रणदीप हुड्डा के साथ OTT डेब्यू करेगा ‘राधे मां’ का बेटा हरजिंदर सिंह!

राधे मां एक ऐसी शख्सियत हैं, जो आए दिन खबरों का हिस्सा बनी रहती हैं. राधे मां को लोगों के द्वारा संत घोषित किया गया है. लेकिन क्या आप उनके परिवार के बारे में जानते हैं? राधे मां का बेटा एक एक्टर है और जल्द ही ओटीटी की दुनिया में भी डेब्यू करने वाला है. जी हां, रणदीप हुड्डा के साथ राधे मां का लाडला हरजिंदर सिंह नजर आने वाले हैं.

राधे मां के बेटे का ओटीटी डेब्यू

राधे मां को आज किसी पहचान की जरूरत नहीं है. राधे मां को दुनियाभर में करोड़ों लोग फॉलो करते हैं. लेकिन बहुत कम लोगों को ही पता होगा कि राधे मां का एक बेटा भी है, जो कुछ बॉलीवुड फिल्मों में भी नजर आ चुके हैं. उन्हें ‘ड्रीम गर्ल’ और ‘आई एम बन्नी’ जैसी फिल्मों में देखा जा चुका है. राधे मां के बेटे का नाम हरजिंदर सिंह है. हरजिंदर जल्द ही रणदीप हुड्डा के साथ ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ नामक वेब सीरीज से डेब्यू करने जा रहे हैं. बताया जा रहा है की इस सीरीज में हरजिंदर का रोल काफी स्ट्रांग होगा. जब से लोगों को इस बारे में पता चला है, तब से वे हरजिंदर को वेब सीरीज में देखने को बेताब हैं.

एक्टर ही बनना चाहते थे हरजिंदर

राधे मां के बेटे हरजिंदर सिंह  ने हाल ही में एक इंटरव्यू दिया, जिसमें उन्होंने बताया कि वे बचपन से ही क्रिकेटर या फिर एक्टर बनना चाहते थे. उन्होंने कहा, ‘मेरे दो ही शौक रहे हैं. मुझे क्रिकेटर बनना था और दूसरा एक्टर. जितना मैं जानता हूं क्रिकेटर की एक उम्र होती है. एक वक्त था जब एक्टिंग की भी उम्र थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है. अब आप कभी भी कैमरे के सामने आ सकते हैं. बस युवा किरदार नहीं कर सकते हैं वरना हमेशा एक्टिंग कर सकते हैं. मैं एमआईटी पुणे से पढ़ा हूं. वहां पर जो भी इवेंट्स होते थे तो मैं उनमें लगा ही रहता था. वहां से फिर धीरे धीरे लिंक निकलता चला गया. मुझे यह भी समझ में आ चुका था कि स्टेज पर रहना मुझे खुशी देता है.’

रणदीप हुडा के फैन हैं हरजिंदर

रणदीप हुड्डा के साथ काम करने के अपने अनुभव को लेकर हरजिंदर कहते हैं,  ‘उनके साथ काम करने का अनुभव बहुत अच्छा रहा. एक एक्टर के तौर पर वह मुझे बहुत पसंद हैं. मैंने उन्हें लखनऊ शूटिंग में बताया था कि मैं कई बार कई फिल्में सिर्फ उनकी वजह से देखने गया हूं वरना मैं नहीं जाता था’.

हरजिंदर के पास काम की कमी नहीं

हरजिंदर ने बताया कि उनके पास कुछ और बड़े प्रोजेक्ट्स भी हैं, लेकिन उनके बारे में अभी बात करना जल्दबाजी होगी.

एक जहां प्यार भरा: भाग 1

कहते हैं इंसान को जब किसी से प्यार होता है तो जिंदगी बदल जाती है. खयालों का मौसम आबाद हो जाता है और दिल का साम्राज्य कोई लुटेरा लूट कर ले जाता है.

प्यार के सुनहरे धागों से जकड़ा इंसान कुछ भी करने की हालत में नहीं होता सिवाए अपने दिलबर की यादों में गुम रहने के. कुछ ऐसा ही होने लगा था मेरे साथ भी. हालांकि मैं सिर्फ अपने एहसासों के बारे में जानती थी.

इत्सिंग क्या सोचता है इस बारे में मुझे जानकारी नहीं थी. इत्सिंग से परिचय हुए ज्यादा दिन भी तो नहीं हुए थे. 3 माह कोई लंबा वक्त नहीं होता.

मैं कैसे भूल सकती हूं 2009 के उस दिसंबर महीने को जब दिल्ली की ठंड ने मुझे रजाई में दुबके रहने को विवश किया हुआ था. कभी बिस्तर पर, कभी रजाई के अंदर तो कभी बाहर अपने लैपटौप पर चैटिंग और ब्राउजिंग करना मेरा मनपसंद काम था.

हाल ही में मैं ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से चाइनीज लैंग्वेज में ग्रैजुएशन कंप्लीट किया था.

आप सोचेंगे मैं ने चाइनीज भाषा ही क्यों चुनी? दरअसल, यह दुनिया की सब से कठिन भाषा मानी जाती है और इसी वजह से यह पिक्टोग्राफिक भाषा मुझे काफी रोचक लगी. इसलिए मैं ने इसे चुना. मैं कुछ चीनी लोगों से बातचीत कर इस भाषा में महारत हासिल करना चाहती थी ताकि मुझे इस के आधार पर कोई अच्छी नौकरी मिल सके.

मैं ने इंटरनैट पर लोगों से संपर्क साधने का प्रयास किया तो मेरे आगे इत्सिंग का प्रोफाइल खुला. वह बीजिंग की किसी माइन कंपनी में नौकरी करता था और खाली समय में इंटरनैट सर्फिंग किया करता.

मैं ने उस के बारे में पढ़ना शुरू किया तो कई रोचक बातें पता चलीं. वह काफी शर्मीला इंसान था. उसे लौंग ड्राइव पर जाना और पेड़पौधों से बातें करना पसंद था. उस की हौबी पैंटिंग और सर्फिंग थी. वह जिंदगी में कुछ ऐसा करना चाहता था जो दुनिया में हमेशा के लिए रह जाए. यह सब पढ़ कर मुझे उस से बात करने की इच्छा जगी. वैसे भी मुझे चाइनीस लैंग्वेज के अभ्यास के लिए उस की जरूरत थी.

काफी सोचविचार कर मैं ने उस से बातचीत की शुरुआत करते हुए लिखा, “हैलो इत्सिंग.”

 ये भी पढ़ें : अक्ल वाली दाढ़ : कयामत बन कर कैसे आई दाढ़

 

हैलो का जवाब हैलो में दे कर वह गायब हो गया. मुझे कुछकुछ अजीब सा लगा लेकिन मैं ने उस का पीछा नहीं छोड़ा और फिर से लिखा,” कैन आई टौक टू यू?”

उस का एक शब्द का जवाब आया, “यस”

“आई लाइक्ड योर प्रोफाइल,” कह कर मैं ने बात आगे बढ़ाई.

“थैंक्स,” कह कर वह फिर खामोश हो गया.

उस ने मुझ से मेरा परिचय भी नहीं पूछा. फिर भी मैं ने उसे अपना नाम बताते हुए लिखा,” माय सैल्फ रिद्धिमा फ्रौम दिल्ली. आई हैव डन माई ग्रैजुएशन इन चाइनीज लैंग्वेज. आई नीड योर हैल्प टू इंप्रूव इट. विल यू प्लीज टीच मी चाइनीज लैंग्वेज?”

इस का जवाब भी इत्सिंग ने बहुत संक्षेप में दिया,” ओके बट व्हाई मी? यू कैन टौक टू ऐनी अदर पीपल आलसो.”

“बिकौज आई लाइक योर थिंकिंग. यू आर वेरी डिफरैंट. प्लीज हैल्प मी.”

“ओके,” कह कर वह खामोश हो गया पर मैं ने हिम्मत नहीं हारी. उस से बातें करना जारी रखा. धीरेधीरे वह भी मुझ से बातें करने लगा. शुरुआत में काफी दिन हम चाइनीज लैंग्वेज में नहीं बल्कि इंग्लिश में ही चैटिंग करते रहे. बाद में उस ने मुझे चाइनीज सिखानी भी शुरू की. पहले हम ईमेल के द्वारा संवाद स्थापित करते थे. पर अब तक व्हाट्सएप आ गया था सो हम व्हाट्सएप पर चैटिंग करने लगे.

व्हाट्सएप पर बातें करतेकरते हम एकदूसरे के बारे में काफी कुछ जाननेसमझने लगे. मुझे इत्सिंग का सीधासाधा स्वभाव और ईमानदार रवैया बहुत पसंद आ रहा था. उस की सोच बिलकुल मेरे जैसी थी. वह भी अन्याय बरदाश्त नहीं कर सकता था. शोशेबाजी से से दूर रहता और महिलाओं का सम्मान करता. उसे भी मेरी तरह फ्लर्टिंग और बटरिंग पसंद नहीं थी.

 ये भी पढ़ें : खेल : मासूम दिखने वाली दिव्या तो मुझ से भी माहिर

आज हमें बातें करतेकरते 3-4 महीने से ज्यादा समय गुजर चुका था. इतने कम समय में ही मुझे उस की आदत सी हो गई थी. वह मेरी भाषा नहीं जानता था पर मुझे बहुत अच्छी तरह समझने लगा था. उस की बातों से लगता जैसे वह भी मुझे पसंद करने लगा है. मैं इस बारे में अभी पूरी तरह से आश्वस्त नहीं थी. पर मेरा दिल उसे अपनाने की वकालत कर चुका था. मैं उस के खयालों में खोई रहने लगी थी. मैं समझ नहीं पा रही थी कि उस से अपनी फीलिंग्स शेयर करूं या नहीं.

एक दिन मेरी एक सहेली मुझ से मिलने आई. उस वक्त मैं इत्सिंग के बारे में ही सोच रही थी. सहेली के पूछने पर मैं ने उसे सब कुछ सचसच बता दिया.

वह चौंक पड़ी,”तुझे चाइनीज लड़के से प्यार हो गया? जानती भी है कितनी मुश्किलें आएंगी? इंडियन लड़की और चाइनीज लड़का…. पता है न उन का कल्चर कितना अलग होता है? रहने का तरीका, खानापीना, वेशभूषा सब अलग.”

“तो क्या हुआ? मैं उन का कल्चर स्वीकार कर लूंगी.”

“और तुम्हारे बच्चे? वे क्या कहलाएंगे इंडियन या चाइनीज?”

“वे इंसान कहलाएंगे और हम उन्हें इंडियन कल्चर के साथसाथ चाइनीज कल्चर भी सिखाएंगे.”

मेरा विश्वास देख कर मेरी सहेली भी मुसकरा पड़ी और बोली,” यदि ऐसा है तो एक बार उस से दिल की बात कह कर देख.”

मुझे सहेली की बात उचित लगी. अगले ही दिन मैं ने इत्सिंग को एक मैसेज भेजा जिस का मजमून कुछ इस प्रकार था,”इत्सिंग क्यों न हम एक ऐसा प्यारा सा घर बनाएं जिस में खेलने वाले बच्चे थोड़े इंडियन हों तो थोड़े चाइनीज.”

“यह क्या कह रही हैं आप रिद्धिमा? यह घर कहां होगा इंडिया में या चाइना में?” इत्सिंग ने भोलेपन से पूछा तो मैं हंस पड़ी,”घर कहीं भी हो पर होगा हम दोनों का. बच्चे भी हम दोनों के ही होंगे. हम उन्हें दोनों कल्चर सिखाएंगे. कितना अच्छा लगेगा न इत्सिंग.”

 ये भी पढ़ें : अपने घर में: भाग 1- सास-बहू की जोड़ी

मेरी बात सुन कर वह अचकचा गया था. उसे बात समझ में आ गई थी पर फिर भी क्लियर करना चाहता था.

“मतलब क्या है तुम्हारा? आई मीन क्या सचमुच?”

“हां इत्सिंग, सचमुच मैं तुम से प्यार करने लगी हूं. आई लव यू.”

आगे पढ़ें

एक जहां प्यार भरा: रिद्धिमा और इत्सिंग मिल पाए?

कई रोगों का आसान इलाज है पान के पत्ते का सेवन

पान का नाम जैसे ही आता है तो दादा के डब्बे से निकलता सरोता और साथ में चुना कथ्था याद आ ही जाता है. अंदर से दादी का पानी में भीगा हुआ पान का पत्ता लेकर हाजिर हो जाना उन कुछ यादों सा होता है जो रोजाना की बात होता हैं. पान का भारत में उन संस्कृति में शामिल है जो हर गली, मौहल्ले को एक धागे में बांधता हैं. हमारे देश में पान और सुपारी का उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों और प्रार्थनाओं में भी किया जाता है क्योंकि इसे शुभ माना जाता है. इसी में अगर हम आपसे कहे की पान खाना कई रोगों से निजाद दिलाता है तो क्यां आप मानेंगे. चलिए जानते है की पान कैसे आपनी सेहत के लिए फायदेमंद हैं…

विटामिन्स से भरपूर है पान

पान के पत्तियां विटामिन सी, थायमिन, नियासिन, राइबोफ्लेविन और कैरोटीन जैसे विटामिन से भरपूर होते हैं और इसे कैल्शियम का एक बड़ा स्त्रोत भी माना जाता हैं. हालांकि ये जरूर है कि पान के पत्ते को तंबाकू और अन्य कैंसर पैदा करने वाले सामग्रियों के साथ खाने से मुंह के कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है. एक रिसर्च के अनुसार ये होंठ, मुंह, जीभ और ग्रसनी के कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं. केवल पान का पत्ता खाना स्वस्थ्य के लिए फायदेमंद होता है.

ये भी पढ़ें- जाने चीज क्यों है आपकी सेहत के लिए फायदेमंद

कैंसर और डायाबिटीज जैसे रोग के लिए फायदेमंद  

पान के पत्ते की बात करें तो इसमें फाइटोकेमिकल्स, फ्लेवोनोइड, टैनिन, अल्कलौइड, स्टेरौयड और क्विनोन जैसे शक्तिशाली एंटीऔक्सिडेंटस और एंटी इंफ्लेमेटरी यौगिक शामिल हैं. जो कैंसर और डायाबिटीज जैसे खतरनाक बामारियों को रोकने में आपकी मदद करता है. कुछ आयुर्वेदिक रिसर्च के अनुसार ये कार्डियोवस्कुलर रोग, उच्च कोलेस्ट्रौल और हाई ब्लड प्रेशर की रोकथाम में भी काफी मददगार होता है.

सर्दी जुखाम में पान के पत्ते का इस्तेमाल

लोग पान के पत्ते का उपयोग काफी लंबे समय से सर्दी और खांसी को दूर करने के लिए करते आ रहे हैं. पत्तियों को पहले सरसों के तेल में भिंगा कर गर्म किया जाता है और फिर उसे छाती पर लगाया जाता है इससे फेफड़ों में जमे कफ से काफी राहत मिलता है.

सूजन को करें कम

पान के पत्ते में एंटीऔक्सिडेंट्स और एंटी इंफ्लेमेटरी यौगिक (Compound) पाये जाते हैं जो आपके मसूड़े में गांठ या फिर सूजन हो जाने पर दर्द से राहत दिलाने में मददगार होते हैं. पान में ऐसे पोषक तत्व पाये जाते हैं जो सूजन को कम करने का काम करते हैं.

ये भी पढ़ें-सफेद बाल हो सकता है दिल की बीमारी का संकेत

थकान से दिलाए राहत

थकान, नींद न आना या फिर आंखों में किसी कारण से समस्या होने पर, जब आंखें लाल हो जाती है. तब आप पान के पत्ते को उबाल लें और उसे ठंडा करके, पानी के छींटे आंखों पर मारें इससे आपके आंखों को काफी राहत मिलती है और शरीर का थकान भी दूर हो जाता है.

तो ये है पान के पत्तों के कुछ फायदे जिसे जानना आपके लिए जरुरी था. तो आगे से अगर आप किसी को पान खाते देखे तो उनको सलाह दे की वो अकेला पान का पत्ता खाए ताकी उनका स्वस्थ अच्छा रहें.

औनलाइन बिक्री में अब रिश्ते भी हैं मौजूद

अपनेपन से पनपने वाले रिश्ते यों तो अनमोल होते हैं लेकिन अगर यही रिश्ते कुछ कीमत में या किराए पर मिल जाएं तो? यह सवाल इसलिए है कि अब तकनीक के दौर में रिश्ते औनलाइन शौपिंग वैबसाइटों पर प्यार की गारंटी के साथ तय समय के लिए भी मिलने लगे हैं.

पत्नी के प्यार के साथ, मातापिता ममता के दिखावे के साथ तो बच्चे फैमिली पैकेज के तौर पर डिस्काउंट के साथ उपलब्ध हैं, वह भी एक फोन कौल पर. अभी तक ये हालात जापान और चीन जैसे देशों में थे, लेकिन कोई आश्चर्य की बात नहीं कि जल्दी ही भारत में भी इन की शुरुआत हो जाए.

ऐसा अंदेशा उन घटनाओं से जन्म ले रहा है जो बीते कुछ समय में सामने आई हैं जिन में पत्नी की बोली पति ने औनलाइन लगा दी तो सास से त्रस्त बहू ने सास को ही बेचने का विज्ञापन औनलाइन चस्पां कर दिया. पत्नी ने पति को कम कीमत में बेचने का विज्ञापन दे डाला.

उन लोगों के लिए यह सुनना अजीब हो सकता है जिन्होंने रिश्तों की बुनियाद को प्रेम से सींचते देखा है, लेकिन रिश्तों की अहमियत से बेफिक्र और ब्रेकअप, बौयफ्रैंड जैसी पश्चिमी संस्कृति में रंगे एक खास तबके के लिए यह एक सहूलियत और अवसर है. यही वजह है कि अब रिश्ते औनलाइन दुकानों पर बिक रहे हैं. साथ ही, ब्रेकअप कराने वाली वैबसाइट्स भी वजूद में आ गई हैं जो ब्रेकअप को ज्यादा रोचक व आसान बना रही हैं.

भारत जैसे देश में इस तरह की घटनाएं इसलिए भी ज्यादा ध्यान खींचती हैं क्योंकि यहां रिश्तों की मर्यादा जिंदगी से भी बड़ी मानी जाती है. इस के बावजूद इसी देश में औनलाइन दुकानों पर किफायती कीमत पर रिश्तों का कारोबार जन्म ले रहा है.

हालांकि ऐसी घटनाएं भी सामने आती रही हैं जब जिगर के टुकड़े चंद रुपयों में बेच दिए गए तो बेटियों, पत्नियों के भी खरीदनेबेचने के मामले सुने गए, जो कभी पेट की खातिर तो कभी परंपरा के नाम पर अंजाम दिए गए. मगर ये चंद ही घटनाएं है जो अज्ञानता और भुखमरी की तसवीरें बयां करती हैं, लेकिन तकनीक से कदम मिला कर चलते उन लोगों की सोच पर कौन लगाम लगाए जो रिश्तों की बोली भी लगा रहे हैं और इन की खरीदफरोख्त भी कर रहे हैं.

औनलाइन संस्कृति

अपनी आदर्श संस्कृति के लिए मशहूर देश भारत में कोई भी धर्म मजहब हो, दासप्रथा जैसी बुराइयों से सभी त्रस्त रहे. नए हिंदुस्तान में इस बुराई को कानून बना कर दूर करने की कोशिश की गई. इस से काफी रोक भी लगी. इस के बावजूद महाराष्ट्र के नांदेड़ के वैधु समाज जैसे कुछ समुदायों में परंपराओं के नाम पर चोरी छिपे बेटियों को बेचने का चलन आज भी जारी है. लेकिन, यहां सवाल उस नई प्रथा की शुरुआत का है जिसे आज की औनलाइन संस्कृति जन्म दे रही है.

रिश्तों के कारोबार के चलन से यह आशंका भी जोर पकड़ रही है कि कहीं यह चलन समाज को खींच कर फिर उसी कबीलाई दौर की तरफ न ले जाए जहां इंसान बेचे खरीदे जाते थे. दासप्रथा में तो फिर भी दूसरे समुदाय के बंदी बनाए गए लोगों को बेचा जाता था लेकिन इस नए समाज में तकनीक घर बैठे सास, पत्नी और पति को बेचने की सहूलियतें भी मुहैया करा रही है, जो समाज के लिए कहीं ज्यादा खतरनाक है.

ऐसी ही एक घटना ने रिश्तों  को शर्मसार कर दिया जब पति ने ही पत्नी की औनलाइन बोली लगा दी. हरियाणा के पटियाकार गांव में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को पौर्न फिल्म मेकर को बेच दिया क्योंकि पत्नी दहेज नहीं लाई थी और उसे दहेज की कीमत वसूल करनी थी.

मार्च 2016 में मिनी मुंबई के नाम से मशहूर मध्य प्रदेश के इंदौर में दिलीप माली ने अपनी पत्नी और बेटी की बोली सोशल साइट पर लगा दी. इस के लिए उस ने सोशल साइट पर पत्नी और बेटी की फोटो अपलोड की और लिखा, ‘‘मैं कर्ज के बोझ तले दबा हूं, मुझे किसी को पैसे लौटाने हैं, इसलिए मुझे रुपयों की जरूरत है. जो मेरी बीवी, बच्ची को खरीदना चाहे, मुझ से संपर्क करे.’’

उस ने पत्नी की कीमत भी तय कर दी 1 लाख रुपए. साथ ही, अपना मोबाइल नंबर भी दर्ज कर दिया ताकि लोग आसानी से उस से संपर्क कर सकें.

अपना प्राइस टैग

वहीं, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो रातों रात अमीर बनने के ख्वाब देखते हैं और इस सपने को साकार करने की कोशिश में वे अपनी ही बोली लगा देते हैं. आईआईटी खड़गपुर के एक छात्र आकाश नीरज मित्तल ने खुद को फ्लिपकार्ट पर बेचने की कोशिश की. इस के लिए उस ने फ्लिपकार्ट की वैबसाइट पर खुद ही एक विज्ञापन भी चस्पां कर डाला. साथ ही, छात्र ने विज्ञापन में अपनी कीमत 27,60,200 रुपए भी लिखी और फ्री डिलीवरी का विकल्प भी दिया. उच्च शिक्षित युवा की ऐसी सोच किस तरह के समाज को गढ़ रही है, समझा जा सकता है.

वर्ष 2015 में औनलाइन खरीदफरोख्त का ऐसा एक मामला सामने आया जिस ने सोचने पर मजबूर कर दिया था. सासबहू सीरियल बुद्धूबक्से पर महिलाओं के मनोरंजन का खास जरिया बनते रहे हैं. इन में खासकर सासबहू के रिश्तों की जो कड़वाहट परोसी जाती है उस ने भी महिलाओं की सोच को काफी हद तक प्रभावित किया है, इस से इनकार नहीं किया जा सकता. यही वजह है कि नफरत की आग में जल रही एक बहू ने शौपिंग साइट पर अपनी सास की तसवीर को न सिर्फ अपलोड किया बल्कि उस ने शब्दों में भी अपनी नफरत उजागर की.

कंपनी की साइट पर विज्ञापन में उस ने लिखा, ‘‘मदर इन-ला, गुड कंडीशन, सास की उम्र 60 के करीब है, लेकिन कंडीशन फंक्शनल है, आवाज इतनी मीठी कि आसपास वालों की भी जान ले ले. खाने की शानदार आलोचक. आप कितना ही अच्छा खाना बना लें, वे खामी निकाल ही देंगी. बेहतरीन सलाहकार भी हैं. कीमत कुछ भी नहीं, बदले में चाहिए दिमाग को शांति देने वाली किताबें.’’

कीमत के स्थान को खाली छोड़ दिया गया. इस तरह का विज्ञापन देख वैबसाइट ने कुछ ही देर में विज्ञापन हटा दिया. बहू की इस हरकत को आईटी कानून के तहत अपराध माना गया और उस के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही हुई.

एक महिला ने क्विकर के पैट्स सैगमैंट में अपने पति की फोटो डाल कर लिखा था, ‘हसबैंड फौर सेल’ और पति की कीमत मात्र 3,500 रुपए. उस ने पैट टाइप में लिखा था, ‘‘हसबैंड, कीमत 3,500 रुपए.’’ वहीं, इसी साइट पर एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को मात्र 100 रुपए में बेचने का विज्ञापन इन शब्दों के साथ दिया, ‘‘यह आदर्श पत्नी है, घर का काम बहुत अच्छे से करती है पर बोलती बहुत है, इसलिए इतने कम दाम में बेच रहा हूं.’’

कुछ भी बेचने की संस्कृति

रिश्तों की यह कौन सी परिभाषा है जो नएपन के इस दौर में लोगों में अपने आप ही पनपने लगी है. कुछ भी बेच दो की संस्कृति कम से कम भारतीय समाज के स्वभाव से तो मेल नहीं खाती. हालांकि इसी समाज में कुछ लोग अपने बच्चों का सौदा करते रहे हैं. बिहार राज्य के गरीबी से त्रस्त लोग बेटियों को बेचने के लिए बदनाम हैं ही. वहीं, हरियाणा में बेटियों को पेट में ही मारने के चलन के साथ महिलाओं को खरीद कर उन से विवाह करने के मामले सामने आना नई बात नहीं है.

गरीबी और प्राकृतिक आपदाओं से तबाह हुए लोगों के बारे में भी सामने आता रहा है कि वे कुछ वक्त की रोटी के लिए अपने बच्चों को बेचने पर मजबूर हो जाते हैं. बीते साल पटना के नंदनगर में पति की प्रताड़ना और आर्थिक तंगी से मजबूर एक महिला ने अपनी दुध मुंही बच्ची को महज 10 हजार रुपयों के लिए बेच दिया.

जुलाई 2015 में रांची के करमटोली की गायत्री ने भुखमरी से तंग आ कर अपनी 8 माह की बेटी को 14 हजार रुपए में बेचा. इसी साल मध्य प्रदेश के मोहनपुर गांव के एक किसान लाल सिंह ने 1 साल के लिए अपने 2 बेटों को 35,000 रुपयों में बेच दिया. वजह थी तबाह हुई फसल और कर्ज.

उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक महिला का बयान रिश्तों के खोखले पन को उजागर कर गया जब उस ने अपने पति पर अपने ही 5 बच्चों को बेचने का आरोप लगाया. वहीं बुंदेलखंड के सहरिया आदिवासी लोगों द्वारा कर्र्ज की वजह से अपने बच्चों को बेचने की घटनाएं देश की बदहाली की दास्तां पेश करती रही हैं.

भारत और इंडिया दोनों में ही इंसानों को बेचने का चलन जारी है, फिर वजह चाहे खुशी से किसी को खरीदने की हो या बदहाली में बेचने की. हर हाल में यहां इंसान बिक रहे हैं. ऐसे में भला भविष्य में संबंधों के प्रति सम्मान की संस्कृति बने रहने की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

 यह कैसा नया समाज है जहां पुराने समाज की कुरीतियां आधुनिकता के नाम पर अपनाई जा रही हैं. जापान में तो ‘रैंट ए वाइफ औटटावा डौट कौम’ नाम की वैबसाइट बनी हुई है जिस पर मांबाप, पत्नी और पति किसी भी रिश्ते को किराए पर लेने की सुविधा दी जा रही है. वहीं, चीन जैसे तेजी से विकसित हो रहे देश में भी बेच दो संस्कृति पैर पसारे हुए है. वहां के फुजियान प्रांत में एक दंपती ने अपनी 18 माह की बच्ची को महज 3,530 डौलर यानी 2.37 लाख रुपए में सिर्फ इसलिए औनलाइन बेचने का विज्ञापन पोस्ट किया क्योंकि उन्हें आईफोन खरीदना था. एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में हर साल

2 लाख बच्चों का अपहरण कर उन्हें औनलाइन बेचा जाता है.

वहीं, अमेरिका में एक आदमी ने अपनी बाइक के साथ अपनी पत्नी की फोटो भी औनलाइन सेल के लिए डाल दी और लिखा, ‘‘मेरी बाइक 2006 की मौडल है और मेरी पत्नी 1959 मौडल है जो दिखने में बहुत ही खूबसूरत है.’’

ब्राजील में 2013 में एक व्यक्ति का अपने बच्चे को बेचने का औनलाइन विज्ञापन चर्चा का विषय बना था, क्योंकि वह बच्चे के रोने के शोर से बचने के लिए उसे बेचना चाहता था. देशदुनिया में इंसान नहीं बिक रहे, बल्कि औनलाइन पशुओं को बेचने की भी शुरुआत हो गई है और इंसानों की कीमत से कहीं ज्यादा में पशु बिक रहे हैं. साथ ही, उन के गोबर की भी बिक्री हो रही है. दिसंबर 2014 में अमेरिका में औनलाइन कंपनी ‘कार्ड्स अगेंस्ट ह्यूमैनिटी’ ने 30 हजार लोगों को महज 30 मिनट में गोबर तक बेच दिया. लोगों ने गोबर क्यों खरीदा, यह जिज्ञासा का विषय हो सकता है.

मनपसंद डेटिंग पार्टनर

आखिर औनलाइन खरीदारी की तरफ लोगों का अंधझुकाव क्यों है? इस की वजह शायद आकर्षक औफर और घर बैठे खरीदारी की सहूलियत है. एसोचैम और प्राइसवाटर हाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) ने अपने अनुमान में कहा है कि बाजार में सुस्ती के बावजूद 2017 में औनलाइन शौपिंग में 78 फीसदी बढ़ोतरी की संभावना है. 2015 में यह 66 फीसदी थी. लोगों के इसी रुझान को देख कर वे लोग भी लाभ उठाने को तैयार बैठे हैं जो औनलाइन इंसानी रिश्तों को बेचने के मौके तलाश रहे हैं. तकनीक ने ऐसे लोगों के हाथ में औनलाइन खरीदारी के तौर पर एक नया विकल्प दे दिया है.

इतना ही नहीं, रिश्तों के साथ ही किसी महिला या पुरुष के साथ वक्त गुजारने का जरिया भी कुछ वैबसाइट दे रही हैं. हाल में महिलाओं के लिए डेटिंग औनलाइन शौपिंग वैबसाइट्स लोगों की तवज्जुह अपनी तरफ खींच रही है. इस पर महिलाएं अपनी पसंद का पुरुष चुनने, उन के साथ डेटिंग करने की सहूलियत पा सकती हैं.

अमेरिकी समाचार पत्र ‘वाल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में इंटरनैट डेटिंग का ट्रैंड तो बढ़ ही रहा है, साथ ही अपराध भी पनप रहा है. वहीं कुछ साइट्स समलैंगिकों के लिए भी जारी हैं. चूंकि भारत में इस तरह के रिश्ते अपराध माने जाते हैं, ऐसे में समलैंगिक औनलाइन डेटिंग के जरिए अपना पार्टनर तलाश कर रहे हैं.

इस के लिए कई साइट्स औनलाइन डेटिंग ऐप, ग्रिडर, एलएलसी, प्लैनेट रोमियो बीवी ऐप्स उपलब्ध करा रही हैं. भारत में ये ऐप्स काफी लोकप्रिय हो रहे हैं.

इंटरनैट, औनलाइन खरीदारी जैसी सहूलियतें जीवन को आसान बनाने के लिए हैं, मगर इन्हीं पर रिश्तों का मजाक बन रहा है. प्राइस टैग के साथ औनलाइन रिश्तों की बिक्री समाज में किस तरह का बदलाव लाएगी, समझने की जरूरत है.

‘लॉकअप’ से निकलकर ‘डांस दीवाने जूनियर’ होस्ट करेंगे करण कुंद्रा !

‘बिग बॉस 15’ स्टार करण कुंद्रा टीवी पर धमाकेदार एंट्री करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. जल्द ही करण कुंद्रा कलर्स टीवी के रिएलिटी शो ‘Dance Deewane Junior’ का हिस्सा बनने वाले हैं.

जल्द ही करण ‘डांस दिवाने जूनियर’ को होस्ट करते नजर आएंगे. कुछ समय पहले ही मेकर्स ने शो का प्रोमो शेयर कर दिया है. इस प्रोमो में करण कुंद्रा कंटेस्टेंट्स के साथ ताल से ताल मिलाते नजर आ रहे हैं.

View this post on Instagram

A post shared by Karan Kundrra (@kkundrra)

View this post on Instagram

A post shared by Karan Kundrra (@kkundrra)

करण कुंद्रा के शो की पहली झलक देखकर फैंस काफी खुश हैं, यही वजह है जो ‘डांस दिवाने जूनियर’ का प्रोमो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. फैंस के मन में अब सवाल ये है कि करण ने लॉक अप शो को अलविदा कह दिया है या नहीं ?

View this post on Instagram

A post shared by Karan Kundrra (@kkundrra)

हाल ही में करण के लेटेस्ट एल्बम सॉन्ग कमली को फैंस ने काफी पसंद किया.करण का ये म्यूजिक एल्बम रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर छा गया .

सुजैन खान की बहन ने किया उर्फी के स्टाइल पर कमेंट तो मिला ये जवाब

टीवी की मशहूर एक्ट्रेस उर्फी जावेद अपने पहनावे को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहती हैं. कई बार एक्ट्रेस अपने स्टाइल के कारण बुरी तरह ट्रोल भी हो चुकी हैं, हालांकि वह उनपर निशाना साधने वालों को करारा जवाब देने से पीछे नहीं हटतीं.

View this post on Instagram

A post shared by Urrfii (@urf7i)

हाल ही में उर्फी जावेद ने ऋतिक रोशन की एक्स वाइफ सुजैन खान की बड़ी बहन फराह खान अली को जमकर लताड़ लगाई है. दरअसल, फराह खान ने उर्फी जावेद के पहनावे पर सवाल उठाया था, साथ ही उनके स्टाइल को भी डिसटेस्टफुल कहा, जिसे लेकर उर्फी जावेद भड़कीं नजर आईं.

View this post on Instagram

A post shared by Urrfii (@urf7i)

फराह खान अली ने उर्फी जावेद के पहनावे पर सवाल खड़ा करते हुए लिखा, “माफ करना, लेकिन इस यंग लड़की को अजीबों-गरीब पहनावे के लिए फटकार लगनी चाहिए. लोग इसका मजाक बना रहे हैं और यह सोच रही है कि वे इसके ड्रेसिंग के अंदाज को पसंद करते होंगे. उम्मीद करती हूं कि कोई ये बात इसे समझाएगा.” फराह खान अली की इन बातों पर उर्फी जावेद भी करारा जवाब देने से पीछे नहीं हटीं.

उर्फी जावेद ने फराह खान अली के सवाल का जवाब देते हुए लिखा, “मैम आपकी नजरों में टेस्टफुल ड्रेसिंग है क्या? क्या आप मुझे बताएंगी. मुझे मालूम है कि लोग मेरे ड्रेसिंग सेंस को पसंद नहीं करते. मैं किसी बबल में नहीं रह रही हूं और मुझे न तो लोगों के विचारों की परवाह है. आप ऐसे कपड़े पहनती होंगी, जिनपर डिजाइनर टैग होगा, लेकिन क्या यह टेस्टफुल है? आपके रिश्तेदार ऐसी फिल्मों में कास्ट होते हैं और ऐसी फिल्में बनाते हैं, जहां महिलाएं छोटे कपड़े पहनकर आइटम नंबर करती हैं तो क्या वह टेस्टफुल है.”

उर्फी का गुस्सा यहीं नहीं रुका ,उन्होंने फराह खान को लताड़ लगाते हुए आगे कहा, “एक आइटम नंबर के लिए महिला के शरीर को ऐसे पेश करना क्या सही है. स्टार किड्स जो भी पहनते हैं, वह सब टेस्टफुल होता है? मुझे बदलने के लिए इसलिए कहना क्योंकि दुनिया मुझे पसंद करती है बिल्कुल 80 के दशक की बातें हैं. क्या आप अपनी बेटी को भी यही सिखाएंगी. ‘लोग आपको पसंद नहीं करते हैं, इसलिए खुद को बदल लो’ इस बात की उम्मीद आपसे तो नहीं की थी. आपने मुझे स्लट शेम किया है. आपको कभी भी स्टारकिड्स को तो सलाह देते नहीं देखा.”

उर्फी जावेद ने भी फराह खान अली की मोनोकिनी में एक फोटो  शेयर की. एक्ट्रेस ने उन्हें फटकार लगाते हुए लिखा, “महिलाओं को नीचा नहीं दिखाना चाहती, लेकिन यह पाखंड सच में मुझे पसंद नहीं है. आप वो पहन सकते हैं जो आप चाहते हैं, पोस्ट भी कर सकते हैं. तो मैं भी वो चीजें पहन सकती हूं जो मैं चाहती हूं”

बता दें कि उर्फी जावेद टीवी के कई बड़े चैनल्स के साथ काम कर चुकी हैं. जिनमें सोनी चैनल शो बड़े भईया की दुल्हनिया ,स्टार प्लस के शो चन्द्र नंदिनी और मेरी दुर्गा ,यह रिश्ता क्या कहलाता है ,और कसौटी जिंदगी की शामिल हैं
इसके अलावा बिग बॉस OTT में भी उर्फी नजर आ चुकी हैं.

सत्यकथा: जब पत्नी ने मांगा रानीहार

   —जगदीश प्रसाद शर्मा ‘देशप्रेमी’  

29 दिसंबर, 2021 की रात को देहरादून के थाना नेहरू कालोनी के थानाप्रभारी प्रदीप चौहान इलाके में गश्त लगा रहे थे. तभी उन्हें वायरलेस से पुलिस कंट्रोल रूम द्वारा डिफेंस कालोनी से सटे फ्रैंड्स एनक्लेव में एक महिला के आत्महत्या करने की सूचना मिली.

सूचना मिलते ही थानाप्रभारी थाने से सिपाही देवेंद्र और विजय को साथ ले कर फ्रैंड्स कालोनी जाने के लिए निकल पड़े.

इस की जानकारी चौहान ने सीओ अनिल जोशी और एसपी (सिटी) सरिता डोवाल व एसएसपी जन्मेजय खंडूरी को भी दे दी थी. साथ ही चौहान ने डिफेंस कालोनी पुलिस चौकीप्रभारी चिंतामणि मैठाणी को भी घटनास्थल पर जल्दी पहुंचने को कह दिया.

ये भी पढ़ें : सत्यकथा: इश्क में दिल हुआ बागी

मात्र 10 मिनट में ही थानाप्रभारी घटनास्थल पर पहुंच गए. वहां जमा भीड़ को हटा कर पुलिस सूचना में बताए गए मकान के भीतर पहुंची तो वहां करीब 32 वर्षीया एक महिला बिछावन पर मृत पड़ी थी. उस का गला धारदार हथियार से रेता हुआ था.

उस शव के पास ही एक चाकू और कपड़े इस्तरी करने की आइरन का तार पड़ा हुआ था. शव के पास ही करीब एक साल का बच्चा लेटा था. जबकि उसी कमरे के कोने में एक 7 वर्षीय लड़की डरीसहमी सी खड़ी थी.

मौके की जांचपड़ताल के बाद थानाप्रभारी ने पाया कि शायद महिला की गला काट कर हत्या की गई है.वहां मौजूद आसपास के लोगों से पूछताछ करने पर मृतका का नाम श्वेता श्रीवास्तव मालूम हुआ. उस का पति सौरभ श्रीवास्तव घर पर नहीं मिला. पड़ोसियों ने बताया कि वे इस मकान में काफी समय से रह रहे थे. घटना के बाद सौरभ श्रीवास्तव अपनी स्कूटी ले कर कहीं चला गया था.

शव और घटना की जानकारी जुटाए जाने के दरम्यान सीओ अनिल जोशी और एसपी (सिटी) सरिता डोवाल भी वहां पहुंच गईं. पुलिस ने श्वेता की मौत की सूचना उन की बेटी के मोबाइल से उस के मायके वालों को दे दी.

फिर मौके की काररवाई पूरी कर शव पोस्टमार्टम के लिए दून अस्पताल भेज दिया. बच्चों को पड़ोसियों ने संभाल लिया. श्वेता की मौत की खबर पा कर उस के पिता अजय कुमार श्रीवास्तव भागेभागे कुशीनगर से देहरादून आ गए.

ये भी पढ़ें : सत्यकथा: मोह में मिली मौत

अगले दिन ही अजय कुमार ने थाने पहुंच कर थानाप्रभारी से अपनी बेटी श्वेता के संबंध में जानकारी ली. पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार श्वेता की गला काट कर हत्या हुई थी. थानाप्रभारी ने जब उन से किसी पर शक करने के बारे में पूछा तो अजय ने साफ कह दिया कि उन की बेटी का हत्यारा कोई और नहीं बल्कि उन का दामाद सौरभ श्रीवास्तव ही है.

उस के बाद अजय श्रीवास्तव ने अपने दामाद सौरभ श्रीवास्तव के खिलाफ अपनी बेटी श्वेता की हत्या करने की तहरीर थानाप्रभारी को दे दी. अजय कुमार की तहरीर पर सौरभ श्रीवास्तव के खिलाफ श्वेता श्रीवास्तव की हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया.

इस हत्याकांड की जांच डिफेंस कालोनी चौकीप्रभारी चिंतामणि मैठाणी को सौंपी गई थी. हत्या का आरोपी सौरभ फरार हो गया था. उस की तलाश के लिए मुखबिर लगा दिए गए थे.

अजय श्रीवास्तव ने स्थानीय लोगों की मदद से श्वेता के शव का अंतिम संस्कार देहरादून के ही श्मशान घाट में कर दिया था.

उस के 3 दिन बाद नेहरू कालोनी पुलिस को श्वेता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल गई थी. रिपोर्ट में श्वेता की मौत का कारण गला काटना बताया गया था. उस के बाद तो पुलिस के सामने सौरभ को गिरफ्तार करना बड़ी चुनौती बन गई थी.

उस की खोजबीन और पकड़ के लिए एसएसपी जन्मेजय खंडूरी ने एसओजी टीम को भी लगा दिया. नए सिरे से पुलिस की 2 टीमों का गठन किया गया था.

बात 31 जनवरी, 2022 की है. शाम का अंधेरा घिर चुका था. एसओजी टीम को मुखबिर के द्वारा एक महत्त्वपूर्ण सूचना मिली. उस सूचना के आधार पर एसओजी टीम थानाप्रभारी प्रदीप चौहान के साथ डिफेंस कालोनी की एक सुनसान जगह पर पहुंच गई.

वहां पर सड़क के किनारे एक बड़े पत्थर पर एक युवक खोयाखोया सा बैठा था. मुखबिर के इशारे पर पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. हिरासत में लेते ही वह युवक बोला, ‘‘अरे, मुझे क्यों पकड़ रहे हो? मैं ने क्या किया है?’’

‘‘तुम से कुछ पूछताछ करनी है, इसलिए चुपचाप थाने चलो,’’ थानाप्रभारी ने कहा.

‘‘तुम्हारा नाम क्या है?’’ थाने पहुंचने पर थानाप्रभारी ने उस से पूछा. वह युवक चुप रहा.

‘‘जल्दी बताओ,’ उस के कुछ नहीं बोलने पर थानाप्रभारी ने डपट दिया.

‘‘जी…जी, सौरभ श्रीवास्तव.’’

‘‘पिता का नाम?’’

‘‘शंभूलाल श्रीवास्तव.’’

‘‘पूरा पता बताओ,’’ चौहान बोले.

‘‘कुशीनगर जिले का रहने वाला हूं. देहरादून में फ्रैंड्स एनक्लेव में रहता हूं.’’

‘‘इसे तुम पहचानते हो?’’ यह कहते हुए चौहान ने अपने मोबाइल की एक तसवीर उस के सामने कर दी. तसवीर देख कर सौरभ चुप लगा गया.

‘‘जवाब दो, हां या नहीं?’’

‘‘जी, पहचानता हूं. यह मेरी पत्नी श्वेता है.’’

‘‘वह अभी कहां है?’’

‘‘मुझे नहीं मालूम?’’ सौरभ बोला.

‘‘नहीं मालूम मतलब? कई दिनों से तुम कहां थे?’’

‘‘कंपनी के काम के सिलसिले में दिल्ली गया हुआ था,’’ सौरभ ने बताया. उन दिनों में पत्नी और परिवार की तुम ने कोई खोजखबर क्यों नहीं ली?’’ उन्होंने पूछा.

‘‘जी, मेरा मोबाइल दिल्ली जाते समय खो गया था.’’

‘‘इसे देखो,’’ चौहान ने दूसरी तसवीर उस के सामने कर दी. तसवीर देख कर उस के मुंह से आवाज ही नहीं निकल पा रही थी. सर्दी में भी उस के चेहरे पर पसीना आ गया था. उस ने सिर झुका लिया और फफकफफक कर रोने लगा.

ये भी पढ़ें : मनोहर कहानियां: ममता का खूनी लव

दरअसल, वह तसवीर भी उस की पत्नी श्वेता की ही थी, लेकिन तसवीर में वह मृत थी. सौरभ को रोता देख कर एक पुलिसकर्मी ने पानी का गिलास ला कर उस के सामने रख दिया. सौरभ एक सांस में पूरा पानी गटागट पी लिया.

सौरभ थाने में अपनी पत्नी की लाश के फोटो देख कर हिल गया था. उस से श्वेता की हत्या की बाबत विस्तार से पूछताछ होने लगी. वह एक माह तक खुद को बचातेबचाते शरीर और दिमाग से काफी थक गया था. टूट चुके सौरभ ने पुलिस को पत्नी की हत्या के बारे में जो कुछ बताया, वह इस प्रकार था—

उत्तर प्रदेश में जिला कुशीनगर के पिटेरवा कस्बे के रहने वाले अजय कुमार श्रीवास्तव ने अपनी बेटी श्वेता श्रीवास्तव की शादी साल 2014 में हरिद्वार निवासी सौरभ श्रीवास्तव के साथ की थी.

श्वेता 6 माह ससुराल में रहने के बाद अपने पति के साथ देहरादून आ गई थी. ग्रैजुएट सौरभ को सरकारी नौकरी भले ही नहीं मिली थी, लेकिन वह सीएसडी कंपनी में मार्केटिंग के काम से संतुष्ट था.

उस की इतनी कमाई हो जाती थी कि वह पत्नी के शौक पूरे कर सके. उस की पसंद के कपड़े दिलवा सके. साथसाथ घूमनेफिरने जा जा सके, रेस्टोरेंट में डिनर कर सके, या फिर कीमती सामानों में एंड्रायड फोन या ज्वैलरी आदि की खरीदारी करने में नानुकुर नहीं करे. सौरभ की कोशिश रहती थी कि वह पत्नी की ख्वाहिश हरसंभव पूरी करता रहे.

दोनों की जिंदगी हंसीखुशी से गुजरने लगी थी. समय का पहिया भी अपनी गति से घूम रहा था. खुशहाल जीवन बिताते हुए श्वेता 2 बच्चों की मां बन गई थी. पहली संतान बेटी और उस के बाद बेटे के जन्म के बाद सौरभ ने पत्नी से परिवार पूरा होने की बात कही थी. पत्नी ने भी संतोष जताया था.

इसी के साथ सौरभ अपने छोटे से परिवार को हमेशा खुश रखने की कोशिश में रहने लगा था. अपने बढ़े हुए खर्च को पूरा करने के लिए सौरभ और मेहनत करने लगा था, ताकि पत्नी की कोई फरमाइश अधूरी न रह जाए.

यह कहा जा सकता है कि सौरभ और श्वेता के दांपत्य जीवन की गाड़ी पटरी पर सरपट दौड़ रही थी. इस में खलल तब पड़ गई, जब 2 साल पहले कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ा और लौकडाउन से अचानक कई विकट परिस्थितियां पैदा हो गईं.

सौरभ का कामधंधा भी प्रभावित हो गया. आमदनी धीरेधीरे कम होने लगी. इस के विपरीत श्वेता ने घरेलू खर्च, अपनी फरमाइशों और शौक में कोई कमी नहीं आने दी.

ये भी पढ़ें : Satyakatha: जान का दुश्मन बना मजे का इश्क

शुरुआत में तो कुछ महीने तक सौरभ जमापूंजी काम में लाता रहा, किंतु जैसेजैसे लौकडाउन की तारीखें बढ़ती चली गईं, वैसेवैसे उस की हालत बिगड़ने लगी. नौबत कर्ज ले कर घर खर्च पूरे करने की आ गई.

कुछ महीने बाद लौकडाउन में ढील मिली, लेकिन उस का काम पहले की तरह रफ्तार नहीं पकड़ पाया. इस के विपरीत श्वेता के फरमाइशों की लिस्ट बढ़ती रही. एक दिन सौरभ के काम से घर लौटते ही उस ने टोका, ‘‘तुम्हें कुछ याद है?’’

‘‘क्या याद नहीं है? मैं कुछ समझा नहीं.’’ सौरभ बोला.

‘‘मैं जानती हूं, तुम जानबूझ कर अनजान बन रहे हो,’’ श्वेता ने मुंह बना कर कहा, ‘‘तुम्हें सच में कुछ नहीं पता या कोई और बात है?’’

‘‘अरे, साफसाफ बोलो न, बात क्या है?’’ सौरभ ने पूछा.

इसी बीच उस की बेटी आ कर बोल पड़ी, ‘‘पापापापा, आज मम्मी का बर्थडे है. आप ने सुबह हैप्पी बर्थडे भी नहीं बोला.’’

‘‘अच्छा तो यह बात है. लो, अभी बोल देता हूं,’’ यह कहते हुए सौरभ ने ‘हैप्पी बर्थडे श्वेता डार्लिंग,’ बोल दिया.

‘‘केवल विश करने से नहीं होगा. बर्थडे गिफ्ट लाओ,’’ श्वेता बोली.

‘‘तुम कैसी बात करती हो, तुम्हें मालूम है, इन दिनों मेरा काम पहले की तरह नहीं चल रहा है,’’ सौरभ उदास लहजे में बोला.

‘‘तो मैं क्या करूं?’’ श्वेता ने कहा.

‘‘देखो, मुझे समझने की कोशिश करो. ऐसा तो पहली बार हुआ है, जब मैं तुम्हें बर्थडे गिफ्ट नहीं दे पा रहा हूं. पिछली बार तुम्हारी पसंद का मोबाइल फोन दिया था,’’ सौरभ बोला.

‘‘उस फोन पर तो बेटी का कब्जा हो गया है. उसी से पढ़ाई करती है.’’

‘‘अच्छा चलो, बर्थडे गिफ्ट उधार रहा मुझ पर.’’ सौरभ ने समझाया.

‘‘चलो मैं मान गई, लेकिन कम से कम आज कहीं डिनर पर तो ले चलो,’’ श्वेता बोली.

‘‘फिर वही बात श्वेता, अभी मैं एकएक पैसा जोड़ रहा हूं और तुम खर्च बढ़ाने की बात कर रही हो,’’ सौरभ तुनकते हुए बोला.

‘‘कितना खर्च बढ़ जाएगा? देखो, आज मैं ने घर में कुछ पकाया भी नहीं है. महीनों से घर में पड़ेपड़े बोर होने लगी हूं,’’ श्वेता ने कहा.

‘‘बाहर जाने में कई दिक्कतें हैं. वैसे भी रेस्टोरेंट में बैठ कर खाने पर रोक है.’’

‘‘तब कुछ औनलाइन ही मंगवा लो.’’ श्वेता के बोलते ही दूसरे कमरे से बेटी बोल पड़ी, ‘‘पापापापा, पिज्जा मंगवाना. मैं चीज वाला और्डर सेलेक्ट करूंगी. उस में कोल्डड्रिंक्स फ्री मिलेगा. …और मम्मी, चौकलेट वाला केक भी मंगवाना.’’

सौरभ और श्वेता के बीच बहस जैसी बातचीत औनलाइन और्डर पर आ कर थम गई. उस रोज सौरभ को 1150 रुपए का एक्सट्रा खर्च आ गया. श्वेता का बर्थडे घर पर ही  मना लिया गया, किंतु सौरभ इस चिंता में पड़ गया कि वह स्कूटी की किस्त कैसे दे पाएगा.

ये भी पढ़ें : मनोहर कहानियां: प्रेमी की खातिर

उस के बाद सौरभ ने खुद को कंपनी के काम में झोंक दिया. काफी मुश्किलों के बाद जरूरी खर्च पूरे करने लगा, लेकिन कर्ज चुका पाने में असमर्थ बना रहा. कभी घर की परेशानी तो कभी काम में आने वाली रुकावटों से जूझता रहा. परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी का निर्वाह करतेकरते वह थक सा गया था.

हालांकि वह जितना परेशान अपने काम को ले कर नहीं रहता था, उस से कहीं अधिक श्वेता की बातों को ले कर तनाव में रहता था.

श्वेता की फरमाइशें तो जैसे खत्म होने का नाम ही नहीं लेती थीं. कई बार तो अपनी मांगों के लिए बच्चों की तरह जिद पकड़ लेती थी. इस बीच कोरोना का दूसरा फेज भी आया. उस झटके ने उसे और भी झकझोर कर रख दिया. पत्नी की फिजूलखर्ची से वह तंग आ गया था. इस की वजह से वह मकान मालिक को 3 महीने का किराया नहीं दे पाया था, जिस से वह काफी तनाव में रहने लगा था. इस के बाद भी श्वेता ने अपने खर्च कम नहीं किए थे. वह उस से रोज अपने खर्च के लिए पैसे मांगती रहती थी.

इसी दौरान सौरभ की छोटी बहन की शादी 10 फरवरी, 2022 को होनी तय हो गई थी. जब सौरभ ने श्वेता को शादी में चलने के लिए कहा तो वह इस बात पर अड़ गई थी कि वह शादी में तभी जाएगी, जब वह उसे रानीहार खरीद कर देगा.इस पर सौरभ ने उसे काफी समझाया कि शादी में पहले के जो जेवर हैं उन्हीं को पहन ले, लेकिन उस की जिद थी कि नया रानीहार ही चाहिए.

