Saras Salil Bhojpuri Cine Award: भोजपुरी एक्टर देव सिंह बनें ‘बेस्ट पौपुलर विलेन औफ द ईयर’

भोजपुरी सिनेमा में अपने दमदार रोल और संवाद अदायगी से अलग पहचान बनाने वाले देव सिंह को सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड-2020 में बेस्ट पॉपुलर विलेन ऑफ़ द ईयर से नवाजा गया. यह अवॉर्ड उन्हें बॉलीवुड भोजपुरी और छोटे पर्दे के जानेमाने अभिनेता राजप्रेमी के हाथों मिला.

इन फिल्मों के लिए मिला अवॉर्ड…

अवॉर्ड की ज्यूरी नें देव सिंह की फिल्म स्पेशल एनकाउंटर, राजतिलक, छलिया और कुली फिल्मों में उनके द्वारा किये गए यादगार रोल के लिए इस अवॉर्ड के लिए चुना. ज्यूरी वर्ष 2020 में प्रदर्शित 40 फिल्मों में भोजपुरी के लीड विलेन की फिल्मों को शामिल किया गया था लेकिन ज्यूरी द्वारा इस कैटेगरी के लिए देव सिंह को सबसे ज्यादा अंक मिले.

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जिन फिल्मों के आधार पर देव सिंह को यह अवॉर्ड मिला उसमें फिल्म स्पेशल एनकाउंटर में देव सिंह नें बाबा राघवेंद्र का कैरेक्टर निभाया है. फिल्म में देव सिंह का कैरेक्टर “बाबा राघवेंद्र” हर समय पुजारी के भेष में रहता है जिसका बहुत आतंक है. बाबा राघवेंद्र अपने इलाके के थाने में आने वाले हर ईमानदार पुलिस वाले की हत्या करवा देता है. इसलिए उससे निपटने वहां स्पेशल टास्क फोर्स जाती है. जिसे राकेश मिश्र भी जॉइन करते हैं. राकेश इस फिल्म में अपने परिवार और प्यार को खो देने के बाद दोषियों से बदला लेने की कहानी दिखाया गया है.

स्पेशल एनकाउंटर का निर्माण अमन फ़िल्म सिने विजन के बैनर तले किया गया है. फिल्म का निर्देशन अरुण राज नें किया है निर्माता गणेश गुप्ता और नंदलाल यादव हैं. फिल्म का छायांकन आर आर प्रिंस का है. फिल्म की मुख्य भूमिका में राकेश मिश्रा, देव सिंह गणेश गुप्ता, ऋतु सिंह, अनूप अरोरा सीमा सिंह है

वहीं ज्यूरी ने फिल्म राजतिलक में भी देव सिंह ने विलेन के रूप में सबसे ज्यादा नम्बर दिए. ज्यूरी ने उनकी फिल्म छलिया में निभाये गए भ्रष्ट पुलिस अफसर के रोल को भी सराहा. इन फिल्मों में विलेन के रूप में उनकी दमदार एक्टिंग के आधार पर बेस्ट पॉपुलर विलेन ऑफ़ द ईयर-2020 की कैटेगरी के लिए उनके नाम को चुना गया. अवॉर्ड मिलने के बाद देव सिंह नें सरस सलिल को धन्यवाद देते हुए इस पहल की सराहना की.

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देव सिंह नें जिन फिल्मों में निगेटिव रोल में यादगार फिल्में की हैं उनमें मैं सेहरा बांध के आऊंगा में बबुआ जी का रोल, डमरू में विधायक जी, राजतिलक के कॉट्रेक्टर, रब्बा इश्क ना होवे का शंकर सिंह, राजा जानी का विक्रम, स्पेशल एनकाउंटर का राघवेन्द्र का रोल यादगार रहा है जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया है. रिलीज हो चुकी फिल्मों में मैं सेहरा बांध के आऊंगा, भाई जी, बजरंग, इंडियन मदर, मोकामा जीरो किलोमीटर, जिगर, लागी नहीं छूटे रामा,  रब्बा इश्क न होवे,  डमरू, पवन राजा , राजा जानी, संघर्ष,  निरहुआ चलल ससुराल 2,  पत्थर के सनम,  राज तिलक,  लल्लू की लैला,  स्पेशल इनकाउंटर,  कुली नंबर, जिद्दी, है. जब की जो अभी रिलीज होने वाली हैं उनमें प्रतिबन्ध, यारा तेरी यारी, जय शम्भू, नाम बदनाम, हीरो हैंडसम, विजेता, मजनुआ, पगलू, छलिया प्रमुख हैं.

Saras Salil Bhojpuri Cine Award: धामा वर्मा बने बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर औफ द ईयर

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में आयोजित सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड के पहले सीजन में विभिन्न श्रेणियों में भोजपुरी अभिनताओं को सम्मानित किया गया. 20 फरवरी 2020 को बादशाह टावर में आयोजित हुए इस अवॉर्ड समारोह में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर ऑफ़ द ईयर-2020 का अवॉर्ड जाने माने चरित्र अभिनेता धामा वर्मा को दिया गया.

यह अवॉर्ड उन्हें वर्ष 2019 में प्रदर्शित हुई फिल्म क्रैक फाइटर और बब्बर में किये गये यादगार अभिनय के लिए दिया गया. इस फिल्म में उन्होंने दर्शकों पर अपने अभिनय के जरिये अमिट छाप छोड़ने में कामयाबी पाई थी. अवार्ड के लिए नामित ज्यूरी नें इनकी दोनों फिल्मों में किये अभिनय के आधार पर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर ऑफ़ द ईयर-2020 के लिए चुना.

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गौतम घोष के निर्देशन में बनी फिल्म पतंग से अपने अभिनय की शुरुआत करने वाले धामा का उस फिल्म में उल्लेखनीय रोल रहा था. इस फिल्म में धामा के साथ मुख्य भूमिका में शबाना आजमी, ओमपुरी, मोहन अगासे और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे दिग्गज कलाकारों की पूरी टीम थी. उन्होंने पहली फिल्म में ही अमिट छाप छोड़ने में सफलता पाई थी.

इसके बाद उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में अभिनय की तरफ रुख किया और कई फिल्मों में यादगार भूमिकाएं कर दर्शको के दिल में आसानी से जगह बनाने में कामयाबी पाई. उनकी प्रमुख भोजपुरी फिल्मों में राजा भोजपुरीया, निरहुआ चलल ससुराल, हमार वियाह तोहरे से होई, श्रीमान् ड्राइबर बाबु, कानून हमरा मुट्ठी में, प्रेम के रोग भईल, दाग, लड़ाई ल अखियां ऐ लौन्डे राजा, आज के करण अर्जुन, लोफर, जान तेरे नाम और सस्ता जिनगी मंहगा सेनुर में उनके अभिनय को आज भी याद किया जाता है. वर्ष 2020 में उनकी दमदार भूमिकाओं में दर्जनों फ़िल्में प्रदर्शन को तैयार हैं.

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सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड के दौरान स्टेज पर अवॉर्ड मिलने के बाद धामा वर्मा नें कहा की उनके अभिनय के करियर में यह पहला बड़ा अवॉर्ड है. उन्होंने कहा की इस अवॉर्ड के मिलने से मेरा हौसला बढ़ा है मेरी कोशिश रहेगी की मै दर्शकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरूं.

उन्होंने सरस सलिल पत्रिका में प्रकाशित होने वाले लेखों की भी जम कर तारीफ़ की और कहा की सरस सलिल नें समाज को नई दिशा देनें का काम किया है इस तेवर को सरस सलिल को ऐसे ही बनाए रखना होगा.

लड़की एक रात के लिए मिल रही है

‘हाय, मेरा नाम रानी है. मैं 19 साल की हूं और इंदौर में अकेली रहती हूं. क्या आप मेरे साथ सैक्स करना चाहेंगे? मेरा मोबाइल नंबर है 975519××××…’

हालांकि यह सब अंगरेजी में लिखा था, लेकिन मध्य प्रदेश के शाजापुर में रहने वाले 26 साला जितेंद्र रघुवंशी (बदला नाम) को पढ़ने में कोई दिक्कत नहीं हुई, क्योंकि वह 12वीं जमात पास था. नजदीक के एक गांव से शाजापुर आ कर बस गए इस नौजवान ने एक साल पहले स्मार्टफोन खरीदा था. मालदार किसान परिवार का होने की वजह से जितेंद्र को पैसों की कमी नहीं थी, इसलिए अपनी खादबीज की दुकान पर बैठाबैठा वह कालगर्ल ढूंढ़ने लगा और ढूंढ़ा तो हैरान रह गया. उसे ऐसा लगा, मानो इस दुनिया में ऐसी लड़कियों के अलावा कुछ है ही नहीं, जो कुछ हजार रुपयों के एवज में अपना जिस्म बेचती हैं और बाकायदा फोटो समेत इश्तिहार भी करती हैं. उन्हें अपना फोन नंबर देने में कोई हिचक नहीं होती और किसी का डर भी नहीं लगता.

आखिरकार हिम्मत कर के जितेंद्र ने दिए गए नंबर पर फोन किया, तो दूसरी तरफ से उम्मीद के मुताबिक एक लड़की की ही आवाज आई.

‘हैलो, कहिए?’ वह लड़की बोली, तो जितेंद्र सकपका गया और हड़बड़ाहट में बोला, ‘‘मैं ने इंटरनैट पर देखा, तो सोचा…’’

‘सोचा क्या, आ ही जाइए. रानी आप की खिदमत में हाजिर है. 2 घंटे के 2 हजार और पूरी रात के 20 हजार रुपए चार्ज है. बताइए, कब और कहां मिलूं? आप जैसे चाहें मेरे साथ सैक्स कर सकते हैं. मैं बहुत ऐक्सपर्ट हूं.’

जितेंद्र अचानक मिली इस दावत से घबरा सा उठा और बोला, ‘‘मैं कल फोन करूंगा…’’

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‘ओके स्वीटहार्ट, जब मरजी हो बता देना. रानी हमेशा तुम्हारी खिदमत में हाजिर मिलेगी. जैसे चाहोगे वैसे सैक्स करेगी और जन्नत का मजा देगी.’ फोन काट कर जितेंद्र गटागट 3 गिलास पानी पी गया और कुछ देर बाद रानी की मीठी बातों के जाल से निकला, तो उसे समझ आया कि कहीं कोई फर्जीवाड़ा या खतरा नहीं है, बस एक बार बात कर के इंदौर जाने की देर है, फिर तो मजे ही मजे हैं. जितेंद्र ने जैसेतैसे 3 दिन काटे, फिर उसी नंबर पर फोन किया, तो उसी लड़की की आवाज आई, ‘बड़ी देर कर दी जानेमन, बोलो…’

‘‘कहां मिलोगी?’’ जितेंद्र ने पूछा.

‘जहां तुम कहो…’ वहां से मधुर आवाज आई.

‘‘कल दोपहर 12 बजे मिलो, सरवटे बसस्टैंड पर.’’

‘ओके, मैं… कौफी हाउस में बैठी मिलूंगी, गुलाबी रंग के सूट में रहूंगी.’ अगले दिन जितेंद्र इंदौर जा पहुंचा और रानी के बताए कौफी हाउस में पहुंचा, तो देख कर हैरान रह गया कि सचमुच कोने वाली सीट पर गुलाबी सूट पहने एक खूबसूरत सी लड़की कोल्ड कौफी की चुसकियां ले रही थी. जितेंद्र उस से मुखातिब हो पाता, उस के पहले ही उस ने उंगलियों से इशारा कर उसे बुलाया. जाहिर है कि वह अपने ग्राहक को पहचान गई थी. जितेंद्र उस के सामने जा कर बैठ गया और बातचीत करने लगा.

रानी 2 घंटे के 2 हजार रुपए ही लेगी. जगह उस की रहेगी, पर कौफी हाउस में खिलानेपिलाने, आटोरिकशा वगैरह के सारे खर्च वह खुद उठाएगा.

‘‘ठीक है,’’ जितेंद्र उस के उभारों पर से नजर हटाते हुए थूक निगल कर बोला.

‘‘तभी इतने नर्वस हो रहे हो. चलो, रास्ते में बीयर या ह्विस्की कुछ ले लेते हैं. दोनों साथ बैठ कर पीएंगे, तो ज्यादा मजा आएगा और तुम्हारी यह ख्वाहिश भी पूरी हो जाएगी,’’ रानी बोली.

ऐसा हुआ भी. बसस्टैंड से आटोरिकशा कर के जितेंद्र रानी के साथ वहां से तकरीबन 16 किलोमीटर दूर एक बड़े अपार्टमैंट्स के उस के फ्लैट पर पहुंचा. वहां कोई नहीं था. अंदर दाखिल होते ही रानी ने दरवाजा बंद किया और बोली, ‘‘चलो, हो जाओ शुरू…’’

‘‘पर बीयर तो ले ही नहीं पाए,’’ जितेंद्र ने कहा.

‘‘सब है यहां, बस पैसे तुम देना…’’ फ्रिज से बीयर की बोतलें और गिलास निकालते हुए रानी ने शोख आवाज में जवाब दिया. 2 घंटे बाद जितेंद्र उसे पैसे दे कर उस फ्लैट से बाहर निकला, तो उस के पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे. वाकई रानी ने उसे मजा दिया था. हालांकि शराब के एक हजार रुपए अलग से रखवा लिए थे. जितेंद्र को इस का कोई मलाल नहीं था. 2 घंटे के दौरान किसी ने कोई दखल नहीं दिया था. रानी ने अपना फोन बंद कर लिया था और जितेंद्र का भी बंद करा दिया था, लेकिन जाते समय उस ने जितेंद्र को अपना पर्सनल नंबर दे दिया था कि फिर कभी मूड हो तो इस नंबर पर ही फोन करना. जितेंद्र ने अलगअलग फोन नंबरों के घालमेल से ज्यादा सिर नहीं खपाया और इस के बाद 2 बार और इंदौर गया, तो रानी से उस के पर्सनल नंबर पर बात कर सीधे उस के फ्लैट पर जा पहुंचा और जम कर मौजमस्ती की.

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स्मार्टफोन ने बदला चलन

अब तकरीबन हर हाथ में स्मार्टफोन है, जिस में हर तरह की जानकारियां बहुत सस्ते में मिल जाती हैं. कालगर्ल की जानकारी भी इन में से एक है. स्मार्टफोन आने से पहले देह का कारोबार पुराने तरीके से चलता था. इंदौर की ही मिसाल लें, तो वहां का बंबई बाजार कभी देह धंधे के लिए जाना जाता था. वहां कोठे थे. जितेंद्र की तरह लोग आते थे, लेकिन मनपसंद कालगर्ल ढूंढ़ने में उन्हें परेशानी होती थी. 2-4 कोठों पर धक्के खाने के बाद या तो मनपसंद कालगर्ल ग्राहक को मिल जाती थी या थकहार कर ग्राहक ही किसी को अपनी पसंद बना लेता था. लेकिन बंबई बाजार जैसी बदनाम जगहों का माहौल लोगों को रास नहीं आता था. शराब की बदबू होती थी. खिड़की और दरवाजों से झांकती लड़कियां भद्दे इशारे कर के ग्राहकों को बुलाती थीं. कई दफा तो हाथ पकड़ कर अंदर खींच लेती थीं. उन की ज्यादतियों से बचने के लिए ग्राहक दलाल का सहारा लेते थे. स्मार्टफोन ने देह धंधे के इस चलन में भारी बदलाव कर दिए हैं. अब दलाल भी कालगर्लों की तरह हाईफाई हो गए हैं. बंबई बाजार टुकड़ेटुकड़े हो कर पूरे इंदौर में चारों तरफ फैल गया है. हर चौथे अपार्टमैंट्स में एक रानी है. जब किसी जितेंद्र का फोन आता है, तो वह मेकअप कर के तैयार हो जाती है. जानपहचान वाला न हो, तो जगह तय कर लेने भी पहुंच जाती है. लेकिन दलाल किसी को नजर नहीं आता.

पहली दफा जितेंद्र ने जिस नंबर पर फोन किया था, वह एजेंट का था. इस फोन नंबर पर शिफ्ट में लड़कियां बैठती हैं और ग्राहक से सैक्सी बातें करती हैं. ग्राहक का नंबर ले कर वे अपने पास रखी लिस्ट या फोन बुक में से किसी एक कालगर्ल का नंबर देख कर उसे बताती है. वह फ्री होती है, तो बातचीत का ब्योरा ग्राहक को दे दिया जाता है और तगड़ा कमीशन ले लिया जाता है. यह ऐस्कौर्ट सर्विस देश के हर बड़े शहर में मौजूद है. भोपाल में ऐस्कौर्ट सर्विस से जुड़े एक मुलाजिम ने बताया कि स्मार्टफोन वालों के लिए उन की एजेंसी इंटरनैट पर तमाम जानकारियां डालती है. वे कई नामों से वैबसाइट बनाते और चलाते हैं. उन्हें देख कर ग्राहक बातचीत करते हैं, तो अपने आसपास की किसी कालगर्ल को उस का नंबर दे देते हैं.

उस मुलाजिम के मुताबिक, अभी उन की लिस्ट में तकरीबन 2 हजार लड़कियों के नाम हैं, जिन में होस्टल में रह रही छात्राएं भी शामिल हैं. कुछ घरेलू औरतें भी हैं, लेकिन ज्यादातर पेशेवर कालगर्ल हैं. उस दलाल के मुताबिक, आजकल लड़कियों के पास खुद की जगह रहती है. इस में खतरा कम रहता है, क्योंकि वे रिहायशी इलाकों में रहती हैं. लेकिन पड़ोसी हल्ला मचाने लगें और पुलिस वालों की नजर उन पर पड़ जाए, तो वे अपना ठिकाना बदल लेती हैं. उस दलाल की मानें, तो ज्यादातर लड़कियां ग्राहक से सीधे बात करने लगती हैं, तो नुकसान दलाल का होता है, क्योंकि उन्हें जमाने में दलाल का बड़ा हाथ रहता है. शुरू में दलाल उन्हें प्यार से ऊंचनीच समझाते हैं. अगर वे नहीं मानतीं, तो एकाध दफा गुंडे या पुलिस वालों के हाथों फंसवा देते हैं. उस के बाद वे कभी झंझट नहीं करती हैं. इस से हर बार दलाल को कमीशन मिलता रहता है. हालफिलहाल तो भोपाल जैसे शहरों में भी ऐस्कौर्ट सर्विस वाले 5-6 लाख रुपए हर महीना कमा रहे हैं, जो 8-10 मुलाजिमों के बीच बंट जाता है. सभी को काम और ओहदे के मुताबिक तनख्वाह मिलती है.

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कंप्यूटर पर साइट्स बनाने और लोड करने वाले इंजीनियर को 15-20 हजार रुपए, स्मार्टफोन पर बात करने वाली कालगर्ल को 10-12 हजार और कारोबार को बढ़ाने वाली मुलाजिमों को 20-25 हजार रुपए महीना तनख्वाह मिलती है. सब से बड़ा हिस्सा बौस की जेब में तकरीबन 3 लाख रुपए जाता है.

घाटे में पुलिस वाले

स्मार्टफोन पर देह धंधे के चलन से बड़ा नुकसान पुलिस वालों का हुआ है. अब तो इन के मुखबिर भी नहीं बता पाते हैं कि कौन कहां धंधा कर रहा है. अब तो कालगर्लें भी कहने लगी हैं कि वे बालिग हैं, किसी के साथ हमबिस्तरी करें, यह मरजी की बात है. लिहाजा, पुलिस वाले कसमसा कर रह जाते हैं. जबरदस्ती करें, तो बेवजह हल्ला मचता है. गिरोह बना कर इंटरनैट पर इस कारोबार को बढ़ावा दे रही ऐस्कौर्ट एजेंसियां भी पुलिस की पकड़ और पहुंच से दूर हैं. वे भी अपना पताठिकाना और फोन नंबर बदलती रहती हैं. सीधेसीधे कहा जाए, तो अब हो यह रहा है कि जितेंद्र जैसे ग्राहक स्मार्टफोन पर ऐसी एजेंसी को ढूंढ़ते हैं और बगैर किसी सिरदर्द के अपनी ख्वाहिश और जरूरत पूरी कर लेते हैं. हालांकि इस से उन का खर्च बढ़ा है, लेकिन इज्जत बनी रहती है और हिफाजत की भी गारंटी रहती है. अब कालगर्लों के पास ग्राहक के नामपते और फोन नंबर वाली डायरी नहीं होती. स्मार्टफोन की फोन बुक होती है, जिस में पासवर्ड डाल दो, तो कोई दूसरा इस को नहीं खोल सकता.

ग्राहक भी फायदे में हैं. जितेंद्र जैसे ग्राहकों को ब्लू फिल्में, सीधे कालगर्ल से चैटिंग और अब वीडियो चैटिंग की सहूलियत, जब भी जोश दिलाती है, तो वे भागते हैं किसी रानी की तरफ, जो उन्हें संतुष्ट करने में माहिर होती है.

मर्द भी मिलते हैं

स्मार्टफोन अब औरतें भी खूब इस्तेमाल करती हैं. लिहाजा, ‘पुरुष वेश्याओं’ की भी मांग बढ़ रही है. ऐस्कौर्ट सर्विस के कर्ताधर्ता अपनी इंटरनैट साइट पर बिकाऊ मर्दों की जानकारी और फोन नंबर भी डालने लगे हैं, जिस से सैक्स की जरूरतमंद औरतें फोन कर के अपनी जिस्मानी भूख मिटा सकती हैं.

ऐस्कौर्ट सर्विस के एक दलाल के मुताबिक, मर्दों के दाम औरतों से ज्यादा होते हैं. वजह, उन की मांग ऊंचे तबकों की औरतों में ज्यादा है. उम्रदराज कुंआरियां, विधवाएं और पति द्वारा छोड़ दी गई औरतों के अलावा पति से नाखुश औरतें भी ऐसे मर्दों की सर्विस लेती हैं. उन्हें 5 हजार रुपए आसानी से मिल जाते हैं. अगर औरत को उन के मुताबिक खुश कर दें, तो 5 के 50 हजार रुपए भी झटक लेते हैं.

सोशल साइटों पर यह धंधा खूब फलफूल रहा है. विदिशा, मध्य प्रदेश के नजदीक गंजबासौदा कसबे का एक बेरोजगार नौजवान एस. कुमार बताता है कि उस ने फर्जी नाम से फेसबुक पर अकाउंट खोला और यह मैसेज डालना शुरू कर दिया कि जो भाभियां, आंटियां अपने पतियों से संतुष्ट नहीं होतीं, वे उस से बात कर सकती हैं. यह नौजवान फेसबुक में चुनचुन कर उम्रदराज औरतों को फ्रैंड रिक्वैस्ट मैसेज कर अपना फोन नंबर दे देता है.

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देखते ही देखते उस की कई फ्रैंड बन गईं और इनबौक्स में जा कर सैक्सी बातें करने लगीं. कुछ ने उसे बुलाया भी. इस नौजवान ने हालांकि अभी 50-60 हजार रुपए ही इस धंधे से कमाए हैं, लेकिन वह स्मार्टफोन का शुक्रगुजार रहता है कि इस की वजह से उसे पैसा मिल रहा है और मजा भी.

अपना एक किस्सा सुनाते हुए वह कहता है कि गुना की एक सरकारी स्कूल की टीचर ने उस से दोस्ती की और बताया कि उस का पति ढीला है. अगर तुम गुना आ कर सैक्स करो, तो मैं आनेजाने का खर्च और 2 हजार रुपए दूंगी. वह नौजवान वहां गया और उसे संतुष्ट कर आया.

ब्लू फिल्मों का खजाना

स्मार्टफोन का इस्तेमाल देह धंधे से ज्यादा ब्लू फिल्में और अश्लील साइटें देखने में हो रहा है. ‘अंतरवासना’ इस में सब से ज्यादा देखी और पढ़ी जाने वाली साइट है. इस साइट पर सैक्सी कहानियां होती हैं, जिन की मस्तराम छाप नीलीपीली किताबें 30 रुपए से सौ रुपए तक में बिका करती थीं, पर ‘अंतरवासना’ की एक और खूबी यह है कि रोज 2-3 कहानियां अपलोड होती हैं. यह साइट दावा करती है कि कहानियां पाठकों की खुद की लिखी होती हैं. इसी में हमबिस्तरी वाले वीडियो भी भरे पड़े हैं. आज से तकरीबन 15 साल पहले तक सिनेमाघर वाले पहले शो में दक्षिण भारत की फिल्में दिखाते थे, तो उन में 15-20 मिनट का एक टुकड़ा ब्लू फिल्म का भी जोड़ देते थे, जिस पर खूब हल्ला मचता था. अकसर आबकारी महकमा छापा मार कर दर्शकों की नाक में दम कर देता था और सिनेमा मालिक को ऐसी फिल्में चलाने पर भारीभरकम घूस देनी पड़ती थी.

अब तो ‘सविता भाभी डौट कौम’ जैसी दर्जनों साइटें ये नजारे आसानी से दिखा रही हैं, वह भी सिर्फ 250 रुपए महीने में. गांवदेहातों में इन साइटों की मांग तेजी से बढ़ रही है. यहां के लोग मनपसंद गोरी देशीविदेशी कालगर्ल को देख कर सैक्स की अपनी जिस्मानी भूख मिटा रहे हैं. मिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती, कन्नड़ वगैरह भाषाओं में भी ऐसी फिल्मों की डबिंग की जाती है.

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इस बार की होली मनेगी किशमिश भौजी के साथ

किशमिश भौजी को भूले तो नहीं न? अरे वही भौजी जो मशहूर भोजपुरी शो ‘बगल वाली जान मारे ली’ (Bagal Wali Jaan Mare Li) में अपनी अदाओं से न जाने कितनों को घायल कर चुकी थीं. अब भौजी यानी गुंजन पंत (Gunjan Pant) एक बार फिर से छोटका परदा यानी टीवी पर वापसी कर रही हैं, वह भी रंगों के त्‍योहार होली (Holi) में. इस बार वे मुहब्‍बत का रंग ले कर जम कर गुलाल मलेंगी अपने नए शो ‘बरसेला रंग फगुनवा में’ (Barsela Rang Fagunwa Me).

दमदार किरदार

लोगों ने फेमस शो ‘बगल वाली जान मारे ली’ में गुंजन को किशमिश भौजी (Kishmish Bhauji) के किरदार में खूब पसंद किया था. तब अपनी अदायगी से उन्होंने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया था. अब दर्शकों के अनुरोध पर वे एक बार फिर होली में छोटे परदे पर आ रही हैं.

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डबल डोज होगा…

 

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Jald aa rahi hun ek baar fir “Big Ganga” channel pe,aapki “kishmish bhauji” ke roop mein…. Ayi ho dada😊

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‘बरसेला रंग फगुनवा में’ होली स्‍पैशल शो होगा और इस में भी गुंजन पंत किशमिश भौजी के रूप में ही नजर आएंगी.

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अपने नए शो को ले कर उत्‍साहित गुंजन पंत ने मीडिया से बातचीत में बताया, “बिग गंगा यह मौका दे रहा है कि मेरे चाहने वाले इस बार की होली मेरे साथ खेलें और तभी हम ‘बरसेला रंग फगुनवा में’ खास भोजपुरी के दर्शकों के लिए जम कर होली खेलने जा रहे हैं. इस शो में मनोरंजन का डोज डबल होगा.”

जरा ध्यान रखिएगा…

गुंजन पंत ने बताया, “इस शो में मेरी वापसी से पहले हालांकि मैं कई फिल्मों में भी व्यस्त रही हूं. लेकिन यह मेरे लिए खुशी की बात है कि मेरे दर्शक मुझ से इतना प्यार करते हैं. मैं बिग गंगा की भी आभारी हूं जिन्होंने मुझे फिर से दर्शकों के मनोरंजन का मौका दिया.”

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तो फिर तैयार हो जाइए इस होली में अपनी प्यारी भौजी के साथ होली मनाने के लिए. पर ध्यान रखिएगा, भांगवांग पी पा कर रंग में भंग नहीं करिएगा, नहीं तो भौजी खूबे नाराज हो जाएंगी.

सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड: शुभम तिवारी नें ‘बेस्ट एक्टर इन सोशल इश्यू’ कैटेगरी में मारी बाजी

सरस सलिल द्वारा भोजपुरी सिनेमा के लिए शुरू किये गए भोजपुरी सिने अवार्ड के पहले संस्करण में जिन अभिनेताओं और फिल्मों को पुरस्कृत किया गया उन नामों में शामिल सुपरस्टार शुभम तिवारी को सामाजिक मुद्दों पर फिल्मों में अभिनय के लिए बेस्ट एक्टर इन सोसल इश्यू का अवार्ड दिया गया.

भोजपुरी सिने अवार्ड शो में पहुंचे शुभम तिवारी ने स्टेज से पर पहुंच कर दर्शकों का खूब मनोरंजन किया. उन्होंने अपने एक्टिंग से दर्शकों की खूब तालियां बटोरी. शुभम तिवारी ने बौलीवुड कलाकारों की मिमिक्री कर लोगों को हंसा हंसा कर लोटपोट कर दिया. उन्होंने गोविंदा, सनी देओल, नाना पाटेकर, अमिताभ बच्चन, सुनील शेट्टी, परेश रावल, सहित कई कलाकारों की नकल उतारी.

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इस दौरान जब मंच से ज्यूरी द्वारा शुभम तिवारी का नाम बेस्ट एक्टर ‘इन सोसल इश्यू अवार्ड’ के लिए पुकारा गया तो दर्शकों की तालियां थमने का नाम नहीं ले रहीं थी. उन्हें यह अवार्ड फिल्म ‘बलमा डेरिंगबाज’ में ससक्त अभिनय के लिए दिया गया. यह फिल्म दिसंबर 2019 में प्रदर्शित हुई थी जिसे दर्शकों नें खूब सराहा था. इस फिल्म में शुभम तिवारी के अपोजिट सोनालिका कुमारी की जोड़ी को खूब पसंद किया गया था.

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फिल्म का निर्माण एस एस सिने वर्ल्ड के बैनर तले किया गया था. फिल्म में शुभम तिवारी और सोनालिका कुमारी के आलावा अयाज खान, बालेश्वर सिंह , पंकज चंद्रा , बबलू खान आरती भर्गवा, नीलम सिंह परवेज हासमी स्वीटी सिंह, सहित अमियकर प्रकाश ठाकुर, जावेद हाशमी, मोहम्मद अली, संजय सिंह, पवन कुमार, श्वेता तिवारी, दिव्या शर्मा,  बेबी सिंह ने अभिनय किया है. फिल्म का निर्देशन जावेद हासमी और निर्माता शरद पाटिल हैं फिल्म का छायांकन जे शाहिल का और संगीतकार के. रत्नेश मिश्रा तथा गीतकार आज़ाद सिंह, अमिताभ रंजन, धनंजय भट्ट व श्याम देहाती हैं. यह फिल्म पारिवारिक मुद्दों पर आधारित रही जिसमें मार-धाड़ के साथ गीत-संगीत एक्शन का भी तड़का देखने को मिला था.

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भोजपुरी और बौलीवुड फिल्मों के स्टार रविकिशन के साथ ‘कानून हमरा मुट्ठी में’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाले शुभम तिवारी अब तक दर्जनों फिल्मों में लीड रोल में अपने अभिनय का जलवा दिखा चुके हैं. उन्होंने ‘तू ही मोर बलमा’, ‘भैया हमार दयावान’,’मल्ल युद्ध’, ‘कलुआ भईल सयान’, ‘प्रतिघात’, ‘अंतिम तांडव’, ‘लड़ब मरते दम तक’ , ‘सन्यासी बलमा’, ‘प्रशासन’, ‘बहुरानी’ , ‘इलाहाबाद से इस्लामाबाद’, सहित कई हिट फिल्में की हैं उन्होंने नागपुर यूनिवर्सिटी से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री भी ले रखी है.

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अवार्ड शो के दौरान उन्होंने कहा की, “सरस सलिल आम लोगों की आवाज है जिसके जरिये लोग अपनी बात लोगों तक पहुंचाते हैं, ऐसे में सरस सलिल ने भोजपुरी सिने अवार्ड की शुरुआत कर ऐतिहासिक पहल की है. इस पहल से भोजपुरी सिने जगत को वैश्विक लेवल पर पहचान मिलेगी. उन्होंने कहा की सरस सलिल उत्तर प्रदेश और बिहार में सर्वाधिक पढ़ी जाने वाली पत्रिकाओं में शुमार हैं. ऐसे में सरस सलिल पत्रिका के जरिये भोजपुरी आम दर्शकों तक पहुंचनें में सफल होगा.” उन्होंने आने वाले वर्षों में सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड को राष्ट्रीय लैवल पर आयोजित किये जाने की अग्रिम शुभकामनाएं भी दीं.

बेस्ट सोसल इश्यू अवार्ड के लिए नामित फिल्म बलमा डेरिंगबाज का ट्रेलर लिंक –

बहुरानी फिल्म का ट्रेलर लिंक –

प्रशासन फिल्म का ट्रेलर लिंक –

इलाहाबाद से इस्लामाबाद ट्रेलर लिंक –

शहनाज गिल से शादी करने आए कंटेस्टेंट ने कहा, आप मुझे पसंद नहीं आई

शहनाज गिल (Shehnaz Gill) बिग बौस (Bigg Boss) के बाद अब शो मुझसे शादी करोगे (Mujhse Shaadi Karoge) में नजर आ रही हैं. इस शो में वह अपने लिए दूल्हा ढूंढ रही हैं. लेकिन हाल ही में शो में एक कंटेस्टेंट ने शहनाज के साथ खूब बहस की. दरअसल, कंटेस्टेंट मयंक अग्निहोत्री (Mayank Agnihotri) और शहनाज के बीच खूब बहस हुई. इतना ही नहीं, इस दौरान मयंक ने ये तक कह दिया कि उन्हें शहनाज पसंद नहीं आई हैं. मेकर्स ने शो का प्रोमो शेयर किया है जिसमें शहनाज कहती हैं, ‘यहां जितनी देर भी हो, इज्जत से रहो, नहीं तो गेट लोस्ट. यहां पर कौन्ट्रोवर्सी मत करो. जिस चीज के लिए यहां आए हो वो तो कर नहीं रहे.’

इसके बाद मयंक कहते हैं, ‘मैं यहाँ कोई कौन्ट्रोवर्सी नहीं कर रहा. ये मेरा एटीट्यूड है. मुझे आप पसंद नहीं आई.’ अब मयंक की इस बात को सुनने के बाद शहनाज क्या करेंगी ये तो आने वाले एपिसोड में देखने को मिलेगा.

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सिद्धार्थ शुक्ला से जुड़ी इस याद को शहनाज गिल ने जलाया…

शहनाज अभी भी कई बार कहती हैं कि वह सिद्धार्थ शुक्ला (Siddharth Shukla) से प्यार करती रहती हैं, लेकिन लास्ट के एपिसोड में शहनाज ने कुछ ऐसा किया था जिसे देखकर फैन्स चौंक गए थे. दरअसल, लास्ट के एक एपिसोड में शहनाज का दूल्हा बनने आए कंटेस्टेंट्स में से एक कंटेस्टेंट शहनाज को टेडी बियर गिफ्ट करता है जिसपर ‘सिडनाज’ (Sidnaz) का टैग लगा होता है. शहनाज को लेकर ये गिफ्ट पसंद नहीं आया और वह गुस्सा हो जाती हैं.

शहनाज उनसे कहती हैं, ‘जो आपने ये खेला ‘सिडनाज’, बहुत हो गए ड्रामे. आप जिस चीज के लिए आए हो उसके लिए आपको मेहनत करनी पड़ेगी.’

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सिद्धार्थ के साथ अपना रिश्ता बढ़ाना चाहती हैं शहनाज…

कुछ दिनों पहले एक इंटरव्यू के दौरान शहनाज ने सिद्धार्थ को लेकर कहा था, ‘मैं सिद्धार्थ से प्यार करती हूं और उनके साथ अपना रिश्ता आगे बढ़ाना चाहती हूं, लेकिन ये सब उन पर निर्भर करता है.’

शहनाज ने कहा था, ‘बिग बौस के घर में मेरी तरफ से एक तरफा प्यार ही दिखा है. मैं दूसरे का दिमाग नहीं पड़ सकती, लेकिन अपनी फीलिंग्स जरूर बता सकती हूं. अगर वह इस रिश्ते को बिग बौस के बाहर भी जारी रखना चाहेंगे तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है.’

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सुरेखा ने कायरव पर लगाया चोरी का इल्जाम, दादी ने नायरा को किया ब्लैकमेल

सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है (Yeh Rishta Kya Kehelata Hai) कि कहानी दिन ब दिन एक अलग ही मोड़ लेती दिखाई दे रही है. पिछले काफी दिनों से लव-कुश (Luv-Kush) की वजह से कार्तिक-नायरा (Kartik-Naira) काफी परेशान थे लेकिन अब लव-कुश की वजह से कायरव (Kairav) भी गलत रास्ते पर चल चुका है जिसके कारण अब कार्तिक-नायरा और भी ज्यादा परेशान हो गए हैं. बीते एपिसोड्स में आपने देखा कि कार्तिक (Mohsin Khan) और नायरा (Shivangi Joshi) गोयनका परिवार से दूर जाने का फैसला कर चुके हैं.

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सुरेखा ने लगाया कायरव पर चोरी का इल्जाम…

कार्तिक (Kartik) और नायरा (Naira) सिर्फ और सिर्फ त्रिशा (Trisha) को इंसाफ दिलाने के लिए अपना घर छोड़ रहे हैं क्योंकि बाकी सब इस केस को खत्म करना चाहते हैं ताकी उनकी और उनके परिवार की इज्जत समाज में बनी रहे. पिछले एपिसोड में आपने देखा कि सुरेखा (Surekha) कायरव (Kairav) पर चोरी का इल्जाम लगाती है जबकी चोरी कायरव ने नहीं बल्कि इस चोरी के पीछे भी लव-कुश (Luv-Kush) का ही हाथ है. कायरव पर चोरी का इल्जाम सुन सभी को झटका लगता है और कार्तिक-नायरा (Kartik-Naira) के तो जैसे पैरों के नीचे से जमीन ही निकल जाती है.

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दादी करेगी नायरा का ब्लैकमेल…

जैसा कि हम सब जानते हैं कि कार्तिक और नायरा गोयनका हाउस छोड़ चुके हैं और इसी के चलते नायरा अपने बेटे कायरव को छोड़ कर नहीं जाना चाहती थी पर वे कुछ नहीं कर सकती क्योंकि उसके लिए त्रिशा को भी इंसाफ दिलाना बेहद जरूरी है. आने वाले एपिसोड्स में कायरव अपने मम्मा पापा के जाने से काफी परेशान होने वाला है लेकिन फिर भी उसे अपनी गलती का एहसास नहीं होगा. इसी के चलते दादी भी कायरव को लेकर नायरा को ब्लैकमेल करने की कोशिश करेगी.

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नायरा और कार्तिक दिलाना चाहते हैं लव-कुश को सजा…

दादी नायरा से ये कहती दिखाई देगी कि उसे त्रिशा का साथ छोड़ कर ये केस यहीं खत्म कर देना चाहिए और अपने बेटे कायरव पर ध्यान देना चाहिए. शो में ऐसा देखने को मिलने वाला है कि नायरा दादी की ये बात मानने से बिल्कुल इंकार कर देगी और कार्तिक के साथ मिलकर लव-कुश के खिलाफ ठोस सबूत ढूंढेगी जिससे कि लव-कुश को उनके कीए की सख्त से सख्त सजा मिल सके.

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ये सब देख हम सब इस बात का अच्छे से अंदाजा लगा सकते हैं कि ये सब करना कार्तिक-नायरा के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं होने वाला. ऐसे में देखने वाली बात ये होगी कि क्या कार्तिक-नायरा मिलकर लव-कुश के खिलाफ सबूत इकट्ठा कर पाते हैं और त्रिशा को इंसाफ दिला पाते हैं या नहीं.

नौजवानों की उम्मीदें हेमंत सोरेन से

झारखंड के दूसरी बार मुख्यमंत्री बने युवा हेमंत सोेरेन से अगर किसी को बहुत ज्यादा उम्मीदें हैं, तो वे नौजवान और छात्र हैं, जो भाजपा राज में रोजगार और तालीम के बाबत हिम्मत हार चुके थे. इन्हीं नौजवानों के वोटों की बदौलत  झारखंड मुक्ति मोरचा यानी  झामुमो और कांग्रेस गठबंधन को विधानसभा चुनाव में बहुमत मिला है.

15 जनवरी, 2020 को रांची में हेमंत सोरेन से उन के घर मिलने वालों का तांता लगा हुआ था, जिन में खासी तादाद नौजवानों की थी. इन में एक ग्रुप ‘आल इंडिया डैमोक्रैटिक स्टूडैंट और्गेनाइजेशन’ का भी था.

इस ग्रुप की अगुआई कर रहे नौजवान शुभम राज  झा ने बताया कि 11वीं के इम्तिहान में मार्जिनल के नाम पर कई छात्रछात्राओं को फेल कर दिया गया है, जो सरासर ज्यादती वाली बात है.

शुभम राज  झा के साथ आए दिनेश, सौरभ, जूलियस फुचिक, घनश्याम, उषा और पार्वती ने बताया कि उन्हें मुख्यमंत्री से काफी उम्मीदें हैं कि वे उन की ऐसी कई परेशानियों को दूर करेंगे.

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हेमंत सोरेन को तोहफे में देने के लिए ये छात्र कुछ किताबें साथ लाए थे, क्योंकि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद ही उन्होंने कहा था कि उन्हें बुके नहीं, बल्कि बुक तोहफे में दी जाएं.

हेमंत सोरेन ने इन छात्रों की परेशानी संजीदगी से सुनी और तुरंत ही शिक्षा विभाग के अफसरों को फोन कर कार्यवाही करने के लिए कहा तो इन छात्रों के चेहरे खिल उठे कि अब एक साल बरबाद होने से बच जाएगा.

बातचीत में इन छात्रछात्राओं ने बताया कि उन्हें मुख्यमंत्री का किताबें व पत्रपत्रिकाएं पढ़ने और लाइब्रेरी खोलने का आइडिया काफी पसंद आया है और अब वे भी खाली समय में किताबें और पत्रपत्रिकाएं पढ़ेंगे.

नौजवानों पर खास तवज्जुह

मुख्यमंत्री बनते ही हेमंत सोरेन ने तालीम पर खास ध्यान देने की बात कही थी. यह बात किसी सुबूत की मुहताज नहीं कि  झारखंड तालीम के मामले में काफी पिछड़ा है. कई स्कूल तो ऐसे हैं, जहां या तो टीचर नहीं जाते या फिर छात्र ही जाने से कतराते हैं, क्योंकि स्कूलों में पढ़ाई कम मस्ती ज्यादा होती है.

हालात तो ये हैं कि झारखंड के 80 फीसदी स्कूलों की हालत हर लिहाज से बदतर है. चुनाव के पहले एक सर्वे में यह बात उजागर हुई थी कि कई स्कूलों के कमरे तो इतने जर्जर हो चुके हैं कि छात्रों को पेड़ों के नीचे बैठ कर पढ़ाई करनी पड़ रही है. ज्यादातर स्कूलों में शौचालय नहीं हैं और पीने के पानी तक का इंतजाम नहीं है.

इस बदहाली के बाबत जब हेमंत सोरेन से पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि इस बदइंतजामी को वे एक साल में ठीक कर देंगे. पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में स्कूलों और पढ़ाई की बुरी गत तो हुई है, जिसे जल्द ही दूर कर लिया जाएगा.

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इस के अलावा हेमंत सोरेन ने बताया कि नौजवानों को रोजगार मुहैया कराना हमारी प्राथमिकता है. इस बाबत भी कोई सम झौता नहीं किया जाएगा, क्योंकि एक वक्त में (जब  झारखंड बिहार में था) तब यहां के छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में टौप किया करते थे.

हेमंत सोरेन की लाइब्रेरी बनाने की मंशा यही है कि नौजवानों में किताबें और पत्रिकाएं पढ़ने की आदत फिर से बढ़े और वे तालीम में अव्वल रहें. वे कहते हैं कि इस में सभी को अपने लैवल पर सहयोग करना चाहिए. इस से राह आसान हो जाएगी.

इस में कोई शक नहीं कि न पढ़ना पिछड़ेपन की एक बड़ी वजह है, जिस पर हेमंत सोरेन का ध्यान शिद्दत से गया है.

अब देखना दिलचस्प होगा कि अपने इस मकसद में वे कितने कामयाब हो पाते हैं, लेकिन यह भी सच है कि बुके की जगह बुक का उन का आइडिया न केवल  झारखंड, बल्कि देशभर में पसंद किया जा रहा है.

ऐक्टिंग के लिए कड़ी मेहनत जरूरी – इति आचार्य

मौडलिंग से अपने कैरियर की शुरुआत करने वाली इति आचार्य ने निफ्ट, बैंगलुरु से फैशन डिजाइनिंग में ग्रेजुएशन की और बाद में ऐक्टिंग के क्षेत्र में अपना एक अलग मुकाम बनाया. हिंदी फिल्म ‘सत्यवती’ से डेब्यू करने वाली इति आचार्य ने साउथ की फिल्मों में काम कर के अपनी ऐक्टिंग का लोहा मनवाया.

3 साल की उम्र से स्टेज शो करने वाली इति आचार्य ने कत्थक और राजस्थानी डांस में महारत हासिल की और पेशेवर मौडल के रूप में साल 2010 में अपना कैरियर संवारा. साल 2016 में उन्होंने ‘मिस्टर ऐंड मिस साउथ इंडिया’ का ताज पहना.

जहां एक ओर ‘गैस्ट हाउस’ जैसी थ्रिलर फिल्म कर के इति आचार्य ने अलग छाप छोड़ी, वहीं दूसरी ओर ‘डील राजा’ में कौमेडी का तड़का लगाया और दर्शकों के दिलों में अलग इमेज बनाई.

इति आचार्य ने ‘केरला टुडे’, ‘पोरा’, ‘सीमा बोधा अगाथे’, ‘शैतान’, ‘ध्वनि’, ‘बदमाश’, ‘कवच’ जैसी तमिल, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में जलवा बिखेर कर लोगों के दिलों पर राज किया.

पेश हैं, इति आचार्य से हुई बातचीत के खास अंश :

मलयालम, कन्नड़ और तमिल फिल्मों के अलावा आप ने बौलीवुड की कुछ फिल्मों में भी काम किया है. वहां आप का अनुभव कैसा रहा?

– अनुभव तो अच्छा रहा है, लेकिन मैं ने काफी शुरुआत में ही ये प्रोजैक्ट कर लिए थे. सो, थोड़ा असहज महसूस हुआ. अब आज मैं ने काफीकुछ सीखा है, काफी सुधार किया है. हिंदी प्रोजैक्ट में सभी हीरो अपना ग्राउंड वर्क कर के और पूरी तैयारी के साथ आते हैं. वे काफी मेहनत करते हैं. उन के साथ ऐक्टिंग करने के लिए आप को भी पूरी तरह तैयार होना जरूरी है.

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हिंदी फिल्मों से किनारा करने की वजह?

– किनारा जैसा कुछ नहीं है. मेरा सर्किल साउथ फिल्मों में ज्यादा है तो वहां काम आसानी से मिल जाता है. मैं निश्चित ही कह सकती हूं कि मेरा साउथ फिल्मों का अनुभव हिंदी फिल्मों में बेहतरीन काम करने में मदद करेगा.

कन्नड़ व तमिल फिल्मों में काम करने का आप का अनुभव कैसा रहा?

– बहुत ही यादगार तजरबा रहा है. अपने कैरियर की शुरुआत में ही मैं ने मलयालम और तमिल इंडस्ट्री में काम किया था. वहां सभी लोग ध्यान रखते हैं. आप बाहर से आए हो, तो आप को स्पैशल ट्रीटमैंट भी मिलता है.

क्या आप ने तमिल व तेलुगु भाषाएं सीखी हैं?

– जी हां, थोड़ीबहुत तो सीखनी पड़ती हैं. आप जिस भाषा में काम करते हैं, उस की बेसिक जानकारी लेना जरूरी होता है. इस से आप को अच्छा परफौर्म करने में मदद मिलती है.

क्या निफ्ट का फायदा ऐक्टिंग में भी मिला?

जी हां, बिलकुल मिला. ड्रैसिंग स्टाइल, नैटवर्किंग, बेसिक जानकारी, सोचने का नजरिया कालेज से ही पैदा हुआ. फिल्म इंडस्ट्री में सब को टाइपकास्ट कर दिया जाता है. जो ग्लैमरस है, उसे ट्रैडिशनल रोल नहीं मिलते. लेकिन मैं ने अब तक दोनों ही लुक्स को बरकरार रखा है.

फैशन डिजाइनिंग का कोर्स करने के बावजूद आप ने फिल्मों में ऐक्टिंग को क्यों चुना?

– मुझे कालेज के दिनों से ही फिल्मों में काम करने के औफर आ गए थे, क्योंकि मैं मौडलिंग कर रही थी. पर उस समय पर कुछ खास काम नहीं किया. लेकिन मैं ने अपना मन बना लिया था कि मैं अपना करियर ऐक्टिंग में ही बनाऊंगी.

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क्या आप ने किसी सामाजिक मुहिम में हिस्सा लिया है?

– जी हां, मैं ने ऐसी काफी फिल्मों में भी काम किया है, जो किसी सामाजिक मुद्दे पर आधारित थीं. वह अनुभव कुछ अलग ही होता है. ज्यादातर आप किसी सच्ची घटना को जोड़ते हैं और उसे स्क्रीन पर हूबहू लाने की कोशिश करते हैं. कहीं न कहीं आप ऐसे सब्जैक्ट से निजी तौर पर जुड़ जाते हैं. कहीं न कहीं उन का दर्द भी आप के दिल में बस जाता है.

अपनी नई फिल्म के बारे में कुछ बताएं?

– हालफिलहाल तो मेरी नई फिल्म ‘आशिक फिर एक बार’ रुपहले परदे पर आई हुई है.

भविष्य में और क्या-क्या करने की योजना है?

– ईमानदारी से कहूं, योजना तो सब बनाते हैं, पर अच्छे प्रोजैक्ट वे होते हैं, जो सोच से अलग हट कर होते हैं.

क्या आप ने किसी म्यूजिक वीडियो अलबम में हिस्सा लिया है?

– जी हां, मैं ने तमिल में गाना किया है. मेरा पंजाबी, हिंदी अलबम में काम करने का मन है.

अपने परिवार के बारे में कुछ बताएं?

– मेरा भाई अभी आचार्य म्यूजिशियन है. उस ने बर्कले कालेज औफ म्यूजिक से ग्रेजुएशन की है. मेरी मम्मी फैशन डिजाइनिंग में काफी अच्छी हैं. वे मुझ से कहीं ज्यादा हुनरमंद हैं. मेरे पापा थिएटर आर्टिस्ट हैं.

मातापिता मेरे हर काम में शामिल रहते हैं. वे फिल्म की स्क्रिप्ट सुनते हैं और सारे फैसले हम चारों ही मिल कर लेते हैं.

आप हमें अपने खानपान के बारे में कुछ बताएं?

– मैं तो पूरी तरह से शाकाहारी हूं. मुझे मम्मी के हाथ का बना खाना बहुत स्वादिष्ट लगता है. इस के अलावा मैं साउथ इंडियन और इटैलियन फूड खाना पसंद करती हूं. लेकिन एक अच्छी बौडी के लिए हैल्दी डाइट लेना बहुत जरूरी है. बहुत बार बिजी शैड्यूल की वजह से मेरे खानपान पर गहरा असर पड़ता है. मैं इसे बदलने की कोशिश करती रहती हूं.

आप के और क्या-क्या शौक हैं?

– सच कहूं, तो मुझे अपने काम के अलावा और कोई शौक नहीं है. इस फील्ड में सबकुछ है. ट्रैवल करना पड़ता है. नए लोगों से मिलना पड़ता है. अच्छे कपडे़ पहनना, अच्छा दिखना, डांस भी करने को मिलता है. अपने परिवार के साथ ज्यादा से ज्यादा समय गुजारना मुझे पसंद है. साथ ही, भाई अभी को परेशान करना मेरा फेवरिट टाइमपास है.

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समाज खासकर महिलाओं को क्या संदेश देना चाहेंगी?

– वैसे तो आजकल समाज में काफी उथलपुथल चल रही है. समाज में हर रोज कोई न कोई घटना सुनने को मिलती है. सोशल मीडिया भी जागरूक हो गया है. सोशल मीडिया पर सभी अपना पक्ष रख रहे हैं.

ध्यान रखें कि आप जो भी करें या कहें, उस से किसी को तकलीफ न पहुंचे. किसी तरह का नैगेटिव कमैंट या फीडबैक देने से पहले जरूर सोचें.

मैं तो यही कहूंगी कि आप इस पावर को समझें और सोचसमझ कर इस्तेमाल करें, क्योंकि पावर आने के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है.

जहां तक महिलाओं की बात है, तो कोशिश करें कि अपने बच्चों को एक अच्छा इनसान बनाएं.

हिंदी फिल्में देखना पसंद है या भाषाई फिल्में?

– मुझे सब तरह की फिल्में देखना पसंद है. सब से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है.

हिंदी के पसंदीदा कलाकार, जिन के साथ आप काम करना चाहेंगी?

– अमिताभ बच्चन और इरफान खान.

पौलिटिकल राउंडअप : विधानपरिषद को खत्म किया

अमरावती. हाल ही में आंध्र प्रदेश में 3 राजधानी का फार्मूला लाने वाले मुख्यमंत्री जगन  मोहन रेड्डी ने 27 जनवरी को विधानपरिषद को खत्म करने संबंधी प्रस्ताव को विधानसभा में पास कर दिया.

याद रहे कि जगन रेड्डी के ही पिता वाईएस रेड्डी ने साल 2007 में विधानपरिषद को बहाल कराया था, जबकि तेलुगु देशम पार्टी के संस्थापक एनटी रामाराव ने भी इस के 23 साल पहले साल 1985 में विधानपरिषद को खत्म कर दिया था.

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि 3 राजधानी वाले प्रस्ताव को रोकने के लिए विपक्षी दल टीडीपी विधानपरिषद में अपने बहुमत का गलत इस्तेमाल कर रही थी, जबकि विधानसभा में इस पर मुहर लग चुकी थी.

ममता ने भी नकारा

कोलकाता. देशभर में आग लगाने वाले नागरिकता संशोधन कानून को नकराते हुए केरल, पंजाब और राजस्थान ने अपनीअपनी विधानसभा में इस के विरोध में प्रस्ताव पास कर दिया था. इसी कड़ी में एक और नाम पश्चिम बंगाल का भी जुड़ गया और 27 जनवरी को संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी प्रस्ताव पास हो गया.

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इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा में कहा, ‘यह प्रदर्शन केवल अल्पसंख्यकों का नहीं, बल्कि सभी का है. इस आंदोलन का सामने से नेतृत्व करने के लिए मैं हिंदू भाइयों का धन्यवाद करती हूं. पश्चिम बंगाल में हम सीएए, एनआरसी, एनपीआर को लागू नहीं होने देंगे.’

उमर अब्दुल्ला को भेजा रेजर

चेन्नई. भारत के हैंडसम नेताओं में शुमार उमर अब्दुल्ला का श्रीनगर में हाल ज्यादा अच्छा नहीं है. कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटने के बाद वहां इंटरनैट सेवाएं बहाल नहीं थीं. अभी हाल ही में उन्हें दोबारा बहाल किया गया तो इस प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके उमर अब्दुल्ला का एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिस में उन की दाढ़ी बहुत ज्यादा बढ़ी हुई नजर आ रही थी.

इसी फोटो पर तंज कसते हुए मंगलवार, 28 जनवरी को तमिलनाडु भाजपा ने उमर अब्दुल्ला को शेविंग रेजर भेज दिया और साथ ही कांग्रेस को भी लपेटे में ले लिया कि उमर अब्दुल्ला को ऐसे देखना निराशाजनक है, जबकि उन के कई ‘भ्रष्ट’ दोस्त बाहर ऐंजौय कर रहे हैं.

मायावती का सवाल

लखनऊ. नागरिकता संशोधन कानून पर उस समय और ज्यादा बहस तीखी हो गई, जब पाकिस्तानी मूल के गायक अदनान सामी को केंद्र सरकार ने ‘पद्मश्री अवार्ड’ दे दिया.

इस से नाराज बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने 28 जनवरी को कहा कि अगर पाकिस्तानी मूल के किसी गायक को नागरिकता और सम्मान मिल सकता है, तो पाकिस्तानी मुसलिमों को भी नागरिकता संशोधन कानून के तहत देश में शरण मिलनी चाहिए.

मायावती ने केंद्र की मोदी सरकार को इस कानून पर दोबारा विचार करने की नसीहत भी दी.

प्रवेश वर्मा के बिगड़े बोल

नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को किसी भी मुद्दे पर घेरने में नाकाम रही भाजपा ने उस के नेताओं पर ही देशद्रोही होने के आरोप लगा दिए.

29 जनवरी को भाजपाई नेता प्रवेश वर्मा ने एक चुनावी रैली में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ही नक्सली और आतंकी कह डाला.

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पश्चिमी दिल्ली से भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा ने शाहीन बाग के बाद अरविंद केजरीवाल को निशाने पर लेते हुए कहा, ‘जैसे आतंकी और नक्सली देश को नुकसान पहुंचाते हैं, सड़कों को तोड़ते हैं, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं, वही काम मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी कर रहे हैं.’

उद्धव ने सराहा

मुंबई. महाराष्ट्र का नया मुख्यमंत्री बनने के बाद भले ही उद्धव ठाकरे की शिव सेना और भाजपा अलगअलग राह पर चल पड़ी हैं, फिर भी उद्धव ठाकरे ने 29 जनवरी को एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री रह चुके देवेंद्र फडणवीस और भाजपाई नेता नितिन गडकरी की जम कर तारीफ की और उन दोनों को राज्य के विकास के लिए कदम उठाने का क्रेडिट दिया.

इस सिलसिले में उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘हम सरकार का हिस्सा थे. भले ही हम एक ट्रेन में नहीं थे, लेकिन आज हम एक ही स्टेशन पर आ खड़े हुए हैं. राजनीति में जब किसी काम के क्रेडिट की बात आती है, तो एक नेता तब तक नेता नहीं होता जब तक वह क्रेडिट न ले, लेकिन मैं नम्रता से कहना चाहता हूं कि हमें क्रेडिट नहीं, लोगों का आशीर्वाद चाहिए.’

दिखाया बाहर का रास्ता

पटना. कभी जनता दल (यूनाइटेड) को बिहार में सत्ता का स्वाद चखाने वाले प्रशांत किशोर को इस पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है. उन के साथ पवन वर्मा को भी चलता कर दिया है.

29 जनवरी को जद (यू) के प्रधान महासचिव और राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने अपने बयान में कहा कि पिछले कई महीनों से दल के अंदर पदाधिकारी रहते हुए प्रशांत किशोर ने कई विवादास्पद बयान दिए, जो दल के फैसले के खिलाफ थे. किशोर और ज्यादा नहीं गिरें, इस के लिए जरूरी है कि वे पार्टी से मुक्त हों.

इसी तरह केसी त्यागी ने पवन वर्मा के बारे में भी कहा कि पार्टी अध्यक्ष को चिट्ठी लिख कर उसे सार्वजनिक करना, उस में निजी बातों का जिक्र करना और उसे सार्वजनिक करना यह दिखाता है कि दल का अनुशासन उन्हें स्वीकार नहीं है.

बढ़ा बेरोजगारी भत्ता

भोपाल. मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार ने बेरोजगारों को लुभाने के लिए नया काम शुरू किया है. राज्य के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने 29 जनवरी को संवाददाताओं को बताया, ‘राज्य के शहरी गरीब नौजवानों के लिए 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ‘मुख्यमंत्री युवा स्वाभिमान योजना’ चलाई गई है. इस योजना में नौजवानों को ट्रेनिंग के साथ 4,000 रुपए मासिक मानदेय दिया जाता है. इसे बढ़ा कर अब 5,000 रुपए किया जा रहा है.’

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जेल से बाहर आते ही धरे गए

गांधीनगर. एक समय गुजरात में नई क्रांति के अगुआ माने गए हार्दिक पटेल ने पूरे देश को हिला दिया था. फिर वे राजनीति में आए और  कांग्रेस में शामिल हो गए. फिलहाल वे जेल में बंद थे और जमानत पर साबरमती जेल से बाहर आए थे, पर गुरुवार, 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया.

हार्दिक पटेल को साल 2017 के एक मामले में गांधीनगर जिला पुलिस ने गिरफ्तार किया.

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