भारत और बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक डे-नाइट टेस्ट मैच कोलकाता में खेला जाना है. हर क्रिकेट प्रेमी इस पल का बेसब्री से इंतजार भी कर रहा है. खिलाड़ी भी इसको लेकर खासा उत्साहित हैं और जमकर पसीना भी बना रहे हैं. ये मैच कोलकाता स्थित ईडन गार्डन्स में खेला जाएगा. इसके लिए तैयारियां भी पूरी हो चुकी हैं और दोनों टीमें कोलकाता पहुंच भी चुकी हैं.

दिन-रात टेस्ट मैच गुलाबी गेंद से खेला जाएगा और इस मैच को लेकर अब सबकी नजरें इस बात पर लगी हुई हैं कि क्या इस मैच में यह गेंद रिवर्स स्विंग होगी या नहीं. इस बीच, बीसीसीआई के अधिकारियों ने बताया है कि मैदान पर रिवर्स स्विंग हासिल करने के लिए गुलाबी गेंद की सिलाई हाथ से की गई है ताकि यह रिवर्स स्विंग में मददगार साबित हो सके.

ये भी पढ़ें- T-20 फौर्मेट में गेंदबाजों के आगे फीके पड़े बल्लेबाजों के तेवर, देखें दिलचस्प रिकॉर्ड

अधिकारी ने कहा, “गुलाबी गेंद को हाथ से सिलकर तैयार किया गया है ताकि यह अधिक से अधिक रिवर्स स्विंग हो सके. इसलिए गुलाबी गेंद से स्विंग हासिल करने में अब कोई समस्या नहीं होनी चाहिए.” गुलाबी गेंद को बनाने में लगभग सात से आठ दिन का समय लगाता है और फिर इसके बाद इस पर गुलाबी रंग के चमड़े लगाए जाते हैं. एक बार जब चमड़ा तैयार हो जाता है तो फिर उन्हें टुकड़ों में काट दिया जाता है, जो बाद में गेंद को ढंक देता है.

इसके बाद इसे चमड़े की कटिंग से सिला जाता है और एक बार फिर से रंगा जाता है और फिर इसे सिलाई करके तैयार किया जाता है. गेंद के भीतरी हिस्से की सिलाई पहले ही कर दी जाती है और फिर बाहर के हिस्से की सिलाई होती है. एक बार मुख्य प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो फिर गेंद को अंतिम रूप से तौलने और उसे बाहर भेजने से पहले उस पर अच्छी तरह से रंग चढ़ाया जाता है. गुलाबी गेंद पारंपरिक लाल गेंद की तुलना में थोड़ा भारी है.

ये भी पढ़ें- हर मोर्चे पर विफल हो रही टीम इंडिया, क्या पूरा हो पाएंगा टी-20 विश्व कप जीतने का सपना

गुलाबी गेंद को लेकर टीम इंडिया के सामने कई चुनौतियां हैं.गुलाबी गेंद से स्पिनर्स को ज्यादा मदद नहीं मिलेगी. दिलीप ट्रॉफी में गुलाबी गेंद से खेलते हुए कुलदीप यादव को ये मुश्किल हुई थी. वहीं गेंद रिवर्स स्विंग भी नहीं होगी क्योंकि गुलाबी गेंद की चमक बनाए रखने के लिए लाख का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. अबतक खेले गए 11 डे-नाइट टेस्ट में तेज गेंदबाजों का औसत 24 के करीब रहा है जबकि स्पिनर्स का 32 के करीब.

दूसरी ओर तेज गेंदबाजों को खेलना बल्लेबाजों के लिए चुनौती होगी. 2016 में गुलाबी गेंद से हुए एक घरेलू मैच में मोहम्मद शमी को खेलना बल्लेबाजों के लिए असंभव हो गया था. बांग्लादेश और टीम इंडिया में ज्यादातर खिलाड़ियों को गुलाबी गेंद से खेलने का अनुभव नहीं है. टीम इंडिया में सिर्फ चेतेश्वर पुजारा, मयंक अग्रवाल, ऋषभ पंत, और कुलदीप यादव फर्स्ट क्लास डे-नाइट क्रिकेट खेले हैं. वहीं रोहित, विराट, रहाणे, अश्विन, उमेश जैसे खिलाड़ी पहली बार गुलाबी गेंद से खेलेंगे.

ये भी पढ़ें- अनुष्का का गुस्सा जायज है! खिलाड़ियों के बेडरूम तक सीमित हो चुकी है खेल पत्रकारिता

Tags:
COMMENT