Bigg Boss 13: देवोलीना के बाद इस कंटेस्टेंट पर आया सिद्धार्थ का दिल, की होठों की तारीफ

बिग बौस सीजन 13 के पिछले एप्सोड्स में अपने देखा कि कैसे दो जिगरी दोस्त यानी कि सिद्धार्थ शुक्ला और असीम रियाज के बीच काफी ज्यादा लड़ाई हुई और इन दोनों की ये लड़ाई हाथापाई तक पर उतर आई थी. इसी बीच जब पंजाब की कैटरीना कैफ कहे जाने वाली एक्ट्रेस यानी शहनाज गिल ने सिद्धार्थ को सपोर्ट किया था तो बिग बौस के फैंस को बिल्कुल पसंद नहीं आया था और फैंस ने शहनाज को ट्वीटर पर जमकर खरी खोटी सुनाई थी.

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शेफाली नें किया माहिरा के होठों पर कमेंट…

इन सब लड़ाई झगड़ों के बीच कंटेस्टेंट सिद्धार्थ शुक्ला और देवोलीना भट्टाचार्या में कुछ प्यार भरे पल भी दर्शकों को देखने को मिले. इन प्यार भरे पलों ने ना सिर्फ सबको एंटरटेन किया बल्कि सिद्धार्थ और देवोलीना के रिश्ते पर भी काफी असर पड़ा. अगर बात करें ‘स्वयंवर’ टास्क की तो उस टास्क में जैसे ही शहनाज ने शेफाली को बुलाकर फल खिलाने को कहा तभी, माहिरा शर्मा बीच में कूद कर उनके आने-जाने और स्टाइल पर कमेंट करने लगी और ये बात शेफाली को बिल्कुल पसंद नहीं आई और शेफाली नें माहिरा के होठों पर कमेंट कर दिया.

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सिद्धार्थ ने भी कहा ‘बड़े होठ वाली छिपकली’…

शेफाली के इस कमेंट पर माहिरा काफी परेशान नजर आईं और इस दौरान माहिरा ने वहां बैठे सिद्धार्थ शुक्ला से पूछा कि क्या उनके होठ वाकई में खराब हैं? बिना देरी किए सिद्धार्थ शुक्ला ने जवाब दिया, ‘मैं वही कहूंगा जो हिंदुस्तानी भाऊ ने कहा था, बड़े होठ वाली छिपकली.’ सिद्धार्थ के इस कमेंट पर माहिरा काफी शौक्ड हो गईं पर उन्होनें कुछ रिएक्ट नहीं किया.

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सिद्धार्थ को माहिरा के होंठ आए पसंद…

इसके बाद सिद्धार्थ जब बेडरूम में लेटे हुए थे तब फिर से माहिरा उनके पास आईं और एक बार फिर से अपने होठों को लेकर उनसे सवाल किया ‘कि क्या उनका वही मतलब था जो उन्होंने उस वक्त कहा था’? इस पर सिद्धार्थ कहते हैं कि वो झूठ बोल रहे थे और उन्हें माहिरा के होठ पसंद हैं. इसके बाद सिद्धार्थ माहिरा की तारीफ करते हुए कहते हैं कि “लड़कियां ऐसे बड़े होठ पाने के लिए इंजेक्शन्स लेती है. आपके तो नैचुरली ऐसे है, आपको तो इस पर गर्व होना चाहिए.”

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पीछे से आकर लगाया गले…

इसके बाद माहिरा ने सिद्धार्थ के साथ अपने पुराने झगड़े सुलझाए और उन्हें अपनी टीम में आने का भी औफर दिया. इससे पहले जब माहिरा शेफाली पर किचन में गुस्सा हो रही थीं तो सिद्धार्थ ने उन्हें पीछे से आकर गले भी लगाया था. सिद्धार्थ शुक्ला और माहिरा शर्मा की इन बातों पर दर्शक काफी हैरान हो रहे हैं कि आखिर ये इन दोनों का गेम प्लैन है या फिर सच में दोनों को बीच नजदीकियां बढ़ रही हैं.

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डोसा किंग- तीसरी शादी पर बरबादी: भाग 1

चेन्नई के वेल्लाचीरी के बहुचर्चित प्रिंस शांता कुमार हत्याकांड की गवाही पूरी हो चुकी थी. 29 मार्च, 2019 को सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी आ गया. सुप्रीम कोर्ट ने चेन्नई हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा. साथ ही आदेश दिया कि प्रिंस शांताकुमार के हत्यारे पी. राजगोपाल, डेनियल, कार्मेगन, हुसैन, काशी विश्वनाथन और पट्टू रंगन को 7 जुलाई, 2019 तक कोर्ट में सरेंडर करना होगा.

दरअसल, 19 मार्च, 2009 को चेन्नई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति बानुमति और जस्टिस पी.के. मिश्रा की बेंच ने प्रिंस शांताकुमार की हत्या और हत्या की साजिश करार देते हुए इस केस के सभी दोषियों को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था. साथ ही हत्याकांड के मुख्य आरोपी और डोसा किंग के नाम से मशहूर पी. राजगोपाल पर 55 लाख रुपए का जुरमाना भी लगाया था, जिस में से 50 लाख रुपए मृतक की पत्नी जीवज्योति को दिए जाने थे. शेष रकम कोर्ट में जमा करानी थी.

हाईकोर्ट ने जब पी. राजगोपाल और उस के साथियों को उम्रकैद की सजा सुनाई तो पी. राजगोपाल ने इस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस की याचिका सिरे से खारिज कर दी और हाईकोर्ट की सजा को बरकरार रखते हुए 7 जुलाई, 2019 तक हाईकोर्ट, चेन्नई में सरेंडर करने का आदेश दिया था.

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पी. राजगोपाल ने घाटघाट का पानी पी रखा था. उस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए एक चाल चली. सरेंडर करने की आखिरी तारीख से 3 दिन पहले यानी 4 जुलाई, 2019 को पी. राजगोपाल नाटकीय ढंग से तमिलनाडु के वाडापलानी स्थित विजया अस्पताल में जा कर भरती हो गया.

अस्पताल में उसे औक्सीजन मास्क लगा दी गई. समाचार पत्रों और इलैक्ट्रौनिक मीडिया को इस बात का पता तब चला जब उस की औक्सीजन मास्क लगी फोटो सामने आई. खबर थी कि प्रिंस शांताकुमार का हत्यारा डोसा किंग पी. राजगोपाल गंभीर रूप से बीमार होने की वजह से विजया अस्पताल में भरती है.

पी. राजगोपाल ने ये चाल जेल जाने से बचने के लिए चली थी ताकि कोर्ट को उस पर दया आ जाए और उसे जेल जाने से बचा ले. अस्पताल में भरती होने के 4 दिन बाद यानी 9 जुलाई, 2019 को वह मास्क लगाए एंबुलेंस से चेन्नई हाईकोर्ट में सरेंडर करने जा पहुंचा.

