न्याय-अन्याय : निम्मी ने जब लांघी दरवाजे की दहलीज

न्याय-अन्याय : भाग 1 – निम्मी ने जब लांघी दरवाजे की दहलीज

लेखक – आरती लोहानी 

दरवाजे की कुंडी खड़कने की आवाज सुन कर निम्मी ने दरवाजा खोला, ‘‘जी कहिए…‘‘ निम्मी ने बाहर खड़े 2 लड़कों को अभिवादन करते हुए कहा.

‘‘जी, हम आप के महल्ले से ही हैं… आप को राशन की जरूरत तो नहीं… यही पूछने आए हैं,‘‘ उन में से एक व्यक्ति ने निम्मी से कहा.

‘‘जी धन्यवाद, अभी घर में पर्याप्त राशन है…‘‘ निम्मी ने जवाब दिया.

‘‘ठीक है… जब भी जरूरत हो, तो इस मोबाइल नंबर पर फोन करना…‘‘ उन में से एक बड़ी मूंछों वाले लड़के ने निम्मी को एक कागज पर मोबाइल नंबर लिख कर देते हुए कहा.

लौकडाउन का तीसरा दिन था. पूरा शहर एक अंतहीन उदासी और सन्नाटे की ओर बढ़ रहा था. किसी को नहीं पता था कि कब बाजार खुलेगा, कब घर से बाहर निकल सकेंगे और कब हालात सामान्य होंगे. सब अपनेअपने घरों में कैद परिवारों के साथ समय बिता रहे थे.

ये भी पढ़ें- नवंबर का महीना : सोनाली किसी और की हो गई

निम्मी का पति अमर किसी काम से दूसरे शहर गया हुआ था कि अचानक से ही कर्फ्यू जैसे हालात बन गए. निम्मी का विवाह हुए अभी सालभर भी नहीं हुआ था. निम्मी बहुत खूबसूरत थी और उस की सुंदरता के किस्से पूरे इलाके में हो रहे थे. कितने नौजवानों को अमर की किस्मत से रश्क था और कितने आदमी निम्मी को किसी न किसी तरह पाना चाहते थे, पर समाज का डर भी था. इस वक्त कइयों को पता था कि अमर घर पर नहीं है, इसलिए कई नएनए तरीकों से महल्ले के मर्द उस के घर के चक्कर काटने में लग गए.

उधर, अमर को इस बात का अंदाजा था कि उस की गैरमौजूदगी में निम्मी जरूर मुश्किलों से रूबरू होगी. अमर दिन में कई बार फोन करता और हालचाल पूछता था.

कहते हैं न कि जब मुश्किल घड़ी आती है तो अपने नातेरिश्तेदार मसलन दुख, चिंता, परेशानी और अवसाद आदि सब को साथ लाती है.

ये तालाबंदी भी निम्मी के जीवन में घोर अंधेरा ले कर आई थी. किसी तरह अपने रिश्तेदारों को फोन कर के वो अपना दर्द और अकेलापन दूर करने की कोशिश कर रही थी.

धीरेधीरे समय बीत रहा था और निम्मी को अमर से मिलने की उम्मीद दिखने लगी थी, तभी लौकडाउन को और आगे बढ़ा दिया गया. अब तो मुसीबत ही मुसीबत.

एक ओर राशन खत्म हो रहा था, तो वहीं दूसरी ओर अमर के खेत में गेहूं की खड़ी फसल. अब कौन फसल को काटे और कौन मंडी ले जाए.

हिमालय सरीखा सवाल निम्मी के सामने खड़ा था. वो किस से मदद मांगे, किस पर भरोसा करे और कैसे करे… क्योंकि निम्मी घर से बाहर कम निकलती थी. शादी कर के जब से वह यहां आई थी, उस ने किसी से कोई खास मेलजोल नहीं बढ़ाया था.

निम्मी सोच ही रही थी, तभी अमर का फोन का फोन आया, ‘‘निम्मी, मुझे तो अभी वहां आना संभव नहीं लगता… खेत का क्या हाल है… तुम गई हो क्या किसी रोज?‘‘ अमर ने चिंता जाहिर करते हुए पूछा.

‘‘बस एक दिन गई थी… फसल पक चुकी है, पर अमर, अब ये कटेगी कैसे… मजदूर भी नहीं मिल रहे हैं इस समय यहां,‘‘ निम्मी ने बताया. कुछ और इधर उधर की बात कर के निम्मी ने फोन रख दिया.

तभी उस के दरवाजे पर किसी ने आवाज दी, ‘‘अमर… ओ अमर, बाहर निकल.‘‘

महल्ले के धनी सेठ की आवाज सुन कर निम्मी बाहर आई.

‘‘अमर को बुलाओ तो बाहर. उस से कहो कि अगर गेहूं को जल्द ही नहीं काटा तो सारी फसल खराब हो जाएगी.‘‘

‘‘जी, वे तो शहर से बाहर गए थे किसी काम से और तालाबंदी के चलते वहीं फंस गए,‘‘ निम्मी ने बताया.

हालांकि धनी सेठ अच्छी तरह से जानता था कि अमर घर पर नहीं है, फिर भी अनजान बनने की अदाकारी बखूबी कर रहा था. बोला, ‘‘ओह, लेकिन अगर फसल नहीं कटेगी तो भारी नुकसान उठाना पड़ेगा…‘‘ धनी सेठ ने हमदर्दी जताने की कोशिश की और बातचीत जारी रखी.

‘‘ठीक है, अब मैं चलता हूं… अगर कोई जरूरत हो, तो मुझे जरूर बता देना. मैं गेहूं मंडी तक पंहुचा दूंगा.‘‘

‘‘जी जरूर… वैसे, इतनी खेती तो है नहीं कि मंडी तक पंहुचाई जाए. हमारा ही गुजर होने लायक अनाज होता है,‘‘ निम्मी ने हाथ जोड़ कर कहा.

धनी सेठ कई सवाल ले कर जा रहा था कि निम्मी मुझे बुलाएगी या नहीं, क्या कभी निम्मी के साथ गुफ्तगू संभव है. वह खुद से ही बोले जा रहा था कि सामने से आते हुए पुजारी से सामना हो गया.

‘‘प्रणाम पुजारीजी… कैसे हैं आप?‘‘ धनी सेठ पुजारी से बोला.

‘‘चिरंजीवी रहो सेठ… तरक्की तुम्हारे कदम चूमे,‘‘ दोनों हाथ से आशीष देते हुए पुजारी ने कहा.

‘‘इस दुपहरी में कहां से आ रहे हैं और कहां जा रहे हैं?‘‘ धनी सेठ ने पुजारी से पूछा.

सकपकाते हुए पुजारी ने उत्तर दिया, ‘‘बस, एक यजमान के घर से आ रहा हूं… सोचा, थोड़ा नदी किनारे टहल ही आऊं.‘‘

‘‘अच्छाजी रामराम,‘‘ कह कर धनी सेठ आगे बढ़ गया.

इधर निम्मी ने अमर को धनी सेठ के प्रस्ताव के बारे में बताया, तो अमर ने साफ इनकार करने को कहा, क्योंकि वह उसे अच्छी तरह जानता था और इस सहयोग के पीछे की मंशा पर भी उसे संदेह था.

ये भी पढ़ें- विश्वास : एक मां के भरोसे की कहानी

निम्मी ने फोन रखा ही था कि घर का दरवाजा किसी ने खटखटाया.

‘‘प्रणाम पुजारीजी,‘‘ निम्मी ने दरवाजा खोल कर सामने खड़े पुजारी का अभिवादन किया.

पुजारी ने भी धनी सेठ की तरह हमदर्दी और सहयोग का प्रस्ताव दिया. इसी तरह हेडमास्टर किशोर कश्यप ने भी सहयोग का प्रस्ताव निम्मी के सामने रखा.

निम्मी असमंजस में थी. एक ओर उस की शुगर की दवा भी खत्म हो रही थी, वहीं दूसरी ओर राशन भी खत्म होने को था.

अगले दिन मुंह पर चुन्नी लपेटे निम्मी महल्ले की दुकान तक गई. वहां से जरूरी सामान ले कर वह लौट रही थी, तभी सामने से उसी मूंछ वाले लड़के ने उसे पहचान लिया. उस का नाम अनूप शुक्ल था.

उसी ने हमदर्दी जताते हुए निम्मी से कहा, ‘‘अरे निम्मीजी, आप को किसी चीज की जरूरत थी, तो मुझ से कहतीं… आप क्यों इस धूप में बाहर निकलीं.‘‘

‘‘जी, इस में परेशानी की कोई बात नहीं… बस इस बहाने मैं टहल भी ली और सामान भी ले लिया.‘‘

इतना कह कर निम्मी तेजी से घर की ओर बढ़ गई. पर, तभी खयाल आया कि उस ने शुगर की दवा तो ली नहीं. वजह, उस की शुगर की दवा अगले दिन बिलकुल ही खत्म हो रही थी और मैडिकल स्टोर बहुत दूर था. तभी उसे अनूप के मोबाइल नंबर वाला कागज भी दिख गया, तो उस ने उसे फोन कर ही दिया.

फोन सुनते ही अनूप वहां आया. परेशानी सुन अनूप ने उसे फौरन दवा ला कर दे दी.

इसी तरह कुछ दिन बीत गए, पर गेहूं की फसल का कुछ तो करना था, वह यह सोच ही रही थी कि धनी सेठ और पुजारी कुछ मजदूरों के साथ उस के घर आ गए.

‘‘आप तो संकोच करेंगी निम्मीजी, पर हमारा भी तो कोई फर्ज बनता है कि नहीं?‘‘

‘‘मैं कुछ समझी नहीं,‘‘ निम्मी ने कहा.

‘‘इस में न समझने जैसा क्या है? बस, तुम हां कह दो, तो खेत से गेहूं ले आएं.‘‘

निम्मी कुछ समझती, इस से पहले दोनों ने मजदूरों को खेत में जाने का आदेश दे दिया. निम्मी ने औपचारिकतावश उन को चाय पीने को कह दिया. दोनों चाय पी कर चले गए.

उसी शाम धनी सेठ फिर निम्मी के घर आ धमका और बोला, ‘‘तुम ठीक तो हो न निम्मी… मेरा मतलब है कि खुश तो हो.‘‘

‘‘जी, मैं ठीक हूं,‘‘ निम्मी ने कहा. धीरेधीरे सेठ उस की ओर बढ़ने लगा… और पास आ कर बोला, ‘‘तुम इतनी खूबसूरत और कमसिन हो…‘‘ इतना कह कर उस ने निम्मी की कमर में हाथ डाल दिया.

निम्मी कुछ रोकती या कहती, सेठ ने उस के मुंह पर हाथ रख दिया और उसे बेहिसाब चूमने लगा. निम्मी रोती, कभी मिन्नत करती. विरोध की हर कोशिश उस की जाया हो रही थी. धनी सेठ की मजबूत बांहों से बचना उस के लिए नामुमकिन था. हर तरह का वास्ता निम्मी दे चुकी थी, पर जिस्म के भूखे सेठ को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, सिवाय निम्मी के शरीर के और उस ने उसे हर तरीके से भोगा. लगभग घंटेभर बाद वह झूमता हुआ घर से निकला, मानो सालों की प्यास बुझ गई हो.

सेठ के जाने के बाद निम्मी जोरजोर से रो रही थी, पर उस की चीख सुनने वाला कोई न था. सहसा उसे याद आया कि उस के महल्ले का देवेंद्र सिंह पुलिस में नौकरी करता है. किसी तरह निम्मी ने उस का पता किया.

‘‘हैलो… कौन बोल रहा है?‘‘ देवेंद्र सिंह ने फोन रिसीव करते हुए पूछा.

ये भी पढ़ें- Short Story : व्यवस्था – अपनी कमियों को जरूर देखें

‘‘जी, मैं आप के ही महल्ले से बोल रही हूं… मुझे आप की मदद चाहिए,‘‘ निम्मी ने जवाब दिया.

‘‘आप को अगर कोई परेशानी है, तो आप थाने आ कर रपट लिखा सकती हैं,‘‘ देवेंद्र सिंह ने यह कह कर फोन रख दिया.

निम्मी ने फिर से फोन किया, ‘‘हैलो… प्लीज, फोन मत काटना… मैं… मैं निम्मी बोल रही हूं. आप के ही महल्ले में रहती हूं. मेरे पति अमर इस समय यहां नहीं हैं और मैं मुसीबत में हूं.’’

अमर का नाम सुनते ही वह निम्मी को पहचान गया. ‘‘अच्छाअच्छा, मैं समझ गया. आप चिंता न करें. मैं शाम को आप के पास आता हूं.”

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

Covid-19 के साइड इफेक्ट : लोगों में बढ़ी डिजिटल कामुकता

लेखक- लोकमित्र गौतम

कोविड-19 के चलते भारत ही नहीं पूरी दुनिया में अब अगर लाॅकडाउन नहीं भी लागू तो भी कामकाजी गतिविधियां लगभग ठप सी पड़ गई हैं. लोग घरों में बैठे हुए हैं. दफ्तर बंद है, फैक्टरियां बंद हैं और शायद दिमाग में भी कुछ नया सोचना बंद है. इसलिए इस गतिहीनता के दौर में लोगों में डिजिटल कामुकता बढ़ गई है.

हालांकि विशेषज्ञों ने कोविड-19 की वजह से साल 2021 में जो बेबी बूम की घोषणा की थी, उसे अब वापस ले लिया है. बावजूद इसके तमाम विशेषज्ञ इस बात पर सहमत है कि लाॅकडाउन के दौरान और उसके बाद अनलाॅक के दौरान तमाम तरह की गतिविधियों में अघोषित कटौती के कारण बड़े पैमाने में पूरी दुनियाभर के कपल्स को साथ रहने का लंबा मौका मिला है. इस वजह से इस पूरे समय में यौन गतिविधियां किसी भी सामान्य समय के मुकाबले कहीं ज्यादा रही हैं. विश्व की सबसे बड़ी कंडोम निर्माता कंपनी कोरेक्स ने अप्रैल के अंत में सार्वजनिक तौरपर स्वीकार किया था कि उसके पास कंडोम का पूरे 2020 के लिए जो स्टाक था, वो खत्म हो गया है.

ये भी पढ़ें- बेफिक्र होकर उठाएं Masturbation का लुत्फ

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोरोना के चलते यौन गतिविधियों में काफी ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है. सवाल है क्या इससे किसी तरह का नुकसान है? पहले तो लगता था कि बिल्कुल किसी तरह का नुकसान नहीं है, लेकिन लाॅकडाउन के दौरान और उसके बाद आयी तमाम रिपोर्टों से पता चला है कि इस दौरान कितने बड़े पैमाने पर पोर्न मैटर तलाशा और देखा गया है. हालांकि पिछले कुछ महीनों से पूरी दुनिया में अधिकतम लोग अपने घरों में रहे हैं और अब के पहले यह माना जाता रहा है कि घरों में परिवार के बीच पोर्न फिल्मों के देखने का चलन नहीं है, सिर्फ एकांत में ये देखी जाती हैं. लेकिन लाॅकडाउन ने इस राय को बदल दिया है.

लाॅकडाउन के दौरान न सिर्फ पोर्न फिल्में बहुत ज्यादा देखी गई हैं बल्कि बाल यौन शोषण मटेरियल (सीएसएएम-चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल) भी ऑनलाइन बहुत ज्यादा सर्कुलेट हुआ है. इसके कारण पिछले दिनों जब कई तरह की आपराधिक घटनाओं में कमी देखी गई, वहीं बाल यौन अपराधों में काफी इजाफा हुआ है. मध्य प्रदेश में तो एक नौ साल की बच्ची के हाथ पैर बांधकर उससे बलात्कार किया गया और फिर उसकी आंखें फोड़ दी गईं. लॉकडाउन के दौरान सीएसएएम कंटेंट का यूजर एक्सेस बढ़ा है,उसका गंभीर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार सुरक्षा आयोग ने गूगल, ट्विटर, व्हाट्सएप्प और एप्पल इंडिया को नोटिस जारी किये हैं.

गौरतलब है कि भारत में अन्य देशों की तरह ही बाल पोर्न के निर्माण व प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध है. इसका व्हाट्सएप्प या अन्य सोशल मीडिया के जरिये एक-दूसरे को भेजना भी दंडनीय अपराध है. इंग्लैंड व कुछ अन्य देशों में तो बाल पोर्न को रोकने के लिए विशेष विभाग हैं,जिनका काम ऐसी साइट्स को तलाशना, बंद करना व उनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करना है. भारत में इस स्तर की चैकसी कम है, फिर भी बाल पोर्न पर काफी हद तक नियंत्रण था, लेकिन लगता है कि कोविड-19 के दौरान ठहर गये कामकाजी जीवन में खुराफाती दिमागों ने इसका चलन बढ़ा दिया है. यह समस्या इस हद तक बढ़ गई है कि कुछ दिन पहले बैडमिंटन कोचिंग का ऑनलाइन लाइव सत्र चल रहा था कि बीच में अचानक पोर्न कंटेंट प्रसारित होने लगा. ऐसा कई बार हुआ. यह कंटेंट जब पहली बार आया तो भारत के राष्ट्रीय बैडमिंटन कोच पी गोपीचंद ने कड़ी आपत्ति दर्ज करते हुए तुरंत अपने को लाइव प्रोग्राम से अलग कर लिया.

ये भी पढ़ें- अंग का आकार : क्या बड़ा है तो बेहतर है?

फिलहाल की स्थिति यह है कि आयोग ने ऑनलाइन सीएसएएम की उपलब्धता पर स्वतंत्र जांच आरंभ कर दी थी और जो साक्ष्य मिले थे, उनके आधार पर आयोग ने उक्त ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किये थे तथा 30 अप्रैल तक जवाब मांगा था. लेकिन बाद में क्या हुआ इसकी कोई खबर नहीं आयी. आयोग इन प्लेटफॉर्म्स से जानना चाहता है कि वह अपने प्लेटफॉर्म्स पर सीएसएएम को रोकने के लिए क्या नीति अपनाये हुए हैं, उन्हें पोर्नोग्राफी व सीएसएएम से संबंधित कितनी शिकायतें मिली हैं और ऐसे मामलों से डील करने की उनकी पालिसी क्या है? आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने जिन लिंक्स,हैंडल पर इस प्रकार का आपत्तिजनक मटेरियल पाया है,उनकी रिपोर्ट व अन्य जानकारियां केन्द्रीय गृह मंत्रालय के साइबरक्राइम पोर्टल को कानूनी कार्यवाही के लिए फॉरवर्ड कर दिया है.

आयोग ने जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भेजा है उसमें इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फण्ड की ताजा रिपोर्ट का हवाला दिया है,जिसमें सावधान किया गया है कि लॉकडाउन के दौरान बाल पोर्न सर्च में जबरदस्त वृद्धि हुई है, इसलिए आयोग अब इसकी स्वतंत्र जांच कर रहा है. गूगल इंडिया को दिए गये नोटिस में कहा गया है, “जांच के दौरान यह संज्ञान में आया है कि पोर्नोग्राफिक मटेरियल को गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध एप्पस के जरिये एक्सेस किया जा सकता है. इससे बच्चे भी इस प्रकार के मटेरियल को एक्सेस करने लगे हैं. यह भी आशंका है कि इन एप्पस पर सीएसएएमभी उपलब्ध है.” जबकि एप्पल इंडिया को दिए गये नोटिस में आयोग ने कहा कि उसके एप्प स्टोर में उपलब्ध एप्पस के जरिये बहुत आसानी से सीएसएएम व पोर्नोग्राफिक मटेरियल एक्सेस किया जा सकता है जो वहां बहुतायत में मौजूद है.

जांच के दौरान यह भी पाया गया कि बहुत से एन्क्रिप्टेड व्हाट्सएप्प ग्रुप्स में सीएसएएम बहुतायत के साथ उपलब्ध है. व्हाट्सएप्प इंडिया को दिए गये नोटिस में आयोग ने कहा है, “इन ग्रुप्स के लिंक्स को ट्विटर पर विभिन्न हैंडल्स के जरिये प्रचारित किया जाता है. आयोग का यह मानना है कि ट्विटर हैंडल्स पर इन व्हाट्सएप्प ग्रुप्स के लिंक्स का प्रचारित किया जाना गंभीर मामला है.” जबकि ट्विटर इंडिया को दिए गये नोटिस में आयोग ने कहा है, “देखा गया है कि आपकी जो नियम व शर्तें हैं, उनके अनुसार 13 वर्ष व उससे अधिक का व्यक्ति ट्विटर पर अकाउंट खोलने के लिए योग्य है. अगर आप 13 वर्ष की आयु में बच्चों को अकाउंट खोलने की अनुमति दे रहे हैं तो आयोग का मानना है कि आप अन्य यूजर्स को ट्विटर पर पोर्नोग्राफिक मटेरियल, लिंक आदि को प्रकाशित, प्रचारित नहीं करने दे सकते.”

ये भी पढ़ें- पोर्न और सेक्स का खुला बाजार

सीएसएएम व पोर्नोग्राफिक मटेरियल गंभीर आपराधिक मामला है. इस प्रकार के मटेरियल पर रोक लगाना अति आवश्यक है और सुप्रीम कोर्ट अपने कई निर्णयों में इस बात की जरुरत पर बल दे चुका है. इस प्रकार के मटेरियल से समाज में यौन अराजकता का खतरा बना रहता है, मानव तस्करी जैसे अमानवीय अपराध भी अक्सर इसी के कारण होते हैं. किशोरों द्वारा किये गये जो यौन अपराध प्रकाश में आये हैं, उनके पीछे भी अक्सर कारण सीएसएएम ही निकला है. इसलिए इस संदर्भ में खालिस नोटिस से काम नहीं चलेगा बल्कि जिन माध्यमों से सीएसएएम व पोर्नोग्राफिक मटेरियल वितरित व प्रचारित हो रहा है उन पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाये और किसी भी सूरत में उल्लंघन को बर्दाश्त न किया जाये. इंटरनेट के युग में बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने का यही एकमात्र तरीका है.

मर्द को भी दर्द होता है : ऐसे करें लाइफ एंजौय

कहावत नहीं है, हां, लोग कहते हैं, मर्द को दर्द नहीं होता. लेकिन, ऐसा नहीं है. पुरुष बाहर से जितने कठोर, भीतर से उतने ही नर्मदिल होते हैं. आजकल की भागदौड़ में पुरुष न तो अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दे पाते हैं न ही अपनी डाइट पर. इस वजह से उन्हें कई बार बीमार भी पड़ना पड़ता है. आज की अतिआधुनिक जीवनशैली में वे कुछ दर्दों से बच सकते हैं. पुरुषों से जुड़ी कई ऐसी चीजें भी हैं जिन्हें वे खुद भी नहीं जानते.  सो, तनावभरे व दर्दभरे मौजूदा दौर में जीवन को आनंदमय बनाने के लिए चौकन्ना व सेहतमंद रहना होगा.

डाक्टर के संपर्क में रहें :

किसी तरह का दर्द महसूस न करें और जीवन का भरपूर आनंद उठाएं, इस बाबत समयसमय पर डाक्टरी सलाह लेते रहें. लेकिन ऐसा देखा जाता है कि ज़्यादातर पुरुष अपनी तकलीफों को इग्नोर करते रहते हैं. हालांकि, अपनी गलती की वजह से उन्हें बाद में बीमारी या फिर किसी वायरस का शिकार होना पड़ता है. वहीं, बीमार होने के बाद डाक्टर के पास जाते भी हैं तो वे कई बार डाक्टर से कई बातें छिपा लेते हैं. इस वजह से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है. सो, दिक्कत न आने पाए, इस के लिए डाक्टर से रूटीन चेकअप जरूर करवाते रहना चाहिए.

ये भी पढ़ें- लड़के आंखों से डार्क सर्कल्स कैसे हटाएं

खर्राटों को हलके में न लें :

रात में सोने के बाद ज्यादातर लोगों की खर्राटे लेने की आदत सी बन जाती है. आप इसे टालने के बजाय इस पर ध्यान दें. खर्राटों का दिल से कनैक्शन होता है. खर्राटे लेते समय कुछ सैकंड के लिए आप की सांसें रुक भी सकती हैं. सो, इसे आदत समझ कर हलके में न लें, बल्कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें.

ज्यादा बार बाथरूम जाना : 

अगर आप दिन में करीब 8 बार और रात में करीब  2 बार टौयलेट जा रहे हैं तो आप के शरीर में किसी तरह की दिक्कत हो सकती है. लोग अकसर ज्यादा बार बाथरूम जाने की बात को नजरअंदाज करने की कोशिश करते हैं, लेकिन आप को इस के लिए चिकित्सक से संपर्क करने की जरूरत है. अगर आप इसे नजरअंदाज करेंगे तो हो सकता है आप किसी बीमारी का शिकार हो जाएं.

सब्जियों का सेवन ताकि दिक्कत न हो :

बहुत ही कम लोग होते हैं जो फल और हरी सब्जियों का सेवन ज्यादा करते हैं. डाक्टर कहते हैं कि फल औऱ हरी सब्जियों के खाने से दिल स्वस्थ रहता है. इस से आप का शुगर लैवल भी ठीक रहता है. अगर आप फल और हरी सब्जियों से दूर भागेंगे तो आप किसी बड़ी बीमारी का शिकार हो सकते हैं.

शराब है खराब :

कई लोगों को शौक होता है कि वे शराब पिएं और सिगरेट का सेवन करें. यह शौक आप के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है. इस लत से कोई भी जल्दी अस्वस्थ हो सकता है.

जीवनशैली से जुड़ी कुछ अहम बातें :

*  पुरुषों की औसत आयु महिलाओं से कम होती है. पुरुषों की औसतन आयु 64.52 वर्ष होती है जबकि स्त्रियों की 68.76 वर्ष होती है.

*  पुरुष के दिमाग का आकार महिलाओं से बड़ा होता है. पुरुषों के दिमाग़ का आकार स्त्रियों से 10 फीसदी ज़्यादा होता है. लेकिन यह निर्भर करता है कि वे दिमाग का कितना इस्‍तेमाल करते हैं.

*  एक शोध से यह पता चला है कि किसी भी काम को करने में पुरुष अपने दिमाग़ का सिर्फ़ आधा हिस्सा ही प्रयोग करते हैं, जबकि स्त्रियां पूरा दिमाग़ एक ही वक़्त में इस्तेमाल कर सकती हैं.

*  आमतौर पर पुरुषों को घर पर बैठ कर ड्रिंक करने से ज़्यादा लंबे रोमांटिक वौक पर जाना ज्यादा पसंद होता है.

*  पुरुष अपनी कुल उम्र के 6 महीने सिर्फ शेविंग करने में बिताते हैं.

*  इस बात से तो हर कोई वाकिफ़ होगा कि लड़कियां, लड़कों से ज्‍यादा बोलती हैं. अध्‍ययन के मुताबिक, एक महिला दिनभर में लगभग 7 हजार शब्द बोलती हैं, तो वहीं पुरुष सिर्फ 2 हजार शब्‍द ही बोलते हैं.

ये भी पढ़ें- Dr Ak Jain: नामर्द नहीं हैं बांझ पुरुष, जानें उपाय

*  पराई स्त्रियों को घूरने में पुरुष अपने जीवन का पूरा एक साल बरबाद कर देते हैं.

*  पुरुष स्त्रियों से ज़्यादा झूठ बोलते हैं. एक स्त्री दिन में औसतन 3 झूठ ही बोलती है, जबकि पुरुष दिनभर में कम से कम 6 झूठ बोलते हैं.

*  ब्रेकअप के बाद पुरुष ज्‍यादा दिन तक अवसाद व तनाव में रहते हैं जबकि महिलाएं रिश्‍तों में दरार आने के बाद जल्‍दी मूवऔन कर लेती हैं.

*  अकसर पुरुष डाक्टर के पास जाने से कतराते हैं, उन्‍हें लगता है कि डाक्‍टर के पास जाने से कहीं कोई बड़ी बीमारी न हो जाए.

एक रिसर्च का नतीजा है कि ब्रेकअप के बाद पुरुष ज्‍यादा दिन तक अवसाद व तनाव में रहते हैं जबकि महिलाएं रिश्‍तों में दरार आने के बाद जल्‍दी मूवऔन कर लेती हैं. इस का ज़िक्र ऊपर हो चुका है, यह, दरअसल, यह दर्शाता है कि मर्द को शारीरिक दर्द ही नहीं होता, बल्कि, संवेदनात्मक दर्द भी होता है वह भी महिलाओं से ज्यादा.

किसान मजदूरों की दुर्दशा : महानगरों की ओर लौटने लगे प्रवासी मजदूर

किसान मजदूरों के जवान बेटे पुनः बिहार और उत्तरप्रदेश के गांवो से महानगरों की ओर लौटने लगे. ठीकेदारों कम्पनी के मैनेजरों का फोन आने लगा. इधर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का रोज अखबारों और टी वी पर यह ब्यान सुनने को मिल रहा है कि प्रवासी मजदूरों को हर हाल में रोजगार दिया जाएगा.लेकिन जमीनी सच्चाई अलग है. मुख्यमंत्रीजी आप कहाँ देंगे रोजगार.आपके पास भाषण के सिवा रोजगार देने के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं है.

किसान मजदूर के बेटे समझ गये हैं कि फजीहत जितनी भी झेलनी पड़े परिवार और अपना पेट भरने के लिए काम तो कहीं न कहीं करना ही पड़ेगा.यहाँ काम मिलना संभव नहीं है ?खेती का हाल और ही बुरा है. खेती में मजदूरी करने के लिए बड़े किसानों के यहाँ सालों भर काम नहीं है. साधरण किसान के बेटे अगर खेती भी करेंगे तो उससे कोई लाभ नहीं है.

ये भी पढ़ें- छुआछूत से जूझते जवान लड़के लड़कियां

हिमाचल प्रदेश के धागा उद्योग फैक्ट्री में काम करनेवाले अजय कुमार और उनकी पत्नी शुष्मा देवी जो लॉक डाउन में कम्पनी बन्द होने की वजह से अपने गृह जिला औरंगाबाद आ गए हैं.शुष्मा देवी ने बतायीं की हम

दोनों वहाँ काम करते थे.हम वहाँ दवा बनाने वाले कम्पनी में डब्बा में दवा भरने का काम करते थे.हमारे पति धागा कम्पनी में काम करते थे.उन्हें 15000 हजार और मुझे 1000 रुपये वेतन मिलता था.दोनों मिलाकर 25000 हजार रुपये मिल जाता था.दो बच्चों को आराम से पढ़ा लिखा रहे थे.प्रतिमहिना उसी में से बचाकर सास ससुर के लिए भी सात आठ हजार महीना भेजते रहते थे.लेकिन इस कोरोना की बीमारी ने तो हमलोगों को बड़ा मुश्किल में डाल दिया.पति के कम्पनी से फोन आ रहा है.पुनः काम पर लौटने के लिए हमलोग मन बना रहे हैं जाने के लिए.यहाँ हमलोग क्या करेंगे ? हमलोग मनरेगा में डेली ढोने और कुदाल चलाने वाला काम नहीं कर सकते.यहाँ और दूसरे चीज में किसी प्रकार का कोई स्कोप नहीं है.

राकेश कुमार गुजरात के राजकोट में टेम्पू फैक्ट्री में वेल्डर का काम करता था.साथ में पत्नी शांति देवी भी रहती हैं.शांति देवी ब्यूटीपार्लर का काम सीखतीं थी.राकेश पाँच वर्ष से इसी फैक्ट्री में काम करता है.दो वर्ष पहले शादी हुवी है.इसी वर्ष होली के बाद पत्नी भी साथ में गयी थी.पति पत्नी आपस में विचार किये की अगर ब्यूटी पार्लर का काम सिख जाती है तो भविष्य में पैसा जमा कर ब्यूटीपार्लर का दुकान खोल सकती है.लेकिन मार्च महीने में ही लॉक डाउन हो गया.जिसकी वजह से जो सपना देखे थे.उसपर पानी फिर गया.जब पति पत्नी से पूछे कि अब आपलोग क्या आगे सोंचें हैं तो दोनों ने बताया कि इस बार जब गाँव आ गए हैं तो धान का रोपण का काम करके फिर वहीं जायेंगे.कम्पनी से आने के लिए फोन आने लगा है.आपलोग यहाँ क्यों नहीं कुछ काम करते तो राकेश ने कहा कि 15000 हजार रुपये महीने का आप ही मुझे कोई काम दिलवा दीजिये.हम यहीं काम करेंगे.यहाँ तो मुझे कोई काम ही नहीं दिखाई पड़ रहा है.

सूरत कपड़ा मिल में काम करने वाला बिजय कुमार बताता है कि हम साड़ी फैक्ट्री में कलर मास्टर का काम करते थे.लॉक डाउन की वजह से कम्पनी बन्द हो गया तो घर आ गये थे.पुनः वहाँ से ठीकेदार फोन कर रहा है. वह भी बिहार का ही है. वह साथ में मेरा रिजर्वेशन कराने के लिए तैयार है. मेरे पास कोई उपाय नहीं है. इसलिए मैं जाने के लिए पुनः तैयार हो गया हूँ.बिहार से मुंबई,हैदराबाद,दिल्ली,लुधियाना की गाड़ियों में मजदूर झुंड के झुंड बाहर जाने के लिए निकल पड़े हैं.

इन मजदूरों में अधिकांशतः दलित और ओ बी सी के युवा हैं. ये युवा मजदूर या मध्यमवर्गीय किसान के बेटे हैं.

ये भी पढ़ें- आशुतोष राणा : गांव की मिट्टी से उपजा कलाकार

आखिर महानगरों की ओर क्यों पलायन करते हैं. बिहार और यू पी के युवा .बिहार और यू पी के गाँवों में किसानों मजदूरों के बेटों को सालों भर काम नहीं मिल पाता.मध्यमवर्गीय किसानों के बेटे को खेती से कोई लाभ नहीं दिखता इसकी वजह से वे महानगरों की ओर रुख करते हैं.किसानों की वास्तविक स्थिति क्या है ? इसे भी समझने की जरूरत है.

अगर किसानों के फसलों का उचित मूल्य मिलने लगे तो बिहार और यू पी के गाँवों से पलायन सदा के लिए रुक जाय. कोई बड़ी योजना परियोजना की जरूरत नहीं है.

तमाम सरकारी दावों के बीच किसानों की स्थिति बद से बदतर होते जा रही है. किसान खेती किसानी छोड़कर अन्य रास्ते की तलाश में हैं.किसान के बच्चे किसी भी हाल में खेती करने के लिए तैयार नहीं हैं. एक समय में कहा जाता था कि उत्तम खेती मध्यम बान, नीच चाकरी भीख निदान यानी खेती  को ऊँच दर्जा प्राप्त था.चाकरी यानी नॉकरी करना भीख माँगने के समान समझा जाता था.लेकिन आज उल्टा हो गया है. नॉकरी करना सर्वश्रेष्ठ हो गया है .खेती करना नीच काम समझा जाने लगा है. आखिर हो भी क्यों नहीं ? क्योंकि खेती किसानी करनेवाले लोगों का परिवार फटेहाली का जिंदगी जीने को मजबूर है. हाड़ तोड़ पूरा परिवार मिहनत करने के बाद भी बच्चों को बेहतर शिक्षा ,स्वास्थ्य ,बेटी को अच्छे घरों में शादी करने से महरूम है.परिवार का अगर कोई सदस्य किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हो जाता है तो जमीन बेचने और गिरवी रखने के सिवा कोई उपाय नहीं बचता और सूद के चंगुल से निकलना मुश्किल हो जाता है.

किसान भूषण मेहता ने बताया कि मेरा बीस बिगहा जमीन है. खेती अपने से करते हैं. सालों भर पाँच परिवार के साथ साथ मजदूर भी लगा रहता है.अगर सच मायने में देखा जाय तो खेती में इतना लागत लग जाता है कि कुछ भी विशेष नहीं बच पाता. अगर बाढ़ सुखाड़ का मार नहीं झेलना पड़ा और मौसम साथ दिया तो साल में एक लाख रुपये मुश्किल से बच पाता है.साल में इतना पैसा तो पाँच परिवार मजदूरी करके कमा सकता है.बीज,खाद,डीजल का दाम रोजबरोज बढ़ते जा रहा है. गेंहूँ और धान की कीमत उस हिसाब से नहीं बढ़ पा रहा है. सरकारी खरीद का सिर्फ दावा किया जाता है. हम कभी भी कॉपरेटिव के माध्यम से धान नहीं बेंचते. इसलिए कि समय पर पैसे नहीं मिलते.अपना काम धाम छोड़कर ब्लॉक और बैंक का चक्कर लगाना हमारे बस की बात नहीं है. हम सस्ते दाम पर ही सही धान खरीदने वाले को खलिहान से ही धान गेंहूँ बेंच देते हैं. जब मेरे जैसे बीस बीघा की खेती करने वाले कि स्थिति बहुत अच्छी नहीं है तो एक और दो बीघा की खेती करने वाले किसानों की क्या स्थिति होगी.बीमारी और बेटी की शादी में किसानों को या तो खेत बीके या जमीन गिरवी रखे.यह तय है.किसान अपने मेधावी बच्चों को भी ऊँच और तकनीकी शिक्षा महँगी होने के कारण दिलवाने में असमर्थ है.

आज किसानों की स्थिति बदतर क्यों होते जा रही है. इसका मूल कारण है खेती में लागत मूल्य दिनों दिन तेज गति से बढ़ते जा रहा है.किसानों द्वारा उत्पादित फसलों और शब्जियों का उचित मूल्य नहीं मिल पाना है. विगत दस वर्षों में कृषि में लागत तीन गुना तक बढ़ गया है. लेकिन उपज की कीमतों में दोगुना भी बढ़ोतरी नहीं हुवी है.

ये भी पढ़ें- वायरसी मार के शिकार कुम्हार

सिर्फ किसानों के उपज का वास्तविक दाम मिल जाय तो किसानों को अलग से किसी प्रकार की कोई राहत की जरूरत नहीं है.

किसानों के नेता नागेश्वर यादव ने बताया कि 1971 में 10 ग्राम सोना का मूल्य 193 रुपये था.उस समय एक क्विटल गेहूं का दाम 105 रुपये था.10 ग्राम सोना खरीदने के लिए एक क्विंटल 83 किलो गेहूँ बेंचने की जरूरत थी.आज सोना का मूल्य 10 ग्राम का 50 हजार रुपये है. गेहूँ 2000 रुपये प्रति क्विंटल है.10 ग्राम सोना खरीदने के लिए आज 25 क्विंटल गेहूँ बेंचने पड़ेगा.इससे बाजार आधारित वस्तु का मूल्य और किसानों द्वारा उपजाए गए .अनाजों का मूल्य का सहज आकलन कर सकते हैं.

पहले खेती किसानी हल बैल,रेहट,लाठा कुंडी के माध्यम से होता था.डीजल की कोई जरूरत नहीं होती थी.आज के तारीख में खेत की जुताई कटाई करने के लिए ट्रैक्टर की जरूरत पड़ती है.सिंचाई करने के लिए डीजल इंजन की जरूरत है. डीजल का दाम लगातार बढ़ने से किसानों की स्थिति अत्यंत दैनीय हो गयी है.बीज,उर्वरक,कीटनाशक सभी की कीमत लगातार बढ़ते जा रही है.

किसानों का बैंक से लिये गए लोन को माफ करने की बात बार बार होती है. किसानों का सिर्फ लोन माफ करना इसका निदान नहीं है. सरकार माफ भी नहीं करना चाहती.क्योंकि देश पर अतिरिक्त भार पड़ने का राग अलापा जाता है. देश के उद्योगपतियों का लोन आराम से माफ कर दिया जाता है.बैंकों की खराब स्थिति किसानों के चलते नहीं बल्कि सरकार और पूंजीपतियों के गठजोड़ की वजह से हुवी है. बिजय माल्या 18000 करोड़,नीरव मोदी 11400 करोड़,भाई चौकसी 2000 करोड़,ललित मोदी कितना का चूना लगाया आमलोगों को पता तक नहीं.ये पूंजीपति सरकार की मिलीभगत से देश का बंटाढार कर दिया.

जो किसान पूरे देश का पेट भरता है. वह खुद पूरे परिवार अभावों में रहते हुवे आत्महत्या तक करने के लिए विवश है.

एक समय था जब 45 करोड़ जनता का पेट भरने के लिए भी किसान अन्न नहीं उपजा पाता था.हमें अमेरिका से गेहूँ का आयात करने पड़ता है. आज हरित क्रांति और वैज्ञानिकों की देन की वजह से 130 करोड़ लोगों को किसान अन्न उपलब्ध करा रहा है. फिर भी किसान कर्ज में दबा है और आत्महत्या तक करने के लिए विवश है.

ये भी पढ़ें- ससुराल में पूरे हुए रूपा के सपने

देश भर से इस तरह की खबरें आते रहती है. टमाटर,कद्दू,प्याज ,लहसुन ,आलू का उचित मूल्य नहीं मिलने की वजह से किसान सड़कों पर फेंकने के लिए विवश हो जाते हैं.देश का अर्थब्यवस्था तभी कायम रह पाएगा जब  किसानों के द्वारा उपजाये गये फसलों का उचित मूल्य मिलेगा.किसान सम्मान योजना जैसे लॉली पॉप से देश के किसानों का निदान नहीं होने वाला है.

मनमोहन मिश्रा की इस भोजपुरी फिल्म का ट्रेलर हुआ रिलीज, यूट्यूब पर मिला बेहतरीन रिस्पौंस

इन दिनों भोजपुरी सिनेमा में बॉलीवुड फिल्मों के टाइटल से मिलते जुलते नामों से फिल्मों का निर्माण बहुत तेजी से हो रहा है. लॉकडाउन में ढील दिए जानें के बाद रिलीज के लिए तैयार फिल्मों के ट्रेलर लांच में भी तेजी आई है. इन दिनों भोजपुरी में बन कर तैयार हो चुकी कई फिल्मों के ट्रेलर लांच किये जा रहें हैं. इसी कड़ी में भोजपुरी के बड़े एक्टर्स से सजी भोजपुरी फिल्म ‘मर कर भी टाइगर अभी ज़िंदा है’ (Mar Kar Bhi Tiger Abhi Zinda Hai) का ट्रेलर Wave Music के ऑफिसियल यूट्यूब चैनल पर लौंच किया गया है.

इस फिल्म के ट्रेलर में भोजपुरी फिल्मों के स्टार मनमोहन मिश्रा (Manmohan Mishra) और हॉट अदाकारा अंजना सिंह (Anjana Singh) के साथ पूनम दुबे (Poonam Dubey) और  पायस पंडित (Payas Pandit) के अभिनय का जलवा देखनें को मिलनें वाला है. फिल्म का ट्रेलर देखनें से पता चलता है की इस फिल्म में जबरदस्त रोमांस है जिसमें फिल्म का हीरो एक साथ तीन हीरोइनों से रोमांस करता नजर आ रहा है और यह तीन हीरोइनें हैं अंजना सिंह, पूनम दुबे और  पायस पंडित.

ये भी पढ़ें- खेसारीलाल यादव और सपना चौधरी ने एक साथ जमाई मेहफिल, परफोर्मेंस से किया फैंस को दीवाना

इसके अलावा फिल्म में मशहूर भोजपुरी गायक और एक्टर प्रमोद प्रेमी यादव (Pramod Premi Yadav) भी एक गानें में आइटम डांस करते नजर आ रहें हैं. फिल्म का एक्शन और मारधाड़ भी रोमांच पैदा करने वाला है क्यों की फिल्म में भोजपुरी के जाने माने खलनायक संजय पांडेय (Sanjay Pandey) और अयाज खान की जोड़ी फिल्म के हीरो से दो-दो हाथ करती नजर आएगी.

इस फिल्म के गाने और डायलॉग भी दर्शकों को अपनी तरफ खींचनें में कामयाब होते नजर आ रहें हैं. फिल्म का फिल्मांकन भी अच्छे लोकेशन में किया गया है. इस फिल्म में नई तकनिकी का प्रयोग भी देखनें को मिलनें वाला है.

ये भी पढ़ें- भोजपुरी फिल्म ‘घातक’ का ट्रेलर हुआ रिलीज, खतकनाक लुक में नजर आए पवन सिंह

फिल्म का निर्माण ‘जे आर फिल्म्स कम्बाइन्स’ (JR Films Combines) के बैनर तले किया गया है जबकि निर्माता भी जे आर फिल्म्स कम्बाइन्स ही है. फिल्म के लेखक वीरू ठाकुर (Veeru Thakur) और निर्देशक रवि सिन्हा (Ravi Sinha) हैं. फिल्म का संपादन गोविंद दुबे (Govind Dubey) नें किया है और पब्लिसिटी डिजाइनर की जिम्मेदारी शक्ति आर्ट्स (Shakti Arts) नें निभाई है. फिल्म में नृत्य मास्टर की भूमिका जाने माने कोरियोग्राफर रामदेवन (Ramdevan) नें निभाई है और संगीतकार छोटे बाबा (Chote Baba) हैं. फिल्म का पोस्ट प्रोडक्शन आई फोकस प्रोडक्शंस प्राइवेट लिमिटेड (Eye Focus Productions Pvt Ltd) का है.

ये भी पढ़ें- सुशांत के घर पहुंची टीवी एक्ट्रेस रतन राजपूत, वीडियो शेयर कर बताई ये बातें

Body Shaming का शिकार हैं बिग बॉस फेम हिमांशी खुराना, बीते दिन घटी ऐसी अजीब घटना

‘‘मिस लुधियाना’’ (Miss Ludhiana) और ‘‘मिस पीटीसी पंजाब’’ (Miss PTC Punjab) की उपाधि जीतने के बाद बीस वर्ष की उम्र में ‘‘माॅडलिंग’’ से करियर की शुरूआत करने वाली पंजाबी सिंगर, एक्ट्रेस और कलर्स टीवी चैनल के रियालिटी शो बिग बॉस 13 (Bigg Boss 13) की कंटेस्टेंट हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) सदैव विवादों और सूर्खिेंयों मे ही रहती हैं. वह सोशल मीडिया पर अपने फैंस के लिए खास फोटोज और वीडियोज के अलावा अपनी जिंदगी से जुड़े अनुभव भी पोस्ट कर शेअर करती हैं.

ये भी पढ़ें- Happy Birthday Ranveer: दीपिका-रणवीर के कॉमन लुक्स देख उड़ जाएंगे होश

इन दिनों वह ‘‘बाॅडी शेमिंग’’ (Body Shaming) को लेकर दिए गए बयान के अलावा मॉडल आसिम रियाज (Asim Riaz) को लेकर दिए गए बयान की वजह से विवादों में  घिरी हुई हैं, तो वहीं कल रात पंजाब में उनकी कार पर हुए हमले के बाद वह काफी गुस्से में हैं और उन्होेने अपने सोशल मीडिया के अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम एकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि देर रात उनकी कार पर हमला हुआ. इतना ही नहीं कुछ लोगों ने उनकी कार के टायर में पंचर तक कर दिया है. पर वह डरने वाली नही हैं, और वह अपना काम करती रहेंगी.

 

View this post on Instagram

 

Something coming really soon on @desimusicfactory 💃 @asimriaz77.official #himanshikhurana Suit by @hinabhullarofficial

A post shared by Himanshi Khurana 👑 (@iamhimanshikhurana) on

हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) ने अपने पोस्ट में लिखा है- “पिछली रात चंडीगढ़ के पास एक गांव में शूटिंग के दौरान किसी ने मेरी कार के टायर में छेद कर दिए. आप लोगों को क्या लगता है, आप लोग इस तरह की छोटी चीजें करके मुझे काम करने से नहीं रोक सकते और ना ही मुझे डरा सकते हो. आपके लिए शुभकामनाएं.” उसके बाद हिमांशी खुराना के लाखों फैंस उनकी इस पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए जांच की मांग कर रहे हैं.

ये भी पढ़ें- लॉकडाउन में हनी सिंह ने दिखाया ऐसा बॉडी ट्रांस्फोर्मेशन, Photos देख सभी हुए हैरान

इससे पहले हाल ही में हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) ने मॉडल असीम रियाज (Asim Riaz) के संग अपने रिश्तों के संदर्भ में अपने एक ट्वीट की वजह से सुर्खियों में थीं. हिमांशी ने अपने ट्वीट में लिखा था- “मुझे हमेशा आसिम रियाज की गर्लफ्रेंड क्यों कहा जाता है? हिमांशी का बॉयफ्रेंड क्यों नहीं कहा जाता? मुझे पता है इसमें कोई गलत बात नहीं है लेकिन महिलाएं भी इस क्षेत्र में काम कर रही हैं. उनकी खुद की एक पहचान है. उनका भी संघर्ष है.तो हमेशा पुरुषों के बारे में ही क्यों कहा जाता है.” हिमांशी के इस ट्वीट के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हंगामा मच गया था.

 

View this post on Instagram

 

Eid Mubarak 😇😇

A post shared by Himanshi Khurana 👑 (@iamhimanshikhurana) on

ज्ञातब्य है कि कुछ दिन पहले हिमांशी खुराना उस वक्त सूर्खियों में आयी थीं, जब सोशल मीडिया पर उनका आसिम रियाज संग एक म्यूजिक वीडियो ‘‘ख्याल रखेया कर’’ (Khyaal Rakhya Kar) वायरल हुआ था. तो वहीं बाॅडी शेमिंग को लेकर भी हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) ने अपने दर्द को एक अंग्रेजी अखबार के साथ बात करते हुए बयां किया है. उनका दावा है कि वह एक गंभीर समस्या से जूझ रही हैं, जिसके चलते उनकी पूरी टीम परेशान रहती है. इस इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उन्हें किस तरह लोगों द्वारा बॉडी शेमिंग का शिकार होना पड़ा है.

ये भी पढ़ें- सरकार द्वारा टिक-टॉक बैन होने पर बिग बौस 13 विनर सिद्धार्थ शुक्ला का आया बयान, कही ये बड़ी बात

 

View this post on Instagram

 

Eid Mubarak Outfit @aliwarofficial Jewellery @urbanmutiyar

A post shared by Himanshi Khurana 👑 (@iamhimanshikhurana) on

हिमांशी खुराना ने कहा है- “लोग बाॅडी शेमिंग को लेकर मेरा मजाक उड़ाते हैं. सोशल मीडिया पर मुझे बहुत ट्रोल किया जाता रहा है. ‘बिग बॉस’ से पहले भी ट्रोल हुआ करती थी और बाद में भी हो रही हूं. लोगों ने मेरी बॉडी का बहुत मजाक उड़ाया है. लेकिन लोगों को नहीं पता कि मैं पीसीओएस से जूझ रही हूं. जो लोग इसके बारे में नहीं जानते हैं, उन्हें इंटरनेट पर इसके बारे में जानकारी लेनी चाहिए क्योंकि ‘पीसीओएस’ से वर्तमान समय में तमाम लड़कियां इससे जूझ रही हैं.

 

View this post on Instagram

 

🌚🌚

A post shared by Himanshi Khurana 👑 (@iamhimanshikhurana) on

‘पीसीओएस के दौरान वजन घटता-बढ़ता रहता है. मेरा ब्लड प्रेशर भी काफी ऊपर-नीचे होता रहता है. कभी- कभी तो बीपी इतना कम हो जाता है कि मुझे तीन घंटे तक ऑक्सीजन लेनी पड़ती है. जब मैं किसी वजह से टीवी को रिस्पौन्ड नहीं कर पाती हूं, तो मेरी मैनेजर परेशान हो जाती है. इस कारण मेरी पूरी टीम मेरा खास ध्यान रखती है.”

ये भी पढ़ें- सुसाइड करने से पहले सुशांत सिंह राजपूत ने इंटरनेट पर किया ये सर्च, जानने के लिए पढ़ें खबर

 

View this post on Instagram

 

Outfit @aliwarofficial ❤️❤️

A post shared by Himanshi Khurana 👑 (@iamhimanshikhurana) on

ज्ञातब्य है कि 2010 में पंजाबी गीत ‘‘जोड़ी-बिग डे पार्टी’’ से संगीत जगत में कदम रखा था. तब से अब तक ‘इजहार’, ‘नैना दे बुहे’, ‘बैक टू भांगड़ा’, ‘सूरमा’, ‘भाभी’, ‘गबरू नी तारसेंगी’, ‘तमाशा’ और ‘बाजार’ सहित साठ गाने गा चुकी हैं. इतना ही नहीं ‘जीत जाएंगे जहांन’, ‘साडा हक’, लीथर लाइफ’ और ‘टू बो’’ पंजाबी फिल्मों में अभिनय भी कर चुकी हैं.

हत्या आत्महत्या में उलझी मौत की गुत्थी : भाग 2

घटनास्थल पर जांचपड़ताल तथा पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारी सर्वोदय नगर स्थित रीजेंसी अस्पताल पहुंचे, जहां मृतक सुनील जोशी का शव रखा था. पुलिस अधिकारियों ने शव का निरीक्षण किया तो पाया कि सुनील ने दाईं कनपटी में पिस्टल सटा कर गोली मारी थी, जो बाईं कनपटी से पार हो गई थी.

मृतक सुनील की उम्र 50 वर्ष के आसपास थी और वह शरीर से हृष्टपुष्ट थे. निरीक्षण के बाद पुलिस अधिकारियों ने सुनील के शव का पंचनामा भरवा कर तथा सीलमोहर करा कर पोस्टमार्टम हेतु लाला लाजपतराय चिकित्सालय भिजवा दिया.

पुलिस अधिकारी इस मामले पर आपस में गंभीरता से विचारविमर्श करने के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि सुनील जोशी ने आत्महत्या ही की है. कारण उन पर करोड़ों रुपए का स्क्रैप बेचने तथा रुपयों का जमा खर्च का हिसाब न देने का आरोप कंपनी के उच्चपदस्थ अधिकारियों ने लगाया था. इसी की जवाबदेही के लिए कानपुर में बैठक बुलाई गई थी.

ये भी पढ़ें- पत्नी के हाथ, पति की हत्या

सुनील गेस्टहाउस आ गए, लेकिन वह बैठक में शामिल होने की हिम्मत नहीं जुटा पाए और खुदकुशी कर ली. फिर भी मृतक के घर वाले यदि कोई तहरीर देते हैं, तो रिपोर्ट दर्ज कर जांच की जाएगी.

पुलिस जांच से इस रहस्यमयी आत्महत्या की जो घटना प्रकाश में आई, उस का विवरण इस प्रकार है—

कानपुर महानगर का एक पौश इलाका है स्वरूप नगर. स्वरूप नगर में ज्यादातर बंगले औद्योगिक घरानों के हैं. क्षेत्र में कई अपार्टमेंट भी हैं, जिन में संपन्न परिवार रहते हैं. स्वरूप नगर में ही रतन मैजेस्टिक अपार्टमेंट है. इस अपार्टमेंट के भूतल पर कानपुर फर्टिलाइजर के डायरेक्टर सुनील कुमार जोशी अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी मेनका जोशी के अलावा एक बेटा और बेटी हैं.

मेनका के पिता अनिल कुमार शर्मा कानपुर शहर के संपन्न और सम्मानित व्यक्ति थे. वह कानपुर के पूर्व मेयर रह चुके थे. मेनका के बाबा रतन लाल शर्मा भी मेयर रह चुके थे. पितापुत्र के कार्यकाल को आज भी लोग याद करते हैं.

अनिल कुमार शर्मा ने अपनी बहन की शादी जेपी गु्रप के चेयरमैन मनोज गौर के साथ की थी, जबकि बेटी मेनका की शादी डायरेक्टर सुनील कुमार जोशी के साथ की थी. इस तरह रिश्ते में मनोज गौर मेनका के फूफा थे.

कानपुर के औद्योगिक क्षेत्र पनकी में फर्टिलाइजर कंपनी की स्थापना कब और कैसे हुई, इस के लिए अतीत की ओर जाना होगा. विदेशी कंपनी आईसीआई ने पनकी में उर्वरक कारखाना लगाया था. इस का उद्घाटन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 6 दिसंबर, 1969 को किया था. उस समय यह देश का पहला यूरिया बनाने वाला कारखाना था, जो नेप्था से चलता था.

वर्ष 1993 में विदेशी कंपनी आईसीआई ने कारखाना गोयनका गु्रप को बेच दिया. तब इस का नाम डंकन्स फर्टिलाइजर लिमिटेड किया गया. घाटे के कारण वर्ष 2002 में गोयनका ने कारखाना बंद कर दिया. इस के बाद जनवरी, 2012 में जेपी गु्रप के चेयरमैन जे.पी. गौर व मनोज गौर ने डंकन्स को खरीद लिया और नाम रखा कानपुर फर्टिलाइजर्स ऐंड कैमिकल लिमिटेड.

यह उत्तर भारत का सब से बड़ा संयंत्र है. इस की उत्पादक क्षमता 2200 टन प्रति दिन है. कारखाने में 1000 कुशल श्रमिक कार्य करते है. प्लांट में ऊर्जा संरक्षण का पूरा सिस्टम लगाया गया है तथा प्लांट को गेल से सीधे प्राकृतिक गैस सप्लाई होती है.

सुनील कुमार जोशी कानपुर फर्टिलाइजर के ही डायरेक्टर नहीं थे, बल्कि 9 अन्य कंपनियों के भी डायरेक्टर थे. उन का जीवन हर तरह से खुशहाल था.

उन्होंने अपनी मेहनत व लगन से और डायरेक्टर जैसे पदों पर रह कर खूब दौलत कमाई. सुनील को लग्जरी कारों और आलीशान घर का बहुत शौक था. वह हर साल लग्जरी कारों पर करोड़ों रुपए खर्च करते थे. उन्होंने दिल्ली और कानपुर में 2 आलीशान बंगले बनवाए थे. उन के शौक का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने दिल्ली वाले बंगले का रेनोवेशन कराने के नाम पर ही 5 करोड़ रुपया पानी की तरह बहा दिया था.

डायरेक्टर सुनील कुमार जोशी को फिल्मों में भी दिलचस्पी थी. इस के लिए उन्होंने बौलीवुड में भी निवेश किया था. उन्होंने बौलीवुड हस्तियों के मैनेजर रहे अनिदा सील के साथ मिल कर एक कंपनी बनाई, जिस में उन की पत्नी मेनका जोशी निदेशक थीं.

कंपनी की पहली फिल्म में गोविंदा का लीड रोल था. लेकिन फिल्म बौक्स औफिस पर औंधे मुंह गिरी. पहली ही फिल्म में हुए घाटे को ले कर उन का विवाद भी हुआ था. जिसे खत्म करने के लिए गोविंदा कई दिन कानपुर में रहे.

डायरेक्टर सुनील कुमार जोशी और जेपी गु्रप के चेयरमैन मनोज गौर के बीच दूरियां तब बढ़ीं, जब सुनील जोशी ने सतना के एक ठेकेदार के मार्फत कंपनी का 10 करोड़ का स्क्रैप बेच दिया. स्क्रैप बेचे जाने की जानकारी उन्होंने चेयरमैन मनोज गौर को भी नहीं दी और न ही यह बताया कि रुपया कब, कहां और कैसे खर्च किया.

कानपुर फर्टिलाइजर कंपनी में जब स्क्रैप बेचने को ले कर स्थितियां स्पष्ट हुईं तो सुनील जोशी और मनोज गौर के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई. कंपनी की माली हालत को ले कर चेयरमैन मनोज गौर पहले से ही तनाव में थे ऊपर से करोड़ों का स्क्रैप बिक जाने के मामले ने आग में घी का काम किया. हालात यहां तक आ गए थे कि मनोज गौर, सुनील जोशी से स्क्रैप बिक्री का हिसाब जानना चाह रहे थे. मगर दोनों के बीच बात नहीं हो पा रही थी.

इसी तनाव के बीच जेपी गु्रप के चेयरमैन मनोज गौर ने फर्टिलाइजर कंपनी को बंद करने का फैसला कर लिया. दरअसल कंपनी को यूरिया खाद बनाने के एवज में सरकार से सब्सिडी मिलती है, तभी कम दाम पर किसानों तक खाद पहुंचती है.

पिछले 8 महीने से करीब 1200 करोड़ की सब्सिडी सरकार ने रोक दी थी, जिस से कंपनी की आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी और 1000 कामगारों को वेतन देना भी मुश्किल हो गया था. यद्यपि कंपनी में उत्पादन ठीक हो रहा था.

ये भी पढ़ें- रासलीला बहू की

स्क्रैप बिक्री का हिसाब जानने तथा कंपनी में तालाबंदी को लेकर ही जेपी गु्रप के चेयरमैन मनोज गौर ने 18 मार्च को बैठक बुलाई थी. चूंकि सुनील जोशी को मीटिंग में स्क्रैप बिक्री का हिसाब देना था. साथ ही वह तालाबंदी भी नहीं चाहते थे, अत: वह परेशान हो उठे. जैसेजैसे बैठक की तारीख नजदीक आती जा रही थी, उन की उलझन बढ़ती जा रही थी.

18 मार्च, 2020 की सुबह सुनील जोशी जल्दी ही उठ गए. उन्होंने रात में ही निश्चय कर लिया था कि उन्हें क्या करना है. उलझन के चलते वह बैठक में जाने को तैयार हुए, फिर बिना खाएपिए ही अपनी कार से गेस्टहाउस के लिए निकल गए.

सुबह 9:20 पर वह गेस्टहाउस के रूम में पहुंच गए. उन्होंने कर्मचारी से पानी मांगा, लेकिन पानी पिए बिना ही वह बाथरूम में चले गए. फिर उन्होंने कंपनी गु्रप पर एक मैसेज डाला, जिस में उन्होंने लिखा—

‘डियर आल, जिंदगी ने बीते 30 सालों में मुझे बहुत कुछ सिखाया. इस दौरान बहुत से उतारचढ़ाव देखे. जिंदगी में बहुत से अच्छेबुरे लोग भी आए. हमेशा यही सोचता था कि जिंदगी कुछ बुरा नहीं दिखाएगी. व्यापारिक परिवेश में पैदा होने के कारण हमेशा यही सोचता था कि जिंदगी ऐसे ही उतारचढ़ाव के साथ ही चलती है. पर जब हमारे पास परिवार होता है, तो जिंदगी के उतार बहुत परेशान करते है. बहुत सारे लोगों ने मुझे प्यार व इज्जत दी है. मैं ने हमेशा संतुलित जीवन जीने का प्रयास किया है. आज मेरे लिए रास्ते बंद हो चुके हैं और इस अंधेरी गुफा में मुझे कोई रोशनी दिखाई नहीं दे रही है. मेरे पास संसाधन नहीं है कि मेरा परिवार मेरे बगैर जिंदगी गुजार सके. एक घर दिल्ली में और एक घर कानपुर में ही है.

मैं श्री मनोज गौर से निवेदन करना चाहता हूं कि वह मेरा कर्ज चुकाने में मेरे परिवार की मदद करें. इस के लिए वह दिल्ली वाला मकान बेच दें. जो पैसा बचे उसे वह एफडी करा दें, जिस से मेरा परिवार जीवनयापन कर सके. इतना सब करने के लिए 12 माह का समय लगेगा. इतने समय के लिए कंपनी के निदेशकों से निवेदन है कि अगले 15 माह के लिए मेरा वेतन मुझे मिलता रहे. मेरे बच्चे अभी छोटे हैं और उन्हें अभी बहुत सारा समर्थन चाहिए. यह मेरे परिवार की गलती नहीं कि मैं जीवन में फेल हो गया. सभी को प्रेम और समर्थन के लिए बहुतबहुत धन्यवाद.

लव यू आल. सुनील जोशी.’

इस मैसेज को भेजने के बाद सुनील जोशी ने अपनी लाइसैंसी इंग्लिश पिस्टल निकाली और दाईं कनपटी में सटा कर गोली दाग दी. गोली उन की बाईं कनपटी को पार कर बाहर निकल गई और वह फर्श पर गिर पड़े. बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया.

जांचपड़ताल के दौरान मृतक सुनील की पत्नी मेनका, साले सोनू और परिवार के एक अन्य सदस्य ने पुलिस को दिए बयान में सुनील जोशी द्वारा आत्महत्या किए जाने की बात को नकार कर उन की हत्या की आशंका जताई थी. साथ ही रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही थी. लेकिन हफ्ता 2 हफ्ता बीत जाने के बाद भी कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई. अत: पुलिस इस मामले को आत्महत्या मान कर फाइल बंद करने की तैयारी पूरी कर चुकी थी.

ये भी पढ़ें- दरवाजे के पार

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

हत्या आत्महत्या में उलझी मौत की गुत्थी : भाग 1

18 मार्च, 2020 को जेपी ग्रुप के चेयरमैन मनोज गौर ने कंपनी के उच्चाधिकारियों की एक अहम बैठक बुलाई थी. यह बैठक कानपुर (कैंट) स्थित कंपनी के आलीशान गेस्टहाउस में दोपहर 12 बजे शुरू होनी थी.

बैठक में शामिल होने के लिए चेयरमैन मनोज गौर के अलावा वाइस चेयरमैन ए.के.जैन, प्रेसीडेंट (एडमिनिस्ट्रेशन) अनिल मोहन, डायरेक्टर स्तर के पदाधिकारी रमेश चंद्र तथा वीरेंद्र सिंह गेस्टहाउस आ चुके थे. वे सब मीटिंग की तैयारी में व्यस्त थे.

इसी अहम बैठक में जेपी गु्रप की कंपनी कानपुर फर्टिलाइजर ऐंड कैमिकल लिमिटेड के डायरेक्टर सुनील कुमार जोशी को भी शामिल होना था. जोशी स्वरूपनगर स्थित रतन मैजेस्टिक अपार्टमेंट के प्रथम तल पर अपने परिवार के साथ रहते थे.

ये भी पढ़ें- खूनी नशा: ज्यादा होशियारी ऐसे पड़ गई भारी

मीटिंग को ले कर वह सुबह से ही उलझन में थे. पति को परेशान देख उन की पत्नी मेनका ने पूछा भी पर उन्होंने ज्यादा कुछ नहीं बताया. हां, इतना जरूर कहा कि आज वह एमडी से बात कर ही लेंगे.

डायरेक्टर सुनील कुमार जोशी ने उलझन के कारण नाश्ता भी नहीं किया और प्रात: 9 बजे अपनी निजी कार से गेस्टहाउस के लिए रवाना हो गये. 20 मिनट बाद वह कैंट स्थित कंपनी के गेस्टहाउस पहुंच गए. उन्होंने वहां मौजूद कर्मचारी से मनोज गौर के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि चेयरमैन साहब रात को ही गेस्टहाउस आ गए थे. इस समय वह बाथरूम में हैं. मीटिंग 12 बजे के बाद शुरू होगी.

इस के बाद सुनील कुमार जोशी कमरे में चले गए. उन्होंने कर्मचारी गौतम राजपूत से पानी लाने को कहा. गौतम पानी लेने चला गया, लेकिन उस के आने से पहले ही वह बाथरूम चले गए. कुछ देर बाद ही बाथरूम से गोली चलने की आवाज आई.

आवाज सुन कर किचन में नाश्ता तैयार कर रहे बुद्धराम कुशवाहा, गौतम राजपूत व जितेंद्र रूम में आ गए. उन तीनों ने बाथरूम का दरवाजा खोला तो उन के होश गुम हो गए. बाथरूम के अंदर सुनील कुमार जोशी खून से लथपथ मरणासन्न स्थिति में पड़े थे.

कर्मचारियों ने तुरंत जा कर प्रेसीडेंट (एडमिनिस्ट्रेशन) अनिल मोहन को घटना की जानकारी दी.

मामला गंभीर देख कर अनिल मोहन फौरन वहां जा पहुंचे, जहां सुनील कुमार जोशी खून के सैलाब में डूबे पड़े थे. उन की हालत गंभीर थी. अनिल मोहन ने कर्मचारियों की मदद से उन्हें कार में बिठाया और कानपुर के चर्चित अस्पताल रीजेंसी ले गए.

चूंकि सुनील कुमार जोशी की हालत नाजुक थी, अत: उन्हें गहन चिकित्सा यूनिट में भरती किया गया. लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी डाक्टर उन्हें बचा नहीं पाए.

सुनील जोशी द्वारा खुदकुशी की कोशिश किए जाने की जानकारी मिलते ही उन की पत्नी मेनका जोशी तत्काल रीजेंसी अस्पताल पहुंचीं. लेकिन वहां पहुंच कर उन्हें पता चला कि उन के पति की मृत्यु हो गई है. इस सदमे को बरदाश्त कर पाना मेनका जोशी के लिए बहुत मुश्किल था.

परिवार की महिलाओं व कंपनी के बड़े अधिकारियों ने जैसेतैसे उन्हें धैर्य बंधाया. इस के बाद मेनका अस्पताल से घटनास्थल गेस्टहाउस को रवाना हो गईं.

इधर प्रेसीडेंट (प्रशासन) अनिल मोहन ने डायरेक्टर सुनील कुमार जोशी द्वारा गोली मार कर आत्महत्या कर लेने की सूचना थाना कैंट पुलिस को दी.

सूचना मिलते ही थानाप्रभारी आदेश चंद्र पुलिस बल के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो गए. जाने से पहले उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी इस घटना के बारे में सूचित कर दिया था.

थाने से कंपनी का गेस्टहाउस दो किलोमीटर दूर था. अत: पुलिस को वहां पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगा. चूंकि गेस्टहाउस में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक थी, अत: भीड़ ज्यादा नहीं थी. गेस्टहाउस के कर्मचारी, पदाधिकारी तथा मृतक के परिजन ही वहां मौजूद थे.

थानाप्रभारी आदेशचंद्र घटनास्थल पर पहुंचे ही थे कि सूचना पा कर एसएसपी अनंत देव, एसपी (पूर्वी) राजकुमार अग्रवाल तथा डीएसपी अरविंद कुमार चतुर्वेदी भी आ गए.

पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया. अधिकारियों की उपस्थिति में फोरैंसिक टीम ने जांच शुरू की. कमरे से अटैच बाथरूम में खून फैला हुआ था. वहीं पिस्टल भी पड़ी थी.

जांच से पता चला कि डायरेक्टर सुनील कुमार जोशी ने .30 बोर की इंग्लिश पिस्टल से खुद को गोली मारी थी. टीम ने जांच के लिए ब्लड सैंपल और पिस्टल से फिंगरप्रिंट ले लिए. पास ही कारतूस का खोखा पड़ा था. टीम ने उसे भी सुरक्षित कर लिया. फोरैंसिक टीम ने पिस्टल से मैगजीन निकाली तो उस में 5 गोलियां मौजूद थीं. सभी बरामद वस्तुओं को टीम ने जांच हेतु सुरक्षित कर लिया.

पुलिस अधिकारियों ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया तो उन्हें कमरे में मृतक सुनील कुमार जोशी का मोबाइल फोन रखा मिल गया. एसपी (पूर्वी) राजकुमार अग्रवाल ने मोबाइल फोन खंगाला तो उन्हें चौंकाने वाली जानकारी मिली.

ये भी पढ़ें- मंदिर में बाहुबल

मृतक सुनील कुमार जोशी ने प्रात: 9 बज कर 26 मिनट पर एग्जीक्यूटिव कमेटी के वाट्सऐप गु्रप में जो मैसेज किया, उस से साफ जाहिर था कि उन की मनोदशा ठीक नहीं थी. मैसेज में उन्होंने लिखा था कि 30 साल से कंपनी की सेवा कर रहा हूं. अच्छे और बुरे दिन देखे. लेकिन अब मेरे सामने कोई रास्ता नहीं है.

घटनास्थल (गेस्टहाउस) पर जेपी गु्रप के चेयरमैन मनोज गौर मौजूद थे. पुलिस अधिकारियों ने जब उन से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि घटना के वक्त वह अपने रूम के बाथरूम में थे. इसी दौरान अनिल मोहन सुनील को अस्पताल ले जा चुके थे. गेस्टहाउस कर्मचारियों से उन्हें घटना की जानकारी हुई तो वह अवाक रह गए.

उन्होंने पुलिस अधिकारियों को बताया कि फर्टिलाइजर कंपनी में करोड़ों का स्क्रैप बेचा गया था, जिसे बिना किसी लिखापढ़ी तथा कंपनी के अधिकारियों को जानकारी दिए बिना उठवा दिया गया था. इसी को ले कर कंपनी में विवाद की स्थिति थी.

मनोज गौर ने बताया कि इस मामले को ले कर उन्होंने कई बार सुनील जोशी से बात करने की कोशिश की, मगर वह उन का फोन ही नहीं उठाते थे और बात करने से बचते थे.

स्क्रैप बिक्री घोटाले को ले क र ही उन्होंने आज कानपुर स्थित कंपनी के गेस्टहाउस में मीटिंग रखी थी. शायद वह इस मीटिंग को फेस करने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थे. गेस्टहाउस आए जरूर पर उन्होंने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली.

गेस्टहाउस में ही मनोज गौर का सामना सुनील जोशी की पत्नी मेनका जोशी से हो गया जो रिश्ते में उन की भतीजी लगती थी. गमगीन भतीजी को देख कर चेयरमैन मनोज गौर भावुक हो गए और बोले, ‘‘सुनील से गलती हो गई थी, तो मुंह छिपाने से क्या फायदा था. कंपनी के जिम्मेदार पद पर हो कर भी फोन नहीं उठा रहे थे. सामने आ कर स्थितियां स्पष्ट करते तो कोई रास्ता निकाला जाता.’’

मेनका जोशी ने अपने फूफा मनोज गौर की बात को गौर से सुना जरूर, पर कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की. जाने वाला हमेशा के लिए जा चुका था. अब कुछ कहनेसुनने से क्या फायदा था. वह चुपचाप सुबकती रही और आंखों से आंसू बहाती रहीं.

एसएसपी अनंत देव तिवारी इस हाईप्रोफाइल मामले पर पैनी नजर रखे हुए थे और बड़ी बारीकी से जांच में जुटे थे. इसी कड़ी में उन्होंने प्रेसीडेंट (प्रशासन) अनिल मोहन से पूछताछ की.

उन्होंने बताया कि घटना के समय वह अपने रूम में थे. तभी 3 कर्मचारी बदहवास हालत में उन के रूम में आए और बताया कि डायरेक्टर सुनील जोशी ने बाथरूम में खुद को गोली मार ली है. वह लहूलुहान बाथरूम में पड़े हैं.

यह सुनते ही वह अवाक रह गए. फिर वह सुनील जोशी को कार से रीजेंसी अस्पताल ले गए और भरती कराया. उस के बाद थाना छावनी पुलिस तथा सुनील की पत्नी मेनका को इस घटना के बारे में सूचना दी.

अनंत देव तिवारी ने गेस्टहाउस के कर्मचारियों से पूछताछ की तो गौतम राजपूत, बुद्धराम कुशवाहा तथा जितेंद्र ने बताया कि वे तीनों रसोइया हैं. उस वक्त वे किचन में नाश्ता तैयार कर रहे थे. जब बाथरूम से गोली चलने की आवाज आई तो उन लोगों ने वहां पहुंच कर देखा कि सुनील जोशी तड़प रहे थे. शायद उन्होंने खुद को गोली मार ली थी. वे तीनों घबरा गए और तुरंत जा कर अनिल मोहन को जानकारी दी. फिर वही घायल सुनील जोशी को अस्पताल ले गए.

कंपनी के गेस्टहाउस (घटनास्थल) में मृतक सुनील जोशी की पत्नी मेनका जोशी, उन का साला सोनू तथा परिवार के अन्य लोग मौजूद थे. पुलिस अधिकारियों ने जब मेनका जोशी से पूछताछ की तो वह बोलीं कि उन के पति ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उन की हत्या की गई है. वह रिपोर्ट दर्ज करा कर सीबीआई जांच की मांग करेंगी.

पुलिस अधिकारियों ने जब उन से सुनील की पिस्टल के संबंध में पूछा तो मेनका ने बताया कि इंगलिश पिस्टल लाइसेंसी है तथा उन के पति सुनील की है.

मृतक सुनील जोशी के साले सोनू का आरोप था कि जिस बाथरूम में सुनील को गोली लगी थी, वहां खून की मोटी परत जमी थी. इस से जाहिर है कि गोली लगने के बाद वह काफी देर तक फर्श पर पड़े रहे और खून निकलता रहा. उन्हें तत्काल अस्पताल नहीं ले जाया गया.

ये भी पढ़ें- पत्नी के हाथ, पति की हत्या

सोनू ने यह भी आरोप लगाया कि जब गेस्टहाउस में आधा दर्जन से अधिक उच्चपदस्थ अधिकारी मौजूद थे तब गोली लगने के बाद सुनील को अस्पताल ले जाने के लिए अकेले प्रेसीडेंट (प्रशासन) अनिल मोहन ही आगे आए. बाकी अस्पताल में उन्हें देखने तक नहीं गए. अत: रिपोर्ट दर्ज करा कर सीबीआई जांच की मांग की जाएगी.

सुनील जोशी के परिवार के एक सदस्य ने आरोप लगाया कि कंपनी का निदेशक मंडल अपने कारनामों को सुनील पर थोप कर बचने का प्रयास कर रहा था. किस ने गलत किया है, इस का फैसला करने के लिए ही बैठक बुलाई गई थी. अपने ऊपर लगे आरोपों से सुनील बेहद नाराज थे. मीटिंग से पहले आत्महत्या की बात गले नहीं उतर रही. अत: रिपोर्ट दर्ज करा कर जांच की मांग करेंगे.

जानें आगे की कहानी अगले भाग में…

 

लाखों रुपए कैश वैन से लूटा, चुटकियों में गए ऐसे पकड़े

छत्तीसगढ़ की संस्कारधानी कहे जाने वाली रायगढ़ सिटी में दिनदहाड़े केवडाबाडी स्टेट बैंक के मुख्य शाखा से पैसे लेकर निकले कर्मचारी नवरतन रात्रे, गनमैन विनोद पटेल, चालक अरविन्द पटेल एवं भीषण कुमार रात्रे के साथ कैश वेन क्रमांक CG 04 JD 0613 में एटीएम  में रुपये  डालते हुए किरोड़ीमल भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम  1.45 बजे पहुंचे. नवरत्न रात्रे पेटी से 13,00,000 रुपए निकालकर एटीएम  में रुपये  डालने के लिए हुड को खोला ही था उसने देखा  दो नकाबपोश सामने खड़े हैं.

उन्होंने शटर  उठाकर गोली चलाई  और बड़े ही आराम से बैग में  13,00,000 रुपए और एटीएम से बची रकम 1,50,000 रुपए, इस तरह कुल14,50,000 रुपए लूटकर वैन के चालक अरविन्द पटेल और गनमैन विनोद पटेल को गोली मारकर मोटर साइकिल से भाग गए. शुक्रवार 3 जुलाई 2020 का यह घटनाक्रम सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो गया और देखते ही देखते देशभर में वायरल भी होता चला गया. लोगों ने देखा किस तरह सड़क पर बड़े ही दुस्साहस तरीके से लूट को अंजाम दिया गया और फायरिंग करते हुए लुटेरे आराम से भाग खड़े हुए.

ये भी पढ़ें- खूनी नशा: ज्यादा होशियारी ऐसे पड़ गई भारी

 

इस घटनाक्रम के पश्चात छत्तीसगढ़ पुलिस की यह जिम्मेदारी हो गई की कैसे भी हो, इस घटनाक्रम को अंजाम देने वाले लोगों को पकड़ कर कानून के हवाले करना होगा और निसंदेह एक चुनौती पूर्ण कार्य था. यहां यह जानना भी जरूरी है कि इस दुस्साहस से लूट कांड में चालक अरविंद पटेल की मौत हो गई, वहीं गनमैन गंभीर रूप से घायल हो गया.

पुलिस हो गई “अलर्ट”

रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह हमारे संवाददाता को बताते हैं की लूट की घटना हमारे लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने खड़ी थी. हमें जनता को विश्वास दिलाना था कि कानून के हाथ लंबे होते हैं.

लूट की यह वारदात की खबर छत्तीसगढ़ से निकल का देश भर में आग की तरह फैलती चली . इधर घटनास्थल  पर जिले के  वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ शहर के  थाना व चौकी प्रभारी के साथ सायबर टीम आ  पहुंची. खबर मिलते ही  बिलासपुर रेंज आईजी दिपांशु काबरा और  पुलिस अधीक्षक  संतोष कुमार सिंह ने पूरे जिले को सील कराकर जिले के अंदर 50 नाकेबंदी पाइंट बनवा रातभर वाहनों एवं आने–जाने वालों की सघन तलाशी अभियान चलाया.  सरहदी जिले कोरबा, रायपुर सहित   सरहदी राज्य उड़ीसा  में नाकेबंदी करा अंतर्राज्यीय जिलों के पुलिस अधीक्षकों से तालमेल बिठाया गया.   लुटेरे आरोपियों  को जल्द से जल्द दबोचने के लिए आठ टीमों को  मुस्तैद किया गया.

पुलिस कन्ट्रोल रूम, जिंदल कम्पनी और शहर के सैकड़ों सीसीटीवी  कैमरों के फुटेज को चेक करने के बाद आरोपियों का अंतिम लोकेशन केराझर गांव के पास मिल गई. इसी बीच पुलिस अधीक्षक को मुखबिर से सूचना मिली की केराझर गांव में दो संदिग्ध देखे गए हैं, तब केराझर एवं पास के दो गांवों को पुलिस की टीमें टारगेट कर आर्म्स लिए हुए 50 जवान की टीम गांव को  घेरते हुए आगे बढ़ी, कुछ जवान नगर पुलिस अधीक्षक  अविनाश सिंह ठाकुर के साथ हथियार लैस होकर एक–एक कर घरों की तलाशी ले रहे थे. पुलिस पार्टी को एक कमरे के अंदर दो संदिग्ध मिले, जिसमें एक युवक ने पुलिस पार्टी पर पिस्टल तान दी, लेकिन जान जोखिम में डाल पुलिसवालों ने झूमाझटकी कर हथियार पकड़े युवक को पकड़ उससे हथियार छीनकर दोनों को हिरासत में ले लिया . और इस तरह पुलिस का ऑपरेशन सफल हुआ.

ये भी पढ़ें- मंदिर में बाहुबल

आरोपी बिहार प्रांत के निकले

और जैसा कि छत्तीसगढ़ पुलिस को एहसास था दोनों आरोपी दीगर राज्य बिहार के निवासी निकले .

पहला आरोपी 23 वर्षीय सुधीर कुमार सिंह पिता झूलन राय बिहार के जिला सिवान के ग्राम खम्हौरी का है. वही  दूसरा आरोपी 18 वर्षीय पिन्टु वर्मा उर्फ विराट सिंह उर्फ छोटू बिहार के जिला कैमूर के थाना रामगढ़ का  रहवासी  है. पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली कि सुधीर सिंह के पिता एवं भाई रायगढ़ में ही रहते हैं. सुधीर जब भी रायगढ़ आता तो कैश वैन को देख कर उसे लूटने का मन बनाकर अपने साथी पिन्टु वर्मा को प्लान में शामिल किया. लूट की प्लान के साथ 2 पिस्टल, 2 देसी कट्टा, 3 मैगजीन में 26 राउंड, 2 जिंदा कारतूस, 2 बटन चाकू के साथ प्री–प्लानिंग कर कैश वैन को लूटने आए, और 15 दिनों की रैकी करने के बाद लूट की घटना को अंजाम दिया. छत्तीसगढ़ पुलिस की तत्परता की कारण  आज जेल के सीखचों में पहुंच गए हैं.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें