पार्थ समथान के साथ ये हौट एक्ट्रेस बनीं 2019 की टौप टेलीविजन एक्टर, देखें फोटोज

यह साल छोटे पर्दे के अभिनेताओं के लिए काफी यादगार और आकर्षक रहा है. कई रिएलिटी शो, डेली सोप और कौमेडी सीरियल्स की पौपुलैरिटी की वजह से अभिनेताओं और अभिनेत्रीयों की लोकप्रियता में उतार चढाव दिखें. 2019 में सोशल मीडिया प्लेटफौर्म, वायरल समाचार और न्यूजप्रिंट पर धूम मचानेवाले टेलीविजन हस्तियों की स्कोर ट्रेंड्स इंडिया ने सूची जारी की हैं.

इस रेटिंग के अनुसार, टेलीविज़न सीरियल ‘कसौटी ज़िन्दगी की 2’  के अभिनेता पार्थ समथान और अभिनेत्री हिना खान ने 2019 के स्कोर ट्रेंड्स के ईयर एंडर लिस्ट में 100 अंको से अव्वल स्थान हासिल किया हैं.

ये भी पढ़ें- अलविदा 2019: इस साल बौलीवुड में रही इन गानों की धूम, देखें Video

इस धारावाहिक में ‘पार्थ’, ‘अनुराग बासु’ का किरदार निभा रहें थे. तो हिना, ‘कमौलिका’ के किरदार में नजर आई थी. इन दोनों को लोकप्रियता में ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर पूरे अंक मिले हैं. दोनों की इस पूरे साल में बढी लोकप्रियता की वजह से न्यूज़प्रिंट और वायरल समाचारों में भी इन दोनों के बारे में काफी लिखा गया.

टेलिविजन स्टार दिव्यंका त्रिपाठी की धारावाहिक ‘ये है मोहब्बतें’ की वजह से वह लोकप्रियता में बनी हुई हैं. फैन्स की फेवरेट डा. इशिता भल्ला 32.7 स्कोर्स के साथ दूसरे स्थान पर हैं. वही फैन्स के फेवरेट मिस्टर बजाज यानी की लोकप्रिय अभिनेता करण सिंह ग्रोवर 92.5 रैंकिंग से दूसरे स्थान पर हैं. कहा जा रहा हैं, की, ‘कसौटी ज़िन्दगी की 2’ से करण बाहर होने की वजह से ही उनकी रैंकिंग में गिरावट आई है. यह आंकड़े अमरिका की मीडिया टेक कंपनी स्कोर ट्रेंड्स इंडिया द्वारा प्रमाणित और संशोधित किए गयें हैं.

करण के बाद ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के कार्तिक याने की अभिनेता मोहसिन खान 72 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर हैं. वही, ‘ये है मोहब्बतें’ के रमन भल्ला अभिनेता करण पटेल ने 52.4 अंकों के साथ चौथा स्थान हासिल किया.

अभिनेत्रियों की फेहरिस्त में, ‘कसौटी जिंदगी की 2’ में प्रेरणा शर्मा की भूमिका में नजर आईं, अभिनेत्री एरिका फर्नांडीस 31 अंकों के साथ तीसरे और ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ की नायरा, अभिनेत्री शिवांगी जोशी 22.8 के स्कोर के साथ चौथे स्थान पर हैं.

ये भी पढ़ें- भोजपुरी क्वीन मोनालिसा ने शेयर किया ये VIDEO, बार-बार देख रहे हैं फैन्स

‘इश्कबाज़’ के शिवाय सिंह औबरौय याने की अभिनेता नकुल मेहता 43.44 स्कोर के साथ और ‘नागिन-3’ में दिखी सुरभि ज्योति को 19.8 स्कोर के साथ पांचवें स्थान पर बनें हुए हैं.

छठे स्थान पर ‘इश्क में मरजावां’ के राज दीप सिंह याने की अभिनेता अर्जुन बिजलानी तो सातवें स्थान पर ‘बेपनाह प्यार’ के रघुबीर मल्होत्रा याने की पर्ल वी पुरी हैं. तो, ये है मोहब्बतें के आदी, अभिषेक वर्मा 8 वें स्थान पर और ‘कुल्फी कुमार बाजेवाला’ के मोहित मलिक 9वें रैंकिंग पर हैं. तो ‘भाभीजी घर पे हैं’ के अभिनेता आसिफ शेख 10वें पायदान पर रहें हैं.

टेलीविजन अभिनेत्रीयों में, ‘नागिन 3’, ‘यें है मोहब्बतें’, ‘नच बलिए 9’ और किचन चैंपियन की वजह से अनीता हसनंदानी नें चार्ट पर एक छठा स्थान हासिल किया. जिनके बाद ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ फेम दिशा वाखानी  सातवें स्थान पर हैं. ‘काहा हम कहा तुम’ फेम दिपीका कक्कड़ नौवें स्थान पर हैं. तो ‘नच बलिए 9’ की वजह से श्रद्धा आर्या रैंकिंग में 10 वें स्थान पर है.

स्कोर ट्रेंड्स के सह-संस्थापक अश्वनी कौल बतातें हैं, “हम मीडिया का विश्लेषण करने के लिए भारत में 14 भाषाओं में 600 से अधिक समाचार स्रोतों से डेटा एकत्र करते हैं. इनमें फेसबुक, ट्विटर, प्रिंट प्रकाशन, सोशल मीडिया, वायरल खबरें, प्रसारण और डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं. विभिन्न परिष्कृत एल्गोरिदम तब डेटा की इस भारी मात्रा को संसाधित करने और हस्तियों के स्कोर और रैंकिंग पर पहुंचने में हमारी मदद करते हैं.”

ये भी पढ़ें- Bigg Boss 13: गुस्से में सलमान ने खुद साफ किया बाथरूम-किचन तो यूं माफी मांगने लगे घरवाले, देखें

महाराष्ट्र में हुआ कैबिनेट का विस्तार, अजित पवार ने चौथी बार उपमुख्यमंत्री बन बनाया रिकौर्ड

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता अजित पवार ने सोमवार को महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. महा विकास अघाड़ी के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और अन्य गणमान्य लोगों की उपस्थिति में राज्यपाल बी.एस. कोश्यारी ने अजित पवार को शपथ दिलाई. राकांपा प्रमुख शरद पवार के भतीजे अजित (60) ने रिकॉर्ड चौथी बार उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है. उन्होंने सबसे पहले नवंबर 2010 में, उसके बाद अक्टूबर 2012 में, उसके बाद मुश्किल से 80 घंटों के लिए नवंबर 2019 में और अब सोमवार को शपथ ली है.

एक बार से ज्यादा बार उपमुख्यमंत्री बनने का कारनामा उन्हीं की पार्टी के नेता छगन भुजबल भी कर चुके हैं. वह पहले अक्टूबर 1999 में तथा उसके बाद दिसंबर 2008 में उपमुख्यमंत्री बने थे. इनके अलावा नासिकराव तिरपुडे, सुंदरराव सोलंके, रामराव आदिक, गोपीनाथ मुंडे, आर.आर. पाटील (सभी का निधन हो चुका) और विजयसिंह मोहिते-पाटील एक-एक बार उप मुख्यमंत्री बन चुके हैं.

ये भी पढ़ें- झारखंड में क्यों नहीं जीत पाई भाजपा ये 26 आदिवासी सीटें? कहीं ये इन बिलों की वजह तो नहीं

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सोमवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया. उद्धव के बेटे आदित्य ठाकरे सहित 35 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली, जिसमें कैबिनेट के 25 और राज्यमंत्री के 10 पद शामिल हैं. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता अजीत पवार ने रिकॉर्ड बनाते हुए चौथी बार उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

नरीमन पॉइंट स्थित महाराष्ट्र विधानमंडल परिसर के बाहर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनियता की शपथ दिलाई. मंत्रिमंडल के विस्तार का स्वागत करते हुए शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने इसे ठाकरे का अच्छी तरह से संतुलित निर्णय करार दिया. उन्होंने कहा कि इस विस्तार से राज्य के सभी वर्गो, समुदाय और धर्म का उचित प्रतिनिधित्व हुआ है.

महा विकास अगाड़ी के अन्य नेताओं सहित आदित्य ठाकरे को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. राज्य के मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस के अशोक चव्हाण, परिषद में विपक्ष के नेता रहे राकांपा के धनंजय मुंडे, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दिलीप वाल्से-पाटिल और राकांपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवाब मलिक इस विस्तार का हिस्सा बने हैं.

ये भी पढ़ें- ‘अबकी बार 65 पार’ का हुआ सूपड़ा साफ, झारखंड में सोरेन सरकार

मंत्रिमंडल में तीन महिलाएं भी शामिल हैं. राकांपा की अदिति तटकरे (राज्य मंत्री) और कांग्रेस कीं वर्षा गायकवाड़ और यशोमती ठाकुर को भी मंत्रिमंडल में स्थान मिला है. वहीं, शिवसेना की तरफ से सरकार में कोई महिला प्रतिनिधित्व नहीं है. साल 2014 के बाद पहली बार मंत्रालय में चार मुस्लिम चेहरे आए हैं. शिवसेना के अब्दुल सत्तार नबी (राज्य मंत्री), राकांपा के नवाब मलिक व हसन मुशरीफ और कांग्रेस के असलम शेख, इन सभी को कैबिनेट स्तर का पद दिया गया है.

तीनों पार्टियों के अन्य बड़े नामों में अनिल परब, विजय वादीतिवार, जितेंद्र अवध, अनिल देशमुख, अमित (विलासराव) देशमुख, राजेश टोपे, और सतेज पाटिल (राज्यमंत्री), विश्वजीत कदम और बच्चू कडू शामिल हैं.

‘अर्जुन रेड्डी’ के इस एक्टर से सीखिए स्टाइल मंत्रा

अर्जुन रेड्डी फेम और तेलुगु सुपर स्टार विजय देवरकोंडा अपनी एक्टिंग और लुक्स के लिए काफी पौपुलर है. साउथ ही नही पूरे इंडिया में उनके फैंस की कमी नहीं है. विजय देवरकोंडा ने तेलुगु सिनेमा को काफी सुपरहिट फिल्में दी है. ‘अर्जुन रेड्डी’ और ‘गीता गोविंदम’ जैसी ब्लौकबस्टर फिल्म से वो करोड़ों लोगो को दिल में एक खास जगह बनाने में कामियाब रहे. उनके गाना इन्कम इन्कम सोंग यूट्यूब पर इतना पौपुलर हुआ की कई बौलीवुच सोंग्स को भी पीछे छोड़ दिया है, अव तक इस गाने को 70 करोड़ लोगों ने देख चुका हैं. इस पौपुलेरिटी के साथ ही विजय देवरकोंडा यंग लोगों के बीच अपनी स्टाइल के लिए भी फैमस हैं. इसलिए आज हम लेकर आए उनके कुछ ऐसे लुक्स जिसे ट्राय करने से आप भी काफी स्टाइलिंश लगेंगे.

विजय का फुल वाइट लुक

वाइट कलर को पीस (PEACE) कलर के नाम से  भी जाना जाता है. इस लुक में विजय काफी शांत लग रहे है जिससे वो और भी ज्यादा अच्छे लग रहे हैं. इस फुल वाइट सूट को आप किसी भी पार्टी में ट्राय कर सकते है. अगर आप ध्यान से देखेंगे तो पता चलेगा की इस सूट के साथ विजय ने क्रीम  कलर के शूज पहने है जो काफी अच्छा लुक दे रहे हैं.

 

View this post on Instagram

 

The art of living.

A post shared by Vijay Deverakonda (@thedeverakonda) on

ये भी पढ़ें- शादी या पार्टी में ट्राय करें शोएब इब्राहिम के लुक

प्रिंटेड शर्ट में विजय

प्रिंटेड शर्ट का भी अपना अलग ही टेस्ट होता है अब विजय की इस शर्ट को ही देख लिजिए. जिग जेग और ट्रेंगल प्रिंट वाली इस शर्ट में विजय काफी कूल लग रहे है. अगर आप कौलेज गोइंग स्टूडेंट है और कुछ नया ट्राय करना चाहते है तो इस लुक जरुर ट्राय करें.

 

View this post on Instagram

 

What?

A post shared by Vijay Deverakonda (@thedeverakonda) on

विजय का साइड स्ट्रीप कोट

आजकल साइड स्ट्रीप पेंट तो काफी लोग ट्राय करते है पर विजय के कोट की साइड स्ट्रीप फैशन मे काफी यूनीक है और देखने में काफी अच्छा लग रहा हैं.

 

View this post on Instagram

 

Stare.

A post shared by Vijay Deverakonda (@thedeverakonda) on

ये भी पढ़ें- 43 की उम्र में भी इतने स्टाइलिश हैं राजीव 

विजय का डिजाइनर पेंट लुक

विजय की डिजाइनर काफी क्लासी लग रही है, पार्टी वियर इस पेंट का लुक काफी अच्छा लग रहा है. इस लुक आप किसी पब पार्टी में जरुर ट्राय कर सकते हैं.

तो ये थे विजय देवरकोंडा के कुछ खास लुक्स जिसे ट्राय कर आप भी काफी स्टाइलिंश लग सकते हैं.

डाक्टर के बजाय चपरासी क्यों बनना चाहते हैं युवा

2017 में मध्य प्रदेश और 2018 में उत्तर प्रदेश के बाद इस साल खबर गुजरात से आई है कि गुजरात हाईकोर्ट और निचली अदालतों में वर्ग-4 यानी चपरासी की नौकरी के लिए 7 डाक्टर और 450 इंजीनियरों सहित 543 ग्रेजुएट और 119 पोस्टग्रेजुएट चुने गए. इस खबर के आते ही पहली आम प्रतिक्रिया यह हुई कि क्या जमाना आ गया है जो खासे पढ़ेलिखे युवा, जिन में डाक्टर भी शामिल हैं, चपरासी जैसी छोटी नौकरी करने के लिए मजबूर हो चले हैं. यह तो निहायत ही शर्म की बात है.

गौरतलब है कि चपरासी के पदों के लिए कोई 45 हजार ग्रेजुएट्स सहित 5,727 पोस्टग्रेजुएट और बीई पास लगभग 5 हजार युवाओं ने भी आवेदन दिया था. निश्चितरूप से यह गैरमामूली आंकड़ा है, लेकिन सोचने वालों ने एकतरफा सोचा कि देश की और शिक्षा व्यवस्था की हालत इतनी बुरी हो चली है कि कल तक चपरासी की जिस पोस्ट के लिए 5वीं, 8वीं और 10वीं पास युवा ही आवेदन देते थे, अब उस के लिए उच्चशिक्षित युवा भी शर्मोलिहाज छोड़ कर यह छोटी नौकरी करने को तैयार हैं. सो, ऐसी पढ़ाईलिखाई का फायदा क्या.

शर्म की असल वजह

जाने क्यों लोगों ने यह नहीं सोचा कि जो 7 डाक्टर इस पोस्ट के लिए चुने गए उन्होंने डाक्टरी करना गवारा क्यों नहीं किया. वे चाहते तो किसी भी कसबे या गांव में क्लीनिक या डिस्पैंसरी खोल कर प्रैक्टिस शुरू कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. इसी तरह इंजीनियरों के लिए भी प्राइवेट कंपनियों में 20-25 हजार रुपए महीने वाली नौकरियों का टोटा बेरोजगारी बढ़ने के बाद भी नहीं है, लेकिन उन्होंने सरकारी चपरासी बनना मंजूर किया तो बजाय शिक्षा व्यवस्था और शिक्षा के गिरते स्तर को कोसने के, इन युवाओं की मानसिकता पर भी विचार किया जाना चाहिए.

ये भी पढ़ें- क्यों भाती है बाथरूम में नहाती लड़की

दरअसल, बात शर्म की इस लिहाज से है कि इन उच्चशिक्षित युवाओं ने अपनी सहूलियत और सरकारी नौकरी के फायदे देखे कि यह नौकरी गारंटेड है जिस में एक बार घुस जाने के बाद आसानी से उन्हें निकाला नहीं जा सकता. तनख्वाह भी ठीकठाक है और ट्रांसफर का भी ?ां?ाट नहीं है. अलावा इस के, सरकारी नौकरी में मौज ही मौज है जिस में पैसे काम करने के कम, काम न करने के ज्यादा मिलते हैं. रिटायरमैंट के बाद खासी पैंशन भी मिलती है और छुट्टियों की भी कोई कमी नहीं रहती. घूस की तो सरकारी नौकरी में जैसे बरसात होती है और इतनी होती है कि चपरासी भी करोड़पति बन जाता है.

इन युवाओं ने यह भी नहीं सोचा कि उन के हाथ में तकनीकी डिगरी है और अपनी शिक्षा का इस्तेमाल वे किसी भी जरिए से देश की तरक्की के लिए कर सकते हैं. निश्चित रूप से इन युवाओं में स्वाभिमान नाम की कोई चीज या जज्बा नहीं है जो उन्होंने सदस्यों को चायपानी देने वाली, फाइलें ढोने वाली और ?ाड़ ूपोंछा करने वाली नौकरी चुनी.

देश में खासे पढ़ेलिखे युवाओं की भरमार है लेकिन डिगरी के बाद वे कहते क्या हैं, इस पर गौर किया जाना भी जरूरी है. इन्फौर्मेशन टैक्नोलौजी के इस युग में करोड़ों युवा प्राइवेट कंपनियों में कम पगार पर नौकरी कर रहे हैं जो कतई शर्म की बात नहीं क्योंकि वे युवा दिनरात मेहनत कर अभावों में रह कर कुछ करगुजरने का जज्बा रखते हैं और जैसेतैसे खुद का स्वाभिमान व अस्तित्व दोनों बनाए हुए हैं.

ऐसा नहीं है कि उन युवाओं ने एक बेहतर जिंदगी के ख्वाब नहीं बुने होंगे लेकिन उन्हें कतई सरकारी नौकरी न मिलने का गिलाशिकवा नहीं. उलटे, इस बात का फख्र है कि वे कंपनियों के जरिए देश के लिए कुछ कर रहे हैं.

इस बारे में इस प्रतिनिधि ने भोपाल के कुछ युवाओं से चर्चा की तो हैरत वाली बात यह सामने आई कि मध्य प्रदेश के लाखों युवाओं ने चपरासी तो दूर, शिक्षक, क्लर्क और पटवारी जैसी मलाईदार सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन ही नहीं किया. उन के मुताबिक, इस से उन की पढ़ाई का मकसद पूरा नहीं हो रहा था.

एक नामी आईटी कंपनी में मुंबई में नौकरी कर रही 26 वर्षीय गुंजन का कहना है कि उस के मातापिता चाहते थे कि वह भोपाल के आसपास के किसी गांव में संविदा शिक्षक बन जाए. लेकिन गुंजन का सपना कंप्यूटर साइंस में कुछ करगुजरने का था, इसलिए उस ने विनम्रतापूर्वक मम्मीपापा को दिल की बात बता दी कि अगर यही करना था तो बीटैक में लाखों रुपए क्यों खर्च किए, बीए ही कर लेने देते.

ये भी पढ़ें- अलविदा 2019: इस साल क्रिकेट की दुनिया में रहा इन महिला खिलाड़ियों का बोलबाला

यही रोना भोपाल के अभिषेक का है कि पापा चाहते थे कि वह एमटैक करने के बाद कोई छोटीमोटी सरकारी नौकरी कर ले जिस से घर के आसपास भी रहे और फोकट की तनख्वाह भी मिलती रहे. लेकिन उन की बात न मानते हुए अभिषेक ने प्राइवेट सैक्टर चुना और अब नोएडा स्थित एक नामी सौफ्टवेयर कंपनी में अच्छे पद और पगार पर काम कर रहा है.

गुंजन और अभिषेक के पास भले ही सरकारी नौकरी न हो लेकिन एक संतुष्टि जरूर है कि वे ऐसी जगह काम कर रहे हैं जहां नौकरी में मेहनत करनी पड़ती है और उन का किया देश की तरक्की में मददगार साबित होता है. सरकारी नौकरी मिल भी जाती तो उस में सिवा कुरसी तोड़ने और चापलूसी करने के कुछ और नहीं होता.

लेकिन इन का क्या

गुजरात की खबर पढ़ कर जिन लोगों को अफसोस हुआ था उन्हें यह सम?ाना बहुत जरूरी है कि गुजरात के 7 डाक्टर्स और हजारों इंजीनियर्स के निकम्मेपन और बेवकूफी पर शर्म करनी चाहिए.

इन लोगों ने मलाईदार रास्ता चुना जिस में अपार सुविधाएं और मुफ्त का पैसा ज्यादा है. घूस भी है और काम कुछ करना नहीं है. डाक्टर्स चाहते तो बहुत कम लागत में प्रैक्टिस शुरू कर सकते थे, इस से उन्हें अच्छाखासा पैसा भी मिलता और मरीजों को सहूलियत भी रहती. देश डाक्टरों की कमी से जू?ा रहा है गांवदेहातों के लोग चिकित्सकों के अभाव में बीमारियों से मारे जा रहे हैं और हमारे होनहार युवा डाक्टर सरकारी चपरासी बनने को प्राथमिकता दे रहे हैं.

क्यों इन युवाओं ने किसी प्राइवेट कंपनी में चपरासी की नौकरी स्वीकार नहीं कर ली, इस सवाल का जवाब बेहद साफ है कि इन की मंशा मोटी पगार वाली सरकारी चपरासी की नौकरी करने की थी. यही बात इंजीनियरों पर लागू होती है जिन्हें किसी बड़े शहर में 30-40 हजार रुपए महीने की नौकरी भार लगती है, इसलिए ये लोग इतनी ही सैलरी वाली सरकारी चपरासी वाली नौकरी करने के लिए तैयार हो गए. हर साल इन्क्रिमैंट और साल में 2 बार महंगाईभत्ता सरकारी नौकरी में मिलता ही है जिस से चपरासियों को भी रिटायर होतेहोते 70 हजार रुपए प्रतिमाह तक सैलरी मिलने लगती है.

ये भी पढ़ें- पिता के रिकशा से आईएएस तक का सफर

गुंजन और अभिषेक जैसे देशभर के लाखों युवाओं के मुकाबले ये युवा वाकई किसी काम के नहीं, इसलिए ये सरकारी चपरासी पद के लिए ही उपयुक्त थे. इन्हीं युवाओं की वजह से देश पिछड़ रहा है जो अच्छी डिगरी ले कर कपप्लेट धोने को तैयार हैं लेकिन किसी प्रोजैक्ट इनोवेशन या नया क्रिएटिव कुछ करने के नाम पर इन के हाथपैर कांपने लगते हैं, क्योंकि ये काम और मेहनत करना ही नहीं चाहते.  इस लिहाज से तो बात वाकई शर्म की है.

मेरे पति मुझ पर यकीन नहीं करते हैं और वे छोटीछोटी बातों पर गालीगलौज करते हैं, मैं क्या करूं?

सवाल-

मैं ने प्रेम विवाह किया है और मेरा एक 9 महीने का बेटा है. मैं ने अपने पति को अपने पुराने प्रेमी के बारे में पहले बताया था. पिछले कुछ समय से मेरे पति मुझ पर यकीन नहीं करते हैं. वे छोटीछोटी बातों पर गालीगलौज करते हैं. मैं क्या करूं?

ये भी पढ़ें- मुझे बहुत तनाव रहता है और मेरा किसी भी काम में मन नहीं लगता, मैं क्या करूं?

जवाब-

कोई भी शौहर बीवी के प्रेमी को बरदाश्त नहीं कर पाता है. अपने प्रेमी के बारे में बता कर आप बड़ी भूल कर चुकी हैं. अब इसे प्यार और सब्र से सुधारने की कोशिश करें. पति को?भरोसा दिलाती रहें कि अब आप सिर्फ उस की हैं और किसी की नहीं. बेवजह उस का विरोध न करें. सवाल बच्चे के भविष्य का?भी है, इसलिए आप को ही झुक कर काम लेना होगा.

ये भी पढ़ें- मैं एक लड़के से बहुत प्यार करती हूं और हमारे बीच सबकुछ हो चुका है

वेबसीरिज “बलमुआ थानेदार” का ट्रेलर लौंच, नए साल के इस तारीख को होगी रिलीज.

बौलीवुड की राह पर आजकल भोजपुरी भी जाती दिखाई पड़ रही है. क्योंकि भोजपुरी में भी वेबसीरीज ने दस्तक देना शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में निर्देशक व अभिनेत्री स्वाति मित्तल के निर्देशन मे बनी वेबसीरिज “बलमुआ थानेदार” का ट्रेलर रिलीज हो चुका है. फिल्म में मुख्य भूमिका में सिनेस्टार पवन सिंह उर्फ सुल्तान और अभिनेत्री स्वाति मित्तल हैं. जबकि रुपेश आर बाबू, अविनाश पांडे फतेहपुरी, चिराग पांडे, विभोर शुक्ला और शेखर श्रीवास्तव  भी अहम् भूमिका में नजर आएंगे.

फिल्म के पीआरओ आर्यन पाण्डेय के जरिये मिली जानकारी के अनुसार इस वेब सीरीज की नए साल में 3 जनवरी को रिलीज होने की पुरी उम्मीद हैं. इसकी पुष्टि खुद फिल्म के निर्माता और अभिनेता “पवन सिंह उर्फ सुल्तान” ने की है. इस फिल्म की कहानी बहुत ही दिलचस्प है.

ये भी पढ़ें- भोजपुरी फिल्म ‘बाप जी’ में सुपरस्टार खेसारीलाल के साथ नजर आने वाले हैं ये बड़े अभिनेता

इस वेबसीरीज  की  शूटिंग वाल्मीकि नगर, फिरोजाबाद और दिल्ली के बेहतरीन लोकेशनों पर हुई है. फिल्म की कहानी को देख कर गैंग्स औफ वासेपुर वाली फीलिंग आने वाली है. आर्यन ने बताया की वेब सीरीज होने के बावजूद भी यह फिल्म अश्लीलता से दूर है. दर्शक इस फिल्म को देख कर रोमांच का अनुभव करेंगे. वेब सीरीज में पवन सिंह उर्फ सुल्तान एक पुलिस औफिसर के  दमदार कैरेक्टर में नजर आएंगे.

इस वेबसीरीज का निर्माण देसी तड़का फिल्म प्रोडक्शन के बैनर तले किया गया है. फिल्म के अभिनेता सुल्तान ने बताया कि उन्होंने अपने इस किरदार और लुक पर काफी मेहनत की है. उनके अनुसार  फिल्म में पुलिस औफिसर का किरदार निभाना आसान काम नहीं था. लेकिन सिनेमा के प्रति मेरे जूनून ने मुझे इस मुकाम तक पहुंचाया है. सुल्तान अपनी इस वेबसीरिज को लेकर काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं. उन्होने उम्मीद जताई है की उनका ये प्रयास लोगों को काफी पसंद आएगा.

ये भी पढ़ें- “कसम पैदा करने वाले की-2” में  खतरनाक लुक में नजर आएंगे ये भोजपुरी सुपरस्टार

वेबसीरीज ट्रेलर लिंक- 

https://www.youtube.com/watch?v=0Z3cqnPPBn0&feature=youtu.be

भोजपुरी फिल्म ‘बाप जी’ में सुपरस्टार खेसारीलाल के साथ नजर आने वाले हैं ये बड़े अभिनेता

भोजपुरी के बड़े चेहरों से सजी फिल्म ‘बाप जी’ की शूटिंग इन दिनों सिद्धार्थनगर जिले में जोर शोर से चल रही है. इस फिल्म में खेसारी लाल लीड रोल में हैं जब की उनके अपोजिट खुबसूरत अभिनेत्री ऋतू सिंह हैं. फिल्‍म में खेसारीलाल यादव के साथ लंबे वक्‍त बाद एक बार फिर से ऋतु सिंह की वापसी बतौर लीड हो रही है. बिग-बौस से बाहर आने के बाद बाप जी खेसारी लाल की यह पहली फिल्म है.

गोविंदा सागर फिल्म इन्टरटेन्मेंट के बैनर तले बन रही इस फिल्म में मनोज सिंह टाइगर बाप जी के रोल में एक अलग ही लुक में नजर आ रहें है. इस फिल्म की शूटिंग उत्तर प्रदेश के नेपाल से सटे सिद्धार्थनगर जिले के खुबसूरत लोकेशन में की जा रही है.

ये भी पढ़ें- “कसम पैदा करने वाले की-2” में  खतरनाक लुक में नजर आएंगे ये भोजपुरी सुपरस्टार

फिल्म की कहानी बाप बेटे के रिश्ते पर आधारित है जिसमें मनोज सिंह टाइगर सुपरस्टार खेसारी लाल के बाप के रोल में नजर आने वाले हैं. बताया जा रहा है की यह फिल्म बाप-बेटों के रिश्तों में आ रही खटास पर एक पारिवारिक फिल्म है जिसे वर्तमान हालात को नजर में रख कर फिल्माया जा रहा है. यह फिल्म भोजपुरी के बड़े बजट वाली फिल्मों में शामिल है जिसको लेकर यूनिट के लोगों की बड़ी उम्मीदें हैं.

इस फिल्म में लीड रोल में नजर आने वाले अभिनेता और गायक खेसारी लाल ने फिल्म के कुछ गानों की डबिंग मुम्बई के एक स्टूडियो में पहले ही पूरा कर लिया है. फिल्म के संगीतकार ओम झा और गीतकार प्‍यारे लाल यादव हैं. बाप की कहानी अब तक आई फिल्मों से अलग हट कर है जिसे दर्शक काफी पसंद करेंगे. इस फिल्म को लेकर पूरी टीम खासा उत्साहित है.  फिल्म में निगेटिव भूमिका में सीपी भट्ट नजर आने वाले हैं. फिल्म में प्रमुख भूमिका में नजर आ रहें मनोज सिंह टाइगर ने बताया की इस फिल्म के जरिये हम भोजपुरी में दर्शकों को कुछ नया दे पाएंगे.

ये भी पढ़ें- कामसूत्र स्वीकार्य है, मगर सेक्स से परहेज: गीतल पटेल

सिद्धार्थनगर जिले में किये जा रहे फिल्म बाप जी के निर्देशक देव पांडेय हैं व लेखक अरविंद तिवारी हैं. जब की फिल्म में खेसारी लाल, रितु सिंह, किरन यादव, सीपी भट्ट, कृष्णा, जोया खान, प्रकाश,  बृजेश त्रिपाठी, संजय वर्मा, जैसे नामचीन चेहरे नजर आएंगे.

बाप जी के लुक में मनोज सिंह टाइगर द्वारा फेसबुक पर शेयर की गई तस्वीरों का लिंक- 

Bigg Boss 13: गुस्से में सलमान ने खुद साफ किया बाथरूम-किचन तो यूं माफी मांगने लगे घरवाले, देखें Video

बिग बौस सीजन 13 का सफर दिन ब दिन दिलचस्प होता जा रहा है और इस सीजन की टी.आर.पी. के तो क्या ही कहने. वैसे तो बिग बौस का हर सीजन सभी रिएलिटी शो के टी.आर.पी को पीछे छोड़ देता है लेकिन इस सीजन ने तो हद ही पार कर दी. जैसे जैसे दिन बीत रहे हैं वैसे वैसे सभी कंटेस्टेंट्स का गेम और ज्यादा स्ट्रौंग होता जा रहा है. बीते एपिसोड्स में आपने देखा कि इस हफ्ते की कैप्टन पंजाब की कैटरीना कैफ यानी शहनाज गिल को चुना गया पर दिखने में ऐसा आया है कि उनकी कैप्टेंसी कुछ खास नहीं जा रही. शहनाज का कहना ये है कि आरती सिंह, शेफाली जरीवाला और शेफाली बग्गा के अलावा उनकी कोई मदद नहीं कर रहा.

ये भी पढ़ें- Bigg Boss 13: कैप्टन शहनाज से भिड़ीं मधुरिमा, शहनाज ने दिया ये दंड

सलमान खान ने किया घर को साफ…

इसी कारण बीते एपिसोड में वो हुआ जो शायद बिग बौस के इतिहास में कभी नहीं हुआ. शो के होस्ट यानी सलमान खान ने खुद घर के अंदर एंट्री ली और किचन से लेकर बाथरूम तक साफ किया. सलमान का कहना ये था कि बीते कुछ दिनों से वे घरवालों के मुंह से ये कहते सुन रहे हैं कि उनका मन नहीं कर रहा काम करने का और इसी बात से सलमान खान ने खुद घर के अंदर आ कर घर को साफ किया. सलमान खान ने बर्तन धोए, फ्रिज साफ किया और यहां तक की बाथरूम तक साफ किया जो कि काफी गंदा था और कोई साफ करने को तैय्यार नहीं था.

ये भी पढ़ें- Bigg Boss 13: ‘नागिन’ एक्ट्रेस ने किया सिद्धार्थ शुक्ला का सपोर्ट, रश्मि देसाई पर लगाए ये इल्जाम

घर को साफ करने बाद लगाई सबकी क्लास…

सलमान खान को घर साफ करना देख सभी कंटेस्टेंट के सर शर्म से झुक गए. इस बात पर सलमान ने कहा कि “इस शो का होस्ट हूं मैं तो ये घर मेरा है और मुझे इसे साफ करने में कोई दिक्कत नहीं है और अगर आप में से किसी का मन ना करे घर साफ करने का तो मुझे बता देना, मैं आकर साफ कर दूंगा. मै किसी भी काम को छोटा नहीं समझता”. इसके बाद सलमान खान घरवालों के अच्छे से क्लास लगाते दिखाई दिए.

ये भी पढ़ें- Bigg Boss 13: अरहान ने दी सिद्धार्थ पर एसिड फेंकने की धमकी, देखें वीडियो

सलमान खान के बिना बिग बौस अधूरा…

शो के होस्ट सलमान खान इस शो को 10 साल से होस्ट कर रहे हैं और बिग बौस के साथ अगर कोई नाम जुड़ा है तो वो है सलमान खान का. सलमान खान के 10 साल पूरे होने पर बिग बौस ने सलमान खान को सुल्तानी अखाड़े में बुलाया और उन्हें बिग बौस के 10 साल का सफर दिखाया जिसमें उन्होनें दर्शकों को हसाया भी और कंटेस्टेंट पर गुस्सा भी हुए पर सबसे बड़ी बात जो बिग बौस ने कही वो ये थी कि सलमान खान के बिना ये शो बिल्कुल अधूरा है.

ये भी पढ़ें- Bigg Boss 13: हाथापाई तक पहुंची सिद्धार्थ-रश्मि की लड़ाई, अरहान की फटी शर्ट

नेता बांटे रेवड़ी, अपन अपन को देय !

यहां सत्ता की खनक की गुंज, गली गली में गूंज रही है. जिसका सबसे बड़ा असर नगरीय निकाय चुनाव में देखने को मिल रहा है .सन 1999 में अविभाजित मध्यप्रदेश के दरम्यान पहला नगरीय निकाय चुनाव हुआ था और अविभाजित मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी मुख्यमंत्री थे दिग्विजय सिंह.

उस समय चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से हुआ था. मतदाताओं ने महापौर, अध्यक्ष, सरपंच और पार्षदों के चुनाव प्रत्यक्ष पृणाली से मतदान करके किया था. तदुपरांत 2004,2009, 2014 तक चुनाव भाजपा के शासन काल में भी इसी प्रत्यक्ष प्राणाली से हुए .इस चुनाव का लाभ यह था की जहां महापौर, अध्यक्ष सीधे मतदाताओं के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराते हैं वहीं राजनीतिक खरीदी बिक्री की संभावना भी खत्म हो जाती है. सत्ता की प्रेशर की राजनीति पर अंकुश लगता है मगर छत्तीसगढ़ में नई परिपाटी शुरू की है उन्होंने एक्ट मैं बदलाव किए और अबकि चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से हुए जिसमें पार्षद ही अपने महापौर चुनेंगे अध्यक्ष चुनेंगे. ऐसे में खरीदी बिक्री और राजनीतिक बवंडर दिखाई पड़ने लगे हैं.

कांग्रेस का सूपड़ा साफ !

मुख्यमंत्री बन कर भूपेश बघेल ने सबसे बड़ा काम यही किया की अपनी साख बचाने के लिए नगरीय निकाय चुनाव को आखिरकार अप्रत्यक्ष प्राणाली से कराने का ऐलान कर दिया .इस पर उनकी कश्मकश देखी गई पहले कहा प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव होंगे लोग महापौर पद की तैयारी में जुट गए .मगर विपक्षी नेताओं का आरोप है जब भूपेश बघेल को यह सीक्रेट जानकारी मिली कि प्रत्यक्ष चुनाव हुए तो कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो जाएगा तो उन्होंने अपनी साख हाईकमान से बचाने की खातिर चुनाव की पद्धति बदलवा दी.

विरोध स्वरूप मामला उच्च न्यायालय पहुंचा .सुनवाई शुरू हुई मगर सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंगी और चुनाव हो गए अब हालात यह है की लगभग सभी नगर निगम, नगर पालिका, और नगर पंचायतों में घमासान मचा हुआ है.

कहीं भाजपा आगे है तो कहीं कांग्रेस कहीं बराबर की टक्कर. अब पार्षदों की खरीदी बिक्री का खेल शुरू हो गया है .कांग्रेस के मंत्री, दावा कर रहे हैं की सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं में हम कांग्रेस के महापौर बैठायेगे. दरअसल यह सीधे-सीधे सत्ता की धमक और खनक का ही परिणाम होगा की कांग्रेसी पत्ते महापौर बनेंगे.

संवैधानिक संस्थाओं से छेड़छाड़

भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बड़ी ही शान से बने थे छत्तीसगढ़ में 67 सीटों पर ऐतिहासिक बहुमत मिला जिसकी कल्पना तक किसी ने नहीं की थी .भाजपा, जोगी कांग्रेस के हाथों के तोते उड़ गए. ऐसे में भूपेश बघेल चाहते तो प्रदेश के साथ देश की राजनीति में एक नजीर बन कर उभर सकते थे .राजनीति में सत्ता ही सब कुछ नहीं होती आपकी छवि आम जनमानस में कैसे बन रही है यह महत्वपूर्ण होता है .आज भी लोग अर्जुन सिंह, अजीत जोगी के कार्यकाल को याद करते हैं क्योंकि उन्होंने आम जनता के हित में संवेदनशील कदम उठाए थे .मगर छत्तीसगढ़ में एक वर्ष में बदलापुर की राजनीति और जीत के जश्न मनाए जाते रहे हैं. आम जनता जिनमें किसान, मजदूर, श्रमिक शामिल है मानौ ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं . किसानों को चक्का जाम करना पड़ रहा है मगर भूपेश बघेल कानों में रूई डालकर भव्य आयोजनों में शिरकत कर रहे हैं.

यह है जमीनी हकीकत

रायपुर नगर निगम जहां कांग्रेस के प्रमोद दुबे महापौर थे इस चुनाव में 70 में 34 पार्षद चुनकर आए हैं दो पार्षदों को कांग्रेस अपने पक्ष में करने एड़ी चोटी का जोर लगा रही है .राजधानी रायपुर के बाद न्यायधानी बिलासपुर में 70 पार्षदों में 35 कांग्रेस के पास आ चुके हैं बहुमत के लिए एक पार्षद को तोड़ा जा चुका है . उर्जा नगरी कोरबा में भाजपा को बढ़त मिली है उसके 32 पार्षद विजई हुए हैं मगर 26 सीटों वाली कांग्रेस सारी नैतिकता ताक पर रखकर पार्षदों को खरीदने प्रभावित करने में लगी हुई है .रायगढ़ में 48 पार्षदों में कांग्रेस के पास 24 पार्षद हैं. इस तरह कांग्रेस हर नगरीय क्षेत्र में अपनी सत्ता बनाने सारे हथकंडे अपना रही है जिसकी नाराजगी राजनीतिक क्षेत्र के साथ आम आवाम में भी देखी जा रही है.

मुझे बहुत तनाव रहता है और मेरा किसी भी काम में मन नहीं लगता, मैं क्या करूं?

सवाल-

मैं 28 साल का हूं और मुझे बहुत तनाव रहता है. मेरा किसी काम में मन नहीं लगता है. इस समस्या का क्या उपाय है?

ये भी पढ़ें- मैं एक लड़के से बहुत प्यार करती हूं और हमारे बीच सबकुछ हो चुका है

जवाब-

आप में आत्मविश्वास की कमी है. यह कोई बड़ी समस्या नहीं है. बेहतर होगा कि आप हरेक चीज और घटना पर अपनी राय कायम करें और किसी के भी कहने पर ढुलमुल न हों. अपने फैसले खुद लें और उन पर अमल भी करें. इस के बाद भी परेशानी दूर न हो तो किसी मनोचिकित्सक से मशवरा लें.

ये भी पढ़ें- पिछले कुछ समय से पेशाब में जलन की शिकायत है और रुकरुक कर आता है, मुझे क्या करना चाहिए?

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें