‘मरजावां’ फिल्म रिव्यू: मैलोड्रामा से भरपूर

रेटिंगः डेढ़ स्टार

निर्माताः निखिल अडवाणी, मेानिशा अडवाणी, मधु भोजवाणी, भूषण कुमार, किशन कुमार, दिव्या खोसला कुमार

लेखक व निर्देशकः मिलाप मिलन झवेरी

कलाकारः सिद्धार्थ मल्होत्रा,रितेश देशमुख, रकुल प्रीत सिंह, तारा सुतारिया, रवि किशन, शाद रंधावा.

अवधिः दो घंटे 16 मिनट

अस्सी व नब्बे के लार्जर देन लाइफ वाले सिनेमा के शौकीन रहे लेखक व निर्देशक मिलाप मिलन झवेरी ‘सत्यमेव जयते’के सफल होने के बाद लार्जर देन लाइफ कथानक वाली फिल्म ‘‘मरजावां’’ लेकर आए हैं, मगर वह एक दमदार मसाला फिल्म बनाने में बुरी तरह से असफल रहे हैं.

कहानीः

मुंबई में पानी के टैंकर माफिया अन्ना(नासर)ने गटर के पास पड़े एक लावारिस बच्चे रघु को अपनी छत्र छाया में पाल पोस कर उसे बड़ा किया.अब वही लड़का रघु (सिद्धार्थ मल्होत्रा)अन्ना के अपराध माफिया के तमाम काले कारनामों और खून-खराबे में अन्ना का दाहिना हाथ बना हुआ है.अन्ना के कहने पर रघु दशहरा के दिन एक दूसरे टैंकर माफिया गायतोंडे के बेटे को मार देता है.

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रघु,अन्ना के हर हुक्म की तामील हर कीमत पर करता है. इसी के चलते अन्ना उसे अपने बेटे से बढ़कर मानते हैं.मगर इस बात से अन्ना का अपना बेटा विष्णु (रितेश देशमुख) को रघु से नफरत है. शारीरिक तौर पर बौना होने के कारण विष्णु को लगता है कि अन्ना का असली वारिस होने के बावजूद सम्मान रघु को दिया जाता है.पूरी बस्ती रघु को चाहती है. बार डांसर आरजू (रकुल प्रीत) भी रघु की दीवानी है.रघु के खास तीन दोस्त हैं.पर जब नाटकीय तरीके से कश्मीर से आई गूंगी लड़की जोया(तारा सुतारिया) से रघु की मुलाकात होती है, तो उसमें बदलाव आने लगता है.

जोया, रघु को एक वाद्ययंत्र देती है. फिर संगीत प्रेमी जोया, पुलिस अफसर रवि यादव (रवि किशन) के कहने पर रघु को अच्छाई के रास्ते पर बढ़ने के लिए प्रेरित करने लगती है.मगर विष्णु अपनी चाल चलता है,जिसमें फंसकर रघु को अपने प्यार जोया को अपने हाथों गोली मारनी पड़ती है और रघु जेल पहुंच जाता है. जोया के जाने के बाद जेल में रघु जिंदा लाश बनकर रह जाता है.जबकि  बस्ती पर विष्णु का जुल्म बढ़ता जाता है. अहम में चूर विष्णु, रघु को अपने हाथों मारने के लिए चाल चलता है और अदालत रघु को बाइज्जत बरी कर देती है. फिर कहानी में मोडत्र आता है. अंततःएक बारा फिर रावण दहन होता है.

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लेखन व निर्देशनः

फिल्म ‘‘मरजावां’’ के प्रदर्शन से पहले मिलाप झवेरी ने खुद बताया था कि कहानी व पटकथा उन्होने ही लिखी थी,पर पहले इस फिल्म को कोई दूसरा निर्देशक निर्देशित करने वाला था,मगर पटकथा पढ़ने के बाद उस निर्देशक ने इस फिल्म से खुद को अलग कर लिया था,तब मिलाप झवेरी ने खुद ही इसके निर्देशन की जिम्मेदारी स्वीकार की. फिल्म देखने के समझ में आया कि पहले वाले निर्देशक ने इसे क्यों नहीं निर्देशित किया.कुछ दृश्यों को जोड़कर बेसिर पैर की कहानी का निर्देशन करने से अच्छा है,घर पर खाली बैठे रहे.प्यार-मोहब्बत, बदला, भावनाएं,मारधाड़,कुर्बानी आदि पर सैकड़ों फिल्में बन चुकी हैं.

सफल फिल्म ‘‘बाहुबली’’ के मार्केटिंग वाले संवाद‘बाहुबली को कटप्पा ने क्यो मारा’ की तर्ज पर  अपनी फिल्म ‘मरजावां’ में इंटरवल से पहले ही हीरो के हाथ हीरोईन को मरवा कर फिल्म को सफल बनाने का उनका प्रयास विफल नजर आ रहा है. अतिकमजोर पटकथा, उथले व अविश्वसनीय किरदारों के चलते फिल्म संभल नही पायी.पानी के माफिया टैंकर को तो अब मुंबई वासी भी भूल चुके हैं.

मिलाप को यह भी नहीं पता कि पानी टैंकर माफिया के पास उस तरह की सशस्त्र सेना नही होती है, जैसी की विष्णु के पास है.फिल्म में रकुल प्रीत के किरदार आरजू को कोठेवाली बताया जा रहा है, पर वह बार डांस में नाचती नजर आती है. फिल्मकार को बार डांस व कोठे का अंतर ही नहीं पता? एक्शन के तमाम दृश्य अविश्वसनीय लगते हैं. व्हील चेअर पर बैठे शाद रंधावा एक भारी भरकम व छह फुट कद के इंसान को रामलीला मैदान से उठाकर ऐसा फेंकते हैं कि वह सीधे मस्जिद में जाकर गिरता है. फिल्म में इमोशन या रोमांस तो ठीक से उभरता ही नहीं.

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अभिनयः

सिद्धार्थ मल्होत्रा बुरी तरह से निराश करते हैं. रितेश देशमुख ने जरुर अच्छा अभिनय किया है. तारा सुतारिया छोटे किरदार में भी अपना प्रभाव छोड़ने में सफल रही हैं. रकुल प्रीत सिंह के हिस्से सुंदर दिखने के अलावा कुछ खास करने को रहा ही नही. रवि किशन की प्रतिभा को जाया किया गया.

फिल्म रिव्यू: मोतीचूर चकनाचूर

रेटिंगः ढाई स्टार

निर्माताः राजेश भाटिया,किरण भाटिया और वायकौम 18

निर्देशकः देबामित्रा बिस्वास  

कलाकारः नवाजुद्दीन सिद्दिकी, आथिया शेट्टी,नवनी परिहार,विभा छिब्बर.

अवधिः दो घंटे 15 मिनट

दहेज कुप्रथा के साथ  वर्तमान पीढ़ी की लड़कियों की विदेशी दूल्हों संग शादी करने की बढ़ती महत्वाकांक्षा पर कटाक्ष करने के साथ साथ छोटे शहरों में रहने वाली कुंठाओं को हास्य व्यंग के साथ फिल्मकार देबामित्रा विस्वास ने फिल्म ‘‘मोतीचूर चकनाचूर’’में पेश करने का प्रयास किया है.मगर फिल्म कई जगह बहुत ढीली होकर रह गयी है.

कहानीः

यह कहानी है बुंदेलखंड इलाके के निवासी परिवारों की, जो कि भोपाल में बसे हुए हैं. अवस्थी परिवार की बेटी एनी उर्फ अनीता (आथिया शेट्टी) से उसके माता इंदू (नवनी परिहार) व पिता बहुत परेशान हैं. एनी के सिर पर शादी करके विदेश में बसने का भूत सवार है. उसे ऐसे युवक से शादी करना है, जो कि लंदन, अमरीका या सिंगापुर सहित किसी देश में रह रहा हो. वह सोशल मीडिया पर अपने पति के साथ विदेशी धरती पर खींची गयी सेल्फी पोस्ट करना चाहती हैं.

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इसी के चलते ऐनी अब तक दस लड़कों को ठुकरा चुकी है.लंदन में रहने वाले लड़के के परिवार वालों को अपमानित करके भगा देती है, क्योंकि वह लड़का शादी के बाद पत्नी को अपने साथ लंदन नहीं ले जाएगा. तो वहीं अवस्थी परिवार के पड़ोस में त्यागी परिवार रहता है. जिसकी बड़ी बेटी हेमा से ऐनी की अच्छी दोस्ती है. दोनों परिवारों के बीच काफी आना जाना है. इस परिवार में दो बेटे व एक बेटी हैं. परिवार का बड़ा लड़का पुशपिंदर त्यागी (नवाजुद्दीन सिद्दिकी) दुबई में नौकरी करता है. 36 साल की उम हो गयी, पर अब तक उसकी शादी नहीं हुई.

पुशपिंदर की मां(विभा छिब्बर) को बेटे की शादी में दहेज 25 से तीस लाख रूप चाहिए. क्योंकि उनका बेटा दुबई मंे नौकरी करता है.बेटे की शादी मंे जो कुछ मिलेगा,वह सब वह बेटी हेमा की शादी में देना चाहती हैं. एक अति मोटी लड़की के साथ पुशंपिंदर शादी करने के लिए तैयार हो जाते हैं. क्योंकि अब उम्र के इस पड़ाव पर लड़की को लेकर उनकी कोई पसंद नहीं है.पर सगाई के बाद जैसे ही पुशपिंदर की मां दहेज की रकम बताती हैं, शादी टूट जाती है. इससे पुशंपिंदर बहुत दुःखी हो जाते हैं.

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उधर पुशपिंदर को देखकर ऐनी की मौसी (करूणा पांडे) उसे समझाती है कि पुशंपिंदर में एक अच्छा चरित्रवान व दुबई मे रहने वाला लड़का है. दुबई भी विदेश ही है. उसके बाद ऐनी बिना अपने माता पिता को बताए, पुशंपिंदर के सामने प्रेम का इजहार कर चुपचाप मंदिर में शादी कर लेती है,जिससे पुशपिंदर की मां विघ्न न डाल पाए.घर पहुंचने पर दोनों परिवार हक्के बक्के रह जाते हैं.

बहरहाल, किसी तरह वह मान जाते हैं. पर समाज की नजरों में दोनो की पुनः रीतिरिवाज के साथ शादी होती है. मगर सुहागरात से पहले ही त्यागी परिवार के साथ ऐनी को भी पता चल जाता है कि पुशंपिंदर की दुबई की नौकरी छूट गयी है और उसे अब भोपाल में ही नौकरी मिल गयी है. फिर कई घटनाक्रम तेजी से बदलते हैं. अंततः पुशपिंदर की मां और ऐनी को भी बहुत कुछ समझ में आ जाता है.

लेखन व निर्देशनः

कथानक के स्तर पर नवीनता न होते हुए भी फिल्म की प्रस्तुतिकरण कमाल की है.फिल्म में छोटे शहरों और संयुक्त परिवार के जीवन मूल्यों को बेहतरीन भी उकेरा गया है. फिल्म में ह्यूमर के साथ साथ दहेज व वैवाहिक जीवन को सफल बनाने सहित कई सामाजिक संदेश भी अच्छे ढंग से बिना भाषणबाजी के परोसे गए हैं. मगर इंटरवल तक फिल्म की गति काफी धीमी है.

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इंटरवल के बाद फिल्म तेज गति से दर्शकों को अपने साथ लेकर आगे बढ़ने का प्रयास करती है, मगर यहां भी कुछ ज्यादा ही खींच दिया गया. क्लायमेक्स में नवाजुद्दीन सिद्दिकी और आथिया शेट्टी के बीच एक दूसरे से मिलने के उतावले पन के दृश्य को इस कदर खींचा गया कि दर्शक कह उठता है कि अब बस भी करो. फिल्म को एडीटिंग टेबल पर कसने की जरुरत थी.

अभिनयः

गंभीर किस्म की भूमिकां निभाने में महारत रखने वाले नवाजुद्दीन सिद्दिकी ने इसमें हलकी फुलकी भूमिका में बेहतरीन अभिनय किया है. वह भावनात्मक दृश्यों में छा जाते हैं. आथिया शेट्टी ने ऐनी के किरदार में जान डाल दी है. पहली फिल्म ‘हीरो’ की असफलता का दंश झेल रही आथिया शेट्टी के करियर को इस फिल्म से नई गति मिलेगी. नवनी परिहार, विभा छिब्बर व करूणा पांडे ने भी ठीक ठाक अभिनय किया है.

Bigg Boss 13: इस कंटेस्टेंट नें दी हिन्दुस्तानी भाऊ को जमकर गालियां, जानें यहां

बिग बौस सीजन 13 में आए दिन दर्शकों को सदस्यों के एक से एक नए रूप देखने को मिल रहे है. जहां एक तरफ विकास पाठक यानी हिंदुस्तानी भाऊ जब से आए हैं सबको हंसाने में लगे हुए हैं तो वहीं दूसरी तरफ सभी सदस्य उनको मजबूर कर रहे हैं अपना दूसरा रूप दिखाने के लिए. दरअसल बीते दिनों घर के सभी सदस्यों नें हिंदुस्तानी भाऊ के ज्यादा सोने के चलते काफी हंगामा किया था. उसी समय हिंदुस्तानी भाऊ भी सभी घरवालों पर भड़कते दिखाई दिए और कहा कि, दवाईयों के चलते उन्हें काफी नींद आ रही है.

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बड़े होठों वाली छिपकली…

इसी के चलते शो के मेकर्स नें आज के एपिसोड का प्रोमो रिलाज किया है जिसमें हिंदुस्तानी भाऊ अपना गुस्सा कंटेस्टेंट माहिरा शर्मा पर निकालते दिखाई दे रहे हैं. प्रोमो में हिंदुस्तानी भाऊ माहिरा शर्मा को बड़े होठों वाली छिपकली कहते नजर आ रहे हैं. उनकी ये बात सुनकर माहिरा जेल के अंदर ही रोने लगती हैं.

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लक्जरी बजत कार्य…

बात करें लक्जरी बजत कार्य की तो आज सभी घरवाले लक्जरी बजत कार्य को पूरा करते दिखाई देंगे जिसमें काफी हंगामा मचने वाला है. इस दौरान शहनाज गिल सामने वाली टीम की गेम खराब करती दिखाई देंगी तो वही कंटेस्टेंट पारस छाबड़ा भी शहनाज की गेम खराब करेंगे. इसी के चलते बिग बौस द्वारा दिए गए टास्क में सारे फ्रेम टूट जाएंगे.

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देवोलीना को लगी चोट…

हिंदुस्तानी भाऊ जब सामने वाली टीम के फ्रेम तोड़ेंगे तो इसी बीच गलती से देवोलीना को चोट लग जाती है जिससे की देवोलीना काफी भड़क जाती हैं. हिंदुस्तानी भाऊ तुरंत ही अपनी गलती मान उनसे माफी मांगते नजर आते हैं पर देवोलीना उनकी एक बात नहीं सुनतीं और उनको काफी कुछ भला बुरा सुना देती हैं. इस बीज देवोलीना हिंदुस्तानी भाऊ को जमकर गालियां देती भी दिखाई देंगी.

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ये 11 सदस्य हैं नोमिनेटिड…

बता दें, इस हफते घर से बेघर होने के लिए जो सदस्य नोमिनेटिड हैं उनका नाम है, सिद्धार्थ शुक्ला, शहनाज गिल, देवोलीन भट्टचार्य, असीम रियाज, माहिरा शर्मा, आरती सिंह, पारस छाबड़ा, विशाल आदित्य सिंह, अरहान खान, हिमांशी खुराना, खेसारी लाल यादव. अब देखने वाली बात ये होगी कि इन 11 सदस्यों में से कौन इस हफ्ते शो छोड़ के अपने घर जाएगा.

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भोजपुरी सिनेमा की ‘एंजल गर्ल’ की फिल्म ‘सईयां है अनाड़ी’ की शूटिंग शुरू, पढ़ें खबर

टीवी की किशमिश भौजी यानी भोजपुरी सिनेमा की एंजल गर्ल गुंजन पंत अब एक बार फिर से बड़े पर्दे की ओर लौट आईं है. तभी वे इन दिनों गौरव झा के साथ एक और फिल्म की शूटिंग में लग गईं है. फिल्म का नाम  ‘सईयां है अनाड़ी’ है, जिसकी शूटिंग मुंबई में शुरू हो चुकी है. इस फिल्म के निर्देशक नीलाभ तिवारी हैं. फिल्म पूरी तरह कमर्सिअल है और इसकी कहानी काफी फ्रेश है.

वहीं फिल्म को लेकर गौरव झा और गुंजन पंत बेहद उत् फिल्म में कई ऐसे मोड़ हैं, जो दर्शकों को आकर्षित करते रहेंगे. हालांकि अभी फील्म की शूटिंग शुरू ही हुई है, इसलिए कहानी को रिवील नहीं करूंगा. इतना जरूर कहूंगा, फिल्म अच्छी है और इसमें मेरे साथ गुंजन पंत हैं. उनके साथ काम कारने  में मज़ा आ रहा है.

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वहीं गुंजन पंत ने भी फिल्म को नायाब बताया और कहा कि इसमें उनकी भूमिका बेहद सशक्त है. गुंजन कहती हैं कि इन दिनों उनके पास जितनी भी फिल्में हैं, उनमें से ये सबसे अलग है. इसलिए मुझे बेहद खुशी है. गौरव झा के साथ काम करने का अनुभव अच्छा होने वाला है.

उनके साथ मेरी पहली फिल्म है. लेकिन अब हमारी अंडरस्टैंडिंग काफी अच्छी हो चली है, तो मुझे पूरी उम्मीद है फिल्म सबों को पसंद आएगी. आपको बता दें कि फ़िल्म ‘सईयां है अनाड़ी’ में गौरव झा और गुंजन पंत के अलावा संजना राज, दीपक सिन्हा, राम मिश्र और अरुण सिंह मुख्य भूमिका में नज़र आने वाले हैं.

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इस भोजपुरी एक्ट्रेस ने साड़ी पहन बरसाया ऐसा कहर, फोटोज देख फैंस ने किए ये कमेंट्स

भोजपुरी क्वीन मोनालिसा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अपनी कई फोटोज और वीडियोज के जरिए सुर्खियों में रहती हैं. भले ही मोनालिसा वेस्टर्न पहने या ट्रेडिशनल वो हर लुक में कमाल लगती हैं. अब हाल ही में मोनालिसा ने साड़ी में अपनी कुछ फोटोज शेयर की हैं जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है.

मोनालिसा की साड़ी का बैक और हौट लग रहा है. मोनालिसा ने इस दौरान ब्लैक कलर की साड़ी पहनी है जिसमें मोनालिसा काफी खूबसूरत लग रही हैं. फैन्स मेनालिसा की इन फोटोज पर उनकी खूब तारीफ कर रहे हैं.

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बाथटब वीडियो भी हुआ वायरल…

 

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Tonight 🔥🔥… #nazar at 11pm on @starplus

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मोनालिसा ने अपना बाथटब वीडियो भी शेयर जो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. मोनालिसा का ये हॉट अवतार देख फैन्स भी शॉक्ड हो गए. बता दें कि मोनालिसा का ये वीडियो उनके शो नजर का प्रोमो वीडियो था. हालाँकि उनके इस वीडियो के शेयर करते ही सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गया था.

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वेस्टर्न लुक्स में बरसाती हैं कहर…

 

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And Where She Stood … She Stood Tall 👆🏻…. #goodmorning #world

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मोनालिसा जितनी खूबसूरत ट्रेडिशनल लुक्स में लगती हैं, उतनी ही हॉट वो वेस्टर्न लुक्स में लगती हैं. मेवाड़ियाँ के फैन्स को उनका ग्लैमरस अंदाज सबसे ज़्यादा पसंद है.

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चिल्ड्रन्स डे पर शेयर की बचपन की फोटोज…

 

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Happy Children’s Day 👶👧🏻… #me #vivaan #mybrother 👀

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चिल्ड्रन्स डे पर मोनालिसा ने अपने बचपन की कई फोटोज शेयर की हैं. मेनालिसा की ये फोटोज सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है.

बता दें कि मोनालिसा 100 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुकी हैं. भोजपुरी सिनेमा में उन्हें काफी पसंद किया जाता है. ऐसा कहा जाता है कि मोनालिसा भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा फीस लेने वाली एक्ट्रेस है. फैंस उनके भोजपुरी फिल्म में जल्द ही कमबैक करने का इंतजार कर रहे हैं.

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मोनालिसा इन दिनों सीरियल ‘नजर’ में नजर आ रही हैं. इस शो में मोनालिसा एक ‘डायन’ का किरदार निभा रही हैं. फैन्स को मोनालिसा का ये किरदार काफी पसंद आ रहा है.

2 आदिवासी औरतें: एक बनी कटी पतंग, दूसरी चढ़ी आसमान पर

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के शिवपुरी और बैतूल जिले की आदिवासी समाज की ये 2 औरतें देश की 2 सब से बड़ी राजनीतिक पार्टियों के इस्तेमाल की चीज बन कर रह गई हैं.

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इस से बड़ी ट्रैजिडी और क्या होगी कि शिवपुरी जिले के कोलारस विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत रामपुरी के गांव लुहारपुरा की अनपढ़ जूली अपने हक को नहीं जानती थी, इसलिए शिवपुरी की जिला पंचायत अध्यक्ष और राज्यमंत्री का दर्जा पाने के बाद भी वह अपनी 18 बीघा जमीन के मामले में ठगी का शिकार बनी. उस का राजनीतिक इस्तेमाल करने वाले नेताओं ने उसे दूध में पड़ी मक्खी की तरह बाहर निकाल फेंका.

वहीं दूसरी औरत ज्योति धुर्वे रायपुर जैसे महानगर की दुर्ग यूनिवर्सिटी से राजनीति में एमए की तालीम लेने के बाद साल 2008 में अनुसूचित जनजाति आयोग की अध्यक्ष बनी और कैबिनेट मंत्री का दर्जा पाने के बाद लंबी उड़ान पर निकल पड़ी. वह 2 बार सांसद बनने के बाद आज भाजपा की राष्ट्रीय सचिव बन बैठी है. साथ ही, अपने ऊपर लगे फर्जी आदिवासी व विधवा होने के आरोप के बावजूद उस ने जायदाद बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है.

करोड़ों रुपए में खेलने वाली भाजपा की इस पूर्व सांसद ज्योति धुर्वे का मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार बाल भी बांका नहीं कर सकी है. वजह, इस भाजपा सांसद के संरक्षक प्रदेश भाजपा कोषाध्यक्ष व पूर्व सांसद हेमंत खंडेलवाल हैं. इन के कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के बैतूल जिले की मुलताई विधानसभा से विधायक और प्रदेश सरकार के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सुखदेव पांसे से गहरे संबंधों के चलते ज्योति धुर्वे का फर्जी आदिवासी का मामला ठंडे बस्ते में जा पहुंचा है.

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एक करोड़ों में तो दूसरी कंगाल

मध्य प्रदेश की राजनीति में दोनों ही औरतें भाजपा व कांग्रेस के पूर्व विधायकों की करीबी रही हैं. जहां जूली कांग्रेस के पूर्व विधायक, जो अब नहीं रहे, राम सिंह यादव के फार्महाउस में काम करती थी तो ज्योति धुर्वे भाजपा के पूर्व सांसद, जो अब नहीं रहे, विजय कुमार खंडेलवाल, प्रदेश भाजपा कोषाध्यक्ष की भारतीय जनता पार्टी महिला मोरचा की अध्यक्ष थी.

ज्योति धुर्वे ने अपने कांग्रेसी पति पूर्व जनपद सदस्य भैसदेही जनपद प्रेम सिंह धुर्वे, जो अब नहीं रहे, की राजनीति में विपक्षी पार्टी के साथ दो कदम आगे बढ़ाए तो जूली के पति मांगीलाल ने मजदूरी करने वाली अपनी बीवी को फार्महाउस के मालिक राम सिंह यादव की कठपुतली बनने पर मजबूर कर दिया.

इन दोनों आदिवासी औरतों का राजनीतिक सफर व खात्मा भाजपा के बीते 15 सालों के राज में हुआ है. लालबत्ती लगी गाड़ी में घूमने वाली इन दोनों औरतों का एक कड़वा सच यह भी है कि दोनों में से एक असली तो दूसरी नकली आदिवासी है.

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एक है एमए दूसरी अंगूठाछाप

एक फटी, मटमैली साड़ी में लिपटी, वहीं दूसरी महंगे कपड़ों और गहनों से लदी हुई. दोनों की राजनीति में शुरुआत साल 2005 और साल 2008 में हुई.

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की जूली को वहां के पूर्व विधायक और नेता राम सिंह यादव ने जिला पंचायत का सदस्य बना दिया था. कुछ समय बाद क्षेत्र के दूसरे पूर्व विधायक वीरेंद्र रघुवंशी ने जूली को राज्यमंत्री का दर्जा दिलवा कर उसे जिला पंचायत के अध्यक्ष का पद सौंप दिया.

साल 2005 से साल 2009 तक जिला पंचायत अध्यक्ष रही जूली के पति मांगीलाल राम सिंह यादव के फार्महाउस पर काम करता था. जूली भी अपने पति के साथ वहीं पर रहती थी और पूर्व विधायक के फार्महाउस पर काम करती थी.

जूली के पास उस के पिता के गांव रामगढ़ में पट्टे की जमीन थी. 9-9 बीघा जमीन पर पूर्व विधायक राम सिंह यादव के बेटे महेंद्र यादव ने भूमि विकास बैंक से ट्रैक्टर उठाया और बैंक की किस्त जमा न करने पर जब भूमि विकास बैंक ने उस के बैंक में बंधक 9-9 बीघा जमीन के पट्टे को नीलाम किया तो पूर्व विधायक राम सिंह यादव के बेटे महेंद्र यादव ने बैंक से वह पट्टे वाली 18 बीघा जमीन खरीद ली.

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जूली अब अपना सबकुछ गंवाने के बाद बकरियां चरा रही है. वर्तमान समय में जूली के साथ न तो कोई विधायक है और न पूर्व विधायक. और तो और जिस पार्टी की ओर से वह जिला पंचायत अध्यक्ष बनी थी, उस पार्टी का कोई कार्यकर्ता से ले कर पदाधिकारी भी उस के दुख में साथी बनने को तैयार नहीं है.

जहां जूली की जाति पर किसी ने सवाल नहीं उठाया, तो वहीं दूसरी ओर ज्योति धुर्वे अपनेआप को असली आदिवासी साबित नहीं कर सकी है.

मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल बैतूल जिले के भाजपा सांसद व प्रदेश भाजपा कोषाध्यक्ष विजय कुमार खंडेलवाल ने ज्योति धुर्वे को साल 2008 में मध्य प्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग की अध्यक्ष की कुरसी और कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिलवा दिया था.

विजय कुमार खंडेलवाल की साल 2007 में हुई मौत के बाद उन के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में उन के छोटे बेटे हेमंत खंडेलवाल साल 2008 में लोकसभा के उपचुनाव में सांसद बने, लेकिन इस बीच बैतूल लोकसभा सीट आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हो जाने के चलते उस सीट पर उन की राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में ज्योति धुर्वे की ताजपोशी हुई.

ज्योति धुर्वे ने साल 2009 में लोकसभा का चुनाव लड़ा और उन का आदिवासी का जाति प्रमाणपत्र विभाजित मध्य प्रदेश के छत्तीसगढ़ से साल 2009 में जारी किया गया.

उस समय ज्योति, पिता महादेव ठाकुर का पता समता कालोनी, रायपुर था. रायपुर जिला कलक्टर सुबोध सिंह के समय बने जाति प्रमाणपत्र में ज्योति धुर्वे को पिता की जाति के आधार पर आदिवासी बताया गया. इसी प्रमाणपत्र को ग्राम पंचायत चिल्कापुर, तहसील भैसदेही ने अटैस्ट किया और उस आधार पर एसडीएम भैसदेही ने साल 2009 में नया जाति प्रमाणपत्र पिता के बदले पति की जाति के आधार पर जारी कर दिया.

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2 बार सांसद रही ज्योति धुर्वे की साल 2014 में घोषित संपत्ति 2 करोड़, 62 लाख रुपए थी. वे वर्तमान में भाजपा की राष्ट्रीय सचिव हैं और ग्राम चिल्कापुर, गुदगांव में उन का एक पैट्रोल पंप भी है.

जाने कहां गए वे दिन

जिला पंचायत अध्यक्ष के साथ ही जूली को एक बार शासन की ओर से राज्यमंत्री का दर्जा भी मिल गया था. फिर क्या था, लालबत्ती की कार में घूमने वाली जूली का रुतबा काफी बढ़ गया था. बड़ेबड़े अफसर और मुलाजिम ‘मैडम’ कह कर उस का आदर करने लगे थे. पद जाते ही मानो जूली की पूरी जिंदगी बदल गई.

एक समय पर इज्जत और सुख के साथ जीने वाली इस औरत की जिंदगी अंधकार और परेशानियों से भर गई. अब गुजरबसर के लिए जूली लुहारपुरा में

रह कर बकरी चराने को मजबूर हो गई है. इन दिनों वह गांव की तकरीबन 50 बकरियां चराने का काम करती है.

जूली के मुताबिक, हर बकरी के लिए उसे 50 रुपए हर महीने मिलते हैं. इस से जो कमाई होती है, उसी के दम पर वह घरपरिवार का पालनपोषण करती है.

पश्चिम बंगाल

कटखने कुत्तों का कहर

देश के सारे बड़े शहरों की तरह पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से सटे हावड़ा जिले में कटखने कुत्तों के कहर से निबटने के लिए हर साल सरकार को लाखों रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं.

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हावड़ा जिला स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि हर साल जिले में 20,000 से ज्यादा लोग कुत्ते के काटने का शिकार होते हैं. इस से उन्हें अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. इस के बावजूद किसी भी नगरनिगम, नगरपालिका, ग्राम पंचायत या ब्लौक की ओर से कुत्तों की बढ़ती तादाद पर काबू पाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है.

हावड़ा नगरनिगम द्वारा 2 साल पहले 50 कुत्तों की नसबंदी कराई गई थी, लेकिन इस का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. रात को हर मोड़ व नुक्कड़ पर दर्जनों आवारा कुत्ते मिल जाते हैं. प्रशासन का कहना है कि ऐसे कुत्तों की हत्या नहीं की जा सकती है, लेकिन उन के पास इन की तादाद कंट्रोल करने के लिए इतनी बड़ी मैडिकल व्यवस्था भी नहीं है.

हावड़ा जिला स्वास्थ्य विभाग ने कुत्तों द्वारा लोगों को काटे जाने का जो आंकड़ा जारी किया है, उस के मुताबिक, साल 2014 में 20,689, साल 2015 में 21,133, साल 2016 में 19,632, साल 2017 में 20,842, साल 2018 में 23,621 और साल 2019 में अप्रैल महीने तक 8,341 लोगों को कुत्तों ने काटा यानी 6 साल में 1 लाख, 14 हजार, 258 लोगों को कुत्ते काट चुके हैं.

इन सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, हर साल औसतन 19,043 लोग कुत्तों के काटने का शिकार होते हैं. इस से बचने के लिए सरकार के जहां लाखों रुपए रेबिज इंजैक्शन पर खर्च हुए हैं, वहीं लोग खुद को महफूज नहीं कर पा रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग ने यह स्वीकार किया है कि कुत्तों द्वारा काटे गए लोगों को बचाने के लिए सरकार को हर साल लाखों रुपए खर्च करने पड़ते हैं.

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धान खरीदी के भंवर में छत्तीसगढ़ सरकार!

छत्तीसगढ़ की राजनीतिक फिजा में आज सिर्फ एक ही मुद्दा है धान खरीदी और किसान का. छत्तीसगढ़ की सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस ने जो मास्टर स्ट्रोक चला था वह अब धीरे-धीरे कांग्रेस और भूपेश सरकार के लिए बढ़ते सर दर्द और ब्लड प्रेशर का हेतु बन रहा है. कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पूर्व धान की खरीदी 2500 रूपये क्विंटल खरीदने और कर्जा मुआफी का वादा किया था. किसानों की कृपा से छत्तीसगढ़ में यह कार्ड चल गया और भूपेश बघेल की सरकार बहुत ताकत के साथ बन गई 67 विधायक चुन लिए गए मगर एक वर्ष बाद जब पुन: खरीफ फसल का समय आया है तो भूपेश सरकार के हाथ पांव फूलने लगे हैं और मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी से रियायते चाहते हैं.

भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री बनते ही जो वादा किया था उसे पूरा करने का ऐलान कर दिया किसानों की जेबें भर गई यही नहीं किसानों को किया गया असीमित कर्जा भी उन्होंने भामाशाह की तरह माफ कर दिया जबकि मध्यप्रदेश में ऐसा नहीं हुआ. छत्तीसगढ़ की आर्थिक स्थिति इन्हीं कारणों से बदतर होती चली गई कर्ज पर कर्ज लेकर भूपेश सरकार एक खतरनाक ‘भंवर’ मे फंसती दिखाई दे रही है. जिसका अंजाम क्या होगा यह मुख्यमंत्री के रूप में एक कुशल रणनीतिक होने के कारण या तो प्रदेश को उबार ले जाएंगे अथवा छत्तीसगढ़ की आने वाले समय में बड़ी दुर्गति होगी यह बताएगा.

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मोदी सरकार से अपेक्षा !

भूपेश बघेल की सरकार किसानों से धान 2500 रूपये क्विंटल में खरीदने को कटिबद्ध है क्योंकि पीछे हटने का मतलब किसानों का रोष और छवि खराब होने की चिंता है .ऐसे में दो ही रास्ते हैं एक छत्तीसगढ़ सरकार शुचिता बरते, सादगी के साथ सिर्फ किसानों के हित साधती रहे और दूसरे दिगर विकास के कामों में ब्रेक लगा दे या फिर केंद्र के समक्ष हाथ पसारे.

भूपेश बघेल की शैली भीख मांगने यानी हाथ पसारने की कभी नहीं रही. भूपेश बघेल को एक आक्रमक छत्तीसगढ़ के चीते के स्वभाव वाला राजनीतिक माना गया है. ऐसे में उनकी सरकार मोदी सरकार के समक्ष हाथ पसारने की जगह सीना तान कर खड़ी हो गई है और केंद्र सरकार से मांग की जा रही है केंद्र को चेतावनी दी जा रही है की धान खरीदी में सहायता करो. छत्तीसगढ़ के एक मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने मोदी सरकार को चेतावनी दी केंद्र धान नहीं खरीदेगी तो हम छत्तीसगढ़ से होने वाले कोयले का परिवहन बंद कर देंगे .इस आक्रमकता  से यह दूध की तरह साफ हो चुका है कि भूपेश सरकार, नरेंद्र दामोदरदास मोदी के समक्ष झुकने को तैयार नहीं बल्कि झुकाने की ख्यामख्याली पाले हुए हैं.

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आज होगा आमना सामना

भूपेश बघेल को 14 जनवरी को देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलने का समय मिला था. छत्तीसगढ़ सरकार ने पूरी तैयारी कर रखी थी की दिल्ली पहुंचकर राष्ट्रपति से मिल केंद्र सरकार को घेरेगे और प्रदेश की जनता के मध्य यह संदेश प्रसारित होगा की केंद्र छत्तीसगढ़ की उपेक्षा कर रही है. मगर ऐन मौके पर चाल पलट गई. राष्ट्रपति भवन से 13 नवंबर की रात को संदेश आ गया की राष्ट्रपति महोदय से मुलाकात को निरस्त कर दिया गया है.

भूपेश बघेल सरकार नरेंद्र मोदी से मिलना चाहती थी मगर प्रधानमंत्री कार्यालय से भी लाल झंडी दिखाई दे रही है ऐसे में भूपेश बघेल स्वयं अपने चुनिंदा मंत्रियों के साथ केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान व केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मिलकर आग्रह करेंगे की 85 लाख मैट्रिक टन धान खरीद पर केंद्र समर्थन मूल्य प्रदान करें । 32 लाख मैट्रिक धान का एफ सी  आई गोदाम में रखने की अनुमति दी जाए और समर्थन मूल्य पर बोनस पर केंद्र की लगी रोक को थिथिल किया जाए.

राजनीतिक प्रशासनिक चातुर्य की कमी  !

संपूर्ण प्रकरण पर दृष्टिपात करें तो स्पष्ट हो जाता है की भूपेश बघेल सरकार में जहां राजनीतिक चातुर्य की कमी है वहीं प्रशासनिक दक्षता जैसी दिखाई देनी चाहिए वह भी दृष्टिगोचर नहीं हो रही है. किसानों के खातिर तलवार भांजने वाली छत्तीसगढ़ सरकार यह कैसे भूल गई की विधानसभा में 68 सीटों का तोहफा देने वाली जनता और किसानों ने लोकसभा चुनाव में भूपेश बघेल की ऊंची ऊंची हांकने की हवा निकाल दी और बमुश्किल 11 में 9 सीटों पर दावा करने वाली कांग्रेस को 2 सीटें ही मिल पाई.

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किसानों का संपूर्ण कर्जा माफी करना भी भूपेश सरकार के गले का फंदा बन गया. अगरचे मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार से थोड़ा सबक सिखा होता तो प्रदेश की आर्थिक स्थिति डांवाडोल नहीं होती .वहीं केंद्र सरकार को आंख दिखाने की हिमाकत छत्तीसगढ़ सरकार को उल्टी न पड़ जाए. डॉक्टर रमन सिंह पूर्व मुख्यमंत्री कहते हैं,- केंद्र से सम्मान और विनय के साथ आग्रह करने की जगह जैसे भूपेश बघेल दो-दो हाथ करने का बॉडी लैंग्वेज दिखा रहे हैं यह गरिमा के अनुकूल नहीं है.

छत्तीसगढ़ के मंत्री, धान खरीदी के मुद्दे पर केंद्र को झुकाना चाहते हैं और केंद्र सरकार, भूपेश बघेल को धान के मुद्दे पर निपटाना चाहती है.! देखिए इस सोच में कौन कहां गिरता है और कहां उखडता है.

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दिल्ली मेट्रो में राखी सावंत के ‘एक्स-हसबैंड’ को पड़े जमकर थप्पड़, VIDEO वायरल

हाल ही में कुछ समय पहले रानू मंडल की एक वीडियो इंटरनेट पर काफी तेजी से वायरल हुई थी जिसमें फैंस उनके साथ सेल्फी ले रहे थे और उसी दौरान एक फैन का हाथ उनसे टच हो गया था तो वे उसी समय झड़क उठीं. रानू मंडल का कहना ये था कि अब वे एक सेलिब्रिटी हैं तो उनको कोई टच नहीं कर सकता. फैंस ने रानू की इस हरकत को लेकर ये कहा था कि सफलता उनके सर चड़ गई हैं और उनमें बहुत ही जल्द घमंड आ गया है.

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मैं एक सेलिब्रिटी हूं…

इसी से मिलता जुलता एक और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें दीपक कलाल नामक यूट्यूबर दिल्ली मैट्रो में सफर कर रहा था तो वहीं मौजूद एक लड़की उनके साथ सेल्फी लेने गईं. सिर्फ इतनी सी बात पर दीपक कलाल उस लड़की पर भड़ उठे और कहा कि, आप मेरे साथ मेरी परमीशन के बिना कैसे सेल्फी ले सकती हैं. मैं एक सेलिब्रिटी हूं और मेरी भी अपनी पर्सनल लाइफ है. दीपक द्वारा बत्तमीजी से बोलते हुए वहा खड़ी लड़की को गुस्सा आ गया और उसनें दीपक के गाल पर जोरदार थप्पड़ मार दिया. इसके बाद बाकी सबनें भी दीपक को एक लड़की को गलत बोलने पर काफी खरी खोटी सुनाई.

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ऐ.. दो टके की डेहली की छोरी…

 

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À 2 kodi ki Selfie Girl ab tu dekh tera haal kya hoga… Bahot Bhutkegi Tu …..Dek lio….

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ये वीडियो दीपक ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपलोड किया है. दीपक कहते हैं, ‘ऐ.. दो टके की डेहली की छोरी. तूने दीपक कलाल की सेल्फी ली? वो भी मेट्रो में, वो भी बिना परमिशन के. तूने जो विद आउट ब्यूटी मोड से मेरा फोटो लिया है, अब देख तू कैसे फूदकेगी. देख अभी तेरा हश्र क्या होगा.’

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आपको बता दें, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब दीपक की पिटाई का वीडियो वायरल हुआ है. एक बार तो दिपक कलाल की जबरदस्त पिटाई हाइ-वे पर एक गूजर नें की थी.

फिल्म रिव्यू: झलकी

रेटिंगः ढाई स्टार

निर्माताः ब्रम्हानंद एस सिंह और आनंद चैहाण

निर्देशकः ब्रम्हानंद एस सिंह और तनवी जैन

कलाकारः बोमन ईरानी,तनिष्ठा चटर्जी,संजय सूरी,जौयसेन गुप्ता, दिव्या दत्ता.

अवधिः एक घंटा 59 मिनट

‘बचपन बचाओ’का संदेश देने के लिए नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के कार्यों से प्रेरित होकर ब्रम्हानंद एस सिंह और तनवी जैन फिल्म ‘‘झलकी’’ लेकर आए हें. निर्देशकद्वय ने एक बाल मजदूर जैसे अति गंभीर विषय पर अपनी तरफ से गंभीर प्रयास किया है, मगर विषयवस्तु को लेकर सीमित सोच के चलते फिल्म अपना प्रभाव झोड़ने में नाकाम रहती है.

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कहानीः     

फिल्म की कहानी गौरया नामक चिड़िया की एक पुरानी लोककथा के एनपीमेान मे काध्यम से शुरू होती है. गौरैया ,जिसका एक दाना बांस की खोल में फंस जाता है,जिसे पाने के लिए वह बढ़ई,राजा, उसकी रानी,सांप,एक छड़ी,आग, समुद्र और एक हाथी तक गुहार लगाती है. हाथी तक पहुंचने से पहले सभी उसे भगा देते हैं.मगर जब हाथी उसकी मदद के लिए उसके साथ चलता है, तो सभी मदद के लिए तैयार हो जाते हैं और गौरैया को उसका दाना मिल जाता है.

फिर मूल कहानी शुरू होती है. कहानी है उत्तर प्रदेश के एक गाँव से रामप्रसाद(गोविंद नामदेव) नियमित रूप से बच्चों को श्रम के लिए शहर में ले जाता है. इसके लिए वह बच्चों के गरीब माता पिता को एलईडी टार्च या एफएम रेडियो अथवा कुछ पैसे देकर उनकी भलाई का नाटक करता है.पर उसी गॉंव की एक नौ साल की लड़की झलकी( बेबी आरती झा)को रामप्रसाद पसंद नहीं. वह हर हाल में अपने छोटे भाई सात साल के बाबू(गोरक्षक सकपाल)को रामप्रसाद से बचाकर रखना चाहती है.

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पर हालात कुछ इस तरह बदलते हैं कि राम प्रसाद के साथ झलकी और उसका भाई बाबू मिर्जापुर शहर पहुंच जाते है, जहां रामप्रसाद बड़ी चालाकी से उसके भाई बाबू को बाल मजदूरी के लिए दूसरों के हाथ बेच देते हैं और झलकी को किसी अन्य के हाथ वेश्यावृत्ति के लिए बेचते हैं. झलकी अपने भाई बाबू से अलग हो जाती है, पर वह भागकर खुद को बचा लेती है. फिर वह अपने भाई बाबू की तलाश शुरू करती है. कारपेट बनाने वाली फैक्टरी के मालिक चकिया (अखिलेंद्र मिश्रा ) के यहां बाबू कारपेट बनाने के काम में लग जाता है.

अपने भाई बाबू की तलाश के लिए झलकी गौरैया की कहानी को याद कर अपने काम पर लग जाती है. उसे सबसे पहले रिक्शा चालक रहीम चाचा (बचन पचेहरा) का साथ मिलता है.जलेबी बेचने वाले दुकानदार को सच पता है, पर वह कुछ बताने को तैयार नही. तब झलकी राजा यानी कि जिले के कलेक्टर संजय ( संजय सूरी)के पास पहुंचती है,संजय उसे भगा देते हैं.

तब वह नाटकीय तरीके से रानी यानी कि कलेक्टर की पत्नी  सुनीता (दिव्या दत्ता) से मिलती है.सुनीता उसे अपने घर ले जाकर अपने साथ रहने के लिए कहती है और आश्वस्त करती है कि वह जल्द उसके भाई को ढुंढ़वा देंगी. पर संजय खुद को असमर्थ बताते हैं.रहीम चाचा की मदद से झलकी को यह पता चल जाता है कि उसके भाई बाबू से कारपेट बनाने वाली कंपनी के मालिक चकिया बाल मजदूरी करा रहे हैं.

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एक दिन जब वह छिपकर कंपनी के अंदर पहुंचती है तो वह कलेक्टर संजय के ज्यूनियर और एसडीएम अखिलेश (जौयसेन गुप्ता) को चकिया से घूस लेते देख लेती है. पर संजय चुप रहते हैं.उसके बाद नाटकीय तरीके से पत्रकार प्रीति व्यास(तनिष्ठा चटर्जी)और बच्चों को छुड़वाने काम कर रहे समाज सेवक(बोमन ईरानी)की मदद से झलकी अपने भाई व गांव के अन्य बच्चों का बाल मजदूरी से मुक्त कराकर अपने गांव पहुचती है.

कहानी खत्म होने के बाद कैलाश सत्यार्थी का लंबा चैड़ा भाषण और उनके द्वारा 86 हजार बच्चों को छुड़ाए जाने के दौरान के उनके कार्यों के वीडियो भी आते हैं.

लेखन व निर्देशनः

मूलतः डाक्यूमेंट्री फिल्मकार ब्रम्हानंद एस सिंह की बतौर निर्देशक यह पहली फीचर फिल्म है, जिसमें उनके साथ निर्देशन में सहयोगी के रूप में तनवी जैन भी जुड़ी हुई हैं. ब्रम्हानंद एस सिंह ने संगीतकार आर डी बर्मन और गजल गायक जगजीत सिंह लंबी डाक्यूमेंट्री बना चुके हैं. जिसका असर फिल्म में इंटरवल से पहले नजर आता है. इंटरवल से पहले जिस तरह से दृश्य व पाश्र्व में गाने पिरोए गए हैं, उससे फीचर फिल्म की बजाय डाक्यमेंट्री का अहसास होता है. इंटरवल के बाद घटनाक्रम घटित होते हैं. पर पटकथा में कुछ झोल के साथ निर्देशन में कुछ कमियां है.फिल्म बेवजह लंबी खींचीं गयी है.

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फिल्म में बच्चो के यौन शोषण को भी बहुत हलके फुलके से दिखाया गया है. फिल्मकार के रूप में ब्रम्हानंद ने बाल मजदूरी के साथ जुड़े हर इंसान को बेनकाब करने का प्रयास किया है. फिल्म में भाई कही तलाश में जुटी झलकी के अंदर के गहरे डर का भी बेहतरीन चित्रण है. कालीन बुनाई के लघु उद्योग में किस तरह छोटे छोटे बच्चे काम कर रहे है और उन्हे किस हालात में रखा जाता है, उसका यथार्थ चित्रण है. मिर्जापुर में घरेलू उद्योगों की लंबी श्रृंखला में कालीन की बुनाई उद्योग है.जहां बाल तस्करी का नेक्सस बड़ा और शक्तिशाली है. मगर फिल्मकार ने इसका बहुत सतही चित्रण किया है.

अभिनयः

जहां तक अभिनय का सवाल है,तो झलकी के किरदार में बाल कलाकार आरती झा अपने शानदार अभिनय से मन मोह लेती हैं. गोरक्षा सकपाल ने भी बाबू के किरदार के साथ न्याय किया है. यह दोनों भाई-बहन के रूप में एक अद्भुत, वास्तविक बंधन बनाते हैं. फिल्म में बेहतरीन कलाकारों की लंबी चैड़ी फौज है, मगर पटकथा लेखन व निर्देशकीय कमजोरी के चलते यह कलाकार बंधे से नजर आते हैं. कोई भी खुलकर अपनी प्रतिभा को सामने नहीं ला पाया.

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Bigg Boss 13: कैप्टेंसी टास्क हारने के बाद सिद्धार्थ नें उठाया इस कंटेस्टेंट पर हाथ, पढ़ें खबर

बिग बौस सीजन 13 के घर में इन दिनों काफी गरम माहौल दर्शकों को नजर आ रहा है. जहां एक तरफ सभी सदस्य कंटेस्टेंट सिद्धार्थ शुक्ला को टारगेट करते दिखाई दे रहे थे तो वहीं अब बिग बौस द्वारा दिए गए कैप्टेंसी टास्क के बाद सिद्धार्थ शुक्ला और असीम रियाज की जमकर लड़ाई हुई. दरअसल बिग बौस नें बीते दिनों घरवालों को एक कैप्टेंसी टास्क दिया था जिसका नाम था ‘तीन राक्षस’. टास्क के दौरान सभी कंटेंस्टेंट के बीच लड़ाई-झगड़े होते दिखाई दिए तो वहीं विशाल आदित्य सिंह नें किसी भी टीम का साथ ना देकर खुद से ही टास्क पूरा किया.

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सिद्धार्थ नें दिया असीम को जोरदार धक्का…

 

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Sid aur Asim ka Badhta Jaaraha hai Jhagda Aagey Kya Hoga jaan ne ke liye Dekhye…. @biggboss13__khabri @biggboss.13___

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टास्क खत्म होने के बाद बिग बौस नें बताया कि, विशाल आदित्य सिंह के अलावा देवोलीना भट्टाचार्य, माहिरा शर्मा और पारस छाबड़ा कैप्टेंसी के दावेदार रहेंगे. बीते एपिसोड के बाद शो के मेकर्स नें एक प्रोमो रिलीज किया जिसमें असीम सिद्धार्थ को दोषी बता रहे हैं टीम की हार को लेकर तो वहीं उन दोनों की ये बहस हाथापाई पर उतर आती है. गुस्से में लाल सिद्धार्थ असीम को जोरदार धक्का मारते हैं तो उसी समय असीम सिद्धार्थ पर काफी झड़क जाते हैं और काफी खरी खोटी सुनाते हैं.

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माहिरा शर्मा और शेफाली जरीवाला के बीच भी हुई लड़ाई…

कैप्टेंसी टास्क ‘तीन राक्षस’ के दौरान माहिरा शर्मा और शेफाली जरीवाला के बीच भी दर्शकों को काफी लड़ाई देखने को मिली. माहिरा नें शेफाली को काफी जोर से धक्का मारा और उसी के चलते शेफाली नें भी माहिरा को काफी कुछ सुनाया.

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ये 11 सदस्य हैं नोमिनेटिड…

बता दें, इस हफते घर से बेघर होने के लिए जो सदस्य नोमिनेटिड हैं उनका नाम है, सिद्धार्थ शुक्ला, शहनाज गिल, देवोलीन भट्टचार्य, असीम रियाज, माहिरा शर्मा, आरती सिंह, पारस छाबड़ा, विशाल आदित्य सिंह, अरहान खान, हिमांशी खुराना, खेसारी लाल यादव. अब देखने वाली बात ये होगी कि इन 11 सदस्यों में से कौन इस हफ्ते शो छोड़ के अपने घर जाएगा.

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