Satyakatha- अय्याशी में गई जान: भाग 1

सौजन्य- सत्यकथा

Writer- प्रमोद गौडि़या

अनैतिक रिश्ते को अधिक दिनों तक परदे में नहीं छिपाया जा सकता. इस से परदा हटते ही भूचाल आ जाता है. कई बार इस कारण आक्रोश की भड़की ज्वाला में जीवनलीला ही भस्म हो जाती है. ऐसा ही कानपुर के एक बैंककर्मी के साथ हुआ. अवैध संबंध में न केवल उस की जान गई, बल्कि 3 जिंदगियां भी तबाह हो गईं.  गुमशुदा विशाल अग्रवाल की लाश बरामद होने पर उन्नाव के दही थाने की पुलिस ने पहली जांच में ही उस के हत्या किए जाने की पुष्टि कर दी थी. करीब 25 वर्षीय विशाल एक बैंककर्मी था, जिस की लाश जिले में शारदा नहर के किनारे झाडि़यों में लावारिस हालत में पड़े ड्रम से मिली थी. लाश को एक प्लास्टिक के ड्रम में ठूंस कर पैक किया गया था. ड्रम पुरवा मार्ग पर स्थित बंद पड़ी एलए आयरन फैक्ट्री से एक किलोमीटर दूर सराय करियान गांव के पास गुजरने वाली नहर के किनारे पड़ा था.

ड्रम से दुर्गंध आने की सूचना ग्रामीणों ने पुलिस को दी थी. सूचना के आधार पर ही खेड़ा चौकीप्रभारी अंशुमान सिंह ने ड्रम को खुलवाया, जिस में से 25 वर्षीय युवक की रक्तरंजित लाश बरामद हुई.

वहीं पास में ही एक स्कूटी की चाबी भी मिली. पुलिस ने मौके की काररवाई पूरी करने के बाद लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी और उस की शिनाख्त के लिए जिले के सभी थानों में सूचना प्रसारित करवा दी.

उन्हीं दिनों नौबस्ता थानाप्रभारी सतीश कुमार सिंह विशाल अग्रवाल नामक युवक की तलाशी कर रहे थे. उस के लापता होने की सूचना अंशुल अग्रवाल ने दर्ज करवाई थी. वह अंशुल का छोटा भाई था. नौबस्ता थानाप्रभारी को दही थानाक्षेत्र में एक युवक की लाश बरामद होने की सूचना मिली तो वह अंशुल को साथ ले कर उन्नाव के थाना दही जा पहुंचे.

वहां पहुंच कर उन्होंने चौकीप्रभारी अंशुमान सिंह से मुलाकात की. तब चौकीप्रभारी ने मोर्चरी ले जा कर बरामद लाश थानाप्रभारी सतीश कुमार सिंह और उन के साथ आए युवक अंशुल को दिखाई. अंशुल ने उस लाश की शिनाख्त अपने छोटे भाई विशाल अग्रवाल के रूप में की. लाश की शिनाख्त हो जाने के बाद थानाप्रभारी नौबस्ता लौट आए. उन्होंने सब से पहले गुमशुदगी के मामले को हत्या में तरमीम कराया फिर वह हत्यारे की तलाश में जुट गए.

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उन्होंने पहले मृतक के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि उस का मोबाइल 7 सितंबर को रात 10 बजे के बाद स्विच्ड औफ हो गया था. उस मोबाइल से अंतिम बातचीत 8 बज कर 50 मिनट पर हुई थी, जबकि साढ़े 8 बजे उस पर एक मिस्ड काल भी आई थी. जांच का सिलसिला मोबाइल से मिली कुछ जानकारियों के साथ शुरू किया गया.

जिस नंबर से विशाल के मोबाइल पर काल की गई थी, वह नंबर सत्यम ओमर नाम के व्यक्ति का था. सत्यम कानपुर निवासी अनिल ओमर का बेटा था. पुलिस द्वारा उस मोबाइल नंबर पर काल की गई तो वह बंद मिला. फिर पुलिस ने नंबर से मिले पते पर दबिश दी, किंतु वहां सत्यम नहीं मिला. सिर्फ इतना मालूम हुआ कि वह इस पते पर ढाई साल पहले रहता था.

हालांकि जल्द ही थानाप्रभारी को मुखबिरों से सत्यम के नए पते की जानकारी मिल गई.

पता चला कि वह अब रामनारायण बाजार स्थित फ्लैट में रहता है. पुलिस को मुखबिर से उस के उस फ्लैट में उपस्थित रहने के समय का भी पता लग गया.

इस सूचना के आधार पर थानाप्रभारी ने क्राइम ब्रांच इंसपेक्टर छत्रपाल सिंह, उस्मानपुर चौकीइंचार्ज प्रमोद कुमार, बसंत विहार चौकीइंचार्ज मनीष कुमार, एसआई रवींद्र कुमार, हैडकांस्टेबल अरविंद सिंह, सुरेंद्र सिंह, दीपू भारतीय, राजीव यादव, कांस्टेबल सौरभ पाडेय, महिला सिपाही पल्लवी के साथ उक्त फ्लैट पर दबिश दी.

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उस समय फ्लैट से 2 युवक सीढि़यों से उतर रहे थे. पुलिसकर्मियों को देखते ही दोनों भागने लगे, लेकिन वे पकड़ लिए गए.

पुलिस दोनों को ले कर उस फ्लैट में गई. उन से पूछताछ करने पर एक युवक ने अपना नाम सत्यम ओमर, जबकि दूसरे ने सरवन बताया. वहीं 16-17 साल की एक लड़की भी मौजूद थी. उस ने पुलिस को बताया कि वह सत्यम की मौसेरी बहन है और पास ही दूसरे मकान में रहती है. उस का नाम राधा (परिवर्तित) था.

उन से पूछताछ के बाद पुलिस ने फ्लैट के बारीकी से निरीक्षण में पाया कि कमरे की दीवारों को जगहजगह खुरचा गया है. इस का कारण पूछने पर उन्होंने बताया कि डिस्टेंपर करवाना है. यह बात पुलिस को हजम नहीं हुई, क्योंकि वहां डिस्टेंपर के लिए किसी तरह के इंतजाम कहीं नहीं दिखा. दीवारों पर खुरचने के निशान भी जहांतहां मिले. उस बारे में सभी ने हिचकिचाट के साथ बताया.

