इस TV Actress ने मुंबई छोड़ कर गोवा में रहने का किया फैसला, शेयर की Hot Photos

टेलिवीजन इंडस्ट्री (Television Industry) की पौपुलर एक्ट्रेस मेघा गुप्ता (Megha Gupta) इन दिनों काफी चर्चा में हैं. मेघा गुप्ता के चर्चा में बने रहने का कारण है उनका मुंबई (Mumbai) छोड़कर गोवा (Goa) में नया घर बसाना. जी हां खबरों के अनुसार उनका कहना ये हैं कि वे अब टीवी सीरियल्स/डेली सोप्स (TV Serials/Daily Soaps) नहीं करना चाहती हैं और अगर उनके पास किसी अच्छे प्रोजेक्ट का औफर आता है तो ही वे मुंबई जाकर फिर से काम करेंगी.

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I have a question. What are you craving for a meal ? I want my chachis Punjabi Pakode waale kadhi chawal and mom’s keema paratha. Both are drool worthy and total sleep tonics. Once I almost missed my Delhi-Mumbai because I couldn’t stop eating the kadhi chawal she’d made for me 😜🍲✈️ Makes me want to say – Somebody call 911, I caynnnnnt staaaaaap eating – total @pujiwoo style 😂😂 @shahdanc @_notorious_d.i.g . . . . . . . . #meghagupta #mood #food #carbs #white #zara #bohochic #islandliving #hm #bershka #bohostyle #aztec #denim #fat #muscle #health #protein #raybans #bohovibes #goa #india #tribal #tattoo #gold #travel #shotoniphone #punjabibynature #ferozpurwaale #punjabi

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टीवी एक्ट्रेस मेघा गुप्ता सोशल मीडिया (Social Media) पर काफी एक्टिव रहती हैं और एक्टिव रहने के साथ ही वे अपने फैंस के साथ कनेक्टिड (Connected) रहती हैं. वे अपने से जुड़ी हर नई अप्डेट अपने फैंस के साथ शेयर करती ही रहती हैं साथ ही वे अपनी बोल्ड (Bold) और हौट (Hot) फोटोज से भी अपने फैंस का दिल जीत लेती हैं.

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एक्ट्रेस मेघा गुप्ता (Actress Megha Gupta) को अपने फैंस को खुश करना बेहद अच्छे से आता है और उन्हें ये बात पता है कि कैसे अपने फैंस को एंटरटेन करना है, इसी वजह से वे सोशल मीडिया पर अपनी सेक्सी (Sexy) फोटोज से अपने फैंस को दीवाना बनाती रहती हैं. हाल ही में उन्होनें अपनी कुछ फोटोज अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट (Official Instagram Account) से शेयर की हैं जिसमें वे बेहद ही खूबसूरत लग रही हैं.

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इन फोटोज में एक्ट्रेस मेघा गुप्ता (Megha Gupta) ने अपनी पूरी बौडी को अच्छे से एक्सपोज किया और साथ ही बिकीनी पहन कर उन्होनें अपने फैंस के दिलों की धड़कने भी बढ़ा दी. मेघा की इन फोटोज पर उनके चाहने वाले खूब प्यार बरसा रहे हैं और कमेंट्स कर उनकी बोल्डनेस की जमकर तारीफ कर रहे हैं.

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नाई से बाल कटाना कहीं भारी न पड़ जाए

कोरोना वायरस के कहर ने पूरे देश को घरों में कैद रहने मजबूर कर दिया है.अब जितने भी कोरोना के नये मामले आ रहे हैं, उनका कारण कम्यूनिटी ट्रांसफर ही है.

लौक डाउन को एक महिने से अधिक का समय हो चुका है. ऐसे में लोगों के सिर के बाल बढ़ रहे हैं. पुरूषों का सेलून,मेंस पार्लर और महिलाओं का ब्यूटी पार्लर जाना बंद है.पुरूष  घर पर सेबिंग कर दाड़ी के बालों से तो निजात पा लेते है, लेकिन गर्मी के मौसम में सिर के बढते बाल परेशानी का सबब बन रहे हैं.

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अब लोग यह सोचकर बेसब्री से लौक डाउन खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं कि सब कुछ खुल जायेगा और सबसे पहले वे हेयर कटिंग सेलून पर जाकर अपनी हजामत करवायेंगे. लौक डाउन के खुलते ही सेलून और पार्लर पर हेयर कटिंग बनवाना आपको भारी भी पड़ सकता है.लौक डाउन खुलते ही सेलून में आने वाले लोगों की भीड़ से कोविड-19 का संक्रमण होने का खतरा ज्यादा बढ़ सकता है.

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के छोटे से गांव बड़गांव में लौक डाउन के बाद भी एक हज्जाम ने अपने सेलून पर कटिंग दाड़ी बनाने का काम जारी रखा.गांव वाले इस बात से खुश थे कि उनकी कटिंग दाड़ी का काम आसानी से हो रहा है. सेलून चलाने वाला नाई  एक ही कपड़े से  कई लोगों की कटिंग और शेविंग करता रहा . गांव में इंदौर से आये एक युवक के कोरोना पाज़ीटिव होने के बाद जब गांव के लोगों को यह पता चला कि उस युवक ने गांव के नाई के सेलून पर दाड़ी बनवाई थी,तो गांव में हड़कंप मच गया.

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ख़बर फैलते ही खरगोन जिले के  नायब तहसीलदार मुकेश निगम ने पुलिस बल और स्वास्थ्य अमले के साथ बड़गांव पहुंचकर पूरे गांव को सील कर दिया. नायब तहसीलदार निगम ने बताया कि पिछले दिनों एक युवक इंदौर से गांव आया था. गांव आने के बाद उस व्यक्ति ने एक हज्जाम के यहां जाकर दाढ़ी बनवाई. हज्जाम को इस बात की भनक तक नहीं थी कि दाढ़ी बनाकर जो युवक गया है ,वो कोरोना से संक्रमित है. हज्जाम रूटीन काम में लगा रहा.उसके यहां गांव के बाक़ी लोग भी बाल-दाढ़ी बनवाने आते जाते रहे. बाद में पता चला कि इंदौर से लौटे युवक का तो पहले से ही जांच के लिए नमूना लिया गया था. जब रिपोर्ट आई तो पता चला युवक कोरोना पॉजिटिव है.धीरे-धीरे जब गांव में कोरोना के मरीज़ों की पहचान करने की शुरुआत हुई तो एक के बाद एक छह लोग पॉजिटिव निकले.जिन लोगों ने भी उस हज्जाम के यहां से दाढ़ी-कटिंग करवाई और जो उसके संपर्क में आए उनमें से 26 लोगों की पहचान कर उन सबके नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए तो  उनमें से छह लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है.

प्रशासन की जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि गांव के उन लोगों की शेविंग, कटिंग एक ही कपड़े से होने के कारण रह संक्रमण हुआ है.सीएमएचओ डॉक्टर दिव्येश वर्मा का कहना है कि बड़गांव के 6 ग्रामीण पॉजिटिव पाए गए हैं.गांव के नाई द्वारा एक ही संक्रमित कपड़े का उपयोग अन्य लोगों के साथ भी करने से यह संक्रमण फैला है. स्वास्थ महकमे के बीएमओ डॉक्टर दीपक वर्मा का कहना है कि 26 में से अभी 23 लोगों की ही रिपोर्ट आई है, बचे हुए तीन लोगों की रिपोर्ट आना बाकी है. पॉजिटिव मरीजों को रात में ही अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है,जहां उनका इलाज शुरू हो गया है. गांव में  मरीजों के 34 परिजनों को होम क्वारंटाइन किया गया है.इसके अलावा पंचायत गांव को सैनिटाइज कर रही है. गांव को सील कर  पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया है.

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वैसे 3म‌ई के बाद भी इस बात की संभावना कम है कि हेयर कटिंग सेलून या ब्यूटी पार्लर खुलेंगे. फिर भी यदि ये खुलते हैं तो अभी और कुछ दिन इनमें जाने से बचना होगा. अभी शादी विवाह के अलावा सभी प्रकार के फंक्शन पर बंदिश लगी है तो महिलाओं को भी ब्यूटी पार्लर जाने से परहेज़ करना चाहिए.यदि मजबूरन जाना ही पड़े तो ध्यान रहे कि मुंह पर मास्क और हाथों ग्लब्ज पहनकर ही इन स्थानों पर जाएं. कटिंग,सेबिंग ,फेशियल ,मसाज, थ्रेडिंग,हेयर स्टाइल कराने घर से साफ कपड़ा लेकर जाएं और हज्जाम और ब्यूटिशियन से कहें कि वो भी हर वार अपनी कैंची,कंघी,  ब्रश , ग्रूमिंग मशीन आदि उपकरणों को गर्म पानी से अच्छी तरह साफ़ करें. हज्जाम और ब्यूटिशियन भी मुंह पर मास्क, हाथों में ग्लब्ज के साथ सेनेटाइजर इस्तेमाल करे. आपके द्वारा बरती जाने वाली ये सावधानियां आपके साथ ही पूरे समाज को कोरोना के संक्रमण से बचा सकती हैं.

प्रिया मेहरा मर्डर केस भाग 1 : लव कर्ज और धोखा

सालोंसाल से एक कहावत चली आ रही है कि मुंबई एक ऐसा शहर है जो कभी नहीं सोता. यह हकीकत भी है, क्योंकि मुंबई के लाखों लोग रातरात भर जागते हैं. इन में हजारों लोग फिल्म और टीवी इंडस्ट्री से जुड़े भी होते हैं, जिन की रातरात भर शूटिंग चलती है. मुंबई में बड़े लोगों की पार्टियां भी रात में ही होती हैं. रात में सैरसपाटे पर निकलने वालों की भी कोई कमी नहीं है.

मुंबई जैसी भले ही न हो, पर रातों को जागने और पार्टियां करने वालों की कमी दिल्ली में भी नहीं है. गुड़गांव में रात भर खुलने वाले रेस्तराओं, पबों, मौल और होटलों की कमी नहीं है, जिन की वजह से दिल्ली के पार्टी कल्चर को काफी बढ़ावा मिला है. तमाम लोग ऐसे भी हैं जो रहते दिल्ली में है और दोस्तों, परिवार या गर्लफ्रैंड के साथ खाना खाने हरियाणा क्षेत्र में जाते हैं. इसी के चलते दिल्ली की सीमा से लगे कुछ ढाबे और मोटल इतने मशहूर हो गए हैं कि रात में वहां बैठने की जगह नहीं मिलती.

उपर्युक्त बातों का इस कहानी से कोई लेनादेना नहीं है, यह सिर्फ प्रसंगवश कही गई हैं. क्योंकि इस कहानी के पात्र पंकज मेहरा और प्रिया मेहरा भी रात में ही घूमने निकले थे. पंकज मेहरा और प्रिया मेहरा रोहिणी सैक्टर-15 के सी ब्लौक में रहते थे. मंगलवार 24 अक्तूबर की रात को पंकज और प्रिया अपने 3 साल के बेटे नाइस को साथ ले कर अपनी मारुति रिट्ज कार से घूमने निकले.

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दोनों का इरादा गुरुद्वारा बंगला साहिब जाने का था. पंकज और प्रियंका के लिए यह कोई नई बात नहीं थी. दोनों कभी गुरुद्वारा बंगला साहिब तो कभी गुरुद्वारा नानक प्याऊ जाते रहते थे. इस की एक वजह यह भी थी कि पंकज का बिजनैस था और उस का पूरा दिन व्यस्तता में बीतता था.

24 अक्तूबर की रात करीब 10 बजे पंकज और प्रिया तैयार हो कर अपनी कार से निकले. उन के साथ उन का बेटा नाइस भी था. मुखर्जीनगर की हडसन रोड पर पंकज के भाई का रेस्टोरेंट था. पहले पतिपत्नी वहीं गए. वहीं पर खाना भी खाया. तब तक आधी रात हो चुकी थी. रेस्टोरेंट में काफी वक्त गुजारने के बाद दोनों गुरुद्वारा बंगला साहिब के लिए निकले. बड़े गुरुद्वारों की खास बात यह होती है कि वहां गुरुग्रंथ साहिब का पाठ कभी नहीं रुकता. द्वार बंद होने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता. पाठ में शामिल होने वाले भी रात हो या दिन, कभी भी गुरुद्वारे जा सकते हैं.

बंगला साहिब पहुंच कर पंकज ने पार्किंग में कार खड़ी की और पतिपत्नी अंदर जा कर पाठ में बैठ गए. नाइस तब तक सो चुका था. काफी देर वहां रुकने के बाद पंकज ने प्रिया से कहा, ‘‘भूख लग आई है, चलो बाहर चल कर कुछ खाते हैं.’’

प्रिया बेटे को गोद में उठा कर खड़ी हो गई. दोनों गुरुद्वारे से बाहर आ गए. रात के 3 बजे बाहर कुछ मिलने का सवाल ही नहीं था. सड़कें सुनसान पड़ी थीं. पंकज ने प्रस्ताव रखा, ‘‘चलो, घर चलते हैं, रास्ते में कहीं कुछ मिला तो खा लेंगे.’’

प्रिया बेटे को ले कर आगे की सीट पर बैठ गई. पंकज ने ड्राइविंग सीट संभाली, कार सुनसान पड़ी सड़क पर दौड़ने लगी. रिंग रोड से होते हुए जब पंकज की कार रोहिणी जेल जाने वाली रोड पर पहुंची तो वहां से उस ने बादली रेडलाइट से यू टर्न ले लिया. उस जगह से रोहिणी सेक्टर-15 के सी ब्लौक स्थित उन का फ्लैट 5-7 मिनट की ड्राइविंग दूरी पर था.

बेमौत मारी गई प्रिया, पति लाश को ले कर पहुंचा अस्पताल

पंकज और प्रिया घर पहुंच पाते, इस से पहले ही एक हृदयविदारक घटना घट गई. पुलिस कंट्रोल रूम से 4 बज कर 20 मिनट पर थाना शालीमार बाग को सूचना मिली कि कार रोक कर एक महिला को गोली मार दी गई है और उस का पति घायल महिला को रोहिणी स्थित सरोज अस्पताल ले गया है. सूचना मिलते ही पुलिस सरोज अस्पताल जा पहुंची. वहां डाक्टरों ने बताया कि प्रिया की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी.

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मृतका प्रिया का पति पंकज मेहरा वहीं पर मौजूद था. वह 3 साल के बेटे नाइस को गोद में थामे खड़ा था, जो बुरी तरह सहमा हुआ था. जिस कार में प्रिया को गोली मारी गई थी, वह भी वहीं खड़ी थी. कार की आगे की सीट पर और उस के नीचे खून ही खून फैला था. दोनों ओर के आगे वाले शीशे भी टूटे थे. पुलिस ने प्रिया की डैडबौडी का मुआयना किया. प्रिया के गले और चेहरे पर 2 गोली लगी थीं.

प्राथमिक लिखापढ़ी के बाद पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. पंकज ने काफी पहले फोन कर के इस घटना के बारे में प्रिया के मायके वालों और अपने घर वालों को बता दिया था. वे लोग भी अस्पताल आ गए थे.

पुलिस ने पंकज से प्राथमिक पूछताछ की तो उस ने बताया, ‘‘जब मैं ने बादली रेडलाइट से यू टर्न लिया, तभी हरियाणा के नंबर वाली सफेद स्विफ्ट कार नजर आई. उस ने तेज गति से ओवरटेक किया और मेरी कार को जबरन रुकवा लिया. उस कार में से आगे की ओर से एक युवक निकल कर आया, जो मुंह पर रूमाल बांधे हुए था. उस ने पहले मुझे बाहर खींच कर मेरी पिटाई की. प्रिया कार के अंदर मेरी बगल में बैठी थी, नाइस उस की गोद में सोया था.’’

पंकज ने आगे बताया, ‘‘प्रिया ने हमलावर का विरोध किया. तभी स्विफ्ट कार से एक और युवक निकल कर आया. उस ने भी मुंह पर रूमाल बांध रखा था. मारपिटाई के दौरान हाथापाई हुई तो हमलावरों में से एक ने मेरे सिर पर पिस्तौल की बट मारी और दूसरे ने चेहरे पर मुक्का.

‘‘इसी बीच हमलावरों ने गोली चला दी, जो प्रिया के गले में लगी. बेटा रोते हुए चिल्ला रहा था. तभी हमलावरों ने एक गोली और चलाई. पिस्तौल वाला तीसरी गोली चलाता, तभी मैं ने पिस्तौल का अगला हिस्सा मुट्ठी में दबोच लिया. छीनाझपटी में हमलावरों ने एक गोली और चलाई, लेकिन चल न सकी. दूसरे हमलावर ने तब तक दोनों ओर के शीशे तोड़ डाले थे.’’

पंकज के अनुसार, उस ने लहूलुहान पत्नी की हालत देखी तो स्पीड से गाड़ी दौड़ा दी और उसी वक्त 100 नंबर पर फोन कर के कंट्रोल रूम को सूचना दी. लेकिन अस्पताल में डाक्टरों ने प्रिया को मृत घोषित कर दिया.

शालीमार बाग थाने की पुलिस ने पंकज से कई बार पूछताछ की. इस पूछताछ में पंकज ने बताया कि उस ने सोनीपत के एक युवक से 5 लाख रुपए उधार ले रखे थे, जिन का वह मोटा ब्याज वसूलता था. अब उस ने यह रकम बढ़ा कर 40 लाख रुपए कर दी थी.

लेकिन इतनी बड़ी रकम वह नहीं दे सकता था. इसी वजह से उसे बारबार धमकियां मिल रही थीं. पंकज ने उसी युवक पर हत्या करवाए जाने का संदेह जाहिर किया. अपने बयान में पंकज ने 6 संदिग्ध लोगों के नाम लिए थे— मोनू, पवन, संजय, मंजीत और 2 अन्य.

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पुलिस ने सीधेसीधे हत्या का केस दर्ज किया, क्योंकि इस घटना में लूटपाट जैसा कुछ नहीं था. हत्या के इस मामले में कई झोल नजर आ रहे थे, फिर भी पुलिस ने उन लोगों को पकड़ने के लिए दबिश दी, पंकज ने जिन के नाम लिए थे. लेकिन उन में से किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया. इस के कई कारण थे, जिन में सब से बड़ा कारण तो यही था कि पुलिस को पंकज की बातों पर यकीन नहीं हो रहा था.

इस की एक वजह तो यह थी कि पंकज जिस जगह पर वारदात होने की बात कह रहा था, वहां कोई भी ऐसा सबूत नहीं मिला था, जिसे हत्या की वारदात से जोड़ा जा सकता.

दूसरे कार की जिस आगे वाली सीट पर प्रिया को गोली लगी थी, उस के नीचे कारतूस के 2 खोखे पड़े मिले थे. पंकज चूंकि दूसरी ओर से गोली चलने की बात कह रहा था, इसलिए उस स्थिति में खोखे प्रिया की सीट के नीचे नहीं, बल्कि पंकज की सीट यानी ड्राइविंग सीट के नीचे होने चाहिए थे.

यहीं से संदेह पैदा होना शुरू हुआ. शक के अंकुर फूटे तो पुलिस ने पंकज से फिर पूछताछ की. लेकिन वह अपनी बात पर अड़ा रहा.

कई बार संपन्न परिवारों में परदे के पीछे का सच नजर नहीं आता

आगे बढ़ने से पहले पंकज मेहरा और प्रिया की थोड़ी बैकग्राउंड जान लें तो बेहतर होगा. पंकज और प्रिया दोनों के परिवार ही बिजनैस में थे. पंकज का परिवार शालीमार बाग में रहता था. उस के पिता सी.एल. मेहरा और भाई अनिल मेहरा का चांदनी चौक में गारमेंट का बिजनैस था. जबकि रोहिणी सेक्टर-15 में रहने वाले प्रिया के पिता अशोक मघानी और भाई कार्तिक मघानी का आजादपुर मंडी में बड़ा कारोबार था.

रोहिणी आने से पहले मघानी परिवार भी शालीमार बाग में ही रहता था. पंकज और प्रिया शालीमार बाग के एक ही स्कूल में पढ़ते थे, वहीं दोनों की मुलाकात हुई जो पहले दोस्ती में बदली फिर प्यार में. प्यार हुआ तो दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया. साथ ही इस बारे में अपनेअपने परिवारों को भी बता दिया.

फलस्वरूप दोनों परिवारों की रजामंदी से 22 जनवरी, 2006 को दोनों की शादी हो गई. उस समय दोनों खुश थे. लेकिन शादी के 3 साल बाद ही दोनों के रिश्ते में दरार पड़ने लगी. वजह था, पंकज का आशिकाना मिजाज. इस के बावजूद दोनों की गृहस्थी चलती रही.

कई साल पहले जब पंकज के पिता सी.एल. मेहरा का गारमेंट का बिजनैस घाटे में जा रहा था, तब पंकज ने अपना अलग बिजनैस करने की सोची. उस का उद्देश्य था अपने परिवार की मदद करना. बिजनैस के लिए उस ने अपने एक परिचित के साथ मिल कर कपड़ों को डाई करने की फैक्ट्री खोली. लेकिन उस के पार्टनर ने उसे धोखा दे दिया, जिस की वजह से उसे काफी नुकसान हुआ.

पंकज ने खोला ‘किंग बार’

पंकज को भरोसा था कि प्रिया के मायके वाले उस की मदद करेंगे, इसलिए उस ने पहाड़गंज में एक बार खोलने का फैसला किया. इस बिजनैस की पूरी योजना बनाने के बाद पंकज ने अपनी ससुराल वालों से इस बारे में बात की तो वे पैसा लगाने को तैयार हो गए. पंकज ने 5-7 लाख रुपए अपने पास से लगाए और बाकी ससुराल वालों से ले कर पहाड़गंज में ‘किंग बार’ के नाम से बार खोल दिया. इस में उस ने अपने साले कार्तिक की भी हिस्सेदारी रखी.

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पहाड़गंज की तंग गलियों में सैकड़ों होटल हैं. सस्ते होने की वजह से ज्यादातर विदेशी टूरिस्ट इन्हीं होटलों में ठहरते हैं. विदेशी पर्यटकों की वजह से यहां के जो भी 2-4 बार हैं, खूब चलते हैं. पंकज का बार भी चल निकला. बिजनैस बढ़ाने के लिए उस ने 2-3 लड़कियों को भी नौकरी पर रख लिया था.

इस बीच प्रिया के मायके वाले शालीमार बाग से रोहिणी सेक्टर-15 में आ कर रहने लगे थे. दूसरी ओर घाटे से उबरने के लिए पंकज मेहरा के परिवार ने अपना शालीमार बाग का मकान 70 लाख रुपए में बेच दिया था. बताया जाता है कि मकान बेचने से मिली रकम भी पंकज मेहरा ने अपनी अय्याशियों पर उड़ा दी थी.

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां

प्रिया मेहरा मर्डर केस भाग 2 : लव कर्ज और धोखा

पहला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- 

बताते हैं कि उस ने दोगुनी करने के चक्कर में यह रकम सट्टे में उड़ाई थी. घर वाले उस से पैसे मागते थे तो वह यह कह कर उन्हें चुप करा देता था कि रकम बिजनैस में लगाई है, जल्द ही दोगुनी हो कर लौटेगी. इस बीच करीब 3 साल पहले प्रिया मां बन गई थी, बेटा हुआ था, जिस का नाम नाइस रखा गया.

बहरहाल, आइए लौट कर फिर क्राइम सीन पर आते हैं. यह तो हम बता ही चुके हैं कि प्राथमिक जांच में पंकज मेहरा संदेह के दायरे में आ चुका था. दूसरी ओर प्रिया के घर वालों की बातें भी पंकज को संदेह के दायरे में ला रही थीं. इस बीच पुलिस को तथाकथित घटनास्थल के पास वाले पैट्रोलपंप पर एक सीसीटीवी कैमरा मिल गया.

हकीकत सामने आई तो सब हैरान रह गए

पुलिस ने उस कैमरे की फुटेज देखी तो सारी हकीकत सामने आ गई. उस फुटेज में वहां पर रात के 4 बजे से साढ़े 4 बजे तक पंकज की कार के अलावा कोई कार नजर नहीं आई. इस का मतलब था कि पंकज सरासर झूठ बोल रहा था.

पोस्टमार्टम के बाद प्रिया का शव उस के घर वालों को सौंप दिया गया था. वे लोग जब उस का अंतिम संस्कार करने श्मशान पहुंचे तो पंकज मेहरा भी साथ था. चिता को मुखाग्नि भी उसी ने दी थी. पुलिस ने उसे वहीं गिरफ्तार कर लिया और सीधे थाना शालीमार बाग ले आई. थाने में उस से कई दौर में पूछताछ की गई.

आखिरकार उस ने मान ही लिया कि अपनी पत्नी प्रिया का कत्ल उसी ने किया था. ऐसा कर के वह एक तीर से 2 शिकार करना चाहता था. यानी एक तरफ तो वह प्रियंका से पीछा छुड़ाना चाहता था और दूसरी ओर उस के कत्ल में वह उन लोगों को फंसाना चाहता था, जिन्होंने उसे कर्ज दे रखा था.

जब जांच शुरू हुई तो पंकज के कुकर्मों की एकएक पर्त खुलती चली गई. इस में उस का मोबाइल और लैपटौप भी सहायक बने. पता चला कि पंकज मेहरा एक बड़ा सट्टेबाज (बुकी) था. दरअसल, सट्टेबाज भी 2 तरह के होते हैं. एक सट्टा लगाने वाले और दूसरे लगवाने वाले. सट्टा लगवाने वाले को बुकी कहते हैं. पंकज तभी सट्टेबाजों के चक्कर में फंस गया था जब वह चांदनी चौक में पिता के साथ गारमेंट का कारोबार करता था.

जांच में पता चला कि प्रिया और पंकज ने घटना से कुछ महीने पहले ही रोहिणी सेक्टर-15 के सी ब्लौक में किराए के मकान में शिफ्ट किया था. इस के पहले ये दोनों पंकज के परिवार के साथ शालीमार बाग में रहते थे. रोहिणी शिफ्ट होने की एक वजह यह थी कि प्रिया के मायके वाले भी इसी ब्लौक में रहते थे.

पंकज से संबंधों में खटास के चलते बात बढ़ने पर वह कभी भी पास में स्थित अपने मायके चली जाती थी. प्रिया का रोहिणी आने का यह कारण था तो पंकज के अपने अलग कारण थे.

सट्टे के शौक ने किया बरबाद

दरअसल, सोनीपत के कुछ सट्टेबाजों की बुकिंग रोहिणी तक चलती थी. इन बुकीज से पंकज के काफी अच्छे संबंध थे. उन का पंकज पर काफी पैसा भी उधार था. पंकज चूंकि खुद बुकी था, इसलिए चाहता था कि किसी तरह रोहिणी की बुकिंग उस के कब्जे में आ जाए.

बहरहाल, हकीकत यही थी कि वह सट्टेबाजों की मोटी रकम का कर्जदार था. उस पर यह कर्ज तब से चला आ रहा था, जब 18 जून, 2017 को भारतपाकिस्तान मैच हुआ था. इस मैच पर पंकज ने मोटी रकम लगाई थी और हार गया था. जिन लोगों का पैसा था, वे उसे धमकाते रहते थे.

एक तरफ यह सब चल रहा था, दूसरी ओर पंकज मेहरा की रंगीनमिजाजी भी कम नहीं थी. बताया जाता है कि उस के बार में 2 लड़कियां काम करती थीं, एक दिल्ली की और दूसरी इलाहाबाद की. पंकज ने इन दोनों ही लड़कियों को अपने प्रेमजाल में फंसा रखा था.

इतना ही नहीं, बल्कि उस के रेशमा नाम की एक 23 वर्षीया युवती से भी प्रेम संबंध थे. रेशमा को उस ने न केवल लाखों रुपए के गिफ्ट दिए थे, बल्कि उसे किराए का एक मकान भी ले कर दे रखा था. उस का पूरा खर्चा पंकज ही उठाता था. पुलिस के अनुसार पंकज प्रिया को अपने रास्ते से हटा कर रेशमा से शादी करना चाहता था.

रेशमा से संबंधों के चलते पंकज कई बार रातरात भर घर नहीं आता था. प्रिया उसे बारबार फोन करती रहती थी, लेकिन वह बहाने बना कर उसे बेवकूफ बनाता रहता था. हालांकि प्रिया इस बात को जानती थी. इसी सब के चलते एक बार प्रिया 11 महीने तक अपने मायके में रही थी, लेकिन उस के मातापिता ने उसे समझा कर पंकज के पास भेज दिया था.

एक तरफ दबंगों का कर्जदार, दूसरी ओर रेशमा के चक्कर में पत्नी से रुसवा, पंकज की स्थिति अजीब सी हो गई थी. यह अलग बात है कि इस सब का जिम्मेदार भी वह खुद ही था. जब लेनदार कुछ ज्यादा ही दबाव बनाने लगे तो ढाई महीने पहले पंकज ने अपना पहाड़गंज स्थित बार बंद कर दिया.

लेकिन इस से उस की समस्या कम होने की बजाय बढ़ती ही गई. अंतत: उस ने इस सब से निजात पाने के लिए ऐसा रास्ता खोजा, जिस से सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे. इस के लिए उस ने घटना से एक माह पहले जो योजना बनाई, वह थी प्रिया को मौत के घाट उतार कर अपने लेनदारों को फंसाने की.

  जान का खतरा बता कर खरीदी पिस्तौल

इस के लिए पंकज ने अपनी जान को खतरा बता कर एक दोस्त की मदद से एक पिस्तौल खरीदा. इस के बाद उस ने कई बार रेकी कर के वह जगह तय की, जहां आराम से प्रिया का कत्ल कर सके और पकड़ा भी न जाए. उसे यह जगह मिली बादली रेडलाइट से यू टर्न ले कर थोड़ा आगे. समय उस ने आधी रात के बाद का चुना, क्योंकि उस समय वह जगह एकदम सुनसान रहती थी. पंकज की सब से बड़ी भूल यह थी कि वह पास वाले पैट्रोल पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरे को नहीं देख पाया.

काम नहीं आया बारबार पुलिस को गुमराह करना

पुलिस पूछताछ में पंकज ने पुलिस को गुमराह करने की पूरी कोशिश की. कभी उस ने कोई रूट बताया तो कभी कोई. पुलिस ने उसे साथ ले कर उस की बताई सभी जगहों, सभी रास्तों को देखा. उन रास्तों के सीसीटीवी कैमरे देखे, लेकिन उस का कोई भी बयान विश्वसनीय नहीं निकला. पुलिस ने जब पैट्रोल पंप पर लगे कैमरे की फुटेज देखी तो वह पूरी तरह से संदेह के घेरे में आ गया.

दरअसल, पैट्रोल पंप वाले कैमरे की फुटेज में साफ दिखाई पड़ रहा था कि भोर के 4 बज कर 15 मिनट पर पंकज ने बादली रेडलाइट से यू टर्न लिया. यू टर्न लेते समय कार की गति धीमी थी, लेकिन अचानक कार की गति बढ़ी और वह सीसीटीवी की रेंज के बाहर हो गई.

इस के 5 मिनट बाद ही पंकज ने 4 बज कर 20 मिनट पर पुलिस कंट्रोल रूम को फोन किया था. इस का मतलब जो भी हुआ था, 5 मिनट के अंदर हुआ था. यह कांड पंकज ने खुद किया था, इस बात की पुष्टि सीसीटीवी की फुटेज से हो रही थी, क्योंकि उस एक घंटे के दौरान कोई भी कार वहां से नहीं गुजरी थी.

पुलिस ने जब पंकज मेहरा से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने मुंह खोल दिया. उस ने अपने पहले वाले बयान को झुठलाते हुए बताया कि उस ने प्रिया के मर्डर की योजना करीब एक महीने पहले बताई थी. इस के लिए वह पिछले 6 महीने से टीवी के क्राइम पैट्रोल और सावधान इंडिया शो देख रहा था, जो क्राइम पर आधारित होते हैं. यहां तक कि उस ने लैपटौप पर अजय देवगन और तब्बू अभिनीत फिल्म ‘दृश्यम’ 17 बार देखी. यूट्यूब पर उस ने पुलिस इनवैस्टीगेशन के हर पार्ट को देखा, समझा.

इतना ही नहीं, उस ने पुलिस के सर्विलांस सिस्टम को धता बताने, मोबाइल काल और सीसीटीवी की नजर से बचने का आइडिया फिल्म ‘दृश्यम’ से लिया था. जब उस की योजना तैयार हो गई तो उस ने एक दोस्त के माध्यम से पिस्तौल खरीदा.

पूरी तैयारी के बाद 24/25 अक्तूबर की रात को वह पत्नी प्रिया और बेटे नाइस को साथ ले कर गुरुद्वारा बंगला साहिब गया. वहां से वापसी में उस ने जामा मसजिद की ओर से हो कर रिंग रोड पकड़ी. उसे तलाश थी किसी ऐसी जगह की, जहां प्रिया को मौत के घाट उतार सके.

पंकज को ऐसी जगह मिली बादली की रेडलाहट से यू टर्न ले कर. वहां उस ने कार के अंदर ही प्रिया को पहले सिर में गोली मारनी चाही, लेकिन ऐन वक्त पर उस ने सिर पीछे कर लिया, जिस की वजह से गोली उस की गरदन में लगी. इस के बाद पंकज ने प्रिया पर एक गोली और दागी, जो उस के चेहरे पर राइट साइड से लग कर लेफ्ट साइड से निकल गई.

बेटा नाइस उस वक्त सो रहा था, जो गोली की आवाज से उठ गया था. प्रिया को मौत के घाट उतार कर पंकज ने कार के दोनों ओर के शीशे तोड़े और कार तेजी से भगा दी. उसी वक्त उस ने पिस्तौल देवली लालबत्ती से आगे रोहिणी के रास्ते में पड़ने वाले जंगल में फेंक दी. इसी बीच उस ने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन किया था.

पुलिस ने अदालत से पंकज का 3 दिन का पुलिस कस्टडी रिमांड ले कर क्राइम सीन को भी रिक्रिएट किया और उस की फेंकी पिस्तौल भी खोजी. लेकिन कई दौर की खोजबीन के बाद भी पिस्तौल नहीं मिली. संभवत: उसे कोई उठा ले गया था.

पुलिस ने जांच के किसी भी कोण को इग्नोर नहीं किया

पंकज के मोबाइल की काल डिटेल्स और उस के लैपटौप से पुलिस को काम की काफी जानकारियां मिलीं. पता चला कि वह एक साथ कई लड़कियों से चक्कर चला रहा था. इन में उस की सब से करीबी थी रेशमा, जिस पर उस ने लाखों रुपए खर्च किए थे. सुनने में यह भी आया कि पंकज ने रेशमा से शादी कर रखी थी और वह रातों को कई बार उसी के साथ रुकता था.

यह बात भी चर्चा में आई कि पंकज पहले से शादीशुदा था और प्रिया को यह बात पंकज से शादी कर लेने के बाद पता चली थी. जो भी हो, पूरी कोशिशों के बाद भी पंकज अपने गुनाह को छिपा नहीं पाया और अपने बुने जाल में खुद ही फंस गया. ‘दृश्यम’ फिल्म से उसे अपराध की जो राह मिली, वह सीधे तिहाड़ जेल में जा कर खुली. उसे शायद यह पता नहीं था कि फिल्म और असल जिंदगी में बड़ा फर्क होता है.

अब जब वह जेल से बाहर निकलेगा तो उसका वही बेटा बड़ा हो कर उस के मुंह पर थूकेगा, जिस ने अपनी आंखों से अपनी मां को मौत के मुंह में जाते देखा. उस की आंखों के सामने एक तरफ ममतामयी मां थी तो दूसरी तरफ जल्लाद बाप.

छोटा बच्चा आज भले ही कुछ न समझता हो, बोल सकता हो, लेकिन वह बड़ा होगा और अपने क्रूरबाप का चेहरा जरूर देखना चाहेगा. वैसे 3 साल का नाइस अभी नानानानी के पास है.

कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां

19 दिन 19 टिप्स: खाने में शामिल करें ये 4 चीजें और पाएं सिक्स पैक एब्स

जिम  में घटों पसीना बहाने के बाद भी अगर आप सिक्स पैक एब्स नही बना पा रहे है तो  शायद इसकी वजाह है आपका खानपान है. दरअसल बौडी  को शेप में लाना तो ज्यादा मुश्किल नही होता पर अगर शेप के बाद आप एब्स या मसल्स को और बिल्ड करना चाहते है तो आपको खाने पर विषेश ध्यान देने की जरुरत है. आप वर्कआउट तो बिल्कुल सही कर रहे हो लेकिन आपका ध्यान अपनी डाइट पर पूरी तरीके से नही है तो आपको एब्स शायद ना मिले. इसलिए आज हम आपके लिए लाए है खाने के कुछ ऐसे आइटम्स की लिस्ट जिसे ट्राय करने से आप सिक्स पैक एब्स जल्द पा लेंगे.

सेब

आपने यह मशहूर पंक्ति तो सुनी ही होगी कि दिन का एक सेब आपको डॉक्टर से दूर रख सकता है. लेकिन हम आपको बताने जा रहे हैं कि यह कैसे आपके पेट के आस-पास वाली चर्बी को भी गायब कर सकता है. जी हां ये बिल्कुल सच है. वेक फॉरेस्ट बैपटिस्ट मेडिकल सेंटर में किए गए एक अध्ययन से यह खुलासा हुआ है कि प्रत्येक दिन घुलनशील फाइबर में 10 ग्राम वृद्धि करने से पेट के आस-पास की चर्बी पांच वर्षों में 3.7 फीसदी तक कम हो सकती है. एक बड़े सेब में पांच ग्राम फाइबर होता है करीब 85 फीसदी पानी और दोनों ही आपका पेट भरे रखने में मदद करते हैं.

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शकरकंद

शकरकंद का स्वाद वास्तव में काफी अच्छा तो होता ही है साथ ही इसके कई स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं. इस फूड को  कार्बोहाइड्रेट के किंग के रूप में जाना जाता है क्योंकि ये धीरे-धीरे पचते हैं और लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करते हैं. शकरकंद विटामिन और मिनरल से भरे होते हैं और हमारे शरीर को ऊर्जा देते हैं. ये आपको लंबे समय तक भूख लगने से छुटकारा देते हैं, जिसके कारण आप अस्वस्थकर भोजन से दूर रहते हैं.

ब्रोकोली

ब्रोकोली विटामिन सी से भरपूर होता है. विटामिन सी एक ऐसा पोषक तत्व है, जो तनावपूर्ण हालात के दौरान कोर्टिसोल स्तर को कम कर सकता है. ब्रोकोली में सल्फोराफेन नाम का फाइटोन्यूट्रिएंट भी होता है, जो टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाता है और बॉडी फैट को कम करने में मदद करता है. ब्रोकोली फाइबर से भरा एक कम कैलोरी वाला फूड है, जो आपका पेट भरा रखता है और वजन घटाने में मदद करता है.

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अंडे

हाई प्रोटीन के अलावा अंडे एब्स बनाने के लिए सबसे अच्छे फूड में से एक है. अंडे में कोलाइन होता है, जो मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है और फैट कम करने में मदद करता है. अंडे अच्छी गुणवत्ता वाला प्रोटीन पाने के लिए सबसे सस्ता और आसान तरीका है. वे लोग, जो सुबह अंडे खाते हैं उनमें अन्य चीजें खाने वालों की तुलना में कम भूख लगती है.’

तो ये है वो कुछ चीजें जो रोजाना आप अपने किचन में देकते तो होंगे पर आपके इसके फायदे के बारे में पाता नहीं होगा. तो देर पत करे और इन सभी खाने को रेगुलर डाइट में फोलों करें.

कसूर किस का था : दूसरा भाग

पिछले अंक में आप ने पढ़ा था

राजन का फोन आते ही राधिका होटल जाने के लिए तैयार हो गई. गाड़ी में बैठते ही वह पुरानी यादों में खो गई. जब वह 19 साल की थी, तभी एक अमीर कारोबारी ने अपने बेटे के लिए उसे पसंद कर लिया था. पर उस का पति मेहुल देर रात की पार्टियों का दीवाना था. वह शराब भी पीता था.

अब पढ़िए आगे…

धीरेधीरे मेहुल बंटी के साथ शराब पीने लगा. वह उस की कोल्ड ड्रिंक के साथ ‘चीयर्स’ करता. ड्राइवर से शराब मंगवाता. नौकरों व बावर्ची से कह कर खाने में तरहतरह की चीजें बनवाता.

राधिका को यह सब बहुत अखरने लगा था. यही तो वह उम्र होती है, जब बच्चा अपने मांबाप को अपना रोल मौडल मान कर उन की नकल करता है, अच्छीबुरी आदतों को अपनाता है.

राधिका देखती कि जब मेहुल टाइम से घर नहीं आता, तब बंटी कोल्ड ड्रिंक से भरा गिलास अपने हाथों में ले कर कहता, ‘‘चलो मम्मी, आज दारू पार्टी हो जाए? रघु काका, आप मेरे लिए चीज ब्रैड और फ्रैंचफ्राई बनाओ.’’

राधिका खून का घूंट पी कर रह जाती. वह अपना दुखदर्द किस से बांटती? मायके में तो किसी की भी हिम्मत नहीं थी, जो मेहुल की आंखों में आंखें डाल कर बातें कर सके.

पर उस दिन राधिका ने भी कुछ सोच लिया था… रात 2 बजे मेहुल के मोबाइल फोन पर बात करनी चाही, तो वह स्विच औफ मिला. तकरीबन ढाई बजे मेहुल का फोन आया, ‘बैडरूम का दरवाजा खोलो.’

गुस्से में आ कर राधिका ने भी कह दिया, ‘मेहुलजी, आज यह दरवाजा नहीं खुलेगा. आप को जहां जाना है, चले जाइए… रोजरोज आप की देर से शराब पी कर आने की आदत से मैं तंग आ गई हूं… इस से बंटी पर भी गलत असर पड़ता है…’

पहले तो मेहुल प्लीजप्लीज करता रहा, फिर बोला, ‘मैं केवल बंटी से मिलना चाहता हूं. राधिका, एक बार दरवाजा खोलो… मैं उसे प्यार कर के चला जाऊंगा…’

राधिका ने न जाने क्या सोच कर गेट खोल दिया. अब तो वह राधिका पर आंखें तरेरने लगा, ‘मेरे घर से मुझे ही निकालती है… मुझे पता था, तेरा बाप दलाल है. 50-50 रुपए के लिए तुम लोगों से धंधा कराता है.

‘‘तेरे बाप की औकात थी इतने बड़े घर में तेरी शादी कराने की… वह तो मेरे बाप की भलमनसाहत है, जो तू यहां पर आ गई, नहीं तो किसी कोठे पर…’

ये सारे शब्द पिघले सीसे की तरह राधिका के कानों में पड़ रहे थे. वह फटी आंखों से मेहुल को देखने लगी. अपनी बेबसी पर उस की आंखें छलक पड़ीं.

बंटी, जो अब 7 साल का हो गया था, कच्ची नींद से उठ गया था और देख रहा था कि पापा गुस्से से मम्मी पर बरस रहे थे. मम्मी रो रही थीं. वह डरासहमा सब देखसुन रहा था.

सुबह 7 बजे स्कूल जाना होता है, इसलिए राधिका ने किसी तरह अपने को संभाला. जैसेतैसे सबकुछ भुला कर उसे सुला दिया. वह खुद रातभर तकिया भिगोती रही. उस की आंखों से दूरदूर तक नींद का नामोनिशान नहीं था. सोचती रही, ‘कैसे इस इनसान के साथ पूरी जिंदगी बिताऊं? जो मर्द अपनी औरत को इज्जत की निगाह से नहीं देखता, उस के बच्चे की नजर में भी उस औरत की कोई इज्जत नहीं रह जाती.’

चाहे पिता के घर में कुछ भी न था, शांति तो थी… रूखासूखा खा कर पढ़ाई करने में ही अपने 18 साल गुजार दिए थे. 19वें साल में उस के भावी ससुर ने उसे मेहुल के लिए पसंद कर लिया था. उस की बेमिसाल खूबसूरती ही आज उस के लिए शाप बन गई.

कालेज में बहुत से लड़के राधिका को अपनी गर्लफ्रैंड बनाना चाहते थे, पर उसे सिर्फ पढ़ाई से ही सरोकार था. शायद इसलिए किसी लड़के की उस से बात करने की हिम्मत न होती थी. वह कालेज में ‘हार्टलैस’ के नाम से मशहूर थी.

घर में काम के सिलसिले से जुड़े कई लोग मेहुल से मिलने आते थे. एक सुबह डोरबैल की आवाज पर राधिका ने अनमनी सी हो कर खुद दरवाजा खोला. सामने एक 30-32 साला नौजवान को अपनी ओर एकटक निहारते पाया. आंखें चार हुईं. पता नहीं, राधिका को क्या हुआ… उस गरमाहट को वह सह न सकी और तुरंत वहां से हट गई.

कारोबार से जुड़े लोगों में से वह भी एक था. वह बुझीबुझी सी अपने काम में लग गई. अकसर लोग बाहर से भी आते ही रहते थे. कभी किसी से मिलना होता था, तो मेहुल खुद बुला कर मिला देता था.

इस बार भी मेहुल बोला, ‘‘राधिका, इन से मिलो, ये हैं रोलिंग मिल के मालिक राजन. दिल्ली से आते हैं… और राजनजी, इन से मिलिए… ये हमारी बैटर हाफ हैं.’’

दोनों ने एकदूसरे से हाथ जोड़ कर नमस्ते किया. राजन ने गौर से राधिका को देखा, पर उस ने ध्यान नहीं दिया.

एक दिन राजन ऐसे ही किसी काम से आया था, पर जाते वक्त एक अपना विजिटिंग कार्ड थमा कर चला गया.

उस कार्ड के पीछे एक नोट लिखा था, ‘टाइम मिलने पर फोन कीजिएगा, मैं इंतजार करूंगा…’

पढ़ कर राधिका कुछ घबरा सी गई. न चाहते हुए भी उस ने शाम को डरतेडरते फोन किया, ‘हैलो, मैं राधिका… आप … राजनजी?’

‘हांहां, मैं राजन ही बोल रहा हूं. मैं कब से आप के फोन का इंतजार कर रहा था. आप बुरा मत मानिए… एक बात बोलूं… आप बहुत खूबसूरत हैं.’

‘थैंक्स…’ वह बोली.

‘प्लीज, मना मत कीजिएगा. क्या कल हम शाम को एकएक कप कौफी पी सकते हैं?’

राधिका चाह कर भी मना न कर सकी.

कौफी पीते वक्त बारबार राजन की ओर नजरें उठतीं, तो उसे अपनी ओर ही देखता पाती. वह शरमा कर सिर झुका लेती.

‘राधिकाजी, जब से मैं ने आप को देखा है, मैं रातभर सो नहीं पाता. जी चाहता है कि बस आप को ही देखता रहूं… दिनरात… हर पल… आप की मुसकराहट बहुत दिलकश है.’

यह सुन कर राधिका का दिल झूम उठा. शर्म से पलकें झुक गईं. होंठों पर एक लुभावनी मुसकान आ गई.

उस दिन के बाद से ही वे एकदूसरे से मिलने लगे. कभी कोई रैस्टोरैंट, तो कभी कोई शौपिंग मौल. कभी मल्टीप्लैक्स सिनेमाहाल, कभी किसी पार्क में, ताकि मेहुल या किसी पर राज न खुले… इसलिए मिलने के लिए अलगअलग जगह तय कर लेते थे.

मिलने पर राधिका को अजीब सी घबराहट होती थी, पर उस की इस घबराहट में भी एक खुशी थी.

(क्रमश:)

राजन का राधिका से मिलने का क्या मकसद था? क्या मेहुल को इस बात का पता चला?  पढ़िए अगले अंक में…

कसूर किस का था : पहला भाग

‘हैलो राधिका, तुम ठीक 8 बजे होटल पहुंच जाना.’

‘‘ओके… राजन. आप भी टाइम से आ जाना.’’

‘जो हुक्म मेरी मलिका. बंदा समय पर हाजिर हो जाएगा.’

‘‘आप भी न, कुछ भी कह देते हो,’’ शरमा कर, मुसकराते हुए राधिका ने मोबाइल फोन काट दिया.

राधिका ने तैयार हो कर गुनगुनाते हुए, आईने में अपनेआप को गौर से ऊपर से नीचे तक देखा. उस का खूबसूरत बदन अभी तक सांचे में ढला हुआ था, तभी तो राजन उसे बांहों के घेरे में ले कर हमेशा कहते, ‘फिगर से आप की उम्र का पता ही नहीं चलता जानेमन…’ और शरारत से हंसने लगते.

तब राधिका थोड़ा शरमा कर रह जाती और कहती, ‘आप भी न…’

नीले रंग की खूबसूरत साड़ी में चांदी के रंग की कारीगरी का काम, नए जमाने का ब्लाउज, जिस का भार पीछे बंधी डोरी ने संभाल रखा था. बालों को हेयर ड्रैसर ने बड़े ही खूबसूरत ढंग से संवार कर 2 लटों को सामने निकाल दिया था.

राधिका के गोरगोरे रुई से भी नरम हाथों पर लोगों की नजर बरबस ही उठ जाती थी.

राधिका को याद है कि पिछली पार्टी में मेघना भटनागर ने कहा भी था, ‘राधिकाजी, आप को तो फिल्म इंडस्ट्री में होना चाहिए था. आप तो इतनी खूबसूरत हो कि आप को छूने से भी डर लगता है. एकदम कांच की गुडि़या सी लगती हो आप.’

ऐसी बातें पहले राधिका को अंदर तक गुदगुदा जाती थीं, लेकिन अब वह सुन कर केवल मुसकरा देती है.

राधिका ने साड़ी से मैच करती ज्वैलरी पहन कर फाइनल टच और फाइनल लुक दिया और मोबाइल फोन और मैचिंग पर्स ले कर बंगले से बाहर आ गई, जहां ड्राइवर पहले से ही हाथ बांधे अपनी ड्यूटी के लिए खड़ा था.

राधिका मैडम को आते देख ड्राइवर ने गाड़ी का पिछला गेट खोला. राधिका ने बैठते ही कहा, ‘‘होटल ताज चलो.’’

‘‘जी मेम साहब,’’ कह कर ड्राइवर ने गाड़ी स्टार्ट कर दी. गाड़ी अब बंगले से निकल कर खाली सड़क पर तेज रफ्तार से दौड़ने लगी.

राधिका का दिमाग भी उस दौड़ में शामिल हो गया. बस फर्क इतना था कि गाड़ी की रफ्तार आगे जा रही थी और राधिका का दिमाग पिछली यादों की ओर रफ्तार पकड़ रहा था. बात तब की है, जब राधिका का 12वीं जमात का रिजल्ट निकला था.

वह फर्स्ट क्लास से पास हुई थी. वह चाहती थी कि वह आगे और पढ़े. उस ने सीपीटी का फार्म भी ले लिया था, लेकिन घर की माली हालात ठीक नहीं थी. 5 भाईबहनों में वह सब से बड़ी थी. उस के बाद पल्लव, जिस ने 10वीं जमात का बोर्ड इम्तिहान दिया था और पल्लवी ने 8वीं जमात का. फिर नकुल और तन्वी थे, जो छठी और चौथी क्लास में पढ़ते थे.

मां घरेलू थीं, सिर्फ कपड़े सीनेपिरोने का काम जानती थीं और पिताजी रेलवे में टीटी थे. जैसेतैसे घर का गुजारा और उन लोगों की पढ़ाई का खर्चा निकल पाता था.

पिताजी की इच्छा थी कि वे राधिका की शादी कर दें, क्योंकि वह तनी खूबसूरत थी कि जहां भी जाती, वहां कोई भी उस का दीवाना हो जाता था. दोनों पतिपत्नी को रातभर इसी चिंता में नींद नहीं आती थी.

राधिका की खूबसूरती पर फिदा हो कर 3 चावल मिलों के मालिक केतन सहाय ने अपने बेटे मेहुल के लिए बिना दानदहेज के शादी की बात चलाई.

राधिका के पिता ने उसे स्वीकार कर लिया और धूमधाम से शादी हो गई. पैसों की कमी में पलीबढ़ी राधिका इतने ऐशोआराम देख कर दंग रह गई. वह बहुत खुश थी. उस के मांबाप भी अपनी बेटी की खुशियों को सराहने लगे.

मेहुल चूंकि एक बड़ा कारोबारी का लड़का था, विदेश से एमबीए कर के आया था, उस का ज्यादा से ज्यादा समय कामकाज और यारदोस्तों में ही बीतता.

मेहुल को राधिका पहली नजर में ही भा गई थी. जब मेहुल ने प्यार से राधिका को देखा, तो हलकी गुलाबी साड़ी में उस का रंग और भी गुलाबी हो उठा था. वह लाज से सिमटी जा रही थी. सभी दोस्त मेहुल से मानो जल रहे थे.

मेहुल भी स्मार्ट और अच्छे नैननक्श का था, पर राधिका के सामने उन्नीस ही था. पर वह राधिका से प्यार तो बहुत करता था, वह उस की खूबसूरती पर कुछ नहीं बोल पाता था. वह आएदिन पार्टी करता रहता था, जिस में सिगरेटशराब व शबाब का जोर होता था और पार्टियां भी देर रात तक चलती थीं.

हाई सोसाइटी में उठनेबैठने वाले मेहुल के यारदोस्त भी वैसे ही थे. हर समय पीनेपिलाने की ही बातें चलती थीं. शुरुआत में तो राधिका नईनवेली होने के नाते पसंद न होते हुए भी ऐसी पार्टियों में शामिल हो जाती थी, पर उसे ऐसी पार्टियां कभी भी अच्छी नहीं लगी थीं.

धीरेधीरे राधिका ने ऐसी हाई प्रोफाइल पार्टियों में जाना छोड़ दिया. घर की पार्टियों में 2-4 बार अपना चेहरा दिखा कर चली आती. बाहर की पार्टियों में केवल मेहुल जाता था. उसे लौटने में कभी सुबह के 2 बजते, तो कभी 3 या 4. पहले तो वह गुस्सा हो जाती थी, मेहुल से बोलचाल बंद कर देती थी या कुछ शिकायत कर देती थी.

एक बार फिर ऐसा ही हुआ. राधिका मेहुल से नाराज थी, तभी मेहुल ने उस का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचा, तो एक पल के लिए वह सकुचाई, मुंह से एक भभका निकला, उस की गंध से उसे उलटी सी होने लगी. वह हटने लगी, तो मेहुल ने उसे झट से अपने बदन से सटा लिया. सीने से लगा कर वह दीवानों की तरह उसे चूमने लगा.

राधिका उस की बांहों से निकलने के लिए छटपटा रही थी. मेहुल कह रहा था, ‘यार, माफ भी कर दो. कल से जल्दी आ जाऊंगा. राधिका, तुम बेहद खूबसूरत हो… मैं वादा करता हूं… कभी लेट नहीं होऊंगा.’

शराबी की जबान और कुत्ते की टेढ़ी पूंछ का जैसे कभी कोई भरोसा नहीं होता, वैसे ही पीनापिलाना मेहुल की आदत में शुमार हो गया था. जितनी नफरत राधिका को शराबसिगरेट, देर रात की पार्टियों से थी, उतनी ही नफरत उसे अपनेआप से भी होने लगी थी.

इधर बंटी के पैदा होने के बाद राधिका उस के पालनेपोसने में लग कर अपने को बिजी रखने लगी.

पहले तो मेहुल सिर्फ बाहर से ही शराब पी कर आता था, पार्टियां करता था, लेकिन सासससुर की मौत के बाद तो जैसे पूरा मैखाना घर में ही खोल लिया. अब वही मेहता ऐंड मेहता संस एकलौता मालिक जो हो गया था.

(क्रमश:)

कसूर किस का था : तीसरा भाग

पिछले अंकों में आप ने पढ़ा था
राधिका राजन से मिलने होटल गई. बीच रास्ते में वह पुरानी यादों में खो गई कि कैसे 19 साल की उम्र में उस की शादी अमीर मेहुल से हो गई. मेहुल शराब पीता था, कभीकभी तो अपने बेटे के साथ बैठ कर भी. राधिका को यह पसंद नहीं था. उस की नजदीकियां राजन के साथ बढ़ने लगीं.
अब पढि़ए आगे…

एक दिन दोपहर को बंटी राधिका के मोबाइल फोन पर गेम खेल रहा था, तभी मोबाइल फोन की घंटी बजी.

राधिका बंटी के हाथ से मोबाइल फोन लेने गई, तो उस ने देने से मना कर दिया. प्यार से, फिर झल्ला कर छीनने गई, तो बोला, ‘‘आप एक नंबर की…’’

इस से आगे राधिका ने जो सुना, तो लगा जैसे किसी ने भरे बाजार में नंगा कर दिया. उस के सोचनेसमझने की ताकत खत्म हो गई. वह बहुत ही दुखी हो गई. उन्हीं नाजुक व कमजोर लमहों में वह राजन के और करीब आ गई.

‘‘क्या बात है राधिका, तुम इतनी चुपचुप और खाईखोई सी क्यों लग रही हो? किसी ने तुम्हें कुछ कहा क्या?’’

‘‘कुछ नहीं…’’ कहतेकहते भी राधिका का गला भर्रा गया. फिर वह हंसते हुए कहने लगी, ‘‘देखो, मैं एकदम ठीक तो हूं. मुझे क्या हुआ है?’’

‘‘मैं इस खोखली हंसी के पीछे के दर्द को साफसाफ महसूस कर रहा हूं. मुझे हैरानी होती है कि इतनी प्यारी और खूबसूरत आंखों में भी आंसुओं का इतना गहरा समंदर भी समा सकता है… क्या बात है? तुम्हारे इन आंसुओं से मुझे बहुत दर्द पहुंचता है. तुम मेरी जान हो, मेरी सबकुछ हो. मैं तुम्हें एक पल के लिए भी उदास नहीं देख सकता.’’

राधिका ने सुबकतेसुबकते राजन को दोपहर में घटी घटना के बारे में सबकुछ सचसच बता दिया.

‘‘तो यह बात है… बच्चे जो देखतेसुनते हैं, वही सीखते हैं… दिल से मत लगाओ. बच्चा है यार…

‘‘तुम्हें पता है कि आज मैं ने तुम्हारे लिए यह गिफ्ट लिया है. जरा खोल कर तो देखो, कैसा है?’’

‘‘इस की क्या जरूरत थी? तुम से दिल की बातें कर के मन हलका हो जाता है. बस…’’

‘‘बस… और कुछ नहीं?’’ टेढ़ी आंखों से राजन ने कहा, तो राधिका शरमा गई.

‘‘क्या तुम मेरी प्रेमिका बनोगी राधिका?’’

राधिका ने चौंक कर राजन की ओर देखा, तो उस की आंखों में सिर्फ प्यार और प्यार ही नजर आ रहा था. अब राधिका हैरत से अपनी आंखों में भर आए आंसू पोंछने लगी. होंठ लरजने लगे.

बहुत मिन्नतें करने पर राधिका ने गिफ्ट का रैपर खोला. हीरे के 2 टौप्स थे.

‘‘बहुत ही खूबसूरत हैं.’’

गिफ्ट तो मेहुल भी ढेरों लाता था, पर उस में गरूर था. वह खुश हो कर कह बैठी, ‘‘राजन, मुझे इस घुटन से कहीं दूर ले चलो…’’

राजन भी उसे दूसरे शहर ले जाने को तैयार था. वह तुरंत बोला, ‘‘हां चलो, कब चलोगी राधिका? मैं तुम्हें अपने साथ हमेशा के लिए ले जाऊंगा…’’ कह कर उस ने राधिका को अपनी बांहों में भर लिया.

राधिका अब भी खोईर् हुई थी. बाहर तेज बारिश हो गई थी. अचानक बिजली कड़की और उस ने दोनों हाथों से कस कर राजन को जकड़ लिया.

जब 2 जवां दिल मिल रहे हों, तो सभी जगह बहार ही बहार दिखाई देती है. बारिश की धुन में प्यार का संगीत था. राजन उसे अपने सीने से लगा कर दीवानों की तरह चूमने लगा. एक पल के लिए वह सकुचाई, पर जब वह दिल ही हार चुकी, तो इनकार कैसा…?

एक शाम राधिका चुपचाप राजन के साथ मुंबई चली आई. आते वक्त राधिका एक चिट्ठी लिख कर छोड़ आई थी. लिखा था, ‘मैं इस घुटनभरी जिंदगी को जीतेजीते तंग आ गई हूं. अब मुझे आजादी से जीना है. सांस लेना है.’

उस वक्त राधिका ने अपने बच्चे के बारे में भी नहीं सोचा. पर वह तो राजन के प्यार में पगलाई हुई थी. उसे उस वक्त जो ठीक लगा किया. यह भी नहीं सोचा कि मेहुल और घर वालों पर क्या बीतेगी.

राजन को पा कर राधिका को लगा कि सारे जहान की खुशियां मिल गई हों. उन लोगों ने 2-4 महीने विदेश में ही बिता दिए. वापस आ कर राजन अपना मुंबई का कारोबार संभालने में लग गया और राधिका अपने फ्लैट को सजानेसंवारने में जुट गई. दिनरात ख्वाबों जैसे बीत रहे थे.

राधिका को कभी बंटी की याद आती, तो दिल में कुछ चटक जाता, गले में कुछ फांस जैसा अटक जाता था, लेकिन वह अपने सिर को झटक देती और दिल को बच्चे की तरह झुनझुना पकड़ा कर समझा लेती थी.

राधिका व राजन अकसर होटलों में ही डिनर लेते थे. वहां जो भी राधिका को देखता, तो उसे बस देखता ही रह जाता.

राजन ने राधिका के लिए काफी मौडर्न कपड़े खरीदे थे. बहुत ही नानुकर के बाद वह उन्हें पहनती थी.

‘‘अरे बाबा, यही तो आजकल का फैशन है. चलो बेबी, पहनो. जल्दी से रैड ड्रैस पहन कर आओ. मैं बाहर कार में तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं. देखूं तो सही, मेरी जान इन कपड़ों में कैसी लगती है,’’ राजन कहता.

थोड़ा घबराते हुए राधिका ने वह ड्रैस पहनी. जब उस ने खुद को आईने में देखा, तो अपने बदले लुक और जंचते कपड़ों के साथ बढ़ती दोगुनी खूबसूरती पर यकीन नहीं हुआ.

देर होने पर राजन खुद ही बैडरूम में चला आया. जब राधिका को लाल रंग की ड्रैस में देखा, तो देखता ही रह गया, ‘‘हाय, स्वीट हार्ट. क्या हौट लग रही हो? अब तो मैं तुम्हें खा जाऊंगा.’’

राधिका के गाल शर्र्म से और भी गुलाबी हो गए.

डिनर करते वक्त कितने लोगों ने पलटपलट कर ललचाई नजरों से देखा, तो राधिका घबराई सी उस ड्रैस में असहज हो उठी थी. पर धीरेधीरे उसे ऐसे कपड़े पहनने की आदत हो गई.

कोलकाता की राधिका और मुंबई की राधिका में जमीनआसमान का फर्क हो गया. मजे से जिंदगी गुजर रही थी. तभी एक दिन राजन दफ्तर से बहुत घबराया सा घर वापस आया.

‘‘गजब हो गया,’’ राजन बोला.

‘‘क्या हुआ?’’ राधिका ने पूछा.

(क्रमश:)

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