रमाकांत की तरफ से रोहिणी को हर तरह का सुख मिला था. दुख था तो  उसे केवल रमाकांत का साथ न मिलने का. दरअसल, रमाकांत अपने को काम में कुछ ज्यादा ही व्यस्त रखते थे. समय उन्हें मिला लेकिन रोहिणी के परलोक सिधारने के बाद.