सौरभ की समस्या यह थी कि उसे शादी के लिए और भी दूसरे खर्च करने थे. सभी को नए कपड़े दिलवाने थे. बेटी को अच्छा फ्रौक और सैंडल खरीदने थे. जबकि पत्नी रानीहार की जिद पर अड़ी रही.

29 दिसंबर, 2021 की रात को श्वेता उस से रानीहार दिलाने के लिए बुरी तरह से झगड़ पड़ी. तब तक सौरभ का दिमाग काम करने की स्थिति में नहीं बचा था. पत्नी के व्यवहार से उसे काफी गुस्सा आ गया. बेटी दूसरे कमरे में सो रही थी. तूतूमैंमैं काफी बढ़ गई.

बात बढ़ने पर सौरभ ने पत्नी को गुस्से में उठा कर उसे बिछावन पर पटक दिया. उस के बाद पहले बच्चे की बैल्ट, फिर आइरन के तार से ही उस का गला कस दिया. दम घुटने से श्वेता तड़प उठी. तब सौरभ तुरंत किचन से चाकू लाया और पत्नी का गला रेत डाला. उस की मौत के बाद वह बच्चों को उसी हालत में छोड़ कर स्कूटी से चला गया था.

श्वेता की हत्या के बाद वह देहरादून के ही अलगअलग स्थानों पर छिपता रहा. उस ने पुलिस पर नजर बनाए रखी. जब विधानसभा की ओर से डिफेंस कालोनी की ओर आ रहा था, तब काफी थके होने के कारण सुस्ताने के लिए सड़क किनारे एक बड़े पत्थर पर ओट ले कर बैठ गया था. तभी पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर उसे गिरफ्तार कर लिया.

ये भी पढ़ें : सौल्वर गैंग : पैसा फेंको, इम्तिहान पास करो

पुलिस ने सौरभ श्रीवास्तव के बयान दर्ज कर के अगले दिन उस का मैडिकल करवाया. उसी दिन उसे अदालत में पेश कर दिया, जहां से वह जेल भेज दिया गया. सौरभ द्वारा श्वेता की हत्या में प्रयुक्त चाकू व आइरन की तार, बेल्ट आदि पहले से ही बरामद हो चुकी थी. कथा लिखे जाने तक सौरभ श्रीवास्तव देहरादून जेल में बंद था. दोनों बच्चों को अजय श्रीवास्तव अपने साथ कुशीनगर ले गए थे.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

इस घरेलू नूस्खे से दूर करें सांसों की बदबू

मुंह की बदबू एक ऐसी समस्या जो एक समस्या ना रहकर शर्मिंदगी का कारण बन जाती हैं जिसके चलते कौन्फिडेंस खत्म हो जाता हैं. मुंह से बदबू आने का सामान्य कारण तो पेट अच्छे से साफ ना होता हैं पर और भी कारण हैं जिसके चलते आपको ये समस्या हो सकती हैं.बहुत से लोगों के मुंह से आने वाली बदबूदार सांसो के कारण मुंह पर हाथ लगाकर हंसना बोलना पड़ता है. ऐसे में आप उससे बचने के लिए माउथवौश की मदद लेते हैं. लेकिन कई माउथवौश में एल्‍कोहल और कई और अप्राकृतिेक तत्‍व होते हैं, जो कि मुंह में प्राकृतिक पीएच लेवल पर बुरा प्रभाव डालते हैं. इस समस्या को लेकर बहुत कम लोग ही किसी डाक्टर से सलाह लेते हैं क्योंकि उनको शर्म आती हैं. इस लिए अगर घरेलू इलाज से कुछ हद तक फायदा पहुंचे तो बुरा नही होगा. आज हम लेकर आए है ऐसे ही कुछ घरेलू इलाज जिसको यूज करने से आप मुंह की बदबू से निजाद पा सकते हैं.

होममेड माउथवौश का करें यूज

बदबूदार सांसों से बचने के लिए सबसे बेहतर और सबसे अच्छा विकल्प है कि आप खुद घर पर अपना होममेड माउथवौश बनाएं. यह आपकी बदबूदार सांसो को दूर करने में आपकी मदद करेगा. इस माउथ वौश को बनाने के लिए आपको नारियल तेल, नमक और पुदीना की आवश्‍यकता पड़ेगी. यह माउथवौश आपके मुंह के लिए सुपर स्वस्थ है.

ये भी पढ़ें : क्यों है लहसुन मर्दों के लिए फायदेमंद? जानें यहां

 

कैसे बनाएं होममेड माउथवौश

पानी- 2 कप

नारियल का तेल – 2 बड़े चम्मच

हिमालयी गुलाबी नमक – 1 टी स्‍पून

पुदीने का तेल – 3-4 बड़े चम्मच

एक कांच के कंटेनर में 2 कप पानी, 2 बड़े चम्मच नारियल का तेल, 1 टी स्‍पून हिमालयी गुलाबी नमक, 3-4 बड़े चम्मच पुदीने का तेल डालें और इन सभी को मिलाएं. नमक अच्‍छी तरह से घुल जाना चाहिए. यदि नारियल का तेल जम जाता है, तो जार को गर्म पानी के ऊपर चलाएं.

ये भी पढ़ें : जब पति साल में सिर्फ कुछ दिन के लिए ही घर आए

 

ऐसे करें यूज

होममेड माउथवौश को मुंह में डालने के बाद थूकने से पहले कम से कम 30 सेकंड के लिए रखें और इससे कुल्‍ला करें. सुबह या दिन जब भी आप अपनी सांस को तरोताजा करना चाहते हैं, इसका उपयोग करें. यह माउथवौश  एंटी-माइक्रोबियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी, टौक्सिन-मुक्त होने के साथ सस्ता भी है, जो बिना किसी रसायन के आपके मुंह, दांतों और मसूड़ों को स्‍वस्‍थ व सुरक्षित रखने में मददगार है.

 

गांव की लड़की और शादी से पहले सेक्स

‘‘तुझे कुछ पता है कि नहीं, डौली और सुरेश का काफी दिनों से चक्कर चल रहा है.’’

‘‘सच में…?’’

‘‘हां, सच में. और उन दोनों के बीच बहुतकुछ हो चुका है. समझ रही है न तू? वह सब भी हो चुका है दोनों के बीच.’’

‘‘हायहाय, शर्म नाम की तो चीज ही नहीं रही है आजकल. यह सब, वह भी शादी से पहले. बिलकुल बदचलन लड़की है वह.’’

‘‘हां, पर हमें क्या करना है. मैं तो जो करूंगी शादी के बाद ही करूंगी. वैसे भी मुझ में आग नहीं लगी है उस डौली की तरह.’’

सेक्स को ले कर अकसर हमारे आसपास कुछ इस तरह की ही बातें होती हैं. वह लड़की जिस ने शादी से पहले सेक्स किया हुआ हो, समाज की नजर में कुलटा से ज्यादा कुछ नहीं होती. हां, शादी के 2 महीने बाद ही पेट से हो जाए तो उस में कोई शर्म नहीं है, क्योंकि शादी तो एक तरह से सेक्स करने का परमिट है. जितना करना है, जैसे करना है, करते रहो, लेकिन शादी से पहले न बाबा न.

बिहार के गांवों में एम्स, पटना के डाक्टरों द्वारा मई, 2019 में किए गए एक सर्वे से पता चला है कि कम से कम 30 फीसदी लड़कों और 15 फीसदी लड़कियों ने माना कि उन्होंने शादी से पहले सेक्स किया था.

सर्वे में यह भी पता चला कि बहुत से लड़के-लड़कियां गांव से बाहर जा कर सेक्स का मजा लेते हैं.

उन सर्वे करने वालों में आलोक रंजन, प्रज्ञा कुमार, शमशाद अहमद, संजय पांडे, रोजर शामिल थे.

सर्वे करने वालों को यह भी पता चला कि बहुत सी बड़ी उम्र वाली औरतें किशोर लड़कों के साथ सेक्स करती हैं.

ये भी पढ़ें : बच्चे जब होस्टल से घर आएं तो उन्हें मेहमान न बनाएं

 

शादी से पहले सेक्स को ले कर समाज की सोच और इस सोच से पैदा हुआ डर ही उन मुश्किलों की वजह बनता है, जिन से लड़कियों को गुजरना पड़ता है.

छत्तीसगढ़ के एक गांव पुलना की 16 साल की एक लड़की को जब पेट में तेज दर्द उठने लगा तो उसे डाक्टर के पास ले जाया गया. वहां उसे बताया गया कि वह मां बनने वाली है.

यह जान कर उस के मांबाप की आंखें फटी रह गईं. घर वालों ने मारमार कर उस का हाल तो बुरा किया ही, साथ ही, उस की पढ़ाईलिखाई छुड़वा कर घर बैठा दिया.

वैसे तो गांवदेहात में आज भी 18 साल की उम्र होते ही लड़की को ससुराल विदा कर दिया जाता है. लड़कों के लिए शादी की उम्र कम से कम 21 साल मानी जाती है, लेकिन जब मोबाइल फोन और टैलीविजन पर इतनी हौट लड़कियों को ये लड़के देखते हैं तो इन का मन सेक्स करने के लिए मचलने लगता है.

चेन्नई के ‘हिंदू’ अखबार की साल 2010 की एक रिपोर्ट में कहा गया कि स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया है कि 6 में से एक लड़के और एक लड़की का शादी से पहले सेक्स हुआ था. ज्यादातर की उम्र सेक्स के समय 18 साल से कम थी.

देश में 25 करोड़ लड़के लड़कियों का सेक्स की चाहत से इनकार करना मुश्किल है, लेकिन कट्टरपंथी सरकारें सेक्स के बारे में कुछ भी स्कूलों में बताने की इजाजत नहीं देतीं कि कहीं पंडेपुजारी नाराज न हो जाएं. वे सेक्स करते हैं, पर मानना नहीं चाहते हैं.

‘लड़के तो होते ही ऐसे हैं’ की तर्ज पर ‘तुझे शर्म नहीं आई ऐसा करते हुए’, ‘मुंह काला कर के आ गई’, ‘तुझ जैसी लड़की को तो पैदा होते ही मार देना चाहिए था’ जैसी बातें लड़की को ही सुनाई जाती हैं. सेक्स करते तो लड़का लड़की दोनों हैं, लेकिन ठीकरा लड़की के सिर फूटता है, इसलिए शादी से पहले अगर लड़कियां सेक्स करना चाहती हैं, तो कुछ बातें अच्छे से जान और समझ लें.

लड़के की सोच क्या

जिस लड़के के साथ सेक्स करने जा रही हैं, उस की सोच असल में सेक्स खासकर लड़कियों के साथ शादी से पहले सेक्स करने को ले कर क्या है, जान लें. कहने को तो वह यही कहेगा कि ‘डार्लिंग, सब करते हैं, हम भी कर लेते हैं. आखिर शादी के बाद भी तो करना ही है’, लेकिन यही लड़का अपनी बहन का गला काटने के लिए भी तैयार हो जाएगा, अगर उसे पता चलेगा कि उस ने शादी से पहले सेक्स किया है.

साथ ही, सेक्स करते समय लड़के को यह उम्मीद रहती है कि जिस लड़की के साथ वह सेक्स करने जा रहा है, वह कुंआरी ही होनी चाहिए. कुंआरी मतलब, जिस की हाइमन झिल्ली फटी न हो, जो भारतीय संस्कृति के मुताबिक पाकसाफ हो, जिसे उस के अलावा पहले किसी ने छुआ न हो.

जिस लड़के के साथ आप सेक्स कर रही हैं, वह यह देखे कि बिस्तर पर खून नहीं है और आप कुंआरी नहीं हैं, चाहे आप कुंआरी हों, पर फिर भी अगर उसे ऐसा लगा और उस ने आप की बदनामी की तो आप जानती हैं कि घरपरिवार आप का न जाने क्या हाल करेगा.

ये भी पढ़ें : कुशीनगर हादसा: रीतिरिवाज और बदइंतजामी की सजा

 

जगह का ध्यान रखें

शादी से पहले सेक्स घर में तो कर नहीं सकते और न ही आसपास ऐसा कोई बड़ा होटल है, जिस में आप जा सकें और न इतने पैसे हैं तो जगह क्या बची? खेत? स्कूल? तबेला? आधी रात में घर के पीछे? पर इस का अंजाम बहुत बुरा हो सकता है.

तमिलनाडु के एक सरकारी स्कूल में छुट्टी होने के बाद वहां के टीचर को आंगनबाड़ी की एक औरत के साथ सेक्स करते पकड़े जाने पर लोगों ने उन दोनों की पिटाई की और साथ ही उन्हें पूरे गांव के आगे शर्मसार किया गया.

गांवदेहात में लड़की चाहे पढ़ीलिखी ही क्यों न हो, शहर की लड़की जितनी खुली नहीं होती, कम से कम सेक्स के मामले में तो नहीं. शादी से पहले सेक्स करते अगर वह पकड़ी जाती है तो शायद वह खुद भी नहीं जानती है कि उस के साथ क्या हो सकता है, इसलिए यह समझ लेना जरूरी है कि सेक्स की जगह ऐसी हो, जहां पकड़े जाने की नौबत ही न आए.

मुसीबत में न डालें

जिस लड़के के साथ लड़की सेक्स कर रही है, वह उस का बौयफ्रेंड भी हो सकता है, रिश्तेदार या पड़ोसी हो सकता है, बहन का देवर हो सकता है या भाई का दोस्त भी हो सकता है. लड़की सेक्स प्यार में भी कर सकती है और सिर्फ मजे के लिए भी. लेकिन, हमारे समाज में सेक्स को ले कर मजा करने की छूट सिर्फ लड़कों को मिली हुई है, लड़कियों के हिस्से में सजा ही आती है.

सेक्स करते समय अगर लड़का कहे कि कुछ नया ट्राई करते हैं, बिलकुल वैसे ही जैसे कि ब्लू फिल्मों में होता है, तो लड़की को कुछ भी करने से पहले सोच लेना चाहिए.

पौपुलेशन काउंसिल के 2,500 लोगों के सर्वे से साफ है कि सिर्फ 7 फीसदी लोग ही कंडोम का इस्तेमाल करते हैं, जबकि वे शादी से पहले जाने अनजाने के साथ सेक्स करते हैं.

अगर लड़के के कहने पर लड़की बिना कंडोम के सेक्स करती है तो मां भी बन सकती है, उसे कोई इंफैक्शन या एड्स जैसी गंभीर बीमारी भी हो सकती है, नए पोज ट्राई करने के चक्कर में अंग पर चोटें भी आ सकती हैं.

किसी को न बताएं

सेक्स करने पर खुशी तो होती ही है और लड़कियां अकसर आपस में सेक्स को ले कर खूब बातें भी करती हैं. शादी के बाद तो सब लड़कियां ग्रुप बना कर बैठ जाती हैं और एकदूसरे को छेड़ती भी हैं, ‘बता न कल रात क्या हुआ’, ‘कितनी बार किया’, ‘तू ने वह भी किया था क्या, मैं तो नहीं करती’ वगैरह.

लेकिन, शादी से पहले सेक्स करने पर शायद ही कोई लड़की चाहेगी कि उस के परिवार या किसी और को भी इस बात का पता चले. लेकिन पेट में बात पचती नहीं है और लड़की अपनी करीबी सहेली या किसी पड़ोस की भाभी को यह बात बता देती है कि उस ने सेक्स कर लिया है.

ये भी पढ़ें : बलात्कार के बाद जन्मा बच्चा नाजायज और बोझ क्यों?

 

पर, जैसे सेक्स करने वाले के पेट में यह बात नहीं रखी गई तो भला सुनने वाले के पेट में कैसे रखी जाएगी. वह आज नहीं तो कल यह बात किसी न किसी को जरूर बताएगी.

तो अगर आप नहीं चाहती हैं कि सभी को आप के सेक्स के बारे में पता चले, तो बेहतर रहेगा कि इसे अपने और अपने प्रेमी तक ही रखें.

लड़के ध्यान दें

लड़कों की सोच साफतौर पर सेक्स को ले कर बहुत अलग होती है. सेक्स करने के लिए वह झूठ का सहारा भी ले लेते हैं और अपनी प्रेमिका पर दबाव भी डालते हैं.

कई बार बात बिलकुल उलट होती है, जिस में लड़की लड़के को सेक्स के लिए उकसाती है. लेकिन, इन सब में लड़के की सोच बहुत माने रखती है.

सोहन ने अपने पड़ोस में रहने वाली पिंकी को बहुत मनाया. वह उसे ‘बस एक बार कर ले न, एक बार में कुछ नहीं होता और किसी को पता भी नहीं चलेगा’ कहा करता था. पिंकी ने हां कर दी. दोनों ने छिप कर सेक्स कर लिया.

सेक्स करने के बाद से ही सोहन पिंकी से दोबारा सेक्स करने के लिए कहने लगा. वे दोनों एकदूसरे से मोबाइल फोन पर चैट करते थे.

एक दिन सोहन ने पिंकी से कहा कि क्या वह उस से पहले भी किसी के साथ सेक्स कर चुकी है?

पिंकी के इनकार करने पर सोहन का कहना था कि कोई भी लड़की पहली बार सेक्स करने पर इतनी ‘मस्त’ नहीं होती.

यह सुन कर पिंकी ने फिर कभी भी सोहन के साथ सेक्स करने से मना कर दिया. इस पर सोहन अपने हर एक दोस्त को यह बताने लगा कि पिंकी बड़ी चालू लड़की है.

ये भी पढ़ें : 6 टिप्स: छोटे घर में कैसे बढ़ाएं भाई-बहन का प्यार

 

जो सोहन ने किया, वह कोई भी लड़का कर सकता है, लेकिन लड़कों को यह समझने की जरूरत है कि लड़कियां भी खुशी से सेक्स कर सकती हैं और इस के प्रति खुलापन रख सकती हैं. जरूरी नहीं कि लड़की डरेसहमे, घबराए या फिर डरनेघबराने का नाटक करे. उसे भी खुशी से सेक्स करने का हक है और इस बाबत वह बदनामी की हकदार नहीं हो जाती.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें