घटना दिल्ली के एक थाने की थी, जो मुझ पर थोपी गई थी, जबकि वहां का थानेदार पहले ही जांच कर रहा था.
मुझे आदेश मिला कि 2 सप्ताह में पुलिस हैडक्वार्टर पहुंचो, वहां का एक पुलिस इंसपेक्टर जांच में तुम्हारा साथ देगा. दोनों को एक एंग्लोइंडियन लड़की की हत्या की जांच करनी है. वह विश्वयुद्ध का समय था. अंगरेजों का फौजी हैडक्वार्टर और एयर हैडक्वार्टर दिल्ली में ही थे. इस केस का संबंध सेना से था, जो मेरे लिए एक नया अनुभव था.
दिल्ली में एक एंग्लोइंडियन लड़की की हत्या हुई थी. थाना पुलिस ने जांच की, लेकिन 2 सप्ताह बीतने पर भी हत्यारे का पता नहीं लगा. अंगरेज सरकार में वायसराय के औफिस ने इस केस की जांच थाने से हटा कर स्पैशल स्टाफ को दे दी थी और हत्यारे का शीघ्र पता लगा कर अदालत में पेश करने का आदेश दिया था.
मैं हैडक्वार्टर पहुंचा तो मेरा परिचय इंसपेक्टर मैक्डोनाल्ड से कराया गया, जिस के साथ मुझे काम करना था. मृतका के बारे में बताया गया कि उस का पिता आर्मी मैडिकल कोर में कर्नल है, जो डाक्टर भी है. उन दिनों वह कलकत्ता में था जबकि उस की मृतका बेटी दिल्ली में सेना में लेफ्टिनेंट थी.
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युद्ध के दौरान औरतों की एक सेना बनाई गई थी, जो डब्ल्यूसीए (वूमन औक्सिलियरी कौर्प्स औफ इंडिया) के नाम से जानी जाती थी. उसे वीकी या विकाई कहते थे. विकाई की अधिकतर औरतें जवान होती थीं, जो सैनिक कार्यालयों में काम करती थीं.
इन में अधिकतर महिलाएं ईसाई होती थीं. उन का काम सेना के अधिकारियों को हर तरह से खुश करना होता था. जो अधिक सुंदर होती थीं, उन की पहुंच जनरलों तक होती थी. वे क्लबों में जाती थीं, औफिसर्स मेस में शराब और डांस में भाग लेती थीं.
मृतका भी जवान और सुंदर थी. उस की हत्या की बात सुन कर उस का पिता कलकत्ता से दिल्ली आया. उस ने जांच को देखा तो अनुमान लगाया कि यह काम थाने के वश का नहीं है. उस ने ही जीएचक्यू में अपनी पहुंच का प्रयोग कर के इस घटना की जांच स्पैशल स्टाफ को दिलवाई थी.
मैं और मैक्डोनाल्ड संबंधित थाने गए. थानेदार को हम ने बताया कि इस केस की जांच हम करेंगे, तो वह बहुत खुश हुआ. थाने में उस लड़की की फोटो देख कर मैक्डोनाल्ड बोला कि इस लड़की के लिए मैं वायसराय तक की हत्या कर सकता हूं.
मैं ने फोटो को ध्यान से देख कर कहा, ‘‘हत्यारा पागल था या लड़की ने उसे अस्थाई रूप से पागल कर दिया था. मुझे हैरानी है कि इस के साथ एक और आदमी की हत्या क्यों नहीं हुई.’’
थानेदार बोला, ‘‘हत्या 40 मील प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ती जीप कार में हुई थी और फायर उसी रफ्तार से दौड़ती कार से किया गया था. लड़की अगली सीट पर बैठी थी. जीप एक हिंदुस्तानी मेजर चला रहा था. पीछे से एक कार आई, उस में से रिवौल्वर की 2 गोलियां चलीं. गोलियां चलने के बाद कार आगे निकल गई.’’
थानेदार ने कहा, ‘‘दूसरी गोली शायद उस ने मेजर पर चलाई थी, लेकिन दोनों गोलियां लड़की को लग गईं.’’
थानेदार ने हमें उस मेजर का बयान भी सुनाया. हम ने पोस्टमार्टम की रिपोर्ट देखी और पूरा केस समझने के बाद कहा, ‘‘इस केस की जांच कोई हिंदुस्तानी थानेदार नहीं कर सकता, क्योंकि इस केस में फौजी अधिकारियों से मिलना होगा, जो हिंदुस्तानियों को अपना गुलाम समझते हैं. वे लोग केस में सहयोग भी नहीं कर रहे.
रौयल एयर फोर्स के अधिकारी ने थानेदार को डांट भी लगा दी थी. जीएचक्यू ने थानेदार को 2 गोरे दे दिए थे, जिस में एक सार्जेंट और दूसरा कारपोरल था. लेकिन भाषा की समस्या की वजह से वे भी सहयोग नहीं कर रहे थे. क्योंकि थानेदार अंगरेजी समझ तो लेता था, लेकिन बोल नहीं सकता था.’’
हत्या से संबंधित जो चीजें थाने में रखी थीं, उन में एक जीप, रिवौल्वर के 2 बुलेट जो मृतका के शरीर से पार हो कर जीप में गिरे थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, मृतका को बाईं ओर 2 गोलियां लगीं थीं और पार निकल गई थीं, जिस से उस की मौत हो गई थी. हत्या से पहले उस के साथ कोई मारपीट नहीं हुई थी. वह शराब पिए हुए थी, खाना उस ने 2 घंटे पहले खाया था.
हम ने थानेदार से जरूरी बातें पूछीं और तय किया कि हम थानेदार की रिपोर्ट पर ध्यान नहीं देंगे बल्कि अपनी अलग जांच करेंगे.
मैक्डोनाल्ड ने स्कौटलैंड यार्ड की ट्रेनिंग ली थी. मैं ने भी उस से बहुत कुछ सीखा. हम ने मिलिट्री पुलिस का सहयोग लिया और उन से कहा, ‘‘हमें एक ऐसा आदमी चाहिए जो होशियार हो और रातों को भी जाग सके.’’
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प्रोवोस्ट मार्शल ने हमें एक अंगरेज वारंट औफिसर दिया, जो मेहनती और बुद्धिमान था. इस के अतिरिक्त हमें फौजी छावनी में मिलिट्री पुलिस का एक अलग कमरा दिया गया, जिसे हम ने अपना औफिस बना लिया.
हम ने सब से पहले जीप अपने कब्जे में ले कर उस मेजर को बुलाया. जो घटना के समय जीप चला रहा था. मौके का गवाह वही था. मिलिट्री इंटेलिजेंस का वह अधिकारी मेजर डोगरा था. मैं अब तक देहातियों से पूछताछ करता रहा था, यह पहला अवसर था कि एक मिलिट्री इंटेलिजेंस अधिकारी से पूछताछ करनी थी. मेरे साथी इंसपेक्टर ने उस डोगरा मेजर से कहा, ‘‘आप मिलिट्री इंटेलिजेंस के अधिकारी हैं. घटना की कहानी इस तरह सुनाएं, जैसी आप किसी अपराधी से उम्मीद रखते हैं.’’
उस ने मृतका के बारे में बताया कि वह आजाद विचारों वाली अतिसुंदर एंग्लोइंडियन लड़की थी. वह अंगरेजी फौजी अधिकारियों में बहुत मशहूर थी. उस की रातें किसी न किसी क्लब या औफिसर्स मेस में गुजरती थीं. निर्लज्जता के साथसाथ वह चालाक भी थी.
हत्या की रात मृतका एक क्लब में किसी पार्टी में थी, वहां पर ज्यादातर अंगरेज और सिविल अफसर थे. डोगरा भी उसी पार्टी में था. शराब के साथ डांस चल रहा था. आधी रात के समय डोगरा मेजर बाहर निकला. अंदर चहलपहल थी, बाहर वीराना. उस ने देखा मृतका तेज चलती हुई उसी की ओर आ रही थी. तभी एक कमरे से रौयल एयर फोर्स का एक अफसर निकला, जो लड़की के पीछे आ रहा था.
लड़की डोगरा मेजर के पास आ कर बोली, ‘‘एक अफसर बातोंबातों में मुझे कमरे में ले गया और बोला मैं तुम्हारे साथ शादी करना चाहता हूं. मैं ने इनकार किया तो उस ने मुझे सोफे पर गिरा दिया. लेकिन मैं जैसेतैसे उस से बच कर निकल आई. वह बहुत शराब पिए हुए था.’’
मृतका डोगरा को कहानी सुना रही थी कि वह अफसर लड़खड़ाता हुआ आ गया और बोला, ‘‘तुम इंडियन हो, इस लड़की को मुझ से बचाने की कोशिश मत करो, नहीं तो मेरे हाथों मारे जाओगे. मैं यहां का सर्वेसर्वा हूं.’’
डोगरा ने कहा, ‘‘तुम इस समय इंडिया के राजा नहीं, पूरी दुनिया के राजा हो. यह लड़की सेना में लेफ्टिनेंट है, तुम इस के साथ जबरदस्ती नहीं कर सकते.’’
वह बोला, ‘‘अगर यह आर्मी में फील्ड मार्शल भी होती तो मेरा मुकाबला नहीं कर पाती. हम इंडिया के मालिक हैं.’’
लड़की बोली, ‘‘मैं तुम्हारे मुंह पर थूकती हूं. तुम्हारी यूनिट के बड़ेबड़े अफसर मेरे दोस्त हैं. तुम तो साधारण स्क्वाड्रन लीडर हो.’’
डोगरा ने उसे समझाया कि एक अधिकारी को ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए. उस ने कहा, ‘‘तुम क्या समझते हो, मैं इंग्लैंड से इंडिया को जापान से बचाने आया हूं. मैं इस देश के लिए मरने आया हूं लेकिन यहां की लड़की मुझे दुत्कार रही है. मैं इसे जान से मार दूंगा.’’
उस ने डोगरा के मुंह पर घूंसा मारा, फिर दोनों में हाथापाई शुरू हो गई. लड़की ने कहा, ‘‘तुम यहां से निकल जाओ, यह अंगरेज है, तुम्हारे ऊपर मनगढ़ंत आरोप लगा देगा.’’
डोगरा ने कहा, ‘‘तुम भी चली जाओ.’’
वह बोली, ‘‘मेरे पास गाड़ी नहीं है.’’
