तुम दे कर मधु का प्याला मेरा मन बहला देती हो, उस पार मुझे बहलाने का उपचार न जाने क्या होगा...

मशहूर कवि हरिवंश राय बच्चन की कविता की ये पंक्तियां आज के संदर्भ में बिलकुल सटीक बैठती हैं. कवि ने अपनी कविता में कहा है कि तुम मधु यानी शराब का प्याला दे कर मेरा मन जरूर बहला देती हो पर यह प्याला मेरे जीवन को कोई उपचार शायद ही दे सके.

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