45 साला उर्मिला मातोंडकर ने साल 2019 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले राजनीति के क्षेत्र में कदम रखा और कांग्रेस में शामिल हो गईं. तब उन्होंने मुंबई उत्तर लोकसभा सीट से बतौर कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव लड़ा था, लेकिन चुनाव में उन्हें भारतीय जनता पार्टी के नेता गोपाल शेट्टी से करारी शिकस्त मिली थी.

लोकसभा चुनाव हुए अभी 5 महीने ही बीते थे कि उर्मिला मातोंडकर को एहसास हो गया कि यहां उन की दाल नहीं गलने वाली. उन्हें लगने लगा कि वे यहां रह कर कोई बड़ा लक्ष्य हासिल नहीं कर सकतीं. अपनी हार के पीछे वे मुंबई कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी मानती हैं. कमजोर रणनीति, कार्यकर्ताओं की अनदेखी और फंड की कमी को उन्होंने जिम्मेदार बताया.

उन्होंने एक गोपनीय खत लिखा था जो लीक हो गया. इस बात से आहत हो कर उर्मिला ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देना बेहतर समझा.

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उर्मिला मातोंडकर ने अपने इस्तीफे में लिखा है, ”मैं ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. पहली बार मेरे मन में इस्तीफे का विचार तब आया था जब मेरी लगातार कोशिशों के बावजूद तत्कालीन मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा को लिखे 16 मई के मेरे खत के संबंध में पार्टी ने कोई ऐक्शन नहीं लिया. इस के बाद इस खत में की गई गोपनीय बातों को बड़ी आसानी से मीडिया में लीक कर दिया गया.

”मेरे साथ यह एक घोर छल था. मेरे लगातार विरोध जाहिर करने के बावजूद पार्टी में किसी ने इस को ले कर माफी नहीं मांगी. यहां तक कि चिंता भी नहीं जताई. यही नहीं, मेरे खत में जिन लोगों के नाम थे, उन में से कुछ को मुंबई नौर्थ में कांग्रेस के घटिया प्रदर्शन के बावजूद नए पदों से नवाजा गया.”

उर्मिला मातोंडकर ने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान मुंबई के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम के करीबी सहयोगियों संदेश कोंडविल्कर और भूषण पाटिल के बरताव की भी आलोचना की थी.

बता दें कि राजनीति में आने से पहले उर्मिला मातोंडकर फिल्मों की चहेती हीरोइन थीं. उन्होंने ‘रंगीला’, ‘जुदाई’, ‘सत्या’, ‘कुंवारा’, ‘प्यार तूने क्या किया’ और ‘पिंजर’ जैसी बेहतरीन फिल्मों में काम कर के अपनी अलग पहचान बनाई.

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