मोदी लाइव: साहब! आपसे आवाम भयभीत क्यों रहती है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी जब जब टीवी पर देश को संबोधित करने, संदेश देने आते हैं चारों तरफ एक भय का वातावरण, सनाका खींच आता है. आखिर लाख टके का सवाल यह है कि देश की आवाम अपने प्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी से भयभीत क्यों रहती है?

जैसे “अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है” एक मुहावरा बन गया है. वैसे ही आज देश में नरेंद्र मोदी की लाइव टेलीकास्ट के समय यह चर्चा बड़े जोरों पर चलती है, ट्रेड करने लगती है कि हमारे प्रधानमंत्री आज जाने क्या “वज्रपात” करेंगे, “बिजली” गिराएंगे!

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शायद यही कारण है कि अपनी इस छवि को दुरुस्त  करने के लिए शुक्रवार का दिन नरेंद्र मोदी ने चयन किया और वक्त भी सुबह 9 बजे का. सबसे बड़ी बात यह कि अपेक्षा के विपरीत, देश की जनता को, सहज  सहलता के साथ सहलाते हुए, यही आग्रह किया कि आगामी पांच अप्रैल दिन रविवार को रात 9 बजे सिर्फ 9 मिनट तक घर में , सब जगह अंधेरा करके, एक दिया जला दिया जाए, एक टार्च  जला दी जाए और यह संदेश दिया जाए कि भारत एक है, भारत की 130 करोड़ आवाम एक है और हम सब मिलकर कोरोना को परास्त करेंगे.

यहां यह बताना लाजमी होगा कि नरेंद्र दामोदर दास मोदी की कार्यशैली पूर्व सभी प्रधानमंत्रियों से बिल्कुल भिन्न है और आपकी एक ही चाहत है कि देश आपको कभी बिसार  न सके संभवत यही कारण है कि बारंबार कुछ ऐसे फैसले लिए जाते हैं जिससे जनता चाहे रो कर नाम ले, की हंसकर नाम ले, नाम तो मोदी का लेना ही पड़ेगा.

मोदी ने अपना मिथक तोड़ा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज तीन अप्रैल को एक तरह से अपने ही बनाये मिथक को तोड़ दिया. दरअसल, जाने अनजाने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा एक बड़ी लकीर खींच दी गई थी. यह लकीर थी, देश की जनता को संबोधन करने के समय कुछ ऐसा प्रहार, कुछ ऐसा वज्रपात, बिजली गिराना की जनता त्राहिमाम त्राहिमाम करने लगे.

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स्मरण आता है 8 नवंबर का वह दिन जब “नोट बंदी” की उन्होंने रात को 8 बजे घोषणा की थी. जब यह संदेश आया था कि प्रधानमंत्री देश को संबोधित करेंगे तो लोगों ने सहजता से लिया था मगर जब रात को 8 बजे उन्होंने नोटबंदी की घोषणा कर दी तो त्राहि-त्राहि मच गई. बाद में जब वह पुनः  रात को आए तो भी जनता को कोई राहत नहीं मिली और यह सबक जरूर मिला की नोटबंदी से आतंकवाद, नक्सलवाद, काला धन समाप्त हो जाएगा. जो कि हम जानते हैं,आज तलक  नहीं हुआ है, इसी तरह जीएसटी पर भी रात को 8 बजे आकर उन्होंने देश को संबोधित किया था. कुल जमा रात को प्रधानमंत्री का आना लोगों में भय, सिहरन पैदा करने लगा था. जिसे आज उनहोंने स्वयं तोड़ने का प्रयास किया है.  मगर मसला यहीं खत्म नहीं होता सवाल है सिर्फ आज के अल्प संवाद से जनता को हासिल क्या हुआ ?जनता को बड़ी अपेक्षा थी कि देश की विषम स्थिति पर, आप मलहम लगाएंगे, मगर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.

कोरोना: यक्ष-प्रश्न यह है

बीते 22 मार्च से, देश एक तरह से घर में बंद है. लॉक डाउन की स्थिति में संपूर्ण देश मानो ठहर गया है.दुकाने बंद है दफ्तर बंद है ट्रेन बंद है, बस बंद है सिर्फ अति आवश्यक कार्य जारी है देश ने अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात को माना और सम्मान करते हुए स्वयं को घरों में कैद कर लिया है. मगर इसके बावजूद देश की स्थिति भयावह होती चली जा रही है लोग सड़कों पर रात बिताने को मजबूर हैं. लोग भूखे हैं, लोग पैदल सैकड़ों किलोमीटर अपने घर की ओर लौट रहे हैं. दिल्ली के निजामुद्दीन में मरकज की घटना से देश उद्वेलित है लोगों पर थूका जा रहा है, डाक्टर  अपना काम निष्ठा पूर्वक कर रहे हैं. मगर डॉक्टरों के लिए सरकार द्वारा सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं कराई गई हैं. ऐसे में देश में एक जन भावनाओं का उद्वेलन देश के नायक ही पैदा कर सकते हैंएक दिशा  प्रदान  कर सकते हैं . आज अगर मोदी हमारे प्रधानमंत्री हैं तो उनसे अपेक्षा देशवासियों को है कि इन मसले पर भी, अपने उद्गार व्यक्त करके देश को दिशा प्रदान करें.

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Lockdown के चलते अपनी हौट फोटोज से चर्चा में आई रश्मि देसाई, देखें Photos

कोरोना वायरस (Corona Virus) महामारी को लेकर दुनियाभर में लड़ाई जारी है. भारत में अभी 21 दिन का लौकडाउन (Lockdown) चल रहा है. ऐसे में फिल्‍म और टीवी इंडस्‍ट्री से जुड़े कई लोग सामने आ कर लोगों को अपने अपने घरों में रहने की सलाह दे रहे हैं और साथ ही टिप्स भी दे रहे हैं कि हम सब अपने घरों में रह कर क्या क्या कर सकते हैं. इसी के साथ ही टीवी इंडस्ट्री की जानी मानी एक्ट्रेस रश्मि देसाई (Rashami Desai) ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम पर अपनी कुछ फोटोज शेयर की है जिसमें वे बेहद खूबसूरत दिखाई दे रही हैं.

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कुछ दिनों पहले रश्मि देसाई (Rashami Desai) ने सोशल मीडिया पर अपनी कुछ ऐसी फोटोज शेयर की थी जिसे उनके फैंस ने काफी पसंद किया और हर बार की तरह रश्मि के फैंस ने उनके इस लुक को भी भरपूर प्यार दिया. इस लुक में रश्मि ने यैल्लो कलर की वन पीस ड्रैस (One Piece Dress) पहनी हुई है जिसमें वे काफी हौट (Hot) और ग्लैमरस (Glamourous) दिखाई दे रही हैं.

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रश्मि देसाई (Rahsami Desai) की इन फोटोज को उनके फैंस खूब पसंद कर रहे हैं और साथ ही उनकी तारीफ कर लगातार कमेंट्स कर रहे हैं. इन फोटोज को देख ऐसा कहा जा सकता है कि इस लौकडाउन के समय में रश्मि काफी अच्छे से अपनी मा टाइम बिता रही हैं और साथ ही अपने लुक्स पर काफी ध्यान दे रही हैं. वैसे देखा जाए तो रश्मि देसाई है ही इतनी सुंदर कि कोई भी उन्हें देख उनकी तारीफ किए बिना रह ही नहीं पाता.

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Happy raam navmi 💝🍀 . . Earring set: @urbanmutiyar Suit : @komalsandhu14

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रश्मि देसाई (Rashami Desai) ने इन ग्लैमरस फोटोज के बीच अपनी एक ट्रैडिशनल (Traditional) फोटो भी फैंस के साथ शेयर की है जिसमें वे सबको राम नवमी (Ram Navmi) की बधाई दे रही हैं. इस फोटो में रश्मि ने साड़ी पहनी हुई है और साड़ी के साथ ही उन्होनें हैवी ज्वैलरी भी पहनी हुई है. इसी के साथ ही उन्होनें इस फोटो के कैप्शन में लिखा है कि,- “May lord ram showers His blessings On you and your family, I wish you all joy, harmony & prosperity on RAM NAVAMI For you and your family.”

