मेरे पति को पिछले कुछ समय से कमर से ले कर गरदन तक दर्द रहता है, सही इलाज बताएं?

सवाल-

मेरे पति को पिछले कुछ समय से कमर से ले कर गरदन तक दर्द रहता है. सही इलाज बताएं?

जवाब-

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आज के समय में पीठ और गरदन में दर्द होना बहुत ही सामान्य सी समस्या हो गई है. अगर आप का पीठ दर्द बहुत गंभीर है और आराम करने के बाद भी कम नहीं हो रहा है, यह फैल कर एक या दोनों पैरों में पहुंच चुका है, खासतौर पर अगर यह दर्द घुटनों से नीचे पहुंच जाए, कमजोरी लाए, एक या दोनों पैरों को सुन्न कर दे या उन में अजीब सी सिहरन हो, अचानक आप का वजन भी कम होने लगे, तो आप डाक्टर को फौरन दिखाएं. डाक्टर आप के दर्द का इलाज शुरू करने से पहले एमआरआई स्कैन करा सकता है.

खेसारी लाल यादव की ‘‘भाग खेसारी भाग’’ का फर्स्ट लुक लौंच

‘जे पी स्टार पिक्चर्स’ के बैनर तले बन रही निर्माता उमाशंकर प्रसाद और निर्देशक प्रेमांशु सिंह द्वारा निर्देशित खेसारी लाल यादव और स्मृति सिन्हा की भोजपुरी फिल्म  ‘भाग खेसारी भाग’ का फर्स्ट लुक बाजार में आते ही चर्चा का केंद्र बन गया है. जबकि फिल्म के पोस्टर खेसारी लाल यादव का चेहरा नहीं दिखाया गया है, बल्कि वह भागते हुए नजर आ रहे हैं. यह फर्स्ट  लुक ‘‘याशी फिल्म्स म्यूजिक’’ कंपनी द्वारा लौंच किया गया है.

उमाशंकर प्रसाद कर रहे हैं बदलाव की कोशिश…

बहुत पुरानी कहावत है कि बदलाव कोई नया आदमी ही करता है. तो अब अपनी पहली फिल्म ‘‘भाग खेसारी भाग’’ के साथ ही निर्माता उमाशंकर प्रसाद भोजपुरी सिनेमा में बहुत बड़ा बदलाव लाने का प्रयास कर रहे हैं. यह बात फिल्म के पहले पोस्टर से ही नजर आ रही है. इस फिल्म में एक साथ खेसारी लाल यादव, स्मृति सिन्हा और निर्देशक प्रेमांशु सिंह की सुपरहिट रही तिकड़ी एक बार फिर इतिहास रचने वाली है.

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खेसारी लाल के साथ स्मृति सिन्हा भी आएंगी नजर…

खेसारी लाल और स्मृति की सुपर हिट जोड़ी फिर से बहुत दिनों बाद इस फिल्म से रिपीट हो रही है. फिल्म ‘‘भाग खेसारी भाग’’ के एसोसिएट प्रोड्यूसर आयुश राज गुप्ता, लेखक मनोज कुशवाहा, संगीतकार ओम झा, कैमरामैन सरफराज खान, नृत्य निर्देषक राम देवन, रिक्की गुप्ता, मारधाड़ हीरालाल यादव, कला शेरा का है.

मुख्य भूमिका में खेसारीलाल यादव, स्मृति सिन्हा, अमित शुक्ला, अयाज खान, संजय वर्मा,अर्जुन यादव, राहुल शाहू, प्रीतम कुमार, अविनाश मधुकर, अमित सिंह, सत्य प्रकाश सिंह आदि हैं.

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वर्कआउट के दौरान इस एक्ट्रेस ने पार की हौटनेस की सारी हदें, वीडियो वायरल

शर्लिन चोपड़ा भारतीय टेलीविजन की अब तक की सबसे हौट अभिनेत्रियों में से एक हैं. अभिनेत्री को उनके बोल्ड और बदमाश रवैये के लिए जाना जाता है, जो निश्चित रूप से उन्हें शहर के सबसे वांछित व्यक्तित्वों में से एक बनाता है. उनके दृष्टिकोण और उनके व्यक्तित्व के अलावा, शर्लिन के बारे में एक और बात है जो उसे इतना वांछनीय बनाती है और वह है उसका शरीर!

हौट फोटोज से भरपूर है शर्लिन का इंस्टाग्राम…

शर्लिन का इंस्टाग्राम उनके निर्दोष शरीर को इतनी सहजता से भर रहा है कि वह हर किसी को आश्चर्य में छोड़ देता है. खैर, इस तरह का शरीर रातोंरात हासिल नहीं किया जाता है.

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वर्कआउट वीडियो…

शर्लिन ने इसे मेहनत व पसीना बहाकर पाया है. इसका सबूत उनका वर्कआउट वीडियो है, जो कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. अपने फिटनेस मंत्र के बारे में बात करते हुए, अभिनेत्री कुछ और करने से पहले जिम में ‘पसीना बहाने’ में विश्वास करती है.

 

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शर्लिन ने अपने वर्कआउट का खुलासा करते हुए कहती हैं- ‘‘मैं भारी वजन उठाती हूं क्योंकि मैं अपनी मांसपेशियों का निर्माण करना पसंद करती हूं ताकि मांसपेशियों को देखा जा सके.”

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जहां तक अभिनय का सवाल है तो शर्लिन एक नए रैप एल्बम पर काम कर रही हैं. उनका पिछला एलबम ‘कटार’ को जबरदस्त सफलता मिली थी. शर्लिन बहुत जल्द अपनी वेब सीरीज भी लौन्च करने वाली हैं.

चावल घोटाले की पकती खिचड़ी

अब तक रामदास एग्रो इंडस्ट्री के पुरुषोत्तम जैन, प्रीति राइस मिल के पंकज कुमार, मौडर्न राइस मिल के राजेश लाल और पावापुरी राइस मिल के दिनेश गुप्ता की तकरीबन 8 करोड़ की जायदाद जब्त की जा चुकी है.

बिहार राज्य खाद्य आपूर्ति निगम हर साल चावल मिलों को चावल निकालने के लिए सरकारी धान देता है. निगम द्वारा दिए गए कुल धान से निकलने वाले चावल का 67 फीसदी चावल निगम को लौटाना होता है. आरोपी मिल मालिकों ने निगम को चावल नहीं लौटाया और खुले बाजार में उसे बेच दिया.

बिहार में चावल मिल मालिकों की धांधली पर रोक लगाने में सरकार नाकाम रही है. पिछले 5 सालों से चावल मिल मालिकों के पास बिहार राज्य खाद्य निगम के 1,200 करोड़ रुपए बकाया हैं. राज्य में 1,300 चावल मिलें ऐसी हैं, जिन्होंने धान ले कर सरकार को चावल नहीं लौटाया, इस के बाद भी धान कुटाई के लिए उन मिलों को दोबारा धान दिया जा रहा है.

