नथनी : भाग 2

सलमा ने किसी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की, न ही सहमति और न विरोध.

सलमा के इस रुख से कमल आहत हुआ.

‘‘क्या बात है? बहुत गुस्से में दिखाई पड़ रही हो. कहीं मुझे छोड़ने तो नहीं जा रही हो? तुम्हारी कसम…दरिया में कूद कर जान दे दूंगा,’’ कहते हुए कमल ने चाय का कप उठा लिया.

‘‘बात बीच में मत काटना, पूरी सुन लेना तब जो कहोगे मैं मानूंगी,’’ कहते हुए सलमा ने रोमी की बात पूरी विस्तार से कमल को बताई तो उस की आंखों में चमक सी आ गई. उस ने सलमा को बांहों में भरते हुए कहा, ‘‘मेरे खयाल से इस में कोई बुराई नहीं है, बल्कि मैं एक गलत धंधे में पड़ने वाला था. अच्छा हुआ तुम ने मेरी आंखें खोल दीं. पर सुनो, तुम मेरे प्यार में कमी तो नहीं आने दोगी न?’’

‘‘तुम्हारे एक इशारे पर सबकुछ छोड़ दिया. बिना तुम को विश्वास में लिए मैं कोई काम नहीं करूंगी. यह भी तुम अच्छी तरह सोचसमझ लो. अगर मना कर दोगे तो नहीं करूंगी,’’ सलमा की आंखों में कुछ लाल डोरे से दिखाई पड़े.

बात आगे बढ़ी. न्यूजर्सी से चल कर जेनी और डेविड मय अपने वकील के हिंदुस्तान आए. कमल के साथ कई बैठकें हुईं. सारी शर्तें ठीक से समझाई गईं. रोमी उन सब में शामिल रही. तमाम शंकाओं के समाधान के बाद मामला 4 लाख पर तय हुआ. कमल व सलमा ने, समझौते पर अपने दस्तखत किए. वादे के अनुसार 50 हजार रुपए का भुगतान पहले कर दिया गया.

सलमा को केवल जेनी ने ही देखा, डेविड ने नहीं. 3  लाख 50 हजार बाद में देने का करार हुआ. यह 9 महीने के दौरान चेकअप, दवाओं व खुराक के खर्च के अलावा था. शहर के एक बड़े नर्सिंग होम पर यह जिम्मा छोड़ा गया कि वह एक फोन पर सेवाएं मुहैया कराया करेगा. 1 महीने बाद आने को कह कर डेविड और जेनी अमेरिका चले गए.

50 हजार रुपए के लिए दोनों मियांबीवी तमाम योजनाएं बना ही रहे थे कि तभी किसी साथी ने कमल को आवाज लगाई. कमल बाहर गया तो उस ने साथ चलने को कहा. कमल ने बिना कुछ सोचेसमझे उस के साथ जाने से मना कर दिया और साथ में यह भी साफ कर दिया कि अब वह अपने पैसों से नया धंधा शुरू करने जा रहा है.

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इस बात की भनक लगते ही उस के साथियों में खलबली मच गई कि कहीं कमल उन लोगों के बारे में पुलिस को न बतला दे. वे लोग उसे धमकी दे कर चले गए. उस ने सब से पहले 40 हजार रुपए की एक जर्मन पिस्तौल खरीद डाली और 5 हजार की एक बढि़या सी सोने की नथनी.

यह बात जब उस के गैंग वालों को पता चली तो उन्होंने खतरे को भांपते हुए कमल से मिल कर यह आश्वासन लेना चाहा कि वह धंधा छोड़ दे तो कोई बात नहीं, पर उन के राज किसी और को न बताए, वरना अंजाम सभी के लिए खराब होगा. कमल राजी हो गया. चलतेचलते किसी ने पलट कर यह कह दिया, ‘‘तुझ को अपनी बीवी सलमा का वास्ता है.’’

‘‘तुम सब को मालूम है कि मैं सलमा को कितना प्यार करता हूं. मैं तुम्हें विश्वास दिलाता हूं कि मैं तुम्हारे रास्ते में नहीं आऊंगा, पर यह याद रखना कि तुम भी मेरा राज कभी किसी से नहीं खोलोगे,’’ कहते हुए कमल ने खुशीखुशी सब को विदा कर दिया पर पिस्तौल तो वह खरीद ही चुका था.

सलमा ने सोचा था कि उस पैसे से वह कमल को कोई धंधा करा देगी, पर यह सब जान कर उस को एक सदमा लगा और वह चुप रह गई.

सलमा अब उस नर्सिंग होम के संरक्षण में आ चुकी थी. उस के पेट में जेनी का बच्चा आ चुका था. उस के खानेपीने व दवाओं का बढि़या इंतजाम हो गया था. एक नर्स उस की दोनों बेटियों की देखरेख के लिए भी रख दी गई थी. पर कमल नहीं बदला.

5वें महीने जेनी ने खुशी से झूमते हुए डेविड को बताया, ‘‘मैं ने सलमा के पेट में अपने बच्चे के दिल की धड़कनें सुन ली हैं. मैं बता नहीं सकती, मैं कैसा महसूस कर रही हूं.’’

यह सुन कर डेविड से भी नहीं रहा गया. उन्होंने भी उन धड़कनों को सुनने की इच्छा जाहिर कर दी.

जेनी ने सलमा से पूछा, ‘‘अगर तुम्हें एतराज न हो तो डेविड भी अपने बच्चे के दिल की धड़कनें सुन लें.’’

सलमा पसोपेश में पड़ गई कि कहीं उस के इजाजत दे देने पर कमल बुरा न मान जाए. पर जेनी और डेविड को रोतेगिड़गिड़ाते देख वह भावुक हो उठी. उसे वह दिन याद आ गया जब कमल ने भी पहली बार अपने बच्चे की धड़कनें सुनने के लिए उस के पेट पर अपने कान लगा दिए थे. काफी देर इंतजार के बाद भी जब कमल नहीं आया तो वे दोनों काफी उदास हो गए और प्रस्ताव रखा कि इस इजाजत के वे 25 हजार रुपए और देंगे. सलमा लालच की गिरफ्त में आ गई और इजाजत दे दी.

सलमा की खूबसूरती देख डेविड दंग रह गए. फिर उन्होंने जैसे ही सलमा के पेट पर कान लगाए वैसे ही वहां कमल आ पहुंचा और यह नजारा देख कर वह आगबबूला हो गया. उस के मुंह से बरबस निकल पड़ा, ‘‘तो यह राज है इतने पैसे मिलने का. जो अपने मांबाप की न हुई, आदमी की क्या होगी?’’

मारे गुस्से के कमल का हाथ भरी पिस्तौल तक पहुंच गया और उस ने एक गोली डेविड पर दाग दी. डेविड को गिरते देख, कमल भाग लिया. गोली की आवाज सुन कर बगल के कमरे में बैठी नर्स कमरे की तरफ दौड़ी और उन्हें संभालने की कोशिश की. नर्सिंग होम को फोन किया गया. डेविड को वहां पहुंचाया गया.

सभी की गोटियां एकदूसरे से ऐसी फंसी थीं कि कोई भी कुछ करने से पहले काफी सोचसमझ लेना चाहता था. पुलिस केस होने पर कमल फंस रहा था, जिस का सीधा असर सलमा पर पड़ता और घुमाफिरा कर उस का असर होने वाले बच्चे पर पड़ता.

जेनी को वह शर्त याद आई कि सलमा को सिर्फ जेनी ही देखेगी, डेविड नहीं. यों पुलिस रिपोर्ट में डेविड भी फंस रहे थे. नर्सिंग होम वालों को इतना पैसा मिला कि उन्होंने इलाज तो चुपचाप शुरू कर दिया था पर फिर भी घबराए हुए थे. डेविड को खतरे से बाहर बताए जाने के बाद ही सारे लोगों की सांस में सांस आई.

सारा खुशी का माहौल गमगीन और तनावपूर्ण हो चुका था. कमल के आरोप पर सलमा तड़प उठी थी. उस ने ही खामोशी तोड़ी, ‘‘मुझे आप लोगों से कोई पैसेवैसे नहीं चाहिए, मुझे मेरा आदमी वापस चाहिए. मैं तो इस के लिए तैयार ही नहीं हो रही थी,’’ कहतेकहते वह रो पड़ी.

इस पर जेनी ने डेविड की आंखों में कुछ झांका और फिर सलमा से कहा, ‘‘डेविड कमल का दर्द समझते हैं. उन के दिल में बदले की कोई भावना नहीं है. कमल को किसी भी कीमत पर वापस लाया जाएगा.’’

तभी नर्सिंग होम से एक फोन आया, ‘‘देखिए, यह मामला कहीं से लीक हो चुका है, पुलिस केस होने जा रहा है, सतर्क रहें.’’

इस बात से सामान्य होता वातावरण फिर गरम हो उठा. खैर, जेनी की आंखों में काफी संतोष दिख रहा था, शायद वह हिंदुस्तान के बारे में सबकुछ जान गई थी कि यहां पैसे से सबकुछ मुमकिन हो जाता है. लिहाजा, सलमा को धीरज बंधाया और खुद अपने डाक्टर के साथ नर्सिंग होम जा पहुंची.

क ाफी पैसे खर्च करने के बावजूद मामला रफादफा करने में कई दिन लग गए पर जेनी को इस से बड़ा धक्का तब लगा जब उसे यह पता चला कि कमल चोरी की पिस्तौल खरीदने के मामले में कहीं पकड़ा जा चुका था. यह सभी के लिए बहुत खराब खबर थी. फिर भी जेनी ने सलमा को धीरज बंधाया कि उस के पास पैसों की कोई कमी नहीं है. वह किसी भी हद तक और कितना भी पैसा खर्च करने को तैयार था.

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लेदे कर वह भी मामला निबटाया गया, तब जा कर सलमा सामान्य हो पाई. कमल की जमानत की काररवाई पूरी की गई. उसे जमानत पर छुड़वा कर लाया गया पर इस दौरान उसे पुलिस वालों को अपने पुराने साथियों के नाम बताने पड़े. उस के जमीर को इस से काफी धक्का लगा था. उसे एक बार तो यह लगा जैसे वह सलमा को खोने जा रहा हो.

लाख न चाहते हुए सलमा को इस कांड का काफी सदमा लगा था पर वह और डेविड दोनों ही अच्छे इलाज की बदौलत तेजी से सुधार की ओर अग्रसर थे. इस से भी बड़ी तसल्ली की बात यह थी कि कमल ने डेविड को अपनी मनोस्थिति बताते हुए माफी मांग ली थी.

समय कितनी तेजी से बीता, पता ही नहीं चला. जेनी और डेविड को, जिस सुखद घड़ी का बेसब्री से इंतजार था, वह आ ही गई. पर सलमा के लिए यह एक बड़े दुख का सबब था, क्योंकि उसे जो सुविधाएं, डेविड ने इस दौरान मुहैया कराई थीं, सब खत्म होने जा रही थीं. कमल पर चोरी की पिस्तौल के अलावा भी 2 मुकदमे दायर हो चुके थे. वह फिर बहुत उदास रहने लगी थी. भविष्य में आने वाली मुसीबतों के बारे में सोचसोच कर वह सहम सी उठती थी. उस का दिल बैठा जाता था.

अत: तमाम मेडिकल सुविधाओं के बावजूद आखिरी दिनों में उस का ब्लडप्रेशर काफी नीचे रहने लगा. प्रसव के समय वह काफी घबराई हुई सी लगी. बच्चे को जन्म देने के 12 घंटे बाद ही उस ने दम तोड़ दिया.

जेनी और डेविड जो एक तरफ बेहद खुश थे, दूसरी तरफ सलमा की मौत से इतने दुखी हुए कि अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए, बरबस रो पड़े. उन का मन था कि बच्चे की पहले 1 माह की परवरिश के लिए उसे सलमा के साथ ही रहने दिया जाता, पर नर्स ने उन्हें यह कह कर तसल्ली दिलानी चाही कि फिर मोह के कारण सलमा से उसे छुड़ाना अधिक दुखद हो जाता.

नर्सिंग होम से कमल जब सलमा का निष्प्राण शरीर ले कर निकला तो उस के परिवार के अलावा सलमा के परिवार के लोग भी आ चुके थे. पिता के कहने पर लाश को कमल अपने पिता के घर ले गया. इस दुखद और अकाल मौत पर जो सुनता दौड़ पड़ता. अंतिम संस्कार के लिए श्मशान तक जाने वाली विकराल भीड़ में जेनी और डेविड सब से आगे थे. कमल की छोटी बेटी तो नर्सिंग होम में नर्स के ही पास थी. बड़ी बेटी को कमल अपने सीने से चिपकाए दहाड़ें मारमार कर रोए जा रहा था.

जिन धर्म के ठेकेदारों ने इन की शादी के चक्कर में पड़ना उचित नहीं समझा था वे इस भीड़ को कैश कराने की गरज से वहां पहुंच चुके थे. सलमा की लाश पर राजनीति शुरू कर दी कि वह मुसलमान थी, इसलिए दफनाया जाना चाहिए. विरोधियों का कहना था कि वह हिंदू से शादी कर के हिंदू हो चुकी थी इसलिए जलाया जाना चाहिए. एक मत और उभर रहा था कि ईसाई बच्चे को जन्म देने के कारण उस को ईसाइयों के रीतिरिवाज से दफनाया जाए.

आखिरी फैसला यह हुआ कि हिंदू रीति ही अपनाई जाए. इस फैसले पर हिंदू पंडों की बाछें खिल उठीं. भीड़ देख कर उन के भाव बढ़ गए. मुखाग्नि के वक्त बोले, ‘‘बिना स्वर्ण दान के आत्मा नहीं तरती है.’’ कमल ने वह नथनी जो सलमा को देने के लिए बहुत संभाल कर रखी हुई थी, आ

 

लौकडाउन स्पेशल : पिता बनने के लिए नींद लेना है जरुरी

नींद किसे अच्छी नहीं लगती. रोज औफिस से घर जाने का सुकून हम सभी महसूस करते हैं. इस भागदौर भारी जिंदगी में कुछ पल अराम के मिल जाए तो सभी खुश होते है पर अगर किसी टेंशन के चलते आप नींद ना ले पा रहे हो तो? अगर आप पिता बनना चाहते है और आप नींद ना आने की समस्या से गुजर रहे है तो आपको इस पर ध्यान देने की जरुरत है क्योंकि नींद ना आना आपको पिता बनने से रोक सकता है.जो लोग पिता बनना चाह रहे हैं उन्हें स्वस्थ शुक्राणुओं के लिए समय से सोना चाहिए. एक रिसर्च में पाया गया कि जो लोग रात 8 से 10 बजे के बीच सो जाते हैं उनके शुक्राणुओं में गतिशीलता ज़्यादा होती हैं. ये तेजी से गति करते हुए अंडे को निषेचित करते हैं.

अपने खानपान के साथ अगर आप नींद पर भी ध्यान देंगे तो आपको इस समस्या से दो चार नही होने पड़ेगा. रात में सोने से पहले देर रात फोन यूज करना या देर से सोना परेशानी पेदा कर सकता हैं. जो पुरूष देर रात तक जागते रहते हैं या काफी देर से सोते हैं उनके वीर्य में शुक्राणुओं की संख्‍या कम होती है और शुक्राणु जल्‍दी नष्‍ट हो जाते हैं.

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नींद लेना क्यों हैं जरुरी

रिसर्च से पता चला कि 6 घंटे या इससे कम सोने वाले पुरूषों के शुक्राणुओं की स्थिति और भी ज्‍यादा खराब होती है. वहीं 9 घंटे सोने वाले पुरूषों के शुक्राणु ज्‍यादा स्‍वस्‍थ होते हैं. ज्‍यादा देर से सोने और सही तरह आराम नहीं करने से शरीर में एंटीस्पर्म एंटीबौडी का लेवल बढ़ता है, यह एक प्रोटीन है जो इम्यून सिस्टम में बनता है और स्वस्थ शूकाणुओं को खत्म करता है. इस तरह की स्‍टडी पहले भी हो चुकी है जिसमें ये बात हद तक स्‍पष्‍ठ हुई है.

जब सड़क किनारे ही एक महिला ने दिया बच्चे को जन्म

जब से लौकडाउन लगा है मजदूरों की स्थिति बेहद भयावह हो गई है. इन की दर्दनाक घटनाएं आएदिन समाचारों की सुर्खियां बनती जा रही हैं.

लौकडाउन के बाद जहां मजदूरों को भूखे पेट रहने पर मजबूर होना पङ रहा है, वहीं अपने गांव जाने की छटपटाहट में ये जानलेवा घटनाओं के भी शिकार हो रहे हैं. सरकारी प्रयास पर्याप्त साबित नहीं हो पा रही, ऐसे में दूसरे राज्यों में फंसे मजदूर हजारों किलोमीटर तक का सफर पैदल ही तय कर रहे हैं.

हाल ही में महाराष्ट्र के अहमदाबाद में 16 मजदूरों की मौत ट्रेन से कट कर हो गई थी और हालात ऐसे हो चुके हैं कि अब तो मजदूरों की दर्दभरी कहानियां देखसुन कर रौंगटे खड़े हो जा रहे हैं.

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इस बीच मजदूरों से जुङी एक घटना दिल को झकझोर देने वाली है.

एमपीमहाराष्ट्र के बिजासन बौर्डर पर नवजात बच्चे के साथ पहुंची महिला मजदूर की कहानी बेहद दर्दनाक है.

बच्चे के जन्म के 1 घंटे बाद ही उसे गोद में ले कर महिला 160 किलोमीटर तक पैदल चल कर बिजासन बौर्डर पर पहुंची.

वह गर्भ से थी और जाना 1 हजार किलोमीटर दूर था

शकुंतला नाम की एक महिला अपने पति के साथ नासिक में रहती थी. गर्भावस्था के 9वें महीने में वह अपने पति के साथ नासिक से सतना के लिए पैदल निकली. नासिक से सतना की दूरी करीब 1 हजार किलोमीटर है.

रास्ते में चलते हुए उसे लेबर पेन हुआ तो साथ चल रहे पति और दूसरे लोगों की समझ में कुछ नहीं आ रहा था. उधर महिला दर्द से तङपने लगी थी. पति की स्थिति बेहद खराब थी. जेब में फूटी कौङी भी नहीं था.

हालात इतने खराब हो गए कि बिजासन बौर्डर से 160 किलोमीटर पहले सड़क किनारे ही महिला ने बच्चे को जन्म दिया.

पुलिस वाले भी हैरान रह गए

शनिवार को महिला बिजासन बौर्डर पर पहुंची तो उस के गोद में नवजात बच्चे को देख चेकपोस्ट की एक महिला इंचार्ज उस के पास जांच के लिए पहुंची. उन्हें लगा कि महिला को मदद की जरूरत है. उस के बाद उस से बात की, तो कहने को कुछ शब्द नहीं थे.

महिला 70 किलोमीटर चलने के बाद रास्ते में मुंबई-आगरा हाइवे पर बच्चे को जन्म दिया था. इस में 4 महिला साथियों ने मदद की थी.

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महिला की बातों को सुन कर पुलिस टीम अवाक रह गई. महिला ने जब यह बताया कि वह बच्चे को जन्म देने तक 70 किलोमीटर पैदल चली थी, तो पुलिस वालों का दिल भी पसीज गया.

जन्म देने के बाद भी निकल पड़ी पैदल

आश्चर्य तो यह भी है कि बच्चे को  जन्म देने के बाद वह महिला 1 घंटे सड़क किनारे ही रुकी और फिर दोबारा पैदल चलने लगी. बच्चे के जन्म के बाद वह बिजासन बौर्डर तक पहुंचने के लिए 160 किलोमीटर पैदल चली.

महिला के पति की लौकडाउन के बाद नौकरी छूट गई थी और जेब में फूटी कौङी भी नहीं थी. ऐसे में उस ने पैदल ही सतना जाने की सोची. दिक्कत यह थी कि उस की बीवी गर्भ से थी और इतनी दूर पैदल जाना इतना आसान भी नहीं था. मगर मरता क्या न करता. आखिरकार उन के बीच एक ही रास्ता था कि वे अपने गांव लौट जाएं.

साहस बटोर कर वे अन्य लोगों के साथ गांव की ओर निकल पङे मगर रास्ते में ही उस की बीवी को लेबर पेन शुरू हो गया. हालांकि बौर्डर पर मौजूद पुलिस वालों ने उस महिला की जरूर हरसंभव मदद की.

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मगर इस दर्दनाक कहानी के पीछे सरकारी निकम्मापन सरकार की उन दावों की भी पोल खोलता है, जिस में आम जनता और खासकर मजदूर वर्ग पिस रहा है मगर इन की सुनने वाला फिलहाल कोई नहीं.

लौकडाउन स्पेशल : अगला मुरगा

लेखक- उदय नारायण सिंह ‘निर्झर’

सुरक्षित सीट से चुनाव जीत कर राजबली विधायक क्या बन गया, उस की तो मानो लौटरी ही खुल गई. खेतों में मजदूरी कर के अपने परिवार को पालता हुआ वह पहले गांव की राजनीति में लगा रहता था.

ग्राम प्रधानी का चुनाव लड़तेलड़ते राजबली विधायक बंसीधर का चुनाव में प्रचार कर के जब उन का चहेता बन गया तो राजनीति के सारे हथकंडे समझने लगा.

चुनाव लड़ रहे बंसीधर को जब अपना पलड़ा हलका लगने लगा तो उन्होंने अपनी जीत के लिए राजबली को ही उस की बिरादरी के वोट काटने के लिए अपने खर्चे से टिकट दिलवा कर मैदान में उतार दिया.

अपनी मेहनत, अच्छे बरताव और बंसीधर की जीत के लिए बिरादरी के वोट काटता राजबली जब खुद चुनाव जीत गया तो मानो उसे राजगद्दी मिल गई. उस की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. जहां पहले वह खुद नेताओं के आगेपीछे आस लिए घूमता रहता था, वहीं अब उस के आगेपीछे तमाम लोग जीहुजूरी कर लाइन में आस लगाए खड़े रहते थे.

राजबली के चुनाव की बागडोर संभाल चुका हरीलाल उस का बहुत नजदीकी बन कर अब उस के नुमाइंदे के रूप में काम करने लगा था.

जब राजबली को तमाम सरकारी योजनाओं में कमीशन मिलने लगा, तो उस का समाजसेवा का भाव बदल गया. विधायक निधि से भी अगर वह किसी को पैसे देता तो 40 फीसदी पहले ही ले लेता.

गांव के छप्पर में रहने वाला राजबली जब लखनऊ के शानदार इलाके में जमीन खरीद कर आलीशान मकान बनवाने लगा तो उस के गांव वाले हैरान रह गए. वे उस की और ज्यादा इज्जत करने लगे.

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4 सहयोगियों और 2 पुलिस वालों के साथ जब राजबली अपने इलाके में घूमते हुए किसी गांव में जाता तो पूरे गांव के लोग उस के स्वागत में इकट्ठा हो कर अपनीअपनी समस्याएं सुनाने लगते.

एक दिन श्रीधर नाम के एक शिक्षक राजबली के करीब जा कर बोले, ‘‘विधायकजी, आप को जिताने में हम ने बड़ी मेहनत की है. मेरी एक समस्या है. इसे आप ही दूर कर सकते हैं.’’

‘‘बताओ गुरुजी, हमारे लायक क्या सेवा है. आप सभी के आशीर्वाद से ही तो मुझे विधायिकी मिली है,’’ जब राजबली ने हाथ जोड़ कर कहा तो श्रीधर बोले, ‘‘इतनी पढ़ाई करने के बाद भी मेरा बेटा दिलीप बेकार घूम रहा है. उसे अगर कोई नौकरी मिल जाती तो उस के साथ मेरा भी भला हो जाता.’’

‘‘नौकरी के लिए उस ने कहीं फार्म भरा है कि नहीं?’’

‘‘भरा है साहब, लोक निर्माण महकमे में.’’

श्रीधर की बात सुन कर राजबली ने हरीलाल को बुला कर कहा, ‘‘गुरुजी से पूरी जानकारी ले लो और सारी बातें समझा दो.’’

‘‘जी विधायकजी…’’ कह कर हरीलाल श्रीधर से बोला, ‘‘गुरुजी, 2-4 दिन में जब आप को समय मिले तब आप अपने बेटे को ले कर लखनऊ आ जाना, तब तक हम महकमे से बात कर लेंगे.’’

दिलीप को ले कर जब श्रीधर लखनऊ विधायक निवास पहुंचे तो हरीलाल ने उन से कहा, ‘‘लोक निर्माण महकमे से विधायकजी की बात हो गई है. आप का काम हो जाएगा, लेकिन एक समस्या है.’’

‘‘वह क्या है…?’’ जब श्रीधर ने पूछा तो हरीलाल बोला, ‘‘वहां का डायरैक्टर बिना रुपए लिए अपौइंटमैंट लैटर पर दस्तखत नहीं करेगा.’’

‘‘कितने पैसे मांग रहा?है?’’

‘‘उस की मांग तो 10 लाख रुपए की है, पर विधायकजी के कहने पर वह 5 लाख रुपए में मान गया है. 2 पद खाली हैं. लिस्ट में 10 लोग हैं.

एक हफ्ते का समय है. अब आप जैसा कहें.’’

‘‘ठीक है, मैं पैसों का इंतजाम कर के आऊंगा.’’

5 लाख रुपए घूस देने के बाद जब दिलीप को नौकरी मिल गई तो हरीलाल पर लोगों का पूरा विश्वास जम गया. ईमानदार समाजसेवक, जनता का शुभचिंतक और अपनी बिरादरी का मसीहा का तमगा लिए विधायक राजबली हरीलाल के जरीए पैसा और नाम दोनों कमाने लगा.

जब गलत ढंग से पैसा आने लगता है तब बुद्धि और विचार दोनों गंदे हो जाते हैं. राजबली न तो खानदानी रईस था और न ही नेता. जब आमदनी बढ़ी तो इच्छाएं बढ़ने लगीं. उपहार के साथसाथ जब पार्टियों में सुरा का दौर चला तो सुंदरी की भी कमी खलने लगी.

राजबली सोचता था कि अगली बार विधायकी मिलेगी भी या नहीं, क्या भरोसा, इसलिए जितना कमा सको, कमा लो.

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एक दिन दूर गांव का मनेश हरीलाल के पास आ कर बोला, ‘‘भैया, मैं बहुत गरीब हूं. मेरी बेटी ग्रेजुएशन कर के घर बैठी है. बेसिक शिक्षा महकमे में फार्म भी भरा है. विधायकजी से सिफारिश लगवा कर उसे नौकरी दिलवा देते तो उस की जिंदगी सुधर जाती और मैं उस की शादी किसी अच्छे घर में कर देता.’’

‘‘लड़की का क्या नाम है?’’

‘‘संगीता.’’

‘‘किस विषय में ग्रेजुएट है?’’

‘‘यह तो मुझे नहीं मालूम. कल उसे साथ ले आऊंगा, तो उसी से पूछ लेना.’’

‘‘ठीक है, कल उसे ले आना. पर पहले यह तो बताओ कि तुम कितना खर्च कर सकते हो? विधायकजी तो कुछ लेते नहीं, पर अफसरों को तो देना पड़ता है. तुम तो जानते ही हो कि आजकल बिना घूस दिए कोई काम नहीं होता है.’’

‘‘हां भैया, जानता तो हूं, लेकिन विधायकजी के जरीए काम होगा तो कम से कम पैसा देना होगा न. वैसे, कम से कम कितने में काम हो जाएगा?’’ जब मनेश ने पूछा तो हरीलाल ने कहा, ‘‘8-10 लाख रुपए से कम तो कोई लेता नहीं. लेकिन तुम गरीब हो, करीबी भी हो और तुम्हारी बेटी की बात है तो कम से कम 5 लाख रुपए का इंतजाम कर देना. रुपए का इंतजाम कर के जब लखनऊ आओगे तब संगीता को साथ जरूर लाना. लेकिन जरा मुझे उस से मिला तो दो.’’

‘‘हां भैया, जरूर. आप आज शाम को मेरी कुटिया पर आ जाते तो मुझे आप की सेवा का मौका मिल जाता,’’ मनेश ने कहा.

‘‘हां, मैं जरूर आऊंगा.’’

शाम को हरीलाल जब मनेश के घर गया तो उस की बड़ी खातिरदारी हुई. संगीता ने उसे अपने हाथ से मिठाई, चायनमकीन परोस कर उस को प्रभावित करने की कोशिश की.

संगीता का पतला व सुडौल बदन, हलका सांवला रंगरूप देख कर हरीलाल खुश हो गया. वह यही तो करता था. वह अपने भगवान राजबली विधायक को मिठाई अर्पित कर प्रसाद खुद खाता था. वह विधायक के मंदिर का पुजारी जो था.

जलपान करने के बाद हरीलाल ने संगीता से पूछा, ‘‘कितना पढ़ी हो?’’

‘‘एमए कर चुकी हूं सर.’’

‘‘किस विषय में?’’

‘‘शिक्षा शास्त्र में.’’

‘‘बहुत अच्छा. शिक्षा भी सुंदर, रूपरंग भी सुंदर…’’ संगीता की आंखों में झांकते हुए हरीलाल ने कहा, ‘‘अपने सारे प्रमाणपत्र ले कर पिता के साथ लखनऊ आ जाना. तुम्हारा काम हो जाएगा.’’

हरीलाल के आश्वासन से संगीता के भीतर खुशी की लहर दौड़ गई. तय समय पर वह मनेश के साथ लखनऊ गई. बंद कमरे में हरीलाल ने उसे विधायक राजबली से मिलाया, बात कराई और पक्का आश्वासन दे कर संगीता को विश्वास में ले लिया.

नौकरी पाने के लालच में संगीता उन दोनों को अपना सबकुछ सौंपती रही. उस की मजबूरी का वे दोनों जम कर फायदा उठाते रहे. यह कोई बलात्कार तो था नहीं इसलिए संगीता यह बात किसी से कह भी नहीं सकती थी.

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अपना सबकुछ लुटाने के बाद भी संगीता को नौकरी नहीं मिली, क्योंकि

5 लाख रुपए का इंतजाम नहीं हो पाया था. जब निराश संगीता ने हरीलाल से नाता तोड़ लिया, तो वह अगले मुरगे की तलाश करने लगा.

Adah Sharma नें Hot अंदाज में किया वर्कआउट, लेकिन इसके पीछे था मां का हाथ

बौलीवुड और साउथ के फिल्मों की सफल अभिनेत्रियों में शुमार अदा शर्मा (Adah Sharma) इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं. वह अपने इन्स्टाग्राम एकाउंट पर ढेर सारे फोटोज और वीडियोज शेयर करती रहीं हैं जिन पर उनके फैन्स की काफी प्रतिक्रियाएं मिलती रहती हैं. वह हाल ही में ‘कमांडो 3’ (Commando 3) में भी अपने अभिनय से दर्शकों पर छाप छोड़ने में कामयाब रहीं थी.

अदा ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है जिसमें वह बिस्तर पर लेटी नजर आ रहीं हैं और बैकग्राउंड में फिल्म का एक गाना बज रहा है. इस गाने में वह बेहद ही चौकाने वाले वर्कआउट स्टेप करती नजर आ रहीं हैं. वह बड़े ही आसानी से अपनें पैरों को लेटे-लेटे कंधे से आगे लाते हुए पीछे की तरफ ले जा रहीं है. जो देखनें में आसान नहीं लग रहा है. जो भी अदा शर्मा के इस वर्कआउट स्टेप को देखेगा एक बार में ही उनका मुरीद हो जाएगा.

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लेकिन वीडियो के अंत में अचानक ही पीछे की तरफ से अदा शर्मा (Adah Sharma) की मम्मी उठ कर बैठ जाती हैं और अदा के इस कठिन वर्कआउट स्टेप का राज खुल जाता है क्यों की अदा जो वर्कआउट स्टेप कर रहीं थी उसके पीछे वह नहीं बल्कि अदा की मम्मी का हाथ था. इस वीडियो में अदा इस अंदाज में लेटी थीं की उनकी मम्मी नजर नहीं आ रहीं थीं और जो पैर आसानी से अदा के कंधे के पार आ-जा रहें थे वह अदा के मम्मी के थे. इस वीडियो को अभी तक 8 लाख 50 हजार से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है.

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Tag someone who needs Exercise Motivation in the times of Corona (I know gyms are shut but you can find ways to workout anywhere !) Your choice of workout 😈 . Be strong , be fearless and take precautions like Ladoo the cat wanted to watch but knew he had to keep distance 😁 . For all of you who complained about the lack of time to exercise in your busy schedule . Now you have time to build up your immunity ! Pick a form of exercise you enjoy . I’ve been training with the mudgal for a few years now .It builds Shoulder strength and flexibility and core strength. So before I do my silambam (stick) routine I do this so my shoulders are all warmed up #mondaymotivation #TraininginTheTimesofCorona #corona #100yearsofAdahSharma #adahsharma

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अदा शर्मा (Adah Sharma) का यह फनी (Funny) वीडियो कोई पहला नहीं हैं क्यों की वह अक्सर ऐसे वीडियोज शेयर करती रहती हैं. इस कड़ी में उन्होंने बीते दिनों अपने इन्स्टाग्राम एकाउंट पर एक वीडियो शेयर किये है जिसमें वह बड़े ही सेक्सी और हौट अंदाज में पोंछा लगाती नजर आ रहीं हैं. इस वीडियो में वह डांस और एक्टिंग के अंदाज में पोंछा लगाती नजर आईं थीं.

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अदा शर्मा (Adah Sharma) ने अपने करियर की शुरुआत साल 2008 में विक्रम भट्ट की फिल्म 1920 से किया था. उस समय वह महज 16 साल की थीं. इसके बाद वह हिंदी फिल्म फिर (Phirr), हम है राही कार के (Hum Hai Raahi Car Ke) और हंसी तो फंसी (Hansi Toh Phasi) में भी नजर आई. उन्होंने ‘कमांडो 2’ (Cammando 2) और ‘कमांडो 3’ (Cammando 3) में भी अभिनय किया है.

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Kartik Aaryan बजा रहे थे गिटार, तभी बज उठी फोन की घंटी और खुल गई पोल, देखें Video

बौलीवुड फिल्मों के एक्टर कार्तिक आर्यन (Kartik Aaryan) सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहतें हैं. इस Lockdown में वह अपने घर में रहते हुए भी सोशल मीडिया के जरिये अपने फैन्स का मनोरंजन करते रहतें हैं. इसको लेकर वह अपने फनी (Funny) वीडियोज शेयर करते रहें हैं. जिसमें वह बर्तन धुलने से लेकर कोरोना को लेकर जागरुक करते नजर आये.

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इसी कड़ी में उन्होंने अपने इन्स्टाग्राम एकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है जिसमें वह “कबीर सिंह” के लुक में नजर आ रहें हैं. इस वीडियो में वह काफी प्रोफेशनल तरीके से गिटार बजाते नजर आ रहें हैं जिसे लोग काफी एंजौय कर रहें हैं.

 

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Haters gonna say i am not really playing it 🎸🔥 #KokiToki

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इस वीडियो में वह एक रौकस्टार की तरह गिटार बजा रहे थे. लेकिन तभी उनके फोन की घंटी बज उठती है और गिटार से धुन निकलना बंद हो जाता है. ऐसे में और उनकी चोरी पकड़ ली गई क्यों की वह गिटार की धुन को अपने मोबाइल फोन से प्ले कर रहे थे. इस वीडियो में उनके फैन्स खूब रिएक्शन दे रहे हैं. कार्तिक इस वीडियो में जानबूझ कर ऐसा कर रहें थे जिससे वह अपने फैन्स का मनोरंजन कर पायें. उन्होंने पोस्ट किये अपने वीडियो के कैप्शन में लिखा की “मुझसे नफरत करने वाले तो यही कहेंगे कि मैं सच में गिटार नहीं बजा रहा हूं” (Haters gonna say i am not really playing it).

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कोरोना वारियर्स के इन्टरव्यू की चला रहें हैं सीरीज

कार्तिक आर्यन (Kartik Aaryan) घर में रहते हुए भी अपनें घर के नाम से कोकी पूंछेगा (Koki Poochega) के नाम से वीडियो काल (Video Call) के जरिये कई सेलेब्रिटीज, कोरोना पीड़ितों और कोरोना वारियर्स का इन्टरव्यू ले चुकें हैं जिसके जरिये वह कोरोना से लड़ाई में जीतनें और उससे बचने के टिप्स भी इन लोगों के जरिये अपने फैन्स को दे रहें हैं. इस श्रृंखला में वह चिकित्सक डा. मीमंसा बुच, पुलिसकर्मी मधुरवीना, कोरोना पीड़ित रह चुकी सुमिति सिंह, का इन्टरव्यू  करके उनके कोरोना के साथ लड़ाई जीतने की दास्तान को सबके सामनें लाने का काम किया है.

 

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Garam Masala dekho😍 Garam Masala khao 😋 #KokiPoochega | @luke_coutinho | Episode 4 🤫 Out Today !!

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Big Salute to all the Wonder Women

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#KokiPoochega 🤫 Episode 1 – @sumitisingh One of India’s first Covid-19 survivors.🙏🏻 Link in Bio ▶️

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इन फिल्मों में कर चुके हैं काम

कार्तिक आर्यन (Kartik Aaryan) नें बौलीवुड में साल 2011 में पदार्पण किया था. उनकी पहली फिल्म प्यार का पंचनामा (Pyaar Ka Punchnama) थी इसके बाद उन्होंने आकाश वाणी (Aakash Vani), कांची: द अनब्रेकेबल (Kaanchi: The Unbreakable), प्यार का पंचनामा 2 (Pyaar Ka Punchnama 2), गेस्ट इन लंदन (Guest In London), सोनू के टीटू की स्वीटी (Sonu Ke Titu Ki Sweety), लुका छुपी (Luka Chhupi), पति पत्नी और वो (Pati Patni Aur Woh) और लव आज कल (Love Aaj Kal) में काम किया. उनकी आने वाली फिल्म ‘भूल भूलैया 2’ है जिसमें वह कियारा आडवाणी (Kiara Advani) और तब्बू (Tabbu) के साथ काम कर रहे हैं. इसके अलावा  ‘दोस्ताना 2’ (Dostana 2) में जाह्नवी कपूर (Jhanvi Kapoor) के साथ नजर आयेंगे.

बेवफा : भाग 2

पहले भाग पढ़ें- बेवफा भाग 1: आखिर क्यों सरिता ने छोड़ा दीपक का साथ?

भाग 2

उस व्यक्ति के मुंह से अपना नाम सुन कर मैं जैसे आसमान से गिरी… आवाज गले में ही अटक कर रह गई.

‘‘मेरा नाम सुमित है. मांजी और दीपक कैसे हैं? आप का इस शहर में कैसे आना हुआ? आप की शादी तो मुंबई में होने वाली थी न?’’

सवाल तो मैं पूछने आई थी, मगर मुझे नहीं मालूम था कि मुझे ऐसे सवाल सुनने पड़ेंगे… तो क्या सरिता ने अपने पति को सबकुछ बता दिया है?

‘‘आप इतना सबकुछ मेरे बारे में…’’ मेरे हलक से आवाज ही नहीं निकल पा रही थी और फिर मैं बिना कुछ और कहे वहीं सोफे पर धम्म से बैठ गई.

तभी सामने दिखी वह तसवीर, जो हम ने अपने फेयरवैल वाले दिन खिंचवाई थी. मैं दीपक भैया और सरिता… एक क्षण में मैं समझ गई कि मैं इस घर के लिए अपरिचित नहीं हूं. मगर यह नहीं समझ में आया कि ‘प्यार दोस्ती है,’ कहने वाली सरिता ने अपने प्यार और दोस्ती दोनों के साथ विश्वासघात क्यों किया? वादे को क्यों तोड़ा उस ने?

‘‘अभी 1 घंटा पहले ही सरिता ने आ कर मुझे बताया कि तुम उस के पार्लर में आई हो… वह समझ गईर् थी कि तुम यहां आओगी जरूर. तभी वह यहां से चली गई है.’’

‘‘आप ठीक कह रहे हैं. आखिर वह कौन सा मुंह ले कर मेरा सामना कर पाएगी,’’ मेरे मन की कड़वाहट शब्दों में स्पष्ट घुल गई थी.

‘‘सरिता ने जैसा बताया था आप बिलकुल वैसी ही हैं. इतने वर्षों में न तो आप बदलीं और न ही आप की सहेली,’’ सुमित ने कहा तो मैं ने अपनी नजरें उस पर टिका दीं. आखिर कौन सी खूबी है इस में जिस के लिए सरिता ने दीपक भैया के प्यार को ठुकरा दिया?

‘‘सरिता तो आज भी 20 साल पुरानी उन्हीं गलियों में भटक रही है, जहां दीपक की यादें बसती हैं. हर दिन, हर पल वह उन्हीं यादों के सहारे जीती है. दुनिया के लिए तो वह मेरी सरिता है, मगर सही माने में वह आज भी दीपक की ही सरिता है.

‘‘मैं एक दुर्घटना में अपाहिज हो गया था. तब एक केयर टेकर के लिए दिया गया मेरा इश्तिहार पढ़ कर सरिता मेरे पास आई और मुझ से शादी करने की विनती करने लगी. अंधा क्या चाहे दो आंखें… बस मैं ने हां कर दी… सच कहूं तो सरिता जैसी केयरटेकर पा कर मैं धन्य हो गया… मेरे जीवन की खुशियां उस की ही देन हैं.’’

‘‘हमारे घर की खुशियों में आग लगा कर उस ने आप के जीवन में रोशन की है… चमक तो होगी ही,’’ पता नहीं क्यों मैं सीधेसीधे सरिता को बेवफा नहीं कह पा रही थी.

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‘‘आप थोड़ा रुकिए मैं अभी आप की गलतफहमी दूर किए देता हूं,’’ कह कर सुमित अंदर से एक डायरी ले आए.

‘‘यह डायरी तो सरिता की है. भैया ने ही उसे उस के जन्मदिन पर उपहारस्वरूप दी थी,’’ कह मैं ने जैसे ही डायरी खोली मेरी नजर एक पत्र पर पड़ी. उस की लिखावट बिलकुल मेरी मां की लिखावट से मिलती थी. अरे, यह तो सचमुच मेरी मां का ही लिखा पत्र है जो उन्होंने सरिता के लिए लिखा था आज से 20 साल पहले-

‘‘सरिता बेटी,

‘‘मैं जानती हूं कि तुम दीपक से बेहद प्यार करती हो और रागिनी तुम्हारी प्यारी सहेली है. मेरी बहन ने दीपक की शादी के लिए एक लड़की देखी है. उस के मातापिता दीपक को बहुत अधिक दहेज दे रहे हैं. तुम तो जानती हो कि दीपक की डाक्टरी की पढ़ाई में मेरे सारे जेवर बिक गए हैं. ऐसे में रागिनी की शादी और दीपक के अच्छे भविष्य के लिए मुझे उस लड़की को ही घर की बहू बनाना पड़ेगा. दीपक तो मेरी बात मानेगा नहीं. ऐसे में उस का भविष्य और रागिनी की जिंदगी अब तुम्हारे हाथों में है. मैं जिंदगी भर तुम्हारा एहसान मानूंगी.

‘‘तुम्हारी मजबूर आंटी.’’

पत्र पढ़ते ही मैं सुबक उठी… ‘‘यह तुम ने क्या कर दिया सरिता? हमारी खुशियों के लिए अपनी जिंदगी में आग लगा ली? आखिर क्यों सरिता? क्या कोई दूसरा रास्ता नहीं था? आज तुम से पूछे बिना मैं यहां से नहीं जाऊंगी. इतने वर्षों तक मैं और दीपक भैया तुम्हें बेवफा समझ कर तुम से नफरत करते रहे और तुम…’’

‘‘दीपक की नफरत ही तो उस के जीने का साधन है. एक ही क्षेत्र में रह कर शायद कहीं किसी मोड़ पर दीपक से मुलाकात न हो जाए, इसीलिए उस ने वह रास्ता ही छोड़ दिया. सरिता कभी नहीं चाहती थी कि तुम लोग उस की हकीकत जानो. इसलिए अगर तुम सच में सरिता को खुश देखना चाहती हो तो उस से बिना मिले ही चली जाओ वरना वह चैन से जी नहीं पाएगी…’’ सुमित ने कहा.

मुझे सुमित की बात सही लगी. मैं एक बार फिर दीपक भैया के प्रति सरिता के प्यार को देख कर नतमस्तक हो गई. सरिता ने तो प्यार और दोस्ती दोनों शब्दों को सार्थक कर दिया था. बस हम ही उसे नहीं समझ पाए.

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पौलिटिकल राउंडअप : चिराग पासवान का ऐलान

पटना. लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने 3 मार्च को कहा था कि उन की पार्टी किसानों के मुद्दे पर बिहार विधानसभा चुनाव में उतरेगी.

याद रहे कि बिहार में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने वाले?हैं. इसी को ध्यान में रख कर 14 अप्रैल को पटना के गांधी मैदान में होने वाली रैली में लोक जनशक्ति पार्टी का चुनाव घोषणापत्र ‘विजन डौक्यूमैंट 2020’ जारी किया जाएगा. इस में जातपांत मुद्दा नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश का विकास मुख्य मुद्दा होगा.

रजनीकांत का खुलासा

चेन्नई. फिल्म सुपरस्टार रजनीकांत ने 12 मार्च को साफ किया कि तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनने की उन की ख्वाहिश कभी नहीं थी और राजनीति की उन की योजना में भावी पार्टी और उस की अगुआई वाली संभावित सरकार के अलगअलग प्रमुख होंगे.

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याद रहे कि रजनीकांत ने 31 दिसंबर, 2017 को राजनीति में आने का ऐलान किया था और अपनी पहली आधिकारिक प्रैस कौंफ्रैंस में यह भी कहा कि उन की योजना है कि मुख्यमंत्री के तौर पर किसी पढ़ेलिखे नौजवान को आगे किया जाए.

केजरीवाल ने नकारा एनआरसी

नई दिल्ली. केंद्र सरकार के ‘कागज दिखाओ मिशन’ को नकारते हुए दिल्ली विधानसभा में 13 मार्च को एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पास कर दिया गया.

इस प्रस्ताव पर हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से पूछा कि कोरोना से देश में चिंता बढ़ी है और अर्थव्यवस्था का बुरा हाल हो चुका है. इन समस्याओं से किनारा कर सीएए, एनपीआर, एनआरसी पर जोर क्यों दिया जा रहा है?

उन्होंने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि अगर सरकार हम से दस्तावेज मांगे तो दिल्ली विधानसभा के 70 में से 61 विधायकों के पास जन्म प्रमाणपत्र नहीं है, तो क्या उन्हें डिटैंशन सैंटर में रखा जाएगा?

जिन्हें लग रहा था कि केजरीवाल सरकार के प्रति मुलायम हो गए हैं, उन्हें थोड़ा संतोष हुआ होगा कि वे फिलहाल तो सिर्फ मुठभेड़ी माहौल से बच रहे हैं.

योगी के तीखे तेवर

लखनऊ. नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ किए गए प्रदर्शनों में हुई हिंसा में सार्वजनिक संपत्तियों के नुकसान की भरपाई के लिए आरोपियों की तसवीर वाली

होर्डिंग्स प्रदेश सरकार द्वारा लखनऊ में अलगअलग चौराहों पर लगाई गईं. इस पर नाराज होते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन होर्डिंग्स को हटवाने का आदेश दिया. इस के बाद योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट गई, पर सुप्रीम कोर्ट ने भी पूछा था कि किस कानून के तहत यह कार्यवाही की गई?

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इस के जवाब में योगी सरकार 13 मार्च को उत्तर प्रदेश रिकवरी औफ डैमेज टू पब्लिक ऐंड प्राइवेट प्रोपर्टी अध्यादेश 2020 ले कर आई, जिसे कैबिनेट से मंजूरी भी मिल गई. इस के तहत आंदोलनोंप्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर कुसूरवारों से वसूली भी होगी और उन के पोस्टर भी लगाए जाएंगे.

यह कानून नितांत लोकतंत्र विरोधी है. भाजपा को पुराणों से मतलब है, संविधान से नहीं. जहां राजा राम शंबूक का गला मरजी के अनुसार काट सकते हैं.

कांग्रेस है डूबता जहाज

रांची. भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और कभी केंद्रीय मंत्री रहे शाहनवाज हुसैन ने 14 मार्च को कहा कि कांग्रेस की बदहाली के लिए खुद कांग्रेस पार्टी जिम्मेदार है और आज इस की दशा डूबते हुए उस जहाज की तरह हो गई है, जिस पर सवार लोग अपनी जान बचाने के लिए उस में से कूद कर भाग रहे हैं.

शाहनवाज हुसैन ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कांग्रेस के नौजवानों को यह समझ में आ गया है कि पार्टी नेता राहुल गांधी की अगुआई में न तो उन का भला होने वाला है और न ही देश का भला होने वाला है. मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया की घर वापसी हुई है. दूसरे प्रदेशों में भी कांग्रेस में भगदड़ मची है.

कांग्रेस में ऊंची जाति वालों या अंधभक्तों की कमी नहीं जो भाजपा के वर्णव्यवस्था वाले फार्मूले में पूरा भरोसा रखते हैं. ये विभीषण हैं.

गहलोत ने केंद्र को कोसा

जयपुर. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 14 मार्च को राजसमंद जिले में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की गलत नीतियों के चलते देश में अभी मंदी का दौर है. भारत सरकार की गलत नीतियों की वजह से नौकरियां लग नहीं रही हैं… नौकरियां जा रही हैं. ऐसे माहौल में अगर हम लोग ऐसे फैसले करेंगे, जिन का फायदा सब को मिले तो मैं समझता हूं कि आने वाले वक्त में हम लोग स्वावलंबन की तरफ बढ़ सकेंगे.

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अपनी सरकार की तारीफ करते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि सरकार राज्य में ढांचागत विकास के साथसाथ पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, सड़कों, ऊंची पढ़ाईलिखाई पर खास ध्यान दे रही है.

यूट्यूब चैनल और साजिश

चंडीगढ़. कांग्रेस विधायक नवजोत सिंह सिद्धू ने 14 मार्च को अपना यूट्यूब चैनल ‘जीतेगा पंजाब’ शुरू किया था, पर इस के 2 दिन बाद ही 16 मार्च को चैनल के चीफ एडमिन स्मित सिंह ने दावा किया कि कुछ ‘पंजाब विरोधी ताकतें’ इसी नाम की फर्जी आईडी बना कर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही हैं. ‘जीतेगा पंजाब’ की लौंच के कुछ ही मिनटों के भीतर इसी नाम की सैकड़ों फर्जी यूट्यूब आईडी बन गईं. कुछ पेशेवर लोग जनता के साथ नवजोत सिंह सिद्धू के सीधे जुड़ाव को कम करने में लगे हैं.

इसी गरमागरमी में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने 16 मार्च को ही एक बयान दिया कि उन का अमृतसर के विधायक (नवजोत सिंह सिद्धू) के साथ कोई मसला नहीं है और वे पार्टी में किसी के साथ भी किसी भी मामले पर चर्चा कर सकते हैं.

कांग्रेस हुई कड़ी

अहमदाबाद. राज्यसभा चुनाव से पहले गुजरात कांग्रेस ने 16 मार्च को अपने उन 5 विधायकों को पार्टी से सस्पैंड कर दिया, जिन्होंने हाल ही में विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था. कांग्रेस ने जहां इसे भाजपा की साजिश बताया, वहीं भाजपा ने इन इस्तीफों के पीछे कांग्रेस के कलह को जिम्मेदार बताया. सस्पैंड होने वाले विधायकों में मंगल गावित समेत 4 दूसरे विधायक शामिल थे.

गुजरात की 182 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 103 सीटें हैं, जबकि कांग्रेस के पास 73 विधायक हैं. भारतीय जनता पार्टी अब देशभर में दूसरे दलों के विधायकों को खरीदने में लग गई है.

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पति, पत्नी और ‘वो’ के बीच तबाह हो गई जिंदगी

कोरोना महामारी के बीच राजधानी दिल्ली में पतिपत्नी और ‘वो’ के बीच पिस कर एकसाथ कई जिंदगियां तबाह हो गई हैं.

कहते हैं वह घर ही खुशहाल रहता है जहां भरोसा कायम रहता है और दांपत्य की गाङी पतिपत्नी रूपी पहिए के रूप में साथ चलती है. जो संभल कर इस गाङी को चलाता है उस की जिंदगी आबाद रहती है, वहीं गाङी का एक पहिया भी अगर सङक से उतरा तो गाङी का पलटना तय है.

उड़ीसा का रहने वाला शरत दिल्ली आया तो उस के आंखों में भी सपने थे. जिंदगी खुशहाल थी. एकएक कर 2 बच्चे आए तो जिंदगी और हसीन हो गई. परिवार दिल्ली के जेलरवाला बाग इलाके में रहने लगा. उस ने घर के पास ही किराने की एक दुकान खोल ली. दुकान भी अच्छा चल निकला. मगर इसी बीच वह बुरी लत का शिकार भी हो गया.

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शराब ने बिगाड़ी जिंदगी

दिनभर दुकान पर रहने के बाद लङखङाते कदमों से घर आने लगा तो बीवी रोकटोक करने लगी.

आएदिन घर में किचकिच होने लगी तो दोनों बच्चे अपने मामा के पास रहने लगे. घर में पतिपत्नी रहते तो दोनों में संवाद कम होता. पेटभर खाना तो दोनों खाते पर शारीरिक सुख से कोसों दूर रहते.

पति पास आने की कोशिश करता तो बीवी उसे अपने से दूर कर देती. धीरेधीरे दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगीं और घर सिर्फ एक दीवार और छत बन कर रह गया, जहां प्रेमप्यार दूरदूर तक नहीं होता.

बीवी जब पति की शारीरिक भूख शांत करने में दिलचस्पी न ले तो संबंध को बिखरते देर नहीं लगती.

शरत अब चिङचिङा रहने लगा और बीवी से आएदिन झगङने लगा. दोनों में मारपीट भी होने लगी.

पतिपत्नी के बीच आशिक की ऐंट्री

उधर बीवी को पति में दिलचस्पी कम हुई तो दोनों के बीच ‘वो’ की ऐंट्री ने रहीसही कसर भी पूरी कर दी.

उक्त शख्स यह जान चुका था कि पतिबीवी के बीच रिश्ता समान्य नहीं है तो वह महिला के करीब आने के लिए वह सब करने लगा जिस की महिला को जरूरत थी.

जल्दी ही दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी स्थापित हो गए.

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उधर पति घर से दुकान निकलता तो इधर वह आशिक चुपके से उस के घर आ जाता. वह महिला को भरपूर जिस्मानी सुख देने लगा तो महिला धीरेधीरे पति को भूल उसी आशिक के लिए सपने देखने लगी. दोनों बाहर घूमने भी जाते और जब भी समय मिलता जिस्मानी सुख हासिल करने को तैयार रहते.

इश्क छिपता नहीं छिपाने से

मगर कहते हैं कि इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपता, चाहे जितना भी जतन कर लो.

दोनों की लवस्टोरी अब पति भी जान चुका था. इस बात को ले कर दोनों के बीच आएदिन मारपीट होने लगी. पति अब पहले से अधिक पी कर आने लगा और नशे में वह बीवी को और भी अधिक पीटने लगा. उस पर बंदिशें भी लगा दीं.

आजिज आ कर बीवी ने एक खतरनाक खेल खेलने का मन बनाया. उस ने सोचा कि क्यों न इस शराबी पति को ही रास्ते से हटा दिया जाए. मगर यह काम इतना आसान नहीं था, इस में उसे अपने कथित आशिक की जरूरत थी.

एक दिन उस ने आशिक से अपने मन की बात कह दी तो वह भी तैयार हो गया इस खतरनाक खेल को अंजाम तक पहुंचाने के लिए.

और फिर एक रात…

वह दिन जल्दी आ भी गया जब पति शराब के नशे में घर आया और सो गया. इस बीच महिला ने अपने आशिक को बुलाया और फिर दोनों ने मिल कर पति की गला दबा कर हत्या कर दी.

रातभर वह लाश के पास ही सोई रही और सुबह दहाङें मारमार कर पति की मौत की बात बता कर नाटक करने लगी.

कानून के हाथ लंबे होते हैं

मगर कानून के हाथ लंबे होते हैं. हुआ भी यही. पुलिस को महिला पर शुरू से ही शक था.

अशोक विहार के एसीपी के एन सुबुद्धि की देखरेख में पुलिस द्वारा पूरी तहकीकात की गई और जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आया तो पुलिस का शक यकीन में बदल गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार हत्या गला दबा कर की गई थी.

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अब पुलिस ने महिला से सख्ती से पूछताछ की. वह टूट गई और हत्या करने की बात कुबूल कर ली. पुलिस आशिक को भी गिरफ्तार कर उस से भी पूछताछ की तो उस ने भी गुनाह कुबूल कर ली. दोनों अब सलाखों के पीछे हैं.

बिखर गए सपने

शराब की लत, रिश्तों में धोखा ने एक हंसतेखेलते परिवार की खुशियां ही छिन लीं. पति शराबी बन गया तो बीवी के कदम भी बहक गए. दोनों को न परिवार की खुशियों से कोई मतलब था न बच्चों की बिगङते भविष्य की चिंता.

यह सही है कि जब पतिपत्नी में न बने, सुलह के सभी दरवाजे बंद हो जाएं तो दोनों को अलग रहने और जिंदगी जीने का हक है. कानून भी यह अधिकार देता है. मगर बीवी ने कानून की मदद लेने के बजाय कानून ही हाथों में ले लिए.

अब बच्चों को न मां का प्यार मिल सकेगा और पिता तो वहां चला गया जहां से कभी कोई लौट कर नहीं आता. मां और कथित आशिक अब सालों जेल में सङेंगे. कानून को हाथ में लेने से यही तो होता है.

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