भोजपुरी सिंगर ने बनाया Corona Virus पर गाना तो भड़के ये गीतकार, कही ये बड़ी बात

जैसा कि हम सब जानते हैं कि भारत में कोरोना वायरस (Corona Virus) का प्रभाव बढ़ते जा रहा है और यहां तक की भारत सरकार (Indian Government) ने इस खतरनाक बिमारी को देखते हुए स्कूल (School), कौलेज (College), शौपिंग मौल्स (Shopping Malls), मूवी थिएटर्स (Movie Theatres), नाइट क्लब्स (Night Clubs) आदि कुछ दिनों तक बंद रखने का आदेश दिया है. जहां एक तरफ सरकार कोरोना वायरस से सावधान रहने के लिए इतना सब कर रही है तो वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस बिमारी का बुरी तरह से मजाक बना रहे हैं.

ये भी पढ़ें- ‘ये गलती आप लोग ना करे जो मैंने की अनजाने में’ – भोजपुरी ऐक्ट्रेस रानी चटर्जी

पौपुलर लिरिसिस्ट मनोज मुंतशिर ने किया ऐसा ट्वीट…

lehenga-me-coronavirus

पिछले कुछ दिनों से एक भोजपुरी (Bhojpuri) गाना काफी वायरल हो रहा है जिसका नाम है “लहंगा में वायरस कोरोना घुसल बा” (Lehenga Mein Corona Virus Ghusal Ba). कई लोगों ने इस गाने की कड़े शब्दों में बुराई भी की. वहीं बौलीवुड (Bollywood) के पौपुलर लिरिसिस्ट (Lyricist) मनोज मुंतशिर (Manoj Muntashir) जिन्होनें बौलीवुड इंडस्ट्री को तेरी मिट्टी (Teri Mitti) जैसे कई खूबसूरत गाने दिए हैं, वे इस गाने को देख काफी गुस्सा हुए और एक ट्वीट (Tweet) कर लोगों से जवाब मांगा कि क्या ऐसी खतरनाक बिमारी का मजाक उड़ाना ठीक है?

ये भी पढ़ें- होली पर रिलीज खेसारीलाल यादव की इस फिल्म को मिली धमाकेदार शुरुआत, देखें फोटोज

ट्वीट कर पूछा ये सवाल…

मनोज मुंतशिर (Manoj Muntashir) ने अपने औफिशियल ट्वीटर (Twitter) अकाउंट से ट्वीट करते हुए लिखा है कि,- “एक #BhikhariThakur के भोजपुरी गीत थे, जो आज भी साहित्य में ऊँची जगह रखते हैं, एक ये लोग हैं जो जिन्होंने इतनी सुंदर भाषा का तमाशा बना के रख दिया है. क्या एक ख़तरनाक बीमारी का इस तरह मज़ाक़ बनाना सही है..??? अपनी राय दीजिए.”

ये भी पढ़ें- सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड : मनोज सिंह टाइगर को मिला बेस्ट पौपुलर कामेडियन अवार्ड

लोगो ने दी अपनी-अपनी राय…

मनोज मुंतशिर के इस ट्वीट के बाद लोगों ने अपनी राय देनी और कमेंट्स करने शुरू कर दिए. मनोज के इस ट्वीट पर जवाब देते हुए टेलिवीजन एक्टर अनिरुद्ध  दावे (Anirudh Dave) ने कमेंट किया,- “कला की हालत खस्ता है, साहित्य कि इन्हें परख नहीं, समझ नहीं, स्तर बहुत सस्ता है !”. प्रमाद कुमार (Pramod Kumar) नाम के एक यूजर ने कमेंट किया कि,- “100% सही कह रहे सर , इन्ही कुछ लोगों के कारण भोजपुरी बदनाम हो गई है , नही तो भोजपुरी भाषा मे बहुत मिडास है , भोजपुरी निर्गुण का कोई जोर है क्या”.

ये भी पढ़ें- आनंद ओझा और काजल रघवानी की बहुप्रतीक्षित फिल्म “रण” का फर्स्टलुक हुआ आउट

भोजपुरी गाने सुन लोगो को आने लगी है शर्म…

सच्चिदानंद मिक्ष्रा (Sachchidanand Mishra) नाम के एक यूजर ने कमेंट किया है,- अब भोजपुरी पे शर्म आने लगी है सर, ऐसे सैकड़ों भोजपुरी गाने है जिसे सुन कर समाज असहज महसूस करता है. यूपी बिहार में ऐसे गाने बस, ट्रेन, टैक्सी, औटो रिक्शा में बजाते रहते हैं लोग और महिलाएं, स्कूली बच्चियों शर्मिंदगी महसूस करती रहती है. ऐसे गाने बजा कर लड़कियों के साथ अभद्रता होती रहती है.

ये भी पढ़ें- सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड : सीपी भट्ट को मिला बेस्ट कौमेडियन का अवार्ड

जल्द दुल्हन बनने वाली हैं हरियाणवी डांसर सपना चौधरी, जानें कौन है दुल्हा?

हरियाणा की छोरी सपना चौधरी (Sapna Choudhary) अपने नए-नए गानों को लेकर दुनिया भर में तहलका मचा रही हैं. साथ ही उनकी ये सफलता आसमान छू रही है. इस सफलता के साथ ही सपना की एक ऐसी खबर सामने आ रही है जिसे सुन कर उनके फैंस के होश उड़ने वाले हैं और साथ ही दिल भी टूटने वाला है. जी हां, आपको बता दें कि हरियाणा की सुपरस्टार डांसर सपना चौधरी ने शादी करने का फैसला ले लिया है.

ये भी पढ़ें- सपना चौधरी का नया हौट फोटशूट आया सामने, अपकमिंग गाने का पोस्टर भी किया शेयर

सपना ने की इस एक्टर से सगाई…

 

View this post on Instagram

 

अपणां ताहीं समझाणा के दूसरा आग्गै थूक बलोऊं क्यूं बेगान्या आग्गै गाणा के आपणा तै लहकोऊं क्यूं बेहूदे(negative) गल्लै खस कै खामखा बेहूदा होऊं क्यूं अहसानमंद मेरे भाईयां का जिन्नै हरदम साथ निभाया है मेरे भाई खडे पाये गैल्लां जित भी #sahu आकेला पाया है भर्मित होण की जरूरत नहीं ना शिश झूखण दूं ना झूकाया है भतेरे बंब पडे डायरी में इबै तै पटाका सा ए बजाया है

A post shared by Veer Sahu (@veersahuofficial) on

खबरों की माने तो सपना चौधरी (Sapna Choudhary) ने सगाई भी कर ली है जिसका पता उन्होंने किसी को लगने नहीं दिया. अब आप सबके मन में ये सवाल तो उठ ही रहा होगी कि आखिर सपना किसको अपना दिल दे बैठी है जिससे उन्होनें चुप-चाप सगाई भी कर ली तो आपको बता दें कि सपना काफी समय से अपने को-स्टार और हरियाणवी एक्टर और सिंगर वीर साहू (Veer Sahu) के डेट कर रही थीं जिससे कि अब सामने आ रहा है कि दोनों ने सगाई कर ली है.

ये भी पढ़ें- Yeh Rishta में आएगा नया ट्विस्ट, क्या जिंदा है कार्तिक-नायरा की बेटी ‘कायरा’?

जल्द दे सकती हैं शादी का सरप्राइज…

हरियाणवी एक्टर और सिंगर वीर साहू को हरियाणा का बब्बू मान (Babbu Maan) भी कहा जाता है. ऐसे में कहा जा सकता है कि सपना चौधरी (Sapna Choudhary) और वीर साहू (Veer Sahu) एक दूसरे को अपना दिल दे बैठे और साथ ही दोनो सगाई के बंधन में भी बंध गए. हालांकि इन दोनो की शादी की खबरें सामने नहीं आई हैं पर उम्मीद की जा सकती है कि सपना बहुत ही जल्द अपने फैंस को अपनी शादी का सरप्राइज भी दे सकती हैं.

ये भी पढ़ें- Disha Patani की यह Photo हुई Viral, फैंस ने किए ऐसे कमेंट्स

एक इवेंट के दौरान हुई थी मुलाकात…

आपको बता दें कि सपना चौधरी और वीर साहू की मुलाकात साल 2015-16 के एक इवेंट में हुई थी जिसका खुलासा खुद सपना ने अपने एक इंटरव्यू में किया था. ऐसे और भी कई इंटरव्यूज हुए हैं जिसमें सपना और वीर दोनो ने एक दूसरे की जमकर तारीफें की हैं और अब ऐसा सामने आ रहा है कि बात अब काफी आगे बढ़ चुकी है और दोनो एक दूसरे को दिल से अपना मान चुके हैं.

ये भी पढ़ें- एक साथ रोमांस करते दिखे असीम रियाज और हिमांशी खुराना, नए गाने का पोस्टर आउट

लड़कों से कम नहीं हैं लड़कियां

‘‘जब मेरे पापा गुजरे, तब उन का अंतिम संस्कार मैं ने ही किया था. उन की अर्थी को कंधा मैं ने ही दिया था. उस वक्त मैं ने खुद को बहुत मजबूत पाया था… पापा के जाने के बाद जिंदगी पहले जैसी कभी नहीं रही, मगर उस के बाद घर की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेनी थी. मैं ने खुद को दोतरफा मजबूत पाया. एक तो हमारे समाज में लड़कियों को इस तरह

के कर्मकांडों से दूर रखा जाता है, मगर मैं ने और मेरी बहनों ने मिल कर ये सारे काम किए थे. तब मैं सिर्फ 19 साल की थी.

‘‘पापा की अर्थी को कंधा देने वाली बात मैं लोगों के सामने पहली बार कर रही हूं, क्योंकि वे बहुत ही निजी और भावुक पल थे.  मगर हां, उस के बाद मेरे अंदर एक अलग तरह की ताकत आ गई थी.’’

यह बात एक इंटरव्यू में फिल्म हीरोइन भूमि पेडनेकर ने कही थी, पर फिल्मी कतई नहीं थी. उन के इस भावुक संदेश से यह समझा जा सकता है कि हमारे देश में लड़कियों को खुद को बेहतर और हिम्मती साबित करने के लिए किस तरह के पापड़ बेलने पड़ते हैं. और अगर किसी गांवदेहात की लड़की की समाज में अपने दम पर की गई जद्दोजेहद को खंगालेंगे तो पता चल जाएगा कि उन्हें अपने मन की करने के लिए किस हद तक समाज से लड़ना पड़ता है.

इतना होने के बावजूद आज हमारे देश की लड़कियां उलट हालात में भी हर क्षेत्र में नाम कमा रही हैं. गांव की बहुत सी लड़कियों ने तो खेल, पुलिस, सेना, बड़ी सरकारी नौकरी और यहां तक कि नेतागीरी में मर्दों को भी पछाड़ दिया है.

ये भी पढ़ें- कहकशां अंसारी – फुटबाल ने बदल दी जिंदगी

उत्तराखंड की सुमन सिंह रावत कुछ ऐसा ही काम कर रही हैं, जिसे करने के लिए बड़ा हौसला चाहिए. अब वे लखनऊ में रहती हैं. सड़क हादसों में घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाती हैं, उन का इलाज कराती हैं और लावारिस लाशों का दाह संस्कार भी कराती हैं. यह काम वे पिछले 27 साल से खुद अपने दम पर कर रही हैं, कोई सरकारी मदद नहीं लेती हैं.

इसी तरह इलाहाबाद की ओम कुमारी सिंह अपनी चैतन्य वैलफेयर फाउंडेशन के जरीए गरीब बच्चों को पढ़ा रही हैं, जबकि ‘उद्गम’ संस्था चलाने वाली रुपाली श्रीवास्तव तेजाब से जलाई गई लड़कियों को सहारा देने का काम करती हैं.

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में लालगंज इलाके की आदिवासी औरतों ने 2 किलोमीटर लंबी नहर खोद कर गांवघर और खेतों तक पानी पहुंचा दिया है. इस से जंगलों में बेकार बह रहे पानी को काम में लाने से न केवल पीने के पानी की समस्या से नजात मिली है, बल्कि इलाके में जमीनी पानी का लैवल भी बढ़ गया है.

बैतूल जिले के गोपीनाथपुर गांव की 16 औरतों ने महज 2 साल में 3 तालाब खोद डाले, जिन में अब सालभर लबालब पानी भरा रहता है.

इन औरतों ने वसुंधरा महिला मंडल नाम से एक समूह बना कर रजिस्ट्रेशन करवाया और तालाब खुदाई में लग गईं. नतीजतन, आज ये सब इन तालाब के पानी से खेती कर रही हैं और साल में सब्जी से एक लाख से 2 लाख रुपए, फलों से भी तकरीबन 2 लाख रुपए और इतना ही मछलीपालन से कमा रही हैं.

बिहार में गोपालगंज हैडक्वार्टर से तकरीबन 25 किलोमीटर दूर कुचायकोट ब्लौक के बरनैया गोखुल गांव की रहने वाली जैबुन्निसा को सब ‘ट्रैक्टर लेडी’ बुलाते हैं.

जैबुन्निसा बताती हैं कि साल 1998 में वे अपने एक रिश्तेदार के घर हरियाणा गई थीं और वहां उन्होंने टीवी पर एक कार्यक्रम देखा था जो केरल के किसी गांव के बारे में था. वहां की औरतें स्वयंसहायता समूह के बारे में बता रही थीं.

गांव आ कर जैबुन्निसा ने अपने गांव की औरतों से बात की और उन्हें उस कार्यक्रम के बारे में बताया. इस के बाद जैबुन्निसा ने अपना स्वयंसहायता समूह बनाया.

फिर जैबुन्निसा ने खुद से ट्रैक्टर चलाना सीखा और खेतों में काम करने लगीं. आज वे कड़ी मेहनत के बल पर सैकड़ों परिवारों में खुशहाली लाने में जुटी हुई हैं. गांव की 250 से ज्यादा औरतें आत्मनिर्भर हो कर अपने परिवार का पालनपोषण बेहतर ढंग से कर रही हैं.

ऐसी ही एक जुझारू लड़की रीटा शर्मा से मैं दिल्ली में मिला था. वैसे तो वे उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की रहने वाली हैं, पर अब लखनऊ में रह कर समाजसेवा के ऐसे काम कर रही हैं, जिस में जान दांव पर लगा देने का भी जोखिम है.

रीटा शर्मा ने जब से अपनी पढ़ाई पूरी की थी, तब वहां बहुत ज्यादा सुविधाएं नहीं थीं. तब लोग ऊंची पढ़ाई के लिए लखनऊ या दिल्ली का रुख करते थे. लड़कियों को तो जैसे जिले के बाहर अपनी मरजी की पढ़ाई करने की इजाजत ही नहीं थी.

ये भी पढ़ें- मजबूत बदन की बेखौफ टौम गर्ल नीलम सिंह

महाराजगांव की रीटा शर्मा ने अपनी 12वीं जमात तक की पढ़ाई बहराइच के आर्य कन्या इंटर कालेज से की थी. वे बीए तक हिंदी मीडियम से पढ़ी थीं.

रीटा शर्मा की गैरसरकारी संस्था ‘शक्तिस्वरूपा सेवा संस्थान’ में हर जरूरतमंद की मदद की जाती है. समाज को बेहतर बनाना, बेरोजगारों को रोजगार की ट्रेनिंग देना, जागरूकता मुहिम चलाना, अपनी हिफाजत की ट्रेनिंग देने के साथसाथ लोगों की कानूनी तौर पर मदद भी की जाती है.

एमबीए कर चुकी रीटा शर्मा अपहरण के कई मामलों में लड़कियों को बचा कर घर वापस लाई हैं. सब से अच्छी बात तो यह है कि वे इस काम को मुफ्त में करती हैं.

रीटा शर्मा ने बाराबंकी के जुलाई, 2017 के एक अपहरण कांड के बारे में बताया, ‘‘यह मामला एक 16-17 साल की लड़की का है. मैं अपने काम से अलीगंज, लखनऊ थाना गई थी. वहां मुझे कुरसी पर बैठने को कहा गया, जबकि वहीं पर जमीन पर एक गांव की औरत बैठी थी, जिस से वहां मौजूद पुलिस वाले मजाकिया या कहें तकरीबन बेहूदा भाषा में बात कर रहे थे.

‘‘आदतन मैं उस औरत से उस की परेशानी पूछ बैठी. उस औरत ने बताया कि उस की बेटी बाराबंकी से गांव की कुछ औरतों के साथ अलीगंज का बड़ा मंगल का मेला देखने आई थी, जहां से वह गायब हो गई है. उस का तकरीबन एक महीने से कोई अतापता नहीं है. एफआईआर हो गई थी, मगर कोई कार्यवाही नहीं हुई.

‘‘अभी कल ही एक नंबर से उसी लड़की का फोन आया है. लोगों की सलाह पर वह औरत नंबर ले कर थाने आई थी और अपनी बेटी को ढूंढ़ने की गुजारिश कर रही थी. इस केस का जांच अधिकारी ही उस से हंसीमजाक कर रहा था.

‘‘मैं ने मौके पर उस जांच अधिकारी से सवालजवाब किए और फिर उस औरत को क्षेत्राधिकारी डाक्टर मीनाक्षी से मिला कर बातचीत कराई, जहां उन्होंने नंबर को सर्विलांस पर लगाने और पता लगते ही जांच अधिकारी को जाने के लिए बोला.

‘‘थाने से बाहर आ कर मैं उस औरत के कागजात की फोटोकौपी और मोबाइल नंबर ले कर और अपना विजिटिंग कार्ड दे कर घर आ गई, मगर फिर भी मन में उस अनजान लड़की के लिए चिंता रह गई थी, जो न जाने किन हाथों में और कैसी हालत में थी.

‘‘रात को उस औरत को फोन कर  अगले दिन ही एसएसपी के औफिस में आने को कहा और पूरा केस पढ़ कर जब वहां मौजूद एसपी ग्रामीण डाक्टर सतीश कुमार को पूरी जानकारी दी, तो उन्होंने तुरंत थाने में फोन कर के स्टेटस लिया और आधे घंटे के भीतर ही पुलिस उस औरत के साथ मौजूदा लोकेशन के लिए निकल पड़ी.

‘‘कुछ समय बाद उस लड़की को सुरक्षित एक कारखाने के अंदर से एक लड़के के साथ बरामद किया गया, जिस ने लड़की को कैद कर रखा था. वह फोन नंबर पास रहने वाले एक आदमी का था, जिस ने शक होने पर मौका पा कर पूछताछ कर घर पर बात कराई थी.

ये भी पढ़ें- गांव की लड़की और शादी से पहले सेक्स

‘‘एक ईमानदार आईपीएस की बदौलत वह लड़की सुरक्षित मिली. केस चल रहा है.’’

