Lockdown में देश बनता चाइल्ड पोर्नोग्राफी का होटस्पोट

देश में कोरोना लाकडाउन के बीच इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड (आईसीपीएफ) की तरफ से देश के लिए शर्मनाक रिपोर्ट सामने आई है. इस रिपोर्ट में लाकडाउन के दौरान देश में चाइल्ड पोर्नोग्राफी में अप्रत्याशित और खतरनाक वृद्धि बताई गई है. आईसीपीएफ ने कहा कि ऑनलाइन मोनिटरिंग डेटा वेबसाइट दिखा रही है कि लाकडाउन के बाद लोगों में ‘चाइल्ड पोर्न’, ‘सैक्सी चाइल्ड’ और ‘टीन सैक्सी वीडियो’ की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है. इस के साथ ही दुनिया की सब से बड़ी पोर्न वेबसाइट पोर्नहब से यह भी पता चलता है कि लाकडाउन के बाद 24 से 26 मार्च तक देश में चाइल्ड पोर्न की मांग में 95 प्रतिशत वृद्धि हुई है.

इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फण्ड ने इसे ले कर एक रिपोर्ट जारी की, जो भारत के 100 मुख्य शहरों के हालिया शोध पर है. जिस में दिल्ली, चेन्नई, मुंबई, कोलकता इत्यादि शहर शामिल हैं. इस रिपोर्ट का नाम ‘चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल इन इंडिया’ है. इस के अनुसार दिसंबर 2019 के दौरान पब्लिक वेब पर 100 शहरों में चाइल्ड पोर्नोग्राफी सामग्री की कुल मांग 50 लाख प्रति माह थी जिस में अब अभूतपूर्व वृद्धि हुई है. इस रिपोर्ट में हिंसक सामग्री की मांग में 200 प्रतिशत तक की वृद्धि का खुलासा किया गया है. यानी इन हिंसक सामग्री में जबरन सैक्स जैसे बच्चे का गला दबाना (चोपिंग), दर्दनाक सेक्स (ब्लीडिंग) और टॉर्चर इत्यादि आते हैं. इस रिपोर्ट में हिंसक सामग्री के बारे में बताने का मतलब भारतीय पुरुष की बच्चों के प्रति बढ़ती मानसिक दुराचार को दिखाती है साथ ही यह भी दिखाती है कि भारतीय पुरुष सामान्य पोर्नोग्राफी से संतुष्ट नहीं बल्कि हिंसक और बर्बर सामग्री की मांग करते है. यह कुरूप होती मानसिक सोच को दिखाती है.

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आईसीपीएफ ने अपनी इस रिपोर्ट में चाइल्डलाइन इंडिया हेल्पलाइन की हालिया रिपोर्ट का भी जिक्र किया जिस में पता चला कि लाकडाउन के 11 दिनों के भीतर देश भर से 92000 से अधिक इमरजेंसी कॉल आई. यह कॉल्स यौन दुर्व्यवहार और हिंसा से सुरक्षा को ले कर की गई थी. ‘इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फण्ड’ की रिपोर्ट लाकडाउन अवधी के दौरान सामना किये जाने वाले अत्यधिक यौन खतरे की ओर इशारा करती है. साथ ही ‘चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल इन इंडिया’ की रिपोर्ट में बाल यौन शोषण सामग्री की बढती मांग दर्शाती है कि बच्चे लाकडाउन में यौन उत्पीड़क के निशाने पर सब से ज्यादा है. जाहिर है संभावना यह है कि उत्पीड़क और पीड़ित दोनों ही घरों में बंद है.

इस रिपोर्ट में ‘ईसीपीएटी’, ‘यूनाइटेड नेशन’ और ‘यूरोपोल’ की हालिया रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया. जिस में चाइल्ड ऑनलाइन ग्रूमिंग का जिक्र किया गया. ऑनलाइन ग्रूमिंग का मतलब इन्टरनेट में बच्चों को सोशल मीडिया में अजनबियों या जानपहचान वालों द्वारा भावनात्मक रिश्ता बना विश्वास में ले कर निजी फोटो या वीडियो की मांग करना. सोशल मीडिया में टीनेजर और बच्चों के साथ इस तरह के अपराध में भारी वृद्धि हुई है. खासकर व्हाट्सएप, फेसबुक में इस का अत्यधिक उपयोग हो रहा है. रिपोर्ट के अनुसार चाइल्ड पोर्न में विशेष उम्र ढूंढी जाती है. ख़ासकर ‘स्कूल गर्ल’ के कंटेंट को खोजा जाता है. इस में उम्र, क्रियाएँ तथा लोकेशन की खोज विशेष तौर पर की जाती है. इस के इतर खासतौर पर हिंसक विडियो की खोज की जाती है.

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भारत इस समय पूरी दुनिया में सब से ज्यादा पोर्न उपभोगी देश है. भारत में सामान्य 70 प्रतिशत ब्राउज़िंग पोर्न कंटेंट के लिए होती है. देश की स्थिति यह है कि अगर देश में कोई सनसनीखेज बलात्कार हो जाए तो पीड़ित महिला के नाम से वीडियो पोर्नसाईट पर ट्रेंड करने लगती है. प्रियंका रेड्डी के मामला इस का ताजा उदाहरण है. साथ ही एक हालिया रिपोर्ट में इस का एक सब से बड़ा कारण स्मार्टफोन का बढ़ता चलन है. स्मार्टफोन के कारण भारत में लाकडाउन के 3 हफ़्तों के दोरान पोर्नोग्राफी देखने में 20 परसेंट की उछाल आई है. किन्तु यह सारी रिपोर्टस भारत के लिए चिंता का विषय हैं. जाहिर है पोर्नोग्राफी एक समय के लिए किसी के लिए यौनकुंठा को निकालने का जरिया हो लेकिन इस से तरह तरह की मानसिक समस्याएं पैदा होती हैं. अपने पार्टनर के साथ अधिक अपेक्षाएं जुड़ जाती हैं. अलगाव और अवसाद जन्म लेते हैं. यौन अपराधों में बढ़ोतरी होती है. खासकर चाइल्ड पोर्नोग्राफी का बनना और देखना मानसिक संकीर्णता को दर्शाता है.

चाइल्ड पोर्न से जुड़ी यह रिपोर्ट खतरनाक होती स्थिति को दर्शाती है. भारत में फरवरी 2009 चाइल्ड पोर्नोग्राफी के खिलाफ संसद में विधेयक सफलतापूर्वक पास हुआ था. यानी चाइल्ड पोर्न को पूरी तरह से गैरकानूनी घोषित किया गया. इस में बच्चों से जुड़े पोर्न वीडियो को प्रसारित और प्रचारित करने वाले को दंड का भी प्रावधान है. जिस में चाइल्ड पोर्न ब्राउज़िंग करने पर 10 लाख तक जुर्माना और 5 साल की सजा मिल सकती है. किंतु ‘इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फण्ड’ की रिपोर्ट भारत के कमजोर आईटी एक्ट की कलह भी खोल रही है कि सब कुछ पता होते हुए भी इस में सरकार मजबूत कदम नहीं उठा पा रही.

