#coronavirus: मानवता हुवी शर्मसार, एम्बुलेंस के अभाव में बच्चे ने तोड़ा दम

बिहार राज्य अंतर्गत जहानाबाद जिला से एक दिल दहलाने वाली घटना प्रकाश में आयी है.जहानाबाद सदर अस्पताल ने एम्बुलेंस मुहैया नहीं कराया इसकी वजह से एक तीन वर्षीय बच्चे की मौत हो गयी. बताया जाता है कि उक्त बच्चे का ईलाज पहले कुर्था स्वास्थ्य केंद्र पर किया गया.लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो सका.सदर अस्पताल जहानाबाद के लिए यहाँ से रेफर किया गया .जब एम्बुलेंस की मांग की गयी तो नहीं मिल सका. बच्चे के माता पिता किसी तरह औटो रिक्शा से सदर अस्पताल जहानाबाद ले गए.वहाँ से इस बच्चे को पटना पी एम सी एच के लिए रेफर कर दिया गया.

बच्चे के माता पिता ने एम्बुलेंस के लिए बहुत आग्रह किया लेकिन पदाधिकारियों द्वारा मुहैया नहीं कराया गया.थक हारकर माता पिता बच्चे को गोद में लेकर पैदल चल दिये.उम्मीद थी कि शायद कहीं प्राइवेट गाड़ी मिल जाय लेकिन गाड़ी नहीं मिल सकी. सड़क पर चलते चलते माँ के गोद में ही बच्चा ने दम तोड़ दिया.माँ बाप चीख चीख कर सड़क पर ही बैठकर रोने लगे. बच्चे के मृत्यु के बाद सदर अस्पताल पुनः आकर एम्बुलेंस की माँग की लेकिन नहीं मिल सका. मजबूर होकर बच्चे के शव को गोद में उठाये पैदल ही रोते बिलखते चल दिये.एक आदमी को दया आयी उसने अपने निजी गाड़ी से इनलोगों को घर तक पहुँचाया .

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बच्चे के पिता गिरजेश कुमार ने बताया कि अगर मुझे एम्बुलेंस उपलब्ध कराया जाता तो मेरे बच्चे की जान नहीं जाती.जब यह मामला तूल पकड़ा तो डी एम नवीन कुमार ने हॉस्पिटल मैनेजर को सस्पेंड कर दिया और सिविल सर्जन से जवाब तलब किया है.दो डाक्टर और चार नर्स पर कार्यवाई हेतु स्वास्थ्य विभाग को डी एम ने पत्र लिखा है.

कोरोना वायरस के बीच बढ़ते संक्रमण के बीच यह मामला बिहार सरकार की तैयारी का पोल खोलकर रख दिया है.

बिहार के सभी प्रखण्ड स्तरीय अस्पतालों में ओ पी डी सेवा बन्द कर दी गयी है.सर्दी खाँसी और बुखार अगर किसी को है तो उसे बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जा रहा है.लेकिन उसे एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है.लॉक डाउन की वजह से प्राइवेट गाड़ी नहीं मिल पा रहा है.लोग मजबूर हैं.

ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत सारे ऐसे मरीज हैं जिनका ईलाज राजधानी के अस्पतालों से चलता है.उनलोगों के पास दवा समाप्त हो गयी है.लोकल बाजारों में वे दवाएँ उपलब्ध नहीं है.नवल सिंह ने बताया कि मेरा हर्ट की दवा पटना के डॉक्टर के देख रेख में चलता है.दवा समाप्त हो गयी है.गाड़ी पटना नहीं आ जा रही है.उन्होंने बताया कि सिर्फ मेरे बस्ती के आठ लोगों का ईलाज पटना से चलता है.लगभग सभी लोगों के पास दवा समाप्ति के कगार पर है.

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लोगों के बचाव और सुरक्षा के लिए लौक डाउन रखा जाय लेकिन इस तरह के मरीजों का ख्याल भी रखा जाय कि जिनका जीवन दवा पर ही आधारित है.उनका जीवन कैसे चलेगा.

लौक डाउन की वजह से वे कोरोना से नहीं पहले से चल रहे दूसरे बीमारी के ईलाज और दवा के अभाव में लोग दम तोडने लगेंगे.

दूसरी शादी जुर्म है!

पेशे से वीडियोग्राफर 32 वर्षीय सुरेंद्र सिंह दांगी मूलत: सीहोर जिले का रहने वाला था और नौकरी के सिलसिले में भोपाल के शंकराचार्य नगर में किराए के मकान में रहता था. शादीविवाह में वीडियोग्राफी से उसे खासी कमाई हो जाती थी. लेकिन दूसरों की खुशियों के माहौल को कैमरे में कैद करने वाले सुरेंद्र सिंह की अपनी जिंदगी नर्क जैसी बनी हुई थी.

पहली बीवी की मौत के बाद उस ने अपने गांव दोराहा की ही एक लड़की सविता (परिवर्तित नाम) से शादी कर ली थी. जिस से 2 साल पहले उसे एक बेटी भी हुई थी. बेटी हुई तो सुरेंद्र को मानो जीने का मकसद मिल गया, लेकिन वह चाह कर भी पहली बीवी को नहीं भूल पा रहा था.

इस पर आए दिन उस की तनातनी सविता से होने लगी थी. अंतत: नाराज सविता उसे अकेला छोड़ कर बेटी को ले कर मायके चली गई तो तनाव में जी रहे सुरेंद्र ने बीते 1 अक्तूबर को फांसी का फंदा लगा कर जान दे दी.

मरने से पहले उस ने अपने सुसाइड नोट में सविता को लिखा कि मैं तुम्हें इतना प्यार करता हूं कि कभी सही और गलत का फैसला नहीं कर पाया. अब मुझे पता चला है कि तुम ने कभी मुझे प्यार ही नहीं…मैं तुम से नफरत करता हूं.

केस्सा-2

56 साल के सुरेश सिंह भोपाल के ही कमलानगर इलाके में रहते थे. वे केंद्र सरकार के एक महकमे के मुलाजिम थे. सुरेश की पहली बीवी सीमा की मौत सन 2002 में हो गई थी, जिस से उन्हें एक बेटा भी था. साल 2004 में उन्होंने दूसरी शादी कर ली थी. दूसरी बीवी का नाम भी इत्तफाक से सीमा ही था.

शादी के बाद से ही इन मियांबीवी में खटपट होने लगी थी. सीमा का दुखड़ा यह था कि शौहर के पास खासी जायदाद और पैसा है, जिस में से वे उसे कुछ नहीं दे रहे. सुरेश बेटे पर ज्यादा ध्यान देते थे जो जबलपुर के एक इंजीनियरिंग कालेज में पढ़ रहा था.

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सीमा आए दिन पति से पैसा और जायदाद अपने नाम कर देने की जिद पर अड़ी रहती थी. जैसे ही उसे पता चला कि सुरेश ने अपने जीपीएफ की 80 फीसदी रकम पहली बीवी से पैदा हुए बेटे के नाम कर दी है तो वह मारे गुस्से के आपा खो बैठी और भोपाल आ कर उन से झगड़ने लगी.

ऐसे ही एक झगड़े में उस ने बीती 28 अगस्त की अलसुबह शौहर की हत्या कर दी और अपना जुर्म छिपाने के लिए पड़ोसियों से यह बताया कि सुरेश की मौत सांप के काटने से हुई है. लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह साफ हो गया कि सुरेश की मौत गला दबाने से हुई थी. आखिर सीमा को अपना जुर्म स्वीकार करना पड़ा. पुलिस हिरासत में होते हुए भी वह पति पर ये आरोप लगाती रही कि उस ने उसे पाईपाई का मोहताज बना दिया था और जायदाद में से कुछ नहीं दिया था.

इन दोनों ही मामलों में मर्दों ने दूसरी शादी की थी, जोकि कतई गुनाह नहीं था. लेकिन एक बड़ी दिक्कत यह थी कि दूसरी बीवी से इन की पटरी नहीं बैठी थी. इस की एक अहम वजह यह भी थी कि ये दोनों पहली बीवी को भूल नहीं पा रहे थे और पहली बीवी की चाहत को अलग तरीके से जाहिर कर रहे थे. सुरेश अपने बेटे से लगाव के जरिए तो सुरेंद्र पहली बीवी की यादों के सहारे.

गुनाह या गलती

यह एक गलती थी, क्योंकि दूसरी बीवी कतई नहीं चाहती कि उस का शौहर उस का ध्यान न रख कर किसी भी तरह पहली बीवी को इतना याद करता रहे कि उसे अपनी अहमियत दोयम दरजे की और जिस्मानी जरूरत पूरी करने की गुडि़या सरीखी लगने लगे. ऐसे में उन्होंने वही किया, जो ज्यादा से ज्यादा वे कर सकती थीं. सविता अपने जज्बाती शौहर को अकेला छोड़ कर मायके चली गई तो सीमा ने पति का काम ही तमाम कर डाला.

ये मामले तो वे थे, जिन में शौहर की पहली बीवी मर चुकी थी पर उन मामलों में भी जिंदगी दुश्वार हो जाती है जब शौहर पहली बीवी से तलाक ले कर दूसरी शादी करता है और बारबार उस का जिक्र दूसरी बीवी से कर के उसे नीचा दिखाने की कोशिश करता रहता है. ऐसे में दूसरी का कलपना कुदरती बात है.

एक दास्तां

भोपाल के ही एक सरकारी स्कूल की 44 वर्षीय टीचर निर्मला (बदला नाम) का कहना है कि उस की उम्र 40 साल की थी, जब उस ने एक सरकारी मुलाजिम नरेश (बदला नाम) से शादी की थी. नरेश का अपनी पहली बीवी से तलाक हुआ था. चूंकि निर्मला की उम्र बढ़ रही थी, इसलिए घर वालों ने तलाकशुदा से उस का रिश्ता तय कर दिया था.

बकौल निर्मला शादी के 2 साल तो ठीकठाक गुजरे. इस दौरान अकसर नरेश पहली बीवी के बारे में बताता रहता था कि वह कितनी झगड़ालू, जालिम, बेगैरत और बिगड़े चालचलन की थी, जिस के चलते उस की जिंदगी नर्क बन गई थी. शौहर की आपबीती सुन कर निर्मला को उस से हमदर्दी होती थी और वह हर मुमकिन कोशिश करती थी कि उसे इतना प्यार दे कि वह पहली बीवी और ज्यादतियों को भूल जाए.

भले ही निर्मला की शादी देर से हुई थी, पर शादीशुदा जिंदगी को ले कर उस के अपने अरमान और ख्वाहिशें थीं. दोनों की पगार अच्छी थी, इसलिए वह चाहती थी कि वह और नरेश अच्छी जिंदगी जिएं. प्यारमोहब्बत की बातें करें, गृहस्थी जमाएं और घूमेंफिरें. पर नरेश अकसर पहली बीवी की कहानी ले कर बैठ जाता था, जिस से कुछ ही दिनों में उसे खीझ होने लगी थी.

इस बाबत उस ने शौहर को समझाया कि जो हुआ उसे भूल जाओ, अब क्या फायदा. अब क्यों न हम नए सिरे से जिंदगी शुरू करें. लेकिन नरेश अपने गुजरे कल से बाहर नहीं आ पा रहा था, जिस से आए दिन कलह होने लगी. जब भी निर्मला रोमांटिक और सैक्सी मूड में होती थी और नरेश को लुभाती थी, तब वह पहली बीवी का पुराण खोल कर बैठ जाता था, जिस से उस का मूड औफ हो जाता था.

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निर्मला ने अपनी तरफ से ईमानदारी से कोशिश की थी, लेकिन यहां नरेश गलती करते अनजाने में उस से ज्यादती कर रहा था. वह बीवी के जज्बातों, जरूरतों, ख्वाहिशों और अरमानों को समझ ही नहीं पा रहा था. ऐसे में एक दिन निर्मला ने गुस्से में कह ही दिया कि जब उसे नहीं भूल पा रहे तो मुझ से शादी क्यों की.

इस से नरेश की मर्दानगी को ठेस लगी और वह यह सोचते हुए फिर मायूस रहने लगा कि पहली बीवी ने तो ज्यादती की ही थी, अब दूसरी भी उसे नहीं समझ रही. उस की नजर में दूसरी बीवी की जिम्मेदारी यह थी कि वह अपने अरमानों का गला घोंट कर उस की रामायण सुनती रहे, तभी अच्छी है.

दरअसल, होता यह है कि अकसर मर्द की दूसरी शादी उस औरत से होती है जो पहली बार शादी करती है. इसलिए उस की ख्वाहिशें अलग होती हैं जबकि इस के उलट शौहर के लिए यह नई बात नहीं होती. दूसरी बीवी उस के लिए जिस्मानी जरूरत पूरी करने का जरिया भर होती है, जिस से वह उसे समझ नहीं पाता और दूसरी शादी भी टूटने के कगार पर पहुंच जाती है. समाज और परिवार के दबाव के चलते न भी टूटे तो दोनों एक छत के नीचे अजनबी बन कर रह जाते हैं.

शौहर और बीवी दोनों यह सोच कर जिंदगी का लुत्फ नहीं उठा पाते कि शादी कर के आखिर उन्हें क्या मिला.

शौहर ध्यान दें

अगर मर्द दूसरी शादी करे तो एक अच्छी और नई जिंदगी के लिए यह जरूरी है कि वह इन बातों पर ध्यान दे-

दूसरी बीवी केवल सैक्स जरूरतें पूरी करने का जरिया नहीं है, यह सोच कर उसे ही सब कुछ माने और उस की ख्वाहिशों और अरमानों को पूरा करने की कोशिश करने की कोशिश करे.

यदि पहली बीवी के बच्चे हों तो दूसरी बीवी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, उसे उस के तमाम हक देना जरूरी है.

उस के सामने बारबार पहली बीवी की याद या जिक्र नहीं करते रहना चाहिए, इस से उसे खीझ ही होगी.

अगर पहली बीवी से औलाद है तो उसे शादी के बाद किसी भरोसेमंद रिश्तेदार के यहां या फिर हौस्टल में रखने की कोशिश करनी चाहिए. लेकिन बीवी उस का पूरा ध्यान रखे तो ऐसा करना जरूरी भी नहीं और इस बाबत उस का शुक्रगुजार होना चाहिए.

अगर उम्र 40 के लगभग हो जाए और बच्चे 8-10 साल के हों तो दूसरी शादी करने से बचना चाहिए. आमतौर पर दूसरी बीवी उतना ध्यान बच्चे का नहीं रख पाती, जितनी यानी सगी मां की तरह उस से उम्मीद की जाती है.

खुद को दूसरी बीवी के मुताबिक ढालने की कोशिश करना चाहिए.

उस की जरूरतों और पैसों का पूरा खयाल रखना चाहिए.

जरूरी नहीं कि हर दूसरी शादी नाकाम हो, लेकिन इस के लिए जरूरी है कि पतिपत्नी दोनों मिल कर नई जिंदगी को खुशनुमा बनाएं. इसलिए बीवी को भी चाहिए कि वह शौहर को इस बात का अहसास न कराए कि उस ने दूसरी शादी कर के उस पर कोई अहसान किया है.

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पहली बीवी को ले कर शौहर पर ताने मारते रहना भी अक्ल की नहीं, बल्कि कलह को न्यौता देने वाली बात है.

दूसरी बीवी को कोशिश यह करनी चाहिए कि वह धीरेधीरे पति का दिल जीते और उसे पुरानी जिंदगी से बाहर निकलने में मदद करे. बेशक यह बेहद कठिन और सब्र वाला काम है, लेकिन बिना इस के शादी कामयाब भी नहीं होती.

Lockdown में भोजपुरी क्वीन रानी चटर्जी ने शेयर की सालों पुरानी फोटोज, पहचानना हुआ मुश्किल

भोजपुरी इंडस्ट्री की एक्ट्रेसस का जलवा अपने आप में सबसे अलग हैं, फिर चाहे उनके गाने हो या एक्टिंग स्टाइल, भोजपुरी स्टार्स ने सब के दिलों में अपनी अलग पहचान बनाई हैं. जैसा कि हम सब जानते हैं कि कोरोना वायरस (Corona Virus) के चलते पूरे विश्व को एक मुश्किल समय का सामना पड़ रहा है और इस बिमारी की वजह से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को कुछ दिनों के लिए पूरे भारत को लौकडाउन (Lockdown) करना पड़ा जिसका मतलब ये है कि कोई भी बिना वजह अपने घरों से बाहर नहीं निकल सकता.

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रानी चटर्जी ने शेयर की पुरानी फोटोज…

ऐसे समय में सभी सेलेब्रिटीज अपने अपने घरों से ही कुछ क्रिएटिव कर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं और साथ ही अपने फैंस को टिप्स भी दे रहे कि उन्हें इस लौकडाउन के समय में क्या-क्या करना चाहिए. ऐसे में भोजपुरी इंडस्ट्री की जानी मानी एक्ट्रेस रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपने फैंस के लिए कुछ फोटोज शेयर की हैं जो कि काफी पुरानी हैं.

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फैंस को बेहद पसंद आईं रानी की ये तस्वीरें…

इन फोटोज के साथ रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) ने कैप्शन में लिखा कि,- “#throwback #10yearsold #picture बैठे बैठे पुरानी तस्वीरों का पिटारा खोला बहुत सारी तस्वीरें मिली जो आप सभी के साझा करुगी.” इन फोटोज को देख ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि रानी चटर्जी अपने शुरूआती दिनों से ही काफी सुंदर थी. रानी के फैंस उन्हें काफी पसंद करते हैं और उनकी हर फोटो और वीडियो पर जमकर लाइक्स और कमेंट्स की बरसात करते हैं.

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फोटोज देख कोई भी हो जाएगा हैरान…

एक बार को तो रानी चटर्जी की पुरानी फोटोज देख कोई भी धोखा खा जाएगा कि क्या ये वोही रानी चटर्जी है कि आज के समय में भोजपुरी इंडस्ट्री की सबसे हौट और ग्लैमरस एक्ट्रेस है. रानी की पुरानी फोटोज काफी सिंपल है और सिंपल होने के साथ साथ वे अपनी हर फोटो में काफी क्यूट लग रही हैं.

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एक्ट्रेस सनी लियोन नें Hot Photos शेयर कर बढ़ा दी फैन्स की धड़कने

अभिनेत्री और पोर्न स्टार सनी लियोन (Sunny Leone) नें इस लॉकडाउन (Lockdown) के बीच अपनी कई तस्वीरों को अपने इन्स्टाग्राम एकाउंट पर साझा किया है जिसमें वह हौट लुक्स में कहर ढा रहीं हैं. सनी लियोन हौट और सेक्सी अंदाज के चलते अपने फैन्स के बीच खासा फेमस हैं. वह अक्सर ही अपनी सेक्सी और बोल्ड तस्वीरें अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर साझा करती रहतीं हैं. उसी कड़ी में उन्होंने हाल ही में कुछ तस्वीरें अपने इन्स्टाग्राम और ट्विटर अकाउन्ट पर शेयर की है.

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इन्स्टाग्राम पर शेयर किये एक तस्वीर में वह पूल में लेटी नजर आ रहीं हैं और उन्होंने अपने बदन पर ब्लैक कलर की बिकनी पहन रखी है. इस तस्वीर पर सनी को खूब रियक्शन मिल रहा है. वहीँ एक दूसरी तस्वीर में सनी बहुत ही बोल्ड अंदाज में एक नाव में खड़ीं हैं इसके बैकग्राउंड में पहाड़ और समुद्र का सीन तस्वीर को और भी मादक बना रहा हैं.

तीसरी तस्वीर जिसमें उन्होंने ब्लैक बिकनी के साथ ओलिव ग्रीन कलर का ट्रांस्पेरेंट क्रॉप टॉप पहना हुआ है। इस तस्वीर में बड़े ही मादक अंदाज में जीप से सट कर खड़ी नजर आ रही हैं. एक तस्वीर में सनी नें हल्के कलर की बिकनी पहन रखी है जिसमें उनका एक पैर पूल में है तो एक पैर पूल के ऊपर इस तस्वीर को देख कर फैन्स के दिल की धडकनें बढ़ जाना लाजिमी हैं. इसके अलावा भी उन्होंने कई तस्वीरें साझा की हैं जिसमें वह  कहर ढाती नजर आ रहीं हैं.

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ट्विटर पर की और भी हौट तस्वीरें शेयर

सनी लियोनी नें जितनी भी फोटोज इन्स्टाग्राम पर शेयर की है उन तस्वीरों के साथ उससे जुडी दूसरी हौट तस्वीरें अपने ट्विटर एकाउंट पर शेयर की हैं. इसमें वह जीप के साथ अलग- अलग पोजीशन में नजर आ रहीं हैं. वहीँ ट्विटर पर शेयर किये नीली बिकनी वाले तस्वीर में तो वह विजली ही गिरा रहीं हैं.

सनी नें घोड़े के पीठ पर बैठ कर भी एक तस्वीर शूट कराई है जिसे उन्होंने इस लॉक डाउन के बीच अपने सोशल मिडिया एकाउंट पर भी शेयर किया है. इस तस्वीर पर उनको ढेर सारे लाइक मिले हैं.

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आप को बतातें चलें की Lockdown के चलते एक्ट्रेस सनी लियोनी अपने तीनों बच्चों और पति डेनियल के साथ घर पर ही समय बिता रहीं हैं और खूब इंज्वाय भी कर रहीं हैं.  सनी लियोनी के हौट तस्वीरों के शेयर किये जानें के चलते उनके सोशल मीडिया पर जबरदस्त फालोअर्स भी हैं. जहां उनके इंस्टग्राम पर 33.7 मिलियन फॉलोअर्स हैं वहीँ ट्विटर पर 5.3 मिलियन फालोअर्स की संख्या है.

ट्विटर पर शेयर की फोटोज…

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Lockdown में सहारा बने ग्रामीण चिकित्सक

लेखक- शम्भू शरण सत्यार्थी

कोरोना कोविड 19 बीमारी को लेकर सरकारी  जिला अस्पताल से लेकर प्रखण्ड स्तर पर स्थापित अस्पतालों में आउट डोर बन्द हैं. यहाँ अन्य किसी प्रकार की बीमारी का ईलाज नहीं किया जा रहा है. सिर्फ कोरोना से संदिग्ध मरीजों के ईलाज के लिए तामझाम के साथ ब्यवस्था की गयी है. ब्लॉक स्तर पर स्थापित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और कहीं कहीं रेफरल अस्पताल में स्टाफ चौबीस घण्टे तैनात हैं.ग्रामीण

क्षेत्रों में सरकार द्वारा संचालित अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र बन्द कर दिए गए हैं.उन स्टाफों को ब्लॉक स्तरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या रेफरल अस्पताल और सदर अस्पताल में ड्यूटी लगा दी गयी है. लेकिन ब्लॉक स्तरीय सरकारी अस्पतालों में विशेष काम नहीं है. इसलिए कि जब आउट डोर बन्द कर दिया गया है तो मरीजों की संख्या नहीं के बराबर है.महानगरों से आये जिन मजदूरों को अगर सर्दी खाँसी है तो उन्हें तत्काल रेफर कर दिया जा रहा है. रेफर करना लोग इसलिए चाह रहे हैं कि हमलोग जहमत मोल क्यों लें ?

मौसम में बदलाव की वजह से सर्दी खाँसी और वायरल बुखार से बहुत लोग परेशान हैं.सरकारी अस्पतालों में आउट डोर की ब्यवस्था बन्द कर दी गयी है.

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अब लोग जायें तो जाएँ कहाँ कोई उपाय नहीं ? जिसे सरकार और बड़े लोग हेय दृष्टि से देखते हैं. लोग जिन्हें झोला छाप डॉक्टर बोलते हैं.

ये झोला छाप और क्वैक के नाम से जाने जाने वाले डॉक्टर लोगों की सेवा में चौबीस घण्टा हाजिर हैं.अपना निजी क्लिनिक चलाने वाले डॉ अरविंद कुमार ने बताया कि मेरा अस्पताल रेफरल अस्पताल के ठीक बगल में है.वहाँ ओ पी डी बन्द रहने की वजह से लोग ईलाज कराने के लिए मेरे पास आ रहे हैं.मैं गरीब मरीजों का निःशुल्क ईलाज करा रहा हूँ. हमें जितनी जानकारी है उस हिसाब से मैं लोगों का ईलाज कर रहा हूँ. इन्हीं के पास ईलाज करा रही प्रमिला देवी ने बतायी की मुझे कई दिनों से बुखार लग रहा था.ठीक नहीं हो रहा था.यहाँ जब डॉक्टर साहब के पास आये तो इन्होंने जाँच कराया तो टायफायड बुखार निकला अब तीन चार दिन से बिल्कुल ठीक हैं.

घर के लोग चिंतित थे और दूरी भी बनाने लगे थे.किसी को सर्दी बुखार या खाँसी हो रहा है तो लोग उसे सन्देह की निगाह से देख रहे हैं. हमारे लिए तो डॉ अरविंद बाबू भगवान के समान हैं.निजी क्लिनिक और साथ में लैब टेक्नीशियन संजय कुमार लोगों का तो इलाज अपने क्लिनिक में कर ही रहे हैं. अपने तरफ से  मास्क गरीब मुहल्ले में जाकर बाँट रहे हैं और लोगों को कोरोना जैसी बीमारी से बचने के लिए उपाय भी बता रहे हैं. सुदूर देहात में रहने वाले अरुण कुमार रंजन ने बताया कि मैं अपने गाँव में लोगों का निःशुल्क ईलाज करता हूँ.सुई देता हूँ.मैं कोई डॉक्टर तो नहीं हूँ लेकिन मुझे जो जानकारी है. एक डॉक्टर के साथ में रहकर मैंने जो सीखा है. उस आधार पर मैं लोगों का ईलाज करता हूँ.इस समय सरकारी अस्पतालों में आम बीमारियों का ईलाज नहीं हो रहा है. लोग मेरे पास आ रहे हैं.

ग्रामीण मोहन सिंह ने बताया कि अगर हमारे गाँव मे अरुण जैसा आदमी नहीं होता तो हमें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता.इसी तरह राजेश विचारक ने बताया कि मैं हड्डी से सम्बंधित ईलाज करता हूँ लेकिन इस समय लोग अन्य बीमारियों से सम्बंधित मरीज मेरे पास आ रहे हैं. मुझे जितनी जानकारी है. उस हिसाब से मैं लोगों का ईलाज कर रहा हूँ.मरीजों का ईलाज करने वाले शिक्षक सन्तोष कुमार ने बताया कि मैं पहले ईलाज करता था उसके बाद सरकारी शिक्षक बन गया लेकिन ईलाज करने का सिलसिला सुबह शाम और रात्रि में जारी रहा.आज लॉक डाउन के दौरान मेरे पास लोग ईलाज कराने के लिए आ रहे हैं और उनका मैं अपने जानकारी के हिसाब से ईलाज कर रहा हूँ.

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वास्तव में अगर ये ग्रामीण क्षेत्रों में ये इलाज करने वाले ग्रामीण चिकित्सक नहीं होते तो इस लॉक डाउन की वजह से लोगों को और परेशानियों का सामना करना पड़ता.महानगर के बड़े अस्पतालों में ईलाज कराने वाले लोगों की दवा ग्रामीण क्षेत्र के बहुत लोगों के पास समाप्त हो गयी है.आवागमन बन्द है.लाचार होकर वैसे लोग भी इन ग्रामीण चिकित्सकों से राय सलाह कर तत्कालिक दवाB लेकर सेवन कर रहे हैं.कोरोना जैसी बीमारी के बढ़ते प्रभाव को देखकर बिहार में इन प्राइवेट डॉक्टरों को भी तत्कालिक प्रशिक्षण देकर सेवा लेने की कवायद चल रही है.लेकिन अभी तक यह कागजों तक ही सीमित है.

#coronavirus: यमराज की अपील

लेखक- राजेश चौरसिया

  • सड़कों पर उतरे यमराज..
  • पुलिस ने यमराज से दिलवाई समझाईश..
  • पुलिस की लॉक डाउन को लेकर अनोखी पहल..
  • लोगों को लॉक डाउन के प्रति सजग रहने करने प्रयास..

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देशभर में फैली कोरोना महामारी से बचने के लिए केंद्र सरकार ने पूरे भारत में लॉक डाउन कर दिया है और पुलिस प्रशासन लोक डाउन को सफल बनाने के लिए लोगों को नए नए अंदाज में समझा दे रही है. कहीं पुलिस गाना गाकर लोगों को घरों के अंदर रहने के लिए कह रहे हैं तो कहीं अलग ही कुछ कलाएं दिखाकर लोगों को समझा बुझा रहे हैं ऐसा ही मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में पन्ना पुलिस ने लोगों को समझाएं इसके लिए सड़कों पर साक्षात यमराज को उतारा है और बखूबी यमराज भी पन्ना की सड़कों में घूमकर लोगों को लॉक डाउन के नियम व घर में रहने की समझाइश दे रहे हैं जरा देखिए यमराज जी किस तरह पन्ना की जनता को समझा रहे हैं.

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यमराज (मोहन लाल जड़िया यमराज के किरदार में) कह रहे हैं कि मैं पन्ना की  जनता से नाराज हूं क्योंकि आप लोग लॉक डाउन के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं अगर आप लोगों को करो ना जैसी महामारी से बचना है तो आप अपने घरों में रहिए अपने हाथों को बार-बार दोगे और एक दूसरे से डिस्टेंस बनाकर रखिए अगर ऐसा नहीं किया आपने तो मुझे मजबूरन आप लोगों को अपने साथ ले जाना पड़ेगा हा हा हा हा हा हा.

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अक्षय कुमार ने Corona के खिलाफ काम कर रहे लोगों को बोला थैंक्यू, बताया रियल आर्मी

कोरोना के चलते लगाए गए लॉक डाउन में लोगों को खाने- पीनें की चीजों की कमी न हो, घर से बिना निकले ही जरुरी दवाएं घर पर ही मिल जाएँ, घर के सामने गंदगी न हो समय से कूड़ा उठ जाए, बीमार पड़ने पर अस्पताल में हमारी सही से देखभाल हो. इस लॉक डाउन में में कोई भूखा न सोने पाए ऐसे लोगों को समय से पका पकाया भोजन मिल जैसे तमाम काम हैं जिसे पूरा करनें के लिए इस जोखिम में भी लाखों लोग 24 घंटें काम कर रहें. वह भी खुद के परिवार से दूर रहते हुए. ये सब काम ये लोग इस लिए कर रहें हैं की आप और आप का परिवार सुरक्षित रहे. इस लिए इस मुहिम में लगे लोगों को कोरोना वारियर्स नाम दिया गया है.

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कोरोना की जंग जीतने में लगे ऐसे लोगों का हौसला कम न हो इसके लिए तमाम लोग आगे आकर उनका हौसला भी बढ़ा रहें हैं. इसमें चाहे आम आदमी हो या सेलेब्रेटीज सभी नें कोरोना वारियर्स के जज्बे को सलाम किया है. अमिताभ बच्चन भी कोरोना वारियर्स के जज्बे को सलाम कर चुके हैं. इस कड़ी में एक नाम और भी जुड़ गया है वह नाम बॉलीवुड के महान नायक अक्षय कुमार का. उन्होंने अपने इन्स्टाग्राम एकाउंट पर एक वीडियो अपलोड कर ऐसे वारियर्स को असली आर्मी बताते हुए उनके जज्बे को सलाम किया हैं.

उन्होंने अपने वीडियो में कहा की “कल मेरी बात मुंबई पुलिस की एक ऑफिसर से हो रही थी वह मेरा दोस्त है. उसकी कही एक लाइन ने मुझे सोचने पर मजबूर मजबूर कर दिया. कह रहा था की अक्षय कमाल है ना कि आप लोग अपने घर से बाहर निकलने से डर रहें हैं और हम हैं अपने घर जाने से डर रहे हैं. सारा दिन सड़क पर रहते हैं इतनें लोगों से मिलते हैं कई बीमारियां अपने घर वालों को ना दे दे इसलिए हम घर नहीं जाते,दस-दस दिन बारह –बारह दिन.

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मैं बहुत दिन देर तक सोचता रहा हमें अंदाजा भी नहीं है कि हम सेफ रहे हैं इसके लिए कितने लोग अपनी जान को जोखिम में डालकर हमारे लिए दिन रात काम कर रहे हैं. हमारी पुलिस फ़ोर्स, नगर नगर निगम के वर्कर्स, डाक्टर्स, नर्सेज, अलग-अलग एनजीओ के वालंटियर्स,हमारे सरकार के लोग, राशन वाले, सब्जी वाले, दूध वाले, बिल्डिंग का जो वाचमैन है वह भी. और भी ऐसे जरूरी काम करने वाले बहुत से लोग है मैं समझता हूँ की पूरी आर्मी हैं जो चौबीस घंटें काम कर रही है. ताकि हम और हमारे परिवार सुरक्षित रहें.

और हम लोग क्या कर रहे हैं घर बैठ कर फिल्में भी देख रहे हैं, वेब सीरीज देख रहें हैं बस. यार एक थैंक्यू तो बनता हैं. दिल से थैंक यू भाई मेरे. अगले ट्वीट में इसके बाद जो ट्वीट डालूंगा मैं सबको अपने और अपने परिवार वालों की तरफ से दिल से थैंक यू करुंगा. अगर आप चाहें मेरा अगला ट्वीट कॉपी पेस्ट कर सकते हैं. सिर्फ अपना नाम और सिटी रिप्लेस करके कोई भी सोशल मीडिया जिस पर हों फेसबुक हो ट्विटर हो इंस्टाग्राम हो पर शेयर करे. हैज टैग दिल से थैंक्यू के साथ”.

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इसके पोस्ट के बाद उन्होंने दिल से थैंक्यू वाला ट्विट भी किया है. जिसमें उन्होंने अपना नाम और शहर का नाम लिखते हुए कहा है मेरे और सिर्फ परिवार के तरफ से  … पुलिस, नगर निगम के कार्यकर्ता, डॉक्टर, नर्स, गैर-सरकारी संगठन, स्वयंसेवक, सरकारी अधिकारी, विक्रेता, भवन के रखवाली करने वाले लोगों को दिल से थैंक्यू”. (Name : Akshay Kumar,City : Mumbai, Mere aur mere parivaar ki taraf se…Police, Nagar Nigam ke workers, doctors, nurses, NGOs, volunteers, government officials, vendors, building ke guards ko #DilSeThankYou) जिसे लोग कॉपी करके अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर शेयर कर रहें हैं.

पकी फसल पर भारी पड़ रहा है Corona का कहर

लेखक- लोकमित्र गौतम

देश का उद्योग और सेवा क्षेत्र तो कोरोना के कहर के चलते पहले से ही हाहाकार के दौर से गुजर रहा था. लेकिन लगता है अब कोरोना वायरस कृषि क्षेत्र में भी बुरी तरह से कहर बरपाकर ही रहेगा.कहने को तो कृषि कार्य को लॉकडाउन से छूट दी गयी है, लेकिन संकट यह है कि रबी फसल में सबसे ज्यादा होने वाली गेंहूँ की फसल को खेतों से काटने,थ्रेसर में कतरने और अनाज को मंडी तक पंहुचाने के लिए सर्वाधिक गेहूं उत्पादक राज्यों में इस समय लेबर ही नहीं हैं.अकेले पंजाब को इस समय गेहूं की फसल को काटने के लिए 6 लाख से ज्यादा लेबर्स की जरूरत है.अगर इसमें हरियाणा और सर्वाधिक गेहूं उत्पादन करने वाले राज्य उत्तर प्रदेश को भी जोड़ लें तो इन तीनों राज्यों में कम से कम 20 लाख मजदूरों की जरूरत है.लेकिन यूपी में तो फिर भी लेबर मिल सकती है,लेकिन पंजाब और हरियाणा की बहुत बुरी हालत है.इन दोनों ही राज्यों में भयानक लेबर संकट पैदा हो गया है.

चूंकि यह संकट मार्च के दूसरे हफ्ते से ही दिखने लगा था.इसलिए चना,मसूर और लाही तो किसानों ने किसी तरह काट ली है और करीब करीब फसल घर भी आ गयी है.लेकिन गेहूं जो कि रबी की कुल फसल में करीब 70% तक होती है,कोरोना के चलते संकट में फंस गयी है.इस साल वैसे भी किसानों ने गेहूं की फसल करीब 5.68 लाख हेक्टेयर में बोई थी जो कि पिछले साल के मुकाबले करीब 8 फीसदी ज्यादा रकबा था.इसलिए इस साल उत्पादन भी 80 से 90 लाख टन ज्यादा होने की उम्मीद थी.गौरतलब है कि हिन्दुस्तान में 2019 में करीब 10 करोड़ 62 लाख टन गेहूं की पैदावार हुई थी,जिसके इस साल करीब 11 करोड़ टन के ऊपर जाने की उम्मीद है. लेकिन अब डर लगने लगा है.क्योंकि गेहूं की फसल खेतों में पकी खडी है.मगर दूर दूर तक पंजाब में लेबर नहीं दिख रही और मंडिया भी बंद हैं.

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वैसे हरियाणा सरकार ने घोषणा की है कि अगर हर पंचायत में नहीं संभव हुआ तो कम से तीन पंचायतों के बीच एक फसल खरीद केंद्र स्थापित किया जायेगा. ताकि किसानों को अपनी फसल लेकर बहुत दूर न जाना पड़े.वैसे देश में अनाज का अच्छाखासा बफर स्टॉक है .फिर भी मंडी तक अनाज पहुंचने में देर होगी तो खुले बाजार में खाद्यान्न का संकट खडा हो जाएगा.इसलिए किसानों की मांग है कि उन्हें अपने घर से मंडियों तक अनाज को पहुंचाने की व्यवस्था सरकार करे वरना खाद्य पदार्थों की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है.

कृषि फसल को कोरोना संकट से बचाना इसलिए जरूरी है क्योंकि तमाम इंडस्ट्री पहले ही कोरोना के चलते पस्त हो चुकी हैं.एविएशन इंडस्ट्री को करीब चार अरब डॉलर का नुकसान अब तक हो चुका है. हॉस्पिटैलिटी,टूरिज्म सेक्टर की हालात भी देखने लायक नहीं बची.होटल और रेस्टोरेंट चेन बुरी ध्वस्त हो गयी है. ये क्षेत्र तो कोरोना के खात्मे के कई महीनों बाद तक भी सन्नाटे में ही रहने वाले हैं. ऑटो इंडस्ट्री की भी बहुत बुरी हालत है. इसे भी करीब दो अरब डॉलर का नुकसान झेलना पड़ सकता है. हालांकि कृषि फसल को मंदी से वास्ता नहीं है.यहां सबसे बड़ा संकट लेबर और मंडियों तक पहुंचने के ट्रांसपोर्ट का संकट है.लॉक डाउन के चलते एक जगह के उत्पाद दूसरी जगह तो बिलकुल ही नहीं पहुँच पा रहे हैं.मसलन दिल्ली की सब्जी मंडी तक दूर के उत्पाद नहीं पहुँच पा रहे.नतीजा अलीगढ़ फरुक्खाबाद,कन्नौज आदि में जो दिल्ली के लिए सब्जियां बोई गयी हैं,सब अब किसानों को डुबाने वाली हैं.

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वैसे लॉकडाउन में किसानों के लिए किसान हेल्पलाइन बनाई गयी है और पहले से भी एक हेल्पलाइन मौजूद है.लॉकडाउन अवधि के लिए किसानों की सुविधा के लिए तमाम किसान कॉल केंद्र भी बनाये गए हैं.लेकिन हम सब जानते हैं इस देश में आपदा प्रबन्धन कितने गैर जिम्मेदार ढंग से होता है.इसलिए खेती-किसानी के लिए गृह मंत्रालय के मुताबिक़ चाहे जो आदेश हों व्योहार में तो ये सब पुलिस की मर्जी से ही नियंत्रित होते हैं. चूँकि लौकडाउन में मजदूर घर से बाहर निकलने से परहेज कर रहे हैं.साथ ही यूपी जैसे गेंहूँ के सबसे बड़े उत्पादक राज्य में पर्याप्त संख्या में कंबाइन हार्वेस्टर भी उपलब्ध नहीं है,इससे एक बात बहुत स्पष्ट है कि फसल की कटाई में विलंब होगा साथ ही इससे काफी कुछ अनाज भीं बर्बाद होगा क्योंकि फसल बहुत ज्यादा पक चुकी होगी.

Lockdown के बीच लोगों की सेवा में लगे सप्लाई वौरियर्स को बिग बी ने ऐसे किया सलाम

कोरोना में लगाए गए Lockdown के चलते उपजे हालातों से उबारने के लिए सुपरस्टार अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) लगातार प्रयासरत हैं. चाहे वह दिहाड़ी मजदूरों को खाद्य राहत के रूप में सहयोग रहा हो यह लोगों को जागरूक करने की मुहिम हो. इसी कड़ी में बिग बी नें Lockdown के बीच लोगों की सेवा में लगे लोगों को एक वीडियो जारी कर सलाम किया है. उन्होंने नें लोगों के घरों तक खाद्य सामग्री मुहैया कराने की मुहिम में लगे लोगों की न केवल सराहना की बल्कि उनके जज्बे को सलाम भी किया. ऐसा उन्होंने इससे जुड़ा एक वीडियों शेयर कर किया है.

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ट्विटर, इन्स्टाग्राम और फेसबुक एकाउंट पर शेयर किये वीडियों की शुरुआत वह अपने चिरपरिचित अंदाज से करते हुए कहते हैं  भाइयों, बहनों देवियों और सज्जनों नमस्कार! मैं हूँ अमिताभ बच्चन. एक तरफ जब आज सारा देश प्रधानमंत्री जी के आह्वान पर Lockdown का पालन करते हुए कोरोना के खिलाफ लड़ाई में योगदान दे रहा है. वहीं दूसरी ओर ऐसे ऐसे निस्वार्थ कर्मयोद्धा भी हैं, जो हमारी रोजमर्रा की जरूरी है वस्तुएं हमें इतनी सहजता से उपलब्ध करवा रहें हैं और इस लड़ाई में एक बहुत ही अहम भूमिका निभा रहे हैं. इन सप्लाई वारियर्स या सप्लाई योद्धा की स्वार्थहीन निष्ठा अपने आप में बहुत बड़ा कारण है जिनकी वजह से कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जो Lockdown वह सफल हो रहा है.

उन्होंने कहा की मै इन सप्लाई वारियर्स का तहेदिल से आभार व्यक्त करता हूँ, जिनमें शामिल हैं अपने घर परिवार से सैकड़ों मील दूर काम कर रहे लाखो ट्रक ड्राइवर, सामान की लोडिंग अनलोडिंग करने वाले हमारे भाई बहन, रेलवे रैक,कार्गो,बंदरगाहों पर कार्यरत कर्मचारी, भारतीय वायु सेना, एयर इन्डिया के पायलट्स और क्रू और वह तमाम लोग जो खाद्य पदार्थ और जरूरी दवाइयों की सप्लाई में जी-जान से काम कर रहें हैं. मै सभी स्थानीय दुकानदार और डिलीवरी में जुटे बहनों और भईयों जो दूध,सब्जी,फल, खाद्यान्न आदि हमारे घर पहुंचा रहे हैं या हमें दुकानों पर मुहैया करा रहे हैं उन सब का भी मै बहुत आभारी हूं.

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उन्होंने नें अपने वीडियो में कहा की मै उन सबका भी आभारी हूँ जिनकी वजह से जितनी भी जरूरी वस्तुएं हैं बहुत ही सहजता से आपको उपलब्ध हो रही हैं. बाकी देशवासियों से मेरा बहुत विनम्र निवेदन है कि आप निश्चिंत रहें इन सप्लाई वॉरियर्स के चलते आप को जरुरी चीजों की कहीं कोई कमी नहीं होगी. इसी लिए अनावश्यक चीजों को आप इकट्ठा न करें, जमाखोरी न करेंघर में रहें सुरक्षित रहें. मै एक बार फिर देश के इस महान सेवा के लिए सभी सप्लाई वारियर्स को कोटि-कोटि नमन करता हूँ नमस्कार! बिग बी द्वारा शेयर किये गए इस वीडियो को अब तक लाखों लोग देख चुकें हैं और इस पर लोगों नें बहुत ही अच्छे कमेन्ट और रिक्यशन दियें हैं.

इस Lockdown के चलते फिल्मों की शूटिंग बंद है और सभी एक्टर्स अपने घरों में हैं इसी कड़ी में अमिताभ बच्चन भी अपने घर पर में हैं लेकिन अगर उनके वर्तमान प्रोजेक्ट की बात करें तो वह जल्द ही फिल्म ब्राम्हस्त्र में नजर आने के साथ ही डायरेक्टर नागराज के फिल्म फिल्म का नाम झुंड में भी नजर आने वाले हैं  साथ ही वह  शूजीत सरकार के निर्देशन में बन रही फिल्म गुलाबो में भी नजर आने वाले हैं.

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डगमगाती इंसाफ की देवी, मनपसंद फैसला नहीं तो बिफरा वकील

इंसाफ के मंदिर में बैठ जज साहब ने ज्यों ही अपना फैसला सुनाया, एक वकील साहब इतना भड़क गए कि गालीगलौज पर उतर आए. उन्होंने गुस्से में जज साहब से यहां तक कह दिया कि उन्हें कोरोना हो जाए.

भरी अदालत में इस तरह का वाक़िआ शायद ही देखने को मिले, जब वकील ही जज पर इस तरह का लांक्षन लगाए.

वकील ने गुस्से में आ कर जज साहब को ही श्राप दे डाला कि उन का भविष्य अंधकारमय हो जाए और उन्हें कोरोना वायरस लग जाए.

जी हां, यह मामला 7 अप्रैल, 2020 को कलकत्ता हाईकोर्ट का है. वकील के इस ‘निकृष्ट आचरण’ से नाराज जज ने उस के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की अनुशंसा की है.

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कोलकाता हाईकोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता ने अदालत की गरिमा को बनाए रखने में नाकाम और इस गरिमा वाले पेशे के सदस्य के अनुसार आचरण न करने पर वकील विजय अधिकारी को नोटिस भेजे जाने की तारीख के 15 दिनों के भीतर अवमानना नियम के तहत जवाब देने को कहा है.

बता दें कि कोरोना संक्रमण फैलने से रोकने और पूरे देश में लॉक डाउन हो जाने की वजह से कलकत्ता हाईकोर्ट 15 मार्च से सिर्फ जरूरी मामलों की ही सुनवाई कर रहा है. 25 मार्च से अदालत ऐसे मामलों की सुनवाई सिर्फ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कर रहा है.

वकील विजय अधिकारी ने कर्ज अदायगी न करने पर एक राष्ट्रीयकृत बैंक द्वारा उस के क्लाइंट की बस नीलामी पर रोक लगाने की याचिका जस्टिस दीपांकर दत्ता की अदालत में दी थी.

जब जस्टिस दीपांकर दत्ता को पता चला कि बस को बैंक द्वारा 15 जनवरी को ही जब्त किया गया है, तो उन्होंने इस मामले पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया.

इस बाबत जब जस्टिस दीपांकर दत्ता ने अपना आदेश देना शुरू किया तो नाराज वकील विजय अधिकारी बारबार उन्हें टोकते रहे, हल्ला करते रहे और अपनी टेबल पीटना शुरू कर दिया, यहां तक कि माइक को टेबल पर पटक दिया.

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जस्टिस दीपांकर दत्ता ने अपने आदेश में कहा, “वकील विजय अधिकारी को बारबार संयमित आचरण के लिए चेतावनी दी गई, लेकिन उन्होंने इन पर ध्यान नहीं दिया, उन्हें यह कहते सुना गया कि वह मेरा भविष्य अंधकारमय बना देंगे और इसलिये उन्होंने मुझे श्राप दिया कि मुझे कोरोना वायरस संक्रमण लग जाए.”‘

जस्टिस दीपांकर दत्ता ने आगे कहा, “वकील विजय अधिकारी को स्पष्ट रूप से बता दिया गया कि न तो मुझे अपने भविष्य के अंधकारमय होने का डर है और न ही मैं वायरस से संक्रमित होने में डरता हूं…अदालत की गरिमा मेरे दिमाग में सर्वोच्च है और इसे बरकरार रखने के लिए उन के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही का निर्देश दिया जा सकता है.”

जस्टिस दीपांकर दत्ता ने यह निर्देश भी दिया कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद जब अदालत खुलेगी तो यह मामला उचित खंडपीठ द्वारा सुना जाएगा, जिस के पास आपराधिक अवमानना के मामले सुनने का अधिकार होगा.

जज साहब ने तो वकील के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल कर दी, पर वकील की उद्दंडता को वे भूल नहीं पाएंगे और वकील साहब को भरी अदालत में सख्ती से पूछा जाएगा कि उन्होंने अदालत की अवमानना क्यों की. अदालत के कठघरे में खड़े वकील की बोलती बंद होना तय है.

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यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि वकील अपनी सफाई में क्या कहते हैं. कौन सी तिकड़म भिड़ाते हैं कि बच जाएं, पर इस तरह की हरकतें वाकई शर्मनाक हैं.

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