राजकोट में हुए दूसरे टी-20 मैच में टीम इंडिया में एक तरफा मुकाबला जीत लिया. लेकिन इस जीत के साथ-साथ कई सवाल टीम इंडिया के प्रदर्शन पर खड़े हुए हैं. कार्यवाहक कप्तान रोहित शर्मा की तूफानी पारी ने मैच को वनसाइडेड बना दिया. यहां आपको ध्यान देना चाहिए कि अगले साल यानी 2020 में टी-20 विश्व कप खेला जाना है. उससे पहले टीम लगातार प्रयोग के दौर से गुजर रही है. भारत बनाम बांग्लादेश पहला टी-20 मैच दिल्ली के अरूण जेटली स्टेडियम में खेला गया. भारत ये मुकाबला हार गया. अक्सर ये देखा जाता है कि जब टीम हार जाती है तो उसकी कई खामियां गिनीं जाती है लेकिन जब टीम जीत जाती है तो वो खामियां छिप जाती है. दूसरे T-20 मैच में भी ऐसा ही हुआ. पहले T-20 की अगर हम बात करें तो टीम इंडिया हर मोर्चे पर विफल रही. बल्लेबाजी की बात करें तो टीम इंडिया के ओपनर शिखर धवन का बल्ला शांत है. शिखर विश्व कप के दौरान घायल हो गए थे. उसके बाद मैदान पर आए. लेकिन लगा नहीं कि शिखर अपनी फॉर्म में हैं. रोहित शर्मा लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि केवल एक खिलाड़ी के प्रदर्शन पर ही पूरी टीम डिपेंड रहे. युवा खिलाड़ी श्रेयस अय्यर ने जरूर कुछ रन बनाएं लेकिन उसके बाद पंत, शिवम दुबे, केएल राहुल इन सभी ने निराश किया. इन खिलाड़ियों को मौका था कि ये टीम में जगह पक्की कर पाते लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. पंत की कीपरिंग को लेकर भी तमाम सवाल उठे. पंत को अभी रिव्यू का भी सही आंकलन नहीं था.

पहले टी20 में, मैच का दसवां ओवर था जबकि डीआरएस को लेकर फैसले भारत के खिलाफ गये और आखिर में यह गलती टीम को महंगी पड़ी और उसे पहली बार बांग्लादेश से हार का सामना करना पड़ा. लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल के इस ओवर की तीसरी गेंद पर मुशफिकुर रहीम पगबाधा आउट थे लेकिन भारत ने रिव्यू नहीं लिया. गेंदबाज या विकेटकीपर पंत ने इसके लिये कप्तान को कोई सलाह भी नहीं दी। रहीम तब छह रन पर खेल रहे थे और बाद में वह 60 रन बनाकर नाबाद रहे. जबकि पगबाधा आउट का सही अंदाजा या तो गेंदबाज को होता है या फिर विकेटकीपर को. गेंदबाज को सही सलाह देने का काम विकेटकीपर को होता है.

इसी ओवर की आखिरी गेंद पर सौम्या सरकार के खिलाफ पंत ने विकेट के पीछे कैच की अपील की जिसे अंपायर ने ठुकरा दिया. पंत ने रोहित पर  डीआरएस  के लिये दबाव बनाया लेकिन  रिव्यू  से स्पष्ट हो गया कि गेंद बल्ले से लगकर नहीं गयी थी. दर्शकों ने भी  धोनी—धोनी  की गूंज से पंत को गलती का अहसास कराया. रोहित ने बाद में स्वीकार किया कि इस तरह के रिव्यू  में कप्तान पूरी तरह से गेंदबाज और विकेटकीपर पर निर्भर होता है लेकिन उन्होंने भरोसा जताया कि पंत अभी युवा है और वह समय के साथ बेहतर फैसले करना सीख जाएगा.

अब बात दूसरे टी-20 मैच की

यहां भी भारतीय टीम ने गलतियों का पहाड़ खड़ा कर दिया. वो तो सही रहा कि कप्तान रोहित शर्मा का बल्ला खूब गरजा और उन्होंने 43 गेंदों पर 85 रन ठोंक डाले. शिखर धवन ने भी उनका साथ दिया. जिससे ये मुकाबला टीम इंडिया ने जीत लिया. लेकिन जब टीम इंडिया की फील्डिंग कर रही थी तो खुद कप्तान रोहित शर्मा ने ही एक कैच छोड़ दिया. कैच के बाद कई बार मिसफिल्डिंग भी हुई. इधर ओवर थ्रो से रन दिए गए. टीम इंडिया की ये फील्डिंग देखकर लग नहीं रहा था कि ये टीम कुछ महीनों बाद टी-20 विश्व कप खेलने वाली हैं. ये बात सही है कि इस टीम में कोहली,बुमरहा और भुवनेश्वर कुमार नहीं है लेकिन जो टीम बांग्लादेश के खिलाफ उतरी थी वो खिलाड़ी भी कम नहीं है. यहां बात करते हैं दूसरे मैच की…

दरअसल, चार ओवर का मैच समाप्त हो गया था. पांचवां ओवर युजवेंद्र चहल (Yuzvendra Chahal) लेकर आए. चहल के सामने बांग्लादेश के ओपनर लिट्टन दास (Litton Das) थे. पहली गेंद पर दो रन लिए. दूसरी गेंद ड्रॉप हो गई. तीसरी गेंद पर जबरदस्त ड्रामा देखने को मिला. टीम इंडिया काफी वक्त से विकेट की तलाश में थी. चहल ने ओवर की तीसरी गेंद फेंकी और विकेट कीपर पंत ने स्टंपिंग कर लिटन दास को आउट भी कर दिया.थर्ड अंपायर को इसमें कुछ गड़बड़ नजर आया और उन्होंने कई बार रिप्ले देखा. लिटन दास क्रीज से बाहर थे, चहल का पैर भी बिल्कुल ठीक था इसके बावजूद जब निर्णय में देर लगी तो मैदान में खड़े खिलाड़ी भी आपस में बातचीत करने लगे. उसके बाद थर्ड अंपायर ने इसको नो बॉल करार दी साथ में फ्री हिट भी दी गई. इस फैसले से सबसे ज्यादा निराश चहल दिखे और कप्तान रोहित शर्मा भी नाखुश नजर आए.

लेकिन यह उन अजीब घटनाओं में से एक थी जो आपको क्रिकेट में देखने को मिलती हैं. चहल की फ्लाइट होती गेंद पर लिटन दास ललचा गए और क्रीज से आगे बढ़कर शॉट खेलने लगे लेकिन लेग ब्रेक पर टर्न से पूरी तरह पिट गए. पंत के लिए स्टंपिंग करना सबसे आसान था, जो अपनी उत्तेजना में गेंद को स्टंप के आगे से ही पकड़ लिया. पंत की यह बहुत छोटी गलती है लेकिन टीम को इसका बड़ा खामियाजा उठाना पड़ सकता है.

अब बात करते कुछ आकंड़ों की

पिछले 12 महीने से टीम इंडिया टी-20 में खस्ता हाल प्रदर्शन कर रही है. टी-20 में टीम इंडिया लगातार प्रयोग कर रही है और इन प्रयोगों का खराब असर टीम इंडिया के प्रदर्शन पर साफ नजर आ रहा है. टी-20 में टीम इंडिया फिसड्डी साबित हो रही है. पिछले एक साल में टीम इंडिया टी-20 की 5 में से सिर्फ 1 सीरीज अपने नाम कर पाई. इस दौरान भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया में 3 मैच की सीरीज 1-1 से ड्रॉ कर पाई. फिर न्यूजीलैंड में टीम इंडिया 3 मैच की टी-20 सीरीज में 1-2 से हारी.

फरवरी में ही ऑस्ट्रेलिया ने भारत में आकर टीम इंडिया को 2-0 से हराया. सिर्फ वेस्टइंडीज के खिलाफ टीम इंडिया टी-20 सीरीज जीती. सितंबर में द. अफ्रीका ने भारत में टी-20 सीरीज 1-1 की बराबरी पर खत्म की. टीम इंडिया पिछले 10 में से 5 मैच हारी, जबकि 4 मैच जीती. एक मैच बेनतीजा रहा. पहले बल्लेबाजी करते हुए तो टीम इंडिया की स्थिति और खराब है. पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने इस साल 5 में से 4 मैच गंवाए हैं.

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