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कमली और कोरोना

लेखक- नीरज कुमार मिश्रा

“जब सब लोग अपने अपने घर म आराम से सो रहे होते ह तब हम लोग क सुबह होती है और जब सब लोग सुबह के  सूरज को सलाम कर रहे होते है, उस समय तक हम लोग थककर चूर हो जाते है “मुबई क एक सुनसान सड़क पर खड़ी ई कमली अपने आप से  ही बुदबुदा उठ थी “पता नह य ,आजकल सड़क पर इतना साटा य रहने लगा है ,पहले तो अपने को शाम आठ बजे से ही ाहक मलने शु हो जाते थे और रात के एक बजे तक तो म तीन चाराहक से धधा कर लेती थी पर अभी दस बजने को आये और एक भी ाहक नह आया ” ाहक के ना आने से झुंझुला रही थी कमली

“ऐ…तुम लोग को कुछ समझ म नह आता ….सारी नया  म बीमारी फ़ैल रही है ,लोग को घर से नकलने को मना कया गया है और तुम लोग को घर म भी चैन नह मल रहा है ….रात यी नह क नकल पड़ी सड़क पर” पीछे से मोटरसाइकल पर सवार दो पुलिसवाल में से एक ने चिल्लाकर कहा…

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“अरे….या साहब …हम लोग बाहर नह नकलगे तो  खाएंगे या ,कौन हमको बैठे बैठे खलायेगा .…हम लोग को तो रोज़ ही कुआं खोदना है और तभी अपुन लोग को पानी नसीब होता है साहब ” कमली ने तवाद कया “चलो….चलो …बक बक  मत करो अब ….बत देर यी ….अब भागो यहाँ से “एक पुलसवाला चलाते ए बोला “अरे …तुमको भी कुछ चाहए तो बोलो …और नह चाहए …तो आप अपने काम पर जाओ और मुझे अपना काम करने दो साहब ,अभी तक बोहनी भी नह ई है अपनी” कमली ने अपनी आवाज़ म मठास घोलते ए कहा जब कमली ने इस तरह से पुलस वाल से रकवेट करी तो वे भी मुकराते ए वहां से नकल गए और जाते जाते कमली को चेताया क थोड़ी देर के लए ही वे छूट दे रह है और उनक वापसी करने तक वह वापस चली जाए ,बदले म कमली ने भी सर झुकाकर उनक बात मान लेने का अभनय कया. सूनी आँख से अब भी सड़क को नहार रही थी कमली , जो सड़क रात को और अधक गुलज़ार रहती थी उन पर आज साटा है जसका कारण कोरोना वायरस ारा संमण का फैलना है जसके कारण ज़री कामो को छोड़कर बाक लोग को घर से नकलने को मना कया गया है ,पर कमली जैसी औरत जो धधा करती है अगर वो बाहर नह नकलेगी तो खायेगी या, उसके लए तो सड़क पर नकलना बत ज़री है. “आज भी खाली हाथ ही वापस लौटना पड़ेगा ,कोई भी ाहक नह दख रहा …….”मायूस हो चुक थी कमली “सुनो..”कोई मदाना आवाज़ थी जो कमली के ठक पीछे से आयी थी कमली ने बड़ी ही आशा भरी नज़र से पीछे घूमकर देखा वह एक लंबा सा युवक था ,जसक उ करीब अड़तीस -चालीस के पास होगी , और देखने से काफ  पैसे वाला लग रहा था वह लगातार कमली को घूरे जा रहा था  उस युवक को अपनी और ऐसे घूरते देखकर कमली को लगा क कम से कम एक ाहक तो आया “ऐसे य घूरे जा रहे हो…..यहाँ घूरने का भी पैसा लगता है”कमली ने इठलाते ए कहा “नह ….मेरा काम सफ घूरने भर से नह होगा ….म तो तुहारे  साथ एजॉय करना चाहता हूं “उस युवक ने कमली के उत सीने पर नज़र टिका दे.

“वो…एजॉय तो ठक है पर …उसका पैसा देना होगा”कमली ने अपने खुले सीने को ढकते ए कहा “कतना पैसा लोगी तुम?बताओ तो सही” वह युवक बत हड़बड़ी म और थोड़ा घबराया आ सा लग रहा था “अब साहब ….वैसे तो म तीस हज़ार लेती ँ तुम बोहनी के समय आये हो इसलये थोड़ा कम दे दो म कुछ नह कँगी….”कमली ने अंगड़ाई लेते ए कहा “अरे …तुम तीस क बजाय पैतीस ले लेना….. बस तुम मुझे एक बार खुश कर दो…  जतना मांगो म उतना पैसा देने को तैयार ँ ” युवक के वर म उेजना थी ये बात उस युवक ने कुछ इस कार थी क कमली भी एक पल को कुछ सोचने लगी थी अगले ही पल कमली ने उस युवक से सवाल कया “पर ..अभी तक तुमने अपना नाम तो बताया ही नह”कमली ने पूछा ” अजीत …अजीत सह है मेरा नाम”जद से युवक ने अपना नाम बताया “हाँ तो ठक है अजीत बाबू …अपनी डील पक हो गयी है …तो चलो .कस होटल म  ले चलना है ….या फर अपनी गाड़ी म ही अपने अरमान पूरे करने का इरादा है”कहने के साथ ही कमली मादक ढंग से हँसने लगी थी “देखो सारे होटल तो बंद ह …और मेरे पास गाड़ी वगैरह भी नह है” अजीत ने कहा “ऐ…तो या यह सड़क पर नपटने का इरादा है या” कमली ने आँख तरेरी “नह …नह यहाँ नह…अगर हम दोन लोग तुहारे घर पर चलकर…. एजॉय कर तो तुहे कोई एतराज तो नह होगा” अजीत सकुचा रहा था “वह अजीत बाबू …एक ही मुलाकात म इतनी मोहबत कर बैठे क मेरा घर तक देख लेना चाहते हो ..पर बाबूजी म तुहे बता ँ क घर के नाम पर अपने पास एक खोली है …और वहां तक जाने के लए हम लोग को थोड़ा पैदल चलना होगा”  “हाँ…..हाँ ..म तैयार ँ  बताओ कधर चलना है “अजीत कमली क हर बात म राज़ी होता दख रहा था चौड़ी सड़क को छोड़कर वे दोन अब तंग गलय म आ गए थे.

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इन गलय म साफ़ सफाई क कोई वथा भी नह दख रही थी ,अचानक से अजीत सह को सूखी खांसी आने लगी  ,पहले तो उसक खांसी पर कमली का यान नह गया पर जब अजीत सह क खासी कुछ यादा ही बढ़ गयी तो कमली ठठक “या बात है तुहे तो लगातार खासी आ रही है?”कमली ने पूछा “हाँ ….वो ज़रा गले म कुछ फस गया था इसलए खासी आ गयी”अजीत ने सामाय दखने का यास कया “फर भी …ये मेरे पास खासी क गोली है …तुम इसे खा लो …तुहे आराम मल जायेगा” कमली ने अजीत को खासी क गोलयां देते ए कहा अजीत ने भी बना कोई वरोध कये वो खांसी के गोली चुपचाप खा ली. “तुहे पता है क आजकल पूरी नया म एक वायरस ने खौफ फैला रखा  है ,उस वायरस को कोरोना वायरस कहते ह और सुना है क जो  कोरोना वायरस से संमत होता है उसे भी मेरी तरह खासी आती है  ,और बुखार भी आता है और बाद म सांस लेने म भी दकत   होती है ,पर मुझे डरने क ज़रत नह है ये खासी वासी तो ऐसे भी आती ही रहती है “कहकर अजीत मुकुराने लगा था “वैसे तुहारा नाम या है”अजीत ने चलते ए पूछा “कमली” “बत सुंदर नाम है तुहारा ,पर सोचता ँ क अगर तुम धंधे वाली नह होती तो एक बत अछ डॉटर बन सकती थी” मुकुरा रहा था अजीत “अरे य मज़ाक करते हो साहब …म भला या डॉटर बन सकती थी”कमली शमा सी गयी “हाँ हाँ बलकुल …एक अछ डॉटर ..देख न तुहारे बैग म मेरे लए दवा भी मल गयी…अब तुमने दवा द है तो मुझे तुहारी फस भी तो देनी होगी ना” इतना कहते ए अजीत सह ने अपनी जेब म हाथ डाल कर दस बीस नोट कमली क तरफ बढ़ाए  पर वह  कोई वदेशी करसी  थी जसे देखकर कमली के मन म कुछ संदेह उ होने लगा तो अजीत सह उसक मनोभावना को समझते ए हँसने लगा और बोला  “अरे तुम घबराओ मत …बई क करसी के अलावा  भारत के नोट भी है …ये लो भारतीय नोट “कहकर अजीत सह ने 500 के ढेर सारे नोट कमली क तरफ बढ़ दये ढेर सारे नोट देखकर कमली क आँख म चमक आ गयी ,उसने लपकर पये ले लए और अपनी चोली म खस लए अभी भी दोन लोग तंग गलय से ही गुज़र रहे थे ,बीच बीच म अचानक कुो के भोकने क आवाज़ आने लगती तो कमली धत कहकर कु को खामोश कर देती एक खोली के बाहर पँच कर कमली क गयी थी ,हाँ यही तो थी उसक खोली ,अजीत सह ने उसक खोली देखकर राहत क सांस ली.

अब वे दोन खोली के अंदर थे ,अजीत सह ने कमली को अपनी बाह म जकड लया और बेतहाशा उसे चूमने लगा ,कमली भी उसका भरपूर साथ दे रही थी ,अजीत क साँसे फूल रही थी ,उसने कमली के जूड़े म लगा आ पन नकाल दया और उसक कैद जफ को आज़ाद कर दया , और बारी बारी कमली के कपड़ो को भी हटा दया वे दोन पैदायशी हालत म बतर पर पँच गए . अजीत सह बतर पर पचते ही लेट गया  “अछा …अजीत बाबू …मजा भी चाहए ..और मेहनत भी नह करना चाहते ..अब सब कुछ हम  को ही  करना पड़ेगा या?  अजीत क टांग के ऊपर बैठते ए कमली ने कहा  “हाँ…दरअसल …अपनी जदगी म म कभी भी अछा ाइवर नह रहा ँ ….इसीलये आज गाड़ी चलाने क ज़मेदारी तुहे दे द है ….गाड़ी तुम चलाना शु तो करो ….अगर मेरा मन करेगा तो बाद म ाइवग सीट पर म आ जाऊँगा” अजीत सह ने  कमली क कमर वाले हसे को दबाते हटे कहा रात के साटे म उन दोन क साँस क आवाज़ खोली म गूंज रही थी और जम दहक रहे थे ,अजीत के शरीर के ऊपर बैठ ई कमली अचानक से नढाल होकर एक और गर गयी और अजीत भी नढाल होकर कमली क पीठ से लपट गया.

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थोड़ी देर तक दोन इसी हालत म  पड़े रहे करीब दस मनट बाद अजीत ने कमली के कान पर पडी यी जुफ हटाकर  धीरे से कहा “कमली …मुझे भूख लगी है ….कुछ खाने को दे ना” अजीत क ये खाने वाली फरमाइश ने कमली को वच हालात म लाकर खड़ा कर दया था एक तो खोली म खाने क कोई चीज़ नह थी और सरी बात ये क आज तक जतने भी ाहक आये वे सब कमली के साथ सेस करने के बाद वहां से  चले गए पर ये पहली बार था क कसी ाहक ने उससे खाना माँगा था ये बात कमली को हैरान भी कर रही थी और कसी के ारा अपनेपन से खाना मांगने के कारण खुश भी हो रही थी.हालाँक कमली का शरीर आराम मांग रहा था और उसक पलक भारी हो रही थी लेकन वह खाना बनाने क गरज   से बतर छोड़कर उठ . खोली के एक कोने म ज़रत का सारा सामान जमा करके उसे कचन क सी शल दे द गयी थी ,एक गैस चूहा और कुछ बतन और कुछ सजयां और आटा ,चावल ,दाल के कुछ डबे म ही कमली खाना बनाने का उपम करने लगी. बतर  म लेटे लेटे ही अजीत ने कमली क और देखा कहा  “तुमने पैसा कमाने के लए कोई और काम य नह पकड़ा कमली”  कमली के लए ये सवाल कुछ नया नह था इससे पहले भी कई ाहक आते थे जो पहले कमली के जम से अपनी द ई पूरी कमत वसूलते और बाद म शराब के नशे  कुछ इसी तरह क बाते करके फालतू क हमदद दखाते अजीत क बात सुनकर हँस पडी थी कमली  “या अजीत बाबू ….पूछा भी तो या पूछा …वEही दल को खाने वाली कहानी ….वैसे म सबको  बताती भी नह पर तुम अछे आदमी दखते हो इसलये बताती ँ  महारा के एक छोटे से गांव म हमारा घर था ,घर म पैसे क बत कमी थी और बाबूजी को शराब क लत लग गयी थी ,घर म जब पैसे खम हो गए तो बाबू जी ने मुझे एक दलाल को बेच दया और फर उस दलाल ने मुझे एक कोठे पर पचा दया और फर या था मुझे एक वैया बनने म समय नह लगा फर एक दन अचानक कोठे पर रेड पड़ गयी और हम लोग को गरतार कर लया गया ,म नाबालग थी इसलए मुझे बाल सुधार गृह भेज दया गया  पर वहां भी नेता टाइप के लोग आते और हमारा शारीरक शोषण करते थे ,मुझे वहां का माहौल पसंद नह था इसलए म एक दन वहां से मौका देखकर भाग गयी  और वहां से बाहर आते ही इस नया म जदा रहने के लए मुझे पैसे क ज़रत थी ,जो क अपने शरीर को बेचकर आसानी से कमाया जा सकता था और …..बस तबसे लेकर आज तक मेरा सफर ऐसे ही चल रहा है”कमली ने अपनी कहानी बयां कर द “ओह काफ खभरी कहानी है तुहारी …पर एक बात बताओ ….लोग कहते ह क तुहारे जैसे सेसवकर संमण फैलाते है ,जससे लोग म बीमारी फैलती है ,एड्स जैसी बीमारी फ़ैलाने म तुम लोग का अहम् रोल रहता है”अजीत ने पूछा “हाँ साहब….गलत काम करने का इलज़ाम हमेशा से ही गरीब लोग पर लगता आया है अरे कंडोम का यूज़ करने से हर बीमारी र रहती है तो आप लोग को कंडोम यूज़ करने म मज़ा नह आता है और अगर बाद म अगर कुछ हो गया तो दोष हम लोग का आता है और तो और अजीत बाबू कंडोम तो आज तुमने भी नह उसे कया है ” इसलए हो सकता है क कह तुहे भी कोई बीमारी न लग जाए” कमली बोली खाने क लेट अजीत के हाथ म देकर कमली भी उसी के साथ खाना खाने लगी “वैसे भी आजकल देश म कोरोना को लेकर बत सती चल रही है  यक अभी तक कोरोना क कोई भी दवाई भी नह बन पायी है

दरअसल म भी अभी तीन दन पहले ही बई से लौटा ँ ,जब म भारत पंच तो हवाई अे पर मेरा गहन चेकअप आ और उसके बाद मुझे एक अलग कमरे म रख दया गया और मुझसे ऐसा वहार कया जाने लगा जैसे मुझे कोई छूत क बीमारी हो ,मुझे लगने लगा था क शायद म कोरोना से त हो गया ँ और बत मुमकन है क म जीवत न रँ इसलये बत ही सुरा होने के बावजूद म सबक नजर बचाकर वहां से भाग नकला  और सीधा तुहारे पास पंचा यक म मरने से पहले जी भरकर जी लेना चाहता था और मन ही मन म बत घबराया आ था यक सीसीटवी म मेरी तवीर आ चुक होगी और अगर म कसी भी बस अे या टेशन पर अपने घर जाने के लए जाता  भी  तो  हो सकता था क मेरी खासी या बुखार को चेक कया जाता और मुझे कोरोना से संमत पाये जाने पर फर से मुझे अकेले कमरे म डाल दया जाता ,जो क म बलकुल नह चाहता था”इतना कहने के बाद अजीत ने घड़ी पर नज़र डाली ,सुबह के पांच बजने वाले थे  “अब मुझे जाना होगा ,  सुबह होने वाली है और मुझे खांसी भी आ रही है ….तुम मुझे खासी क दवाई और दे दो ताक म ठक से अपने घर तक पँच जाऊँ”ये कहकर अजीत क खासी और तेज़ हो गई थी और बुखार के कारण उसके माथे से पसीना भी आने लगा था कमली फट नज़र से अजीत को देख रही थी ,उसने कांपते हाथ से खासी क दवा अजीत के हाथ म दे द  अजीत हांफता आ तेज़ी से कमली क खोली के बाहर नकल गया. कमली अंदर साटे म बैठ ई थी और अचानक से कमली का सर भारी होने लगा था.

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Lockdown ने बिगाड़े किसानों के हालात, खेतों में पड़ी सड़ रही हैं फसलें

लेखक- हरीश भंडारी

कोरोना जैसी महामारी   से बचने के लिए देश में जारी 21 दिन के लौकडाउन के बाद जहां एक तरफ गरीब व दिहाड़ी मजदूरों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा है, वहीं तो दूसरी तरफ गरीब किसान अपनी फसलों को खेतों में सड़ते देख खून के आंसू बहा रहा है. लौकडाउन की घोषणा के बाद से ही खेतों में पड़ी फसल, खेतों में पड़ी-पड़ी सड़ रही है. मंडियों का काम ठप हो गया है, तो जिसकी वजह से फसलों की खरीद भी बंद है. ऐसे में किसान करे तो क्या करे. वह बडी ऊहापोह की स्थिति में है.

किसानों की खस्ता हालत

किसानों की हालत इतनी खराब है कि उन्हें किसी फसल से कोई कमाई नहीं हो पायी है. उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और पंजाब के किसानों का भारी नुकसान हुआ है. किसानों का मानना है कि उनकी दशा  बड़ी दयनीय हो गई है. एक तरफ उनका पेमेंट फंसा हुआ है तो वहीँ, सड़ती फसल के नुकसान की भरपाई की कोई व्यवस्था नहीं है.

स्वास्थ्य मंत्रालय पहले ही कह चुका है कि कोरोना से बचाव के चलते लॉकडाउन आगे बढ़ाया जा सकता है. तो वहीँ लॉकडाउन से परेशान किसान इस आशंका को लेकर तनाव में आ गए हैं. किसान नेताओं का कहना है कि यह संकट अभी और बढ़ सकता है. अगले कुछ दिनों में अंगूर, तरबूज, केले, चना, कौटन, मिर्च, हल्दी, जीरा, प्याज और आलू की फसल आने वाली है.

लौकडाउन के चलते मंदी के आसार

लौकडाउन के चलते किसानों को फसलों के लिए मजदूर मिलने मुश्किल हो गए हैं और फिर बाजार में भी बिक्री करना आसान काम नहीं होगा. वहीँ किसानों की माने तो लॉकडाउन की वजह से बाजार में मंदी के बने रहने के आसार हैं, जिससे डिमांड कम हो जाएगी और किसानों को उनकी फसल का सही दाम नहीं मिल पाएगा

भूख के आगे धुआं हुआ कोरोना का खौफ

एक रिपोर्ट के अनुसार, किसान संगठनों के समूह के कंसोर्टियम के मुख्य सलाहकार ने बताया कि ‘केंद्र सरकार बार-बार यह बात कह रही है कि लोगों को जरूरी सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी. जबकि किसानों की खेती खड़ी है और राज्यों की ओर से किसानों को फसलों की कटाई नहीं करने दी जा रही. फसलों को बाजार नहीं पहुंचने दिया जा रहा है और खरीदारों को खरीदारी से रोका जा रहा है.’  उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इस मसले पर समय पर ध्यान न दिया तो हालात बदतर हो सकते हैं यानी किसानों पर दोहरी मार पड़ने के आसार हैं.

ट्रांसपोर्ट की समस्या

किसानों के अलावा फलों और सब्जियों की ढुलाई करने वाले ट्रक संचालकों का कहना है कि वे भी लौकडाउन की वजह से संकट का सामना कर रहे हैं. उनका कहना है कि लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद से ही देशभर में बिना खाने और पैसे के उनके लोग जहां-तहां फंसे हुए हैं.

गेंहू के दाम गिरे

वहीं लौकडाउन के कारण गेहूं की फसल के दाम भी गिर गए हैं. एक तरफ जहां सभी मंडियों में काम ठप्प है तो वहीँ जिस मंडी में काम चल भी रहा है, वहां सिर्फ 1,600 रुपये प्रति क्विंटल के दाम में गेहूं की खरीद की जा रही है. जबकि पिछले दिनों गेहूं के रेट 2,200 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास थे, जबकि सरकार की ओर से तय न्यूनतम समर्थन मूल्य भी 1,840 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन लॉकडाउन के बाद किसान इससे भी कम दाम पर अपनी फसल बेचने के लिए मजबूर हैं.

 बंपर पैदावार के बाद भी किसान परेशान, सड़कों पर फेंकी फसल

आंध्र प्रदेश में टमाटर, मिर्च और केले के किसान बुरी तरह से लॉकडाउन की मार झेल रहे हैं. कई जगहों पर किसानों ने अपनी उपज को सड़क पर फेंक दिया है.

नरमुंड का रहस्य

मुरादाबाद आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक गांव है शिमलाठेर, जो थाना कुंदरकी के अंतर्गत आता है. 9 सितंबर, 2017 को इसी गांव के रहने वाले 2 भाई लक्ष्मण और ओमकार अपने भतीजे शिवम के साथ अपने खेत में पानी लगाने पहुंचे. उन्हें दिन में ही पानी लगाना था, लेकिन दिन में बिजली नहीं थी, इसलिए वे रात में गए थे. रात होने की वजह से वे टौर्च भी ले गए थे.

वे खेत पर पहुंचे तो उन्हें कुछ आहट सी सुनाई दी. टौर्च की रोशनी में उन्होंने देखा तो वहां 4 आदमी खड़े थे. उन के हाथों में हथियार थे. उन्होंने गांव के ही बबलू को बांध कर बैठा रखा था. बबलू संपन्न आदमी था. उन्हें समझते देर नहीं लगी कि ये बदमाश हैं. डर के मारे वे जाने लगे तो एक बदमाश ने उन पर टौर्च की रोशनी डालते हुए चेतावनी दी, ‘‘अगर भागे तो गोलियों से छलनी कर दिए जाओगे. जहां हो, वहीं रुक जाओ.’’

तीनों निहत्थे थे, इसलिए अपनीअपनी जगह खड़े हो गए. बदमाश उन को वहीं ले आए, जहां बबलू बंधा बैठा था. उन्होंने उन्हें भी बांध कर बबलू के साथ बैठा दिया. बदमाशों ने बबलू के साथ मंत्रणा कर के लक्ष्मण को खोल दिया. 3 बदमाश लक्ष्मण को ले कर चले गए और एक राइफलधारी बदमाश बंधे हुए लोगों के पास चौकसी से खड़ा रहा.

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कुछ देर बाद वह लक्ष्मण को ले कर लौटा तो उन में से एक ने कहा, ‘‘लड़का तो अच्छा है.’’

इस के बाद बदमाशों ने आपस में कुछ बातें की और वही 3 बदमाश उसे फिर से ले कर जंगल में चले गए. करीब 20 मिनट बाद वे लौटे तो उन के साथ लक्ष्मण नहीं था. उन में से एक बदमाश ने कहा, ‘‘काम हो गया.’’

बदमाश के मुंह से यह बात सुन कर ओमकार और शिवम घबरा गए. लक्ष्मण को ले कर उन के दिमाग में तरहतरह के खयाल उठने लगे.

इस के बाद बदमाशों ने बबलू, ओमकार और शिवम की तलाशी ली. उन के पास जो मिला, उसे ले कर उन बदमाशों ने तीनों को औंधे मुंह लिटा कर उन के ऊपर चादर डाल कर धमकी दी कि वे अपनी खैर चाहते हैं तो इसी तरह पड़े रहें. डर की वजह से वे उसी तरह पड़े रहे.

जब उन्हें लगा कि बदमाश चले गए हैं तो बबलू ने चादर हटा कर इधरउधर देखा. वहां कोई नहीं दिखा तो उस ने ओमकार और शिवम से कहा, ‘‘लगता है, वे चले गए.’’

जब मिली लक्ष्मण की सिरकटी लाश

किसी तरह बबलू ने अपने हाथ खोल कर उन दोनों के हाथ भी खोले. इस के बाद सभी तेजी से गांव की ओर भागे. गांव जा कर उन्होंने बताया कि बदमाशों ने उन्हें बंधक बना कर लूट लिया और लक्ष्मण को अपने साथ ले गए हैं. उन के इतना कहते ही गांव में शोर मच गया. लाठीडंडा व अन्य हथियार ले कर गांव वाले खेतों की तरफ दौड़ पड़े.

सब लक्ष्मण और बदमाशों को खोजने लगे. थोड़ी देर में एक खेत के पुश्ते पर गड्ढे में लक्ष्मण की सिरकटी लाश मिल गई. इस की सूचना बबलू ने वहीं से फोन द्वारा थाना कुंदरकी को दे दी. उस समय थानाप्रभारी धीरज सिंह सोलंकी हाईवे पर गश्त पर थे. सूचना मिलते ही वह घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने इस वारदात की जानकारी एसएसपी प्रीतिंदर सिंह, एसपी (देहात) उदयशंकर सिंह, सीओ (बिलारी) अर्चना सिंह को दे दी.

लक्ष्मण की हत्या की बारे में पता चलने पर उस के घर में कोहराम मच गया था. उस की पत्नी अमरवती और दोनों बच्चे बिलख रहे थे. एसएसपी के निर्देश पर रात में ही घटनास्थल के आसपास सघन चैकिंग अभियान शुरू कर दिया गया, लेकिन न बदमाशों का सुराग मिला और न ही लक्ष्मण का सिर.

सवेरा होने पर पुलिस ने घटनास्थल की जरूरी काररवाई पूरी कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए मुरादाबाद भिजवा दिया. हालांकि बबलू लक्ष्मण के घर वालों के दुख में शरीक हो कर हर काम में बढ़चढ़ कर भाग ले रहा था, लेकिन उन्हें यही लग रहा था कि लक्ष्मण की हत्या में बबलू का हाथ है, क्योंकि वह उन से अदावत रखता था.

जैसेजैसे आसपास के गांवों में बदमाशों द्वारा शिमलाठेर गांव के लक्ष्मण का सिर काट कर ले जाने वाली बात पता चली, वे घटनास्थल की तरफ चल पड़े.

वहां पहुंच कर पता चला कि इस घटना के विरोध में लोग शिमलाठेर गांव में जमा हो रहे हैं तो वे भी वहीं चले गए. लक्ष्मण के घर के सामने इकट्ठा लोगों का पुलिस के प्रति गुस्सा बढ़ता जा रहा था. लक्ष्मण का सिर न मिलने से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने मुरादाबादआगरा राजमार्ग पर जाम लगा दिया.

कुछ ही देर में राजमार्ग के दोनों तरफ कई किलोमीटर लंबा जमा लग गया. सूचना मिलने पर थाना पुलिस के अलावा सीओ अर्चना सिंह भी वहां पहुंच गईं. उन्होंने भीड़ को समझाने की कोशिश की, पर लोग वहां से नहीं हटे. तब एसएसपी प्रीतिंदर सिंह और एसपी (देहात) उदयशंकर सिंह भी वहां पहुंच गए. एसएसपी ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि पुलिस को कुछ समय दो, लक्ष्मण का सिर व कातिल जल्द से जल्द पकड़े जाएंगे.

उन के समझाने के बाद उत्तेजित लोगों ने जाम खोल दिया. 10 सितंबर को पोस्टमार्टम के बाद लक्ष्मण का शव उस के घर वालों को सौंप दिया गया तो उसी दिन उन्होंने उस का अंतिम संस्कार कर दिया. उस समय भारी संख्या में पुलिस भी मौजूद थी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया था कि लक्ष्मण का सिर किसी तेज धारदार हथियार से एक ही झटके में काटा गया था. मरने से पहले उस ने बचाव के लिए संघर्ष किया था, क्योंकि उस की कलाइयों पर गहरे चोट के निशान थे.

मृतक के भाई ओमकार की तहरीर पर पुलिस ने गांव के ही बबलू और 4 अज्ञात लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201, 34 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली. अगले दिन यह मामला अखबारों की सुर्खियों में आया तो इलाके में सनसनी फैल गई.

उधर एसपी देहात उदयशंकर सिंह व सीओ अर्चना सिंह जंगलों में सर्च औपरेशन चला कर लक्ष्मण का सिर ढूंढ रहे थे. जब सफलता नहीं मिली तो एसएसपी प्रीतिंदर सिंह ने सीओ अर्चना की अध्यक्षता में एक पुलिस टीम का गठन कर दिया.

टीम में थानाप्रभारी धीरज चौधरी, एसआई राजेश कुमार पुंडीर, ऋषि कपूर, कांस्टेबल अफसर अली, मोहम्मद नासिर, केशव त्यागी, कपिल कुमार, वेदप्रकाश दीक्षित के अलावा सर्विलांस टीम के एसआई नीरज शर्मा, कांस्टेबल अजय, राजीव कुमार, रवि कुमार, चंद्रशेखर आदि को शामिल किया गया था. एसओजी को भी टीम के साथ लगा दिया गया था. टीम का निर्देशन एसपी (देहात) उदयशंकर सिंह कर रहे थे.

चूंकि रिपोर्ट बबलू के नाम दर्ज थी, इसलिए पूछताछ के लिए उसे थाने ले आया गया. पूछताछ में वह खुद को बेकसूर बताने के अलावा यह भी कह रहा था कि वह दिशामैदान के लिए गया था, तभी बदमाशों ने उसे बंधक बना लिया था. उस ने बताया कि बदमाश उस की जेब से 3 हजार रुपए निकाल ले गए हैं. जब बबलू से कोई क्लू नहीं मिला तो पुलिस ने उसे घर भेज दिया.

सर्विलांस से पकड़े गए लक्ष्मण के हत्यारे

पुलिस का पहला काम लक्ष्मण का सिर ढूंढना था. अपने स्तर से वह सिर तलाश रही थी. पीडि़त परिवार के दबाव में पुलिस बबलू को जब थाने बुलाती, कोई न कोई राजनैतिक रसूख वाला उस की हिमायत में थाने पहुंच जाता. पुलिस ने उस से सख्ती से भी पूछताछ की, पर रोरो कर वह खुद को निर्दोष बताता रहा.

इस के बाद उसे इस हिदायत के साथ छोड़ दिया गया कि वह गांव में ही रहेगा और जब भी जरूरत पड़ेगी, उसे थाने आना पड़ेगा. बबलू ने पूरे गांव व पुलिस से कहा था, ‘‘अगर लक्ष्मण की हत्या में मेरा हाथ पाया जाए तो मुझे सरेआम फांसी पर लटका देना. यह बात सभी जानते हैं कि मैं ने इस परिवार की कितनी मदद की है.’’

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पुलिस ने बबलू का फोन सर्विलांस पर लगा रखा था. पिछले एक महीने में उस ने जिनजिन नंबरों पर बात की थी, वे सभी सर्विलांस पर थे. जांच में पता चला कि घटना से पहले बबलू के मोबाइल पर छंगा उर्फ अकबर, निवासी इमरतपुर ऊधौ, थाना मैनाठेर से बात हुई थी. पुलिस ने मुखबिर के द्वारा छंगा के बारे में पता कराया तो जानकारी मिली कि वह घर पर नहीं है.

इस हत्याकांड को 27 दिन हो चुके थे, परंतु लक्ष्मण का सिर नहीं मिला था. पुलिस की हिदायत की वजह से बबलू सतर्क था. वह कहीं आताजाता भी नहीं था.

6 अक्तूबर, 2017 को बबलू ने किसी से फोन पर कहा कि वह गांव शिमलाठेर के बाहर अमरूद के बगीचे में आ जाए, वहीं बात करेंगे. यह बात सर्विलांस टीम को पता चल गई. थानाप्रभारी ने मुखबिर से गांव के बाहर की अमरूद की बाग के बारे में पूछा और उस पर नजर रखने को कहा.

मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने गांव शिमलाठेर के बाहर अमरूद के बाग में दबिश दे कर वहां से बबलू के अलावा 3 अन्य लोगों को हिरासत में ले लिया, जबकि 3 लोग भाग गए. हिरासत में लिए गए लोगों को थाने ला कर पूछताछ की गई तो उन्होंने अपने नाम शबाबुल निवासी इमरतपुर ऊधौ, फरीद निवासी लालपुर गंगवारी और गुलाम नबी निवासी डींगरपुर बताया.

उन्होंने बताया कि फरार होने वाले छंगा उर्फ अकबर, राशिद निवासी इमरतपुर ऊधौ और पिंटू उर्फ बिंटू निवासी दौलतपुर थे. उन सभी से पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो न सिर्फ उन्होंने लक्ष्मण की हत्या का अपराध स्वीकार किया, बल्कि उन की निशानदेही पर एक जगह गड्ढे में दबाया हुआ लक्ष्मण का सिर भी बरामद कर लिया. उस पर उन्होंने ऐसा कैमिकल लगा रखा था, जिस से वह करीब एक महीने तक जमीन में दबा रहने के बावजूद खराब नहीं हुआ था. लक्ष्मण की हत्या की उन्होंने जो कहानी बताई, वह चौंकाने वाली थी.

उत्तर प्रदेश के जनपद मुरादाबाद से कोई 18 किलोमीटर दूर है थाना कुंदरकी. इसी थाने के गांव शिमलाठेर में बबलू अपने परिवार के साथ रहता था. वह संपन्न आदमी था. उस के पास 4 ट्रैक्टर और 6 ट्रक हैं. वह टै्रक्टरों से खेतों की जुताई करता है और ट्रकों से मुरादाबाद के रेलवे माल गोदाम में आने वाले सीमेंट को अलगअलग गोदामों तक पहुंचवाता था. इस सब से उसे अच्छी कमाई हो रही थी.

लक्ष्मण का छोटा भाई टिंकू बबलू के ट्रक पर पल्लेदारी करता था. वह मेहनती और ईमानदार था. बबलू उस पर बहुत विश्वास करता था, जिस की वजह से उस का बबलू के घर भी आनाजाना था. बबलू अपने कामधंधे में व्यस्त रहता था, इसलिए बबलू की पत्नी कमलेश टिंकू से ही घर के सामान मंगाती थी. ऐसे में ही कमलेश के टिंकू से संबंध बन गए.

हालांकि दोनों की स्थिति में जमीनआसमान का अंतर था. कमलेश के सामने टिंकू की कोई औकात नहीं थी. इस के बावजूद कमलेश का टिंकू पर दिल आ गया था. शुरू में तो उन के संबंधों पर किसी को शक नहीं हुआ. लेकिन ऐसे संबंधों में कितनी भी सावधानी बरती जाए, देरसवेर उजागर हो ही जाते हैं. कमलेश और टिंकू के संबंधों की बात भी गांव में फैल गई.

3 लाख रुपए में टिंकू की मौत का सौदा

बबलू गांव का रसूखदार व्यक्ति था. टिंकू की वजह से उस की गांव में अच्छीखासी बदनामी हो रही थी. इसलिए उस ने तुरंत टिंकू को पल्लेदारी से हटा दिया. इस के बाद टिंकू का कमलेश के घर आनाजाना बंद हो गया. कमलेश किसी भी हाल में टिंकू को छोड़ना नहीं चाहती थी. लिहाजा फोन पर संपर्क कर के वह टिंकू को अपने खेतों पर बुला लेती. बबलू ने पत्नी को भी समझाया, पर वह नहीं मानी. इस पर बबलू ने टिंकू को ठिकाने लगवाने की ठान ली.

बबलू के गांव के नजदीक ही इमरतपुर ऊधौ गांव है. इसी गांव में अकबर उर्फ छंगा रहता था. वह वहां का माना हुआ बदमाश था. कई थानों में उस के खिलाफ दरजन भर मामले दर्ज थे. बबलू ने उस से बात कर 3 लाख रुपए में टिंकू की हत्या का सौदा कर डाला.

छंगा का एक भतीजा शबाबुल सुपारी किलर था. उस पर भी 10-12 केस चल रहे थे. छंगा ने शबाबुल से बात की. वह मुरादाबाद के जयंतीपुर में अपनी 2 बीवियों के साथ रहता था. उसे अपना मकान बनाने के लिए पैसों की जरूरत थी, इसलिए वह 2 लाख रुपए में टिंकू की हत्या करने को राजी हो गया.

चूंकि शबाबुल पेशेवर अपराधी था, इसलिए उसी बीच लालपुर गंगवारी के फरीद और डींगरपुर के गुलाम नबी ने शबाबुल से किसी नवयुवक के कटे हुए सिर की डिमांड की. इस के लिए उन्होंने शबाबुल को 2 लाख रुपए भी दे दिए. वह नरमुंड उन्हें सालिम के मार्फत दिल्ली के सीलमपुर में रहने वाले एक बड़े तांत्रिक महफूज आलम के पास पहुंचाना था. फरीद संपेरा और तांत्रिक है.

महफूज आलम ने नरमुंड पहुंचाने पर गुलाब नबी और सालिम को 20 लाख रुपए देने की बात कही थी. पर इन दोनों ने शबाबुल से 2 लाख रुपए में ही सौदा कर लिया था. तांत्रिक महफूज उस नरमुंड का क्या करता, यह किसी को पता नहीं था.

शबाबुल को दोहरा फायदा उठाने का मौका मिल गया था. उसे टिंकू की हत्या 2 लाख रुपए में करनी थी. उस का सिर काट कर गुलाम नबी को देना था यानी एक तीर से उस के 2 शिकार हो रहे थे.

इस तरह टिंकू की हत्या से 4 लोगों को फायदा हो रहा था. पहला फायदा बबलू को था, क्योंकि उस की पत्नी से उस के अवैध संबंध थे. दूसरा फायदा छंगा को था, जिस ने 3 लाख रुपए में टिंकू की हत्या की बात तय कर के 2 लाख रुपए में अपने भतीजे को कौन्ट्रैक्ट दे दिया था. तीसरा फायदा शबाबुल को था, जिसे टिंकू की हत्या पर 2 लाख रुपए छंगा से मिलने थे और 2 लाख नरमुंड देने पर फरीद से मिलने थे. चौथा और सब से बड़ा फायदा गुलाब नबी और सालिम को था, क्योंकि उन्हें दिल्ली के तांत्रिक महफूज आलम से नरमुंड पहुंचाने पर 20 लाख रुपए मिलने थे और उन्होंने 2 लाख में शबाबुल से बात कर ली थी. उन्हें 18 लाख रुपए बच रहे थे.

इस के बाद बबलू टिंकू की हर गतिविधि पर नजर रखने लगा. उसे कहीं से पता चल गया था कि 9 सितंबर की रात टिंकू अपने खेत में पानी लगाने जाएगा. यह बात उस ने छंगा को बता दी. छंगा ने शबाबुल को सूचित कर दिया. पूरी योजना बना कर छंगा, शबाबुल, फरीद, गुलाब नबी और बबलू टिंकू के खेत के पास पहुंच गए. रास्ते में उन्होंने ठेके से शराब खरीदी. बबलू के अलावा उन सब ने खेत के किनारे बैठ कर शराब पी. योजना के अनुसार उन्होंने बबलू के हाथ बांघ कर वहीं बैठा दिया.

9 सितंबर, 2017 की शाम को खाना खाने के बाद यादराम ने अपने दोनों बेटों लक्ष्मण और ओमकार को खेत में पानी लगाने को कहा. क्योंकि उस दिन उन का तीसरा बेटा टिंकू डीसीएम गाड़ी में तोरई भर कर दिल्ली की आजादपुर मंडी गया था. लक्ष्मण और ओमकार अपने चचेरे भाई शिवम को भी साथ ले गए थे. वे अपने साथ टौर्च भी ले गए थे.

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जब वे खेत पर पहुंचे तो उन्हें वहां 4 बदमाश मिले और बबलू उन के पास बैठा था. उस के हाथ पीछे की ओर बंधे थे. बदमाशों ने धमकी दे कर उन तीनों को भी बांध दिया. बबलू ने देखा कि उन तीनों में टिंकू नहीं है तो वह चौंका, क्योंकि उसी की हत्या के लिए तो उस ने यह ड्रामा रचा था. बदमाशों ने बबलू के साथ मंत्रणा की. बबलू ने जब देखा कि खेल बिगड़ रहा है तो उस ने बदमाशों को बता दिया कि इन में से जो बीच में है, उसी का काम तमाम कर दिया जाए. बीच में लक्ष्मण था.

इस के बाद एक बदमाश ने लक्ष्मण के हाथ खोल दिए और 3 लोग शबाबुल, फरीद और गुलाम नबी लक्ष्मण को अंधेरे में अपने साथ ले गए. छंगा राइफल लिए बाकी के पास खड़ा रहा. करीब 5 मिनट बाद वे लक्ष्मण को ले कर वापस आ गए. उन्होंने बबलू से फिर बात की और कहा कि लड़का अच्छा है. बबलू ने उन से कहा कि कोई बात नहीं, इसी का काम कर दो. तब शबाबुल, फरीद व गुलाम नबी लक्ष्मण को फिर जंगल में ले गए.

तीनों ने लक्ष्मण को जमीन पर गिरा दिया. लक्ष्मण जान पर खेल कर उन से भिड़ गया. पर वह अकेला तीनों का मुकाबला नहीं कर सका. लिहाजा बदमाशों ने उसे फिर नीचे गिरा दिया. वह उठ न सके, इस के लिए फरीद ने उस के पैर पकड़े और गुलाम नबी ने सिर के बाल पकड़ लिए. तभी शबाबुल ने फरसे से एक ही वार में उस का सिर धड़ से अलग कर दिया. लक्ष्मण चिल्ला भी न सका. उस का सिर कलम कर के वे उन बंधकों के पास आ कर बोले, ‘‘काम हो गया.’’

यह काम करने में उन्हें केवल 20 मिनट लगे थे. इस के बाद वे बंधकों को उलटा लिटा कर उन के ऊपर चादर डाल कर चले गए. वह चादर ओमकार अपने साथ घर से लाया था. शबाबुल ने लक्ष्मण का सिर गुलाम नबी तांत्रिक के हवाले कर दिया. गुलाम नबी ने कैमिकल का लेप लगा कर उस के सिर को डींगरपुर के जंगल में एक बेर के पेड़ के नीचे दबा दिया था.

करीब आधे घंटे बाद ओमकार, बबलू और शिवम ने किसी तरह खुद को खोला और तेजी से गांव की तरफ भागे. उन के शोर मचाने पर गांव वाले जंगल की तरफ बदमाशों की तलाश में निकले. जंगल में लक्ष्मण की लाश मिलने पर बबलू ने ही कुंदरकी पुलिस को फोन कर के सूचना दी थी.

इतनी बड़ी घटना को अंजाम देने के बाद भी बबलू लक्ष्मण की अंतिम क्रिया तक में साथ रहा. सभी कर्मकांडों में उस ने अपना सहयोग दिया. लक्ष्मण की चिता के फूल चुनने के समय भी वह उस के घर वालों के साथ था.

गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों से पूछताछ कर पुलिस ने उन की निशानदेही पर फरसा भी बरामद कर लिया. अभियुक्तों की निशानदेही पर पुलिस ने 2 अन्य अभियुक्तों इमरतपुर ऊधौ के राशिद और सालिम को भी गिरफ्तार कर लिया था. सालिम पूर्व ग्रामप्रधान था. इन सभी से पूछताछ के बाद उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया.

फरार अभियुक्तों की तलाश में पुलिस ने कई स्थानों पर दबिशें डालीं, पर पुलिस को सफलता नहीं मिल सकी. इसी बीच अभियुक्त छंगा उर्फ अकबर ने 12 अक्तूबर, 2017 को मुरादाबाद की कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया. पुलिस ने कोर्ट में दरख्वास्त दे कर छंगा को पुलिस रिमांड पर लिया और पूछताछ कर के जेल भेज दिया था.

इस के अलावा पुलिस सीलमपुर दिल्ली के तांत्रिक महफूज आलम को भी तलाश रही थी, जिस ने 20 लाख रुपए में नरमुंड लाने की बात डींगरपुर के तांत्रिक गुलाम नबी से तय की थी. महफूज की गिरफ्तारी के बाद ही यह पता चल सकेगा कि तांत्रिक 20 लाख रुपए में उस कटे हुए सिर को खरीद कर क्या करता? पुलिस जब तांत्रिक के दिल्ली ठिकाने पर पहुंची तो वह फरार मिला. लोगों ने बताया कि महफूज तांत्रिक के पास देश के अलगअलग राज्यों से ही नहीं, बल्कि अरब के शेख भी आते थे.

इस से पुलिस को शक है कि कहीं तांत्रिक ने इस से पहले तो नरमुंड के लिए किसी की हत्या तो नहीं कराई थी. बहरहाल, पुलिस फरार अभियुक्तों की तलाश कर रही है.

Lockdown के चलते भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह ने शेयर की ऐसी फोटोज और वीडियो

कोरोना वायरस (Corona Virus) महामारी को लेकर दुनियाभर में लड़ाई जारी है. भारत में अभी 21 दिन का लौकडाउन (Lockdown) चल रहा है. ऐसे में फिल्‍म इंडस्‍ट्री से जुड़े कई लोग सामने आ कर लोगों को अपने अपने घरों में रहने की सलाह दे रहे हैं और साथ ही टिप्स भी दे रहे हैं कि हम सब अपने घरों में रह कर क्या क्या कर सकते हैं. इसी के साथ ही पौपुलर भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह (Akshara Singh) सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अपने फैंस के साथ फोटोज और टिप्स शेयर करती रहती हैं.

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कुछ दिनों पहले ये खबर भी आई थी कि अक्षरा सिंह (Akshara Singh) ने कोरोना वायरस (Corona Virus) से लड़ने क लिए मुख्‍यमत्री राहत कोष में 1 लाख का चेक दिया है और उन्होनें इसकी फोटो अपने औफिशियल इंस्टाग्राम पर भी शेयर की थी. इस लौकडाउन के टाइम अक्षरा सिंह अच्छे से मी टाइम बिता रही हैं और साथ ही सोशल मीडिया पर अपनी फोटोज और वीडियोज शेयर कर रही हैं. आइए दिखाते हैं आपको उनकी कुछ फोटोज-

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Lost💛

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इस वीडियो में अक्षरा सिंह सौंग गेंदा फूल (Genda Phool) पर डांस करती नजर आ रही हैं जिसमें उन्होनें यैल्लो कलर का टौप और ब्लू कलर की जींस पहनी हुई है. इस वीडियो में अक्षरा काफी अच्छे से अपनी अदाएं दिखा रही हैं जो कि उनके फैंस भी काफी पसंद कर रहे हैं. इस वीडियो पर उनके फैंस ने उनकी तारीफ में काफी कमेंट्य किए हैं और साथ ही लाइक्स की तो बरसात ही कर दी है.

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अक्षरा सिंह ने अपनी कई फोटोज भी शेयर की हैं जिसमें वे काफी खूबसूरत नजर आ रही हैं. ऐसा लग रहा है कि वे लौक डाउन का जमकर फायदा उठा रही हैं और अपने आप में ही खूब एंजौय कर रही हैं. ऐसे ही हम सबको भी अपने अपने घरों में रहकर इस मुसीबत की घड़ी के निकलने का इंतजार करना चाहिए और अपने और अपने परिवार वालों का ध्यान रखना चाहिए.

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भूपेश बघेल: साकी, प्याले में शराब डाल दे

छत्तीसगढ़ में शराबबंदी को अपना हथियार बनाकर 2018 के विधानसभा चुनाव में सत्ता की वैतरणी पार करने वाले भूपेश बघेल मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद शराबबंदी के मामले पर कैसे करवट बदल रहे हैं, यह सारा देश देख चुका है. अब जब कोरोना का संकट सर पर है, शराबबंदी को लेकर भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार के उछल कूद के नजारे देखकर सत्ता की उथली नीतियों पर आप और हम हंस  भी नहीं सकते. जहां 15 वर्ष तक सत्ता के बाहर जाकर कांग्रेस  की हालत पतली हो गई थी और  आदर्श बघारने लगी थी वहीं सत्ता सिंहासन  में बैठने के बाद वही कांग्रेस और उसके चेहरे शराबबंदी को लेकर  नित्य नए-नए तर्क दे रहे हैं.

कथनी और करनी में जो अंतर आया है वह राजनीति की असलियत को नंगे पन के साथ  उघाड़ कर सामने रख देता है. यहां हम आपको बताना चाहते हैं कोरोना वायरस महामारी के पश्चात लाक डाउन की स्थिति में भी छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की सरकार ने दोनों हाथों से शराब बेचा. शायद आपको विश्वास ना हो … मगर यह 100 फीसदी सही बात है. आप शायद कल्पना भी नहीं कर सकते कि 22 मार्च 2020 को जब प्रधानमंत्री के आह्वान पर संपूर्ण देश में लॉक डाउन था छत्तीसगढ़ में देसी और विदेशी शराब की दुकाने खुली हुई थी जिसकी बड़ी निंदा हुई. मगर सरकार ने इस पर कोई नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए दो शब्द कहने से भी गुरेज किया.

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मर रहे है  आम लोग…

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में दो लोगों की मौत हो गई. मौत शराब नहीं मिलने और  स्पिरिट पीने की वजह से हुई बताई जा रही है.दरअसल, लाॅकडाउन होने की वजह से शराब दुकानें  बंद है, फलत: कुछ  दोस्तों ने स्पिरिट पीकर अपनी लत दूर करने की कोशिश की, मगर  उन्हे अपनी  जिंदगी से हाथ धोना पड़ गया.यह  घटना रायपुर के गोलाबाजार थाना क्षेत्र में बाँसटाल की है. यहां रहने वाले तीन लोगों ने शराब की जगह स्पिरिट का सेवन कर लिया . इससे उनकी तबियत बिगड़ गई. फिर इनमें से दो लोग असगर खान (43 वर्ष) और दिनेश समुंदर (45 वर्ष) की मौत हो गई है. रायपुर के महापौर  एजाज ढेबर बताते हैं – जिस तरह कोरोना वायरस के मद्देनजर शराब की दुकानें बंद की गई है. यह उसका ही असर है. महापौर ने बताया  उनके पास यह खबर भी आई है कि एक युवक ने शराब ना मिलने की वजह से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली .

सरकार चाहती है प्याले छलका लो…

उपरोक्त दो युवकों की मौत की बिनाह पर भूपेश बघेल की सरकार यह पटकथा तैयार कर रही है कि कैसे शराब की दुकाने जल्द से जल्द छत्तीसगढ़ में खुल जाएं. दरअसल, यह माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में सरकार के हाथों में शराब दुकानें चल रही हैं जो  दुधारू गाय के समान है. इस बिजनेस से बेपनाह पैसा आता है. इसका सबसे ज्वलंत तथ्य यही है कि जब देशभर में 14 अप्रैल 2020 तक लाक डाउन है तब सरकार की तरफ से यह बात बारंबार सामने लायी गई है की आगामी 0 7 अप्रैल तक ही शराब दुकानें बंद हैं. यानी यह कहा जा सकता है कि जैसे ही हालत थोड़ी भी   सामान्य होंगे छत्तीसगढ़ की सरकार सबसे पहले देशी और विदेशी शराब की दुकानों पर खोल देगी. क्योंकि प्रतिदिन करोड़ों रुपए की इनकम सरकार को शराब से होती रही है. अब सच यही  है  की छत्तीसगढ़ की जनता, आम गरीब आदमी, भूखा मर जाए कोरोना  की चपेट में आकर  तिल तिल कर मर जाए, छत्तीसगढ़ की  सरकार को उससे कोई लेना देना नहीं है. लोकतंत्र के इस  संवैधानिक छत्रछाया में यह सब बेहद दर्दनाक और दुखद है.

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कोरोना : घर में रहें, इम्यूनिटी बढ़ाएं

‘अर्जुन अवार्ड’ विजेता और ओलिंपिक खेलों में भारत का मान बढ़ाने वाले मुक्केबाज मनोज कुमार ने कोरोना महामारी से बचने के लिए सब से घर में रहने की अपील की है. उन का कहना है कि जब घर में ही परिवार के साथ रहना है तो सेहतमंद चीजों का सेवन करें और रोजाना कसरत जरूर करें. ऐसी कसरतें चुनें जिन का आप के पूरे शरीर पर अच्छा असर पड़े.

बचपन में आप ने खूब रस्सी कूदी होगी जिसे स्किपिंग कहते हैं. इस कसरत में बस एक रस्सी की जरूरत होती है, पर यह रस्सी कूदना बहुत फायदेमंद होता है. इस के अलावा अपने शरीर का खयाल रखें, शासन और प्रशासन के कहे मुताबिक रहें, बेवजह घर से बाहर न जाएं

डाइटीशियन नेहा सागर का मानना है कि कोरोना से मजबूती से लड़ने के लिए हमें अपने शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाने की जरूरत है. इस के लिए विटामिन सी से भरपूर चीजों का सेवन करें. यह सभी तरह के खट्टे फलों, पपीता और लाल शिमला मिर्च में  पाया जाता है. अगर कहीं लौकडाउन के चलते सब्जियों या फलों की कमी हो गई है तो विटामिन सी के सप्लीमैंट भी ले सकते हैं.

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विटामिन सी के अलावा दूसरी चीजों जैसे लहसुन, अदरक और ग्रीन टी का भी सेवन कर सकते हैं. खाली पेट लहसुन की कली का सेवन करने से इम्यूनिटी बढ़ती है.

विटामिन डी भी इन हालात में जरूरी है. चूंकि अभी ज्यादातर लोग घर पर ही हैं तो वे उतना ही खाएं जो आसानी से पच सके. शराबसिगरेट के सेवन से बचें.

इस की वजह यह है कि इन के सेवन से शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत कम होती है. सिगरेट पीना तो इसलिए हानिकारक है, क्योंकि यह हमारे गले के साथसाथ फेफड़ों पर भी बुरा असर डालती है.

भारतीय रेलवे कुश्ती टीम के कोच और इंटरनैशनल रैफरी कृपाशंकर बिश्नोई ने इस लौकडाउन में सब को दंड बैठक करने की सलाह दी है. उन का मानना है कि अगर लोग घर पर दंड बैठक भी कर लेते हैं, तो उन्हें किसी और वर्कआउट की जरूरत नहीं है. दंड बैठक सभी कसरतों का राजा है और इस से आप की फिटनैस का लैवल बढ़ता है.

मुंबई में आइडियल बौडी (आईबी) फिटनैस नामक जिम चलाने वाली और प्रोफैशनल पर्सनल ट्रेनर अंजू गुप्ता ने बताया कि कोरोना के कहर से बचने के लिए लोगों को अपनी इम्यून पावर बढ़ाने वाली चीजों का सेवन ज्यादा करना चाहिए जैसे फल, सूखे मेवे, सब्जियां और ऐसी चीजें जिन में विटामिन सी की प्रचुरता हो जैसे नीबू, अदरक, संतरा वगैरह.

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जहां तक कसरत की बात है तो लोगों को ऐसे काम करने चाहिए जिन से उन का दिल मजबूत बने, ताकि उन का ब्लडप्रैशर सही रहे. घर के काम जैसे साफसफाई, कपड़े धोना भी बिना किसी जिम के उपकरण के करने वाली कसरत ही मानी जाएगी. बौडी स्ट्रैचिंग भी जरूरी है. साथ ही अपने मन को भी शांत रखें.

इस के अलावा उन कसरतों को ही ज्यादा करें जिन में फ्लोर और आप की बौडी की ही जरूरत हो. इस विपदा में आप का घर में रहने के साथसाथ सेहतमंद रहना भी जरूरी है.

Lockdown में लोग पढ़ रहे ‘मस्त मस्त’ कहानियां

वैसे तो इंटरनेट के जमाने मे पोर्नोग्राफी की डिमांस सबसे ज़्यादा होती है. 21 दिन के लौक डाउन के दौर में पोर्नोग्राफी के साथ ही साथ लोग सेक्स की भवनाओ को उभारने वाली मस्त मस्त कहानियां लोग सबसे ज्यादा पढ़ रहे है. इसकी दो सबसे बड़ी वजह है एक तो पोर्नोग्राफी की तमाम साइड बंद हो चुकी है दूसरे वीडियो और फोटो डाउन लोड करने के लिए ज्यादा इंटरनेट स्पीड चाहिए होती है. लोगो का डेटा जल्दी खत्म हो जाता है.

एक सबसे बड़ी परेशानी यह है कि फोटो और वीडियो देखने के लिए  एकांत का समय होना जरूरी होता है. इससे बचने के लिए लोग अब फोटो या वीडियो की जगह पर सेक्स की कहानियां पढ़ना पंसद करते है. इसको पढ़ते समय किसी के द्वारा देखे जाने का खतरा कम होता है.

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कुछ लोगो को सेक्स का जो आंनद किसी कहानी को पढ़ने में आता है वो फोटो देंखने और वीडियो देखने मे कम आता है. इस लिए लॉक डाउन के इस दौर में लोगो ने विडियो और फोटो से अधिक कहानी पढ़ने में जोर दिया.

सेक्सी स्टोरीज का बिजनेस :

इस तरह की कहानियां हिंदी सेक्स स्टोरी के रूप में सर्च की जाती है. वैसे यह कहानियां पूरी तरह से मनगठन्त होती हैं पर इनका प्रस्तुतिकरण सच्ची कहानियों जैसा होता हैं. कुछ कहानियां एक बार मे खत्म हो जाती हैं. कुछ कहानियां एक दो सीरीज में लिखी होती हैं. इस तरह की सेक्सी कहानियों का अपना पूरा बाज़ार होता हैं.

बहुत पहले ऐसी किताबे पीली पन्नी में पैक हो कर बिकती थी. इनमे 64 पेज होते थे तो इनको “चोसठिया” भी कहते थे. यह किताबे बहुत अच्छी प्रिंट नही होती थी और इनमे बहुत गलतियां भी होती थी. इनके लेखक के नाम पर मस्तराम लिखा होता था.

समय के साथ बदले रंग

1990 के बाद जब कलर प्रिंटिंग का दौर आया तो इस तरह की किताबें पीली पन्नी से बाहर आ गई. इस दौर में यह “मन मंथन” और ऐसे ही कई अलग अलग नामो से बिकने लगी. इस दौर में ही “मस्तराम की कहानियां” नाम से भी कुछ प्रकाशन शुरू हुए. थोक के भाव छपने वाली यह किताबे खुद को कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए “सेक्स समस्याओ” के नाम इनका प्रकाशन होता था. समस्या के प्रश्न कहानी की तरह से लंबी होती थी. इनका समाधान कुछ लाइनों में ही खत्म हो जाता था. कुछ सालों में इनकी शिकायत शुरू हुई तो इनको छपना बन्द हो गया चोरी छिपे ही बिकती थी. पर इनका बाजार बंद हो गया. इसके बाद ज़ब इंटरनेट और और वेबसाइट का चलन शुरू हुआ तो नेट पर ऐसी कहानियां लोग लिखने और पढ़ने लगे.

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सविता भाभी डौटकौम

इंटरनेट के दौर में “सविता भाभी डॉटकॉम” से यह शुरू हुआ. इसमे कहानी के साथ कॉमिक टाइप के किरदारों से कहानी पढ़ाई जाती थी. पोर्नोग्राफी साइटों पर रोक से “सविता भाभी डॉटकॉम” बन्द हो गया. अब सीधी कहानियों को लिखा जाने लगा.

यह कहानियां आपबीती के रूप में लिखी जाती हैं. यह कहानी कम अश्लील अधिक होती है. यह  आमतौर पर देवर भाभी, जीजा साली, औफिस सहयोगी, दोस्त और दूसरे तमाम रिश्तों के बीच की होती है.

#lockdown: भूखे पेट की कुलबुलाहट, गांव वाले हो रहे परेशान

कोरोना का कहर बाहर ही नहीं, बल्कि पेट के भीतर भी जारी है. देशभर में तालाबंदी होने से तमाम राज्यों ने अपनी सीमाएं बंद कर रखी हैं. जो जहां है, वहीं का हो कर रह गया है. इतना ही नहीं, गांवों में बुरी हालत है क्योंकि गरीब दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहे हैं.

जी हां, वाकई गांवों में रहने वाले दिहाड़ी मजदूरों को रोटी नहीं मिल पा रही है. भूख से कलपते इन गरीबों का खयाल कोई नहीं ले रहा.

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के बुजुर्गा गांव में वनवासी मुसहर बस्ती में कामगार और गरीब मजदूर परिवारों का हाल बड़ा ही बेहाल है. इन के पास तालाबंदी के चलते कोई काम नहीं है और न ही उन तक राशन पहुंच पाया है.

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ये गरीब मजदूर परिवार हर रोज खानेकमाने वाले हैं. इन दिनों इन लोगों को रोजीरोटी की किल्लत आ गई हैं. घर मे खाने को अनाज का दाना नहीं है. भूख मिटाने के लिए ये लोग सुबहसवेरे ही निकल पड़ते हैं खेतों की ओर. उन सूने पड़े खेतों में बचे हुए छोटे आलू बीन कर घर ला रहे हैं और इन आलू को नमक के साथ खा कर अपनी जिंदगी किसी तरह गुजरबसर करने को मजबूर हैं.

इन लोगों का कहना है कि वे ईंटभट्टों पर काम करते थे. लॉकडाउन के कारण काम बंद है. इस वजह से मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है. दुकानदार बिना पैसा लिए सामान देने को तैयार नहीं है.

हालात ये है कि जो आलू खेतों से चुन कर लाए थे वो भी खत्म हो रहे हैं और सरकारी मदद भी नहीं मिली है. ऐसे में इस बस्ती के सभी बच्चे और औरतें भी भूखे रहने को मजबूर हैं और बचे हुए आलू पर निर्भर हैं.

इस गांव में गरीब लोग सोशल डिस्टेंसिंग का मतलब ही नहीं जानते और न ही साफसफाई का ध्यान रखते, सब एकदूसरे के साथ वैसे ही बिना किसी परहेज के रह रहे हैं. वे इस वक्त भोजन न मिलने के कारण ज्यादा परेशान हैं.

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गाजीपुर के डीएम को जब यह समस्या बताई गई तो वे जान कर हैरान हो गए. वे चौंकने वाले अंदाज में बोले कि ये सभी लोग तो चिन्हित हैं. पता नहीं, क्यों अब तक उन परिवारों में राहत सामान नहीं पहुंचा, मैं खुद हैरान हूं, वहीं प्रशासन का कहना है कि हम तत्काल उन गरीबों को खाद्यान्न मुहैया करा रहे हैं.

यह तो महज एक गांव की तसवीर है. न जाने कितने गांव होंगे जो इस तरह की भूख जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं.

है कोई उपाय किसी के पास इन गरीबों की भूख मिटाने का. नहीं तो ये बेचारे बेमौत मारे जाएंगे, कोरोना से नहीं भूख से.

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