धारा 370: किस तरफ चली कांग्रेस की धारा

कश्मीर में धारा 370 के हटने से वहां के लोगों का कितना भला या बुरा होगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी लेकिन कांग्रेस की धारा किस तरफ जा रही है, यह बड़ी चिंता की बात है. उस के नेता एक सुरताल में कतई नहीं दिख रहे हैं.

राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद को छोड़ कर और किसी गैर गांधी परिवार वाले को इस की कमान सौंपने का जो सपना देश की जनता को दिखाया था वह सोनिया गांधी को फिर से अंतरिम अध्यक्ष चुन कर तोड़ दिया गया है, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सोच से लबरेज भारतीय जनता पार्टी मजबूत होती जा रही है.

शनिवार, 10 अगस्त, 2019 को कांग्रेस हैडक्वार्टर में दिनभर मचे घमासान में अध्यक्ष का फैसला नहीं हो सका था. राहुल गांधी को मनाने की पुरजोर कोशिश हुई, पर वे अध्यक्ष न बनने पर अड़े रहे. इस के बाद कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में सोनिया गांधी को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष चुन लिया गया और राहुल गांधी का लंबित चल रहा इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया गया.

आज से कई साल पहले भारत की ज्यादातर जनता इस तरह की खबरों पर इतना ज्यादा ध्यान नहीं देती थी, लेकिन राजनीति से जुड़े लोग या विपक्षी दलों वाले ऐसे फेरबदल पर पैनी नजर रखते थे. चूंकि अभी कांग्रेस विपक्ष में है और राहुल गांधी किसी भी तरह से अपनी पार्टी में नई जान नहीं फूंक पा रहे थे इसलिए लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद उन्होंने तकरीबन ऐलान कर दिया था कि अगला अध्यक्ष कोई गैर कांग्रेसी होगा, ताकि जनता यह भरम अपने दिल से निकाल दे कि कांग्रेस का मतलब गांधीनेहरू परिवार ही है.

पर अफसोस, ऐसा हो न सका. पहले तो लोगों ने सोचा कि क्या पता राहुल गांधी ही अपनी जिद छोड़ देंगे या फिर वे प्रियंका गांधी के नाम पर सहमत हो जाएंगे. कुछ के दिमाग में यह भी चल रहा था कि शायद कांग्रेस किसी युवा चेहरे को जनता के सामने ले आए, पर जब कहीं कोई बात नहीं बनी तब सोनिया गांधी को कांटों का हार पहना दिया गया.

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कभी इंदिरा गांधी को ले कर हवा बनाई गई थी कि ‘इंदिरा इज इंडिया’ और अब आज ऐसा ही कुछ सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद महसूस हुआ है. लेकिन यह बात कांग्रेस के दोबारा फलनेफूलने में बड़ी बाधा साबित हो सकती है.

ऐसा कहने की एक बहुत बड़ी और खास वजह है. अभी जब भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने जम्मूकश्मीर से धारा 370 को हटाया तो इस ज्वलंत मसले पर भी कांग्रेस बंटी हुई दिखाई दी.

गुलाम नबी आजाद ने इस मुद्दे पर बड़ी बेबाकी से अपनी राय रखी थी और लगा था कि कांग्रेस अब इस मसले को हवा दे कर लोगों को यह बताने में कामयाब हो जाएगी कि जबरदस्ती के थोपे गए इस फैसले पर वह जनता के साथ है.

लेकिन बाद में इसी पार्टी के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत कई दूसरे नेताओं जैसे जनार्दन द्विवेदी, भुबनेश्वर कलिता, दीपेंद्र हुड्डा, मिलिंद देवड़ा, कर्ण सिंह और रंजीता रंजन ने धारा 370 पर केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन कर दिया था.

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट कर के कहा था कि जम्मूकश्मीर और लद्दाख को ले कर उठाए गए कदम और भारत देश में उन के पूरी तरह से एकीकरण का समर्थन करता हूं. संवैधानिक प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन किया जाता तो बेहतर होता.

कुछ साल पहले तक सोनिया गांधी के बेहद करीबी माने जाने वाले जनार्दन द्विवेदी ने तो दो हाथ आगे बढ़ कर इस मुद्दे पर कहा, ‘मैं ने राम मनोहर लोहियाजी के नेतृत्व में राजनीति शुरू की थी. वे हमेशा इस धारा के खिलाफ थे. आज इतिहास की एक गलती को सुधार लिया गया है.’

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भुबनेश्वर कलिता को कश्मीर मुद्दे को ले कर ह्विप जारी करना था लेकिन उन्होंने इस्तीफा दे दिया और कहा कि सचाई यह है कि देश का मिजाज पूरी तरह से बदल चुका है और यह ह्विप देश की जन भावना के खिलाफ है.

भुबनेश्वर कलिता ने जवाहरलाल नेहरू का भी जिक्र किया और कहा कि पंडितजी तो खुद धारा 370 के खिलाफ थे और उन्होंने कहा था कि एक दिन घिसतेघिसते यह खत्म हो जाएगी. आज कांग्रेस की विचारधारा से ऐसा लगता है कि पार्टी खुदकुशी करना चाहती है और मैं इस का भागीदार नहीं बनना चाहता हूं.

ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह राहुल गांधी के बेहद करीब माने जाने वाले हरियाणा के युवा कांग्रेसी नेता दीपेंद्र हुड्डा ने धारा 370 के मुद्दे पर कांग्रेस को गच्चा दे दिया. उन्होंने जम्मूकश्मीर से धारा 370 हटाने और राज्य को 2 केंद्रशासित प्रदेश के रूप में बांटने के सरकार के कदम का समर्थन करते हुए कहा कि यह फैसला देश की अखंडता और जम्मूकश्मीर के हित में है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह उन की निजी राय है.

कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद रंजीता रंजन ने कहा कि कांग्रेस पार्टी विपक्ष में है लेकिन विपक्ष में होने का मतलब यह नहीं है कि सरकार के हर फैसले का विरोध किया जाए. धारा 370 को हटना ही चाहिए. यह तो पहले से तय था कि धारा 370 को हटाना है. आज अगर उसे हटा दिया गया है तो यह सही फैसला है.

कांग्रेस नेता कर्ण सिंह ने धारा 370 के हटाए जाने पर कहा कि निजी तौर पर मैं इस फैसले के विरोध में नहीं हूं. इस के कई फायदे हैं. हालांकि, मैं इस को ले कर संसद द्वारा अचानक लिए गए फैसले से हैरान हूं. इस का अलगअलग लैवलों पर असर होगा, मेरी पूरे हालात पर नजर है. लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा दिए जाने का मैं स्वागत करता हूं.

साल 1965 में मैं ने खुद भी राज्य के पुनर्गठन की बात कही थी. नए परिसीमन के बाद पहली बार जम्मूकश्मीर रीजन में राजनीतिक शक्ति का सही से बंटवारा होगा.

युवा कांग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा ने इस मुद्दे पर कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि धारा 370 को उदार बनाम रूढि़वादी बहस में तबदील कर दिया गया. कांग्रेस पार्टी को अपनी विचारधारा से अलग हट कर इस पर चर्चा करनी चाहिए कि भारत की अखंडता और जम्मूकश्मीर में शांति बहाली कश्मीरी युवाओं को नौकरी और कश्मीरी पंडितों के न्याय के लिए बेहतर क्या है.

भारत पर इतने साल राज करने वाली कांग्रेस की इतनी बुरी हालत कभी नहीं हुई थी. अब जब भाजपा अपना राष्ट्रवादी एजेंडा देश पर थोप देना चाहती है तब अगर इस पार्टी के नेता यों अपने निजी विचार लोगों के सामने रखेंगे तो सोशल मीडिया के इस जमाने में कांग्रेस को और ज्यादा रसातल में जाने से कोई नहीं बचा पाएगा.

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नेताओं में विचारों की यह फूट सोनिया गांधी और राहुल गांधी के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ा रही है. सब से अहम सवाल तो यह है कि जो युवा नेता जैसे ज्योतिरादित्य सिंधिया, मिलिंद देवड़ा, दीपेंद्र हुड्डा राहुल गांधी के साथ जुड़ कर ताकतवर हो रहे थे, क्या वे उन के इस्तीफे के बाद कमजोर तो नहीं पड़ गए हैं या वे अपनेअपने राज्य के लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि देशहित से जुड़े धारा 370 के मुद्दे पर वे जनता की भावनाओं का सम्मान करते हैं, ताकि उन की सियासी जमीन न सरक जाए?

कांग्रेस के साथ दिक्कत यह रही कि जम्मूकश्मीर पुनर्गठन बिल पर वह भाजपा को दमदार तरीके से घेर न सकी. गुलाम नबी आजाद और शशि थरूर ने जरूर पार्टी के विचारों को जनता के सामने रखा था और जता दिया था कि देशभक्ति के नाम पर सरकार की मनमानी नहीं चलेगी, पर कांग्रेस के ही नेता अधीर रंजन चौधरी ने इसे भारत का आंतरिक मामला न कहते हुए पूरा खेल ही बिगाड़ दिया जिस से जनता को पता चलता कि क्यों कांग्रेस इस मसले पर अपना विरोध जाहिर कर रही है.

इस सब में एक बात और बेहद जरूरी है कि अब राहुल गांधी के भविष्य का क्या होगा? जो नेता उन के अध्यक्ष बनने के बाद हाशिए पर चले गए थे, वे सोनिया गांधी के दोबारा मजबूत होने से मन ही मन खुश हो रहे होंगे कि उन को अब दोबारा तवज्जुह मिलने लगेगी. अब तो राहुल गांधी के इस तरह अपने पद को छोड़ने के बाद उन की वापसी की राह भी मुश्किल हो जाएगी.

इस का सब से बड़ा फायदा अब प्रियंका गांधी को मिल सकता है, क्योंकि सोनिया गांधी के पास अब विकल्प के रूप में सिर्फ वे ही कांग्रेस का नया चेहरा बचती हैं. अगर सोनिया गांधी ज्यादा समय तक इसी तरह अंतरिम अध्यक्ष पद पर बनी रहीं तो फिर प्रियंका गांधी के लिए कांग्रेस की कमान संभालने में और ज्यादा आसानी रहेगी.

वैसे, अपने एक इंटरव्यू में कांग्रेस नेता शशि थरूर ने बताया कि किस तरह उन्होंने सुझाव दिया है कि चुनाव से कांग्रेस का अध्यक्ष तय किया जाए. उन्होंने इंगलैंड की कंजर्वेटिव पार्टी का उदाहरण देते हुए कहा कि उस की हालत हमारी पार्टी की हालत से भी कमजोर थी. उस हालत में उन्होंने जब चुनाव किया तो उस प्रक्रिया से लोगों के मन में भी कंजर्वेटिव पार्टी को ले कर दिलचस्पी जगी. कांग्रेस में भी ऐसा ही किया जाएगा तो पूरे देश का ध्यान कांग्रेस पर होगा कि कौन जीत रहा है, कौन हार रहा है. कार्यकर्ताओं को भी लगेगा कि अध्यक्ष उन्होंने तय किया है और इस से उन्हें मोटिवेशन मिलेगा.

इस के अलावा पिछले कुछ समय से कांग्रेस में जो गलतियां हुई हैं, उन से इस के नेताओं ने कोई खास सबक लिया नहीं है. उन्होंने सरकार के खिलाफ तो बहुतकुछ कहा, पर वे जनता तक अपना संदेश पहुंचाने में ज्यादा कामयाब नहीं रहे, जबकि भारतीय जनता पार्टी आज के समय में बहुत ज्यादा प्रोफैशनल हो चुकी है. उस के कार्यकर्ता बहुत ज्यादा संगठित हैं. मजबूत सोशल मीडिया सेल है. फंड भी बहुत ज्यादा बढ़ गया है. नरेंद्र मोदी अपनी मार्केटिंग बड़े जबरदस्त तरीके से करते हैं.

कांग्रेस ने इन बातों को हलके में लिया, जबकि उसे भी यह सब करना चाहिए था, लेकिन शायद कांग्रेस को लगा कि उसे मार्केटिंग की जरूरत नहीं है, क्योंकि उस की जनता में बहुत ज्यादा पैठ है और लोग नरेंद्र मोदी को जुमलेबाज समझ कर इन लोकसभा चुनावों में नकार देंगे, पर ऐसा हो न सका.

अब भारतीय जनता पार्टी ने जम्मूकश्मीर से धारा 370 हटा कर यह जताने की कोशिश की है कि वह जो कहती है, कर के दिखाती है. यह मुद्दा अब कांग्रेस से हैंडल नहीं हो पा रहा है, क्योंकि उस के कई नेता इस फैसले के पक्ष में दिखाई दिए हैं.

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कोढ़ पर खाज तो यह है कि कांग्रेस की इस सियासी बेमेल खिचड़ी को सोशल मीडिया भी चटकारे लेले कर खा रहा है. लोगों को भाजपा से उतना प्रेम नहीं है, जितनी कोफ्त कांग्रेस की वैचारिक टूट से हो रही है. मणिशंकर अय्यर और दिग्विजय सिंह जैसे दिग्गजों का मीडिया के सामने बचकाना रुख अपनाना जनता को कतई रास नहीं आ रहा है. कांग्रेस को इस का सब से ज्यादा नुकसान उन जगहों पर उठाना पड़ सकता है जहां आने वाले समय में राज्यों के विधानसभा चुनाव होने हैं.

लालबहादुर शास्त्री के बेटे और कांग्रेसी नेता अनिल शास्त्री ने धारा 370 को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस को चेताते हुए कहा, ‘कांग्रेस को अवश्य ही लोगों के मन को भांपना चाहिए और फिर कोई रुख अख्तियार करना चाहिए. इस मुद्दे पर लोग पूरी तरह से सरकार के साथ हैं. हम ने मंडल (कमीशन) का विरोध किया और उत्तर प्रदेश व बिहार को गंवा दिया और अब भारत को खोने का खतरा मोल नहीं लेना चाहिए.’

अनिल शास्त्री की यह देश गंवाने की चिंता जायज भी है क्योंकि अगर भाजपा अगले कुछ साल और इसी तरह देश पर राज करती रही तो वह राष्ट्रभक्ति के नाम पर ऐसेऐसे बड़े फैसले ले लेगी जो जनता को दिवास्वप्न में रखेंगे और जब तक जनता जागेगी तब तक चिडि़या खेत चुग चुकी होगी. शायद तब तक कांग्रेस की सियासी जमीन भी बंजर हो चुकी होगी, इसलिए कांग्रेस को अपने भीतर लगा यह आपातकाल जल्दी ही हटाना होगा.

दोस्त दोस्त ना रहा!

यह मामला है छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिला के पिथौरा थाना अंतर्गत ग्राम किशनपुर का. कैसा आश्चर्य है कि जिस मित्र के साथ नित्य का उठना बैठना था, घर आना जाना था, इंसान उसी की हत्या कर देता है आखिर ऐसा क्या हुआ? क्यों एक शख्स ने अपने ही मित्र की शराब पिलाकर हत्या कर दी आइए, आज आपको इस दर्दनाक घटनाक्रम से अवगत कराते हैं कि आखिर इस अपराध कथा में ऐसा क्या हो गया मशहूर गीतकार शैलेंद्र के लिखा गीत दोस्त दोस्त ना रहा …(फिल्म संगम) जीव॔त हो उठा .

दोस्त की पत्नी को छेड़ना पड़ा महंगा…

घटना के सम्बंध में पिथोरा थाना प्रभारी दीपेश जायसवाल ने हमारे संवाददाता को बताया कि मृतक दुर्गेश पिता कन्हैया यादव एवम आरोपी मनहरण उर्फ मोनो अच्छे दोस्त थे.मृतक दुर्गेश का मोनो के घर अक्सर आना जाना रहता था. परंतु दुर्गेश दोस्त की पत्नी को ही बुरी नजर से देखता था. एक दिन आरोपी की पत्नी सरोजा (काल्पनिक नाम) ने मोनो को उसके दोस्त दुर्गेश द्वारा उससे छेड़छाड़ करने की बात बताई. इसके बाद मोनो ने अपने दोस्त को ऐसा नही करने की नसीहत देते हुए समझाया था.

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परंतु विगत सप्ताह दुर्गेश पुनः मोनो के घर पहुच कर उससे छेड़छाड़ कर ही रहा था कि मोनो ने देख लिया.आरोपी मनहरण उर्फ मोनो द्वारा पुलिस को दिए बयान में बताया कि उक्त घटना के बाद से ही उसने दुर्गेश को ठिकाने लगाने की ठान ली थी और योजना बना कर विगत शनिवार को मोनो ने पहले ग्राम के समीप कन्टरा नाले में महुआ शराब बनाई और मृतक दुर्गेश यादव को शराब पीने नाला बुला लिया .जानकारी के अनुसार दुर्गेश के साथ उसका एक नाबालिग साथी सूरज भी आ धमका .

सभी शराब पीने के पहले मवेशियों के लिए चारा लेने निकले थे.चारा लेकर दोनों दोस्त दुर्गेश मोनो और नाबालिग सूरज ने मिल कर महुआ शराब पी.

इसके बाद सब वापस ग्राम जाने के लिए निकले. नाबालिग सूरज साइकल में चारा पीछे लेकर जा रहा था परंतु वह रास्ते मे ही अत्यधिक नशा होने के कारण गिर पड़ा। पीछे चल रहा दुर्गेश भी नशे में धुत्त था।वह भी सूरज को उठाते उठाते स्वयं भी वही गिर पड़ा. थोड़ी देर बाद ही दुर्गेश उठा और नशे की हालत में जिधर से वे आये थे वापस उसी दिशा में चल पड़ा और रास्ते मे पड़ने वाले तिरिथ राम के खेत मे ही गिर पड़ा. इसी स्थान पर मोनो ने पहले दुर्गेश को उसकी हत्या क्यो कर रहा है इसके बारे में बताया और उसका गला दबाकर उसकी हत्या कर दी.

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अपने दोस्त की हत्या करने के बाद वह घर आ पहुंचा और पत्नी को सारी घटना क्रम बयान कर नित्य के कामों में लग गया.

अंततः हत्या करना स्वीकारा

और जब दूसरे दिन गांव के एक व्यक्ति तीरथराम को अपने खेत में दुर्गेश की लाश मिली तो उसने पुलिस को इत्तला दी. पुलिस ने पंचनामा करने के बाद जांच प्रारंभ की और जांच प्रक्रिया पूछताछ में आरोपी मोनो ज्यादा देर टिक नही पाया और अंततः उसने अपना अपराध कबूल कर लिया.

और पुलिस इकबालिया बयान में बताया कि उसने अपने मित्र की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी, क्योंकि वह उसकी पत्नी सरोजा पर बुरी निगाह रखने लगा था,छेड़छाड़ करने लगा था. उसने उसे एक दफे समझाया भी था. बहरहाल स्थानीय पुलिस मनहरण उर्फ मोनो को रिमांड में जेल भेज दिया है.

सेक्स और नाते रिश्तों का टूटना

समाज में आज दिनोंदिन अपराधिक घटनाएं बढ़ती चली जा रही है. अक्सर हम देखते हैं की हत्या का कारण जर जोरू जमीन के इस ट्रायंगल में जोरू अधिकांश रहता है.पत्नी अथवा प्रेमिका के कारण अपराध निरंतर घटित हो रहे हैं. समाज का कोई ऐसा तंतु नहीं है जो इसे रोक सके थाम सके.

इस संदर्भ में सच्चाई यह है कि उपरोक्त हत्याकांड में अपराध घटित होने का सबसे अहम कारण है दुर्गेश का शराब पीकर अपने मित्र मनहरण की पत्नी को पाने का प्रयास करना और जब सरोजा ने सारा घटनाक्रम पति के समक्ष उजागर कर दिया और मनहरण ने दुर्गेश को समझाइश दी इसके बावजूद दुर्गेश अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो अंततः अपने सम्मान और पत्नी की इज्जत बचाने के लिए मनहरण ने अपने ही बचपन के मित्र दुर्गेश की गला घोटकर हत्या कर दी.

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ऐसी अनेक घटनाएं हमारे आसपास समाज में घटित हो रही हैं अगर कोई व्यक्ति बहक जाता है उसके पांव बहक जाते हैं उसका भी अंजाम अंततः ऐसे ही घटनाक्रम में जाकर समाप्त होता है. अच्छा होता मृतक अपनी मर्यादा में रहता, तो संभवतः यह घटनाक्रम घटित ही नहीं होता . जब जब कोई मित्र दुर्गेश की तरह आचरण करता है तो वह मौत का सामना करता है या फिर चौराहे पर पीटा जाता है.

मुख्यमंत्री रोहरानंद चले विदेश!

कहानी-हास्य

दोस्तों! तकदीर सबकी यूं ही नहीं खुलती,अब देखो आप और मैं, हम में कितना अंतर है .आप आम आदमी हैं, मैं भाग्य से मुख्यमंत्री हूं.आपने व्होट दिया, आप अगर वोट न देते,तो मैं मुख्यमंत्री भला कैसे बनता ? मगर, आप प्रदेश की तरक्की में अपनी भूमिका निभाईये मैं रोहरानंद मुख्यमंत्री, आपके व्होट की बदौलत दुनिया जहान के सुख भोग रहा हूं… मैं अमेरिका जा रहा हूं .हे! मतदाताओं…!! मैं आपको बताकर, अधिकारपूर्वक विदेश जा रहा हूं. आपने अपना कर्तव्य, ईमानदारी से निभाया है. आपने अपने बहुमूल्य मत का उपयोग किया, विधायक चुने, फिर विधायकों ( माफ करिए आलाकमान, पार्टी ) ने मुझे अपना वफादार सेवक माना और मैं मुख्यमंत्री बन गया. प्रदेश का मुखिया बनने के पश्चात, हालांकि आपकी और हमारे बीच की दूरियां बढ़ गई हैं. यह स्वभाविक है. यही लोकतंत्र है, जैसे ही मैं मुख्यमंत्री बना मेरी अंतरात्मा ने करवट बदली… मैं विशिष्ट बन गया .अब मैं आपसे दूर दूर रहता हूं. आप मुझसे सीधे नहीं मिल सकते.

दोस्तों…! यह सच है, कि मैंने कभी स्वपन में भी कल्पना नहीं की थी, कि मैं कभी मुख्यमंत्री बन जाऊंगा. मैं साफगोई से स्वीकार करता हूं कि मेरी तो लॉटरी ही निकल आईं है.मेरे इस सत्य स्वीकारोक्ति का प्लीज बतंगड़ मत बनाना. मैं स्पष्ट शब्दों में साहस के साथ कहना चाहूंगा कि मैं मुख्यमंत्री बनते ही, आप लोगों से बहुत बहुत दूर हो गया हूं. रूपक स्वरूप इस तरह समझे जैसे मनुष्य से चांद दूर है,जैसे आम आदमी से अमेरिका दूर है. मगर मैं ईमानदार इंसान हूं. राजनीतिज्ञ की बात में नहीं करता . राजनीतिज्ञ के रूप से मेरे चेहरे पर अनेकानेक मुखोटे लगे हुए हैं.

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हे मतदाताओं..!में यह कहने में कोई गुरेज नहीं करता कि आप भी जब मुख्यमंत्री बन जाएं तब मेरी ही तरह खूब सुख भोगना. जैसे मेरी फितरत देख रहे हो न… वैसी करना. कुर्सी की सौगंध मैं एक बार भी कुछ नहीं बोलूंगा. मैं बुरा भी नहीं मानूंगा.आप मेरी ही तरह जनता जनार्दन से दूर दूर रहना और पद की गरिमा को मेंटेन करना, तब मैं आम आदमी रहूगां, मगर मैं बुरा नहीं मानूंगा. आज जैसे आपके साथ मैं व्यवहार कर रहा हूं आप करना सच में बुरा नहीं मानूंगा .मैं मिलने आऊंगा, आप के चरण स्पर्श करूंगा तब मेरी और देखना भी मत. बस…

दोस्तों! मुख्यमंत्री बनने के बाद यह रोहरानंद परिपक्व हुआ है .बहुतेरी बातों को मैंने समझा है , जिसको आपसे शेयर करने में मुझे कोई संकोच नहीं है .मैं जान गया हूं यह परम सत्य है कि जैसे यह जीवन भाग्य से मिलता है, वैसे ही लोकतंत्र में भाग्य से मैं मुख्यमंत्री बन गया हूं. और जब भाग्य ने साथ दिया है तो क्यों न मैं जीवन का हर सुख भोग लूं. फिर पता नहीं मौका मिले या न मिले. मैं यह सत्य जान गया हूं कि मेरे कई सीनियर टापते रह गए . मेरे कई जूनियर इंतजार कर रहे हैं कि छींका कब टूटे.

हे मतदाताओं … इस जीवन दर्शन के पश्चात मै अमेरिका जा रहा हूं. मैं मुख्यमंत्री रहते रहते चीन, ब्रिटेन, रूस, जापान, जर्मनी अर्थात दुनिया के संपूर्ण 189 देशों को घूम लेना चाहता हूं . यही नहीं स्वीटजरलैंड मैं अवश्य जाऊंगा, बारंबार जाऊंगा क्योंकि इस देश से मैं कुछ ज्यादा ही प्रेम करता हूं. क्योंकि यहां एक से एक बैंक है. यहां मैं खाता भी खुलवाना चाहूंगा.क्योंकि हम उच्च श्रेणी के मुख्यमंत्रियों के मध्य अक्सर यह शिगुफा चलता है कि जिस मुख्यमंत्री का स्विजरलैंड में बैंक अकाउंट नहीं है, भला वह भी कोई मुख्यमंत्री है .तो मैं इसे ठीक करूगा. क्योंकि इज्जत का सवाल तो आपका है न. लोग क्या कहेंगे, कैसे लोग हैं इनके मुख्यमंत्री का एक अदद खाता भी स्विजरलैंड में नहीं है.

दोस्तों… मैं मुख्यमंत्री बनकर खुद तो दुनिया घूम ही रहा हूं,मुझे यह बताते काफी हर्ष हो रहा है कि मैं परिवार, धर्म पत्नी और बच्चों को भी घुमा रहा हूं. अगर मेरे मन में चोर होता तो यह सच्चाई में कदापि नहीं बताता. छुपकर सपरिवार चला जाता,आप ( तुम ) क्या कर लेते ? मगर मैं एक साफ दिल मुख्यमंत्री हूं अतः जो भी करता हूं आप सभी को स्पष्ट बता कर करता हूं. क्योकि मैं जानता हूं बताऊंगा तो भी मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते, क्योंकि संवैधानिक रूप से मैं मुख्यमंत्री हूं ।और मुझे आपके हित में कोई भी निर्णय लेने का पूर्ण अधिकार है. वह इस तरह, कि मैं जिस परंपरा का पालन कर रहा हूं वह पूर्ववर्ती है,और आप के भले के लिए है, कल आप भी सपरिवार जा सकेंगे.

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हे मतदाताओं! में अमेरिका जा रहा हूं… मैं अपना जन्मदिन अबकी वही मनाऊंगा. देखो, यहां मनाता तो क्या आनंद आता ? जिंदगी भर तो यही धूल धक्कड़ खाता रहा हूं .समय मिला है, उसका भरपूर लाभ उठाना ही बुद्धिमत्ता है .यहां रखा क्या है ? अमेरिका में जीवन है, सुख है ऐश्वर्य है. मैं तो कहता हूं जिसने अमेरिका में जन्म दिवस नहीं मनाया वह जन्मा ही नहीं है.

दोस्तों ! बतौर मुख्यमंत्री, मैं अमेरिका जा रहा हूं….मैं जा रहा हूं …अर्थात प्रदेश का हर नागरिक जा रहा है.आखिरकार में प्रत्येक नागरिक का प्रतिनिधित्व ही हूं. मै आनंद उठाऊंगा,मैं समझूंगा मेरे प्रदेश के प्रत्येक नागरिक ने सदुपयोग किया. मैं मुख्यमंत्री के रूप में बेशकीमती सुख, सुविधाओं का उपयोग करूंगा समझूंगा मेरे मतदाता भी मेरे साथ आनंद उठा रहे हैं.देखिए मेरा हृदय कितना विशाल है. हे मतदाताओं… में बड़ा ही सहृदय मुख्यमंत्री हूं. आशा है आप भी सहृदयता का परिचय देंगे. जब दूरदर्शन, टीवी और समाचार पत्रों में मेरे अमेरिका दौरे की खबर पढेंगे, तो उसे सकारात्मक दृष्टि से लेंगे.

शेष फिर ( तुम्हारा ) रोहरानंद.

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हौलीवुड की ‘वंडर वुमन’ के साथ काम करेगा ये बौलीवुड हीरो

‘‘फास्ट एंड फ्यूरियस 7’’ और ‘‘विक्टोरिया एंड अब्दुल’’ जैसी अंतरराष्ट्रीय ख्याति और औस्कर पुरस्कृत फिल्में करने के बाद अब बौलीवुड एक्टर अली फजल हौलीवुड फिल्म ‘‘डेथ औन द नाइल’’ में नजर आएंगे. फिल्म ‘‘विक्टोरिया एंड अब्दुल’’ में अली फजल ने विश्व प्रसिद्ध ब्रिटिश अदाकारा जूडी डिंच के साथ अभिनय किया था, तो वहीं वह अपकमिंग हौलीवुड फिल्म ‘‘डेथ औन द नाइल’’ में ‘वंडर वुमन’ के रोल से मशहूर हुई अदाकारा गैल गैडोट के साथ मुख्य किरदार में नजर आएंगे.

34 साल की गैल गैडोट मूलत इजरायली एक्ट्रेस, मौडल, गायक, मार्शल आर्ट एक्सपर्ट है, जो कि दो साल तक ‘इजरायली डिफेंस फोर्स’ में कोम्बाट प्रशिक्षक के रूप में कार्य कर चुकी हैं. उन्होंने सबसे पहले 2009 में ‘फास्ट एंड फ्यूरिस’ में अभिनय किया था, जिसकी सातवीं सीरीज में अली फजल ने अभिनय किया. अब तक वह 15 फिल्में कर चुकी हैं.

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केनेथ ब्रानघ निर्देशित फिल्म ‘‘डेथ औन द नाएल’’, मशहूर ब्रिटिश लेखक अगाथा क्रिस्टी के मशहूर उपन्यास ‘‘डेथ औन द नाइल‘ का आधुनिक एडप्टेशन है. निर्देशक केनेथ ब्रानघ इससे पहले ‘थोर सीरीज’, ‘हैमलेट’,‘ऐज यू लाइक इट’,‘मर्डर ऑन द ओरिएंट एक्सप्रेस’ सहित कई बेहद लोकप्रिय व सफल फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं.

अगाथा क्रिस्टी के उपन्यास ‘‘डेथ औन द नाइल’’ की कहानी इजिप्ट की नील नदी में एक क्रूज शिप पर होने वाले कुछ रहस्यमय घटनाक्रमों, हत्या और उसके बाद उसकी जांच की है. जैसे जैसे जांच आगे बढ़ती है, वैसे वैसे कई लोग शक के दायरे में आते हैं. पर अचानक एक के दायरे में आने वाले कुछ लोगों की मौत के साथ रहस्य और अधिक गहरा जाता है.

फिल्म का निर्माण ‘‘ट्वेटीथ सेंचुरी फौक्स’’कर रहा है, जो कि पहले मल्टीस्टारर फिल्म ‘‘मर्डर औन द ओरिएंट’’ सहित कई सफल फिल्मों का निर्माण कर चुका है.

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इस पर अली कहते हैं-‘‘ “जी हां, मैं भी इस वंडरफुल जर्नी का हिस्सा हूं और मैं इसका हिस्सा बनने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं. मैं और मेरी मां हमेशा से अगाथा क्रिस्टी के उपन्यास की फैन रही हैं.”

वैसे अगाथ क्रिस्टी का उपन्यास ‘‘डेथ औन द नाइल’’ 1937 में प्रकाशित हुआ था और इस उपन्यास पर इसी नाम से सबसे पहले 1978 में बेट्टे डेविस, मैगी स्मिथ, मिया फैरो, जैसे लीजेंड्स के साथ ‘डेथ औन द नाइल‘ फिल्म बनाई गई थी, जिसका निर्देशन जौन गिल्लेरमिन ने किया था. इसके अलावा इसी उपन्यास पर इसी नाम से 2004 में सीरियल बनी थी. फिल्म व सीरियल दोनों को जबरदस्त सफलता मिली थी..

इस फिल्म की शूटिंग सितंबर माह के अंत में लंदन और यूरोप के कुछ हिस्सों में शुरू होगी.

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एडिट बाय- निशा राय

सपना चौधरी का ऐसा डांस देख फैंस बोले वन्स-मोर, वीडियो वायरल

हरियाणा की मशहूर डांसर सपना चौधरी लाखो दिलों की जान बन चुकी हैं. सपना चौधरी  ने अब तक कई स्टेज शो किए है और हर स्टेज शो में वे अपने डांस से फैंस का दिल जीतने में कामयाब रही हैं. सपना का हर हांस वीडियो इंटरनेट पर बड़ी ही तेज़ी से वायरल होता है और हर बार की तरह इस बार भी उनके लेटेस्ट डांस वीडियो ने तबाही मचा दी है. हाल ही में हुए सपना चौधरी के स्टेज शो में उनका डांस फैंस लोग पागल हो गए.

फैंस ने की वन्स मोर की रिक्वेस्ट…

सपना चौधरी इस वीडियो में ऐसा डांस कर रही हैं जिसे देख लोगो ने अपने होश खो दिए और उनके डांस में ही झूम उठे. इस दौरान अनके फैंस ने उन्से एक बार फिर डांस करने रिक्वेस्ट की और हर बार उनके फैंस वन्स मोर-वन्स मोर कहते गए. सपना चौधरी की फैन फौलोविंग देख हर कोई हैरान रह जाता है और उनकी इतनी ज्यादा फैन फौलोविंग का राज़ उनके डांस का टेलेंट ही तो है. सपना को अपने फैंस को खुश करना अच्छे से आता है और सिर्फ खुश करना ही नहीं बल्कि वे अपने फैंस को अपने साथ नचाना भी अच्छे से जानती हैं.

 

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जोश में ठुमके लगाती दिखीं सपना चौधरी…

सपना चौधरी जिस अंदाज में डांस करती हैं वे वाकई में काबिल-ए-तारीफ है. उनका इतना जोश देख हर कोई हैरान रह जाता है और उनके इसी जोश के साथ वे फैंस को सब कुछ भुला कर अपने डांस में खोने पर मजबूर कर देती हैं. उनके इस नए डांस वीडियो में वे काफी जोश में ठुमके लगा रही हैं और उनके ठुमके लगाने के अंदाज ने तो हर किसी को पागल किया हुआ है. सपना जैसे ही स्टेज हर डांस करने उतरती हैं, उसी समय उनके फैंस उनकी वीडियो बनाने में ज़रा भी देर नही करते, और शायद यही कारण है कि उनकी हर वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल जाती है.

