साल 2014 में भोजपुरी फिल्म ‘जो जीता वही सिकंदर’ (Jo Jeeta Wahi Sikander) में खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) के साथ अपने फिल्मी करियर की शुरूआत करने वाली एक्ट्रेस पूनम दुबे (Poonam Dubey) इस समय लाखों दिलों की जान बन चुकी हैं. पूनम दुबे सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और एक्टिव रहने के साथ-साथ वे अपनी फोटोज और वीडियोज फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं जिसे उनके फैंस काफी प्यार देते हैं. पूनम दुबे की हर फोटो को उनके फैंस जमकर प्यार देते हैं और साथ ही लाइक्स और कमेंट्स की बरसात भी कर देते हैं.
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ज्यादातर सुर्खियों में रहती हैं पूनम दुबे…
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❤तुम तलब-ए-दीदार बरक़रार रखना , हम यू ही सावन बन के बरसते रहेंगे ।❤ #poonamdubey
भोजपुरी एक्ट्रेस पूनम दुबे (Poonam Dubey) अक्सर अपने हौट और ग्लैमरस लुक से लोगों का दिल जीतती दिखाई देती हैं और शायद यही वजह है कि वे ज्यादातर सुर्खियों में बनी रहती हैं. सोशल मीडिया पर अपनी हौट और बोल्ड फोटोज शेयर कर पूनम ने अपनी कमाल की फैन फौलोविंग बना ली है. पूनम के फैंस ना सिर्फ उनके लुक्स से बल्कि उनकी एक्टिंग के भी काफी इम्प्रेस्ड रहते हैं.
किसी बौलीवुड एक्ट्रेस से कम नही हैं पूनम दुबे…
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❤️👑मोहब्बत कह , दीवानगी या पागलपन जो कुछ भी है बस तुझसे ही हैं।👑❤️ #poonamdubey
पूनम दुबे (Poonam Dubey) ने अपनी अदाओं से अब तक कई लोगों को अपना दिवाना बना लिया है और उनकी हौट और ग्लैमरस फोटोज देख ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि वे किसी बौलीवुड एक्ट्रेस से कम नहीं लगती. पूनम के फैंस उनके लुक्स और उनकी अदाओं पर तो जान छिड़कते हैं और शायद यही वजह है कि पूनम को अपने फैंस को खुश करना अच्छे से आता है, तभी वे आए दिन सोशल मीडिया पर अपनी फोटोज शेयर करती ही रहती हैं.
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2 अवौर्ड भी कर चुकी हैं हासिल…
पूनम दुबे (Poonam Dubey) ने अब तक 12 भोजपुरी फिल्मों में काम किया है जिसमें से 2 फिल्मों के लिए उन्हें अवौर्ड भी मिला है. भोजपुरी सिने अवौर्ड (Bhojpuri Cine Award) की तरफ से उन्हें साल 2018 में फिल्म रंगदारी टैक्स (Rangdaari Tax) के लिए बेस्ट एक्ट्रेस अवौर्ड (Best Actress Award) मिला तो वहीं उसी साल उन्हें भोजपुरी सिनेमा स्क्रीन एंड स्टेज अवौर्डस (Bhojpuri Cinema Screen and Stage Awards) की तरफ से फिल्म रंगीला (Rangeela) के लिए उन्हें बेस्ड सपोर्टिंग एक्ट्रेस (Best Supporting Actress) का अवौर्ड मिला.
भोजपुरी बेल्ट के दर्शकों के दिलों में राज करने वाले अभिनेता और गायक पवन सिंह (Pawan Singh) के भोजपुरी गाने रिलीज होते ही यूट्यूब पर धमाल मचाने लगते हैं. लेकिन इस बार पवन सिंह का जो गाना यूट्यूब पर टौप ट्रेंड में है वह कोई भोजपुरी गाना नहीं बल्कि होली के मौके पर गाया हिंदी गीत है. इस गाने के यूट्यूब पर रिलीज होने के एक हफ्ते के भीतर ही ढाई करोड़ व्यूअर्स का आंकड़ा पार कर लिया है. इनके इस गाने में फीमेल सिंगर के रूप में पायल देव (Payal Dev) नें अपनी आवाज दी है. पवन सिंह ने इसके साथ ही अपना पहला हिंदी गाना भी डेब्यू कर लिया है. जिसके पहले कदम नें ही उन्हें सफलता की ऊंचाइयों पर खड़ा कर दिया है. जस्ट म्यूजिक के बैनर तले रिलीज हुए इस गाने का बोल है ‘कमरिया हिला रही है’ (Kamariya Hila Rahi Hai), ये होली पर आधारित गाना है.
पवन सिंह को भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री की हिट मशीन कहा जाता है क्योंकि उनका गाया हुआ हर गाना सुपरहिट होता है. पवन सिंह के कई भोजपुरी गाने ऐसे हैं जो सुपरहिट साबित हुए हैं. इस गाने के वीडियों एल्बम में पवन सिंह और पायल देव के अलावा लौरेन गोटलिब (Lauren Gottlieb) नें तो कमाल ही कर दिया है. उन्होंने अपने सेक्सी अंदाज और अदा से दर्शकों के ऊपर जादू कर दिया है वैसे भी लौरेन गोटलिब सोशल मीडिया पर अपनी हौट तस्वीरों के चलते ट्रेंड करती रहती हैं.
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गाने के वीडियो अल्बम में सफल होने में लौरेन गोटलिब ने रंगबिरंगे सेक्सी परिधान और बैकग्राउंड का कमाल भी माना जा रहा है. गाने में पवन सिंह और लौरेन होली खेलते हुए नजर आ रहे हैं. लौरेन गोटलिब और पवन सिंह ने अपने इन्स्टाग्राम अकाउंट पर इस गाने से जुड़ा जो प्रोमो शेयर किया है. वह भी टौप ट्रेंड में शामिल रहा है. पवन सिंह के साथ फिमेल सिंगर के रूप में अपनी आवाज देनें वाली पायल देव नें ही इसका म्यूजिक भी कंपोज किया है. गीत मोहसिन शेख और पायल देव नें लिखें हैं. संगीत निर्माता आदित्य देव हैं, गाने के मिक्स एंड मास्टर भी आदित्य देव ही हैं. गाने की रिकौर्डिंग आदित्य देव स्टूडियो में की गई हैं.
वीडियो अल्बम के निर्देशक और कोरियोग्राफर मुदस्सर खान व कैमरामैन विशाल सिन्हा हैं. इसका संपादन नितिन एफसी नें किया है. प्रोडक्शन की जिम्मेदारी योगेश कुमार प्रोडक्शंस नें निभाई है. लाइन प्रोडक्शन भी योगेश कुमार का ही है. अल्बम की कौस्ट्यूम डिजाइनर की जिम्मेदारी विभूति चमरिया, मेकअप मायरा जैन, आयशा और देवराह का है. प्रोडक्शन मैनेजर सुशील पांडे और प्रवीण आचार्य हैं. पोस्ट प्रोडक्शन एक्जीक्यूटिव का काम जयेश लुढानी नें किया है प्रोडक्शन सुपरवाइज़र रितिका कौल हैं स्टिल फोटोग्राफ़ी की जिम्मेदारी गौतम लालवानी, आयुष गुमडेलवार नें निभाई है.
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‘कमरिया हिला रही है’ गाने का लिंक –
लड़की और उस की मां ने विरोध किया तो अपराधियों ने छात्रा पर तेजाब उड़ेल दिया जिस से उस का चेहरा और पेट बुरी तरह से जल गया. अपराधी सामूहिक बलात्कार करने की नीयत से वहां आए थे.
तेजाब फेंकने की वारदातें देश के अलगअलग हिस्सों में आएदिन होती रहती हैं और लगातार बढ़ती ही जा रही हैं. पहले तो ये शहरों तक ही सिमटी थीं, पर अब तो गांवदेहात की लड़कियों पर भी तेजाब फेंकने के मामले बढ़ रहे हैं.
मथुरा, उत्तर प्रदेश के दामोदरपुर में 25 साला महिला पुलिसकर्मी के ऊपर बदमाशों ने तेजाब फेंक दिया था जिस से वे बुरी तरह से घायल हो गई थीं. वे ड्यूटी कर के अपने घर जा रही थीं कि दरिंदों ने इस वारदात को अंजाम दे दिया.
इसी तरह बिहार के औरंगाबाद जिले के कुटुंबा थाना क्षेत्र की एक लड़की कोचिंग के लिए जा रही थी कि अचानक उस के ऊपर एक मोटरसाइकिल सवार मनचले ने तेजाब फेंक दिया. वहां मौजूद लोग उस घायल लड़की को इलाज के लिए तत्काल अस्पताल ले गए.
इसी जिले के हसपुरा ब्लौक के रघुनाथपुर गांव के नजदीक एक लड़की, जो पुलिस की बहाली के लिए सुबह दौड़ने की प्रैक्टिस कर रही थी, की कुछ दरिंदों ने उस के साथ रेप कर के उस
की हत्या कर दी और चेहरे पर तेजाब डाल दिया.
बिहार के बाहुबली नेता शहाबुद्दीन द्वारा अंजाम दिए गए तेजाब कांड को आज भी लोग भूल नहीं पाते हैं, जिस में चंदा बाबू के परिवार के 2 सदस्यों सतीश और गिरीश पर तेजाब की बालटी उलट कर उन की हत्या कर के लाश को टुकड़ेटुकड़े कर बोरे में भरवा कर फिंकवा दिया था.
बरेली, उत्तर प्रदेश में पानी लेने आई 3 औरतों पर तेजाब फेंक दिया गया था जिस से वे तीनों बुरी तरह से झुलस गई थीं.
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वाराणसी, उत्तर प्रदेश में एक दोस्त के घर ठहरी रूसी लड़की पर उसी के दोस्त ने तेजाब फेंक दिया था जिस से वह 50 फीसदी झुलस गई थी.
इसी तरह उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक आदमी द्वारा अपनी पत्नी, सासससुर समेत 7 दूसरे लोगों पर तेजाब फेंक कर घायल करने का मामला सामने आया था.
पत्नी द्वारा दुष्कर्म और दहेज व सताने का मामला दर्ज कराया गया था जिस से नाराज हो कर पति ने यह घिनौना काम किया था. इस तेजाबी कांड में एक 6 महीने का बच्चा भी चपेट में आ गया था और 3 लड़कियां भी बुरी तरह से झुलस गई थीं.
शामली जिले में 4 सगी बहनें बोर्ड के इम्तिहान से ड्यूटी कर के लौट रही थीं कि तभी मोटरसाइकिल से 2 लड़के आए और उन चारों पर तेजाब फेंक कर चलते बने.
छत्तीसगढ़ में 4 नाबालिग लड़कियों पर तेजाब फेंकने की वारदातें हो चुकी हैं. महाराष्ट्र में एक पत्रकार और उस के परिवार के सदस्यों पर एक अज्ञात लड़की ने तेजाब फेंक दिया था.
मुजफ्फरनगर में एक बस में सवार लड़की पर एक लड़के ने तेजाब फेंक दिया था जिस से लड़की के साथसाथ दूसरी सवारियां भी घायल हो गई थीं.
इसी तरह उत्तराखंड के देहरादून
में भी एक कालेज छात्रा पर एक लड़के ने तेजाब फेंक दिया था.
तेजाब फेंकने की बढ़ती वारदातें लोगों को झकझोर कर रख देती हैं. लड़के पहले लड़की से प्यार करते हैं और फिर किसी तरह अनबन होने से प्यार का धागा टूटने पर ऐसे वहशी दरिंदों द्वारा लड़कियों पर तेजाब फेंकने की वारदातों को अंजाम दिया जाता है.
आमतौर पर यह देखा जा रहा है
कि प्यार में ज्यादातर लड़कियां धोखा खाती हैं. यहां तक कि उन के जिस्म से खिलवाड़ भी किया जाता है और जब शादी करने की बात आती है तो ज्यादातर लड़के मुकर जाते हैं. वे तो प्यार का सिर्फ ढोंग करते हैं और लड़कियों के जिस्म से खेलना चाहते हैं.
बहुत से मनचले तो किसी लड़की को एकतरफा चाहते हैं और जब लड़की उन्हें तवज्जुह नहीं देती है तो उस पर तेजाब फेंकने जैसी वारदात कर बैठते हैं.
लड़की के मातापिता लड़की की शादी किसी दूसरे लड़के के साथ करने के लिए ठान लेते हैं तो उन हालात में
भी लड़की के ऊपर तेजाब फेंकने की वारदातें हो जाती हैं.
अगर कोई लड़का हकीकत में किसी लड़की से प्यार करता है तो वह किसी भी सूरत में तेजाब नहीं फेंक सकता. इतिहास इस बात का गवाह है कि प्यार में धोखा खाने वाले लोग मासूम की तसवीर के सहारे मरते दम तक उस से प्यार करते हैं.
तेजाब फेंकने वाले प्रेमी अपराधी सोच के होते हैं. जिन लड़कियों का तेजाब से चेहरा झुलस गया है, वे बदसूरत दिखने लगी हैं. वे उन दहशतगर्दों से सवाल भी पूछती हैं कि क्या तुम मुझे इस रूप में आज भी चाहते हो? इस का जवाब इन दहशतगर्दों के पास शायद नहीं होगा.
औरंगाबाद जिले के रजानगर महल्ले की 9वीं जमात की छात्रा सलमा पर एक लड़के ने साल 2016 में तेजाब फेंक दिया था जिस से वह बुरी तरह से झुलस गई थी.
सलमा ने बताया, ‘‘जब मेरे साथ साल 2016 में तेजाब की घटना घटी थी तो लोगों द्वारा हमदर्दी और मदद करने का आश्वासन देने वालों का तांता लगा था. पत्रकारों की भी भीड़ जमा हुई थी. रिश्तेदारों ने भी तरहतरह से भरोसा दिया था. लेकिन आज सभी लोग भूल गए हैं. अब तो जिंदगी काटनी ही मुश्किल हो गई है. मेरा चेहरा देखने से लोगों की यात्रा खराब होने लगी है. मुझे देख कर बच्चे भी डरने लगे हैं.
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‘‘अब तो मैं घर वालों पर ही बोझ बन कर रह रही हूं. कोई दूसरा उपाय भी नहीं है. अपराधी को सजा हो भी जाए तो थोड़ी देर के लिए तसल्ली जरूर होगी, लेकिन मेरी जिंदगी तो नरक ही बन गई है.
‘‘मैं लड़की नहीं, एक जिंदा लाश के समान हूं. बारबार खुदकुशी करने का जी करता है. लेकिन यह सोच कर फैसला बदल देती हूं कि परिवार ने मेरे चलते बहुत दुख झेला है और मेरी वजह से इन लोगों को जेल नहीं जाना पड़े. अब तो भूल से कभी आईना भी नहीं देखती. गलती से अगर देख लेती हूं, आंखों से आंसू रुकते नहीं हैं.’’
दिल्ली की लक्ष्मी अग्रवाल, जिन के साथ भी तेजाब की वारदात घटी थी, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से सवाल किया
कि तेजाब खुलेआम बिकता क्यों है? कोर्ट ने खुलेआम तेजाब बेचने पर रोक लगाई थी, लेकिन आज भी हालात जस के तस बने हुए हैं.
सामाजिक सरोकार से जुड़ी रंजीता सिंह का कहना है कि जब तक इन दहशतगर्दों पर कड़ी कार्यवाही नहीं की जाएगी, इन का मनोबल बढ़ता जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए तेजाब फेंकने वालों पर 10 साल की सजा का प्रावधान किया है, फिर भी इन वारदातों पर रोक लगने के बजाय ये और ज्यादा बढ़ती जा रही हैं.
डाक्टर ने जवाब दे दिया था, ‘‘माधव, हम से जितना बन पड़ा हम कर रहे हैं, लेकिन कृतिकाजी के स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हो रहा है. एक दोस्त होने के नाते मेरी तुम्हें सलाह है कि अब इन्हें घर ले जाओ और इन की सेवा करो, क्योंकि समय नहीं है कृतिकाजी के पास. हमारे हाथ में जितना था हम कर चुके हैं.’’
डा. सुकेतु की बातें सुन कर माधव के पीले पड़े मुख पर बेचैनी छा गई. सबकुछ सुन्न सा समझने न समझने की अवस्था से परे माधव दीवार के सहारे टिक गया. डा. सुकेतु ने माधव के कंधे पर हाथ रख कर तसल्ली देते हुए फिर कहा, ‘‘हिम्मत रखो माधव, मेरी मानो तो अपने सगेसंबंधियों को बुला लो.’’
माधव बिना कुछ कहे बस आईसीयू के दरवाजे को घूरता रहा. कुछ देर बाद माधव को स्थिति का भान हुआ. उस ने अपनी डबडबाई आंखों को पोंछते हुए अपने सभी सगेसंबंधियों को कृतिका की स्थिति के बारे में सूचित कर दिया.
इधर, कृतिका की एकएक सांस हजारहजार बार टूटटूट कर बिखर रही थी. बची धड़कनें कृतिका के हृदय में आखिरी दस्तक दे कर जा रही थीं. पथराई आंखें और पीला पड़ता शरीर कृतिका की अंतिम वेला को धीरेधीरे उस तक सरका रहा था.
कृतिका के भाई, भाभी, मौसी सभी परिवारजन रात तक दिल्ली पहुंच गए. कृतिका की हालत देख सभी का बुरा हाल था. माधव को ढाड़स बंधाते हुए कृतिका के भाई कुणाल ने कहा, ‘‘जीजाजी, हिम्मत रखिए, सब ठीक हो जाएगा.’’
तभी कृतिका को देखने डाक्टर विजिट पर आए. कुणाल और माधव भी वेटिंगरूम से कृतिका के आईसीयू वार्ड पहुंच गए. डा. सुकेतु ने कृतिका को देखा और माधव से कहा, ‘‘कोई सुधार नहीं है. स्थिति अब और गंभीर हो चली है, क्या सोचा माधव तुम ने?’’
‘‘नहींनहीं सुकेतु, मैं एक छोटी सी किरण को भी नजरअंदाज नहीं कर सकता. तुम्हीं बताओ, मैं कैसे मान लूं कि कृतिका की सांसें खत्म हो रही हैं, वह मर रही है, नहीं वह यहीं रहेगी और उसे तुम्हें ठीक करना ही होगा. यदि तुम से न हो पा रहा हो तो हम दूसरे किसी बड़े अस्पताल में ले जाएंगे, लेकिन यह मत कहो कि कृतिका को घर ले जाओ, हम उसे मरने के लिए नहीं छोड़ सकते.’’
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सुकेतु ने माधव के कंधे को सहलाते हुए कहा, ‘‘धीरज रखो, यहां जो इलाज हो रहा है वह बैस्ट है. कहीं भी ले जाओ, इस से बैस्ट कोई ट्रीटमैंट नहीं है और तुम चाहते हो कि कृतिकाजी यहीं रहेंगी, तो मैं एक डाक्टर होने के नाते नहीं, तुम्हारा दोस्त होने के नाते यह सलाह दे रहा हूं. डोंट वरी, टेक केयर, वी विल डू आवर बैस्ट.’’
माधव को कुणाल ने सहारा दिया और कहा, ‘‘जीजाजी, सब ठीक हो जाएगा, आप हिम्मत मत हारिए,’’ माधव निर्लिप्त सा जमीन पर मुंह गड़ाए बैठा रहा.
3 दिन हो गए, कृतिका की हालत जस की तस बनी हुई थी, सारे रिश्तेदार इकट्ठा हो चुके थे. सभी बुजुर्ग कृतिका के बीते दिनों को याद करते उस के स्वस्थ होने की कामना कर रहे थे कि अभी इस बच्ची की उम्र ही क्या है, इस को ठीक कर दो. देखो तो जिन के जाने की उम्र है वे भलेचंगे बैठे हैं और जिस के जीने के दिन हैं वह मौत की शैय्या पर पड़ी है.
कृतिका की मौसी ने हिम्मत करते हुए माधव के कंधे पर हाथ रखा और कहा, ‘‘बेटा, दिल कड़ा करो, कृतिका को और कष्ट मत दो, उसे घर ले चलो.
‘‘माधव ने मौसी को तरेरते हुए कहा, ‘‘कैसी बातें करती हो मौसी, मैं उम्मीद कैसे छोड़ दूं.’’
तभी माधव की मां ने गुस्से में आ कर कहा, ‘‘क्यों मरे जाते हो मधु बेटा, जिसे जाना है जाने दो. वैसे भी कौन से सुख दिए हैं तुम्हें कृतिका ने जो तुम इतना दुख मना रहे हो,’’ वे धीरे से फुसफुसाते हुए बोलीं, ‘‘एक संतान तक तो दे न सकी.’’
माधव खीज पड़ा, ‘‘बस करो अम्मां, समझ भी रही हो कि क्या कह रही हो. वह कृतिका ही है जिस के कारण आज मैं यहां खड़ा हूं, सफल हूं, हर परेशानी को अपने सिर ओढ़ कर वह खड़ी रही मेरे लिए. मैं आप को ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता इसलिए आप चुप ही रहो बस.’’
कृतिका की मौसी यह सब देख कर सुबकते हुए बोलीं, ‘‘न जाने किस में प्राण अटके पड़े हैं, क्यों तेरी ये सांसों की डोर नहीं टूटती, देख तो लिया सब को और किस की अभिलाषा ने तेरी आत्मा को बंदी बना रखा है. अब खुद भी मुक्त हो बेटा और दूसरों को भी मुक्त कर, जा बेटा कृतिका जा.’’
माधव मौसी की बात सुन कर बाहर निकल गया. वह खुद से प्रश्न कर रहा था, ‘क्या सच में कृतिका के प्राण कहीं अटके हैं, उस की सांसें किसी का इंतजार कर रही हैं. अपनी अपलक खुली आंखों से वह किसे देखना चाहती है, सब तो यहीं हैं. क्या ऐसा हो सकता है?
‘हो सकता है, क्यों नहीं, उस के चेहरे पर मैं ने सदैव उदासी ही तो देखी है. एक ऐसा दर्द उस की आंखों से छलकता था जिसे मैं ने कभी देखा ही नहीं, न ही कभी जानने की कोशिश ही की कि आखिर ये कैसी उदासी उस के मुख पर सदैव सोई रहती है, कौन से दर्द की हरारत उस की आंखों को पीला करती जा रही है, लेकिन कोईर् तो उस की इस पीड़ा का साझा होगा, मुझे जानना होगा,’ सोचता हुआ माधव गाड़ी उठा कर घर की ओर चल पड़ा.
घर पहुंचते ही कृतिका के सारे कागजपत्र उलटपलट कर देख डाले, लेकिन कहीं कुछ नहीं मिला. कुछ देर बैठा तो उसे कृतिका की वह डायरी याद आई जो उस ने कई बार कृतिका के पास देखी थी, एक पुराने बकसे में कृतिका की वह डायरी मिली. माधव का दिल जोरजोर से धड़क रहा था.
कृतिका का न जाने कौन सा दर्द उस के सामने आने वाला था. अपने डर को पीछे धकेल माधव ने थरथराते हाथों से डायरी खोली तो एक पन्ना उस के हाथों से आ चिपका. माधव ने पन्ने को पढ़ा तो सन्न रह गया. यह पत्र तो कृतिका ने उसी के लिए लिखा था :
‘प्रिय माधव,
‘मैं जानती हूं कि मैं तुम्हारे लिए अबूझ पहेली ही रही. मैं ने कभी तुम्हें कोई सुख नहीं दिया, न प्रेम, न संतान और न जीवन. मैं तुम्हारे लायक तो कभी थी ही नहीं, लेकिन तुम जैसे अच्छे पुरुष ने मुझे स्वीकार किया. मुझे तुम्हारा सान्निध्य मिला यह मेरे जन्मों का ही फल है, लेकिन मुझे दुख है कि मैं कभी तुम्हारा मान नहीं कर पाई, तुम्हारे जीवन को सार्थक नहीं कर पाई. तुम्हारी दोस्त, पत्नी तो बन गई लेकिन आत्मांगी नहीं बन पाई. मेरा अपराध क्षम्य तो नहीं लेकिन फिर भी हो सके तो मुझे क्षमा कर देना माधव, तुम जैसे महापुरुष का जीवन मैं ने नष्ट कर दिया, आज तुम्हारा कोई तुम्हें अपना कहने वाला नहीं, सिर्फ मेरे कारण.
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‘मैं जानती हूं तुम ने मेरी कोई बात कभी नहीं टाली इसलिए एक आखिरी याचना इस पत्र के माध्यम से कर रही हूं. माधव, जब मेरी अंतिम विदाईर् का समय हो तो मुझे उसी माटी में मिश्रित कर देना जिस माटी ने मेरा निर्माण किया, जिस की छाती पर गिरगिर कर मैं ने चलना सीखा. जहां की दीवारों पर मैं ने पहली बार अक्षरों को बुनना सीखा. जिस माटी का स्वाद मेरे बालमुख में कितनी बार जीवन का आनंद घोलता रहा. मुझे उसी आंगन में ले चलना जहां मेरी जिंदगी बिखरी है.
‘मैं समझती हूं कि यह तुम्हारे लिए मुश्किल होगा, लेकिन मेरी विनती है कि मुझे उसी मिट्टी की गोद में सुलाना जिस में मैं ने आंखें खोली थीं. तुम ने अपने सारे दायित्व निभाए, लेकिन मैं तुम्हारे प्रेम को आत्मसात न कर सकी. इस डायरी के पन्नों में मेरी पूरी जिंदगी कैद थी, लेकिन मैं ने उस का पहले ही अंतिम संस्कार कर दिया, अब मेरी बारी है, हो सके तो मुझे क्षमा करना.
‘तुम्हारी कृतिका.’
माधव सहम गया, डायरी के कोरे पन्नों के सिवा कुछ नहीं था, कृतिका यह क्या कर गई अपने जीवन की उस पूजा पर परदा डाल कर चली गई, जिस में तुम्हारी जिंदगी अटकी है. आज अस्पताल में हरेक सांस तुम्हें हजारहजार मौत दे रही है और हम सब देख रहे हैं. माधव ने डायरी के अंतिम पृष्ठ पर एक नंबर लिखा पाया, वह पूर्णिमा का नंबर था. पूर्णिमा कृतिका की बचपन की एकमात्र दोस्त थी.
माधव ने खुद से प्रश्न किया कि मैं इसे कैसे भूल गया. माधव ने डायरी के लिखा नंबर डायल किया.
‘‘हैलो, क्या मैं पूर्णिमाजी से बात कर रहा हूं, मैं उन की दोस्त कृतिका का पति बोल रहा हूं,‘‘
दूसरी तरफ से आवाज आई, ‘‘नहीं मैं उन की भाभी हूं. दीदी अब दिल्ली में रहती हैं.’’
माधव ने पूर्णिमा का दिल्ली का नंबर लिया और फौरन पूर्णिमा को फोन किया, ‘‘नमस्कार, क्या आप पूर्णिमाजी बोली रही हैं.’‘
‘‘जी, बोल रही हूं, आप कौन?’’
‘‘जी, मैं माधव, कृतिका का हसबैंड.’’
पूर्णिमा उछल पड़ी, ‘‘कृतिका. कहां है, वह तो मेरी जान थी, कैसी है वह? कब से उस से कोई मुलाकात ही नहीं हुई. उस से कहिएगा नाराज हूं बहुत, कहां गई कुछ बताया ही नहीं,’’ एकसाथ पूर्णिमा ने शिकायतों और सवालों की झड़ी लगा दी.
माधव ने बीच में ही टोकते हुए कहा, ‘कृतिका अस्पताल में है, उस की हालत ठीक नहीं है. क्या आप आ सकती हैं मिलने?’’
पूर्णिमा धम्म से सोफे पर गिर पड़ी, कुछ देर दोनों ओर चुप्पी छाई रही. माधव ने पूर्णिमा को अस्पताल का पता बताया.
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‘‘अभी पहुंचती हूं,’’ कह कर पूर्णिमा ने फोन काट दिया और आननफानन में अस्पताल के लिए निकल गई.
माधव निर्णयों की गठरी बना कर अस्पताल पहुंच गया. कुछ ही देर बाद पूर्णिमा भी वहां पहुंच गई. डा. सुकेतु की अनुमति से पूर्णिमा को कृतिका से मिलने की आज्ञा मिल गई.
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी ने हमें इतना मसरूफ कर दिया है कि हमारे पास अपने पड़ोसियों के साथ बैठ कर बात करने का क्या, उन से उन का नाम तक पूछने का समय नहीं है.
अब लोगों के घर तो बड़े होते जा रहे हैं, पर अपने पड़ोसियों के लिए उन के दरवाजे तक नहीं खुलते हैं. मर्द अपने पड़ोसियों से कोई खास संबंध नहीं रखते हैं, जबकि औरतें टैलीविजन के सामने पड़े रहने में ज्यादा सुकून महसूस करती हैं. बच्चों को भी बाहर जा कर पड़ोस के बच्चों के साथ न खेलने की हिदायतें दी जाती हैं.
यह नया चलन अच्छा नहीं है, पर अफसोस हमारे समाज पर हावी हो रहा है, जबकि पड़ोसी के साथ रिश्ते केवल 1-2 वजहों से नहीं, बल्कि बहुत सी वजहों से अच्छे साबित होते हैं.
मुसीबत की घड़ी में आप के दूर बैठे रिश्तेदार मदद करने के लिए एकदम से नहीं आ पाते हैं, बल्कि आप के पड़ोसी ही सब से पहले आप की तरफ मदद का हाथ बढ़ाते हैं.
पड़ोसी हर तरह के होते हैं. कुछ अच्छे भी होते हैं तो कुछ बुरे भी, लेकिन एक अच्छा पड़ोसी आप की हर तरह से मदद करता है.
मुश्किल घड़ी में साथ
आजकल अखबारों की सुर्खियों में किसी न किसी वारदात की खबर छपी होती है. इन वारदातों में लोगों के घरों में चोरी होना, घर में घुस कर किया गया जोरजुल्म व घर से बाहर गलीपड़ोस में बच्चों को अगवा कर लेने की खबरें होती हैं.
इन वारदातों के पीछे अहम वजह है अकेलापन. लोगों के अपने पड़ोसियों से खत्म हो रहे रिश्ते उन के घर की तरफ बढ़ रहे जुर्म को बढ़ावा देने का काम करते हैं, जबकि पड़ोसियों से जुड़े रहने पर आप एक मजबूत संगठन की तरह होते हैं जिस पर एकदूसरे की हिफाजत व मदद करने की जिम्मेदारी होती है.
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हुआ यों था कि एक छोटे से शौर्टसर्किट से लगी आग ने उस इमारत के एक फ्लोर पर बड़ा भीषण रूप ले लिया था. स्वाति गर्ग अपार्टमैंट्स से निकलने के बजाय वहां मौजूद सभी लोगों को होशियार कर बाहर जाने के लिए कहने लगीं.
आग बुझने के बाद फायरफाइटर्स को छत के दरवाजे पर बेहोशी की हालत में स्वाति मिली थी. अस्पताल ले जाते समय उन की रास्ते में ही मौत हो गई थी.
दिल्ली के वजीरपुर में रहने वाली 25 साला उस औरत के साथ बलात्कार की नाकाम कोशिश के बाद उस के देवर ने उसे छत से नीचे गिराने की कोशिश की थी.
उस औरत के शोर मचाने से पड़ोसी अपनेअपने घरों से बाहर आ गए थे. छत से धक्का दिए जाने के बाद वह औरत एक कूलर के स्टैंड को पकड़ कर कुछ देर लटकी रही थी, फिर होश खोने पर जब वह गिरी तो उस के पड़ोसियों ने उसे पकड़ लिया. अस्पताल जाने पर पता लगा कि जख्म गहरे नहीं थे.
दरअसल, उस मुसलिम परिवार पर गांव के कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि उन्होंने एक बछड़े की बलि दी है. इस आरोप के चलते 55 साला मोहम्मद इखलाक का कत्ल कर दिया गया था और उन के बाकी परिवार वालों को जान से मारने की धमकियां दी गई थीं. जब यह बात उन के पड़ोसियों विनीत कुमार, उमेश कुमार और अशोक को पता चली तो उन्होंने उन्हें सहीसलामत दादरी रेलवे स्टेशन तक पहुंचाया था.
ऐसे ढेरों मामले सामने आते हैं जहां पड़ोसियों ने अपने आसपास के लोगों की जान बचाई या उन्हें किसी बड़े खतरे से बाहर निकाला.
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जिंदगी में रस घोलते
पड़ोसी केवल मुश्किल समय में ही नहीं, बल्कि खुशी के माहौल को और मजेदार बनाने में भी सब से बेहतर साबित होते हैं. बगीचे की छोटीमोटी सफाई हो या घर की चीनी खत्म हो जाए तो पड़ोसी का दरवाजा खटखटा दें. पड़ोसियों के साथ ऐसे आपसी संबंध बहुत खट्टेमीठे होते हैं जो जिंदगी में ताजगी भर देते हैं.
एक रिपोर्ट के मुताबिक, 55 फीसदी बच्चों को उन के मातापिता द्वारा बाहर जा कर खेलने की इजाजत नहीं दी जाती है, जबकि उन के विकास के लिए उन्हें पड़ोस के बच्चों के साथ खेलने दिया जाना चाहिए.
आल इंडिया इंस्टीट्यूट औफ मैडिकल साइंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डिप्रैशन से पीडि़त 50 फीसदी बच्चे 14 साल की उम्र से कम के हैं और ऐसे 75 फीसदी नौजवान 15 से 25 साल की उम्र के हैं.
ये आंकड़े इस बात के सुबूत हैं कि किस तरह बच्चों और नौजवानों के मानसिक तनाव उन्हें समाज से दूर व अकेलेपन के करीब खींच रहे हैं.
अगर वे अपने आसपड़ोस के हमउम्र से बात करें, उन के साथ घूमेंफिरें व अपनी परेशानियों के बारे में चर्चा करें, तो शायद उन्हें इस अकेलेपन से जूझना नहीं पड़ेगा.
ऐसे कायम रखें रिश्ते
पड़ोसियों से रिश्ते बनाने का सब से पहला नियम है कि उन्हें उन की प्राइवेसी दें. दोस्ती का हाथ जरूर बढ़ाएं, पर दखलअंदाजी न करें. अगर उन्हें किसी तरह की जरूरत है तो कोशिश करें कि आप उन की मदद कर सकें.
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आप हफ्ते में एक बार किटी पार्टी का प्रोग्राम भी बना सकते हैं. इस से आप एकदूसरे के परिवारों से परिचित होंगे व आपसी संबंधों में मिठास भी रहेगी.
अकसर घरेलू औरतें घरों में ही रहती हैं और केवल बच्चों को स्कूल से लाना, ले जाना ही करती हैं. ऐसी औरतें पड़ोस की दूसरी औरतों के साथ पास के बाजार या माल वगैरह में जा कर बाहरी दुनिया से रूबरू हो सकती हैं.
अगर आप की और आप के पड़ोसी की काम करने की जगह आसपास है तो गाड़ी में एकसाथ भी जाया जा सकता है. इस से पैसों की बचत के साथसाथ रिश्ते भी मजबूत होते हैं.
बिग बौस सीजन 13 (Bigg Boss 13) के सबसे चहीते कंटेस्टेंट और फर्स्ट रनर-अप रह चुके असीम रियाज (Asim Riaz) इन दिनों काफी सुर्खियां बटोर रहे हैं. कुछ दिनों पहले खबरे आई थीं कि असीम रियाज बौलीवुड की जानी मानी एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडीज (Jacqueline Fernandez) के साथ एक म्यूजित वीडियो में दिखाई देने वाले हैं. हाल ही में असीम रियाज और जैकलीन फर्नांडीज की एक वीडियो भी सामने आई है जिसमें दोनों अपने म्यूजिक वीडियो को लेकर काफी एक्साइटिड नजर आ रहे हैं.
असीम और जैकलीन के नए गाने का नाम है…
आपको बता दें कि असीम रियाज (Asim Riaz) और जैकलीन फर्नांडीज (Jacqueline Fernandez) के नए गाने का नाम है ‘मेरे अंगने में’ (Mere Angne Mein) जो कि होली (Holi) के दिनों में रिलीज किया जाएगा. असीम इस वीडियो में स्कूल ड्रैस पहने दिखाई दे रहे हैं तो वहीं जैकलीन ने साड़ी पहनी हुई है. खबरों की माने को असीम और जैकलीन के इस म्यूजिक वीडियो की थीम होली पर बेस्ड है, और तो और यह म्यूजिक वीडियो 1981 में बनी अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) की फिल्म ‘लावारिस’ (Laawaris) के गाने ‘मेरे अंगने में’ का रीमेक है.
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बिग बौस में शुरू हुआ असीम और हिमांशी का रिलेशन…
असीम रियाज के फैंस के लिए एक और खुशखबरी है जिसे सुन असीम के फैंस बेहद खुश हो जाएंगे. बिग बौस (Bigg Boss) के घर में बना असीम रियाज (Asim Riaz) और हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) का रिलेशन काफी कौन्ट्रोवर्शियल (Controversial) रहा और उसके बाद भी असीम लास्ट तक यही कहते दिखाई दिए कि वे हिमांशी से बेहद प्यार करते हैं. फैंस ने भी असीम और हिमांशी के रिलेशन को प्यार दिया और सोशल मीडियो पर #ASIMANSHI भी काफी ट्रेंड हुया.
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एक साथ नजर आने वाले हैं असीम रियाज और हिमांशी खुराना…
आपको बता दें कि हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) और असीम रियाज (Asim Riaz) ने अपने औफिशिल इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के जरिए फैंस को ये खुशखबरी दी है कि वे दोनों साथ में एक म्यूजिक वीडियो में दिखाई देने वाले हैं. गाने के पोस्टर में इस गाने की रिलीज डेट 18 मार्च लिखी हुई है. इससे भी ज्यादा खुशी की बात ये है कि इस गाने को अपनी सुरिली आवाज दे रही हैं बौलीवुड की जानी मानी सिंगर नेहा कक्कड़ (Neha Kakkar).
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ऐसा देखने में आ रहा है कि बिग बौस के घर से बाहर आते है असीम रियाज का करियर बड़ी ही तेज़ी से आगे बढ़ रहा है. असीम इन दिनों काफी प्रोजेक्ट्स पर काम रहे हैं.
भोजपुरी सिने जगत की सनसनी और फेयर लवली गर्ल के नाम से चर्चित अभिनेत्री रितु सिंह को सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड के पहले सीजन में बेस्ट ऐक्ट्रेस का अवार्ड मिला. यह अवार्ड ज्यूरी ने उनकी फिल्म स्पेशल इनकाउन्टर में उनके दमदार अभिनय के लिए दिया गया. इस फिल्म में रितु ने पुलिस अधिकारी की भूमिका में दर्शकों का मन मोह लिया था. रितु ने लगभग सभी बड़े भोजपुरी अभिनेताओं के साथ काम किया है. फिल्मों में उनके नेचुरल अभिनय और खूबसूरती के लोग दीवाने है. इस वजह से रितु सिंह फिल्मकारों के सबसे पसंदीदा हिरोईनों में शुमार हैं.

इस फिल्म का निर्देशन अरुण राज नें किया है जो उनके निर्देशन में पहली फिल्म है. फिल्म के निर्माता गणेश गुप्ता हैं. इस फिल्म में कई भोजपुरी सितारे हैं, फिल्म में रितु सिंह के अलावा, सीमा सिंह, राकेश मिश्रा, नें का भी दमदार अभिनय देखने को मिला था.
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इस फिल्म में सभी कलाकारों ने दमदार अभिनय किया था. फिल्म में जहाँ मशहूर अभिनेता अनूप अरोड़ा पूरे फिल्म में छाये रहे वहीँ राकेश मिश्र और रितु सिंह की जोड़ी नें भी खूब धमाल मचाया था. फिल्म में आइटम गर्ल सीमा सिंह का आइटम सॉंग भी धूम मचाने में कामयाब रहा.
फिल्म में रितु सिंह जहाँ पुलिस इंस्पेक्टर के रूप में अपराधियों से पंगा लेती दिखीं वहीँ वह राकेश मिश्रा के साथ रोमांस के सीन में भी दर्शकों को लुभाने में कामयाब रहीं. इस फिल्म में रितु की एक्टिंग के चलते फिल्म सुपरहिट रही थी.

आने वाले महीनों में रितु सिंह की कई फ़िल्में प्रदर्शन के लिए तैयार है. अभी हाल में ही रितु सिंह ने नेपाल से सटे जिले सिद्धार्थनगर में बाप जी की शूटिंग पूरी की है. जिसमें उनके अपोजिट खेसारीलाल हैं वहीँ फिल्म में मनोज सिंह टाइगर, बृजेश त्रिपाठी, सीपी भट्ट, संजय वर्मा का जोरदार अभिनय देखने को मिलेगा.
अवार्ड के साथ इंस्टाग्राम पर पोस्ट फोटो-
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Thanku so much #sarassalilmagazine #sarassalilteam for #bestactressaward thanku #brihaspati jee…🙏
मशहूर नृत्यांगना और भोजपुरी फिल्मों की अभिनेत्री चांदनी सिंह (Chandni Singh) हमेशा सोशल मीडिया पर सूर्खियों में बनी रहती हैं. अभिनेत्री चांदनी सिंह की तस्वीरें या वीडियो इंटरनेट पर आते ही वह सुर्खियों में छा जाती हैं. इन दिनों वह अपनी नई भोजपुरी फिल्म ‘‘बंसी बिरजू’’ (Bansi Birju) को लेकर चर्चा में हैं, जिसका फस्टलुक पोस्टर कुछ दिन पहले ही सोशल मीडिया पर जारी किया गया था. चांदनी सिंह की फिल्म के इस पोस्टर में परवेशलाल यादव (Parveshlal Yadav), काजल राघवानी (Kajal Raghavani), आदित्य ओझा (Aditya Ojha) और सपना गिल (Sapna Gill) के संग अति खूबसूरत नजर आती हैं. अब चांदनी ने इस फिल्म के लिए फिल्म के नायक परवेश लाल यादव संग खास फोटो शूट करवाया है. इस फोटो को जैसे ही उन्होने अपने फेसबुक वौल पर जारी किया, वैसे ही चांदनी सिंह के फैन्स लाईक करने से पीछे नहीं हटे. कई फैन्स ने तो कमेंट्स भी किए.
फिल्म ‘बंसी बिरजू’ की चर्चा करते हुए चांदनी सिंह (Chandni Singh) कहती हैं- ‘‘मैंने अब तक इतना चुनौतीपूर्ण किरदार नहीं निभाया है. यह मेरे करियर का सही मायनों में पहला चैलेंजिंग किरदार है. पहले मुझे लगा था कि इस किरदार को निभाना मेरे लिए काफी कठिन होगा, मगर फिल्म के निर्देशक अजय कुमार झा को मेरी प्रतिभा पर यकीन था. मुझे लगता है कि निर्देशक अजय कुमार झा की वजह से ही इस फिल्म के अपने किरदार के साथ न्याय करने में मैं सफल रही हूं. अब मुझे दर्शकों की प्रतिक्रिया का बेसब्री से इंतजार है. मेरे साथ अक्सर ऐसा होता रहा है कि जब भी मैं कोई किरदार प्ले करती हूं, उस किरदार के साथ भावनात्मक रूप से इस कदर जुड़ जाती हूं कि उस किरदार से बाहर निकलने में मुझे काफी समय लगता है.’’
फिल्म के निर्माता रत्नाकर कुमार की तारीफ करते हुए चांदनी सिंह कहती हैं- ‘‘मैने कई निर्माताओं के संग काम किया, मगर रत्नाकर कुमार की बात ही कुछ निराली है. वह हमेशा सेट पर न सिर्फ मौजूद रहते हैं, बल्कि हम कलाकारों का ध्यान रखते हैं.’’
इस फिल्म के निर्माता वर्ल्ड वाईड के रत्नाकर कुमार और निर्देशक अजय कुमार झा हैं. इस फिल्म में चांदनी सिंह के नायक परवेश लाल यादव हैं. फिल्म में नृत्य निर्देशक कानू मुखर्जी ने चांदनी सिंह और परवेश लाल यादव को नचाया है.
फिलहाल चांदनी सिंह फिल्म ‘बंसी बिरजू’ के प्रमोशन में बिजी हैं और सोशल मीडिया पर फिल्म से जुड़े पोस्टर्स शेयर कर रही हैं.
ज्ञातब्य है कि मूलत बिहार निवासी चांदनी सिंह मशहूर मौडल, मशहूर नृत्यांगना और भोजपुरी फिल्मों की सफल अदाकारा है. चांदनी सिंह ने मौडलिंग के साथ साथ म्यूजिक वीडियो से करियर की शुरूआत की थी. सोशल मीडिया पर बहुत बडी फैन फौलोविंग होने के चलते उनके हर म्यूजिक वीडियो को एक दिन के ही अंदर करोड़ों व्यूवर्स मिल जाते हैंं. इसलिए भोजपुरी इंडस्ट्री में उन्हें हौट केक माना जाता है.
जबकि परवेश लाल यादव अभिनेता होने के साथ साथ प्रतिभाशाली गायक भी हैं. परवेश लाल यादव और चांदनी सिंह ने अब तक जिन म्यूजिक वीडियों में एक साथ अभिनय किया, वह सभी सुपर डुपर हिट रहे हैं.
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इस फिल्म के अलावा परवेश लाल यादव अपनी देशभक्ति वाली फिल्म ‘सरफरोश‘ को लेकर भी उत्साहित हैंं. जिसमें उनके साथ यामिनी सिंह और रितेश पांडे भी हैं. इस फिल्म की कहानी भारत-पाकिस्तान आतंकवाद की स्थिति पर आधारित है.
एक्शन-रोमांटिक-ड्रामा के मसाले से भरपूर फिल्म ‘‘बंसी बिरजू’’ में परवेशलाल यादव, आदित्य ओझा, चांदनी सिंह की मुख्य भुमिका है. इस फिल्म के लेखक संतोष मिश्रा हैं. फिल्म ‘बंसी बिरजू’ के प्रमुख दृश्यों की शूटिंग महाराष्ट्र के रायगढ़ में हाजी मलंग में की गई है.
बॉलीवुड दर्शकों के लिए मार्च का महीना बेहद ख़ास रहने वाला है.क्यों की इस महीनें वालीवुड की वह फ़िल्में रिलीज होनें जा रहीं हैं जिनका दर्शकों को बेसब्री से इन्तजार था. बॉलीवुड के बड़े कलाकारों से सजी ये फ़िल्में प्रदर्शन के लिए तैयार हैं जो मार्च के अलग-अलग तारीखों को रिलीज होंगी. तो आइये जानते हैं वह कौन सी फ़िल्में जो इस महीनें सिनेमाघरों में धमाल मचाने को तैयार है.
सफल अभिनेताओं में शुमार और बागी सीरीज की दो सफल फ़िल्में देनें वाले टाइगर श्रॉफ इसी सीरीज की फिल्म बागी-3 में अपने नए अवतार में नजर आने वाले हैं. यह फिल्म 6 मार्च को रिलीज होने जा रही है. फिल्म में टाइगर श्रॉफ रोनी के रूप में नजर आयेंगे वहीं श्रद्धा कपूर सिया के रूप में नजर आने वाली हैं. अहमद खान द्वारा निर्देशित और साजिद नाडियाडवाला द्वारा निर्मित यह फिल्म फॉक्स स्टार स्टूडियो के बैनर तले बनीं हैं. फिल्म का संगीत टी सीरीज का है. इस फिल्म में जबरदस्त एक्शन के साथ ही रोमांस, स्पेशल ईफैक्ट के साथ-साथ उन्नत तकनीकी और फिल्मांकन का भी तड़का देखने को मिलेगा.
फिल्म बागी-3 के सफल होने के कयास पहले से ही लगाये जा रहें हैं. क्योंकि इसके पहले बागी सीरिज की आई दोनों फ़िल्में भी बॉक्स ऑफिस पर कमाई के मामले में अव्वल रहीं थी. उस समय टाइगर श्रॉफ के करियर की सबसे सफल फिल्मों में शुमार बागी ने बॉक्स ऑफिस पर 76 करोड़ के करीब की कमाई की थी. इसके बाद बागी फिल्म की दूसरी सीरीज नें पहली सीरीज की तुलना में लगभग दुगुनी कमाई की थी और उस फिल्म की कमाई 164 करोड़ के आस-पास रही थी.
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कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से उबरने के बाद इरफान खान इस फिल्म में एक अलग ही अंदाज में नजर आने वाले हैं. फिल्म में इरफ़ान कभी हंसाते हुए तो कभी इमोशनल अंदाज में नजर आयेंगे. इनके साथ इस फिल्म में करीना कपूर खान, राधिका मदान, दीपक डोबरियाल, डिंपल कपाड़िया, रणवीर शौरी, पंकज त्रिपाठी और कीकू शारदा भी प्रमुख भूमिका में नजर आयेंगी. फिल्म का निर्देशन होमी अदजानिया और निर्माता दिनेश विजान और ज्योति देशपांडे हैं. संगीत सचिन-जिगर का है यह फिल्म 13 मार्च को रिलीज होने जा रही है.
मल्टी स्टारर यह फिल्म सिनेमाघरों में दर्शकों को फिल्म देखते समय रोमांच से भरने वाली है. ऐसा इस फिल्म का ट्रेलर देख कर कयास लगाया जा रहा है. इस फिल्म में अक्षय कुमार, अजय देवगन, रणवीर सिंह का एक्शन देखते बनेगा. रोहित शेट्टी के डायरेक्शन में बन रही इस फिल्म में अक्षय कुमार सूर्यवंशी, संग्राम भालेराव सिंबा के रोल में रणवीर सिंह और बाजीराव सिंघम के रोल में अजय देवगन भी दिखाई देंगे.
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वहीं जैकी श्रॉफ निगेटिव भूमिका में अलग ही रोमांच पैदा करते नजर आयेंगे. यह फिल्म 93 के बम धमाकों पर आधारित है. फिल्म 24 मार्च की शाम को ही दुनियाभर में एक साथ रिलीज की जायेगी. ऐसा इसलिए हो रहा है क्यों कि महाराष्ट्र सरकार नें सिनेमाघरों में चौबीसों घंटे फिल्म दिखाए जाने की अनुमति दे दिया है. इस लिए इस फिल्म को पहले से निर्धारित तारीख से तीन दिन पहले 24 मार्च को रिलीज करने का निर्णय किया है. यह फिल्म पहले 27 मार्च को रिलीज होने वाली थी.