थानाप्रभारी ने राधा के चेहरे पर भी गौर किया, जिस का रंग अचानक तब फीका पड़ गया था, जब उन्होंने कहा कि वे विशाल अग्रवाल की हत्या के सिलसिले में पूछताछ करने आए हैं. इस में उस ने साथ नहीं दिया तो वह भी मुश्किल में पड़ जाएगी.

इसी के साथ थानाप्रभारी दोनों युवकों को विशेष पूछताछ के लिए थाने ले आए. उन्होंने सत्यम से सीधा सवाल किया, ‘‘तुम ने 7 सितंबर की शाम साढ़े 8 बजे विशाल को मिस्ड काल क्यों की थी?’’

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इस का जवाब देते हुए सत्यम हकबकाता हुआ बोला, ‘‘वह नंबर मैं नहीं, मेरी मौसेरी बहन इस्तेमाल करती है. उसी से पूछना होगा.’’

‘‘वह विशाल को कैसे जानती है?’’ सिंह ने सवाल किया.

‘‘मुझे नहीं मालूम,’’ सत्यम बोला.

उस के बाद थानाप्रभारी को उस की मौसेरी बहन राधा भी संदिग्ध लगी. उन्होंने उसे भी तुरंत थाने बुलाया और पूछताछ शुरू की. उस से फोन काल के बारे में नहीं पूछा, बल्कि सीधे लहजे में पूछ लिया कि विशाल से उस के क्या संबंध थे.

यह सवाल सुन कर सामने बैठे अपने भाई और उस के दोस्त सरवन को देख कर घबरा गई. उस के कुछ बोलने से पहले ही थानाप्रभारी ने समझाया, ‘‘तुम्हारे विशाल से जो भी संबंध रहे, वे उस की मौत के साथ खत्म हो गए. तुम्हारे भाई ने भी मुझे कई बातें बताई हैं, जिस से तुम पर भी उस की हत्या में साथ देने का शक है. मुझे पता है कि विशाल ने तुम्हारे मिस्ड काल के थोड़ी देर बाद फोन किया था. तुम सिर्फ इतना बता दो कि उस से तुम्हारी क्या बात हुई थी.’’

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पांच साल बाद- भाग 1: क्या निशांत को स्निग्धा भूल पाई?

उस दिन सुबह से ही मौसम खुशगवार था. निशांत के घर में फूलों की महक थी, हवा गुनगुना रही थी. उस के मम्मी और डैडी कल ही कानपुर से आ गए थे. निशांत ने उन्हें सबकुछ बता दिया था. उन्हें खुशी थी कि बेटा 5 साल बाद ही सही, ठीक रास्ते पर आ गया था वरना न जाने उसे कौन सा रोग लग गया था कि शादी के नाम से भड़क जाता था.

मम्मीपापा के सामने स्निग्धा को खड़ा कर के निशांत ने कहा, ‘‘अब आप देख लीजिए. जैसा आप चाहते थे वैसा ही मैं ने किया. आप एक सुंदर, पढ़ीलिखी और अच्छी बहू अपने बेटे के लिए चाहते थे. क्या इस से अच्छी व सुंदर बहू कोई और हो सकती है?’’

स्निग्धा निशांत की मम्मी के चरण स्पर्श करने के लिए नीचे की तरफ झुकने लगी, परंतु उन्होंने स्निग्धा को अपने कदमों पर झुकने का मौका ही नहीं दिया. उस के पहले ही उसे अपने सीने से लगा लिया.

स्निग्धा पहली नजर में ही सब को पसंद आ गई थी.

निशांत ने मम्मीडैडी को स्निग्धा के बारे में बताना उचित नहीं समझा. वह जानता था कि स्निग्धा के दुखद और कष्टमय विगत को बताने से मम्मीडैडी को मानसिक संताप पहुंच सकता था. इसलिए उस ने थोड़े से झूठ का सहारा लिया और उन्हें केवल इतना बताया कि स्निग्धा को एक रिश्तेदार ने पालापोसा और पढ़ायालिखाया था. इलाहाबाद में वह उस के साथ पढ़ती थी, तभी उन दोनों की जानपहचान हुई थी. अब वह अपने पैरों पर खड़ी थी और दिल्ली में रह कर एक प्राइवेट फर्म में नौकरी कर रही थी. निशांत के परिवार वाले समझदार थे. स्निग्धा की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उस के परिवार के बारे में कोई बात नहीं की.

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निशांत और स्निग्धा की शादी हो गई. बहुत सादगी और परंपरागत तरीके से उन दोनों की शादी का आयोजन किया गया था. निशांत तथा उस के घर वाले शादीब्याह में बहुत ज्यादा तामझाम और दिखावे के खिलाफ थे. थोड़े से खास रिश्तेदारों और मित्रों के बीच में उन की शादी संपन्न हो गई.

शादी के पहले एक दिन एकांत में निशांत ने स्निग्धा से पूछा, ‘अगर तुम्हारा मन हो तो हम दोनों चल कर तुम्हारे मम्मीपापा को मना लाते हैं. उन का आशीर्वाद मिलेगा तो हम सब को अच्छा लगेगा.’

‘चाहती तो मैं भी हूं परंतु अभी मेरे पास इतना नैतिक साहस नहीं है. एक बार तुम्हारे साथ शादी कर के घरगृहस्थी सजा लूं तब फिर चल कर मम्मीपापा से मिलेंगे. तब वे मेरे अतीत की भूलों को माफ भी कर सकेंगे.’

‘जैसी तुम्हारी इच्छा,’ और बात वहीं समाप्त हो गई थी.

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पति, सास, ससुर और एक पारिवारिक जीवन, बिलकुल नया अनुभव था स्निग्धा के लिए. कितना सुखद और स्निग्ध, वसंत के फूलों की खुशबू से भरा हुआ, वर्षा की पहली फुहारों की तरह मदहोश करता हुआ और पायल की मधुर झंकार की तरह कानों में संगीत घोलता हुआ, यह था जीवन का असली संगीत, जिस की धुनों के बीच हर व्यक्ति झूमझूम जाता है. और आज स्निग्धा जीवन के बीहड़ रास्तों के घुमावदार मोड़ों को पार करती हुई अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल हुई थी.

शादी के बाद स्निग्धा ने निशांत के घरपरिवार को ही नहीं, बल्कि उस के व्यक्तित्व को भी संवार दिया था. इस में निशांत की मम्मी का बहुत बड़ा हाथ था. उन्होंने स्निग्धा को एक बेटी की तरह घरपरिवार की जिम्मेदारी से अवगत कराया. उस ने भी अपनी सास से कुछ सीखने में संकोच नहीं किया. नतीजा यह हुआ कि कुछ ही दिनों में उस ने एक समझदार पत्नी, आदर्श बहू और सुलझी हुई गृहिणी के रूप में सब के दिलों में स्थान बना लिया.

अब उसे स्वयं विश्वास नहीं होता था कि वह 5 साल पहले की एक बिगड़ैल और गैरजिम्मेदार, सामाजिक परंपराओं को तोड़ने वाली लड़की थी.

निशांत इतना शांत और सरल स्वभाव का व्यक्ति था कि वह कभी भी स्निग्धा के अतीत की चर्चा नहीं करता था, परंतु वह स्वयं कभीकभी एकांत के क्षणों में सोचने पर मजबूर हो जाती थी कि शादी के पहले वह किस प्रकार का गंदा जीवन व्यतीत कर रही थी. उस ने तब अपने जीवन के लिए जो राह चुनी थी वह एक न एक दिन उसे पतन के गर्त में डुबो देती. बिना शादी के किसी पुरुष के साथ रहना और शादी कर के अपने पति व एक परिवार के बीच रहने में कितना अंतर था. अब उसे महसूस हो रहा था कि शादी के पहले वह एक डरासहमा, उपेक्षित और घृणास्पद जीवन व्यतीत कर रही थी.

अपने रूप और सौंदर्य पर स्निग्धा को बहुत अभिमान था. वह सुशिक्षित और संपन्न परिवार की लड़की थी, इसलिए लालनपालन बहुत प्यार व दुलार के साथ हुआ था. उस ने अपने जीवन में किसी अभाव को कभी महसूस नहीं किया था, उस के ऊपर किसी प्रकार के पारिवारिक और सामाजिक प्रतिबंध नहीं थे, वह जिद्दी और विद्रोही स्वभाव की हो गई थी.

मेरी पत्नी इंटरकोर्स करते समय दर्द की शिकायत करती है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 28 वर्षीय युवक हूं. एक महीने पहले ही मेरी शादी हुई है. वाइफ मुझे बहुत प्यार करती है. हर तरह से मेरा ध्यान रखती है. मैं भी उस से बहुत खुश हूं. सैक्स लाइफ एंजौय कर रहे हैं. सैक्स से पहले फोरप्ले हम दोनों को एक्साइटमैंट से भर देता है. बस, इंटरकोर्स करते समय वह दर्द की शिकायत करती है, ऐसा क्यों है? कृपया सलाह दें.

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जवाब

यह समस्या महिलाओं में अकसर देखने को मिलती है. इंटरकोर्स के दौरान दर्द होना उन्हें सैक्स से दूर कर देता है. यह समस्या वैजाइना में सूखेपन, सूजन या किसी इन्फैक्शन आदि के कारण होती है.

वैसे आप को मालूम होना चाहिए कि आप की पत्नी को कब दर्द हो रहा है और कब वह सैक्स के दौरान सहयोग दे रही है. जिस में वह आनंद उठाए, ऐसी पोजिशन में सैक्स करें तो यह समस्या उत्पन्न ही नहीं होगी. साथ ही, इस के लिए एक अच्छा लुब्रिकैंट भी इस्तेमाल करना चाहिए. अगर इस से भी आराम न हो या इंटरकोर्स के दौरान लगातार दर्द हो तो डाक्टर से सलाह लें.

मैं अपने बच्चे को मिल्क पाउडर का दूध पिलाती हूं, क्या यह उसके हेल्थ के लिए सही है ?

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

“नवजात” को बेचने के “अपराधी”

यह एक प्रसंग देश की संपूर्ण जमीनी हालत का ऐसा सच बता रहा है जिस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. सरकार को ऐसे कदम उठाने चाहिए कि कोई अपनी गरीबी के कारण ना तो अपना जिस्म बेचे और ना ही अपनी नवजात शिशु को.

महाराष्ट्र में अहमदनगर जिले के शिरडी शहर में एक महिला ने कथित तौर पर गरीबी की वजह से  अपने  नवजात शिशु को मुंबई के एक व्यक्ति को 1.78 लाख रुपए में बेच दिया. यहां के डोंबीवली में मानपाड़ा पुलिस थाने मे दर्ज की गई प्राथमिकी से पता चलता है पुलिस ने महिला, बच्चा खरीदने वाले व्यक्ति और इस अपराध में महिला की मदद करने वाले चार लोगों को गिरफ्त में लिया  है. पुलिस थाने के एक अधिकारी अनुसार महिला रेखा देवी (काल्पनिक नाम) ने सितंबर 2021  में एक बच्चे को जन्म दिया था, लेकिन खराब आर्थिक हालात के कारण वह बच्चे के पालन पोषण में असमर्थ थी, इसलिए उसने बच्चे को बेचने के लिए खरीदार की तलाश शुरू कर दी  उसे कुछ बिचौलिए भी मिल गए बच्चे को बेचने की पटकथा लिखी जाने लगी. पुलिस अफसर के अनुसार  अहमदनगर और ठाणे के कल्याण तथा मुलुंड की तीन महिलाओं ने इस काम में उसकी मदद की और उन्होंने मुलुंड के निवासी एक व्यक्ति को बच्चा बेचने का सौदा पक्का कर लिया. प्राथमिकी के अनुसार बच्चे की मां ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर कथित तौर पर व्यक्ति को 1.78 लाख रुपये में बच्चा बेचा. इसके लिए कोई कानूनी औपचारिकता पूरी नहीं की. जब कुछ हंगामा मचा और जानकारी पुलिस तक पहुंची तब सूचना के आधार पर पुलिस ने व्यक्ति के घर पर छापा मारा और बच्चा बरामद किया.इसके बाद बच्चे की मां, बच्चा खरीदने वाले व्यक्ति, तीन अन्य महिलाओं और एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लिया गया.  भारतीय दंड संहिता तथा किशोर न्याय अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है.

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नवजात: जाने कितनी कहानियां

अगर हम इतिहास या पौराणिक कथाओं में जाएं तो ऐसे जाने कितने किस्से कहानियां आपको मिल जाएंगे जो नवजात शिशु के बिक्री और उसके इर्द-गिर्द बुनी गई हैं. फिल्में और साहित्य में ऐसी ही अनेक कहानियां हैं यह मामला समाज का एक ऐसा आईना है जिसे हम अपने आसपास भी अक्सर देखते हैं और महसूस करते हैं कि कभी नवजात को कथित रूप से अवैध संतान होने के कारण परिजन कूड़ेदान में फेंक देते हैं अथवा किसी को पालन पोषण के लिए दे देते हैं. अथवा नदी नालों में बहा दिया जाता है. भाग्यशाली कुछ नवजात शिशु बच जाते हैं अधिकांश अवैध नवजात शिशुओं की मौत हो जाती है.

ऐसे ही एक कथा महाभारत में  भी चर्चित है, यह पांडवों के बड़े भाई कर्ण की है. इसी तरह राजेश खन्ना की पहली फिल्म आराधना और अमिताभ बच्चन की लावारिश भी कुछ इसी ताने-बाने के साथ बनाई गई थीं.

नवजात शिशु के इस प्रसंग के अंतर्गत यह सच समझना होगा कि जाने कितने नवजात शिशुओं के साथ समाज में एक तरह से भयावह व्यवहार और अत्याचार होता है जिसकी आवाज कभी नहीं उठती.

इस संदर्भ में कानून की कुछ धाराओं का प्रावधान जरूर किया गया है मगर जैसे अन्य बहुतेरे कानून किताबों में कैद हैं नवजात शिशु के व्यवहार संबंधी आचरण भी इन कानूनी धाराओं से बहुत दूर होने के कारण अत्याचार जारी रहता है.हां, कभी कभी महाराष्ट्र के अहमदनगर की घटना के तारतम्य में मामला बहुचर्चित हो जाता है.

वस्तुतः यह मामला समाज की एक ऐसी संवेदनशील अपेक्षा का है जो कानून से बहुत दूर है. जब तक समाज में संवेदना का संचार नहीं होता नवजात शिशुओं के साथ ऐसा व्यवहार जाने कब तक चलता रहेगा इसे कोई नहीं जानता.

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नवजात शिशु के आचरण संबंधी कानून के संदर्भ में अधिवक्ता बीके शुक्ला के मुताबिक कानून की धाराएं अपनी पूरी संवेदना के साथ नवजात शिशुओं का संरक्षण करती है और उनकी बिक्री आदि पर कठोर नियम हैं. यही कारण है कि जब कभी इनका कोई उल्लंघन करता है तो कानून के शिकंजे से बच नहीं सकता.

अधिवक्ता डॉ उत्पल अग्रवाल बताते हैं कि अक्सर ऐसे मामले प्रकाश में आते हैं जिनका सिर्फ एक कारण होता है अवैध संतान का ठप्पा जिसके कारण या तो नवजात शिशु के साथ अत्याचार करते हुए उन्हें कहीं फेंक दिया जाता है या फिर अपनी कथित रूप से इज्जत बचाने के लिए किसी जरूरतमंद को पालन पोषण के लिए बच्चे को सौंप दिया जाता है.

GHKKPM: सई का सपोर्ट करेगा निनाद, अश्विनी लगाएगी पाखी की क्लास

स्टार प्लस का सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin) की कहानी में एक नया मोड़ आ चुका है. दर्शको को कहानी का लेटेस्ट ट्रैक काफी पसंद आ रहा है. शो के आने वाले एपिसोड में हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिलेगा. आइए बताते हैं कहानी के नए अपडेट्स के बारे में.

शो में अब तक आपने देखा कि सई चौहान परिवार का दिल जीतने में कामयाब हो रही तो दूसरी तरफ पाखी सई के खिलाफ भवानी के कान भर रही है. तो वहीं भवानी पाखी की बातों में आकर सई को हर्ट कर रही है.

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तो वहीं भवानी सई को अश्विनी के साथ बाजार जाने से भी रोक देती है. शो में आप देखेंगे कि भवानी की इन हरकतों की वजह से चौहान हाउस दो हिस्सों में बंटने वाला है.

 

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शो में दिखाया जाएगा कि भवानी की हरकतों सई दुखी हो जाएगी ऐसे में अश्विनी और निनाद सई का सपोर्ट करेंगे. तो वहीं निनाद भवानी से कहेगा कि सई ने चौहान परिवार के लिए बहुत कुछ किया है. ऐसे में सई के साथ बुरा बर्ताव नहीं होना चाहिए.

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तो दूसरी तरफ अश्विनी भवानी को समझाने की कोशिश करेगी. अश्विनी, पाखी की भी क्लास लगाएगी. ऐसे में पाखी गुस्सा करेगी और पूरे परिवार के सामने सई के खिलाफ जहर उगलेगी. तो वहीं सोनाली भी सई की गलतियां गिनाएगी.

 

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शो से जुड़ी एक खबर सामने आ रही है, बताया जा रहा है कि सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ के आने वाले एपिसोड में एक बड़ा ट्विस्ट आने वाला है. कहानी में जल्द ही सई के सामने विराट का अतीत आ जाएगा. इस बारे में जानकर सई विराट से अलग हो जाएगी.

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Anupama: वनराज ने किया बा को बेघर, क्या शाह हाउस में होगी बापूजी की वापसी?

रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly)  और सुधांशु पांडे (Sudhanshu Pandey) स्टारर सीरियल ‘अनुपमा’ (Anupama) की कहानी में दिलचस्प मोड़ देखने को मिल रहा है. शो में अब तक आपने देखा कि बापूजी ने बा से सारे रिश्ते खत्म कर दिया है और उन्होंने शाह हाउस जाने से मना कर दिया है. ऐसे में काव्या परेशान है कि वनराज के वापस आने के बाद जब उसे पता चलेगा तो वह बा और उसके साथ कैसे पेश आएगा. शो के आने वाले एपिसोड में खूब ड्रामा होने वाला है. आइए बताते हैं शो के आगे की कहानी.

शो में दिखाया जा रहा है कि अनुपमा बापूजी को अपने घर लाई है तो वहीं काव्या अपनी आदतों से बाज नहीं आ रही है और अनुपमा के खिलाफ बा का कान भर रही है. लेकिन वनराज के घर लौटने से पहले काव्या और बा ने बापूजी को घर वापस लाने का प्लान बनाया है. वो दोनों अनुपमा के घर बापूजी को लेने गए हैं पर बापूजी ने साफ मना कर दिया है.

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तो दूसरी तरफ वनराज लगातार घर के लोगों को फोन लगाएगा. लेकिन कोई उसका फोन नहीं उठाएगा. वह काव्या, तोषू, बापूजी को कॉल करेगा. जब कोई फोन नहीं उठाएगा तो वह जल्द ही घर वापस आ जाएगा. शो में आप ये भी देखेंगे कि वनराज घर आते ही तोषू से पूछेगा कि आखिर क्या हुआ है उसके जाने के बाद, किसी ने बापूजी से कुछ कहा है? लेकिन तोषू बात को टाल देगा.

 

तो दूसरी तरफ तोषू काव्या के पास मैसेज करेगा कि वनराज वापस आ चुका है. यह जानकर काव्या और बा के होश उड़ जाएंगे. शो के अपकमिंग एपिसोड में दिखाया जाएगा कि जब वनराज को बापूजी के घर छोड़ने के बारे में पता चलेगा तो उसका गुस्सा बा पर फूटेगा.

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वनराज अपने पिता के अपमान को बर्दाश्त नहीं कर पाएगा. वह गुस्से में आग बबूला हो जाएगा. वह बा से कहेगा कि वह इस घर में तब तक कदम नहीं रख सकती जब तक उसके पिता वापस नहीं आ जाते. वह बा को घर से बाहर कर देगा. शो में अब ये देखना होगा कि क्या बापूजी को शाह हाउस वापस आएंगे या अनुपमा बा की मदद करेगी?

लौटती बहारें- भाग 6: मीनू के मायके वालों में क्या बदलाव आया

राजू भी दिन भर बाहर रहता है. खानेपीने का कोई नियम नहीं. तेरे पापा ने चाय बनानी सीख ली है. चाय तो वे ही बना लेते हैं.

ये सब सुन कर मन बेहद दुखी हुआ. मैं भी रेनू और राजू के बहकते कदमों के बारे में मम्मी को सतर्क करना चाहती थी पर उन के स्वास्थ्य को देखते हुए मैं ने इस विषय पर चुप्पी ही साध ली.

अगले दिन मैं ने अपनी सहेली चित्रा को फोन किया. वह मुझ से मिलने घर आ गई. विवाह के बाद मैं उसे मिल न पाई थी. चित्रा मेरी बचपन की एक मात्र अंतरंग सखी थी. वह एक धनी व्यवसायी की बेटी थी, परंतु घमंड से कोसों दूर थी. बेहद स्नेहमयी थी. इसीलिए वह हमेशा मेरे दिल के करीब रही. दोनों एकदूसरे के दुखसुख में भागीदार रहती थीं.

चित्रा के आने पर मेरा मन खुश हो उठा. हम दोनों पहले मम्मी के पास बैठीं.

मम्मी बोलीं, ‘‘अरे चित्रा, आज तो तू मीनू को कहीं बाहर घुमा ला. जब से आई है मेरी सेवा में लगी है. अब मैं ठीक हूं.’’

चित्रा ने चलने का अनुरोध किया तो मैं मना न कर पाई. वह अपनी कार में आई थी. दोनों एक रेस्तरां में पहुंच गईं. चित्रा ने कौफी और सैंडविच का और्डर दिया. फिर दोनों बतियाने लगीं. चित्रा मुझ से मेरे विवाह और ससुराल के अनुभव सुनने के लिए बेताब थी. फिर अचानक चित्रा गंभीर हो गई. बोली, ‘‘मीनू, हम दोनों कितने समय बाद मिले हैं. मैं तेरा दिल दुखाना नहीं चाहती हूं पर इस विषय पर चुप्पी साध कर भी मैं तेरा और तेरे परिवार का नुकसान नहीं करना चाहती.’’

मैं ने उसे सब कुछ खुल कर बताने को कहा तो चित्रा ने कहा, ‘‘मीनू तू तो जानती है

कि मेरा छोटा भाई रजत और राजू कालेज में एकसाथ ही हैं. रजत ने मुझे बताया कि राजू 3-4 महीनों से कालेज में बहुत कम दिखाई देता है. वह कुछ दादा टाइप लड़कों के साथ घूमता है. प्रोफैसर उसे कई बार चेतावनी दे चुके हैं. मुझे लगता है उसे अभी न रोका गया तो वह गलत रास्ते पर आगे बढ़ जाएगा, फिर वहां से लौटना कठिन हो जाएगा.’’

मैं ने चित्रा को शुक्रिया कहा और बोली, ‘‘तू ने सही समय पर मुझे सचेत कर दिया. राजू से आज ही बात करती हूं.’’

बात निकली तो मैं ने रेनू के बारे में भी चित्रा को सब बता दिया. मेरी बात सुन कर चित्रा कहने लगी, ‘‘वैसे तो इस उम्र में लड़कियों और लड़कों में आकर्षण आम बात है पर परेशानी तब होती है जब लड़के मासूम लड़कियों को बहलाफुसला कर उन से संबंध बना कर उन के आपत्तिजनक वीडियो बना कर ब्लैकमेल करने लगते हैं.’’

मैं ने कहा, ‘‘बस चित्रा मुझे यही चिंता खा रही है. रेनू सुनने को तैयार ही नहीं है.

क्या करूं?’’

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अभी हम बातें कर ही रही थीं कि एकाएक मेरी नजर सामने की टेबल पर पड़ी. वहां एक नवयुवक और एक नवयुवती हाथों में हाथ डाले जूस पी रहे थे. वे धीरेधीरे बातें कर रहे थे. मुझे लगा कि इस लड़के को कहीं देखा है. दिमाग पर जोर डाला और ध्यान से देखा तो याद आ गया. यह वही लड़का है, जिस के साथ रेनू बाइक पर घूमती है.

बस अब मेरा दिमाग तेजी से काम करने लगा. इस फ्लर्टी लड़के के चक्कर में रेनू मेरा इतना अपमान कर रही थी. मैं ने झटपट एक प्लान बनाया और चित्रा को समझाया. चित्रा वाशरूम जाने के बहाने उन दोनों के पास जा कर रुकेगी और मैं समय नष्ट न करते हुए मोबाइल से उन का फोटो ले लूंगी. अगर वह जोड़ा सचेत हो जाता है, तो मैं कैमरे का रुख चित्रा की ओर कर के उसे पोज देने को कहने लगूंगी. मगर दोनों प्रेमी अपने आसपास की चहलपहल से बेखबर एक ही गिलास में जूस पीने में मस्त थे. मैं ने जल्दी से फोटो लिए और हम दोनों रेस्तरां से बाहर आ गईं.

घर पर रेनू और राजू भी आ चुके थे. राजू तो चित्रा को घर आया देख सकपका सा गया

पर चित्रा को रेनू बहुत पसंद करती थी, इसलिए वह चित्रा से बहुत प्यार से मिली. एकदूसरे का हालचाल पूछ कर रेनू सब के लिए चाय बनाने चली गई.

कुछ देर रुक राजू मौका देख कर कोचिंग क्लास के बहाने बाहर जाने लगा तो चित्रा ने लपक कर उस का हाथ पकड़ लिया और बोली, ‘‘क्यों मैं इतने दिनों बाद आई हूं, मुझ से बातचीत नहीं करोगे? मीनू के ससुराल जाने के बाद अब मैं ही तुम्हारी दीदी हूं. मुझ से अपने मन की बात कह सकते हो,’’ यह कहतेकहते वह राजू को अलग कमरे में ले गई.

चित्रा ने राजू को समझाया, ‘‘तुम्हारी हरकतों से तुम्हारा कैरियर तो खराब होगा ही, पूरे घर के मानसम्मान पर भी धब्बा लगेगा. तुम्हारे मातापिता तुम से कितनी उम्मीदें लगाए बैठे हैं.’’

राजू सब सिर झुकाए सुनता रहा.

चित्रा ने आगे कहा, ‘‘तुम कल से नियमित कालेज जाओ… उन लड़कों से मिलनाजुलना बंद करो. अगर इस में कोई भी समस्या सामने आती है, तो प्रोफैसर आदित्य के पास चले जाना. वे मेरे कजिन हैं. हर तरह से तुम्हारी मदद करेंगे. हां, अब तुम्हारी सारी गतिविधियों पर ध्यान भी रखा जाएगा. याद रहे तुम्हारी मीनू दीदी उसी कालेज में टौपर रह चुकी हैं.’’

राजू चित्रा का बहुत आदर करता था. अत: ये सब सुन कर रो पड़ा. उस ने चित्रा से वादा किया कि वह उन की बातों पर अमल करेगा. चित्रा ने प्यार से उस की पीठ थपथपाई. तभी

रेनू चाय बना कर कर ले आई. उधर मैं ने भी अपना काम कर लिया. मैं ने रेस्तरां में खींचे गए फोटो वहीं रख दिए जहां टेबल पर रेनू ने चाय रखी थी. मैं वहां से उठ कर मम्मी के कमरे में चली गई.

रेनू चाय के लिए सब को बुलाने लगी. हम सब हंसतेखिलाते चाय पीने लगे. तभी रेनू की नजर फोटो पर पड़ गई, ‘‘किस के फोटो हैं ये?’’ कह कर उन्हें उठा लिया.

चित्रा बोली, ‘‘ये मेरे फोटो खींच रही थी. मेरे तो खींच नहीं पाई. यह जोड़ा रेस्तरां में बैठा था, उस की खिंच गई. मीनू तू तो मोबाइल से भी फोटो नहीं खींच पाती.’’

फोटो देखते ही रेनू के चेहरे का रंग बदल गया. हम चुपचाप अनजान बने चाय पीते रहे.

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रेनू चुपचाप वहां से चली गई. हम थोड़ी देर बाद रेनू के कमरे में जा पहुंचे. वह बिस्तर पर पड़ी रो रही थी.

चित्रा ने उस से प्यार से रोने का कारण पूछा तो उस ने पहले तो बहाना किया पर उस का बहाना मेरे और चित्रा के सामने नहीं चला. मैं ने पुचकार कर पूछा तो उस ने उस लड़के के बारे में सब बता दिया. मैं ने और चित्रा ने उसे इस उम्र में होने वाली गलतियों से आगाह किया और पढ़ाईलिखाई में ध्यान देने को कहा.

रेनू रोतेरोते मेरे गले लग गई और बोली, ‘‘दीदी, मुझे डांटो, मैं बहुत खराब हूं.’’

तब मैं ने प्यार से समझाया, ‘‘सुबह का भूला अगर शाम को घर वापस आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते. अब मम्मीपापा की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी तुम्हारी है.’’

रेनू ने हां में सिर हिला दिया. राजू भी सिर झुकाए खड़ा था. वह भी मेरे गले लग गया.

चित्रा जाते समय मम्मीपापा से मिलने गई तो हंस कर बोली, ‘‘अंकल जिस काम के लिए मैं यहां आई थी उसे तो भूल कर जा रही थी. दरअसल, पापा ने मुझे आप के पास इसलिए भेजा था कि पापा को अपने व्यवसाय के लिए एक अनुभवी अकाउंटैंट चाहिए. यदि आप यह कार्य संभाल लें तो उन की चिंता कम हो जाएगी.’’

पापा की खुशी की सीमा न रही. बोले, ‘‘नेकी और पूछपूछ. चित्रा बेटी तुम्हारा यह उपकार कभी नहीं भूलूंगा.’’

यह सुन कर चित्रा प्यार भरे गुस्से से बोली, ‘‘अंकल आप ऐसा कहेंगे तो मैं आप से बहुत नाराज हो जाऊंगी.’’

पापा ने मुसकरा कर अपने कान पकड़ लिए तो सभी जोर से हंस पड़े. सारा माहौल खुशगवार हो गया.

मम्मी अब ठीक थीं. रेनू ने भी घर के कामकाज में ध्यान देना शुरू कर दिया था. मैं ने भी ससुराल लौटने की इच्छा जताई. इस बार राजू मुझे ससुराल छोड़ने जा रहा था. अगले दिन मैं जाने से पहले मम्मीपापा के कमरे के पास से गुजर रही थी तो मुझे उन की बातचीत सुनाई पड़ी.

मम्मी कह रही थीं, ‘‘देखो हम बेटियों को पराया धन, पराई अमानत कह कर दुखी करते हैं परंतु बेटियां पति के घर जा कर भी पिता की चिंता नहीं छोड़तीं.’’

पापा हंस कर बोले, ‘‘तुम ने वह कहावत नहीं सुनी है कि बेटे अपने तब तक रहते हैं जब तक न हो वाइफ और बेटियां तब तक साथ रहती हैं जब तक हो लाइफ.’’

यह सुन कर मैं भी मुसकरा दी. अगले दिन मैं मायके से विदा हो कर ससुराल आ गई. सभी मुझ से और राजू से बहुत प्यार से मिले. शेखर ने राजू को पूरी दिल्ली घुमाया. कई तोहफे दिए. नीलम जीजी भी राजू से मिलने आईं. राजू बहुत ही अच्छे मूड में विदा हुआ.

अम्मां के घुटनों के दर्द के लिए मैं एक तेल लाई थी. उस से मालिश कर के अम्मां और पापाजी के कमरे से निकली तो पापा की आवाज सुनाई दी, ‘‘बहुएं तो प्यार की भूखी होती हैं. जब तक उन्हें पराए घर की, पराए खून की कहते रहेंगे वे ससुराल में अपनी जगह कैसे बनाएंगी?’’

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अम्मां बोलीं, ‘‘सच कह रहे हो शेखर के पापा… वे बेचारियां अपना मायके का सब कुछ छोड़ कर हमारे आसरे आती हैं और हम उन्हें अपनाने में पीछे हटते हैं.’’

‘‘ये नादानियां तुम्हीं ने सब से ज्यादा की हैं,’’ पापा ने कहा तो अम्मां ने शर्म से सिर झुका लिया.

Satyakatha- इश्क का जुनून: प्यार को खत्म कर गई नफरत की आग- भाग 1

सौजन्य- सत्यकथा

लेखक-  दिनेश बैजल ‘राज’/संजीव दुबे

उत्तर प्रदेश का फिरोजाबाद जिला चूडि़यों एवं कांच के सामान बनाने के लिए प्रसिद्ध है. इसी जिले के थाना सिरसागंज

के गांव जहांगीरपुर में देवीराम यादव अपने परिवार के साथ रहता था. देवीराम खेतीकिसानी करता था.

परिवार में उस की पत्नी के अलावा 3 बेटियां व सब से छोटा बेटा था. इन में तीसरे नंबर की बेटी नेहा थी. सुंदर होने के साथसाथ चंचल स्वभाव की नेहा गांव से करीब 10 किलोमीटर दूर सिरसागंज के एक इंटर कालेज में 10वीं कक्षा में पढ़ती थी.

इसी गांव में देवीराम के मकान के सामने सुघर सिंह यादव भी अपने परिवार के साथ रहता था. वह भी खेतीकिसानी करता था. इस काम में उस के बेटे उस का हाथ बंटाते थे. 4 बेटों में उत्तम तीसरे नंबर का था. कक्षा 10 में फेल होने के बाद उस का मन पढ़ाई से उचट गया. इस के बाद वह शटरिंग का काम करने लगा था.

नेहा और उत्तम के घर आमनेसामने होने और एक ही जाति के होने से दोनों के परिवारों में नजदीकियां थीं. 16 वर्षीय नेहा जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी थी. इस उम्र में लड़कियों का लड़कों के प्रति आकर्षण होना स्वाभाविक बात है. नेहा के साथ भी यही हुआ.

जब कभी घर के सामने दरवाजे पर खड़े उत्तम पर उस की नजर पड़ जाती, वह चोर निगाह से उसे देख लेती. धीरेधीरे उसे उत्तम अच्छा लगने लगा. जब वह स्कूल जाती तो रास्ते में अकसर उत्तम मिल जाता था. वह भी उसे चाहत की नजरों से देखता था. उस की उम्र करीब 20 साल थी. धीरेधीरे दोनों एकदूसरे की ओर आकर्षित हुए.

नेहा और उत्तम के बीच लुकाछिपी का यह सिलसिला काफी दिनों तक चलता रहा. दोनों एकदूसरे से अपने प्यार का इजहार करने में सकुचा रहे थे, क्योंकि उन का यह पहलापहला प्यार था.

एक दिन स्कूल जाते समय रास्ते में उत्तम ने हिम्मत जुटा कर नेहा से पूछ ही लिया, नेहा कैसी हो? तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है?

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नेहा तो इस पल का न जाने कब से इंतजार कर रही थी. उस ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘मेरी पढ़ाई तो ठीक चल रही है, पर तुम कैसे हो?

‘‘मैं भी अच्छा हूं.’’ उत्तम ने जवाब दिया.

‘‘उत्तम तुम ने पढ़ाई क्यों छोड़ दी?’’ नेहा ने पूछा.

‘‘मेरा मन नहीं लगता था. कुछ काम करूंगा तो चार पैसे इकट्ठा कर लूंगा.’’

जब भी दोनों मिलते एकदूसरे की तरफ देख कर मुसकरा देते थे. इस दौरान दोनों का झुकाव एकदूसरे के प्रति गया. धीरेधीरे नेहा और उत्तम के प्रेम संबंध हो गए.

दोनों ने एकदूसरे को अपनेअपने मोबाइल नंबर भी दे दिए थे. जिस से उन के बीच फोन पर भी बातचीत होने लगी. रही बात मिलने की तो नेहा से वह उस के स्कूल जाने पर सिरसागंज में बेरोकटोक मिल लेता था.

धीरेधीरे उन का प्यार परवान चढ़ने लगा. दोनों किसी न किसी बहाने मिल लेते थे. उन के प्रेमसंबंध यहां तक पहुंच गए थे कि उन्होंने शादी तक करने का फैसला कर लिया था.

वे एक ही जाति के थे, इसलिए उन्हें पूरा विश्वास था कि उन के घर वालों को उन की शादी पर कोई ऐतराज नहीं होगा. लेकिन उन के सामने समस्या यह थी कि नेहा से बड़ी 2 बहनें अभी अविवाहित थीं.

नेहा और उत्तम मिलने और मोबाइल पर बात करने में पूरी सावधानी बरतते थे. लेकिन गांवों में प्यारमोहब्बत या अवैध संबंधों की बातें ज्यादा दिनों तक छिपती नहीं हैं. नेहा और उत्तम के मामले में भी यही हुआ.

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प्यार पर पहरा भी हुआ नाकाम

कई बार दोनों को साथ पकड़ा गया. इस के बाद नेहा के घर वालों ने उसे काफी समझाया और उत्तम से न मिलने की धमकी भी दी गई. किशोरी के परिजनों ने मेलजोल पर रोक के लिए उत्तम और उस के परिवार से भी शिकायत की. चेतावनी के बाद भी नेहा और उत्तम मिलते रहे, भविष्य की भूमिका बनाते रहे. हां, दोनों ने अब सावधानी जरूर बरतनी शुरू कर दी थी.

लेकिन प्रेम का रंग हलका हो या गाढ़ा, अपना रंग आसानी से नहीं छोड़ता. ज्यादा अंकुश लगाने का परिणाम यह हुआ कि प्रेमीयुगल पर प्यार का ऐसा खुमार चढ़ा कि दोनों ने घर से भाग कर शादी का निर्णय ले लिया. और फिर दोनों मार्च 2021 में अपनेअपने घरों से भाग गए.

किसी तरह इस बात का पता नेहा के घर वालों को लग गया. उन्होंने दोनों की तलाश शुरू कर दी. दोनों प्रेमी अभी सिरसागंज ही पहुंचे थे कि धर लिए गए.

दोनों को घर लाया गया. हंगामा भी हुआ. गांव वालों ने बीचबचाव कर दोनों पक्षों में समझौता करा दिया. समझौता भले ही हो गया हो, लेकिन दोनों परिवारों में तल्खी बढ़ती गई. अब नेहा पर कड़ा पहरा रहने लगा.

प्रेमी युगल किसी तरह सीने पर पत्थर रख कर कई महीने शांत रहे. नेहा के घर वालों ने भी सोचा कि अब शायद नेहा के सिर से प्यार का भूत उतर गया है. लेकिन उन की सोच गलत थी. दोनों के दिल में प्यार की आग धधक रही थी.

नेहा ने इस बात का फायदा उठाया और एक दिन मौका मिलते ही उत्तम से मिली.

वह उत्तम को देखते ही उस से लिपट गई.

उस की आंखों में आंसू आ गए. वह बोली, ‘‘उत्तम, मेरे घर वालों और गांव वालों से डर कर तुम मुझे कहीं भूल तो नहीं जाआगे?’’

इस पर उत्तम ने उस के होंठों पर हाथ रख कर उसे चुप कराते हुए कहा, ‘‘नेहा दो सच्चे प्रेमियों को मिलने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती. हमारे प्यार के बीच चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, मैं वादा करता हूं कि तुम्हारा हर तरह से साथ दूंगा. मैं जिंदगी भर तुम्हारा साथ नहीं छोड़ूंगा.’’

31 जुलाई, 2021 की सुबह 10 बजे दोनों अचानक लापता हो गए. उस समय दोनों के परिवार व आसपास के लोग अपनेअपने काम पर चले गए थे. प्रेमी युगल के फिर से लापता होने की किसी को खबर नहीं हुई.

काफी देर बाद दोनों के घर वालों को इस बात का पता चला. घर वाले उन्हें खोजने में जुट गए. कई घंटे की तलाश के बाद भी उन का सुराग नहीं लगा.

गांव वालों ने इस संबंध में पुलिस को सूचना देने की बात कही. लेकिन बदनामी के डर से नेहा के पिता देवीराम ने थाने में सूचना देने या रिपोर्ट करने से मना कर दिया.

सुघर सिंह और उस के परिजन बेटे उत्तम को रिश्तेदारियों व संभावित स्थानों पर तलाश करते रहे. इस के बाद 10 अगस्त को थाना सिरसागंज में सुघर सिंह ने अपने बेटे उत्तम की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद गांव में उसे पता चला कि उत्तम का नेहा के घरवालों ने अपहरण कर लिया है.

पुलिस की 6 टीमें जुटीं जांच में

इस बात की जानकारी होने पर सुघर सिंह ने 12 अगस्त को जान से मारने की नीयत से उत्तम के अपहरण की रिपोर्ट भादंवि की धारा 364 के अंतर्गत नेहा के पिता देवीराम, चाचा शिवराज व गांव के ही श्याम बिहारी, रोहित, राहुल, अमन उर्फ मोनू तथा चालक गुंजन निवासी कुतुकपुर के विरुद्ध दर्ज करा दी.

रिपोर्ट दर्ज होने की भनक मिलते ही आरोपी फरार हो गए. मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी अशोक कुमार शुक्ला ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसपी (ग्रामीण) डा. अखिलेश नारायण के नेतृत्व में 6 टीमों का गठन किया.

अगले भाग में पढ़ें- दगाबाज निकला जिगरी दोस्त वीनेश

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