सलीम .

अपनी बहन के घर आकर यास्मीन ने सारा काम काज संभाल लिया था ,बच्चे भी मौसी के साथ घुल मिल गए थे और यास्मीन भी अच्छे तरह से उन लोगों को संभाल ले रही थी .

उधर मोबीना को क्वारंटीन में रखा गया था ताकि बीमारी की अच्छी  तरह से जांच हो सके ,इसी जगह पर कहीं सुरेश और रमिया चाची भी होंगी ,पर क्या फायदा ?

जब एक दूसरे से मिल ही नहीं सकते मिलना तो दूर वो सब अपने लोग तो मोबीना को दिखाई ही नहीं देतें है

बस डौक्टर और नर्स  का ही आना जाना रहता है ,वो भी अपने आपको पूरी तरह से ढके हुए

किसी की भी शक्लें सही से देखे हुए कितना टाइम हो गया है यही सब की उधेड़बुन में रहती थी मोबीना .

मोहल्ले के लोग हैरान और परेशान थे कि कैसे इस कोरोना वायरस की जद में उनके मोहल्ले के लोग भी आ गए ,

क्या सच में वह वायरस सुरेश के साथ आया था ?

या फिर और कोई संक्रमित होकर आया और उसने मोहल्ले में संक्रमण फैलाया ?

हाँ इतना ज़रूर था कि इन बातों को कोई एक दूसरे से कहता नहीं था पर परेशान तो मोहल्ले के सभी लोग थे .

पर ऐसी दशा में कोई था जो मोबीना के जाने और यास्मीन के आने से खुश था पर कौन था वो?

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वो कोई और नहीं बल्कि सलीम था क्योंकि उसकी नज़र हमेशा से ही यास्मीन  पर थी और इसी के चलते उसे अपनी पत्नी के क्वारंटीन में जाने का कोई दुःख नहीं हुआ बल्कि वो यास्मीन को लॉक डाऊन के खतरे के बाद भी लिवा लाया था .

“यास्मीन …देखो आज तक मैंने मन की बात तुमसे सामने से कभी नहीं कही ..हाँ पर ये अलग बात है कि तुम शायद उस बात को मन ही मन समझती रही …

दरअसल जब मैंने तुम्हे  मामा के यहाँ एक शादी में देखा था तभी तुम मुझे पसंद आ गयी थी और मैंने तुम्हरे लिए पैगाम भी भिजवाया था पर

मोबीना तुमसे उम्र में बड़ी थी और उसके रहते तुम्हारी शादी करने में तुम्हारे घर वालों ने आना कानी करी और  उल्टा मेरे घर वालों से मोबीना की शादी मेरे साथ करने पर ज़ोर दिया …तुम्हारे घर की माली हालत देखकर मेरे घर वालों ने मेरे साथ मोबीना की शादी करा दी  और …और इस ज़माने के कारण मैं कुछ कह भी न सका ,पर आज मैंने अपने दिल की बात तुमसे कह दी है और हैं मैं तुमसे बेपनाह मोहब्बत करता हूँ”  रसोईघर में खाना बनाती यास्मीन से सलीम ने मन की बात कह डाली

बच्चे घर में टीवी देखने में व्यस्त थे इसीलिये यास्मीन ने भी अपनी बात कह देने ठीक समझी

“देखिये  जो बीत गया है  उसे भूल जाइए ,मैं आपको अच्छी लगी या आप मुझे अच्छे लगे पर अब काफी समय बीत चुका है आप अब  दो लड़कियों के बाप है और आपको ये सब करना अच्छा नहीं लगता …इसलिए किसी नए रिश्ते को जन्म मत दीजिये ”

यास्मीन का दो  टूक का उत्तर सुनकर सलीम जड़वत हो गया था ,उसे इस तरह के सूखे उत्तर की आशा नहीं थी उसे ,बेचारा मन मसोस कर रह गया था .

कोरोना से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या में इज़ाफ़ा हो रहा था ,कस्बे और गाँव में भी पुलिस की गश्त बढ़ती जा रही थी जोये सुनिश्चित करती थी कि लोग सामाजिक दूरी बनाकर रहें.

रात गहरी हो रही थी ,यास्मीन भी नींद में थी ,अचानक एक हाथ  उसकी जांघो को सहलाने  लगा ,कुछ देर बाद यास्मीन ने अपने सीने पर किसी के हाथों का दबाव महसूस किया ,यास्मीन समझ गयी थी कि वह सलीम ही होगा जो दिन के उजाले में अपनी बात नहीं मनवा पाया तो रात में जबरदस्ती अपनई मर्दानिगी दिखाने आया है उसने धक्का देकर हटाने की कोशिश करी पर औरत तो औरत है ,मर्द ही हमेशा औरत पर भारी पड़ता आया है और आज भी वही हुआ .

सलीम का पुरुषत्व यास्मीन के कोमल जिस्म को दबा चुका था और सलीम ने अपने को तृप्त करने के लिए शुरुवात  कर दी थी ,हालाँकि यास्मीन आज तक तो कुंवारी थी पर आज जब उसका कौमार्य भंग हुआ तो उसे भी कुछ अच्छा सा लगा उस ने कुछ देर तक तो विरोध किया पर कुछ देर बाद उसे भी आनंद आने लगा पर उसने प्रकट रूप में अपने गुस्से को बनाये ही रखा .

सुबह सलीम विजयी भाव से अपने घर में घूम रहा था ,कभी तो बेवजह यास्मीन के आगे पीछे घूमता तो कभी जबर्दस्ती उससे बोलने की कोशिश करता .

और बच्चे तो यही समझ कर खुश होते रहे कि मौसी उनको समय पर खाना और पानी देती है पर दूसरी तरफ तो और ही खेल चल रहा था

उधर मोबीना को क्वारंटीन में रखा गया था और  सही सामाजिक दूरी ,एहतियात के बाद जब मोबीना के सारे टेस्ट कोरोना नेगेटिव आये तो डौक्टरों ने मोबीना को घर जाकर रहने की सलाह दी और कुछ नियम भी बताये जो उसे अब भी बरतने थे .

आज मोबीना घर आकर बहुत खुश थी ,उसके बच्चे बार बार माँ  -माँ कह  कर आ लिपट जाते थे .

यास्मीन भी अपनी बहन के सकुशल घर आ जाने से खुश थी .

एक सलीम ही ऐसा व्यक्ति था ,जिसके सीने पर मोबीना को देख सांप लोटे जाते थे .

रात को खाना खाने के बाद जब मोबीना अपने होठो से सलीम के होठों को चूमने लगी तो सलीम ने उसे हाथ मारकर  अलग कर दिया .

“उफ़ मोबीना …तुम अपना इलाज़ करा कर आयी हो और तुम्हे तो अभी मुझसे दूर रहना चाहिए पर ऐसा लगता है कि तुम अपनी  सेक्स की प्यास बुझाने के लिए मुझे भी बीमार करने से बाज़ नहीं आओगी”

आँसुओं में टूट गयी थी मोबीना ,बीमारी के बाद अपने शौहर से ऐसी उम्मीद नहीं थी उसे ,पर अपने मन को उसने के कहकर समझा लिया कि कोई बात नहीं कुछ दिन में सब सही हो जायेगा.

पर सही तो जब होता जब सलीम की नीयत सही होती ,सलीम का व्यवहार दिनबदिन मोबीना के प्रति खराब होता गया .

मोबीना ने यही समझ कि लॉकडाऊन में ज़रा पैसे की किल्लत हो रही है इसीलिये सलीम ज़रा चिड़चिड़े हो गए हैं .

“अप्पी …अब आप आ गयी हो और आपकी तबीयत भी ठीक हो गयी है इसलिए …हो सके तो मुझे घर भिजवा दो”यास्मीन ने मोबीना से कहा

“अरे …ऐसी भी क्या बात है …चली जाना “मोबीना ने कहा

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“हाँ …पर घर पर भी कुछ काम है इसलिए ….मेरा घर जाना ही उचित होगा” यास्मीन ने सलीम और मोबीना की कलह की जड़ को भांपते हुए कहा

“ठीक है मैं  बात करती हूँ तेरे जीजा से”

रात को बिस्तर पर मोबीना ने यास्मीन को घर छोड़कर आने की बात कही तो अचानक चौक उठा था सलीम पर उसने अपने गुस्से का प्रदर्शन नहीं किया और चुपचाप सो गया.

रात में मोबीना की आंख खुली तो सलीम को उसने बिस्तर पर नहीं पाया  पर यास्मीन वाले कमरे से कुछ आवाज़ आती सुनाई दी तो उसने कान लगाकर सुनने की कोशिश की ओर की ओट से अंदर झाँका तो उसे वो दिखा जो नहीं दिखना चाहिए था .

अंदर कमरे में सलीम और यास्मीन  एक दुसरे से लिपटे हुए थे और सलीम कह रहा था .

“ओह…जानेमन …भला तुम जाने की बात क्यों करती हो ….अगर किसी को जाना होगा तो वो यास्मीन जाएगी …तुम नहीं”  यास्मीन के होठो को चूसते हुए सलीम ने कहा.

“पर वो अबकी बीवी है और मैं तो कुछ भी नहीं ..मेरा और आपका रिश्ता भी तो नाज़ायज़ है ….फिर मैं कैसे?”

“अरे नाज़ायज़ और जायज़ कुछ भी नहीं होता …और वैसे भी मैं उसे तलाक़ देने जा रहा हूँ और  जबसे  मोबीना को ये छूत की कोरोना वाली बीमारी लगी है न तबसे मुझे तो उसे छूने में भी घिन आती है ”

मोबीना पर तो जैसे आसमान ही टूट पड़ा था  अब क्या करेगी वो ?कहाँ जायेगी वो?

वो तो इतनी पढ़ी लिखी भी नहीं कि चार पैसे कमाकर  अपना और बच्चों का पेट ही भर ले ,फिर ,फिर क्या करेगी अब मोबीना …..

मोबीना वहीँ फर्श पर पछाड़ खा कर गिर गयी थी.

कोरोना और लौकडाउन ने मोबीना की पूरी ज़िंदगी ही तबाह कर दी थी .

ये था मोबीना की ज़िंदगी पर कोरोना का साइड इफेक्ट.

छत्तीसगढ़: तंत्र मंत्र के संजाल मे फैलता अंधेरा

देश में किस तरह युवा अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के फेर में, आज भी पड़कर अपना एवं अपने आसपास के लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं. इसकी ज्वलंत सच्चाई छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल के गांव में देखने को मिलती है,  जहां युवक ने अंधविश्वास के भंवर जाल में फंस कर  कई लोगों की नृशंस हत्या कर दी, और खुद भी अपना जीवन बर्बाद कर लिया.

छत्तीसगढ़ के  सरगुजा जिला के सीतापुर थाना क्षेत्र के गांव में एक युवक ने  तंत्र  मंत्र के फेर  मे टांगिया  से अपनी मां सहित पड़ोस में रहने वाले तीन लोगों की हत्या कर  दी और जेल चला गया. इसके अलावा युवक ने पड़ोस में बंधे 3 मवेशियों व 7 मुर्गों को भी तंत्र मंत्र की त्रासदी मे डूब मार डाला. छत्तीसगढ़ में फैले अंधविश्वास और तंत्र मंत्र की यह एक  नजीर है.दरअसल, युवक लंबे समय  से कथित  रूप से तंत्र साधना   मे रत था. बीते शनिवार की रात  तंत्र साधना के बाद वह अपनी मां सहित पड़ोस में रहने वाले तीन  लोगों की भी हत्या कर दी. युवक हत्या करने के पश्चात साधना का मद उतरने पर भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पड़ोसियों ने उसे घेर लिया.  पुलिस मौके पर पहुंची और रात को ही आरोपी  युवक को गिरफ्तार कर लिया.

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अंधविश्वास का  संजाल 

तंत्र मंत्र और अंधविश्वास के  संजाल में फंस कर आदमी किस कदर हैवान बन जाता है यह घटना बताती है. इस लोमहर्षक घटना की सूचना मिलते ही सरगुजा पुलिस अधीक्षक  आशुतोष सिंह रात को ही  घटनास्थल पहुंच गये . अब आपको बताते हैं युवक हत्यारा कौन था उसके हाथों कौन अंधविश्वास की भेंट चढ़ गया – देवगढ़ सरना पारा निवासी ईश्वर पैकरा (35 वर्ष ) शनिवार,4 अप्रेल  की रात करीब 11 बजे तंत्र साधना के बाद अपनी 70 वर्षीय मां मनबसिया पैकरा की हत्या करने के बाद पड़ोसी 55 वर्षीय राजकुमार पैकरा, 50 वर्षीय मोहन राम बारगाह, 70 वर्षीय बुजुर्ग जबर साय पर टांगी से मार मार कर  हत्या कर दी. गांव के कुछ लोग बताते हैं की युवक की मानसिक स्थिति खराब   थी. युवक प्रारंभ से ही अंधविश्वास में डूबा रहता था और तंत्र मंत्र क्रियाएं किया करता था यही कारण है कि कुछ अध कचरे ज्ञान के कारण उक्त युवक ने  अपनी मां और बुजुर्गों के  साथ-साथ मवेशियों और मुर्गियों को भी मार डाला.

कब पहुंचेगी शिक्षा की रोशनी

गांव वालों ने बताया कि युवक तंत्र विद्या करता था यही नही  वह  हाल ही में  संपन्न पंचायत चुनाव मे पंच पद हेतु चुनाव में  खड़ा हुआ था, लेकिन हार गया था.

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युवक ने सीधे-सीधे अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के चक्कर में अपनी मां व अन्य 3 लोगों को मारा.  युवक  जिस कमरे में  रहता  था वहां तंत्र साधना करता था, पुलिस को वहां  सिंदूर, गुलाल बिखरे हुए मिला . इस संपूर्ण घटनाक्रम को देखकर यही कहा जा सकता है कि जब दुनिया विकास की विज्ञान की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है छत्तीसगढ़ और देश के अनेक गांव ऐसे भी हैं जहां आज भी अंधविश्वास का अंधेरा फैला हुआ है जिसे दूर करना एक बहुत बड़ी चुनौती है.

इस लौकडाउन देखिए साउथ की Hindi Dubbed ब्लौकबस्टर फिल्में

एक्शन के मामले में भारत में बनने वाली फिल्मों में साउथ की फिल्में सबसे आगे हैं. इसी लिए यहां की फिल्में हिन्दी में रिलीज की जाती हैं. जो हिंदी में रिलीज होने के बाद अच्छी कमाई करती हैं. साउथ की फिल्मों को भोजपुरी बेल्ट में भी खूब पसंद किया जाता है. इसका एक कारण यह है की भोजपुरी के कई कई एक्टर्स साउथ की फिल्मों में भी अपने अभिनय का डंका बजाये हुए हैं, इसमें रविकिशन का नाम सबसे ऊपर है. हम आप को बता रहें हैं हिंदी में डब की गई ऐसी ही 5 ब्लौकबस्टर फिल्मों के बारे में जो यूट्यूब पर फ्री में देखनें के लिए उपलब्ध हैं. इन फिल्मों को आप लौक डाउन (Lockdown) के दौरान देख कर अपनीं बोरियत दूर कर सकतें हैं.

रियल सिंघम 3 (Real Singham 3)

इस फिल्म में एक लड़का (महेश बाबू) जो बचपन में अपनी मां को खो देता है.वह बचपन से ही फिल्म में भ्रष्ट और खतरनाक लोगों से पंगा लेता रहता है. बड़ा होने पर पुलिस में भर्ती होने और खतरनाक लोगों से पंगा लेते हुए फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है. और अंत में फिल्म का हीरो गैंगेस्टर्स से पंगा लेते हुए उनके पूरे साम्राज्य को ख़त्म कर देता हैं. इस फिल्म में महेश बाबू मुख्य भूमिका में हैं इसके अलावा तमन्नाह, सोनू सूद, श्रुति हासन, ब्रह्मानंदम, नासर, आशीष विद्यार्थी , राजेंद्र प्रसाद नें भी सशक्त रोल कियें हैं. फिल्म के निर्देशक श्रीनु वैतला व  निर्माता रिवाज दुग्गल हैं  फिल्म का छायांकन केवी गुहान नें किया हैं.

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समुराई एक योद्धा (SAMURAI EK YODHA)

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई पर आधारित इस फिल्म का एक्शन एक अलग ही तरह का रोमांच पैदा करता है. फिल्म का हीरो विक्रम सिस्टम से लड़ते हुए उसे बदलने की जिस मुहिम पर चलाता है. अंत में वह ऐसे लोगों का पर्दाफ़ाश कर जीत जाता है. फिल्म में एक्शन के साथ ही रोमांश का भी जबरदस तड़का देखने को मिलता है. फिल्म में विक्रम नें थियागराजन के रूप में मुख्य भूमिका निभाई है. इसके साथ ही अनीता हसनंदानी नें  देवा के रूप में जया नें कविता के रूप में अपनी भूमिका निभाई है. साथ ही नासिर, अनुपम श्याम,कोल्लम थुलसी, चिन्नी जयंत, बिन्दू पणिक्कर, वैडिवुकरासी, दिल्ली कुमार, श्रिया रेड्डी, पीयूष मिश्रा नें भी यादगार भूमिका निभाई हैं.

फोर-जी (4G)

https://www.youtube.com/watch?v=zl-uQ-XNZwo&feature=emb_title

महेश बाबू और किआरा अडवाणी की लव स्टोरी और एक्शन से भरपूर इस फिल्म में वह सब कुछ है जिसे आप देखना चाहतें हैं. साउथ की फिल्मों की खासियत लिए हिंदी में डब की गई यह एक्शन मूवी Full HD में यूट्यूब पर देखी जा सकती हैं.

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मरते हैं शान से (Marte Hai Shaan Se)

इस फिल्म के निर्देशक हरि और निर्माता बी भारती रेड्डी हैं. फिल्म में विशाल, प्रभू, मुख्ता, नाधिया, नासर, विजय कुमार नें मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं. फिल्म की कहानी हरी नें लिखी है और छायांकन प्रियान नें किया हैं. फिल्म का हीरो विशाल शांतिपूर्ण ढंग से परिवारों के बीच होने वाले संघर्ष को सुलझाने की कोशिश करता है, इसमें उसे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. फिल्म की कहानी शुरू से अंत तक दर्शकों को बांधे रखने वाली हैं.

प्लेयर एक खिलाड़ी (Player Ek Khiladi)

तमिल भाषा की फिल्म अरामबम को “प्लेयर एक खिलाड़ी” (Player Ek Khiladi) के नाम से हिंदी में डब  किया गया है यह एक एक्शन थ्रिलर फिल्म है जो विष्णुवर्धन के  निर्देशन में बनीं है. फिल्म के निर्माता रघुराम हैं और लिखा हैं सुभा नें इस फिल्म में अजिथ कुमार, आर्या, नयनतारा और तापसी पन्नू मुख्य भूमिकाओं में हैं. किशोर, राणा दग्गुबाती, अक्षरा गुड्डा नें भी यादगार भूमिकाएं की हैं। यह फिल्म 31 अक्टूबर 2013 को रिलीज़ हुई थी.

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जानें इस Lockdown में बच्चों संग कैसे समय बिता रहे हैं ये बौलीवुड एक्टर्स

बौलीवुड में तमाम ऐसे एक्टर्स, डायरेक्टर्स, और तकनीशियन्स हैं जिनके पूरे साल का शेड्यूल बहुत व्यस्त होता है. ऐसे यह अपने बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं जिसका मलाल इनको और इनके बच्चों को बना रहता है. लेकिन इस LOCKDOWN में बौलीवुड में सभी एक्टर्स, डायरेक्टर्स, और तकनीशियन्स पास न केवल पर्याप्त समय है रद्द किए गए शेड्यूल के कारण, व्यस्त बौलीवुड हस्तियों के पास मजेदार गतिविधियों के लिए पूरा समय भी है. ये लोग अपने बच्चों को पूरा समय देनें के साथ जम का मस्तियाँ भी कर रहें हैं. वालीवुड से जुडी ऐसी तमाम हस्तियाँ हैं जो अपने बच्चों के साथ बिताये जा रहे पलों की तस्वीरें और वीडियोज अपने सोसल मीडिया एकाउंट पर अपलोड करते रहतें हैं. इनमें से कुछ एक्टर्स और डायरेक्टर्स ऐसे हैं जो इस LOCKDOWN को बच्चों के साथ स्पेशल बना रहें हैं. हम ऐसे ही कुछ सेलिब्रिटीज से आप को रूबरू करा रहें हैं जो अपने बच्चों के साथ फुल मस्ती में नजर आ रहें हैं.

शिल्पा शेट्टी…

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एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी कुंद्रा (Shilpa Shetty Kundra) नें सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहतीं हैं और वह हर रोज अपने एक्टिविटी से जुड़े पोस्ट शेयर करती रहतीं हैं. इस LOCKDOWN के दौरान वह हर रोज अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर वीडियोज शेयर करती रहतीं है. जिसमें वह कोरोना से बचाव के सन्देश के साथ स्वस्थ्य रहने की टिप्स, और वर्क आउट के टिप्स भी देतीं नजर आती हैं. इसके अलावा वह अपने बेटे वियान के साथ किये जा रहे मस्ती भरे पलों की तस्वीरें और वीडियोज भी शेयर करती रहतीं हैं. इसी कड़ी में शिल्पा शेट्टी नें अपने बेटे वियान राज कुंद्रा (Viaan Raj Kundra) के साथ मस्ती भरे कई वीडियो शेयर कियें हैं. शिल्पा ने शेयर किया है जिसमें वियान अपनी मम्मी के पैर का मसाज कर रहा है और ढेर सारी बातें भी कर रहा है.

 

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It’s a dichotomy of emotions. I am concerned about what’s happening around us while we are hoping and praying for the situation to get better across the world, I’m also valuing and spending extra time with Viaan every day. We spent this morning creating these little love notes for each other. I genuinely value these moments. We are crafting memories, are you? These are challenging times. You too can take up this #CraftingMemories challenge and make this time memorable for your kids! ~ Today, I’m grateful for this time that I can spend with my child and I pray that may all the children in pain and suffering be blessed with love . . . . . . . @indiacraftingmemories @fevicreate @momspresso #CraftingMemories #Gratitude #MomSonTime #20DaysOfGratefulness #Day6

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इस वीडियो पर शिल्पा ने एक बड़ा सा कैप्सन भी लिखा है जिसकी कुछ लाइनें इस प्रकार हैं ” मुझे नहीं पता था कि मेरी माँ यह शूट कर रही थी… लेकिन वह इस तरह के एक अनमोल क्षण को कैप्चर करने में सफल रही. इस वीडियो को देखकर मुझे यह एहसास हुआ कि बच्चे पैदा करना एक आशीर्वाद है.
शिल्पा शेयर किये गए एक दूसरे वीडियो में वियान के साथ क्राफ्ट मेकिंग करती नजर आ रहीं हैं इसके कैप्सन  में उन्होंने लिखा है की ये चुनौतीपूर्ण समय हैं, आप भी इस #CraftingMemories चुनौती को उठा सकते हैं और अपने बच्चों के लिए इस समय को यादगार बना सकते हैं. आज, मैं इस समय के लिए आभारी हूं कि मैं अपने बच्चे के साथ बिता सकती हूं @indiacraftingmemories #CraftingMemories #MomSonTime. इसके अलावा शिल्पा ने बेटे वियान के साथ वर्कआउट का एक वीडियो कोलाज भी शेयर किया है.

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करण जौहर…

 

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Well #tiedye or #holi you decide? #lockdownwiththejohars #toodles

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High tea with @hiroojohar ! #lockdownwiththejohars

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There is someone who can take away the #coronavirus

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करण जौहर अपने दोनों जुड़वा बच्चों यश ( Yash) और रूही (Ruhi) जौहर बच्चों के साथ फुल मस्ती में नजर आ रहें हैं इस लॉक डाउन के दौरान उन्होंने बच्चों के साथ मस्ती भरे कई वीडियोज शेयर किये हैं एक वीडियोज में करन के बच्चे कपड़ों के साथ मस्ती कर रहें है तो इसके अलावा उन्होंने इस लॉक डाउन के दौरान अपने बच्चों के खाने-पीने से लेकर खेलने और नाराज होने के दर्जनों वीडियोज शेयर किये हैं.

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नेहा धूपिया…

 

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MOOD …. #day10 #lockdown #lockdownlove

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नेहा धूपिया इन दिनों अपनें ही घर में सेल्फ क्वारंटाइन में हैं उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक बहुत ही खुबसूरत इमेज शेयर की है. जिसमें वह और उनकी बेटी मेहर के साथ पति अंगद बेदी दिखाई दे रहे हैं. उनकी बेटी मेहर खिलौनों से खेल रही है और उनके पति बेटी के पास सोफे पर लेटे हैं. नेहा नें शेयर किये गए इस तस्वीर के साथ अपने कैप्सन में लिखा है #lockdown #lockdownlove  जिस उन्हें यूजर्स से ढेर सारी प्रतिक्रियाएं भी मिल रहीं हैं.

सोहा अली खान…

 

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Confined to our columns and rows #neveracrossword Day 4

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House party Day 6 #lockdown

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लौकडाउन के दौरान अपने घर से सोहा अली खान नें  बेटी इनाया संग बिताये जा रहें अनमोल क्षणों में से कुछ चुनिन्दा तस्वीरें शेयर की हैं. एक तस्वीर में उनकी बेटी इनाया टेडी वियर के साथ बैठी नजर आ रही हैं. तो दूसरे में बेटी के साथ शेयर तस्वीर के कैप्सन के साथ लिखा है columns and rows #neveracrossword Day 4.

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सनी लियोन…

सनी लियोन (Sunny Leone) भी अपने पति  डेनियल और अपनें तीनों बच्चों निशा, अशर और नोआह के साथ सेल्फ क्वारंटाइन में हैं. ऐसे में वह घर पर रहते हुए पति और बच्चों के साथ इंज्वाय कर रहीं हैं. सनी नें अपने बच्चों का दौड़ लगाते हुए एक वीडियों शेयर करते हुए कैप्सन में लिखा हैं “भगवान का शुक्र है कि मेरे बच्चे आसानी से मनोरंजन कर रहे हैं” (Thank the Lord my kids are easily entertained. Running up and down until they were tired! Tired toddlers = good nights rest! @dirrty99).

काजोल…

 

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About tomorrow..

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काजोल (Kajol) ने अपने बेटे युग देवगन के साथ एक वीडियो रिकार्ड कर शेयर किया और कहा की “हम अक्सर यह कहतें हैं की काश हमारे पास वक्त होता, हमारे बच्चों के साथ बैठने का , हमारे माँ बाप के साथ बैठने का, और हमेशा सोचते हैं काश ये होता काश हमारे पास कुछ नहीं होता करनें के लिए. अब हमारे पास ये वक्त है और वजह भी है तो गाइड प्लीज प्लीज सबके लिए घर के अन्दर रहें और सफाई रखें. वीडियो के का अंत युग नें धन्यवाद बोल कर किया है.

लिसा रे…

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कैंसर से जीतने वाली सुपर मौडल और अभिनेत्री 2018 में सैरोगेसी की मदद से जुड़वा बच्चों की मां बनी लिसा रे (Lisa Ray) ने भी भी अपने जुड़वा बेटियों की तस्वीर इंस्टाग्राम शेयर किया है. और उन्होंने सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने की अपील भी की है.

#lockdown: बंदी की कगार पर मध्यम और छोटे कारोबारी

लौक डाउन की वजह से डूबते कारोबारी जगत को अब सरकार से ही राहत की उम्मीद है. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार को जरूरी एहतियात के साथ कारोबार जगत को पटरी लाने के लिए सतर्कता बरतते हुए उपाय करना चाहिए और कारोबारियो की मदद करनी चाहिए.

देश मे कारोबार और कारोबारियों की हालत बहुत  खराब है. नोटबंदी और जीएसटी की गलत नीतियों से कारोबार जगत उबर भी नही पाया था कि “करोना” और ”लौक डाउन” से कारोबार और भी अधिक टूट गया अब यह बंदी के कगार पर पहुच गया है.

लखनऊ की युवा कारोबारी रोली सक्सेना ने 3 साल पहले गारमेंट्स का अपना बिजनेस शुरू किया. अपनी छोटी सी दुकान को बड़े शो रूम में बदला दिया. 40 हजार रुपये के किराए पर एक जगह लेकर शॉप शुरू की. अचानक नोटबन्दी और जीएसटी की वजह से कारोबार में काफी उथलपुथल आ गई. वो किसी तरह से इन हालातों को संभाल रही थी.

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इसी बीच जब ‘करोना’ और ”लौक डाउन” का समय आया तो कारोबार पूरी तरह बन्द हो गया. दुकान के मालिक ने 40 हजार रुपये किराए की मांग की. रोली ने किराया देने का तो तय कर लिए पर यह सोच लिया कि अब यह कारोबार नहीं करेगी. रोली कहती है “सरकार कारोबारियों को हालात समझती है. उसे इनकी मदद का कोई एक्शन प्लान तैयार करना चाहिए वरना हमारे जैसे ना जाने कितने कारोबारी कारोबार बंद कर सड़क पर आ जायेंगे.”.

छोटे कारोबारियों के लिए राहत पैकेज दे सरकार : संदीप बंसल

अखिल भारतीय उधोग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप बंसल ने कहा है कि “देश और प्रदेश की सरकार को उन कारोबारियों की चिंता करनी चाहिए जो माध्यम वर्ग के है और आवश्यक सेवाओ का कारोबार नही करते है. यह व्यापारी ऐसी किसी भी सरकारी राहत योजना में भी नही आते जिससे उनको सरकार की मदद मिल सके.”.

कारोबारी नेता संदीप बंसल ने कहा कि “होली के समय से ही इन सबका कारोबार नही चल रहा है. यह अपने खर्चे और कर्मचारियों के वेतन का इंतजाम तभी कर सकते है जब इनकी दुकानें खुले. जब तक इन कारोबारियों की दुकानें नही खुल रही तब तक यह खुद भुखमरी के कगार पर है.”

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संदीप बंसल ने कहा कि “जो बड़े कारोबारी है और सक्षम है वो प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री राहत कोष में पैसा दे रहे है. तमाम व्यपारी जनता को खाना खिलाने और दूसरी मदद का काम भी कर रहे है. इसके बाद भी देश मे करोड़ो ऐसे व्यपारी है जो रोज कमाने औऱ खाने वाले है. सरकार के पास ऐसे कारोबार और उसको करने वाले लोगो के लिए कोई योजना नहीं है. यह व्यपारी अपने व्यपार के बन्द होने की हालत से परेशान है और उनकी समझ मे नही आ रहा कि कैसे हालात का मुकाबला करे. सरकार से यह लोग भी राहत की उम्मीद कर रहे है.”.

#Lockdown: डिजिटल बन रहा है सहारा, सब्सक्रिप्शन में आई तेजी

कोरोना महामारी के चलते लोग अपने घरों में कैद होकर रह गयें हैं. इस दौर में लोगों के सामने देश दुनियाँ की खबरों पर नजर रखने के साथ ही मनोरंजन के साधनों पर भी ग्रहण लग चुका है. सरकार भले ही अखबार पत्रिकाओं के छपने पर पाबन्दी न लगाने की बात कर रही हो लेकिन आवागमन के साधनों पर पाबन्दी लगने के चलते अखबार पत्रिकाओं सर्कुलेशन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. वहीँ सोसल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रख कर सिनेमाहालों के खुलने पर लगाए गए पाबन्दी नें नई फिल्मों की रिलीजिंग को भी लटका रखा है. टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक शूटिंग बंद होने से रिपीट टेलीकास्ट हो रहें हैं. बार-बार रिपीट हो हो रहे धारावाहिकों को देख कर लोग अब ऊबनें लगें हैं. ऐसे में अब लोग डिजिटल प्लेटफार्म पर पैसे खर्च कर मनोरंजन के साधनों की तलास करने के साथ ही पत्रिकाओं और अख़बारों को सब्सक्राइब कर रहें हैं.

पत्रिकाओं और अखबारों के साथ ऑनलाइन मूवी दिखाने वाले प्लेटफार्म पर यूजर्स की संख्या में आया उछाल

लोग घर बैठे खबरों और कहानियों को पढने के साथ ही देश दुनियां पर नजर रखने के लिए अब पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफार्म पर निर्भर नजर आ रहें हैं. जिससे मनोरंजन मिलनें के साथ ही अपडेट जानकारियां भी मिल पा रहीं हैं. डिजिटल प्लेटफार्म पर बढ़ रहे खर्चों को देखते हुए बीते कुछ दिनों से पत्रिकाओं और अखबारों नें पाठकों के लिए मुफ्त सेवा पर पाबंदियां लगा दिया है. और मामुली शुल्क पर लोगों को मासिक और वार्षिक आधार पर सब्सक्राइब करने का ऑफर दे रहें हैं. जिसे सब्सक्राइब कर पाठक पूरी तरह से उस डिजिटल प्लेटफार्म का उपयोग पढ़ने के लिए कर सकतें हैं.

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दिल्ली प्रेस के पत्रिकाओं की अगर बात की जाए तो LOCKDOWN के दौरान इसके डिजिटल प्लेटफार्म पर पाठकों की संख्या में तेजी से उछाल आया है. दिल्ली प्रेस अभी भी सरस सलिल और गृहशोभा के डिजिटल प्लेटफार्म को पाठकों के लिए मुफ्त में पढने के लिए उपलब्ध करा रखा है. केवल सरिता डिजिटल के लिए मासिक और वार्षिक आधार पर मामूली शुल्क लिया जा रहा है. जिसे लोग पैसे खर्च कर न केवल सब्सक्राइब कर रहें हैं बल्कि पढ़ने के लिए पूरा समय भी दे रहें हैं.

इन डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिये लोग बेहतरीन वेब सीरीज और नई फिल्मों का लुत्फ तक उठा रहे हैं. इस समय लोग टीवी की जगह नेटफ्लिक्स, एमजॉन प्राइम, वूट, जी 5 जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पैसे खर्च कर फिल्मों का मजा ले रहें हैं. इसके अलावा एमजॉन और नेटफ्लिक्स पर वायरस से जुड़ी फिल्मों को दिखाए जाने की होड़ मची हुई है. जिसे देखने के लिए दर्शक पैसे खर्च करनें में ज़रा भी पीछे नहीं हैं यही कारण है. जिससे इनके सब्स्क्रिबर्स की संख्या में भारी इजाफा देखने को मिल रहा है.

डिजिटल प्लेटफौर्म के सस्ते प्लान का उठाएं लाभ नहीं तो चुकता करने होंगे अधिक पैसे

अक्सर यह देखा जाता की जब किसी चीज की मांग में बढ़ोतरी होती है तो उसके रेट भी बढ़ जातें हैं. लेकिन इन सबसे इतर डिजिटल प्लेटफार्म के जरिये लोगों को खबरें, कहानियाँ, लेख, वेबसीरीज, कराने वाले लोगों नें अपने सब्स्क्रिप्सन शुल्क में भारी कटौती की है. लॉक डाउन के दौरान सिनेमा के साथ-साथ अख़बार और पत्रिकाओं के सबस्क्रिप्सन शुल्क में भारी कमी देखने को मिल रही है. लोगों को खबरें,कहानियाँ और मूवी दिखाने वाले डिजिटल प्लेटफार्म से जुड़े लोगों का कहना है की वह इस लॉक डाउन में कम पैसे में लोगों का मनोरंजन करने और अपडेट ख़बरें पहचानें के लिए संकल्पबद्ध हैं जिसका लाभ लोगों को उठाना चाहिए.

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दिल्ली प्रेस की सर्वाधिक पसंद की जाने वाली पत्रिका सरिता ने भी स्पेशल ऑफर का प्लान अपने पाठकों के लिए जारी किया. इस प्लान के तहत पाठक को साल भर के लिए 600 रूपये की जगह केवल 149 रूपये और एक महीने के लिए 50 रूपये की जगह मात्र 29 रूपये सब्सक्राइब करने के लिए खर्च करनें होंगे. सबस्क्राइब करने के बाद सरिता अपने सभी लेख और कहानियां सबस्क्राइब करने वाले पाठक के लिए मुहैया कराता है. कई अखबारों ने अपने डिजिटल प्लेटफार्म पर भी अपने सब्स्क्रिप्सन शुल्क में भारी कटौती की है.

इसी के साथ डिजिटल प्लेटफार्म पर पैसे खर्च कर मूवी देखने वालों की संख्या में भी इजाफा देखने को मिल रहा है इसका एक कारण शुल्क लेकर डिजिटल प्लेटफार्म के जरिये मूवी और वेबसीरीज दिखाने वाली वेबसाइटों द्वारा भारी कटौती किया जाना भी है.

अगर आप भी हो रहें हो बोर तो आज ही करें सबस्क्राइब

अगर आप भी लौक डाउन (LOCKDOWN) में घर बैठे बोर हो रहें हैं तो बेहतरीन कहानियों और लेखों के साथ ही मन पसंद मूवी, वेबसीरीज देखनें के लिए डिजिटल प्लेटफार्म का सहारा ले सकतें हैं और इस लौक डाउन में दिए जा रहे औफर का लाभ उठा सकतें हैं.

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स्वरा भास्कर ने दिया पीएम की अपील पर रिएक्शन, ट्रोल करते हुए यूजर्स ने पार की हदें

फिल्म अभिनेत्री स्वरा भास्कर हर वाजिब मुद्दे पर खुल कर बोलनें वालों में शुमार हैं. भले ही उन्हें इसके लिए आलोचना का समाना क्यों न करना पड़े. लेकिन वह इन चिंताओं से दूर अपनी भावनाएं सोशल मीडिया पर खुल कर जाहिर करती रहतीं हैं. अब उन्हें अपने ट्विटर एकाउंट पर कोरोना को लेकर किये गए एक प्रतिक्रिया को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.

पीएम ने की थी ये अपील…

स्वरा नें यह प्रतिक्रिया प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के उस अपील पर दी है. जिसमें उन्होंने 5 अप्रैल यानी रविवार की रात 9 बजे सभी लोगों से घर की लाइट बुझाकर 9 मिनट तक दिए, मोमबत्ती जलाने और मोबाइल के फ्लैश लाइट को जलाने का आग्रह किया है. इसके पहले भी प्रधानमन्त्री नरेद्र मोदी नें 22 मार्च को कोरोना संकट में एक जुटता के लिए शाम 5 बजे ताली-थाली बजाने का आह्वान किया था. जिस पर आम जनता से लेकर सेलेब्रेटी नें बखूबी अमल किया था.

स्वरा ने किया ये कमेंट…

स्वरा भास्कर नें प्रधानमंत्री के इसी अपील पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. स्वरा नें अपने ट्विटर एकाउंट पर एक पोस्ट कर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा है “थाली बजाएंताली बजायेंदिये जलाएंटॉर्च चलाएं सब करें.. बस याद रखें कि अस्पतालों में डॉक्टरनर्सेज़ और मेडिकल कर्मचारी हैं जिन्हें इन प्रदर्शन से ज़्यादा ग्लवमास्क इत्यादि अपनी सुरक्षा की सामग्री चाहिए अपनी जान बचाने के लिए ताकि वो #corona से देश को बचा पाएँ! #DocsNeedGear”. 

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यूजर्स ने किया जमकर ट्रोल…

स्वरा के इस प्रतिक्रिया के बाद यूजर्स हाथ धोकर उनके पीछे पड़ गयें हैं. ट्विटर पर दिए गये इस प्रतिक्रिया पर उन्हें जमकर गालियां भी मिल रही है लेकिन स्वरा इस सबसे बेफिक्र है.

प्रणव महाजन (Pranav Mahajan) नाम के एक यूजर्स “आपसे विनर्म अनुरोध है कि आप कुछ दिन के लिए social media से self quarantine हो जाएं. देश को बचाने में यही आपका सहयोग होगा”

स्वरा भास्कर के इस प्रतिक्रिया पर यूजर्स नें जो ट्रोल किये उसमें तो कई नें निहायत ही घटिया किस्म का कमेन्ट किया है. आप इसी से अंदाज लगा सकतें हैं की स्वरा के इस प्रतिक्रिया पर 8 हजार से अधिक लोगों नें ट्रोल किया है और कई नें तो बहुत ही अश्लील और गंदे मीम्स भी दिए हैं.

वाजिब है स्वरा का सवाल…

लेकिन प्रधानमन्त्री के दिए जलाने वाली अपील पर स्वरा द्वारा दी गई प्रतिक्रिया भी वाजिब हैं क्यों की देश के अधिकांश स्वास्थ्यकर्मी कोरोना से बचाव में काम आने वाली किट की भारी कमी से जूझ रहें हैं. ऐसे में प्रधानमन्त्री द्वारा स्वास्थ्य कर्मियों के सुरक्षा पर सवाल उठाना वाजिब भी है क्यों की डॉक्टर से लेकर नर्सेज तक अपनी जान जोखिम में डाल कर कोरोना पीड़ितों का इलाज करनें में लगें हैं.

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