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Corona का चक्रव्यूह, नरेन्द्र मोदी की अग्नि परीक्षा

प्रधानमंत्री दामोदरदास मोदी ने 14 अप्रैल के ऐतिहासिक दिवस पर सुबह 10 बजे कोरोना विषाणु महामारी के बरक्स देश को संबोधित किया. जैसा कि हम जानते हैं यह खबर कल से ही वायरल थी कि मंगलवार को प्रधानमंत्री देश को संबोधित करने जा रहे हैं.और इसके साथ ही बड़ी बेताबी के साथ देश की भयाकांत जनता प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन को सुनने के लिए बेताबी से इंतजार कर रही थी. कुछ लोगों को यह उम्मीद थी कि देश के सर्वे सर्वा होने की फल स्वरुप नरेंद्र मोदी लोक लुभावनी घोषणाएं करेंगे , तो बहुत लोग यह अपेक्षा कर रहे थे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जयंती पर प्रतीकात्मक रूप से संबोधन में उन्हें नमन करते हुए राजनीतिक “खिलंदड़ी” दिखा जाएंगे.  और अगर कहेंगे कि देश की जनता तुम डांस करो तो देश की जनता उनके कहने पर सड़कों पर नृत्य भी करने लगेगी.

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दरअसल  प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी को देश की जनता को संबोधित करने में आनंद की अनुभूति होती है. क्योंकि आपके आह्वान पर देश की जनता वह सब करने लगती है जो अपने नेता या प्रधान मंत्री  के कहे पर किया जाता है. और विरोधी यह सब देख कर कहते हैं- देखो! किस तरह देश रसातल को जा रहा है. सवाल है, देश को संबोधित कर दिशा देने का और आम गरीब जनता को मजबूत संबल देने का, आज 14 अप्रैल हमारे देश के संविधान निर्माता डॉ बाबासाहेब अंबेडकर के जन्म दिवस पर क्या नरेंद्र मोदी का संबोधन  इन चुनौतियों पर खरा उतर  है. इन प्रश्नों का  प्रति उत्तर देना अभी जल्दबाजी होगी. क्योंकि इनका सही जवाब भविष्य के गर्भ में छिपा हुआ है.

नरेन्द्र मोदी का हाव भाव!

आज जब जैसे ही सुबह  के 10 बजे, देश के सभी टीवी चैनलों पर जैसे समय थम गया. थोड़ी देर में नरेंद्र दामोदरदास मोदी प्रकट हुए उनके हाव भाव बदले हुए नजर आए कोरोना विषाणु के खिलाफ संदेश देते हुए उन्होंने चेहरा ढक रखा था जिसे सबसे पहले उन्होंने हटाया और देश की जनता को संबोधित करते हुए लगभग 20 मिनट तक अपनी बात विस्तार से रखी .आज मोदी के चेहरे पर बेहद गंभीरता दिखाई दे रही थी उनके एक एक शब्द में देश की जनता के लिए दिशा देते हुए संदेश था. उन्होंने अपने इस एक तरह से ऐतिहासिक भाषण में बाबा साहब को याद करने और नववर्ष की शुभकामनाओं के साथ कोरोना विषाणु पर  कई अहम बातें रखी इसमें सबसे महत्वपूर्ण था देश को आगामी 3 मई तक लाख डाउन पार्ट 2 से गुजारना होगा. जैसा कि उम्मीद थी वही हुआ 30 अप्रैल तक के लाक डाउन की अपेक्षा तो देश कर ही रहा था. जो 3 दिन और बढ़ गई. उन्होंने सोशल डिस्टेंसिंग की बात की. यह कहना भी नहीं भूले की उनकी सरकार ने कोरोना विषाणु के प्रसारण के  पहले ही, देश को संभालने में कोई कोताही नहीं की है .और हां अगर नरेंद्र मोदी एक्शन प्लान नहीं बनाते तो देश में कोरोना के कारण भयावह तस्वीर आज देखने को मिलती. दरअसल, देश को संबोधित करने का कोई भी मौका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं छोड़ रहे हैं और ना ही यह बताने से गुरेज कर रहे हैं कि उनकी सरकार बेहतर से बेहतर कर रही है. मगर जमीनी हकीकत तो देश की आवाम जान ही रहीं है की किस तरह लोग सड़कों पर भूखे, नंगे, बदहवास  घूम रहे हैं.

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लोगों के आंसू कौन पोछेगा?

निसंदेह देश की सरकार, चुनी हुई सरकार ऐसे विकट समय में एक गार्जियन  की भूमिका निभाती है. आज का दौर महामारी के कारण आपात काल का समय है.   भले ही  घोषित रूप से देश में इमरजेंसी लागू नहीं हुई है. मगर यह समय इमरजेंसी से आगे का  है क्योंकि आपातकाल तो अल्प  समय के लिए ही होता है. मगर यह महामारी का समय, भीषण त्रासदी का दौर है. जो कब खत्म होगा, यह देश की सरकार भी नहीं जानती. ऐसे में चुनी हुई सरकार से देश की आवाम यही अपेक्षा कर सकती है देश की जनता को किस तरह इस महा संकट से निकाल कर के आप ले जायेंगे! यह समय सरकार के लिए भी एक बहुत बड़ी चुनौती का है, ऐसा समय शताब्दी में कभी कभी आता है. इन दिनों नरेंद्र मोदी के समय काल में यह जारी है. यही कारण है कि यह मोदी के परीक्षा का भी समय है. देश की गरीब गुरबा जनता पानी और खाने के लिए अगर घंटों इंतजार करती है, लाइन लगाती है चूल्हा नहीं जलता पीने का  पानी नहीं है  तो इसका जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ देश की चुनी हुई सरकार ही हो सकती है. ऐसे में इस चुनौती और परीक्षा की घड़ी को कैसे नरेंद्र मोदी की सरकार पार करेगी, यह  तो समय रेखांकित करेगा.

#coronavirus: हमारा कसूर क्या है साहब

एमपी में स्वास्थ महकमे के चार IAS अफसर कोरोना पौजिटिव है. भोपाल में 142 कोरोना पौजिटिव में स्वास्थ्य विभाग के ही 75 अधिकारी और कर्मचारी है.

इन बड़े IAS अफ़सरों की लापरवाही की सजा उनके नीचे के कर्मचारी और उनके परिवार वाले भुगत रहे हैं. इनमें क्लर्क, चपरासी और ड्राइवर भी हैं. यदि स्वास्थ्य विभाग के लोग इस क़दर संक्रमित नहीं होते तो भोपाल के रहवासी भी इतने सख्त लौकडाउन को  झेलने मजबूर न होते.

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कोरोना के लिए अब किसी गरीब और किसी क़ौम को दोष नहीं दिया जा सकता साहब .जब ये पढ़े लिखे अफ़सर ही कोरोना की भयावहता नहीं समझ पाए . अपने साहबजादों के‌ विदेश से लौटने की बात छिपाने वाले ये अफसर अपने मातहत अधिकारियों और घरेलू काम करने वाले नौकर चाकरों को  वायरस बाँटते रहे . अपने परिवार का पेट भरने के लिए लौकडाउन को तोड़ने वालेआम आदमी, मजदूर ,किसान और किसी कौम को जिम्मेदार ठहराने के पहले साहब यह भी सोच लो कि कसूर किसका है..

इन दिनों पुलिस छोटी छोटी जगहों पर कोरोना पीड़ितों के खिलाफ मामले दर्ज कर रही है. नरसिंहपुर जिले की चैक पोस्ट पर  एक तेरह साल के किशोर के शव वाहन को केवल इसलिए भोपाल वापस भेज दिया गया कि उस पर कोरोनावायरस के संक्रमित होने का संदेह था. एक छोटे से गांव के दलित युवक पर फेसबुक के माध्यम से कोरोना से संबंधित फर्जी पोस्ट करने पर एफ आई आर दर्ज कर ली गई .भोपाल और आगर के एक एक पत्रकार पर बीमारी फैलाने का आरोप लगाते हुए FIR हुयी है ,मगर इन अफसरों की लापरवाही पर सरकार की चुप्पी समझ से परे है.

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इस Lockdown में आखिर क्या कर रहीं हैं FIR की चंद्रमुखी चौटाला, देखें Video

सब टीवी के चर्चित शो एफ. आई. आर (FIR) की सब-इंस्पेक्टर (Sub Inspector) चन्द्रमुखी चौटाला (Chandramukhi Chautala) को आप जानते ही होंगे. इस रोल को निभानें वाली ऐक्ट्रेस कविता कौशिक (Kavita Kaushik) दर्शकों के बीच छा गई थीं. उन्होंने धारावाहिक एफ. आई. आर. (FIR) में चन्द्रमुखी चौटाला के रूप में दबंग पुलिस वाली का किरदार निभाया था. इस धारावाहिक  में उनके साथ दो हवलदार, मुलायम सिंह गु्लगुले और गोपीनाथ गंडोत्रा  के अलावा  बजरंग पांडे नाम के पुलिस इंस्पेक्टर भी थे जो सब इंस्पेक्टर चन्द्रमुखी चौटाला का अधिकारी होता है, दर्शकों को हंसाने में कामयाब रहे थे.

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इसके अलावा कविता कौशिक (Kavita Kaushik) नें धारावाहिक अरे दीवानों मुझे पहचानो, दिल क्या चाहता है, कुमकुम – एक प्यारा सा बंधन, कहानी घर घर की, रीमिक्स, तुम्हारी दिशा, नच बलिए – 3, केसर, घर एक सपना, कुटुंब में भी दमदार दमदार भूमिकाएं निभाई थी.

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अब जब देश में कोरोना के चलते लौकडाउन (Lockdown) लगा है तो लोगों ने अपनी बोरियत दूर करने के लिए अलग – अलग तरीके अपना लिए हैं. कविता कौशिक (Kavita Kaushik) उन्हीं में से एक है. वह इन दिनों अपने घर में हैं और खुद को व्यस्त रखने के लिए तमाम तरीके अपना रहीं है और अपने रूटीन से जुड़ी तस्वीरें फैंस के साथ शेयर कर रहीं हैं. इन तस्वीरों में वह अपने पति रोनित विश्वास के साथ बेहद रोमांटिक अंदाज में एक्सरसाइज करती नजर आ रहीं है. इस लौकडाउन के बीच इन्स्टाग्राम पर शेयर किये गए कुछ तस्वीरों और वीडियोज में उन्होनें अपने पति के साथ बहुत ही सेक्सी अंदाज में पोज दिए है.

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कविता कौशिक नें हाल ही में एक्सरसाइज के लिए सर्टिफिकेट भी हासिल किया है. शेयर किये गए फोटोज में वह एक योगा एक्सपर्ट के रूप में एक्सरसाइज करती  नजर आयीं. कविता कौशिक नें अलग अलग तरीके से एक्सरसाइज करते हुए का वीडियो और फोटोज शेयर किया है. किसी में वह सर के बल योगा करती नजर आ रहीं है तो किसी में वह पति के साथ योगा पोजीशन में हैं.

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Strrrrrrrretch 🥰

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हाल ही में दर्शकों नें दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत का पुनः प्रसारण की मांग की थी. जिसको लेकर कविता नें अपने विचार साझा किये थे. इसके बाद इनके ऊपर FIR कराये जाने की मांग तक होने लगी थी. उन्होंने लेकिन इन सबसे दूर कविता ने उन ट्रोलर्स को अपनी तस्वीरें शेयक कर करारा जबाब दिया है.

इन्स्टाग्राम पर शेयर किये गए कुछ तस्वीरों पर यूजर्स नें कमेन्ट भी किये और उनका मजाक भी बनाया है. योगा करने वाले वीडियो को लेकर एक यूजर नें मजे लेते हुए लिखा है “ध्यान रखियो पाँव पंखें में ना आ जाए चौटाला” वहीं एक नें लिखा है “इन्साफ की देवी चंद्रमुखी चौटाला”. एक और यूजर नें लिखा है “घर से बाहर निकलनें के जुर्म में चालान काट रहा हूं प्लीज Paytm करवा दीजिये.”

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Lockdown में लगातार अपनी हौट फोटोज शेयर कर रही हैं Sunny Leone

इस लौकडाउन (Lockdown) के बीच बौलीवुड अभिनेत्रियों में हौट और सेक्सी तस्वीरों को शेयर करनें की होड़ सी लगी हुई है. इनमें तो कुछ इतनी आगे है की हर रोज कोई न कोई फोटो शेयर करती रहती हैं. इन एक्ट्रेसेस मे सनी लियोन (Sunny Leone) और उर्वशी रौतेला (Urvashi Rautela) का नाम सबसे ऊपर है. इन दोनों अभिनेत्रियों में तस्वीरों की शेयर करने की होड़ सी मची है.

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सोशल मीडिया पर कर रही हैं हौट फोटोज शेयर…

 

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My Saturday hang !!! 😍 12 days of #Summer 🍀 . . . Shot by @dabbooratnani | @manishadratnani @dabbooratnanistudio

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लौक डाउन के चलते सनी लियोन इन दिनों अपने पति और बच्चों के साथ अपने घर पर समय बिता रही हैं. लेकिन इन सबके बीच वह अपने हौट तस्वीरों के कलेक्शन में से चुनिन्दा तस्वीरों को अपने इन्स्टाग्राम और ट्विटर एकाउंट के जरिये अपने फैन्स के सामने ला रहीं हैं.

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मोनोकिनी पहनी आईं नजर…

उन्होंने जो लेटेस्ट तस्वीरें शेयर की हैं उनमें वह मोनोकिनी (Monokini) पहनी हुई नजर आ रही है. इसके साथ उन्होंने ईयररिंग्स, ब्रेसलेट और नुकीले हील्स भी पहन रखे हैं. इन तस्वीरों में वह पत्थरों पर लेट कर पोज देती नजर आ रहीं हैं. मोनोकिनी के साथ उन्होंने कई हौट और सेक्सी पोज दिए हैं.

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कैप्शन में लिखा ये…

शेयर किये गए इन तस्वीरों के साथ उन्होंने उसके कैप्सन में लिखा है “रविवार” “कुछ भी नहीं करने का दिन” “ओह रुको” वह “अब तो हर दिन कुछ नहीं हो रहा है” Sunday. The day to do nothing !!! Oh wait, that’s everyday now. एक्ट्रेस की ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है.

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फैंस कर रहे हैं ऐसे कमेंट्स…

शेयर किये एक दूसरे तस्वीर में वह बिकनी में नजर आ रहीं हैं. इन तस्वीरों पर उनके फैंस दिल खोल कर कमेंट्स कर रहें हैं जैसे कि – “वास्तव में सेक्सी लग रहीं है, मैं अपना ध्यान एक पल के लिए भी नहीं हटा सकता (That’s really sexy look, I can’t divert my attention for a second even).” एक यूजर नें मजे लेने वाले अंदाज में कमेंट किया है,- “किसी संस्था से बोल के कपड़े डोनेट करो रे. 4 दिन से बेचारी को देख रहा हूं ऐसी हालत में बस रंग बदल जाता है बाकी सब ऐसा ही रहता है.” एक नें लिखा है की,- “आप बहुत खुबसूरत हो, ऐसा हूर जैसे, चांदनी रात में चांद की रौशनी जैसे फैली हुई है आप की स्माइल और आप की खूबसूरती ऐसी ही रहे यही दुआ है हमारी और आप और आगे जाये.”

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फिलहाल सनी लियोन (Sunny Leone) के फैन्स का लौकडाउन में सनी के चलते बड़े आराम से चल रहा है, क्यों की सनी हर दिन उनके लिए नायाब और चुनिन्दा तस्वीरें जो पोस्ट कर रहीं हैं.

ई-नाम पोर्टल पर तीन नई सुविधाएं, किसान भाई निभाएंगे सोशल डिस्टेंसिंग के नियम

कोरोना (कोविड-19) वायरस से किसानों को कोई नुकसान नहीं हो, इसके लिए सरकार नई-नई योजनाओं और राहतों की घोषणाएं कर ही है. अब केंद्र सरकार ने देश के करोड़ों लघु और सीमांत किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) पोर्टल पर तीन सुविधाएं लांच की है. तो आइये जानते है इसके बारे में….

केंद्रीय कृषि मंत्री ने बीते सप्ताह कोरोना वायरस के संक्रमण काल में सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का ख्याल रखते  हुए , किसान भाईयों के लिए राष्ट्रीय कृषि बाजार के ई- प्लेटफ़ॉर्म की प्रभावशीलता बनाने के लिए तीन उपयोगकर्ता के अनुकूल सॉफ्टवेयर प्रोग्राम को लॉन्च किया. इससे किसानों को अपनी उपज को बेचने के लिए खुद थोक मंडियों में आने की जरूरत कम हो जाएगी. वे उपज  वेयरहाउस  में रखकर वहीं से बेच सकेंगे.

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कोरोना वाय़रस के संक्रमण के इस दौर में इसकी आवश्यकता है. साथ ही एफपीओ अपने संग्रह से उत्पाद को लाए बिना व्यापार कर सकते हैं व लॉजिस्टिक मॉड्यूल के नए संस्करण को भी जारी किया गया है, जिससे देशभर के पौने चार लाख ट्रक जुड़ सकेंगे. परिवहन के इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपयोगकर्ताओं तक कृषि उपज सुविधापूर्वक शीघ्रता से पहुंचाई जा सकेगी.

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि अनाज, फल और सब्जियों की आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने में मंडियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. नई सुविधाओं से छोटे और सीमांत किसानों को काफी सहूलियत होगी. वे अपनी उपज मान्यता प्राप्त गोदामों में रख पाएंगे, लॉजिस्टिक्स खर्चों को बचा सकेंगे और बेहतर आय अर्जित करते हुए देशभर में उपज को अच्छे तरीके से बेचकर खुद को परेशानी से बचा सकते हैं. मूल्य स्थिरीकरण समय और स्थान उपयोगिता के आधार पर किसान आपूर्ति और मांग की तुलना करते हुए फायदे में रहेंगे.

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एफपीओ को बोली के लिए अपने आधार/संग्रह केंद्रों से अपनी उपज अपलोड करने में सक्षम बनाया जा सकेगा. वे बोली लगाने से पहले उपज की कल्पना करने में मदद के लिए आधार केंद्रों से उपज और गुणवत्ता मापदंडों की तस्वीर अपलोड कर सकते हैं. एफपीओ के पास सफल बोली लगाने के बाद मंडी के आधार पर या अपने स्तर से उपज वितरण का विकल्प रहेगा. इन सबसे मंडियों में आवागमन कम होने से सभी को सुविधा होगी, परिवहन की लागत कम होगी. साथ ही ऑनलाइन भुगतान की सुविधा मिलेगी.

आपको बता दे कि ‘ ई-नाम’ पोर्टल 14 अप्रैल 2016 को शुरू किया गया था, जिसे अपडेट कर काफी सुविधाजनक बनाया गया है. इसमें पहले से ही 16 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में 585 मंडियों को ई-नाम पोर्टल पर एकीकृत किया गया है इसके अतिरिक्त 415 मंडियों को भी ई-नाम से जल्द ही जोड़ा जाएगा, जिससे इस पोर्टल पर मंडियों की कुल संख्या एक हजार हो जाएगी. ई-नाम पर इन सुविधाओं के कारण किसानों, व्यापारियों व अन्य को मंडियों का चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी.

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इस Lockdown देखिए भोजपुरी की ये सबसे बड़ी कौमेडी फिल्म

बौलीवुड की तरह भोजपुरी में फुल कौमेडी वाली फिल्में अभी काफी कम बन रहीं हैं. जब की भोजपुरी फिल्मों में भी अब स्तरीय कौमेडी देखनें को मिल रही है. इस कड़ी में भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में “बताशा चाचा” (Batasha Chacha) के नाम से मशहूर अभिनेता मनोज टाइगर (Manoj Singh Tiger) के लीड रोल वाली फिल्‍म ‘लागल रहा बताशा’ (Lagal Raha Batasha) को एसआरके म्यूजिक के औफिसियल यूट्यूब चैनल पर रिलीज कर दिया गया है. यह फिल्म साल 2019 के जनवरी महीनें में प्रदर्शित की गई थी. ‘लागल रहा बताशा’ भोजपुरी सिनेमा की मात्र फुल कौमेडी फिल्म है.

इस फिल्म की की खास बात यह है की इसे पूरे परिवार के साथ बैठ कर देखा जा सकता है. अश्‍लीलता से परे इस फिल्म में प्यार और इमोशन्स का भी जबरदस्त तड़का देखनें को मिलता है.

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इस फिल्म की कहानी फिल्म के लीड एक्टर मनोज सिंह टाइगर “बतासा चाचा” ने लिखी है. मनोज सिंह टाइगर भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के हरफनमौला कलाकारों में शुमार हैं. भोजपुरी में वह बतौर कौमेडियन, विलेन, और गंभीर रोल के जरिये अपनी अलग ही पहचान बनानें में कामयाब रहें हैं.

फिल्म की कहानी गांव में नौटंकी मण्डली चलाने वाले एक ऐसे युवक की है जिसे भोजपुरी सीखने आई नामचीन अभिनेत्री आम्रपाली दूबे (Amrapali Dubey) से हुए प्यार हो जाता है. फिल्म में आम्रपाली दूबे को उनके असली नाम से किरदार में दिखाया गया है जो बहुत बड़ी फिल्म ऐक्ट्रेस है. फिल्म में नौटंकी मंडली के अगुआ बतासा यानी मनोज सिंह टाइगर ने इस फिल्म में अपने रोल को बड़ी सिद्दत से निभाया है, फिल्म की कहानी में नवीनता तो है ही साथ ही फिल्मांकन में भी भव्यता देखने को मिलती है. इस फिल्‍म की सबसे खास बात ये है कि फिल्म के सभी अभिनेता रंगमंच से जुड़े हैं. फिल्म में अश्‍लीलता से परहेज किया है.

इन दिग्गज कलाकारों से सजी है यह फिल्म

इस फिल्म को फुल इंटरटेनमेन्ट्स के नजरिये से देखा जा सकता है क्यों की इस फिल्म में भोजपुरी के सभी दिग्गज कौमेडियन्स नें काम किया है इस फिल्म में भोजपुरी सनसनी आम्रपाली दूबे और मनोज टाइगर के साथ अविनाश द्विवेदी, प्रकाश जैस, संजय पांडे, के के गोस्वामी, सीपी भट्ट, आनंद मोहन, विनोद मिश्रा, महेश आचार्य, संतोष श्रीवास्तव, राहुल श्रीवास्तव, किरण यादव, धामा वर्मा, दिलीप वर्मा, लल्लन सिंह, सोनू पांडेय, जे के, सम्भावना सेठ एवं सुशील सिंह नें जबरदस्त अभिनय किया है.

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फिल्म का निर्देशन आलोक विसेन नें किया है निर्माता संजीव कुशवाहा और आलोक ने. फ़िल्म के संगीतकार ओम झा हैं, गीतकार हैं प्यारेलाल कवि व आज़ाद सिंह है और सिनेमेटोग्राफी फ़िरोज़ खान नें की है.क्रिएटिव प्रोड्यूसर की जिम्मेदारी रजनीश कुमार नें निभाई है तो संपादन संतोष मंडल नें किया है. फिल्म की कोरियोग्राफी रिक्की गुप्ता और महेश आचार्य नें की है इस फिल्म के पीआरओ उदय भगत और रंजन सिंह है. फिल्‍म का निर्माण वी क्लासिक मूवीज़ प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले हुआ है.

फिल्म का लिंक-

#coronavirus: दैनिक मजदूरों की स्थिति चिंताजनक

ग्रामीण क्षेत्रों में लौक डाउन की वजह से दैनिक मजदूरों की हालत अत्यंत चिंताजनक हो गयी है. ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले दिहाड़ी मजदूर कृषि कार्य, भवन निर्माण, सरकारी योजना या बड़े बड़े ठीकेदारों द्वारा बनाये जा रहे सड़क, पुल पुलिया निर्माण में कार्य करने वाले लोगों का  काम पूर्णतः ठप्प है. इनके घरों में चूल्हा तभी जलता है जब दिन भर काम करते हैं. शाम को मजदूरी मिलती है. इनके घरों में महीने भर का राशन पानी नहीं रहता.

सुरेश राम भवन निर्माण के कार्यों में दैनिक मजदूरी का काम करते हैं. मजदूरी के रूप में 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मिलता है. पत्नी बच्चों के साथ साथ बृद्ध माता पिता हैं. कुल सात परिवार हैं. लॉक डाउन की वजह से काम धंधा बन्द है.

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मुन्नी एक आदमी के घर में खाना बनाने,बर्तन धोने और झाड़ू पोछा का काम करती है. लॉक डाउन की वजह से उसके मालिक ने काम छोडवा दिया है. इनके घरों में चूल्हा जुटना मुश्किल हो गया है.मुन्नी ने दिल्ली प्रेस को बतायी की भारतीय युवा मंच के कुछ युवा लोग मेरे घर पर आकर राशन और जरूरी सामान पन्द्रह दिन के लिए देकर गए हैं जिससे तत्काल में काम चल रहा है. अधिकांशतः घरों में काम करने वाली कामकाजी महिलाओं को उसके मालिक ने काम से हटा दिया है. इन महिलाओं के साथ भुखमरी की समस्या पैदा हो गयी है

.राजू पासवान राजमिस्त्री का काम करता है. काम धंधा बन्द होने की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.घर में जमा किये हुवे पैसा पत्नी की बीमारी में समाप्त हो गए .

लोगों के द्वारा मालूम हुआ कि सरकार के तरफ से प्रति परिवार पाँच किलो अनाज फ्री में दिया जाएगा.लेकिन अभी तक नहीं मिला है.जनवितरण प्रणाली विक्रेता से पूछने पर बताता है कि आएगा तब न देंगे.अपना जमीन बेचकर थोड़े देंगे.इसी तरह महानगरों से किसी तरह पैदल मालगाड़ी या कोई माध्यम से अपने घरों तक पहुँचे कुछ मजदूरों को स्कूल या सामुदायिक भवन में रखा गया है. जो मजदूर अपने घरों में भी हैं. उन्हें कृषि कार्यों में भी किसान नहीं लगा रहे हैं. यहाँ तक कि उनसे लोग इतना घृणा कर रहे हैं कि वह एक ब्यक्ति नहीं बल्कि कोरोना वायरस है.

अगर यही हालात रह गए और लॉक डाउन अधिक दिनों तक खींच गया तो कोरोना वायरस से क्या भूख और कुपोषण से इन मजदूरों के परिवार वाले दम तोड़ने लगेंगे.

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गाँव में बहुत सारे सुखी सम्पन्न लोग हैं जिनके पास गरीबी रेखा वाला राशन कार्ड है. बहुत सारे ऐसे गरीब और मजबूर लोग हैं जिनके पास राशन कार्ड नहीं है. टेलीविजन अखबार और रेडियो पर सरकार द्वारा घोषणाओं का अंबार है. देख सुनकर येसा लगता है कि लोगों तक पैसों और हर तरह की सामग्री भरपूर मात्रा में पहुँच रही है. कहीं किसी चीज की कोई कमी नहीं है. लेकिन वास्तविक स्थिति कुछ अलग ही है. घोषणाओं का सिर्फ ढोल पीटा जा रहा है. लोगों तक वे चीजें पहुँच नहीं पा रही है. मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री राहत कोष में दिए गए अरबों रुपये इन बेसहारा भूखों नंगों तक नहीं पहुँच पा रहा है. दुष्यंत कुमार की गजल की पंक्ति है – सारी नदियां सुख जाती है, मेरे गांव के आते आते.

Lockdown में उजड़ने लगीं देह व्यापार की मंडियां

49 साला सोनिया बीते 25 सालों से मुंबई के कमाठीपुरा में रहते देह व्यापार कर रही है यानि सेक्स वर्कर है. सालों पहले पह नेपाल से इस बदनाम इलाके में आई थी, तब कमसिन थी सो अच्छा खासा पैसा मिल जाता था क्योंकि जवान लड़कियां हमेशा ही ग्राहकों की पहली पसंद रहीं हैं. हालांकि इस उम्र में भी वह 2-3 हजार रु रोज कमा लेती है लेकिन लॉक डाउन के बाद यानि  24 मार्च से सोनिया ने एक धेला भी नहीं कमाया है क्योंकि कोरोना की दहशत और लॉक डाउन के चलते ग्राहक कमाठीपुरा की तरफ झांक भी नहीं रहे हैं.

हैरान परेशान सोनिया पहली सेक्स वर्कर है जिसने मीडिया के सामने अपना दुख दर्द बयां किया वह कहती है, पूरी ज़िंदगी इधर निकल गई, लेकिन इतने बुरे हालात कभी नहीं देखे. इतने बम फटे, अटैक हुये, बीमारिया आईं पर ऐसी वीरानी कभी नहीं देखी.

सोनिया जिस कमरे में रहती है उसमें तीन और सेक्स वर्कर रहतीं हैं. उन्हें भी हालात सुधरते नहीं दिख रहे. बक़ौल सोनिया, अगर हालात ऐसे ही रहे तो हमें खाने पीने के लाले पड़ जाएंगे.  अभी तो मकान मालिक को किराया देने भी पैसे नहीं हैं. सोनिया के साथ रहने वाली जया भी उसी की तरह चिंतित है कि अब क्या होगा, कमाठीपुरा में इतना सन्नाटा उसने भी पहले कभी नहीं देखा.

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जया ने अपने 6 साल के बेटे को पुणे में एक रिश्तेदार के यहां रख छोड़ा है जिससे वह पढ़ लिखकर कुछ बन सके. बेटे की पढ़ाई के लिए उसे हर महीने 1500 रु भेजने पड़ते हैं जो अब शायद ही वह भेज पाये. अभी तो चिंता पेट पालने की है क्योंकि धंधा एकदम से बंद हुआ है जिसकी उम्मीद उसने या देह व्यापार के लिए बदनाम कमाठीपुरा की हजारों काल गर्ल्स ने नहीं की थी.

कमाठीपुरा में हजारों सेक्स वर्कर हैं जिनमें से कई यहीं की चालों में किराए से रहती हैं तो कई मुंबई की उपनगरियों से देहव्यापार के लिए आती हैं. इस इलाके में सुबह ही देर रात 8 बजे के बाद होती है. देश का ऐसा कोई इलाका नहीं जहां की काल गर्ल्स यहां न मिलती हों. ग्राहकों की फरमाइश पर दलाल हर तरह का माल उन्हें मुहैया कराते हैं मसलन साउथ इंडियन, नेपाली बंगाली, हिन्दी राज्यों की और पूर्वोत्तर राज्यों की लड़कियां भी इस बाजार में मिलती हैं. लेकिन लॉकडाउन के बाद न केवल कमाठीपुरा बल्कि देश भर की देह मंडियों की सेक्स वर्कर भुखमरी के कगार पर आ खड़ी हुई हैं और चूंकि वे समाज के माथे पर बदनुमा दाग हैं इसलिए कोई उनकी सुध नहीं ले रहा जबकि इनकी हालत भी रोज कमाने खाने वाले दिहाड़ी मजदूरो सरीखी ही है.

एक और सेक्स वर्कर किरण का कहना है कि आप मीडिया बाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हमें माली इमदाद भेजने क्यों नहीं कहते क्योंकि हमारे ऊपर भी बूढ़े माँ बाप और बच्चों की देखभाल की ज़िम्मेदारी है. अब जब धंधा चौपट है तो हम क्या करें. कमाठीपुरा में तकरीबन 2 लाख सेक्स वर्कर हैं जो लॉकडाउन  के चलते बदबूदार और संकरी कोठियों में कैद होकर रह गईं हैं. इनके अधिकतर ग्राहक भी रोज कमाने खाने बाले ही होते हैं जिनके अब कहीं अते पते नहीं.

ये मंडियां हुईं सूनी…   

कमाठीपुरा से भी बड़ा बाजार कोलकाता का सोनगाछी है जो एशिया का सबसे बड़ा रेड लाइट इलाका है. एक अंदाजे के मुताबिक सोनगाछी में कोई 3 लाख सेक्स वर्कर हैं कुछ पार्ट टाइम धंधा करती हैं तो कुछ फुल टाइम. इनका एक बड़ा संगठन भी है जिसका नाम दरबार महिला समन्वय समिति है. इस संगठन में लगभग 1 लाख 30 हजार सेक्स वर्कर्स ने रजिस्ट्रेशन कराया हुआ है और इससे ज्यादा वे हैं जिनहोने रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं समझी.

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सोनगाछी में हैरानी की बात है लॉकडाउन से पहले ही ग्राहकों की आवाजाही कम हो चली थी. दरबार की एक पदाधिकारी महाश्वेता मुखर्जी के पास पश्चिम बंगाल के अलग अलग इलाकों से फोन सेक्स वर्कर्स के आने लगे थे कि उन्हें भुखमरी से बचाने कोई पहल की जाये. 30 मार्च आते आते तो हालात काफी भयावह हो चले थे. अधिकांश सेक्स वर्कर्स के पास जमापूंजी और राशन खत्म हो चला था.

ऐसे में महाश्वेता ने एक एनजीओ सोनगाछी रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की मदद से एक योजना बनाई. इस एनजीओ के प्रबंध निदेशक समरजीत साना ने ममता बनर्जी सरकार की सामाजिक कल्याण मंत्री शशि पांजा से गुजारिश की कि कोरोना वायरस के मद्देनजर सरकार की तरफ से दिये जाने बाले फायदे सेक्स वर्कर्स को भी दिये जाएँ. किराए से रह रही तकरीबन 30 हजार सेक्स वर्कर्स के मकान मालिकों को भी उन्होने कहा कि उनका किराया माफ किया जाये. अलावा इसके समरजीत ने कई जानी मानी हस्तियों और दूसरी एनजीओ से भी सेक्स वर्कर्स की मदद के लिए गुहार लगाई है.

यह कोशिश थोड़ी ही सही रंग लाई. शशि पांजा की पहल पर सेक्स वर्कर्स को दाल चावल और आलू के अलावा पका हुआ खाना भी दिया जा रहा है लेकिन लॉकडाउन के बाद क्या होगा इसे लेकर काल गर्ल्स की चिंता कुदरती बात है. सोनगाछी एक महीने पहले तक चौबीसों घंटे गुलजार रहने बाला बाजार हुआ करता था जिसमें देहव्यापार पर बनी कई फिल्मों की शूटिंग भी हुई है. लेकिन अब यहाँ मनहूसियत पसरी पड़ी हुई है.

देह व्यापार पर दर्जनो फिल्मे बन चुकी हैं और मीना कुमारी से लेकर करीना कपूर और विद्धया बालान तक तकरीबन सभी नामी एक्ट्रेसों ने तवायफ का किरदार जिया है. इनकी मुसीबतों पर बनी सबसे सटीक फिल्म 1983 में आई श्याम बेनेगल निर्देशित मंडी थी जिसमें लीड रोल शबाना आजमी ने निभाया था. मंडी में सधे ढंग से दिखाया गया था कि नेता कारोबारी, समाजसेवी और दलाल कैसे कैसे वेश्याओं को मोहरा बनाकर अपना उल्लू सीधा करते हैं.

कमाठीपुरा और सोनगाछी के मुक़ाबले दिल्ली के रेड लाइट इलाके जीबी रोड की सेक्स वर्कर थोड़ी बेहतर हालात में हैं. इस इलाके में 98 के लगभग ऐसे मकान हैं जिन्हें कोठा कहा जा सकता है इनमें 1500 के लगभग सेक्स वर्कर रहती हैं. लॉकडाउन  के बाद यहाँ की सेक्स वर्कर भी भुखमरी के कगार पर आ गईं थीं लेकिन उन्हें खाना दिल्ली पुलिस दे रही है और नजदीक के गुरुद्वारे से भी मदद और राशन मिल जाता है.

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सेक्स वर्कर भूखी न रहें इसके लिए पहले दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग यानि डीसीपीसीआर ने जीबी रोड के कोठों पर रहने बालियों के लिए एक हंगर सेंटर बनाया था लेकिन ये सेक्स वर्कर लोगों के तानों के चलते वहाँ जाने से कतराईं तो उन्हें घर पर ही दवाइयों और राशन पहुंचाया जा रहा है. यह एक काबिले तारीफ पहल है जिसका श्रेय डीसीपीसीआर के मेम्बर सुदेश विमल को जाता है जो दूसरे जरूरी सामान के साथ साथ सेनेटरी नेपकिन तक सेक्स वर्कर्स को पहुंचाने का इंतजाम कर रहे हैं.

यहां तो कुछ भी नही –

ये तो वे शहर और इलाके थे जहां सेक्स वर्कर बड़ी तादाद में हैं और एक ही जगह से धंधा करती हैं इसलिए राज्य सरकारें इनकी अनदेखी नहीं कर पाईं लेकिन कोरोना और लॉकडाउन  का सबसे बुरा और ज्यादा असर उन शहरों और इलाकों पर पड़ रहा है जहां यह धंधा छिटपुट और छोटे पैमाने पर होता है लेकिन अक्सर चर्चाओं और सुर्खियों में रहता है.

ऐसे खास इलाके हैं ग्वालियर का रेशमपुरा, आगरा का कश्मीरी मार्केट, पुणे का बुधबर पैठ, सहारनपुर का नक्काफसा बाजार, इलाहाबाद का मीरागंज और एक और नामी धार्मिक शहर वाराणसी का मड़ुआडिया, मेरठ का कबाड़ी बाजार और नागपुर का गंगा जमुना.

इन इलाकों और अड्डों की रौनक गायब है और अधिकांश सेक्स वर्कर या तो घरों में कैद हैं या फिर अपने घरो को लौट गईं हैं. मुमकिन है लॉकडाउन के बाद ये भी दूसरे दिहाड़ी मजदूरों की तरह अपने धंधे पर वापस लौट आयें लेकिन धंधा पहले सा चलेगा इसमें शक है क्योंकि हर कोई कोरोना से लंबे वक्त तक डरा रहेगा और सोशल डिस्टेन्सिंग पर अमल करने की हर मुमकिन कोशिश करेगा लेकिन यह देखना भी दिलचस्पी की बात होगी की शरीर की भूख और जरूरत पर कोरोना कितना और कब तक भारी पड़ेगा .

भोपाल के एमपी नगर इलाके की एक काल गर्ल लक्ष्मी शर्मा (बदला नाम) से इस बारे में बात की गई तो उसने बताया नौबत तो भूखों मरने की आ गई है सामाजिक संगठन जो खाना बाँट रहे हैं उससे पेट भर रही हूँ लेकिन अब न तो खाने में मजा आ रहा है और न ही जीने में. पास के शहर विदिशा से भोपाल आकर धंधा करने बाली 28 साला लक्ष्मी कहती है पैसों के लिए कई ग्राहकों को फोन किया लेकिन कोई साला नहीं दे रहा कई ग्राहक जो आम दिनों में कुत्ते की तरह दुम हिलाते आगे पीछे घूमते थे परेशानी के इन दिनों में फोन ही नहीं उठा रहे.

वे क्यों मुझे भाव दें, वह जैसे खुद को तसल्ली देते हुये बताती है यह तो इस हाथ दे उस हाथ ले वाला सौदा है पर लोक डाउन की बेगारी ने साबित कर दिया कि एक रंडी आखिर रंडी ही होती है जिसका कोई सगा नहीं होता.

फर्क धंधे के तरीकों का

लक्ष्मी की खीझ अपनी जगह सही है लेकिन उसकी बातों से एक बात तो समझ आती है कि कालगर्ल दो तरह की होती हैं एक वे जो मर्जी से धंधा करतीं हैं और दूसरी वे जो मजबूरी के चलते इस दलदल में आती हैं. हाई टेक कालगर्ल्स उतनी परेशानी में नहीं हैं जितनी में कि  लक्ष्मी जैसी हैं जिनकी गुजर का जरिया ही रोज रोज जिस्म बेचना है. इन्हें ज्यादा पैसा नहीं मिलता है कई बार तो दिन में 200– 300 रु ही मिल जाएं तो ही इनके घर का चूल्हा जल पाता है.

कमाठीपुरा और सोनागाछी जैसे इलाकों में लक्ष्मी जैसी ही सेक्स वर्कर हैं जबकि फाइव स्टार होटलों, स्पा, मसाज सेंटर्स, फार्म हाउसों और खुद के आलीशान फ्लेट्स से धंधा करने बालियों पर लॉकडाउन का कोई खास असर नहीं पड़ा है. यह ठीक वैसी ही स्थिति है कि अमीर और आम मध्यांवर्गीयो पर लॉकडाउन बेअसर है लेकिन मारा गरीब मजदूर जा रहा है.

हाइटैक कालगर्ल्स की तादाद 10 फीसदी ही है जबकि रोजाना कमाने खाने वालियों की 90 फीसदी है जो बद से बदतर हालत में लॉकडाउन के बाद आ गई हैं और ऐसा लगता नहीं कि अभी एकाध साल और ये उजड़ती मंडिया आबाद हो पाएंगी.

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दूसरों की जिस्मानी भूख मिटाने बाली इन सेक्स वर्कर्स के पेट की भूख खैरात के खाने से अगर जैसे तैसे मिट पा रही है तो इसकी वजह इस धंधे का गैर कानूनी होना भी है और इन्हें पापिन करार देना भी है.

योजनाओं का भी फायदा नहीं

इन सेक्स वर्कर्स की गिनती दिहाड़ी मजदूरों में नहीं होती इसलिए इन्हें सरकारी योजनाओं का फायदा भी न के बराबर ही मिलता है. सेक्स वर्कर्स के भले के लिए काम करने बाली सबसे बड़ी एजेंसी भारतीय पतिता उद्धार सभा की दिल्ली इकाई के सचिव इकबाल अहमद की मानें तो सरकार की जनधन और सेहत समेत किसी योजना का लाभ सेक्स वर्कर्स को नहीं मिल पा रहा है क्योंकि अधिकांश के पास न तो आधार कार्ड हैं और न ही राशन कार्ड हैं और न ही इनके बेंक खाते हैं.

बक़ौल इकबाल अहमद लॉकडाउन के मुश्किल वक्त में कई संगठन बाले आते हैं और थोड़ा बहुत सामान देकर चले जाते हैं पर उनकी असल मंशा फोटो खिंचाने की होती है. राशन मिल भी जाये तो सेक्स वर्कर्स के पास उसे पकाने न तो गेस सिलेन्डर हैं और न ही केरोसिन के लिए पैसे हैं. इस पर भी दिक्कत यह कि अधिकांश सामान देने बाले नीचे से ही सामान देकर चले जाते हैं जिससे तीसरे चौथे माले पर रहने बालियों को सामान मिल ही नहीं पाता.

इसी संस्था के अध्यक्ष खैराती लाल भोला की मानें तो लॉकडाउन के बाद उन्हें देश भर से सेक्स वर्कर्स के फोन आए और उन्होने अपनी समस्याएँ बताईं जिनसे मैंने पत्र द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वास्थ मंत्री हर्षवर्धन को अवगत कराया लेकिन अभी तक कोई जबाब मुझे इनसे नहीं मिला है. गौरतलब है कि देश में कोई 1100 रेड लाइट इलाके हैं. खैराती लाल पहले भी सेक्स वर्कर्स की परेशानियों को लेकर सभी सांसदों को चिट्ठी लिख चुके हैं जिससे सेक्स वर्कर्स का हेल्थ कार्ड बन सके क्योंकि अस्पताल में जब ये खुद को रेड लाइट इलाके का बताती हैं तो हर कोई इनसे कन्नी काटने लगता है.

अब लॉकडाउन के वक्त में सेक्स वर्कर्स की बदहाली भुखमरी के जरिये भी उजागर हो रही है तो बारी सरकार की है कि वह इनके बाबत संजीदगी से सोचे और इनके भले के लिए कदम उठाए क्योंकि ये भी समाज का अहम हिस्सा हैं.

क्या कसूर था उन मासूमों का ?

उत्तर प्रदेश के भदोही जनपद के गोपीगंज कोतवाली क्षेत्र के जहांगीराबाद की ये घटना है जो सामने आई है, इस घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है. जो भी सुनेगा उसका कलेजा कांप जाएगा ये सोचकर ही भला कोई मां ऐसा कैसे कर सकती है? अब जरा आप भी जानिए कि आखिर ऐसा क्या हुआ.

गंगा घाट पर एक महिला ने अपने पांच बच्चों को गंगा में फेंक दिया. उन बच्चों को अभी भी पुलिस स्थानीय गोताखोरों के द्वारा ढ़ूढ रही है. सबसे आश्चर्य की बात तो ये है कि महिला खुद तैरक बाहर आ गई लेकिन बच्चों का कुछ भी अता-पता नहीं चल पाया. महिला ने बताया कि उसका पति से झगड़ा हुआ था, जिसकी वजह से उसने अपने पांचों बच्चों को गंगा में फेंक दिया. जहांगीराबाद गांव की रहने वाली महिला का नाम मंजू यादव है. शायद इसीलिए इसे कलयुग कहा गया है क्योंकि आप खुद सोचिए कि भला पति से झगड़े में उन बच्चों का क्या दोष था?

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ये घटना शनिवार देर रात की है जब उस महिला का अपने पति से किसी बात पर झगड़ा हुआ और फिर वो महिला अपने बच्चों को लेकर जहांगीराबाद गंगा घाट पर पहुंची, जहां उसने सभी बच्चों को गंगा में फेंक दिया. इन बच्चों की पहचान वंदना (12), रंजना (10), पूजा (6), शिव शंकर (8) और संदीप (5) के रूप में हुई है. महिला मंजू यादव ने बताया कि पहले उसने तीन बच्चों को गंगा में फेंका उसके बाद उसने अपने अन्य दो बच्चों को भी गंगा में फेंक दिया और फिर वह अपने घर चली आई.भला ये कैसी मां है जिसने अपने ही हांथों से अपने बच्चों को मौत के मुंह में डाल दिया अरे जब मारना ही था तो पैदा क्यों किया लेकिन कौन समझाए इस कलयुगी मां को.

पुलिस  का कहना है कि वो अभी भी बच्चों की तलाश कर रही है क्योंकि शव मिले नहीं हैं. हालांकि महिला के पति ने साफ-साफ किसी भी झगड़े के होने से इंकार किया है और कहा कि हमारा कोई झगड़ा नहीं हुआ था पता नहीं इसने ऐसा कदम क्यों उठाया. बात जो भी हो लेकिन इन सब में उन मासूमों की जान चली गई जिनका कोई कसूर नहीं था. उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनकी मां कुछ ऐसा करेगी उनके साथ और दो बच्चे तो इतने छोटे थें कि उन्हें तो कुछ पता भी नहीं होगा कि उनके साथ क्या हुआ. किस तरह से तड़प रहे होंगे वो सोचकर ही रूह कांप जाती है हाय रे मां ये तूने क्या कर डाला कैसे अपने ही हांथों से अपने बच्चों को मार डाला.

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