कोर्ट ने उसे 7 जुलाई तक की मोहलत दे रखी थी, लेकिन दिमाग का शातिर राजगोपाल कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुए जानबूझ कर 2 दिन बाद कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचा था, जबकि उस के पांचों साथियों डेनियल, कार्मेगन, हुसैन, काशी विश्वनाथन और पट्टू रंगन ने पहले ही सरेंडर कर दिया था.

पी. राजगोपाल के वकील ने उसे बचाने के लिए कोर्ट के सामने उस के गंभीर रूप से बीमार होने के दस्तावेज पेश किए. लेकिन हाईकोर्ट ने उस की एक नहीं सुनी. न्यायालय ने कहा कि सुनवाई के दौरान कोर्ट को उस के बीमार होने की कोई सूचना नहीं दी गई थी, इसलिए उसे जेल जाना होगा.

जेल से अस्पताल पहुंचा राजगोपाल

कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने पी. राजगोपाल को हिरासत में ले कर पुजहाल जेल भिजवा दिया. ऐसा करना कोर्ट की विवशता थी, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश था. जेल जाने के 10 दिनों बाद पी. राजगोपाल की तबीयत सचमुच बिगड़ गई.

18 जुलाई को उसे जेल से निकाल कर सरकारी अस्पताल स्टेनली मैडिकल कालेज, चेन्नई में भरती कराया गया. तबीयत में कोई सुधार न होता देख राजगोपाल के बेटे ने अधिकारियों से इजाजत ले कर उसे इलाज के लिए उसे एक निजी अस्पताल में भरती कराया. अगले दिन इलाज के दौरान सुबह करीब 10 बजे पी. राजगोपाल ने दम तोड़ दिया. राजगोपाल की मौत के साथ शांताकुमार के एक हत्यारे की कहानी का अंत हो गया.

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प्रिंस शांताकुमार कौन था? पी. राजगोपाल ने उस की हत्या क्यों की या करवाई, वह हत्यारा कैसे बना? इन सवालों से साइड बाई साइड निकली कहानी रोचक और रोमांचक है. प्याज उगाने वाले एक मामूली किसान का बेटा पी. राजगोपाल पिता की कर्मस्थली से भाग कर कैसे फर्श से अर्श तक पहुंचा, इस कहानी को जानने के लिए हमें पी. राजगोपाल के शुरुआती जीवन के पन्नों को पलटना होगा.

राजगोपाल मूलरूप से तमिलनाडु के तूतीकोरिन के पुन्नाइयादी का रहने वाला था. वह अपने मांबाप की एकलौती संतान था. उस के पिता प्याज की खेती करते थे. इस कहानी की शुरुआत होती है 1973 से. पिता की ख्वाहिश थी कि राजगोपाल खेती में उन का हाथ बंटाए ताकि प्याज का पुश्तैनी कारोबार चलता रहे. प्याज की पैदावार ही उन के परिवार के भरणपोषण का एकमात्र साधन थी.

राजगोपाल मांबाप का एकलौता बेटा था. उसे पिता के साथ खेती करना मंजूर नहीं था. वह गांव छोड़ कर चेन्नई (तब मद्रास) चला आया. चेन्नई के के.के. नगर में उस ने किराने की एक छोटी सी दुकान खोल ली.

करीब 8 साल तक उस ने किराने की दुकान चलाई. इसी दौरान उस की दुकान पर एक ज्योतिषी आया. ज्योतिषी ने बताया कि अगर वह किराने की दुकान के बजाए रेस्टोरेंट खोले तो ज्यादा मुनाफा होगा.

राजगोपाल ने ज्योतिषी की बात मान ली. उस ने किराने की दुकान बंद कर के उसी जगह पर छोटा सा रेस्टोरेंट खोल लिया. उस ने रेस्टोरेंट को नाम दिया— सर्वना भवन. अपने रेस्टोरेंट में उस ने डोसा, इडली, पूड़ी और वड़ा बेचना शुरू किया.

वह दौर ऐसा था, जब अधिकांश भारतीय बाहर खाने के बारे में सोचते तक नहीं थे, लेकिन राजगोपाल ने रिस्क लिया. उस ने डोसा, पूड़ी, वड़ा और इडली बनाने के लिए नारियल तेल का इस्तेमाल करना शुरू किया. साथ ही मसाले भी अच्छी क्वालिटी के लगाए.

कीमत रखी प्रति थाली सिर्फ 1 रुपया. नतीजा यह हुआ कि उसे एक महीने में 10 हजार रुपए का घाटा हो गया. लेकिन वह न तो कारोबार में हुए घाटे से पीछे हटा और न ही गुणवत्ता के मामले में कोई समझौता किया.

पी. राजगोपाल की मेहनत रंग लाई. बीतते वक्त के साथ कुछ ऐसा हुआ कि चेन्नई में अगर किसी का बाहर खाने का मन होता तो उस की पहली पसंद सर्वना भवन ही होती थी. उस के स्टाफ में जितने भी कर्मचारी थे, सब को अच्छी सैलरी देनी शुरू कर दी.

निचले स्तर के कर्मचारियों को उस ने मैडिकल की सुविधा भी देनी शुरू कर दी. नतीजा यह निकला कि उस का स्टाफ उसे अन्नाची (बड़ा भाई) कहने लगा. पी. राजगोपाल के अच्छे व्यवहार से उस के कर्मचारी उसे दिल से चाहते थे. अगर उसे छींक भी आ जाती तो वे तड़प उठते थे.

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अरबपति बनने की राह पर

राजगोपाल की मेहनत और निष्ठा से उस का कारोबार चल निकला. नतीजा यह निकला कि राजगोपाल का ज्योतिषी पर भरोसा बढ़ गया. बहरहाल, जो भी हो वक्त के साथ कारोबार इतना बढ़ा कि राजगोपाल ने रेस्टोरेंट की चेन शुरू कर दी. धीरेधीरे लोग राजगोपाल का नाम भूल गए और उसे डोसा किंग के नाम से जानने लगे.

ज्योतिषी की सलाह पर राजगोपाल ने रंगीन कपड़े पहनने छोड़ दिए थे. वह झक सफेद पैंट और शर्ट पहनने लगा. साथ ही माथे पर चंदन का बड़ा टीका भी लगाता.

इतना ही नहीं, उस ने अपने रेस्टोरेंट में अपने ज्योतिषी की तसवीर भी लगवा दी. जीवन में आए इस बदलाव की वजह से उस ने ज्योतिषी को भगवान का दरजा दे दिया. ज्योतिषी जो कहता, राजगोपाल वही करता था.

