अकेले जूझती राबड़ी देवी

अपने बेटों तेजस्वी और तेजप्रताप की हरकतों ने उन की टैंशन में कई गुना ज्यादा इजाफा कर दिया है. बेटी मीसा भारती को राजनीति में सैटल करने लिए 2 बार लोकसभा चुनाव के अखाड़े में उतारा गया, लेकिन उन्हें दोनों बार हार का मुंह देखना पड़ा.

कुलमिला कर राबड़ी देवी हर तरफ से परेशानियों से घिरी हुई हैं और उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि लालू प्रसाद यादव की गैरमौजूदगी में वे किस तरह से पार्टी और परिवार को पटरी पर लाएं?

राबड़ी देवी पार्टी में नई जान फूंकने और परिवार को एकजुट करने की तमाम कोशिशें कर रही हैं, पर अपने पति की तरह सियासी दांवपेंच के खेल में वे माहिर नहीं हैं. साल 2020 में बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे में राजद को नए सिरे से खड़ा करना राबड़ी देवी के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है.

लालू प्रसाद यादव की गैरमौजूदगी में राजद ने राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की अगुआई में पिछला लोकसभा चुनाव लड़ा था, पर वे दोनों अपनी पार्टी को एक भी सीट नहीं दिला सके. 40 में से 20 लोकसभा सीटों पर राजद ने अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी उम्मीदवार को जीत नहीं मिली. मीसा भारती भी पाटलिपुत्र लोकसभा सीट से जीत नहीं सकीं.

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साल 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद राजद और उस के घटक दलों को मिली करारी हार की समीक्षा के लिए संयुक्त समिति बनाने की बात अभी तक हवा में है. अब तक घटक दलों की एक भी मीटिंग नहीं हो सकी है. तेजस्वी यादव तकरीबन 3 महीने तक सियासी हलचल से भी गायब रहे.

राजद में उथलपुथल से लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी चिंतित हैं. लालू प्रसाद यादव ने अपने दोनों बेटों को संदेश भिजवाया है कि पार्टी के कार्यकर्ता हताश और निराश हैं. कार्यकर्ता ही अब पार्टी पर कई तरह के सवाल उठाने लगे हैं. वे कहने लगे हैं कि पार्टी को खूनपसीने से सींच कर खड़ा करने वाले लालू प्रसाद यादव जेल में हैं और उन का परिवार सत्ता के लालच में आपस में ही सिरफुटौव्वल कर रहा है.

लालू प्रसाद यादव ने अपने बेटों से साफ कह दिया है कि अगर पार्टी और परिवार में से एक को बचाने की नौबत आएगी, तो वे पार्टी को चुनेंगे.

उन की इस चेतावनी के बाद ही पटना से गायब तेजस्वी यादव वापस लौटे और पार्टी कार्यक्रम में भाग लिया.

21 अगस्त, 2019 की रात वे पटना जंक्शन के पास दूध मार्केट को तोड़ने के विरोध में धरने पर बैठे.

गौरतलब है कि दूध मार्केट को साल 1991 में लालू प्रसाद यादव ने ही बनवाया था. इस से पहले राजद की सदस्यता मुहिम की समीक्षा को ले कर 16 अगस्त, 2019 को बुलाई गई बैठक में तेजस्वी यादव नहीं पहुंचे थे. 4 घंटे तक चली बैठक में उन का इंतजार होता रहा.

18 अगस्त, 2019 को दोबारा बैठक बुलाई गई और उस में तेजस्वी यादव के मौजूद रहने का दावा राजद नेताओं ने किया. राबड़ी देवी बैठक में मौजूद थीं. उन्होंने कहा कि विरोधी कहते हैं कि राजद टूट गया है, लेकिन पार्टी पहले से ज्यादा मजबूत हो रही है.

राबड़ी देवी ने पार्टी नेताओं से कहा कि लोकसभा चुनाव की हार को भूल कर नए सिरे से पार्टी को एकजुट कर आगे बढ़ाने के काम में लग जाएं. राज्य के हर बूथ पर कम से कम 100 सदस्य बनाने पर जोर दिया. गौरतलब है कि बिहार में 72,000 बूथ हैं.

पार्टी सूत्रों की मानें तो तेजस्वी यादव पार्टी पर एकाधिकार के साथ कानूनी पचड़ों से भी नजात चाहते हैं. पार्टी चलाने के लिए वे पार्टी और परिवार दोनों तरफ से कोई दखल नहीं चाहते हैं.

16 अगस्त को राबड़ी देवी ने तेजस्वी यादव को 3 बार फोन कर के पार्टी की बैठक में आने के लिए कहा, पर तेजस्वी ने उन की बात नहीं सुनी. पार्टी के सीनियर नेता भी तेजस्वी के इस रवैए से खासा नाराज हैं.

शिवानंद तिवारी कहते हैं कि तेजस्वी यादव के मीटिंग में रहने या नहीं रहने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है, वहीं रघुवंश प्रसाद सिंह मजाकिया लहजे में यहां तक कह गए कि वे हमारे मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं और अब सीधे शपथ लेने ही आएंगे.

भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता सुशील कुमार मोदी कहते हैं कि जनता के पैसों को गटकने और परिवारवाद को बढ़ावा देने वाली पार्टी राजद की नैया को उस के मांझी ही डुबा रहे हैं, वहीं जनता दल (यूनाइटेड) के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह कहते हैं कि राजद की अगुआई कर भाजपा और जद (यू) को चुनौती देने का दावा करने वाले तेजस्वी यादव भगोड़े बन कर रह गए हैं. वे जानते हैं कि राजद की नैया डूब चुकी है और डूबते जहाज की सवारी कोई नहीं करना चाहता है.

साल 2015 के विधानसभा चुनाव के बाद से राबड़ी देवी ने धीरेधीरे सियासी गलियारों से दूरियां बढ़ा ली थीं. मीडिया से भी उन्होंने खामोश दूरी बना रखी

थी. बिहार में सब से लंबे समय तक राज करने वाली दूसरी मुख्यमंत्री रही राबड़ी देवी फिर अपनी मनपसंद जगह ‘किचेन’ की ओर लौट चुकी थीं.

राबड़ी देवी 25 जुलाई, 1997 से 11 फरवरी, 1999 तक मुख्यमंत्री रही हैं. उस के बाद 3 मार्च, 1999 से 2 मार्च, 2000 तक और फिर 11 मार्च, 2000 से 6 मार्च, 2005 तक वे मुख्यमंत्री की कुरसी पर बैठीं. इस मामले में उन्होंने अपने पति लालू प्रसाद यादव को भी मात दे दी. वे तकरीबन 7 साल तक मुख्यमंत्री रहे थे. राज्य के पहले मुख्यमंत्री श्रीकष्ण सिंह का नाम सब से लंबे समय तक मुख्यमंत्री बने रहने का रिकौर्ड दर्ज है. वे तकरीबन 15 साल तक मुख्यमंत्री बने रहे थे.

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राजद की कमान नए हाथ में देने की तैयारी?

साल 2020 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव के लिए लालू प्रसाद यादव अपनी पार्टी राजद को नए सिरे से एकजुट कर सियासी अखाड़े में उतारना चाहते हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद राजद अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहा है. लालू प्रसाद यादव के बगैर राजद बिखर रहा है. इसी चिंता

को ले कर राजद के उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह और विधानसभा के अध्यक्ष रहे उदय नारायण चौधरी ने रांची रिम्स में लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की थी.

इस साल के आखिर तक राजद को नए तेवर और मुखिया से लैस करने की कवायद शुरू हो चुकी है. राजद के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे को हटा कर नए अध्यक्ष की खोज भी जारी है.

तेजस्वी यादव की अगुआई में लोकसभा चुनाव लड़ने पर राजद को कोई फायदा नहीं हुआ था. इस से तेजस्वी यादव भी हताश हैं और पार्टी के कई नेताओं में नाराजगी भी है. राजद ने 10 अक्तूबर, 2019 तक 75 लाख पार्टी सदस्य बनाने का टारगेट रखा है.

राजद का अगला प्रदेश अध्यक्ष बनने में विधानसभा के अध्यक्ष और राजद के संस्थापक सदस्य रहे उदय नारायण चौधरी का नाम सब से आगे है. हालांकि वे 10 साल तक विधानसभा के अध्यक्ष रहे हैं और जद (यू) का साथ देते रहे हैं. उन पर राजद को तोड़ने का आरोप लगाते हुए लालू प्रसाद यादव ने खुद साल 2014 में विधानसभा तक मार्च किया था.

दूसरा नाम विधानपरिषद के उपसभापति रहे सलीम परवेज का है जो पिछड़ी अंसारी बिरादरी से आते हैं. इस के अलावा दलित सिपाही शिवचंद्र राम और तनवीर हसन के नाम भी चर्चा में हैं.

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बाल विवाह आखिर क्यों?

आसपास की ढाणियों के बच्चे इकट्ठा हो कर सुबह स्कूल जाते थे और छुट्टी होने के बाद वापस अपनी अपनी ढाणी में आ जाते थे.

उस दिन रीना के घर मेहमान आए हुए थे. इस वजह से सुबह उस ने अपनी मां के काम में हाथ बंटाया, जिस से उसे कुछ देर हो गई. नतीजतन, आसपास की ढाणी के बच्चे स्कूल चले गए.

काम निबटा कर रीना भी तैयार हो कर स्कूल की तरफ दौड़ पड़ी. वह अभी स्कूल से तकरीबन एक किलोमीटर दूर थी कि पास की ढाणी का एक नौजवान विक्रम आता दिखा.

रीना स्कूल के लिए लेट हो गई थी. लिहाजा, वह भागती हुई जा रही थी. तभी विक्रम ने उसे पुकारा, ‘‘रीना, आज अकेले ही स्कूल जा रही हो. दूसरे बच्चे कहां हैं?’’

‘‘मैं लेट हो गई हूं. सब बच्चे पहले ही स्कूल चले गए हैं,’’ रीना ने हांफते हुए कहा.

यह सुन कर विक्रम के सिर पर शैतान सवार हो गया. उस ने इधरउधर निगाह डाली. दूर तक कोई नहीं दिख रहा था. चारों तरफ रेतीले टीले थे. बीच में आक, खेजड़ी, केर के पेड़ों के झुरमुट थे.

विक्रम ने रीना को आवाज दे कर रुकने का इशारा किया, ‘‘रीना, जरा रुकना. तुम अपने पापा को यह चिट्ठी दे देना,’’ वह अपनी जेब में हाथ डालते हुए उस के नजदीक आ गया.

रीना बोली, ‘‘जल्दी चिट्ठी दो. मैं स्कूल के लिए लेट हो रही हूं.’’

पास आ कर विक्रम ने उसे दबोच लिया. रीना डर के मारे थरथर कांप रही थी, फिर भी वह हिम्मत जुटा कर बोली, ‘‘यह क्या कर रहे हो… छोड़ो मुझे.’’

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रीना ने छूटने की बहुत कोशिश की, मगर नाकाम रही.

रीना खूब रोईगिड़गिड़ाई, मगर उस दरिंदे ने रेप करने के बाद ही उसे छोड़ा.

विक्रम ने रीना को धमकी दी कि अगर किसी को बताया, तो वह उसे और उस के मांबाप को मार डालेगा.

13 साल की उम्र में रीना की इज्जत लूट ली गई. उस का दर्द के मारे बुरा हाल था. वह स्कूल जाने के बजाय घर लौट आई.

मां ने जब बेटी को वापस आते देखा तो पूछा, ‘‘क्या हुआ? तू स्कूल नहीं गई क्या? वापस कैसे आई?’’

रीना दर्द से कराहते हुए बोली, ‘‘मां, वह विक्रम है न ऊपर की ढाणी वाला. उस ने मेरे साथ खोटा काम किया है और धमकी दी है कि किसी को बताना नहीं. अगर बताया तो वह मुझे और मम्मीपापा को मार डालेगा.’’

यह सुन कर मां के पैरों तले से जमीन खिसक गई.

उस समय रीना के पापा मेहमानों को गाड़ी में बिठाने बसस्टैंड गए हुए थे. जब वे लौटे और पत्नी से रीना के साथ हुए रेप के बारे में सुना तो वे सन्न रह गए. बाद में उन्होंने हिम्मत की और रीना के साथ थाने पहुंचे और रिपोर्ट दर्ज करा दी.

पुलिस ने रीना की मैडिकल जांच कराई और दरिंदे विक्रम को धर दबोचा. विक्रम को उम्रकैद की सजा हुई.

रीना का कोई कुसूर नहीं था, मगर रेप होने के बाद वह बुझीबुझी सी घर में पड़ी रहती. उस ने स्कूल ही जाना छोड़ दिया. एक साल बाद रीना की शादी कर दी गई.

आज गांव, कसबे, शहर में मासूम बच्चियों से ले कर बूढ़ी औरतों तक से रेप की वारदातें बढ़ी हैं. इस से लोगों में दहशत बढ़ी है. जिन के घर बेटियां हैं, वे मांबाप हर समय अपनी बेटी के बारे में ही सोचते रहते हैं.

सोशल मीडिया ने अपने पैर हर घर तक पसार लिए हैं. हर रोज रेप की कोई न कोई वारदात की खबर आ ही जाती है, जिन्हें देखसुन कर गांवदेहात में लोग अपनी और अपनी बेटियों की इज्जत की खातिर उन का बाल विवाह करा कर छुटकारा पा लेना चाहते हैं.

ऐसा कोई दिन नहीं जाता, जब देश में रेप न होता हो. कुछ मामलों को छोड़ कर रेप की वारदातों को अंजाम देने वाले जानपहचान के, आसपड़ोस के या फिर रिश्तेदार ही होते हैं. ऐसे मे लाजिमी है कि हर शख्स को शक की निगाह से देखा जाने लगा है.

जैसलमेर, राजस्थान के गफूर भट्ठा इलाके में पिछले दिनों 2 नाबालिग बहनों की शादी चोरीछिपे की गई. बाल विवाह कराने वाले इन बेटियों के पिता अमराराम ने बताया, ‘‘हर रोज रेप हो रहे हैं. ऐसी खबरों से मेरी नींद हराम थी. मैं दिनभर यही सोचता रहता था कि कोई मेरी मासूम बेटियों के साथ रेप न कर दे.

‘‘बस, इसी वजह से मैं ने अपनी दोनों बेटियों का बाल विवाह कर दिया. अब मैं ने चैन की सांस ली है.

‘‘सरकार भले ही मुझे फांसी पर चढ़ा दे, पर मुझे अपनी और बेटियों की इज्जत का खयाल था, इसीलिए मैं ने 16 साल की कम्मो और साढ़े 14 साल की धापू का बाल विवाह करा दिया.’’

अमराराम की बीवी का कुछ यह कहना था, ‘‘बेटियां जब तक कुंआरी थीं, हर समय डर लगा रहता था कि उन के साथ कोई गलत काम न कर दे. हर रोज रेप हो रहे हैं. इस से बेटियों के मांबाप चिंतित रहते हैं. वे जल्द से जल्द बेटियों की शादी करा देना चाहते हैं, फिर चाहे बाल विवाह ही क्यों न कराना पड़े.’’

मोहनगढ़ के बीरबलराम इन दोनों की बात का समर्थन करते हुए कहता है, ‘‘मेरी 4 बेटियां हैं. मैं ने उन चारों की शादी 15 साल की होने से पहले ही करा दी. भले ही बाल विवाह हुआ, मगर मुझे अब चैन मिला है, वरना हर वक्त यही डर लगा रहता था कि कोई दरिंदा उन के साथ गलत काम न कर दे.’’

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बीरबलराम ने आगे बताया कि पहली बेटी के जन्म पर एक पंडितजी ने उस से कहा था, ‘बीरबलराम, बेटी को मासिक धर्म शुरू हो, उस से पहले ही ससुराल भेज देना. जिस घर में बेटी को मासिक धर्म आता है, वह घर पाप से भर जाता है.’

बीरबलराम की इस बात का समर्थन करते हुए चंदन सिंह भाटी कहता है, ‘‘15-16 साल की उम्र की कई किशोर लड़कियां अपने प्रेमी के साथ घर से भाग गईं. ‘‘यह साबित करता है कि लड़कियां 16 साल की उम्र में ही जवान हो जाती हैं. उन का इस उम्र में रास्ता भटकना तय रहता है. मातापिता बेटी पर से निगाह हटाते हैं, तो बेटी के कदम बहक ही जाते हैं.’’

बेटी का बाल विवाह कराने वाले पोखरण के बाशिंदे रामलाल का कहना था कि बाल विवाह में खर्च बहुत ही कम आता है. वे इस की वजह बताते हैं कि नातेरिश्तेदारों के अलावा गांव के लोग थानाकचहरी के डर से शादी में शरीक नहीं होते कि कहीं बाल विवाह कराने वालों में उन का नाम भी नहीं आ जाए. बस, इस वजह से न दारू की महफिल सजती है और न ही मुरगे उड़ाए जाते हैं.

समाज में अपनी इज्जत बचाए रखने के लिए शादी करने वाले मातापिता साहूकार से कर्ज ले कर लोगों को शादी में दारू, अफीम व खाना खिलाते हैं, भले ही वह आदमी उम्रभर ब्याज पर लिए गए साहूकार के रुपए न भर पाए और हर रोज साहूकार से बेइज्जत होता रहे. इस खर्च से बचने के लिए ही लोग बाल विवाह करा रहे हैं.

कई समाज में तो पंडों ने यह अंधविश्वास भर रखा है कि बड़ेबुजुर्ग की मौत होने पर तेरहवीं के दिन भोज पर नन्हेमुन्नों की शादी करने से मरने वाले की आत्मा को शांति मिलती है, साथ ही बच्चों के मातापिता को पुण्य मिलता है.

ऐसा करने से पंडों को दोहरा मुनाफा मिलता है. मृत्युभोज पर उन्हें खूब सारा रुपया, घी, शक्कर, सोने के गहने व दूसरी चीजें दी जाती है, साथ ही मासूम बच्चों की शादियां कराने वाले मातापिता पंडित को खूब दानदक्षिणा देते हैं, क्योंकि उन के दिमाग में पंडों ने भर रखा है कि पंडित को दिया गया दान मृत आत्मा को मिलता है.

पंडों ने पहले अपढ़ लोगों को धर्म व पाप का डर दिखा कर खूब लूटा और अब उन्होंने पढ़ेलिखों को भी झांसे में ले लिया है.

आज के जमाने में भी लोग रूढि़वादी प्रथाओं को अपना कर ठग पंडों की जेबें भर रहे हैं. किसी बच्ची के साथ रेप होता है तो ठग पंडे अनपढ़ लोगों से कहते हैं कि यह बच्ची और उस के मातापिता के पापों का फल है.

लोग पंडों से यह क्यों नहीं पूछते हैं कि 13 साल की बच्ची ने ऐसा कौन सा पाप किया है, जिस की सजा उसे रेप के रूप में मिली है?

पंडे गांव, कसबों, शहरों में गरीब अनपढ़ लोगों के बीच यह भरम फैला देते हैं कि बेटियों को जवान होने से पहले यानी 14-15 साल की उम्र में ब्याह देना चाहिए. छोटी उम्र में बेटी की शादी कराने से मांबाप को पुण्य मिलता है. पुण्य कमाने व बेटियों को रेप से बचाने के लिए लोग बाल विवाह करा रहे हैं. उन्हें किसी सजा का डर नहीं है.

बाल विवाह पर मामूली खर्च आता है, यह भी बाल विवाह को बढ़ावा मिलने की एक अहम वजह है.

राजस्थान में बालिग लड़केलड़की की शादी तकरीबन 4 लाख से 5 लाख रुपए में निबटती है, जबकि बाल विवाह पर 15,000 से 20,000 रुपए का खर्च आता है. लोग पैसे बचाने के चक्कर में बेटियों को बालिका वधू बनाने में देर नहीं लगाते हैं.

जीवराज चौधरी की 3 बेटियां थीं. पहली बेटी जब बालिग हुई तब उस की शादी कराई. शादी में खर्च आया महज 5 लाख रुपए.

गरीब जीवराज ने कर्ज ले कर बेटी की शादी कराई. शादी में मिठाइयां बनवाईं, दारू और मांस का इंतजाम किया. नशेड़ी लोगों को अफीम व डोडा पोस्त परोसा गया. कुछ समय तक तो लोगों ने तारीफ की, पर आज उसे कोई नहीं पूछ रहा है.

जीवराज के पिता की मौत पर उस ने 13वीं की कड़ाही पर दोनों छोटी बेटियों का बाल विवाह करा दिया. मृत्युभोज के खर्च में ही 2 शादियां निबट गईं.

जीवराज चौधरी कहता है, ‘‘हमारे यहां पीढि़यों से मृत्युभोज पर बाल विवाह होते रहे हैं. पंडित कहते हैं कि मृत्युभोज के मौके पर छोटी बेटियों, पोतियों, नातिनों के ब्याह से पुण्य मिलता है. इस वजह से मैं ने भी अपनी बेटियों की शादी करा दी. बड़ी बेटी का ब्याह बालिग होने पर किया था. आज तक मेरे सिर पर वह कर्ज है. न जाने कब उतरेगा.’’

जीवराज के पास थोड़ी सी खेती की जमीन है, 20 बकरियां हैं और 2 गाएं भी हैं. इसी से उस के परिवार का पेट पलता है. बारिश होती?है तो खेत में बाजरा, मतीरा, मूंग, तिल की फसल हो जाती है. अच्छी बारिश होने पर सालभर का अनाज और गायबकरियों के लिए चारा हो जाता है.

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गायबकरी का दूध बेच कर घर का सामान खरीदा जाता है व बकरा बिकने पर पैसे मिलते हैं. वह भी गरीब के घर में ही खप जाता है. ऐसे में लाखों रुपया, जो अपनी झूठी शान के लिए शादियों में खर्च कर दिया जाता है, वह कैसे चुकता होगा? हर महीने की पहली तारीख को कर्ज देने वाले आ धमकते हैं.

सरकार को कुछ ऐसा करना होगा कि लोग बाल विवाह न करें. मगर लोग तो यह कह रहे हैं कि जब हैवान एक साल की मासूम बच्ची से रेप कर सकते हैं, तो 15 साल की बच्ची को कहां छोड़ेंगे.

राजस्थान में पिछले 6 महीने से बलात्कार की आंधी आई है, यह चिंता की बात है. न जाने कब राज्य सरकार की नींद खुलेगी.

सरकारों को रेप के बढ़ते ग्राफ पर ध्यान दे कर आरोपियों को सख्त सजा दिलानी चाहिए. फास्ट ट्रैक कोर्ट में ऐसे केस की जल्द से जल्द सुनवाई करा कर बलात्कारियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाना होगा.

लोग बेटियों को ले कर चिंतित न हों, सरकार को ऐसा माहौल तैयार करना होगा, वरना लोग बेटियों को या तो औरत की कोख में मार देंगे या फिर पैदा होते ही मार डालेंगे.

नैशनल फैमिली हैल्थ सर्वे की पिछले साल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान का भीलवाड़ा बाल विवाह में अव्वल है. इस सर्वे में 20 साल  से

40 साल की औरतों से उन की शादी के समय की उम्र पूछी गई. किसी औरत ने 8 साल बताई, तो किसी औरत ने 10 साल.

सर्वे में 57.2 फीसदी औरतों ने स्वीकार किया कि उन का बाल विवाह हुआ है. भविष्य में यह आंकड़ा और भी बढ़ने वाला है.

सरकार ने बाल विवाह निषेध कानून बना कर सजा या जुर्माने का प्रावधान कर रखा है. कभीकभार बाल विवाह कराने वाले पुलिस की गिरफ्त में आ भी जाते हैं, मगर इस से इस बुराई पर पूरी तरह पाबंदी लगाने में सरकार नाकाम रही है.

वैसे, जिन के बाल विवाह हुए हैं, वे बालिग होने पर आपसी सहमति से इसे कोर्ट से निरस्त भी करा सकते हैं.

जोधपुर शहर में सारथी ट्रस्ट की मैनेजिंग डायरैक्टर और मनोचिकित्सक कृति भारती पिछले कई सालों से बाल विवाह निरस्त कराने और बाल विवाह रुकवाने का काम कर रही हैं.

उन्होंने बताया, ‘‘मैं राजस्थान में अब तक 39 बाल विवाह निरस्त करा चुकी हूं. बाल विवाह के 10-12 मामले निरस्त कराने बाकी हैं. आज तक 1,200 बाल विवाह होने से रुकवाए हैं.’’

कृति भारती ने आगे बताया कि मध्य प्रदेश में सिर्फ 2 बाल विवाह निरस्त हुए हैं, वे भी मध्य प्रदेश सरकार ने कराए हैं, किसी संस्था ने नहीं कराए हैं.

कृति भारती ने कोर्ट के माध्यम से पहला बाल विवाह जोधपुर, राजस्थान में ही निरस्त कराया था. राजस्थान के अलावा मध्य प्रदेश के 2 बाल विवाह के अलावा किसी भी राज्य में एक भी बाल विवाह निरस्त नहीं हुआ है.

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कृति भारती को तमाम तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती हैं. कई बार उन की जान तक लेने की कोशिश की गई है, मगर वे अपने संकल्प पर डटी हैं.

अगर कोई कृति भारती से बाल विवाह निरस्त कराने या बाल विवाह रुकवाने में मदद मांगता है, तो वे आधी रात को भी हमेशा मदद करने को तैयार रहती हैं. लेकिन जब तक पंडों का अंधविश्वास लोगों के मन में अंदर तक बैठा रहेगा, तब तक सरकार भले ही बाल विवाह बंद कराने का दावा करे, ये नहीं रुकने वाले हैं.

मेरी उम्र 60 साल है. मैं बवासीर से परेशान हूं. उपाय बताएं?

सवाल-

मेरी उम्र 60 साल है. मैं बवासीर से परेशान हूं. उपाय बताएं?

जवाब-

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पौष्टिक खाना न खाने से यह परेशानी हो जाती है. आप का खाना ऐसा होना चाहिए, जो सही तरह से हजम हो जाए. तलीभुनी चीजों और मिर्चमसाले वाले खाने से परहेज करें. अगर बवासीर में खून आ रहा हो, तो इस को आपरेशन कर के ठीक किया जा सकता है.

क्यों की जा रही वीरेंद्र सहवाग और रोहित शर्मा की तुलना?

आपको याद होगा रोहन गावस्कर की. रोहन महान खिलाड़ी सुनील गावस्कर के बेटे हैं. मीडिया और फैंस ने उनकी तुलना गावस्कर से कर दी. लोगों की उम्मीदें उनसे बढ़ गईं. रोहन ने 2012 में क्रिकेट के हर फॉर्मेट को अलविदा कह दिया.

हालांकि इस खिलाड़ी का घरेलू करियर अच्छा रहा और उन्होंने 117 फर्स्ट क्लास मैच में 6938 रन बनाए लेकिन इसके बावजूद भी वो अंतरराष्ट्रीय करियर आगे नहीं बढ़ा सके. ऐसा बिल्कुल नहीं था कि रोहन गावस्कर का खेल बहुत बुरा था लेकिन बस उनकी तुलना और उम्मीदों ने पूरा करियर तबाह कर दिया.

आईसीसी रैंकिंग में भारतीय टीम विश्व की नंबर 1 टीम है. इस मैच में सबकी नजरें टिकी थीं रोहित शर्मा पर. उसका कारण था कि वो पहली बार टेस्ट टीम की अगुवाई करने जा रहे थे. मौका भी अच्छा था अपनी ही धरती पर मेहमानों को पटखनी देने का. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ विशाखापत्तनम टेस्ट मैच में पहली बार ओपनिंग करने उतरे रोहित शर्मा ने शानदार 176 रनों की पारी खेली. वनडे क्रिकेट में ओपनिंग की जिम्मेदारी संभालने के बाद दमदार प्रदर्शन करने वाले रोहित शर्मा ने टेस्ट क्रिकेट में भी मिले मौके को पूरे तरीके से भुनाया.

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रोहित शर्मा की टेस्ट ओपनर के तौर पर 176 रनों की दमदार पारी के बाद कई पूर्व क्रिकेटरों ने उनकी तुलना और वीरेंद्र सहवाग से की. हालांकि, रॉबिन उथप्पा इस राय से इत्तिफ़ाक़ नहीं रखते। रोहित शर्मा और वीरेंद्र सहवाग की टेस्ट ओपनर के रूप में तुलना किए जाने पर रॉबिन उथप्पा ने कहा, ‘दोनों की तुलना करना सही नहीं है, उनकी बल्लेबाजी की अपनी शैली है. सहवाग और रोहित दोनों आक्रामक हैं और यही एक कॉमन बात है. सहवाग गेंद पर ज्यादा आक्रामण करते थे वहीं रोहित इसे सम्मान देते हैं. जिस तरह से रोहित शर्मा शॉट खेलते हैं वह सहवाग से काफी अलग है.’

रोहित शर्मा की पारी को देखकर क्रिकेट के भगवान भी अपना मत देने से रोक नहीं पाए. सचिन तेंदुलकर ने कहा कि ‘रोहित ने मिले मौके को भुनाया है और उन्हें अब यहां से अपने परफॉर्मेंस को आगे ले जाना है. इसके साथ-साथ सचिन ने कहा कि रोहित शर्मा प्रैक्टिस मैच में बिना कोई रन बनाकर आउट हुए थे लेकिन उन्होंने उस पारी को भुलाकर इस मैच में आए और कमाल की पारी खेली.

इसके साथ-साथ सहवाग और रोहित की तुलना पर सचिन ने कहा कि, दोनों की तुलना करना गलत है. रोहित शर्मा का अपना खेलने का स्टाइल है. सचिन ने कहा कि किसी भी खिलाड़ी की तुलना किसी दूसरे खिलाड़ी से होना बिल्किुल गलत है.

सचिन तेंदुलकर ने आगे रोहित शर्मा के बारे में कहा कि अपनी बल्लेबाजी के दौरान जिस रणनीति के साथ रोहित ने वर्नन फिलेंडर जैसे तेज गेंदबाज का सामना किया वो दर्शाता है कि वो बल्लेबाजी करने आने से पहले अपनी बल्लेबाजी रणनीति बनाकर मैदान पर उतरे थे.

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रोहित शर्मा और सहवाग के बारे में कई दिग्गजों की टिप्पणी आई हैं. इन दोनों खिलाड़ियों की कोई तुलना नहीं हो सकती है क्योंकि दोनों अपना स्वभाविक खेलते हैं. सहवाग के क्षमता थी कि वो पहली गेंद को बाउंड्री पर पहुंचा सकते थे. वो क्रीज पर ज्यादा वक्त नहीं जाया करते. गेंदबाज पहली गेंद से ही सोच लेता था कि ये खिलाड़ी डिफेंस नहीं करेगा. रोहित शर्मा के साथ बिल्कुल उल्टा है.

शर्मा को क्रीज में वक्त लगता है. गेंदबाज शुरुआत में ही उनको आउट करने का प्रयास करते हैं और कई बार वो ऐसा करने में सफल हो जाते हैं. रोहित शर्मा के शॉट्स सेलेक्शन और सहवाग के शाट्स सेलेक्शन में भी फर्क है. सहवाग क्रीज पर खड़े होकर भी बड़े शॉट्स खेलते हैं. लेकिन रोहित शर्मा फिलहार अभी ऐसा खेल नहीं दिखा पाए.

दिशा पटानी को मिला एकता कपूर का सहारा

यूं तो एकता कपूर का दावा है कि उन्होने इसकी शुरूआत फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ से की थी, जिसमें आलिया भट्ट और करीना कपूर खान के सशक्त किरदार थे. फिर ‘वीरे दी वेडिंग’ में सोनम कपूर, स्वरा भास्कर और शिखा तलसानिया के सशक्त किरदार थे. इसके बाद ‘जजमेंटल है क्या’ में सशक्त महिला किरदार मे कंगना रानौट नजर आयीं.

‘डौली किट्टी और वो’’ बनाने का लिया निर्णय…

एकता कपूर का मानना है कि अब वह अपनी कंटेंट प्रधान फिल्मों में देसी किरदारों को ही प्रधानता दे रही है. अब एकता कपूर ने सशक्त महिला किरदारों से युक्त फिल्म ‘‘डौली किट्टी और वो’’ बनाने का निर्णय लिया है, जिसमें भूमि पेडणेकर भी हैं.

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हौट अंदाज में नजप आएंगी दिशा पटानी…

सूत्रों की माने तो अब एकता कपूर ‘‘बालाजी मोशन पिक्चर्स’’ के तहत एक और महिला प्रधान फिल्म बनाने जा रही हैं. सूत्रों के अनुसार यह एक रौमकौम फिल्म होगी, जिसमें रोमांटिक किरदार में दिशा पटानी अपने चरिपरिचति हौट अवतार में ही नजर आएंगी. इस फिल्म में दिशा पटानी एक सशक्त यथार्थवादी किरदार निभाते हुए नजर आ सकती हैं. आशिमा छिब्बर के निर्देशन में बनने वाली इस फिल्म के लिए अन्य कलाकारों का चयन बाकी है.

इंस्टाग्राम पर हैं पच्चीस मिलियन फालोवर्स हैं…

उधर दिशा पटानी से जुड़े सूत्र दावा करते हैं कि इन दिनों एकता कपूर अपनी फिल्मो, वेब सीरीज और सीरियलों में सोशल मीडिया के स्टार को प्रधानता दे रही हैं. इसी कारण उनका ध्यान दिशा पटानी पर जाकर टिक गया. क्योंकि दिशा पटानी के इंस्टाग्राम पर लगभग पच्चीस मिलियन फालोवर्स हैं. इतना ही नही दिशा पटानी ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर एक प्रोडक्ट मौडलिंग की वह तस्वीरें पोस्ट की, जिसमें वह हौट के साथ देसी लुक में नजर आ रही है.

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यूं तो एकता कपूर और ‘‘बालाजी मोशन पिक्चर्स’’ से जुड़े लोग इस फिल्म को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं. मगर सूत्र दावा कर रहे हैं कि इस फिल्म का फिल्मांकन जनवरी माह से माउंट आबू में शुरू होगा. इतना ही नही बौलीवुड में चर्चाएं है कि निर्देशक श्रीराम वेणु के साथ अल्लू अर्जुन की अगली फिल्म में भी दिशा पटीनी होंगी.

बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आए पप्पू यादव, तस्वीरें हो रहीं हैं वायरल

जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की इन दिनों पटना बाढ़ पीड़ितों में फंसे लोगों की सहायता करते हुए की तस्वीरें व वीडियो खूब वायरल हो रहीं है. वह अपने पार्टी के सदस्यों के साथ बाढ़ के पानी में राहत सामग्री वितरित करते हुए नजर आ रहे हैं. उनके साथ जहां एक तरफ पार्टी के सदस्य दिन-रात बाढ़ पीड़ितों को सहायता पहुंचाने में लगे हुए हैं. वही आम लोग भी पप्पू यादव के जरिए आर्थिक सहायता पहुंचा कर बाढ़ पीड़ितों की मदद कर रहे हैं.

पप्पू यादव के इस काम की लोग जम कर सराहना कर रहें हैं. पप्पू यादव के फेसबुक आईडी व उनके वास्तविक नाम राजेश रंजन के नाम से बने फेसबुक पेज व ट्विटर पेज पर उनके तस्वीरों पर खूब, लाइक कमेन्ट व शेयर हो रहें है. इन दिनों पटना व आसपास के शहर भीषण रूप से बाढ़ के पानी में गिरे हुए हैं. जिससे लोग अपने घरों में कैसे हो कर रह गए हैं. लोगों में खाने-पीने की सामग्री का बेहद अकाल है. और बिहार सरकार बाढ़ पीड़ितों को मदद पहुचाने में लाचार नजर आ रही है. ऐसे में पप्पू यादव बाढ़ पीड़ितों के लिए मसीहा बनकर सामने आए हैं.

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बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए पप्पू यादव दिन रात अपने साथियों के साथ कमर से ऊपर पानी में घुसकर लोगों के घरों तक राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं. वहीं जहां पर पानी में घुसकर राहत सामग्री पहुंचाना संभव नहीं है वहां वह ट्रैक्टर व जेसीबी के जरिए भी राहत सामग्री का वितरण करते हुए नजर आ रहे हैं. बाढ़ के पानी में घिरे अमीर व गरीब लोगों में पप्पू यादव द्वारा वितरित किये जा रहे दूध, पानी व खाद्य सामग्री रस्सियों व जेसीबी के जरिये पहुचाएं जा रहें है.

पप्पू यादव के जरिए सहायता के लिए आगे आ रहे हैं लोग-

पप्पू यादव द्वारा बाढ़ पीड़ितों को पहुचाये जा रहे राहत कार्य से प्रभावित होकर लोग उनके जरिये बाढ़ पीड़ितों को मदद पहुचाने में आर्थिक सहयोग के लिए भी आगे आ रहें हैं. इसमें आम आदमी से लेकर नौकरीपेशा व विदेशों में रह रहे लोग भी शामिल हैं.  पप्पू यादव ने अपने राजेश रंजन वाले पेज पर लिखा है कि- “नगर अध्यक्ष मधेपुरा के बीडीओ के गोपीकृष्ण उन्हें 100000 रूपये  की मदद बाढ़ पीड़ितों में मदद पहुचाने के लिए दी है. हम आपकी भावनाओं का सम्मान करते हैं. आपने पटना के लोगों के दर्द को समझा और उनकी परेशानी से निकलने निकालने में हमारी मुहिम को अपना योगदान दिया. गोपी जी आपको पटना के लोगों की दुआएं खूब मिलेंगी धन्यवाद”.

वही उन्होंने लिखा है कि नवादा जिले के शिक्षक राजकुमार प्रसाद जी को सलूट जिन्होंने पटना में मुसीबत की मार झेल रहे लोगों की मदद के लिए आज अपना 1 महीने का वेतन दे दिया. रियल हीरो राजकुमार जी हैं ऐसे लोग हमारे बीच रहेंगे तब तक इंसानियत जिंदा रहेगी.

पप्पू यादव अपने राजेश रंजन नाम की पेज से लिखते हैं कि पटना के परेशान लोगों की पीड़ा को विदेशों में में रह रहे लोग भी महसूस कर रहे हैं. यही वजह है कि शिकागो में रह रहे श्री शंभू प्रसाद जी और उनकी पत्नी और आर प्रसाद जी ने 525 यूएस डौलर यानी 36751 रूपये की आर्थिक मदद भेजी है. इसके अलावा शिकागो से श्री समर्थ अबरोल जी ने भी 257 यूएस डॉलर यानी 18000 रूपये की मदद की है. हम आपको पटना से लोगों की तरफ धन्यवाद देते हैं और आपका आभार प्रकट करते हैं.

9 वर्ष की बच्ची ने अपने गुल्लक से दिए 11 हजार रूपये –

पप्पू यादव के रात कार्यों के बारे में अपने परिवार वालों के सोशल मीडिया के जरिये जानकारी होने पर उनके राहत कार्यों से प्रभावित होकर बिहार के समस्तीपुर जिले की रहने वाली नौ वर्ष की बच्ची सौम्या सिद्धि ने भी अपनी पौकेट मनी से गुल्लक में बचा कर रखे गए 11000 रुपयों को पटना आकर पप्पू यादव को सौंपा. सौम्या सिद्धि ने बताया कि वह पप्पू यादव के कार्यों से प्रभावित होकर अपने गुल्लक में बचाए गए 11000 रुपयों को गुल्लक तोड़कर पप्पू यादव को समस्ती पुर से पटना तक देनें आई है. इस बात की जानकारी पप्पू यादव ने अपने टि्वटर पेज पर शेयर भी किया है उन्होंने लिखा है –

“माता-पिता के द्वारा जब बच्चों में सेवाभाव और मानवता का संस्कार भरा जाए, तो लगता है कि अभी भी बहुत कुछ बचा है. वहीं, 24 घंटे में पानी निकालने वाले रणछोड़ मोदी को सौम्या से सबक लेना चाहिए, जो सालों से गुल्लक में जोड़े अपने पैसे लेकर टीवी और सोशल मीडिया में पटना के लोगों की परेशानी देख कर मदद के लिए निकल पड़ी.”

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बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाने में नाकाम होने पर उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी द्वारा अपने पड़ोसियों को बाढ़ में छोड़कर भाग जाने के बाद जब इसकी जानकारी पप्पू यादव को हुई तो वह सुशील मोदी के कौलोनी के लोगों को भी राहत पहुंचाने के लिए पहुंच गए. उन्होंने अपने फेसबुक आईडी पर लिखा है की “अभी हम सुशील कुमार मोदी के राजेंद्र नगर स्थित घर पर आए हैं जहां जो भी लोग फंसे हैं उनको पानी और खाना दिया जा रहा है . इस इलाके में पानी अभी भी इतना लगा हुआ है कि लोग बेहाल है . लेकिन सुशील मोदी जी अपने पड़ोसियों को छोड़कर भाग खड़े हुए हैं”.

उन्होंने लिखा है “बिहार के उपमुख्यमंत्री के राजेंद्र नगर स्थित घर घर वाले इलाके में स्थिति बेहद ख़राब है. हम वहां पहुंच कर फंसे लोगों की मदद कर रहे हैं. जो घर के छत पर खड़े होकर मदद की गुहार लगा रहे हैं. वह लिखते हैं सुशील कुमार मोदी की गली में तो लोग रोने लगते हैं . ऐसे में मेरे आंखों से आंसू निकल आए . स्थिति  इतनी खराब है स्थिति है कि बताया नहीं जा सकता है.”

भूखे बच्चों की मां के आंसू बताते हैं कि बिहार में बहार

राजेश रंजन उर्फ़ पप्पू यादव के सोशल मीडिया पेज पर शेयर किये जा रहें फोटो व वीडियो पर लोग बिहार सरकार पर जहां जम कर भड़ास निकाल रहें हैं . वहींं पप्पू यादव की जम कर तारीफ भी कर रहें हैं. उनके एक ट्वीट पर जावेद आलम नाम के यूजर ने लिखा है- “बिहार के इस कठिन समय मे आपसे जितने लोगो की मदद हो रही है आप कर रहे है,बहुत ही सहरानीय कार्य ह . आपने बिना स्वर्थ के सभी लोगो की मदद कर रहे है. इस मदद को जनता जरूर याद रखेगी. क्योंकि जो सरकार में रहकर कार्य नही कर पा रहे है,आप बिना किसी पद के रहते हुए भी इतने लोगों की मदद की.” वहीं  राकेश कुमार नाम का यूजर लिखता है – “देखे सुशील मोदी और नीतीश कुमार एक बच्ची भी आप से समझदार है वो गुल्लक फोड़ लाई और आप मजबूरी में फंसे लोगो का हम मारते हैं. ये कलयुग है हर आदमी का हिसाब यही पर होता है.
बाढ़ पीड़ितों के मदद में आगे आये पप्पू यादव इन दिनों बिहार के लिए हीरो बन कर उभरें है. उनके द्वारा किये जा रहे राहत कार्यों की सराहना सभी को करनी चाहिए.

आखिर क्यों वायरल हो रहा है सपना चौधरी का ये डांस, देखें वीडियो

हरियाणा की मशहूर डांसर सपना चौधरी लाखो दिलों की जान बन चुकी हैं. सपना चौधरी  ने अब तक कई स्टेज शो किए है और हर स्टेज शो में वे अपने डांस से फैंस का दिल जीतने में कामयाब रही हैं. वैसे तो सपना के नए वीडियो के साथ-साथ पुराने वीडियो भी वायरल होते रहते हैं और इसी के चलते हाल ही में उनका एक वीडियो इंटरनेट पर खूब वायरल हो रहा है. उनके फैंस बस इसी उम्मीद में बैठे रहते हैं कि कब सपना का कोई वीडियो आए और वे उस वीडियो को जमकर प्यार दें लेकिन जब सपना के नए वीडियो आने में थोड़ी देरी हो जाती है तो उनके फैंस उनके पुराने वीडियो ही देखना शुरू कर देते हैं और उन्हे वायरल करने में लग जाते हैं.

सपना चौधरी का एक वीडियो दुबारा सामने आ रहा है जिसमें वे साड़ी पहन पर खूब वाहवाही लूट रही हैं. इस वीडियो में सपना गाने ‘तेरी लत लग जागी’ पर जमकर ठुमके लगाती दिखाई दे रही हैं. इस वीडियो से साफ पता चलता है कि सपना अच्छे से जानती हैं कि किस तरह उन्हें अपने फैंस को खुश करना है. सपना ने इस वीडिसो में प्रिंटेड साड़ी के साथ लाल कलर का ब्लाउज पहना हुआ है.

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करीब 2 मिनट 49 सैकेंड के इस वीडियो में सपना ने अपने फैंस के दिलों में जैसे तुफान ही ला दिया है. इस वीडियो की सबसे खास बात ये है कि इस वीडियो में सपना चौधरी ने साड़ी पहनी हुई है. ऐसा बहुत कम ही देखने को मिलता है कि सपना साड़ी पहन कर डांस करें क्योंकि वे ज्यादातर सूट में ही डांस करना पसंद करती हैं. लेकिन देखा जाए तो सपना साड़ी में भी कहर बरसा रही हैं और काफी सुंदर लग रही हैं.

बता दें, हाल ही में सपना ने एक पंजाबी सिंगर आर. नेत के साथ म्यूजिक वीडियो में काम किया था जिसका नाम था “लूटेरा”. इस वीडियो ने तो जैसे यू-ट्यूब पर तबाही ही मचा दी थी. इस गाने के व्यूज़ कुछ ही देर में मिलियंस पार कर गए थे.

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वीडियो लिंक-

भोजपुरी फिल्म में सपना दिखाएंगी हुस्न और अदाकारी के जलवे

बिहार, यूपी के साथसाथ नेपाल के सिनेमाघरों में भोजपुरी सिनेमा का क्रेज आज भी कम नहीं. यों भी ठेठ देशी अंदाज में देशी ठुमके लगाती भोजपुरी फिल्मों की नायिका जब रुपहले परदे पर आइटम सौंग करती हैं तो दर्शक खुद भी ठुमके लगाने से खुद को रोक नहीं पाते.

कुल्हङ में चाय पीने जैसा आनंद देती हैं भोजपुरी फिल्में…

वैसे, भोजपुरी सिनेमा को ले कर अकसर यह कहा जाता है कि इस की ज्यादातर फिल्में वल्गर होती हैं और फिल्मों में डबल मीनिंग यानी द्विअर्थी संवाद बोल कर दर्शकों का सस्ता मनोरंजन किया जाता है, जबकि हकीकत तो यही है कि इन सब के बावजूद भोजपुरी फिल्म कुल्हङ में चाय पीने जैसा आनंद देती है और शायद तभी इस की लगभग फिल्में बौक्स औफिस पर खूब पैसा बनाती हैं.

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जम कर नाचने वाली हैं सपना गिल…

खबर है कि अपनी शोख अदाओं से दर्शकों को दीवाना बनाने वाली हौट गर्ल सपना गिल फिल्म ‘बंसी बिरजू’ में दर्शकों का दिल लूटने आ रही हैं. निर्माणाधीन फिल्म ‘बंसी बिरजू’ में बतौर नायिका वे अपनी अदा और हुस्न का ऐसा जलवा दर्शकों को दिखाएंगी कि दर्शक दांतों तले उंगलियां दबाने को मजबूर हो जाएंगे. इस फिल्म के कई गानों में वे जम कर नाचने वाली हैं.

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वर्ल्डवाइड चैनल व जितेन्द्र गुलाटी प्रस्तुत फिल्म ‘बंसी बिरजू’ में नायक प्रवेशलाल यादव और आदित्य ओझा हैं. इस फिल्म की नायिका सपना गिल और चांदनी सिंह हैं. निर्देशक हैं अजय झा.

फेस्टिव सीजन में ट्राय करें सिद्धार्थ मल्होत्रा के ये लुक्स

फिल्म “स्टूडेंट औफ द ईयर” से अपने एक्टिंग करियर की शुरूआत करने वाले सिद्धार्थ मल्होत्रा इन दिनों कामयाबी के शिखर पर हैं. उनकी चार्मिंग पर्सनैलिटी ने उनके फैंस की नींदे उड़ाई हुई हैं और खास तौर पर उनकी पर्सनैलिटी लड़कियों के बीच काफी पौपुलर है. उनकी इस डैशिंग पर्सनैलिटी का एक खास कारण है उनका ट्रैंडी फैशन. सिद्धार्थ लेटेस्ट ट्रेंड से हमेशा अप्डेटिड रहते हैं और सोशल मीडिया पर अपनी फोटोज फैंस के साथ शेयर करते रहते हैं तो आइए हम आपको दिखाते हैं सिद्धार्थ मल्होत्रा के कुछ ऐसे लुक्स जिसे आपको अपनी रूटीन में जरूर ट्राय करना चाहिए.

फेस्टिव लुक…

 

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Festive vibes ✨ #Navratri Stylist- @nikitajaisinghani Photography- @rohit_bhatkar

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जैसा कि आप सब जानते हैं कि त्योहारों का सिलसिला शुरू हो गया है और अब एक के बाद एक त्योहार मनाने की बारी आ गई है. इसी के चलते सिद्धार्थ मल्होत्रा ने अपना एक फेस्टिव लुक हम सब के साथ शेयर किया है जिसमें उन्होने ग्रीन कलर के इंडो वेस्टर्न के साथ व्हाइट कलर की पयजामी पहन रखी है. उनके इंडो वेस्टर्न पर लगा ब्रोच इस लुक पर चार चांद लगा रहा है. इस लुक को आप गरबा नाइट या किसी भी फैमिली फंक्शन में ट्राय कर सकते हैं.

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कैसुअल पार्टी लुक…

 

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Good vibes rolling! #MarjaavaanTrailerLaunch

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कई बार हमें समझ नहीं आता कि छोटी-मोटी पार्टीज या कैसुअल पार्टीज में हमें कैसे पहड़े पहनने चाहिए जिससे की हम बाकियों से अलग और कूल दिख सकें तो उन पार्टीज के लिए आप सिद्धार्थ मल्होत्रा का ये लुक ट्राय कर सकते हैं जिसमें उन्होनें व्हाइट कलर की राउंड नैक टी-शर्ट के ऊपर प्रिंटेड शर्ट और साथ ही वहाइट कलर का ट्राउसर पहना हुआ है. इस लुक के साथ सिद्धार्थ ने व्हाइट कलर के ही शूज पहने हुए हैं जो कि काफी कूल नजर आ रहे हैं.

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ट्रेंडी लुक…

 

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#KoiKahaniShuruTohKar

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आज कल हर कोई लेटेस्ट ट्रेंड की भागदौड़ में लगा हुआ है और इसी के साथ सिद्धार्थ मल्होत्रा का एक ट्रेंडी लुक सामने आया है जिसमें वे काफी डैशिंग नजर आ रहे हैं. इस ट्रेंडी लुक में सिद्धार्थ ने ब्लैक कलर की प्लेन टी-शर्ट के ऊपर ग्रीन कलर की जैकेट और साथ ही आर्मी कलर का ट्राउसर पहना हुआ है. आप ये लुक अपने कौलेज और इंस्टीट्यूट में ट्राय कर अपने क्रश को इम्प्रेस कर सकते हैं.

जेंटलमैन लुक…

 

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#AGentleman in delhi , releasing this Friday 25th Aug !

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कई लडकियों को फंकी लुक से ज्यादा जेंटलमैन लुक वाले लड़के पसंद आते हैं तो अगर आपको लगता है कि आप अपने जेंटलमैन लुक से अपनी क्रश को इम्प्रेस करने में कामयाब हो सकते हैं तो जरूर ट्राय करें सिद्धार्थ का ये लुक. इस लुक में ब्लैक कलर की प्लेन टी-शर्ट के ऊपर ग्रे कलर का ब्लेजर और साथ ही ग्रे कलर का ट्राउसर पहना हुआ है. इस लुक को आप सेमी-फोर्मल लुक भी कह सकते हैं.

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खुद का कत्ल, खुद ही कातिल: भाग 2

पहला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- खुद का कत्ल, खुद ही कातिल: भाग 1

भोपाल में जब उस के घर पुलिस गई तो वह नदारद मिला. इस से सारी दाल काली नजर आने लगी. राजेश की आत्महत्या का राज अब कोई खोल सकता था तो वह निहाल था, बशर्ते वह जिंदा हो. पुलिस को एक आशंका यह थी कि कहीं मृतक निहाल ही न हो.

इसी दौरान एक महत्त्वपूर्ण सुराग पुलिस के हाथ यह लगा कि राजेश जिंदा है और अपने नजदीकी दोस्तों को फोन कर पैसे उधार मांग रहा है. इस से मामले में सस्पेंस और बढ़ने लगा. राजेश के एक साथी नामी बदमाश ने पुलिस को बताया था कि राजेश ने उस से फोन पर 60 हजार रुपए मांगे थे. इस से यह बात तो साफ हुई कि लाश उस राजेश परमार की नहीं थी जिस ने खुदकुशी की थी या फिर जिस की हत्या हुई थी.

काररवाई आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने निहाल के मोबाइल की पड़ताल की तो उस की लोकेशन गुजरात के अहमदाबाद की मिली. निहाल को दबोचने के लिए इतना काफी था. पुलिस ने गुजरात जा कर उसे पकड़ा तो उसने कोई हीलाहवाली न कर हकीकत बता दी. जिसे सुन पुलिस वाले हैरान रह गए कि राजेश कितना शातिर दिमाग अपराधी है.

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क्राइम सीरियल देख बनाई योजना

कहानी अब शीशे की तरह साफ थी कि राजेश ने क्राइम सीरियल देख कर योजना बना ली थी कि वह भी अपनी कदकाठी के किसी आदमी को ढूंढ कर उस की हत्या को आत्महत्या का रूप दे देगा.  इस बाबत उसने निहाल से बात की तो पहले तो निहाल साथ देने से मुकर गया लेकिन जैसे ही राजेश ने उसे एक लाख रुपए देने का लालच दिया तो वह तैयार हो गया.

ऐसा आदमी कहां मिल सकता है जिस की कद काठी राजेश जैसी हो और जिसे जल्द से जल्द आसानी से मारा जा सके. इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए इन दोनों को जहमत नहीं उठानी पड़ी. उन्होंने कहा कि ऐसा आदमी सिर्फ एक ही जगह मिल सकता है और वह है शराब का ठेका.

लिहाजा दोनों 28 जून को भोपाल के शराब ठेकों की खाक छानने निकल पड़े. कुछ ठेके घूमने के बाद आखिरकार उन्हें शिकार मिल ही गया. गोविंदपुरा के प्रभात पेट्रोल पंप की कलारी पर उन्हें ठीक वैसा ही आदमी शराब पीते दिख गया जैसा उन्हें चाहिए था.

शराब के अड्डे की एक खूबी यह होती है कि वहां किसी से जानपहचान करने के लिए किसी औपचारिकता की जरूरत नहीं पड़ती. बस पास बैठ कर गला तर करना भर काफी होता है. राजेश और निहाल दोनों उस शख्स के पास जा कर शराब पीने लगे और देखते ही देखते शख्स से उन की गहरी दोस्ती हो गई, जिसे कुछ देर पहले तक वे जानते भी नहीं थे. तीनों ऐसे मिले जैसे फिल्मों में कुंभ के मेले में बिछड़े भाई मिलते हैं.

बातों ही बातों में पता चला कि उस शख्स का नाम राजू रैकवार है. बातों ही बातों में राजेश ने उसे क्रेशर पर नौकरी लगवाने का झांसा दिया तो वह झट तैयार हो गया जिस की वजह नशे में होने के साथ तगड़ी पगार का लालच भी था. शिकार ने दाना चुग लिया तो इन दोनों ने फौरन उसे हलाल करने का प्लान बना डाला. राजू उन के साथ नौकरी की बात करने साथ चल पड़ा.

राजेश और निहाल राजू को किसी कीमती सामान की तरह संभाल कर रातीबड़ स्थित घर ले आए. रास्ते में उन्होंने बाइक में एक हजार रुपए का पेट्रोल डलवाया और शराब भी और खरीद ली, जिस से राजू ज्यादा हाथ पांव न मार पाए.

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सब कुछ योजना के मुताबिक हो रहा था. राजू की मौत में राजेश को अपनी जिंदगी और निहाल को एक लाख रुपए के रंगबिरंगे नोट दिख रहे थे. अपने अंजाम से बेखबर राजू को भी अच्छी पगार वाली नौकरी दिख रही थी.

दोनों ने घर पर राजू को छक कर शराब पिलाई. राजू भी अपनी मौत से बेपरवाह मुफ्त की दारू के लालच में आ गया. जब वह पी कर लुढ़क गया तो दोनों ने गला दबा कर उस की हत्या कर दी.

हत्या के बाद राजेश ने सुसाइड नोट लिखा और फिल्मी स्टाइल में राजू को जला दिया. जलाने के लिए 10 लीटर से ज्यादा पैट्रोल का इस्तेमाल किया गया था. राजू को वे दोनों बेहोशी की हालत में पैट्रोल स्नान करवा चुके थे.

इस तरह राजू रैकवार, राजेश परमार बन कर मर गया. वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों अपनेअपने रास्ते हो लिए. राजेश ने अपना मोबाइल फोन घर पर ही छोड़ दिया था जिस से पुलिस शक न करे. बातचीत करने के लिए निहाल ने उसे अपनी एक पुरानी सिम दे दी थी, खुद निहाल भी बतौर अहतियात अहमदाबाद चला गया.

धरी रह गई सारी होशियारी

अब पुलिस के पास करने को यही रह गया था कि वह राजेश को गिरफ्तार कर ले. पूछताछ में निहाल ने बताया कि वह इटारसी होते हुए दक्षिण भारत भागा है. राजेश को पकड़ने के लिए पुलिस ने निहाल को ही मोहरा बनाया. निहाल ने राजेश को फोन किया तो पता चला कि वह इधर से उधर भाग रहा है.

इस पर पुलिस के निर्देश पर निहाल ने उस से कहा कि वह चेन्नई रेलवे स्टेशन पहुंचे जहां उस का एक दोस्त रिसीव कर लेगा. राजेश की चालाकी धरी रह गई. उसे इल्म तक नहीं हुआ था कि निहाल पुलिस के हत्थे चढ़ चुका है और अब उस की बारी है. अब तक वह नागपुर, बंगलुरु, चैलपट्टनम और वेल्लौर सहित चैन्नई तक भागता रहा था.

7 जुलाई को सुनील भदौरिया और एएसपी कर्मवीर सिंह चैन्नई पहुंच गए. कहीं राजेश उन्हें पहचान न ले इसलिए उन्होंने साउथ इंडियन गेटअप धारण कर लिया था. जब राजेश चैन्नई रेलवे स्टेशन पर पहुंचा तो कर्मवीर सिंह उस से निहाल का दोस्त बन कर मिले. जैसे ही वह उन की कार में बैठा चैन्नई क्राइम ब्रांच के कर्मचारियों की सहायता से राजेश को गिरफ्तार कर लिया गया.

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इस तरह राजेश की कहानी बड़े दिलचस्प से तरीके से खत्म हुई जिस से उसे कोई खास फर्क नहीं पड़ना क्योंकि आजीवन सजा तो वह अंकित की हत्या के आरोप में भुगत रहा था अब उस पर एक कत्ल का इलजाम और लग गया था. निहाल भी उस के साथ जेल में है और तय है दोनों अपनी साजिशी स्कीम की चूक पर झींक रहे होंगे जो जल्दबाजी में उन्होंने की थी.

राजू रैकवार के बारे में भी तुरंत पता चल गया कि उस की गुमशुदगी की रिपोर्ट उस की पत्नी ने गोविंदपुरा थाने में लिखाई थी. राजू 26 जून, 2019 को अपनी पत्नी से मंदिर जाने की बात कह कर निकला था लेकिन सीधे मौत के मुंह में पहुंच गया था. गोविंदपुरा के जनता क्वार्टर्स में रहने वाले राजू के घर अब मातम पसरा है उस के पिता भैयालाल रैकवार को बेटे द्वारा हत्या किए जाने की बात पर यकीन नहीं हो पा रहा है.

राजू के घरवालों ने उन चप्पलों की पहचान की जो वह घटना वाले दिन पहन कर घर से निकला था. ये चप्पलें राजेश के घर के बाहर मिलीं लेकिन राजेश ने दूसरी बड़ी गलती राजू को गला दबा कर मारने की की थी, जिस के चलते उस पर शक गहराया और फिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद यकीन में बदल गया.

अगर वह राजू को सीधे जला कर मारता और राजू की चप्पलें भी गायब कर देता तो शायद यह मौत राजेश परमार की ही मानी जाती, जो अंजू को दूर कहीं ले जा कर शादी कर लेता और सच का किसी को पता भी नहीं चलता. लेकिन यह बात बेवजह नहीं कही जाती कि अपराधी कितना भी शातिर और चालाक क्यों न हो, अपने पीछे कोई सुराग या सबूत छोड़ ही जाता है.

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कहानी सौजन्य – मनोहर कहानियां

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