घटना दिल्ली के एक थाने की थी, जो मुझ पर थोपी गई थी, जबकि वहां का थानेदार पहले ही जांच कर रहा था.

मुझे आदेश मिला कि 2 सप्ताह में पुलिस हैडक्वार्टर पहुंचो, वहां का एक पुलिस इंसपेक्टर जांच में तुम्हारा साथ देगा. दोनों को एक एंग्लोइंडियन लड़की की हत्या की जांच करनी है. वह विश्वयुद्ध का समय था. अंगरेजों का फौजी हैडक्वार्टर और एयर हैडक्वार्टर दिल्ली में ही थे. इस केस का संबंध सेना से था, जो मेरे लिए एक नया अनुभव था.

दिल्ली में एक एंग्लोइंडियन लड़की की हत्या हुई थी. थाना पुलिस ने जांच की, लेकिन 2 सप्ताह बीतने पर भी हत्यारे का पता नहीं लगा. अंगरेज सरकार में वायसराय के औफिस ने इस केस की जांच थाने से हटा कर स्पैशल स्टाफ को दे दी थी और हत्यारे का शीघ्र पता लगा कर अदालत में पेश करने का आदेश दिया था.

मैं हैडक्वार्टर पहुंचा तो मेरा परिचय इंसपेक्टर मैक्डोनाल्ड से कराया गया, जिस के साथ मुझे काम करना था. मृतका के बारे में बताया गया कि उस का पिता आर्मी मैडिकल कोर में कर्नल है, जो डाक्टर भी है. उन दिनों वह कलकत्ता में था जबकि उस की मृतका बेटी दिल्ली में सेना में लेफ्टिनेंट थी.

ये भी पढ़ें- ऐसा भी होता है प्यार : भाग 2

युद्ध के दौरान औरतों की एक सेना बनाई गई थी, जो डब्ल्यूसीए (वूमन औक्सिलियरी कौर्प्स औफ इंडिया) के नाम से जानी जाती थी. उसे वीकी या विकाई कहते थे. विकाई की अधिकतर औरतें जवान होती थीं, जो सैनिक कार्यालयों में काम करती थीं.

इन में अधिकतर महिलाएं ईसाई होती थीं. उन का काम सेना के अधिकारियों को हर तरह से खुश करना होता था. जो अधिक सुंदर होती थीं, उन की पहुंच जनरलों तक होती थी. वे क्लबों में जाती थीं, औफिसर्स मेस में शराब और डांस में भाग लेती थीं.

मृतका भी जवान और सुंदर थी. उस की हत्या की बात सुन कर उस का पिता कलकत्ता से दिल्ली आया. उस ने जांच को देखा तो अनुमान लगाया कि यह काम थाने के वश का नहीं है. उस ने ही जीएचक्यू में अपनी पहुंच का प्रयोग कर के इस घटना की जांच स्पैशल स्टाफ को दिलवाई थी.

मैं और मैक्डोनाल्ड संबंधित थाने गए. थानेदार को हम ने बताया कि इस केस की जांच हम करेंगे, तो वह बहुत खुश हुआ. थाने में उस लड़की की फोटो देख कर मैक्डोनाल्ड बोला कि इस लड़की के लिए मैं वायसराय तक की हत्या कर सकता हूं.

मैं ने फोटो को ध्यान से देख कर कहा, ‘‘हत्यारा पागल था या लड़की ने उसे अस्थाई रूप से पागल कर दिया था. मुझे हैरानी है कि इस के साथ एक और आदमी की हत्या क्यों नहीं हुई.’’

थानेदार बोला, ‘‘हत्या 40 मील प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ती जीप कार में हुई थी और फायर उसी रफ्तार से दौड़ती कार से किया गया था. लड़की अगली सीट पर बैठी थी. जीप एक हिंदुस्तानी मेजर चला रहा था. पीछे से एक कार आई, उस में से रिवौल्वर की 2 गोलियां चलीं. गोलियां चलने के बाद कार आगे निकल गई.’’

थानेदार ने कहा, ‘‘दूसरी गोली शायद उस ने मेजर पर चलाई थी, लेकिन दोनों गोलियां लड़की को लग गईं.’’

थानेदार ने हमें उस मेजर का बयान भी सुनाया. हम ने पोस्टमार्टम की रिपोर्ट देखी और पूरा केस समझने के बाद कहा, ‘‘इस केस की जांच कोई हिंदुस्तानी थानेदार नहीं कर सकता, क्योंकि इस केस में फौजी अधिकारियों से मिलना होगा, जो हिंदुस्तानियों को अपना गुलाम समझते हैं. वे लोग केस में सहयोग भी नहीं कर रहे.

रौयल एयर फोर्स के अधिकारी ने थानेदार को डांट भी लगा दी थी. जीएचक्यू ने थानेदार को 2 गोरे दे दिए थे, जिस में एक सार्जेंट और दूसरा कारपोरल था. लेकिन भाषा की समस्या की वजह से वे भी सहयोग नहीं कर रहे थे. क्योंकि थानेदार अंगरेजी समझ तो लेता था, लेकिन बोल नहीं सकता था.’’

हत्या से संबंधित जो चीजें थाने में रखी थीं, उन में एक जीप, रिवौल्वर के 2 बुलेट जो मृतका के शरीर से पार हो कर जीप में गिरे थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, मृतका को बाईं ओर 2 गोलियां लगीं थीं और पार निकल गई थीं, जिस से उस की मौत हो गई थी. हत्या से पहले उस के साथ कोई मारपीट नहीं हुई थी. वह शराब पिए हुए थी, खाना उस ने 2 घंटे पहले खाया था.

हम ने थानेदार से जरूरी बातें पूछीं और तय किया कि हम थानेदार की रिपोर्ट पर ध्यान नहीं देंगे बल्कि अपनी अलग जांच करेंगे.

मैक्डोनाल्ड ने स्कौटलैंड यार्ड की ट्रेनिंग ली थी. मैं ने भी उस से बहुत कुछ सीखा. हम ने मिलिट्री पुलिस का सहयोग लिया और उन से कहा, ‘‘हमें एक ऐसा आदमी चाहिए जो होशियार हो और रातों को भी जाग सके.’’

ये भी पढ़ें- 3 साल बाद मिला इंसाफ

प्रोवोस्ट मार्शल ने हमें एक अंगरेज वारंट औफिसर दिया, जो मेहनती और बुद्धिमान था. इस के अतिरिक्त हमें फौजी छावनी में मिलिट्री पुलिस का एक अलग कमरा दिया गया, जिसे हम ने अपना औफिस बना लिया.

हम ने सब से पहले जीप अपने कब्जे में ले कर उस मेजर को बुलाया. जो घटना के समय जीप चला रहा था. मौके का गवाह वही था. मिलिट्री इंटेलिजेंस का वह अधिकारी मेजर डोगरा था. मैं अब तक देहातियों से पूछताछ करता रहा था, यह पहला अवसर था कि एक मिलिट्री इंटेलिजेंस अधिकारी से पूछताछ करनी थी. मेरे साथी इंसपेक्टर ने उस डोगरा मेजर से कहा, ‘‘आप मिलिट्री इंटेलिजेंस के अधिकारी हैं. घटना की कहानी इस तरह सुनाएं, जैसी आप किसी अपराधी से उम्मीद रखते हैं.’’

उस ने मृतका के बारे में बताया कि वह आजाद विचारों वाली अतिसुंदर एंग्लोइंडियन लड़की थी. वह अंगरेजी फौजी अधिकारियों में बहुत मशहूर थी. उस की रातें किसी न किसी क्लब या औफिसर्स मेस में गुजरती थीं. निर्लज्जता के साथसाथ वह चालाक भी थी.

हत्या की रात मृतका एक क्लब में किसी पार्टी में थी, वहां पर ज्यादातर अंगरेज और सिविल अफसर थे. डोगरा भी उसी पार्टी में था. शराब के साथ डांस चल रहा था. आधी रात के समय डोगरा मेजर बाहर निकला. अंदर चहलपहल थी, बाहर वीराना. उस ने देखा मृतका तेज चलती हुई उसी की ओर आ रही थी. तभी एक कमरे से रौयल एयर फोर्स का एक अफसर निकला, जो लड़की के पीछे आ रहा था.

लड़की डोगरा मेजर के पास आ कर बोली, ‘‘एक अफसर बातोंबातों में मुझे कमरे में ले गया और बोला मैं तुम्हारे साथ शादी करना चाहता हूं. मैं ने इनकार किया तो उस ने मुझे सोफे पर गिरा दिया. लेकिन मैं जैसेतैसे उस से बच कर निकल आई. वह बहुत शराब पिए हुए था.’’

मृतका डोगरा को कहानी सुना रही थी कि वह अफसर लड़खड़ाता हुआ आ गया और बोला, ‘‘तुम इंडियन हो, इस लड़की को मुझ से बचाने की कोशिश मत करो, नहीं तो मेरे हाथों मारे जाओगे. मैं यहां का सर्वेसर्वा हूं.’’

डोगरा ने कहा, ‘‘तुम इस समय इंडिया के राजा नहीं, पूरी दुनिया के राजा हो. यह लड़की सेना में लेफ्टिनेंट है, तुम इस के साथ जबरदस्ती नहीं कर सकते.’’

वह बोला, ‘‘अगर यह आर्मी में फील्ड मार्शल भी होती तो मेरा मुकाबला नहीं कर पाती. हम इंडिया के मालिक हैं.’’

लड़की बोली, ‘‘मैं तुम्हारे मुंह पर थूकती हूं. तुम्हारी यूनिट के बड़ेबड़े अफसर मेरे दोस्त हैं. तुम तो साधारण स्क्वाड्रन लीडर हो.’’

डोगरा ने उसे समझाया कि एक अधिकारी को ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए. उस ने कहा, ‘‘तुम क्या समझते हो, मैं इंग्लैंड से इंडिया को जापान से बचाने आया हूं. मैं इस देश के लिए मरने आया हूं लेकिन यहां की लड़की मुझे दुत्कार रही है. मैं इसे जान से मार दूंगा.’’

उस ने डोगरा के मुंह पर घूंसा मारा, फिर दोनों में हाथापाई शुरू हो गई. लड़की ने कहा, ‘‘तुम यहां से निकल जाओ, यह अंगरेज है, तुम्हारे ऊपर मनगढ़ंत आरोप लगा देगा.’’

डोगरा ने कहा, ‘‘तुम भी चली जाओ.’’

वह बोली, ‘‘मेरे पास गाड़ी नहीं है.’’

डोगरा मेजर ने जीप में लड़की को अगली सीट पर बिठाया और जीप को खुद ही ड्राइव कर के ले गया.

चलती जीप से उस ने पीछे देखा, एक गाड़ी उस का पीछा करती हुई आ रही थी. वह गाड़ी जीप के पास आ गई. उस गाड़ी की लाइट बुझ गई, इसी के साथ 2 गोलियां चलीं. लड़की की चीख सुनाई दी. वह बोली, ‘‘ही हैज शाट मी.’’

ये भी पढ़ें- विदेशी शोलों में झुलसते भारतीय : भाग 2

इतनी देर में गाड़ी की लाइटें जलीं और वह आगे निकल गई. मेजर ने देखा वह प्राइवेट कार थी. उस ने कार के नंबर देखे आखिर के 2 नंबर याद थे जो 66 थे. पहले 2 नंबर उसे याद नहीं रहे. शायद 23 थे या 83. वह लड़की को ले कर तुरंत अस्पताल पहुंचा, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

सेना पुलिस आई. लेकिन उस ने कोई सहायता नहीं की. उस ने केस सिविल पुलिस को दे दिया. थानेदार ने स्क्वाड्रन लीडर से कोई बयान नहीं लिया, क्योंकि उस ने थानेदार को डांट कर भगा दिया था.

हम ने डोगरा से पूछा, ‘‘क्या उस लीडर के पास रिवौल्वर था? उस ने आखिरी शब्द क्या बोले थे.’’

मेजर ने कहा, ‘‘मैं ने देखा नहीं कि उस के पास रिवौल्वर था. उस ने कहा था कि तुम दोनों को जिंदा नहीं छोड़ूंगा.’’

‘‘आप जब अपनी जीप की ओर आ रहे थे तो वह स्क्वाड्रन लीडर आप के पीछे था?’’

उस ने बताया, ‘‘वह बरामदे में खड़ा था और वहां 2-3 बैरे खड़े थे.’’

‘‘आप उस लड़की को अच्छी तरह जानते थे. उस लड़की से कोई शादी के लिए कहता होगा.’’

वह बोला, ‘‘ऐसी लड़कियों से कौन शादी करेगा. सब को पता है कि ये चरित्रहीन होती हैं.’’

‘‘आप इंटेलिजेंस अफसर हैं. आप ने ध्यान दिया होगा कि हत्यारा कौन हो सकता है.’’

वह बोला, ‘‘स्क्वाड्रन लीडर के अलावा और कोई नहीं हो सकता.’’

‘‘आप जरा दिमाग पर जोर दे कर बताएं, कोई ऐसा विवाहित जोड़ा है, जिन में पुरुष मृतका को चाहता हो और पत्नी ने उस की हत्या करवा दी हो.’

वह बोला, ‘‘ऐसा हो सकता है लेकिन मैं ऐसे किसी आदमी को नहीं जानता.’’

अगले दिन हम ने पुलिस हैडक्वार्टर से कहा कि पूरे शहर की कारों के नंबर देखे, जिस के आखिर में 66 हो, उस के मालिक का नाम और घर का पता नोट कर लें. डोगरा मेजर ने बताया था कि कार फोर्ड थी, लेकिन मौडल उसे याद नहीं रहा.

दूसरा काम हम ने यह किया कि एयर हैडक्वार्टर से उस स्क्वाड्रन लीडर का पता लिया, बताया गया कि वह पालम एयरपोर्ट के उस भाग में मिलेगा, जहां एयरफोर्स के जहाज रखे जाते हैं. हम एयर हैडक्वार्टर गए. वहां पता लगा कि वह स्क्वाड्रन लीडर अभी एक महीने पहले ही आया है लेकिन उसे कोई काम नहीं दिया गया. क्योंकि वह मानसिक रोग से पीडि़त है और एक अंगरेज डाक्टर उस का इलाज कर रहा है.

हम पहले उस डाक्टर से मिले और बताया कि हम एक लड़की की हत्या की जांच कर रहे हैं जो सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर थी. वह डाक्टर अपना काम छोड़ कर हमारे पास बैठ गया. मैक्डोनाल्ड ने उसे डोगरा मेजर का बयान सुना कर स्क्वाड्रन लीडर के इलाज के बारे में पूछा.

डाक्टर से पता चला कि वह स्क्वाड्रन लीडर लंदन में एक लड़ाका स्क्वाड्रन का कमांडिंग औफिसर था और उस ने अनगिनत जरमन जहाज गिराए थे. आखिरी लड़ाई में उस के जहाज में गोली लगी और उस जहाज से निकल नहीं सका. संयोग से उस का जहाज पानी में गिरा पर डूबा नहीं. लेकिन वह जहाज पानी में इतने तेज झटके से गिरा कि उस के दिमाग में चोट आ गई और वह जहाज से निकल कर तैरने लगा.

अगले दिन उसे एक ब्रिटिश गश्ती नाव ने बचा लिया. लंदन के एक अस्पताल में उस का इलाज हुआ. अस्पताल में कुछ दिन इलाज के बाद उस की यह कह कर छुट्टी कर दी गई कि यह शारीरिक तौर पर तो ठीक है, लेकिन कभीकभी उस का दिमाग थोड़ी देर के लिए अपना नियंत्रण खो देता है.

जब वह अपने घर गया तो उस का मकान खंडहर हो चुका था. उस की पत्नी और बच्चा मारे गए थे. वह अपनी यूनिट में नौकरी पर वापस आ गया, वहां उस ने कुछ ऐसे गलत काम किए जो अनदेखे नहीं किए जा सकते थे. पूछने पर उस ने बताया कि उस का दिमाग थोड़ी देर के लिए खराब हो जाता है.

मानसिक रोगों के डाक्टर ने कुछ दिन उस का इलाज किया फिर कह दिया कि कुछ देर के लिए उस का दिमाग काम नहीं करता, उसे यह भी पता नहीं रहता कि वह क्या कर रहा है.

इस का कारण घरेलू समस्या थी. उसे इलाज के लिए भारत भेजा गया. लेकिन यहां उसे कोई काम नहीं दिया गया, उसे मौजमस्ती की खुली छूट दी गई, लेकिन यहां भी कुछ देर के लिए उस का दिमाग खराब रहने लगा.

ये भी पढ़ें- हत्या: मासूम ने खोला बुआ, दादी का राज!

हम ने पूछा, ‘‘क्या बिगड़ी हालत में हत्या भी कर सकता है?’’

उस ने कहा, ‘‘कुछ कह नहीं सकते. लेकिन इस हालत में उसे अगर गुस्सा दिला दिया जाए तो वह हत्या भी कर सकता है.’’

‘‘औरत के मामले में उस का रवैया कैसा है?’’

‘‘जितने हवाबाज होते हैं, जब छुट्टी पर आते हैं तो शारीरिक संबंध बहुत बनाते हैं और इस में भी यह आदत है.’’

मैक्डोनाल्ड ने कहा, ‘‘हम उस से मिल रहे हैं. आप से अनुरोध है कि आप उस से इस तरीके से बात करें कि वह हत्या के बारे में कुछ बता दे.’’

डाक्टर ने कहा, ‘‘मैं उस से हत्या का पता लगा लूंगा और अगर उस ने हत्या की है तो मैं उसे बचा भी लूंगा.’’

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां

Tags:
COMMENT