हर्ष ना था हर्षिता के ससुराल में: भाग 2

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मैं ने उन के पैर का पंजा व कुरता पकड़ कर ऊपर खींचने की कोशिश की, लेकिन बचा नहीं पाई. इस दौरान मालकिन पीछे खड़ी रहीं. उन्होंने मदद नहीं की.

नौकरानी शकुंतला के बयानों के बाद थानाप्रभारी प्रभुकांत ने पुलिस अधिकारियों के आदेश पर रानू अग्रवाल को महिला पुलिस के सहयोग से हिरासत में ले लिया. उसे हिरासत में लेते ही मृतका के मायके वालों का गुस्सा फूट पड़ा. महिलाएं हत्यारिन सास कह कर रानू पर टूट पड़ीं.

पुलिस ने बड़ी मशक्कत से रानू अग्रवाल को हमलावर महिलाओं से बचाया और उसे पुलिस सुरक्षा में जीप में बिठा कर थाना कोहना भेज दिया. पुलिस को शक था कि कहीं मायके वाले उत्कर्ष व उस के पिता सुशील कुमार पर भी हमला न कर दें. इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से उन्हें भी थाने भेज दिया गया.

पुलिस अधिकारियों ने मृतका हर्षिता के पिता पदम अग्रवाल से घटना के संबंध में जानकारी ली तो वह फफक पडे़ और बोले, ‘‘मैं ने हर्षिता को बडे़ लाडप्यार से पालपोस कर बड़ा किया, पढ़ायालिखाया था. शादी भी बडे़ अरमानों के साथ की थी. उस की शादी में करीब 40 लाख रुपए खर्च किया था. इस के बावजूद ससुराल वालों का पेट नहीं भरा. शादी के कुछ दिन बाद ही वह रुपयों के लालच में बेटी को शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताडि़त करने लगे थे.

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‘‘मार्च 2019 में समधी सुशील कुमार की बेटी परिधि की शादी थी. शादी के लिए उन्होंने हर्षिता के मार्फत 25 लाख रुपए मांगे थे. लेकिन उस ने मना कर दिया था. तब पूरा परिवार बेटी को प्रताडि़त करने लगा. फैक्ट्री शिफ्ट करने के लिए भी कभी 30 लाख तो कभी 40 लाख की मांग की थी.

‘‘आज 11.20 बजे हर्षिता ने फोन कर के सास द्वारा प्रताडि़त करने की जानकारी दी थी. उस ने जानमाल का खतरा भी बताया था. आखिर दहेज लोभियों ने मेरी बेटी को मार ही डाला. आप से मेरा अनुरोध है कि इन दहेज लोभियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर के इन्हें सख्त से सख्त सजा दिलाने में मदद करें.’’

ससुराल वालों के खिलाफ हुआ केस दर्ज

पदम अग्रवाल की तहरीर पर कोहना थानाप्रभारी प्रभुकांत ने भादंवि की धारा 498ए, 304बी, 506 तथा दहेज अधिनियम की  धारा 3/4 के अंतर्गत हर्षिता की सास रानू अग्रवाल, पति उत्कर्ष अग्रवाल, ससुर सुशील कुमार  अग्रवाल, ननद परिधि और ननदोई आशीष जालौन के विरूद्ध रिपोर्ट दर्ज कर ली. मामले की जांच का कार्य सीओ (कर्नलगंज) जनार्दन दुबे को सौंपा गया.

7 जुलाई, 2019 को हर्षिता का जन्म दिन था. बर्थ  डे पर ही उस की अरथी उठी. पदम अग्रवाल की लाडली बेटी का जन्म 7 जुलाई, 1991 को रविवार के दिन हुआ था. 28 साल बाद उसी तारीख और रविवार के दिन घर से बेटी की अरथी उठी.

उसी दिन उस के शव का पोस्टमार्टम हुआ. दोपहर बाद शव घर पहुंचा तो वहां कोहराम मच गया. लाल जोडे़ में सजी अरथी को देख कर मां संतोष बेहोश हो गई. महिलाओं ने उन्हें संभाला. हर्षिता को अंतिम विदाई देने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा.

हर्षिता की मौत का समाचार 7 जुलाई को कानपुर से प्रकाशित प्रमुख समाचार पत्रों में प्रमुखता से छपा तो शहर वासियों में गुस्सा छा गया. लोग एक सुर से हर्षिता को न्याय दिलाने की मांग करने लगे. सामाजिक संगठन, महिला मंच, मुसलिम महिला संगठन, जौहर एसोसिएशन आदि ने घटना की घोर निंदा की और एकजुट हो कर हर्षिता को न्याय दिलाने का आह्वान किया.

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इधर विवेचक जनार्दन दुबे ने जांच प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए एक बार फिर घटनास्थल का निरीक्षण किया. फ्लैट को ख्ांगाला और घटना की अहम गवाह नौकरानी शकुंतला का बयान दर्ज किया. साथ ही फ्लैट के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी देखीं. आरोपियों के बयान भी दर्ज किए गए. साथ ही मृतका के मातापिता का बयान भी लिया गया.

जांच के बाद ससुरालियों द्वार हर्षिता को प्रताडि़त करने का आरोप सही पाया गया. इस में सब से बड़ी भूमिका हर्षिता की सास रानू की थी. यह बात भी सामने आई कि उत्कर्ष और सुशील कुमार अग्रवाल भी हर्षिता को प्रताडि़त करते थे. रानू अग्रवाल हर्षिता को सब से ज्यादा प्रताडि़त करती थी.

जांच के बाद 7 जुलाई, 2019 को थाना कोहना पुलिस ने अभियुक्त रानू अग्रवाल, उत्कर्ष अग्रवाल तथा सुशील अग्रवाल को विधि सम्मत गिरफ्तार कर लिया. रानू अग्रवाल को कानपुर कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया. जहां से उसे जेल भेज दिया गया. दूसरे रोज 8 जुलाई को उत्कर्ष तथा सुशील को कोर्ट में पेश किया गया. जहां से उन दोनों को भी जेल भेज दिया गया.

हर्षिता की मौत के मामले में नामजद 5 आरोपियों में से 3 जेल चले गए थे, जबकि 2 आरोपी हर्षिता की ननद परिधि जालान तथा ननदोई आशीष जालान बाहर थे. सीओ जनार्दन दुबे की विवेचना में ये दोनों निर्दोष पाए गए. रिपोर्टकर्ता पदम अग्रवाल ने भी इन दोनों को क्लीन चिट दे दी थी. इसलिए विवेचक ने दोनों का नाम मुकदमे से हटा दिया.

हर्षिता की मौत के गुनहगारों को पुलिस ने हालांकि जेल भेज दिया था, लेकिन कानपुर वासियों का गुस्सा अब भी ठंडा नहीं पड़ा था. सामाजिक संगठन, महिला मंच आल इंडिया डेमोक्रेटिक वूमेंस एसोसिएशन, मौलाना मोहम्मद अली जौहर एसोसिएशन महिला संगठन तथा स्कूली छात्राएं सड़कों पर प्रदर्शन कर रही थीं.

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10 जुलाई को भारी संख्या में महिलाएं छात्राएं तथा सामाजिक संगठनों के लोग मोतीझील स्थित राजीव वाटिका पर जुटे और हर्षिता की मौत के गुनहगारों को फांसी की सजा दिलाने के लिए शांति मार्च निकाला. इस दौरान हर किसी की आंखों में गम और चेहरे पर गुस्सा था.

हर्षिता की मौत को ले कर मुसलिम महिलाओं में भी आक्रोश था. इसी कड़ी में हर्षिता को न्याय दिलाने के लिए मौलाना मोहम्मद अली जौहर एसोसिएशन की महिला पदाधिकारियों ने हलीम मुसलिम कालेज चौराहे पर श्रद्धांजलि सभा की, फिर कैंडिल मार्च निकाला. कैंडिल मार्च का नेतृत्व जैनब कर रही थीं. मुसलिम महिलाएं हाथ में ‘जस्टिस फार हर्षिता’, ‘हत्यारों को फांसी दो’ लिखी तख्तियां लिए थीं.

पदम अग्रवाल ने विवेचक पर आरोप लगाया कि वह जांच को प्रभावित कर के आरोपियों को फायदा पहुंचा रहे हैं. इस की शिकायत उन्होंने डीएम विजय विश्वास पंत से की. साथ ही आईजी मोहित अग्रवाल व एसएसपी अनंतदेव को भी इस बात से अवगत कराया.

पदम अग्रवाल की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आईजी मोहित अग्रवाल ने सीओ (कर्नलगंज) जनार्दन दुबे से जांच हटा कर सीओ (स्वरूपनगर) अजीत सिंह चौहान को सौंप दी. जांच की जिम्मेदारी मिलते ही अजीत सिंह चौहान ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तथा फ्लैट में जा कर बारीकी से जांच की. साथ ही पदम अग्रवाल, उन की पत्नी संतोष, बेटी गीतिका तथा हर्षिता के पड़ोसियों का बयान दर्ज किया. फोरैंसिक टीम को साथ ले कर उन्होंने क्राइम सीन को भी दोहराया.

कानपुर महानगर के काकादेव थाना क्षेत्र में पौश इलाका है सर्वोदय नगर. इसी सर्वोदय नगर क्षेत्र के मोती विहार में पदम अग्रवाल अपने परिवार के साथ रहते हैं. उन के परिवार में पत्नी संतोष के अलावा 2 बेटियां गीतिका व हर्षिता थीं. पदम अग्रवाल कागज व्यापारी हैं. कागज का उन का बड़ा कारोबार है. 80 फुटा रोड पर उन का गोदाम तथा दुकान है. अग्रवाल समाज में उन की अच्छी प्रतिष्ठा है.

पदम अग्रवाल अपनी बड़ी बेटी गीतिका की शादी कर चुके थे. वह अपनी ससुराल में खुशहाल थी. गीतिका से छोटी हर्षिता थी, वह भी बड़ी बहन गीतिका की तरह खूबसूरत, हंसमुख तथा मृदुभाषी थी. उस ने छत्रपति शाहूजी महाराज (कानपुर) यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन कर लिया था.

हर्षिता को फोटोग्राफी का शौक था. वह फोटोग्राफी से अपना कैरियर बनाना चाहती थी. इस के लिए उस ने न्यूयार्क इंस्टीट्यूट औफ फोटोग्राफी से प्रोफेशनल फोटोग्राफी का कोर्स पूरा कर लिया था.

हर्षिता जहां फोटोग्राफी के व्यवसाय की ओर अग्रसर थी, वहीं पदम अग्रवाल अपनी इस बेटी के हाथ पीले कर उसे ससुराल भेज देना चाहते थे. वह ऐसे घरवर की तलाश में थे, जहां उसे मायके की तरह सभी सुखसुविधाएं मुहैया हों. काफी प्रयास के बाद एक विचौलिए के मार्फत उन्हें उत्कर्ष पसंद आ गया.

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उत्कर्ष के पिता सुशील कुमार अग्रवाल अपने परिवार के साथ कानपुर के कोहना थाना क्षेत्र स्थित एल्डोराडो अपार्टमेंट की 7वीं मंजिल पर फ्लैट नंबर 706 में रहते थे. उन के परिवार में पत्नी रानू अग्रवाल के अलावा बेटा उत्कर्ष तथा बेटी परिधि थीं. दोनों ही बच्चे अविवाहित थे.

सुशील कुमार धागा व्यापारी थे. मंधना में उन की अनुशील फिलामेंट प्राइवेट लिमिटेड नाम से पौलिस्टर धागा बनाने की फैक्ट्री थी. उत्कर्ष अपने पिता सुशील के साथ धागे की फैक्ट्री को चलाता था. वह पढ़ालिखा और स्मार्ट था. पदम अग्रवाल ने उसे अपनी बेटी हर्षिता के लिए पसंद कर लिया. हर्षिता और उत्कर्ष ने एकदूसरे को देखा, तो वे दोनों भी शादी के लिए राजी हो गए. इस के बाद रिश्ता तय हो गया.

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जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां

स्वीमिंग पूल किनारे इस एक्ट्रेस ने दिखाया बोल्ड अवतार, देखें वीडियो

2015 में मिस दीवा और मिस यूनिवर्स का खिताब जीतने वाली बौलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला अक्सर सुर्खियों में बनी नजर आती हैं. एक बार फिर वे अपनी वीडियो के चलते फैंस के बीच चर्चा का विषय बन गई हैं. हाल ही में उर्वशी ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर फैंस के साथ अपनी एक वीडियो शेयर की थी जिसमें वे स्वीमिंग पूल के किनारे अपने हौट अवतार से फैंस का दिल जीत रही हैं. इस वीडियो ने फैंस के दिलों में हलचल पैदा कर दी है.

काफी तेजी से वायरल हआ वीडियो…

उर्वशी रौतेला अक्सर अपने हौट अंदाज से फैंस को खुश करने में लगी रहती हैं लेकिन उनकी इस वीडियो ने तो तबाही ही मचा दी. उर्वशी की ये वीडियो उंटरनेट पर काफी तेजी से वायरल होती नजर आ रही है और साथ ही उर्वशी के फैंस इस वीडियो को बेहद प्यार दे रहे हैं.

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हौटनेस है फैन फौलोविंग का कारण…

उर्वशी रौतेला की जबरदस्त फैन फौलोविंग है और इस फैन फौलोविंग का कारण उनकी एक्टिंग के साथ-साथ उनका इतना हौट होना भी है. उनके फैंस उनकी हर फोटो को काफी पसंद करते हैं और बेहद प्यार भरे कमेंट्स करते हैं.

मौडल भी रह चुकी है उर्वशी…

उर्वशी एक्टर होने के साथ एक बेहतरीन मौडल भी रह चुकीं हैं और यही वजह है कि उनहे इसने अच्छे पोज देने आते हैं. उनके पोज मारने का अंदाज इस वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है, जिस तरह वे कैमरे के आगे पोज दे रही हैं वे वाकई तारीफ के काबिल है और उर्वशी अच्छे से जानती है कि किस तरह वे अपने फैंस को खुश कर सकती हैं.

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उर्वशी रौतेला ने कई फिल्मों में काम किया है जैसे कि, ‘सनम रे’, ‘काबिल’, ‘ग्रेट ग्रैंड मस्ती’, ‘हेट स्टेरी 4’, आदि. फिल्मों के साथ उर्वशी ने कई म्यूजिक वीजियो में भी काम किया है जिन में से कुछ नाम हैं ‘लव डोज’, ‘लाल दुपट्टा’, आदी. इसी के साथ उर्वशी अपनी अप्कमिंग फिल्म पागलपंती में जौन अब्राहम के साथ दिखाई देंगी.

फिल्म ‘‘सांड की आंख’’ पर बढ़ता विवाद, एक्ट्रेसेस में छिड़ी जंग

अभिनेत्री तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर की फिल्म ‘सांड की आंख‘’ का ट्रेलर बाजार में आने के बाद जहां एक तरफ लोग इसे पसंद करते हुए इसकी तारीफ कर रहे हैं, वहीं अभिनेत्री कंगना रानौट की बहन रंगोली चंदेल ने तापसी पन्नू के अभिनय पर सवाल उठाए हुए ट्वीट कर एक नए विवाद को जन्म दे दिया है.  इस बार तापसी पन्नू ने भी रंगोली को जबरदस्त जवाब दिया. उसके बाद इस विवाद में आलिया भट्ट की मां सोनी राजदान के साथ साथ अभिनेत्री नीना गुप्ता भी कूद पड़ी हैं.

ज्ञातब्य है कि फिल्म ‘‘सांड की आंख’’ की कहानी मेरठ के जौहर गांव की 85 और 60 वर्षीय ‘‘राष्ट्रीय शार्प शूटर’’ (निशाने बाज) प्रकाशी और चंद्रा तोमर के जीवन, उनकी सोच और उनके द्वारा शूटर के तौर पर गढ़े गए नए मापदंडो की है, जिसमें साठ वर्षीय प्राकाशी के किरदार में तापसी पन्नू और 85 वर्षीय चंद्रो के किरदार में भूमि पेडणेकर हैं. मगर रंगोली चंदेल ने अपने ट्वीट पर सिर्फ तापसी पर निशाना साधा है. इसकी मूल वजह यह भी है कि रंगोली पिछले कुछ माह से लगातार तापसी के खिलाफ कुछ न कुछ ट्वीट करती आ रही हैं.

अब इसी विवाद में कूदते हूए अभिनेत्री आलिया भट्ट की मां व अदाकारा सोनी राजदान ने भी बुजुर्ग किरदार के लिए वरिष्ठ अभिनेत्री को किरदार निभाने का मौका न दिए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं. सोनी राजदान ने कहा है- ‘‘मैं इन दोनों अभिनेत्रियों को पसंद करती हूं, लेकिन मैं इस बात को नहीं समझ पा रही हूं कि उन्हें अपनी उम्र से बड़े रोल के लिए क्यों चुना गया’’.

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मजेदार बात यह है कि सोनी राजदान यह भूल गयीं कि कई वर्ष पहले उनके पति व फिल्मकार महेश भट्ट ने फिल्म ‘‘सारांष’’ में 60 वर्ष के किरदार को निभाने के लिए 28 वर्ष के अनुपम खेर को चुना था.

सोनी राजदान का मानना है कि जब फिल्मकार 60 वर्ष के लोगों पर फिल्म बना रहे हैं, तो यदि वह इसके लिए असल उम्र वाली अभिनेत्रियों को क्यों नहीं चुन सकते हैं. पर सोनी राजदान ने आगे कहा है- ‘‘चूंकि युवा अनुपम खेर को फिल्म ‘सारांश‘ में 60 वर्ष का किरदार निभाने के लिए चुना गया था, इसलिए यह उचित नहीं है कि फिल्म बनाने के दौरान निर्देशक को सीमित कर दिया जाए. इन दिनों बुजुर्ग किरदार हासिल करने को लेकर उम्रदराज कलाकारों के पास बेहद सीमित अवसर हैं.’’

दरअसल, यह मामला तब शुरू हुआ जब रंगोली के ट्वीट के बाद एक सोशल मीडिया यूजर ने कहा कि फिल्म ‘सांड की आंख‘ में शूटर दादियों के रोल के लिए नीना गुप्ता, शबाना आजमी या जया बच्चन ज्यादा बेहतर होतीं, लेकिन मेकर्स ने भूमि और तापसी को चुना.

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यूजर के इस कथन पर नीना गुप्ता ने भी सहमति जताई उन्होंने यूजर को जवाब देते हुए लिखा, ‘हां, मैं भी इस बारे में सोच रही थी. हमारी उम्र के रोल तो कम से कम हमसे करा लो भाई. ‘जबकि इससे पहले नीना गुप्ता ट्वीट कर तापसी पन्नू और भूमि पेडणेकर की तारीफ कर चुकी थीं.

इसके बाद उधर ट्वीटर पर कंगना रनौत की बहन रंगोली चंदेल व तापसी पन्नू के बीच बहस लगातार जारी हैै. तापसी पन्नू ने ट्वीट किया है कि ये लोग जो बड़े उम्र के रोल पर सवाल उठा रहे हैं, उन्होंने अपनी आवाज तब क्यों नहीं उठाई थी, जब नरगिस दत्त,अनुपम खेर और दूसरे कलाकारों ने अपनी उम्र से अधिक उम्र के किरदार निभाए थे.

इस पर रंगोली ने तापसी के ट्वीट पर जवाब लिखा- ‘‘ऐक्टिंग का ए भी नहीं आता और खुद की तुलना लेजंड्स से कर रही हैं. भाई जा थोड़ी ऐक्टिंग सीख ले. चांदी के बाल और सस्घ्ता प्रोस्थेटिक आपको एक्टर नहीं बना देगा. 60 वर्ष की उम्र वाली बौडी लैंग्वेज का क्या? बुजुर्ग वाली आवाज कहां है? ऐक्टिंग कहां है? सो फनी!‘

देखना यह है कि यह विवाद कहां तक जाएगा. पर इस तरह के विवाद इस बात की ओर इशारा करते हैं कि कलाकारों के बीच प्रतिस्पर्धा का स्तर कितना नीचे गिरता जा रहा है.

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मां बनने के बाद अब शादी करेंगी अक्षय कुमार की ये को-स्टार, देखें फोटोज

फिल्म ‘सिंह इज ब्लिंग’ में अक्षय कुमार की को-स्टार बनीं एमी जैक्सन इन दिनों काफी चर्चा में हैं. दरअसल एमी जैक्सन ने एक बेटे को जन्म दिया है जिसका नाम उन्होनें ‘एंड्रेस’ रखा है. एमी जैक्सन लम्बे समय से जौर्ज पानायिटू को डेट कर रही थीं. एमी ने अपने प्रेग्नेंसी की खबर सोशल मीडिया पर अपने फैंस के साथ काफी खुशी से शेयर की थी और प्रेग्नेंसी के चलते ही एमी और उनके बौयफ्रेंड जौर्ज पानायिटू ने काफी रौयल तरीके से सगाई का प्रोग्राम किया था.

 

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Our Angel, welcome to the world Andreas 💙

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शादी करने का किया विचार…

अब खबरें कुछ एसी आ रही हैं कि बौलीवुड एक्ट्रेस एमी जैक्सन ने शादी करने का मन बना लिया है. अब तक एमी ने जौर्ज के साथ सगाई तो कर ली थी पर शादी नहीं की थी. नन्हे मेहमान को जन्म देने के बाद एक्ट्रेस एमी ने शादी करने का विचार बना लिया है और अपनी शादी के लिए दोनों ने एक ग्रैंड लोकेशन का भी इंतजाम कर लिया है.

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अगले साल ग्रीक में करेंगे शादी…

 

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Happy Birthday to my ride or die. Roll on to becoming a Mummy & Daddy! LoveYou 🐧

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एमी जैक्सन और जौर्ज पानायिटू ने अपनी शादी ग्रीक में समुंदर किनारे करने का प्लैन किया है. खबरों की मानें तो एमी और जौर्ज की शादी अगले साल होगी क्योंकि एमी चाहती हैं कि उनका बेटा थोड़ा और बड़ा हो जाए उसके बाद वे एक ग्रैंड पार्टी जो की दोनों ने ग्रीक में प्लैन की है उसमें पती-पत्नी होने की रसम पूरी करेंगे. एमी जैक्सन और जौर्ज पानायिटू की शादी की सारी रसमें क्रिश्चियन रिती-रिवाजों के साथ ही होंगी. तो अब देखना ये होगा की अगले साल वे दोनों किस दिन शादी के बंधन में बंधेंगे.

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mom&dad | The little one was at 14 weeks here… hidden under @kstewartstylist 🎀 game 👏🏼

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बता दें, एमी जैक्सन ने बौयफ्रेंड जौर्ज पानायिटू से 6 मई 2019 को सगाई की थी और उन्होनें 23 सितम्बर को अपने बेटे को जन्म दिया था. एमी ने हिंदी फिल्मों के साथ-साथ कई और भाषाओं की फिल्मों में भी काम किया हैं जैसे कि, तमिल, तेलुगु, अंग्रेजी, आदी और वहीं दूसरी तरफ उनके मंगेतर एक बहुत बड़े बिजनेसमैन हैं.

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सावधान! रेलवे में होती है, ऐसी ऐसी चोरियां

पहला प्रसंग-

लोकल ट्रेन का सफर करते हुए रजनी अपने पति के साथ बिलासपुर जा रही थी की अचानक एक शख्स ने झपट्टा मार उसका पर्स लेकर देखते ही देखते गायब हो गया. रजनी देखती रह गई, रिपोर्ट करने के बाद भी पर्स  कभी नहीं मिला.

दूसरा प्रसंग-

राजू नवरात्रि के समय अपने मित्रों के साथ मां बमलेश्वरी डोंगरगढ़ की ओर सफर कर रहा था कि अचानक ट्रेन में बैठे बैठे उसकी मोबाइल चोरी हो गई. रेल्वे  पुलिस में रिपोर्ट करने के बाद भी मोबाइल नहीं मिली.

तीसरा प्रसंग-

जानकी मसंद इलाहाबाद  से रायपुर की ओर रेलवे में सफर कर रही थी की आधी रात को एक शख्स ने उनके गले में रखे सोने के जेवर पर हाथ साफ करने की कोशिश की. महिला जाग गई चिल्लाने पर, लूटेरा भाग खड़ा हुआ.

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रेलवे के यह कुछ प्रसंग हैं, प्रतिदिन रेलवे में करोड़ों  लोग सफर करते हैं और बहुतेरे लोग दुर्भाग्य के मारे अपने सफ़र में लूट जाते हैं. आइए, देखें इस रिपोर्ट में, हम कैसे रेलवे में सफर करते हुए अपने आप को सेफ रखें.

रेलवे का सफर आपके लिए अनिवार्य है. और जब सफर करना है तो साथ में सामान भी होगा रूपए,पैसे भी होंगे, जेवर जेवरात भी होंगे और जब यह सब होगा तो चोरी भी होगी चोर भी होंगे. ऐसे में आवश्यकता है आंख खुली रखने की, रेलवे के सफर में जैसे ही आपकी आंख चुकी कि आपका बेशकीमती माल चोरी चोरा जाता है . ऐसी हजारों घटनाएं आम है, यह भी सच है कि रेलवे की अपनी एक पुलिस होती है अपना कानून होता है नियम कानून बेहद सख्त होते हैं. मगर इसके बावजूद चोर तो चोर है वह कब आपका सामान चोरी करके ले जाएगा और कैसे ले जाएगा यह अंदाज लगा पाना बेहद मुश्किल होता है.  रेलवे में सफर करने से पूर्व सावधानी की समझ भी, अख्तियार कर लेनी चाहिए.

चोरों के गिरोह मुसतैद रहते हैं

छत्तीसगढ़ के  बिलासपुर मे पुलिस ने “ट्रेन” में चोरी और लूट की वारदात को अंजाम देने वाले पश्चिम बंगाल के एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है. जीआरपी और आरपीएफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के एक दो नहीं,  पूरे  8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनके पास से जेवर सहित 18 हजार नगद बरामद किया है. ये शातिर चोर गिरोह त्योहार में चोरी करने निकला था और  शातिराना  ढंग  से कोलगेट पेस्ट के अंदर छुपा कर 3 तोला वजनी चोरी की सोने की चैन रखे हुए थे. जिसकी कीमत 95 हजार रुपए आंकी गई है.पुलिस के अनुसार इस गिरोह का पर्दाफाश रविवार की घटना की जांच के दौरान हुआ.

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भिलाई निवासी सुरेश कुमार शर्मा पत्नी के साथ विशाखापत्तनम-कोरबा लिंक एक्सप्रेस में चढ़ रहे थे. भीड़ का फायदा उठाकर किसी ने महिला के गले से सोने की चेन निकाल ली. यात्री ने जीआरपी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई. तब इस गिरोह का खुलासा हुआ.इस गिरोह का मुख्य सरगना तालदी नरसिंग दक्षिण परगना पश्चिम बंगाल निवासी रिजाउल उर्फ बिशु (36) पुत्र युसुफ सरदार है.

गिरोह के अन्य सदस्यों में शहजादा मुल्ला निवासी तालदी हल्दीग्राम, तुतुर मैत्री निवासी कैनी हेलीकाप्टर मोड़, राहुल कोयल निवासी कैनी दूरबीन, प्रलय हलधर निवासी उतरतली काली नाला, रविउल सरदार निवासी बारुईपुर, मनोतोष मंडल निवासी मडा हल्दी व नाजीम खान निवासी वायरसील कैनी (सभी पश्चिम बंगाल निवासी) शामिल हैं.

रेल के सफर मे जोखिम भी!

जैसे की सर्वज्ञात है रेल्वे के सफर में  जितना आकर्षण,आनन्द है वैसे ही  इसमें  जोखिम भी है .भारतीय रेलवे की यात्रा भगवान भरोसे की होती हैं आप  यात्रा  पर निकल पड़े हैं तो आगे  सबकुछ आपके मत्थे है. अपना सामान असबाब, आपको खुद  संभालना है.जरा सी नज़र चुकी की आपका क़ीमती  सामान  कब चोरी  चला  जाएगा. ट्रेन की यात्रा के समय आपका पर्स आपकी अटैची आपका मोबाइल कभी भी किसी भी समय गायब हो सकता है और उसके बाद, आपकी परेशानी का अंत नहीं होगा क्योंकि रेलवे पुलिस के चक्कर लगाना, रिपोर्ट लिखवाना एक बहुत बड़ी पेचीदगियों  का  सबब है.  हमारी सलाह तो यही है कि आप स्वयं जागरूक बने बुद्धिमता का परिचय देते हुए ट्रेन के सफर में अपने सामान की सुरक्षा स्वयं करें और आने वाले बेवजह के टेंशन से बचे.

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गरीबों के अजीब मंदिर

एक विधवा को सुबह देखने से हमारा दिन खराब हो जाता है. हम सारी दकियानूसी बातों, परंपराओं, कुप्रथाओं का समर्थन करते हुए विश्व गुरु बनने का जो सपना देख रहे हैं, शायद वह खयालीपुलाव है या फिर आसमान के चांदसितारे तोड़ लाने की बातें.

हम आप को भारत के कुछ अजीबोगरीब मंदिरों के बारे में बताना चाहेंगे. लाखों की तादाद में लोग इन मंदिरों में माथा टेकते हैं और मन्नतें मानते हैं, जबकि इन मंदिरों को बनाने में चालाक किस्म के पंडेपुजारियों का हाथ रहता है.

मंदिर का झूठा गुणगान करने में इन की ही जातबिरादरी के लोग होते हैं. उन को पता होता है कि इन मंदिरों से हमारी बिरादरी वालों को फायदा होगा, बाकी लोग तो बेवकूफ बनेंगे.

इन मंदिरों में पुजारी सवर्ण जाति के ब्राह्मण पंडे ही होते हैं और मंदिर की मूर्ति का झूठा यशोगान कर के वे आम लोगों से ठगी करते रहते हैं. सरकार भी इन मंदिरों को इसलिए बढ़ावा देती रहती है कि इस देश की आम जनता में वैज्ञानिक सोच का विकास नहीं हो और वह मंदिरमसजिद में उलझी रहे.

चूतड़ टेका मंदिर

गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा के तकरीबन बीच में हनुमान का एक मंदिर है, जिस का नाम है चूतड़ टेका मंदिर. यहां पर परिक्रमा करने वाले लोगों को चूतड़ टेकना अनिवार्य माना जाता है.

कितना हास्यास्पद लगता है इस मंदिर में चूतड़ टेकना. अगर कोई सभ्य देश का नागरिक इस तरह का मंजर देखे तो पहली नजर में वह चूतड़ टेकने वाले को पागल ही समझेगा. इस मंदिर में पढ़ेलिखे और अनपढ़ सभी लोग आते हैं.

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बीड़ी बाबा का मंदिर

बिहार के भभुआ जिले के तहत अघौरा जाने वाले रास्ते में मुख्य सड़क के किनारे बीड़ी वाले बाबा का मंदिर है, जहां लोग चढ़ावे के रूप में बीड़ी चढ़ाते हैं और बीड़ी पीते भी हैं.

पूछने पर पता चला कि यहां एक बाबा थे जो बीड़ी पीने के शौकीन थे. उन की मौत हो जाने के बाद लोगों ने खुद ही मंदिर बनवाया और बीड़ी चढ़ाना शुरू कर दिया.

भूतना मेला

बिहार के औरंगाबाद जिले के तहत अमजेर शरीफ, मनोरा शरीफ, शिहुली वगैरह जगहों पर भूतना मेला लगता है, जहां भूतप्रेत से तथाकथित ग्रसित लोग अंधभक्ति का शिकार हो कर लोग आते हैं. इन मेलों में ज्यादातर वैसे लोग आते हैं जिन के कोई औलाद नहीं होती है.

इन मेलों में ज्यादातर हिस्टीरिया रोग से पीडि़त लोग आते हैं. मुरगे और बकरे की यहां पर कुरबानी दी जाती है.

इस मजार पर जमीन से संबंधित विवाद है और स्थानीय जमीन मालिक और सरकार के बीच मुकदमा चल रहा है. सब से बड़ी बात यह है कि साल में यहां पर 2 बार भूतना मेला लगता है. लाखों रुपए की इस से आमदनी है. अभी सरकार के अधीन है. इस का फायदा सरकार भी उठा रही है.

सिगरेट वाले बाबा

इंदौर में एक ऐसा मंदिर है, जहां सिगरेट चढ़ाई जाती है. इस मंदिर में आने वाला हर श्रद्धालु हारफूल, प्रसाद और अगरबती के साथ सिगरेट भी लाता है.

सिगरेट के हर डब्बे पर लिखा हुआ रहता है कि सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, वहीं इस मंदिर में लोग सिगरेट चढ़ा कर एक धार्मिक और सामाजिक मान्यता दे रहे हैं, जो गलत है.

लंबे अंग वाले इलोजी

राजस्थान में इलोजी का मंदिर है. यहां कोई मूंछ रखे हुए देवता हैं. लंबा अंग, नंगधड़ंग. औरतमर्दों दोनों में प्रिय. मर्द इन के जैसा अंग चाहते हैं, काम शक्ति चाहते हैं और बेशक औरतें भी. दूल्हा नईनवेली दुलहन को अपने साथ ले जा कर दर्शन करता है. दुलहन इस का आलिंगन करती है. ब्याहता औरतें भी उस के अंग को छूती हैं और बेटे की प्राप्ति की कामना करती हैं.

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इस मंदिर में आने वाले लोगों को अंधविश्वासी कहा जाए या फिर और कुछ? समाज में कुछ इस तरह की परंपराएं चल पड़ती हैं कि पीढ़ी दर पीढ़ी लोग उन्हें मानते चले आ रहे हैं. लोग वैज्ञानिक आधार पर कोई बात समझने के लिए तैयार नहीं होते हैं. लोग यही बोलते देखे जाते हैं कि बापदादा करते थे, हम लोग भी कर रहे हैं.

वीजा वाले हनुमानजी

अहमदाबाद के इस चमत्कारिक हनुमानजी के मंदिर में लोग विदेश जाने के लिए भगवान से वीजा दिलाने की प्रार्थना करते हैं. मान्यताओं में आस्था रखने वाले लोग बड़ी तादाद में यहां आते हैं और कनाडा, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, यूरोप जाने के लिए भगवान से वीजा मांगते हैं.

सोचने वाली बात है कि अगर हम पासपोर्ट नहीं बनवाएंगे, वीजा के लिए कोई कोशिश नहीं करेंगे तो क्या इस मंदिर में माथा टेकने से वीजा मिल जाएगा? सारी कोशिश करने के बाद यहां अर्जी लगाते हैं और वीजा मिल जाता है तो अपनी मेहनत पर विश्वास न कर के इस मंदिर पर विश्वास करते हैं और दूसरे को भी बता कर इस ढकोसले को बढ़ावा देते हैं.

कुतिया महारानी मां मंदिर

बुंदेलखंड क्षेत्र के झांसी जनपद में रेवन और ककवारा गांवों के बीच लिंक रोड पर कुतिया महारानी मां का एक मंदिर है, जिस में काली कुतिया की मूर्ति है.

झांसी के मऊरानीपुर के गांव रेवन और ककवारा के बीच 3 किलोमीटर का फासला है. इन दोनों गांवों को आपस में जोड़ने वाले लिंक रोड के बीच सड़क किनारे एक चबूतरा बना है. इस चबूतरे पर एक छोटा सा मंदिरनुमा मठ बना हुआ है. इस मंदिर में काली कुतिया की मूर्ति है. मूर्ति के बाहर लोहे की जालियां लगाई गई हैं, ताकि कोई इस मूर्ति को नुकसान न पहुंचा सके.

जिंदा कुतिया को तो दरवाजे पर से मार कर भगा देते हैं, लेकिन घोर अंधविश्वासी लोग कुतिया महारानी की पूजा करते हैं.

बुलेट बाबा का मंदिर

जयपुर, राजस्थान के पाली इलाके में एक ऐसा मंदिर है जहां भगवान नहीं बल्कि बुलेट की पूजा होती है. लड्डुओं की जगह शराब चढ़ाई जाती है. लोगों का मानना है कि ऐसा करने से हादसा नहीं होता है और यहां के बाबा उन की हिफाजत करते हैं.

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सती माता के चौरे

वैसे तो पूरे देश में, लेकिन खास राजस्थान में आप को बहुत से मंदिर मिल जाएंगे, सती माता के मंदिर पर बाकायदा मेले लगते हैं. सुना तो यही है कि बेचारी औरत को जबरदस्ती नशा पिलाया जाता था और फिर भीड़ उसे ठेलतीठालती पति की चिता तक ले जाती थी. उस की चीखें ढोलनगाड़ों के शोर में दबा दी जाती थीं और जिंदा जला दिया जाता था. फिर शुरू होती थी उस की पूजा.

राजस्थान में झुंझुनूं नामक जगह पर हर साल सती माता का बहुत बड़ा मंदिर है, मेला लगता है. इन सती मंदिरों का महिमामंडन करना घोर अनर्थ है. किसी न किसी रूप में इन मंदिरों में सती की पूजा कर हम सती प्रथा को बढ़ावा दे रहे हैं. इन मंदिरों पर सरकार को तत्काल रोक लगानी चाहिए.

डकैत ददुआ का मंदिर

पाठा की सरजमीं पर तकरीबन 40 साल से भी ज्यादा लंबे समय तक आतंक का दूसरा नाम रहे दस्यु सम्राट ददुआ की मूर्ति का अनावरण धाता, फतेहपुर में कर दिया गया. अब वे मरणोपरांत भगवान की श्रेणी में आ गए हैं, जबकि अपने संपूर्ण जीवनकाल में ददुआ का दूसरा मतलब दहशत ही था.

कितना हास्यास्पद लगता है एक डकैत की पूजा करना. क्या हमारे आदर्श यही डकैत थे?

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सियासी समोसे से लालू गायब

इस के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के जेल में बंद होने की वजह से पार्टी बिखरने के कगार पर है और लालू प्रसाद यादव के दोनों लाड़ले उन की सियासी विरासत को संभालने में फिलहाल तो नाकाम साबित हो रहे हैं.

कभी बिहार की राजनीति की धुरी रहे लालू प्रसाद यादव जानते हैं कि साल 2020 में होने वाला बिहार विधानसभा चुनाव उन के लिए आरपार की लड़ाई साबित होगा. इस के लिए वे अपनी पार्टी को नई सजधज के साथ उतारने की कवायद में जुट गए हैं, पर उन की सब से बड़ी लाचारी है कि वे रांची जेल में बंद हैं. इतना ही नहीं, चारा घोटाला

में कुसूरवार ठहराए जाने की वजह से वे साल 2024 तक चुनाव नहीं लड़ सकते हैं.

लालू प्रसाद यादव की गैरमौजूदगी में उन के लाड़ले बेटे तेजस्वी यादव की अगुआई में लोकसभा 2019 का चुनाव लड़ा गया और वे पूरी तरह से नाकाम रहे.

इस लोकसभा चुनाव में लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली. लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती भी पाटलिपुत्र से चुनाव हार गईं.

साल 1997 में राष्ट्रीय जनता दल के बनने के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि लोकसभा चुनाव में इस पार्टी की मौजूदगी जीरो है.

साल 1997 में नई पार्टी राजद बनाने के बाद लालू प्रसाद यादव ने पूरे दमखम के साथ 1998 का लोकसभा चुनाव लड़ा था, जिस में पार्टी को 17 सीटें हासिल हुई थीं. उस के बाद से लोकसभा में राजद की लगातार दमदार मौजूदगी री है. फिलहाल तो लालू प्रसाद यादव के लिए राहत की बात यह है कि 243 सीट वाली बिहार विधानसभा में उन की पार्टी राजद के 81 विधायक हैं और राजद ही विधानसभा में सब से बड़ी पार्टी है. जद (यू) के 71, भाजपा के 53 और कांग्रेस के 27 विधायक हैं.

विधानसभा में सब से बड़ी पार्टी होने के बाद भी पिछले लोकसभा चुनाव में राजद का खाता नहीं खुल सका. इस की सब से बड़ी वजह बिहार के सियासी अखाड़े से लालू यादव की गैरमौजूदगी होना रही.

बिहार में ज्यादातर नेताओं के बेटे अपने पिता लालू यादव की सियासी विरासत को संभालने और बाप जैसा रसूख पाने में नाकाम ही रहे हैं.

बिहार के पहले मुख्यमंत्री रहे श्रीकृष्ण सिंह के बेटे स्वराज सिंह और शिवशंकर सिंह विधायक तो बने, पर अपने पिता के कद को हासिल नहीं कर सके.

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समाजवादी नेता और राज्य के धाकड़ मुख्यमंत्री रहे कर्पूरी ठाकुर के बेटे रामनाथ ठाकुर कई बार विधायक और मंत्री तो बने, पर नेतागीरी के मामले में पिता जैसी ऊंचाई नहीं पा सके.

मुख्यमंत्री रहे चंद्रशेखर सिंह की बीवी तो सांसद बनीं, पर उन के बेटे राजनीति में कुछ नहीं कर सके. रेल मंत्री रहे ललित नारायण मिश्रा के बेटे विजय कुमार मिश्रा भी अपने पिता के बराबर की लकीर भी नहीं खींच सके.

भागवत झा आजाद के बेटे कीर्ति आजाद और जगदेव प्रसाद के बेटे नागमणि आज तक पिता के नाम पर ही राजनीति कर रहे हैं. वे अपना खास वजूद बनाने में नाकाम ही रहे हैं.

कांग्रेस के दिग्गज नेता राजेंद्र सिंह के बेटे समीर सिंह और बुद्धदेव सिंह के बेटे कुणाल सिंह ने कई बार विधानसभा का चुनाव लड़ा, पर जीत नहीं पाए. ‘शेरे बिहार’ कहे जाने वाले रामलखन सिंह यादव के बेटे प्रकाश चंद्र पिता जैसी हैसियत पाने को तरसते ही रह गए.

लालू प्रसाद यादव की बात करें तो 5 जुलाई, 1997 को जनता दल से अलग हो कर उन्होंने नई पार्टी राष्ट्रीय जनता दल बनाई थी. उस के बाद साल 2005 तक बिहार पर राजद ने राज किया था. वे 2 दशकों तक बिहार में सरकार और सियासत की धुरी रहे, ऐसे में उन का सत्ता से दूर होना पार्टी के लिए परेशानी का सबब बन गया है.

गौरतलब है कि जनवरी, 1996 में 950 करोड़ रुपए के चारा घोटाले का भंडाफोड़ हुआ था. इस घोटाले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा गया था. 17 साल तक की जांच और अदालती सुनवाई के बाद लालू प्रसाद यादव समेत पहले के मुख्यमंत्री और जद (यू) नेता जगन्नाथ मिश्र जो अब नहीं रहे, जद (यू) सांसद जगदीश शर्मा, राजद विधायक आरके राणा समेत 32 आरोपियों को सजा मिली है.

सत्ता और लगातार मिलती कामयाबी ने लालू प्रसाद यादव को बौरा भी दिया था. उन के बदलते तेवरों की वजह से उन के कई भरोसेमंद साथी एकएक कर उन का साथ छोड़ने लगे.

पहली बार उन की पार्टी राजद को सब से बड़ा झटका फरवरी, 2014 में लगा था, जब उन की पार्टी के 13 विधायकों ने उन्हें ‘बायबाय’ कर दिया था और सब उन के प्रतिद्वंद्वी रहे नीतीश कुमार के खेमे में जा बैठे थे.

सम्राट चौधरी, राघवेंद्र प्रताप सिंह, ललित यादव, रामलषण राम, अनिरुद्ध कुमार, जावेद अंसारी जैसे कद्दावर नेताओं ने लालू प्रसाद यादव का साथ छोड़ दिया था. इन नेताओं का आरोप था कि लालू प्रसाद यादव ने राजद को कांग्रेस की बी टीम बना कर रख दिया है.

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इस झटके से लालू प्रसाद यादव उबर भी नहीं पाए थे कि उन के सब से भरोसेमंद सिपहसालार और आंखकान माने जाने वाले रामकृपाल यादव ने उन की ‘लालटेन’ छोड़ कर भाजपा का ‘कमल’ थाम लिया था. उस के बाद दानापुर के कद्दावर नेता श्याम रजक भी उन का साथ छोड़ नीतीश कुमार की पार्टी में शामिल हो गए थे.

लालू प्रसाद यादव की सब से बड़ी कमजोरी यह रही है कि पार्टी के ऊंचे पदों पर वे अपने परिवार के लोगों को ही बिठाना चाहते हैं.

साल 1997 में जब चारा घोटाले में मामले में लालू यादव पहली बार जेल गए थे तो अपनी पत्नी राबड़ी देवी को रसोईघर से निकाल कर मुख्यमंत्री की कुरसी पर बिठा दिया था. उस के बाद वे जेल से ही राजपाट चलाते रहे.

अब कुछ महीने पहले जब चारा घोटाले पर अंतिम फैसला आने की सुगबुगाहट चालू हुई तो पार्टी के बड़े नेताओं के बजाय अपने बेटे तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव को आगे ला कर खड़ा कर दिया.

पिछले लोकसभा चुनाव में भी पाटलिपुत्र सीट से अपनी बड़ी बेटी मीसा भारती को चुनाव मैदान में उतारा था और उस बाद भी वे चुनाव हार गईं.

पटना यूनिवर्सिटी के प्रोफैसर राजीव रंजन कहते हैं कि बिहार की राजनीति में अब लालू प्रसाद यादव को फिर जीरो से शुरुआत करने की जरूरत होगी.

साल 1990 के विधानसभा चुनाव के समय जन्म लेने वाले बच्चे आज वोटर बन चुके हैं और वे अपने कैरियर के साथ नए बिहार का सपना भी देखबुन रहे हैं. नीतीश कुमार के 19 सालों के काम के सामने सामाजिक न्याय के मसीहा लालू प्रसाद यादव कमजोर नजर आने लगे हैं.

बदलते बिहार और नौजवान वोटरों के मनमिजाज को लालू प्रसाद यादव और उन के लाल अब तक भांप नहीं सके हैं. वे अभी भी सामाजिक न्याय, आरक्षण और लालटेन जैसे चुक गए नारों की ही रट लगाते रहते हैं. समय के साथ उन्होंने न खुद की सोच को बदला और न ही वे नए सियासी नारे ही पढ़ पाए हैं.

गौरतलब है कि बिहार में अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित 38 सीटों के अलावा 60 ऐसी विधानसभा सीटें भी हैं जहां दलित निर्णायक स्थिति में हैं, क्योंकि वहां उन की आबादी 16 से 30 फीसदी है.

राज्य के 38 जिलों व 40 लोकसभा सीटों और 243 विधानसभा सीटों पर जीत उसी की होती है, जो बिहार की कुल 119 जातियों में से ज्यादा को अपने पक्ष में गोलबंद करने में कामयाब हो जाता है.

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लालू प्रसाद यादव माय समीकरण (मुसलिमयादव) के बूते बिना कुछ काम किए 15 सालों तक बिहार पर राज करते रहे थे. नीतीश कुमार बारबार तरक्की का नारा लगाते रहे हैं, पर चुनाव के समय उन के इस नारे पर जातिवाद ही हावी होता रहा है. टिकट के बंटवारे में हर दल यही देखता है कि उन का उम्मीदवार किस जाति का है और जिस क्षेत्र से वह चुनाव लड़ रहा है, वहां कौनकौन सी जातियों के वोट उसे मिल सकेंगे. बिहार की कुल आबादी 10 करोड़, 50 लाख है और 6 करोड़, 21 लाख वोटर हैं. इन में 27 फीसदी  अतिपिछड़ी जातियां, 22.5 फीसदी पिछड़ी जातियां, 17 फीसदी महादलित, 16.5 फीसदी मुसलिम, 13 फीसदी अगड़ी जातियां और 4 फीसदी अन्य जातियां हैं.

वंचित मेहनतकश मोरचा के अध्यक्ष किशोरी दास कहते हैं कि जाति के नाम पर पिछड़ों और दलितों के केवल वोट ही लिए गए हैं, उन्हें आज तक किसी भी सियासी दल या सरकार ने कुछ नहीं दिया.

बिहार राज्य की राजनीति सामाजिक समीकरण से नहीं, बल्कि जातीय समीकरण से चलती रही है. हर दल का जातीय समीकरण है. कांग्रेस सवर्ण, मुसलिम और दलित वोट को गोलबंद करने में लगी रही है तो लालू प्रसाद यादव मुसलिमों और यादवों के बूते राजनीति चमकाते रहे हैं.

नीतीश कुमार कुर्मी, कुशवाहा, दलित और महादलित के वोट पाते रहे हैं, वहीं रामविलास पासवान दुसाध और महादलितों की बात करते रहे हैं. भाजपा अगड़ी जातियों के साथ वैश्यों और पिछड़ी जातियों को लुभाती रही है.

लालू प्रसाद यादव की ही बात करें तो वे भी हमेशा से पोंगापंथ के जाल में उलझे रहे हैं. पिछड़ों और दलितों को आवाज देने का दावा करने वाले लालू प्रसाद यादव भी चुनाव में जीत के लिए जनता से ज्यादा मंदिर और मजार पर यकीन करते रहे हैं.

चारा घोटाला में फंसने और उस के बाद उस मामले में आरोप साबित होने के बाद से लालू प्रसाद यादव अपनी जिंदगी की सब से बड़ी सियासी और कानूनी मुश्किलों से जूझते रहे हैं. वे चारा घोटाला मामले में जेल में बंद हैं और उन की पार्टी का वजूद खतरे में है.

लालू प्रसाद यादव की सब से बड़ी गलती यही रही है कि उन्होंने अपनी पार्टी में दूसरे नेताओं को ताकतवर नहीं बनाया, ताकि पार्टी हमेशा उन की मुट्ठी में रहे. अपनी पार्टी के एक से 10वें नंबर तक केवल लालू प्रसाद यादव ही रहे. अब जब वे जेल गए हैं तो उन्हें अपनी इस गलती का अहसास हो रहा है, पर अब कुछ किया नहीं जा सकता है.

राष्ट्रीय जनता दल में रघुवंश प्रसाद सिंह, जगदानंद सिंह, अब्दुलबारी सिद्दीकी जैसे कई धाकड़ और असरदार नेता हैं, पर लालू प्रसाद यादव ने कभी उन्हें आगे बढ़ने नहीं दिया. उन की हालत ऐसी कर के रखी कि लालू प्रसाद यादव के बगैर वे बेजार साबित हों. अब जो हालात पैदा हुए हैं, उन में पार्टी के विधायकों को एकजुट रखना सब से बड़ी चुनौती है.

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लालू प्रसाद यादव के स्टाइल की ठेठ गंवई सियासत की कमी बिहार को खल रही है. बिना किसी लागलपट के अपनी धुन में अपने मन की बात और भड़ास मौके बे मौके कह देने वाले लालू प्रसाद यादव के बगैर बिहार का राजनीतिक गलियारा सूना पड़ गया है.

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव अकसर हंसीमजाक में कहते थे कि जब तक समोसे में आलू रहेगा, तब तक बिहार की राजनीति में लालू रहेगा. आज बिहार के सियासी समोसे से गायब लालू प्रसाद यादव झारखंड की जेल में बंद हैं, जिस से निश्चय ही पटना से ले कर दिल्ली तक के सियासी समोसे का मजा किरकिरा हो चुका है.

हर्ष ना था हर्षिता के ससुराल में: भाग 1

उस दिन जुलाई 2019 की 6 तारीख थी. सुबह के 10 बज चुके थे. कानपुर शहर के जानेमाने कागज व्यापारी पदम अग्रवाल अपनी 80 फुटा रोड स्थित दुकान पर कारोबार में व्यस्त थे. कागज खरीदने वालों और कर्मचारियों की चहलपहल शुरू हो गई थी. तभी 11 बज कर 21 मिनट पर पदम अग्रवाल के मोबाइल पर काल आई. उन्होंने मोबाइल स्क्रीन पर नजर डाली तो काल उन की बेटी हर्षिता की थी. काल रिसीव कर पदम अग्रवाल ने पूछा, ‘‘कैसी हो बेटी? ससुराल में सब ठीक तो है?’’

हर्षिता रुंधे गले से बोली, ‘‘पापाजी, यहां कुछ भी ठीक नहीं है. सासू मां झगड़ा कर रही हैं और मुझे प्रताडि़त कर रही हैं. उन्होंने मेरे गाल पर कई थप्पड़ मारे और झाडू से भी पीटा. पापा, मुझे ऐसा लग रहा है कि ये लोग मुझे जान से मारना चाहते हैं. इस षड्यंत्र में मेरी ननद परिधि और उस का पति आशीष भी शामिल हैं. सासू मां ने मुझ से कार की चाबी छीन ली है और दरवाजा लाक कर दिया है. पापा, आप जल्दी से मेरी ससुराल आ जाइए.’’

बेटी हर्षिता की व्यथा सुन कर पदम अग्रवाल का मन व्यथित हो उठा, गुस्सा भी आया. उन्होंने तुरंत अपने दामाद उत्कर्ष को फोन मिलाया, लेकिन उस का फोन व्यस्त था, बात नहीं हो सकी. तब उन्होंने अपने समधी सुशील अग्रवाल को फोन कर के हर्षिता के साथ उस की सास रानू अग्रवाल द्वारा मारपीट की जानकारी दी और मध्यस्तता की बात कही.

दुकान पर चूंकि भीड़ थी. इसलिए पदम अग्रवाल को कुछ देर रुकना पड़ा. अभी वह हर्षिता की ससुराल एलेनगंज स्थित एल्डोराडो अपार्टमेंट जाने की तैयारी कर ही रहे थे कि 12 बज कर 42 मिनट पर उन के मोबाइल पर पुन: काल आई. इस बार काल उन के समधी सुशील अग्रवाल की थी.

उन्होंने काल रिसीव की तो सुशील कांपती आवाज में बोले, ‘‘पदम जी, आप जल्दी घर आ जाइए.’’ पदम उन से कुछ पूछते, उस के पहले ही उन्होंने फोन का स्विच औफ कर दिया.

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समधी की बात सुन कर पदम अग्रवाल बेचैन हो गए. उन के मन में विभिन्न आशंकाएं उमड़नेघुमड़ने लगीं. वह कार से पहले घर  पहुंचे फिर वहां से पत्नी संतोष व बेटी गीतिका को साथ ले कर हर्षिता की ससुराल के लिए निकल पड़े. हर्षिता की ससुराल कानपुर शहर के कोहना थाने के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र एलेनगंज में थी. सुशील अग्रवाल का परिवार एलेनगंज के एल्डोराडो अपार्टमेंट की सातवीं मंजिल के फ्लैट नं. 706 में रहता था.

क्षतविक्षत मिला हर्षिता का शव

पदम अग्रवाल सर्वोदय नगर में रहते थे. सर्वोदय नगर से हर्षिता की ससुराल की दूरी 5 कि.मी. से भी कम थी. उन्हें कार से वहां पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगा. वह कार से उतर कर आगे बढे़ तो वहां का दृश्य देख कर वह अवाक रह गए.

अपार्टमेंट के बाहर फर्श पर उन की बेटी हर्षिता का क्षतविक्षत शव पड़ा था और सामने गैलरी में हर्षिता का पति उत्कर्ष, सास रानू, ससुर सुशील तथा ननद परिधि मुंह झुकाए खडे़ थे. पदम के पूछने पर उन लोगों ने बताया कि हर्षिता ने सातवीं मंजिल की खिड़की से कूद कर जान दे दी.

उन लोगों की बात सुन कर पदम अग्रवाल गुस्से से बोले, ‘‘मेरी बेटी हर्षिता ने स्वयं कूद कर जान नहीं दी. तुम लोगों ने दहेज के लिए उसे सुनियोजित ढंग से मार डाला है. मैं तुम लोगों को किसी भी हालत में नहीं छोड़ूंगा.

इसी के साथ उन्होंने मोबाइल फोन द्वारा थाना कोहना पुलिस को घटना की सूचना दे दी. उन्होंने अपने परिवार तथा सगे संबंधियों को भी घटना के बारे में बता दिया. खबर मिलते ही पदम के भाई मदन लाल, मनीष अग्रवाल, भतीजा गोपाल और साला मनोज घटनास्थल पर आ गए.

हर्षिता का क्षतविक्षत शव देख कर मां संतोष दहाड़ मार कर रोने लगी थीं. रोतेरोते वह अर्धमूर्छित हो गईं. परिवार की महिलाओं ने उन्हें संभाला और मुंह पर पानी के छींटे मार कर होश में लाईं. गीतिका भी छोटी बहन की लाश देख कर फफक रही थी. रोतेरोते वह मां को भी संभाल रही थी. मां बेटी का करूण रुदन देख कर परिवार की अन्य महिलाओं की आंखों में भी अश्रुधारा बहने लगी.

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इधर जैसे ही कोहना थानाप्रभारी प्रभुकांत को हर्षिता की मौत की सूचना मिली, वह पुलिस टीम के साथ एल्डोराडो अपार्टमेंट आ गए. आते ही उन्होंने घटनास्थल को कवर कर दिया, ताकि कोई सबूतों से छेड़छाड़ न कर सके. मामला चूूंकि 2 धनाढ्य परिवारों का था. इसलिए उन्होंने तत्काल घटना की खबर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दे दी.

खबर पाते ही एडीजी प्रेम प्रकाश, आईजी मोहित अग्रवाल, एसएसपी अनंत देव तिवारी, सीओ (कर्नलगंज) जनार्दन दुबे और सीओ (स्वरूप नगर) अजीत सिंह चौहान घटनास्थल पर आ गए. पुलिस अधिकारियों ने फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया. साथ ही उपद्रव की आशंका से थाना काकादेव, स्वरूप नगर तथा कर्नलगंज से पुलिस फोर्स मंगवा ली.

पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तो वह भी दहल उठे. हर्षिता  अपार्टमेंट की सातवीं मंजिल की खिड़की से गिरी थी. अधिक ऊंचाई से गिरने के कारण उस के सिर की हड्डियां चकनाचूर हो गई थीं और चेहरा विकृत हो गया था. शरीर के अन्य हिस्सों की भी हड्डियां टूट गई थीं.

हर्षिता का रंग गोरा था और उस की उम्र 27 वर्ष के आसपास थी. पुलिस अधिकारियों ने फ्लैट नं. 706 की किचन के बराबर वाली उस खिड़की का भी मुआयना किया जहां से हर्षिता कूदी थी या फिर उसे फेंका गया था.

फ्लैट से पुलिस को कोई ऐसी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली जिस से साबित होता कि हर्षिता की हत्या की गई थी. फोरैंसिक टीम ने भी एक घंटे तक जांच कर के साक्ष्य जुटाए. निरीक्षण के बाद पुलिस अधिकारियों ने हर्षिता के शव को पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपत राय चिकित्सालय भिजवा दिया.

घटनास्थल पर अन्य लोगों के अलावा हर्षिता का पति उत्कर्ष तथा उस के माता पिता मौजूद थे. पुलिस अधिकारियों ने सब से पहले मृतका के पति उत्कर्ष से पूछताछ की. उसने बताया कि वह हर्षिता से बहुत प्यार करता था, लेकिन उस के जाने से सब कुछ खत्म हो गया है. शादी के बाद वह दोनों बेहद खुश थे. मम्मीपापा भी उसे काफी प्यार करते थे. उसे अपना फोटोग्राफी का व्यवसाय शुरू कराने वाले थे, आनेजाने के लिए उसे कार भी दे रखी थी. कहीं आनेजाने पर कोई रोकटोक नहीं थी.

28 मई से 16 जून 2019 तक वे दोनों अमेरिका में रहे, तब भी भविष्य को ले कर सपने बुने लेकिन क्या पता था कि सारे सपने टूट जाएंगे. आज मैं और पापा फैक्ट्री में थे तभी मम्मी का फोन आया. हम लोग तुरंत घर आए. हर्षिता खिड़की से नीचे कैसे गिरी उसे पता नहीं है.

हर्षिता के ससुर सुशील कुमार अग्रवाल ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि उन्हें अपनी फैक्ट्री मंधना से तांतियागंज में शिफ्ट करनी थी. माल ढुलाई के लिए वह आज सुबह 9 बजे ही फैक्ट्री पहुंच गए थे. उस समय घर में सबकुछ ठीकठाक था.

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दोपहर 12.35 बजे पत्नी रानू ने फोन कर बताया कि बहू हर्षिता अपार्टमेंट की खिड़की से गिर गई है. यह पता चलते ही उन्होंने हर्षिता के पिता को फोन किया और फौरन घर आने को कहा. फिर बेटे उत्कर्ष को साथ ले कर घर के लिए चल दिए. घर पहुंचे तो वहां बहू हर्षिता की लाश नीचे पड़ी मिली.

मृतका हर्षिता की सास रानू अग्रवाल ने बताया कि सुबह 9 बजे के लगभग उत्कर्ष अपने पापा के साथ मंधना स्थित फैक्ट्री चला गया था. बरसात थमने के बाद नौकरानी आ गई. उस के आने के बाद वह एक जरूरी कुरियर करने जाने लगी. उस वक्त बहू हर्षिता सफाई कर रही थी. शायद वह खिड़की के पास कबूतरों द्वारा फैलाई गई गंदगी को साफ कर रही थी.

नौकरानी ने खोला भेद

वह कुरियर का पैकेट ले कर फ्लैट के दरवाजे के पास ही पहुंची थी कि नौकरानी के चिल्लाने की आवाज आई. वह वहां पहुंची तो देखा कि हर्षिता खिड़की से नीचे गिर गई है. नौकरानी ने उसे खींचने की कोशिश की लेकिन वह उसे बचा नहीं पाई. इस पर उस ने शेर मचाया और नीचे जा कर देखा. बहू की मौत हो चुकी थी. फिर उस ने जानकारी फोन पर पति को दी.

फ्लैट पर नौकरानी शकुंतला मौजूद थी. पुलिस अधिकारियों ने उस से पूछताछ की. उस ने मालकिन रानू अग्रवाल के झूठ का परदाफाश कर दिया और सारी सच्चाई बता दी. शकुंतला ने बताया कि वह सुबह साढे़ 9 बजे फ्लैट पर पहुंची थी.

उस समय भैया (उत्कर्ष) और उन के पापा (सुशील) फैक्ट्री जा चुके  थे. भाभी (हर्षिता) और मालकिन रानू ही फ्लैट में मौजूद थी. किसी बात पर उन में विवाद हो रहा था.

मालकिन भाभी से कह रही थीं कि नौकरानी को 8 हजार रुपए दिए जाते हैं और तुम कमरे में पड़ी रहती हो. घर का काम नहीं कर सकतीं. इस के बाद दोनों में नौकझोंक होने लगी. इसी नौकझोंक में मालकिन ने भाभी को 2-3 थप्पड़ जड ़दिए और फिर झाडू उठा कर मारने लगीं. तब भाभी कार की चाबी ले कर बाहर जाने लगीं. पर मालकिन गेट पर खड़ी हो गईं.

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मेनगेट बंद कर ताला लगा लिया और चाबी अपने पास रख ली. गुस्से में भाभी ने सिर दीवार से टकराने की कोशिश की तो मैं ने मना किया. फिर वह खिड़की से नीचे कूदने लगीं तो मैं ने उन का हाथ पकड़ कर खींच लिया और कमरे में ले आई.

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

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बदहाल सरकारी अस्पताल

गांवदेहात के तमाम इलाकों से राजधानी पटना तक के सरकारी अस्पतालों में इलाज का सही इंतजाम नहीं है. जिला अस्पताल या ब्लौक अस्पताल तो इन गरीबों को बड़े अस्पतालों में रैफर कर देते हैं, जबकि इन के पास राजधानी के अस्पतालों में जाने के लिए भाड़ा तक नहीं होता. मजबूर हो कर ऐसे लोग सूद पर या जेवर गिरवी रख कर इन सरकारी अस्पतालों में इलाज कराते हैं.

औरंगाबाद जिले के कंचननगर के बाशिंदे 25 साला जयप्रकाश का पूरा शरीर लुंज हो गया था. इलाज के लिए आसपड़ोस के लोगों ने चंदा जमा कर उसे एम्स अस्पताल, दिल्ली भिजवाया. एक महीने तक जांच होने पर भी बीमारी का पता नहीं चल सका और जयप्रकाश लौट कर अपने गांव चला आया.

अमीर तबके के लोग तो देशविदेश तक में अपना इलाज करा रहे हैं, पर गरीबों के लिए सरकारी इलाज भी मजाक बन कर रह गया है. सरकारी अस्पतालों में जचगी के लिए आई औरतों को कोई न कोई बहाना बना कर प्राइवेट अस्पतालों में आपरेशन से बच्चा पैदा करने के लिए मजबूर किया जाता है.

सरकारी अस्पताल के बहुत से मुलाजिमों का इन प्राइवेट अस्पतालों से कमीशन बंधा हुआ है और यह खेल पूरे बिहार में बिना डर के खुलेआम चल रहा है.

गरीबों का इलाज

अगर अमीर लोग भी सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए जाते हैं तो उन का खासा खयाल रखा जाता है. पटना पीएमसीएच जैसे अस्पताल में भी जिन लोगों की पैरवी होती है, उन पर खासा ध्यान दिया जाता है. गरीबों की न तो कोई पैरवी होती है, न ही वे ज्यादा पैसा खर्च कर पाते हैं.

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जांच के नाम पर प्राइवेट और सरकारी अस्पताल के डाक्टरों का कमीशन बंधा हुआ है. जिस जांच का कोई मतलब नहीं होता है, वह भी कमीशन के फेर में कराई जाती है.

प्रदेश का सूरतेहाल

100 कुपोषित जिलों में से 18 जिले बिहार के हैं. इन जिलों में गोपालगंज, औरंगाबाद, मुंगेर, नवादा, बांका, जमुई, शेखपुरा, पश्चिमी चंपारण, दरभंगा, सारण, रोहतास, अररिया, सहरसा, नालंदा, सिवान, मधेपुरा, भागलपुर और पूर्वी चंपारण शामिल हैं.

11 जिलों में औसत से कम लंबाई के बच्चे हैं. उन जिलों में जमुई, मुंगेर, पटना, बक्सर, दरभंगा, खगडि़या, बेगूसराय, अररिया, रोहतास, मुजफ्फरपुर और सहरसा में ठिगनेपन की समस्या है.

सेहत का मतलब शारीरिक और मानसिक रूप से सेहतमंद होना है, लेकिन दोनों लैवलों पर बिहार की हालत ज्यादा चिंताजनक है. गरीबों की जबान पर एक नाम है पटना का पीएमसीएच सरकारी अस्पताल. बिहार के किसी कोने में भी गरीबों को अगर कोई गंभीर बीमारी होती है तो लोग सलाह देते हैं कि पटना पीएमसीएच में चले जाओ. लेकिन बहुत से मरीज यहां आ कर भी बुरी तरह फंस जाते हैं.

इस अस्पताल में बिहार के कोनेकोने से मरीज आते हैं. उन्हें यह यकीन होता है कि यहां अच्छा इलाज होगा, लेकिन यहां भी घोर बदइंतजामी है.

इस अस्पताल में 1,675 बिस्तर हैं लेकिन मरीजों की तादाद दोगुनी है. इमर्जैंसी में 100 से बढ़ा कर 200 बिस्तर किए गए हैं लेकिन स्टाफ की तादाद नहीं बढ़ाई गई है. ओपीडी में तकरीबन रोजाना 1,500 से ले कर 2,500 तक मरीज आते हैं.

इस अस्पताल में 1,258 नर्सों की जगह 1,018 नर्स बहाल हैं. 27 ओटी असिस्टैंट में से महज 19 ही बहाल हैं. 28 ड्रैसर में से महज 11 ही बहाल हैं. 37 फार्मासिस्ट की जगह 31 हैं. 21 लैब टैक्निशियन की जगह 14 हैं.

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ब्लड बैंक में 6 मैडिकल अफसरों में से महज 2 ही बहाल हैं. सैंट्रल इमर्जैंसी के लिए 25 डाक्टरों का कैडर बनना था जो आज तक नहीं बना है.

मर्द डाक्टरों से जचगी

बिहार के गांवदेहात के क्षेत्रों से ले कर शहर तक के सरकारी अस्पतालों में महिला डाक्टरों की कमी है. इस राज्य में 68 फीसदी महिला डाक्टरों के पद खाली हैं. स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के 533 फीसदी पद स्वीकृत हैं. इन में से महज 167 पद ही भरे गए हैं और 366 पद खाली हैं. संविदा पर नियुक्ति के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति ने 88 महिला डाक्टरों की नियुक्ति की जिस में से महज 48 लोगों ने योगदान किया.

बेगूसराय, जहानाबाद, वैशाली, कैमूर, सारण वगैरह जगहों के पीएचसी में मर्द डाक्टरों द्वारा एएनएम का सहारा ले कर जचगी कराने का सिलसिला जारी है. ऐसे डाक्टरों से औरतों का शरमाना लाजिमी है, पर मजबूरी में वे उन्हीं से जचगी करा रही हैं.

बिहार प्रदेश छात्र राजद के प्रभारी राहुल यादव का कहना है कि स्वास्थ्य सूचकांक के सर्वे में बिहार सब से निचले पायदान पर है. स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ने के बजाय इस राज्य में उस की लगातार गिरावट जारी है.

भारत और राज्य सरकार का सेहत से जुड़ा खर्च दुनिया में सब से कम है. बिहार देश में सब से कम खर्च करने वाला राज्य है जो राष्ट्रीय औसत से भी एकतिहाई कम खर्च करता है.

पिछले 12 सालों से सत्ता पर काबिज नीतीश सरकार का ध्यान शायद इस ओर नहीं है. ऐसा लगता है कि हमारा देश और राज्य दुनिया में ताल ठोंक कर परचम लहरा रहा है, लेकिन सचाई कुछ और ही है.

बिहार की सरकार स्वास्थ्य पर खर्च 450 रुपए प्रति व्यक्ति सालाना करती है, जबकि एक बार की डाक्टर की फीस 500 रुपए है. बिहार का हर दूसरा बच्चा कुपोषण का शिकार है.

सरकार की उदासीनता की वजह से स्वास्थ्य सुविधाएं इस राज्य के गरीबों की जेब पर भारी पड़ती जा रही हैं और इलाज के लिए लोग घरखेत तक बेचने के लिए मजबूर हैं.

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डाक्टर जब मरीज के परिवार वालों को बोलता है कि 4 लाख रुपए जमा करो या फिर मरीज को मरने के लिए अपने घर ले जाओ, उस समय उन पर क्या गुजरती है, यह सोच कर कलेजा मुंह को आ जाता है. कभीकभार ऐसा भी होता है कि जमीनजायदाद बेचने के बाद भी मरीज की मौत हो जाती है. उस के बाद उस का परिवार सड़क पर आ जाता है.

सच तो यह है कि तरक्की का जितना भी ढोल पीट लिया जाए लेकिन सेहत के मामले में बिहार पूरी तरह फिसड्डी साबित हो चुका है.

GARBA 2019: करना हो लड़कियों को इम्प्रेस, ट्राय करें T.V. के ‘कार्तिक’ के ये आउटफिट

स्टार प्लस के पौपुलर सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के ‘कार्तिक’ उर्फ मोहसीन खान अपनी एक्टिंग के चलते काफी पौपुलैरिटी गेन कर चुके हैं. मोहसीन के लुक्स ना सिर्फ लड़कियों में बल्कि लड़कों में भी काफी पौपुलर है. तो आज हम आपके सामने मोहसीन के कुछ ट्रेडिशनल लुक्स ले कर आए हैं जिसे आप ‘गरबा’ करते समय ट्राय कर सकते हैं. गरबा गुजरात का एक ऐसा लोकप्रिय डांस फोर्म है जो आज की तारीख में हर जगह पौपुलर हो रहा है. इस डांस फोर्म की सबसे अच्छी और खास बात है इसके कपड़े. तो आइए देखते हैं मोहसीन खान के कुछ चुनिंदा गरबा लुक्स.

प्रिंटेड इंडो-वेस्टर्न…

आज कल शर्ट से लेकर टी-शर्ट तक हर कोई प्रिंटेड पहनना चाहता है. प्रिंटेड शर्ट और टी-शर्ट के साथ अब प्रिंटेज इंडो-वेस्टर्न का भी फैशन काफी ट्रेंड में है. इस आउटफिट में मोहसीन खान ने डार्क ब्लू कलर का प्रिंटेड इंडो-वेस्टर्न पहन रखा है जो काफी सूट कर रहा है. आप भी ये लुक अपने गरबा प्रोग्राम में ट्राय कर सबको इम्प्रेस कर सकते हैं.

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कुर्ता पयजामा…

 

जब बात आती है डांस की तो कुर्ता पयजामा एक ऐसा आउटफिट है जो काफी कम्फरटेबल होता है फिर चाहे वो गरबा हो या भांगड़ा. इस लुक में मोहसीन खान ने ब्लू कलर के कुर्ते के साथ व्हाइट कलर का पयजामा और साथ ही यैल्लो प्रिंटेड बेस कोट पहना हुआ है. इस फोटो में मोहसीन अपनी ‘नायरा’ यानी शिवांगी जोशी के साथ खड़े नजर आ रहे हैं तो आगर आप भी अपनी चाहते हैं ‘कार्तिक-नायरा’ जैसा फेवरेट होना तो जरूर ट्राय करें ये लुक अपनी पार्टनर के साथ.

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डीसेंट लुक…

इस डीसेंट लुक में मोहसीन खान ने व्हाइट कलर का कुर्ता पयजामा और साथ ही उन्होनें ब्लू बेस कोट पहना हुआ है. इस आउटफिट में वे वाकई काफी सिम्पल और डीसेंट लग रहे हैं. अगर आप भी चाहते हैं अपनी सादगी से लोगों को इम्प्रेस करना तो जरूर ट्राय करें ये लुक क्योंकि खूबसूरती आखिर सादगी में ही है.

फुल प्रिंट बेस कोट…

मोहसीन का ये लुक सही में आपको ट्राय करने पर मजबूर कर देगा. इस लुक में उन्होनें ब्लू कलर के कुर्ते के साथ ब्लू कलर की ही सलवार पहनी हुई है और साथ ही उन्होनें प्रिंटेड बेस कोट पहना हुआ है जो काफी अच्छा लग रहा है. इस गरबे में आप इस लुक को ट्राय कर अपनी क्रश को आसानी से इम्प्रेस कर सकते हैं.

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