खतरे में पड़ी ‘नायरा’ की जान, ‘वेदिका’ की वजह से रुकी ‘नायरा-कार्तिक’ की शादी

स्टार प्लस के शो ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में इन दिनों हाई बोलटेज ड्रामा चल रहा है. मेकर्स ने दोबारा टीआरी चार्ट में नंबर वन पर जगह बनाने के लिए शो में नए-नए ट्विस्ट ला रहे हैं. ‘वेदिका’ की ‘नायरा’ और ‘कार्तिक’ की शादी को रोकने का प्लान पूरा होता नजर आ रहा है. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

 ‘वेदिका’ तलाक रोकने के लिए चलती है चाल

अब तक आपने देखा कि ‘वेदिका’ और ‘कार्तिक’ के साथ कोर्ट जाती है, लेकिन ‘वेदिका’ रास्ते में दरगाह जाने के लिए ‘कार्तिक’ कहती है ताकि उन्हें कोर्ट जाने में देरी हो जाए.

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‘नायरा’ करेगी ‘वेदिका’ का प्लान फेल

‘वेदिका’ जानबूझ कर तलाक के पेपर्स को फेक देती है, जो कि ‘नायरा’ के हाथ लग जाते हैं. वहीं ‘नायरा’ भी ‘वेदिका’ और ‘कार्तिक’ को तलाक के पेपर्स देने के लिए दरगाह जाती है.

‘नायरा’ की पड़ी खतरे में जान

अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि ‘नायरा’ दरगाह पहुंचेगी और वह ‘कार्तिक’ से मिलेगी. दूसरी तरफ दरगाह में कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा होगा, जिसके चलते जब ‘नायरा’ ‘कार्तिक’ को तलाक के पेपर्स देगी तो उनके ऊपर ईंटें और सरिये गिर जाएंगी.

क्या बच पाएगी ‘नायरा’

इसी बीच ‘नायरा’ के सरिया लगने से ब्लीडिंग होनी शुरू हो जाएगी और ‘कार्तिक’ अपना हेल्थ छोड़कर ‘नायरा’ को अस्पताल ले जाएगा. इसी के साथ वह बाकी घरवालों को फोन करके ‘नायरा’ के एक्सीडेंट की खबर भी देगा.

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बता दें, ‘वेदिका’ तलाक रोकने के लिए इससे पहले भी कईं चाले चल चुकी है, जिसको लेकर दादी को ‘वेदिका’ पर शक रहता है. अब देखना ये है कि क्या दादी एक बार फिर ‘नायरा’ के एक्सीडेंट को देखते हुए ‘वेदिका’ को बेनकाब कर पाएंगी या ‘वेदिका’ एक बार फिर ‘नायरा’ और ‘कार्तिक’ की शादी को रोकने में कामयाब हो जाएगी.

पिता के रिकशा से आईएएस तक का सफर

लेखक- डा. श्रीगोपाल नारसन एडवोकेट

दुकान जब बंद हो जाती तो वे रात में बनारस की सड़कों पर रिकशा चलाते थे. उन के 4 बच्चे थे, 3 बेटियां और सब से छोटा बेटा, जिस का नाम गोविंद रखा गया था.

पिता ने कुछ पैसे जोड़ कर धीरेधीरे एक रिकशे से 4 रिकशे बना लिए. समय बीतता रहा. पिता ने तीनों बेटियों को बीए तक पढ़ाया और उन की शादी कर दी.

इस परिवार का सब से छोटा सदस्य गोविंद बहुत मेधावी था. वे लोग जिस महल्ले में रहते थे, उस के बगल में ही एक पौश कालोनी थी. 12 साल का गोविंद चूंकि मेधावी था, इसलिए पौश कालोनी के एक बच्चे से उस की दोस्ती हो गई.

एक दिन गोविंद उस के घर गया, जहां दोस्त के पिताजी उस से मिले.

दोस्त के पिताजी ने अपने बेटे से पूछा, ‘‘यह बच्चा कौन है?’’

दोस्त ने कहा, ‘‘मेरा दोस्त है.’’

उन्होंने गोविंद से पूछा, ‘‘किस क्लास में पढ़ते हो?’’

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गोविंद ने बताया, ‘‘7वीं क्लास में.’’

‘‘तुम्हारे पापा क्या करते हैं?’’

‘‘जी, वे रिकशा चलाते हैं.’’

इतना सुनते ही दोस्त के पिताजी आगबबूला हो गए. उन्होंने अपने बेटे को फटकारा, ‘‘अब यही बचा है… रिकशे वालों से दोस्ती करोगे.’’

दोस्त चुप हो कर रह गया और दोस्त के अमीर पिता ने गोविंद को वहां से बेइज्जत कर के निकाल दिया.

मासूम गोविंद को यह समझ ही नहीं आया कि उस के साथ ऐसा क्यों हुआ? उस ने अपने एक रिश्तेदार को यह बात बताई. रिश्तेदार ने कहा कि इन हालात से बाहर निकलने का बस एक ही रास्ता है कि तुम आईएएस बन जाओ.

लेकिन 12 साल के बच्चे को यह जानकारी न थी कि आईएएस क्या होता है? पर उस ने यह ठान लिया था कि उसे आईएएस ही बनना है. उस ने बनारस से ही पहले इंटर किया, फिर गणित से बीए. साथसाथ वह यूपीएससी की तैयारी करने लगा.

उधर पिता रिकशा चला कर परिवार पाल रहे थे और एक के बाद एक बेटियों की शादियां भी कर रहे थे, साथ ही, वे बेटे को पढ़ा भी रहे थे.

यह वह समय था, जब बनारस में 14 घंटे के पावर कट लगते थे और उस दौरान सब लोग जनरेटर चलाया करते थे. किराए के जिस छोटे से कमरे में उन का परिवार रहता था, उस के इर्दगिर्द चारों तरफ जनरेटर चलते थे और उन का भयंकर शोर और धुआं होता था. ऐसे में गोविंद सभी खिड़कियांदरवाजे बंद कर अपने कानों में रुई ठूंस कर पढ़ा करता था.

ग्रेजुएशन करने के बाद गोविंद को यूपीएसएसी की तैयारी के लिए दिल्ली जाना था. लेकिन उस के पिता को एक दिन पैर में हलकी सी चोट लग गई. उन का कायदे से इलाज नहीं हुआ और न ही उन्हें आराम मिला, जिस के चलते घाव बढ़ने लगा, जो बाद में सैप्टिक की हालत तक पहुंच गया.

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उधर गोविंद दिल्ली के मुखर्जी नगर में यूपीएससी की तैयारी के लिए रहने लगा. वह घर से पैसे मंगाता नहीं था. वह दिल्ली में बच्चों को ट्यूशन के रूप में गणित पढ़ाता था और फिर उस के बाद अपनी यूपीएससी की तैयारी करता था.

गोविंद के पास कोचिंग में पढ़ने तक के पैसे नहीं थे. पिता का पैर खराब होता जा रहा था. ट्यूशन भी साल में सिर्फ 8 महीने ही मिलती थी. इस माली मुसीबत के चलते धीरेधीरे सभी रिकशे बिक गए. एकमात्र जमीन का टुकड़ा बचा था, वह पिताजी ने मजबूरी में सिर्फ 4,000 रुपए में बेच दिया. घर में फाका होने लगा था. ऐसे में बहनों ने अपने पति व परिवार से छिपा कर भाई की मदद की.

गोविंद इतिहास और मनोविज्ञान पढ़ रहा था. मनोविज्ञान की कोचिंग में उस की दोतिहाई फीस माफ हो गई. इतिहास की कोचिंग के लिए पैसे न थे, इसलिए उस की तैयारी खुद की. वह अनगिनत रातें भूखे पेट सोया होगा, तब जा कर कड़ी मेहनत से पहली ही कोशिश में गोविंद को यूपीएससी के इम्तिहान में 48वां रैंक मिला और अब वह अरुणाचल प्रदेश में बतौर आईएएस तैनात है.

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पहनी बार बिकिनी में नजर आईं हिना खान, Maldives में दिखा हौट अवतार

हमेशा सुर्खियों में रहने वाली टीवी एक्ट्रेस हिना खान हमेशा फैंस के लिए कुछ नया लेकर आती हैं फिर वो चाहे उनकी लाइफ की नई अपडेट हो या फिर उनके नए काम की. वे हमेशा सोशल मीडिया पर अप टू डेट रहती है जिसके चलते फैंस उनसे काफी कनेक्टिड फील करते है. इसी के साथ ही हिना ने बीते दिनों कुछ फोटोज अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर की जिसमें उन्होनें ओरेंज कलर की बिकिनी पहनी हुई है.

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वायरल हुआ ओरेंज बिकिनी फोटोशूट…

 

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Aaahhhh this smell of salt and sand.. I am wild, beautiful within and free.. just like the sea 🌊 @kurumba_maldives PC- @rockyj1

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समुंदर किनारे ओरेंज कलर की बिकिनी पहनीं हिना खान सचमुच कयामत ढ़ा रही हैं. वैसे तो उनकी हर फोटो सोशल मीडियो पर इतनी वायरल होती है की क्या ही कहें और उनके फैंस उनकी हर फोटो को काफी प्यार भी देते हैं. हर बार की तरह इस बार भी हिना के फैंस ने उनके इस ओरेंज बिकिनी फोटोशूट को भी काफी प्यार दिया है और लगातार लाइक्स और कमेंट्स की बरसात कर रहे हैं.

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फैंस ने की जमकर तारीफ…

 

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A few more😀

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हिना खान के इस बिकिनी फोटोशूट में उनकी अदाएं देख कोई भी उनका दीवाना हो जाएगा. ऐसे में ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि हिना को अपने फैंस को खुश करना बेहद अच्छे से आता है. जैसे ही हिना अपनी कोई भी फोटो सोशल मीडियो पर शेयर करती हैं उनके फैंस बिना देर किए उन फोटोज को वायरल कर देते हैं और खूब सारा प्यार देते हैं.

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अप्सरा से कम नही लग रहीं हिना खान…

 

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Smelling the sea, Feeling the sky @kurumba_maldives

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वैसे हिना खान है हीं इतनी प्यारी की कोई भी उनकी तोरीफ किए बिना रह ही नहीं पाता और उनकी एक झलक देख ही उनको दिल दे बैठता है. अब इन्हीं फोटाज की बात करें तो हिना की इन फोटोज ने तो तहलका ही मचा रखा है. ओरेंज बिकिनी में इतनी हौट अदाएं दिखाती हिना खान किसी अप्सरा से कम नही लग रहीं.

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हिना खान की प्रोफेशनल लाइफ की बात करें तो उन्होनें कलर्स टीवी के सबसे बड़े रिएलिटी शो बिग बौस सीजन 11 में हिस्सा लिया था और उनको पौपुलैरिटी स्टार प्लर के फेमस सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है से मिली थी जिसमें उन्होनें अक्षरा सिंघानिया की भूमिका निभाई थी.

अंधविश्वास: समाधि ने ले ली बलि!

एक समुदाय विशेष के शख्स चमन लाल जोगी  ने यह ऐलान किया कि मैं समाधि लूंगा यह खबर सुर्खियों में रही. शासन प्रशासन अर्ध निंद्रा में उंघता रहा. हालात यह हो गए कि सार्वजनिक रूप से भीड़ की उपस्थिति मे उसने समाधि ले ली. और उसे रोका भी नहीं जा सका.

दरअसल, छत्तीसगढ़ की छवि वैसे भी देश दुनिया में अंधविश्वास रूढ़िवादिता और भोले भाले लोगों की स्वर्ण भूमि के रूप में जाना जाता रहा है. अक्सर यहां अंधविश्वास की घटनाएं घटती रहती हैं शासन सिर्फ औपचारिकता निभाता है, कुछ विज्ञापन जारी कर देता है. कुछ आंसू बहा देता है और फिर सब कुछ वही ढाक के तीन पात होने लगता है. महासमुंद के पचरी गांव में बाजे-गाजे और धूम धाम के साथ समाधि लेने वाले बाबा को जब लोग निर्धारित तिथि पर पांच  दिवस पश्चात  समाधि से निकालने पहुँचे तो सभी की आँखे फटी की फटी रह गयी….!!

समाधि, ढोंग और अंधविश्वास

सबसे त्रासद  स्थिति यह है कि छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिला में एक श्वेत कपड़ा धारी शख्स  ने जब यह घोषणा की कि वे समाधि लेगा और दो चार घंटे नहीं, बल्कि 5 दिन की समाधि लेगा.तब  यह घोषणा  आग की तरह फैल गई . पक्ष में लोग खड़े हो गए . धार्मिक मामला होने के कारण  पुलिस प्रशासन के हाथ बंधे हुए थे,  उसमें इतना साहस नहीं था कि  लोगों को समझा सके  कि ऐसा कतई संभव नहीं है.

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परिणाम स्वरूप समुदाय विशेष की धार्मिक गतिविधि सार्वजनिक रूप से घटित होती चली गई.

पांच दिन होने पर जब समाधि स्थल  पर लोग पहुंचे और सच देखा तो हतप्रभ रह गए.क्योंकि समाधि से बाहर निकलने से पूर्व  का समाधि के अंदर उस शख़्स  का दम घूंट चुका था . सच तो यह है कि समाधि साधना के जूनून ने आखिर एक युवक की जान ले ली… पांच दिनों तक समाधि लेने के बाद जब उसे निकाला गया तो वह मृत था.

जिला प्रशासन ने आत्महत्या रोकने यहां नाम मात्र का ‘नवजीवन’ कार्यक्रम चला रखा है…वहीं अंधविश्वास की आंधी के प्रवाह में  बहकर  ग्राम पचरी का रहवासी  चम्मन लाल जोगी ने समाधि के दौरान दम तोड़ दिया. कुल जमा यह की तपोबल से समाधि लगाना महासमुंद जिले के ग्राम पचरी के एक युवक के लिए जानलेवा साबित हो गया.

दम घुटने से हो गई मौत

दरअसल, 30 वर्षिय चमनदास  ग्राम पचरी के निवासी पिछले पांच सालों से अलग  अलग  अवधि की  खतरनाक समाधि लिया  करता  रहा था. इस समाधि में उसने पहले साल 24 घंटे, दूसरे साल 48 घंटे, तीसरे साल 72 घंटे, चौथे साल 96 घंटे की समाधि ली थी. समाधि लेने के बाद हर साल किसी तरह जान बच जाने की वजह से इस दफे 16 दिसंबर 2019 को 108 घंटों की समाधि के लिए 4 फिट गड्ढे में भुमिगत समाधि के लिए उतरा था.

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पर उसको और उसके भक्तों को क्या मालूम था कि अंधविश्वास की ये समाधि चमनदास को मौत के बाद ही बाहर निकालेगी. पांच दिन बाद जब चमनदास को जब गड्ढे से बाहर निकाला गया तब वह बेहोश था…जहाँ उसे आनन  फानन मे जिला चिकित्सालय ले जाया गया. महासमुंद जिला अस्पताल में जांच  के बाद चिकित्सकों नें उसे मृत घोषित कर दिया.मृतक के रिश्तेदार का कहना है कि  हमने लंबे समय तक समाधि लेने को मना किया था लेकिन  वह नही माना और जान गवा दी. चिकित्सक जी. आर. पंजवानी ने इस संदर्भ में बताया कि  जमीन के अंदर ऑक्सीजन की कमी के वजह से दम घुटने से उसकी मौत हुई है.

बंगलों के चोर

लेखक- रविंद्र शिवाजी दुपारगुडे  

मुंबई शहर के मुलुंड इलाके के रहने वाले सुरेश एस. नुजाजे एक होटल व्यवसायी थे. मुंबई के अलावा उन के बेंगलुरु और दुबई में भी होटल थे. इस के अलावा ठाणे जिले की तहसील शहापुर के खंडोबा गांव में उन का एक फार्महाउस के रूप में ‘ॐ’ नाम का बंगला भी था. वैसे तो 48 वर्षीय सुरेश एस. नुजाजे अपने बिजनैस में ही व्यस्त रहते थे, लेकिन समय निकाल कर अपने परिवार के साथ वह ठाणे स्थित बंगले में आते रहते थे. यहां 4-5 दिन रह कर वह मुंबई लौट जाते थे.

जुलाई, 2019 के दूसरे सप्ताह में भी वह 8 दिनों के लिए परिवार के साथ अपने इस बंगले में आए थे. मुंबई पहुंचने के बाद उन्हें खबर मिली कि बंगले में रहने वाले 8 कुत्तों में से एक कुत्ता बीमार है. उस की बीमारी की खबर सुन कर वह परिवार को मुंबई छोड़ कर अकेले ही कुत्ते के इलाज के लिए फिर से अपने बंगले पर पहुंच गए.

उन्होंने अपने बीमार कुत्ते का इलाज कराया. उन के बंगले की सफाई आदि करने के लिए दीपिका नामक एक महिला आती थी. हमेशा की तरह 19 जुलाई, 2019 को भी वह सुबह करीब 7 बजे बंगले पर पहुंची. उसे सुरेश नुजाजे के बैडरूम की भी सफाई करनी थी, लिहाजा उन के बैडरूम में जाने से पहले उस ने दरवाजा खटखटाया.

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दरवाजा खटखटाने और आवाज देने के बाद भी जब अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो वह अपने साहब को आवाज देते हुए उन के कमरे में चली गई. तभी उस ने देखा कि उस के मलिक सुरेश नुजाजे बैड से नीचे पड़े थे. उन के हाथ बंधे दिखे.

दीपिका ने उन्हें गौर से देखा तो वह लहूलुहान हालत में थे. उन के हाथों के अलावा पैर भी बंधे थे और उन के पेट पर घाव थे. दीपिका ने उन्हें उठाने की कोशिश की पर वह नहीं उठे और न ही कुछ बोले. वह डर गई और बाहर की ओर भागी. वह सीधे वहां रहने वाले जगन्नाथ पवार के कमरे पर गई. उस ने जगन्नाथ पवार को यह खबर दी.

जगन्नाथ पवार ने उसी समय फोन द्वारा उपसरपंच नामदेव दुधाले और भाई रमेश पवार को बता दिया कि सुरेश नुजाजे बंगले में लहूलुहान हालत में हैं. जगन्नाथ पवार के बुलावे पर दोनों उस के पास पहुंच गए.

इस के बाद वे तीनों इकट्ठे हो कर सुरेश नुजाजे के बंगले पर दीपिका के साथ गए. जब उन्होंने बंगले में जा कर देखा तो सुरेश नुजाजे अपने बैडरूम में मृत हालत में थे. यानी किसी ने उन की हत्या कर दी थी.

इस के बाद जगन्नाथ पवार ने मोबाइल फोन से शहापुर पुलिस को सूचना दे दी. हत्या की सूचना मिलने के बाद शहापुर थाने से इंसपेक्टर घनश्याम आढाव, एसआई नीलेश कदम, हवलदार बांलू अवसरे, कैलाश पाटील, कांस्टेबल सुरेश खड़के को साथ ले कर घटनास्थल की तरफ रवाना हो गए.

खून से लथपथ मिली लाश

जब वे ‘ॐ’ बंगले में गए तब वहां उन्हें सुरेश नुजाजे की खून से लथपथ लाश मिली. लाश फर्श पर लकड़ी की मेज के पास पड़ी थी. उन के बगल में एक नीले रंग का तकिया गिरा पड़ा था. साथ ही उन के बैडरूम में लकड़ी की 2 अलमारियां उखड़ी हुई थीं.

अलमारियों का सामान भी इधरउधर बिखरा पड़ा था. शोकेस भी टूटा हुआ था. साथ ही बैड पर मच्छर मारने का इलैक्ट्रिक रैकेट टूटी हुई अवस्था में नजर आया. किसी ने सुरेश के दोनों पैर टावेल से मजबूती से बांधे थे और दोनों हाथ लाल रंग की शर्ट से बांधे थे.

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पुलिस को वैसे तो लग ही रहा था कि सुरेश नुजाजे की मृत्यु हो चुकी है लेकिन वहां मौजूद लोगों के अनुरोध पर पुलिस उन्हें इलाज के लिए शहापुर के सरकारी अस्पताल ले गई लेकिन डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. डाक्टरों ने प्रारंभिक जांच में पाया कि गंभीर रूप से घायल करने के बाद हत्यारों ने इन का गला घोंटा था.

इंसपेक्टर घनश्याम आढाव ने इस वारदात की खबर एसपी (ग्रामीण) डा. शिवाजी राव राठौर और एसडीपीओ दीपक सावंत, क्राइम ब्रांच के इंचार्ज व्यंकट आंधले को दी. कुछ ही देर में ये सभी अधिकारी अस्पताल पहुंच गए.

इस के बाद पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना किया. जांच में पुलिस ने देखा कि बंगले के पीछे का गेट खुला था. इस के अलावा बंगले की खिड़की का ग्रिल भी उखड़ा हुआ था. हत्यारे ग्रिल उखाड़ कर सरकने वाली कांच की खिड़की सरका कर बैडरूम में घुसे थे.

बैडरूम की उखड़ी अलमारियों और शोकेस के टूटने पर पुलिस ने अंदाजा लगाया कि ये हत्यारों ने लूटपाट के इरादे से किया होगा, तभी तो अलमारियों का सामान कमरे में फैला है. इस जांच से यही पता चल रहा था कि सुरेश नुजाजे की हत्या लूट के इरादे से की गई होगी.

पुलिस ने अंदाजा लगाया कि अंदर घुसने पर बंगले के मालिक सुरेश नुजाजे ने शायद बदमाशों का विरोध किया होगा, फिर बदमाशों ने हाथपैर बांधने के बाद उन की हत्या कर दी होगी.

मृतक के घर वाले भी आ चुके थे. उन्होंने पुलिस को बताया कि सुरेश के हाथ की अंगूठियां, ब्रेसलेट, गले में सोने की चेन रहती थी. अलमारी में भी लाखों रुपए रखे रहते थे. ये सब गायब थे. क्राइम ब्रांच ने मौके से कई साक्ष्य जुटाए. एसपी (ग्रामीण) डा. शिवाजी राव राठौर ने हत्या के इस केस को खोलने के लिए एक पुलिस टीम का गठन किया.

पुराने अपराधियों की हुई धरपकड़

पुलिस टीम ने पुराने अपराधियों के रिकौर्ड खंगालने शुरू किए. उन में से कुछ को पुलिस ने पूछताछ के लिए उठा लिया. उन से पूछताछ की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली. कोंकण परिक्षेत्र के स्पैशल आईजी निकेत कौशिक टीम के सीधे संपर्क में थे. इस के अलावा क्राइम ब्रांच की टीम भी मामले की समानांतर जांच कर रही थी.

क्राइम ब्रांच की टीम में सीनियर इंसपेक्टर व्यंकट आंधले, इंसपेक्टर प्रमोद गड़ाख, एसआई अभिजीत टेलर, गणपत सुले, शांताराम महाले, कांस्टेबल आशा मुंडे, जगताप राय, एएसआई वेले, हैडकांस्टेबल चालके, अमोल कदम, गायकवाड़ पाटी, सोनावणे, थापा आदि शामिल थे.

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पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की. जांच के दौरान एक खबरची ने पुलिस को सूचना दी कि जिन लोगों ने सुरेश नुजाजे के बंगले में वारदात को अंजाम दिया, वे भिवंडी इलाके के नवजीवन अस्पताल के पीछे स्थित एक टूटीफूटी इमारत में छिपे हुए हैं.

इस सूचना पर सीनियर इंसपेक्टर व्यंकट आंधले अपनी पुलिस टीम के साथ मुखबिर द्वारा बताई गई जगह पर पहुंच गए और वहां उस बिल्डिंग को चारों ओर से घेर कर उस में छिपे चमन चौहान (25 वर्ष), अनिल सालुंखे (32 वर्ष) और संतोष सालुंखे (35 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया.

उन से पूछताछ की गई तो उन्होंने सुरेश नुजाजे की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. उन से पूछताछ के बाद उन की निशानदेही पर पुलिस ने 22 जुलाई, 2019 को औरंगाबाद से उन के साथी रोहित पिंपले (19 वर्ष), बाबूभाई चौहान (18 वर्ष) व रोशन खरे (30 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया. ये सभी बदमाश महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के रहने वाले थे.

पूछताछ में पता चला कि कत्लेआम के साथ डकैती करने वाली यह अंतरराज्यीय टोली दिन में गुब्बारे या अन्य चीजें बेचने का बहाना कर रेकी करती और रात में वारदात को अंजाम देती थी. इसी तरह इस टोली के सदस्यों ने सुदेश नुजाजे के बंगले की रेकी की थी.

तकिए से मुंह दबा कर घोंटा था गला

वारदात के दिन जब ये बदमाश उन के बंगले के पास गए, तब चोरों की आहट से सुरेश सतर्क हो चुके थे. फिर मौका देख कर ये किसी तरह उन के बंगले में घुस गए. सुरेश ने इन का विरोध किया, पर इतने लोगों का वह मुकाबला नहीं कर सके. बदमाशों ने उन के हाथपैर बांध कर उन पर फावड़े के हत्थे से प्रहार किया.

वहीं बैडरूम में पड़े तकिए से उन का मुंह दबा कर उन्हें मार दिया. कत्ल के बाद सुरेश के शरीर के सारे जेवरात उन्होंने उतार लिए. लकड़ी की अलमारी उखाड़ कर उन्होंने उस में रखे 28 हजार रुपए भी निकाल लिए. हत्या और डकैती की वारदात को अंजाम दे कर वे वहां से फरार हो गए.

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पूछताछ में उन्होंने उस इलाके में 17 वारदातों को अंजाम देने की बात स्वीकार की. सुरेश नुजाजे के बंगले के पास ही दूर्वांकुर और शिवनलिनी बंगले में भी इन अभियुक्तों ने दरवाजे तोड़ कर चोरी की वारदात को अंजाम दिया था.

पुलिस ने इन बदमाशों से बरमा, तराजू, पेचकस, एक मोटरसाइकिल एवं बोलेरो कार के साथ सोनेचांदी के जेवरात भी बरामद किए. पुलिस को पता चला कि इस टोली के साथ कुछ महिलाएं भी अपराध में शामिल रहती हैं. पूछताछ के बाद पुलिस ने उन के साथ की 2 महिलाओं को भी हिरासत में ले लिया.

इस अपराध में पुलिस के पास कोई भी सुराग न होने के बावजूद भी स्थानीय पुलिस ने न सिर्फ मर्डर और डकैती की घटना का खुलासा किया, बल्कि 17 अन्य वारदातों को भी खोल दिया. स्पैशल आईजी निकेत कौशिक ने इस केस को खोलने वाली टीम की प्रशंसा कर उत्साहवर्धन किया.

Bigg Boss 13: ‘नागिन’ एक्ट्रेस ने किया सिद्धार्थ शुक्ला का सपोर्ट, रश्मि देसाई पर लगाए ये इल्जाम

बिग बौस का सीजन 13 काफी दिलचस्प होता जा रहा है और इस गेम को इंट्रस्टिंग कर रही है सिद्धार्थ शुक्ला और रश्मि देसाई की लड़ाई. बीते दिनो हमने देखा की सिद्धार्थ और रश्मि के बीच काफी भयंकर लड़ाई हुई और लड़ाई इस कदर बढ़ गई की दोनो ने एक दूसरे पर चाय तक फेंक दी. भले ही चाय फेंकने की शुरूआत रश्मि ने की हो लेकिन इस लड़ाई में एक कंटेस्टेंट ऐसा भी था जो बिना किसी मतलब के सिद्धार्थ से लड़ता दिखाई दिया और उस कंटेस्टेंट का नाम है अरहान खान.

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घटती जा रही है रश्मि देसाई की फैन फौलोविंग…

जी हां जब रश्मि देसाई और सिद्धार्थ शुक्ला आपस में लड़ रहे थे तो इतना तो सबको समझ में आ रहा था पर बिना किसी मतलब के अरहान ने भी सिद्धार्थ पर चाय फेंक दी जिस वजह से सिद्धार्थ का गुस्सा और ज्यादा बढ़ गया और वे आपे से बाहर हो गए. वैसे तो रश्मि देसाई और सिद्धार्थ शुक्ला दोनो ही टेलिवीजन इंडस्ट्री का जाना माना नाम है पर ऐसा देखने में आ रहा है कि रश्मि के इस तरह के बिहेवियर को देख उनकी फैन फौलोविंग घटती जा रही है.

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को-स्टार जैसमीन भसीन का आया बड़ा बयान…

रश्मि देसाई और सिद्धार्थ शुक्ला की लड़ाई को देख उन्के फैन क्लब्स भी दो हिस्सो में बट गए हैं. पर ज्यादातर लोगों का कहना यही है कि रश्मि देसाई जान बूझ कर सिद्धार्थ को टारगेट कर उन्हें गुस्सा दिलाती हैं और गर्लकार्ड प्ले करती हैं. इसी बीच उनके सीरियल “दिल से दिल तक” में रश्मि के साथ काम कर चुकीं उनकी को-स्टार जैसमीन भसीन का एक बयान भी सामने आया है.

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रश्मि साध रही हैं सिद्धार्थ पर निशाना…

एक इंटरव्यू के दौरान जैसमीन भसीन ने बताया कि, ‘सिद्धार्थ कभी भी किसी लड़की के साथ बदतमीजी नहीं कर सकते हैं. मैं उनके साथ काम कर चुकी हूं तो मुझे अच्छे से पता है कि वह कैसे इंसान हैं. रश्मि आए दिन उन पर निशाना साध रही है, जोकि बिल्कुल गलत है.’ इसी विषय पर आगे बात करते हुए जैसमीन ने बताया कि, ‘सिद्धार्थ सिर्फ गेम के लिए ऐसी बातें नहीं कहेंगे, उनका दिल दुखा है और इसी वजह से वह आपे से बाहर हो गए. रश्मि को सोच-समझकर इस गेम में आगे बढ़ने की जरुरत है.’

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यही सदस्य रहेंगे नोमिनेटिड…

बीते एपिसोड में आपने देखा कि शो के होस्ट सलमान खान ने सभी घरवालों की गलतफहमियां दूर करवाईं और असीम को एक अच्छी खबर सुनाई कि वे कैप्टन होने की वजह से नोमिनेट होने से बच गए हैं. बीते वीकेंड के वौर में घर से कोई भी सदस्य घर से बेघर नहीं हुआ और यही नोमिनेटिज सदस्य अगले हफ्ते के लिए भी नोमिनेटिड ही रहेंगे जिसमें से सिद्धार्थ शुक्ला, अरहान खान, विशाल अदित्य सिंह, मधुरिमा तुली, शेफाली बग्गा और आरती सिंह का नाम शामिल है.

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‘अबकी बार 65 पार’ का हुआ सूपड़ा साफ, झारखंड में सोरेन सरकार

इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का ‘अबकी बार 65 पार’ का नारा पसंद नहीं आया और मतदाताओं ने इस नारे को नकार दिया. झारखंड के मतदाताओं ने ‘अबकी बार सोरेन सरकार’ नारे को अपना लिया है. अभी तक के रुझानों से साफ है कि कांग्रेस, राजद और झामुमो गठबंधन के मुख्यमंत्री प्रत्याशी हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य की अगली सरकार बनेगी.

भाजपा 30 से कम सीटों पर सिमटती दिख रही है. जबकि झामुमो गठबंधन 41 सीटों के बहुमत के आंकड़े को पार कर रही है. गौरतलब है कि भाजपा इस चुनाव में अकेले मैदान में उतरी थी. ऐसे में उसके साथ कोई सहयोगी भी नहीं है, जो किसी तरह उसकी नैया पार लगा सके. भाजपा के लिए सबसे शर्मनाक स्थिति यह है कि मुख्यमंत्री रघुवर दास स्वयं जमशेदपुर पूर्व सीट से चुनाव हार गए और उनके प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय सरयू राय ने जीत दर्ज की.

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दूसरी ओर, झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन ने हेमंत सोरेन को चुनाव पूर्व ही मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर दिया था, जिसका लाभ भी गठबंधन को हुआ है. भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने यहां जोरदार चुनाव प्रचार किया था. जबकि गठबंधन की ओर से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी हेमंत सोरेन के साथ साझा रैलियों को संबोधित किया था.

भाजपा की इस स्थिति के संबंध में जब मुख्यमंत्री रघुवर दास से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जनादेश का सम्मान है. उन्होंने ’65 पार’ के नकारने के संबध में पूछे जाने पर कहा कि लक्ष्य कभी भी बड़ा रखना चाहिए, और उसी के अनुरूप लक्ष्य बड़ा रखा गया था. झामुमो के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा ने यह नारा झामुमो गठबंधन के लिए दिया था.

पिछले चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन तब सरकार बनाने के करीब थी और उसके साथ सहयोगी भी थे. 2014 में भाजपा ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी। चुनाव के बाद झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) के छह विधायक भी उसके साथ आ गए थे.

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क्या करें जब पड़ोस की लड़की भाने लगे

खैर, मसला यह है कि क्या करें जब पड़ोस की लड़की भाने लगे, उस के लिए दिल में कुछकुछ होने लगे और उसे देखने भर से मन न भरे. पहली बात जो इस मसले में जान लेना बहुत जरूरी है, यह है कि पड़ोस के प्यार के बारे में शायद आप को अब भी कुछ दुविधा हो कि यह प्यार है या नहीं, लेकिन, पूरे महल्ले के लिए तो आप का उसे एक नजर देखना भर ही “पक्का इन का चक्कर चल रहा है” कहने के लिए काफी होगा. तो, जरा संभल कर.

प्रोपोज करने से पहले सोच लें यदि आप यह सोचें की आप को अपने सामने वाले घर में रहने वाली लड़की अच्छी लगती है और आप के दिमाग में उसे देखते ही ‘मेरे सामने वाली खिड़की में एक चांद सा टुकड़ा रहता है’ गीत गुनगुनाने लगता है, तो इस का मतलब यह नहीं कि आप जा कर सीधा प्रोपोज कर दें.

पहले अपनी फीलिंग्स को ले कर क्लियर हो जाएं कि सच में आप उसे चाहने लगे हैं या यह छोटा मोटा क्रश है. इस के बाद उस लड़की के हावभाव नोटिस करें. अगर वह भी आप को उस नजर से देखती है जिस से आप देखते हैं, अगर वह भी आप को नोटिस करती है, अगर उस ने सच में कोई हिंट दिया है तो आप उसे प्रोपोज करने के बारे में सोच सकते हैं, नहीं तो नहीं.

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हां, परंतु उस का अपनी खिड़की पर आ कर बाल सुखाना और खिड़की का पर्दा खुला रखना आप के लिए कोई संकेत नहीं है, यह भी ध्यान रखें. उस की सामान्य क्रियाओं को प्रतिकिर्याओं के रूप में लेने की कोशिश न करें.