20 साल के अंदर राजगोपाल का सर्वना भवन देश में ही नहीं, विदेशों में भी मशहूर हो गया. सिंगापुर, मलेशिया, थाइलैंड, हौंगकौंग, सऊदी अरब, ओमान, कतर, बहरीन, कुवैत, दक्षिण अफ्रीका, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, बेल्जियम, स्वीडन, कनाडा, आयरलैंड, ब्रिटेन, अमेरिका, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, इटली और रोम में भी राजगोपाल के आउटलेट्स खुल गए.

डोसा किंग पी. राजगोपाल की किस्मत आसमान में तारे की तरह चमक रही थी. कारोबार में नोट बरस रहे थे. डोसे की कमाई से उस के पास इतने पैसे आ गए कि वह नोटों के बिस्तर पर सोने लगा. उसी दौरान पी. राजगोपाल ने एक नहीं, 2-2 शादियां कीं. लेकिन दोनों पत्नियां उस के साथ नहीं टिकीं और हमेशाहमेशा के लिए उस का साथ छोड़ कर चली गईं.

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कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

अंधविश्वास करे शर्मसार

शनिवार का दिन था. दोपहर के तकरीबन 2 बजे थे. उत्तर प्रदेश में जौनपुर जिले के शाहगंज कसबे की रहने वाली शीला खरीदारी करने बाजार जा रही थीं. वे अभी घर से कुछ ही दूर गई थीं कि तभी रास्ते में उन्हें 14-15 साल का एक लड़का मिला जिस ने उन्हें ‘माताजी’ कहते हुए पूछा, ‘‘आप लंगड़ा कर क्यों चल रही हैं? क्या आप घुटनों के दर्द से परेशान हैं?’’

उस लड़के के मुंह से इतना सुनना था कि शीला ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा, ‘‘हां बेटा, मैं काफी समय से घुटनों के दर्द से परेशान हूं. मेरे पति को भी इसी मर्ज ने जकड़ रखा है. वे तो खाट पर पड़े हुए हैं. उन को कहांकहां नहीं दिखाया लेकिन तमाम इलाज कराने के बाद भी मर्ज बढ़ता ही जा रहा है. समझ में नहीं आ रहा है कि कैसे ठीक होगा…’’

शीला की बात अभी पूरी भी नहीं हो पाई थी कि वह लड़का बोल पड़ा, ‘‘माताजी, मेरे मातापिता भी इसी तरह परेशान हुआ करते थे जिन्हें एक बाबाजी ने चंद दिनों में ही भलाचंगा कर दिया…’’

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उस लड़के की बात अभी खत्म भी नहीं हो पाई थी कि एक आदमी उन्हीं की ओर आता दिखाई दिया. उस की ओर इशारा करते हुए वह लड़का बोला, ‘‘लीजिए, बाबाजी भी आ गए. मैं आप से इन्हीं की बातें कर रहा था.’’

तब तक वह आदमी भी उन के करीब आ चुका था. उस लड़के ने हाथ जोड़ कर उसे प्रणाम किया और देखते ही देखते वहां से गायब हो गया.

ऐसे फंसती चली गईं शीला

शीला ने उस आदमी की ओर उम्मीद भरी नजरों से देखते हुए कहा, ‘‘हमें भी कुछ उपाय बताएं, ताकि मैं और मेरे पति इस दर्द से छुटकारा पा लें.’’

शीला की बात सुन कर वह आदमी तपाक से बोला, ‘‘यह दर्द कोई मर्ज नहीं बल्कि शनिदेव का प्रकोप है जिस ने आप के पूरे परिवार को जकड़ रखा है. इस पर दवा और डाक्टर का कोई असर नहीं होने वाला है. इस से छुटकारा पाने का एक ही रास्ता है कि सोने के गहनों से शनिदेव की पूजा कर के इस बला से बचो.’’

उस आदमी ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, ‘‘अगर आप इस बाधा से अभी और हमेशा के लिए छुटकारा पाना चाहती हैं तो सिर्फ सोने के जेवर ले कर आएं…’’

उस आदमी ने जेवर लाने की विधि बताई और बोला, ‘‘यह काम सूरज डूबने से पहले करना होगा. और हां, इस बात का खयाल रखना कि इस बीच कोई आप को टोके नहीं, वरना आप का बुरा हो जाएगा.’’

अपने शब्दों के जरीए उस आदमी ने शीला को इस कदर भरमजाल में जकड़ लिया था कि वे उस पर यकीन करती चली गईं. वे बाजार जाने के बजाय सीधे घर गईं और अपने गहनों के साथ तीनों बेटियों के भी गहनों को एक पोटली में ले कर उस आदमी द्वारा बताई गई जगह पर पहुंच गईं.

वहां वह आदमी पहले से ही बैठा हुआ था. उस के आसपास 2-4 और लोग भी बैठे हुए थे. 2 औरतें भी बैठी हुई थीं. बगल में हवन वगैरह का सामान रखा हुआ था.

वहां पहुंच कर शीला ने अपने साथ लाए जेवर, जिन में सोने का एक हार, सोने की 4 चेन, सोने की  6 अंगूठियां, 2 झाले, 2 मांग टीके, 2 कंगन, 2 झुमके, एक नैकलैस वगैरह जिन की कीमत तकरीबन 7 लाख रुपए थी, उस आदमी को सौंप कर उसी के बगल में बैठ गईं.

शीला के हाथों से पोटली अपने हाथों में लेने के बाद वह आदमी उन्हें सामने बैठने के साथ आंखों को बंद कर ध्यान लगाने की बोल गया.

आंखें मूंद कर बैठने के बाद शीला को एक मंत्र भी पढ़ने के लिए कह गया और वह आदमी खुद भी मंत्र पढ़ने लगा.

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मंत्र पढ़ने के साथ उस आदमी ने शीला की पोटली से गहने निकाल कर अपनी झोली में डाल दिए और एक डब्बे में मिट्टी वगैरह भर कर उसे धागे से बांध दिया और शीला को आंखें खोलने की बोल कर उन्हें वह डब्बा पकड़ाते हुए बोला, ‘‘अब आप घर जाएं और इस डब्बे को सोमवार की सुबह सूरज की किरणें निकलने से पहले थाली में फूल रख कर मेरे बताए सिद्ध मंत्र को पढ़ने के साथ खोलिएगा.’’

उस आदमी ने अगले हफ्ते उन के घर आने की कहते हुए अपनी बात पूरी की. शीला को पूरी तरह से भरोसा हो चला था कि अब उन को दर्द से छुटकारा मिलने वाला है.

हासिल हुआ पछतावा

यह अंधविश्वास शीला के लिए घातक साबित होने के लिए काफी था. उस आदमी ने उन्हें चेता रखा था कि उस के द्वारा बताए गए पूजापाठ में वे किसी को हमराज नहीं बनाएंगी वरना दुखों से छुटकारा नहीं मिलेगा.

डरीसहमी शीला ने भी कुछ ऐसा ही किया. सोमवार की सुबह उन्होंने गहनों से भरा डब्बा खोला तो उन के पैरों तले जमीन खिसक गई. डब्बे में गहनों की जगह मिट्टी वगैरह थी.

लाखों रुपए के गहनों को लुटा बैठने के बाद शीला को दर्द से छुटकारा तो क्या मिला उन की परेशानियां और बढ़ गईं. मारे शर्म के वे किसी से कुछ कह भी नहीं पा रही थीं.

देश में आज भी ऐसे लोगों की भरमार है जो अंधविश्वास जैसी अधकचरी बातों पर भरोसा करते चले आ रहे हैं. शीला जिस लड़के और उस के द्वारा बताए गए शख्स को जानती तक नहीं थीं, उन की बातों में आ कर वे परिवार वालों को बताए बगैर घर के 7 लाख रुपए के जेवरात को लुटा बैठीं.

औरतों को जागरूक कर रही बांदा की समाजसेविका छाया सिंह कहती हैं,

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‘‘जब तक औरतें अधकचरी जानकारी से बाहर निकलते हुए खुद जागरूक होने और परिवार को जागरूक करने का काम नहीं करेंगी तब तक समाज में उन्हें बराबरी का हिस्सा मिलने वाला नहीं है.

‘‘बाबाओं के अलावा सड़कछाप चोलाधारियों की शरण में जाने और उन की अधकचरी बातों में आने से नुकसान ही होता है. ऐसे में लोगों को बेखौफ हो कर ऐसे मामलों की पुलिस को सूचना देनी चाहिए.’’

* ऐसे लोगों के चक्कर में पड़े ही नहीं.

परिवार के लोगों को पूरी बात बताएं.

* ऐसे मामलों में बिना देर किए पुलिस को सूचना दें, ताकि कार्यवाही हो सके.

* परेशानी, बीमारी की हालत में माहिर डाक्टर की सलाह लें न कि ऐसे बाबाओं और फकीरों की जो आप को लूट कर चलते बनें.

* एक डाक्टर के बताए इलाज से आराम न मिले तो दूसरे को दिखाएं. देश में माहिर डाक्टरों की कमी नहीं है.

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ऐतिहासिक होगा पहला डे-नाइट टेस्ट मैच, जानिए लाल गेंद से कैसे अलग है पिंक गेंद?

भारत और बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक डे-नाइट टेस्ट मैच कोलकाता में खेला जाना है. हर क्रिकेट प्रेमी इस पल का बेसब्री से इंतजार भी कर रहा है. खिलाड़ी भी इसको लेकर खासा उत्साहित हैं और जमकर पसीना भी बना रहे हैं. ये मैच कोलकाता स्थित ईडन गार्डन्स में खेला जाएगा. इसके लिए तैयारियां भी पूरी हो चुकी हैं और दोनों टीमें कोलकाता पहुंच भी चुकी हैं.

दिन-रात टेस्ट मैच गुलाबी गेंद से खेला जाएगा और इस मैच को लेकर अब सबकी नजरें इस बात पर लगी हुई हैं कि क्या इस मैच में यह गेंद रिवर्स स्विंग होगी या नहीं. इस बीच, बीसीसीआई के अधिकारियों ने बताया है कि मैदान पर रिवर्स स्विंग हासिल करने के लिए गुलाबी गेंद की सिलाई हाथ से की गई है ताकि यह रिवर्स स्विंग में मददगार साबित हो सके.

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अधिकारी ने कहा, “गुलाबी गेंद को हाथ से सिलकर तैयार किया गया है ताकि यह अधिक से अधिक रिवर्स स्विंग हो सके. इसलिए गुलाबी गेंद से स्विंग हासिल करने में अब कोई समस्या नहीं होनी चाहिए.” गुलाबी गेंद को बनाने में लगभग सात से आठ दिन का समय लगाता है और फिर इसके बाद इस पर गुलाबी रंग के चमड़े लगाए जाते हैं. एक बार जब चमड़ा तैयार हो जाता है तो फिर उन्हें टुकड़ों में काट दिया जाता है, जो बाद में गेंद को ढंक देता है.

इसके बाद इसे चमड़े की कटिंग से सिला जाता है और एक बार फिर से रंगा जाता है और फिर इसे सिलाई करके तैयार किया जाता है. गेंद के भीतरी हिस्से की सिलाई पहले ही कर दी जाती है और फिर बाहर के हिस्से की सिलाई होती है. एक बार मुख्य प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो फिर गेंद को अंतिम रूप से तौलने और उसे बाहर भेजने से पहले उस पर अच्छी तरह से रंग चढ़ाया जाता है. गुलाबी गेंद पारंपरिक लाल गेंद की तुलना में थोड़ा भारी है.

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गुलाबी गेंद को लेकर टीम इंडिया के सामने कई चुनौतियां हैं.गुलाबी गेंद से स्पिनर्स को ज्यादा मदद नहीं मिलेगी. दिलीप ट्रॉफी में गुलाबी गेंद से खेलते हुए कुलदीप यादव को ये मुश्किल हुई थी. वहीं गेंद रिवर्स स्विंग भी नहीं होगी क्योंकि गुलाबी गेंद की चमक बनाए रखने के लिए लाख का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. अबतक खेले गए 11 डे-नाइट टेस्ट में तेज गेंदबाजों का औसत 24 के करीब रहा है जबकि स्पिनर्स का 32 के करीब.

दूसरी ओर तेज गेंदबाजों को खेलना बल्लेबाजों के लिए चुनौती होगी. 2016 में गुलाबी गेंद से हुए एक घरेलू मैच में मोहम्मद शमी को खेलना बल्लेबाजों के लिए असंभव हो गया था. बांग्लादेश और टीम इंडिया में ज्यादातर खिलाड़ियों को गुलाबी गेंद से खेलने का अनुभव नहीं है. टीम इंडिया में सिर्फ चेतेश्वर पुजारा, मयंक अग्रवाल, ऋषभ पंत, और कुलदीप यादव फर्स्ट क्लास डे-नाइट क्रिकेट खेले हैं. वहीं रोहित, विराट, रहाणे, अश्विन, उमेश जैसे खिलाड़ी पहली बार गुलाबी गेंद से खेलेंगे.

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Bigg Boss 13: सिद्धार्थ और असीम के बीच आईं शहनाज गिल तो भड़क उठे फैंस, किए ऐसे-ऐसे ट्वीट्स

कुछ दिनों पहले कंटेस्टेंट सिद्धार्थ शुक्ला और असीम रियाज के बीच जमकर लड़ाई दर्शकों को देखने को मिली. लेकिन बीते वीकेंड के वौर के बाद ये दोनों फिर से गले लग कर दोस्त बन गए थे. लेकिन एक बार फिर इनकी दोस्ती में दरार पड़ती दिखाई दे रही है. दरअसल बीते एपिसोड में सिद्धार्थ और रश्मि देसाई के बीच काफी लड़ाई झगड़ा हुआ जिसमें असीम नें बीच में आ कर रश्मि के सपोर्ट में बोल कर सिद्धार्थ को लड़ाई खत्म करने के लिए कहा.

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सिद्धार्थ और रश्मि की लड़ाई के बीच आए असीम रियाज…

जब सिद्धार्थ और रश्मि की लड़ाई के बीच असीम रियाज आए तो सिद्धार्थ को ये बिल्कुल अच्छा नहीं लगा और वे गुस्से में आग बबूला हो गए. इसी दोरान सिद्धार्थ और असीम के बीच लड़ाई काफी बढ़ गई और बात हाथापाई तक जा पहुंची. इसी दौरान सिद्धार्थ शुक्ला का साथ देने पहुंची पंजाब की कैटरीना कैफ यानी शहनाज गिल. शहनाज सिद्धार्थ को ही सपोर्ट करती दिखाई दीं.

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फैंस को पसंद नहीं आया शहनाज का सिद्धार्थ को सपोर्ट…

यही नहीं बल्कि ‘स्वंयवर’ टास्क के चलते भी जब सिद्धार्श शुक्ला और असीम रियाज का झगड़ा हुआ था तब भी शहनाज ने सिद्धार्थ को ही सपोर्ट किया था. पर लगता है सिद्धार्थ और असीम की लड़ाई में शहनाज का कूदना दर्शकों को बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा है. इसी मुद्दे पर बिग बौस के फैंस नें उन्हें ट्विटर पर बुरा भला बोलना शुरू कर दिया. चलिए आपको दिखाते हैं कुछ ट्वीट्स…

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शहनाज को ही नहीं बल्कि सिद्धार्थ शुक्ला को भी मिल रहे हैं ऐसे कमेंट्स…

असीम रियाज के सपोर्ट में उतरे फैंस और किए ऐसे ट्वीट्स…

भोजपुरी फिल्‍म ‘आंख मिचौली’ की शूटिंग हुई कंप्‍लीट, ये हौट एक्ट्रेस आएंगी नजर

यश & राज इंटरटेंमेंट के बैनर तले बन रही एन आर घिमरे की भोजपुरी फिल्‍म ‘आंख मिचौली’ की शूटिंग कंप्‍लीट हो चुकी है. इस फिल्‍म की शूटिंग लखनऊ और नेपाल की खूबसूरत वादियों में की गई है. फिल्‍म को लेकर फिल्‍म की पूरी कास्‍ट उत्‍साहित है, लेकिन ‘आंख मिचौली’ में एक अहम किरदार में नजर आने वाली खूबसूरत अभिनेत्री त्रिशा खान कुछ ज्‍यादा ही एक्‍साइटेड हैं. त्रिशा खान फिल्‍म के पैक अप के बाद से ही इसकी चर्चा करते अक्‍सर नजर आ जाती हैं.

शूटिंग के दौरान की खूब मस्‍ती…

त्रिशा खान ने फिल्‍म की शूटिंग कंप्‍लीट करने के बाद कहा कि हमने एक बेहतरीन कहानी वाली फिल्‍म का यादगार शूट कंप्‍लीट कर लिया. इस दौरान हमने खूब मस्‍ती भी की. इस फिल्‍म में मेरा किरदार बेहद स्‍ट्रांग है. इसलिए मुझे पूरा यकीन है दर्शाकों को मेरा किरदार पसंद आयेगा.

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मजेदार होने वाली है ‘आंख मिचौली’…

फिल्‍म की कहानी को अभी रिवील करना उचित नहीं है, लेकिन फिल्‍म के टायटल से कुछ तो लोग अंदाजा लगा ही सकते हैं कि फिल्‍म कितनी मजेदार होने वाली है. इस फिल्‍म में मेरे साथ सभी कलाकारों ने बेहतरीन काम किया है. मैं निर्देशक एन आर घिमीरे की भी शुक्रगुजार हूं, जिनके साथ एक शानदार कंसेप्‍ट पर काम करने का मौका मिला.

लुक, टीजर और ट्रेलर भी करेंगे जल्द ही जारी…

वहीं, ‘आंख मिचौली’ को लेकर एन आर घिमरे ने कहा कि यह काफी हेल्‍दी मनोरंजन वाली फिल्‍म है. दर्शकों को यह खुद से कनेक्‍ट करने में कामयाब होगी. हमने फिल्‍म पर खूब मेहनत की है. अब शूटिंग के बाद हम फिल्‍म के पोस्‍ट प्रोडक्‍शन फेज के लिए भी तैयार हैं. जल्‍द ही हम फिल्‍म का लुक, टीजर और ट्रेलर भी जारी करेंगे. उन्‍होंने बताया कि फिल्‍म ‘आंख मिचौली’ की कहानी सूरज और एन आर ने लिखी है.

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त्रिशा खान के अलावा ये सब कलाकार भी आएंगे नजर…

फिल्‍म के गीतकार राजेश दुबे और मनोज द्विवेदी व संगीतकार ओम ओझा हैं. डीओपी दिव्‍या राज सुबेदी और एक्‍शन प्रदीप खड़का है. कोरियोग्राफी कानू मुखर्जी और कवि राज ने किया है. एडिटर संजय जायसवाल और कला रंधीर का है. फिल्‍म में त्रिशा खान के अलावा आकाश सिंह, मनोज द्विवेद्वी, समर्थ चतुर्वेदी, सुमित सिंह, संजय वर्मा, माया यादव,  संजय गुप्‍ता, नेहा दास, रूप श्री, अंजली बनर्जी और संजय  मुख्‍य भूमिका में हैं.

अंजलि इब्राहिम और लव जेहाद!

एक मुस्लिम शख्स द्वारा हिंदू लड़की से विवाह का मामला, छत्तीसगढ़ में इन दिनों कुछ इस तरह सरगर्म है की क्या शहर क्या परिवार, क्या हिंदू मुस्लिम और बौद्धिक वर्ग सहित पुलिस और न्यायालय के साथ-साथ राजनीति के धुरंधर इस मामले में इनवौल्व हो चुके हैं.

और सात माह से अंजलि नामक युवती जो 23 वर्ष की है के मानवअधिकारों को ताक में रखकर, सभी अपनी अपनी ढपली, अपना अपना राग भज रहे है  परिणाम स्वरूप अंजलि जो एक तरह से सखी सेंटर में निरुद्ध है को, अपनी आवाज दुनिया को सुनाने की खातिर महात्मा गांधी के…  उपवास, भूख हड़ताल को अपना हथियार बनाना पड़ा. छत्तीसगढ़ के गांधीवादी, डॉक्टर गुलाब राय पंजवानी कहते हैं, यह मामला एक इंसान के अधिकारों का है यह सच भी है साभार ऊपर मानूस सत्य!

शायद इसीलिए गांधी के बताए रास्ते पर चल अंजलि को गूंगे बहरी व्यवस्था को अपनी आवाज सुनाने भूख हड़ताल करनी पड़ी.

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अंजलि इब्राहिम का मामला 23 फरवरी 2018 के बाद सुर्खियां बना .आज देश दुनिया में लव जिहाद के नाम पर छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का यह मामला एक तरह से छत्तीसगढ़ सरकार और प्रशासन के लिए एक बवंडर बन गया है.

क्या है मामला जानिए

दरअसल, छत्तीसगढ़ के अशोक जैन की 23 वर्षीय पुत्री ने वहीं के एक मुस्लिम शख्स इब्राहिम से आर्य समाज में विवाह कर लिया .इब्राहिम ने विवाह से पूर्व आर्य समाज में अपना धर्म बदल हिंदू बन गया और उसे आर्यन आर्य नाम मिल गया. उसने और अंजलि ने विवाह कर लिया मगर इसके बाद इसे कुछ कतिपय तत्वों ने लव जिहाद का नाम दे दिया.

सनद रहे 2018 में छत्तीसगढ़ में भाजपा की हिंदू हितों की पोषक सरकार थी, तब गली गली में हिंदुत्व की ढोल पीटती संस्थाएं, लोग थे और  शासन-प्रशासन में उनकी पुछपरख भी थी. ऐसे मे अंजलि के पिता अशोक जैन के सक्रिय होते और अंजलि को मनोरोगी निरूपित करने के बाद मामला सरगर्म होने होते चला गया. इब्राहिम जेल चला गया अंजली अशोक जैन के घर पहुंच गई. मामला तब चर्चा में आया जब इब्राहिम ने उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट तक अंजली का मामला लेकर न्याय की गुहार लगाई.

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चूंकि मामले में कई प्रतिष्ठित ताकतें अपना जोर लगा रही थी ऐसे में अंजली का यह मामला पेचीदा होता चला गया और अंततः कोर्ट के आदेश पर अंजलि को स्वतंत्र सोच की खातिर रायपुर के सखी सेंटर में रखा गया है,जहां 20 नवंबर को, उसकी भूख हड़ताल के बाद उसे छोड़ने का निश्चय किया गया है.

भूख हड़ताल से हड़कंप

अंजली बालिग है. देश में संविधान का शासन है. उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय है . यह सब होने के बाद भी एक लड़की किस तरह तमाशा बन  कर दुनिया में भारत के मानव अधिकार हनन की नजीर बन गई यह देखने लायक बात है. एक छोटी सी चीज किस तरह दबाव प्रभाव में अपनी प्राकृतिक, स्वतंत्रता, अस्तित्व को खो बैठती है यह भी अंजली इब्राहिम का विवाह की परते विहूप बन कर हमें नग्न सच दिखा रही हैं.

इस संपूर्ण मामले में अशोक जैन और उसके परिवार की अपनी कुंठा, अधिकार और प्रभाव है. उन्होंने कथित रूप से सात याचिकाएं अदालत में लगा रखी है दूसकी तरफ इब्राहिम आर्य अंजली आर्य है जो एक भारतीय नागरिक की हैसियत से अपनी कथित पत्नी अंजलि को पाना चाहता है और न्यायालय की देहरी पर मत्था टेके हुए हैं.

एक तरफ हिंदुत्व व अतिवादी संगठन है कुछ चेहरे और नाम है  जो इस साधारण से प्रकरण को अपने अपने ढंग से देखते और भूनाने की जुगत में है . तो क्या अंजलि को जीने का हक है… यह बहुत जल्द स्पष्ट होने वाला है या फिर वह भी एक चीड़, पक्षी की भांति दबोच दी जाएगी कैद रखी जाएगी.

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20 नवंबर को प्रशासन द्वारा आम सूचना के अनुसार दिन के 11:00 बजे सखी सेंटर से अंजलि को एक तरह से रिहा कर दिया जाएग . विगत लंबे अरसे से वह यहां कोर्ट के एक आदेश के अनुसार रखी गई थी ताकि स्वतंत्र रूप से सोच विचार कर वह अपने भविष्य का निर्णय स्वयं करें . पिता, परिजनों व इब्राहिम यानी आर्यन आर्य से बहुत दूर. आगे यह स्पष्ट होगा की वह कौन सी डगर जाएगी- क्या 11:00 बजे बाहर आकर वह इब्राहिम का हाथ थामेगी  या फिर अपने पिता के घर जाना पसंद करेगी.

Bigg Boss 13: आखिर कौन 5 सदस्य हुए घर से बेघर होने के लिए नोमिनेटिड, पढ़ें खबर

बिग बौस सीजन 13 का माहौल दिन ब दिन रोमांचक होता जा रहा है. हर कोई घर के अंदर बने रहने के लिए अपने सर से एड़ी तक को जोर लगाता दिखाई दे रहा है. इसी दौड़ में बीते वीकेंड के वौर में सलमान खान नें इस रेस से एक कंटेस्टेंट को घर से बेघर कर दिया और उस कंटेंस्टेंट का नाम है अरहान खान. इसी के चलते बीते एपिसोड में बिग बौस नें सभी घरवालों को एक नोमिनेशन टास्क दिया जिसमें सभी घरवालों को 2 ऐसे नाम बताने थे जिन्हें वे घर से बेघर नहीं होने देना चाहते.

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माहिरा ने लिया विशाल आदित्य सिंह का नाम…

इसी टास्क के दौरान घर में कई लड़ाई-झगड़े दर्शकों को देखने को मिले. कंटेस्टेंट माहिरा शर्मा और रश्मि देसाई की दोस्ती के बीच भी नोमिनेशन की दीवार देखने को मिली. दरअसल इस टास्क में माहिरा ने कंटेस्टेंट विशाल आदित्य सिंह का नाम लिया तो रश्मि इसी बात से माहिरा से नाराज होती दिखाई दीं कि उन्होनें दो हफ्ते पहले आए कंटेंस्टेंट का नाम ले लिया और उनका नहीं लिया.

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ये 5 सदस्य हैं नोमिनेटिड…

साथ ही कंटेस्टेंट सिद्धार्थ शिक्ला को बिग बौस ने सजा के तौर पर 2 हफ्ते तक नोमिनेट रहने की सजा सुनाई थी तो वे इस हफ्ते भी नोमिनेट ही रहने वाले हैं. सिद्धार्थ शुक्ला के साथ घर में 4 सदस्य और नोमिनेट हुए हैं जिनमें से रश्मि देसाई, आरती सिंह, खेसारी लाल यादव और देवोलीना भट्टाचार्या का नाम शामिल है.

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अब देखने वाली वात ये होगी कि अरहान खान के बाद आने वाले वीकेंड के वौर में इन 5 सदस्यों में से कौन होगा घर से बेघर.

महुआ के पेड़ का अंधविश्वास

अंधविश्वास की बेडि़यों में समाज के केवल अनपढ़ या निचले और थोड़े ऊंचे तबके के लोग ही नहीं जकड़े हुए हैं, बल्कि अपनी काबिलीयत का दंभ भरने वाले पढ़ेलिखे और ऊंचे तबके के लोग भी इस की गिरफ्त में हैं.

लोगों की आदत कुछ इस तरह हो गई है कि अखबार और पत्रपत्रिकाओं को पढ़ने के बजाय वे सोशल मीडिया में आने वाली खबरों पर यकीन करने लगे हैं. लोग किसी खबर या घटना के सही या गलत होने की पड़ताल न कर के कहीसुनी बातों पर भरोसा कर के भेड़चाल चलने लगे हैं.

इसी भेड़चाल का नजारा नवरात्र के मौके पर मध्य प्रदेश के हिल स्टेशन पिपरिया, पचमढ़ी से लगे सतपुड़ा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में देखने को मिला. पिपरिया से तकरीबन 17 किलोमीटर दूर नयागांव ग्राम पंचायत के तहत कोड़ापड़रई गांव के जंगल में एक महुआ के पेड़ को महज छूने भर से लोगों की शारीरिक और मानसिक परेशानियां दूर होने की खबर सोशल मीडिया पर क्या वायरल हुई, हजारों की तादाद में अंधभक्तों की भीड़ वहां जमा होने लगी.

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हमारे देश में गरीबी की एक वजह यह भी है कि यहां लोग कामधंधा छोड़ कर चमत्कारों के पीछे भागने लगते हैं.

महुआ के चमत्कारिक पेड़ का राज जानने के लिए शरद पूर्णिमा के दिन मैं अपने पत्रकार दोस्त के साथ वहां पहुंचा तो वहां का नजारा देख कर हम दंग रह गए. सतपुड़ा के घने जंगलों के बीच कोरनी और कुब्जा नदी को पार कर हम वहां पहुंच गए.

महुआ के पेड़ के चारों ओर हजारों की तादाद में मर्दऔरतों की भीड़ जमा थी. पेड़ के आसपास नारियल, अगरबत्ती के खाली पैकेट और प्लास्टिक की पन्नियों का ढेर लगा था. लोग अपने हाथों में जलती हुई अगरबत्ती और नारियल ले कर महुआ के पेड़ के चक्कर लगा रहे थे.

उस महुआ पेड़ के पास उसे छोटेछोटे दूसरे पेड़ों की शाखाओं पर लोगों द्वारा अपनी मुराद पूरी होने के लिए धागा, कपड़ा और प्लास्टिक की पन्नी बांधने का सिलसिला चल रहा था. पास जा कर देखा तो उस पेड़ के पास देवीदेवताओं की मूर्तियां और फोटो रखे थे, जिन पर फूल, बेलपत्र और नारियल चढ़ाने के लिए लोग धक्कामुक्की कर रहे थे.

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वहां पर आसपास के पत्रकारों और टैलीविजन चैनलों के प्रतिनिधि भी जमा थे, जो महुआ पेड़ के चमत्कार को बढ़चढ़ कर पेश कर रहे थे.

हम ने वहां मौजूद लोगों से बातचीत का सिलसिला शुरू किया तो पता चला कि नवरात्र के तकरीबन एक हफ्ते पहले एक आदिवासी चरवाहा जंगल में बकरी चराने गया था, जिस को जोड़ों के दर्द के चलते चलनेफिरने में परेशानी होती थी. उस शख्स ने अनजाने ही पेड़ को छू लिया तो उस के जोड़ों की पीड़ा दूर हो गई.

जब यह बात आदिवासी इलाकों में फैली तो वहां के अनपढ़ आदिवासी सतरंगी  झंडे और औरतें कलश ले कर उस जगह पर पहुंच गए और पेड़ को पूजने लगे.

सोशल मीडिया पर जब यह घटना वायरल हुई, तो मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, बैतूल, नरसिंहपुर, रायसेन, होशंगाबाद जिले के अंधभक्तों की भीड़ वहां जमा होने लगी. भीड़ के मनोविज्ञान का फायदा प्रसाद बेचने वाले दुकानदारों ने जम कर उठाना शुरू कर दिया.

इस जगह पर ऐसी तमाम दुकानें लग रही हैं. चायनाश्ते की दुकानों पर धड़ल्ले से सिंगल यूज प्लास्टिक के डिस्पोजल का ढेर संरक्षित जंगल को प्रदूषित कर रहा है.

एक पंडित वहां आए लोगों को कुमकुम का तिलक लगा कर 10-10 रुपए दक्षिणा ले कर अपना आशीर्वाद बांट रहे थे.

कुछ पंडेपुजारी तंत्रमंत्र के नाम पर लोगों को बरगला कर महुआ के पेड़ के चमत्कार को महिमामंडित कर अपनी दानदक्षिणा बटोरने में लग गए थे.

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पूरे वन क्षेत्र में मेले जैसा नजारा देखने को मिल रहा था. 2-3 दुकानों पर बाकायदा महुआ के पेड़ पर अंकित देवीदेवताओं के चित्र वाले फोटो 50-50 रुपए में बेचे जा रहे थे और लोग उन्हें खरीद भी रहे थे.

हर दिन भीड़ के बढ़ने से आसपास की सड़कों पर जाम लगने लगा तो पुलिस प्रशासन हरकत में आया. तहसील के एसडीएम और तहसीलदार पुलिस टीम के साथ वहां पहुंचे तो भीड़तंत्र के सामने वे भी मायूस हो गए.

वन्य जीवों की सिक्योरिटी के नजरिए से इस क्षेत्र को प्रतिबंधित किया गया है. लेकिन हैरानी की बात यह रही कि वन विभाग का अमला अंधभक्तों की भीड़ को रोकने में नाकाम ही रहा.

वन विभाग के रेंजर पीआर पदाम अपनी गाड़ी में लगे माइक से प्रतिबंधित क्षेत्र का हवाला देते हुए लोगों को आगे न बढ़ने की सम झाइश दे रहे थे, लेकिन भीड़ पर इस का कोई असर नहीं पड़ रहा था.

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के एसडीओ लोकेश नैनपुरे का कहना था कि वहां पर कोई चमत्कार नहीं हो रहा है, लेकिन हम बलपूर्वक लोगों को हटा नहीं सकते हैं.

पिपरिया स्टेशन रोड थाने के प्रभारी सतीश अंधवान अपने स्टाफ के साथ सिविल ड्रैस में पहुंचे और अंधविश्वास को रोकने के बजाय वे भी भीड़तंत्र का हिस्सा बन गए.

छिंदवाड़ा जिले के तामिया के बाशिंदे सोमनाथ ठाकुर महुआ के पेड़ के इस चमत्कार की बात सुन कर अपनी मां को ले कर यहां आए थे, जो पिछले 2 सालों से लकवे के चलते बिस्तर पर पड़ी थीं. पर यहां आ कर उन्हें निराश ही होना पड़ा.

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कोड़ापड़रई गांव के इस चमत्कारिक पेड़ की अफवाह पर यकीन कर टिमरनी के रायबोर गांव का बबलू बट्टी आज जिंदगी और मौत के बीच जू झ रहा है.

13 अक्तूबर, 2019 को बबलू बट्टी ने पेड़ की परिक्रमा की और ठीक होने की मंशा से घर वापस आ गया, लेकिन उस की हालत बिगड़ गई और उसे आननफानन भोपाल के बड़े अस्पताल में भरती कराना पड़ा.

रायबोर गांव के राजू दीक्षित ने बताया कि अभी बबलू बट्टी की हालत गंभीर है और उसे आईसीयू में रखा गया है.

छिंदवाड़ा चावलपानी की 30 साला बुधिया बाई ठाकुर के मुंह में कैंसर हो गया और उस का पति रामविलास ठाकुर डाक्टरों को छोड़ उस पेड़ के पास ले कर आया.

हरदा के राजेंद्र मेहरा, बरेली के सुलतान खान, शबीना बी समेत अनेक लोग अपनी गंभीर बीमारी ठीक होने की कामना करते हुए वहां आ रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई भी शख्स ऐसा नहीं मिला जिस ने खुल कर कहा हो कि उसे महुआ के पेड़ को छूने से कोई राहत मिली है.

उस पेड़ को ले कर हर रोज नईनई अफवाहें चल रही हैं और रोज ही हजारों लोग उस पेड़ को देखने जा रहे हैं, जिसे लोग चमत्कारी मान रहे हैं.

आसपास के इलाकों के लोगों से बातचीत में यह पता चला कि असल में नयागांव के 30 साला रूप सिंह ठाकुर ने अफवाह उड़ाई कि उसे उस महुआ के पेड़ ने खींच कर चिपका लिया और तकरीबन 10 मिनट तक चिपकाए रखा.

इस के बाद वह रोजाना ही उस पेड़ के पास जाता रहा और ठीक हो गया, लेकिन गांव वालों ने यह नहीं बताया कि उसे कौन सी बीमारी थी.

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वन विभाग के बीट प्रभारी ने इस अफवाह उड़ाने वाले को पहचान लिया है. रूप सिंह पढ़ालिखा नहीं है और लोग उस की बातों में आ कर दर्शनों के लिए वहां आने लगे और देखते ही देखते यह तादाद हजारों में पहुंच गई.

गंभीर बीमारी में आराम लगने की चाह से बहुत दूरदूर के लोग महुआ के इस पेड़ के पास पहुंच रहे हैं. बनखेड़ी से 15 किलोमीटर दूर और पिपरिया से 17 किलोमीटर दूर इस जगह का किराया भी वाहन चालक जम कर वसूल रहे हैं. यहां आ कर यह देखने को मिला कि पढ़ेलिखे सभ्य समाज के लोग कैसे एक अनपढ़ आदमी द्वारा फैलाई गई अफवाह के चक्कर में अपना कीमती समय और पैसा खर्च कर रहे हैं.

प्रतिबंधित सतपुड़ा के जंगल में चूल्हा जला कर बाटीभरता और हलवापूरी का भंडारा चल रहा है. इस से जंगल का तापमान भी बढ़ गया है. पेड़ों के नीचे सूखे हुए पत्तों और लकडि़यों का ढेर लगा है, जो कभी किसी बड़ी अग्नि दुर्घटना की वजह भी बन सकता है. अभी तक प्रशासन की ओर से लोगों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. धर्म के नाम पर लोगों की आस्था से खिलवाड़ किया जा रहा है.

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दिखना चाहते हैं सबसे कूल तो जरूर ट्राय करें सत्यजीत दुबे के ये लुक्स

साल 2011 में फिल्म ‘औल्वेज कभी कभी’ से अपने फिल्मी करियर की शुरूआत करने वाले बहरतीन एक्टर सत्यजीत दुबे हाल ही में फिल्म ‘प्रस्थानम’ में बौलीवुड इंडस्ट्री के बाबा यानी संजय दत्त और अली फजल के साथ दिखाई दिए थे. इस फिल्म में सत्यजीत दुबे की एक्टिंग को काफी सराहना मिली थी. सत्यजीत ना सिर्फ अच्छी एक्टिंग के लिए पौपुलर हैं बल्कि उन्के लुक्स भी काफी लोग फौलो करते हैं. तो आज हम आपको दिखाएंगे बोलीवुड एक्टर सत्यजीत दुबे के कुछ ऐसे लुक्स जिसे देख आपका मन खुद ब खुद उन्हें ट्राय करने को कर जाएगा.

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कैसुअल लुक…

सत्यजीत दुबे ने अपने कैसुअल लुक में ब्लैक कलर की प्लेन टी-शर्ट के ऊपर महरून कलर की जैकेट और साथ में ब्लू कलर की जींस पहनी हुई है. ये कैसुअल लुक आप अपनी डेली रूटीन या कौलेज में ट्राय कर सकते हैं.

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सत्यजीत इन पिंक…

इस लुक में सत्यजीत ने व्हाइट कलर की प्लेन टी-शर्ट के ऊपर पिंक कलर का ब्लेजर और साथ ही पिंक कलर का ट्राउसर कैरी किया हुआ है. सत्यजीत पर ये कलर काफी सूट कर रहा है, तो अगर आपका भी रंग गोरा है तो जरूर ट्राय करें ये स्टाइलिश पिंक कलर.

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ट्रेंडी लुक…

इस ट्रेंडी लुक में सत्यजीत दुबे ने व्हाइट कलर की टी-शर्ट के ऊपर स्टाइलिश ट्रेंडी जैकेट कैरी की हुई है और साथ ही उन्होनें ब्लैक कलर की जींस पहनी हुई है. इस लुक के साथ उन्होनें शूज ना पहन कर लौंग बूट कैरी किए हुए हैं जो काफी सूट कर रहे हैं.

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फंकी लुक…

इस फंकी लुक में सत्यजीत दुबे नें ब्लू कलर की ‘rugged’ जींस के साथ व्हाइट प्लेन टी-शर्ट और साथ ही ब्लू कलर की जैकेट पहनी हुई है. आप भी सत्यजीत जैसा फंकी लुक ट्राय कर किसी को भी आसानी से इम्प्रेस कर सकते हैं.

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