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गौरतलब है कि पटना की 64 चावल मिलों पर 55.61, नालंदा की 84 मिलों पर 55.34, सीतामढ़ी की 52 मिलों पर 55.83, मुजफ्फरपुर की 33 मिलों पर 66.51, भोजपुर की 90 मिलों पर 72.05, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण की 153 मिलों पर 63, बक्सर की 152 मिलों पर 101, औरंगाबाद की 207 मिलों पर 62.15, कैमूर की 357 मिलों पर 220, रोहतास की 191 मिलों पर 111, गया की 49 मिलों पर 40, वैशाली की 25 मिलों पर 23.66, दरभंगा की 34 मिलों पर 39.83, शिवहर की 8 मिलों पर 17.78, नवादा की 23 मिलों पर 20.48 करोड़ रुपए की रकम बकाया है.

इस के अलावा सिवान, अरवल, शेखपुरा, मधुबनी, सारण, समस्तीपुर, लखीसराय,  गोपालगंज वगैरह जिलों की सैकड़ों छोटीमोटी चावल मिलों पर तकरीबन 90 करोड़ रुपए बकाया हैं.

चावल घोटाले का यह खेल पिछले 8 सालों से चल रहा था. साल 2011-12 में राज्य खाद्य निगम ने 17 लाख, 6 हजार टन धान किसानों से खरीदा था. सारा धान चावल मिलों को दे दिया गया था. चावल मिलों से 14 लाख, 47 हजार टन चावल सरकार को मिलना था, पर उन्होंने केवल 8 लाख, 56 हजार टन चावल ही लौटाया है. बाकी चावल चावल मिलों ने आज तक नहीं लौटाया. उस चावल की कीमत 1,200 करोड़ रुपए है.

बिहार महालेखाकार ने पिछले साल की अपनी रिपोर्ट में कहा था कि धान को ले कर मिलरों ने सरकार को 434 करोड़ रुपए का चूना लगाया है. इस के बाद भी राइस मिल मालिकों पर कानूनी नकेल कसने में सरकार पता नहीं क्यों सुस्त रही?

बिहार राज्य खाद्य निगम के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, केवल 50 हजार रुपए की गारंटी रकम पर ही 3 से 6 करोड़ रुपए के धान चावल मिलों को सौंप दिए जाते रहे.

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चावल मिलों को धान देने के बारे में नियम यह है कि भारतीय खाद्य निगम मिलों से एग्रीमैंट करता है, जिस के तहत मिलर पहले निगम को 67 फीसदी चावल देते हैं, जिस के बदले में उन्हें रसीद मिलती है. उस रसीद को दिखाने के बाद ही निगम द्वारा मिलों को 100 फीसदी धान दिया जाता है. इस मामले में हेराफेरी के बाद भी राइस मिलों को सरकारी धान कुटाई के लिए मिलता रहा और वे घोटाले का खेल साल दर साल खेलते रहे

चावल घोटाले के मामले में 1,300 बड़े बकायादार मिल मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. गौरतलब है कि पिछले 5 सालों से चावल मिलों के मालिक 1,342 करोड़ रुपए बकाया देने में टालमटोल करते रहे हैं.

मेरी उम्र 40 साल है. मैं पिछले 5 साल से माइग्रेन के दर्द से परेशान हूं. इलाज बताएं?

सवाल-

मेरी उम्र 40 साल है. मैं पिछले 5 साल से माइग्रेन के दर्द से परेशान हूं. इलाज बताएं?

जवाब-

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माइग्रेन साधारण सिरदर्द नहीं होते?हैं. साउंड हौट पैक्ट व हीटिंग पैड्स तनावग्रस्त मांसपेशियों को आराम दे सकते हैं. गरम पानी से नहाने या शौवर लेने का असर भी ऐसा ही हो सकता?है. कैफिनेटेड बेवरेज का सेवन करें. कम मात्रा में अकेला कैफिन शुरुआती दौर में माइग्रेन के दर्द से राहत दे सकता है या पैरासिटामोल और एस्प्रिन दर्द कम करने के असर को बढ़ा सकती हैं.

खुद का कत्ल, खुद ही कातिल: भाग 1

बीती 15 जून को हत्या के आरोप में सजा काट रहे राजेश को अदालत ने 15 दिन के पैरोल पर छोड़ा था. हरिनगर भोपाल के तेजी से विकसित होते रातीबड़ और नीलबड़ इलाकों का एक मोहल्ला है जिस में कच्चेपक्के मकानों की भरमार है.

ऐसे ही एक मकान में राजेश अपनी बूढ़ी मां के साथ रहता था. पैरोल पर छूटे राजेश ने सबसे पहले अपने पसंदीदा काम किए जिन में पहला था शराब पीना और दूसरा था अपनी प्रेमिका अंजू (बदला नाम) के साथ घंटों बिस्तर में पड़े रह कर शारीरिक सुख भोगना.

ये दोनों ही चीजें चूंकि जेल में नहीं मिलती थीं इसलिए वह 15 दिन तक जी भर कर मौजमस्ती कर जिंदगी जी लेना चाहता था क्योंकि पैरोल खत्म होते ही उसे वापस जेल जाना पड़ता जहां की नर्क सी बदतर जिंदगी किसी मुजरिम को रास नहीं आती और आजादी उन के लिए एक ख्वाब भर बन कर रह जाती है.

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अंजू हालांकि तनमनधन से उस के लिए समर्पित थी लेकिन वह यह भी समझ रही थी कि इस के बाद शायद ही कभी राजेश को पैरोल मिले क्योंकि इस सहूलियत का फायदा वह 3 बार ले चुका था. पहली बार तब जब उसे 13 सितंबर, 2017 को सजा होने के बाद अंतरिम जमानत मिली थी. दूसरी दफा तब जब 17 मई, 2018 को उस के पिता की मौत हुई थी और तीसरी बार अब जो 29 जून को खत्म होने वाली थी.

आदतन अपराधी राजेश परमार ने 29 जुलाई, 2014 को सरेआम अंकित जवादे नाम के युवक की हत्या की थी. एक तरह से यह 2 छोटे स्तर के गिरोहों की गैंगवार थी जिसे योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया था. कमला नगर इलाके में रहने वाला अंकित भी राजेश की तरह गुंडा था और अपराध किया करता था. इन दोनों में किसी बात को ले कर दुश्मनी हुई तो दोनों एकदूसरे के खून के प्यासे हो गए.

हत्या वाले दिन राजेश ने अपने 3 साथियों भरत मेवाड़ा, राहुल श्रीवास्तव और दिलीप विश्वकर्मा उर्फ कुटरू के साथ मिल कर शिवाजी नगर इलाके में अंकित की हत्या एक पार्क के पास की थी. पहले इन चारों ने अंकित को देसी कट्टे से गोली मारी थी फिर लोहे की रौड से उस पर प्रहार किए. अंकित की मौत की तसल्ली होने के बाद चारों फरार हो गए थे लेकिन बाद में एकएक कर पकड़े भी गए थे.

राजेश ने 10 महीने फरारी काटी और जब उसे लगने लगा कि अब वह पकड़ा नहीं जाएगा तो बेफिक्री से भोपाल में घूमनेफिरने लगा लेकिन पुलिस के एक मुखबिर ने उस के शिवाजी नगर में दिखने की खबर दी तो एमपी नगर थाने के तत्कालीन टीआई ब्रजेश भार्गव ने उसे 29 मई, 2015 को गिरफ्तार कर लिया.

मुकदमा चला तो अदालत ने राजेश को मुख्य आरोपी मानते  उम्रकैद और राहुल और भरत को सह भियुक्त मानते हुए 10-10 साल की सजा सुनाई. दिलीप उर्फ कुटरू को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया था. इस तरह 13 सितंबर, 2017 को राजेश आजीवन कारावास की सजा काटने भोपाल की सेंट्रल जेल भेज दिया गया.

3 बार पैरोल मिलने के बाद उसे बाहर की हवा रास आने लगी थी, लेकिन मजबूरी यह थी कि वह भाग नहीं सकता था क्योंकि पैरोल के अपने सख्त नियम होते हैं और दूसरे इस बात का अहसास उसे हो चुका था कि कहीं भी भाग जाए, आज नहीं तो कल पकड़ा जरूर जाएगा. अंकित की हत्या के बाद भी आखिरकार वह ज्यादा दिनों तक छिपा नहीं रह पाया था.

बहरहाल उस ने 25 जून तक का वक्त तो जैसेतैसे काट लिया लेकिन इस के बाद 29 जून का खौफ उस के सर चढ़ कर बोलने लगा था. मंजू भी इशारों में उसे समझा चुकी थी कि आखिर वह कब तक उस का इंतजार करेगी क्योंकि घर वाले शादी के लिए दबाव बना रहे हैं.

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काफी सोचनेसमझने के बाद उस ने अपने आप को मना लिया कि अब जेल की जिंदगी ही उस की नियति है. इसलिए 15 दिन की मौजमस्ती ही काफी है हालांकि इस दौरान उस ने इस तरफ भी खूब सोचाविचारा कि कोई तो ऐसा रास्ता होगा जो हमेशा के लिए कैद से आजाद करा सके.

फिर जल्द ही उसे वह रास्ता मिल भी गया. एक दिन वह मंजू की बगल में पड़ेपड़े एक चैनल पर क्राइम सीरियल देख रहा था, तभी अचानक वह खुशी से भर उठा. सीरियल में दिखाया जा रहा था कि एक अपराधी ने अपनी ही कद काठी के एक आदमी की हत्या कर वारदात को आत्महत्या की शक्ल दे दी और बाहर आजाद घूमता रहा.

मैं ऐसा क्यों नहीं कर सकता, यह बात राजेश ने सोची तो उसे अपनी ख्वाहिशें पूरी करने और जेल की सजा से भी बचने का रास्ता दिखाई देने लगा, जो मुश्किल जरूर था लेकिन असंभव नहीं. लेकिन इस बाबत उस के पास एक दिन का ही वक्त था. मन ही मन उसने कुछ तय किया और मंजू को बाहों में समटेते हुए बोला, ‘‘अब मैं कभी जेल नहीं जाऊंगा.’’

फिर 29 जून की शाम रातीबड़ थाने में एक 34 वर्षीय शख्स द्वारा आत्महत्या करने की खबर पहुंची तो थानाप्रभारी सुनील भदौरिया घटनास्थल की तरफ दौड़ पड़े. पूछताछ में उन्हें पता चला कि उस मकान में राजेश परमार नाम का युवक रहता है जो हत्या के आरोप में सजा काट रहा था और हालफिलहाल पैरोल पर था.

राजेश की लाश फर्श पर पड़ी थी और पूरी तरह जली हुई थी. पुलिस वालों ने घर की तलाशी ली तो जल्द ही उन्हें एक सुसाइड नोट भी मिला, जिस में राजेश ने जिंदगी से परेशान हो कर खुदकुशी करने की बात लिखी थी.

पहली नजर में ही यह बात स्पष्ट हो गई थी कि राजेश परमार नाम का सजायाफ्ता मुजरिम जेल की जिंदगी से आजिज आ गया था और घबरा कर आत्महत्या कर बैठा. शुरुआती पड़ताल और पूछताछ के बाद लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी गई. दूसरे दिन ही राजेश का अंतिम संस्कार भी हो गया.

एकबारगी ऐसा लगा कि राजेश परमार नाम के हत्यारे की कहानी खत्म हो गई लेकिन जिसे लोग और पुलिस वाले अंत मान कर चल रहे थे वह दरअसल में एक नई कहानी की शुरुआत और एक ऐसे कत्ल की दास्तां थी जिस में किसी आदमी ने खुद का ही कत्ल कर डाला हो.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ शक

चौथे दिन जब पुलिस वालों को राजेश के पोस्टमार्टम की रिपोर्ट मिली तो वे भौचक्क रह गए क्योंकि रिपोर्ट में उस की मौत जलने से नहीं बल्कि दम घुटने से हुई बताई गई थी. यह बात किसी भी एंगल से पुलिस वालों को हजम नहीं हो रही थी क्योंकि लाश राजेश की ही थी और सुसाइड नोट उस की आत्महत्या की पुष्टि कर रहा था लेकिन शक तो बना हुआ था क्योंकि लाश की पहचान उस की कद काठी की बिना पर हुई थी उस का चेहरा बुरी तरह झुलसा हुआ था.

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अगर यह सच है तो कैसे मुमकिन है इस पुलिस सच की तलाश में निकली तो हर कदम पर एक हैरानी उन का पीछा करती नजर आई. एक टेढ़ा सवाल तो शुरु से ही मुंह बाए खड़ा था कि शुरुआत कहां से की जाए. सीएसपी उमेश तिवारी और एएसपी अखिल पटेल ने राजेश  के मोबाइल को टटोला तो पता चला कि 27 और 28 जून के दरम्यान उस ने अंजू के अलावा एक और नंबर पर बारबार बात की थी.

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

कहानी सौजन्य – मनोहर कहानियां

पौलिटिकल राउंडअप: कुमारी शैलजा को कमान

साथ ही, प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके भूपेंद्र सिंह हुड्डा को विधायक दल का नेता बनाने के साथसाथ विधानसभा चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है. विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे में इन दोनों नेताओं का रोल अहम होगा.

कन्हैया को क्लीनचिट

दिल्ली. फरवरी, 2016 में दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में संसद पर हमले के मास्टरमाइंड अफजल गुरु की फांसी के खिलाफ एक कार्यक्रम हुआ था जिस में जेएनयू छात्र संघ के तब के अध्यक्ष और आज के नेता कन्हैया कुमार को गिरफ्तार किया गया था.

अब दिल्ली की आम आदमी सरकार ने कन्हैया कुमार और 9 दूसरे लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने की दिल्ली पुलिस को इजाजत नहीं दी है. सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली के गृह मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा है कि पुलिस ने जो सुबूत पेश किया है, उस के मुताबिक कन्हैया कुमार और दूसरों पर देशद्रोह का मामला नहीं बनता.

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अगर मुकदमा चलता तो भी पुलिस गुनाह साबित नहीं कर पाती, पर अदालतों में हाजिरी के समय कन्हैया कुमार के साथ मारपीट का मौका भाजपाई वकीलों को जरूर मिल जाता.

माया का पुराना राग

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में साल 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं जिस की मायावती ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है. वे अपनी बहुजन समाज पार्टी को मजबूत बनाने के लिए एक बार फिर सोशल इंजीनियरिंग का सहारा ले रही हैं, इसीलिए उन्होंने 5 सितंबर को मुसलिम मुनकाद अली, दलित बीआर अंबेडकर और अन्य पिछड़ा वर्ग के आरएस कुशवाहा को स्टेट कोऔर्डिनेटर बनाया है.

इस बारे में पार्टी के एक बड़े नेता ने बताया, ‘हम गैरयादव और गैरलोध ओबीसी वोटर को पार्टी में वापस लाने का प्रयास करेंगे. हम ने महसूस किया कि भले ही हम ने लोकसभा चुनाव सपा के साथ लड़ा लेकिन ओबीसी और दलितों का एक समूह हम से दूर हो गया है.’ मायावती अब पूरी तरह फुस पटाखा हो चुकी हैं.

लोकतंत्र है तो दिखाए सरकार

श्रीनगर. जब से जम्मूकश्मीर का बंटवारा हुआ है और वहां से आर्टिकल 370 को हटाया गया है, तब से केंद्र सरकार ने हालात के सामान्य होने का दावा किया है, लेकिन 9 सितंबर, 2019 को जम्मूकश्मीर पौलिटिकल मूवमैंट (जेकेपीएम) के प्रमुख शाहिद खान ने भारत सरकार से कहा कि अगर देश में लोकतंत्र है तो वह दुनिया को दिखना भी तो चाहिए.

शाहिद खान ने केंद्र सरकार को लपेटते हुए कहा कि कश्मीर को समाधान का हिस्सा होना चाहिए, समस्या का नहीं, लेकिन पता नहीं क्यों, दुनिया कश्मीर को समस्या की तरह देखती है. वे मानते हैं कि घाटी के नौजवान एनर्जी और विचारों से भरे हुए हैं, लेकिन दुनिया उन्हें अलग नजरिए से देख रही है. पूरा कश्मीर आज कर्फ्यू की गिरफ्त में है. जो लोग प्लौट खरीदने के ख्वाब देख रहे थे वही नजर नहीं आ रहे.

उर्मिला का विलाप

मुंबई. कभी फिल्मकार रामगोपाल वर्मा की चहेती हीरोइन रही उर्मिला मातोंडकर ने इन लोकसभा चुनाव से पहले बड़े जोरशोर के साथ कांग्रेस में ऐंट्री मारी थी और मुंबई उत्तर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, पर उन्हें भाजपा नेता गोपाल शेट्टी से करारी शिकस्त मिली थी.

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अब उर्मिला मातोंडकर का कांग्रेस से मोह भंग हो गया है और उन्होंने इस पार्टी से कन्नी काट ली है. 10 सितंबर को कांग्रेस से इस्तीफा देते हुए उन्होंने कहा कि मुंबई कांग्रेस बड़े लक्ष्यों पर ध्यान देने की जगह उन का इस्तेमाल कर राजनीति कर रही है.

आंध्र में सियासी बवाल

हैदराबाद. पिछले लोकसभा चुनाव में सभी बड़े विपक्षी दलों को एकसाथ लाने की कोशिश करने वाले चंद्रबाबू नायडू अब अपने प्रदेश में मुसीबत में हैं.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके चंद्रबाबू नायडू 11 सितंबर को पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ गुंटूर जिले में सरकार के खिलाफ रैली करने वाले थे, जिस की उन्हें इजाजत नहीं मिली तो उन्होंने भूख हड़ताल करने का फैसला किया. इस के बाद मौजूदा वाईएसआरसीपी सरकार द्वारा उन्हें और उन के बेटे नर लोकेश को उन के घर में ही नजरबंद कर दिया गया.

इस के बाद नरसरावपेटा, सत्तेनापल्ले पलनाडू और गुराजला में धारा 144 लागू कर दी गई. बाद में पुलिस ने टीडीपी के कई और नेताओं को भी नजरबंद कर दिया.

सुशील ने बताया अपना ‘कैप्टन’

पटना. बिहार में जैसेजैसे विधानसभा चुनाव का समय नजदीक आ रहा है, वैसेवैसे वहां सियासी उठापटक तेज हो गई है. वहां यह खबर भी सियासी गलियारों में तैर रही है कि प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री भाजपा से होगा, जिस से जनता दल (यूनाइटेड) वालों की भौंहें तन गई हैं.

लेकिन विवाद ज्यादा न बढ़े, इसी के मद्देनजर भाजपाई और राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एनडीए के ‘कैप्टन’ हैं और आने वाले विधानसभा चुनाव तक वे ही ‘कैप्टन’ बने रहेंगे. भाजपा की राजनीति में जो कहा जाता है, वह किया नहीं जाता.

संभाजी भिड़े का एकादशी राग

पुणे. जब से इसरो का चंद्रयान 2 अभियान सुर्खियों में छाया है तब से लोगों ने इस के पूरी तरह कामयाब न होने पर तरहतरह की बातें बनाई हैं. इन्हीं में से एक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व कार्यकर्ता संभाजी भिड़े ने अपना अलग ही राग छेड़ा कि अमेरिका को चंद्रमा पर अंतरिक्ष यान भेजने में तब कामयाबी मिली जब उस ने इस के लिए एकादशी की तिथि चुनी.

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9 सितंबर को शोलापुर में संभाजी भिड़े ने कहा, ‘अमेरिका ने 38 बार चांद पर अंतरिक्ष यान भेजने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहा. इस के बाद कुछ अमेरिकी वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया कि क्यों न अमेरिकी कालगणना की जगह भारतीय कालगणना का इस्तेमाल किया जाए. अमेरिकी वैज्ञानिकों ने इस सुझाव पर अमल किया और 39वीं बार एकादशी के दिन अंतरिक्ष यान भेजा और वे कामयाब रहे.’ हमारे वैज्ञानिक भी पाखंडों से परे नहीं सोचते तो संभाजी भिड़े का क्या कहना.

