मां बाप की शादी की गवाह बनी बेटी

25 अक्तूबर 2017 को धौलपुर के आर्यसमाज मंदिर में एक शादी हो रही थी. इस शादी में हैरान करने वाली बात यह थी कि वहां न लड़की के घर वाले मौजूद थे और न ही लड़के के घर वाले. इस से भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह थी कि जिस लड़के और लड़की की शादी हो रही थी, उन की ढाई साल की एक बेटी जरूर इस शादी में मौजूद थी.

इस शादी में लड़की के घर वालों की भूमिका बाल कल्याण समिति धौलपुर के अध्यक्ष अदा कर रहे थे तो इसी संस्था के अन्य सदस्य लड़के के घर वालों तथा बाराती की भूमिका अदा कर रहे थे. इस के अलावा कुछ अन्य संस्थाओं के कार्यकर्ता भी वहां मौजूद थे.

दरअसल, इस के पीछे जो वजह थी, वह बड़ी दिलचस्प है. राजस्थान के भरतपुर का रहने वाला 19 साल का सचिन धौलपुर के कोलारी के रहने वाले अपने एक परिचित के यहां आताजाता था. उसी के पड़ोस में अनु अपने मांबाप के साथ रहती थी. लगातार आनेजाने में सचिन और अनु के बीच बातचीत होने लगी.

ऐसे परवान चढ़ा दोनों का प्यार

15 साल की अनु को सचिन से बातें करने में मजा आता था. चूंकि दोनों हमउम्र थे, इसलिए फोन पर भी उन की बातचीत हो जाती थी. इस का नतीजा यह निकला कि उन में प्यार हो गया. मौका निकाल कर दोनों एकांत में भी मिलने लगे.

जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी अनु सचिन पर फिदा थी. उस ने तय कर लिया था कि वह सचिन से ही शादी करेगी. ऐसा ही कुछ सचिन भी सोच रहा था. जबकि ऐसा होना आसान नहीं था. इस के बावजूद उन्होंने हिम्मत कर के अपनेअपने घर वालों से शादी की बात चलाई.

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सचिन ने जब अपने घर वालों से कहा कि वह धौलपुर की रहने वाली अनु से शादी करना चाहता है तो उस के पिता ने उसे डांटते हुए कहा, ‘‘कमाताधमाता कौड़ी नहीं है और चला है शादी करने. अभी तेरी उम्र ही क्या है, जो शादी के लिए जल्दी मचाए है. पहले पढ़लिख कर कमाने की सोच, उस के बाद शादी करना.’’

सचिन अभी इतना बड़ा नहीं हुआ था कि पिता से बहस करता, इसलिए चुप रह गया.

दूसरी ओर अनु ने अपने घर वालों से सचिन के बारे में बता कर उस से शादी करने की बात कही तो घर के सभी लोग दंग रह गए. क्योंकि अभी उस की उम्र भी शादी लायक नहीं थी. उन्हें चिंता भी हुई कि कहीं नादान लड़की ने कोई ऐसावैसा कदम उठा लिया तो उन की बड़ी बदनामी होगी. उन्होंने अनु को डांटाफटकारा भी और समझाया भी. यही नहीं, उस पर घर से बाहर जाने पर पाबंदी भी लगा दी गई.

घर वालों की यह पाबंदी परेशान करने वाली थी, इसलिए अनु ने सारी बात प्रेमी सचिन को बता दी. उस ने कहा कि उस के घर वाले किसी भी कीमत पर उस की शादी उस से नहीं करेंगे. जबकि अनु तय कर चुकी थी कि उस की राह में चाहे जितनी भी अड़चनें आएं, वह उन से डरे बिना सचिन से ही शादी करेगी.

घर वालों के मना करने के बाद कोई और उपाय न देख सचिन और अनु ने घर से भागने का फैसला कर लिया. लेकिन इस के लिए पैसों की जरूरत थी. सचिन ने इधरउधर से कुछ पैसों का इंतजाम किया और घर से भागने का मौका ढूंढने लगा.

दूसरी ओर अनु के घर वालों को लगा कि उन की बेटी बहक गई है, वह कोई गलत कदम उठा सकती है. हालांकि उस समय उस की उम्र महज 15 साल थी, इस के बावजूद उन्होंने उस की शादी करने का फैसला कर लिया. इस से पहले कि वह कोई ऐसा कदम उठाए, जिस से उन की बदनामी हो, उन्होंने उस के लिए लड़का देखना शुरू कर दिया.

यह बात अनु ने सचिन को बताई. सचिन अपनी मोहब्बत को किसी भी सूरत में खोना नहीं चाहता था, इसलिए योजना बना कर एक दिन अनु के साथ भाग गया. अनु को घर से गायब देख कर घर वाले समझ गए कि उसे सचिन भगा ले गया है. अनु के पिता अपने शुभचिंतकों के साथ थाने पहुंचे और सचिन के खिलाफ अपहरण और पोक्सो एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी.

मामला नाबालिग लड़की के अपहरण का था, इसलिए पुलिस ने तुरंत काररवाई शुरू कर दी. धौलपुर के कोलारी का रहने वाला सचिन का जो परिचित था, उस से पूछताछ की गई. उसे साथ ले कर पुलिस भरतपुर स्थित सचिन के घर गई, लेकिन वह वहां नहीं मिला.

पुलिस ने उस के घर वालों से भी पूछताछ की, पर उन्हें सचिन और अनु के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. सचिन की जहांजहां रिश्तेदारी थी, पुलिस ने वहांवहां जा कर जानकारी हासिल की. सभी ने यही बताया कि सचिन उन के यहां नहीं आया है.

सचिन का फोन नंबर भी स्विच्ड औफ था. पुलिस के पास अब ऐसा कोई जरिया नहीं था, जिस से उस के पास तक पहुंच पाती. इधरउधर हाथपैर मारने के बाद भी पुलिस को सफलता नहीं मिली तो वह धौलपुर लौट आई.

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पुलिस को महीनों बाद भी न मिला दोनों का सुराग

अनु के गायब होने से उस के मातापिता बहुत परेशान थे. उन्हें चिंता सता रही थी कि उन की बेटी पता नहीं कहां और किस हाल में है. पुलिस में रिपोर्ट वे करा ही चुके थे. जब पुलिस उसे नहीं ढूंढ सकी तो उन के पास ऐसा कोई जरिया नहीं था कि वे उसे तलाश पाते. महीना भर बीत जाने के बाद भी जब अनु के बारे में कहीं से कोई खबर नहीं मिली तो वे शांत हो कर बैठ गए.

पुलिस को भी लगने लगा कि सचिन और अनु किसी दूसरे शहर में जा कर रह रहे हैं. पुलिस ने राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सभी थानों में दोनों का हुलिया भेज कर यह जानना चाहा कि कहीं उस हुलिए से मिलतीजुलती डैडबौडी तो नहीं मिली है.

सचिन उत्तर प्रदेश के इटावा का मूल निवासी था और उस के ज्यादातर रिश्तेदार उत्तर प्रदेश में ही रहते थे. इसलिए वहां के थानों को भी सूचना भेजी गई थी. इस से भी पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली.

समय बीतता रहा और पुलिस की जांच अपनी गति से चलती रही. थानाप्रभारी ने हिम्मत नहीं हारी. वह अपने स्रोतों से दोनों प्रेमियों के बारे में पता करते रहे. एक दिन उन्हें मुखबिर से जानकारी मिली कि सचिन अनु के साथ इटावा में रह रहा है.

यह उन के लिए अच्छी खबर थी. अपने अधिकारियों को सूचित करने के बाद वह पुलिस टीम के साथ मुखबिर द्वारा बताए गए इटावा वाले पते पर पहुंच गए. मुखबिर की खबर सही निकली. सचिन और अनु वहां मिल गए. लेकिन उस समय अनु 7 महीने की गर्भवती थी. पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया और उन्हें धौलपुर ले आई.

पुलिस ने दोनों को न्यायालय में पेश किया, जहां अनु ने अपने प्रेमी सचिन के पक्ष में बयान दिया.  अनु के मातापिता को बेटी के मिलने पर खुशी हुई थी. वे उसे लेने के लिए कोर्ट पहुंचे. बेटी के गर्भवती होने की बात जान कर भी उन्होंने अनु से घर चलने को कहा. पर अनु ने कहा कि वह मांबाप के घर नहीं जाएगी. वह सचिन के साथ ही रहेगी.

चूंकि सचिन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज थी, इसलिए न्यायालय ने उसे जेल भेजने के आदेश दे दिए थे. घर वालों के काफी समझाने के बाद भी जब अनु नहीं मानी तो कोर्ट ने उसे बालिका गृह भेज दिया. अनु 7 महीने की गर्भवती थी, इसलिए बालिका गृह में उस का ठीक से ध्यान रखा गया. समयसमय पर उस की डाक्टरी जांच भी कराई जाती रही. वहीं पर उस ने बेटी को जन्म दिया. बेटी के जन्म के बाद भी अनु की सोच नहीं बदली, वह प्रेमी के साथ रहने की रट लगाए रही.

सचिन जमानत पर छूट कर जेल से बाहर आ गया था. उसे जब पता चला कि अनु ने बेटी को जन्म दिया है और वह अभी भी बालिका गृह में है तो उसे बड़ी खुशी हुई. वह उसे अपने साथ रखना चाहता था. इस बारे में उस ने वकील से सलाह ली तो उस ने कहा कि जब तक उस की उम्र 18 साल नहीं हो जाएगी, तब तक शादी कानूनन मान्य नहीं होगी. अनु ने तय कर लिया था कि जब तक वह बालिग नहीं हो जाएगी, वह बालिका गृह में ही रहेगी.

अनु अपनी बेटी के साथ वहीं पर दिन बिताती रही. उस के घर वालों ने उस से मिल कर उसे लाख समझाने की कोशिश की, पर वह अपनी जिद से टस से मस नहीं हुई. उस ने साफ कह दिया कि वह सचिन को हरगिज नहीं छोड़ सकती.

बाल कल्याण समिति, धौलपुर के अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह परमार को जब अनु और सचिन के प्रेम की जानकारी हुई तो वह इन दोनों से मिले. इन से बात करने के बाद उन्होंने तय कर लिया कि वह इन की शादी कराएंगे, ताकि इन की बेटी को भी मांबाप दोनों का प्यार मिल सके. वह भी अनु के बालिग होने का इंतजार करने लगे.

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16 अक्तूबर, 2017 को अनु की उम्र जब 18 साल हो गई तो उसे आशा बंधी कि लंबे समय से प्रेमी से जुदा रहने के बाद अब वह उस के साथ रह सकेगी. अब तक उस की बेटी करीब ढाई साल की हो चुकी थी. उसे भी पिता का प्यार मिलेगा.

सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों ने कराया दोनों का विवाह

अनु के बालिग होने पर धौलपुर की बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह परमार ने उन के विवाह की तैयारियां शुरू कर दीं. इस बारे में उन्होंने भरतपुर की बाल कल्याण समिति और सामाजिक संस्था प्रयत्न के पदाधिकारियों से बात की. वे भी इस काम में सहयोग करने को तैयार हो गए.

अनु धौलपुर की थी और बिजेंद्र सिंह परमार भी वहीं के थे, इसलिए उन्होंने तय किया कि वह इस शादी में लड़की वालों का किरदार निभाएंगे. जबकि सचिन भरतपुर का था, इसलिए बाल कल्याण समिति, भरतपुर के पदाधिकारियों ने वरपक्ष की जिम्मेदारियां निभाने का वादा किया.

हैरान करने वाली इस शादी का आयोजन धौलपुर के आर्यसमाज मंदिर में किया गया. इस मौके पर विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों के अलावा पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे. तमाम लोगों की मौजूदगी में सचिन और अनु की शादी संपन्न हुई. शादी में उन की ढाई साल की बेटी भी मौजूद थी.

सामाजिक संस्था प्रयत्न के एडवोकेसी औफिसर राकेश तिवाड़ी ने बताया कि उन का मकसद था कि ढाई साल के बच्चे को उस के मातापिता का प्यार मिले और अनु को भी समाज में अधिकार मिल सके.

सचिन और अनु दोनों वयस्क हैं. वे अपनी मरजी से जीवन बिताने का अधिकार रखते हैं. यह शादी सामाजिक दृष्टि से भी उचित है. अब वे अपना जीवन खुशी से बिता सकते हैं. खास बात यह रही कि इस शादी में वर और कन्या के घर का कोई भी मौजूद नहीं था.

वहां मौजूद सभी लोगों ने वरवधू को आशीर्वाद दिया. शादी के बाद सचिन अनु को अपने घर ले गया. सचिन के घर वालों ने अनु को अपनी बहू के रूप में स्वीकार कर लिया. अनु भी अपनी ससुराल पहुंच कर खुश है.

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छत्तीसगढ़ : सुपर सीएम भूपेश चले अमेरिका!

छत्तीसगढ़ के सुपर सीएम बन चुके भूपेश बघेल अपनी प्रथम विदेश यात्रा पर “अमेरिका” के लिए निकल पड़े हैं. भूपेश बघेल 11 फरवरी  अर्थात आज से अमेरिका के दौरे पर रहेंगे. इस दौरान  मुख्यमंत्री सैनफ्रांसिस्को, बोस्टन और न्यूयौर्क में कुछ  कार्यक्रमों में शामिल होंगे. 15 से 16 फरवरी को हार्वर्ड में आयोजित ‘इंडिया कॉन्फ्रेंस’ के विशेष चर्चा में शिरकत करेंगे , जहां ‘लोकतांत्रिक भारत में जाति और राजनीति’ विषय पर व्याख्यान भी देंगे.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अमेरिका यात्रा इन दिनों छत्तीसगढ़ में चर्चा में है जहां सरकार यह बता रही है कि यह यात्रा अमेरिका के उद्योगपतियों को निवेश के लिए मील का पत्थर बनेगी  वहीं भाजपा नेताओं सहित  पहले  के सुपर  मुख्यमंत्री  रहे अजीत जोगी ने गहरे तंज किए हैं.अजीत जोगी ने यात्रा के एक दिन पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ छत्तीसगढ़ में पेंड्रा जिला के उद्घाटन मौके पर तंज का बाण चलाते हुए कहा – भूपेश बघेल अमेरिका जा रहे हैं,आज पेंड्रा जिला का उद्घाटन है उनसे आग्रह है कि “पेंड्रा जिला” को भी अमेरिका जैसा बना दें! अजीत जोगी आजकल भूपेश बघेल पर संकेतिक हमले कर रहे हैं. उनके इस तंज में छिपा हुआ है कि मुख्यमंत्री जी अमेरिका तो जा रहे हैं पेंड्रा और छत्तीसगढ़ क्या अमेरिका जैसा बन पाएगा!

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और यह सभी जानते हैं कि छत्तीसगढ़ ना कभी लंदन बन सकता है, अमेरिका या जापान अथवा चीन मगर राजनेता देशों का दौरा करके चाहते हैं हमारा राज्य भी विकसित हो जाए. यह कैसे होगा कब होगा यह जनता को सोचना होगा.अजीत जोगी के मेहमान स्वरूप उपस्थिति और तंज के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शालीनता से कहा कि पेंड्रा जिला को “अमेरिका” बनाने के लिए सभी का सहयोग चाहिए. जाहिर है मुख्यमंत्री ने सच को स्वीकार किया और यह संकेत दिया कि सत्ता के साथ-साथ विपक्ष के ताल पर ही छत्तीसगढ़ का “विकास” हो सकता है.

दरियादिल  मुख्यमंत्री भूपेश!

आपको बताते चलें कि छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री बने भूपेश बघेल को लगभग सवा साल  हो गए हैं और यह आपकी पहली विदेश यात्रा है. जब इस अमेरिका यात्रा का समाचार सुर्खियों में आया तो विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर चरणदास महंत ने  बिना झिझक मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वह भी अमेरिका चलना चाहेंगे. मुख्यमंत्री ने दरियादिली दिखाते हुए अपने साथ अपने अग्रज राजनेता और वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरणदास को भी ले लिया है.इस तरह छत्तीसगढ़ के 2 बड़े राजनीतिज्ञ अमेरिका के राजकीय दौरे पर निकल पड़े हैं . ऐसे में याद आता है डॉ रमन सिंह के विदेश भ्रमण के अनेक दौरे, जो उन्होंने मुख्यमंत्री मंत्री रहते हुए किए थे और जनता ने इन दोनों का इस्तकबाल किया था.

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल  10 दिवसीय अमेरिका प्रवास पर हार्वर्ड में आयोजित ‘इंडिया कॉन्फ्रेंस’ में शामिल होने के साथ ही उद्योग से जुड़े विभिन्न प्रतिनिधियों से चर्चा कर उन्हें छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आकर्षित करेंगे, मुख्यमंत्री अमेरिका में रहने वाले छत्तीसगढ़ियों से भी मुलाक़ात करेंगे. इसके अलावा बोस्टन के गवर्नर और नोबल विजेता अभिजीत बनर्जी से मुलाक़ात का भी कार्यक्रम है.

भूपेश बघेल का ‘दिल’

बता दें ‘इंडिया कॉन्फ्रेंस’ मूल रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में भारत पर ध्यान केंद्रित करने वाले सबसे बड़े छात्र-सम्मेलन में से एक है. यह हार्वर्ड बिजनेस स्कूल और हार्वर्ड केनेडी स्कूल में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के स्नातक छात्रों द्वारा आयोजित किया जाता है. इनकी 17वीं वर्षगांठ पर 15 और 16 फरवरी को भूपेश बघेल व डाक्टर  चरणदास महंत  कार्यक्रम में शामिल होंगे. यहां उल्लेखनीय है कि जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल  अमेरिका जाने ही वाले थे जब पत्रकारों ने उन्हें घेरा और अमेरिका यात्रा पर बातचीत की तब भूपेश बघेल ने कहा वे भले ही 10 दिनों के लिए अमेरिका जा रहे हैं मगर उनका “दिल” तो छत्तीसगढ़ में ही रहेगा.

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Bigg Boss 13: Rajat Sharma के सामने हुई Siddharth-Rashami की बोलती बंद, जानें क्यों उड़े होश

बिग बौस (Bigg Boss) सीजन 13 का फिनाले (Finale) जैसे जैसे नजदीक आ रहा है वैसे वैसे शो के मेकर्स हर दिन को काफी दिलचस्प बनाते दिखाई दे रहे हैं और साथ ही बिग बौस शो के फैंस अपने फेवरेट कंटेस्टेंट को जितवाने के लिए काफी मेहनत कर रहे हैं. बीते सोमवार के वार में सलमान खान (Salman Khan) ने सभी कंटेस्टेंटस् के साथ खूब मस्ती की और साथ ही सलमान ने सभी को एक टास्क भी दिया जिसमें सभी को एक एक करके घरवालों के पापों की पोट्ली भरनी थी और साथ ही कारण भी देना था. इस टास्क के दौरान रश्मि देसाई (Rashami Desai) के पास सबसे ज्यादा रश्मि देसाई की पोट्ली भरती दिखाई दी.

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रजत ने किया सलमान को कटघरे में खड़ा…

बीते एपिसोड में जाने माने न्यूज़ एंकर रजत शर्मा (Rajat Sharma) ने भी बिग बौस के स्टेज पर एंट्री मारी और साथ ही उन्होनें सलमान को कटघरे में खड़ा कर उनसे सवाल पूछने का मौका हाथ से ना जाने दिया. रजत शर्मा के सवालों का सिलसिला आज भी बरकरार रहने वाला है क्योंकि आज के एपिसोड में न्यूज़ एंकर रजत शर्मा बिग बौस के घर के अंदर जाएंगे और साथ ही सभी कंटेस्टेंटस् पर जमकर आरोप लगाएंगे.

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सिद्धार्थ शुक्ला और रश्मि देसाई की खुलेगी पोल…

बिग बौस के मेकर्स ने आज के एपिसोड का एक प्रोमो रिलीज किया है जिसमें रजत शर्मा सिद्धार्थ शुक्ला (Siddharth Shukla), रश्मि देसाई (Rashami Desai) समेत सभी घरवालों से तीखे और कड़वे सवाल पूछ उनकी जमकर क्लास लगाने वाले हैं. प्रोमो के मुताबिक रजत शर्मा सिद्धार्थ शुक्ला और रश्मि देसाई से उनके रिश्ते से जुड़ी सच्चाई बताने को कहेंगे और साथ ही वे सिद्धार्थ पर ये आरोप लगाएंगे कि वे किसी की बात नहीं सुनते हैं बल्कि सिर्फ अपनी बात ही मनवाते हैं.

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कौन हाने वाला है घर से बेघर…

ऐसे में देखने वाली बात ये होगी कि शो के आखिरी हफ्ते में रजत शर्मा की बिग बौस के घर में अदालत कौनसा नया हंगामा लाने वाली है. साथ ही आपको बता दें कि बीते वीकेंड के वार में सलमान ने किसी को बी घर से बेघर नहीं किया है बल्कि सभी नोमिनेटिड कंटेस्टंटस् को ये चेतावनी देकर गए हैं कि वे किसी भी समय घर से बेघर हो सकते हैं.

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इस समय घर से बेघर होने के लिए 3 सद्स्य नोमिनेटिड हैं जिसमें से शहनाज गिल (Shehnaz Gill), आरती सिंह (Aarti Singh) और माहिरा शर्मा (Mahira Sharma) का नाम शामिल है.

नींदड़ जमीन समाधि सत्याग्रह हक के लिए जमीन में गडे़ किसान

पूरे देश में 6 साल पहले नया भूमि अधिग्रहण कानून लागू हो चुका है, इस के बावजूद राजस्थान की राजधानी जयपुर में तरक्की के लिए काम करने वाला जयपुर विकास प्राधिकरण किसानों को नए कानून के तहत मुआवजा देने को तैयार नहीं है.

इसी को ले कर राजधानी जयपुर के बिलकुल पास सीकर रोड पर गांव नींदड़ में नींदड़ आवास योजना के तहत जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा ली गई 1,350 बीघा जमीन पर किसान जमीन समाधि सत्याग्रह करने पर मजबूर हो गए हैं.

गांव नींदड़ में जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा बिना किसानों से बातचीत किए व सूचना दिए अचानक ही जमीन पर कब्जा कर के काम शुरू कर दिया गया. इस के खिलाफ किसान गुस्से में हैं और जमीन समाधि सत्याग्रह चला रहे हैं.

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तकरीबन 2 साल पहले भी सैकड़ों किसान जमीन को ले कर धरना प्रदर्शन कर चुके हैं. किसानों का कहना है कि उन को नए जमीन अधिग्रहण कानून के मुताबिक मुआवजा नहीं मिला है.

जयपुर विकास प्राधिकरण की इस तानाशाही के खिलाफ गांव नींदड़ के किसानों ने डाक्टर नगेंद्र सिंह शेखावत की अगुआई में ‘नींदड़ बचाओ युवा किसान संघर्ष समिति’ के कहने पर जमीन समाधि सत्याग्रह शुरू किया.

इस आंदोलन की अगुआई कर रहे डाक्टर नगेंद्र सिंह शेखावत का कहना है कि जयपुर विकास प्राधिकरण अपने अडि़यल रवैए पर उतरते हुए 1 जनवरी, 2020 को इस जमीन पर अपना कब्जा लेने के लिए आदेश जारी कर चुका है.

किसानों का कहना है कि नया जमीन अधिग्रहण कानून लागू हो चुका है, इस के बावजूद सरकार उन को पुराने कानून के मुताबिक मुआवजा देने का गलत काम कर रही है, जिस को किसान स्वीकार नहीं करेंगे.

इसी सिलसिले में नींदड़ आवासीय योजना में किसानों का हाल जानने की कोशिश की गई और यहां पर किसानों की अगुआई कर रहे जमीन समाधि सत्याग्रह में शामिल राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके डाक्टर नगेंद्र सिंह शेखावत से बातचीत की गई. पेश हैं, उसी के खास अंश:

यहां के हालात कैसे हैं? जयपुर विकास प्राधिकरण के क्या हालात हैं? आप की डिमांड क्या है?

देखिए, यह आंदोलन लगातार पिछले 10 सालों से चल रहा है. जिस दिन जयपुर विकास प्राधिकरण ने नोटिफिकेशन डाला, तब से किसान आंदोलन कर रहे हैं. वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं. सरकार के मुख्यमंत्री के पास हम ने अपना पक्ष रखा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.

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जयपुर विकास प्राधिकरण यहां पर आवासीय कालोनी बसाना चाहता है और यहां पर पहले से ही 18 कालोनियां बसी हुई हैं. उन को उजाड़ कर और नए लोगों को बसाने की यह प्रक्रिया है, जिस का हम लोग पूरी तरीके से विरोध कर रहे हैं. यहां के मूल निवासियों को उजाड़ेंगे, नए लोगों को बसाएंगे, यह कहां का इंसाफ है?

जयपुर विकास प्राधिकरण किसान परिवारों की 3,500 करोड़ की जमीन हड़पना चाहता है, जबकि किसान नए कानून के हिसाब से मुआवजा चाहते हैं.

इस से कितने परिवार प्रभावित हुए हैं?

यह 1,350 बीघा जमीन का मामला है. यहां पर हजारों की आबादी है. इस के अलावा किसानों की अपनी खेती की जमीन है और सब से बड़ी बात है कि देश में नया भूमि अधिग्रहण कानून लागू हो चुका है. पुराने कानून के तहत हम जमीन नहीं देना चाहते हैं.

क्या यहां के स्थानीय विधायक नरपत सिंह राजवी से कोई बात हुई है?

वे पिछले 10 साल से यहां लगातार विधायक हैं. उन को इस बारे में सबकुछ पता है और उन्होंने कितना सहयोग किया है या नहीं, यह किसान भी जानते हैं, और वे खुद भी जानते हैं, पर हमारा तो उन से भी और सरकार से भी निवेदन है कि किसानों की लोकतांत्रिक मांग को देखते हुए और वर्तमान में जो कानून इस देश में लागू है, उस के मुताबिक मुआवजा दिलवाएं, जिस से किसानों के साथ नाइंसाफी न हो.

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राजस्थान सरकार और मुख्यमंत्री से कोई बातचीत हुई या उन की तरफ से कोई मैसेज आया?

मुख्यमंत्री संवेदनशील हैं, वे किसानों के दर्द को समझते हैं और किसानों के प्रति उन्होंने इस देश में बहुत काम किया है. नई सरकार बनने के बाद 5 जनवरी, 2019 को हम ने इस मामले को ले कर उन को ज्ञापन दिया था. हमारे पिछले आंदोलन में भी उन का समर्थन मिला था, तो मुझे पूरा विश्वास है कि वे किसानों की जायज मांग को समझेंगे.

जल्द ही सामने आएगी लव-कुश की सच्चाई, त्रिशा देगी कार्तिक-नायरा को ऐसा हिंट

स्टार प्लस (Star Plus) के पौपुलर सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ (Yeh Rishta Kya Kehelata Hai) में जब से लव-कुश (Luv-Kush) की रीएंट्री हुई है तब से शो ने एक अलग ही ट्रैक पकड़ लिया है जो कि दर्शकों को खूब पसंद भी आ रहा है. जैसा कि पहले हमने आपको बताया था कि लव-कुश की जबसे रीएंट्री हुई है तब से ही कार्तिक-नायरा (Kartik-Naira) की मुश्किलें बढ़ गईं हैं और इसका कारण ये है कि लव-कुश जब से बोर्डिंग स्कूल से लौटे हैं तक से ही वे काफी बिगड़ गए हैं और उन्हें हर वो बुरी आदत की लत लग चुकी है जो कि नहीं लगनी चाहिए थी.

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नायरा-कार्तिक ने बचाई त्रिशा की जान…

पिछले एपिसोड्स में हमने देखा कि लव-कुश (Luv-Kush) ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर त्रिशा (Trisha) को मोलेस्ट किया जिसकी वजह से त्रिशा ने सुसाइड करने की भी कोशिश की. त्रिशा बच तो गई पर वह कोमा में चली गई थी जिससे की लव-कुश ने राहत की सांस ली थी और सोचा था कि वे अब बच गए. कार्तिक-नायरा (Kartik-Naira) ने मिलकर त्रिशा की खूब देखभाल की और उसकी जान बचाई. लव-कुश ने हर वो मुमकिन कोशिश की जिससे कि वे अपनी इस हरकत पर पर्दा डाल सकें.

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जल्द खुलेगी लव-कुश की पोल…

 

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खबरों के अनुसार अप्कमिंग एपिसोड्स में दर्शकों को देखने को मिलने वाला है कि लव-कुश अब ज्यादा दिनों तक कार्तिक-नायरा से नहीं बच पाएंगे और उनकी ये पोल जल्द ही खुल जाएगी. दरअसल इशारों इशारों में त्रिशा कार्तिक नायरा को ये हिंट दे देगी कि उसके साथ से जो भी कुछ हुआ उसके पीछे लव-कुश का ही हाथ था. त्रिशा इशारे में ही बताएगी कि उसके गुनहगार का नाम एल से शुरु होता है.

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नायरा-कार्तिक और दादी के बीच तकरार…

जैसा कि हम सब जानते हैं कि कार्तिक (Mohsin Khan) नायरा (Shivangi Joshi) और दादी (Swati Chitnis) के बीच तकरार होना अब आम बात हो गई है तो इसी के चलते एक बार फिर कार्तिक नायरा दादी से भिड़े जिसकी वजह थी त्रिशा के गोयनका परिवार में ले कर आना. दरअसल दादी का ये मानना है कि त्रिशा का गोयनका हाउस में आना उनकी इज्जत के लिए अच्छा नहीं होगा और समाज में उनकी नाक कट जाएगी.

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क्या होगा कार्तिक-नायरा का रिएक्शन…

इसी के चलते दर्शकों को ये देखने को मिला की कार्तिक नायरा ने दादी की बात ना मानते हुए त्रिशा के अपने घर में जगह दी. अब देखने वाली बात ये होगी कि आखिर कब लव-कुश का ये सच सबके सामने आएगा और जब आएगा तो इस पर कार्तिक नायरा का क्या रिएक्शन होने वाला है.

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मर्दों की विरासत को नया नजरिया देती गांव की बिटिया

लेखक- देवांशु तिवारी

हाथ में तलवार, आंखें तिरछी और तेज आवाज में क्या कोई आप के दिल को छू सकता है? कई लोग कहेंगे कि दिल को छूने का तो नहीं पता, पर दिल में छेद जरूर कर सकती है ऐसी शख्सीयत, लेकिन आप को इतना सोचने की जरूरत नहीं है, क्योंकि शीलू यह सबकुछ करती है और लोग उस को इस अंदाज में देख कर दंग रह जाते हैं.

उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में एक छोटे से इलाके गुरुबक्शगंज की रहने वाली शीलू सिंह राजपूत एक आल्हा गायिका हैं.

याद रहे कि आल्हा गीत पुराने समय में राजामहाराजाओं के लड़ाई पर जाने से पहले गाया जाता था. इस गीत को केवल मर्द ही गाते थे.

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पर, शीलू तो एक लड़की है, फिर भला वह क्यों गाने लगी वीर रस से भरा मर्दों का यह आल्हा? यही एक सवाल कभी समाज ने उस से पूछा था, जब छोटी सी उम्र में शीलू ने अपने हाथ में पहली बार तलवार थामी थी और आल्हा गाना शुरू किया था.

शीलू रायबरेली जिले के जिस हिस्से से आती है, वह बेहद पिछड़ा हुआ इलाका है. यहां ज्यादातर लड़कियों के हाथों में जिस उम्र में किताबें होनी चाहिए, वे चूल्हे में पड़ी लकडि़यों को जलाने वाली फुंकनी और गोलगोल रोटी बनाने वाला बेलन लिए हुए नजर आ जाएंगी. इन देहाती हालात के बीच शीलू ने अपनी अलग राह खुद चुनी है और इस में सब से बड़ी बात यह रही कि उस के पिता भगवानदीन ने उस का हर कदम पर साथ दिया.

आल्हा गायक लल्लू बाजपेयी का आल्हा सुन कर शीलू बड़ी हुई और आज एक जानीपहचानी आल्हा गायिका बन चुकी है. उस के इस हुनर को आज केवल उस के गांव वाले ही नहीं, बल्कि कई राष्ट्रीय व राजकीय मंच भी सराह चुके हैं. पहले गांव के जो लोग उस को ऐसा करते देख आंखें टेढ़ी कर लिया करते थे, आज वही अपनी लड़कियों को शीलू का आल्हा दिखाने लाते हैं.

शीलू ने आल्हा गायन के साथसाथ हाल ही में अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की है. लेकिन जब भी वह आल्हा गाने मंच पर आती है, तो उस की मासूमियत कहीं ऐसे छिप जाती है मानो दोपहर का चमचमाता सूरज अचानक बदली में कहीं गुम हो जाता है.

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चेहरे पर वही तेज, हाथों में धारदार तलवार और तिरछी आंखें. चारों ओर बैठे लोग उसे इस अंदाज में देख कर दंग रह जाते हैं.

लोग कहते हैं कि शीलू जब अपने हाथों में तलवार नचाते हुए आल्हा गाती है, तो मंच पर एक अजीब सा कंपन महसूस होता है और शरीर में अपनेआप रोमांच हो जाता है. उस का आल्हा दिल को ऐसे छू लेता है कि अगले दिन तक वह आवाज कानों में गूंजती रहती है.

शीलू का यह हुनर उस के परिवार को अब हर लमहा गर्व का अहसास कराता है और सीना ठोंक के चुनौती देता है समाज की हर उस रूढि़वादी सोच को, जो औरतों को हमेशा चारदीवारी के अंदर रहने को मजबूर करती है.

मलंगः “निराश करती फिल्म”

रेटिंगः डेढ़ स्टार

निर्माताः लव रंजन,अंकुर गर्ग,भूषण कुमार,किशन कुमार

निर्देशकः मोहित सूरी

कलाकारः अनिल कपूर,आदित्य रौय कपूर,दिशा पटानी,कुणाल केमू,एवलीन शर्मा व अन्य

अवधिः दो घंटे 14 मिनट

बदला लेने के लिए इंसान किस तरह हिंसात्मक हो सकता है, इसी पर मोहित सूरी रोमांटिक अपराध फिल्म ‘‘मलंग’ ’लेकर आए हैं, जो कि पूरी तरह से निराश करती है.

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कहानीः

अपने माता पिता के संबंधों से परेशान अद्वैत (आदित्य रौय कपूर) मौज मस्ती और सकून के लिए गोवा पहुंचता है, जहां उसकी मुलाकात एक खूबसूरत लड़की सारा (दिशा पाटनी) से होती है.अद्वैत चुप रहने वाला लड़का है, जबकि सारा लंदन से आई एक मस्तमौला लड़की है. सारा पहली बार भारत आयी है और वह तुरंत ही अद्वैत की तरफ आकर्षित हो जाती है. सारा की दोस्ती ड्रग्स के शिकंजे में कैद चैसी (इवलीन) से भी जाती है.

सब कुछ ठीक था लेकिन अचानक ही इनकी जिंदगी में बहुत सारी घटनाएं घटती हैं. उधर 5 साल बाद दो पुलिस औफिसर अंजनी अगाशे (अनिल कपूर) और माइकल रौड्रिक्स (कुणाल खेमू) अद्वैत की तलाश में हैं. पुलिस अफसर अंजनी अगाशे कानून को न मानते हुए अपराधी को अपने तरीके से सजा देने में यकीन करते हैं. जबकि माइकल सब कुछ कानून के दायरे में रहकर करना पसंद करता है. तो वहीं सारा के साथ मिलकर बदला लेने के लिए माइकल सहित चार पुलिस वालों की हत्या करता है.

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लेखन व निर्देशनः

पटकथा के स्तर पर यह अति कमजोर फिल्म है. लार्जर देन लाइफ किरदार परोसने और फिल्म को रहस्यमयी जामा पहनाने के चक्कर में लेखक ने कथा कथन की जिस शैली को अपनाया है, उससे दर्शक कन्फ्यूज होता रहता है. कहानी बार बार वर्तमान से अतीत में जाती है, मगर ऐसा जिस अंदाज में होता है, उससे दर्शक समझ नहीं पाता कि यह हो क्या रहा है? इसके अलावा पति पत्नी के रिश्ते, मर्दांनगी और बदले की भावना के साथ हत्याएं सहित कई चीजों को पेशकर चूंचूं का मुरब्बा बना दिया गया है.

निर्देशक के तौर पर मोहित सूरी की फिल्म पर कोई पकड़ नजर नहीं आती. परिणामतः गोवा और मौरीशस की खूबसूरत लोकेशन भी दर्शकों को बांधकर नहीं रख पाती. फिल्म के संवाद भी घटिया हैं. फिल्म की एडीटिंग भी गड़बड़ है. इंटरवल से पहले दर्शक सोचता रहता है कि कहां फंस गया. इंटरवल के बाद कहानी कुछ ठीक होती है.

अभिनयः

जहां तक अभिनय का सवाल है तो कानून के दायरे से बाहर निकलकर काम करने वाले पुलिस अफसर के किरदार में अनिल कपूर जरुर अपने अभिनय की छाप छोड़ जाते हैं. मगर उनकी हंसी उन्हे अति छिछोरा बना देता है. आदित्य रौय कपूर काफी निराश करते हैं. दिशा पटानी केवल खूबसूरत लगी हैं. एवलीन जरुर अपने अभिनय से दर्शकों का ध्यान आकर्षित करती हैं. कुणाल खेमू व अमृता खानविलकर ने ठीक ठाक अभिनय किया है. छोटे किरदार में एवलीन शर्मा अपनी छाप छोड़ जाती हैं.

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फिर होगी कार्तिक-नायरा की दादी से तकरार, त्रिशा बनेगी वजह

स्टार प्लस (Star Plus) के सबसे पौपुलर और हिट सीरियल्स में से एक ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ (Yeh Rishta Kya Kehelata Hai) में जब से गोयनका परिवार में लव-कुश (Luv-Kush) की रीएंट्री हुई है तब से शो में कुछ ना कुछ ऐसा हो रहा है जिससे कि कार्तिक (Mohsin Khan) और नायरा (Shivangi Joshi) काफी परेशान हो रहे हैं. दरअसल जब से लव-कुश बोर्डिंग स्कूल (Boarding School) से वापस लौटे हैं तब से वे दोनों कुछ ज्यादा ही बिगड़ गए हैं और ऐसी हरकतें करने लगे हैं जिसे देख ना सिर्फ कार्तिक-नायरा परेशान होते हैं बल्कि दर्शकों के भी होश उड़ जाते हैं.

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गोयनका परिवार में आएगी त्रिशा…

पिछले कुछ एपिसोड्स में हमने देखा कि लव-कुश ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर त्रिशा (Trisha) को मोलेस्ट किया था जिस कारण त्रिशा ने सुसाइड करने का कदम उठाया. कार्तिक-नायरा (Kartik-Naira) ने मिलकर त्रिशा की जान बचाई और अब जब वे ठीक होने जा रही है तो लव-कुश (Luv-Kush) के होश उड़ते दिखाई दे रहे हैं. त्रिशा जैसे ही ठीक होगी तो कार्तिक और नायरा मिलकर उसे गोयनका परिवार में लेकर आने का फैसला करेंगे.

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दादी करेंगी इस बात से इंकार…

आने वाले एपिसोड्स में ऐसा देखने को मिलने वाला है कि जब कार्तिक और नायरा त्रिशा को अपने घर लाने का फैसला करेंगे तो दादी इस फैसले के सख्त खिलाफ होंगी. ऐसे में दादी को लगेगा कि त्रिशा को अपने घर रखने से समाज में उनकी इज्जत पर असर पड़ेगा. लेकिन कार्तिक और नायरा दादी की इस बात को नहीं मानेंगे और वे उनसे कहेंगे कि जब तक वो हैं तब तक त्रिशा कहीं और नही जाएगी.

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गोयनका परिवार में होंगे भरपूर हंगामें…

अब देखने वाली बात ये होगी कि जब कार्तिक और नायरा दादी की बात मानने से इंकार कर देंगे तब गोयनका परिवार में कैसे कैसे हंगामें दर्शकों को देखने को मिलने वाले हैं.

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‘लव आजकल’ से लेकर ‘थप्पड़’ तक, इस महीने धमाल मचाएंगी ये 7 बड़ी फिल्में

फरवरी महीना बौलीवुड फिल्मों के रिलीजिंग के नजरिये से बहुत अहम् रहने वाला है. इस महीने पड़ने वाले शुक्रवार के दिन में दर्जनों फिल्में रिलीज को तैयार हैं. जिसमें से तो कुछ बहु प्रतिक्षित भी हैं जिसका दर्शक बेसब्री से रिलीज का इंतजार कर रहें हैं. यह फिल्में दर्शकों पर अपनी कितनी छाप छोड़ पाएंगी यह तो फिल्मों के रिलीज के बाद ही पता चलेगा. लेकिन यह तय है की शुभमंगल ज्यादा सावधान , लव आज कल, भूत, मलंग जैसी फ़िल्में दर्शकों की भीड़ को सिनेमाहाल तक खींचने में कामयाब रहेंगी. आइये जानते हैं की इस माह कौन सी फिल्में रिलीज होने वाली हैं.

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– मलंगट्रेलर लांच होने के बाद से ही यह फिल्म चर्चा में हैं. इस फिल्म का दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहें हैं. यह फिल्म 7 फरवरी को रिलीज होने जा रही हैं. जिसकी मुख्य भूमिका में अनिल कपूर दिशा पाटनी, कुणाल खेमू और आदित्य राय कपूर है फिल्म के निर्देशक मोहित शूरी हैं .

फिल्म के ट्रेलर का लिंक –

– हैक्ड- यह फिल्म भी 7 फरवरी को रिलीज होने जा रही है. फिल्म की मुख्य भूमिका में हिना खान और रोहन शाह है फिल्म का निर्देशन  विक्रम भट्ट हैं.

फिल्म ट्रेलर का लिंक

– शिकाराइस फिल्म का निर्देशन विधु विनोद चोपड़ा ने किया है. फिल्म की कहानी कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार पर आधारित है. इस फिल्म के सफल होने के अनुमान पहले से लगाए जा रहें हैं.

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फिल्म ट्रेलर लिंक –

– लव आजकल 14 फरवरी को रिलीज हो रही इस इस फिल्म की मुख्य भूमिका में कार्तिक आर्यन, सारा अली खान, रणदीप, अरुषि शर्मा, नजर आने वाले हैं. फिल्म का निर्देशन इम्तियाज अली ने किया है इस फिल्म के निर्मात दिनेश हैं.

मूवी ट्रेलर का लिंक-

– शुभ मंगल ज्यादा सावधान- इस बहु प्रतीक्षित फिल्म के रिलीजिंग की डेट 21 फरवरी तय हुई है फिल्म के निर्देशक हितेश केवल्या हैं. निर्माता आनंद एल राय, भूषण कुमार, कृष्णा कुमार, हिमांशु शर्मा है. फिल्म की मुख्य भूमिका में आयुष्मान खुराना, जीतेन्द्र कुमार, नीना गुप्ता, सुनीता राजवार और मानवी गागरू नजर आएंगी.

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फिल्म ट्रेलर का लिंक

– भूत पार्ट – 1 फरवरी माह के 21 तारीख को रिलीज हो रही इस फिल्म में विक्की कौशल और भूमि पेड्नेकर नजर आयेंगी. फिल्म का निर्देशन भानु प्रताप सिंह ने किया है और निर्माता हीरो यश जौहर, करण जौहर, अपूर्व मेहता और शशांक खेतान हैं.

फिल्म के ट्रेलर का लिंक 

– थप्पड़- तापसी पन्नू अभिनीत यह फिल्म महिला हिंसा पर करारा चोट करने वाली है. फिल्म थप्पड़ का ट्रेलर रिलीज हो हो चुका है . पूरे फिल्म की रिलीजिंग28 फरवरी को होंगी . इस टाइटल की तरह फिल्म की कहानी भी एक थप्पड़ के इर्द-गिर्द घूमती है.

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ट्रेलर लिंक –

बीमा पौलिसी के नाम पर ठगी

8-10  महीने पहले की बात है. जयपुर शहर के उनियारों का रास्ता में रहने वाले नेमीचंद सैन एक दिन अपने घर पर आराम कर रहे थे. दोपहर का समय होने वाला था, वे भोजन करने का मन बना रहे थे. इसी दौरान उन के मोबाइल की घंटी बजी. नेमीचंद ने मोबाइल का स्विच औन कर के कान पर लगाया और हैलो बोलने ही वाले थे कि दूसरी ओर से आवाज आई, ‘‘हैलो, नेमीचंदजी बोल रहे हैं?’’

‘‘हां, बोल रहा हूं.’’ नेमीचंद ने सहज भाव से जवाब दिया, लेकिन पूछा भी कि आप कौन बोल रहे हैं? मैं ने आप को पहचाना नहीं.

‘‘नेमीचंदजी, हम दिल्ली से बीमा कंपनी के कस्टमर केयर से बोल रहे हैं.’’ काल करने वाले ने बताया.

‘‘हां, ठीक है, बताइए आप को क्या काम है?’’ नेमीचंद ने सवाल किया.

‘‘नेमीचंदजी, हम ने इसलिए फोन किया है कि आप को कुछ फायदा हो सके. अगर आप की इच्छा हो तो आगे बात करें.’’ दूसरी ओर से फोन करने वाले ने कहा.

‘‘मेरी समझ में नहीं आया कि तुम कैसे फायदे की बात कर रहे हो?’’ नेमीचंद ने फिर सवाल किया.

‘‘नेमीचंदजी, आप के पास बीमा पौलिसी है. बीमा कंपनी तो आप को कुछ देगी नहीं, लेकिन हम आप का फायदा करवा सकते हैं. इस पर आप को अच्छाभला बोनस मिल जाएगा.’’ दूसरी ओर से कहा गया.

‘‘ठीक है, लेकिन अभी मैं कहीं बाहर जा रहा हूं. तुम 1-2 दिन बाद फोन करना.’’ नेमीचंद ने उस समय टालने के लिहाज से कहा.

‘‘ठीक है सर, आप की जैसी इच्छा. हम 1-2 दिन में आप को फिर फोन करेंगे. तब तक आप विचार बना लेना.’’ दूसरी तरफ से फोन करने वाले ने कहा. इस के बाद फोन कट गया.

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नेमीचंद हाथमुंह धो कर भोजन करने लगे. भोजन करते हुए उन के मन में फोन करने वाले की बात घूमती रही कि बीमा पौलिसी पर बोनस दिलवा देंगे. नेमीचंद के पास जीवन बीमा पौलिसियां थीं. ये पौलिसियां उन्होंने अपने भविष्य के हिसाब से ले रखी थीं, ताकि जीवन में जरूरत के समय पर पैसा मिल जाए.

मोटे बोनस का लालच दे कर फंसाया नेमीचंद को

उन्हें यह तो पता था कि जब पौलिसी की समयावधि पूरी हो जाएगी तो उन्हें पूरी रकम मिल जाएगी, लेकिन उन्हें यह पता नहीं था कि पौलिसी पर कोई बोनस भी मिलता है. इसलिए फोन करने वाले ने जब बोनस दिलाने की बात कही तो उन की दिलचस्पी बढ़ गई थी.

इस बात के तीसरे दिन नेमीचंद के मोबाइल पर दिल्ली से फिर फोन आ गया. इस बार एक युवती बोल रही थी. उस ने नेमीचंद से कहा कि साहब 2 दिन पहले हमारी कंपनी के मैनेजर ने आप को फोन कर के बीमा पौलिसी पर बोनस दिलाने की बात बताई थी. उस के बारे में आप ने क्या सोचा है?

‘‘हां, फोन तो आया था लेकिन मैं ने अभी तक कुछ भी नहीं सोचा है. तुम ये बताओ, मुझे करना क्या होगा?’’ नेमीचंद ने उस युवती से सवाल किया.

‘‘पहले आप यह बताइए कि आप के पास कितनी राशि की बीमा पौलिसियां हैं?’’ युवती ने पूछा.

‘‘मेरे पास कोई 10-20 लाख रुपए की पौलिसियां नहीं हैं, मैं तो गरीब आदमी हूं. अपना पेट काट कर बुढ़ापे के लिए 2-3 लाख रुपए की पौलिसियां करवा रखी हैं.’’ नेमीचंद ने कहा साथ ही यह भी पूछा कि इन पर कितना बोनस मिल जाएगा?

‘‘नेमीचंदजी, अगर आप के पास 10 लाख रुपए की पौलिसी होती तो हम आप को करीब 2 लाख रुपए बोनस दिलवा देते. लेकिन आप बता रहे हैं कि 2-3 लाख रुपए की ही पौलिसियां हैं.’’ युवती ने जवाब देते हुए कहा, ‘‘अगर 3 लाख रुपए की पौलिसी है तो हम आप को 50-60 हजार रुपए बोनस दिलवा देंगे.’’

‘‘ठीक है, मैं घर में सलाह करने के बाद 1-2 दिन बाद बताऊंगा.’’ कहते हुए नेमीचंद ने फोन काट दिया.

उसी दिन शाम को नेमीचंद ने अपने परिवार वालों से इस मुद्दे पर बात की. परिवार वालों को भी पौलिसियों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, इसलिए उन्होंने कहा कि जैसा आप ठीक समझो, कर लो. इस के 2-3 दिन बाद नेमीचंद के मोबाइल पर दिल्ली से फिर फोन आया. इस बार कोई तीसरा आदमी बोल रहा था. उस ने नेमीचंद से सीधे ही पूछा कि पौलिसी के बारे में आप ने अपने परिवार में बात कर ली होगी. अब आप ने क्या विचार बनाया है?

‘‘विचार तो हम ने बना लिया है, लेकिन मुझे करना क्या होगा?’’ नेमीचंद ने पूछा.

‘‘सर, आप अपनी पौलिसियों के नंबर, कंपनी और उन की मैच्योरिटी डेट बताइए.’’

नेमीचंद ने झुंझलाते हुए कहा, ‘‘पौलिसी क्या मैं जेब में रख कर घूमता हूं, जो उन के नंबर और दूसरी चीजें बता दूं.’’

‘‘साहब, नाराज होने की बात नहीं है. मैं 10 मिनट बाद आप को फोन करूंगा. आप तब तक अपनी पौलिसी निकाल लें, फिर मुझे बता देना.’’

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फोन कटने के बाद नेमीचंद ने अलमारी से पौलिसी निकाल कर देखी. इतनी देर में दिल्ली से फिर उसी आदमी का फोन आ गया. उस ने जो बातें पूछीं, वह नेमीचंद ने पौलिसी देख कर बता दीं. फोन करने वाले ने सारी बातें पूछने के बाद कहा, ‘‘नेमीचंदजी, आप को 50 हजार रुपए से ज्यादा बोनस मिल जाएगा, लेकिन इस के लिए पहले आप को कंपनी के खाते में 15 हजार रुपए जमा कराने होंगे.’’

‘‘15 हजार रुपए क्यों?’’ नेमीचंद ने सवाल किया.

‘‘नेमीचंदजी, बीमा कंपनी वैसे तो पौलिसी होल्डर को सीधे तौर पर कोई बोनस नहीं देती है, लेकिन हम कंपनी के एजेंट हैं. कंपनी हमें बिजनैस प्रमोशन के नाम पर इंसेंटिव देती है. हम उस इंसेंटिव में से आप को बोनस की रकम देंगे. आप जो 15 हजार रुपए देंगे, वह पैसा कंपनी के खाते में ही जमा होगा.’’ फोन करने वाले ने नेमीचंद को संतुष्ट करते हुए कहा.

नेमीचंद को उस की बातें ज्यादा समझ नहीं आईं. फिर भी उन्होंने सोचा कि अगर 15 हजार रुपए दे कर 50 हजार रुपए बोनस मिल जाए तो क्या बुराई है. यही सोच कर उन्होंने फोन करने वाले से पूछा, ‘‘मुझे पैसे कहां जमा कराने होंगे?’’

फोन करने वाले ने नेमीचंद से कहा कि उस के मोबाइल नंबर पर एसएमएस के जरिए एक खाता नंबर भेजा जा रहा है, इसी खाते में पैसे जमा कराने हैं.

इस के बाद फोन कट गया. एक मिनट बाद ही नेमीचंद के मोबाइल पर मैसेज आ गया. मैसेज में एक खाता नंबर लिखा था. नेमीचंद ने वह खाता नंबर एक कागज पर नोट कर लिया. फिर उसे ध्यान आया कि वह पैसे तो भेज देगा, लेकिन बोनस की रकम कब और कैसे मिलेगी? यह बात तो उस ने पूछी ही नहीं.

नेमीचंद ने सोचा कि 1-2 दिन रुक जाता हूं. दोबारा फोन आएगा तो सारी बातें पूछने के बाद ही पैसा भेजूंगा. दिल्ली से फिर 2-3 दिन बाद फोन आ गया. इस बार एक युवती बोल रही थी. युवती ने कहा, ‘‘नेमीचंदजी, आप ने अभी तक कंपनी के खाते में 15 हजार रुपए नहीं भेजे. आप जितनी देर करेंगे, आप के बोनस के भुगतान में उतनी ही देर होती जाएगी. इसलिए आप तुरंत पैसे भेज दीजिए.’’

‘‘अरे भई, पैसे तो मैं आज ही भेज दूंगा, लेकिन यह बताओ कि मुझे बोनस कब और कैसे मिलेगा?’’ नेमीचंद ने सवाल किया.

‘‘आप को बोनस एक महीने के अंदर मिल जाएगा. बोनस की रकम सीधे आप के खाते में आएगी. जब चैक तैयार हो जाएगा, तब आप से आप का खाता नंबर पूछेंगे और उसी में रकम ट्रांसफर कर दी जाएगी.’’ युवती ने नेमीचंद की शंका का समाधान कर दिया.

बड़ी ही चालाकी से करते थे ठगी

नेमीचंद ने उसी दिन 15 हजार रुपए उस बैंक खाते में जमा करा दिए. इस के बाद कई दिन गुजर गए. इस बीच न तो नेमीचंद के पास फिर कोई फोन आया और न ही बोनस की रकम उन के खाते में आई.

एक दिन नेमीचंद ने उन नंबरों पर फोन किया, जिन से उस के पास 4-5 बार फोन आए थे. वहां बात हुई तो एक आदमी ने खुद को बिजनैस प्रमोशन मैनेजर बताते हुए कहा कि आप का चैक तैयार हो गया है. आप अपना खाता नंबर बता दीजिए. 2-4 दिन में चैक आप के खाते में जमा हो जाएगा.

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नेमीचंद ने अपना खाता नंबर बता दिया.

2-4 दिन क्या, करीब एक महीना बीत गया लेकिन खाते में कोई पैसा नहीं आया. नेमीचंद ने फिर उन्हीं नंबरों पर फोन किया, लेकिन इस बार उसे कोई रिस्पौंस नहीं मिला. नेमीचंद को मामला गड़बड़ नजर आया. उस ने अपने परिचितों से बात की तो लोगों ने ठगी की आशंका जताते हुए उसे पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने की सलाह दी.

नेमीचंद ने 15 सितंबर, 2017 को जयपुर कमिश्नरेट के नाहरगढ़ रोड थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया. पुलिस ने 420 व 406 आईपीसी में मामला दर्ज कर लिया. जयपुर कमिश्नरेट के विभिन्न पुलिस थानों में इस से पहले भी बीमा पौलिसी के नाम पर ठगी के कई मुकदमे दर्ज हुए थे.

पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल ने साइबर अपराधों के ऐसे मामलों का खुलासा करने के लिए एडीशनल पुलिस कमिश्नर (प्रथम) प्रफुल्ल कुमार के निर्देशन व डीसीपी (क्राइम) डा. विकास पाठक के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया. इस में क्राइम ब्रांच की संगठित अपराध शाखा के एसीपी राजवीर सिंह तथा सबइंसपेक्टर मनोज कुमार व तकनीकी शाखा के कर्मचारियों को शामिल किया गया.

पुलिस टीम ने कई दिनों की लंबी जांचपड़ताल में पता लगाया कि अभियुक्त संगठित रूप से कालसेंटर की आड़ में अपराधों को अंजाम दे रहे हैं. यह बात भी पता चली कि अभियुक्त सफेदपोश बन कर अलगअलग कंपनियों की आड़ में उत्तर प्रदेश के नोएडा में कालसेंटर चलाते हैं और धोखाधड़ी के जरिए लोगों से करोड़ों रुपए की ठगी कर रहे हैं.

एसीपी राजवीर सिंह के नेतृत्व में जयपुर पुलिस की टीम 9 अक्तूबर को नोएडा पहुंची. नोएडा पुलिस को सूचना दे कर जयपुर पुलिस की टीम ने सैक्टर-2 के मकान नंबर ए-23 पर दबिश दी. इस मकान में डेस्टिमनी सिक्योरिटी प्राइवेट लिमिटेड, एचडीएफसी तथा भारती एक्सा के नाम से कंपनियां चल रही थीं. कालसेंटर भी इसी मकान में चल रहा था. पुलिस इस कालसेंटर को देख कर चौंक गई. इस कालसेंटर में 150 से अधिक युवकयुवतियां काम करते थे.

देश के हर राज्य में फैला था ठगों का नेटवर्क

यहां से पुलिस ने एक युवती सहित 9 लोगों को गिरफ्तार किया. इन में दिलशाद गार्डन, सीमापुरी, दिल्ली निवासी नेहा त्यागी, टीम लीडर हरमपुर, लोनी, गाजियाबाद निवासी गौरव त्यागी, गाजियाबाद के मुरादनगर के रहने वाले भारत सिंह, शामली के कृष्णानगर निवासी संजीव कुमार, दिल्ली के कबीरनगर निवासी यतींद्र कुमार शर्मा, दिल्ली के पांडवनगर कौंप्लेक्स निवासी नितिन शर्मा, बुलंदशहर जिले में औरंगाबाद थाना क्षेत्र के बखोरा गांव निवासी शिवराज सिंह, एटा के कैलाशगंज निवासी राम कन्हैया और बिहार के सहरसा जिले के रहने वाले अमूल्य कुमार तोमर को गिरफ्तार कर लिया. तोमर दिल्ली के जैतपुर में रह रहा था.

पुलिस ने यहां से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, सिम कार्ड्स, इंटरकौम फोन व वाकीटाकी सहित बड़ी संख्या में दस्तावेज बरामद किए. पुलिस ने इस कालसेंटर पर काम करने वाले युवकयुवतियों को भी हिरासत में ले लिया. गिरफ्तार किए गए 9 आरोपियों व हिरासत में लिए गए कालसेंटर के कर्मचारियों से पूछताछ में पता चला कि नोएडा के सेक्टर-2 में ही 2 साल से अभियुक्त इस कालसेंटर के जरिए लोगों को फोन कर के औनलाइन ठगी कर रहे थे. ये लोग रोजाना देश भर में बड़ी संख्या में लोगों को फोन करते थे और लाइफ इंश्योरेंस में बोनस दिलवाने के बहाने उन से अपने खातों में औनलाइन पैसे डलवा लेते थे.

गिरफ्तार आरोपी फरजी आईडी के जरिए ली गई दर्जनों सिम व मोबाइलों को ठगी की वारदातों के काम में लाते थे ताकि पुलिस उन तक न पहुंच सके. ठगी गई राशि को ये लोग खुद के और अपने परिवार के सदस्यों के नाम से खोले गए विभिन्न बैंक खातों में जमा करवाते थे.

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जांचपड़ताल में सामने आया कि आरोपियों ने एक साल के दौरान देश के लगभग 23 राज्यों में 4,755 से ज्यादा काल फरजी नंबरों से किए थे. इन में से राजस्थान में 249 काल की गई थीं. राजस्थान के 18 जिलों में इस गिरोह ने 37 लोगों से एक करोड़ 30 लाख 68 हजार 400 रुपए की ठगी की थी.

क्राइम ब्रांच ने पीडि़तों से संपर्क कर के इन तथ्यों की पुष्टि की है. गिरोह की ठगी का शिकार हुए लोग जयपुर के अलावा भीलवाड़ा, जोधपुर, अजमेर, सीकर, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, उदयपुर, कोटा, जालौर, झालावाड़, नागौर, टोंक, अलवर, भरतपुर, पाली तथा श्रीगंगानगर के रहने वाले हैं. गिरोह ने सब से बड़ी ठगी 30 लाख रुपए की भीलवाड़ा के एक व्यक्ति से थी. इस का मुकदमा जयपुर के साइबर थाने में दर्ज है. इस के अलावा 16 लाख रुपए, 14 लाख रुपए, 2 लाख रुपए और 1 लाख रुपए से ले कर 3400 रुपए की धोखाधड़ी इस गिरोह ने की है.

गिरोह के संचालक कालसेंटर पर काम करने वाले युवकयुवतियों को 8-10 हजार रुपए वेतन देते थे. इस के अलावा लोगों को झांसा दे कर खाते में रकम डलवाने के लिए अलग से कमीशन देते थे. पुलिस ने हिरासत में लिए इस कालसेंटर के कर्मचारियों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया.

बीमा पौलिसी की ठगी करने वाले गिरोह में सीए तथा एमबीए के छात्र भी शामिल   

बीमा पौलिसी की किस्त औनलाइन जमा करवाने पर डिसकाउंट मिलने का झांसा दे कर लोगों से 50 लाख रुपए से ज्यादा की ठगी करने वाले 4 बदमाशों को जयपुर पुलिस ने इसी साल मई के दूसरे सप्ताह में गिरफ्तार किया था. इन में एक सीए और एक एमबीए का छात्र था.

इसी साल 6 मई को जयपुर के प्रतापनगर थाने में हरेंद्र सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि मेरी मैक्स लाइफ इंश्योरेंस पौलिसी की सालाना 49 हजार 500 रुपए किस्त जाती है. एक दिन एक अज्ञात आदमी ने मोबाइल पर काल कर के कहा कि आप पौलिसी का औनलाइन पेमेंट कर दोगे तो आप को डिसकाउंट मिलेगा. इस के लिए 45 हजार 500 रुपए जमा कराने होंगे. उस आदमी ने मुझे मोबाइल पर मैसेज भेजा. मैसेज में मोबाइल नंबर नहीं आया, बल्कि मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी का नाम आया और खाता नंबर लिखा था.

एकाउंट होल्डर की जगह मैक्स लाइफ कंपनी का नाम लिखा था, जिस से हरेंद्र को भरोसा हो गया. उस ने औनलाइन बैंकिंग के जरिए 4 मई को अपने बैंक खाते से 45 हजार 500 रुपए उस खाते में ट्रांसफर कर दिए. इस के बाद हरेंद्र ने जमा कराई रकम की रसीद लेने के लिए जब मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में संपर्क किया तो उसे पता चला कि वह औनलाइन ठगी का शिकार हो चुका है.

जयपुर पुलिस ने दिल्ली जा कर जांचपड़ताल की तो पता चला कि जिस खाते में हरेंद्र से रकम डलवाई गई थी, वह एसबीआई दिल्ली का खाता था. यह खाता दिल्ली के मंगोलपुरी निवासी अमन छीपी का था.

बाद में पुलिस ने अमन के अलावा मूलरूप से पंजाब के मोहाली निवासी और आजकल दिल्ली में रह रहे जीत सिंह संधूजा, यूपी के पंचशील नगर निवासी और हाल दिल्ली में बादली मेट्रो स्टेशन के पास रहने वाले संदीप कुमार छीपी तथा दिल्ली के मंगोलपुरी निवासी राहुल खटीक को गिरफ्तार कर लिया. इन से पुलिस ने 15 फरजी सिम कार्ड भी बरामद किए. इन में अमन छीपी सीए और जीत सिंह संधूजा एमबीए का छात्र है.

पूछताछ में पता चला कि इस गिरोह ने लोगों को ठगने के लिए 13 बैंक खाते खुलवा रखे थे. सितंबर, 2016 से इन्होंने औनलाइन ठगी की करीब 100 वारदातें की थीं.

इन वारदातों में लोगों से 50 लाख रुपए से ज्यादा की ठगी की गई थी. पूछताछ में यह बात भी पता चली कि आरोपियों का मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में संपर्क था.

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वे वहां कंपनी के अफसरों और कर्मचारियों से मिल कर पौलिसीधारक की डिटेल्स हासिल कर के उस की पौलिसी की किस्त आदि पता कर लेते थे. इस के बाद ये लोग पौलिसी धारकों को फोन कर के अपने जाल में फंसाते थे.

कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां

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