हे राम! देखिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की दो नावों की सवारी

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस, भाजपा के पद चिन्हों पर चलने को आतुर दिखाई दे रही है. शायद यही कारण है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की कैबिनेट ने भाजपा के राम राम जाप को बड़ी शिद्दत के साथ अंगीकार करने में कोताही नहीं की है. और यह जाहिर करना चाहती है, कि राम तो हमारे हैं और हम राम के हैं. कांग्रेस सरकार को, राम मय दिखाने की सोच के तहत, छत्तीसगढ़  सरकार ने  “राम के वनगमन पथ” को सहेजते हुए इन स्थलों का पर्यटन की दृष्टि से विकसित किए जाने का ऐलान किया है, जो इसी सोच का सबब है.

21 नवंबर 2019  को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में हुई मंत्रीपरिषद की बैठक में जो  निर्णय लिया गया, वह एक तरह से भाजपा के बताए  पद चिन्हों  पर चलना है.संपूर्ण कवायद पर निगाह डालें तो पहली ही दृष्टि में यह स्पष्ट हो जाता है कि भूपेश बघेल सरकार की सोच कैसी पंगु है. सबसे बड़ी बात यह है कि भगवान राम करोड़ों वर्ष पूर्व हुए थे. यह मान्यताएं हैं की छत्तीसगढ़ जो कभी  “दंडकारण्य” था, यहां से राम ने गमन किया था. दरअसल, यह सिर्फ और सिर्फ किवंदती एवं मान्यताएं हैं. इसका कोई वैज्ञानिक आधार अभी तक जाहिर नहीं हुआ है. ऐसे में क्या यह  सारी कवायद लकीर का फकीर बनना नहीं होगा. इसके अलावा भी अन्य कई पेंच है जिसका सटीक जवाब कांगेस के पास नहीं होगा, देखिए यह खास  रिपोर्ट-

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 राम के संदर्भ में मान्यताएं बनी आधार

आइए, अब जानते हैं, क्या है  मान्यताएं और “श्रीराम का वनगमन पथ” ….कहा जाता है छत्तीसगढ़ का इतिहास प्राचीन है. त्रेतायुगीन छत्तीसगढ़ का प्राचीन नाम दक्षिण कौसल एवं दण्डकारण्य के रूप में विख्यात था. दण्डकारण्य में भगवान श्रीराम के वनगमन यात्रा की पुष्टि वाल्मीकि रामायण से होती है. शोधकर्ताओं की शोध किताबों से प्राप्त जानकारी अनुसार प्रभु श्रीराम द्वारा अपने वनवास काल के 14 वर्षों में से लगभग 10 वर्ष का समय छत्तीसगढ़ में व्यतीत किया गया था.

छत्तीसगढ़ के लोकगीत में माता सीता जी की पहचान कराने की मौलिकता एवं वनस्पतियों के वर्णन मिलते हैं.  श्रीराम द्वारा उत्तर भारत से दक्षिण में प्रवेश करने के बाद छत्तीसगढ़ में विभिन्न स्थानों पर चैमासा व्यतीत करने के बाद दक्षिण भारत में प्रवेश किया गया था. अतः छत्तीसगढ़ को दक्षिणापथ भी कहा जाता है. मान्यता है छत्तीसगढ़ में कोरिया जिले के भरतपुर तहसील में नदी से होकर जनकपुर नामक स्थान से लगभग 26 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सीतामढ़ी पर चैका नामक स्थल से  श्रीराम ने छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया.

इस राम वनगमन पथ के विषय पर शोध का कार्य राज्य में स्थित संस्थान छत्तीसगढ़ स्मिता प्रतिष्ठान रायपुर द्वारा किया गया है। स्थानीय साहित्यकार मनु लाल यादव द्वारा रामायण किताब का प्रकाशन किया गया तथा इसी विषय पर छत्तीसगढ़ पर्यटन में राम वनगमन पथ के नाम से पुस्तक का प्रकाशन किया गया है. श्रीराम ने छत्तीसगढ़ में 10 वर्षों के वनगमन के दौरान लगभग 75 स्थलों का भ्रमण किया था तथा इनमें 51 स्थान ऐसे हैं जहां  श्रीराम ने भ्रमण के दौरान कुछ समय व्यतीत किया था.

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अब इस सब को लेकर के सरकार द्वारा योजना बनाई जा रही है कि लोग आ कर प्रभु राम का वन गमन क्षेत्र का भ्रमण करेंगे जो सीधे-सीधे उन क्षेत्रों के प्राकृतिक और नैसर्गिक भाव को सरकार द्वारा  विकृत  करना  ही होगा. अच्छा हो, प्राचीन मान्यता के अनुरूप जैसी स्थिति है, वही बनी रहे, वहां किसी भी तरह की छेड़-छाड़, नव निर्माण भारतीय पुरातत्व अधिनियम के तहत भी अवैध माना जाएगा.

 भूपेश बघेल भी जपने लगे राम राम!

शायद कांग्रेस पार्टी ने यह मान लिया है कि जिस तरह भाजपा ने राम राम जप कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी नैया पार लगाई, अब कांग्रेस को भी ऐसा ही करना होगा. अब विकास  का मुद्दा महत्वहीन हो चुका है,अब तो कुर्सी पाना है, तो बस राम राम जप लो. आगामी समय में छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव एवं पंचायत चुनाव हैं. ऐसे में राम गमन के मसले को बेतरह से उठाना यह इंगित करता है कि भूपेश सरकार भी छत्तीसगढ़ की आवाम को भगवान राम के नाम पर आकर्षित करना चाहती है. और अपना वोट बैंक और भी ज्यादा मजबूत बनाने के लिए प्रयत्नशील है.

यह होगी विकास की योजना 

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा  राम वनगमन पथ को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किए जाने की कार्य योजना का आगाज कर दिया गया है.इसका उद्देश्य राज्य में आने वाले पर्यटकों के साथ-साथ प्रदेश के लोगों को भी इन राम वनगमन मार्ग स्थलों से परिचित कराना है. इन स्थलों का भ्रमण करने के दौरान पर्यटकों को सुविधा हो सके, इस लिहाज से योजना तैयारी की जा रही है.

राज्य सरकार द्वारा बजट उपलब्ध कराया जाएगा. साथ ही भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की योजनाओं से भी राशि प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा.इन स्थलों का राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार प्रसार भी किया जाएगा. पहुंच मार्ग के साथ पर्यटक सुविधा केंद्र, इंटरप्रिटेशन सेंटर, वैदिक विलेज, पगोड़ा, वेटिंग शेड, पेयजल व शौचालय आदि मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी. बताया गया है विकास कार्य शुभारंभ चंद्रपुरी में स्थित माता कौशल्या के मंदिर से किया जाएगा.

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विकास योजना तैयार करने के पूर्व विशेषज्ञों का एक दल सर्वे करेगा. इस तरह भूपेश बघेल ने एक तरह से इस संपूर्ण परियोजना को हरी झंडी दे दी है मगर यह धरातल पर कब कैसे उतरेगा इस पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह है क्योंकि सरकारी योजनाएं कागजों पर और अखबारों की सुर्खियों में तो आकर्षित करती हैं मगर हकीकत में उनकी दशा बहुत दयनीय होती है इसका सच जानना हो तो डॉक्टर रमन के कार्यकाल के पर्यटन विकास के ढोल को देखना समझना काफी होगा करोड़ों, अरबों रुपए कि कैसे बंदरबांट बात हो गई और फाइलें बंद पड़ी हैं .

हास्यास्पद पहल- 11 लाख का पुरस्कार!

राम गमन और भगवान राम के नाम पर आप कुछ भी कर ले, सब माफ है. शायद यही सोच भाजपा के बाद अब कांग्रेस भी अपनाती चली जा रही है.

अब वह प्रगतिशील महात्मा  गांधी और जवाहरलाल  नेहरू की कांग्रेस नहीं है. आज की कांग्रेस शायद संघ की हिंदुत्ववादी सोच के पीछे चलने वाली दकियानूसी कांग्रेस बन चुकी है. यही कारण है कि कांग्रेस के पूर्व विधायक और दूधाधारी मठ के प्रमुख महंत राम सुंदर दास ने इसी तारतम्य में यह घोषणा कर दी है कि माता कौशल्या का जन्मदिन की गणना करके जो बताएगा, उसे वह स्वयं अपनी ओर से 11 लाख रुपए का पुरस्कार,सम्मान राशि देंगे.

यही नहीं, भूपेश बघेल के नेतृत्व में कौशल्या माता के मंदिर का जीर्णोद्धार का काम भी शुरू हो गया है. क्योंकि उसके लिए पैसा सरकार नहीं दे सकती, सुप्रीम कोर्ट की बंदिशें है, इसलिए विधायकों ने दो लाख  बीस हजार रुपए मुख्यमंत्री को अपनी ओर से दिया है की मंदिर बनवाया जाए! अर्थात सीधी सी बात है जो काम भाजपा नहीं कर सकी जो काम हिंदुत्ववादी संगठन नहीं कर सके, अब वह अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता करेंगे और यह संदेश देंगे की, हे जनता!आओ हम भी राम भक्त हैं, हमने भी माता कौशल्या का मंदिर बनाया है, हमें भी वोट दो.

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चाहे कुपोषण में बच्चे मरते रहे, आंगनबाड़ियों में स्कूलों में पहुंचने वाला भोजन, खाद्यान्न की लूट चलती रहे, सफाई ना हो, सड़कें न बने, बिजली पैदा ना हो, मगर वोट हमें  ही देना. अगर भूपेश बघेल सरकार और कांग्रेस पार्टी को यह लगता है कि राम नाम जपने से कांग्रेस पार्टी का और प्रदेश का कल्याण हो जाएगा तो राम वन गमन के प्रपंच से अच्छा होगा क्यों न छत्तीसगढ़ का नाम ही बदल दिया जाए और प्राचीन “दंडकारण्य”  रख दिया जाए. इससे कांग्रेस पार्टी की साख और बढ़ जाएगी कि देखो इनमे  भगवान राम के प्रति कितनी श्रद्धा आ गई है!

भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा ने बिखेरे अपने हुस्न के जलवे, वायरल हुआ नया फोटोशूट

125 से ज्यादा भोजपुरी फिल्में करने वाली एक्ट्रेस मोनालिसा एक बार फिर अपने नए फोटोशूट को लेकर चर्चा का विषय बन गई हैं. इन दिनों मोनालिसा स्टार प्लस के पौपुलर सीरियल ‘नजर’ में अपने एक्टिंग के जलवे बिखेरती दिखाई दे रही हैं. मोनालिसा इस सीरियल में ‘मोहाना’ का किरदार निभा रही हैं. मोनालिसा ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से अपनी कुछ फोटोज फैंस के साथ शेयर की हैं जिसमें वे बेहद खूबसूरत लग रही हैं.

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‘नजर’ के सेट की ही हैं ये फोटोज…

 

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ये फोटोज उनके सीरियल ‘नजर’ के सेट की ही हैं. इन फोटोज में मोनालिसा ने साड़ी पहनी हुई है और हर बार की तरह इस बार भी वे काफी सुंदर नजर आ रही हैं. इन फोटोज को देख ये पहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि वे अपनी एक्टिंग के साथ साथ अपनी फोटोज से भी फैंस का दिल जीतने में हर बार कामयाब रहती हैं.

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लाइक्स और तारीफों के कमेंट्स की बरसात…

वैसे तो मोनालिसा के फैंस उनकी हर फोटो को जबरदस्त प्यार देते हैं लेकिन बात करें इन फोटोज की तो उनके फैंस उनकी इन फोटोज पर जमकर प्यार दे रहे हैं और लाइक्स और तारीफों के कमेंट्स की तो बरसात कर रहे हैं, और करें भी क्यों ना आखिर वे हैं ही इतनी खूबसूरत कि कोई भी उनकी फोटोज को देख उनकी तारीफ किए बिना रह ही नहीं सकता. मोनालिसा के इस फोटोशूट में उनकी अदाएं काफी कातीलाना हैं और साथ ही वे अपने इस फोटोशूट में काफी सजी भी हुईं हैं तो कोई कैसे उनकी तारीफ किए बिना रह सकता है.

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‘बिग बौस’ सीजन 10 में भी आईं थीं नजर…

 

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💜💜💜… #nazar 📸: @roi_chandan

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बता दें, मोनालिसा ने अबतक 125 से ज्यादा भोजपुरी फिल्मों के साथ कई और भाषाओं में भी फिल्में की हैं जैसे कि, हिंदी, बंगाली, तमिल, तेलुगु, आदि. और साथ ही मोनालिसा ने कलर्स टी.वी. के सबसे बड़े रिएलिटी शो ‘बिग बौस’ सीजन 10 में भी भाग लिया था और दर्शको को काफी एंटरटेन किया था.

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Bigg Boss 13: आखिर क्यों इस कंटेस्टेंट को फैंस ने बताया आतंकवादी, पढ़ें ट्वीट

बिग बौस सीजन 13 जब से शुरू हुआ है तब से ही दर्शकों को इसमें लड़ाइयां देखने को मिल रही हैं. वैसे तो बिग बौस शो के हर सीजन में ही लड़ाई झगड़े दर्शकों को देखने को मिलते हैं लेकिन इस सीजन की बात थोड़ी अलग है. बीते दिनों आपने देखा कि कंटेस्टेंट सिद्धार्थ शुक्ला और असीम रियाज के बीच की लड़ाई खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही. इन दोनों की लड़ाई के चलते बाहर इनके फैंस तक आपस में भिड़ रहे हैं.

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असीम रियाज को बताया आतंकवादी…

जब से सिद्धार्थ शुक्ला और असीम रियाज के बीच हाथापाई हुई थी तब से ही दोनो के फैंस आए दिन कोई ना कोई नया हैशटैग सोशल मीडियो पर ट्रेंड करते नजर आ जाते हैं. इसी के चलते सिद्धार्थ शुक्ला के फैंस ने असीम रियाज को आतंकवादी कहना शुरू कर दिया जिसकी वजह से टेलिवीजन के कई सितारे असीम रियाज के सपोर्ट में खड़े दिखाई दिए.

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करणवीर बोहरा ने असीम रियाज का सपोर्ट करते हुए कहा…

बिग बौस फैमिली के एक्स कंटेंस्टेंट और टेलिवीजन इंडस्ट्री का जाना माना नाम करणवीर बोहरा ने असीम रियाज का सपोर्ट करते हुए एक ट्वीट किया जिसमें लिखा था कि, ‘इंटरनेट पर जो हैशटैग ट्रेंड कर रहा है अगर वो सही है तो मैं बिग बौस 13 के सभी दर्शकों से यह गुजारिश करना चाहूंगा कि आप परिवार और धर्म को बीच में ना लाएं. इस शो को सिर्फ शो के रूप में देखें और निजी कमेंट ना करें. मैं सोच भी नहीं सकता कि आसीम रियाज का परिवार किस भावनात्मक लड़ाई से गुजर रहा होगा.’

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असीम रियाज के भाई ने दी चेतावनी…

करणवीर बोहरा के अलावा असीम रियाज के भाई उमर रियाज ने भी ट्वीटर पर एक ट्वीट कर सभी को चेतावनी देते हुए कहा है कि, ‘जो लोग और फैन क्लब असीम रियाज के धर्म पर कमेंट कर रहे हैं और उसे आतंकवादी कह रहे हैं मैं उन सबको चेतावनी देना चाहता हूं. मैंने इसके खिलाफ साइबर पुलिस को शिकायत दर्ज कराई है. आप अपने ट्वीट्स को डिलीट कर दीजिए या फिर अपने आपको जेल के अंदर देखने के लिए तैयार हो जाइए.’

अब देखने वाली बात ये होगी की क्या सच में सिद्धार्थ शुक्ला के फैंस अपने ट्वीट्स डिलीट करेंगे या नहीं. पर जो असीम रियाज के खिलाफ ट्वीट्स आ रहे हैं वे सब वाकई काफी चौंका देने वाले हैं.

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‘ये रिश्ते हैं प्यार के’ फेम रित्विक अरोड़ा के लुक्स ट्राय कर बनें लड़कियों के फेवरेट

कलर्स टीवी के पौपुलर शो ‘तू आशिकी’ से अपना एक्टिंग करियर स्टार्ट करने वाले एक्टर रित्विक अरोड़ा अपने फैंस के बीच काफी पौपुलर हैं. इन दिनों वे स्टार प्लस के सीरियल ‘ये रिश्ते हैं प्यार के’ में कुनाल राजवंश का किरदार निभातो दिखाई दे रहे हैं. रित्विक ना सिर्फ अपनी अच्छी एक्टिंग के लिए पौपुलर हैं बल्कि उन्के लुक्स भी काफी लोग फौलो करना पसंद करते हैं. तो आज हम आपको दिखाएंगे टेलिवीजन एक्टर रित्विक अरोड़ा के कुछ ऐसे लुक्स जिसे देख आपका मन खुद ब खुद उन्हें ट्राय करने को कर जाएगा.

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कुर्ता विद ‘rugged’ ट्राउसर…

 

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Love for architectural frames and abstract prints in vivid colours 🙌🏻

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कुर्ते के साथ ‘rugged’ ट्राउसर का कौम्बीनेशन शायद आपने पहली बार देखा होगा. इस लुक में रित्विक अरोड़ा ने पर्पल कलर के कुर्ते के साथ व्हाइट कलर का ‘rugged’ ट्राउसर पहना हुआ है जो कि काफी ट्रेंडी लग रहा है. आप भी ये कुर्ते के साथ ‘rugged’ ट्राउसर वाला लुक अपने किसी भी फैमिली फंक्शन में ट्राय कर सबको इम्प्रेस कर सकते हैं.

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चैक थ्री पीस सूट…

 

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Is it true that people see you how you want them to see you as ? Cause then jo bhi main kehna chahu barbaad kare alfaaz mere 😛

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चैक का फैशन लंबे समय से चलता आ रहा है और दिखने में भी काफी अच्छा लगता है. इस लुक में रित्विक अरोड़ा ने ब्राउन कलर का चैक थ्री पीस सूट पहना हुआ है जो कि उन पर काफी सूट कर रहा है. आप रित्विक जैसा ये लुक किसी भी पार्टी में ट्राय कर सकते हैं.

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कैसुअल लुक…

अपने इस कैसुअल लुक में रित्विक अरोड़ा ने ब्लैक कलर की टीशर्ट के साथ ‘rugged’ जींस कैरी की हुई है. इस लुक में रित्विक काफी डैशिंग दिखाई दे रहे हैं. तो अगर आप भी अपने कौलेज में दिखना चाहते हैं रित्विक की तरह स्मार्ट और कूल तो जरूर ट्राय करें ये कैसुअल लुक.

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ट्रेंडी इंडो वेस्टर्न…

 

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Jab outfit ka design na samajh aaye – “designer hai” 🙌🏻

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अपने इस लुक में रित्विक अरोड़ा ने ब्लैक कलर का ट्रेंडी इंडो वेस्टर्न कैरी किया हुआ हा और इस लुक के साथ उन्होनें व्हाइट कलर की पयजामी पहनी हुई है. आप भी ऐसा ट्रेंडी इंडो वेस्टर्न ट्राय कर सबको अपने लुक्स से इम्प्रेस कर सकते हैं.

बता दें, रित्विक अरोड़ा के लुक्स की वजह से उनको कौलेज में ही उनके पहले सीरियल ‘तू आशिकी’ के लिए सेलेक्ट कर लिया गया था जो कि साल 2017 में औन एयर हुआ था. रित्विक अरोड़ा ने काफी जल्द अपनी कमाल की फैन फौलोविंग हासिल कर ली है. अगर इंस्टाग्राम की बात करें तो उनके औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर करीब साढ़े चार लाथ फैंस हैं.

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फिल्म ‘टोनी’ के पोस्टरों और ट्रेलर के खिलाफ ईसाई समुदाय में रोष, पढ़ें खबर

रुस्तम, इकबाल, मुम्बई-वाराणसी एक्सप्रेस जैसी कई ब्लौकबस्टर फिल्मों के लेखक रहे विपुल के. रावल अब फिल्म ‘टोनी’ के जरिए बतौर निर्देशक अपना डेब्यू करने जा रहे हैं. उल्लेखनीय है कि इस फिल्म के ट्रेलरों और पोस्टरों को पिछले हफ्ते ही जारी किया गया था. यह फिल्म साइकोलौजी के चार ऐसे छात्रों की कहानी हैं, जिनका सामना टोनी नामक एक ऐसे सीरियल किलर से हो जाता है, जो एक पादरी की हत्या करने की बात को कुबूल कर लेता है. इस बीच, सिरिल दारा नामक शख्स का दावा है कि फिल्म में इस तरह से ईसाई समुदाय का चित्रण किये जाने से पूरा ईसाई समुदाय काफी गुस्से में है और ऐसे में फिल्मकार के खिलाफ पुलिस में एक शिकायत भी दर्ज कराई गई है.

गौरतलब है कि फिल्म के लेखक और निर्देशक विपुल के. रावल ने जारी किये गये एक बयान के जरिए कहा, “यह फिल्म टोनी नामक एक सीरियल किलर पर आधारित है. ऐसे में फिल्म में धार्मिक तत्वों का इस्तेमाल करना लाजिमी हो जाता है. मेरी फिल्म को बिना किसी काट-छांट के सेंट्रल बोर्ड औफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) की ओर से हरी झंडी मिल चुकी है. ऐसे में पोस्टरों में बदलाव अथवा ट्रेलर को वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता है.”

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पुलिस में शिकायत दर्ज करानेवाले सिरिल दारा के मुताबिक, “मैं एक धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति हूं और मैं सभी धर्मों का समान रूप से आदर करता हूं. इस फिल्म के तमाम पोस्टरों और ट्रेलरों के माध्यम से कैथलिक और प्रोटेस्टेन्ट्स के बीच दरार पैदा करने की कोशिश जा रही है और एक भारतीय नागरिक होने के नाते मैं इसे कतई बर्दाश्त नहीं कर सकता हूं. इससे दोनों समुदाय की भावनाएं आहत होंगी. फिल्म में एक कैथलिक शख्स को सीरियल किलर के तौर पर पेश किया जा रहा है. मुझे लगता है कि इस फिल्म को बनाने के पीछे की विपुल के. रावल की नीयत सही नहीं है और इसके पीछे उ‌नका अपना ही कोई एजेंडा छिपा है.”

सिरिल दारा ने हमें बताया कि आग्रीपाडा पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस इंस्पेक्टर ने उनकी शिकायत को दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है, मगर न तो इस संबंध में कोई एफआईआर दर्ज की गयी है और न ही कोई एनसी. मगर उनका यह भी दावा है कि इस मसले पर कई पादरी, बिशप और चर्च भी उनके साथ खड़े हैं. उनके मुताबिक, चर्च और ईसाई समुदाय मिलकर सार्वजनिक तौर पर विरोध जताने की तैयारी में हैं, मगर वो नफरत फैलाने के पक्ष में नहीं हैं और इसीलिए उन्होंने इस तरह के विरोध को फिलहाल के लिए रोक रखा है. उनका यह भी कहना है कि इसी वजह से वे फिल्म को कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शित नहीं किये जाने के पक्ष में हैं.

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ईसाई समुदाय और फ़िल्मकार विपुल के. रावल के बीच की इस लड़ाई के जल्द सुलझने के कोई आसार नज़र नहीं आ रहे हैं. विपुल कहते हैं, “सबसे पहली बात तो यह है कि मेरे पोस्टरों के जरिए पूरे समुदाय की भावनाएं आहत नहीं हुईं हैं, बल्कि ऐसे लोगों के एक छोटे से समूह ने इस पर नाराज़गी जताई है, जो मेरे रचनात्मकता को आधार बनाकर सस्ती पब्लिसिटी बटोरना चाहते हैं.

अगर सिरिल दारा का यह दावा है कि कई पादरी उनके साथ हैं, तो वो मुझे निजी तौर पर उन सभी के नाम बताने से क्यो‌ कतरा रहे हैं? मैं निजी तौर पर सभी को ट्रेलर दिखाने के लिए तैयार हूं और उनसे यह जानने के लिए उत्सुक हूं कि आखिर उन्हें इन ट्रेलरों में क्या गलत लगा? जरूरत पड़ी तो इसपर मैं बहस करने के लिए भी राजी हूं. मैं उनसे गुज़ारिश करता हूं कि किसी भी तरह के नतीजे पर पहुंचने से पहले वो आकर फिल्म देखें. जब तक कि कोर्ट मुझे कोई दिशा-निर्देश नहीं देती, मैं फिल्म में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं करनेवाला हूं. इसके लिए मैं अपनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक जाकर लड़ने के लिए भी तैयार बैठा हूं.”

फिल्म ‘टोनी’ साइकोलौजी के चार ऐसे छात्रों की कहानी है, जो चर्च के कंफेशन बौक्स में चोरी से एक कैमरा लगा देते हैं. फिर इसी कैमरा में हुई रिकौर्डिंग के जरिए उन्हें पता चलता है कि एक सीरियल किलर ने एक हत्या को लेकर कुबूलनामा दिया है. इन चारों की जिंदगी उस वक्त एक अजीब मोड़ ले लेती है, जब उनका सामना खुद टोनी से हो जाता है और फिर ये सभी उसके साथ लोगों की हत्या के लिए निकलते हैं. इस फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में यशोधन राणा, अक्षय वर्मा, मनोज चंडालिया, महेश जिलोवा. कबीर चिलवल , जिनल बेलानी, मनोज चंदीला  नज़र आएंगे. उल्लेखनीय है कि इस फिल्म का लेखन, निर्माण और निर्देशन विपुल के रावल ने किया है.

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Bigg Boss 13: बिग बौस ने दिया घरवालों को ‘शौकिंग इविक्शन’ का नया झटका, ये सदस्य होंगे घर से बेघर

बिग बौस सीजन 13 जब से शुरू हुआ है तब से घर में रह रहे सदस्यों और दर्शकों को एक के बाद एक झटकों का सामना करना पड़ रहा है. इन दिनों जहां एक तरफ कैप्टेंसी टास्क में सभी सदस्य अपनी जी जान लगा रहे हैं घर का कैप्टन बनने के लिए तो वहीं दूसरी तरफ बिग बौस ने घर वालों को एक और झटका दे दिया है. सबसे पहले बिग बौस ने घर के सदस्यों को वो नाम लेने को कहा जिसका योगदान घर में सबसे कम रहा है.

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ये दोनों सदस्य हो सकते हैं घर से बेघर…

इसके बाद बिग बौस शो के मेकर्स ने एक प्रोमो रिलीज किया है जिसमें बिग बौस ने बताया कि जिन सदस्यों का भी उन्होनें नाम लिया है वो सदस्य घर से बेघर हो जाएगा. इसी के चलते प्रोमो में साफ दिखाई दे रहा है कि घरवालों ने सबसे ज्यादा नाम भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव का और टेलिवीजन क्वीन रश्मि देसाई का लिया है.

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किन सदस्यों का रहा घर में योगदान सबसे कम…

दरअसल पहले तो बिग बौस ने घरवालों को सिर्फ वो नाम लेने को कहा जिनका योगदान घर में सबसे कम रहा है, पर इसके बाद घरवालों को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब बिग बौस ने इस बात का ऐलान किया कि ये प्रक्रिया घर से बेघर होने के लिए है. सबसे ज्यादा नाम जो सामने आए हैं वो सिर्फ खेसारी लाल यादव और रश्मि देसाई के ही हैं.

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कब होगा ये शौकिंग इविक्शन…

अब देखना ये होगा कि इस शौकिंग इविक्शन में खेसारी लाल यादव और रश्मि देसाई में से कौन होगा घर से बेघर. ये अभी तक तय नहीं हुआ है कि ये इविक्शन आज के आने वाले एपिसोड में होगा या फिर सलमान खान खुद वीकेंड के वौर में इन दोनो में से किसी एक को करेंगे घर से बेघर.

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दूसरी जाति में शादी, फायदे ही फायदे

किसी ब्राह्मण परिवार में पलाबढ़ा अर्जुन जाति के फर्क या भेदभाव को नहीं मानता था. अपनी पढ़ाई पूरी करतेकरते उसे एक दूसरी जाति की लड़की से प्यार हो गया. उस ने अपने परिवार को बताया, तो घर में कुहराम मच गया. अर्जुन के पिता ने डांटते हुए कहा, ‘‘तुम्हें ब्राह्मण लड़की से ही शादी  करनी है, नहीं तो हम तुम्हारे टुकड़ेटुकड़े कर देंगे.’’ अर्जुन ने अपने मातापिता को बहुत समझाया, पर किसी ने उस की एक न सुनी. उसे समझ आ गया कि परिवार का साथ नहीं मिलेगा और उन्हें एकदूसरे से दूर कर दिया जाएगा. अर्जुन उस लड़की रीता को ले कर मिरजापुर से दिल्ली आ गया, जहां वह कुछ दिन अपने दोस्त के घर रहा और वहीं उन्होंने आर्यसमाज रीति से शादी कर ली. उस के दोस्त ने उसे नौकरी भी दिलवा दी.

अर्जुन का कहना है, ‘‘सब को छोड़ कर हमें यहां आना पड़ा. मैं अब किसी को अपना पता भी नहीं दे सकता. अगर पता दे दिया, तो आज भी समस्या खड़ी हो सकती है. ‘‘मैं ने सरकारी और गैरसरकारी संस्थाओं से मदद चाही, पर किसी से कोई मदद नहीं मिली. ऐसा कोई कानून नहीं है, जो मेरे जैसे लोगों की मदद करे. हमारा कानून दूसरी जाति में शादी करने की इजाजत देता है, पर उन लोगों की हिफाजत नहीं कर पाता, जो अपनी जाति से बाहर शादी कर लेते हैं.

‘‘जाति और धर्म के नाम पर प्यार को कब तक दबाया जाता रहेगा  आजादी के इतने साल बाद भी यही सुनने को मिलता है कि ब्राह्मण लड़के को ब्राह्मण लड़की से ही शादी करनी है, नीची जाति की लड़की से नहीं. ‘‘जीवनसाथी चुनने का हक सब को मिलना चाहिए. धर्म और जातिवाद की इस सामाजिक बुराई ने कई जिंदगी बरबाद की हैं.’’

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दूसरी जाति में शादी करने का तो भारतीय समाज की एकता बढ़ाने में बड़ा योगदान हो सकता है. ऐसी शादियों से नुकसान तो कुछ है ही नहीं, फायदे ही फायदे हैं, जैसे:

* दूसरी जाति में शादी के चलन को अपना कर समाज में छोटी मानी जाने वाली जातियों को भी ऊपर उठने का मौका दिया जा सकता है.

* ऐसी कामयाब शादियां आने वाली पीढ़ी को भी धार्मिक पाखंडों और आडंबरों से छुटकारा दिलाने में मददगार होती हैं.

* दूसरी जाति में शादी करने वाले ही अपने समाज के साथसाथ दूसरे समाज के प्रति भी सब्र के साथ अपने विचार रखते हैं.

* सामाजिक विरोध का सामना करने के लिए ऐसे पतिपत्नी को बहुत मजबूत होना पड़ता है. एकदूसरे का साथ देते हुए जिंदगी में आगे बढ़ते हुए यह रिश्ता मजबूत होता चला जाता है. भारत को धर्मनिरपेक्ष बनाने के लिए समाज में ऐसी शादियां खुशी से स्वीकार कर लेनी चाहिए.

* लड़कालड़की दोनों ने अपनी मरजी से शादी की होती है, इसलिए वे रिश्ता निभाने में कोई भी कसर नहीं छोड़ते. दोनों ही यह सोचते हैं कि उन्हें ही एकदूसरे का साथ देना है. परिवार वालों से कोई उम्मीद नहीं होती और किसी को अपने फैसले का मजाक उड़ाने का मौका नहीं देना होता है. पतिपत्नी ज्यादा ईमानदारी से यह रिश्ता निभाने की कोशिश करते हैं.

* इन के बच्चे भी हर धर्म का आदर करना सीख जाते हैं. दोनों धर्मों के बुरे रीतिरिवाज छोड़ कर पतिपत्नी अपनी सुखी शादीशुदा जिंदगी के लिए नई दुनिया बसा कर केवल सुखदायी बातों पर ही ध्यान देते हैं.

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* समाज में फैले अंधविश्वास, पाखंड, आडंबर जैसी कुरीतियों को मिटाने के लिए ऐसी शादियां बड़ी फायदेमंद साबित होती हैं.

* सामाजिक भेदभाव, एकदूसरे के धर्म को नीचा दिखाना, यह सब रोकने के लिए समाज को दूसरी जाति में शादी स्वीकार करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए.

* दोनों धर्मों के त्योहारों का मजा ले कर जिंदगी में एक जोश सा बना रहता है, मिलजुल कर एकदूसरे के रंग में रंग कर जीने का मजा ही कुछ और होता है.

* आजकल के बच्चे तो गर्व से अपने दोस्तों को बताते हैं कि उन के मम्मीपापा ने दूसरी जाति में शादी की है. ऐसे नौजवान अपने मातापिता को आदर से देखते हैं. उन के मातापिता ने यह रिश्ता जोड़ने के लिए कितने सुखदुख झेले हैं, यह बात उन्हें भावनात्मक रूप से मजबूत बनाती है.

* जहां औनर किलिंग जैसी शर्मनाक बातें समाज को गिरावट की ओर ले जाती हैं, वहीं ऐसी शादियों के समर्थन में उठे कदम उम्मीद की किरण बन कर राह भी दिखाते हैं.

* बड़े शहरों में तो अब उतना विरोध नहीं दिखता, पर छोटे शहरों, कसबों में आज भी होहल्ला मचाया जाता है. धर्म की जंजीरों में जकड़े लोग दूसरे समुदाय को अच्छी नजर से देख ही नहीं पाते. हर धर्म अपने को ही अच्छा कहता है. ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना कहीं देखने को नहीं मिलती, फिर जब यह कहा जाता है कि छोटा शहर, छोटी सोच, तो ऐसे लोगों को बुरा भी बहुत लगता है, पर अपने को बदलने के लिए भी ये लोग कतई तैयार नहीं हैं.

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* दूसरी जाति में शादी करने वालों के बच्चों में भी दूसरों के मुकाबले ज्यादा मजबूत जींस होते हैं. ये बच्चे एक ही जाति के पतिपत्नी के बच्चों से ज्यादा होशियार होते हैं.

* ऐसी शादियों का एक बड़ा फायदा यह भी है कि दहेज प्रथा का यहां कोई वजूद नहीं रहता.

* जहां एक ओर अपनी जातबिरादरी में शादी तय करते समय लड़की की बोली लगाई जाती है, वहीं दूसरी तरफ ऐसी शादी सिर्फ प्यार, विश्वास और समर्पण पर टिकी होती है. दहेज, रुपएपैसे से इन्हें कोई मतलब नहीं होता. मिलजुल कर घर बसाते हैं. न कोई लालच, न किसी से कोई उम्मीद.

तो जब समाज की बेहतरी के लिए दूसरी जाति में शादी करने के इतने फायदे हैं, तो लोगों को एतराज क्यों है ? वैसे भी ‘जब मियां बीवी राजी तो क्या करेगा काजी’ की तर्ज पर प्यार करने वालों का साथ दे कर उन्हें सुखी शादीशुदा होने की शुभकामनाएं ही क्यों न दें. समाज से धार्मिक आडंबर, जातिवाद, पाखंड, अंधविश्वास, दहेज मिट जाएगा, तो भला तो सब का ही होगा न.

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मोरे बालम गए कलकत्ता

बालम, कलकत्ता और गोरी का बहुत ही गहरा रिश्ता है. गोरी परेशान है. उस की रातों की नींद और दिन का चैन उड़ा हुआ है… यह सोचसोच कर कि बालम का काम बारबार कलकत्ता में ही क्यों होता है? चलो मान लिया काम होता भी है तो पूरे दफ्तर में अकेले उसी के बालम रह गए हैं क्या, जिन्हें बारबार कलकत्ता भेज दिया जाता है? बालमजी भी इतना खुश हो कर कलकत्ता ही क्यों जाते हैं जबकि देश

के मानचित्र पर अनेक शहर हैं. फिर कलकत्ता में ऐसी कौन सी डोर बंधी है जो गोरी के बालम को खींच रही है और बालम भी गोरी के लटकेझटके, नाजनखरे, प्यारमुहब्बत सब बिसार कर उधर ही खिंचे चले जाते हैं?

गोरी विरह की आग में जल रही है, ऊपर से बरसात उस की इस आग को ठीक उसी तरह भड़काने का काम कर रही है जैसे होम में घी करता है. गोरी के दिल से फिल्मी गाने के ये बोल निकल रहे हैं, ‘हायहाय ये मजबूरी, ये मौसम और ये दूरी…’

पर न तो कोई गोरी की हालत समझ रहा है, न ही उस का गीत सुन रहा है. गोरी के दिल का बोझ बढ़ता गया और आखिरकार उस ने अपनी पीड़ा हमउम्र सखियों को बताई. उस की पीड़ा सुन कर सखियां भी उदास हो गईं. एक बोली, ‘‘रे सखी, कहीं तेरे बालम का दिल वहां की किसी सांवलीसलोनी पर तो नहीं आ गया है?’’

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‘‘ऐसा नहीं हो सकता. हमारी इतनी प्यारी सखी को छोड़ कहीं नहीं जाएगा जीजा,’’ दूसरी सखी डपटते हुए बोली. तभी तीसरी सखी बोली, ‘‘अरी, हम ने तो सुना है कि वहां की औरतें काला जादू जानती हैं और मर्दों को अपने बस में कर लेती हैं?’’

‘‘हां री, मैं ने भी बचपन में अपनी दादी से यही सुना था कि जो भी मरद कलकत्ता गए वे कभी न लौटे. फिर वहां की लुगाइयां मर्दों को भेड़बकरा या तोता कुछ भी बना डालती हैं जादू से और अपने यहां पालती हैं. उन की लुगाइयां बेचारी ऐसी ही जिंदगीभर इंतजार करती हैं उन का,’’ एक सखी ने उस में जोड़ा. ‘‘हां री, मैं ने भी सुना है यह तो… कलकत्ता गए मर्द कभी न आते वापस.’’

‘‘ऐसा हुआ तो हम कहां जाएंगे?’’ गोरी का कलेजा बैठने लगा, बहुत कोशिश कर के भी खुद को रोक न पाई और बुक्का फाड़ कर रो पड़ी, ‘‘हाय रे, मैं क्या करूं, कहां जाऊंगी मैं. कहीं वे भेड़बकरा बन गए तो मेरे किस काम के रह जाएंगे… एक तो पहले ही शक्ल बकरे जैसी थी, ऊपर से जादू से बकरा बना ही दिया तो कहां रखूंगी मैं उन्हें.’’ सारी सखियां उस की बातों पर हंसने लगीं. सभी सखियां मिल कर गोरी को चुप कराने लगीं, ‘अरी, रो मत. हम तो तुझ से मजाक कर रही थीं… यह सच नहीं है. ऐसा कुछ नहीं होता… जीजा बहुत जल्द आ जाएंगे,’ और उसे समझाबुझा कर घर भेज दिया.

गोरी घर तो आ गई, पर उस के मन का बोझ कई गुना बढ़ गया था. वह मन ही मन समझ रही थी कि जो बातें सखियों ने कहीं, वे झूठ नहीं थीं, क्योंकि उस ने भी वैसी बातें सुन रखी थीं… पर उस का बालम तो नहीं सुनता. इस बार तो कई महीनों से वापस नहीं आया. उसे अचानक याद आया कि उस का बालम कई बार कह भी चुका है कि कलकत्ता की लुगाइयां बड़ी सलोनी होती हैं. वह पहले क्यों न समझी. गोरी की रातों की नींद और दिन का चैन छिन गया. पर यह बालम भी कैसा बेदर्द है. वह एक फोन तक नहीं कर रहा उस से बात करने को… बताओ, उस फिल्मी हीरोइन के बालम ने तो रंगून से भी फोन किया था कि तुम्हारी याद सताती है… और यह मेरा बालम है जो कलकत्ता से भी फोन नहीं कर रहा.

ऊपर से दिनभर सास के ताने सुनने को मिलते हैं, ‘‘ये आजकल की लड़कियां भी बिना खसम के रह ही न सकें, जाने काहे की आग लगी है? हम भी तो कभी जवान थे. हमारे वे तो 6-6 महीने के लिए परदेश जाते थे कमाने को… हम ने तो यों आंसू न बहाए थे… पूरे घर के काम और करे थे. ‘‘मर्द और बैल कभी खूंटा से बांध के रखे जाते हैं भला. उन्हें तो काम करना ही पड़ेगा तभी तो पेट भरेंगे सब का.’’

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गोरी बेचारी चुपचाप ताने सुनसुन कर घर के काम कर रही थी. वैसे भी हमारी बहुओं में चुप रहने की आदत होती है. उस ने ठान लिया था कि इस बार बालम बस वापस आ जाएं, फिर उन्हें कहीं भी जाने देगी, पर कलकत्ता नहीं जाने देगी, चाहे कुछ भी हो जाए. वह अपने पति के रास्ते को वैसे ही रोकेगी जैसे गोपियों ने उद्धव का रथ रोका था जब वे कान्हा को ले कर मथुरा जा रहे थे.

उस दिन सुबहसुबह सचमुच आहट हुई और दरवाजे पर बालम को देख गोरी खुशी में पति से ऐसे लिपट गई मानो चंदन के पेड़ पर सांप लिपटे हों. वह तो ऐसे ही लिपटी रहती अगर सास ने सुमधुर आवाज में उस के पूरे खानदान की आरती न उतारी होती. गालियों की बौछारों ने उस के अंदर से फूटे प्रेम के झरने को बहने से तुरंत रोक दिया.

गोरी ने अपनी भावनाओं को रोका और चुपचाप अपने कामों में जुट गई. भले ही उस की आंखें बालम पर टिकी थीं. आखिरकार इंतजार की घडि़यां खत्म हुईं और गोरी का बालम से मिलन हुआ. पर यह मिलन स्थायी तो नहीं था… गोरी के दिल में हरदम डर लगा रहता, बालम फिर से न कहें कलकत्ता जाने की. गोरी अपने बालम की हर इच्छा का खयाल रखती ताकि उसे जाने की याद न आए. वह प्यारमनुहार से बालम के दिल को टटोलने की कोशिश कर रही थी जिस की डोर का एक सिरा कलकत्ता में बंधा तो है, पर किस से? पर अब तक कामयाब न हो सकी. सो बालम के प्रेम में मगन हो गई.

अभी कुछ ही दिन प्रेम की नदी में डुबकियां लगाते बीते थे कि बालमजी ने फिर कलकत्ता का राग अलापा. इधर उन का अलाप शुरू हुआ… उधर गोरी ने ऐसा रुदन शुरू किया कि बालम के स्वर हिलने लगे. गोरी जमीन में लोटपोट हो कर दहाड़ें मार रही थी… बालम बेचारा हैरानपरेशान उसे जितना चुप कराने की कोशिश करता, गोरी उतनी ही तेज आवाज में अपना रोना शुरू कर देती. सारा घर, सारा महल्ला इकट्ठा हो गया.

सासू ने भी अपने चिरपरिचित अंदाज में गोरी को चुप होने का आदेश दिया, पर आज तो गोरी ने उन की भी न सुनी. उस का रैकौर्डर एक ही जगह फंस गया था कि इस बार बालम को कलकत्ता नहीं जाने दूंगी. जितने लोग उतने उपाय. कोई कहे इस पर भूतनी आ गई है, इसे तांत्रिक बाबा के पास ले चलो… कोई चप्पल सुंघाने की सलाह दे रहा था… कोई कह रहा था कि इस के खसम का किसी कलकत्ते वाली से टांका भिड़ा है. उस के बारे में गोरी को पता लग गया है इसलिए इतना फैल रही है. बालम बेचारा अपने माथे पर हाथ धर के बैठ गया. सब मिल कर गोरी से जानने की कोशिश कर रहे थे कि ऐसी क्या वजह है कि वह अपने बालम को कलकत्ता नहीं जाने देना चाहती.

पर गोरी पर तो जैसे सच्ची में भूत सवार था. वह दहाड़ें मारमार कर रोए जा रही थी और कलकत्ता पर गालियां बरसा रही थी. यह नाटक और कई घंटे चलता, पर इतने में किसी ने पुलिस को फोन कर दिया. कुछ देर तक तो पुलिस के सामने भी यह नाटक चालू रहा, पर फिर दरोगाजी ने डंडा फटकार कर कहा, ‘‘इस को, इस की सास को और पति को ले चलो और जेल में डाल दो. सारा सच सामने आ जाएगा…’’

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जेल का नाम सुनते ही गोरी के रोने पर झटके से ब्रेक लग गया. वह एक सांस में बोली, ‘‘हमें न भेजना अपने बालम को कलकत्ता, वहां की औरतें काला जादू जानती हैं, इसे जादू से बकरा बना कर अपने घर में बांध लेंगी, फिर हमारा क्या होगा?’’ और गोरी फिर से रोने लगी. गोरी की बात सुन कर बाकी लोग हंसने लगे. गोरी रोना बंद कर मुंहबाए सब को देखने लगी… उस ने देखा कि बालम भी हंस रहा है… ‘‘धत पगली, ऐसा किस ने कह दिया तुम से. इस जमाने में ऐसी कहानी कहां से सुन ली…’’ बालम ने उसे मीठी फटकार लगाई.

‘‘मैं ने बचपन में सुना था ऐसा, जो भी बालम कलकत्ता जाते, कभी वापस नहीं आते और मेरी सब सखियों ने भी तो ऐसा ही कहा,’’ गोरी ने बताया. अब सासूजी बोलीं, ‘‘ये कौन सी सखियां हैं तेरी… मुझे बता, मैं खबर लूं उन की. बताओ छोरी का दिमाग खराब कर के धर दिया… कोई भी लुगाई यह सुनेगी, उस बेचारी का कलेजा तो धसक ही जाएगा…

‘‘चल, अब तू भीतर चल. कहीं न जाएगा तेरा बालम… और तुम सब भी अपनेअपने घर को जाओ. यहां कोई मेला थोड़े ही न लगा है.’’ सब अपने रास्ते चल दिए और दारोगाजी भी हंसते हुए वापस चले गए. आखिर गोरी की जीत जो हो गई थी. उस के बालम बकरा बनने से बच जो गए थे.

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फैशन के मामले में सुष्मिता सेन से कम नही हैं उनके बौयफ्रेंड, देखें लुक्स

हाल ही में 19 नवम्बर को बोलीवुड इंजस्ट्री की जानी मानी एक्ट्रेस सुष्मिता सेन ने अपना बर्थडे सेलिब्रेट किया था. सुष्मिता के बर्थडे के अवसर पर उनके बौयफ्रेंड ने उन्हें एक बहतरीन सरप्राइज दिया था जिसे देख सुष्मिता काफी खुश दिखाई दीं. आपको बता दें, सुष्मिता सेन के बौयफ्रेंड का नाम रोहमन शौल है. रोहमन सुष्मिता से 14 साल छोटे हैं लेकिन जब रोहमन ने उन्हें प्रोपोज किया तो सुष्मिता मना ना कर पाईं और उन्होनें साथ में एक दूसरे को डेट करने का प्लैन किया.

रोहमन शौल एक बहतरीन मौडल हैं और वे आए दिन अपने फैंस के लिए अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से अपने गजब के लुक्स शेयर करते रहते हैं. तो आज हम आपको दिखाते हैं रोहमन शौल के कुछ चुनिंदा लुक्स जिसे आप जरूर ट्राय करना चाहेंगे.

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इंडो वेस्टर्न लुक…

इस लुक में रोहमन शौल ने येल्लो कलर का ट्रेंडी इंडो वेस्टर्न कैरी किया हुआ है जो बेहद कमाल का लग रहा है. इस लुक के साथ रोहमन ने व्हाइट कलर का पयजामा पहना हुआ है जो इस लुक के साथ काफी जच रहा है. आप भी ये लुक अपने किसी फैमिली फंक्शन में ट्राय कर सबको इम्प्रेस कर सकते हैं.

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ट्रेंडी लुक…

 

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Styled by @soodpranav

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इस लुक में रोहमन शौल ने ग्रे कलर के कुर्ते के साथ यैल्लो कलर का ट्राउसर और साथ ही कुर्ते के ऊपर यैल्लो कलर का ही ब्लेजर पहना हुआ है. इस कुर्ते और ब्लेजर का कौम्बीनेशन काफी ट्रेंडी लग रहा है तो अगर आपको भी है नए ट्रैंड्स अपनाने का शौंक को जरूर ट्राय करें रोहमन का ये लुक.

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लौंग कोट…

विंटर्स में लौंग कोट काफी सूट करता है तो इसी के साथ रोहमन शौल ने भी अपना एक लौंग कोट वाला लुक फैंस के साथ शेयर किया है जिसे उन्होनें व्हाइट हाई नेक टी-शर्ट के साथ कैरी किया हुआ है. इस लुक के साथ उन्होनें ब्लैक कलर की जींस पहनी हुई है. आप भी ये लुक अपने कौलेज में ट्राय कर लड़कियों को इम्प्रेस कर सकते हैं.

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फ्लावर प्रिंट इंडो वेस्टर्न…

रोहमन शौल का ये फ्लावर प्रिंट इंडो वेस्टर्न काफी ट्रेंडी लग रहा है. इस लुक में रोहमन ने ब्लू कलर के कुर्ते के ऊपर ब्लू कलर का ही फ्लावर प्रिंट इंडो वेस्टर्न पहना हुआ है. इसी के साथ उन्होनें क्रीम कलर की पयजामी पहनी हुई है. आप ये ट्रंडी लुक किसी भी फंक्शन में ट्राय कर सकते हैं.

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हौलीवुड स्टार ‘लुसी लियू’ ने किया अनुपम खेर के शो का निर्देशन

अभिनेता अनुपम खेर अपने शो ‘न्यू एम्सटर्डम’ में डा. विजय कपूर का किरदार निभा कर वेस्ट में जाना माना नाम बन चुके है. अक्सर उन्हें हौलीवुड में अपने दोस्तों के साथ समय बिताते हुए देखा जाता है. वे बेहद ही उत्साहित नजर आए जब हाल ही में हौलीवुड स्टार लुसी लियू ने अनुपम खेर के मेडिकल ड्रामा शो के एक एपिसोड का निर्देशन किया.

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‘चार्लीज एंजेल्स’ और ‘किल बिल टू’ जैसी ब्लौकबस्टर फिल्मों में किया है काम…

बता दें की लुसी लियू ने ‘चार्लीज एंजेल्स’ और ‘किल बिल टू’ जैसी ब्लौकबस्टर फिल्में की हैं. इसके बारे में बात करते हुए, दिग्दज अभिनेता अनुपम खेर ने कहा, “जब हम पहली बार मिले तो उन्होंने सबसे पहले ये बात कही कि हमें एक एक्टर के तौर पर काम करना होगा, मैंने कहा किसी न किसी दिन जरूर. उन्होंने मेरा काम देखा है यही अपने आप में एक तारीफ है. इस बात से मैं बहुत खुश हुआ.”

लुसी लियू के बारे में अनुपम खेर ने कहा…

एक एक्टर द्वारा दूसरे एक्टर को डायरेक्ट करने के बारे में बात करते हुए अनुपम खेर कहते हैं, “एक अभिनेता को डायरेक्ट करते हुए देखना बहुत ही दिलचस्प है, खासकर जब वो एक युवा और ऊर्जावान अभिनेता हो. यह सभी के लिए एक सरप्राइज था. साथी एक्टर को डायरेक्ट करते हुए देखना खुशी की बात है. अन्य लोग जिन्होंने निर्देशन किया है, वे निर्देशक हैं, लेकिन एक अभिनेता अपने निर्देशन में निश्चित रूप से कुछ नया एलिमेंट लेकर आता है. मैंने उनके साथ दो दिन का काम किया है. वो माइंड ब्लोइंग हैं. उनका दृष्टिकोण बहुत अलग है. ”

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