एक और केस के बारे में रीटा शर्मा ने बताया कि महाराष्ट्र का रहने वाला मोहम्मद शाहिद पैसे कमाने के लिए 1 मार्च, 2018 को किसी एजेंट के जरीए कतर गया था, मगर कुछ दिन बाद उस ने अपनी पत्नी को फोन पर बताया कि वे लोग उस से बताए गए काम के बजाय मजदूरी करा रहे हैं और खानेपीने को भी नहीं दे रहे हैं. कुछ दिनों बाद उन्होंने फोन भी ले लिया था.

शाहिद की पत्नी और घर वालों ने हर किसी से मदद मांगी. प्रधानमंत्री के दफ्तर में चिट्ठी भी भेजी, मगर कोई जवाब नहीं आया. इस तरह मई का महीना आ गया.

मोहम्मद शाहिद की बहन को किसी ने मेरे बारे में बताया और मोबाइल नंबर दिया. बातचीत और पूरी जानकारी लेने के अलावा सोशल मीडिया के कुछ साथियों से और ज्यादा जानकारी लेने के बाद दोहा एंबैसी को ट्वीट और ईमेल किया. साथ ही, फोन पर बातचीत के बाद उन्होंने दी गई जानकारी के आधार पर जब जांच कराई तो पता चला कि केवल मोहम्मद शाहिद ही नहीं, बल्कि 2 और भारतीय इसी तरह धोखे से लाए गए थे.

लगातार संपर्क में रहने के बाद 13 जून, 2018 को एंबैसी ने सुरक्षित सभी भारतीयों को वापस भारत भेज दिया. सभी परिवार, जो महीनों से परेशान थे और उन से मदद के नाम पर भारीभरकम रकम मांगी जा रही थी, उन का सब काम ऐसे ही बिना रिश्वत दिए हो गया.

रीटा शर्मा बचपन से ही आईपीएस बनने का सपना देखती थीं. जब भी टैलीविजन पर आईपीएस किरण बेदी आती थीं, तो वे उन्हें बहुत ध्यान से देखती थीं, मगर बीए पास करने के बाद पिताजी आगे पढ़ने के लिए उन्हें इलाके से बाहर भेजने को तैयार न हुए. शायद समाज में हो रहे अपराध देख कर उन में बेटी को ले कर असुरक्षा की भावना थी.

बाद में पिताजी से जिद कर रीटा शर्मा ने एक प्राइवेट नौकरी शुरू की. फिर पिताजी की मौत के बाद एक आंटी की मदद से वे बिना पारिवारिक इजाजत के लखनऊ आ गईं और फिर शुरू हुआ जिंदगी की जद्दोजेहद भरा दूसरा दौर.

रीटा शर्मा ने नौकरी के साथ एमबीए किया. इस बीच कुछ निजी परेशानियों के चलते वे डिप्रैशन में आ गईं और उन के बाहर के काम करने पर रोक लग गई. काउंसलिंग और इलाज के दौरान अपना शौक पूरा करने के लिए उन्होंने एक गैरसरकारी संस्था खोल कर बेसहारा लोगों की मदद करने की सोची, वह भी उस वक्त जब उन्हें खुद मदद की जरूरत थी.

ये भी पढ़ें- छोटी जात की बहू

25 दिसंबर, 2015 को इस संस्था का पहला प्रोग्राम जरूरतमंदों को कपड़े बांटने के साथ शुरू हुआ था. उन की इस मुहिम को आगे बढ़ाने में सोशल मीडिया को वे अहम कड़ी मानती हैं.

भविष्य की बात करें, तो रीटा शर्मा अब राजनीति के क्षेत्र में आ कर बड़े लैवल पर समाजसेवा करना चाहती हैं. उन का यह सपना कब और कैसे पूरा होगा, यह तो भविष्य ही बताएगा, पर इतना तो पक्का है कि ऐसी जुझारू लड़कियां अपने बुलंद हौसलों से देश और समाज में पौजिटिव बदलाव लाने का माद्दा रखती हैं और एक छिपी नायिका की तरह उलझे हुए मामले अपनी सूझबूझ और हिम्मत से सुलझा कर कुछ लोगों की जिंदगियां खुशियों से भर देती हैं.

फुजूल की ट्रंप सेवा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत की 36 घंटों की यात्रा पर जो तैयारी भारत सरकार ने की थी, वह पागलपन का दौरा ज्यादा थी. डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के चुने हुए राष्ट्रपति जरूर हैं और हो सकता है कि 2020 के चुनावों में एक बार फिर चुन लिए जाएं, पर वे न तो विश्व नेता हैं और न ही अमेरिकी जनता के नेता. वे सिर्फ हेरफेर, रूसी कृपा से, अमेरिकी गोरों की भड़ास पूरी करने वाले सिरफिरे से विशुद्ध व्यवसायी हैं जो राजनीति में घुस गए और जैसे व्यापार चलाते हैं, वैसे ह्वाइट हाउस चला रहे हैं.

उन्हें अमेरिका के सर्वोच्च पद पर बैठे होने के कारण इज्जत पाने का हक है, पर हम अपना दिल और दिमाग बिछा दें, इस की कोई जरूरत नहीं. उन का स्वागत एक आम पदासीन राष्ट्राध्यक्ष की तरह से होना चाहिए था, उन से व्यापार व कूटनीति के समझौते होने चाहिए थे, पर इतना होहल्ला मचाना अपनी कमजोरी दिखाता है.

अमेरिका अब भारत जैसे देश को कुछ दे नहीं सकता. एक समय पब्लिक ला 480 के अंतर्गत अमेरिका ने भारत की भूखी जनता को मुफ्त गेहूं दिया था. आज हमारा अपना भंडार लबालब भरा है. भारत अमेरिका से जो पाता है, वह खरीदता है, मुफ्त नहीं पाता. अमेरिका भारत की विदेश नीति में कोई खास मदद नहीं करता. अमेरिका में लाखों भारतीय मूल के लोग नागरिक हैं या अन्य वर्क वीजाओं के अंतर्गत काम कर रहे हैं, पर यह किसी राष्ट्रपति की कृपा नहीं है, यह अमेरिकियों की जरूरत है.

ये भी पढ़ें- गहरी पैठ

अमेरिका अब दूसरा सब से मजबूत लोकतंत्र होने का लंबाचौड़ा रोब भी मार नहीं सकता, क्योंकि भारत और अमेरिका दोनों जगह नागरिकों की स्वतंत्रताएं आज बेहद खतरे में हैं. अमेरिका की जेलें लाखों कैदियों से लबालब भरी हैं और भारत की जेलें यातनाघर हैं, जहां बिना सजा पाए लोग वर्षों गुजार देते हैं. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अमेरिका और भारत दोनों में सरकारी या व्यापारिक ग्रहण लग चुका है.

अमेरिका अब किसी भी माने में दुनिया का सिपाही नहीं है और भारत किसी भी माने में एक आदर्श विकासशील देश नहीं है. ऐसे में भारत की अमेरिकी राष्ट्रपति की चाटुकारिता एक बेवकूफी से ज्यादा कुछ नहीं है, इसीलिए डोनाल्ड ट्रंप के बारे में जनता में कहीं भी जोश नहीं है. टीवी मीडिया इसे तमाशे के रूप में दिखाता रहा है और सड़कों पर भीड़ भाड़े पर ही आई थी. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यह क्षणिक यात्रा मात्र एक कौमा है, निरर्थक सा.

बढ़ गई बेकारी

गांवकसबों में बेकारी आज की सरकार के लिए कोई परेशानी की बात नहीं है. पुराणों में बारबार यही दोहराया गया है कि शूद्रों और उन के नीचे जंगलवासियों को कम में रहने की आदत होनी चाहिए और राजा को उन के पास जो भी हो छीन लेना चाहिए. यह हुक्म पुराणों में भरा हुआ है कि राजा जनता से धन एकत्र कर के ब्राह्मणों को दान कर दे.

आज देशभर की सरकारें यही कर रही हैं, चाहे किसी भी पार्टी की क्यों न हों. आरक्षण से जो उम्मीद बनी थी कि सदियों से दबाएकुचले किसान, कारीगर, मजदूर, कलाकार, मदारी, लोहार, बढ़ई, बिना जमीन वाले मजूर अपने बच्चों को पढ़ालिखा कर सरकारी नौकरी पा जाएंगे, अब खत्म होती जा रही है. मनरेगा जैसे प्रोग्राम की भी गरदन मरोड़ दी गई है. स्कूलों में खाना खिलाने में छुआछूत इस कदर फैल गया है कि अब निचले तबकों के बच्चे स्कूल जाने से कतराने लगे हैं.

इन गरीबों को अब मालूम पड़ गया है कि उन का कुछ भला न होगा. अकेले उत्तर प्रदेश में पिछले 2 सालों में 12 लाख से ज्यादा लोग बेरोजगार हो गए हैं और वे अब अपने घर वालों पर बोझ बन गए हैं. गरीब घरों में जब एक बेरोजगार और आ जाए तो आमदनी तो कम हो ही जाती है. जो रहनसहन पहले सब का था, वह एक निठल्ले की वजह से और हलका हो जाता है. हर घर में झगड़े शुरू हो गए हैं.

मंदिर, आश्रम, पूजापाठ का जो चसका हाल के सालों में चढ़ा है उस ने गांवकसबों की तसवीर और खराब कर दी है. खाली बैठे लोग मंदिरों से कमाई की खातिर मंदिरों के इर्दगिर्द दुकानें लगा कर बैठ गए हैं. जहां मिलता तो जरा सा है, पर यह भरोसा हो जाता है कि भगवान की कृपा होगी.

सरकार के खजाने में पैसा कम हो रहा है, क्योंकि एक तरफ टैक्स कम मिल रहे हैं, दूसरी तरफ सरकारी फुजूलखर्ची बढ़ रही है. सारे देश में पुलिस पर बेहद खर्च बढ़ रहा है. नागरिक संशोधन कानून से देश में अफरातफरी मची है, जिस के लिए चप्पेचप्पे पर पुलिस तैनात है और कहीं से तो पैसा आएगा ही. कश्मीर में कई लाख सैनिक, अर्धसैनिक और पुलिस वाले हैं. लाखों को नागरिकों पर नजर रखने के लिए लगा दिया गया है. मंदिरों पर सरकार बेतहाशा खर्च कर रही है.

ये भी पढ़ें- बेरोजगारी का आलम

प्रधानमंत्री रोजगार योजना एक छोटा नमूना है जिस में पिछले साल 6 लाख मजदूर काम कर रहे थे, इस साल ढाई लाख रह गए. देशभर में कहीं भी न कुएं खुद रहे हैं, न डैम बन रहे हैं, न नहरें बन रही हैं, न जंगल उगाए जा रहे हैं.

देश में 16-27 साल के बीच के एकचौथाई जवान लड़केलड़कियां बेकार हैं और सरकार को मंदिर बनाने की पड़ी है. जीएसटी की वजह से लाखों छोटे दुकानदारों ने काम बंद कर दिया, क्योंकि उन का काम नकद से चलता था और जीएसटी में यह नहीं हो पाता. इन दुकानों पर काम करने वाले आज बेकार हैं. देश में नए मकान बनने कम हो गए हैं और नए मजूरों के लिए काम खत्म हो गया है.

गाडि़यां कम बिक रही हैं तो पैट्रोल कम बिक रहा है, सड़क के किनारे बनी गाड़ी मरम्मत की दुकानें उजड़ रही हैं. सरकारी विभागों में 22 लाख पद खाली हैं, पर सिवा भरती के विज्ञापन देने के कोई काम नहीं हो रहा.

यह देश के कल की बुरी हालत का एक जरा सा हलका सा निशान है, पर यह पुराणों की बात साबित करता है.

पौलिटिकल राउंडअप : भाजपाई बनीं वीरप्पन की बेटी

चेन्नई. कुख्यात चंदन और हाथी दांत तस्कर रहे वीरप्पन की बेटी विद्यारानी ने 22 फरवरी को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली. इस के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने भाजपा को निशाने पर लेना शुरू कर दिया, जबकि इस बारे में विद्यारानी का कहना है कि उन्हें उन के पिता से जोड़ कर नहीं देखना चाहिए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित हो कर वे भाजपा में शामिल हुई हैं.

बचपन से ही आईएएस बनने का सपना देखने वाली विद्यारानी अपने गांव और आसपास के इलाके में साफ पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के सुधार के लिए काम करना चाहती हैं.

विद्यारानी ने कहा, ‘मेरे पिता के रास्ते जरूर गलत थे, लेकिन उन्होंने हमेशा गरीबों के बारे में ही सोचा. मैं अब सही रास्ते पर चल कर सही काम करने की कोशिश कर रही हूं.’

आजम खान की गिरफ्तारी

लखनऊ. समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और सांसद आजम खां और उन के परिवार को 26 फरवरी को जेल भेजे जाने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आगबबूला होते हुए कहा कि यह बदले की भावना से किया गया है और सत्ता का गलत इस्तेमाल करना भाजपा की राजनीतिक आदत है.

ये भी पढ़ें- मिथिला की बेटी ने उड़ा दी है नीतीश कुमार की नींद

डिप्टी सैक्रेटरी के यहां पड़ा छापा

रायपुर. छत्तीसगढ़ के सीएमओ में डिप्टी सैक्रेटरी के पद पर तैनात सौम्य चौरसिया के घर पर 28 फरवरी को इनकम टैक्स डिपार्टमैंट ने छापा मारा तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे ‘राजनीतिक बदला’ बताया और केंद्र सरकार पर प्रदेश की बहुमत वाली सरकार को अस्थिर करने का आरोप भी लगाया.

इस से पहले रायपुर में पुलिस ने इनकम टैक्स महकमे के नो पार्किंग इलाके पर खड़ी गाडि़यों को जब्त कर लिया था. इनकम टैक्स महकमे ने 27 फरवरी को महापौर एजाज ढेबर समेत कई बड़े अफसरों के यहां छापे मारे थे.

राहुल गांधी को मिली राहत

रांची. कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके राहुल गांधी को लोकसभा चुनावों के समय ‘सभी मोदियों को चोर बताए’ जाने के बयान के मामले में निचली अदालत से जारी सम्मन पर झारखंड हाईकोर्ट ने 27 फरवरी को राहत देते हुए उन्हें निजीतौर पर पेशी से छूट दी.

रांची की निचली अदालत ने राहुल गांधी को मानहानि के एक मामले में सम्मन जारी करते हुए 28 फरवरी को खुद या अपने वकील के जरीए अदालत में हाजिर होने का निर्देश दिया था.

निचली अदालत में वकील प्रदीप मोदी ने राहुल गांधी पर 20 करोड़ रुपए की मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था, जिस में कहा गया कि लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान रांची के मोरहाबादी मैदान में कांग्रेस की सभा में राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी, नीरव मोदी, ललित मोदी का नाम लेने के साथ कहा था कि जिन के नाम के आगे मोदी है वे सभी चोर हैं.

मुसलिम रिजर्वेशन पर रार

मुंबई. पढ़ाईलिखाई में मुसलिमों को 5 फीसदी रिजर्वेशन देने को ले कर महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार में अलगअलग राय नजर आई. राकांपा के कोटे से एक मंत्री ने जहां मुसलिमों को 5 फीसदी रिजर्वेशन के लिए जल्द एक कानून लाने की बात कही, वहीं शिव सेना के मंत्री ने कहा कि इस संबंध में अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है.

इस से पहले 28 फरवरी को महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की अगुआई वाली गठबंधन सरकार ने कहा था कि वह मुसलिमों को स्कूलकालेजों में रिजर्वेशन देने के लिए कानून बनाएगी. इस के लिए कांग्रेस और राकांपा की तरफ से मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर पहले से दबाव बनाया जा रहा था.

ये भी पढ़ें- पौलिटिकल राउंडअप : मध्य प्रदेश में बड़ा घोटाला

कमलनाथ का केंद्र से सवाल

इंदौर. देशभर में अपने स्वादिष्ठ पोहे के लिए मशहूर इस शहर में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 28 फरवरी को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला करते हुए सवाल किया कि देश में आखिर ऐसी कौन सी आफत आ गई थी, जो केंद्र सरकार को संशोधित नागरिकता कानून बनाना पड़ा और सीएए में क्या है, वह बात छोडि़ए, लेकिन सवाल है कि क्या कोई युद्ध चल रहा है या देश में बड़ी संख्या में शरणार्थी आ रहे हैं जो केंद्र सरकार ने सीएए का चक्कर चला दिया? यह कानून बनाने की आखिर क्या जरूरत थी? इस कानून का आखिर क्या मकसद है?

कन्हैया को लपेटा

नई दिल्ली. दंगों में जल रही दिल्ली की आंच बढ़ाने के लिए जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी देशद्रोह केस में भाकपा नेता व जेएनयू स्टूडैंट यूनियन के अध्यक्ष रह चुके कन्हैया कुमार समेत 10 और लोगों के खिलाफ अरविंद केजरीवाल की दिल्ली सरकार ने 28 फरवरी को मुकदमे की मंजूरी दे दी, जो शायद अमित शाह के दबाव में दी गई है. केजरीवाल हाल में पलटी मारते नजर आ रहे हैं.

सुशील मोदी के कड़े बोल

पटना. ज्योंज्यों बिहार के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, त्योंत्यों वहां एकदूसरे की खिंचाई करने का माहौल बनने लगा है.

भारतीय जनता पार्टी और जनता दल की गठबंधन सरकार को घेरने के लिए विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ‘बेरोजगारी हटाओ यात्रा’ निकाल रहे हैं. उसे ले कर भाजपाई नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार  मोदी ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया.

उन्होंने कहा है कि तेजस्वी यादव खुद इतने पढ़ेलिखे हैं नहीं कि कोई सम्मानजनक नौकरी पा सकें, लेकिन वे लाखों बिहारियों की नौकरी खतरे में डालने वाली मांग को जरूर तूल दे रहे हैं.

इस से पहले शनिवार, 29 फरवरी को तेजस्वी यादव ने अपने ट्वीट में लिखा था, ‘उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी कह रहे हैं कि बिहार के 7 करोड़ बेरोजगार युवाओं को नौकरी लेने अब चांद पर जाना होगा, क्योंकि नीतीशजी बिहार में नौकरी नहीं दे सकते…’

ये भी पढ़ें- दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 : आप का दम बाकी बेदम

ममता बनर्जी का दर्द

कोलकाता. देश में फैले दंगों पर मची राजनीति से दुखी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोगों से समाज से जाति, पंथ और धर्म के आधार पर सभी तरह के विभाजन को उखाड़ने की अपील की.

ममता बनर्जी का यह बयान 1 मार्च को उस दिन आया, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में सीएए के समर्थन में एक रैली की थी.

Yeh Rishta में आएगा नया ट्विस्ट, क्या जिंदा है कार्तिक-नायरा की बेटी ‘कायरा’?

स्टार प्लस (Star Plus) का पौपुलर सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है (Yeh Rishta Kya Kehelata Hai) में कार्तिक (Kartik) और नायरा (Naira) की जिंदगी से तो जैसे सारी खुशियां चली ही गई हैं. आए दिन इस सीरियल में कुछ ना कुछ ऐसा जरूर हो जाता है जिससे कि कार्तिक-नायरा (Kartik-Naira) परेशान हो जाते हैं. कार्तिक-नायरा की कहानी में तो जैसे हर दिन एक अलग ट्विस्ट नजर आता है और शायद यही वजह है कि इतने समय से ये सीरियल दर्शकों के दिलों में बस चुका है और सिर्फ सीरियल ही नहीं बल्कि इस सीरियल के लीड आर्टिस्ट मोहसीन खान (Mohsin Khan) और शिवांगी जोशी (Shivangi Joshi) भी दर्शकों के फेवरेट बने हुए हैं.

ये भी पढ़ें- Yeh Rishta में खत्म हो जाएगी नायरा की कहानी, कायरव और कार्तिक को ऐसे कहेगी अलविदा

सीढियों से गिरी गायू…

बीते एपिसोड्स में आपने देखा कि कार्तिक-नायरा (Kartik-Naira) ने काफी मुश्किलों का सामना करते हुए लव-कुश (Luv-Kush) को सजा दिलवा दी है और साथ ही त्रिशा (Trisha) के न्याय भी मिल चुका है. यह सब खत्म करके दोनों अपने प्यार भरे पल गुजार ही रहे थे कि इतने में गायू जो कि मां बनने वाली है कि सीढियों से गिर जाती है और कार्तिक-नायरा दोनों दौड़ कर उसके पास जाते हैं. गायू को इस हालत में देख कार्तिक घरवालों को आवाज़ देने ही वाला होता है कि इतने में गायू उसे रोक देती है.

ये भी पढ़ें- होली पर लव-कुश का पर्दाफाश करेंगे कार्तिक-नायरा, ऐसे होगा खुलासा

नायरा को लगा गहरा सदमा…

गायू की बात मानते हुए कार्तिक-नायरा बिना किसी को बताए उसे हौस्पिटल ले जाते हैं लेकिन कार्तिक जिस हौस्पिटल में गायू को लेकर जाता है वहीं कुछ साल पहले कार्तिक और नायरा की बेटी की मौत हुई थी. नायरा को हौस्पिटल पहुंचते ही गहरा सदमा लगता है और वे तुरंत वहां से निकल कर बाहर गार्डन में आकर बैठ जाती है जहा उसे ढूंढते हुए कार्तिक भी पहुंच जाता हैं.

ये भी पढ़ें- सुरेखा ने कायरव पर लगाया चोरी का इल्जाम, दादी ने नायरा को किया ब्लैकमेल

नायरा की सारी पुरानी यादें हुईं ताज़ा…

वहां सभी बच्चों को खेलता देख नायरा अपनी बेटी को याद कर खूब रोती है और कार्तिक उसे चुप कराने की कोशिश करता है. नायरा की सारी पुरानी यादें ताज़ा हो जाती है जिससे वह हद से ज्यादा इमोश्नल हो जाती है. घर आते ही वह कायरव को देखती है और देखते ही उसे गले लगा कर रोने लगती है. ऐसे में सीरियल के अपकमिंग ट्रैक का अंदाजा लगाया जा सकता है कि कायरव (Kairav) को उसकी बहन मिल सकती है.

ये भी पढ़ें- लव-कुश की वजह से कार्तिक-नायरा ने छोड़ा घर, कायरव से भी हुए दूर

क्या कार्तिक और नायरा की बेटी आएगी वापस…

खबरों की माने तो शो के मेकर्स अब इस सीरियल में एक अलग ही ट्विस्ट लेकर आने वाले हैं जिसमें आने वाले एपिसोड्स में कार्तिक और नायरा की बेटी के वापस आने की पूरी पूरी उम्मीद लगाई जा सकती है.

‘ये गलती आप लोग ना करे जो मैंने की अनजाने में’ – भोजपुरी ऐक्ट्रेस रानी चटर्जी

जहां पूरा देश कोरोना (Corona) के भय से भयभीत दिख रहा है. वहीं अलग-अलग लोग अपने-अपने तरीकों से लोगों को जागरूक भी कर रहें हैं. कोरोना से बचाव के लिए जागरूकता फैलानें में आम आदमी से लेकर सेलेब्रेटी तक का नाम शामिल है. फिर इसमें भोजपुरी एक्टर्स कैसे पीछे रहें. इसी कड़ी में भोजपुरी ऐक्ट्रेस रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) भी लोगों को कोरोना से बचाव के टिप्स लगातार देती नजर आ रहीं हैं.

ये भी पढ़ें- होली पर रिलीज खेसारीलाल यादव की इस फिल्म को मिली धमाकेदार शुरुआत, देखें फोटोज

आखिर क्यों कहा रानी चटर्जी ने ऐसा…

 

View this post on Instagram

 

Main meri FAVORITE hu that’s why i am the happiestwoman #onelife ❤️❤️❤️

A post shared by Rani Chatterjee Official (@ranichatterjeeofficial) on

रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) द्वारा दिए जा रहे कोरोना से बचाव के मैसेज के दौरान कुछ ऐसा हुआ की उन्हें यह कहना पड़ा की “ये गलती आप लोग ना करे जो मैंने की अनजाने में”. इसको लेकर उन्होंने अपने इन्स्टाग्राम पर बकायदा एक वीडियो पोस्ट कर उसके कैप्शन में लिखा है ये गलती आप लोग ना करे जो मैंने की अनजाने में 🥴🥴🥴🥴🥴🥴🥴🥴🥴🥴🥴 #besafe #loveyouall

ये भी पढ़ें- सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड : मनोज सिंह टाइगर को मिला बेस्ट पौपुलर कामेडियन अवार्ड

गुंजन पन्त ने भी कमेंट करके दी सबको सलाह…

 

View this post on Instagram

 

केहर गिराना मेरा काम है 🤪❤️ #love #beuty #me

A post shared by Rani Chatterjee Official (@ranichatterjeeofficial) on

इसके बाद इनके इस पोस्ट पर तमाम लोगों ने कमेन्ट भी किये हैं. पोस्ट किये गए वीडियो पर अभिनेत्री गुंजन पन्त (Gunjan Pant) नें रानी को सलाह दी है, “ध्यान दें, रूमाल का इस्तेमाल अपने मुंह और नाक को कम से कम ढकने के लिए करें “mind it, Use handkerchief to cover your mouth and nose atleast”. किये गए कमेन्ट में उनके फैन्स और फालोअर्स उन्हें खुद कोरोना से बचाव की सलाह देते नजर आ रहें हैं.

ये भी पढ़ें- आनंद ओझा और काजल रघवानी की बहुप्रतीक्षित फिल्म “रण” का फर्स्टलुक हुआ आउट

रानी चटर्जी से हुई ये गलती…

 

View this post on Instagram

 

#workmode #feelinggood #happy ,❤️❤️❤️❤️

A post shared by Rani Chatterjee Official (@ranichatterjeeofficial) on

रानी चटर्जी अपने किये गए पोस्ट में मुम्बई एयरपोर्ट पर नजर आ रहीं हैं जिसमें वह बिना मास्क के लोगों से कोरोना से बचाव की अपील कर रहीं हैं. उन्होंने अपने वीडियो में कहा है “ जा रहीं हूं कोलकाता और मै इस समय मुम्बई एयरपोर्ट पर हूं. और पूरा एयरपोर्ट वैसे खाली है देख सकतें है आप लोग. लेकिन जितने भी लोग यहां दिख रहें है सबने मास्क पहना हुआ है. और मै दो दिन से अपडेट कर रही हूं मास्क पहनियें, मास्क पहनियें, मास्क पहनियें बी सेफ, बी सेफ बी सेफ और मै अपना मास्क घर पर भूल कर आ गई हूं.

ये भी पढ़ें- यूट्यूब क्‍वीन आम्रपाली दुबे का धमाकेदार गाना ‘लगा के वैसलीन’ हुआ Viral, देखें Video

इसके बाद रानी ने रोनी सूरत बना लिया. तब भई आप लोग वह गलती ना करें जो रानी चटर्जी ने किया है यानी बचाव ही इलाज है.  खास कर कोरोना के मामले में तो आप भी साफ-सफाई का ख्याल रखिये, बढ़िया से हाथ धुलिये, मास्क न हो तो रुमाल और दुपट्टे को मास्क की तरह उपयोग में लाइए.

इन्स्टाग्राम वीडियो लिंक –

Disha Patani की यह Photo हुई Viral, फैंस ने किए ऐसे कमेंट्स

दिशा पटानी (Disha Patani) अपनी हौट और सेक्सी तस्वीरों को लेकर हमेशा चर्चा में रहती हैं. इस बार उनकी जो तस्वीर चर्चा में है उसे सोशल मीडिया पर खूब तारीफ मिल रही है तो किसी-किसी ने मजाक भी बनाया है. इन्स्टाग्राम और ट्विटर पर शेयर किये गए तस्वीर पर यूजर के खूब लाइक और कमेन्ट मिल रहे है. इन्स्टाग्राम पर शेयर की गई इस तस्वीर पर जहां 17 घंटे के भीतर 14,33,171 लाइक मिल चुके थे वहीं इन्स्टाग्राम की ही दूसरी तस्वीर पर 24,62,549 लाइक मिल चुका है. वह एक वीडियो पोस्ट जिसमें वह मस्ती करती नजर आ रहीं हैं उस पर भी 46,42,933 लाइक्स मिल चुके हैं.

ये भी पढ़ें- एक साथ रोमांस करते दिखे असीम रियाज और हिमांशी खुराना, नए गाने का पोस्टर आउट

 

View this post on Instagram

 

#malang out today ❤️

A post shared by disha patani (paatni) (@dishapatani) on

ट्विटर पर किये गए फोटो शेयर के कैप्शन में दिशा नें लिखा है “मलंग डायरीज” #malangdiaries. इस फोटो को शेयर करने के बाद उनके फैन्स की मिली जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. जहां यूजर तस्वीर की तारीफ करते नजर आ रहें हैं तो वहीं कुछ नें मीम्स के साथ मजाक भी बनाया है.

ये भी पढ़ें- Yeh Rishta में खत्म हो जाएगी नायरा की कहानी, कायरव और कार्तिक को ऐसे कहेगी अलविदा

 

View this post on Instagram

 

#malangdiaries 🌸

A post shared by disha patani (paatni) (@dishapatani) on

Pankaj Kumar Sain नें तारीफ करते हुए लिखा हैं ‘सबसे जुदा बौलीवुड में दिशा’ “Sabse juda bollywood me disha”. वहीं आनन्द कागिता (Anand Kagita) नें तारीफ करते हुए लिखा है “Your smile is very cute @DishPatanimadam.” गोर्धन गुर्जर (Gordhan Gurjar) ने अपने कमेन्ट में लिखा है “मलंग मूवी वेरी वेरी नाइस सो क्यूट दिशा जी” “Malang Movie Very Very Nice So cute Disha ji”.

ये भी पढ़ें- सपना चौधरी का नया हौट फोटशूट आया सामने, अपकमिंग गाने का पोस्टर भी किया शेयर

 

View this post on Instagram

 

🌸

A post shared by disha patani (paatni) (@dishapatani) on

भगवान The God नाम के यूजर नें तस्वीर पर मजाक बनाते हुए लिखा है “अरे कोई तो मैप दो इसको देख के तो हम भी दिशा भूल जाते है”. सागर दत्त (Sagar Dutt) नाम के यूजर नें लिखा है यहां लोग कोरोना वायरस से मर रहें हैं और यह ब्रेनलेस मैडम मलंग-मलंग कर रहीं हैं. “Yaha log corona virus se mar rahe hai aur iss brainless madam malang malang kar rai hai”. पराजय नाईक (Prajay Naik) नें कमेन्ट किया है “इनका कोई अलग ही वायरस चल रहा है. Inka koi alag hi virus chal Raha hai.”

ये भी पढ़ें- अपने बोल्ड फोटोशूट को लेकर फिर ट्रोल हुई दीपिका पादुकोण, यूजर्स ने किए ऐसे कमेंट्स

 

View this post on Instagram

 

#malang🌸🌼

A post shared by disha patani (paatni) (@dishapatani) on

अभी हाल में ही दिशा पाटनी (Disha Patani), आदित्य रौय कपूर (Aditya Roy Kapoor) और अनिल कपूर (Anil Kapoor) के साथ ‘मलंग (Malang)’  में नजर आई थी. उनकी इस फिल्म ने बौक्स औफिस पर अच्छा कलेक्शन किया था. वैसे दिशा सलमान खान (Salman Khan) के साथ फिल्म ‘राधे, योर मोस्ट वान्टेड भाई’ (Radhe – Your Most Wanted Bhai) में भी नजर आने वाली हैं. यह एक एक्शन-ड्रामा फिल्म है, जिसे प्रभु देवा (Prabhudeva) निर्देशित कर रहें हैं.

Pankaj Kumar Sain का कमेन्ट लिंक –

आनन्द कागिता का कमेन्ट लिंक –

ये भी पढ़ें- क्या शहनाज के स्वयंवर वाले शो करने से नाराज हैं सिद्धार्थ, जानें एक्टर का जवाब

गोर्धन गुर्जर Gordhan Gurjar का कमेन्ट –

भगवान् The God नाम के यूजर का कमेन्ट –

सागर दत्त का कमेन्ट लिंक –

पराजय नाईक  का कमेन्ट लिंक –

कहकशां अंसारी – फुटबाल ने बदल दी जिंदगी

लेखिका- निभा सिन्हा

24 दिसंबर, 1994 को गोरखपुर की बसंत नरकटिया नामक जगह पर कहकशां अंसारी ने जन्म लिया, तो सब से ज्यादा मायूस अब्बा मोहम्मद खलील अंसारी हुए थे.

वजह, लड़कियों का क्या, वे तो भारी खर्च करा कर शादीब्याह कर के दूसरे का घर आबाद करेंगी. बेटा होता तो बड़ा हो कर उन के काम में हाथ बंटाता.

मोहम्मद खलील अंसारी गीता प्रैस गोरखपुर में काम करते थे, पर घरखर्च चलाने के लिए अरबी भाषा की ट्यूशन भी लेते थे.

नन्ही कहकशां बचपन से ही चंचल, हठी और बातूनी थी. एक बार जो ठान लिया, उसे पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ती थी. उस के घर या आसपास की लड़कियां जब सिर पर दुपट्टा रख गुड्डेगुडि़यों का खेल खेलती थीं, मेहंदी लगवाने या नई चूडि़यां पहनने की जिद करती थीं, तब कहकशां इधरउधर ऊधम मचाती फिरती थी या हमउम्र दोस्तों को चिढ़ाया करती थी.

कहकशां को गेंद से खेलना बहुत भाता था. गेंद से खेलतेखेलते कब उसे फुटबाल से लगाव हो गया, पता ही नहीं चला, पर फुटबालर बनना उस के लिए इतना आसान भी नहीं था. स्कूल में उसे सिर्फ गेम्स पीरियड में ही खेलने का मौका मिल पाता था.

ये भी पढ़ें- मजबूत बदन की बेखौफ टौम गर्ल नीलम सिंह

कहकशां के हुनर और लगन को देखते हुए 7वीं जमात में उस का चयन अपने स्कूल ‘इमामबाड़ा मुसलिम गर्ल्स इंटर कालेज, गोरखपुर’ की फुटबाल टीम में हो गया था. यह उस के लिए बड़ी खुशी की बात थी, पर घर के बड़ेबुजुर्गों ने इस की पुरजोर खिलाफत की थी.

कहकशां पहले 2-3 दिनों तक तो चुप ही रही, फिर उस ने हिम्मत और अक्ल से काम लिया. वह सीधे पहुंच गई फुटबाल कोच आरडी पौल के पास. उन्हें अपना दुखड़ा सुनाया और अगले दिन उन्हें अपने घर ले कर पहुंच गई.

कोच आरडी पौल ने अम्मीअब्बू से बात की, कहकशां के हुनर और मजबूत इरादों से परिचित करा कर उन्हें राजी तो कर लिया, पर संयुक्त परिवार के दूसरे कई सदस्यों की खिलाफत फिर भी जारी रही.

अम्मीअब्बू के हां कहने के बाद तो कहकशां की खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा. उस ने अपनी मेहनत दोगुनी कर दी. बेटी की उपलब्धि ने अब्बू का दिल भी जीत लिया था. बेटी के सपनों को पूरा करने में अब वे भी साथ देने लगे. गरमी के दिनों में सुबह साढ़े 4 बजे और सर्दियों में सुबह साढ़े 5 बजे उसे उठाते, अपने साथ ले जा कर ग्राउंड में छोड़ते और वहीं से मसजिद चले जाते.

सुबह के 8 बजे तक कहकशां प्रैक्टिस करती, घर आ कर अम्मी के काम में थोड़ा हाथ बंटाती और फिर तैयार हो कर स्कूल पहुंच जाती, शाम को फिर अभ्यास. यही दिनचर्या बन गईर् थी उस की.

कहकशां की मेहनत रंग लाई और अगली बार ही उस का चयन सबजूनियर नैशनल फुटबाल टीम में हो गया. अब्बू खुश थे, पर इस बार अम्मी अड़ गईं कि वे उसे बाहर नहीं जाने देंगी. बड़ी मुश्किलों के बाद किसी तरह अम्मी को राजी कर लिया गया.

अपनी तरफ से कहकशां कोशिश करती कि अच्छा खेले, पर कई बार गलतियां हो जाती थीं. कमियों को दूर करने के लिए कोच द्वारा बुरी तरह डांट भी पड़ती थी. साधन सीमित थे और मंजिल दूर, उसे महसूस हुआ कि अच्छे इंटरनैशनल खिलाडि़यों के खेल देख कर वह अपनी कमियों को दूर कर सकती है.

घर में टैलीविजन नहीं था. जिस दिन फुटबाल मैच देखना होता, वह शाम को थोड़ी दूरी पर रहने वाली अपनी बूआ के घर पहुंच जाती. वहां थोड़ा पढ़लिख कर बूआ के कामों में हाथ बंटाती और रात में मैच देखती, फिर वहीं से सुबह प्रैक्टिस करने समय पर गाउंड में पहुंच जाती.

ये भी पढ़ें- गांव की लड़की और शादी से पहले सेक्स

अब कहकशां के हुनर को रफ्तार मिल गई. उस ने सबजूनियर नैशनल, जूनियर नैशनल सभी खेला. 2008 में अंडर 14 में बिहार वुमंस चैंपियनशिप में उत्तर प्रदेश की तरफ से कहकशां ने प्रतिनिधित्व किया. उस की टीम जीती. उसे बैस्ट कैप्टन और बैस्ट प्लेयर घोषित किया गया. साल 2010 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा गोरखपुर में ‘पूर्वांचल सम्मेलन समारोह’ में सम्मानित करते हुए सर्टिफिकेट दिया गया.

एक तरफ कहकशां को फुटबालर बनने की तमन्ना थी, तो वहीं दूसरी तरफ पढ़ने का हौसला भी रखती थी. स्कूल तक की पढ़ाई तो पूरी हो गई, पर आगे की पढ़ाई जारी रखने में माली चुनौतियां सामने थीं. स्कूल के दिनों में ही बीमारी के चलते अब्बू को नौकरी छोड़नी पड़ी थी.

पर कहते हैं न कि ‘लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती’, डरना तो कहकशां जानती ही नहीं थी, बस उस का भी समाधान निकाल लिया इस हठी लड़की ने. कालेज की पढ़ाई के बाद लाइब्रेरी में जा कर पढ़ती और उस के बाद कई घरों में ट्यूशन पढ़ा कर रात 9 बजे तक घर लौटती, ताकि समय से फीस भरी जा सके.

आज कहकशां अपनी लगन और मेहनत के बल पर गे्रजुएशन के साथसाथ बैचलर औफ फिजिकल ऐजूकेशन का कोर्स पूरा कर चुकी है और संफोर्ट वर्ल्ड स्कूल, ग्रेटर नोएडा में फुटबाल कोच के रूप में काम करती है.

कहकशां के अब्बू अब इस दुनिया में नहीं हैं. उन के बाद अम्मी व 5 छोटे भाईबहनों की पढ़ाईलिखाई की जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए स्कूल खत्म होने के बाद शाम को ‘बाइचुंग भूटिया फुटबाल स्कूल, ग्रेटर नोएडा’ में 2 घंटे बच्चों को फुटबाल खेलने की ट्रेनिंग देती है.

अपनी जद्दोजेहद के बारे में पूछने पर कहकशां कहती है, ‘‘अभी लहरों के बीच नौका में पतवार चलानी शुरू की है. मंजिल तो अभी बाकी है, दूर है… पर नामुमकिन नहीं.’’

ये भी पढ़ें- छोटी जात की बहू

कहकशां का फिजिकल ऐजूकेशन में मास्टर डिगरी और पीएचडी कर के अपनी अकादमी शुरू करने का इरादा है, ताकि भारतीय फुटबाल टीम के लिए और भी कहकशां पैदा की जा सकें.

3 साल बाद मिला इंसाफ

बंगलादेश की राजधानी ढाका में होली आर्टिसन बेकरी नाम का एक कैफे है. उस दिन शाम सुहानी थी. तारिषी जैन अपने पिता संजीव जैन व 2 दोस्तों अबिंता कबीर व फराज अयाज हुसैन के साथ कैफे में डिनर पर गई थी. यह कैफे ढाका के दूतावास क्षेत्र में था. डिनर आया भी नहीं था कि तारिषी के पिता के मोबाइल पर किसी का फोन आया, जिस की वजह से उन्हें जरूरी काम से कैफे से जाना पड़ गया.

पिता संजीव जैन को गए अभी कुछ समय ही हुआ था कि अचानक कैफे गोलियों और धमाकों की आवाज से गूंज उठा. पता ही नहीं चला कि कैफे में कब दबेपांव आतंकवादी घुस आए थे. ताबड़तोड़ गोलियां चलते ही कैफे में अफरातफरी मच गई. आतंकवादियों ने गोलियां चलाते हुए कैफे में घुस कर डिनर कर रहे मेहमानों को बंधक बना लिया.

उन्होंने कैफे में मौजूद मेहमानों को 12 घंटे तक अपने कब्जे में रखा. बंधक बनाने के बाद उन्होंने एकएक कर 22 लोगों को मौत के घाट उतार दिया. मरने वालों में उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद शहर की छात्रा तारिषी जैन सहित इटली के 9, जापान के 7, बंगलादेश में जन्मा एक अमेरिकी, बंगलादेश के 2 नागरिकों के अलावा 2 पुलिस अधिकारी भी शामिल थे.

ये भी पढ़ें- विदेशी शोलों में झुलसते भारतीय : भाग 2

कुछ देर में सेना के कमांडो भी वहां पहुंच गए. कमांडो औपरेशन में वे 5 आतंकवादी मारे गए, जिन्होंने कैफे में गोलीबारी की थी. यह घटना पहली जुलाई, 2016 को घटी थी. हमले के बाद बंगलादेश में चरमपंथ को ले कर नई बहस छिड़ गई. इतना ही नहीं, देश के उद्योग, व्यापार को ले कर भी चिंता बढ़ गई थी. क्योंकि देश के इतिहास में यह सब से भीषण आतंकवादी हमला था.

करीब 3 साल तक इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई ढाका की आतंकरोधी विशेष ट्रिब्यूनल में चल रही थी. विशेष ट्रिब्यूनल द्वारा 27 नवंबर, 2019 को इस केस का फैसला सुनाया जाना था.

हाईप्रोफाइल मामला होने के कारण कोर्ट परिसर और आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. इस विशेष अदालत में इन आतंकियों को कड़ी सुरक्षा के बीच लाया गया था. फैसले को ले कर कोर्टरूम पत्रकारों, वकीलों व अन्य लोगों से भरा हुआ था. सभी को इस फैसले का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार था. निर्धारित समय पर विशेष अदालत के जज मुजीबुर रहमान कोर्टरूम में आ कर अपनी कुरसी पर बैठे तो वहां मौजूद सभी लोगों की नजरें उन पर जम गईं.

आगे बढ़ने से पहले आइए हम इस आतंकवादी हमले को याद कर लें. यह आतंकवादी हमला इतना वीभत्स था कि विश्वभर में इस की गूंज सुनाई दी. इस आतंकवादी हमले ने बंगलादेश को ही नहीं, भारत सहित कई देशों को स्तब्ध कर दिया था. दूतावास इलाके में हमला होने से बंगलादेश की छवि धूमिल हुई थी. इस के बाद पुलिस ने जगहजगह छापेमारी कर सैकड़ों संदिग्धों को हिरासत में लिया था.

इस आतंकी हमले के तुरंत बाद इस की जिम्मेदारी आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने ली थी. लेकिन जांच में यह बात सामने आई कि इन आतंकियों का आईएस से कोई संबंध नहीं था. यह बात बंगलादेश सरकार ने भी स्वीकारी कि इस हमले में किसी विदेशी आतंकी संगठन का हाथ नहीं था. हमले के पीछे जिहादी संगठन जमायतुल मुजाहिदीन बंगलादेश (जेएमबी) का हाथ था. जांच में यह भी सामने आया था कि कमांडो औपरेशन में मारे गए 5 आतंकियों में से 2 आतंकी जाकिर नाइक से प्रभावित थे.

बंगलादेश पुलिस मामले की जांच में जुट गई. जांच में पता चला कि इस हमले में कई संदिग्ध हमलावर थे. इन में से 5 हमलावर कमांडो ने मौके पर ही ढेर कर दिए थे, अन्य की जांच एजेंसियों ने तलाश शुरू कर दी. अपने तलाशी अभियान में पुलिस ने अलगअलग मुठभेड़ के दौरान 8 आतंकी और मार गिराए, जबकि 8 जीवित आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया गया.

गिरफ्तार हुए दहशतगर्दों में जहांगीर हुसैन, रकीबुल हसन, असलम हुसैन, अब्दुल सबूर, सोहिल महफूज, हादुर रहमान और शरीफुल इसलाम मामूनुर रशीद थे.

हमले में मारे गए लोगों में शामिल 19 वर्षीय भारतीय लड़की तारिषी जैन का परिवार मूलरूप से उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद स्थित मोहल्ला सुहागनगर का रहने वाला था. तारिषी बर्कले यूनिवर्सिटी, कैलिफोर्निया की मेधावी छात्रा थी. वह वहां एमबीए (इकोनौमिक्स) कर रही थी.

तारिषी के पिता संजीव कुमार जैन ढाका में कपड़े का कारोबार करते थे. पिता संजीव जैन बिजनैस के सिलसिले में करीब 20 साल पहले हांगकांग शिफ्ट हो गए थे. उन के 2 बच्चे थे, तारिषी और संचित. तारिषी की शुरुआती पढ़ाई हांगकांग में ही हुई. संचित कनाडा में इंजीनियर की नौकरी कर रहा है.

ये भी पढ़ें- हत्या: मासूम ने खोला बुआ, दादी का राज!

गारमेंट कारोबार की वजह से संजीव जैन का परिवार सन 2007 में ढाका शिफ्ट हो गया था. 3 महीने की छुट्टियां होने पर तारिषी अपने मातापिता के साथ ढाका आई हुई थी. दूसरे दिन वह पिता संजीव जैन, मां तूलिका जैन व बड़े भाई संचित के साथ अपने चाचा राकेश मोहन के पास फिरोजाबाद जाने वाली थी. उस का भाई संचित जैन भी कनाडा से दिल्ली पहुंच गया था. सभी लोगों को दिल्ली से फिरोजाबाद जाना था. लेकिन खानाखाने गई तारिषी दहशतगर्दों का निवाला बन गई.

सेना के कमांडो ने लोगों को बचाने की काररवाई के दौरान कैफे में घुस कर 22 लोगों की हत्या करने वाले पांचों दहशतगर्दों को मार गिराया था. इन में निबरस इसलाम, रिहान इम्तियाज, मीर समी मुबस्सिर, रिपान व बिकाश शामिल थे.

घटना के बाद इन पांचों के फोटो आईएसआईएस द्वारा जारी किए गए. फोटो में ये लोग एके-47 व आईएसआईएस के झंडे के साथ दिखाई दे रहे थे.

खास बात यह कि इन पांचों ने मदरसे में तालीम नहीं ली थी, बल्कि सभी नामचीन स्कूलों के पढ़ने वाले, बड़े घरानों के युवक थे. इन के मासूम चेहरों के पीछे छिपी हैवानियत का किसी को पता नहीं था. ये लोग आईएसआईएस से कैसे जुडे़, इन के घर वालों तक को पता नहीं थी.

मृत आतंकियों के घर वालों को इस घटना के दूसरे दिन अखबारों व टीवी की खबरों से उन के मरने की जानकारी मिली. पहचान होने के बाद आतंकी के दोस्तपरिचित हैरान रह गए. इन में एक तो हिंदी फिल्मों की अभिनेत्री श्रद्धा कपूर का प्रशंसक था.

पांचों आतंकी जनवरी, 2016 से अपनेअपने घरों से गायब हुए थे. कुछ के घर वालों ने थाने में गुमशुदगी भी दर्ज करा रखी थी. सवाल यह था कि आखिर किस ने उन के हाथ से किताबें ले कर बंदूक थमा दी और उन के बस्तों में बारूद भर दी.

हमले के दौरान तारिषी जैन अपने दोस्तों अबिंता कबीर व फराज अयाज हुसैन के साथ कैफे के टौयलेट में छिप गई थी. वहीं से उस ने अपने पिता संजीव जैन व चाचा राकेश मोहन को फोन किया था. तारिषी के अंतिम शब्द रोंगटे खड़े करने वाले थे. उस ने कहा, ‘आतंकी रेस्तरां में घुस आए हैं. मैं बुरी तरह से डरी हुई हूं और दोस्तों के साथ टौयलेट में छिपी हूं. पापा, मुझे नहीं लगता कि मैं जिंदा बच पाऊंगी. आतंकी एकएक कर के लोगों को मार रहे हैं.’

तारिषी निरीह परिंदे की तरह फड़फड़ा रही थी. संजीव जैन भले ही बेटी का हौसला बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन का दिल बैठा जा रहा था.

आयतें सुन कर अलग किए गैरइसलामी

सेना के कमांडो द्वारा रेस्क्यू में बचाए गए 18 प्रत्यक्षदर्शियों में से एक हसनात करीम भी थे. उन के पिता रिजाउल करीम के अनुसार पांचों आतंकवादियों ने रेस्टोरेंट के हाल में सभी बंधकों को बंदूक की नोंक पर इकट्ठा किया.

फिर उन से कुरआन की 1-2 आयतें सुनाने को कहा. जो लोग आयतें सुना देते, उन्हें एक ओर कर देते थे और जो नहीं सुना पाते थे, उन्हें दूसरी ओर खड़ा कर दिया जाता था. इस के बाद आयतें न सुना पाने वाले लोगों की तेज धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई. इन में तारिषी के साथ अधिकतर विदेशी शामिल थे.

जब आतंकी मजहब जानने के लिए आयतें सुन कर लोगों को मार रहे थे, तब तारिषी के दोस्त इंसानियत का धर्म निभा रहे थे. तारिषी के दोनों दोस्त अबिंता और फराज ने आखिरी वक्त तक दोस्ती और इंसानियत का साथ नहीं छोड़ा.

ये भी पढ़ें- टूट गया शांति सागर के तनमन का संयम : भाग 3

फराज ने आतंकियों को कुरआन की आयतें सुना दी थीं. इस पर फराज से उन्होंने दूसरी ओर जाने को कहा, लेकिन फराज ने अपनी दोस्त तारिषी और अबिंता के बिना जाने से इनकार कर दिया. इस पर आतंकियों ने तीनों दोस्तों की हत्या कर दी थी.

तारिषी जैन की हत्या की खबर मिलने के बाद उस के परिजनों व परिचितों में मातम छा गया. पलभर में परिवार की खुशियां काफूर हो गईं. घटना वाली रात तारिषी ने फिरोजाबाद में रहने वाले अपने चाचा राकेश मोहन से फोन पर बात की थी और वहां के हालात के बारे में भी बताया था.

राकेश मोहन के अनुसार, 3 जुलाई, 2016 रविवार को तारिषी परिवार के साथ फिरोजाबाद आने वाली थी, लेकिन उस से पहले दरिंदों ने उन की बेटी की हत्या कर दी.

तारिषी की मौत के बाद फिरोजाबाद व देश में अलगअलग स्थानों पर घटना की निंदा की गई. कैंडल मार्च निकाल कर श्रद्धांजलि दी गई.

भारत सरकार की सक्रियता के कारण तारिषी का शव 4 जुलाई, 2016 को बंगलादेश से नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे लाया गया. वहां से कार द्वारा शव को गुरुग्राम (हरियाणा) ले जाया गया, जहां तारिषी के पिता संजीव जैन का घर था. गुरुग्राम में ही तारिषी का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

लंबी सुनवाई के बाद सुनाया गया फैसला

लगभग 3 साल तक यह मामला विशेष ट्रिब्यूनल में चला. जांच अधिकारी हुमायूं कबीर ने 113 गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज कराए. पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 8 दहशतगर्दों ने अदालत में खुद को बेकसूर बताया. गवाहों के बयान और दोनों पक्षों के वकीलों की जिरह सुनने के बाद जज मुजीबुर रहमान ने सबूतों के आधार पर 27 नवंबर, 2019 को अपना फैसला सुनाया.

जज मुजीबुर रहमान ने इसलामी आतंकवादी संगठन के 7 आतंकियों जहांगीर हुसैन, रकीबुल हसन रेगन, असलम हुसैन उर्फ रशीदुल इसलाम, अब्दुल सबूर खान उर्फ सोहिल महफूज, हादुर रहमान सागर, शरीफुल इसलाम, खालिद और मामूनुर रशीद को फांसी की सजा सुनाई.

अदालत ने आतंकी हमले में 22 निर्दोष लोगों की दर्दनाक मौत को अमानवीय करार दिया. जज ने सभी दोषियों पर 50-50 हजार टका का जुरमाना भी लगाया. जब कोर्ट ने फैसला सुनाया तो दोषी बिना किसी पछतावे के बेखौफ खड़े थे और उन्होंने अल्लाह हू अकबर का नारा भी लगाया.

न्यायाधीश ने आठवें आरोपी मिजानुर रहमान को बरी कर दिया, क्योंकि अभियोजन पक्ष प्रतिबंधित संगठन नव-जमायतुल मुजाहिदीन बंगलादेश (नव जेएमबी) द्वारा किए गए हमले में उस के संबंध को साबित नहीं कर सका था.

अपने फैसले में न्यायाधीश ने बंगलादेशी मूल के कनाडाई नागरिक तमीम चौधरी को हमले का मास्टरमाइंड बताया, जो हमले के बाद राष्ट्रव्यापी आतंकवादरोधी सुरक्षा अभियान के दौरान मारा गया था. आतंकरोधी शाखा ने आतंकी हमले की 2 साल की जांच के बाद पिछले साल जुलाई में अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी.

फैसला सुनाए जाने के बाद सरकारी वकील गुलाम सरवर खान ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि मामले की जांच में पता चला कि दोषियों ने आतंकवादियों को धन मुहैया कराया था. हथियारों की आपूर्ति की थी या फिर हमले में सीधे तौर पर शामिल लोगों की मदद की थी. उन के खिलाफ जो आरोप थे, वे साबित हो गए.

ये भी पढ़ें- पिता के प्यार पर भारी मां की ममता – भाग 2

जिन 7 आतंकियों को सजा सुनाई गई है, वे हमले की साजिश में शामिल थे. कोर्ट ने उन्हें अधिकतम सजा सुनाई. सभी दोषी करार दिए गए अपराधियों का संबंध जमायतुल मुजाहिदीन बंगलादेश से था. यह संगठन बंगलादेश में शरिया कानून लागू करना चाहता था.

फिरोजाबाद के सुहागनगर में रहने वाले तारिषी के ताऊ राजीव जैन को 27 नवंबर, 2019 की शाम यह खबर मिली कि ढाका के रेस्टोरेंट में आतंकी हमला करने वाले 7 आतंकियों को विशेष अदालत ने मौत की सजा सुनाई है तो उन के दिल को सुकून मिला.

बेटी को खोने का गम आज भी परिवार के सदस्यों की आंखों में झलकता है. बर्कले यूनिवर्सिटी, कैलिफोर्निया की छात्रा तारिषी मेधावियों में अपना स्थान रखती थी. तारिषी के मातापिता ने बेटी की स्मृति में बर्कले यूनिवर्सिटी में एक मेधावी स्कौलरशिप शुरू करने की घोषणा की है.

कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें