खेसारीलाल यादव की भोजपुरी फिल्म ‘मेरी जंग मेरा फैसला’ को लेकर दर्शक एक्साइटेड

भोजपुरी सुपरस्टार खेसारीलाल यादव और नवोदित बाला मुनमुन घोष को लेकर बनी मिथिला टाकिज की भोजपुरी फिल्म ‘मेरी जंग मेरा फैसला’ १५ नवंबर को पुरे देश में एक साथ प्रर्दशित होने जा रही है. इस फिल्म को देखने के लिए लोग पहले से ही काफी एक्साइटेड हैं. फिल्म को लेकर लंबे वक्त से ही काफी बज़ क्रिएट किया गया है, यही वजह है कि फिल्म की बंपर बुकिंग होने की बात कही जा रही है. इसके अलावा फिल्म में खेसारीलाल यादव ने दमदार एक्शन सीन किए हैं.

ये भी पढ़ें- ‘‘सपोर्ट सिस्टम बहुत जरुरी है..’’ -रकुल प्रीत सिंह

इस फिल्म में वो सब है जो आपको पसंद आयेगा…

इसी के साथ मुनमुन घोष भी इस फिल्म में बहुत ज्यादा ग्लैमरस लग रही हैं. कुल मिलाकर कहा जाए तो दर्शकों को लुभाने के लिए डायरेक्टर राजू ने इस फिल्म में वो सब डाला है जो आपको पसंद आयेगा. फिल्म के निर्माता मनोज चौधरी की मानें तो फिल्म ‘मेरी जंग मेरा फैसला’ खत्म होने तक फैंस थोड़ा इमोशनल नजर आयेंगे. और फिल्म की कहानी में काफी ट्विस्ट हैं. लाजवाब फिल्म बनायी है निर्देशक राजू ने. फिल्म के सभी कलाकार दर्शकों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरे उतरेंगे. फैंस को खेसारीलाल यादव का एक्शन सीन, फाइट सीन काफी जबरदस्त लगेगा. इस फिल्म के गीत संगीत भी काफी अलग हैं.

फैंस को चौंकाती नजर आएंगी मुनमुन घोष…

फिल्म के निर्देशक राजू कहते हैं, खेसारीलाल यादव के एक्शन सीन्स के अलावा मुनमुन घोष भी फिल्म में फैंस को चौंकाती नजर आयेगी. वे कहते हैं, जबरदस्त कहानी है ‘मेरी जंग मेरा फैसला’ की और यह फिल्म दर्शकों को जरुर पसंद आयेगी. आदि शक्ती इंटरटेनमेंट प्रस्तुत इस भोजपुरी फिल्म में भोजपुरी सुपरस्टार खेसारीलाल यादव के अपोजिट बंगाली बाला मुनमुन घोष को लांच किया जा रहा है.

ये भी पढ़ें- Bigg Boss 13: इस कंटेस्टेंट नें बोला सिद्धार्थ शुक्ला को ‘नामर्द’, भड़क उठीं नताशा सिंह

साथ में होंगे अवधेश मिश्रा, सुबोध सेठ, देव सिंह, संजय वर्मा, मनीष चतुवेर्दी, दिलीप सिंहा, माया यादव, पलक तिवारी, आकांक्षा दूबे, अनिता रावत, पप्पू यादव और रोहित सिंह मटरू. इस फिल्म की कथा, पटकथा और संवाद तैयार किया है एस.के. चौहान ने जबकि संगीत दिया है मधुकर आनंद ने. फिल्म के एक्शन डायरेक्टर हैं इकबाल सुलेमान तथा कैमरामैन हैं प्रिंस.

चांदनी सिंह का हौट अंदाज आएगा नजर…

इस फिल्म में यूट्यूब की सनसनी चांदनी सिंह के उपर फिल्माया गया गाना दर्शकों को काफी पसंद आयेगा और चांदनी सिंह इस गाने में काफी हौट लग रही हैं. इस फिल्म के कहानी में काफी ट्विस्ट भी हैं. करीब ढाई घंटे की इस फिल्म को लेकर कुछ लोगों का मानना है कि यह मसाला एंटरटेनमेंट मूवी होगी. वहीं कुछ लोगों को फिल्म के एक्शन से बहुत उम्मीदें हैं.

ये भी पढ़ें- प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस को शाहिद कपूर ने दी ये सलाह

दुसरी फिल्मों से काफी अलग होगी ये फिल्म…

आपको बता दें कि मिथिला टाकिज की फिल्मों का दर्शक बेसब्री से इंतजार करते हैं. इस जाने माने बैनर से अबतक भोजपुरी फिल्म डकैत, राखेला शान भोजपुरिया जवान, हम हई लुटेरे, गुंडई राज, इज्जत और जानलेबू काहो जैसी कामयाब फिल्म बनायी गयी हैं जिन्हे दर्शकों ने खुब पसंद किया है. माना जा रहा है कि इस गेम चेंजर बैनर मिथिला टाकिज की ‘मेरी जंग मेरा फैसला फिल्म दुसरी फिल्मों से काफी अलग होगी और दर्शकों की पसंद पर यह फिल्म भी खरी उतरेगी.

अगर आपका रंग भी है सांवला तो ट्राय करें डांस गुरू रेमो डिसूजा के ये फैशन टिप्स

डांस की दुनिया के बेताज बादशाह यानी रेमो डिसूजा अपने डांर्स फोर्म और अपनी डांस मूव्स को ले कर हमेशा चर्चा में रहते हैं. रेमो के ना सिर्फ भारत में बल्कि देश-विदेश में फैंस हैं. करोड़ों लोग रेमो को पसंद करते हैं और ना सिर्फ पसंद बल्कि लोग उनके डांस फोर्म और तो और उनके लुक्स तक फौलो करते हैं. जी हां ना सिर्फ रेमो का डांस बल्कि उनके लुक्स भी यूवाओं में काफी पौपुलर है. आप हम आपको दिखाते हैं रेमो डीसूजा के कुछ ऐसे लुक्स जिन्हें आप बेहद पसंद करेंगे और जरूर ट्राय करेंगे.

ये भी पढ़ें- अगर आप भी है स्टाइलिश कपड़ों के शौकीन, तो ट्राय करें ये स्लोगन टी-शर्ट्स

ट्रेंडी लौंग कोट…

 

View this post on Instagram

 

#look21 #danceplus4 @starplus styled by @lizelleremodsouza costume by @denishhamirani shot by @sumit.baruah #indian

A post shared by Remo D’souza (@remo_dancer) on

डांसर्स को अक्सर आपने लोवर और टी-शर्ट में ही देखा होगा लेकिन रेमो का ट्रेंडी लुक देख आप हैरान रह जाएंगे. इस लुक में रेमो नें काफी बहतरीन कलर का लौंग कोट पहना हुआ है जो कि उन पर काफी सूट कर रहा है. आप भी ये लुक विंटर्स में ट्राय कर सकते हैं.

ये भी पढ़ें- Winter Parties में ट्राय करें आयुष्मान खुराना के भाई के ये लुक्स

डीसेंट लुक…

 

View this post on Instagram

 

Look #18. #danceplus4 @starplus styled by @lizelleremodsouza costume by @denishhamirani shot by @sumit.baruah shoe @prada

A post shared by Remo D’souza (@remo_dancer) on

इस लुक में रेमो डिसूजा नें ब्लैक प्लेन टी शर्ट के ऊपर व्हाइट कलर का ब्लेजर और साथ ही व्हाइट कलर का ट्राउसर पहना हुआ है. इस लुक में रेमो काफी डीसेंट दिखाई दे रहे हैं तो अगर आप भी रेमो की तरह डीसेंट दिखना चाहते हैं तो जरूर ट्राय करें ये लुक.

ये भी पढ़ें- दिखना चाहते हैं सबसे अलग, तो जरूर ट्राय करें ‘Rugged’ जींस

फौर्मल वियर…

 

View this post on Instagram

 

#look13. #danceplus4 @starplus styled by @lizelleremodsouza costume by @denishhamirani shoe @icobblus shot by @sumit.baruah

A post shared by Remo D’souza (@remo_dancer) on

इस फौर्मल वियर में रेमो डिसूजा नें व्हाइट कलर की शर्ट के ऊपर ब्लू कलर का ब्लेजर और साथ ही ब्लू कलर का ट्राउसर पहना हुआ है. इस लुक के साथ रेमो नें टाई कैरी की हुई है जो की काफी स्मार्ट लुक दे रही है. आप भी ये फौर्मल आउटफिट किसी भी फैमिली फंक्शन या पार्टीज में ट्राय कर सकते हैं.

ये भी पढ़ें- अगर आपको भी है नए हेयरस्टाइल्स रखने का क्रेज तो जरूर फौलो करें ये ट्रेंडी लुक्स

मेन इन व्हाइट…

इस व्हाइट लुक में रेमो डिसूजा नें व्हाइट कलर का इंडो वेस्टर्न कैरी किया हुआ है जो कि काफी डैशिंग लग रहा है. इंडो वेस्टर्न तो वैसे ही काफी समय से ट्रेंड में है ऊपर से ये रेमो जैसा व्हाइट इंडो वेस्टर्न कौन ट्राय नहीं करना चाहेगा. आप भी ये इंडो वेस्टर्न लुक ट्राय कर किसी को भी इम्प्रेस कर सकते हैं.

ये भी पढ़ें- फेस्टिव सीजन के लिए परफेक्ट हैं इन एक्टर्स के ये इंडो वेस्टर्न लुक, देखें फोटोज

अंधविश्वास की पराकाष्ठा: भाग 2

पहला भाग पढ़नें के लिए यहां क्लिक करें- 

होने लगी नेतागिरी

पुलिस द्वारा गोलू तथा उस के मातापिता को नजरबंद करने की जानकारी लोक जनशक्ति पार्टी के दलित नेता राजीव पासवान को मिली तो वह अपने समर्थकों के साथ बेरूई गांव आए. गांव में उन्होंने पुलिस काररवाई को गलत बताते हुए भड़काऊ बयान दिया.

उन्होंने कहा कि 6 वर्षीय बालक गोलू गरीब दलित का बेटा है इसलिए पुलिस ने उसे व उस के मातापिता को नजरबंद कर दिया है. यही गोलू अगर किसी ब्राह्मण का बेटा होता तो पुलिस किसी पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे तख्त डाल कर बिठा देती और उस की सुरक्षा करती.

राजीव पासवान ने कहा कि वह गोलू व उस के मातापिता को रिहा कराने के लिए डीएम व एसपी से बात करेंगे. फिर भी बात न बनी तो लोक जनशक्ति पार्टी के नेता तथा केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान से मिलेंगे और तीनों को हर हाल में रिहा कराएंगे.

ये भी पढ़ें- जीवन की चादर में छेद: भाग 1

गोलू को नजरबंद हुए अभी 2 ही दिन बीते थे कि क्षेत्रीय विधायक संजय कुमार गुप्ता अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ बेरूई गांव आए. उन्होंने डीएम मनीष कुमार वर्मा तथा एसपी प्रदीप गुप्ता से मोबाइल फोन पर बात की और नजरबंद बालक गोलू तथा उस के मातापिता को बेरूई गांव बुलवा लिया.

बालक गोलू से मिलने और बातचीत करने के बाद विधायक संजय गुप्ता ने अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाला बयान दिया, जबकि उन्हें लोगों को अंधविश्वास से दूर रहने की नसीहत देनी चाहिए  थी.

विधायक संजय गुप्ता ने कहा कि बालक गोलू से बात कर के और उस के हाथों के स्पर्श से उन्हें भी बच्चे के अंदर दैवीय शक्ति की अनुभूति हुई है. गोलू नाम के इस बच्चे के ऊपर वाकई दैवीय कृपा है, जिस के छूने मात्र से असाध्य रोग ठीक हो जाता है.

उन्होंने आगे कहा कि यह बच्चा किसी को छूता है तो अंदर से चट्ट सी आवाज आती है. यह आवाज हमने भी सुनी है. निश्चित तौर पर जन कल्याण के लिए पैदा हुए इस बच्चे के माध्यम से लोगों को लाभ होगा, ऐसा मुझे विश्वास है.

विधायक के इस बयान के बाद अंधविश्वास को बढ़ावा मिला तो लोगों की भीड़ और भी ज्यादा जुटने लगी. इलाहाबाद, फतेहपुर, कानपुर, इटावा, उन्नाव और लखनऊ आदि जिलों से पीडि़त लोग आने लगे. भीड़ का रिकौर्ड तब टूटने लगा जब चमत्कारी बालक की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं, प्रिंट मीडिया में छपने लगीं और इलेक्ट्रौनिक मीडिया पर दिखाई जाने लगीं. अभी तक लोग जिलों से ही आते थे. अब अन्य प्रदेशों से भी आने लगे.

ये भी पढ़ें- वेलेंसिया की भूल: भाग 2

अगस्त माह बीततेबीतते 15 दिनों में बेरूई गांव में 4-5 हजार लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई. जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन अंधाबहरा हो गया. हां, इतना जरूर हुआ कि कुछ बेरोजगारों को रोजगार मिल गया. गोलू बाबा के दरबार के बाहर कई दरजन चाय, पान और खानेपीने की दुकानें सज गईं.

आटो टैंपो वालों की आमदनी 10 से 20 गुना बढ़ गई. आसपास के जिलों के होटल मालिकों की भी आमदनी बढ़ गई. यही नहीं गोलू बाबा के परिजनों को भी अच्छी आमदनी होने लगी.

दरअसल, जब भीड़ बढ़ी तो गांव के कुछ दबंग युवकों ने गोलू के परिजनों के साथ मिल कर एक कमेटी बना ली और कमेटी मेंबरों को पहचान पत्र दे दिया गया. इस कमेटी के सदस्यों ने 10 रुपए में टोकन नंबर देने शुरू कर दिए, जो कमाई का बड़ा जरिया बना. गोलू बाबा से मिलने के लिए दिन रात टोकन दिए जाने लगे.

इन दबंगों ने विरोध करने वालों से निपटने के लिए लठैत युवकों को तैनात कर दिया गया, जिन्हें भीड़ को संभालने का जिम्मा सौंपा गया. टोकन नंबर धारी ही गोलू बाबा के पास पहुंचता और उस के तथाकथित स्पर्श पा कर रोग से राहत पाता.

ये भी पढ़ें- वेलेंसिया की भूल: भाग 1

आस्था और अंधविश्वास के मेले में ऐसे तमाम स्त्रीपुरुष थे, जिन का रोग गोलू बाबा के स्पर्श मात्र से ठीक हो गया था, लेकिन ऐसे लोगों की कमी नहीं थी जो गोलू बाबा के स्पर्श से ठीक नहीं हुए थे. उन का कहना था कि यह सब अंधविश्वास है, लेकिन गोलू बाबा के समर्थक और कमेटी के लोग बाबा के विरुद्ध कुछ सुनना या बोलना पसंद नहीं करते थे.

बेहोश हो कर गिरा चमत्कारी बालक

कौशलपुरी (कानपुर नगर) निवासी रवींद्र मोहन ठक्कर सामाजिक कार्यकर्ता हैं. ठक्कर पेट रोग से पीडि़त थे, उन्हें एक टीवी चैनल के माध्यम से गोलू के बारे में पता चला तो वह बेरूई गांव आए. गोलू बाबा ने उन्हें स्पर्श किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.

वह समझ गए कि यह सब अफवाह और अंधविश्वास है. उन्होंने कौशांबी पहुंच कर डीएम और एसपी से मिल कर अपना विरोध जताया और इस अंधविश्वास को जल्दी खत्म कराने की अपील की.

8 सितंबर, 2019 को गोलू बाबा के दरबार में लगभग 5-6 हजार लोगों की भीड़ जुटी थी. मरीजों के स्पर्श करने के दौरान गोलू बाबा की तबीयत बिगड़ गई. पुलिस प्रशासन को खबर लगी तो एसपी प्रदीप गुप्ता ने तत्काल मासूम बालक को अस्पताल में भरती करने का आदेश दिया.

आदेश पाते ही मझनपुर, कौशांबी कोतवाल उदयवीर सिंह, बेरूई गांव पहुंचे और गोलू को जीप में बिठा कर कौशांबी लाए. उसे जिला अस्पताल में भरती करा दिया गया. कौतूहलवश कई नर्स व कर्मचारी चमत्कारी बालक को देखने के लिए आए.

जिला चिकित्सालय के सीएमओ दीपक सेठ की देखरेख में बालरोग विशेषज्ञ डा. आर.के. निर्मल ने गोलू का शारीरिक परीक्षण किया और एमआरआई कराई.

ये भी पढ़ें- पति का टिफिन पत्नी का हथियार: भाग 3

शारीरिक परीक्षण के बाद डा. निर्मल कुमार ने बताया कि बालक शारीरिक रूप से स्वस्थ है उसे कोई बीमारी नहीं है. थकान के चलते वह मूर्छित हो गया था. उन्होंने यह भी बताया कि उस के शरीर में कोई दैवीय या चमत्कारिक शक्ति नहीं है. दूसरे बच्चों की तरह वह भी बालक है.

जिला अस्पताल में ही कोतवाल उदयवीर सिंह ने बालक गोलू से स्पर्श करा कर इलाज कराया. वह कमर दर्द से परेशान थे. नर्स रमा ने भी स्पर्श करा कर इलाज कराया. वह पीठ दर्द से पीडि़त थी. दोनों ने कहा कि उन का दर्द चला गया है.

कोतवाल उदयवीर सिंह द्वारा बालक के स्पर्श वाला इलाज कराने का वीडियो सोशल मीडया पर वायरल हुआ तो एडीजी इलाहाबाद ने नाराजगी जताई. यही नहीं उन्होंने त्वरित काररवाई करते हुए अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले इंसपेक्टर उदयवीर सिंह को लाइन हाजिर कर दिया.

आस्था और अंधविश्वास के बीच गोलू बाबा जब मीडिया की सुर्खियां बना तो चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सदस्य भी गोलू की जांच करने पहुंचे. जांच के बाद कमेटी के सदस्य मोहम्मद रेहान ने इसे मात्र एक अफवाह और अंधविश्वास मानते हुए बच्चे के मौलिक अधिकारों का हनन बताया. साथ ही एसपी प्रदीप गुप्ता से जेजे एक्ट के प्रावधानों के तहत काररवाई करने की मांग की.

ये भी पढ़ें- पति का टिफिन पत्नी का हथियार: भाग 2

चाइल्ड वेयफेयर कमेटी की रिपोर्ट के बाद जिला पुलिस प्रशासन की नींद टूटी. एसपी प्रदीप गुप्ता ने 11 सितंबर, 2019 को बेरूई गांव में भारी पुलिस तैनात कर दिया, जिस ने भीड़ को वहीं से खदेड़ दिया. यही नहीं उन्होंने गोलू बाबा तथा उस के परिवार वालों को नजरबंद करा दिया. ताकि अंधविश्वासी उस से न मिल सके.

एसपी प्रदीप गुप्ता ने अंधविश्वास का मेला बंद तो करा दिया है, लेकिन अब सूबे के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, सांसद विनोद सोनकर, डीएम मनीष कुमार वर्मा तथा बाल विकास मंत्री, स्वाति सिंह की जिम्मेदारी है कि वह पुन: इस अंधविश्वास को न पनपने दें. साथ ही विधायक संजय गुप्ता तथा राजीव पासवान जैसे लोगों पर भी नजर रखें जिन्होंने सरे आम अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले बयान दिए.

बहरहाल यह तो समय ही बताएगा कि गोलू बाबा का दरबार पुन: चालू होगा या फिर बंद हो जाएगा. कथा संकलन तक गोलू बाबा उस के मातापिता थाना सराय अंकिल पुलिस थाने में नजरबंद थे. कुछ शरारती तत्वों, जिन की कमाई की दुकानें बंद हो गई थीं, ने पुलिस थाने पर धरनाप्रदर्शन भी किया.

कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां

ये भी पढ़ें- पति का टिफिन पत्नी का हथियार: भाग 1

जड़ें: भाग 2

पहला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- 

‘‘थैंक यू, कविता. वैसे मेरी समझ में नहीं आता है कि तुम हर साल यहां आ कर मुझे विश करने का कष्ट क्यों उठाती हो?’’ उन्होंने मौसी को ताना सा मारा.

‘‘रिलैक्स, राजीव. हर साल मैं आ जाती हूं, क्योंकि मुझे मालूम है कि मेरे अलावा तुम्हें विश करने और कोई नहीं आएगा,’’ मौसीजी ने उन की बात का बुरा माने बगैर आगे बढ़ कर उन से हाथ मिलाया.

‘‘यह भी तुम ठीक कह रही है. यह कौन है?’’ उन्होंने मेरे बारे में सवाल पूछा.

‘‘यह नीरज है. मेरी बड़ी बहन अनिता की बेटी शिखा का पति,’’ मौसीजी ने उन्हें मेरा परिचय दिया तो मैं ने एक बार फिर से उन्हें हाथ जोड़ कर नमस्ते कर दी.

उन्होंने मेरे अभिवादन का जवाब सिर हिला कर दिया और फिर ऊंची आवाज में बोले, ‘‘रामदीन, इन मेहमानों का मुंह मीठा कराने के लिए फ्रिज में से रसमलाई ले आ.’’

ये भी पढ़ें- राहुल बड़ा हो गया है

‘‘तुम्हें मेरी मनपसंद मिठाई मंगवाना हमेशा याद रहता है.’’

‘‘तुम से जुड़ी यादों को भुलाना आसान नहीं है, कविता.’’

‘‘खुद को नुकसान पहुंचाने वाली मेरी यादों को भूला देते तो आज तुम्हारा घर बसा होता.’’

‘‘तुम्हारी जगह कोई दूसरी औरत ले नहीं पाती, मैं ने दोबारा अपना घरसंसार ऐसी सोच के कारण ही नहीं बसाया, कविता रानी.’’

‘‘मुझे भावुक कर के शर्मिंदा करने की तुम्हारी कोशिश हमेशा की तरह आज भी बेकार जाएगी, राजीव,’’ मौसीजी ने कुछ उदास से लहजे में मुसकराते हुए जवाब दिया, ‘‘मैं फिर से कहती हूं कि मुझ जैसी बेवफा पत्नी की यादों को दिल में बसाए रखना समझदारी की बात नहीं है. यह छोटी सी बात मैं तुम्हें आज तक नहीं समझा पाई हूं. इस बात का मुझे सचमुच बहुत अफसोस है, राजीव.’’

मौसीजी ने खुद को बेवफा क्यों कहा था, इस का कारण मैं कतई नहीं

समझ सका था. तभी राजीव अपने नौकर को कुछ हिदायत देने के लिए मकान के भीतरी भाग में गए तो मैं ने मौसीजी से धीमी आवाज में अपने मन में खलबली मचा रहे सवाल को पूछ डाला, ‘‘आप ने अभीअभी अपने को बेवफा क्यों कहा?’’

मेरी आंखों में संजीदगी से झांकते हुए मौसीजी ने मेरे सवाल का जवाब देना शुरू किया, ‘‘नीरज, हमारे बीच जो तलाक हुआ उस का दूसरे नंबर पर आने वाला महत्त्वपूर्ण कारण तो मैं तुम्हें पहले ही बता चुकी हूं. इन्हें दोस्तों के साथ आएदिन शराब पीने की लत थी और मुझे शराब की गंध से भी बहुत ज्यादा नफरत थी. मैं इस कारण इन से झगड़ा करती तो ये मुझ पर हाथ उठा देते थे.

ये भी पढ़ें- मुक्ति

‘‘तब मैं रूठ कर मायके भाग जाती. ये मुझे जाने देते, क्योंकि इन्हें अपने दोस्तों के साथ पीने से रोकने वाला कोई न रहता. फिर जब मेरी याद सताने लगती तो मुझे लेने आ जाते. मेरे सामने कभी शराब न पीने वादा करते तो मैं वापस आ जाती थी.’’

‘‘लेकिन इन के वादे झूठे साबित होते. शराब पीने की लत हर बार जीत जाती. हमारा फिर झगड़ा होता और मैं फिर से मायके भाग आती. यह सिलसिला करीब 3 महीने चला और फिर अमित मेरी जिंदगी में आ गया.’’

‘‘अमित कौन?’’

‘‘जो आज तुम्हारे मौसाजी हैं. उन्हीं का नाम अमित है, नीरज. वे मेरी एक सहेली के बड़े भाई थे. उन की पत्नी की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी. उन्होंने जब मेरे दांपत्य जीवन की परेशानियों और दुखों को जाना तो बहुत गुस्सा हो उठे. मेरे लिए उन के मन में सहानुभूति के गहरे भाव पैदा हुए. पहले वे मेरे शुभचिंतक बने, फिर अच्छे दोस्त और बाद में हमारी दोस्ती प्रेम में बदल गई.’’

‘‘नीरज, ये राजीव भी दिल के बहुत अच्छे इंसान होते थे. हमारे बीच प्यार का रिश्ता भी मजबूत था, लेकिन इन्होंने शराब पीने की सुविधा पाने को मुझे मायके भाग जाने की छूट दे कर बहुत बड़ी गलती करी थी. विधुर अमित ने इस भूल का फायदा उठा कर अपना घर बसा लिया और राजीव की गृहस्थी ढंग से बसने से पहले ही उजड़ गई.

‘‘राजीव ने मेरे सामने बहुत हाथ जोड़े थे. छोटे बच्चे की तरह बिलख कर रोए भी पर मेरे दिल में तो इन की जगह अमित ने ले ली थी. मैं ने अमित के साथ भविष्य के सपने देखने शुरू कर दिए थे. मैं ने इन के साथ बेवफाई करी और ये हमारे बीच तलाक का पहला और मुख्य कारण बन गया.’’

‘‘मैं मानती हूं कि मैं ने राजीव के साथ बहुत गलत किया. अब तक भी मैं अपने मन में बसे अपराधबोध से मुक्त नहीं हो पाई हूं और इसी कारण तलाक हो जाने के बावजूद इन की खोजखबर लेने आती रहती हूं. क्या अब तुम समझ सकते हो कि मैं तुम्हें आज यहां अपने साथ क्यों लाई हूं?’’

‘‘क्यों?’’ बात कुछकुछ मेरी समझ में आई थी और इसी कारण मेरा मन बहुत बेचैन हो उठा था.

ये भी पढ़ें- घर लौट जा माधुरी: भाग 1

‘‘तुम भी वैसी ही मिस्टेक कर रहे हो जैसी कभी राजीव ने करी थी. ये बेरोकटोक शराब पीने की खातिर मुझे मायके भाग जाने देते थे और तुम रितु के साथ ऐश करने को शिखा को मायके जा कर रहने की फटाफट इजाजत दे देते हो. कल को…’’

‘‘मेरा रितु के साथ किसी तरह का चक्कर…’’

‘‘मुझ से झूठ बोलने का क्या फायदा है, नीरज? मैं ने तुम्हें रसोई में और रितु को ड्राइंगरूम में गले लगाया था. तुम्हारे कपड़ों में से रितु के सैंट की महक बहुत जोर से आ रही थी और तुम भला लड़कियों वाला सैंट क्यों प्रयोग करोगे?’’

‘‘मैं अपनी भूल स्वीकार करता हूं, मौसीजी,’’ और ज्यादा शर्मिंदगी से बचने के लिए मैं ने उन्हें टोक दिया और फिर तनावग्रस्त लहजे में बोला, ‘‘पर आप मुझे एक बात सचसच बताना कि क्या मायके में रहने की शौकीन शिखा का वहां किसी के साथ चक्कर चल रहा है?’’

‘‘नहीं, बालक. मगर ऐसा कभी नहीं हो सकता है, इस की कोई गारंटी नहीं. रितु के साथ मौज करने के लिए तुम जो अपने विवाहित जीवन की खुशियों और सुरक्षा को दांव पर लगा रहे हो, वह क्या समझदारी की बात है? कल को अगर कोई अमित उस की जिंदगी में भी आ गया तो क्या करोगे?’’

‘‘मैं ऐसा कभी नहीं होने दूंगा,’’ मैं उत्तेजित हो उठा.

‘‘राजीव ने भी कभी मुझे खो देने की कल्पना नहीं करी थी, नीरज. जैसे मैं भटकी वैसे ही शिखा क्यों नहीं भटक सकती है?’’

ये भी पढ़ें- लाजवंती: भाग 1

‘‘मैं उसे कल ही वापस…’’

‘‘कल क्यों? आज ही क्यों नहीं, बालक?’’

‘‘हां आज ही…’’

‘‘अभी ही क्यों नहीं निकल जाते हो उसे अपने पास वापस लाने के लिए?’’

‘‘अभी चला जाऊं?’’

‘‘बिलकुल जाओ, बालक. नेक काम में

देरी क्यों?’’

‘‘तो मैं चला, मौसीजी. मैं आप को विश्वास दिलाता हूं कि शिखा के साथ आपसी प्रेम की जड़ें मैं बहुत मजबूत कर लूंगा. मेरी आंखें खोलने के लिए बहुतबहुत धन्यवाद.’’ कह मैं ने उन के पैर छुए और फिर लगभग भागता सा शिखा के पास पहुंचने के लिए दरवाजे की तरफ चल पड़ा.

ये बी पढ़ें- कृष्णकली ससुराल चली… ठीक है: भाग 1

तुम प्रेमी क्यों नहीं: भाग 2

पहला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- 

लेखक- परशीश

मुझे याद है, एक बार मैं फ्लू की चपेट में आ गई थी. शेखर ने बिना देर किए दवा मंगा दी थी, पर मैं जानबूझ कर अपने को बीमार दिखा कर बिस्तर पर ही पड़ी रही थी. शेखर ने तुरंत मायके से मेरी छोटी बहन सुलू को बुला लिया था. मैं चाहती थी कि शेखर नीरू के रवि की तरह ही मेरी तीमारदारी करे, मेरे स्वास्थ्य के बारे में बारबार पूछे, मनाए, हंसाए, मगर ऐसा कुछ न हुआ. बीमारी आई और भाग गई.

इतना ही नहीं, शेखर स्वयं बीमार पड़ता तो इस बात की मुझ से कभी अपेक्षा नहीं करता कि मैं उस की सेवाटहल में लगी रहूं. मैं जानबूझ कर उस के पास बैठ भी जाऊं तो मुझे जबरन उठा कर किसी काम में लगवा देता या अपने दफ्तरी हिसाब के जोड़तोड़ में लग जाता. ऐसी स्थिति में मैं गुस्से से उबल पड़ती. अगर कभी रवि बीमार होता तो उस की डाक्टर सिर्फ नीरू होती.

ये भी पढ़ें- राहुल बड़ा हो गया है

‘‘मैं रवि को पा कर कभी निराश नहीं होऊंगी, दीदी,’’ नीरू अकसर कहती, ‘‘उसे हमेशा मेरी चिंता सताती रहती है. मैं अगर चाहूं तो भी लापरवाह नहीं हो सकती. पहले ही वह टोक देगा. कभीकभी उस की याददाश्त पर मैं दंग हो जाती हूं. लगता है, जैसे वह डायरी या कैलेंडर हो.’’

याददाश्त के मामले में भी शेखर बिलकुल कोरा है. अगर कहीं जाने का कार्यक्रम बने तो वह अधिकतर भूल ही जाता है. सोचती हूं कि किसी दिन वह कहीं मुझे ही न भूल जाए.

एक दिन मैं ने शादी वाली साड़ी पहनी थी. शेखर ने देखा और एक हलकी सी मिठास से वह घुल भी गया, पर वह बात नहीं आई जो नीरू के रवि में पैदा होती. मुझे इतना गुस्सा आया कि मुंह फुला कर बैठ गई. घंटों उस से कुछ न बोली. शेखर को किसी भी चीज की जरूरत पड़ी तो गुड्डी के हाथों भिजवा दी. शेखर ने रूठ कर कहा, ‘‘अगर गुड्डी न होती तो आप हमें ये चीजें किस तरह से देतीं?’’

‘‘डाक से भेज देती,’’ मैं ने ताव खा कर कहा. शेखर हंसने लगा, ‘‘इतनी सी बात पर इतना गुस्सा. हमें पता होता कि बीवियों की हर बात की प्रशंसा करनी पड़ती है तो शादी से पहले हम कुछ ऐसीवैसी किताबें जरूर पढ़ लेते.’’

ये भी पढ़ें- मुक्ति

मैं ने भन्ना कर शेखर को देखा और बिलकुल रोनेरोने को हो आई, ‘‘प्रेमी होना हर किसी के बस की बात नहीं होती. तुम कभी प्रेमी न बन पाओगे. रवि को तो तुम ने देखा होगा?’’

‘‘कौन रवि?’’ शेखर चौंका, ‘‘कहीं वह नीरू का प्रेमी तो नहीं?’’

‘‘जी हां, वही,’’ मैं ने नमकमिर्च लगाते हुए कहा, ‘‘नीरू की एकएक बात की तारीफ हजार शब्दों में करता है. तुम्हारी तरह हर समय चुप्पी साधे नहीं रहता. बातचीत में भी इतनी कंजूसी अच्छी नहीं होती.’’

‘‘अरे, तो मैं क्या करूं. बिना प्रेम का पाठ पढ़े ही ब्याह के खूंटे से बांध दिए गए. वैसे एक बात है, प्रेमी बनना बड़ा आसान काम है समझीं, मगर पति बनना बहुत मुश्किल है.

‘‘जाने कितनी योग्यताएं चाहिए पति बनने के लिए. पहले तो उत्तम वेतन वाली नौकरी जिस से लड़की का गुजारा भलीभांति हो सके. सिर पर अपनी छत है या नहीं, घर कैसा है, उस के घर के लोग कैसे हैं, घर में कितने लोग हैं. लड़के में कोई बुराई तो नहीं, उस के अच्छे चालचलन के लिए पासपड़ोसियों का प्रमाणपत्र आदि चाहिए और जब पूरी तरह पति बन जाओ तो अपनी सुंदर पत्नी की बुराइयों को दूर करने का प्रयत्न करो. अपनेआप को ही लो. तुम्हें सोना, सजनासंवरना, गपें मारना, फिल्में देखना आदि यही सब तो आता था. नकचढ़ी भी कितनी थीं तुम. हमारे घर की सीमित सुविधाओं में तुम्हारा दम घुटता था.’’

ये भी पढ़ें- घर लौट जा माधुरी: भाग 1

अब शेखर बिलकुल गंभीर हो गया था, ‘‘तुम जानती ही हो कैसे मैं ने धीरेधीरे तुम्हें बिलकुल बदल दिया. व्यर्थ गपें मारना, फिल्में देखना सब तुम ने बंद कर दिया. फिर तुम ने मुझे भी तो बदला है,’’ शेखर ने रुक कर पूछा, ‘‘अब कहो, तुम्हें शेखर की भूमिका पसंद है या रवि की?’’

‘‘रवि की,’’ मैं दृढ़ता से बोली, ‘‘प्रेम ही जिंदगी है, यह तुम क्यों भूल जाते हो?’’

‘‘क्यों, मैं क्या तुम से प्रेम नहीं करता. हर तरह से तुम्हारा खयाल रखता हूं. जो बना कर देती हो, खा लेता हूं. दफ्तर से छुट्टी मिलते ही फालतू गपशप में उलझने के बजाय सीधा घर आता हूं. तुम्हें जरा सी छींक भी आए तो फौरन डाक्टर हाजिर कर देता हूं. क्या यह प्रेम नहीं है?’’

‘‘यह प्रेम है या कद्दू की सब्जी?’’ मैं बिलकुल झल्ला गई, ‘‘तुम्हें प्रेम करना रवि से सीखना पड़ेगा. दिनरात नीरू से जाने क्याक्या बातें करता रहता है. उस की तो बातें ही खत्म नहीं होतीं. नीरू कुछ भी ओढ़ेपहने, खाएपकाए रवि उस की प्रशंसा करते नहीं थकता. नीरू तो उसे पा कर किसी और चीज की तमन्ना ही नहीं रखती.’’

‘‘अच्छा तो यह बात है. तब तुम ने नीरू से कभी यह क्यों नहीं कहा कि वह रवि से शादी कर ले.’’

ये भी पढ़ें- लाजवंती: भाग 1

‘‘कहा तो है…’’

‘‘फिर वह विवाह उस से क्यों नहीं करता?’’

‘‘रवि का कहना है कि जब तक उस के अंदर की कविता शेष न हो जाए तब तक वह विवाह नहीं करना चाहता. विवाह से प्रेम खत्म हो जाता है.’’

‘‘सब बकवास है,’’ शेखर उत्तेजित हो कर बोला, ‘‘आदमी की कविता भी कभी मरती है? जिस व्यक्ति ने सभ्यता को विनाशकारी अणुबम दिया, उस के अंदर की भी कविता खत्म नहीं हुई थी. ऐसा होता तो वह कभी अपने अपराधबोध के कारण आत्महत्या नहीं करता, समझीं. असल में रवि कभी भी नीरू से शादी नहीं करेगा. यह सब उस का एक खेल है, धोखा है.’’

‘‘क्यों?’’ मैं ने घबरा कर पूछा.

‘‘असल में बात तो प्रेमी और पति बनने के अंतर की है, यह रवि का चौथा प्रेम है. इस से पहले भी उस ने 3 लड़कियों से प्रेम किया था.

‘‘जब पति बनने का अवसर आया, वह भाग निकला. प्रेमी बनना बड़ा आसान है. कुछ हुस्नइश्क के शेर रट लो. कुछ विशेष आदतें पाल लो…और सब से बड़ी बात अपने सामने बैठी महिला की जी भर कर तारीफ करो. बस, आप सफल प्रेमी बन गए.

ये भी पढ़ें- कृष्णकली ससुराल चली… ठीक है: भाग 1

‘‘जब भी शादी की बात आएगी, देखना कैसे दुम दबा कर भाग निकलेगा.

‘‘तुम देखती चलो, आगेआगे होता है क्या? अब भी तुम्हें शिकायत है कि मैं रवि जैसा प्रेमी क्यों नहीं हूं? और अगर है तो ठीक है, कल से मैं भी कवितागजल की पुस्तकें ला कर तैयारी करूंगा. कल से मेरी नौकरी बंद. गुड्डी की देखभाल बंद, तुम्हारे शिकवेशिकायतें सुनना बंद, बाजारघर का काम बंद. बस, दिनरात तुम्हारे हुस्न की तारीफ करता रहूंगा.’’

शेखर के भोलेपन पर मेरी हंसी छूट गई. अब मैं कहती भी क्या क्योंकि यथार्थ की जमीन पर आ कर मेरे पैर जो टिक गए थे.

‘‘सपोर्ट सिस्टम बहुत जरुरी है..’’ -रकुल प्रीत सिंह

दिल्ली निवासी रकुल प्रीत सिंह नें तमिल व तेलगू फिल्मों में दस वर्षाे से काम करते हुए अपनी एक अलग पहचान बना ली है. 2014 में उन्होने ‘‘यारियां’’ से बौलीवुड में कदम रखा था. मगर फिर वह दक्षिण भारत मे ही व्यस्त हो गयीं थी. पर पिछले दो वर्षो से वह लगातार बौलीवुड में काम कर रही हैं. 2018 में ‘अय्यारी’ के बाद 2019 में अजय देवगन के साथ फिल्म ‘दे दे प्यार दे’ में नजर आयीं थी. अब 15 नवंबर को प्रदर्शित हो रही मिलाप झवेरी प्रदर्शित फिल्म ‘‘मरजावां’’ में वह तारा सुतारिया, सिद्धार्थ मल्होत्रा व रितेश देशमुख के साथ नजर आएंगी.

ये भी पढ़ें- Bigg Boss 13: इस कंटेस्टेंट नें बोला सिद्धार्थ शुक्ला को ‘नामर्द’, भड़क उठीं नताशा सिंह

प्रस्तुत है उनसे हुई एक्सक्लूसिब बातचीत के अंश:

2009 से 2019 दस साल का आपका कैरियर है. इस कैरियर को किस रूप में देखती हैं?

– अरे मैं पंडित थोड़े ही हूं. लेकिन जिस मुकाम पर भी हूं, उससे खुश हूं. देखिए, जब मैने अभिनय में कदम रखा, तो मेरे पास खोने को कुछ नहीं था. मेरी पहली फिल्म तेलगू भाषा में थी, जो कि मेरी अपनी भाषा नही है. तेलगू भाषा की फिल्में करते हुए वहां के फिल्मकारों, कलाकारों व दर्शकों का मुझे जो प्यार मिला है, वह मेरे लिए बहुत खास है. फिर बौलीवुड में मैने टीसीरीज की फिल्म ‘‘यारियां’’ से कदम रखा था. जिसके चलते ‘टीसीरीज’ से मेरा खास संबंध बन गया. फिर मुझे अजय देवगन के साथ फिल्म ‘‘दे दे प्यार दे’’ करने का अवसर मिला. मैं इससे अच्छी फिल्म की मांग नहीं कर सकती थी. यह फिल्म ‘शो रील’ की तरह है. जहां सब कुछ देखने को मिला. लोगो ने फिल्म को सराहा. मेरे काम को भी सराहा. उसके बाद अब मैने ‘मरजावां’ में बहुत अलग तरह का किरदार निभाया है. दो तीन दूसरी हिंदी फिल्में साइन की है, जिनमे मेरे किरदार बहुत ही अलग तरह के हैं. तो मैं खुश हूं. मै बहुत ज्यादा सोचती नहीं हूं. मेरे लिए मेरी जिंदगी में महत्वपूर्ण बात यह है कि मैं खुशी खुशी काम करुं.

ये भी पढ़ें- प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस को शाहिद कपूर ने दी ये सलाह

दक्षिण भारत व बौलीवुड में आपको सबसे बड़ा फर्क क्या नजर आता है?

– फिल्मों में कोई फर्क नहीं. वहां भी बौलीवुड की तरह कंटेंट प्रधान और मासी फिल्में हैं. ‘मरजावां’ बौलीवुड की मसाला फिल्म है. हां! फर्क यह है कि वहां पर शाम को छह बजे शूटिंग का पैकअप हो जाता है. जबकि सुबह आठ बजे हम शूटिंग करने के लिए तैयार रहते हैं. वहां पर छह से छह की शिफ्ट होती है, जबकि यहां पर नौ से नौ की शिफ्ट होती है, तो रात के दस ग्यारह बज जाते हैं. परिणामतः पूरा दिन चला जाता है. पर शाम को छह बजे शूटिंग खत्म हो जाए, तो हमें घर जाकर दूसरे दिन के लिए फ्रेश होने का वक्त मिल जाता है.

फिल्म ‘‘मरजावां’’ क्या है?

– यह एक एक्षन ड्रामा फिल्म है, जिसमें प्यार में जो दर्द होता है, उसका चित्रण है.

‘‘मरजावां’’ में आपका किरदार हीरोईन का नहीं है. फिर आपने इसे क्यों किया?

– जब मैं अजय देवगन के साथ फिल्म ‘दे दे पर दे’ की शूटिंग कर रही थी, तब मिलाप झवेरी मेरे पास इस फिल्म का औफर लेकर आए थे. उन्होने कहा कि यह एक पावरफुल किरदार है. फिल्म में स्पेशल किरदार है. इसमें मेरा किरदार दमदार है, जैसा कि फिल्म ‘‘मुकद्दर का सिकंदर’’ में रेखा जी का किरदार था. मैने कहानी व किरदार सुना, तो अच्छा लगा. इस तरह के किरदार नब्बे के दषक में हुआ करते थे, जहां नजाकत, शेरो शायरी होती थी. इसमें मेरा तवायफ का किरदार है, मगर बहुत स्ट्रांग है. मुझे अच्छा लगा. मुझे लगा कि इसमे अलग तरह का स्कोप मेरे अभिनय में नजर आएगा, इसलिए मैने यह फिल्म की.

ये भी पढ़ें- मनोज आर पांडे की फिल्म देवरा सुपरस्टार का फर्स्ट लुक जारी

अपने किरदार को कैसे परिभाषित करेंगी?

– मैने इसमें आरजू का किरदार निभाया है, जो कि एक वेष्या/तवायफ है. जिसके कई लोग दीवाने हेैं. जबकि आरजू खुद रघू की दीवानी है. उनकी नजाकत, बात करने का अंदाज, शेरो शायरी के चलते उसके किरदार में एक ग्रेस है.

तारा सुतारिया और मिलाप झवेरी के साथ यह आपकी पहली फिल्म है. इनके साथ क्या अनुभव रहे?

– बहुत ही अच्छे अनुभव रहे. मुझे लगता है कि मिलाप का सबसे स्ट्रांग प्वाइंट है उनके द्वारा लिखे गए संवाद और विषय को लेकर उनका कंविक्शन है. वह बहुत ही अच्छे इंसान हैं. तारा भी बहुत अच्छी हैं. उनके साथ काम करके मजा आया. हम लोगों के साथ में ज्यादा सीन नहीं है. हमने 4 से 5 दिन एक साथ शूटिंग की. सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ यह मेरी दूसरी फिल्म है. इससे पहले मैंने उनके साथ फिल्म ‘अय्यारी’ की थी.

इस बार कलाकार के तौर पर आपने सिद्धार्थ में क्या बदलाव महसूस किया?

– सिद्धार्थ ने इस फिल्म के लिए बहुत मेहनत की है. उन्होंने अपनी बौडी से लेकर बौडी लैंग्वेज पर काफी काम किया है. जिस तरह से वह संवाद बोल रहे है, वह चुनौतीपूर्ण है.जब हम लोग इतने बड़े-बड़े संवाद बोलते हैं, तो जरुरी होता है कि वह नकली न लगे. ऐसा करना काफी कठिन होता है. पर उनके संवाद आपको यकीन दिलाएंगे.

ये भी पढ़ें- जानें क्या है आयुष्मान खुराना की नई फिल्म “बाला” की सबसे खास बात

आपको अपने किरदार के लिए कुछ तैयारी करनी पड़ी?

– जी हां! एक अलग तरह की बौडी लैंग्वेज है. मेरा आरजू का किरदार तारा सुतारिया के किरदार आएशा की तरह बात नही कर सकती. मैने होमवर्क के तहत डांस बार में जाकर देखा कि बार गर्ल की बैडी लैंग्वेज क्या होती है. वह किस अंदाज में खड़ी होती हैं.उनका हाथ हमेशा किस तरह से रहता है.

आप अब तक 30 फिल्में कर चुकी हैं. किस फिल्म के किस किरदार ने आपकी निजी जिंदगी पर असर किया?

– किसी ने नहीं किया. मैं हमेशा इस बात को ध्यान में रखती हूं कि काम को काम की तरह करना है. पैकअप बोलने के बाद दिमाग से एकदम से उस किरदार का पैकअप हो जाना बहुत जरूरी है. अन्यथा निजी जिंदगी खत्म हो जाती है. कलाकार डिप्रेशन में चले जाते हैं. मुझे लगता है कि जब आपके पास कोई सपोर्ट सिस्टम होता है, फिर चाहे परिवार हो या दोस्त हो, तो काम करने के बाद उनके साथ बातें करने से आप भूल सकते है कि आप किस तरह से किरदार को निभाकर आयी हैं. और कलाकार एकदम फ्रेश हो जाता है.

ये भी पढ़ें- Bigg Boss 13: सभी घरवाले हुए सिद्धार्थ के खिलाफ, गुस्सा में कही ये बात

आपने अब तक हिंदी में जितनी भी फिल्में की, उनमें आप सोलो हीरोईन नहीं हैं?

– ऐसा न कहें. फिल्म ‘दे दे प्यार दे’ में तो तब्बू जी इंटरवल के बाद आई थी. इस फिल्म में मेरा किरदार ही अहम था.

आपने दक्षिण की भाषाएं सीखी हैं?

– नहीं..मगर मैं तेलगू बहुत अच्छी बोल लेती हूं. मैंने कन्नड़ में दस साल पहले एक फिल्म की थी. उसके बाद नहीं की. कन्नड़ फिल्म पौकेटमनी के लिए की थी. उसके बाद मैंने कौलेज की पढ़ाई खत्म करने के बाद तेलगू फिल्म से शुरूआत की. मुझे तमिल समझ में आ जाती है. टूटी फूटी तमिल बोल भी लेती हूं.

सोशल मीडिया पर कितना व्यस्त है और क्या लिखना पसंद करती हैं?

– बहुत कम. अगर आप मेरा इंस्टाग्राम देखेंगे, तो मैं बहुत कम उसमें पोस्ट करती हूं. कुछ नृत्य व जिम में वर्क आउट की तस्वीरें पोस्ट करती हूं. जब छुट्टियां मनाने जाती हूं, तो उसकी तस्वीरे डालती हूं. फिल्म को प्रमोट करती हूं. मुझे लगता है कि मैं क्या हूं, यह बात मेरे सोशल मीडिया के फैंस को पता होना चाहिए. लोगों को कई बार लगता है कि कलाकार की जिंदगी तो बहुत ज्यादा ग्लैमरस है. उनको लगता है कि हम लोग उन पर ध्यान नहीं देते हैं. इसलिए मुझे लगता है कि उनको असलियत दिखाना बहुत जरूरी है. क्योंकि हमारे भी बुरे दिन हो सकते हैं. मेरा भी चेहरा एक दिन खराब दिख सकता है. मेरे भी एक दिन दांत खराब हो सकते हैं. क्योंकि हम लोग भी एक आम इंसान ही हैं. कई लोगों को लगता है कि यह गोरे हैं. और हम इनकी तरह नहीं है. पर ऐसा नहीं है. सभी के अच्छे व बुरे दिन होते हैं. मुझे लगता है कि सोशल मीडिया बहुत ही अच्छा जरिया है लोगों के साथ जुड़ने का. जब आप लोगों को इनफ्लुएंस कर लेते हैं, तो आप उनसे सामाजिक मुद्दों पर भी बात कर सकते हैं. प्रदूषण को लेकर बात कर सकते हैं.

ये भी पढ़ें- सैटेलाइट शंकर: और बेहतर हो सकती थी फिल्म

आपकी आने वाली फिल्में कौन- कौन सी हैं?

– दो तमिल फिल्में है. तीन हिंदी फिल्में साइन की है, उनकी घोषणा जल्दी होगी.

Bigg Boss 13: इस कंटेस्टेंट नें बोला सिद्धार्थ शुक्ला को ‘नामर्द’, भड़क उठीं नताशा सिंह

बिग बौस सीजन 13 के घर में इन दिनों काफी गरम माहौल दर्शकों को नजर आ रहा है. सभी सदस्य कंटेस्टेंट सिद्धार्थ शुक्ला को टारगेट करते दिखाई दे रहे हैं, और ये सिलसिला तब से ज्यादा बढ़ गया जब से घर की बहुएं यानी कि देबोलीना भट्टाचार्जी और रश्मि देसाई नें घर के अंदर दोबारा एंट्री मारी. रश्मि देसाई देसाई तो शो की शुरूआत से ही सिद्धार्थ के पीछे हाथ धो के पड़ी हुईं थी ते वहीं आब दूसरी तरफ जब से वे दोबारा शो के अंदर आईं है तब से इस काम में उनका साथ पारस छाबड़ा और माहिरा शर्मा दे रहे हैं.

ये भी पढ़ें- Bigg Boss 13: सभी घरवाले हुए सिद्धार्थ के खिलाफ, गुस्सा में कही ये बात

रश्मि देसाई नें सिद्धार्थ शुक्ला को कहा ‘नामर्द’

सिद्धार्थ को प्रोवोक करने के लिए और उन्हें हर बार पर टारगेट करने के चलते रश्मि देसाई नें सिद्धार्थ शुक्ला को नामर्द कह दिया तो वहीं दूसरी तरफ माहिरा शर्मा नें उन्हें बूढ़ा कह कर बुलाया. इस दौरान सिद्धार्थ शुक्ला की दोस्त नताशा सिंह काफी गुस्से में आ गईं. जी हां एक इंटरव्यू के चलते नताशा सिंह नें कहा कि, “बिग बौस के घर में लगातार सिद्धार्थ शुक्ला के लिए भद्दे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में किसी भी इंसान को गुस्सा तो आएगा ही.”

ये भी पढ़ें- Bigg Boss 13: सबसे ज्यादा रकम चार्ज करने वाला कंटेस्टेंट होगा घर से बेघर

सिद्धार्थ और रश्मि के रिश्ते की बात करते हुए बताया कि…

नताशा सिंह नें आगे कहा कि, “पिछले कुछ दिनों में सिद्धार्थ शुक्ला पर काफी घटिया कमेंट्स किए गए हैं. इसके बाद भी वह चुप रहने की कोशिश करता है. ये बात अलग है कि उसकी तिलमिहालट गुस्से में साफ झलकती है.” नताशा सिंह नें सिद्धार्थ शुक्ला और रश्मि देसाई के रिश्ते की बात करते हुए बताया कि “मुझे इस दोनों की पर्रसनल लाइफ के बारे में ज्यादा नहीं पता लेकिन अगर सिद्धार्थ शुक्ला इतना ही बुरा था तो रश्मि देसाई उसके इतने करीब क्यों आई. सीरियल ‘दिल से दिल तक’ खत्म होने के बाद भी ये दोनों काफी अच्छे दोस्त थे और अब रश्मि देसाई सिद्धार्थ को नामर्द बताती है.”

ये भी पढ़ें- Bigg Boss 13: इस कंटेस्टेंट पर भड़के फैंस, सिद्धार्थ शुक्ला को दिखाया जूता

माहिरा को अपनी जुबान पर लगाम लगानी चाहिए…

नताशा सिंह नें अपनी नाराजगी माहिरा शर्मा की ओर भी जताते हुए कहा कि, “40 साल का होने का मतलब ये नहीं है कि, इसांन बूढ़ा हो गया है. माहिरा को अपनी जुबान पर लगाम लगानी चाहिए”. नताशा नें आगे बताया कि इनकी इमेज सबके सामने एक प्ले बौय की तरह बनी हुई है पर सिद्धार्थ ऐसा बिल्कुल नहीं है. इन सब के चलते इतना तो तय है कि घर के अंदर भले ही सब सिद्धार्थ के खिलाफ हों पर बाहर के लोग उन्हें सपोर्ट भी कर रहे हैं.

ये भी पढ़ें- Bigg Boss 13: इस दिन होगी घर के अंदर बहुओं की एंट्री, जानें किसकी लगेगी वाट

प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस को शाहिद कपूर ने दी ये सलाह

शाहिद कपूर हाल ही में नेहा धूपिया के शो में पहुंचे. इस दौरान दोनों ने खूब बातचीत की. शो के दौरान नेहा ने जब शाहिद से कहा कि वो प्रियंका को परफ़ेक्ट रिलेशनशिप एडवाइस देना चाहेंगे तो शाहिद ने कुछ ऐसा कहा जिसे सुनकर देसी गर्ल को जरूर अपने एक्स बौयफ्रेंड पर नाज होगा.

क्या बोले शाहिद….

प्रियंका और निक को रिलेशनशिप एडवाइस देते हुए शाहिद ने कहा- दोनों को एक दूसरे के बैकग्राउंड को अच्छे से समझना चाहिए क्योंकि दोनों अलग-अलग बैकग्राउंड से आते हैं. अब शाहिद की एडवाइस पर प्रियंका का क्या रिएक्शन आता है ये देखना होगा.

वैसे बता दें कि प्रियंका और शाहिद ने ‘कमीने’ और ‘तेरी मेरी कहानी’ जैसी फिल्मों में साथ काम किया था. लेकिन कुछ साल की डेटिंग के बाद दोनों अलग हो गए.

ये भी पढ़ें- मनोज आर पांडे की फिल्म देवरा सुपरस्टार का फर्स्ट लुक जारी

लाइव कॉन्सर्ट के बीच निक ने प्रियंका को किया Kiss, वीडियो हुआ वायरल

प्रियंका इन दिनों पति निक के साथ टाइम स्पेंड कर रही हैं. इसके साथ ही वो निक के कॉन्सर्ट में भी जाती रहती हैं. अब हाल ही में ऐसे ही लाइव कॉन्सर्ट के बीच निक ने प्रियंका को किस किया जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.

वीडियो में आप देखेंगे कि प्रियंका और निक के भाई केविन की पत्नी डेनियल ऑडिटोरियम के वीआईपी एरिया में खड़ी हैं और फिर वहां से तीनों भाई परफॉर्म करते हुए जाते हैं. इस दौरान निक, प्रियंका को किस करते हैं. दोनों जैसे ही एक दूसरे को किस करते हैं तो फ़ैन्स भी ज़ोर से चिल्लाने लगते हैं.

साथ में मनाया करवा चौथ…

अभी कुछ दिनों पहले प्रियंका और निक ने साथ में पहला करवा चौथ मनाया. प्रियंका ने अमेरिका में करवा चौथ मनाया. इस दौरान प्रियंका ने रेड कलर की साड़ी पहनी थी. वहीं निक ने भी कुर्ता पजामा पहना था. इसके साथ ही उस दिन निक का कॉन्सर्ट भी था तो प्रियंका उसमें चूड़ा पहनकर गई थीं.

प्रियंका की प्रोफेशनल लाइफ़ की बात करें तो वो लास्ट फिल्म ‘द स्काई इज पिंक’ में नज़र आई थीं. प्रियंका ने 3 साल बाद इस फ़िल्म से बॉलीवुड में वापसी की है. हालांकि, फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला. फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर फ़्लॉप साबित हुई.

ये भी पढ़ें- Bigg Boss 13: इस कंटेस्टेंट पर भड़के फैंस

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की दूरदर्शिता ने बचा ली ठाकरे परिवार की सियासी जमीन

समझने ही नहीं देती सियासत हम को सच्चाई, कभी चेहरा नहीं मिलता कभी दर्पन नहीं मिलता…सियासत के ऊपर अज्ञात का शेर मौजूदा महाराष्ट्र की राजनीति पर बिल्कुल सटीक बैठता है. एक पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी अब तक महाराष्ट्र की जम्हूरियत को उनका निजाम नहीं मिला. जनता ने अपने मौलिक अधिकार का प्रयोग कर मतदान तो किया लेकिन सरकार का गठन अब तक नहीं हो पाया.

आखिरकार 30 साल की घनिष्ठ दोस्ती महज सीएम पद की लड़ाई कैसे टूट गई. इसके पीछे काफी लंबी सोची समझी रणनीति है. जरा गौर कीजिए 2014 विधानसभा चुनावों में. शिवसेना और बीजेपी दोनों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था लेकिन बहुमत किसी को नहीं मिला जिसके बाद दोनों ने मिलकर सरकार बनी और देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाया गया है.

2019 लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, सीएम देवेंद्र फडणवीस उद्धव ठाकरे से मिलने मातोश्री पहुंचे थे. तब तीनों नेताओं ने मिलकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऐलान किया था शिवसेना और बीजेपी लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव दोनों मिलकर लड़ेंगे और सरकार में 50-50 प्रतिशत की भागीदारी होगी. लेकिन अब रिजल्ट आने के बाद पेंच फंस गया. शिवसेना स्टेट में अपना सीएम बनाना चाहती है. इसी रणनीति के तहत ही पहली बार ठाकरे परिवार को कोई सदस्त जनता की अदालत में उतरा था.

ये भी पढ़ें- मोदी को आंख दिखाते, चक्रव्यूह में फंसे भूपेश

क्यों महाराष्ट्र में शिवसेना चाह रही है मुख्यमंत्री पद
केंद्र में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद बीजेपी का देश में ग्राफ बढ़ा है. भारत के उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्वोत्तर से लेकर पश्चिम के कई राज्यों में बीजेपी अपने दम पर सरकार बनाने में सफल रही है. उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है, जिस पर बीजेपी की नजर है. 2014 से पहले तक महाराष्ट्र में शिवसेना बड़े भाई तो बीजेपी छोटे भाई की भूमिका में थी.

बीजेपी 2014 में अकेले दम पर चुनावी मैदान में उतरकर 120 सीटें जीतने में कामयाब रही थी. महाराष्ट्र में शिवसेना उग्र हिंदुत्व, मुसलमान विरोध और पाकिस्तान पर हमलावर विचारधारा को लेकर चली थी, बीजेपी उससे ज्यादा उग्र तेवर अपनाकर और नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे नेताओं को आगे करके शिवसेना के सामने बड़ी लकीर खींच चुकी है. महाराष्ट्र में शिवसेना का बालासाहेब ठाकरे के दिनों वाला जलवा खत्म हो चुका है. इसी का नतीजा था कि 2019 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन में बीजेपी को 164 और शिवसेना को 124 सीटों पर किस्मत आजमानी पड़ी.

बीजेपी को महाराष्ट्र की सत्ता में अपने दमपर आने के लिए एक न एक दिन शिवसेना को पीछे छोड़ना था. ऐसे में शिवसेना सीएम की कुर्सी के लिए खुद ही बीजेपी का साथ छोड़कर कांग्रेस और एनसीपी के साथ हाथ मिलने जा रही है. ऐसे में बीजेपी की मन की मुराद पूरी होती नजर आ रही है, क्योंकि शिवसेना के साथ उसका 1989 से गठबंधन चल रहा था. ऐसे में बीजेपी ने यह महायुति खुद न तोड़कर गेंद शिवसेना के पाले में डाल दी थी.

कांग्रेस-एनसीपी के साथ जाने के बाद शिवसेना को अपने उग्र हिंदुत्व की राजनीति और मुस्लिम विरोधी सियासत से भी समझौता करना पड़ेगा. ऐसे में यह फैसला हो गया कि महाराष्ट्र में उग्र हिंदुत्व की प्रतिनिधि पार्टी अब शिवसेना नहीं बल्कि बीजेपी रहेगी. अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला राममंदिर के पक्ष में आ चुका है और मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को हटाकर बड़ा दांव चल चुकी है, जिससे उसे अपना सियासी आधार बढ़ाने और अपने दम पर सत्ता में आने की उम्मीद नजर आ रही है.

उद्धव ठाकरे का ये फैसला उनकी राजनीति के हिसाब से बिल्कुल सटीक बैठता है. अगर उद्धव इस बार भी 2014 के माफ़िक बीजेपी के हाथों सरेंडर हो जाते तो ठाकरे परिवार की राजनीति खत्म होने की कगार पर आ जाती. उद्धव ठाकरे की राजनीति जिन मुद्दों पर टिकी थी, भाजपा ने उसको भी खींच लिया. उद्धव ठाकरे की दूरदर्शिता यहां पर उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर बिल्कुल सटीक थी. वो भांप गए थे कि अगर अब बीजेपी ने दोबारा शासन किया तो राज्य में उनका प्रभुत्व स्थापित हो जाएगा.

ये भी पढ़ें- सेक्स स्कैंडल में फंसे नेता और संत

वहीं एक बात और भी गौर करने वाली है. चुनाव के पहले तक जितने भी न्यूज चैनल एग्जिट पोल दिखा रहे थे. उसमें बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिलता दिख रहा था. हरियाणा में तो कुछ चैनल्स 70 सीटों तक बीजेपी को दे रहे थे लेकिन दोनों की जगह सारे अनुमानों पर पानी फिर गया. बीजेपी हरियाणा में 40 सीटों तक ही सिमट गई और महाराष्ट्र में 105 पर. ये चुनाव तब हुआ था जब कि जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाया गया था. इससे एक बात तो साफ हो गई कि जनता चुनावों में लोकल मुद्दों को नजर अंदाज नहीं कर रही. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने दोनों ही चुनावों में ताकत झोंक दी थी. जबकि कांग्रेस ने हरियाणा में चुनावी कैंपन के नाम पर कुछ खास नहीं किया था.

अब देखना दिलचस्प होगा कि महाराष्ट्र की सियासत किस ओर जाती है. शिवसेना के लिए एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाना भी एक बड़ा चैलेंज होगा क्योंकि दोनों पार्टियों की आइडियोलॉजी बिल्कुल विपरीत है. और इतिहास गवाह है कि जब-जब दो विपरीत विचारधारा की पार्टियों ने सरकार बनाई है वो सरकार पांच साल पूरे नहीं कर पाई है.

T-20 फौर्मेट में गेंदबाजों के आगे फीके पड़े बल्लेबाजों के तेवर, देखें दिलचस्प रिकॉर्ड

17 फरवरी 2005 को पहला टी-20 मैच खेला गया. ये मैच ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया था. याद आता है जब इस फॉर्मेट की शुरूआत हो रही थी तो कई बड़े दिग्गजों ने इसे हानिकारक बताया था. तब कहा गया था कि इस खेल से गेंदबाजों का दमन हो जाएगा. वास्तव में हम सब कुछ ऐसा ही सोचते थे. मैदान पर हर गेंद पर बढ़ता रोमांच. दर्शकों को भी खूब आनंद आता है. 20 ओवर का खेल होता है. 10 विकेट हाथ में होतें हैं. इस फॉर्मेट में बस एक सिद्धांत लागू  होता है वो है बस हिटिंग. ऐसा हमने कई बार देखा भी.

पहला आधिकारिक टी-20 मैच 17 फरवरी, 2005 को ऑकलैंड में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया था. उस मैच में बल्लेबाजों ने अपनी चमक बिखेरते हुए 40 ओवरों में 384 रन बनाए थे लेकिन उसी मैच में ऑस्ट्रेलिया के माइकल कास्प्रोविच ने चार ओवर में 29 रन देकर चार विकेट लेकर साबित कर दिया था कि क्रिकेट के इस सबसे तेज फॉरमेट में गेंदबाजों की अहमियत हमेशा बरकरार रहेगी.

इसी तरह का एक वाक्या रविवार को नागपुर में हुआ, जहां भारत के तेज गेंदबाज दीपक चहर ने हैट्रिक के साथ सात रन देकर छह विकेट लिए और बल्लेबाजों की चमक फीकी करते हुए न सिर्फ भारत को बांग्लादेश पर बड़ी जीत दिलाई बल्कि विश्व रिकार्ड भी कायम किया.

ये भी पढ़ें- हर मोर्चे पर विफल हो रही टीम इंडिया, क्या पूरा हो पाएंगा टी-20 विश्व कप जीतने का सपना

युवा गेंदबाज दीपक चाहर किसी एक टी-20 मैच में सबसे अच्छी गेंदबाजी करने वाले खिलाड़ी बने. दीपक के अलावा श्रीलंका के अजंता मेंडिस (8-6 और 16-6) तथा भारत के युजवेंद्र चहल (25-6) ने ही टी-20 में छह विकेट लिए हैं लेकिन चाहर की कामयाबी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने हैट्रिक के साथ यह सफलता हासिल की और सबसे कम रन देकर छह विकेट हासिल किए.

चहर की कामयाबी शानदार है लेकिन इस फॉरमेट के 14 साल के इतिहास में कई ऐसे मौके आए हैं, जब गेंदबाजों ने अपने प्रदर्शन से लोगों को दांतों तले अंगुली दबाने पर मजबूर किया है. मेंडिस और चहल के अलावा अफगानिस्तान के राशिद खान का भी नाम इनमें शामिल है. राशिद ने 2017 में ग्रेटर नोएडा में आयरलैंड के खिलाफ दो ओवर में एक मेडन सहित तीन रन देकर पांच विकेट लिए थे. यह हैरान कर देने वाला प्रदर्शन है.

टी-20 इतिहास में अब तक कुल नौ गेंदबाज ऐसे हुए हैं, जिन्होंने दहाई की संख्या तक पहुंचे बिना विपक्षी टीम के पांच या उससे अधिक खिलाड़ियों को आउट किया है. इनमें चाहर, मेंडिस (दो बार), श्रीलंका के रंगना हेराथ (3-5), राशिद, अर्जेटीना के पी. अरीघी ( 4-5), पाकिस्तान के उमर गुल (दो मौकों पर 6-5), लक्जमबर्ग के ए, नंदा (6-5), श्रीलंका के लसिथ मलिगा (6-5) और नामीबिया के सी. विल्जोन (9-5) शामिल हैं.

टी-20 क्रिकेट में अब तक करीब 41 बार गेंदबाजों ने पांच या उससे अधिक विकेट लिए हैं लेकिन सिर्फ नौ मौके ऐसे आए हैं जब इन गेंदबाजों ने मेडन डाले हैं. यह फॉर्मेट पूरी तरह बल्लेबाजों को सपोर्ट करता है और ऐसे में मेडन डालना विकेट लेने से कम नहीं. भारत की ओर से यह सौभाग्य अब तक किसी गेंदबाज को नहीं मिला है जबकि मेंडिस, हेराथ, राशिद, आराघी, मलिंगा यह कारनामा कर चुके हैं. 2014 में चटगांव में न्यूजीलैंड के खिलाफ हेराथ ने तो 3.3 ओवर की गेंदबाजी में दो ओवर मेडन डाले थे और तीन रन देकर पांच विकेट विकेट लिए थे.

ये भी पढ़ें- DCP किरण बेदी! के समय भी यही हाल था जो आज

टी-20 में कुल 10 खिलाड़ियों ने हैट्रिक पूरी की है. मलिंगा यह कारनामा दो बार कर चुके हैं. इनमें ऑस्ट्रेलिया के ब्रेट ली, न्यूजीलैंड के जैकब ओरम और टिम साउदी, श्रीलंका के थिसिरा परेरा और मलिंगा, पाकिस्तान के मोहम्मद हसनैन और फहीम अशरफ, ओमान के खावर अली, पापुआ न्यू गिनी के एन. वानुआ और चाहर शामिल हैं. राशिद और मलिंगा के नाम एक खास रिकार्ड दर्ज है. इन दोनों ने इस फॉरमेट में चार गेंदों पर चार विकेट लिए हैं.

अब बात चहर की करते हैं. किसी खिलाड़ी को पता नहीं होता कि उसका करियर कितना लम्बा है और यही कारण है कि वह अपने प्रदर्शन के दम पर अपना नाम खेलों की दुनिया में अमर कर लेना चाहता है. चहर के लिए रविवार को मौका भी था और दस्तूर भी था. साथ ही किस्मत भी उनके साथ थी. चहर ने 7 रन देकर हैट्रिक सहित 6 विकेट लिए, जो एक विश्व रिकॉर्ड है. वह टी-20 में हैट्रिक लेने वाले भारत के पहले पुरुष खिलाड़ी बने. भारत के लिए महिला खिलाड़ी एकता बिष्ट ने हैट्रिक लिया है.

चाहर की सफलता ने भारतीय टीम को सफलता के नए मुकाम पर पहुंचा दिया. भारत इस साल एकमात्र ऐसी टीम बनी, जिसके खिलाड़ियों ने क्रिकेट के तीनों फारमेट में हैट्रिक ली है. चहर ने टी-20 में तो जसप्रीत बुमराह ने वनडे और मोहम्मद समी ने टेस्ट मैच में हैट्रिक पूरी की. शमी ने इस साल टेस्ट के अलावा वनडे में भी हैट्रिक ली थी और यह हैट्रिक विश्व कप में आई थी। इस साल वैसे कुल छह हैट्रिक बने.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें