Bigg Boss 15: जबरदस्त फैंस फॉलोइंग के बाद भी शो से क्यों बाहर हुए Umar Riaz?

बिग बॉस 15 (Bigg Boss 15) से उमर रियाज (Umar Riaz) आउट हो चुके हैं. शो के बिते एपिसोड में सालमान खान ने उमर रियाज को बिग बॉस हाउस से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. शो में कहा गया कि फैंस से कम वोट मिलने के कारण उमर रियाज को शो से बाहर किया जा रहा है.

तो अब उमर रियाज ये बात मानने को तैयार नहीं हैं. उन्होंने दावा किया है कि मेकर्स ने इस एलिमिनेशन में अपनी मनमानी की है. शो से बाहर होते ही उमर रियाज ने मेकर्स की क्लास लगा दी है.

 

उमर रियाज ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि मेरी जनता मेरी आर्मी मुझे शो से बाहर नहीं निकाल सकती. मेरे फैंस मुझे सपोर्ट न करें ऐसा हो ही नहीं सकता.मैं हर उस शख्स को धन्यवाद कहना चाहता हूं जिसने मुझे वोट किया है. इंडिया ही नहीं बल्कि बाहर के लोगों ने भी मुझे बहुत प्यार दिया है. इतना प्यार देने के लिए आपका शुक्रिया.

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उमर रियाज के इस ट्वीट को देखकर कहना गलत नहीं होगा कि उन्हें अपने फैंस पर भरोसा है. उमर को लगता है कि मेकर्स ने वोट्स को नजरअंदाज करते हुए उन्हें शो से बाहर किया है. लेकिन बिग बॉस हाउस का पल पल की खबर देने वाले एक रिपोर्ट के अनुसार उमर रियाज को वाकई में कम वोट्स मिले हैं.

 

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एक रिपोर्ट के अनुसार उमर रियाज को केवल 27 प्रतिशत वोट्स ही मिले हैं. कम वोट्स मिलने की वजह से ही उमर रियाज बिग बॉस 15 से आउट हुए हैं. फैंस ही उमर रियाज को शो से बाहर करना चाहते थे. फैंस को उमर रियाज का गुस्सा खास पसंद नहीं आया है. उमर रियाज लगातार अपने गुस्से की वजह से टारगेट हो रहे थे.

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सहारा – पार्ट 3

‘अर्चना डियर, तुम बेकार में भावुक हो रही हो. बीती बातों पर खाक डालो. मुझे तुम्हारी पीड़ा का एहसास है. दूसरी तरफ मेरे बूढ़े मांबाप के प्रति भी मेरा कुछ कर्तव्य है. वे मुझ से एक ही चीज मांग रहे थे, इस घर को एक वारिस, इस वंश को एक कुलदीपक.’

‘तो कर लो दूसरी शादी, ले आओ दूसरी पत्नी, पर इतना बताए देती हूं कि मैं इस घर में एक भी पल नहीं रुकूंगी,’ अर्चना भभक कर बोली.

‘अर्चना…’

‘मैं इतनी महान नहीं हूं कि तुम्हारी बांहों में दूसरी स्त्री को देख कर चुप रह जाऊं. मैं सौतिया डाह से जल मरूंगी. नहीं रजनीश, मैं तुम्हें किसी के साथ बांटने के लिए हरगिज तैयार नहीं.’

‘अर्चना, इतना तैश में न आओ. जरा ठंडे दिमाग से सोचो. यह दूसरा ब्याह महज एक समझौता होगा. यह सब बिना विवाह किए भी हो सकता है पर…’

‘नहीं, मैं तुम्हारी एक नहीं सुनूंगी. हर बात में तुम्हारी नहीं चलेगी. आज तक मैं तुम्हारे इशारों पर नाचती रही. तुम ने अबार्शन को कहा, सो मैं ने करा दिया. तुम ने यह बात अपने मातापिता से गुप्त रखी, मैं राजी हुई. तुम क्या जानो कि तुम्हारी वजह से मुझे कितने ताने सहने पड़ रहे हैं. बांझ…आदि विशेषणों से मुझे नवाजा जाता है. तुम्हारी मां ने तो एक दिन यह भी कह दिया कि सवेरेसवेरे बांझ का मुंह देखो तो पूरा दिन बुरा गुजरता है. नहीं रजनीश, मैं ने बहुत सहा, अब नहीं सहूंगी.’

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‘अर्चना, मुझे समझने की कोशिश करो.’

‘समझ लिया, जितना समझना था. तुम लोगों की कूटनीति में मुझे बलि का बकरा बनाया जा रहा है. जैसे गायगोरू के सूखने पर उस की उपयोगिता नहीं रहती उसी तरह मुझे बांझ करार दे कर दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल फेंका जा रहा है. लेकिन मुझे भी तुम से एक सवाल करना है…’

‘क्या?’ रजनीश बीच में ही बोल पड़ा.

‘समझ लो तुम मेें कोई कमी होती और मैं भी यही कदम उठाती तो?’

‘अर्चना, यह कैसा बेहूदा सवाल है?’

‘देखा…कैसे तिलमिला गए. मेरी बात कैसी कड़वी लगी.’

रजनीश मुंह फेर कर सोने का उपक्रम करने लगा. उस रात दोनों के दिल में जो दरार पड़ी वह दिनोंदिन चौड़ी होती गई.

रजनीश ने दरवाजे की घंटी बजाई तो एक सजीले युवक ने द्वार खोला.

‘‘अर्चनाजी हैं?’’ रजनीश ने पूछा.

‘‘जी हां, हैं, आप…आइए, बैठिए, मैं उन्हें बुलाता हूं.’’

अर्चना ने कमरे में प्रवेश किया. उस के हाथ में ट्रे थी.

‘‘आओ रजनीश. मैं तुम्हारे लिए काफी बना रही थी. तुम्हें काफी बहुत प्रिय है न,’’ कह कर वह उसे प्याला थमा कर बोली, ‘‘और सुनाओ, क्या हाल हैं तुम्हारे? अम्मां व पिताजी कैसे हैं?’’

‘‘उन्हें गुजरे तो एक अरसा हो गया.’’

‘‘अरे,’’ अर्चना ने खेदपूर्वक कहा, ‘‘मुझे पता ही न चला.’’

‘‘हां, तलाक के बाद तुम ने बिलकुल नाता तोड़ लिया. खैर, तुम तो जानती ही हो कि मैं ने मोहिनी से शादी कर ली. और यह नियति की विडंबना देखो, हम आज भी निसंतान हैं.’’

‘‘ओह,’’ अर्चना के मुंह से निकला.

‘‘हां, अम्मां को तो इस बात से इतना सदमा पहुंचा कि उन्होंने खाट पकड़ ली. उन के निधन के बाद पिताजी भी चल बसे. लगता है हमें तुम्हारी हाय लग गई.’’

‘‘छि:, ऐसा न कहो रजनीश, जो होना होता है वह हो कर ही रहता है. और शादी आजकल जन्म भर का बंधन कहां होती है? जब तक निभती है निभाते हैं, बाद में अलग हो जाते हैं.’’

‘‘लेकिन हम दोनों एकदूसरे के कितने करीब थे. एक मन दो प्राण थे. कितना साहचर्य, सामंजस्य था हम में. कभी सपने में भी न सोचा था कि हम एकदूसरे के लिए अजनबी हो जाएंगे. और आज मैं मोहिनी से बंध कर एक नीरस, बेमानी ज्ंिदगी बिता रहा हूं. हम दोनों में कोई तालमेल नहीं. अगर जीवनसाथी मनमुताबिक न हो तो जिंदगी जहर हो जाती है.

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‘‘खैर छोड़ो, मैं भी कहां का रोना ले बैठा. तुम अपनी सुनाओ. यह बताओ, वह युवक कौन था जिस ने दरवाजा खोला?’’

यह सुन कर अर्चना मुसकरा कर बोली, ‘‘वह मेरा बेटा है.’’

‘‘ओह, तो तुम ने भी दूसरी शादी कर ली.’’

‘‘नहीं, मैं ने शादी नहीं की, मैं ने तो केवल उसे गोद लिया है.’’

‘‘क्या?’’

‘‘हां, रजनीश, यह वही बच्चा दीपू है, अनाथाश्रम वाला. तुम से तलाक ले कर मैं दिल्ली गई जहां मेरा परिवार रहता था. एक नौकरी कर ली ताकि उन पर बोझ न बनूं, पर तुम तो जानते हो कि एक अकेली औरत को यह समाज किस निगाह से देखता है.

‘‘पुरुषों की भूखी नजरें मुझ पर गड़ी रहतीं. स्त्रियों की शंकित नजरें मेरा पीछा करतीं. कई मर्दों ने करीब आने की कोशिश की. कई ने मुझे अपनी हवस का शिकार बनाना चाहा, पर मैं उन सब से बचती रही. 1-2 ने विवाह का प्रलोभन भी दिया, पर जहां मन न मिले वहां केवल सहारे की खातिर पुरुष की अंकशायिनी बनना मुझे मंजूर न था.

‘‘इस शहर में आ कर अपना अकेलापन मुझे सालने लगा. नियति की बात देखो, अनाथाश्रम में दीपू मानो मेरी ही प्रतीक्षा कर रहा था. इस ने मेरे हृदय के रिक्त स्थान को भर दिया. इस के लालनपालन में लग कर जीवन को एक गति मिली, एक ध्येय मिला. 15 साल हम ने एकदूसरे के सहारे काट दिए. इस आशा में हूं कि यह मेरे बुढ़ापे का सहारा बनेगा, यदि नहीं भी बना तो कोई गम नहीं, कोई गिला नहीं,’’ कहती हुई अर्चना हलके से मुसकरा दी.

Anupamaa के अनुज कपाड़िया बने ‘मिस इंडिया’! देखें Video

टीवी सीरियल अनुपमा (Anupamaa) फेम अनुज कपाड़िया सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं. वह आए दिन सोशल मीडिया पर फोटोज और वीडियो शेयर करते रहते हैं. फैंस को अनुज कपाड़िया के पोस्ट का बेसब्री से इंतजार रहता है. शो में अनुज-अनुपमा की लव स्टोरी की शुरूआत हो चुकी है. अनुपमा भी अनुज को बेइंतहा प्यार करने लगी है. लेकिन अनुज से इजहार नहीं कर पाई है. इसी बीच अनुज कपाड़िया का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. आइए बताते हैं इस वीडियो के बारे में.

इस वीडियो में आपके फेवरेट कैरेक्टर अनुज यानी गौरव खन्ना मिस इंडिया बनकर नखरे दिखा रहे हैं. जी हां, मिस इंडिया बनते ही अनुज ने अपने कोस्टार्स को भी नखरा दिखाना शुरू कर दिया है. फैंस गौरव खन्ना को मिस इंडिया बनते देख खूब हंस रहे हैं. इस वीडियो पर यूजर्स खूब कमेंट कर रहे हैं.

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‘अनुपमा’ सीरियल में दिखाया जा रहा है कि मालविका का अतीत सामने आ चुका है. अनुज ने अनुपमा को बताता है कि उसकी शादी एक ऐसे शख्स से हुई थी. जो मेरी बहन को दिन-रात मारता था. अनुज कहता है कि मेरे ही कारण मेरी बहन ने इतना दर्द झेला है.

 

अनुज आगे कहता है कि मालविका के इस हालत का जिम्मेदार मैं हूं. दोनों भाई-बहन अनुपमा की गोद में सिर रखकर फूट-फूट कर रोते हैं. अनुपमा उनका दर्द कम करने की कोशिश करती है.

 

शो के आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि अनुपमा अनुज और मालविका को संभाल रही होगी तभी वनराज भी आ जाएगा. वनराज के मालविका के पास जाने पर काव्या नाराज होगी तो दूसरी तरफ स्वीटी अनुपमा के पार्टी में नहीं पहुंचने से उदास होगी और रोने लगेगी.

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मालविका की हालत देखकर अनुपमा भी टूट जाएगी. लेकिन वह फैसला करेगी कि वह मालविका को उसके दर्द से जरूर बाहर निकालेगी. दूसरी तरफ काव्या सभी घरवालों को अनुपमा के खिलाफ भड़काने की कोशिश करेगी.

‘तेरी मेरी लव स्टोरी’ फेम एक्टर ने जयपुर में की राजसी अंदाज में शादी, देखें फोटोज

‘तेरी मेरी लव स्टोरी’,‘काल भैरव रहस्य’,‘एक घर बनेगा’ और ‘मिटेगी लक्ष्मण रेखा’ जैसे सीरियलों में अभिनय कर लोकप्रियता हासिल कर चुके अभिनेता राहुल शर्मा ने ‘कोविड 19’’के सभी प्रावधानों का पालन करते हुए अपनी मां की पसंद की लड़की नेहा शर्मा के 22 जनवरी को परंपरागत रीति रिवाजों के साथ राजस्थान में शादी रचा ली.

राहुल शर्मा बताते हैं- ‘‘हमने पंरपरागत तरीके से विवाह किया. सगाई, हल्दी, मेहंदी, संगीत, रिसेप्शन,फेरे सहित सभी कार्यक्रम हुए. तीसरी लहर को देखते हुए लोग हमें शादी को स्थगित करने की सलाह दे रहे थे, लेकिन मैं बहुत अडिग रहा और हमने 22 जनवरी को विवाह किया. मैंने अतीत में देखा है, कि जब आप शादी स्थगित करते हैं,तो सारा उत्साह खत्म हो जाता है. इसके अलावा भविष्य में मेरी कुछ प्रतिबद्धताएं हैं, इसलिए यह मेरे लिए संभव नहीं था.’’

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राहुल ने यह प्रेम विवाह नहीं बल्कि अपनी मां की मर्जी से विवाह रचाया है. वह बताते हैं-‘‘यह एक अरेंज मैरिज है. इसकी बहुत ही रोचक कहानी है. मुझे शादी में कोई दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन एक साल पहले मैं कोरोना के कारण घर पर था. अपने माता-पिता के साथ बातचीत के दौरान मैंने महसूस किया कि वह कुछ चीजों की कामना करते हैं और मुझे उन्हें पूरा करना चाहिए. तो यह मेरे लिए एक भावनात्मक निर्णय है. पिछले अनुभव को देखते हुए मैंने प्रेम विवाह की बजाय एक व्यवस्थित विवाह का विकल्प चुना. मैंने अपनी माँ से कहा कि वह एक लड़की की तलाश करें. मेरी मां ने नेहा शर्मा को चुना. मैं उनसे आठ माह पहले मिला था. हालांकि हम ज्यादा नहीं मिल सके,पर हमने बहुत बातें की. वह सुंदर था और मैंने अपने पिछले रिश्ते में ऐसी प्रक्रिया नहीं देखी थी. नेहा जयपुर के एक स्कूल में शिक्षिका हैं.

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मैं राजस्थान में एक भव्य शादी करना चाहता था. राजस्थान में राजसी शादी के अपने सपने को पूरा करके खुश हूं.’’ राहुल शर्मा आगे कहते हैं-‘‘ वैसे मैं 6-7 साल पहले शादी करना चाहता था, उस वक्त शादी हुई नही. फिर मेरा इरादा बदल गया था. पर अब मेरे सपनों के अनुसार यह विवाह संपन्न हुआ है. बहुत सारे लोग हैरान हैं कि मैंने अरेंज्ड मैरिज को चुना, लेकिन सही तरह की लड़की ढूंढना जो आपके जीवन का निर्माण करती है और आपको आगे ले जाती है और आपके विकास को देखती है और आपको अपने जीवन में विकसित करने की कोशिश करती है, यह महत्वपूर्ण होता है. मुझे पता है कि इस विवाह को करने से पहले मैं नेहा को बहुत ज्यादा नहीं जानता था.’’

वह आगे कहते हैं-‘‘विवाह मेरे लिए जीवन बदलने वाली घटना है. कुंवारे से शादीशुदा आदमी तक का सफर पूरी तरह से अलग होता है.जब आप 30 के पार हो जाते हैं, तो आपको बहुत सी चीजों का एहसास होता है. जहां आप अधिक परिपक्व होते हैं और अपनी भावनाओं के साथ बस जाते हैं.मैं काफी कुछ कर चुका हूं… अब मेरे पास बहुत धैर्य है और मैं चीजों को अलग तरीके से संभालूंगा.‘‘

भारतीय जनता पार्टी की कमजोरी हैं नरेन्द्र मोदी!

यह बात थोड़ी अजीब नहीं है कि क्या चुनाव चाहे पश्चिम बंगाल में हों, उत्तर प्रदेश में हों, गोवा में हों, उत्तराखंड में हों या कहीं और किसी विधानसभा के हों, भारतीय जनता पार्टी को नरेंद्र मोदीको ही मोरचों पर खड़ा करना होता है. चुनावी भाषण मोदी को देने खूब आते थे पर धीरेधीरे उन का नयापन खत्म हो रहा है और किराए की भीड़ भी सुनने को कोई खास बेचैन नहीं होती पर फिर भी पार्टी को उन्हीं को बुलाना पड़ता है.

जो पार्टी नेताओं से भरी हो, जिस के मैंबर गलीगली में हों, जो हर दंगे में हजारों की भीड़ जमा कर लेती हो, उसे विधानसभाओं के छोटे चुनावों में भी प्रधानमंत्री को एक बार नहीं दसियों बार बुलाना पड़े, यह तो बहुत परेशानी की बात है. प्रधानमंत्री का काम चुनाव लड़ना नहीं होता देश चलाना होता है. ऐसे समय जब देश में महंगाई का नासूर बढ़ रहा है, बेरोजगारी का कोई उपाय नहीं दिख रहा हो, टैक्स बढ़ रहे हों, हिंदूमुसलिम दंगे भड़क रहे हों, पढ़ाई बिखर रही हो, किसान रोना रो रहे हों, विदेशों में देश की इज्जत को खतरा हो, प्रधानमंत्री छोटेछोटे कसबोंशहरों में जा कर भाषण दे कर कांग्रेस या दूसरी पार्टियों को कोसने का काम करें, यह शर्म की बात है.

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गलती नरेंद्र मोदी की नहीं है. गलती तो पूरी पार्टी की है कि उस का कोई मुख्यमंत्री ऐसा नहीं है जो अपने बलबूते पर चुनाव जीत कर आ सके. ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल का चुनाव अपने बलबूते पर जीता था. तमिलनाडु का चुनाव स्टालिन ने अपने बलबूते पर जीता था. कांग्रेस सरकारों में भी पहले अशोक गहलोत ने राजस्थान का चुनाव अपने बलबूते पर जीता था और पंजाब का चुनाव कैप्टन अमरिंदर सिंह, जो अब भाजपा से मिल रहे हैं, ने अपने बलबूते पर जीता. इन के साथ दूसरी पार्टियां या कांग्रेस पार्टी थीं पर इन्हें किसी प्रधानमंत्री की तो जरूरत नहीं पड़ी.

भारतीय जनता पार्टी में ऐसी क्या कमजोरी है कि उस के पास नरेंद्र मोदी के अलावा कोई और चेहरा नहीं है जिस पर लोग भरोसा कर सकें? पहले कनार्टक में बीएस येदियुरप्पा हुआ करते थे जो अपने बलबूते पर विधानसभा का चुनाव कई बार जीत चुके हैं पर उन के अलावा भारतीय जनता पार्टी में और कोई नेता क्यों नहीं है?

भारतीय जनता पार्टी तो सब के विकास की बात करती है तो उस के पास नेताओं की खान होनी चाहिए. भारतीय जनता पार्टी हर सांस में परिवारवाद को कोसती है पर उस के पास परिवार तो क्या अकेला नरेंद्र मोदी बचा है तो क्यों? क्यों नहीं भारतीय जनता पार्टी में सम?ादार, तेज, होशियार, पढ़ेलिखे, जनता की सेवा करने वाले जमा हो रहे जो भरोसे के हों और कल को नरेंद्र मोदी की जगह ले सकें?

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वैसे हमारा पौराणिक इतिहास भी यही सा कुछ कहता है. पांडवों के बाद कुरुक्षेत्र समाप्त सा हो गया, राम के बाद उन का राज समाप्त सा हो गया. कम से कम महाभारत और रामायण अगर वे ऐतिहासिक दस्तावेज हैं तो यही कहते हैं. तो क्या भारतीय जनता पार्टी भी पौराणिक किस्सों को दोहराने की तैयारी में है? आज उस के हजारों सांसद, विधायक, पार्षद, जिलाध्यक्ष कल को प्रधानमंत्री का पद नहीं पाएंगे? अगर ऐसा हुआ तो देश को चाहे नुकसान न हो, भाजपाई भक्तों को बहुत नुकसान होगा.

गरीब बच्चों को क्यों नहीं पढ़ने देते?

गरीब और अनपढ़ लोगों से जब उन के बच्चों को स्कूल भेजने और पढ़ाने की बात कही जाती है, तो उन का यही जवाब होता है, ‘इन को कौन सा पढ़लिख कर कलक्टर बाबू बनना है. पढ़ाईलिखाई बड़े और पैसे वालों के लिए होती है. स्कूल जा कर समय खराब करने से अच्छा है कि मेहनतमजदूरी कर के दो पैसे कमाए जाएं. इस से घरपरिवार की मदद हो सकेगी. लड़की को दूसरे घर जाना है. पढ़ालिखा कर क्या फायदा?’

गरीब अनपढ़ लोगों को अपने हकों का पता नहीं होता है. पौराणिक किताबों और कहानियों में यह बारबार कहा गया कि दलित तबके के लिए पढ़ाईलिखाई नहीं है.

इस का असर यह है कि गरीब अनपढ़ अपने बच्चों को पढ़ने नहीं देते. बच्चे पढ़ सकें, इस के लिए जरूरी है कि मांबाप भी सजग हों और वे बच्चों को स्कूल भेजें, पर पौराणिक कहानियों ने हमारे दिमाग पर ऐसा असर किया है कि मांबाप जागरूक ही नहीं होना चाहते हैं.

आज भी एससी और एसटी तबके में लड़कों की पढ़ाईलिखाई तो खराब है ही, लड़कियों की पढ़ाईलिखाई और भी ज्यादा खराब हालत में है. 5वीं जमात के बाद स्कूल छोड़ने वाली लड़कियों में

यह तादाद सब से ज्यादा है. तकरीबन 42 फीसदी लड़कियां 5वीं जमात के बाद, 67 फीसदी लड़कियां 8वीं जमात के बाद और 77 फीसदी लड़कियां 10वीं जमात के बाद पढ़ाई छोड़ देती हैं.

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ऊंची तालीम में भी दलित तबके की लड़कियों की तादाद सब से कम है. आदिवासी और दलित तबके में लड़कियों की पढ़ाईलिखाई की हालत बहुत बुरी है. इस की सब से बड़ी वजह है कि 8वीं जमात के बाद लड़कियों को घर के कामकाज में ?ांक दिया जाता है, वहीं 10वीं जमात तक आतेआते ज्यादातर लड़कियों की शादी हो जाती है. यह भी देखा गया है कि जब लड़कियां पढ़लिख लेती हैं, तो वे घरपरिवार और समाज को मदद करने के लायक हो जाती हैं.

तालीम से दूर बड़ी आबादी

जब गरीब और अनपढ़ लोगों की बात होती है, तो उस में सब से बड़ा हिस्सा एससी और एसटी तबके का है. इन्हें दलित या अछूत कहा जाता है. ये लोग भारत की कुल आबादी का 18 से 20 फीसदी हैं.

साल 1850 से साल 1936 तक ब्रिटिश साम्राज्यवादी सरकार इन्हें दबेकुचले तबके के नाम से देखती थी. इन की कुल आबादी 32 करोड़ के करीब मानी जाती है. यह भारत की आबादी का एकचौथाई हिस्सा है.

पौराणिक जमाने से आज तक दबेकुचले तबके के साथ भेदभाव होता आ रहा है. इन को सब से ज्यादा पढ़ाईलिखाई के हक से दूर रखा जाता है. सदियों से इस तबके के मन में एक बात अंदर तक बैठ गई है कि पढ़ाईलिखाई पर इन लोगों का हक नहीं है.

सरकार ने संविधान के मुताबिक तालीम देने का इंतजाम तो कर दिया, लेकिन सरकारी तालीम का बुरा हाल कर दिया, जिस की वजह से सरकारी स्कूल में पढ़ने के बाद भी ये लोग सामान्य वर्ग का मुकाबला करने में बहुत पीछे हो जा रहे हैं.

1931-32 में गोलमेज सम्मेलन के बाद जब ब्रिटिश शासकों ने ऐसे लोगों के लिए अलग सूची बनाई, जिस से उन के लिए अलग सरकारी योजनाओं को चला कर उस का फायदा उन को दिया जा सके.

आजादी के बाद संवैधानिक (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 जारी किया गया, जिस में भारत के 29 राज्यों की 1,108 जातियों के नाम शामिल किए गए थे. ऊंचनीच के हिसाब से यह समाज तमाम बिरादरी और जातियों में बंटा है.

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तकरीबन 2000 साल से चली आ रही जातीय व्यवस्था को आजादी के 70 सालों के बाद भी खत्म नहीं किया जा सका है. किसी न किसी रूप में यह कायम है. इन को कमजोर करने के लिए जातीय व्यवस्था के भीतर जातियों का बंटवारा किया जा रहा है, जिस से राजनीतिक दबाव को कम किया जा सके.

कमजोर पड़ते दलित मुद्दे

डाक्टर भीमराव अंबेडकर जैसे नेताओं ने पढ़ाईलिखाई को पूरी अहमियत दी थी. दलित आंदोलन को शुरू कर के उन को हक और पहचान दिलाने के लिए काम किया. 20वीं सदी की शुरुआत में दलितों की सामाजिक, तालीम और माली तौर पर हालत बेहद खराब थी. डाक्टर भीमराव अंबेडकर की अगुआई में दलित आंदोलन से दलितों को कुछ फायदे हुए.

आजादी मिलने के बाद यह आंदोलन राजनीतिक सत्ता पाने में लग गया, जिस के चलते दलित जातियां तमाम बिरादरी में बंट कर कमजोर हो गई हैं, जिस से उन का दबाव कम हो गया है. इस वजह से आरक्षण का विरोध करने वाले लोग अब आरक्षण को खत्म करने की मांग करने लगे हैं.

शासन व्यवस्था के हर दर्जे में कुछ सीटें दलितों के लिए आरक्षित होती हैं. इस का फायदा अब दलितों के एक वर्ग में ही बांटा जा रहा है. सरकारी मदद से चलने वाले शैक्षिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में भी दलितों के लिए आरक्षण होता है.

आजादी के बाद बने भारत के संविधान में दलित हितों के संरक्षण के लिए ये व्यवस्थाएं की गई हैं. 70 साल के बाद भी ये आधीअधूरी ही हैं. दलितों के एक खास तबके तक ही फायदा पहुंच पा रहा है.

अहमियत को नहीं समझ रहे

यह सही है कि दलितों का एक तबका पढ़लिख कर आगे बढ़ गया है. इस ने अपने रोजगार भी शुरू कर लिए हैं. दलित इंडियन चैंबर औफ कौमर्स ऐंड इंडस्ट्री भी बन गई है. इस के बाद अभी भी दलितों का एक तबका बहुत पीछे है.

आरक्षण की नीति उन्हीं को फायदा पहुंचाती आ रही है, जो इस का फायदा ले कर आगे बढ़ चुके हैं. दलितों में एक छोटा तबका ऐसा तैयार हो गया है, जो अमीर है. यह दलितों की आबादी का महज 10 फीसदी है.

दलितों का यह तबका सामाजिक तौर पर खुद को ऊंचे दर्जे का सम?ाने लगा है. इस का बाकी दलित आबादी से कोई सरोकार नहीं रह गया है.

शहरों की बात छोड़ दें, तो गांव में एक बड़ा तबका ऐसा है, जो अभी भी पढ़ाईलिखाई के चलते तरक्की से कोसों दूर है. गांव के ऐसे लोग केवल मजदूर बने हुए हैं, क्योकि दलित भूमिहीन हैं. ऐसे में नौकरी और खेती उन के पास नहीं हैं. वे केवल सरकारी सुविधाओं पर आश्रित हो गए हैं. वे खुद कुछ करना नहीं चाहते, जिस की वजह से उन की तरक्की नहीं हो पा रही है.

वे ‘वोटबैंक’ राजनीति का शिकार हो गए हैं. जमीन के मालिक न होने के बावजूद दलित भूमिहीन मजदूर और सीमांत किसान की तरह नजर आता है. दलितों के पास जो थोड़ीबहुत जमीन है, गरीबी के चलते वह भी बिकती जा रही है.

काम नहीं आ रहे संविधान के हक

सरकारी स्कूलों में आज दलितों की तादाद दूसरी जातियों के मुकाबले ज्यादा है, लेकिन जैसेजैसे पढ़ाई आगे बढ़ती है, यह तादाद कम होती जा रही है. ये लोग सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं, जहां पढ़ाई का लैवल ज्यादा अच्छा नहीं होता.

इस वजह से इन को रोजगार भी घटिया दर्जे का ही मिलता है. जैसेजैसे आरक्षित नौकरियां और रोजगार के दूसरे मौके कम हो रहे हैं, वैसेवैसे इस तबके की निराशा और भी ज्यादा बढ़ती जा रही है.

साल 1997 से साल 2021 के बीच सरकारी नौकरियों में लाखों की कमी आई है, जिस की वजह से दलितों में भी रोजगार घटा है.

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संविधान ने दलितों को जो हक दिए हैं, वे उतने काम नहीं आ रहे जितना उम्मीद की जा रही थी. मिसाल के रूप में छुआछूत को असंवैधानिक करार दिए जाने के बावजूद यह आज तक कायम है. तमाम योजनाएं बनाई गई हैं, लेकिन उन का फायदा नहीं मिल रहा.

इस की सब से बड़ी वजह यह है कि दलित संगठन अब समाज में जागरूकता का काम करने की जगह राजनीति के जरीए सत्ता पाने में लग गए हैं.

वोट पाने के लिए अलगअलग तबके के लोगों को भी साथ लेना पड़ता है, जिस के चलते केवल दलित जागरूकता पर काम करना मुश्किल हो जाता है. इस की वजह से दलित मुद्दे कम होते जा रहे हैं. दलितों के लिए काम करने वाले दलों को भी दलित समाज की जगह सर्वसमाज की बात करनी पड़ रही है.

आज जरूरत इस बात की है कि गरीब और अनपढ़ लोग खुद सजग हों. अपने बच्चों को पढ़ने भेजें. जब वे पढ़लिख कर सम?ादार हो जाएंगे, तो अपना अच्छाबुरा सम?ाने लगेंगे.

जो लड़कियां स्कूल जाती हैं, वे कम उम्र में शादी नहीं करना चाहती हैं. वे अनपढ़ लोगों से बेहतर सोचती हैं. अपना और परिवार दोनों का भला करती हैं. इस वजह से गरीब और अनपढ़ लोगों को यह भूल जाना चाहिए कि पढ़लिख कर कौन सा कलक्टर बनना है. पढ़लिख कर ही अपने हक पता चल सकते हैं. वह जिंदगी में तरक्की का रास्ता है. अनपढ़ रह कर मजदूरी करने से अच्छा है कि पढ़लिख कर कोई हुनरमंद काम करें. इसी से जिंदगी में इज्जत मिलेगी.

विराट कोहली और रोहित शर्मा: दिग्गजों की लड़ाई, कराई जग हंसाई

अपने समय के स्टार क्रिकेटर और भारतीय टीम के कप्तान रहे मोहम्मद अजहरुद्दीन आजकल सुर्खियों में हैं, पर उन्होंने खुद कोई कारनामा नहीं किया है, बल्कि भारतीय क्रिकेट टीम में रोहित शर्मा और विराट कोहली के बीच कप्तानी को ले कर जो लड़ाई चल रही है, उस पर उन्होंने कुछ ऐसा कह दिया है, जिस से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड भी शक के दायरे में आ गया है. सब की जगहंसाई हो रही है, सो अलग.

आप को याद होगा कि यूएई में खेले गए ट्वैंटी20 वर्ल्ड कप के बीच में ही विराट कोहली ने अपनी टी20 की कप्तानी छोड़ दी थी और यह कमान रोहित शर्मा को सौंप दी गई थी. तब तक तो सबकुछ ठीक ही लग रहा था, पर बाद में विराट कोहली को जिस तरह

8 दिसंबर, 2021 को वनडे की कप्तानी से भी हटाया गया, वह अब विवादों में है. वैसे, फिलहाल विराट कोहली भारतीय टैस्ट टीम के कप्तान बने हुए हैं.

लेकिन तब मामला और ज्यादा उछला, जब खबर आई कि विराट कोहली वनडे मैचों में और रोहित शर्मा टैस्ट मैचों में खेलने से बच रहे हैं, क्योंकि वे एकदूसरे की कप्तानी में नहीं खेलना चाहते हैं.

इस खबर पर ही मोहम्मद अजहरुद्दीन ने रोहित शर्मा और विराट कोहली को तकरीबन लताड़ते हुए अपने ट्वीट में लिखा था, ‘विराट कोहली ने जानकारी दी कि वे वनडे सीरीज के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे, जबकि रोहित शर्मा चोट के चलते टैस्ट सीरीज में नहीं खेल पाएंगे. ब्रेक लेने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन टाइमिंग बेहतर होनी चाहिए. इस से दोनों के बीच तकरार की खबरों को और हवा मिलेगी.’

असल में यह सारी लड़ाई तब शुरू हुई थी, जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने बिना किसी ठोस वजह के विराट कोहली को वनडे टीम की कप्तानी से भी हटा दिया था.

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इस मुद्दे पर विराट कोहली ने15 दिसंबर, 2021 को एक प्रैस कौंफ्रैंस में बताया कि सबकुछ पहले से ही तय हो गया था और मु?ा से कुछ पूछा ही नहीं गया. मेरे पास स्वीकार करने के अलावा कुछ नहीं बचा था.

एक सवाल का जवाब देते हुए विराट कोहली ने कहा, ‘‘टैस्ट टीम के सैलेक्शन को ले कर चीफ सैलेक्टर्स ने मु?ा से बात की थी. टैस्ट टीम सैलेक्शन के बाद 5 मुख्य चयनकर्ताओं ने मु?ो बताया कि मैं अब वनडे टीम का कप्तान नहीं हूं. इस पर मैं ने कहा… ओके. इस फैसले से पहले मु?ो कप्तानी से हटाए जाने को ले कर किसी से कोई भी बात नहीं हुई थी.’’

पर बाद में बात को संभालते हुए विराट कोहली ने यह भी कहा, ‘‘रोहित शानदार कप्तान और राहुल भाई काफी अनुभवी हैं. दोनों को मेरा सपोर्ट मिलता रहेगा. बीसीसीआई ने जो भी फैसला लिया है, वह सोचसम?ा कर ही लिया गया है.

‘‘मेरे और रोहित के बीच में कोई टकराव नहीं है. मैं हमेशा ही इस बात को क्लियर करकर के थक गया हूं. जब तक मैं क्रिकेट खेलूंगा, तब तक उस से भारतीय क्रिकेट को कोई नुकसान नहीं होने दूंगा.’’

विराट कोहली द्वारा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को लपेटे जाने के बाद बोर्ड के एक सीनियर अफसर ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि विराट से सितंबर में ही कप्तानी पर बात कर ली गई थी. उन्हें तभी टी20 टीम की कप्तानी छोड़ने से रोकने की कोशिश हुई थी. जब वे नहीं माने तो तभी उन्हें चेतावनी दे दी गई थी कि ह्वाइट बाल क्रिकेट में टीम के 2 अलगअलग कप्तान नहीं हो सकते हैं.

याद रहे कि रोहित शर्मा को 8 दिसंबर, 2021 को भारत का वनडे और टी20 टीम का कप्तान बनाया गया था. कप्तानी पर विवाद को ले कर रोहित ने तब कहा था, ‘‘जब आप भारत के लिए क्रिकेट खेलते हो, तो आप पर हमेशा दबाव होता है. जब आप खेलते हो तो हमेशा लोग कुछ न कुछ कहेंगे. कोई पौजिटिव बातें करेगा, कोई नैगेटिव बातें करेगा. लेकिन मेरे लिए बतौर कप्तान नहीं, बल्कि एक क्रिकेटर के रूप में यह जरूरी है कि मैं अपने काम पर ध्यान दूं, न कि लोग जो कह रहे हैं उस पर. आप उस पर काबू नहीं पा सकते.

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‘‘टीम का हर खिलाड़ी इस बात को सम?ाता है कि जब हम हाई प्रोफाइल टूर्नामैंट खेलते हैं, तो बातें होती ही हैं. हमारे लिए यह जरूरी है कि अपने काम को सम?ों और वह है टीम के लिए मैच जीतना. हम जिस तरह के खेल के लिए जाने जाते हैं, वैसा खेलें. बाहर जो बातें होती हैं, उस के कोई माने नहीं हैं.

‘‘हमारे लिए अहम यह है कि एकदूसरे के बारे में हम क्या सोचते हैं. मैं ऐक्स, वाई, जैड के बारे में क्या सोचता हूं, यह अहम है. हम खिलाडि़यों के बीच एक मजबूत संबंध बनाना चाहते हैं और इस तरह से हम यह रिश्ता बना पाएंगे. राहुल भाई (राहुल द्रविड़) भी इस में हमारी मदद करेंगे.’’

देखा जाए तो जब से सौरव गांगुली बीसीसीआई के अध्यक्ष बने हैं और उस के बाद राहुल द्रविड़ को भारत क्रिकेट टीम का कोच बनाया गया है, तब से ही विराट कोहली और रवि शास्त्री के पर काटे गए हैं. इस टी20 वर्ल्ड कप में भारत को पाकिस्तान और न्यूजीलैंड से पहले 2 अहम मुकाबले खेलने थे. भारत दोनों ही मैच हार गया था और बाद में सारे मैच जीतने के बाद भी वह सैमीफाइनल में जगह नहीं बना पाया था.

पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के खिलाफ विराट कोहली ने अनुभवी औफ स्पिनर आर. अश्विन को नहीं खिलाया था, जिस का खमियाजा भारत को भुगतना पड़ा था. जबकि सौरव गांगुली ने तब कहा था कि विराट कोहली के कहने पर ही आर. अश्विन का चयन टीम में किया गया था.

हालांकि बाद के 3 मैचों में आर. अश्विन ने 6 विकेट लिए थे, इसलिए यह सवाल भी उठा कि विराट कोहली ने उन्हें पहले 2 मैच क्यों नहीं खेलने दिए? इस के बदले स्पिन गेंदबाज वरुण चक्रवर्ती को खेलने का मौका दिया था, जिन्होंने पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के खिलाफ एक भी विकेट नहीं लिया था.

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इस के बाद अगर हम विराट कोहली के कप्तानी के गुणों की बात करें, तो वे अग्रैसिव बहुत ज्यादा हैं, पर कभीकभार वे काफी उत्तेजित दिखाई देते हैं. वे महेंद्र सिंह धौनी जैसे कूल व शार्प कप्तान नहीं हैं और न ही रोहित शर्मा जैसे धीरगंभीर.

पिछले 2 साल की अपनी कप्तानी में विराट बल्लेबाजी पर ज्यादा फोकस नहीं कर पाए हैं. हालिया न्यूजीलैंड टैस्ट सीरीज के दूसरे और आखिरी मैच में विराट ने पहली पारी में जीरो और दूसरी पारी में 36 रन बनाए थे.

विराट कोहली ने अपना आखिरी सैकड़ा 2 साल पहले बंगलादेश के खिलाफ पिंक बाल टैस्ट मैच में लगाया था. तब से ले कर अभी तक 13 टैस्ट मैचों में वे 26.04 की साधारण औसत से सिर्फ 599 रन ही बना पाए हैं. सभी फौर्मेट्स को मिला कर 57 पारियां हो गई हैं उन्हें सैंचुरी लगाए हुए.

वैसे, अब इस मसले पर लीपापोती की जा रही है और क्रिकेट से जुड़े दिग्गज यह बताने और जताने की कोशिश कर रहे हैं कि कप्तानी जाने के बाद भी विराट कोहली बतौर बल्लेबाज उतने ही आक्रामक रहेंगे, जैसी उन की इमेज है, पर रोहित शर्मा और उन की इस तनातनी से भारतीय क्रिकेट की किरकिरी तो हुई है, जिस की भरपाई तभी होगी, जब टीम में एकजुटता दिखाई देगी और वह दोबारा अपनी इमेज के मुताबिक खेल भी दिखाएगी.

Manohar Kahaniya: पति पर पहरा

सौजन्य- मनोहर कहानियां

कोई भी महिला इस बात को हरगिज बरदाश्त नहीं कर सकती कि उस के पति के किसी और महिला से संबंध हों. दिल्ली की रीना गुलिया को जब पता चला कि उस के पति नवीन गुलिया का किसी लड़की से चक्कर चल रहा है, तब वह उस पर वीडियो कालिंग कर के नजर रखने लगी.

रीना गुलिया को पिछले 5 महीने से लगने लगा था कि उस के ग्लैमर और खूबसूरती में कमी आ गई है.

वह एक बच्चे की मां थी और पति नवीन गुलिया केबल कारोबारी. पति पहले की तरह अब उस की तारीफ नहीं करता था और न ही उस को कहीं घुमानेफिराने ले कर जाने की बातें ही करता था.

कनाट प्लेस में कैंडल डिनर और टूरिस्ट प्लेस के लिए डेटिंग तो बीते जमाने की बातें हो चुकी थीं. हर बात पर उसे झिड़की सुनने को मिलती थी. वह उस के प्यार में आई नीरसता और व्यवहार के रूखेपन से चिंतित होने लगी थी. वह समझ नहीं पा रही थी कि उस में इस तरह का बदलाव क्यों और कैसे आ गया है.

नवीन के स्वभाव में आए अचानक फर्क से रीना का चिंतित होना स्वाभाविक था. पहले तो उस ने सोचा कि शायद ऐसा लंबे समय से लौकडाउन के बाद कारोबार में बिजी होने की वजह से होगा, किंतु एक दिन नवीन को चार्मिंग फेस के साथ फोन पर बातें करते सुना. फोन पर लंबी बातचीत करने पर रीना को बेहद आश्चर्य हुआ.

रीना ने अपने सिक्स्थ सेंस से इतना तो अंदाजा लगा ही लिया था कि नवीन की जरूर किसी लड़की से बातें हो रही होंगी. उस के बारे में सीधेसीधे पूछने के बजाय उस ने उस पर निगरानी शुरू कर दी.

रीना का शक सही निकला. जल्द ही उसे पता चल गया कि नवीन किसी भारती नाम की लड़की से बातें करता है. फिर क्या था, रीना का पति को अंकुश में रखने का सिलसिला शुरू हो गया.

एक दिन जब पति घर से बाहर गया हुआ था तो रीना ने शाम के समय उसे वीडियो काल कर के पूछा, ‘‘नवीन तुम कहां हो?’’

‘‘गजब का सवाल करती हो. वीडियो काल किया है तो अंदाजा लगा लो. वैसे दिखाता हूं… देखो मालवीय नगर मेट्रो स्टेशन का मेनगेट दिखा?’’ कहते हुए नवीन ने मोबाइल कैमरे को मेट्रो स्टेशन की तरफ घुमा दिया.

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‘‘अरे…अरे, तुम तो नाराज हो गए. दरअसल, मुझे कालकाजी मंदिर जाना था, इसलिए मैं पूछ रही थी,’’ रीना बोली.

‘‘इस बारे में सुबह ही बताना था. मैं बस पर्किंग से गाड़ी ले कर मार्केट होता हुआ पहुंच रहा हूं. वैसे भी इस समय वहां जाएंगे तो काफी जाम में फंस जाएंगे,’’ नवीन बोला.

‘‘चलो कोई बात नहीं, अगले शुक्रवार को चलते हैं.’’ रीना बोली और फोन कट

कर दिया.

नवीन बड़बड़ाने लगा, ‘‘…पता नहीं इसे आजकल क्या हो गया है. बातबात पर वीडियो काल करती रहती है. मेरी भी कोई प्राइवेसी है या नहीं?’’

नवीन थोड़े समय में ही घर आ गया था. साथ में 3 बर्गर भी लाया था. उस का 7 वर्षीय बेटा बोल पड़ा, ‘‘पिज्जा नहीं लाए? उस के साथ कोका कोला भी मिलता है.’’

नवीन का चल रहा था भारती से चक्कर

नवीन कुछ बोलने को ही था कि उस का फोन आ गया. उस ने झट से काल रिसीव किए बगैर काट दिया. क्योंकि फोन भारती का ही था. अपने हिस्से का एक बर्गर लिया और वह छत पर चला गया.

छत पर पहुंच कर नवीन ने भारती को फोन मिलाया, ‘‘हां, हैलो, बताओ मेरी जान. कैसे फोन किया? तुम्हें मैं ने कहा है कि मुझे काल मत किया करो, मैसेज भेज दो. मैं खुद ही काल कर लूंगा.’’

‘‘अरे नवीन, मैं ने तुम्हें एक खुशखबरी देने के लिए फोन किया था. मैं संडे को देहरादून जा रही हूं. साथ चलोगे क्या?’’ भारती बोली.

‘‘संडे को यानी परसों. देखता हूं… तुम्हारे लिए तो समय निकालना ही पड़ेगा. रीना से कोई नया झूठ भी बोलना पड़ेगा,’’ नवीन

ने कहा.

‘‘झूठ नहीं, बहाना बनाना पड़ेगा.’’ कहती हुई भारती हंस पड़ी. नवीन भी हंस पड़ा और बर्गर की एक बाइट ले कर चबाने लगा.

‘‘तुम कुछ खा रह हो न! वह भी अकेलेअकेले?’’ भारती मुंह चलाने की आवाज सुन कर बोली.

‘‘…एक मिनट होल्ड करना, रीना की काल आ रही है.’’ कहते हुए नवीन ने भारती का फोन होल्ड पर कर दिया.

‘‘एक मिनट चैन से नहीं रहते देती है…’’ बड़बड़ाते हुए नवीन ने पत्नी की काल रिसीव की, ‘‘हां, बोलो… क्या चाय बन गई है. मैं अभी आ रहा हूं नीचे.’’ और फिर नवीन ने भारती के काल को दोबारा औन कर उस से सौरी बोला. इसी के साथ देहरादून चलने का वादा भी किया.

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‘‘किस का फोन था, जो तुम उस के लिए छत पर चले गए?’’ रीना सेंटर टेबल पर चाय रखती हुई बोली.

‘‘औफिस के किसी आदमी का फोन था, मुझे संडे को देहरादून जाना पड़ेगा.’’ नवीन ने झूठ बोला.

‘‘देहरादूनऽऽ, रास्ते में तो हरिद्वार, ऋषिकेश आएगा न? मैं भी चलूं क्या?’’ रीना चहकते हुए बोली.

‘‘नहींनहीं, मुझे अकेले जाना होगा, फैमिली के साथ नहीं.’’ नवीन ने उसे डपटते हुए कहा.

इतना कहना था कि रीना बिफरती हुई कहने लगी, ‘‘मुझे कहीं नहीं ले जाते हो, खुद घूमते रहते हो. मैं यहां घर में पड़ीपड़ी सड़ती रहती हूं. खुद तो मौजमस्ती करते हो. मैं सब जानती हूं कि तुम मुझे क्यों नहीं ले जाना चाहते…’’

पत्नी के सवालों से चिढ़ जाता था नवीन

नवीन और रीना के बीच की यह नोंकझोंक आए दिन की हो गई थी. नवीन बातबात पर रीना से उलझ जाता था, उस के कई उलझाने वाले शिकायती सवालों के संतुष्ट करने लायक जवाब नहीं दे पाता था.

वह जब भी अपना बचाव करने लगता, तब तूतूमैंमैं की नौबत आ जाती थी. ढाई-3 महीने से तो रीना कुछ ज्यादा ही आक्रामक हो गई थी. बातबात पर सवाल करने लगी थी. उसे हमेशा लगता था कि नवीन उस से बहुत सारी बातें छिपा रहा है. हालांकि वह अब कंफर्म हो चुकी थी कि नवीन के किसी भारती नाम की लड़की के साथ संबंध हैं.

वह नवीन को उस का नाम ले कर ताने भी मारने लगी थी. नवीन उस की बातों से जितना परेशान रहता था, उस से कहीं अधिक उस के बाहर रहने पर वीडियो कालिंग से तंग आ गया था. इस तरह दोनों की ही जिंदगी भारी तनाव में गुजर रही थी.

बात 18 नवंबर, 2021 की है. मालवीय नगर निवासी नवीन गुलिया शाम के करीब 5 बजे अपनी रक्तरंजित पत्नी रीना गुलिया को ले कर शेख सराय स्थित पीएसआरआई अस्पताल पहुंचा था. डाक्टर को मरीज की हालत देखते ही अपराध का मामला लगा और उन्होंने तत्काल मालवीय नगर थाने में इस की सूचना दे दी थी.

सूचना के बाद अस्पताल पहुंची पुलिस टीम को पता चला कि नवीन की 33 वर्षीय पत्नी रीना गुलिया बेहद जख्मी है. उस की किसी ने चाकुओं से गोद कर सुनियोजित ढंग से हत्या करने की कोशिश की है.

उपचार के सिलसिले में डाक्टर को शरीर पर चाकू के अनेक निशान मिले थे. उन्हें गिनना शुरू किया तब वह भी दंग रह गए. शरीर पर कुल 17 वार थे. ऐसा लग रहा था, जैसे किसी ने ताबड़तोड़ चाकू से गोद डाला है. डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया.

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पूछताछ में नवीन ने घटना के दिन के बारे में बताया कि वह दोपहर करीब ढाई बजे

अपने बेटे के साथ डिफेंस कालोनी में एक डाक्टर के पास गया था. उस वक्त रीना घर पर अकेली थी.

डाक्टर से मिलने के बाद उस ने अपने बेटे के लिए खरीदारी की. फिर वह बेटे को शिव मंदिर बांध रोड के पास नाई की दुकान पर छोड़ कर कालकाजी स्थित अपने औफिस चला गया था.

वहां पर उस ने नाई को ही फोन कर के कह दिया कि वह औफिस में व्यस्त है इसलिए बेटे के बाल काटने के बाद उसे घर भिजवा दे.

वह नाई नवीन का परिचित था, इसलिए उस ने अपने एक कर्मचारी के साथ बेटे को घर भिजवा दिया. घर पहुंचने पर रीना घर में खून से लथपथ पड़ी मिली. कर्मचारी ने यह बात नाई को बता दी.

तब नाई ने शाम करीब पौने 5 बजे नवीन के मोबाइल पर फोन कर बताया कि उन की पत्नी खून से लथपथ पड़ी है और उसे चाकू लगे हैं. यह सुन कर नवीन तुरंत अपने घर पहुंचा और रीना को पीएसआरआई अस्पताल ले गया.

नवीन के बयान पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 302, 449, 201,120बी और 34 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी.

जांच में पता चला कि रीना को 16-17 बार चाकू मारा गया है. मामले को सुलझाने के लिए एसीपी अरुण चौहान की देखरेख और एसएचओ कुमारकांत मिश्रा के नेतृत्व में हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए विशेष तरीके से जांचपड़ताल और पूछताछ की जाने लगी.

नवीन से की गई प्रारंभिक पूछताछ से पुलिस संतुष्ट नहीं हुई थी, इसलिए पुलिस ने नवीन से दोबारा पूछताछ की.

इस वारदात की सूचना डीसीपी बेनितो मोरिया जयकर को भी दे दी गई. तब डीसीपी ने इस वारदात की जांच के लिए थानाप्रभारी कुमारकांत मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस टीम बनाई गई थी. टीम में इंसपेक्टर पंकज कुमार, एसआई संदीप कुमार आदि को शामिल किया गया.

घर पर मिले खून के निशान

घटनास्थल पर पहुंची पुलिस टीम के साथ नवीन भी था. वह पत्नी की मौत पर विलाप करने लगा था. वहीं उस का बेटा भी ‘मम्मीमम्मी’ रट लगा कर रोए जा रहा था. पुलिस ने उन्हें ढांढस बंधाते हुए उस दिन की पूरी गतिविधियों की जानकारी ली. इस से पहले ड्राइंगरूम समेत पूरे मकान का मुआयना किया.

घर में फर्श पर खून के बड़ेबड़े धब्बे दिखाई दिए. उन्हें देख कर कोई भी सहज अंदाजा लगा सकता था कि हत्या की पूरी वारदात ड्राइंगरूम में ही हुई होगी.

हत्यारे ने उसे वहां से दूसरे कमरे में या कहीं और भागने तक का मौका ही नहीं दिया होगा. बाकी कमरों में सब कुछ व्यवस्थित था. लूटपाट जैसी कोई बात कहीं से भी नजर नहीं आ रही थी, सिवाय कुछ सामान बिखरने के.

पुलिस टीम ने जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज की जांच के अलावा पड़ोसियों से भी पूछताछ की. जांच के दौरान सीसीटीवी की एक फुटेज मिली, जिस में 2 संदिग्ध व्यक्ति रीना के घर में जाते हुए दिखाई पड़े. कुछ देर बाद घर से 3 लोग बाहर आते दिखाई पड़े.

इस के अलावा, सीसीटीवी फुटेज की जांच करने पर स्कूटी सवार तीनों संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान पंपोश एनक्लेव, कालकाजी निवासी के तौर पर हुई.

जांच के दौरान पुलिस को रीना के पति नवीन पर भी शक और गहरा हो गया. फिर नवीन के मोबाइल नंबर की जांच की गई. उस से पता चला कि वह एक नंबर पर लगातार बातचीत कर रहा है. वह नंबर गोविंदपुरी में रहने वाली एक महिला का निकला.

नवीन के मोबाइल फोन को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया. उस के नंबर की काल डिटेल्स निकाली गई. वाट्सऐप, इंस्टाग्राम और फेसबुक को खंगाला गया. उस से पता चला कि वह भारती नाम की महिला से काफी लंबी बातें करता था.

भारती के बारे में पूछने पर नवीन ने स्वीकार कर लिया कि 2 साल पहले इंस्टाग्राम पर उस की भारती से दोस्ती हुई थी. वह गोविंदपुरी की रहने वाली है.

दोनों एकदूसरे से प्रेम करते थे. वे दोनों किसी तरह समय निकाल कर हर रोज एक बार मिल भी लिया करते थे. उन का आपसी प्रेम धीरेधीरे परवान चढ़ चुका था. 2-3 बार दोनों साथसाथ शहर से बाहर भी जा चुके थे.

इस की गवाही इंस्टाग्राम और वाट्सऐप पर उन की पोस्ट की गई तसवीरें दे रही थीं. कुछ को तो उन्होंने यादगार के तौर पर रखा हुआ था, जबकि कुछ को डिलीट करने की कोशिश की गई थी.

पुलिस को समझते देर नहीं लगी कि रीना की हत्या की जड़ निश्चित तौर पर भारती और नवीन का प्रेम संबंध हो सकता है.

सख्ती से की गई पूछताछ में टूट गया नवीन

उस के बाद पुलिस नवीन से और भी सख्ती से पूछताछ करने लगी. साथ ही पुलिस ने तर्क दिया कि प्रेम संबंध की खातिर उस की पत्नी अब इस दुनिया में नहीं है, तो क्या अब प्रेमिका को भी खोना चाहता है? उस पर बच्चे के पालनपोषण की भी जिम्मेदारी है. अगर उस ने सब कुछ सचसच बता दिया तो उस के गुनाह को कम किया जा सकता है.

यह बात नवीन को पसंद आ गई और वह पुलिस को सब कुछ बताने के लिए राजी हो गया. नवीन ने बताया कि उस के भारती से प्रेम संबंध के बारे पता चलने पर रीना बेहद परेशान रहने लगी थी.

उस ने खुल कर विरोध नहीं जताया, लेकिन उस के लोकेशन के बारे जानने की कोशिश करने लगी. इसलिए वह हमेशा वीडियो काल से ही बात करती थी.

इस बात से उसे परेशानी होती थी. उसे लगने लगा था कि उस की अपनी प्राइवेसी छिन गई है. इसी कारण उस की कई बार रीना से बहस और लड़ाईझगड़े भी होने लगे थे. वह रीना की लोकेशन जानने की आदत से तंग आ गया था. एक दिन ऊब कर उस ने पत्नी की हत्या की योजना बना ली.

नवीन ने मालवीय नगर के ही रहने वाले राहुल नाम के बदमाश को 5 लाख रुपए में पत्नी की हत्या की सुपारी दे दी. राहुल ने अपने 2 दोस्तों चंदू और सोनू को योजना में शामिल कर लिया.

घटना के दिन हत्यारों को घर का पता दे कर नवीन खुद अपने औफिस चला गया. इसे उस ने बड़े ही सुनियोजित तरीके से किया. पहले उन्हें अपने घर की फोटो वाट्सऐप पर भेज दी थी. साथ ही घर की लोकेशन भी भेजी थी. इसी के जरिए सुपारी किलर उस के फ्लैट पर पहुंचा था.

घटना के दिन 18 नवंबर, 2021 को जब रीना बाथरूम में थी, तब नवीन अपने बेटे को होम्योपैथी डाक्टर के यहां दिखाने के बहाने से उसे ले कर डिफेंस कालोनी जाने के लिए घर से निकला था. उस से पहले उस ने फ्लैट का दरवाजा बाहर से लौक कर दिया था.

तीनों बदमाशों ने चाकू से गोद दिया रीना को

इस की जानकारी नवीन ने राहुल नाम के बदमाश को वाट्सऐप से दे दी थी. डिफेंस कालोनी जाने के रास्ते में ही राहुल उसे मिल गया था, जिसे नवीन ने चाबी दे दी.

राहुल चाबी ले कर उस के घर पहुंचा और दरवाजे का ताला खोल कर बैडरूम में छिप गया था. अपने बैडरूम में रीना को इन बातों का जरा भी आभास नहीं हुआ.

राहुल ने बाहर का दरवाजा खुला छोड़ दिया था. थोड़ी देर में स्कूटी से राहुल के साथी चंदू और सोनू आ गए. जब वे फ्लैट में दाखिल हुए तब तक रीना ड्रांइरूम में आ गई थी. वह तीनों को वहां पा कर हक्कीबक्की रह गई. सिर्फ इतना ही पूछ पाई, ‘‘तुम लोग नए स्टाफ हो?’’

बदमाशों ने उस से आगे रीना को कुछ बोलने का मौका ही नहीं दिया और ताबड़तोड़ चाकुओं से उसे बुरी तरह से जख्मी कर दिया. कुछ हमले उस की गरदन पर हुए. उस की सांसें थमने के बाद तीनों स्कूटी पर बैठ कर वहां से फरार हो गए.

इसी दौरान नवीन बेटे को सैलून पर छोड़ कर अपने औफिस चला गया. वहां से नाई ने अपने एक स्टाफ हरि को सैलून से नवीन के बेटे को घर पहुंचाने को भेज दिया.

हरि घर पहुंचा, तब उस ने पाया कि घर का दरवाजा खुला था और ड्राइंगरूम में फर्श पर रीना की लाश पड़ी थी. बाद में जब नवीन घर पहुंचा तो वह पत्नी को इलाज के लिए अस्पताल ले गया.

इस हत्याकांड का खुलासा हो चुका था. नवीन की निशानदेही पर 3 हत्यारोपियों की गिरफ्तारी भी हो गई. नवीन को भी हिरासत में ले लिया गया. हत्या में इस्तेमाल चाकू व वारदात में इस्तेमाल स्कूटी बरामद कर ली. राहुल के पास से सुपारी के दिए गए 50 हजार रुपए भी बरामद कर लिए.

गिरफ्तार आरोपियों मालवीय नगर निवासी नवीन कुमार गुलिया, सोनू और राहुल को पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

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