कमल हासन का हमला

चेन्नई. भाजपा नेता और गृह मंत्री अमित शाह ने 14 सितंबर ‘हिंदी दिवस’ पर ‘एक राष्ट्र, एक भाषा’ की पैरवी की थी. यह बात अभिनेता से नेता बने कमल हासन को नागवार गुजरी और उन्होंने एक वीडियो जारी कर अमित शाह पर हमला करते हुए कहा कि भारत 1950 में ‘अनेकता में एकता’ के वादे के साथ गणतंत्र बना था और अब कोई ‘शाह, सुलतान या सम्राट’ इस से इनकार नहीं कर सकता है.

अपने वीडियो में कमल हासन ने कहा कि इस बार एक बार फिर भाषा के लिए आंदोलन होगा और यह जल्लीकट्टू आंदोलन से भी बड़ा होगा.

ममता की चिंता

कोलकाता. भारत में भाजपा के राज से हलकान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 15 सितंबर को कहा कि देश ‘घोर आपातकाल’ से गुजर रहा है. उन्होंने लोगों से संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों व स्वतंत्रता की रक्षा करने की अपील की.

पिछले लोकसभा चुनाव प्रचार में भाजपा से लोहा लेने वाली तृणमूल की प्रमुख ममता बनर्जी अपने दम पर केंद्र सरकार की तानाशाही के खिलाफ जम कर लगी हैं.

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एक शाम थाने के नाम

मजाक-

एक लंबी सांस लेने के बाद प्रभु दयाल अपने घर की ओर जा रहा था कि उस ने देखा कि लालबत्ती के पास कुछ लोग जमा हो रहे हैं.

माजरा क्या है, यह जानने के लिए जब वह उन लोगों के पास पहुंचा तो पता चला कि जेब काटने के दौरान मिले माल के बंटवारे को ले कर 2 जेबकतरे आपस में झगड़ रहे थे.

तभी गश्त पर निकले 2 पुलिस वाले मोटरसाइकिल पर वहां आ धमके. होशियार लोग तो वहां से खिसक गए, लेकिन प्रभु दयाल पुलिस वालों के हत्थे चढ़ गया.

एक पुलिस वाला प्रभु दयाल की कलाई जोर से पकड़ कर बोला, ‘‘चल, थाने चल. चौकचौराहे पर झगड़ाफसाद करता है, दंगा करता है…’’

घबराया हुआ प्रभु दयाल घिघियाते हुए बोला, ‘‘अरे भाई साहब, मैं शरीफ आदमी हूं. मैं ने कुछ नहीं किया है. मुझे क्यों पकड़ रहे हैं? दंगा करने वाले बदमाश तो भाग गए.’’

दूसरा पुलिस वाला थोड़ा अकड़ कर बोला, ‘‘थाने चल, वहीं तुझे सब बताएंगे.’’

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चौकचौराहे पर पुलिस के डंडे खाने के बजाय प्रभु दयाल ने थाने चलने में ही भलाई समझी.

थाने में प्रभु दयाल को जिस सबइंस्पैक्टर के सामने पेश किया गया, वह पहले से ही थाने लाए गए कुछ लोगों से निबटने में लगा था.

सबइंस्पैक्टर एक नौजवान को डांट रहा था, ‘‘देखो, तुम ने सरकारी जमीन को घेर कर रेहड़ी लगा रखी है. तुम्हारी अच्छी आमदनी होती है, तो फिर बीट कांस्टेबल से झगड़ा क्यों करते हो?

‘‘आपसी तालमेल से सब ठीकठाक चलता रहेगा. बीट कांस्टेबल जो कहता है मान लो, अकेले सब हजम करना तो ठीक नहीं है.’’

वह नौजवान घिघियाता हुआ बोला, ‘‘साहबजी, कोई नौकरी न मिलने पर ही यह काम शुरू किया था.

‘‘देखने से ही ऐसा लगता है कि हमें खूब कमाई हो रही है, पर हकीकत में ऐसा नहीं है. पुलिस वाले हर महीने पैसे बढ़ा कर लेना चाहते हैं. बताइए, उन को हम कैसे खुश रखें? आप मालिक हैं, हमें इंसाफ दीजिए.’’

सबइंस्पैक्टर पानी के साथ दवा की गोली गटकते हुए बोला, ‘‘हम फुजूल में किसी को तंग नहीं करना चाहते. तुम थोड़े कहे को ही ज्यादा समझो. बीट अफसर को खुश रखो. अब भाग लो यहां से. आगे से कोई शिकायत नहीं आनी चाहिए. पानी में रह कर मगर से बैर न पालो.’’

अब अगला नंबर एक एसटीडी बूथ चलाने वाले का था. सबइंस्पैक्टर उस आदमी से बोला, ‘‘लालाजी, तय रेट से ज्यादा पैसा वसूल रहे हो. बहुत बड़ा जुर्म है यह. जेल में चक्की पीसनी पड़ेगी. तुम्हारे खिलाफ जो शिकायतें आई हैं, उन का निबटारा कर लो, नहीं तो तुम्हारे साथ बुरा हो सकता है. समझ गए न?’’

अब अगला नंबर प्रभु दयाल का था. सबइंस्पैक्टर प्रभु दयाल को घूरते हुए बोला, ‘‘आंखों पर चश्मा, जेब में पैन. तुम तो काफी पढ़ेलिखे लगते हो, फिर भी चौकचौराहे पर दंगा क्यों कर रहे थे? सबकुछ खुद ही बता दो. मेरा गुस्सा बहुत बुरा है. तुम मुझे गुस्सा मत दिलाना, नहीं तो बड़ी मार खाओगे.’’

प्रभु दयाल बोला, ‘‘गुस्सा आप की सेहत के लिए अच्छा नहीं है साहब. हाई ब्लड प्रैशर के मरीज को तो गुस्से से हमेशा दूर ही रहना चाहिए.’’

सबइंस्पैक्टर हैरान हो कर बोला, ‘‘तुम्हें कैसे पता है कि मैं हाई ब्लड प्रैशर का मरीज हूं? यह तो कमाल है.’’

प्रभु दयाल बोला, ‘‘साहबजी, यह तो छोटी सी बात है. मुझे तो यह भी मालूम है कि कुछ देर पहले आप कोर्ट में पेश होने वाले बदमाशों की फाइल की लिखापढ़ी में लगे थे. मैं ठीक कह रहा हूं न?’’

सबइंस्पैक्टर को लगा जैसे उस के सामने एक ऐसा आदमी खड़ा है, जो दीवारों के आरपार देख सकता है.

लोहा गरम देख प्रभु दयाल ने एक और चोट की, ‘‘साहबजी, मुझे तो यह भी पता?है कि आज आप ने चावल और रोटी के साथ कौन सी सब्जी खाई है. आज आप ने लंच में कद्दू की सब्जी खाई है. ठीक कहा न?’’

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सबइंस्पैक्टर को ऐसा लग रहा था, जैसे उस की कुरसी के नीचे से जमीन खिसक रही है. ऐसे सच्चे भविष्य बताने वाले से तो उस का जिंदगी में कभी सामना ही नहीं हुआ था.

सबइंस्पैक्टर प्रभु दयाल के सामने हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया और बोला, ‘‘आप तो सबकुछ जानते हैं. मैं और मेरे बीवीबच्चों के बारे में भी कुछ बताइए. मैं खुशकिस्मत हूं कि आप जैसे बड़े लोगों के दर्शन हो गए.

‘‘यहां पास ही में मेरा फ्लैट है. क्या आप मेरे घर चल कर कुछ चायनाश्ता करेंगे? इसी बहाने ही सही, आप के साथ मिलनेबैठने का मौका मिल जाएगा.’’

प्रभु दयाल बोला, ‘‘फिर किसी दिन सही. आज बस इतना ही.’’

सबइंस्पैक्टर जैसे ही प्रभु दयाल के पैर छूने को आगे बढ़ा, प्रभु दयाल दूर हटते हुए बोला, ‘‘अजी साहब, ऐसा गजब मत कीजिए. अभी तो मैं अपने घर लौटना चाहूंगा, फिर किसी दिन फुरसत से आऊंगा.’’

सबइंस्पैक्टर गरजा, ‘‘मुबारक सिंह, भाई साहब को थाने की जीप में घर छोड़ कर आओ.

‘‘और हां, रास्ते में भोलू हलवाई की दुकान से साहब के बच्चों के लिए 5 किलो देशी घी के गुलाब जामुन दिलवा देना.’’

उधर महल्ले वाले प्रभु दयाल को थाने की जीप से उतरते व पुलिस द्वारा अदब से सलाम मारते देख हैरान थे. कुछ नौजवान भी वहां खड़े थे. उन में से एक ने कान में फुसफुसा कर कहा, ‘‘हमें तो पहले से ही शक था कि अपने में मस्त रहने वाला हमारा यह पड़ोसी प्रभु दयाल बड़ी ऊंची चीज है. थाने की जीप में आया है.’’

इधर, सारी बातें जानने के बाद प्रभु दयाल की बीवी हैरान हो कर पूछ रही थी, ‘‘शेर के मुंह में जाने के बाद भी आप सहीसलामत वापस कैसे आ गए? और साथ में देशी घी के गुलाब जामुन भी ले आए. कैसे हुआ यह चमत्कार? आप को तो ज्योतिष के बारे में कुछ भी नहीं आता, फिर वहां आप भविष्य बताने वाले कैसे बन गए?’’

प्रभु दयाल थोड़ा मुसकरा कर बोला, ‘‘अगर ज्योतिष के द्वारा कुछ बताया जा सकता, तो वाजपेयीजी समय से पहले चुनाव करा कर गद्दी नहीं खोते. ओसामा बिन लादेन कहां छिपा है, यह कब का पता लग गया होता. ज्योतिष के नाम पर जो बातें मैं ने सबइंस्पैक्टर को बताई थीं, वे तो कोई भी बता सकता था…’’

प्रभु दयाल ने राज खोला, ‘‘मैं ने देखा था कि पानी मंगा कर सबइंस्पैक्टर ने एनवास-10 की गोली गटकी थी. इस का मतलब यही था कि वह हाई ब्लड प्रैशर का मरीज है.

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‘‘लिखते हुए शायद रिफिल लीक कर गई थी, जिस से उस की उंगली में स्याही लगी थी. इस से साफ जाहिर था कि उस ने थोड़ी देर पहले लिखाई का काम किया है.

‘‘उस की मूंछों में कद्दू की सब्जी का एक छोटा टुकड़ा फंसा हुआ था यानी दोपहर को उस ने कद्दू की सब्जी खाई थी.

‘‘मैं बेकुसूर था और बेमतलब ही फंसाया जा रहा था, सो बचने के लिए ही सबइंस्पैक्टर के सामने मैं ने कुछ बातें हवा में उछाल दी थीं. मेरे बुरे समय पर हाजिरजवाब होने की नीति काम कर गई थी.

‘‘मैं ने उन से एक बार भी नहीं कहा कि मैं कोई पहुंचा हुआ पीरपंडित या भविष्य बताने वाला हूं. अब वह अपनी समझ से खुद ही यह मानने लगा था कि मैं कोई बहुत बड़ा ज्योतिषी हूं, तो उस हालत में मैं क्या कर सकता था? अंधविश्वासी लोग अकसर अपने जाल में खुद ही फंस जाते हैं.’’

प्रभु दयाल की बीवी बोली, ‘‘आप ने तो कहीं भी कोई गलतबयानी नहीं की. दूसरों की मेहनत की कमाई और हक पर हिस्सापत्ती चाहने वाले ऐसे लोगों को तो सेर का कोई सवा सेर मिलते ही रहना चाहिए.’’

फिर पत्नी अपने बड़े बेटे को बुला कर बोली, ‘‘बेटा, गुलाब जामुन की यह हांड़ी गरीबों में दे आ. कहीं इस धौंसपट्टी की कमाई को खाने से हमारे बच्चों पर भी बुरा असर न पड़ जाए.’’

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कातिल

लेखक- भीमराव रामटेके ‘अनीश’

‘‘कुछ नहीं सर, वह कल वाला फिटनैस सर्टिफिकेट देने का हिसाब देना था. ये जीनियस स्कूल की 10 बसों के 5 लाख रुपए हैं. 50,000 के हिसाब से, 60,000 के लिए वे नहीं माने. कह रहे थे कि साहब का बच्चा पढ़ता है हमारे स्कूल में, तो इतनी छूट तो मिलनी ही चाहिए, तो मैं ने भी ले लिए,’’ कहते हुए मुकेश ने एक बड़ा सा लिफाफा अपने बैग से निकाल कर सुनील के हाथ में दे दिया.

‘‘यार, फिर तुम एजेंट किस काम के हो… जब पहले ही बात हो गई थी तो पूरे ही लेने थे न… चलो, ठीक है.

‘‘अच्छा, आज मैं 3 बजे निकल जाऊंगा. मेरे बेटे का बर्थडे है… तो कल मुलाकात होगी,’’ सुनील लिफाफा सूटकेस में रखते हुए बोला और अपने काम में लग गया.

3 बजे सुनील अपनी कार से घर के लिए चल दिया. जैसे ही उस ने हाईवे पर मोड़ काटा, तो थोड़ी ही दूरी पर उसे जीनियस स्कूल की बस नजर आई.

‘अरे… 18 नंबर… यह तो चंकी की बस है…’ सुनील सोच ही रहा था कि बस को रुकवा कर उसे अपने साथ ले जाए कि अचानक बस लहराती हुई दूसरी तरफ उछली और सामने से आने वाले ट्रक से उस की जोरदार टक्कर हो गई. बच्चों की चीखों से आसमान जैसे गूंज उठा.

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सुनील का कलेजा कांप उठा. वह गाड़ी को ब्रेक लगा कर रुका और जल्दी से बस के अंदर घुसा.

अंदर का सीन देख कर सुनील के होश उड़ गए. बुरी तरह से जख्मी बच्चों की चीखें उस के कलेजे पर हथौड़े की तरह लग रही थीं. जैसे उस से कह रही हों कि तुम्हीं ने हमें मारा है. उस की नजरें तलाशती हुई जैसे ही चंकी पर पड़ीं, उस के तो मानो हाथपैर ठंडे पड़ गए.

चंकी के सिर और हाथों से खून बह रहा था. उस की सारी यूनीफौर्म खून से लथपथ हो चुकी थी और वह सिर पकड़ कर तड़पता हुआ जोरजोर से ‘मम्मीमम्मी’ चिल्ला रहा था.

सुनील ने तुरंत अपनी शर्ट उतार कर उस के सिर पर बांधी और उसे गोद में ले कर कार की तरफ दौड़ लगा दी. उसे कार में बिठा कर पास के ही अस्पताल की ओर तेजी कार से बढ़ा दी.

अस्पताल पहुंचते ही चंकी को स्ट्रैचर पर लिटा कर इमर्जैंसी में ले जाया गया.

सुनील ने कांपते होंठों से डाक्टर को हादसे की जानकारी दी… तुरंत ही इलाज शुरू हो गया.

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सुनील जरूरी कार्यवाही पूरी कर के बैठा ही था कि 2 एंबुलैंस आ कर रुकीं और उन में से ड्राइवर, कंडक्टर और कुछ बच्चों को निकाल कर स्टै्रचर पर लिटा कर अस्पताल के मुलाजिम उन्हें अंदर ले आए.अस्पताल में अफरातफरी का माहौल हो गया. नर्स ने बताया कि 8 बच्चों सहित ड्राइवर की मौत हो गई है. यह सुन कर सुनील पसीने से तरबतर

हो गया.‘तेरी रुपयों की हवस ने ही इन्हें मारा है… अगर तू उन खराब बसों को फिटनैस सर्टिफिकेट नहीं देता तो यह हादसा नहीं होता… तू ने ही अपने बेटे को जख्मी कर मौत के हवाले कर दिया है. तू ही कातिल है इन सब मासूम बच्चों का…’सुनील की पैसे की हवस जैसे पिघल कर उस की आंखों से बह रही थी.

भूखे बच्चों की मां के आंसू बताते हैं कि बिहार में बहार नहीं सिर्फ हाहाकार है!

सितंबर का महीना वास्तव में भर-भर के सितम लेकर आया. खासकर के बिहार वासियों के लिए. पहले तो बारिश हुई नहीं और जब हुई तो ऐसी हुई कि बिहार की राजधानी पटना का 90 फीसदी हिस्सा जलमग्न हो गया. कौन मंत्री, कौन संत्री, कौन ब्यूरोक्रेट कोई नहीं बच पाया.

जिस वक्त बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी आधे पानी में डूबकर घर से बाहर निकलने की जद्दोजहद कर रहे थे उसको देखकर लग गया कि सरकार भी आधी डूब गई. हालांकि वो ठहरे सियासतदान. उनके लिए आनन-फानन व्यवस्थाएं की गई. जल्द से जल्द उनको पानी से बाहर सुरक्षित स्थान ले जाया गया. अब यहां थोड़ा जिक्र कर लेते हैं सुशासन बाबू की.

जी हां बिहार के सीएम नीतीश कुमार जिनको जनता ने सुशासन बाबू का खिताब दिया हुआ है. लालू के कुशासन से त्रस्त जनता से नीतीश कुमार को प्रदेश की कमान सौंप दी. नीतीश कुमार ने जनता के भरोसे को टूटने भी नहीं दिया. उसी का नतीजा है नीतीश कुमार लगातार तीसरी बार बिहार के मुख्यमंत्री बने हैं. सुशासन बाबू के प्रदेश में कानून व्यवस्था तो सुधरी लेकिन नहीं सुधरा तो बिहार का इंफ्रास्ट्रक्चर. उसी का परिणाम है कि सरकार के नंबर दो सुशील मोदी को पानी में डूबकर घर से बाहर निकलना पड़ा.

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जरा अब बात कर लेते हैं कि आखिरकार बार-बार ऐसा क्यों होता है. क्यों राजधानी पटना का ये हाल बना हुआ है. सुशासन बाबू ग्रह-नक्षत्रों को क्यों दोष दे रहे हैं. क्यों नहीं सुशासन कुमार इस बात से ताल्लुक रखते कि उनसे गलती हुई. जब तक एक इंसान ये स्वीकार नहीं करेगा कि उससे गलती हुई, तब तक वो उसको कैसे सुधारेगा. आज भी पटना की आधी आबादी को साफ पानी मुहैया नहीं हो पा रहा है.

लोग पानी के लिए तसर रहे हैं. बच्चों को दूध नहीं मिल रहा. घरों का सामान सड़ रहा है लेकिन माननीय मुख्यमंत्री जी पहले तो हवाई दौरा किया. उसके बाद 19 लग्जरी गाड़ियों का काफिला लेकर बाढ़ के हालात देखने निकले. सीएम के काफिले को देखकर लगा नहीं कि सीएम साहब वाकई पीड़ितों का दर्द बांटने आए हैं. जो तस्वीरें हमने देखी उसमें तो ऐसा लगा कि मानों सीएम साहब शक्ति प्रदर्शन कर रहे हों.

फिलहाल बारिश थम गई है. सोमवार को कभी-कभी सिर्फ बूंदाबांदी ही हुई. कुछ ऊंचे इलाकों से पानी हटा भी है. मगर अभी भी निचले इलाकों राजेंद्र नगर, कदमकुआं, पटना सिटी, कंकड़बाग और इंद्रपुरी-शिवपुरी में लाखों की आबादी जलजमाव में फंसी है. लेकिन बुधवार को फिर से मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया. यानी फिर मूसलाधार बारिश का अनुमान लगाया जा रहा है.

सरकार, प्रशासन की भूमिका और “राहत तथा बचाव” कार्यों की है तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसे नेचर (प्रकृति) से उत्पन्न आपदा मान चुके हैं, प्रशासन की विफलता इस बात से भी स्पष्ट हो जाती है कि राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और बिहार कोकिला कही जाने वालीं पद्मश्री गायिका शारदा सिन्हा जैसी बड़ी हस्तियों को तीन दिन बाद पानी से निकाला जा सका. ऐसे में आम आदमी की बात ही करना बेमानी सा लगता है. क्योंकि लाखों की आबादी जो अपने घरों में फंसी है, उसके लिए एनडीआरएफ़ की महज़ 33 नौकाएं ही काम कर रहे हैं.

यहां पर बड़ा सवाल ये है कि आखिरकार महज चार या पांच दिन की बारिश में ही पूरा पटना कैसे जल मग्न हो गया. लोग इसकी तुलना 1967 में आई प्रलयंकारी बाढ़ से करने लगे हैं. हालांकि वो बाढ़ नदियों के बढ़े जलस्तर और बांधों के टूटने के कारण आई थी. लेकिन इस बार तो ना कहीं बांध टूटे, ना कहीं नदी के उफ़ान से बाढ़ आया. 72 घंटों के दौरान करीब 300 मिमी की बारिश हुई. और इतने में ही पूरा पटना शहर डूब गया. ऐसा भी नहीं कि पटना में पहले कभी इतनी बारिश नहीं हुई, मुहल्लों में जलभराव नहीं हुआ, पर पटना के रहने वाले कह रहे हैं कि उनके जीवनकाल में ऐसे हालात कभी नहीं पैदा हुए.

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सिलसिलेवार तरीके से हम बताते हैं कि आखिरकार ऐसा हुआ कैसे. पटना में जलप्रलय का पहला कारण तो ये कि शहर की ड्रेनेज व्यवस्था पूरी तरह फेल हो गई है. इसके ज़िम्मेदार पटना नगर निगम और बुडको दोनों है. दोनों में कोई समन्वय ही नहीं है. पटना को स्मार्ट सिटी का रूप दिया जा रहा है जिसकी वजह से जगह-जगह पर सड़कें खुदी हुई पड़ी हैं. खुदी हुई मिट्टी और कूड़ा करकट के अंबार ने ड्रेनेज को ब्लौक कर दिया है. पाइपों में मिट्टी भर गई है और कई जगह तो वो डूब ही गए हैं.

दूसरा कारण ये कि जिन नदियों में बारिश का पानी छोड़ा जाता है वे पहले से खतरे के निशान से ऊपर बह रही थीं. पानी का प्रेशर इतना बढ़ गया था कि सारे ड्रेनेज पहले से बंद कर दिए गए था. इसलिए पानी कहीं जा नहीं सका. पटना से सटे दीघा में गंगा नदी अपने 44 साल के जलस्तर के रिकार्ड को पार कर 50.79 मीटर पर आ गया है जो अभी तक के रिकौर्ड स्तर से महज़ 1.07 मीटर ही कम है. इसका प्रमुख कारण है सहयोगी नदियों पुनपुन, सोन और गंडक का जलस्तर, जो ख़तरे के निशान को पार कर चुका है.

तीसरा कारण है राहत बचाव कार्यों के नाकाफी इंतजाम. सीएम नीतीश कुमार बिहार में पिछले 15 सालों से सरकार चला रहे हैं वो इस बात को बोलकर नहीं बच सकते कि ये हथिनी नक्षत्र की वजह से हो रहा है. आपको ये मानना पड़ेगा कि पहले से कोई तैयारी नहीं थी. पूरा सिस्टम सूखे से निपटने की योजना बनाने में लगा था. कल्पना की जा सकती है कि जब इतनी बड़ी आबादी पानी में घिरी है, तब केवल 33 बोट ही राहत और बचाव कार्य में लगे हैं.

राहत और बचाव कार्यों में सुस्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर के एक बड़े इलाके राजीव नगर, इंद्रपुरी, शिवपुरी, पाटलिपुत्र कौलोनी जहां करीब एक लाख की आबादी फंसी है वहां तीसरे दिन एक बोट उपलब्ध कराई जा सकी. बीबीसी की एक रिपोर्ट में पता चलता है कि प्रशासन की तरफ से जो राहत और क्विक रिस्पांस टीम के नंबर जारी किए गए हैं, उनपर फोन नहीं लग रहा. अगर कहीं लग भी रहा है तो कोई रिस्पांड नहीं कर रहा.

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चौथा और सबसे अहम कारण है कि सरकारी सिस्टम इस बारिश का आकलन करने में पूरी तरह विफल रहा. पहले तो सब सूखे के इंतजार में आंख मूंद कर सोए रहे. और जब बारिश शुरू हुई तो उसकी भयावहता का अंदाजा नहीं लगा सके. बारिश छूटने का इंतजार होता रहा.

पांचवा कारण वही है जो मुख्यमंत्री ने कहा है. इस हालात लेकर बोली गई उनकी बात से ऐसा लगता है जैसे सरकार ने अपने हाथ खड़े कर दिए हो. पटना को स्मार्ट सिटी बनाने का ख्वाब देख रही सरकार 300 मिलीमीटर वर्षापात से जमा पानी भी निकाल पाने में अक्षम है.

बिहार में एक बात तो है. शासन और प्रशासन में एक समानता देखी जा रही है. दोनों के मुंह से एक ही बयान सामने आ रहा है कि ये प्राकृतिक आपदा है ये पहले से बताकर नहीं आती. ये बात सबको पता है कि प्राकृतिक आपदा पर किसी का जोर नहीं है लेकिन अगर महज बारिश के बाद जलभराव से ये नौबत आ जाए कि 40 से 50 लोगों की मौत हो जाए तो आपको जवाब देना पड़ेगा. अगर आपकी बात मान भी ली जाए तो क्या फानी तूफान आने के बाद भी हम हाथ पर हाथ रखे बैठे रहते और इंतजार करते कि आपदा का. फिर लाशें गिनते फिर उनकी कीमतें लगा देते.

चक्रवाती तूफान फानी से निपटने के भारत के प्रयासों की संयुक्त राष्ट्र ने सराहना की थी. संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि भारतीय मौसम विभाग की सटीक और अचूक भविष्यावाणी से फानी से कम से कम नुकसान हुआ. दुनिया भर की प्राकृतिक आपदाओं पर निगाह रखने वाली संयुक्त राष्ट्र की ‘डिजास्टर रिडक्शन’ एजेंसी यूएन औफिस फौर डिजास्टर रिडक्शन (UNISDR) ने कहा कि भारत के मौसम विभाग ने लगभग अचूक सटीकता के साथ फानी चक्रवात के बारे में जानकारी दी, इसका नतीजा ये हुआ कि सरकारी विभागों को लोगों को फानी के प्रभाव में आने वाले इलाके से निकालने के लिए पूरा वक्त मिला. इसके तहत 10 लाख से ज्यादा लोगों को आपदा राहत केंद्रों में ले जाया गया.

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