डोसा किंग- तीसरी शादी पर बरबादी: भाग 2

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हर काम ज्योतिषी से पूछ कर करने वाले राजगोपाल ने उसी ज्योतिषी से सलाह ली. ज्योतिषी ने उसे तीसरी शादी का सुझाव दिया. राजगोपाल ने उस का सुझाव मान लिया. अब सवाल यह था कि तीसरी शादी किस से की जाए, क्योंकि तब तक राजगोपाल की आयु 50-55 बरस हो चुकी थी. इस उम्र में कोई उसे अपनी बेटी क्यों देता.

राजगोपाल की तीसरी शादी की बात बरबादी के रूप में आई. शादी के चक्कर में उस का टकराव जीवज्योति से हुआ. बात सन 2000 के शुरुआत की है. जीवज्योति पी. राजगोपाल से कुछ पैसे उधार लेने के लिए आई. वह उन्हीं की कंपनी में काम करने वाले असिस्टेंट मैनेजर रामास्वामी की बेटी थी.

जीवज्योति का पति शांता कुमार ट्रैवल एजेंसी शुरू करना चाहता था, जिस के लिए उसे मोटी रकम की जरूरत थी. इसीलिए पति के कहने पर वह राजगोपाल के पास गई. उस के पिता रामास्वामी बेटी को अकेला छोड़ कर थाइलैंड चले गए थे. वह होते तो यह रकम वह अपने पिता से ले सकती थी.

राजगोपाल ने जब बला की खूबसूरत जीवज्योति को पहली बार देखा तो वह देखता ही रह गया. उस की खूबसूरती आंखों के रास्ते दिल में उतर जाने वाली थी. उस समय जीवज्योति की उम्र 27-28 साल रही होगी. वह राजगोपाल के दिल में उतर गई. उस ने जीवज्योति को तीसरी पत्नी बनाने की ठान ली.

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लेकिन यहां राजगोपाल गलत था, क्योंकि वह प्रिंस शांताकुमार की पत्नी थी. जीवज्योति ने शांताकुमार से बहुत पहले ही लव मैरिज कर ली थी. यह बात राजगोपाल को पता भी चल गई थी. फिर भी वह जीवज्योति की खूबसूरती पर मर मिटा.

दरअसल शांताकुमार प्रोफेसर था. वह रामास्वामी की बेटी जीवज्योति को मैथ्स पढ़ाने के लिए उस के घर आता था. वह स्मार्ट और गबरू जवान था, चेन्नई के वेल्लाचीरी का रहने वाला. पढ़ातेपढ़ाते शांताकुमार का दिल जीवज्योति के लिए धड़कने लगा. जीवज्योति का भी हाल कुछ ऐसा ही था.

दोनों को इस बात का अहसास तब होता था, जब ट्यूशन के बाद दोनों अलग होते थे. जीवज्योति ने अपने गुरु की आंखों में अपने प्रति पलते प्यार को देख लिया था. जीवज्योति का दिल भी शांताकुमार के लिए बेकरार था. अंतत: दोनों ने अपने प्यार का इजहार कर दिया. फिर दोनों ने चुपचाप मंदिर में जा कर शादी भी कर ली.

यह बात सन 1999 की है. जीवज्योति ने भले ही अपने प्यार और शादी के राज को दबाए रखा, लेकिन उस का यह राज उस के पिता रामास्वामी के सामने आ ही गया. रामास्वामी को जब यह राज पता चला तो उन्हें धक्का लगा. उन्हें यह शादी मंजूर नहीं थी, क्योंकि शांताकुमार क्रिश्चियन था और जीवज्योति ब्राह्मण.

तमाम विरोधों के बावजूद जीवज्योति और शांताकुमार ने अपनी राह चुन ली थी

घर वालों ने इस शादी का घोर विरोध किया. परिवार वालों के विरोध के चलते जीवज्योति अपने मांबाप का घर छोड़ कर प्रेमी से पति बने शांताकुमार के घर चली गई. बेटी के इस कदम से आहत हो कर रामास्वामी थाइलैंड चले गए और वहीं बस गए.

शादी के कुछ समय बाद शांताकुमार की नौकरी छूट गई और वह बेरोजगार हो गया. उस ने अपना व्यवसाय करने के बारे में सोचा. जीवज्योति पी. राजगोपाल को जानती थी, क्योंकि उस के पिता की वजह से राजगोपाल उसे बेटी कहता था और मानता भी खूब था.

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पति शांताकुमार ने ही जीवज्योति को सुझाया था कि वह राजगोपाल के पास जा कर कुछ रकम उधार मांगे. जब बिजनैस से पैसा आएगा, तो उस की रकम लौटा देंगे. पति के सुझाव पर जीवज्योति राजगोपाल के पास पैसा मांगने गई. पी. राजगोपाल ने जीवज्योति को उतनी रकम दे दी, जितनी उसे जरूरत थी. इस रकम से शांता कुमार ने ट्रैवलिंग एजेंसी शुरू भी कर दी.

लेकिन दूसरी ओर जीवज्योति को देख कर राजगोपाल की नीयत खराब हो गई थी. उसे जीवज्योति इतनी पसंद आई कि वह उस से तीसरी शादी करने की योजना बनाने लगा. इतना ही नहीं, उस ने जीवज्योति को महंगेमहंगे गिफ्ट भेजने भी शुरू कर दिए.

राजगोपाल की इस मेहरबानी को न तो जीवज्योति समझ पाई थी और न ही उस का पति शांताकुमार. लेकिन जल्द ही दोनों उस की नीयत को समझ गए कि उस के दिमाग में कितनी गंदगी भरी हुई है. तभी तो बेटी कहने वाला राजगोपाल उस पर नजर गड़ाए हुए था.

दरअसल, राजगोपाल ने एक दिन जीवज्योति को अपने औफिस बुलाया. औफिस में उस की खूब आवभगत की और उस के सामने अपने दिल की बात रख दी कि वह अपने पति शांताकुमार को छोड़ कर उस से शादी कर ले.

उस की बात सुन कर जीवज्योति बुरी तरह भड़क गई और उसे खूब खरीखोटी सुना कर घर लौट आई. इस के बाद राजगोपाल ने पतिपत्नी के बीच दूरी पैदा करने की कोशिश शुरू कर दी.

पी. राजगोपाल अपने बुरे इरादों में कामयाब नहीं हो पाया. फिर भी उस ने जीवज्योति को फोन करना और महंगे तोहफे भेजना बंद नहीं किया. जब से राजगोपाल ने जीवज्योति से शादी की बात की थी, तभी से वह राजगोपाल पर भड़की हुई थी. ऊपर से उस का रोज फोन आना और महंगे तोहफे भेजना, इस सब से वह परेशान हो गई थी. जब उस ने देखा कि पानी सिर से ऊपर बह रहा है तो वह उस के प्रति और सख्त हो गई.

पी. राजगोपाल के फोन करने और महंगे तोहफों से परेशान हो कर जीवज्योति ने उस की शिकायत पुलिस में करने की धमकी दी. लेकिन इस धमकी का उस पर कोई असर नहीं हुआ. इस के बावजूद वह जीवज्योति को रोज फोन करता और महंगे तोहफे भेजता.

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जीवज्योति का पति शांताकुमार काफी समझदार था. वह जानता था कि पी. राजगोपाल रसूखदार इंसान है. उस की ऊपर तक पहुंच है. उस से पंगा लेना आसान नहीं होगा. काफी सोचविचार करने के बाद वह इस नतीजे पर पहुंचा कि इस शहर को ही छोड़ दिया जाए.

प्रिंस शांताराम और उस की पत्नी चेन्नई छोड़ पाते, उस से पहले ही 28 सितंबर, 2001 को पी. राजगोपाल अपने 5 साथियों के साथ उन के घर जा पहुंचा. उस ने जीवज्योति से धमकी भरे लहजे में कहा कि 2 दिन के अंदर वह अपने पति से रिश्ता तोड़ दे और उस से शादी कर ले नहीं तो इस का बहुत बुरा अंजाम होगा. जीवज्योति डरी नहीं, उस ने उस के मुंह पर ही कह दिया कि वह अपने पति से किसी भी तरह अलग नहीं हो सकती, चाहे वह जो भी कर ले.

जीवज्योति के मुंह से न सुनते ही पी. राजगोपाल आगबबूला हो उठा. वह न सुनने का आदी नहीं था. वह ऐसा शख्स था, जिस चीज पर उस का दिल आ जाता था, उसे साम, दाम, दंड, भेद चारों नीति अपना कर उसे हासिल कर लेता था, चाहे इस के लिए उसे भारी कीमत क्यों न चुकानी पड़े.

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कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

सदियों के श्रापों की देन कलयुगी बलात्कार

आसाराम व रामरहीम के बाद वीरेंद्र देव दीक्षित नाम का हिंदुत्व का नया वाहक पिछले दिनों प्रकट हुआ है. धर्म की नफरतों की दीवारों पर रंगाईपुताई करता अध्यात्म का यह नया देवता अवतारी बन कर उभरा तो देशभर में चर्चा का विषय बन गया. बने भी क्यों नहीं, क्योंकि अब तक जितने भी बाबा के नाम मीडिया ने उछाले हैं, वे ज्यादातर गैरब्राह्मण थे और यह ब्राह्मण है.

ब्राह्मण बाबा मीडिया व ब्राह्मणवादी उद्योगपतियों की मदद से बचते रहे हैं, लेकिन यह मामला कुछ ज्यादा ही बड़ा हो गया. इसलिए जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए कानून के लूपहोल में खेल रहे हैं.

अब तक तकरीबन 500 लड़कियां इस हैवान के चंगुल से छुड़ाई जा चुकी हैं. वीरेंद्र देव दीक्षित नाम का यह तथाकथित नया अवतारी अपनेआप को कृष्ण अवतार बता रहा है. वह 5 हजार से अधिक लड़कियों से बलात्कार का टारगेट पूरा कर चुका है और उस का असली टारगेट, 16,000 लड़कियों का बलात्कार कर हासिल करना था, लेकिन इस बीच उस की करतूत का परदाफाश हो गया. देश की पुलिस व कानूनी एजेंसियां बाबा को खोजने में अभी तक नाकाम रही हैं.

वैसे, हिंदू धर्म में बलात्कार को अनैतिक नहीं बताया गया है. पुराण भरे पड़े हैं श्रापों व देवदासियों के बहाने महिलाओं के शोषण के किस्सों से. मत्स्यगंधा जैसी मैलीकुचैली महिलाओं को भी ऋषि पाराशर जैसे लोगों ने नहीं छोड़ा. ऐसे में आप सोच सकते हैं कि थोड़ा सा भी खुलापन ले कर शृंगार करने वाली महिलाओं की उस दौर में क्या हालत होती रही होगी.

हवस के तो ये इतने भूखे थे कि गौतम को बेवकूफ बना कर नहाने भेज दिया और पीछे अहल्या के साथ बलात्कार कर डाला. क्या तभी इन लोगों ने नारा चलाया कि ब्रह्ममुहूर्त में नहाना शुभ रहता है, क्योंकि पति अंधेरे में नदीतालाब में नहाने चला जाए और इन को पीछे मौका मिल जाए.

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शंकर तपस्या में थे और पीछे, पार्वती के गणेश पैदा हो गए. तर्क तो देखो इनके कि मैल से पैदा हो गए. जैसे पार्वती सदियों से नहीं नहाई हों और मैल को उतार कर पुतला बना लिया हो. कुंती व माद्री के जो 6 लड़के हुए उन में भी पांडु की कोई भूमिका नहीं थी. एक तो शादी से पहले ही पैदा हो गया. बता दिया गया कि महर्षि दुर्वासा ने कुंती को वरदान दे रखा था कि वह जब चाहे जिस देवता को बुला कर बच्चा पैदा कर सकती थी.

धर्म को बुला कर युधिष्ठिर पैदा कर लिया, वायुदेव से भीम पैदा करवा लिया व इंद्र को बुला कर अर्जुन पैदा करवा लिया. फिर यह वरदान माद्री को ट्रांसफर कर दिया, जिस के बूते माद्री ने अश्विनी को बुला कर नकुल व सहदेव पैदा करवा लिए.

ऋषि दुर्वासा तो तीनों युगों में पाए जाते हैं. आदमी थे या कुछ और? हर कालखंड में ऐसे मामलों के इर्दगिर्द ही नजर आता था. कहीं यह वीरेंद्र देव दीक्षित महर्षि दुर्वासा का कलियुगी रूप तो नहीं है. जब इन तथाकथित देवताओं, ऋषिमुनियों की मौज कम होने लगी तो इन लोगों ने वर्तमान को कलियुग कहना शुरू कर दिया. इन को तो वह वाला सतयुग चाहिए जहां ये कभी भी किसी भी महिला को पकड़ कर आनंद की अनुभूति ले सकें और किसी भी प्रकार की रोकटोक न हो.

वीरेंद्र देव दीक्षित ने क्या गुनाह किया है. अपने पूर्वजों की तरह जीवन जीने की कोशिश की थी. अब असली शिलाजीत मिली नहीं, तो कुछ नकली दवाइयां खा ली थीं, इसलिए टारगेट थोड़ा हाई रख लिया था.

इस में इस की गलती थोड़े ही है. यह तो कलियुगी दवाइयां ही खराब निकली हैं. सत्यवती, वाचा, अंबिका, अंबालिका, अहल्या, कुंती, माद्री आदि को एक जगह एकत्रित कर रहा था बेचारा. जब इस के पास आतीं तो उम्र 16 से 19 साल तय थी, लेकिन जब उम्रसीमा क्रौस हो जाती तो वह दूसरों के इस्तेमाल के लिए भी तो व्यवस्था करता था. देवदासियों की तरह खानेपीने का इंतजाम कर के वह अपने शिष्यों व अन्य संगी देवताओं के लिए भी तो माकूल बंदोबस्त किया था.

आप लोग कितने ही नाटक कर लो, लेकिन धर्म में इस तरह के कारनामे हर ग्रंथ में बोलते हैं. मध्ययुग में राम महिमा गातेगाते तुलसीदास को औरत ने मना कर दिया तो दुनिया की सारी महिलाओं को ताड़न की वस्तु बता दिया और ये लोग गोस्वामी तुलसीदासजी की चौपाइयां हर गलीमहल्ले में ले कर घूम रहे हैं. ये गागा कर बता रहे हैं कि महिलाएं सिर्फ उपभोग के लिए हैं, उपयोग में लें और लताड़ लगाएं.

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अब वीरेंद्र देव दीक्षित उस स्वर्णकाल के हिसाब से, अपने ग्रंथों के हिसाब से लड़कियों को उपयोग में ही तो ले रहा था. अब बालिगनाबालिग की सीमा तो इन्होंने तय की नहीं थी न. ये तो कलियुगी चोंचले हैं. क्या औरतों के बिकने की मंडियां लगने वाला रामराज्य चाहिए, देवदासियों के रूप में मंदिरों को नईनई लड़कियों का इंतजाम वाला स्वर्णयुग चाहिए?

स्वर्णकाल का भोग

यह ब्राह्मण देवता यानी वीरेंद्र देव दीक्षित गिरफ्त में इतनी आसानी से नहीं आएगा क्योंकि इस ने बहुत सारे देवताओं के लिए इंतजाम किए होंगे. इस का टारगेट तो 16,000 महिलाओं से बलात्कार करने का था, इसलिए एक बार श्राप दिया और आगे बढ़ गया होगा. फिर तो शिष्यों के लिए यही वरदान बन जाता होगा. आध्यात्मिक विश्वविद्यालय बनाया है व जगहजगह उस की शाखाएं खोली गई थीं तो यह काम अकेला ब्राह्मण देवता तो कर नहीं सकता.

कलियुग गुप्तकाल के बाद ही तो आया है. 1200-1300 साल तो छद्म कलियुग के थे, असली कलियुग तो आजादी के बाद ही आया है. अब देखो, बेचारा छिप कर स्वर्णकाल का भोग कर रहा था और हम लोगों ने हंगामा कर दिया. जिस तरह के छापे, जांच व मीडिया कवरेज हो रही है, उस के हिसाब से वीरेंद्र देव दीक्षित नामक ब्राह्मण देवता सोने की तरह तप कर, बेदाग हो कर निकलेगा.

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Bigg Boss 13: सबके सामने सिद्धार्थ ने किया शहनाज को किस, रश्मि ने दिया ऐसा रिएक्शन

इन दिनों बिग बौस सीजन 13 काफी एंटरटेनिंग होता दिखाई दे रहा है. जहां एक तरफ दर्शकों को लड़ाई झगड़े देखने को मिल रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ कंटेस्टेंट्स के मन में एक दूसरे के लिए बढ़ता प्यार भी सामने आ रहा है. हाल ही में असीम रियाज को हिंमाशी खुराना से प्यार हुआ था तो वहीं सिद्धार्थ शुक्ला और शहनाज गिल का रिश्ता भी गहरा होता दिखाई दे रहा है.

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फिर से दिखा शहनाज और सिद्धार्थ का प्यार…

जब से शो के होस्ट सलमान खान ने सिद्धार्थ और शहनाज को बताया है कि उनकी दोस्ती को घर के बाहर काफी किया जा रहा है तभी से ही दोनों ने एक दूसरे के साथ सारे गिले शिकवे दूर कर एक बार फिर एक दूसरे का हाथ थाम लिया था. बीते कुछ एपिसोड्स में जैसे हमें देखने को मिला कि शहनाज गिल ने सिद्धार्थ शुक्ला के माथे पर सबके सामने किस किया था. तो वहीं आज के एपिसोड में फिर इन दोनो के बीच का प्यार दर्शकों के सामने आने वाला है.

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सिद्धार्थ ने किया शहनाज को किस…

हाल ही में बिग बौस शो के मेकर्स ने आज के एपिसोज का एक प्रोमो रिलीज किया है जिसमें सिद्धार्थ शुक्ला और शहनाज गिल एक दूसरे के साथ पिल्लो फाइट कर रहे हैं. उसके बाद सिद्धार्थ शहनाज को पकड़ने उनके पीछे दौड़ते हैं और आखिर में वे शहनाज को पकड़ ही लेते हैं. उसके बाद शहनाज सिद्धार्थ को कहती हैं कि, मैं तुझे बहुत प्यार करती हूं, प्लीज मुझे छोड़ दे. इसके बाद सिद्धार्थ शहनाज को किस करते नजर आते हैं.

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ये 6 सदस्य हैं इस हफ्ते नोमिनेटिड…

इसी दौरान किचन एरिया में खड़ी रश्मि देसाई सिद्धार्थ और शहनाज की ऐसी मीठी नोकझोंक को देख काफी खुश होती हैं और वे भी मुस्कुराए बिना नहीं रह पातीं. आपको बता दें, इस हफ्ते घर से बेघर होने के लिए 6 सदस्य नोमिनेटिड हैं जिनमे से पारस छाबड़ा, शहनाज गिल, शेफाली जरीवाला, माहिरा शर्मा, आरती सिंह और हिन्दुस्तानी भाऊ का नाम शामिल है. अब देखने वाली बात ये होगी की इस हफ्ते किसका होगा इस घर से सफर खत्म यानी कौन होगा घर से बेघर.

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इस हौट एक्ट्रेस ने की तेलुगु फिल्म “अला वैकुण्ठपुररामलू” के लिए डबिंग, पढ़ें खबर

पूजा हेगड़े ने हर फिल्म के साथ अपनी एक्टिंग टैलेंट को औडियंस के सामने बखूबी रखा. जहां एक तरफ हमने उन्हें कई अलग -अलग रोल में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए देखा तो वही अब फैंस उन्हें बड़े परदे पर उनकी बहुप्रतीक्षित अपकमिंग तेलुगु फिल्म “”अला वैकुण्ठपुररामलू” में देखने के लिए बहुत उत्साहित है. इस फिल्म में इस अभिनेत्री के अपोज़िट ‘अल्लू अर्जुन’ नज़र आने वाले हैं.

इस महीने की शुरुआत में पूजा पेरिस की खूबसूरत जगहों पर इस फिल्म के रोमांटिक सौंग सीक्वेंस की शूटिंग पूरी कर चुकी है. कुछ समय पहले ही इस अभिनेत्री ने हैदराबाद में फिल्म की शूटिंग पूरी की और अब उन्होंने फिल्म के लिए डबिंग शुरू कर दी है.

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इससे पहले पूजा हेगड़े को फिल्म ‘अरविंद समेता’ में उनकी डबिंग के लिए फैंस से काफी सरहाना मिली, इस फिल्म में वह त्रिविक्रम श्रीनिवास के साथ नज़र आयी थी. पूजा हेगड़े अपनी अपकमिंग फिल्म “अला वैकुण्ठपुररामलू” की डबिंग के साथ अपनी पुरानी यादों को एक बार फिर से जीने के लिए बहुत ही उत्साहित है. पूजा अपने द्वारा चुने हुए रोल में अपना बेस्ट देने में यकीन रखती है. यह त्रिविक्रम श्रीनिवास का दूसरा बड़ा प्रोजेक्ट है जिसमें पूजा हेगड़े मुख्य भूमिका निभा रही हैं.

पूजा ने अपने अभिनय के प्रदर्शन से बॉलीवुड में तो एक खास पहचान बनाई ही है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने टॉलीवूड में भी अपनी एक्टिंग की अलग छाप छोड़ी है. पूजा दोनों ही इंडस्ट्री में अपने शानदार अभिनय से लोगो का दिल जीत रही हैं और वह ने करियर में लगातार आगे बढ़ रही हैं.

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परफेक्ट लुक के लिए अपनाएं इन बौलीवुड एक्टर्स के ये ब्लैक आउटफिट्स

आजकल की युवा पीढ़ी अपने पहनावे का काफी ध्यान रखती है, फिर चाहे वे किसी फंक्शन के लिए हो या फिर उनके कौलेज जाने के लिए. और तो और आजकल ब्लैक कलर का इतना ट्रेंड चल पड़ा है कि हर कोई अपने पहनावे में ब्लैक कलर पहनना काफी पसंद करता है. अगर आपको भी है शौंक ब्लैक आउटफिट्स पहनने का तो हम आपको लिए लेकर आए हैं बौलीवुड एक्टर्स के कुछ ऐसे ब्लैक आउटफिट्स जिसे आप जरूर ट्राय करना पसंद करेंगे.

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  1. आयुष्मान खुराना…

ayushmann khurana

आयुष्मान खुराना का लुक भी हर बार उन्हीं की तरह परफेक्ट होता है जैसे कि आप देख ही सकते हैं आयुष्मान का ये ब्लैक लुक उन पर कितना अच्छा लग रहा है. इस लुक में आयुष्मान ने ब्लैक कलर की शर्ट के साथ ब्लैक कलर का ट्राउसर पहना हुआ है. पर ब्लैक शर्ट के ऊपर ब्लैक कलर की स्टाइलिश ब्लेजर इस लुक में चार चांद लगा रहा है. आप भी आयुष्मान खुराना जैसा ये लुक अपनी किसी पार्टी में ट्राय कर किसी को भी इम्प्रेस कर सकते हैं.

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  1. रनबीर कपूर…

बौलीवुड इंडस्ट्री के प्रिंस चार्मिंग यानी रनबीर कपूर पर करोड़ों लड़कियां जान छिडकती हैं और इसकी वजह ये है कि वे उनके लुक्स होते ही इतने इम्प्रेसिव हैं कि किसी को भी उनसे प्यार हो जाए. अपने इस ब्लैक लुक में रनबीर कपूर ने ब्लैक कलर का कुर्ता पयजामा कैरी किया हुआ है और साथ ही इस लुक के उन्होनें ब्लैक कलर का ब्लेडर पहना हुआ है. तो अगर आप भी चाहते हैं रनबीर की तरह डैशिंग दिखना तो जरूर ट्राय करें उनका ये लुक.

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  1. रनवीर सिंह…

अगर बात करें रनवीर सिंह की तो उनका फैशन सबसे निराला होता है. इस ब्लैक आउटफिट के ट्रेंड में रनवीर सिंह की भी एक फोटो सामने आई है जिसमें उन्होनें व्हाइट कलर की शर्ट के साथ ब्लैक कलर का बेस कोट और ब्लैक वैलवेट ब्लेजर पहना हुआ है. इस लुक में उन्होनें ब्लैक कलर का ही ट्राउसर कैरी किया हुआ है. आप रनवीर जैसा ये लुक किसी भी पार्टी में ट्राय कर सकते हैं.

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  1. कार्तिक आर्यन…

बोलीवुड इंडस्ट्री के चोकलेटी बौय कहे जाने वाले स्टाइलिश एक्टर कार्तिक आर्यन के लुक्स युवाओं में काफी पौपुलर हैं. अपने इस ब्लैक लुक में कार्तिक आर्यन ने ब्लैक कलर की हाई नैक टीशर्ट के साथ ब्लैक कलर का ब्लेजर और साथ ही ब्लैक कलर का ट्राउसर कैरी किया हुआ है. अगर आप भी चाहते हैं कार्तिक आर्यन जैसा स्मार्ट दिखना तो जरूर ट्राय करें उनका ये ब्लैक लुक.

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शादीलाल की ससुराल यात्रा

शादीलाल जैसा सामान धरती पर कम ही मिलता है. साढ़े 4 फुट की उस चीज का पेट आगे निकला हुआ था और गंजे सिर पर गिनने लायक बाल थे. मुझे यकीन था कि उस की शादी नामुमकिन है, पर शायद वह अपने माथे पर कुछ और ही लिखा कर लाया था.

पिछले साल ही तो शादीलाल की शादी हुई थी. कुदरत ने उस के साथ मजाक नहीं किया, क्योंकि कोई भी यह नहीं कह सकता था कि ‘राम मिलाए जोड़ी, एक अंधा एक कोढ़ी’.

जी हां, जैसा हमारा प्यारा दोस्त शादीलाल था, ठीक वैसी ही उस की बीवी यानी मेरी भाभी आई थीं. वे भी करीब 37 साल की होंगी. शादीलाल की कदकाठी से ले कर मोटापा, लंबाई, ऊंचाई, निचाई, चौड़ाई सभी में जबरदस्त टक्कर देने वाली थीं.

मेरी भाभी का नाम पहले कुमारी सुंदरी था, पर अब श्रीमती सुंदरी देवी हो गया था.

पर भाभी का सुंदरी होना तो दूर, वे सुंदरी का ‘सु’ भी नहीं थीं, मगर ससुराल के नाम से बिदकने वाला मेरा यार गजब की तकदीर पाए हुए था. उस के 7 सगी सालियां थीं और सातों एक से बढ़ कर एक.

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मैं भी शादी में गया था. सच कहता हूं कि मेरा ईमान भूचाल में जैसे धरती डोलती है, वैसे डोल गया था. अगर मेरी नकेल पहले से न कसी होती, तो मैं शादीलाल की सालियों के साथ इश्क कर डालता.

शादी में शादीलाल की सालियों ने उस की इतनी खिंचाई की थी कि वह ससुराल का नाम लेना ही भूल गया. शादी में उस से जूतों की पूजा कराई गई. धोखे में डाल कर सुंदरी देवी के पैर छुआए गए. सुंदरी देवी के नाम से झूठी चिट्ठी भेज कर उसे जनवासे से 7 फर्लांग दूर बुलवाया गया.

खैर, होनी को कौन टाल सकता था. आज शादीलाल की शादी को एक साल हो गया. सुंदरी देवी अपने मायके में थीं. वे न जाने कितनी बार वहां हो आईं, पर मेरे यार ने कभी वहां की यात्रा का नाम नहीं लिया.

वहां से ससुर साहब की चिट्ठी आई कि आप शादी के बाद से ससुराल नहीं आए. अब सुंदरी की विदाई तभी होगी जब आप खुद आएंगे, वरना नहीं.

यह वाकिआ मुझे तब पता चला, जब औफिस की बड़े बाबू वाली कुरसी पर शादीलाल को गमगीन बैठे देखा.

‘‘मेरे यार, क्या कहीं से कोई

तार वगैरह आया है या गमी हो गई?’’ मैं ने घबरा कर पूछा.

शादीलाल ने अपना मुंह नहीं खोला. अलबत्ता, नाक पर मक्खी बैठ जाने पर भैंस जैसे सिर हिलाती है, वैसे न में सिर हिला दिया.

तब मैं ने पूछा, ‘‘क्या आप को सुंदरी देवी की तरफ से तलाक का नोटिस आया है? क्या वे बीमार हैं या सासससुर गुजर गए?’’

अब शादीलाल ने जो सिर उठाया, तो मेरा दिल बैठ गया. लाललाल आंखें आंसुओं से भरी थीं. चेहरा गधे सा मुरझाया था.

मैं ने उस के हाथ पर हाथ रखा, तो शादीलाल रो उठा और बोला, ‘‘देखो एकलौता राम, तुम मेरे खास दोस्त हो, तुम से क्या छिपाना. चिट्ठी आई है.’’

‘‘क्या कोई बुरी खबर है या कोई अनहोनी घटना घट गई?’’

‘‘नहीं, ससुरजी ने मुझे बुलाया है. इस बार वे साले के साथ सुंदरी को नहीं भेज रहे हैं. अब तो मुझे जाना ही होगा.’’

‘‘अरे, तो इस में घबराने की क्या बात है. ससुराल से बुलावा तो अच्छे लोगों को ही मिलता है. तुम तो

7 सालियों के आधे घरवाले हो, तुम जरूर जाओ.’’

‘‘नहीं यार, यही तो मुसीबत है. मैं उन सातों के मुंह में तिनके की तरह समा जाता हूं.’’

‘‘शादीलाल, तुम्हें क्या हो गया है? घबराओ मत, मैं तुम्हारे साथ हूं,’’ मैं ने उसे हौसला बंधाया.

‘‘एकलौता राम, मुझे तुम्हीं पर भरोसा है. इस संसार में मेरा साथ देने वाले यार तुम्हीं हो. क्या तुम मेरे ऊपर एक एहसान करोगे?’’

‘‘कहो यार, मैं तो यारों का एकलौता राम हूं.’’

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‘‘तुम को मेरे साथ मेरी ससुराल चलना होगा, वरना मेरी शैतान सालियां मुझे सतासता कर काढ़ा बना कर पी जाएंगी.’’

मैं ने शादीलाल को समझाना चाहा, पर वह मुझे अपनी ससुराल ले ही गया. इस तरह अब शादीलाल की ससुराल यात्रा और साथ में एकलौता राम की यादगार यात्रा शुरू हो गई.

87 किलोमीटर दूर ससुराल में पहुंचे, तो हमारी खूब खातिरदारी हुई. फिर सातों शैतान सालियों के कारनामे शुरू हो गए, जिन का हमें डर था.

थका होने की वजह से शादीलाल शाम 7 बजे से ही खर्राटे लेने में मस्त हो गया. तभी वे सातों आईं. उन्होंने मुंह पर उंगली रख चुप रहने का इशारा किया तो मैं समझ गया कि शादीलाल अब तो गया काम से.

मैं शादीलाल को जगाने के चक्कर में था कि 27 साला एक साली ने कहा, ‘‘आप खामोश रहिए, वरना आप की हजामत जीजा से भी बढ़ कर होगी.’’

मैं ने रजाई तानी और उस में झरोखा बना कर नजारा देखने लगा. शादीलाल के हाथों में एक साली ने नीली स्याही का पोता फेरा. दूसरी साली ने उस की नाक में कागज की सींक बना कर घुसा दी. नतीजतन, शादीलाल का हाथ नाक पर पहुंच गया और स्याही चेहरे पर ‘मौडर्न आर्ट’ बनाती गई.

मैं लिहाफ के अंदर हंसी नहीं रोक पा रहा था. आखिर में 6 सालियां बाहर चली गईं, केवल 7 साल की सुनीता बची, तो उस ने अपने जीजा के हाथों में उसी की हवाई चप्पलें उलटी कर के फंसी दीं और फिर उस के कानों में सींक घुमा कर भाग गई.

सींक से बेचैन हो कर शादीलाल ने अपने कानों पर हाथ मारे, तो चप्पलें गालों पर चटाक से बोलीं.

मैं ने किसी तरह झरोखा बंद किया. हंसहंस कर मेरा पेट हिल रहा था, पर कान आहट ले रहे थे.

मेरा यार उठा. चप्पलें फेंकने की आवाज आई, फिर उस ने मेरी रजाई उठा दी. मैं तब भी हंस रहा था.

शादीलाल बरस पड़ा, ‘‘एकलौता राम, तू कर गया न गद्दारी. मेरी यह हालत किस ने की?’’

मैं ने आंख मलने का नाटक किया और पूछा, ‘‘क्या बात है यार?’’

‘‘बनो मत, मेरी हालत पर तुम हंस रहे थे.’’

‘‘क्या बात करते हो यार… मैं तो सपने में हंस रहा था. अरे, तुम्हारे चेहरे पर रामलीला का मेकअप किस ने किया?’’

‘‘उठ यार, मैं यहां पलभर भी नहीं ठहर सकता. वही कमबख्त सालियां होंगी,’’ उस ने आईने में अपना चेहरा देखते हुए कहा.

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‘‘चलो ससुरजी के पास, मैं उन सब की शिकायत करता हूं,’’ मैं ने कहा.

‘‘पर यार, ससुरजी ऐसा टैक्नीकलर दामाद देखेंगे तो क्या कहेंगे? आखिर मैं क्या करूं? मैं इसीलिए यहां नहीं आता हूं. तुझे बचाव के लिए लाया था, पर तू भी बेकार रहा.’’

‘‘शादीलाल, क्या मैं रातभर जाग कर तुम्हारी खाट के चक्कर लगाऊंगा? तुम भी तो घोड़े बेच कर सो गए. वहां जग में पानी रखा है, मुंह धो डालो.’’

बेचारा शादीलाल मुंह धो कर लेट गया. मैं सोने की कोशिश में था कि तभी पायल की आवाज सुन कर चौंका.

जीरो पावर का बल्ब जल रहा था.

मैं ने देखा, वह भारीभरकम औरत शायद श्रीमती शादीलाल थीं. मैं ज्यादा रात तक जागने पर मन

ही मन झल्लाया और करवट बदल कर लेटा रहा. मुझे आवाजें सुनाई पड़ रही थीं.

‘‘अरे तुम, देखो हल्ला नहीं करना. मेरा यार एकलौता राम सोया हुआ है. तुम खुद नहीं आ सकती थीं. तुम्हारी बहनों ने मेरा मजाक बना दिया.’’

ठीक तभी बिजली जलने की आवाज सुनाई दी और सामूहिक ठहाके भी. मैं ने फौरन हड़बड़ा कर रजाई फेंकी. देखा तो दंग रह गया. शादीलाल की 6 सालियां खड़ी थीं. बेचारा शादीलाल उन्हें टुकुरटुकुर देख रहा था.

साली नंबर 5 गद्दा, तकिया व साड़ी फेंक कर फ्राक में खड़ी हो गई और बोली, ‘‘हम सातों को जीजाजी शैतान कह रहे थे.’’

‘‘अरे, मैं तो पहले ही समझ गया था. मैं तो नाटक कर रहा था,’’ शादीलाल ने झेंपते हुए साली नंबर 5 को देखा.

इस मजाक के बाद अगला मजाक सुबह ही हुआ. मैं और मेरा यार जब कमरे से बाहर आए, तो आंगन में सालियों से दुआसलाम हुई.

तभी एक साली ने कहा, ‘‘जीजाजी, क्या आप रात को बड़ी दीदी के कमरे में गए थे?’’

‘‘नहीं सालीजी, तुम्हारे होते हुए मैं वहां क्यों जाता?’’ कह कर शादीलाल ने उसे गोद में उठा लिया.

‘‘पर जीजाजी, आप बड़ी दीदी की चप्पलें पहने हैं और आप की चप्पलें तो दीदी के कमरे में पड़ी हैं.’’

शादीलाल ने घबरा कर पैरों की ओर देखा. पैरों में लेडीज चप्पलें ही थीं.

शादीलाल के हाथ से साली छूट गई, पर मैं ने उसे संभाल लिया. फिर ठहाका लगा, तो शादीलाल की सिट्टीपिट्टी गुम हो गई.

सब से ज्यादा मजा उस समय आया, जब शादीलाल पेट हलका करने शौचालय में घुसा. तब मैं आंगन में खड़ाखड़ा ब्रश कर रहा था. सालियों ने जो टूथपेस्ट दिया था, उस का स्वाद कड़वा सा था और उस से बेहद झाग भी निकल रहा था.

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तभी शौचालय के अंदर के नल का कनैक्शन, जिस से पानी जाता था, एक साली ने बाहर से बंद कर दिया.

मैं ने सोचा कि शादीलाल तो गया काम से. इधर मैं थूकतेथूकते परेशान था कि शादीलाल की सास ने कहा, ‘‘बेटा, तुम कुल्ला कर लो. इन शैतानों ने टूथपेस्ट की जगह तुम्हें ‘शेविंग क्रीम’ दे दी थी.’’

मेरे तो मानो होश ही उड़ गए. जल्दीजल्दी थूक कर भागा और सालियों के जबरदस्त ठहाके सुनता रहा.

शादीलाल एक घंटे बाद जब बिना पानी के ‘शौचालय’ से बाहर आया तो छोटी साली नाक दबा कर आई और बोली, ‘‘जीजाजी, फिर से अंदर जाइए. अब नल चालू कर दिया है.’’

शादीलाल दोबारा अंदर घुसा, फिर निकल कर नहाने घुस गया. उस का लगातार मजाक बनाया जा रहा था, पर वह ऐसा चिकना घड़ा था कि उस पर कोई बात रुकती नहीं थी.

2 दिन ऐसे ही सालियों की मुहब्बत भरी छेड़खानी में गुजरे. जब जाने का नंबर आया तो मेरे सीधेसादे यार शादीलाल ने सालियों से ऐसा मजाक किया कि सातों सालियां ही शर्म से पानीपानी हो गईं.

हुआ यों कि जब हमारे जाने का समय आया और रोनेधोने के बाद तांगे में सामान रख दिया गया, तब सालियां, उन की सहेलियां और महल्ले वालों की भीड़ जमा थी.

तभी शादीलाल ने कहा, ‘‘देखो सातों सालियो, मुझे यह बताओ कि कुंआरी लड़की को क्या पसंद है?’’

सातों सालियों ने न में सिर हिलाया. सब लोगों को यह जानने की बेताबी थी कि शादीलाल अब क्या कहेंगे. तभी शादीलाल ने आगे बढ़ कर कहा, ‘‘अरे, तुम लोगों को नहीं पता कि कुंआरी लड़कियों को क्या पसंद है?’’

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‘नहीं,’ सातों सालियों ने एकसाथ फिर से वही जवाब दिया.

‘‘मुझे पहले ही तुम लोगों पर शक था,’’ शादीलाल ने नाटकीय लहजे में कहा.

उस समय सातों सालियों पर घड़ों पानी पड़ गया, जब उन की एक सहेली ने कहा, ‘‘तुम लोगों को जीजाजी ने बेवकूफ बना दिया. उन्हें तुम्हारे कुंआरे होने पर शक है. उन्होंने तुम सभी को शादीशुदा बना दिया है, क्योंकि तुम लोगों को कुंआरी लड़कियों की पसंद नहीं मालूम है.’’

और फिर तो सातों सालियों पर इतने जबरदस्त ठहाके लगे कि सभी दुपट्टे में मुंह छिपा कर अंदर भाग गईं.

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लिव इन रिलेशनशिप का फंदा

आइए आपको आज छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का एक लिव इन रिलेशनशिप का मामला परत दर प्रदत दिखाने महसूस करने का एक छोटा सा प्रयास करते हैं शायद इससे लोगों का भविष्य बन जाए और कभी इस अवधारणा के फंदे में न फंसे. दरअसल यह एक अजीब फंडा है जो कब फंदा बन जाता है पता ही नहीं चलता और इंसान इसके मकड़जाल में फंस कर अपना जीवन तबाह कर लेता है दरअसल हुआ यह कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक जोड़ा

एक साल तक लिव इन रिलेशनशिप में रहता हैं. बाद में बात  दोनों के संबंध खराब होते  चले जाते है,  तब युवती युवक पर दुष्कर्म का आरोप लगा देती है. हद तो तब हो जाती है जब मामला कोर्ट तक पहुंच  जाता है. मगर अब कोर्ट ने युवती को बड़ा  करंट  दिया है. युवती द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप को माननीय न्यायालय ने खारिज कर दिया. कोर्ट में दुष्कर्म का अपराध साबित नहीं होने पर युवक को दोषमुक्त कर दिया गया है. साथ ही सिंदूर भरकरशादी करने का आश्वासन देकर जबरदस्ती दुष्कर्म करने के आरोप को भी संदेहजनक माना है.

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आधुनिक प्यार की कहानी कुछ ऐसी है

आधुनिक प्यार या कहें लव इन रिलेशनशिप की  कहानी दरअसल कुछ ऐसी है- राजधानी रायपुर के मोवा निवासी आशीष होरा के खिलाफ करीब दो साल पहले 31 वर्षीय युवती ने पंडरी थाने में दुष्कर्म, मारपीट और धमकी का अपराध दर्ज कराया था. युवती आशीष के साथ 15 सितंबर 2016 से 23 मई 2017 तक “लिव इन रिलेशनशिप” में रहती रही. दोनों  खुशी खुशी दलदल सिवनी स्थित नेचुरा अपार्टमेंट में आशीष के फ्लैट में रहते थे.  अचानक 24 मई 2017 को पंडरी थाने में युवती ने आशीष के खिलाफ दुष्कर्म का अपराध दर्ज कराया.

युवती ने आरोप लगाया था कि मांग में सिंदूर भरकर, शादी करने का विश्वास दिलाकर आशीष दुष्कर्म    उससे  करता रहा, फिर एक माह पहले शादी करने से इनकार कर दिया. और हद यह है कि  मारपीट करते हुए जान से मारने की धमकी दी है . पुलिस ने मामले में जांच पड़ताल की बयान लिए अंत में न्यायालय में चालान पेश किया.

मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट अपर सत्र न्यायाधीश पूजा जायसवाल के कोर्ट में विचाराधीन था. इसकी सुनवाई के दौरान युवती पक्ष के वकील धोखा देकर या जबरदस्ती दुष्कर्म करना साबित नहीं कर पाए. एफआईआर में दर्ज कराए गए आरोप भी साबित नहीं हो पाए.

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इसके चलते कोर्ट ने आशीष होरा को दुष्कर्म के अपराध से अंततः दोषमुक्त कर दिया. दरअसल युवती के एक दफे शादी करके तलाक  के चलते उसका केस कमजोर होता चला  गया.  न्यायालय ने आरोपी युवक के पक्ष में निर्णय दिया.

नहीं फंसना, लव इन रिलेशन में

दरअसल भारतीय सभ्यता और समाज की जैसी संरचना है उसको समझ कर आज की युवा पीढ़ी अदर लव इन रिलेशनशिप से बचती है तो उसमें युवा पीढ़ी का भला है  हमारे पुरखों ने सैकड़ों वर्ष पूर्व बहुत अनुभव के पश्चात विवाह की संस्था को जन्म दिया है और यह संस्था लगभग सभी देशों में अलग-अलग स्वरूप में पाई जाती है ऐसे में लव इन रिलेशनशिप एक ऐसा नासूर है जो सिर्फ लोगों को दुख दर्द और दंश ही देता है.

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के अधिवक्ता बीके शुक्ला इस संबंध में कहते हैं-” आस-पास दुष्कर्म के कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें पीड़िता अपनी सहमति से संबंध बनाती है. बाद में जबरदस्ती या शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का मामला दर्ज कराती है. और अंत में युवतियां या फिर युवक न्यायालय से परितोष चाहते हैं जो उन्हें कई महत्वपूर्ण कारणों से नहीं मिल पाता.”

ऐसे में समझदारी यही है कि लव इन रिलेशनशिप के फंदे से आप अपने आप को बचाए रखें.

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कहो, कैसी रही चाची

लड़की लंबी हो, मिल्की ह्वाइट रंग हो, गृहकार्य में निपुण हो… ऐसी बातें तो घरों में तब खूब सुनी थीं जब बहू की तलाश शुरू होती थी. जाने कितने फोटो मंगाए जाते, देखे जाते थे.

फिर लड़की को देखने का सिलसिला शुरू होता था. लड़की में मांग के अनुसार थोड़ी भी कमी पाई जाती तो उसे छांट दिया जाता. यों, अब सुनने में ये सब पुरानी बातें हो गई हैं पर थोड़े हेरफेर के साथ घरघर की आज भी यही समस्या है.

अब तो लड़कियों में एक गुण की और डिमांड होने लगी है. मांग है कि कानवेंट की पढ़ी लड़की चाहिए. यह ऐसी डिमांड थी कि कई गुणसंपन्न लड़कियां धड़ामधड़ाम गिर गईं.

अच्छेअच्छे वरों की कतार से वे एकदम से बाहर कर दी गईं. उन में कुंभी भी थी जो मेरे पड़ोस की भूली चाची की बेटी थी.

‘‘कानवेंट एजुकेटेड का मतलब?’’ पड़ोस में नईनई आईं भूली चाची ने पूछा, जो दरभंगा के किसी गांव की थीं.

‘‘अंगरेजी जानने वाली,’’ मैं ने बताया.

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‘‘भला, अंगरेजी में ऐसी क्या बात है भई, जो हमारी हिंदी में नहीं…’’ चाची ने आंख मटकाईं.

‘‘अंगरेजी स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियां तेजतर्रार होती हैं. हर जगह आगे, हर काम में आगे,’’ मैं ने उन्हें समझाया, ‘‘फटाफट अंगरेजी बोलते देख सब हकबका जाते हैं. अच्छेअच्छों की बोलती बंद हो जाती है.’’

‘‘अच्छा,’’ चाची मेरी बात मानने को तैयार नहीं थीं, इसलिए बोलीं, ‘‘यह तो मैं अब सुन रही हूं. हमारे जमाने की कई औरतें आज की लड़कियों को पछाड़ दें. मेरी कुंभी तो अंगरेजी स्कूल में नहीं पढ़ी पर आज जो तमाम लड़कियां इंगलिश मीडियम स्कूलों में पढ़ रही हैं, कुछ को छोड़ बाकी तो आवारागर्दी करती हैं.’’

‘‘छी…छी, ऐसी बात नहीं है, चाची.’’

‘‘कहो तो मैं दिखा दूं,’’ चाची बोलीं, ‘‘घर से ट्यूशन के नाम पर निकलती हैं और कौफी शौप में बौयफे्रंड के साथ चली जाती हैं, वहां से पार्क या सिनेमा हाल में… मैं ने तो खुद अपनी आंखों से देखा है.’’

‘‘हां, इसी से तो अब अदालत भी कहने लगी है कि वयस्क होने की उम्र 16 कर दी जाए,’’ मैं ने कुछ शरमा कर कहा.

‘‘यानी बात तो घूमफिर कर वही हुई. ‘बालविवाह की वापसी,’’’ चाची बोलीं, ‘‘अच्छा छोड़ो, तुम्हारी बेटी तो अंगरेजी स्कूल में पढ़ रही है, उसे सीना आता है?’’

‘‘नहीं.’’

‘‘खाना पकाना?’’

‘‘नहीं.’’

‘‘चलो, गायनवादन तो आता ही होगा,’’ चाची जोर दे कर बोलीं.

‘‘नहीं, उसे बस अंगरेजी बोलना आता है,’’ यह बताते समय मैं पसीनेपसीने हो गई.

चाची पुराने जमाने की थीं पर पूरी तेजतर्रार. अंगरेजी न बोलें पर जरूरत के समय बड़ेबड़ों की हिम्मत पस्त कर दें.

उस दिन चाची के घर जाना हुआ. बाहर बरामदे में बैठी चाची साड़ी में कढ़ाई कर रही थीं. खूब बारीक, महीन. जैसे हाथ नहीं मकड़ी का मुंह हो.

‘‘हाय, चाची, ये आप कर रही हैं? दिखाई दे रहा है इतना बारीक काम…’’

‘‘तुम से ज्यादा दिखाई देता है,’’ चाची हंस कर बोलीं, ‘‘यह तो आज दूसरी साड़ी पर काम कर रही हूं. पर बिटिया, मुझे अंगरेजी नहीं आती, बस.’’

मैं मुसकरा दी. फिर एक दिन देखा, पूरे 8 कंबल अरगनी पर पसरे हैं और 9वां कंबल चाची धो रही हैं.

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‘‘चाची, इस उम्र में इतने भारीभारी कंबल हाथ से धो रही हैं. वाशिंगमशीन क्यों नहीं लेतीं?’’

‘‘वाशिंगमशीन तो बहू ने ले रखी है पर मुझे नहीं सुहाती. एक तो मशीन से मनचाही धुलाई नहीं हो पाती, कपड़े भी जल्दी पतले हो जाते हैं, कालर की गंदगी पूरी हटती नहीं जबकि खुद धुलाई करने पर देह की कसरत हो जाती है. एक पंथ दो काज, क्यों.’’

चाची का बस मैं मुंह देखती रही थी. लग रहा था जैसे कह रही हों, ‘हां, मुझे बस अंगरेजी नहीं आती.’

उस दिन बाजार में चाची से भेंट हो गई. तनु और मैं केले ले रही थीं. केले छांटती हुई चाची भी आ खड़ी हुईं. मैं ने 6 केलों के पैसे दिए और आगे बढ़ने लगी.

चाची, जो बड़ी देर से हमें खरीदारी करते देख रही थीं, झट से मेरा हाथ पकड़ कर बोलीं, ‘‘रुक, जरा बता तो, केले कितने में लिए?’’

‘‘30 रुपए दर्जन,’’ मैं ने सहज बता दिया.

‘‘ऐसे केले 30 रुपए में. क्या देख कर लिए. तू तो इंगलिश मीडियम वाली है न, फिर भी लड़ न सकी.’’

‘‘मेरे कहने पर दिए ही नहीं. अब छोड़ो भी चाची, दोचार रुपए के लिए क्या बहस करनी,’’ मैं ने उन्हें समझाया.

‘‘यही तो डर है. डर ही तो है, जिस ने समाज को गुंडों के हवाले कर दिया है,’’ इतना कह कर चाची ने तनु के हाथ से केले छीन लिए और लपक कर वे केले वाले के पास पहुंचीं और केले पटक कर बोलीं, ‘‘ऐसे केले कहां से ले कर आता है…’’

‘‘खगडि़या से,’’ केले वाले ने सहजता से कहा.

‘‘इन की रंगत देख रहा है. टी.बी. के मरीज से खरीदे होंगे 5 रुपए दर्जन, बेच रहा है 30 रुपए. चल, निकाल 10 रुपए.’’

‘‘अब आप भी मेरी कमाई मारती हो चाची,’’ केले वाला घिघिया कर बोला, ‘‘आप को 10 रुपए दर्जन के भाव से ही दिए थे न.’’

‘‘तो इसे ठगा क्यों? चल, निकाल बाकी पैसे वरना कल से यहां केले नहीं बेच पाएगा. सारा कुछ उठा कर फेंक दूंगी…’’

और चाची ने 10 रुपए ला कर मेरे हाथ में रख दिए. मैं तो हक्कीबक्की रह गई. पतली छड़ी सी चाची में इतनी हिम्मत.

एक दिन फिर चाची से सड़क पर भेंट हो गई.

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सड़क पर जाम लगा था. सारी सवारियां आपस में गड्डमड्ड हो गई थीं. समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे रास्ता निकलेगा. ट्रैफिक पुलिस वाला भी नदारद था. लोग बिना सोचेसमझे अपनेअपने वाहन घुसाए जा रहे थे. मैं एक ओर नाक पर अपना रुमाल लगाए खड़ी हो कर भीड़ छंटने की प्रतीक्षा कर रही थी.

तभी चाची दिखीं.

‘‘अरे, क्या हुआ? इतनी तेज धूप में खड़ी हो कर क्या सोच रही है?’’

‘‘सोच रही हूं, जाम खुले तो सड़क के दूसरी ओर जाऊं.’’

‘‘जाम लगा नहीं है, जाम कर दिया गया है. यहां सारे के सारे अंगरेजी पढ़ने वाले जो हैं. देखो, किसी में हिम्मत नहीं कि जो गलत गाडि़यां घुसा रहे हैं उन्हें रोक सके. सभ्य कहलाने के लिए नाक पर रुमाल लगाए खड़े हैं या फिर कोने में बकरियों की तरह मिमिया रहे हैं.’’

‘‘तो आप ही कुछ करें न, चाची,’’ उन की हिम्मत पर मुझे भरोसा हो चला था.

चाची हंस दीं, ‘‘मैं कोई कंकरीट की बनी दीवार नहीं हूं और न ही सूमो पहलवान. हां, कुछ हिम्मती जरूर हूं. बचपन से ही सीखा है कि हिम्मत से बड़ा कोई हथियार नहीं,’’ फिर हंस कर बोलीं, ‘‘बस, अंगरेजी नहीं पढ़ी है.’’

चाची बड़े इत्मीनान से भीड़ का मुआयना करने लगीं. एकाएक उन्हें ठेले पर लदे बांस के लट्ठे दिखे. चाची ने उसे रोक कर एक लट्ठा खींच लिया और आंचल को कमर पर कसा और लट्ठे को एकदम झंडे की तरह उठा लिया. फिर चिल्ला कर बोलीं, ‘‘तुम गाड़ी वालों की यह कोई बात है कि जिधर जगह देखी, गाड़ी घुसा दी और सारी सड़क जाम कर दी है. हटो…हटो…हटो…पुलिस नहीं है तो सब शेर हो गए हो. क्या किसी को किसी की परवा नहीं?’’

पहले तो लोग अवाक् चाची को इस अंदाज से देखने लगे कि यह कौन सी बला आ गई. फिर कुछ चाची के पीछे हो लिए.

‘‘हां, चाची, वाह चाची, तू ही कुछ कर सकती है…’’ और थोड़ी ही देर में चाची के पीछे कितनों का काफिला खड़ा हो गया. मैं अवाक् रह गई.

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गलतसलत गाडि़यां घुसाने वाले सहम कर पीछे हट गए. चाची ने मेरा हाथ पकड़ा और बोलीं, ‘‘चल, धूप में जल कर कोयला हो जाएगी,’’ और बांस को झंडे की तरह लहराती, भीड़ को छांटती पूरे किलोमीटर का रास्ता नापती चाची निकल गईं. जाम तितरबितर हो चला था. कुछ मनचले चिल्ला रहे थे :

‘‘चाची जिंदाबाद…चाची जिंदाबाद.’’

चाची किसी नेता से कम न लग रही थीं. बस, अंगरेजी न जानती थीं. भीड़ से निकल कर मेरा हाथ छोड़ कर कहा, ‘‘यहां से चली जाएगी या घर पहुंचा दूं?’’

‘‘नहींनहीं,’’ मैं ने खिलखिला कर कहा, ‘‘मैं चली जाऊंगी पर एक बात कहूं.’’

‘‘क्या? यही न कहेगी तू कि कानवेंट की है, मुझे अंगरेजी नहीं आती?’’

‘‘अरे, नहीं चाची, पूरा दुलार टपका कर मैं ने कहा, ‘‘मैं जब बहू खोजूंगी तब लड़की का पैमाना सिर्फ अंगरेजी से नहीं नापूंगी.’’

चाची खिलखिला दीं, शायद कहना चाह रही थीं, ‘‘कहो, कैसी रही चाची?’’

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Bigg Boss 13: हौट इंग्लिश टीचर बनीं पंजाब की कैटरीना कैफ, उड़े सिद्धार्थ के होश

पंजाब इंडस्ट्री की मशहूर सिंगर और बिग बौस सीजन 13 की सबसे फेवरेट कंटस्टेंट शहनाज गिल को शुरू से ही लोग काफी पसंद कर रहे हैं. इस सीजन की सबसे एंटरटेनिंग कंटेंस्टेंट भी शहनाज गिल ही रही हैं. ना सिर्फ दर्शकों ने उन्हे पसंद किया है बल्कि बौलीवुड के भाईजान यानी बिग बौस शो के होस्ट सलमान खान खुद शहनाज से काफी इन्प्रेस हैं. पिछला हफ्ता शहनाज के लिए काफी मुश्किल भरा रहा क्योंकि इस बीच घर के अंदर काफी हंगामा दर्शकों को देखने मिला.

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हौट अंदाज में सबकी क्लास लगाएंगी शहनाज…

हाल ही में बिग बौस शो के मेकर्स ने एक प्रोमो रिलीज किया है जिसमें पंजाब की कैटरीना कैफ यानी शहनाज गिल को एक हौट टीचर की भूमिका निभानी है. बिग बौस द्वारा दिए गए इस टास्क का नाम है “बीबी क्लासरूम”. इस टास्क में शहनाज गिल खूब मजे लेती दिखाई देंगी और अपने हौट अंदाज से सबकी क्लास लगाएंगी.

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भड़क उठेंगे असीम रियाज और शेफाली जरीवाला…

प्रोमो देख के साफ पता लग रहा है कि शहनाद सबसे पहले अपने करीबी दोस्त पारस छाबड़ा के पास जाएंगी और उनके साथ जमकर फ्लर्ट करेंगी. इसके बाद एक एक करके सभी कंटेस्टेंट्स की क्लास लगाएंगी और सभी से उनसे जुड़ी नेगेटिविटी के बारे में पूछेंगी. इस दौरान असीम रियाज और शेफाली जरीवाला काफी भड़क जाएंगे और इस टास्क में हिस्सा लेने से साफ मना कर देंगे.

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ये 6 सदस्य हैं इस हफ्ते नोमिनेटिड…

इसी के चलते शहनाज गिल को कोई फर्क नहीं पड़ेगा और वे अपने नौटी अंदाज से टास्क आगे खेलती रहेगी. प्रोमो के हिसाब से असीम रियाज और शहनाज गिस के बीच आज के एपिसोड में काफी ज्यादा लड़ाई होती दिखाई देगी. आपको बता दें, इस हफ्ते घर से बेघर होने के लिए 6 सदस्य नोमिनेटिड हैं जिनमे से पारस छाबड़ा, शहनाज गिल, शेफाली जरीवाला, माहिरा शर्मा, आरती सिंह और हिन्दुस्तानी भाऊ का नाम शामिल है. अब देखने वाली बात ये होगी की इस हफ्ते किसका होगा इस घर से सफर खत्म यानी कौन होगा घर से बेघर.

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Bigg Boss 13: असीम को हुआ हिमांशी से प्यार, सबके सामने ऐसे करेंगे इजहार

बिग बौस सीजन 13 के घर में आए दिन कुछ ना कुछ नया दर्शकों को देखने को मिलता रहता है. जहां एक तरफ पिछले हफ्ते घर के अंदर काफी लड़ाई झगड़े हुए वहीं इस हफ्ते घर में प्यार भरा माहौल दिख रहा है. बीते दिनों बिग बौस ने सिद्धार्थ शुक्ला और रश्मि देसाई के सीरियल ‘दिल से दिल तक’ का एक वीडियो घर की स्क्रीन पर दिखाया और सिद्धार्थ और रश्मि को एक टास्क दिया जिसमें दोनों को एक दूसरे के साथ कुछ रोमांटिक पल बिताने थे और वहीं पंजाब की कैटरीना कैफ यानी शहनाज गिल को उन दोनों के प्यार भरे पल एक मोबाईल में रिकौर्ड करने थे.

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असीम करेंगे हिमांशी के सामने अपने प्यार का इजहार…

सिद्धार्थ और रश्मि ने काफी अच्छे ठंग से बिग बौस का ये टास्क पूरा किया और घर में काफी अच्छे से रोमांस किया. यहां तक की दोनों ने बिग बौस के घर के अंदर बने स्वीमिंग पूल में भी एक दूसरे के साथ रोमांस किया. अगर बात करें असीम रियाज और हिमांशी खुराना कि तो बिग बौस के मेकर्स ने ट्वीटर के जरिए फैंस को बताया कि आज के एपिसोड में असीम हिमांशी के सामने अपने प्यार का इजहार करेंगे.

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‘अगर प्यार है तो बोल दे ना’…

बीते कुछ एपिसोड्स में दर्शकों को असीम के इस प्यार के बारे में तक पता चला जब शेफाली जरीवाला ने असीम को ये कहा कि, ‘अगर प्यार है तो बोल दे ना’, लेकिन उस समय असीम ने शरमाते हुए कहा कि ‘ऐसा कुछ नहीं है और वो हिमांशी के कुछ नहीं बोलेगा’. लेकिन बिग बौस के मेकर्स से आई जानकारी के अनुसार आज के एपिसोड में असीम आरती सिंह को ये कहते नजर आएंगे कि वो हिमांशी खुराना से प्यार करते हैं.

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‘क्यूं होता है प्यार, ना तुम जानो ना हम’…

इतना ही नहीं बल्कि असीम हिमांशी के लिए एक गाना भी गाएंगे जिसके नाम है, ‘क्यूं होता है प्यार, ना तुम जानो ना हम’. जैसा कि आप सब को पता है कि हिमांशी खुराना इस बात का खुलासा पहले ही कर चुकी हैं कि वे पहले से ही रिलेशनशिप मे हैं, तो अब देखने वाली बात ये होगी कि आखिर असीम अपने प्यार को पाने के लिए किस हद तक जाएंगे और हिमांशी असीम के प्यार को अपनाएंगी या फिर दोनों घर के अंदर सिर्फ एक दोस्त बन कर ही रह जाएंगे.

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