डोगरा मेजर ने जीप में लड़की को अगली सीट पर बिठाया और जीप को खुद ही ड्राइव कर के ले गया.
चलती जीप से उस ने पीछे देखा, एक गाड़ी उस का पीछा करती हुई आ रही थी. वह गाड़ी जीप के पास आ गई. उस गाड़ी की लाइट बुझ गई, इसी के साथ 2 गोलियां चलीं. लड़की की चीख सुनाई दी. वह बोली, ‘‘ही हैज शाट मी.’’
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इतनी देर में गाड़ी की लाइटें जलीं और वह आगे निकल गई. मेजर ने देखा वह प्राइवेट कार थी. उस ने कार के नंबर देखे आखिर के 2 नंबर याद थे जो 66 थे. पहले 2 नंबर उसे याद नहीं रहे. शायद 23 थे या 83. वह लड़की को ले कर तुरंत अस्पताल पहुंचा, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
सेना पुलिस आई. लेकिन उस ने कोई सहायता नहीं की. उस ने केस सिविल पुलिस को दे दिया. थानेदार ने स्क्वाड्रन लीडर से कोई बयान नहीं लिया, क्योंकि उस ने थानेदार को डांट कर भगा दिया था.
हम ने डोगरा से पूछा, ‘‘क्या उस लीडर के पास रिवौल्वर था? उस ने आखिरी शब्द क्या बोले थे.’’
मेजर ने कहा, ‘‘मैं ने देखा नहीं कि उस के पास रिवौल्वर था. उस ने कहा था कि तुम दोनों को जिंदा नहीं छोड़ूंगा.’’
‘‘आप जब अपनी जीप की ओर आ रहे थे तो वह स्क्वाड्रन लीडर आप के पीछे था?’’
उस ने बताया, ‘‘वह बरामदे में खड़ा था और वहां 2-3 बैरे खड़े थे.’’
‘‘आप उस लड़की को अच्छी तरह जानते थे. उस लड़की से कोई शादी के लिए कहता होगा.’’
वह बोला, ‘‘ऐसी लड़कियों से कौन शादी करेगा. सब को पता है कि ये चरित्रहीन होती हैं.’’
‘‘आप इंटेलिजेंस अफसर हैं. आप ने ध्यान दिया होगा कि हत्यारा कौन हो सकता है.’’
वह बोला, ‘‘स्क्वाड्रन लीडर के अलावा और कोई नहीं हो सकता.’’
‘‘आप जरा दिमाग पर जोर दे कर बताएं, कोई ऐसा विवाहित जोड़ा है, जिन में पुरुष मृतका को चाहता हो और पत्नी ने उस की हत्या करवा दी हो.’
वह बोला, ‘‘ऐसा हो सकता है लेकिन मैं ऐसे किसी आदमी को नहीं जानता.’’
अगले दिन हम ने पुलिस हैडक्वार्टर से कहा कि पूरे शहर की कारों के नंबर देखे, जिस के आखिर में 66 हो, उस के मालिक का नाम और घर का पता नोट कर लें. डोगरा मेजर ने बताया था कि कार फोर्ड थी, लेकिन मौडल उसे याद नहीं रहा.
दूसरा काम हम ने यह किया कि एयर हैडक्वार्टर से उस स्क्वाड्रन लीडर का पता लिया, बताया गया कि वह पालम एयरपोर्ट के उस भाग में मिलेगा, जहां एयरफोर्स के जहाज रखे जाते हैं. हम एयर हैडक्वार्टर गए. वहां पता लगा कि वह स्क्वाड्रन लीडर अभी एक महीने पहले ही आया है लेकिन उसे कोई काम नहीं दिया गया. क्योंकि वह मानसिक रोग से पीडि़त है और एक अंगरेज डाक्टर उस का इलाज कर रहा है.
हम पहले उस डाक्टर से मिले और बताया कि हम एक लड़की की हत्या की जांच कर रहे हैं जो सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर थी. वह डाक्टर अपना काम छोड़ कर हमारे पास बैठ गया. मैक्डोनाल्ड ने उसे डोगरा मेजर का बयान सुना कर स्क्वाड्रन लीडर के इलाज के बारे में पूछा.
डाक्टर से पता चला कि वह स्क्वाड्रन लीडर लंदन में एक लड़ाका स्क्वाड्रन का कमांडिंग औफिसर था और उस ने अनगिनत जरमन जहाज गिराए थे. आखिरी लड़ाई में उस के जहाज में गोली लगी और उस जहाज से निकल नहीं सका. संयोग से उस का जहाज पानी में गिरा पर डूबा नहीं. लेकिन वह जहाज पानी में इतने तेज झटके से गिरा कि उस के दिमाग में चोट आ गई और वह जहाज से निकल कर तैरने लगा.
अगले दिन उसे एक ब्रिटिश गश्ती नाव ने बचा लिया. लंदन के एक अस्पताल में उस का इलाज हुआ. अस्पताल में कुछ दिन इलाज के बाद उस की यह कह कर छुट्टी कर दी गई कि यह शारीरिक तौर पर तो ठीक है, लेकिन कभीकभी उस का दिमाग थोड़ी देर के लिए अपना नियंत्रण खो देता है.
जब वह अपने घर गया तो उस का मकान खंडहर हो चुका था. उस की पत्नी और बच्चा मारे गए थे. वह अपनी यूनिट में नौकरी पर वापस आ गया, वहां उस ने कुछ ऐसे गलत काम किए जो अनदेखे नहीं किए जा सकते थे. पूछने पर उस ने बताया कि उस का दिमाग थोड़ी देर के लिए खराब हो जाता है.
मानसिक रोगों के डाक्टर ने कुछ दिन उस का इलाज किया फिर कह दिया कि कुछ देर के लिए उस का दिमाग काम नहीं करता, उसे यह भी पता नहीं रहता कि वह क्या कर रहा है.
इस का कारण घरेलू समस्या थी. उसे इलाज के लिए भारत भेजा गया. लेकिन यहां उसे कोई काम नहीं दिया गया, उसे मौजमस्ती की खुली छूट दी गई, लेकिन यहां भी कुछ देर के लिए उस का दिमाग खराब रहने लगा.
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हम ने पूछा, ‘‘क्या बिगड़ी हालत में हत्या भी कर सकता है?’’
उस ने कहा, ‘‘कुछ कह नहीं सकते. लेकिन इस हालत में उसे अगर गुस्सा दिला दिया जाए तो वह हत्या भी कर सकता है.’’
‘‘औरत के मामले में उस का रवैया कैसा है?’’
‘‘जितने हवाबाज होते हैं, जब छुट्टी पर आते हैं तो शारीरिक संबंध बहुत बनाते हैं और इस में भी यह आदत है.’’
मैक्डोनाल्ड ने कहा, ‘‘हम उस से मिल रहे हैं. आप से अनुरोध है कि आप उस से इस तरीके से बात करें कि वह हत्या के बारे में कुछ बता दे.’’
डाक्टर ने कहा, ‘‘मैं उस से हत्या का पता लगा लूंगा और अगर उस ने हत्या की है तो मैं उसे बचा भी लूंगा.’’
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हम अंदर गए तो वहां ब्रिगेडियर बैठा था, हम ने उसे अपना परिचय दिया तो उस ने तपाक से हमारा स्वागत किया और बोला, ‘‘मुझे पता है कि आप हत्या के केस की जांच कर रहे हैं.’’
मैक्डोनाल्ड ने कहा, ‘‘हमारी जांच की लाइन बदल गई है. हमें पता लगा है कि मृतका का बाप और चाचा जासूसी में पकडे़ गए हैं.’’
वह चौंक कर बोला, ‘‘आप को कैसे पता लगा?’’
मैक्डोनाल्ड ने कहा, ‘‘हम स्पैशल स्टाफ के अधिकारी हैं, किसी की गिरफ्तारी को हम गुप्त रख सकते हैं. आप निश्चिंत रहें, हम से कोई गलत काम नहीं होगा. हम यहां यह पता करने आए हैं कि मृतका की उस के ही गिरोह के किसी आदमी ने हत्या कर दी है.’’
उस ने कहा, ‘‘यह इंटेलिजेंस का मामला है, जो गुप्त होता है.’’
हम ने उन्हें विश्वास दिलाया कि हम किसी को नहीं बताएंगे.
उस ने बताया, ‘‘कर्नल डाक्टर के भाई पर हमें पहले से शक था. कलकत्ता की सीआईडी उस के पीछे लगी थी. उसे भी पता लग गया और वह चौकस हो गया. हमें उस की कुछ बातें पता लग चुकी थीं. हम ने उस लड़की की निगरानी शुरू कर दी. 2 मेजरों को उस के पीछे लगा दिया.’’
हम ने उस से कहा आप उन के नाम बता सकते हैं?
उस ने कहा कि एक तो डोगरा मेजर है और दूसरा एक मुसलमान मेजर है. ब्रिगेडियर ने हमें इजाजत दे दी कि इन दोनों का सहयोग ले सकते हैं.
जब हम अपने औफिस आए तो मिलिट्री औफिस के वारंट औफिसर ने हमें एक नोट दिया जिस में एक कार का नंबर लिखा गया था, लेकिन वह कार दिल्ली से बाहर की थी. हम तुरंत डोगरा मेजर और उस वारंट औफिसर को ले कर उस शहर की ओर चल दिए. उस शहर में पहुंच कर उस हवेली पर गए.
वहां वह कार खड़ी थी. डोगरा मेजर ने पहचान कर कहा कि यही कार है. हम ने दरवाजे पर दस्तक दी, 2 आदमी बाहर आए. जिन में एक की उम्र 30 और दूसरे की 35 होगी. ये दोनों जागीरदार लग रहे थे.
मैं ने उन से पूछा, ‘‘यह कार किस की है?’’
वह बोला, ‘‘हमारी है.’’
उन में से एक ने कहा, ‘‘यह चोरी की तो नहीं है.’’
मैं ने आगे बढ़ कर धीरे से कहा, ‘‘अभी हम ने आप से कुछ नहीं कहा और आप चोरी की कहने लगे. मैं पुलिस अधिकारी हूं, यह अंगरेज अधिकारी हैं. वह फौज का मेजर है और इस के साथ सेना पुलिस का अधिकारी है. तुम्हें इतनी भी तमीज नहीं है कि तुम हमें अंदर बैठने को कहो. अगर तुम यही चाहते हो तो हम जिस काम के लिए आए हैं, वह यही सब के सामने शुरू कर दें.’’
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उस ने हमें अंदर बिठाया. मैं डोगरा मेजर के साथ बाहर आ कर कार को देखने लगा. डोगरा ने मडगार्ड के किनारे पर अंगुली रख कर देखने के लिए कहा. मैं ने देखा वहां से एक गोली की तरह चिपका हुआ लग रहा था. मैं ने टायर को देखा, एक जगह टायर के ऊपरी भाग में एक निशान था, जैसे गोल रेती से रगड़ा गया हो. यह गोली का निशान लग रहा था.
मैं ने डोगरा मेजर से कहा, ‘‘गाड़ी को थोड़ा पीछे धकेलो.’’
हम दोनों धक्का लगा कर गाड़ी को उस पिचके हुए निशान के बराबर में ले आए जो मडगार्ड पर था. मैं ने पीछे खड़े हो कर देखा, वहां से मुझे मडगार्ड का वह भाग दिखाई दिया जो टायर के सामने होता है.
वहां कीचड़ जमा हुआ था. वहां मुझे एक चमकती हुई चीज दिखाई दी. मैं ने हाथ अंदर कर के देखा तो गोली का खोखा धंसा हुआ मिला. उसे देख कर मैं उछल पड़ा, जैसे मैं अपनी जांच में सफल हो गया हूं.
मैं दौड़ता हुआ अंदर गया और सब से कहा, ‘‘बाहर आओ और ऐसी कोई चीज लाओ, जिस से मडगार्ड की मिट्टी हटाई जा सके.’’
उन में से एक जाने लगा तो मैं ने उसे बाजू से पकड़ कर रोक लिया और उस से कहा, ‘‘तुम यहीं रहो, नौकर को आवाज दो.’’
नौकर खुरपा लाया. मैं ने धीरेधीरे मडगार्ड की मिट्टी हटाई. वह चीज साफ दिखाई देने लगी. मैं ने मैक्डोनाल्ड से देखने के लिए कहा. उस ने छू कर देखा और मेजर की ओर देख कर कहा, ‘‘आप का निशाना ठीक था. टायर को आप ने मिस नहीं किया. एक इंच का अंतर रह गया था.’’
मैं ने कार के मालिकों से कहा, ‘‘तुम्हें पता नहीं था कि जीप से तुम्हारी कार पर फायर किया गया था.’’
दोनों के रंग उड़ गए और कोई जवाब नहीं दे पाए. मैं ने उन दोनों को वे निशान दिखाए. वे फिर भी चुप रहे, मैं ने धीरे से पूछा, ‘‘क्या तुम दोनों थे?’’
मैं ने वहां एक सम्मानित व्यक्ति को बुला कर वे निशान दिखाए और कहा कि आप को इस की गवाही देनी है. दूसरा गवाह मैं ने डोगरा मेजर को बनाया. मैं ने कार वालों से पूछा, ‘‘तुम्हारा रिवौल्वर कहां है?’’
छोटा बोला, ‘‘हमारे पास रिवौल्वर नहीं है.’’
मैं ने कहा, ‘‘मैं मकान की तलाशी लूं, इस से पहले तुम खुद ही निकाल दो.’’
उन में से एक बोला, ‘‘चलो, अंदर चलो. बाकी लोग बाहर ही रहें.’’
मैं अंदर चला गया. मेरी पैंट में रिवौल्वर था. मैं ने अपनी जेब में हाथ डाल कर रिवौल्वर अपने हाथ में ले लिया. लेकिन उस ने अंदर जाते ही कहा, ‘‘आप जितनी रकम चाहो, ले लो और इन लोगों को वापस ले जाओ. अगर तुम ने इधरउधर किया तो बाहर वालों की लाशें भी नहीं मिलेंगी. बोलो, क्या चाहते हो?’’
कमरे में एक पलंग था, उस पर सुंदर चादर पड़ी थी. छोटे भाई ने चादर हटाई तो उस के नीचे एक रिवौल्वर दिखाई दिया. वह उठाने के लिए हाथ बढ़ा ही रहा था, मैं ने एक गोली चला दी, जो पलंग पर लगी और दूसरी गोली मैं ने उस के पैर पर मारी.
बाहर वालों ने गोली चलने की आवाज सुनी तो वे दौड़ कर अंदर आ गए. सब के हाथों में रिवौल्वर थे. मेरी गोलियों ने दोनों अपराधियों को वश में कर लिया. मैं ने कांस्टेबलों से कहा, ‘‘इन्हें हथकड़ी लगाओ.’’
मैं ने कागज तैयार किए और गवाहों में डोगरा मेजर और उस सम्मानित व्यक्ति के हस्ताक्षर करा लिए. डोगरा ने कहा, ‘‘ये जासूस गिरोह के लोग हो सकते हैं, इसलिए मकान की तुरंत तलाशी ले कर सील करना जरूरी है.’’
मैं पुलिस स्टेशन गया और वहां से दिल्ली इंटेलिजेंस के ब्रिगेडियर को फोन कर सूचना दी, पुलिस हैडक्वार्टर को भी बता दिया. पुलिस स्टेशन से मुझे 2-3 कांस्टेबल मिल गए, जिन्हें मैं ने मकान के अंदर और बाहर खड़ा कर दिया. वहां की पुलिस ने मेरी यह सहायता की कि एक मजिस्ट्रैट को भेज दिया.
यह केस इसलिए विशेष हो गया था कि इस में जासूसी का मामला था. कुछ ही देर में दिल्ली पुलिस की नफरी आ गई. साथ में ब्रिगेडियर भी था. मजिस्ट्रैट के सामने मकान की तलाशी ली गई लेकिन गहन तलाशी पर भी कुछ नहीं मिला.
मैं ने दोनों अपराधियों से पूछा, ‘‘तुम दोनों अपराधी हो या दोनों में से एक.’’
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वे बोले दोनों हैं. दिल्ली ला कर दोनों को सेना के क्वार्टर गार्ड में बंद कर दिया. अपने कमरे पर जा कर आराम करने के लिए मैं लेटा ही था कि डोगरा मेजर एक व्यक्ति को ले कर आया. वह इंटेलिजेंस का मुसलमान मेजर था. उस ने बताया कि मेरे से ज्यादा उस लड़की को यह जानते हैं.
उस ने कहा, ‘‘मृतका मुझे बरबाद कर गई. आप ने जिन 2 आदमियों को गिरफ्तार किया है, वे मेरे साले हैं. मैं ने उन से क्वार्टर गार्ड में मिल कर कहा है कि वे अपना अपराध स्वीकार कर लें.
लेकिन जासूसी के मामले में उन का दूर का भी वास्ता नहीं है. वे दोनों अपनी कहानी खुद सुनाएंगे, मैं तो आप को उस केस की मोटी बातें सुना देता हूं.’’
उस ने बताया कि मैं भी उसी जगह का रहने वाला हूं, जहां के ये लोग हैं. मेरी शादी उन के घराने में हुई है. मैं चूंकि इंटेलिजेंस में हूं, इसलिए मैं घर से कईकई दिनों तक गायब रहता था. मेरी पत्नी मेरे ऊपर शक करने लगी.
मैं ने उस का शक दूर करने की बहुत कोशिश की लेकिन उस का शक दूर नहीं हुआ. घर में क्लेश रहने लगा. पत्नी कहती थी कि आप बड़े अधिकारी हो, सुंदर लड़कियां आप के पास आती होंगी. मैं ने बहुत समझाया लेकिन वह नहीं मानी. उस के भाइयों ने भी मुझे धमकियां दीं.
एक दिन मैं ने ससुराल में कहला दिया कि अगर पत्नी का यही व्यवहार रहा तो मैं उसे छोड़ दूंगा. इस पर तो ससुराल वालों ने कहा कि अगर छोड़ोगे तो तुम्हारी हत्या हो जाएगी.
लेकिन मैं उसे वास्तव में छोड़ना नहीं चाहता, क्योंकि मुझे अपनी पत्नी से बहुत प्यार था. इसी बीच मुझे मेरे हैडक्वार्टर से आदेश मिला कि मृतका लड़की का ध्यान रखो, बल्कि उस से दोस्ती का संबंध बनाओ. मेरा यह डोगरा मेजर दोस्त उस से पहले ही संबंध बना चुका था. बाद में पता चला कि वह लड़की जासूस गिरोह की है.
हमें उस लड़की के खानपान के लिए औफिस से अच्छी रकम मिलती थी. मैं उसे ऊंचे होटलों में ले गया, शिमला की सैर कराई, उस से जासूसी की बातें भी कीं लेकिन उस ने अपना भेद नहीं दिया. एक दिन दिल्ली में उस लड़की के साथ मेरे सालों ने मुझे देख लिया और मेरे घर आ कर मुझे धमकी दी.
मैं ने उन्हें बहुत समझाया कि उस लड़की से संबंध मैं ने सरकार के कहने पर बनाए हैं और उस के साथ रहना मेरी ड्यूटी में शामिल है. लेकिन उन की समझ में नहीं आया. मैं जानता था कि यह लड़की जो जनरलों तक को अपनी अंगुली पर नचाती है, मेरे इतने करीब क्यों आ रही है. वह जानती थी कि मैं इंटेलिजेंस का अधिकारी हूं, इसलिए वह मुझे अंधेरे में रखना चाहती थी.
डोगरा और मैं आगे की काररवाई के बारे में सोच ही रहे थे कि उस लड़की की हत्या हो गई. लेकिन मैं समझ रहा था कि हत्या किस ने की है.
उस के बाद से मेरे साले दिखाई नहीं दिए. मैं ने यह बात डोगरा मेजर को भी नहीं बताई. मैं ने उस की हत्या की बात अपनी पत्नी से भी नहीं की. मैं ने आप को पूरी बात बता दी है और अपने सालों से भी कह दिया है कि वे अपना अपराध स्वीकार कर लें.
उन दोनों भाइयों ने अपराध स्वीकार कर लिया और वही कहानी सुनाई जो इंटेलिजेंस अफसर ने सुनाई थी. उन्होंने अपने बयान में यह भी बताया कि अगर इंटेलिजेंस अधिकारी उन की बहन को तलाक देता, तो उस लड़की की और अपने जीजा की हत्या कर देते. लेकिन उन्होंने यह तय किया कि लड़की की हत्या कर दें तो उन की बहन का घर उजड़ने से बच जाएगा.
हत्या कर के जब वे घर आए तो उन्होंने कार को अच्छी तरह से देखा कि उस पर कहीं कोई गोली का निशान तो नहीं है, लेकिन इतनी बारीकी से नहीं देखा, जितना मैं ने देखा था. काफी दिन बीतने पर भी जब कुछ नहीं हुआ तो वे समझे मामला खत्म हो गया है. इस की खुशी तो थी लेकिन साथ में इस बात की भी खुशी थी कि अगर उन्हें फांसी भी हो गई तो उन की बहन का सुहाग तो बना रहेगा.
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इंटेलिजेंस ने बहुत छानबीन की लेकिन वे जासूसी का केस साबित नहीं कर सके. हत्या के मामले में उन दोनों को आजीवन कारावास की सजा हुई. उन के जीजा मेजर ने दिल्ली का एक योग्य वकील कर लिया, जिस ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर दी और उस ने संदेह का लाभ दिला कर दोनों को दोषमुक्त करा लिया.
कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां
उसी दिन हम ने स्क्वाड्रन लीडर को मिलिट्री पुलिस के वारंट द्वारा बुलवाया. मैक्डोनाल्ड ने उसे अपना और मेरा परिचय दिया. मुझ से उस ने हाथ मिलाया और बोला, ‘‘हिंदुस्तानियों में यह आदत है कि वे अंगरेजी नहीं जानते. आप से पहले इंसपेक्टर को मैं ने डांट दिया था, इसलिए यह केस आप को दिया गया है.’’
मैक्डोनाल्ड ने उस से बहुत सी बातें करने के बाद पूछा, ‘‘आप कब ऐबनौर्मल होते हैं?’’
उस ने कहा, ‘‘मुझे जब बातें करने वाला या सुनने वाला नहीं मिलता तो मेरे शरीर में चींटी सी चलने लगती है, फिर मैं खुद ऊपर से नियंत्रण खो देता हूं और मुझे यह याद नहीं रहता कि मैं ने क्या कहा.’’
मैक्डोनाल्ड ने कहा, ‘‘इस का मतलब यह हुआ कि लड़की की हत्या से पहले आप ने क्या कहा और क्या किया था. आप को याद नहीं?’’
वह बोला, ‘‘मुझे सब कुछ याद है, आप पूछें लेकिन उस थानेदार की तरह यह मत कह देना कि मैं ने एक लड़की की गोली मार कर हत्या कर दी है.’’
‘‘हम बात तो यही कहेंगे लेकिन ऐसे नहीं जो आप को गुस्सा आ जाए.’’ मैक्डोनाल्ड ने कहा, ‘‘मैं यह मान नहीं सकता कि आप ने हत्या की है.’’
वह बोला, ‘‘पूछें, आप क्या पूछते हैं, मुझे गुस्सा नहीं आएगा.’’
उस ने अपनी वही कहानी सुनाई थी. उस ने बताया कि जब वह लड़की को कमरे में ले गया और उस के साथ जबरदस्ती की तो वह उसे धक्का दे कर बाहर निकल आई. उस के बाद जो कुछ हुआ था, वह मेजर डोगरा सुना चुका था.
मैं ने कहा, ‘‘जब आप को लड़की ने धक्का दिया तो आप को गुस्सा आया होगा.’’
वह बोला, ‘‘गुस्सा आया, लेकिन मैं ने नियंत्रण नहीं खोया था.’’
मैं ने पूछा, ‘‘आप के कितने मित्र हैं, उन में से किसी के पास तो कार होगी?’’
‘‘मेरा कोई मित्र नहीं है. मुझे यहां आए अभी कुछ ही दिन हुए हैं.’’ वह बोला.
‘‘आप के पास रिवौल्वर है?’’ मैक्डोनाल्ड ने पूछा.
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उस ने कहा, ‘‘मेरा निजी रिवौल्वर .38 का है, जो मेरे कमरे में रखा हुआ है.’’
मृतका की. 38 से ही हत्या की गई थी. उसे अपना रिवौल्वर आर्मरी में रखनी चाहिए था. इस से हम शक में पड़ गए.
‘‘आप ने यहां आ कर किसी को रिवौल्वर के बारे में बताया था?’’
वह बोला, ‘‘मुझ से किसी ने नहीं पूछा.’’
हम उस से सवाल करते रहे वह जवाब देता रहा. उस का मूड अच्छा था, वह हमें अपने कमरे पर ले गया. हम ने रिवौल्वर और कागज देखे. रिवौल्वर बिलकुल साफ था, उस में तेल लगा था. वह थानेदार को रिवौल्वर अपने कब्जे में ले कर जांच के लिए भेजना चाहिए था.
मैक्डोनाल्ड ने जांच के लिए भेजने हेतु वह रिवौल्वर अपने कब्जे में ले लिया और उस से यह सवाल किया, ‘‘आप ने इस रिवौल्वर से आखिरी गोली कब चलाई थी?’’
मैक्डोनाल्ड ने कहा, ‘‘यह सवाल बहुत खतरनाक है. आप खूब सोचसमझ कर जवाब दें, यह रिवौल्वर फोरैंसिक लैब में जांच के लिए जा रहा है. इस की नली भी साफ नहीं है.’’
उस ने मैक्डोनाल्ड के कंधे पर हाथ रख कर कहा, ‘‘मैं ने इस से किसी की हत्या नहीं की. मैं ने ढाई साल पहले एक खरगोश पर गोली चलाई थी.’’
मैं ने मैक्डोनाल्ड से अपनी भाषा में कहा, ‘‘इसे गरमा कर देखते हैं.’’
मैं ने उस से कहा, ‘‘सोच कर जवाब दो, ढाई साल पहले या ढाई सप्ताह पहले?’’
उस ने गरमी से कहा, ‘‘साल…साल…’’
मैं ने उसे और गुस्सा दिलाने के लिए कहा, ‘‘ढाई साल या ढाई सप्ताह में इतना अंतर होता है, जितना मौत और जिंदगी में. मैं आप के गुस्से की परवाह नहीं करूंगा. मेरा अनुभव है कि यह रिवौल्वर ढाई सप्ताह पहले चला था. आप झूठ बोल रहे हैं.’’
वह सोचता रहा और कुछ देर के लिए बाहर चला गया. आधे घंटे बाद आ कर उस ने शराब पी. मैक्डोनाल्ड ने पूछा, ‘‘आप बाहर क्यों चले गए थे?’’
उस ने हैरानी से कहा, ‘‘मैं बाहर चला गया था? मैं तो यह समझा कि मैं पलंग पर लेटा हूं.’’
हम ने उस से पूछा कि वह क्लब से किस समय और किस के साथ आया था? उस ने बताया, ‘‘एयरफोर्स की एक जीप में 7 अधिकारी आ रहे थे, मैं उन के साथ गया था.’’
हम ने उस का रिवौल्वर लिया और वापस अपने औफिस आ गए.
हम उस स्क्वाड्रन लीडर से मिले, जिस के साथ वह आया था. उस ने पुष्टि कर दी कि वह लीडर उस के साथ आया था. हम ने उस से यह भी पूछा कि क्या वह क्लब से डेढ़ घंटे के लिए कहीं चला गया था, उस ने कहा नहीं.
उस रात हम ने एक इंतजाम यह किया कि एक हिंदुस्तानी हवलदार को क्लब के नौकरों में शामिल कर दिया ताकि वह उस कार पर नजर रखे जिस के नंबर के आखिर में 66 हो.
दूसरे दिन हम ने जीप को फिर ध्यान से देखा. वह जगह देखी, जहां गोलियां मृतका के शरीर से निकल कर लगी थी. हम ने डोगरा मेजर को बुला कर पूछा, ‘‘आप ने कार के बैकव्यू मिरर से यह देखने की कोशिश की कि अगली सीट पर एक आदमी हैं या 2?’’
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‘‘मैं ने कोशिश की थी लेकिन मेरी जीप की रोशनी कार पर पड़ रही थी, इसलिए कुछ दिखाई नहीं दिया.’’
‘‘यह नैचुरल है कि जब आप ने बाईं ओर से गोलियां चलने की आवाज सुनी तो उसी ओर देखा होगा. आप को कार की सीट पर आदमी दिखाई दिया होगा. याद कर के बताओ वे आदमी फौजी थे या सिविलियन? आप गुप्तचर सेवा में हैं, आप को तो हर चीज ध्यान से देखनी चाहिए थी.’’
‘‘मेरा ध्यान लड़की पर था. उस की चीख से मैं घबरा गया था.’’
‘‘अगर आप अनपढ़ गंवार होते तो मैं मान लेता कि आप ने कार के अंदर नहीं झांका. गाड़ी बाईं ओर घूमी और उस का पूरा दृष्य आप के सामने था. आप उस पर फायर कर सकते थे. आप फौजी हैं, आप को अच्छा टारगेट मिला, लेकिन आप ने फायर नहीं किया.’’
यह सुन कर उस का रंग बदल गया, वह बोला, ‘‘मेरा ध्यान दूसरी ओर था,’’
उस ने दबी आवाज में कहा, ‘‘मेरी जगह आप होते तो आप भी ऐसा ही करते. मैं मानता हूं कि हत्यारे मेरी कमी के कारण निकल गए, अगर मुझे पीछा करते समय पता लग जाता कि लड़की मर गई है तो मैं उन का पीछा करता. मैं लड़की को बचाना चाहता था.’’
मैक्डोनाल्ड ने कहा, ‘‘सुनो मेजर, क्या आप को पता है कि हम आप से ये सवाल क्यों कर रहे हैं? हम आप को लड़की का हत्यारा समझ रहे हैं. आप यह साबित करें कि आप हत्यारे नहीं हैं.’’
उस ने भड़क कर कहा, ‘‘फिर तो आप की जांच पूरी हो गई. आप अपना समय बरबाद न करें.’’ वह बोला, ‘‘मेरे पास हत्या का कोई कारण नहीं है. मैं न तो उस को चाहता था, न ही मैं मृतका के चाहने वाले का प्रतिद्वंदी था. वह सुंदर अवश्य थी लेकिन मैं उसे उच्चसोसायटी की वेश्या समझता था.
‘‘मैं मानता हूं कि उस के साथ मेरे संबंध थे. मैं यह भी जानता हूं कि एक मेजर चाहे वह हिंदुस्तानी हो या अंगरेज, उस से दोस्ती कर ही नहीं सकता था, क्योंकि वह बहुत महंगी लड़की थी. उस की मांग बहुत ऊंची थी. वह राजामहाराजा या ब्रिगेडियर के अलावा किसी से दोस्ती पसंद नहीं करती थी.’’
‘‘फिर आप ने उस के साथ संबंध कैसे बनाए?’’
वह बोला, ‘‘इस के लिए मुझे अलग से पैसा मिलता था. आप देख रहे हैं मैं एक हिंदुस्तानी मेजर हूं और एक हिंदुस्तानी को इतना वेतन नहीं मिलता कि वह इतने महंगे क्लबों में जा कर इतनी महंगी लड़कियों से दोस्ती करे. जब भी क्लब में कोई पार्टी होती है, मैं सरकारी ड्यूटी पर जाता हूं.’’
उस ने आगे कहा, ‘‘मैं ने उस लड़की को अपनी ड्यूटी के बारे में नहीं बताया था. भले ही वह मुझे कोई राजामहाराजा समझती रही हो. एक रात उस ने मेरे गले लगते हुए कहा था कि मुझे आप जैसे अधिकारी से मोहब्बत है. मैं खुश हो गया कि मुझे दूसरे जासूसों को पकड़ने में एक हथियार मिल गया है.’’
‘‘आप को उस के मरने का दुख है?’’
वह बोला, ‘‘केवल इतना कि एक जासूस मर गई. अगर वह जिंदा रहती और मैं उसे मौके पर पकड़ता तो मेरी तरक्की हो जाती.’’
स्क्वाड्रन लीडर से बात करने के बाद मृतका का डाक्टर बाप आ गया और आते ही बोला, ‘‘लाओ, मुझे दिखाओ तुम ने स्क्वाड्रन लीडर से क्या बात की.’’
मैक्डोनाल्ड को गुस्सा आ गया, ‘‘मैं बिल्कुल परवाह नहीं करूंगा कि आप कर्नल हैं. आप इसी समय कमरे से निकल जाएं और आगे से हम से बात करने की कोशिश न करें.’’
वह उस समय चला गया और अगले दिन फिर आ गया और बोला, ‘‘मैं एडजुटेंट जनरल से मिला था. उस ने जांच पर नजर रखने के लिए कहा है.’’
मैं ने उस से कहा, ‘‘मैं जांच इसी समय खत्म कर के वायसराय को रिपोर्ट दे दूंगा कि हमारे काम में विघ्न डाला जा रहा है.’’ उस के बाद मैक्डोनाल्ड भी उस पर बरस पड़ा.
वह फिर दिखाई नहीं दिया. अगले दिन डोगरा मेजर हांफताकांपता आया और बोला, ‘‘मृतका जासूस थी. उस का बाप कर्नल गिरफ्तार हो गया है.’’
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पूरी बात पूछने पर उस ने बताया, ‘‘पिछली रात कलकत्ता मिलिट्री इंटेलिजेंस से फोन आया कि इस एंग्लोइंडियन कर्नल को गिरफ्तार कर के मिलिट्री पुलिस को दे दिया जाए.’’
सुबह भोर में डोगरा मेजर और फिर उस के साथी को जगा कर कहा गया कि अमुक होटल के अमुक कमरे को मिलिट्री पुलिस ने सील कर दिया है, कर्नल भी गिरफ्तार हो गया. आप जा कर कमरे की और कर्नल के सामान की तलाशी लो.
डोगरा मेजर अपने साथी के साथ चला गया. कर्नल के सामान की तलाशी में कुछ ऐसे कागज मिले, जिस से जासूसी का पता चला, और भी कई संदिग्ध चीजें मिलीं. कलकत्ता इंटेलिजेंस ने खबर दी कि कर्नल का पूरा परिवार कलकत्ता में था. कर्नल का छोटा भाई जासूसी करते पकड़ा गया.
उस की पिटाई हुई तो उस ने बताया कि वह जरमनों का जासूस है और उस का कर्नल भाई भी जासूस है. वे जापानियों की जासूसी करते थे. कर्नल की बेटी, जिस की हत्या हुई, वह भी इस गिरोह में शामिल थी. डोगरा मेजर जल्दी में था, इतना कह कर वह भाग गया.
उस के जाने के बाद हम दोनों ने सलाह की. मैक्डोनाल्ड ने कुछ सोच कर कहा, ‘‘मुझे हत्या का कारण भी बदला हुआ लगता है. हो सकता है, मृतका के गिरोह के किसी आदमी ने उस की हत्या कर दी हो, क्योंकि उन्हें संदेह था कि मृतका लड़की होने के नाते पूरे गिरोह को पकड़वा सकती है.’’
मैक्डोनाल्ड ने कहा, ‘‘अगर मेरी बात में कुछ जान है तो हमें मिलिट्री इंटेलिजेंस से मिल कर जांच करनी चाहिए.’’
उस दिन हमें ट्रैफिक पुलिस से 2 कारों के नंबर मिले, जिन के आखिर में 66 नंबर थे. दोनों के पते दिल्ली के थे. हम ने डोगरा मेजर को बुलाया कि वह हमारे साथ कार की जांच के लिए चले, क्योंकि उस ने ही कार देखी थी. वह हमारे साथ चलने को तैयार हो गया. हम ने रास्ते में उस से पूछा कि कर्नल के मामले में और क्या प्रगति हुई है तो उस ने कहा, ‘‘यह मामला गुप्त रखा गया है, किसी को कुछ बताने की इजाजत नहीं है.’’
हम दोनों कार के मालिकों के पते पर पहुंचे, जिन की कार के नंबर के आखिर में 66 था, लेकिन वहां से भी कुछ पता नहीं लगा. हमें डोगरा मेजर ने बताया कि आप हमारे अफसर से मिलें, शायद वह कुछ बता दे. डोगरा मेजर हमें अपने चीफ के औफिस ले गया और गायब हो गया.
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कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां
पिछले साल के फरवरी महीने में मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के गांव खापरखेड़ा के जगदीश धाकड़ अपने खेत में लगी गेहूं की फसल में यूरिया डाल रहे थे कि तभी एक आवारा सांड़ खेत में घुस आया, जिसे खदेड़ने के लिए जगदीश दौड़ पड़े.
सांड़ ने भी अपने नथुने फुलाए और सींगो के बल पर जगदीश को जमीन पर पटक दिया. पास के खेत में काम कर रहे कुछ किसानों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया. डाक्टर की सलाह पर जब ऐक्सरे कराया गया, तो जगदीश के दोनों पैर की हड्डियों में फ्रैक्चर निकला.
जगदीश 3 महीने तक बिस्तर पर पड़े रहे. इस दौरान उन की गेहूं की फसल देखरेख की कमी में बुरी तरह बरबाद हो गई. बताया जाता है कि जिस आवारा सांड़ ने उन्हें घायल किया था, उसे गांव के ही एक दबंग द्वारा किसी माता की पूजापाठ कर के खुला छोड़ा गया था.
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लौकडाउन के पहले दतिया के रेलवे स्टेशन पर आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता था. ये आवारा गायबैल मुसाफिरों के खानेपीने की चीजों पर झपट पड़ते थे. कई बार इन आवारा जानवरों के अचानक रेलवे प्लेटफार्म पर दौड़ लगाने से बच्चों, औरतों और बुजुर्गों को चोट भी लग जाती थी.
होशंगाबाद जिले के गांव पचुआ में साल 2018 में चरनोई जमीन पर गांव के कुछ रसूख वाले किसानों ने कब्जा कर लिया, जिस के चलते गांव के आवारा पशु किसानों के खेतों में घुस कर फसलों को नुकसान पहुंचाने लगे. इस बात को ले कर 2 पक्षों में विवाद हो गया, जिस से एक आदमी की मौत हो गई. दूसरे पक्ष के 2 लोग हत्या के आरोप में हवालात में बंद हैं.
पिछले कुछ सालों में देश के अलगअलग इलाकों में हुई ये घटनाएं बताती हैं कि हमारे देश में पशुओं की आवारगी लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है. किसानों की हाड़तोड़ मेहनत से उगाई गई फसल जब आवारा पशु चर लेते हैं तो वे मनमसोस कर रह जाते हैं. गांवकसबों में दबंगों के पाले पशु आवारा घूमते हैं और एससी और बीसी तबके की जमीन पर उगी फसल चट कर जाते हैं. दबंगों के खौफ से इन आवारा पशुओं को कोई रोकने की हिम्मत नहीं कर पाता.
क्या हैं कायदेकानून
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51(ए) के मुताबिक हर जीवित प्राणी के प्रति सहानुभूति रखना भारत के हर नागरिक का मूल कर्तव्य है. ‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम’ और ‘खाद्य सुरक्षा अधिनियम’ में इस बात का जिक्र है कि कोई भी पशु सिर्फ बूचड़खाने में ही काटा जाएगा और बीमार तथा गर्भधारण कर चुके पशु को मारा नहीं जाएगा.
भारतीय दंड संहिता की धारा 428 और 429 के मुताबिक किसी पशु को मारना या अपंग करना, भले ही वह आवारा क्यों न हो, दंडनीय अपराध है. ‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम’ के मुताबिक किसी पशु को आवारा छोड़ने पर 3 महीने की सजा हो सकती है. पशुओं को लड़ने के लिए भड़काना, ऐसी लड़ाई का आयोजन करना या उस में हिस्सा लेना संज्ञेय अपराध है.
‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम’ की धारा 22(2) के मुताबिक भालू, बंदर, बाघ, तेंदुए, शेर और बैल को मनोरंजक कामों के लिए ट्रेनिंग देने और मनोरंजन के लिए इन जानवरों का इस्तेमाल करना गैरकानूनी माना गया है.
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पीपुल्स फार एनीमल से जुड़े पत्रकार भागीरथ तिवारी बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने जीने के मौलिक अधिकार के दायरे का विस्तार करते हुए इस में पशुओं को भी शामिल कर लिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुसार बैलों को भी एक स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण में रहने का अधिकार है, उन्हें पीटा नहीं जा सकता. न ही उन्हें शराब पिलाई जा सकती है और न ही तंग बाड़ों में खड़ा किया जा सकता है.
हमारे देश की न्याय व्यवस्था भी दोहरे मापदंड वाली है. एक तरफ सुप्रीम कोर्ट कहती है कि आवारा पशुओं को भी खयाल रखो और अपनी फसलों को भी सहीसलामत रखो. व्यवहार में यह कैसे संभव है? जमीनी हकीकत यह है कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के इलाकों में नीलगाय, सूअर और गाय, बकरी, भैंस जैसे आवारा पशुओं से फसल बचाने के लिए किसान खेतों में रतजगा कर रहे हैं.
आवारा पशुओं को किसान मार भी नहीं सकते, क्योंकि यह गैरकानूनी है. गांवों में खेती करने वाले छोटेछोटे किसानों के पास जो जमीन है, उस पर किसी बड़े फार्महाउस जैसे तार की फैंसिंग नहीं रहती. गरीब, बीसी और एससी पशुपालक अपने पालतू पशुओं को खुद चराने ले जाते हैं, पर ऊंची जाति के दबंगों के पशु बेखौफ आवारा घूमते हैं. देश का कानून भी उपदेशकों जैसे केवल उपदेश भर देता है.
एक दौर था जब पशुपालन किसानों के लिए आमदनी का जरीया हुआ करता था. लोग गायभैंस, बकरी पाल कर इन के दूध, घी, मक्खन को बेच कर घरपरिवार की जरूरतों की पूर्ति करते थे. बैल खेतीकिसानी के कामों में हल, बखर चलाते थे. बैलगाड़ी में किसान अपनी उपज मंडियों तक ले जाते थे. नई तकनीक आने से अब खेती में कृषि उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ गया है. इस के चलते पशुपालन में अब किसानों की दिलचस्पी कम हो गई है. अब लोग पालतू पशुओं को दूध देने तक घर में रखते हैं, बाद में उन्हें आवारा छोड़ देते हैं. आजकल गांवकसबों में आवारा पशुओं के चलते फसलों की सुरक्षा एक बड़ी समस्या बन कर उभर रही है.
मौजूदा दौर में खेती में मशीनीकरण से गौवंश के बैल बेकार होने की बात तो समझ में आती है, लेकिन दूध देने वाली गाय के आवारा होने की बात समझ से परे है. गांवशहर से ले कर दिल्ली तक गौवंश की रक्षा की हिमायती सरकार होने के बावजूद भी आज तक पशुओं की आवारगी पर कोई ठोस नीतिनियम नहीं बन पाए हैं.
समस्या की जड़ है पाखंड
धर्म के ठेकेदारों ने गाय को ले कर जो अंधविश्वास और पाखंड फैलाया है, उसे मानने का खमियाजा भी तो समाज ही भुगत रहा है. कपोलकल्पित कथाओं के जरीए पंडेपुजारी लोगों को बताते हैं कि गाय के अंदर 33 करोड़ देवी देवता रहते हैं. जो पंडित को गाय दान में देते हैं, वे कितने ही पाप कर लें, सीधे स्वर्ग पहुंच जाते हैं.
बड़े-बड़े पंडालों में होने वाली कथाओं में बताया जाता है कि दान की गई गाय की पूंछ पकड़ कर स्वर्ग के रास्ते में पड़ने वाली एक वैतरणी नदी को पार करना पड़ता है. इसी पाखंड की वजह से मध्य प्रदेश की एक महिला मुख्यमंत्री तो सड़क पर अपने काफिले को रोक कर गाय को रोटी खिलाती थीं. आखिर लोगों को यह बात समझ में क्यों नहीं आती कि गाय को हरे चारे और भूसे की जरूरत रोटी से कहीं ज्यादा है.
समाजसेवी बृजेंद्र सिंह कुशवाहा कहते हैं कि गौहत्या की चिंता करने वालों को यह चिंता भी करना होगी कि गाय को माता मानने वाले लोग गाय को सड़कों पर मरने के लिए क्यों छोड़ देते हैं? वैसे तो गाय एक बहुपयोगी पशु है, उस के दूध को बहुत गुणकारी माना गया है और आज भी गांवदेहात में कई परिवारों की आजीविका का स्रोत गाय का दूध और उस से बने उत्पाद दही, मक्खन और घी हैं. गाय के गोबर से बने उपले गांवदेहात के लाखों घरों के चूल्हों का ईंधन बने हुए हैं, पर वर्तमान में गाय की बदहाली और अनदेखी भी किसी से छिपी नहीं है.
गाय के नाम पर सरकारी अनुदान बटोरने वाले तथाकथित गौसेवक गाय का निवाला खा रहे हैं. आधुनिकता की अंधी दौड़ में आज पशुधन से किसान भी विमुख हो रहे हैं. यही वजह है कि गाय जब तक दूध देती है, पशुपालक उस की सेवा करते हैं और जैसे ही गाय दूध देना बंद करती है तो पशुपालक उसे सड़कों पर खुला छोड़ देते हैं. ऐसे ही लोगो की वजह से गाएं सड़कों पर आवारा घूमती कचरे के ढेर पर प्लास्टिक की पन्नी खाती नजर आती हैं.
मध्य प्रदेश के भोपालजबलपुर नैशनल हाईवे 12 पर आवारा घूमती गायों का समूह सड़क पर घूमता हमेशा नजर आता है. इन में से कुछ गाएं आएदिन ट्रक या दूसरी बड़ी गाड़ियों की चपेट में आ कर मौत का शिकार हो जाती हैं, तो कुछ जिंदगीभर के लिए अपाहिज हो जाती हैं.
सड़कों पर घायल गायों की सुध लेने कोई नहीं आता. औसतन हर 10 किलोमीटर के दायरे में सड़क किनारे मरी पड़ी गाय की बदबू आनेजाने वालों का ध्यान खींचती है, पर किसी जिम्मेदार अफसर या नेता का ध्यान इस ओर नहीं जाता है.
स्थानीय लोग बताते हैं कि गायों की खरीदफरोख्त करने वाले लोग इन गायों को साप्ताहिक लगने वाले एक बाजार से दूसरे बाजार में ट्रकों से ले जाते हैं. कई बार मवेशी बाजार में सही कीमत न मिलने के चलते ट्रांसपोर्ट का खर्चा बचाने या तथाकथित गौरक्षकों के डर से वे उन्हें दूसरे बाजार के लिए नहीं ले जा पाते. कुछ व्यापारी तो गाय के शरीर पर कलर से कोई मार्क बना कर उसे सड़क पर छोड़ देते हैं. अगले हफ्ते वही व्यापारी आ कर उनगायों की तलाश करते हैं और ज्यादातर गाएं उन्हें मिल भी जाती हैं, जिन्हे वे फिर से बाजार में खरीदफरोख्त के लिए ले जाते हैं. आवारा घूमती गायों की यह बदहाली गाय के नाम पर हायतोबा मचाने वाले गौरक्षकों को धत्ता बताती नजर आती है .
मरने-मारने पर उतारू
गौसेवा का ढोंग करने वाले भगवाधारी घर में भले ही अपने मांबाप का खयाल न रखते हों, पर गौतस्करी करने वाले लोगों को पकड़ कर उन की जान लेने पर उतारू हो जाते हैं.
28 अप्रैल, 2020 को मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के उदयपुरा में एक गाय का कटा सिर मिलने की खबर ने माहौल में जहर घोल दिया था. इस मामले में एक समुदाय विशेष की आलोचना से सोशल मीडिया प्लेटफार्म गरमाया हुआ था.
दरअसल, जिस इलाके में गाय का सिर मिला था, वह एक समुदाय विशेष का महल्ला था. इस वज़ह से यही कयास लगाया जाने लगा कि गाय का कत्ल कर के गौमांस निकाल कर सिर फेंका गया है. जब ऐसी घटनाओं से एक समुदाय गुस्से से भर दूसरे समुदाय पर लानतें भेजने लग जाए तो विश्वास का संकट खड़ा हो जाता है. गौहत्या और गौतस्करों पर सियासत करने वाले लोग मौका पाते ही हर घटना को सांप्रदायिक रंग देने से पीछे नहीं हटते हैं.
इस तरह की घटनाओं का दुखद पहलू यह भी है कि गौहत्या का विरोध कर के गुस्से में आ कर मरनेमारने पर उतारू लोग भीड़ तंत्र का हिस्सा तो बन जाते हैं, पर गायों की आवारगी पर बात नहीं करना चाहते.
हो रही हिंसा और चंदा वसूली
मध्य प्रदेश में तो बाकायदा गौसेवा आयोग बना कर उस के अध्यक्ष को राज्यमंत्री का दर्जा भी दिया जाता है, पर प्रदेश में गायों की बदहाली गौसेवा आयोग के वजूद पर ही सवालिया निशान लगाती ही लगाती है.
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मध्य प्रदेश के कई शहरों में छोटीबड़ी दुकानों पर गाय की आकृति वाली प्लास्टिक की चंदा जमा करने वाली गुल्लक रखी रहती हैं, जिन में दुकान पर आने वाले ग्राहक चंदे के नाम पर कुछ रकम डालते हैं. ऐसे ही एक दुकानदार से सवाल करने पर बताया गया कि गौशाला चलाने वाली संस्थाओं के नुमाइंदे इन गुल्लकों को दुकान पर छोड़ जाते हैं और एक निश्चित समय पर उस की रकम को निकाल कर ले जाते हैं.
गौशाला चलाने वाले ज्यादातर लोग किसी न किसी राजनीतिक दल से जुड़े होते हैं, जो स्वयंसेवी संस्था बना कर शासकीय अनुदान का जुगाड़ करने में माहिर होते हैं. सड़कों पर आवारा घूमती गायों और इन गुल्लकों को देख कर यह सवाल बरबस ही उठता है कि आखिर गौसेवा के नाम पर उगाहे जा रहे इस चंदे का इस्तेमाल कौन सी गायों की सेवा पर किया जाता हैं?
हालांकि कुछ ऐसी गौशालाएं आज भी हैं जो बिना चंदे या शासकीय अनुदान के प्रचार से कोसों दूर निर्बल और रोगी गायों की सेवा का काम कर रही हैं. पर बहुत से संगठन गौसेवा के नाम पर देश में हिंसा फैला रहे हेैं. गौरक्षकों की टोली आएदिन सड़कों पर गायों का परिवहन करने वाले ट्रकों को रोक कर ड्राइवर और क्लीनर से मारपीट कर उन से चौथ वसूली करने में भी पीछे नहीं रहती हैं.
सवाल यह भी उठता है कि सड़कों पर आवारा घूमती गायों को देख कर इन गौरक्षकों का खून क्यों नहीं खोलता? गौहत्या और गौमांस के मुद्दे पर कानों सुनी बातों पर मौब लिंचिंग पर उतारू इन भक्तों की भीड़ को सोचना होगा कि गाय को मां का दर्जा दे कर इस तरह सड़कों पर आवारा छोड़ना भी कोई धर्म नहीं है. गाय को आवारगी से मुक्त करा कर उस के पालक बनने की पहल भी उन्हें करनी होगी.
चरनोई जमीन पर कब्जा
पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी हरिहर बुनकर मानते हैं कि पशुओं की आवारगी की एक अहम वजह चरनोई जमीन का न होना भी है. चरनोई जमीन पर गांवकसबों के रसूख वाले लोगों ने कब्जा कर रखा है. सरकारी जमीन पर एससी और बीसी तबके द्वारा अपने परिवार का पेट पालने के लिए खेती करने पर पुलिस द्वारा पिटाई करती है, लेकिन दबंगों की दबंगई के आगे पुलिस और बड़े अफसरों को सांप सूंघ जाता है.
चरनोई जमीन न होने से पशु आवारा घूमते हैं और फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिस से कई बार लड़ाई-झगड़े के हालात भी बन जाते हैं.
आवारा पशुओं की समस्या का समाधान केवल जुमलों से होने वाला नहीं है. इस के लिए सरकार को चरनोई जमीन को दबंगों के चंगुल से मुक्त कराना होगा. बीमार, लाचार, आवारा पशुओं को गौशालाओं में पहुंचा कर गांवकसबों में चरनोई जमीन का रकबा तय कर के और व्यावहारिक कानून बना कर आवारा पशुओं की समस्या से नजात मिल सकती है.
इन दिनों अभिनेता इमरान हाशमी (Emraan Hashmi) 21 अक्टूबर को ‘‘बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’’ में प्रीमियर होने को लेकर काफी उत्साहित है. तो वहीं उनकी इस फिल्म का पहला ट्रेलर रिलीज होते ही वायरल हो गया.
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यह फिल्म मुंबई के अनाथ बच्चों पर बनी है, जिन्हें केवल एक नंबर के नाम से अनाथालय में जाना जाता है और वह रोजाना जेबकतरी करके अपना जीवन चलाते हैं. फिल्म में इन जेबकतरे बच्चों के सरगना बने हैं सागर (इमरान हाशमी), जो हमेशा इंग्लिश में बात करते हैं. फिल्म की कहानी तब मोड़ लेती है, जब इन जेबकतरों में से एक लड़का पचपन (रिजवान शेख ) एक मध्यम वर्गीय परिवार के इंसान का पैसा चुरा लेता है. अपने पैसे चोरी हो जाने के सदमें में वह इंसान ट्रेन के आगे कूदकर जान दे देता है. इसके बाद पचपन उस आदमी के घर जाता है, जहां उसे उस आदमी की लड़की उमा (धनश्री पाटिल) से प्यार हो जाता है. इसके बाद वह लड़का उस परिवार की मदद करने की ठान लेता है, उसके इस मकसद के आड़े उसकी गैंग के लोग ही आ जाते हैं.
फिल्म ‘‘हरामी’’ (Harami )के ट्रेलर से आभास होता है कि फिल्म ‘‘स्लमडॉग मिलियनेयर’’ (Slumdog Millionaire) की ही तर्ज पर फिल्म ‘‘हरामी’’ में भी कठोर वातावरण को यथार्थवादी व किरकिरे तरीके से प्रस्तुत किया गया है. ट्रेलर से यह भी पता चलता है कि कठोर होते हुए भी सागर यानी कि इमरान हाशमी (Emraan Hashmi) के अंदर अभी भी सहानुभूति का भाव बाकी है.
‘‘बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’’ में फिल्म ‘‘हरामी’’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और सर्वश्रेष्ठ दर्शकों के पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है. इन पुरस्कारों को क्रमषः ‘न्यू क्यूरेंट्स अवार्ड’, ‘किम जीसोक अवार्ड‘ और ‘केएनएन ऑडियंस अवार्ड’ के नाम से जाना जाता है, जो प्रतिष्ठित समारोह में मुख्य प्रतियोगिता के लिए चुनी गई फिल्मों के लिए दिए जाने वाले सबसे अच्छे पुरस्कार हैं.
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श्याम मदीराजू लिखित और निर्देशित फिल्म ‘‘हरामी’’ (Harami) अंतर्राष्ट्रीय पटल पर इमरान हाशमी (Emraan Hashmi) की वापसी है. इससे पहले वह 2014 के ऑस्कर विजेता निर्देशक डेनिस स्टैनोविच के साथ अंतरराष्ट्रीय फिल्म ‘‘टाइगर्स’’ में अभिनय कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित कर चुके हैं.
अमरीकन कंपनी ‘‘जर्म कलेक्टिव’’ के साथ ही इसका सह निर्माण इमरान हाशमी (Emraan Hashmi) की कंपनी ‘इमरान हाशमी फिल्मस’’ ने भी किया है. ब्रेंट मैडॉक और प्रवेश सिंह राजपूत, पॉल फिग, सनी खन्ना और नवीन शेट्टी कार्यकारी निर्माता हैं. फिल्म में इमरान हाशमी के अलावा रिजवान शेख, धनश्री पाटिल, हर्ष राजेंद्र राणे, आशुतोश गायकवाड़, मछिन्द्र गाडकर, सार्थक दुसाने, मनीश मिश्रा, यश कांबले, आदित्य भगत दीक्षा निशा और आदिल खान जैसे कलाकारों के अहम किरदार हैं.
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पिछले कुछ दिनों से इंटरनेट पर कुछ वीडियो और फोटो काफी वायरल हो रही है जो कि डांस इंडस्ट्री के सबसे पौपुलर कोरियोग्राफर टेरेंस लुईस (Terence Lewis) और अपने डांस और एक्टिंग से सबको दीवाना बना चुकीं एक्ट्रेस नोरा फतेही (Nora Fatehi) की है. जैसा कि हम सब जानते हैं कि इन दिनों एक्ट्रेस नोरा फतेही (Nora Fatehi) सोनी टीवी (Sony TV) के फेमस रिएलिटी शो ‘इंडियाज बेस्ट डांसर’ (India’s Best Dancer) में कोरियोग्राफर टेरेंस लुईस (Terence Lewis), मलाइका अरोड़ा (Malaika Arora) और गीता कपूर (Geeta Kapoor) के साथ जज की भूमिका निभा रही हैं.
इसी के चलते सोमवार सुबह से एक वीडियो काफी वायरल हो रही है जिसमें टेरेंस लुईस (Terence Lewis) नोरा फतेही (Nora Fatehi) के पीछे हाथ मारते हुए दिखाई दे रहे हैं. तभी से टेरेंस और नोरा विवादों में फंस गए और फैंस टेरेंस की इस हरकत की जमकर निंदा कर रहे हैं. जब से टेरेंस लुईस (Terence Lewis) ने नोरा के पीछे हाथ मारा है तभी से लोग टेरेंस को काफी खरी खोटी सुना रहे हैं और इसी मुद्दे पर सोशल मीडिया पर काफी मीम्स बन रहे हैं.
ऐसे में खुद नोरा फतेही (Nora Fatehi) ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर कर अपने फैंस को बताया है कि टेरेंस लुईस (Terence Lewis) ने उनके साथ कोई बद्तमीजी नहीं की. नोरा फतेही (Nora Fatehi) का कहना है कि कुछ लोगों ने उन फोटोज के साथ छेड़छाड़ की है और जो हीं हुआ वो दिखाने की कोशिश की है.
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एक्ट्रेस नोरा फतेही (Nora Fatehi) का इस बारे में कहना है कि, ‘धन्यवाद टेरेंस.. सोशल मीडिया के इस जमाने में जहां मीम्स बनाने के लिए तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ की जाती है, उस समय आपने धैर्य से काम लिया है. मुझे खुशी है कि आपने इन चीजों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और अपनी गरिमा कायम रखी. ये वक्त भी निकल जाएगा. आप और गीता मैम ने मुझे हमेशा प्यार दिया है और एक जज के रूप में स्वीकार किया है. यह मेरे लिए एक शानदार एक्सपीरियंस था. आपका धन्यवाद.’
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आने वाले 3 अक्टूबर को टेलीविजन इंडस्ट्री के सबसे पौपुलर रिएलिटी शो बिग बॉस के सीजन 14 (Bigg Boss 14) की शुरूआत होने जा रही है. जैसे जैसे दिन नजदीक आ रहे हैं वैसे वैसे फैंस के दिलो में एक्साइटमेंट बढ़ती जा रही है कि आखिर कौन कौन सी हस्तियां इस बार लेने वाली है बिग बॉस के घर में एंट्री. बिग बॉस के मेकर्स आए दिन दर्शकों की एक्साइटमेंट बढ़ाने के लिए कोई ना कोई प्रोमो या शो से जुड़ी कोई लेटेस्ट अप्डेट शेयर करते रहते हैं.
Sirf 5 din mein uthega parda iss haseen chehre se! #BB14 Grand Premiere, 3rd Oct, Saturday at 9 PM.
Streaming partner @VootSelect. @BeingSalmanKhan #BiggBoss2020 @PlayMPL #DaburDantRakshak @TRESemmeIndia @LotusHerbals pic.twitter.com/E81dhv4NF8— Bigg Boss (@BiggBoss) September 28, 2020
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ऐसे में मेकर्स ने बिग बॉस (Bigg Boss) के औफिशियल ट्विटर पेज से एक ट्वीट शेयर किया है जिसमें साउथ इंडस्ट्री की जानी मानी एक्ट्रेस निक्की तम्बोली (Nikki Tamboli) बेहद ही हॉट अंदाज में दिखाई दे रही हैं. इस दौरान एक्ट्रेस निक्की तम्बोली ‘दिलबर’ (Dilbar) गाने पर पर्फोर्म कर रही हैं. इस वीडियो के कैप्शन में मेकर्स ने लिखा है कि, “Sirf 5 din mein uthega parda iss haseen chehre se! #BB14 Grand Premiere, 3rd Oct, Saturday at 9 PM.”
आपको बता दें एक्ट्रेस निक्की तम्बोली (Nikki Tamboli) सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और एक्टिव रहने के साथ साथ वे अपनी लेटेस्ट फोटोज फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं. निक्की तम्बोली (Nikki Tamboli) दिखने में बेहद खूबसूरत हैं और तो और वे इतनी ग्लैमरस हैं कि कोई भी उन्हे देखते ही उन्हें दिल दे बैठे. बात करें उनकी फैन फौलोविंग की तो इंस्टाग्राम पर उनके 4 लाख से भी ज्यादा फौलोवर्स हैं और इसकी एकमात्र वजह है उनकी खूबसूरत व हॉट फोटोज.
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You ain’t gotta like me🤨 I like me 😉 #healthylifestyle #fitness #girlboss #stayhome 📸 @aviraj
अब देखने वाली बात ये होगी कि जब इतनी खूबसूरत एक्ट्रेस बिग बॉस 14 में एंट्री लेंगी तब बिग बॉस फैंस को क्या क्या नया देखने को मिलेगा.
इंसपेक्टर मुनीष प्रताप को लगा कि हो न हो इसी झगडे़ में हमले की वजह छिपी हो सकती है. पुलिस टीम ने तब तक राजीव के फोन की काल डिटेल्स निकाल कर उस में उन तमाम लोगों से पूछताछ कर चुकी थी जो नंबर संदिग्ध लगे. लेकिन इस पूरी कवायद में कोई अहम जानकारी नहीं मिली.
लिहाजा इंसपेक्टर मुनीष प्रताप ने राजीव की पत्नी शिखा के मोबाइल की काल डिटेल्स निकाल कर उस की छानबीन शुरू करा दी क्योंकि उन्हें लग रहा था कि पति से झगडे़ की वजह से भी शिखा ऐसी किसी साजिश को अंजाम दे सकती है.
शिखा के मोबाइल पर आनेजाने वाले नंबरों की जांचपड़ताल शुरू हुई तो घर परिवार वालों के अलावा केवल एक ही ऐसा अंजान नंबर था जिस पर अकसर बात होती थी और वाट्सएप मैसेज और किए जाते थे.
जब जानकारी ली गई तो पता चला कि यह नंबर बुराड़ी में ही चंदन विहार कालोनी के रहने वाले रोहित कश्यप का है. हालांकि काल डिटेल्स से कोई शक करने वाली बात सामने नहीं आई थी. ये नंबर राजीव वर्मा की काल डिटेल्स में भी सामने आया था तभी पता चला था कि राजीव वर्मा और उस की पत्नी शिखा रोहित कश्यप के जिम में वर्क आउट करने जाते थे. राजीव सुबह जाता था जबकि शिखा उस वक्त जाती थी. जब भी उसे वक्त मिलता था.
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यानी एक तरह से रोहित कश्यप वो शख्स था जो पतिपत्नी की जिंदगी में कामन था. दोनों ही उस के जिम में वर्क आउट करने जाते थे. इसलिए स्वाभाविक था कि वे दोनों ही उस से किन्हीं कारणों से फोन पर बात करते होंगे. लेकिन शिखा उस से वाट्सएप चैट और काल करती थी. ये सवाल गौर करने लायक था.
शिखा को ले कर इंसपेक्टर मुनीष के मन में संदेह का कीड़ा तो पहले ही कुलबुला रहा था. इसलिए उन्होंने रोहित के बारे में विस्तार से जानने के लिए उस के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवा कर छानबीन शुरू कर दी. बस छानबीन होते ही महत्त्वपूर्ण क्लू पुलिस के हाथ लग गया.
दरअसल जिस दिन राजीव वर्मा पर हमला हुआ उस दिन और उस से एक दिन पहले रोहित कश्यप के मोबाइल की लोकेशन उसी जगह मिली थी जहां राजीव पर हमला हुआ. ये जानकारी महज संयोग नहीं हो सकती थी. दिलचस्प बात ये थी कि वारदात से पहले और बाद में शिखा के फोन से रोहित कश्यप के फोन पर वाट्सएप काल भी की गई थी. बस इंसपेक्टर मुनीष के लिए इतना सबूत काफी था.
प्रेमी-प्रेमिका हुए गिरफ्तार
उन्होंने 11 अगस्त, 2019 को एक विशेष टीम का गठन किया. एसआई सरिता मलिक शिखा को उस के घर से और एसएसआई दिलीप सिंह ने अपनी टीम के साथ रोहित कश्यप को उस के जिम से हिरासत में ले लिया. दोनों को सूरजपुर थाने लाया गया. सीओ तनु उपाध्याय के सामने दोनों से सारे सबूत दिखा कर कड़ी पूछताछ की गई तो वे अपना गुनाह कबूल करने से बच नहीं सके.
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शिखा ने बता दिया कि उसी ने अपने जिम ट्रेनर प्रेमी के प्यार में पड़ कर अपने पति की हत्या करने के लिए रोहित को 1 लाख 20 हजार रुपए की सुपारी दी थी.
पुलिस ने दोनों से विस्तृत पूछताछ के बाद अगली सुबह रोहित के दोस्त गोविंदपुरी (दिल्ली) निवासी रोहन उर्फ मनीष को भी गिरफ्तार कर लिया. तीनों से पूछताछ में राजीव वर्मा शूटआउट केस का सनसनीखेज खुलासा हो गया.
शादी के बाद एक बेटा होने के बाद भी शिखा की खूबसूरती में कोई कमी नहीं आई थी लेकिन घर में कामकाज करने के कारण उस का फिगर बेडौल हो गया था. शरीर पर काफी चर्बी चढ़ने लगी थी, जिस कारण वह मोटी हो गई.
राजीव हालांकि पत्नी को बेहद प्यार करता था लेकिन शिखा के लगातार बढ़ रहे मोटापे के कारण पत्नी के प्रति उस का आकर्षण कम हो रहा था.
अब राजीव शिखा को अपने साथ दोस्तों के यहां अथवा किसी पार्टी में ले जाने से कतराने लगा था. राजीव अकसर शिखा पर उस का वजन बढ़ने के कारण कमेंट करता रहता था कि क्या वो खुद को शीशे में नहीं देखती, कितनी मोटी हो गई है.
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इन कमेंट्स से तंग आ कर शिखा ने वजन कम करने का फैसला कर लिया था. राजीव की सलाह पर उसने भी नजदीक के चंदन विहार मोहल्ले में स्थित उसी जिम को जौइन कर लिया जहां राजीव जाता था.
शिखा अकसर दोपहर बाद या शाम को जिम में जाती थी. जिम का ट्रेनर रोहित उसे प्यार भरी नजरों से देखता था. एक तरफ जहां पति की नजरों में शिखा को तिरस्कार दिखता था तो रोहित की प्यार भरी नजरों के कारण वह जल्द ही उसके आकर्षण में बंध गई.
रोहित कश्यप वैसे तो 8वीं पास था लेकिन उस का शरीर बेहद आकर्षक था कोई लड़की अगर एक बार उस के चेहरे और सुडौल बदन को देख ले तो उस के मोहपाश में फंसे बिना नहीं रह सकती थी. हालांकि 9 साल पहले रोहित ने भी एक बाल्मिकी लड़की से प्रेम विवाह किया था, जो आईटीओ पर एक संस्था में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है.
खुद रोहित पहले भिवानी के एक जिम में ट्रेनर की नौकरी करता था लेकिन 2 साल पहले उसने बुराड़ी में अपना जिम खोल लिया था. लेकिन अब अपनी पत्नी से उस का भी अकसर झगड़ा होता रहता था.
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जब रोहित ने देखा कि शिखा धीरेधीरे उस के मोहपाश में बंध रही है तो उसने एक और कदम आगे बढ़ाया और वह वर्कआउट कराते वक्त न सिर्फ उस के नाजुक अंगों को सहला देता बल्कि अकसर उस के फिगर और उस की खूबसूरती की तारीफ भी कर देता. बस यही वो खूबी थी जिस के कारण धीरेधीरे शिखा रोहित के प्यार में डूबती चली गई.
जिम में वर्कआउट करतेकरते कब दोनों की नजदीकी प्यार में बदली और कब दोनों के बीच अवैधसंबध कायम हो गए पता ही नहीं चला. बहकी हुई औरत को जब किसी गैरमर्द के शरीर की गंध लग जाती है तो उस का विवेक भी गलत दिशा में चल पड़ता है. दोनों के नाजायज रिश्ते को एक साल से ज्यादा हो गया था.
वर्कआउट करने के बावजूद शिखा का मोटापा कम नहीं हो रहा था. पति राजीव के ताने अब और ज्यादा बढ़ गए थे. जिस कारण दोनों में अकसर झगड़ा भी हो जाता था. पति के ताने अब शिखा को शूल की तरह चुभने लगे थे. जब ताने बरदाश्त से बाहर हो गए तो 2 महीना पहले एक दिन शिखा ने मन की बात रोहित से कह दी. शिखा ने रोहित से कहा कि अगर वह उस से प्यार करता है तो किसी भी तरह राजीव को उस की जिदंगी से निकालना होगा.
शिखा के इरादे जानकर रोहित सहम गया. राजीव से बदला लेने और अपने रास्ते से हटाने की ठान ली. इस के लिए उसने रोहित को 1 लाख 20 हजार रुपए दिए. रोहित ने अपने पहचान वाले आदमी से एक पिस्तौल खरीदी. उस ने अपने एक दोस्त रोहन को भी इस प्लान में शामिल किया.
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शिखा ने बताया कि उसने ही राजीव को मारने की प्लानिंग की थी. उस ने कहा कि जिस दिन राजीव ग्रेटर नोएडा स्थित साइट पर जाता था, वहां दोस्तों के साथ खाना शेयर करने के चलते उस दिन अपनी मनपसंद का अधिक खाना पैक करा कर ले जाता था और नोएडा की साइट पर जाने पर खाना कम पैक कराता. लंच बौक्स से ही जानकारी मिल जाती थी कि वह किस दिन कौन सी साइट पर जा रहा है. 23 जुलाई को राजीव ने कम खाना पैक कराने पर शिखा समझ गई कि राजीव नोएडा जाएगा. इस पर लोकेशन की जानकारी उस ने अपने प्रेमी रोहित को दे दी. रोहित अपने दोस्त के साथ बाइक से पीछा कर ग्रेटर नोएडा आया और घटना को अंजाम दिया.
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल की गई पल्सर मोटरसाइकिल व एक पिस्तौल और कारतूस बरामद कर लिए. रोहित और शिक्षा से पूछताछ के बाद पुलिस ने तीसरे आरोपी रोहन को भी गिरफ्तार कर लिया. तीनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.
कथा लिखे जाने तक राजीव का अस्पताल में इलाज चल रहा था. उस की हालत खतरे से बाहर थी.
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