चांदनी सिंह की फिल्म ‘‘बंसी बिरजू’’ की शूटिंग का वीडियो वायरल

‘‘यूट्यूब’ की सनसनी और भोजपुरी फिल्मों की अभिनेत्री चांदनी सिंह जब भी कोई नयी फिल्म साईन करती हैं, वह अपने आप चर्चा का विषय बन जाता है. इन दिनों चांदनी सिंह अपनी नई फिल्म ‘‘बंसी बिरजू’’ को लेकर सोशल मीडिया पर छायी हुई हैं.

उन्होने इस फिल्म की शूटिंग भी शुरू कर दी है. इन दिनों सोशल मीडिया पर चांदनी सिंह का एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें वह परवेश लाल यादव के साथ डांस करती नजर आ रही हैं. चांदनी सिंह प्रोफेशनल डांसर की तरह अपने डांस मूव्स दिखा रही हैं, जो कि फिल्म ‘‘बंसी बिरजू’’ के एक गाने के फिल्मांकन के दौरान का है. इस गाने का नृत्य निर्देशन कानू मुखर्जी ने किया है. इस फिल्म का निर्माण वर्ल्ड वाईड के रत्नाकर कुमार कर रहे हैं, जबकि निर्देशक हैं अजय कुमार झा.

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इस फिल्म में चांदनी सिंह के साथ परवेशलाल यादव की जोड़ी है. फिल्म की शूटिंग इन दिनों नयी मुंबई के खारघर में चल रही है. चांदनी सिंह, रत्नाकर कुमार की जमकर तारीफ करते हुए कहती हैं- ‘‘वह हमेशा सेट पर कलाकारों का ध्यान रखते हैं.’’ इस फिल्म में परवेशलाल यादव, आदित्य ओझा, चांदनी सिंह की मुख्य भुमिका है.

बता दें, चांदनी सिंह ने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत भोजपुरी सुपरस्टार अरविंद अकेला कल्लू के साथ फिल्म मैं नागिन तू सपेरा से की थी और उन्होनें कई म्यूजिक वीडियो में भी बेहतरीन काम किया है और अपने टैलेंट के दम पर उन्होने बहुत ही जल्द अपनी खुद की काफी अच्छी फैन फौलोविंग हासिल कर ली है. इसी के साथ वे सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अपने फैंस के साथ फोटोज और वीडियो शेयर करती रहती हैं.

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‘‘किसिंग सीन करने से परहेज नहीं’’- करिश्मा शर्मा

‘प्यार का पंचनामा 2,’ ‘होटल मिलन’ व ‘फंसते फंसाते’ फिल्मों के अलावा करिश्मा कई वैब सीरीज व म्यूजिक वीडियो में भी नजर आ चुकी हैं.

करिश्मा शर्मा हाल ही में प्रदर्शित फिल्म ‘सुपर 30’ के एक गाने में रितिक रोशन के साथ डांस करते हुए नजर आईं. पर इस मुकाम तक वे कठिन संघर्ष करते हुए पहुंची हैं.

क्या आप की परवरिश कला के माहौल में हुई है?

ऐसा नहीं है. मैं पटना की रहने वाली हूं. मेरे पापा बैंक मैनेजर हैं. मैं ने कौन्वैंट स्कूल में पढ़ाई की. जब मैं 8वीं कक्षा में थी, तो मुझे पुणे में अपनी मौसी के पास आ कर रहना पड़ा. मैं ने पुणे के सिंबायोसिस से बीबीए किया. सिंबायोसिस में मीडिया व फैशन डिजाइनिंग की भी पढ़ाई होती है. वहीं पर मैं ने रैंप पर चलना शुरू किया. उस के बाद मुंबई आ कर बीएमडब्लू के साथ मैं ने इंटर्नशिप की. लेकिन 3 महीने बाद मुझे एहसास हुआ कि यह नौकरी मेरे बस की बात नहीं है. तब मैं ने नौकरी छोड़ कर अभिनय के लिए कोशिश करनी शुरू कर दी. मैं ने काफी औडिशन दिए. निखिल आडवाणी के साथ मैं ने बतौर सहायक भी काम किया. एकता कपूर निर्मित सीरियल ‘पवित्र रिश्ता’ में प्रिया का किरदार निभाते हुए मैं ने अभिनय कैरियर की शुरुआत की.

सीरियल ‘पवित्र रिश्ता’ में काम कैसे मिला था?

एकता कपूर को मेरा चेहरा पसंद आ गया. उन्होंने मुझे बुलाया. औडिशन देने के बाद मुझे इस में पिया का किरदार निभाने के लिए चुना गया. इस में मुझे अच्छी शोहरत मिली, जिस के चलते मुझे फिल्म ‘प्यार का पंचनामा 2’ में अभिनय करने का मौका मिला. इस के बाद मैं ने कुछ फिल्में मेन लीड में भी कीं. पर जब मैं ने वैब सीरीज ‘रागिनी एमएमएस रिटर्न’ की तो मुझे जरूरत से ज्यादा शोहरत मिली. इस वैब सीरीज में अभिनय करते वक्त मुझे एहसास हुआ कि मुझे अभिनय की ट्रेनिंग लेनी चाहिए.

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तो आप ने अभिनय की ट्रेनिंग ली?

जी हां, ‘रागिनी एमएमएस’ करते समय मेरी समझ में आया कि लोग न्यूयौर्क फिल्म अकादमी या दूसरे इंस्टिट्यूट में क्यों जाते हैं. मैं तो हर नए कलाकार को सलाह देती हूं कि वह अभिनय की ट्रेनिंग ले कर ही बौलीवुड से जुड़े. सिर्फ सुंदर चेहरा है, इसलिए आप काम पा जाएंगे, ऐसा न समझें. यदि आप के पास अभिनय की ट्रेनिंग के लिए पैसा नहीं है, तो कम से कम थिएटर ही करें. अभिनय की ट्रेनिंग लेने से आप को अपने अंदर की अच्छाइयां व कमियां पता चल जाती हैं.

क्या आप को किसी बात का रिग्रैट है?

मुझे किसी बात का कोई रिग्रैट या गम नहीं है. जब मैं ने ‘रागिनी एमएमएस रिटर्न’ किया था तो कई लोगों ने मुझे इसे करने से मना किया था. पर मैं ने किया. लोगों ने कहा था कि जब तुम्हें अलग तरह के किरदार करने हैं तो ‘रागिनी एमएमएस रिटर्न’ में बोल्ड किरदार न निभाओ. पर उस वक्त मेरी जो समझ थी, मेरी जो संजीदगी थी, उस के अनुसार मुझे इसे करने में कोई बुराई नजर नहीं आई. जब तक आप की फिल्म बौक्सऔफिस पर हिट न हो जाए तब तक कोई आप के नाम पर पैसा नहीं लगाता. फिल्म बनाने में करोड़ों रुपए लगते हैं. अब जब कलाकार के तौर पर मेरी इमेज बन गई है, एक पहचान बन गई है तो अब मुझे अलग तरह के किरदार निभाने हैं.

जब आप ने ‘रागिनी एमएमएस रिटर्न’ में बोल्ड किरदार निभाया था, उस वक्त आप की क्या सोच थी?

उस वक्त जब मैं ने किरदार पढ़ा था तब मुझे लगा था कि यह तो एक कालेज में पढ़ने वाली लड़की की यात्रा है. कालेज में उस के तमाम दोस्त हैं. कुछ दोस्तों से उस के झगड़े हैं और एक साथी को वह ऐसे लड़कों से बचाती है. उसे एक लड़के से प्यार भी है. पूरी वैब सीरीज में उस के अपने प्रेमी के साथ रिश्ते को ले कर सिर्फ 2 दृश्य हैं जोकि मुझे बहुत और्गेनिक लगे. मुझे उन दोनों दृश्यों में हौआ वाली कोई बात नहीं लगी.

भविष्य में बोल्ड किरदार करने से आप को परहेज नहीं होगा?

भविष्य में भी यदि किसी फिल्म में स्क्रिप्ट की मांग के अनुसार किसिंग सीन होंगे तो मुझे करने में परहेज नहीं होगा. लेकिन सबकुछ खुल कर नहीं करना चाहूंगी, कुछ तो मैं ने सीमाएं बना रखी हैं.

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आप फिल्म ‘सुपर 30’ में सिर्फ एक गाने में नजर आईं?

डांस में महारत रखने वाले रितिक रोशन के साथ काम करने का अवसर नहीं गंवाना चाहती थी. उन के साथ एक गाना कर के भी मुझे पहचान मिली. फिर मेरा मकसद अपनी अभिनय प्रतिभा को लोगों तक पहुंचाना है. यह एक बड़े बजट की फिल्म थी जिसे दर्शक मिलना तय था और वही हुआ.

आप काफी म्यूजिक वीडियो कर रही हैं?

जी हां, 2018 के अंत में गजेंद्र वर्मा का म्यूजिक वीडियो ‘तेरा घाटा’ आया था जिसे काफी पसंद किया गया था. इस साल मैं ने दर्शन रावल का म्यूजिक वीडियो ‘काश ऐसा होता’ किया है. वहीं सोनल प्रधान का म्यूजिक वीडियो ‘नीदें’ किया है.

क्या वैब सीरीज करने से कलाकार को ज्यादा फायदा मिलता है?

ईमानदारी से कहूं तो मैं फायदा व नुकसान कभी नहीं सोचती. मैं सिर्फ यह देखती हूं कि मुझे अभिनय का स्कोप कितना मिल रहा है. लोगों तक पहुंचने का सवाल है, तो फिल्म व वैब सीरीज दोनों से हम विशाल दर्शक वर्ग तक पहुंच सकते हैं. अब तो सभी बड़े कलाकार वैब सीरीज कर रहे हैं. फिल्म और वैब सीरीज की शूटिंग में अंतर नहीं है. हां, कलाकार के तौर पर यह माने रखता है कि हम किस तरह के कंटैंट पर काम कर रहे हैं.

कोई ऐसा किरदार जिसे निभाना चाहती हैं?

मैं ने मीना कुमारी की किताब पढ़ी है. उन में बहुत दर्द था. उन्हें बहुत कुछ सहना पड़ा था. मैं उन का किरदार निभाना चाहती हूं. इस के अलावा मैं ने माताहारी की किताब पढ़ी है. मैं माताहारी का किरदार निभाना चाहती हूं. माताहारी डच की रहने वाली सैंसुअल डांसर थीं. उन्हें जासूसी के आरोप में 1917 में मार दिया गया था. मैं ने उन की एक किताब पढ़ी जिस में एक सीन है, जब उन्हें शूट किया जाना है तो उन से पूछा जाता है कि क्या आप की आंखों पर पट्टी बांध दी जाए? तो वे कहती हैं, ‘नहीं, मैं ने कुछ भी गलत नहीं किया.’ फिर वे हवा में किस करती हैं. उन की यात्रा भी दिल को छू लेने वाली है. बहुत दर्दनाक कहानी है. मेरे अंदर भी बहुत दर्द है, जो बाहर निकालना चाहती हूं. केवल हौट व सैक्सी का लैवल लगाना नहीं चाहती. अब मेरी कोशिश है कि ऐसा किरदार निभाऊं जिस से लोगों को मेरे अंदर की अभिनय प्रतिभा का पता चल सके.

कुछ नया कर रही हैं?

एकता कपूर की कंपनी एएलटी बालाजी के लिए एक वैब सीरीज ‘फिक्सर’ की है, जोकि बहुत जल्द रिलीज होगी. यह अंडरवर्ल्ड और एटीएस के बीच टकराव की कहानी है. यह कहानी देश की राजधानी दिल्ली के भ्रष्ट एटीएस औफिसर की है जो मुंबई के नकली अंडरवर्ल्ड और उद्योगपतियों की सांठगांठ का शिकार है. निजी जीवन के संघर्षों से जूझ रहे एटीएस अफसर की भूमिका में शब्बीर अहलूवालिया हैं. तिग्मांशु धूलिया ने मलिक नामक अंडरवर्ल्ड की भूमिका निभाई है जो देश व विदेश में अंडरवर्ल्ड का संचालन करता है.

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आप के शौक क्या हैं?

यात्रा करना, डांस करना, गीत गाना. मैं बचपन में गायक बनना चाहती थी. मैं ने संगीत की ट्रेनिंग ली थी. पर जब मैं 8वीं कक्षा में पढ़ रही थी, तभी मेरे मातापिता का तलाक हो जाने के बाद सबकुछ भूल गई थी. पढ़ने का भी शौक है.

‘प्रधानमंत्री आवास योजना’: गरीबों के लिए बनी मुसीबत

गरीबों को लगा था कि उन का पक्का मकान बनाने का सपना पूरा हो जाएगा. पर सरकार का एक कार्यकाल खत्म होतेहोते योजना की कछुआ चाल, नेताओं और अफसरों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार ने साबित कर दिया कि साल 2022 तक देश के सभी गरीबों को पक्का मकान देने का मोदी सरकार का वादा पूरा होने वाला नहीं है.

देश में गरीबों को मकान देने के लिए पहले ‘इंदिरा आवास योजना’ चलती थी, जिस का साल 2015 में नाम बदल कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ रख दिया था और ऐलान किया था कि साल 2022 तक सभी के सिर पर छत होगी. इस के लिए यह भी योजना बनी थी कि सरकारी विभागों से घर बना कर देने के बजाय खुद जरूरतमंद के खाते में पैसे जमा कराया जाए.

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‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत गांवदेहात के इलाकों में एक लाख, 60 हजार की रकम और शहरी इलाकों में 2 लाख, 40 हजार की रकम सीधे जरूरतमंद के बैंक खाते में जमा करने का काम किया गया था. इस रकम से एक कमरा, एक रसोई, एक स्टोररूम का नक्शा भी दिया गया था.

पर हुआ यह कि जिन लोगों के पास पहले से मकान थे, उन्हें रकम मिल गई और जो लोग बिना छत के प्लास्टिक की पन्नी तान कर अपना आशियाना बना कर रह रहे थे, उन्हें पक्का मकान देने के बजाय झुनझुना पकड़ा दिया गया.

ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव और नगरपालिकाओं की अध्यक्ष, सीएमओ की मिलीभगत से जरूरतमंदों से 10,000 से 20,000 रुपए ले कर योजना की रकम की बंदरबांट कुछ इस तरह हुई कि बिना नक्शे और बिना सुपरविजन के योजना की रकम खर्च कर ली गई.

‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत साल 2022 तक देश में सभी लोगों को छत देने की बात कही जा रही है. इस के लिए लक्ष्य और उस के पूरा होने के आंकड़े भी पेश किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत देख कर आप दंग रह जाएंगे.

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मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले की नगरपरिषद साईंखेड़ा के वार्ड नंबर 14 के लाभार्थी हरिगोपाल श्रीवास्तव की दास्तान ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ की असलियत को उजागर करती है.

हरिगोपाल श्रीवास्तव को मई, 2018 में पक्का घर बनाने के लिए पहली किस्त के रूप में एक लाख की रकम मिली थी. उन्होंने अपने कच्चा मकान तोड़ कर जून महीने में ही पक्का मकान बनाने का काम शुरू कर दिया था. एक महीने में एक लाख रुपए खर्च कर छत तक का काम पूरा हो गया था, लेकिन दूसरी किस्त की रकम उन्हें नहीं दी गई.

हरिगोपाल श्रीवास्तव के परिवार के लोग पूरी बरसात, ठंड और भीषण गरमी में प्लास्टिक की पन्नी तान कर अपना गुजारा कर रहे हैं, लेकिन एक साल के बाद भी उन्हें दूसरी किस्त की रकम नहीं मिली है.

हरिगोपाल श्रीवास्तव ने कई बार इस की शिकायत सरकारी अफसरों के साथसाथ चुने हुए जनप्रतिनिधियों से की, मगर कोई समाधान नहीं निकला. परेशान हो कर जब उन्होंने एसडीएम, गाडरवारा को अनशन पर बैठने की अर्जी दी, तो उन्हें इस की भी इजाजत नहीं दी गई.

नगरपरिषद के अधिकारी विधानसभा और लोकसभा चुनाव की आचार संहिता का बहाना बना कर इसी तरह अनेक लोगों को दूसरी किस्त की रकम देने में आनाकानी कर रहे हैं. वोट का सौदा करने वाली सरकार के नुमाइंदे भी अब चुप्पी साध कर बैठे हैं.

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खिरका टोला वार्ड नंबर 8 के दीपक कुशवाहा और बासुदेव अहिरवार बताते हैं कि उन्हें भी जून, 2018 में पहली किस्त की रकम मिल चुकी है, पर दूसरी किस्त की रकम के लिए नगरपरिषद के अधिकारी और पार्षद और रुपयों की मांग कर रहे हैं. पीडि़त परिवार के छोटेछोटे बच्चों ने पूरी गरमी खुले आसमान के नीचे बिताई है और अब बरसात का मौसम है. ऐसे में उन की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं.

जनता की सेवा के लिए चुने गए पार्षद दूसरी किस्त दिलाने के लिए दलाली कर लाभार्थियों से 10,000 से ले कर 20,000 रुपए की रकम खुलेआम मांग रहे हैं. जो लोग पैसे दे देते हैं, उन्हें दूसरी किस्त का पैसा आसानी से मिल जाता है.

इन की बल्लेबल्ले

‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ का फायदा किसी को मिला हो या न मिला हो, पर ग्राम पंचायतों के सरपंच सचिव की दुकानदारी खूब चल निकली है.

सरपंच सचिव ने गरीबों को रकम दिलाने के एवज में पैसे वसूल तो किए ही हैं, साथ ही मिल कर गांवगांव में अपनी ईंट, गिट्टी, लोहा, सीमेंट की दुकानें खोल ली हैं. अगर इन की दुकान से सामान खरीदा तो समय पर किस्त मिल जाती है, नहीं तो सालों दूसरी किस्त की रकम नहीं मिलती है. कई सरपंचों ने नेताओं के इशारों पर गांव की रेत खदानों पर गैरकानूनी कब्जा कर के करोड़ों रुपए की रेत साफ कर दी है. गांवदेहात के इलाकों में 500 रुपए प्रति ट्रौली मिलने वाली रेत आज 2,000 रुपए प्रति ट्रौली मिल रही है.

मध्य प्रदेश में सरपंच सचिव द्वारा किए भ्रष्टाचार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नरसिंहपुर जिले की हीरापुर ग्राम पंचायत के सचिव भागचंद कौरव के घर आयकर विभाग द्वारा जून, 2019 में मारे गए छापे के दौरान आमदनी से ज्यादा 2 करोड़ रुपए की जायदाद का खुलासा हुआ है.

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गांवदेहात के लोग बताते हैं कि ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के आने से घरघर पक्के मकान बनने से गांव की नदियों की रेत बहुत महंगी हो गई है. जिला प्रशासन के अधिकारी ट्रैक्टरट्रौली जब्त कर उन्हें परेशान करते हैं, जबकि रेत से भरे भारीभरकम डंपर रातदिन शहरों के लिए गैरकानूनी रेत सप्लाई कर रहे हैं. योजना का सुपरविजन कर रहे इंजीनियर मकान के वैल्युएशन के नाम पर लोगों से 10,000 रुपए की वसूली कर रहे हैं.

दूसरा पहलू यह भी

‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ में अकेले नेता, अधिकारी, कर्मचारी ही गड़बड़झाला नहीं कर रहे हैं, बल्कि जनता भी पीछे नहीं है. सरकार मकान बनाने के लिए गरीबों के खाते में पैसे डाल रही है, लेकिन लोग पैसा ले कर उसे दूसरे कामों में खर्च कर लेते हैं. किसी ने उस पैसे से मोटरसाइकिल खरीद ली है तो कोई दूसरी पत्नी ले आया. मकान के नाम पर कहीं पत्थरों का टीला है तो कहीं झोंपडि़यां. किसी ने पैसे बीमारी पर खर्च कर लिए तो कोई शराब और जुए में उड़ा गया.

बांसखेड़ा गांव के मिहीलाल का घर ऐसा है जिन्हें पहली किस्त नवंबर, 2017 में मिली थी और 10 दिन के अंदर ही सारे पैसे निकाल लिए गए. घर बनाने के नाम पर एक ईंट भी नहीं रखी गई.

अब सरकारी अधिकारी मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दे रहे हैं तो उन का कहना है कि पैसे रखे हैं, लेकिन ईंटभट्ठों व रेत खनन पर रोक होने के चलते वे मकान नहीं बना पा रहे हैं.

होशंगाबाद जिले के बारछी गांव के चंदन नौरिया के 3 बेटे हैं. तीनों को अलगअलग ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ का पैसा मिल गया. 2 बेटों के पैसों से मकान बना लिया तो तीसरे बेटे के पैसे में मोटरसाइकिल और दूसरा सामान खरीद लिया, जबकि गांव में कटिंगदाढ़ी बना कर अपनी आजीविका चलाने वाले कमलेश को ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ का पैसा नहीं मिला है. वे खपरैल के कच्चे मकान में अपने बूढ़े मांबाप समेत 7 सदस्यों के परिवार के साथ रह रहे हैं.

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इसी तरह रायसेन जिले के पटना गांव के अरविंद ने अपना पक्का मकान बनाने के लिए पुराने खपरैल के मकान को तोड़ दिया था. यह सोच कर वे किराए के मकान में रहने लगे थे कि 4 महीने बाद अपने मकान में वापस रहने लगेंगे, लेकिन उन्हें भी सालभर बीत जाने के बाद दूसरी किस्त का पैसा नहीं मिला है और उन का पैसा किराए के मकान में खर्च हो रहा है.

लोगों का मानना है कि ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के जमीनी हकीकत पर सही न उतरने से प्रधानमंत्री की यह योजना कामयाब होती नजर नहीं आ रही है. अगर सरकार एक से नक्शे और डिजाइन के मुताबिक गरीबों को मकान तैयार कर के देती तो उन्हें पक्के मकान भी मिल जाते और सरकारी पैसे की बंदरबांट भी न होती.

हर्ष ना था हर्षिता के ससुराल में: भाग 3

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हर्षिता की जिंदगी में आया उत्कर्ष

इस शादी में कानपुर शहर के उद्योगपतियों के अलावा अनेक जानीमानी हस्तियां शामिल हुई थीं. पदम अग्रवाल ने इस शादी में लगभग 40 लाख रुपया खर्च किए. उन्होंने बेटी को ज्वैलरी के अलावा उस की ससुराल वालों को वह सब दिया था, जिस की उन्होंने डिमांड की थी.

शादी के बाद 6 माह तक हर्षिता के जीवन में बहार रही. सासससुर व पति का उसे भरपूर प्यार मिला. लेकिन उस के बाद सास व ननद के ताने शुरू हो गए. उस पर घरगृहस्थी का बोझ भी लाद दिया गया. घर की साफसफाई कपडे़ व रसोई का काम भी उसे ही करना पड़ता.

नौकरानी कभी रख ली जाती तो कभी उस की छुट्टी कर दी जाती. काम करने के बावजूद हर्षिता के हर काम में टोकाटाकी की जाती. सास ताने देती कि तुम्हारी मां ने यह नहीं सिखाया, वह नहीं सिखाया.

धीरेधीरे हर्षिता की सास रानू अग्रवाल के जुल्म बढ़ने लगे. रानू हर्षिता के उठनेबैठने, सोने पर आपत्ति जताने लगी थी. खानेपीने व घर के बाहर जाने पर भी आपत्ति जताती और प्रताडि़त करती थी. हर्षिता जब कभी घर से ब्यूटीपार्लर जाती तो सजासंवरा देख कर ऐसे ताने मारती कि हर्षिता का दिल छलनी हो जाता.

वह उत्कर्ष से शिकायत करती तो उत्कर्ष मां का ही पक्ष लेता और उसे प्रताडि़त करता. ससुर सुशील अग्रवाल भी अपनी पत्नी रानू के उकसाने पर हर्षिता को दोषी ठहराते और प्रताडि़त करते.

हर्षिता मायके जाती, लेकिन ससुराल वालों की प्रताड़ना की बात नहीं बताती थी. वह सोचती थी कि आज नहीं तो कल सब ठीक हो जाएगा. पर एक रोज मां ने प्यार से बेटी के सिर पर हाथ फेर कर पूछा तो हर्षिता के मन का गुबार फट पडा.

वह बोली, ‘‘मां, आप लोगों से दामाद चुनने में भूल हो गई. उस के मातापिता का व्यवहार ठीक नहीं है. सभी मुझे प्रताडि़त करते हैं.’’

बेटी की व्यथा से व्यथित मां संतोष ने हर्षिता को ससुराल नहीं भेजा. इस पर उत्कर्ष ससुराल आया और हर्षिता तथा संतोष से माफी मांग कर हर्षिता को साथ ले गया.

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हर्षिता के ससुराल आते ही उसे फिर प्रताडि़त किया जाने लगा. उस पर अब 25 लाख रुपए दहेज के रूप में लाने का दबाव बनाया जाने लगा.

दरअसल हर्षिता की ननद परिधि की शादी तय हो गई थी. शादी के लिए ही पति, सासससुर हर्षिता पर रुपए लाने का दबाव बना रहे थे. रुपए न लाने पर उन का जुल्म बढ़ने लगा था.

23 नवंबर, 2018 को हर्षिता के चचेरे भाई की शादी थी. हर्षिता शादी में शामिल होने आई तो उस ने मां को 25 लाख रुपया मांगने तथा प्रताडि़त करने की बात बताई. इस पर पदम अग्रवाल ने हर्षिता को ससुराल नहीं भेजा. 2 हफ्ते बाद उत्कर्ष अपने पिता सुशील के साथ आया और दोनों ने हाथ जोड़ कर माफी मांगी. सुशील ने अपनी पत्नी रानू के गलत व्यवहार के लिए भी माफी मांगी, साथ ही हर्षिता को प्रताडि़त न करने का वचन दिया, तभी हर्षिता को ससुराल भेजा गया.

सुशील कुमार अग्रवाल ने फैक्ट्री में नई मशीनें लगाने के लिए लगभग 2.5 करोड़ रुपए बैंक से लोन लिया था. इस लोन की भरपाई हेतु सुशील ने कभी 30 लाख, तो कभी 40 लाख की डिमांड की. लेकिन पदम अग्रवाल ने रुपया देने से मना कर दिया था.

हर्षिता की सास रानू अग्रवाल व पति उत्कर्ष ने भी हर्षिता के मार्फत लाखों रुपए मायके से लाने की बात कही. रुपए लाने से मना करने पर हर्षिता को परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी.

मई, 2019 में पदम अग्रवाल ने अमेरिका घूमने का प्लान बनाया. उन के साथ बड़ी बेटी गीतिका व उस का पति भी जा रहा था. पदम अग्रवाल ने हर्षिता व उस के पति उत्कर्ष को भी साथ ले जाने का निश्चय किया.

हर्षिता की सास रानू नहीं चाहती थी कि हर्षिता घूमने जाए. अत: उस ने हर्षिता का टिकट बुक कराने से मना कर दिया. तब पदम अग्रवाल ने ही बेटीदामाद का टिकट बुक कराया. 25 मई को पदम अग्रवाल अपनी पत्नी तथा दोनों दामाद व बेटियों के साथ टूर पर चले गए.

सास ने की बहू हर्षिता की पिटाई 16 जून को वे सब अमेरिका से लौट आए. टूर से लौटने के बाद हर्षिता मायके में ही रुक गई. वह ससुराल नहीं जाना चाहती थी. लेकिन उत्कर्ष माफी मांग कर तथा समझा कर हर्षिता को ले गया. ससुराल पहुंचते ही सास रानू अग्रवाल हर्षिता को बातबेबात मानसिक रूप से प्रताडि़त करने लगी. उस ने हर्षिता के ब्यूटीपार्लर जाने पर भी रोक लगा दी. हर्षिता घर से निकलती तो वह कार की चाबी छीन लेती और मारपीट पर उतारू हो जाती.

6 जुलाई, 2019 को जब उत्कर्ष तथा सुशील फैक्ट्री चले गए तो घरेलू काम करने को ले कर सासबहू में झगड़ा होने लगा. कुछ देर बाद नौकरानी शकुंतला आ गई. तब भी दोनों में झगड़ा हो रहा था. तकरार ज्यादा बढ़ी तो किसी बात का जवाब देने पर सास रानू ने हर्षिता के गाल पर 2-3 थप्पड़ जड़ दिए तथा झाड़ू से पीटने लगी.

गुस्से में हर्षिता ने पर्स और कार की चाबी ली और घर के बाहर जाने लगी. यह देख कर रानू दरवाजे पर जा खड़ी हुई और उस ने मुख्य दरवाजा लौक कर दिया. इस पर गुस्से में हर्षिता किचन की बराबर वाली खिड़की पर पहुंची और वहां से कूदने लगी. लेकिन शकुंतला ने उसे खींच लिया और कमरे में ले आई.

इस के बाद शकुंतला बरतन साफ करने लगी. लगभग साढ़े 12 बजे रानू चिल्लाई तो शकुंतला वहां पहुंची. लेकिन हर्षिता खिड़की से कूद चुकी थी. हर्षिता स्वयं कूदी या सास रानू ने उसे धक्का दिया, शकुंतला नहीं देख पाई. हर्षिता जीवित है या मर गई, यह देखने के लिए रानू अपार्टमेंट के नीचे आई. उस ने हर्षिता का पर्स व चाबी उठाई, फिर हर्षिता की कलाई पकड़ कर नब्ज टटोली. इस के बाद उस ने पति सुशील को फोन किया, ‘‘जल्दी घर आओ. हर्षिता खिड़की से कूद गई है.’’

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जानकारी पाते ही सुशील ने समधी पदम अग्रवाल को घर आने को कहा और उत्कर्ष के साथ घर आ गए. कुछ देर बाद पदम अग्रवाल भी अपनी पत्नी संतोष व बेटी गीतिका के साथ आ गए और बेटी का शव देखकर रो पड़े. उन्होंने थाना कोहना में ससुराली जनों के विरूद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई.

रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने रानू, उत्कर्ष, तथा सुशील कुमार अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया. बाद में उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया.

दहेज हत्या के आरोपी सुशील कुमार अग्रवाल की जमानत हेतु जिला न्यायाधीश अशोक कुमार सिंह की अदालत में बचाव पक्ष के वकील ने अरजी दाखिल की. जिस पर 9 अगस्त को सुनवाई हुई. बचावपक्ष के वकील ने हृदय की बीमारी को आधार बना कर तथा दहेज न मांगने की बात कह कर अरजी दाखिल की थी.

बचावपक्ष के वकील ने हृदय की बीमारी के तर्क के जरिए कोर्ट में जमानत की गुहार लगाई. वहीं पीडि़त पक्ष के वकील ने न्यायालय में जमानत का विरोध करते हुए दलील दी कि हर्षिता की मृत्यु विवाह के ढाई वर्ष के अंदर ससुराल में असामान्य परिस्थितियों में हुई है. विवेचना में भी विवेचक को पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं. दहेज हत्या का अपराध गैरजमानती होने के साथसाथ गंभीर भी है.

दोनों वकीलों की दलील सुनने के बाद जज ने कहा कि दहेज हत्या जैसे मामले में उदारता नहीं बरती जा सकती. इस से पीडि़तों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास कम होगा. जहां तक आवेदक के बीमार होने की बात है, उसे जेल में इलाज मुहैया कराया जा सकता है. इस पर जज ने सुशील की जमानत खारिज कर दी. कथा संकलन तक सभी आरोपी जेल में बंद थे.

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अपने लुक्स से सभी एक्ट्रेसेस को पीछे छोड़ेगी BIGG BOSS 12 की ये कंटेस्टेंट, देखें फोटोज

कलर्स टी.वी के सबसे पौपुलर शो बिग बौस में आना नए कलाकारों के करियर के लिए काफी दिलचस्प मोड़ रहता है. इस शो के जरिए कई कलाकारों ने अपने करियर की शुरूआत की है, और उन्ही कलाकारों में से एक नाम है सबा खान. सबा ने इंडिया के सबसे बड़े रीएलिटी शो में से एक शो बिग बौस सीजन 12 में अपनी बहन सोमी खान के साथ एंट्री मारी थी और इस शो से निकलने के बाद सबा को टेलिविजन इंजस्ट्री में काम करने का काफी अच्छा मौका मिला. अपने सिंपल अंदाज से सबका दिल जीतने वाली सबा खान इन दिनों काफी ग्लैमरस लुक में नजर आ रही हैं.

सबा खान का ग्लैमरस लुक…

 

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Just be you 💓 . . Outfit – @sassy_chalet

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दरअसल सबा खान अपने औफिशियल इंस्टाग्राम पर काफी एक्टिव रहती हैं और इसी के साथ वे अपनी फोटोज फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं. हाल ही में सबा ने अपनी कुछ फोटोज सोशल मीडिया पर शेयर की थी जिससे की वे फैंस के बीच चर्चा में आ गई हैं. उनका ग्लैमरस लुक देख कर फैंस काफी हैरान रह गए और हैरानी के साथ-साथ उनके फैंस को उनका ऐसा लुक काफी पसंद भी आया है.

बाकी एक्ट्रेसेस को पीछे छोडेंगी सबा…

 

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Dare to live the life you have always wanted ⭐️ . . 📸 – @karan_jinwal . 📷 edited by @ayan_david_

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ऐसा देखने से लग रहा है कि सबा खान बहुत ही जल्द कामयाबी के शिखर पर चड़ जाएंगी. सबा की एंक्टिंग ने तो लोगों का दिल जीता ही था पर अब वे अपने लुक से बाकी एक्ट्रेसेस को पीछे छोडने की तैय्यारी में लगी हुई हैं. बिग बौस सीजन 12 के बाद अब वे अपने ग्लैमरस अवतार में लोगों को नजर आ रही हैं. सबा के फैंस भी उनकी ऐसी फोटोज पर जमकर लाइक्स बरसा रहे हैं और लाइक्स के साथ-साथ उनकी तारीफ में प्यार भरे कमेंट्स भी कर रहे हैं.

बिग बौस से पहले रिसेप्शनिस्ट थीं सबा खान…

बता दें, सबा खान ने एक्टिंग करियर की शुरूआत सीरियल द्वारकाधीश – भगवान श्रीकृष्ण के दूसरे सीजन से कर रही हैं. बिग बौस सीजन 12 में आने से पहले सबा एक होटल में रिसेप्शनिस्ट का काम करती थीं और देखा जाए तो बिग बौस ने उनके करियर को काफी अच्छे मोड़ पर ला कर खड़ा कर दिया है.

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धोनी मामले में बड़ा खुलासा, पीठ दर्द की समस्या के कारण नहीं हैं टीम का हिस्सा

धोनी इस वक्त टीम का हिस्सा नहीं हैं लेकिन उनकी खबरें हमेशा से ही सुर्खियों में बनी रहती हैं. हाल ही में हुए हुई दो महत्वपूर्ण सीरीज पहली वेस्टइंडीज और दूसरी साउथ अफ्रीका के साथ खेली गई लेकिन इसमें धोनी टीम का हिस्सा नहीं थे. विश्व कप के बाद से ही टीम का हिस्सा नहीं है. हर बार चयनकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने अपने आपको अनुपलब्ध बताया है. विश्व कप के बाद धोनी ने परिवार संग कुछ वक्त बिताया और फिर वो सेना के साथ पैरा कमांडोंज की ट्रेनिंग करने लगे थे. इस दौरान भारत ने वेस्टइंडीज और साउथ अफ्रीका के साथ सीरीज खेली थी लेकिन इस वक्त धोनी टीम का हिस्सा नहीं थे. अब खबर आ रही है कि धोनी के पीठ में दर्द की शिकायत है जिसकी वजह से वो टीम से बाहर चल रहे हैं.

धोनी के टीम से बाहर होने पर तरह-तरह की बातें की जा रहीं थी. कोई कह रहा था कि धोनी की खराब प्रदर्शन के कारण उनको टीम में जगह नहीं मिली कोई कह रहा था कि वो सीधे अगले साल ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी-20 विश्व कप में दिखेंगे लेकिन अब जो खुलासा हो हुआ है वो वाकई चौंकाने वाला है. रिपोर्ट्स की मानें, तो बीसीसीआई सूत्रों ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा है कि धोनी के नवंबर तक फिट हो जाने की उम्मीद है. धोनी की उम्र 38 साल की है और वो हमेशा से ही उनकी गिनती फिट खिलाड़ियों में की जाती है लेकिन इस वक्त धोनी पीठ दर्द की समस्या से गुजर रहे हैं इस वजह से धोनी टीम का हिस्सा नहीं है.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक धोनी पीठ में दर्द की शिकायत के साथ वर्ल्ड कप खेलने गए थे. और उनके पीठ का दर्द वर्ल्ड कप के दौरान और बढ़ गया. इसके अलावा विश्व कप के दौरान उन्हें कलाई में भी चोट लगी थी. टीम इंडिया के वर्ल्ड कप से बाहर हो जाने के बाद धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से ब्रेक ले लिया. धोनी वेस्टइंडीज दौरे के लिए भारत के सीमित ओवरों के स्क्वॉड से बाहर रहे. उन्होंने इस दौरान टेरिटोरियल आर्मी यूनिट के साथ कश्मीर में 15 दिन बिताए. वह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हाल ही में संपन्न तीन मैचों की घरेलू टी-20 इंटरनेशनल सीरीज में भी नहीं खेले.

धोनी पीठ की चोट से पिछले सीजन में भी परेशान रहे थे. पिछले साल मोहाली में किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ आईपीएल मैच में उन्होंने नाबाद 79 रन बनाए थे. मैच के बाद चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान धोनी ने अपनी चोट के बारे में बात की थी. उन्होंने कहा था, ‘यह बुरा है. यह कितना बुरा है, मैं नहीं जानता.’ इस साल (2019) आईपीएल के दौरान भी धोनी ने अपनी चोट का जिक्र किया था और माना था कि वर्ल्ड कप आ रहा है और यह उनके लिए बेहद अहम है.

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इस बीच भारतीय टीम प्रबंधन ने संकेत दिया कि पूर्व कप्तान को ‘बाहर’ मानकर नहीं चला जा सकता. धर्मशाला में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी-20 मैच से पहले विराट कोहली ने कहा था, ‘उनके (धोनी) बारे में एक बड़ी बात यह है कि वह भारतीय क्रिकेट के लिए सोचते हैं. और जो भी हम (टीम प्रबंधन) सोचते हैं, वह भी वही सोचते हैं. ‘ कोहली ने कहा था कि युवा खिलाड़ियों को तैयार करने और उन्हें अवसर देने के बारे में उनकी जिस तरह की मानसिकता थी, वह आज भी है.

असहज करने वाले किरदार निभाना चाहते हैं सिद्धार्थ बोडके

चर्चित नाटक ‘‘अनन्या’’ में अभिनय कर रहे अभिनेता सिद्धार्थ बोड़के का मानना है कि यह नाटक उनके दिल के बहुत करीब है. वह अपने चरित्र के बारे में बात करते हुए कहते हैं- ‘‘मैंने इसमें जय दीक्षित का किरदार निभाया है, जो कि इस नाटक में एक आश्चर्यजनक तत्व है. वह दूसरे हाफ में नाटक में प्रवेश करता है और 20-25 मिनट में वह नाटक के मूड को बदल देता है. वह जिस तरह से बोलता है, उसके विचार और व्यक्तित्व और आभा जिस तरह की होती है, वह बहुत दिलचस्प है.

उसे नाटक में एक अलग जीवंतता मिलती है और वह अनन्या के जीवन में एक बहुत महत्वपूर्ण किरदार है. अनन्या एक खूबसूरत नाटक है यह एक प्रेम कहानी है, एक लड़की की प्रेरणादायक कहानी है जो एक दुखद घटना से गुजरती है और उसके बाद वह कैसे संघर्ष करती है और सफलता की ओर ले जाती है. जय दीक्षित नाटक में एक बहुत महत्वपूर्ण किरदार है, इसलिए यह भूमिका बहुत खास है.”

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यह नाटक अतीत में अपने गुजराती और मराठी संस्करणों में भी लोकप्रिय रहा है. सिद्धार्थ मराठी संस्करण का हिस्सा रहे हैं और इस तथ्य से प्यार करते हैं कि उन्हें यह हिंदी में भी करने को मिला. वह कहेत हैं- ‘‘यह नाटक गुजराती और मराठी में हुआ है. और यह अभी भी चल रहा है. हमने लगभग 75 शो पूरे कर लिए हैं. प्रताप फड़ सर, जो इस नाटक के लेखक और निर्देशक हैं, जब उन्होंने हिंदी अनन्या के लिए कास्टिंग के बारे में सोचा, तो मैं शुरू में इसका हिस्सा नहीं था. लेकिन बाद में मुझे सर का फोन आया और उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि मैं जय दीक्षित का किरदार करूं. मैं इस भूमिका को करने के लिए बहुत सम्मानित और भाग्यशाली महसूस करता हूं. अनन्या की पूरी टीम को कई पुरस्कार मिले. यह मेरा पहला हिंदी नाटक है और मैं इसे प्यार कर रहा हूं.’’

अभिनेता सिद्धार्थ कई टीवी सीरियल कर चुके हैं. वह वर्तमान में जी युवा पर मराठी सीरियल ‘तू आशी जावली रा’ का हिस्सा हैं. फिल्मों, टीवी और थिएटर में काम करने के बारे में बात करते हुए सिद्धार्थ कहते हैं- “प्रत्येक माध्यम की अपनी सुंदरता होती है. मैंने थिएटर से शुरुआत की है और मुझे लगता है कि थिएटर मजेदार है क्योंकि इसमें लाइव ऑडियंस है. थिएटर शो में कटौती नहीं होती है, आपको सहज होना होगा ताकि थिएटर की सुंदरता हो. व्यक्तिगत रूप से, मैं तीनों माध्यमों में काम करना पसंद करता हूं क्योंकि मेरा जुनून अभिनय है.”

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वह आगे कहते हैं- ‘‘मैं ऐसी भूमिकाएं करना चाहता हूं जो मेरे कम्फर्ट जोन से बाहर हों, जिससे मुझे असहजता होगी, इस तरह की भूमिकाएं करने के बाद मेरे अंदर का अभिनेता विकसित होगा. मैं जीवन के हर पहलू की खोज करना चाहता हूं. मैं एक नायक बनना चाहता हूं, मैं एक बौलीवुड नायक की तरह भी भूमिका निभाना चाहता हूं और अन्य गहन किरदार भी करने हैं.’’

‘चंद्रमुखी चौटाला’ ने दिखाया अपना बोल्ड अवतार, समुंदर किनारे शेयर की फोटोज

सब टी.वी के पौपुलर शो एफ.आई.आर. की ‘चंद्रमुखी चौटाला’ उर्फ कविता कौशिक अक्सर सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और इसी के साथ वे अपनी तकरीबन हर फोटो फैंस के साथ शेयर करती हैं. बीते दिनों कविता ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से अपनी कुछ फोटोज शेयर की जिसकी वजह से वे एक बार फिर सुर्खियों में आ गईं हैं.

फिशिंग करते हुए दिखीं कविता कौशिक…

दरअसल कविता कौशिक ने समुंदर किनारे फिशिंग करते हुए अपनी फोटोज शेयर की जिसमें वे काफी हौट नजर आ रही हैं. उनका ये बोल्ड अंदाज देख फैंस की खुशी का ठिकाना ही ना रहा. इन फोटोज में कविता ने बिकिनी के ऊपर शोर्टस पहन रखे हैं और अपनी अदाओं से सबको दीवाना बना रही हैं.

 

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Basics ! Hunt and eat , soak the sun , sleep under the moon ❤️

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जल परी से कम नहीं दिख रहीं कविता…

कविता कौशिक अक्सर योगा करते हुए अपनी फोटोज शेयर करती ही रहती हैं जिसे उनके फैंस काफी पसंद करते हैं. पर कविता की इन फोटोज ने तो सोशल मीडिया पर जैसे आग ही लगा दी है. इन फोटोज में कविता समुंदर किनारे फिशिंग पोल से मछलियां पकड़ती दिखाई दे रही हैं लेकिन वे खुद भी किसी जल परी से कम नहीं दिख रहीं.

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कविता कौशिक ने इन फोटोज को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा कि- “बेसिक्स! हंट एंड ईट, सोक द सन, स्लीप अंडर द मून.” इस कैप्शन को देख ये कहना दिल्कुल गलत नहीं होगा कि कविता को प्रकृती यानी नेचर से काफी लगाव है.

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The greatest challenge on earth is the challenge of self realisation 🙏🏼❤️

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बता दें, कविता कौशिक को योगा करना काफी अच्छा लगता है और वे योगा करने में काफी माहिर भी हैं. उनका एक भी दिन बिना योगा किए नहीं गुजरता. कविता एक टेलीविजन एक्ट्रेस होने के साथ फिल्म एक्ट्रेस भी हैं और उन्होनें हिंदी और पंजाबी दोनों फिल्मों में काम किया है जैसे कि,- ‘एक हसीना थी’, ‘वेख बरातां चल्लियां’, ‘वधाईयां जी वधाईयां’, आदि.

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पंगेबाज कंगना की बदजबानी

कंगना राणावत का जन्म 23 मार्च, 1987 को हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में हुआ था. साल 2014 में आई पहली हिंदी फिल्म ‘गैंगस्टर’ में अपनी जबरदस्त ऐक्टिंग के चलते उन्हें दर्शकों ने रातोंरात स्टार बना दिया और देखते ही देखते वे बौलीवुड की ‘क्वीन’ कही जाने लगीं.

कंगना राणावत ने कम उम्र में ही अपना घर छोड़ दिया था और दिल्ली में अस्मिता थिएटर ग्रुप के साथ उन्होंने अपने ऐक्टिंग कैरियर की शुरुआत की थी. रंगमंच डायरैक्टर अरविंद गौड़ के साथ उन्होंने कई नाटकों में काम किया और अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया. वैसे, अरविंद गौड़ के साथ उन का पहला नाटक गिरीश कर्नाड का ‘रक्त कल्याण’ था.

बौलीवुड में कंगना राणावत ने थ्रिलर फिल्म ‘गैंगस्टर’ से कदम रखा था. उस के बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा. ‘क्वीन’, ‘फैशन’, ‘कृष 3’, ‘तनु वैड्स मनु’, ‘रिवौल्वर रानी’, ‘मणिकर्णिका-द क्वीन औफ झांसी’, ‘जजमैंटल है क्या’ जैसी तमाम फिल्मों में काम करने के बाद वे आज की टौप हीरोइनों में गिनी जाती हैं.

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एक तरफ कंगना राणावत की फिल्में हिट हो रही थीं, तो वहीं उन का दिमाग बदगुमानी पर था. वे फिल्मों में नाम कमा ही रही थीं कि फिल्म ‘जजमैंटल है क्या’ के एक गीत ‘द वखरा…’ के प्रमोशन के दौरान उन का पीटीआई के एक पत्रकार जस्टिन राव से पंगा लेना भारी पड़ गया. वजह थी, फिल्म ‘मणिकर्णिका – द क्वीन औफ झांसी’ को ले कर घटिया बातें लिखने की.

कंगना राणावत के मुताबिक, पत्रकार जस्टिन राव ने घटिया बातें लिख कर उन की इमेज खराब की है. एक प्रैस कांफ्रैंस में कंगना राणावत पत्रकार का नाम सुनते ही भड़क उठीं, ‘‘जस्टिन, तुम तो हमारे दुश्मन बन गए हो यार. बड़ी घटिया बातें लिख रहे हो. कितनी ज्यादा गंदीगंदी बातें लिख रहे हो. इतना गंदा सोचते कैसे हो?’’

जब पत्रकार ने टोकते हुए कहा कि इस तरह का आरोप लगाना उचित नहीं है, तो कंगना ने कहा, ‘‘लेकिन, तुम्हारे लिए ऐसा करना उचित है?’’

कंगना ने आगे कहा, ‘‘मैं जिंगोस्टिक महिला हूं, जिस ने ‘मणिकर्णिका’ बनाई है. क्या राष्ट्रवाद पर फिल्म बना कर कोई गलती कर दी?’’

झगडे़ के तूल पकड़ने के बाद फिल्म ‘जजमैंटल है क्या’ बनाने वाली एकता कपूर ने कंगना राणावत से किनारा करना ही बेहतर समझा, वहीं पत्रकारों के संगठन ने अपनी त्योरियां चढ़ा लीं.

फिल्म ‘जजमैंटल है क्या’ के प्रमोशन इवैंट में एक पत्रकार जस्टिन राव के साथ फिल्म ‘मणिकर्णिका – द क्वीन औफ झांसी’ को ले कर तूतूमैंमैं होने के बाद से कंगना राणावत लोगों और मीडिया के निशाने पर हैं.

पहले तो कुछ मीडिया वालों ने कंगना राणावत की खबरों पर बैन लगाया, फिर देश की सब से बड़ी न्यूज एजेंसी पीटीआई ने भी उन का बहिष्कार कर दिया. बदले में कंगना राणावत ने जर्नलिस्ट एसोसिएशन और प्रैस क्लब औफ इंडिया को लीगल नोटिस भेजे.

उस पत्रकार से कंगना राणावत ने पंगा ले लिया और अपनी बात पर वे डटी रहीं, जबकि फिल्म की प्रोड्यूसर एकता कपूर ने लिखित में माफी मांग ली.

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कंगना राणावत ने वरुण धवन, तापसी पन्नू, अनुराग कश्यप, आलिया भट्ट, करण जौहर के अलावा कई फिल्मी सितारों से भी समयसमय पर पंगा लिया है. इस पंगेबाजी में उन की बहन रंगोली चंदेल ने उन का भरपूर साथ दिया है.

वहीं दूसरी ओर, कंगना राणावत का प्रेमप्रसंग या कहें कि उन पर किए गए जुल्मोसितम जगजाहिर हैं. कंगना को अपने घर में तथाकथित रूप से कैद कर के रखने वाले आदित्य पंचोली आज बौलीवुड से कोसों दूर हैं. वे कंगना के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करा चुके हैं.

आदित्य पंचोली का कंगना के बारे में कहना है कि वह उन्हें धमकी देती है. आदित्य ने यहां तक कह दिया कि वह सिरफिरी है.

शेखर सुमन का बेटा अध्ययन सुमन भी कंगना की दीवानगी का शिकार रह चुका है. अध्ययन सुमन ने भी कंगना के साथ बिताए वे बुरे पल ताजा किए जिन के बारे में सुन कर कंगना कुछ न बोलीं, वहीं दूसरी ओर रितिक रोशन का कंगना राणावत के साथ हुआ झगड़ा कोर्ट तक पहुंच गया. उधर, करण जौहर भी कंगना के गुस्से का शिकार बने और सैफ अली खान भी इस से अछूते नहीं रहे.

साल 2009 में कंगना राणावत और रितिक रोशन की लवस्टोरी भी किसी से छिपी नहीं रही जो लंबे समय तक सुर्खियों में बनी रही थी. जहां एक तरफ रितिक रोशन कंगना राणावत से इश्क फरमा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ वे अपनी पत्नी सुजैन से तलाक ले रहे थे, जिस के चलते इन दोनों के बीच भी झगड़ा शुरू हो गया.

इसी झगड़े के चलते कंगना भी आएदिन रितिक रोशन के खिलाफ नए बयान देती रहती थीं. बात इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि रितिक और उन के पिता राकेश रोशन ने कंगना के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराना ही बेहतर समझा.

‘राज 2’ की शूटिंग के दौरान कंगना राणावत का अगला शिकार अध्ययन सुमन बना था. उस का कंगना के बारे में कहना है कि कंगना उसे गंदीगंदी गालियां दे कर जलील करती थी, मारती थी और काला जादू भी करती थी.

फिल्म ‘मणिकर्णिका-द क्वीन औफ झांसी’ को ले कर कंगना राणावत ने बयान दिया था कि करणी सेना ने अगर उन की इस फिल्म का विरोध किया तो वे भी राजपूत हैं, सेना के लोगों को बरबाद कर देंगी. इस पर करणी सेना ने विरोध न करने का फैसला किया था.

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एक इंटरव्यू में कंगना राणावत ने खुद माना है कि वे इस बात को मना तो नहीं करेंगी कि वे जरा सी सनकी तो हैं. सनक नहीं होती तो 15 साल की उम्र में वे घर से भाग कर यहां नहीं आतीं. उन्हें जो लोग समझ में आते हैं, उन के पैरों में बिछ जाती हैं. पर जो समझ नहीं आते, उन से वे हाथ तक नहीं मिला सकतीं. यह जिद्दीपन उन में बचपन से ही है.

हालांकि, अपनी इस पसंद और नापसंद को कंगना अपने ऊपर हावी नहीं होने देतीं. तभी तो वे यहां सर्वाइव कर रही हैं, वरना इंडस्ट्री में न तो वे किसी कैंप में हैं और न किसी गैंग में.

कंगना राणावत ने अपनी बातें लोगों के सामने रखीं और झुकी नहीं, भले ही उन के कहने का तरीका सही न हो. यही वजह है कि बौलीवुड उन से कन्नी काटता नजर आता है. लोग भी उन्हें जिद्दी, अडियल, झगड़ालू मानते हैं. लेकिन, सच यही है कि वे बचपन से ही अपने हक के लिए लड़ाई लड़ती दिखी हैं.

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पौलिटिकल राउंडअप: ‘आप’ ने पसारे पैर

सभाजीत सिंह ने शिक्षा के बाजारीकरण के खिलाफ लंबे समय तक आंदोलन चलाया है और शिक्षा के अधिकार कानून के तहत गरीब बच्चों के दाखिले को ले कर छेड़े गए आंदोलन पर कई सामाजिक संगठनों ने उन्हें सम्मानित भी किया है.

जावड़ेकर की ‘मैं हूं न’

दिल्ली. अरविंद केजरीवाल के चुनावी वादों और ऐलानों से भारतीय जनता पार्टी में खलबली मची हुई है. इस से उन की आपसी खींचतान भी सामने आ रही है. बौखलाहट में नेता अलगअलग बयान दे रहे हैं. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजय गोयल का एक कार्यक्रम तक रद्द करा दिया गया.

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इसी सिलसिले में बुधवार, 28 अगस्त को दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा की तरफ से नए बने प्रभारी केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, ‘मैं सब संभाल लूंगा.’

यह कहना जितना आसान लग रहा है उतना ही करना मुश्किल होगा, क्योंकि फिलहाल भाजपा अरविंद केजरीवाल के तोहफों वाले सियासी गणित में फंस कर रह गई है.

‘इंदिरा कैंटीन’ के बहाने

बैंगलुरु. कांग्रेस के सिद्धारमैया ने 15 अगस्त, 2017 को ‘इंदिरा कैंटीन’ योजना चलाई थी और आज बैंगलुरु में 173 ‘इंदिरा कैंटीन’ और 18 ‘मोबाइल इंदिरा कैंटीन’ काम कर रही हैं जिन में 5 रुपए में नाश्ता और 10 रुपए में दोपहर और रात का खाना मिलता है.

कांग्रेस सरकार गई तो अब इस योजना पर बंद होने के काले बादल मंडराने लगे हैं जबकि 28 अगस्त को कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा

कि राज्य सरकार की ‘इंदिरा कैंटीन’ बंद करने की कोई योजना नहीं है लेकिन वे उस के काम करने के तरीके की जांच कराना चाहते हैं.

इस से पहले एक रिपोर्ट आई थी जिस में कहा गया था कि पिछली सरकार की पसंदीदा योजना बंद होने के कगार पर है क्योंकि न तो राज्य सरकार ने और न ही वृहद बैंगलुरु महानगरपालिका ने कैंटीन के लिए बजट आवंटित किया है.

मुख्यमंत्री ने बताया कि ऐसी कुछ रिपोर्टें हैं जिन के मुताबिक कई जगह पर बढ़ा कर बिल दिखाया गया. रिकौर्ड में 100 लोगों को दिखाया गया, जबकि 1,000 लोगों का खाना वहां था.

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भाजपा अध्यक्ष की बदजबानी

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष के पुलिस वालों और तृणमूल कार्यकर्ताओं को पीटने संबंधी बयान के बाद कोलाघाट पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया.

पूर्वी मेदिनीपुर जिले के मेचेडा में 26 अगस्त की रात पार्टी के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिलीप घोष ने कहा था, ‘तृणमूल के गुंडों और पुलिस वालों से डरने की जरूरत नहीं है. राज्य के विभिन्न हिस्सों में भाजपा कार्यकर्ताओं पर अकसर हमले होते हैं. दोषियों को पकड़ने की जगह पुलिस फर्जी मामलों में हमारे लड़कों को फंसा रही है…

‘अगर आप पर हमला होता है तो तृणमूल के कार्यकर्ताओं और पुलिस वालों को पीट दीजिए. डरने की जरूरत नहीं. कोई भी दिक्कत होगी तो हम हैं न, सब संभाल लेंगे. अगर पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम को जेल भेजा जा सकता है तो तृणमूल के ये नेता तो हमारे लिए मच्छर, कीड़ेमकोड़े की तरह हैं.’

हर गांव के नेता के लिए यह संदेशा है कि जाओ, भाजपा के पांव पकड़ो.

मनोहर का सियासी दांव

चंडीगढ़. विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पांसा फेंक दिया है. उन्होंने 30 अगस्त को हरियाणा में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए नई योजना शुरू की है जिस में उन लोगों को 6,000 रुपए हर साल दिए जाएंगे, जिन की सालाना आमदनी 1.80 लाख रुपए से कम है और 2 हैक्टेयर से कम जोतभूमि है. इस योजना को ‘मुख्यमंत्री परिवार समृद्धि योजना’ नाम दिया गया है.

इस के साथ ही परिवार के सदस्य जीवन बीमा या दुर्घटना बीमा या प्रधानमंत्री मानधन योजना के तहत पैंशन के भी लाभपात्र होंगे.

केपी यादव के बेहूदा बोल

गुना. मध्य प्रदेश की गुना संसदीय सीट से भाजपा सांसद केपी यादव ने महिला कलक्टर के खिलाफ बेहूदा टिप्पणी करते हुए उन्हें चाटुकार बोला और कहा कि कलक्टर सांसदों से मिलने के लिए गांवगांव जाती थीं और उन के चरण चुंबन करती थीं.

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याद रहे कि केपी यादव ने इस साल लोकसभा चुनाव में गुना से कांग्रेस के उम्मीदवार ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ जीत दर्ज की थी.

केपी यादव पहले कांग्रेस में ही थे और ज्योतिरादित्य सिंधिया के सहयोगी रह चुके हैं. पिछले उपचुनाव में अनदेखी का आरोप लगा कर वे कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गए थे.

नीतीश बोले जींसटीशर्ट नहीं

पटना. बिहार सरकार ने सचिवालय में काम करने वाले अफसरों और मुलाजिमों के लिए एक फरमान जारी किया है जिस के तहत वे अब दफ्तर में जींसटीशर्ट पहन कर नहीं आ सकेंगे. उन के तड़कभड़क रंगों वाले कपड़ों के पहनने पर भी रोक लगाई गई है.

राज्य सरकार के अवर सचिव शिव महादेव प्रसाद की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि पदाधिकारी और कर्मचारी औफिस संस्कृति के खिलाफ कैजुअल ड्रैस पहन कर दफ्तर नहीं आएंगे. उन्हें फौर्मल ड्रैस पहन कर ही आना होगा.

सुप्रिया ने जताई चिंता

नासिक. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की नेता सुप्रिया सुले ने कहा है कि अपने भंडार से सरकार को नकदी देने का भारतीय रिजर्व बैंक का फैसला संकेत देता है कि देश की माली हालत अच्छी नहीं है.

भारतीय रिजर्व बैंक ने 26 अगस्त को सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपए का लाभांश और अधिशेष भंडार देने को मंजूरी दी थी. इस से वित्तीय घाटे के बढ़े बिना ही अर्थव्यवस्था को मंदी से उबारने में मोदी सरकार को मदद मिलेगी.

इसी मुद्दे को ले कर केंद्र सरकार पर हमला करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा, ‘यह दिखाता है कि देश की अर्थव्यवस्था अच्छी नहीं है. विभिन्न औद्योगिक इकाइयां बंद हो चुकी हैं और बेरोजगारी बढ़ रही है.’

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गहलोत की इच्छा

बाड़मेर. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकारी मैडिकल कालेज के लोकार्पण समारोह में कहा कि सरकार राज्य के हर जिले में मैडिकल कालेज खोलना चाहती है ताकि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का फायदा जनता को मिल सके.

फिलहाल जैसलमेर, सिरोही, करौली और नागौर जैसे विकासशील जिलों में जल्दी ही मैडिकल कालेज खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं.

याद रहे कि एक अस्पताल 8-10 साल में ही बन पाता है. आज कह दो, देखा जाएगा.

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