 

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फैन फौलोविंग के चलते आईं बिग बौस में नज़र…

बता दें, सपना चौधरी ने अपनी फैमिली को सपोर्ट करने के चक्कर में बहुत ही छोटी उम्र से नाचना और गाना शुरू कर दिया था और फिर उन्होने अपने टेलेंट के दम पर काफी फैन फौलोविंग हासिल की. सपना की फैन फौलोविंग इतनी बढ़ गई थी कि उन्हें कलर्स टी.वी के सबसे बड़े रीएलिटी शो बिग बौस सीजन 11 में आने का मौका मिला और वहां भी सपना ने दर्शको को काफी एंटरटेन किया.

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मेकअप रुम में इस गाने पर झूमती दिखीं हिना खान, देखें वीडियो

स्टार प्लस के खासा पौपुलर सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में अक्षरा का रोल अदा करने वाली एक्ट्रेस हिना खान सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं, और सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने की वजह से ही वे अपने फैंस के साथ जुड़ी रहती हैं. देखा जाए तो यह समय हिना खान के लिए काफी अच्छा चल रहा है और वे एक के बाद एक सफलता की सीढियां चड़ती जा रही हैं और साथ ही अपनी लाइफ खुलकर एंजौय करती नजर आ रही हैं.

हाल ही में हिना खान ने अपनी अप्कमिंग फिल्म ‘हैक्ड’ की शूटिंग शुरू की है और इसी फिल्म के सेट से वे कई फोटोज और वीडियो सोशल मीडिया पर अपने फैंस के साथ शेयर कर रही हैं. हिना ने सब कुछ ध्यान मे रखते हुए इस फिल्म के लिए अपना नया शेड्यूल बनाया है और इसी के साथ ही वे आज सुबह ही फिल्म की शूटिंग के लिए निकली हैं. इस सफर के दौरान उनका साथ उनकी गाड़ी से लेकर उनके मेकअप रूम तक कई खूबसूरत गानें ने दिया पर इन सब में से एक गाना ऐसा था जिसे सुन कर हिना अपना दिल खो बैठी.

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जिस गोने ने हिना खान का दिल जीत लिया उस गाने का नाम है ‘ए जिंदगी गले लगा ले’ जो कि श्रीदेवी और कमल हासन की सुपरहिट फिल्म ‘सदमा’ से है. इस गाने को हिना ने कई बार सुना और इसी गाने पर उन्होने कई वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर शेयर की. इन वीडियो से साफ पता चलता है कि हिना खान को गाने सुनना काफी पसंद है और खास तौर पर जब गाने पुराने हों. हिना अपने इस वीडियो में ‘ए जिंदगी गले लगा ले’ गाने पर खूब मस्ती में झूमती दिखाई दे रही हैं.

बता दें, हिना खान साल 2020 में दो फिल्मो में नजर आने वाली हैं जिसमें से एक फिल्म का नाम है ‘हैक्ड’ और दूसरी फिल्म का नाम है ‘द कंट्री औफ ब्लाइंड’ तो अब देखने वाली बात ये होगी कि, क्या हिना खान बड़े पर्दे पर भी अपने जलवे बिखेरने में कामयाब हो पाएंगी या नही. हिना ने छोटे पर्दे पर कई रिएलिटी शो में भी भाग लिया है जैसे कि, ‘बिग बौस’ सीजन 11 और ‘खतरो के खिलाड़ी’ सीजन 8.

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शर्मनाक: रिमांड होम अय्याशी के अड्डे

समाजसेवा के नाम पर चलाए जा रहे आश्रयगृहों यानी रिमांड होम को सरकारी अफसरों और सफेदपोशों ने एक तरह का चकलाघर बना कर रख दिया है. इस के चलते अपनों से बिछड़ी और भटकी मासूम बच्चियां और आपराधिक मामलों में फंसी महिलाएं बंदी समाज के रसूखदारों की घिनौनी हरकतों की वजह से जिस्मफरोशी के दलदल में फंस कर रह जाती हैं.

कई लड़कियों ने बताया कि उन्हें नशे की हालत में ही जहांतहां भेजा जाता था. बेहोशी की हालत में उन के साथ क्याक्या किया जाता था, इस बारे में उन्हें कुछ पता नहीं चलता था. उन्हें बस इतना ही पता चलता था कि उन के पूरे बदन में भयानक दर्द और जलन होती थी.

पटना के गायघाट इलाके में बने महिला रिमांड होम (उत्तर रक्षा गृह) में कुल 136 बंदी हैं. उन के नहाने और कपड़े धोने की बात तो दूर, पीने के पानी का भी ठीक से इंतजाम नहीं है. कमरों में रोशनी और हवा का आना मुहाल है. तन ढकने के लिए ढंग के कपड़े तक मुहैया नहीं किए जाते हैं. इलाज का कोई इंतजाम नहीं होने की वजह से बीमार संवासिनें तड़पतड़प कर जान दे देती हैं.

पिछले साल टाटा इंस्टीट्यूट औफ सोशल साइंसेज, मुंबई की रीजनल यूनिट ने बिहार के 110 सुधारगृहों और सुधार केंद्रों का सर्वे किया था. उस सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ था कि 3 केंद्र मानवाधिकार का उल्लंघन कर रहे थे, जिस में मुजफ्फरपुर का बालिका सुधारगृह भी शामिल था. इस के अलावा मोतिहारी और कैमूर सुधार केंद्रों में भी मानवाधिकार के उल्लंघन का मामला सामने आया था.

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ताजा मामला यह है कि पटना के उत्तर रक्षा महिला सुधारगृह, गायघाट में बंगलादेश की 2 लड़कियां पिछले 4 सालों से बंद हैं. ढाका की रहने वाली मरियम परवीन और मौसमी को रेलवे पुलिस ने पटना जंक्शन पर गिरफ्तार किया था. वे मानव तस्करों के चंगुल में फंस गई थीं और किसी तरह भाग निकली थीं. बिहार सरकार की ओर से अब तक उन्हें वापस उन के देश भेजने का कोई इंतजाम नहीं किया गया है.

मरियम परवीन ने बताया कि बंगलादेश की ही लैला नाम की एक औरत नौकरी दिलाने का झांसा दे कर उसे नेपाल ले गई थी. बाद में पता चला कि वह दलालों के चंगुल में फंस चुकी है. एक दिन मौका लगते ही वह भाग निकली. इन दोनों लड़कियों के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है, इस के बाद भी ये पिछले 4 सालों से रिमांड होम में रहने के लिए मजबूर हैं.

समाज कल्याण विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, रिमांड होम के गेट के भीतर पुरानी और दबंग कैदियों का राज चलता है. उन की बात न मानने वाली कैदियों की थप्पड़ों, लातघूंसों और डंडों से पिटाई तक की जाती है, तो कभी खाना बंद करने का फरमान सुना दिया जाता है.

कुछ साल पहले एक ऐसी ही संवासिन पिंकी ने तो गले में फंदा लगा कर खुदकुशी कर ली थी. पिंकी की चीख रिमांड होम के अंधेरे कमरों की दीवारों में घुट कर रह गई थी. आज तक उस की मौत के गुनाहगारों का पता ही नहीं चल सका है.

गौरतलब है कि पटना के रिमांड होम में प्रेम प्रसंग के मामलों में 34 लड़कियां बंद हैं. बिहार के किशनगंज जिले की रहने वाली लड़की बेबी पिछले 22 महीने से रिमांड होम में कैद है. उस का गुनाह इतना ही है कि उस ने दूसरे धर्म के लड़के से प्यार किया. उस के घर वालों ने पहले तो उसे समझाया, पर वह अपने प्यार को पाने की जिद पर अड़ी रही तो आखिरकार गुस्से में आ कर बेबी के घर वालों ने उस के प्रेमी को मार डाला. उस के बाद लड़के के परिवार ने बेबी समेत उस के समूचे परिवार को हत्या का आरोपी बना दिया.

बेबी सिसकते हुए कहती है कि जिस से मुहब्बत की और साथ जीनेमरने की कसमें खाई थीं, उसे वह कैसे मार सकती है?

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पिछले साल बिहार के मुजफ्फरपुर शहर के बालिका बाल सुधारगृह में बच्चियों के जिस्मानी शोषण के मामले का भंडाफोड़ हुआ था. सेवा, संकल्प एवं विकास समिति नाम की संस्था की ओट में जिस्मफरोशी का धंधा चलता था.

इस संस्था के संचालक ब्रजेश ठाकुर ने अपने घर, प्रिंटिंग प्रैस और बालिकागृह के बीच राज भरी दुनिया बना रखी थी. सीबीआई की टीम जब मुजफ्फरपुर के साहू रोड पर बने उस के घर पर पहुंची तो सीढि़यों की बनावट देख कर हैरान रह गई.

बालिकागृह में 4 सीढि़यां मिलीं और सभी बालिकागृह के मेन भवन तक पहुंचती हैं. एक सीढ़ी प्रिंटिंग प्रैस वाले कमरे में निकलती थी, एक उस के घर की ओर निकलती थी. मकान की तीसरी मंजिल को बालिका सुधारगृह बनाया गया था.

सांसद रह चुके पप्पू यादव साफतौर पर कहते हैं कि मुजफ्फरपुर के बालिका सुधारगृह की मासूम बच्चियों को रसूखदार लोगों के पास ‘मनोरंजन’ के लिए भेजा जाता था. छापेमारी के बाद पता चला कि पीडि़त लड़कियों की उम्र 6 से 15 साल के बीच है, जिन में से 13 लड़कियों की दिमागी हालत ठीक नहीं है.

पुलिस सूत्रों की मानें तो जांच के दौरान यह खुलासा होने लगा है कि कई बच्चियों को नेताओं और अफसरों के पास भेजा जाता था. बालिकागृह में भी हर शुक्रवार को महफिल सजती थी, जिस में कई सफेदफोश और वरदीधारी शामिल होते थे.

कुछ ऐसा ही धंधा पटना की ‘पेज थ्री क्वीन’ कही जाने वाली मनीषा दयाल और उस का पार्टनर चितरंजन भी चला रहा था. मनीषा दयाल की एनजीओ अनुमाया ह्यूमन रिसर्च फाउंडेशन को आसरा होम के संचालन का जिम्मा कैसे मिला, इस के पीछे भी बड़ी कहानी है. आसरा होम का काम मिलने से पहले मनीषा ने बदनाम ब्रजेश ठाकुर द्वारा चलाए जा रहे शैल्टर होम का मुआयना किया था. ब्रजेश ठाकुर की पैरवी से ही मनीषा दयाल को आसरा होम चलाने की जिम्मेदारी समाज कल्याण विभाग ने दी थी.

पटना के राजीव नगर की चंद्रविहार कालोनी के नेपाली नगर में मनीषा दयाल का आसरा होम चलता था. आसरा होम को मिलने वाली सरकारी मदद की रकम में चितरंजन और मनीषा दयाल बड़े पैमाने पर हेराफेरी करते थे.

आसरा होम को चलाने के लिए सरकार की ओर से हर साल 76 लाख, 80 हजार, 400 रुपए देने का करार किया गया था. साल 2018-19 के लिए अब तक 67 लाख रुपए मिल चुके थे.

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आसरा होम के नाम पर करोड़ों रुपए जुटाने वाली मनीषा दयाल इतनी बेदर्द थी कि वह आसरा होम में रहने वाली औरतों और लड़कियों को ठीक से खाना तक नहीं देती थी. उस की गिरफ्तारी के बाद आसरा होम में रहने वाली संवासिनों की मैडिकल जांच की गई तो वे सभी कुपोषण की शिकार निकलीं.

डाक्टरों का कहना है कि इन संवासिनों की नाजुक हालत को देख कर यही लगता है कि इन्हें सही तरीके से खाना और पानी भी नहीं दिया जाता था.

महिला बंदियों को ले कर सोच बदलें :

सुषमा साहू राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुषमा साहू कहती हैं कि औरतों को सताने के मामलों में कहीं कोई कमी नहीं आई है. जेल और रिमांड होम की अंदर की बात तो दूर घरों में औरतों के साथ अच्छा रवैया नहीं अपनाया जाता है. वे मानती हैं कि जेलों और रिमांड होम में बंद कैदियों को दोबारा बसाने की सब से बड़ी समस्या है. ऐसी कैदियों को ले कर समाज की सोच बदलने की जरूरत है. उन्हें हुनरमंद बनाना होगा, तभी वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकेंगी. इस के लिए कई योजनाएं बनाई गई हैं और जल्दी ही इस का असर भी दिखाई देने लगेगा.

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कहानी सौजन्य– मनोहर कहानियां

पीएम की लाइफ पर भोजपुरी फिल्म बनायेंगे सुपर स्टार रवि किशन

भोजपुरी फिल्म के सुपरस्टार और वर्तमान में गोरखपुर के सांसद रवि किशन जल्द ही भारत के प्रधानमंत्री के रोल में नजर आयेंगे. इसके लिए वह खुद ही फिल्म बनाने की तैयारी में है. उन्होंने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर पटना में भाजपा कार्यालय में पहुंच कर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा की वह देश की अलग-अलग भाषाओं में 600 के करीब फिल्मों में काम कर चुके है. लेकिन आने वाले दिनों में वह जिन महापुरुषों में से प्रेरित है उनके जीवन पर फिल्में बनाने वाले है. वह प्रधानमन्त्री मोदी व स्वामी विवेकानंद पर फिल्म बनाने पर विचार कर रहें हैं. जिसमें वह खुद ही प्रधानमंत्री रोल करने वाले हैं.

उन्होंने कहा कि बिहार का उनके ऊपर बड़ा कर्ज है जिसे वह चुका नहीं पायेंगे. क्योंकि उनकी जो भी पहचान है उसमें बिहार के दर्शकों और उनके प्रशंसकों का बड़ा योगदान है. मल्टीप्लैक्स में भोजपुरी फिल्मों के प्रदर्शन न हो पाने के एक सवाल पर उन्होंने कहा की सिनेमाघरों में भोजपुरी फिल्मों का प्रदर्शन कम हो रहा है. इसके लिये उन्होंनें राज्य सरकार से मल्टीप्लैक्स में भी भोजपुरी के एक शो दिखाए जाने की मांग की है. जिससे भोजपुरी फिल्मों को बढ़ावा मिलेगा और भोजपुरी के दर्शक भी मल्टीप्लेक्स में भोजपुरी फिल्मों को देखने का मजा ले सकेंगे.

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इस दौरान बिहार सरकार द्वारा भोजपुरी फिल्मों को बढ़ावा दिए जाने के नजरिये से शुरू किये गए राज्य सरकार के 25 लाख रूपये के अनुदान की भी सराहना की. उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में अवार्ड दिए जाने की शुरुआत किये जाने को लेकर कहा की इससे भोजपुरी कलाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा.

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है की वह सांसद बनने के फिल्मों से एकदम से दूरी नहीं बनायेंगे बल्कि वह अब चुनिंदा विषयों पर काम करेंगे. साथ वह भोजपुरी के के विकास के लिए सरकार के लेवल पर भी हर संभव प्रयास करेंगे. इसके पहले भी रवि किशन ने भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किये जाने को लेकर लोकसभा में आवाज उठाई थी. रवि किशन भोजपुरी के एकमात्र ऐसे कलाकार है जिन्होंने भोजपुरी सहित हिंदी, व दक्षिण की कई भाषाओं की फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया है.

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KBC 11 के पहले करोड़पति विनर बने बिहार के सनोज राज, दिया ये बयान

बिहार के प्रतियोगी सनोज राज केबीसी-सीजन 11 के पहले करोड़पति के रूप में तालियों के पात्र बने हैं. सरल और मृदुभाषी सनोज बेहद धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ हौट सीट पर अपने सामने आने वाले सवाल दर सवाल का सामना करते हुए आगे बढ़े. आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें.

आईएएस बनना चाहते हैं सनोज…

एक आईएएस बनने के इच्छुक, सनोज वर्तमान में दिल्ली में अपनी यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. उनका मानना ​​है कि आईएएस के पद के साथ, बदलाव लाने के लिए शक्ति आती है. उनकी दिलचस्पी नीति निर्माण और उसके कार्यान्वयन में निहित हैं. वह स्वास्थ्य और पर्यावरण के संबंध में नीतियां बनाना चाहते हैं. उनके अनुसार, वर्षा जल संचयन, गांवों में जल निकासी की उचित व्यवस्था और अधिक वृक्षारोपण के बारे में मजबूत नीतियों की आवश्यकता है.

जब स्वास्थ्य की बात आती है, तो वह कुपोषण और जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं.

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बच्चन भी हुए इंप्रैस…

सनोज सादा जीवन और उच्च विचार में विश्वास करते हैं. श्री बच्चन के साथ उन्हें हौट सीट पर देखना एक ट्रीट था, जहां वह हर कदम पर उन्हें प्रोत्साहित कर रहे थे. सनोज के विचारों और विचारधाराओं ने श्री बच्चन को प्रभावित किया, जो इस तथ्य की सराहना कर रहे थे कि हमें अपने देश के भविष्य को सकारात्मक दिशा देने के लिए इस तरह के मजबूत दिमाग और जानकार युवाओं की जरूरत है.

एपिसोड का यादगार पल…

लेकिन इस एपिसोड का सबसे अच्छा हिस्सा वह पल था जब सनोज का सामना 1 करोड़ के सवाल से हुआ था. इस आश्वस्त युवक को जवाब पता था लेकिन उन्होंने सभी को हैरान करते हुए अपनी आखिरी लाइफलाइन का इस्तेमाल किया. एबी द्वारा पूछे जाने पर, कि जब उन्हें जवाब पता था तो उन्होंने लाइफलाइन क्यों चुनी.

सनोज ने दिया ये जवाब…

सनोज ने विनम्रतापूर्वक उल्लेख किया कि चूंकि वह 7 करोड़ के सवाल के लिए लाइफलाइन का उपयोग नहीं कर पाएंगे, इसलिए उन्हें लगा कि इसे बेकार जाने के बजाय इसका उपयोग किया जाए! दर्शकों और एबी को हंसाते हुए, कौन बनेगा करोड़पति पर 1 करोड़ जीतने वाले सनोज का यह पल इतिहास में दर्ज किया गया है.

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विनर बनने के बाद कही ये बात…
सीज़न के पहले करोड़पति बनने पर, ख़ुशी से भरे सनोज ने कहा, “मैं इस जीत पर खुश हूं. यह मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण पल है और मैं केवल कई और उपलब्धियां हासिल करने के लिए यहां से और आगे बढ़ने का इरादा रखता हूं. मेरा मानना ​​है कि अपने लक्ष्यों के प्रति कड़ी मेहनत, लगन और समर्पण उन्हें हासिल करने की प्रक्रिया को बहुत अधिक सुखद बना देगा. वर्तमान में मेरी खुशी अल्पकालिक है क्योंकि मैं अपनी यूपीएससी परीक्षाओं पर ध्यान केंद्रित कर रहा हूं जो अगले सप्ताह से शुरू हो रही हैं.”

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‘कुंडली भाग्य’ की इस एक्ट्रेस ने दिखाया बोल्ड अंदाज, फोटोज वायरल

जी टी.वी. के सबसे फेमस सीरियल ‘कुंडली भाग्य’ में सृष्टि अरोड़ा का रोल अदा करने वाली एक्ट्रेस अंजुम फकीह सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं, और इसी के साथ वे अपने फैंस के साथ जुड़ी रहती हैं. जहां एक तरफ अंजुम फकीह ने सीरियल ‘कुंडली भाग्य’ और ‘कुमकुम भाग्य’ में अपनी एक्टिंग से सबको दीवाना कर दिया था तो अब वहीं अपने बोल्ड लुक्स और अदाओं से अपने फैंस को पागल कर दिया हैं.

दरअसल हाल ही में अंजुम फकीह ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से अपनी कुछ बोल्ड फोटोज शेयर की हैं जिसमे वे बेहद खूबसूरत नजर आ रही हैं. अंजुम ने सोशल मीडिया पर अपनी बोल्ड फोटोज शेयर कर फैंस को काफी खुश कर दिया है और फैंस भी उनकी इन फोटोज को जमकर प्यार देते दिखाई दे रहे हैं. अंजुम फकीह की ये फोटोज देख कर कोई भी कह सकता है कि अंजुम को अपने फैंस का दिल जीतना काफी अच्छे से आता है.

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अपनी एक्टिंग के टैलेंट और अदाओं के जलवे बिखेर अंजुम फकीह अब तक लाखों लोगो को अपना दीवाना बना चुकी हैं, और शायद यही कारण है कि उनकी फैन फौलोविंग काफी हद तक बढ़ी हुई है. उनके फोटोज शेयर करते ही फैंस के दिलो में तो जैसे हंगामा मच जाता है और इसीलिए उनकी फोटोज को इतना प्यार मिलता है.  अंजुम फकीह की हर फोटो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल होती हैं.

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बता दें, अंजुम फकीह ने अपना एक्टिंग करियर 15 साल की उम्र में ही शुरू कर लिया था और सबसे पहले वे सोनी टी.वी. के सीरियल ‘माही वे’ में दिखाई दी थीं. उसके बाद उन्होने काफी सफल सीरियल्स किए जैसे कि, ‘तेरे शेहर में’, ‘एक था राजा एक था रानी’, आदि और लोगो का दिल जीतने में कामयाब हुईं. अंजुम ने सीरियल ‘कुंडली भाग्य’ के चलते ‘बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस (फीमेल)’ का अवार्ड भी हासिल किया.

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