शब्दों का चुनाव सही हो

अगर आप को उस लड़की को प्रोपोज करना है तो अपने शब्दों का चुनाव सही रखना बेहद जरूरी है. उसे दो दिन पहले देखा और तीसरे दिन जा कर यह कह देना कि मैं तुम्हें बेहद प्यार करता हूं और तुम्हारे बिना मर जाऊंगा, बेतुका है. फिल्म रांझना के कुंदन बनने से कुछ होने वाला नहीं है, थोड़े समझदार व्यक्ति की तरह सोचें. यदि आप उसे पसंद करते हैं तो उसे यह कहें कि आप को वह पसंद है. आप को उसे देखना अच्छा लगता है तो उसे यह कहें कि वह खूबसूरत है और आप की नजरें उस पर रुक जाती हैं. जवानी के जोश में और अपने खुद के भ्रम में उस लड़की को उलझाने की कोशिश न करें. प्यार को चलता फिरता शब्द न बनाएं.

गति धीमी रखें

यदि आप की पड़ोस की लड़की भी आप को उतना ही पसंद करती है जितना आप करते हैं तो खुशी के मारे हर चीज़ हबड़तबड़ में न करें. आज उसे खत भेजना तो कल बाजार में हाथ पकड़े घूमना और परसो उसे कहना कि किस करे या सेक्स करे, गलत है. चीज़ें शुरू के दिनों में जितनी अच्छी लगेंगी ब्रेकअप होने के बाद उतनी ही खलेंगी भी. वैसे भी जल्बाजी करने पर चीज़े बिगड़ती ही हैं, फल अपना समय ले कर ही उगते हैं, जल्बाजी करने पर पेट में रसायन ही जाता है जो जानलेवा होता है.

आसपड़ोस का रखे ध्यान

अपने प्यार में इतना भी न खो जाएं कि आप आसपास देखना ही भूल जाएं. पड़ोस की लवस्टोरी में परिवार और पड़ोस की भी बड़ी भूमिका होती है. यदि जाने-अनजाने किसी को आप दोनों के प्रेमप्रसंग के बारे में पता चलता है तो यह आप दोनों के रिश्ते का अंत भी हो सकता है. यह न भूलें कि भारतीय परंपरा और प्रतिष्ठा से लिप्त परिवारों के लिए लड़के लड़की का शादी से पहले ‘प्यार’ का नाम लेना भी “थूथू” से कम नहीं. तो, बाजार में हाथ पकड़े न घूमें, हमेशा उसे ही ताकते न रहें, इशारों इशारों में इतनी भी बातें न करें कि पूरा महल्ला ही इस का दर्शक बन जाए.

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दोस्तों को हर बात न बताएं

माना दोस्तों से कुछ छुपाना नहीं चाहिए हम ने बचपन से सीखा है लेकिन इस का मतलब यह नहीं कि आप इस बात को अपने अंदर इतना घुसा लें कि आप अपने प्रेमप्रसंग की बातें हर किसी को ही बताने लगें. आप का दोस्त यदि आप को जानता है तो उस लड़की को भी जानता ही होगा. एक ही महल्ले में रहने के कारण आप का दोस्त भी उस लड़की को हमेशा ‘भाभी’ की नजर से ही देखेगा जोकि सही नहीं है, क्योंकि इस से उस लड़की को अटपटा लग सकता है.

आप यदि अपने दोस्तों को अपने और उस लड़की के शारीरिक संबंधों के बारे में बताते फिरेंगे तो यकीन मानिए वे उस लड़की को वासना की नजर से देखने लगेंगे. कितनी ही बार तो ऐसी घटनाएं भी सामने आई हैं जब दोस्तों ने अपनी ही दोस्त की गर्लफ्रेंड को छेड़ा या उस के साथ बलात्कार की कोशिश की है. तो, जरा संभल कर.

पारिवारिक अस्मिता का ध्यान रखें

पड़ोस के प्यार में अकसर लड़के-लड़कियां पारिवारिक अस्मिता का ध्यान रखना भूल जाते हैं. एकदूसरे से छत पर छुपछुप कर मिलना, एकदूसरे के घर में घुस जाना, फंक्शन का फायदा उठा कर एकदूसरे को भरी महफिल में छूने की कोशिश करना, गलत है. कुछ भी करने से पहले अच्छी तरह सोच लें. इस पड़ोस के प्यार के पकड़े जाने पर आप और आप का परिवार तो आहत होते ही हैं, साथ ही लड़ाई झगड़ा होता है जिस का मनोरंजन पूरा महल्ला उठाता है और मजे लेता है. अपनी मोहब्बत को अपने परिवार की इज्जत उछालने का जरिया न बनने दें.

ब्रेकअप को सर पर न चढ़ने दें

हो सकता है आप को लग रहा हो कि अभी तो आप की लवस्टोरी शुरू भी नहीं हुई और मैं ब्रेकअप की बातें करने लगी. लेकिन, यह समझना भी बेहद जरूरी है. पड़ोस के प्यार में प्राइवेसी बहुत कम होती है, एकदूसरे का घर भी आसापास ही होता है इसलिए. ऐसे में यदि आप का ब्रेकअप हो जाए तो दो चीज़ें हो सकती हैं. पहला, आप इस ब्रेकअप से इतना टूट गए हैं कि उस लड़की की हंसी भी आप को अंगारों जैसी जला रही है.

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दूसरा, आप उस लड़की को अपनी खुशी दिखा कर जलाना चाहते हैं. दोनों ही मामलों में कुछ भी करने से पहले सोच लें. यह वही लड़की है जिस की चाहत में आप कुछ दिन पहले तक पागल हो गए थे, इसलिए अब उस के लिए कुछ बुरा सोचना या उस को नुक्सान पहुंचाने जैसी चीजें न सोचें. जो हो गया, सो हो गया. बातों को पकड़ कर न बैठे रहें बल्कि आगे बढें.

क्या क्षेत्रीय दल के वापसी का समय आ गया है !

2014 के चुनाव के बाद कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए , तो 2018 तक क्षेत्रीय पार्टी के नेताओं को कुछ कमाल नहीं देखा पाए , लेकिन बीते कुछ महीनों के चुनावी नतीजों में इनको शक्ति एक बार फिर उभरने लगी है .

2017 के दिसम्बर में केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा का शासन कई राज्यों के सत्ता में भी था . भारत के एक वृहद भूभाग पर था , वहीं 2019 के अंत आते आते वह सिमट कर आधे पर आ गया.

इसमें भाजपा के मुख्य प्रतिद्वंदी पार्टी कांग्रेस ने अपने क्षेत्रीय चेहरों के मदद से कई राज्यों में सत्ता में वापसी का रास्ता तय किया, तो दूसरे तरफ कई अन्य राज्यों के क्षेत्रीय क्षत्रपों ने अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए कई राजनीतिक पार्टी से समझौता कर सत्ता तक पहुंचने का रास्ता साफ किया.

सत्ता में वापसी करें वाले इन क्षत्रपों में हरियाणा के जेजेपी के दुष्यत चौटाला , आंध्र प्रदेश के वी एस आर के जगन मोहन रेड्डी , महाराष्ट्र के शिवसेना के ठाकरे एवम् एन सी पी के पावर फैमली , झारखंड में जे.एम.एम के हेमंत सोरेन हैं.

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हरियाणा में तो भाजपा ने चुनाव परिणामों के बाद जे.जे.पी से गठबंधन के सत्ता को अपने पास ही बरकरार रखने में कामयाबी पाई , जबकि महाराष्ट्र में अपने ही पूर्व सहयोगी दल शिवसेना से टकराव कर सत्ता से बाहर हो गई.

झारखंड में पार्टी का किसी से गठबंधन नहीं हुआ . पार्टी आत्मविश्वास से चुनाव में उत्तरी, लेकिन परिणाम सीटों के नहीं बदल पाया. वोट प्रतिशत में तो बढ़ोतरी हुई लेकिन सीटों के संख्या ने उम्मीद से अधिक गिरावट देखने को मिला.

परिणास्वरूप भाजपा के हाथ से एक और राज्य सत्ता से निकल गया . इन सब के पीछे कहीं ना कहीं क्षेत्रीय दलों के आपसी समझदारी और किसी भी शर्त पर सत्ता में रहेंगी की जिद्द है.

अगर समय रहते अगर केंद्रीय सत्तारूढ़ राजनीतिक दल भाजपा इन बातों पर गौर नहीं करती है, तो एक बार फिर क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियां सत्ता में होगी.

झारखंड का चुनावी नतीजे बिहार को भी प्रभावित करेंगे . जहां तक संभव है , आरजेडी जो इस झारखंड के जे.एम.एम के चुनावी गठबंधन में सहयोगी है, वहीं सरकार में भी भूमिका होगी . लंबे समय के बाद सरकार में आने के बाद आरजेडी के लिए यह जीत संजीवनी का काम करेंगी . वहीं इसकी भी पूरी संभावना है कि रिम्स में लालू के अच्छे दिन आ गए हैं . वह वहां अपना दरबार लगा पाएंगे. अगले साल बिहार में चुनाव है , इसका असर साफ तौर पर बिहार में देखने को मिलेगा.

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साथ ही इन इस पराजय के बाद भाजपा से बिहार चुनाव में अपने लिए अधिक सीटों को मांग कर अगर नीतीश कुमार अपने पार्टी के लिए करते है तो उसमें कोई नई बात नहीं होगी. आगामी छह महीनों में भाजपा को इन बातों पर ध्यान देना ही होगा नहीं तो बिहार विधानसभा चुनाव में भी परिणाम अनुकूल नहीं होगा.

Bigg Boss 13: अरहान ने दी सिद्धार्थ पर एसिड फेंकने की धमकी, देखें वीडियो

बिग बौस के फैंस को बीते दिनों काफी बड़ा झटका लगा जब उन्होनें सिद्धार्थ शुक्ला और रश्मि देसाई को इतनी बुरी तरह आपस में भिड़ते हुए देखा. जैसे जैसे रश्मि और सिद्धार्थ की लड़ाई बढ़ती गई वैसे वैसे फैंस के दिलों की धड़कनें भी बढ़ती गईं क्योंकि इन दोनों के बीच लड़ाई सिर्फ मुंह से नहीं बल्कि हाथापाई पर पहुंच गई थी और हाथापाई की शुरूआत और सुद्धार्थ शुक्ला को उक्साने में सबसे बड़ा हाथ रश्मि देसाई का ही रहा.

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अरहान ने की सिद्धार्थ पर तेजाब फेंकने की बात…

जैसा की हम सबने देखा की चाय फेंकने की शुरूआत रश्मि देसाई ने की और जैसे ही रश्मि ने चाय का कप फेंका उसके बाद सिद्धार्थ अपना आपा खो बैठे और उन्होनें भी रश्मि पर पानी फेंका. पर इस बीच रश्मि के बेहद करीबी दोस्त अरहान खान ने आकर बात और आगे बढ़ा दी. बीते दिनों एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है जिसमें कंटेस्टेंट अरहान खान सिद्धार्थ शुक्ला के मुंह पर तेजाब फेंकने की बीत कर रहे हैं.

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रश्मि-सिद्धार्थ के झगड़े में फटी अरहान की शर्ट…

जब रश्मि और अरहान की लड़ाई हो रही थी तो जबरदस्ती ही अरहान बीच में कूद पड़े और सिद्धार्थ के आगे आ गए और तभी सिद्धार्थ का गुस्सा सांतवें आस्मान पर पहुंच गया और उन्होनें अरहान को पकड़ कर अपनी तरफ खींचते हुए कहा, “तेरा क्या लेना देना था इसमें” और इसी के चलते अरहान की शर्ट फट जाती है जिस बात का वे इतना बड़ा मुद्दा बना लेते हैं.

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सलमान ने लगाई जमकर क्लास…

बीते वीकेंड के वौर में सलमान ने रश्मि देसाई और सिद्धार्थ शुक्ला की जमकर क्लास लगाई और रश्मि के कहा कि वे सिद्धार्थ को बार बार पोक कर रही थी “कैसी लड़की, कैसी लड़की” पूछ कर और वे अपना मजाक खुद बना रही थीं जबकी सिद्धार्थ का वे मतलब बिल्कुल नहीं था जैसा वे सोच रही थीं और जैसा उन्होनें खुद के करैक्टर को उछाला है.

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