धर्म के नाम पर चंदे का धंधा

धार्मिक कहानियां हमेशा ही लोगों को कामचोर और भाग्यवादी बनाने की सीख देती हैं. सभी धर्मों की कहानियों में यह बताया जाता है कि अमुक देवीदेवता को पूजने या पैगंबर की इबादत करने से दुनिया की सारी दौलत पाई जा सकती है.

इन कहानियों का असर युवा पीढ़ी यानी नौजवानों पर सब से ज्यादा पड़ता है. यही वजह है कि हमारे देश के नौजवान कोई कामधंधा करने के बजाय गणेशोत्सव, होली, दुर्गा पूजा, राम नवमी, मोहर्रम, क्रिसमस वगैरह त्योहारों पर जीजान लुटा देते हैं. ऐसे नौजवान धार्मिक कार्यक्रमों के बहाने जबरन चंदा वसूली को ही रोजगार मानने लगते हैं.

चंदा वसूली के इस धंधे में धर्म के ठेकेदारों का खास रोल रहता है और चंदे के धंधे के फलनेफूलने में नौजवान खादपानी देने का काम करते हैं. तथाकथित पंडेपुजारियों द्वारा दी गई जानकारी की बदौलत धार्मिक उन्माद में ये नौजवान अपना होश खो बैठते हैं.

धर्म के नाम पर चंदा वसूली के इस खेल में दबंगई भी दिखाई जाने लगी है. स्कूलकालेज के पढ़ने वाले छात्रों की टोली इस में अहम रोल निभाती है.

जनवरी, 2018 में जमशेदपुर के साकची के ग्रेजुएट कालेज में सरस्वती पूजा के नाम पर छात्र संगठन के लोगों ने चंदा न देने वाली छात्राओं के साथ मारपीट की थी. सितंबर, 2019 में भुवनेश्वर में गणेश पूजा के दौरान जबरन चंदा वसूली करने वाले 13 असामाजिक और उपद्रवी तत्त्वों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था.

दरअसल, त्योहारों के मौसम में चंदा वसूलने का धंधा खूब फलताफूलता है. हाटबाजारों की दुकानों, निजी संस्थानों और सरकारी दफ्तरों में भी इन की चंदा वसूली बेरोकटोक चलती रहती है.

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होली, गणेशोत्सव और दुर्गा पूजा के दौरान तो ये असामाजिक तत्त्व खुलेआम सड़क पर बैरियर लगा कर आनेजाने वाली गाडि़यों को रोक कर चंदा वसूली करते हैं. चंदा न देने पर गाडि़यों की हवा निकालने के साथ वाहन मालिकों के साथ गलत बरताव किया जाता है.

धर्म के नाम पर इकट्ठा किए गए चंदे के खर्च और उस के बंटवारे को ले कर कई बार ये नौजवान आपस में ही उल झ कर हिंसा पर उतारू हो जाते हैं.

10 अक्तूबर, 2019 को मध्य प्रदेश की गाडरवाला तहसील के गांव पिठवानी की घटना इस बात का जीताजागता सुबूत है. गांव में दुर्गा पूजा पर हर घर से चंदा इकट्ठा किया गया और दशहरे के बाद हुई मीटिंग में चंदे के हिसाबकिताब को ले कर नौजवानों में  झगड़ा हो गया. देखते ही देखते  झगड़ा इतना बढ़ गया कि 3 नौजवानों ने एक नौजवान को इस कदर पीटा कि उस की मौत हो गई.

धर्म के बहाने पुण्य कमाने वाले वे तीनों नौजवान इस समय जेल की सलाखों के पीछे हैं.

धर्म के नाम पर मौजमस्ती

धार्मिक त्योहारों पर चंदे के दम पर होने वाले बेहूदा डांस, लोकगीत और आरकेस्ट्रा के कार्यक्रमों में नशे का सेवन कर यही नौजवान मौजमस्ती करते हैं.

अनंत चतुर्दशी और दशहरा पर्व पर निकाले जाने वाले चल समारोह और प्रतिमा विसर्जन कार्यक्रमों में धर्म की दुहाई देने वाले ये नौजवान डीजे के गानों की मस्ती में इस कदर डूबे रहते हैं कि उन्हें होश ही नहीं रहता है.

12 सितंबर, 2019 को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में  गणेश प्रतिमा के विसर्जन के लिए गए नौजवानों में से 13 की मौत की कहानी तो यही बयां करती है. तालाब में डूबने से मौत की नींद सोए सभी लड़के 15 से 30 साल की उम्र के थे. अंधश्रद्धा और अंधभक्ति के रंग में रंगे ये नौजवान रात के 3 बजे 2 नावों पर सवार हो कर प्रतिमा विसर्जन के लिए तालाब के बीच में गए थे.

गणेशोत्सव के नाम पर की गई मस्ती और हुड़दंग में नाव का संतुलन बिगड़ गया और पुण्य कमाने गए लड़के अपनी जान से हाथ धो बैठे.

कुछ इसी तरह का एक और वाकिआ राजस्थान के धौलपुर में 8 अक्तूबर, 2019 को हुआ था. दशहरे के दिन आयोजकों की टोली के कुछ नौजवान दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए चंबल नदी गए हुए थे. दोपहर 2 बजे नदी की तेज धार में प्रतिमा विसर्जन के बहाने मौजमस्ती कर रहे 2 नौजवान बह गए, जिन्हें बचाने की कोशिश में 8 दूसरे नौजवानों की भी मौत हो गई.

इसी दिन मध्य प्रदेश के देवास के सोनकच्छ थाना क्षेत्र के गांव खजूरिया में भी तालाब में प्रतिमा विसर्जन के दौरान नौजवानों की डूबने से मौत हो गई थी.

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इन घटनाओं में हुई मौतें तो यही साबित करती हैं कि पढ़नेलिखने या कामधंधा खोजने की उम्र में ये नौजवान धार्मिक कट्टरता में पड़ कर अपनी जिंदगी से ही हाथ धो

रहे हैं. देश के पढ़ेलिखे नौजवान कामधंधा न कर के किस कदर धार्मिक आयोजन की बागडोर संभालने में अपना भला सम झ रहे हैं.

दरअसल, देश में बेरोजगारी का आलम यह है कि पिछले कई सालों से नौजवानों को रोजगार के मौके नहीं मिल पा रहे हैं. लाखों की तादाद में नौजवान बेकार घूम रहे हैं. सरकार केवल नौजवानों को रोजगार देने का लौलीपौप दिखा कर उन के वोट बटोर लेती है और फिर नौजवानों को राष्ट्र प्रेम, धारा 370, मंदिरमसजिद, गौहत्या रोकने के मसलों में उल झा देती है.

यही वजह है कि नौजवान धार्मिक कार्यक्रमों के बहाने जबरन चंदा वसूली को रोजगार मान कर 10-15 दिन मौजमस्ती से काट लेना चाहते हैं.

गांवदेहातों में यज्ञ, हवन, रामकथा, भागवत कथा, प्रवचन देने का चलन इतना बढ़ा है कि वहां हर महीने इस तरह के आयोजन होते रहते हैं. ऐसे आयोजनों में एक हफ्ते में 2 से 5 लाख रुपए का खर्चा आ ही जाता है.

भक्तों को काम, क्रोध, लोभ, मोह से दूर रहने का संदेश देने वाले ये उपदेशक और कथावाचक लाखों रुपयों के चढ़ावे की रकम और कपड़ेलत्ते ले कर अपना कल्याण करने में लगे रहते हैं.

हालात ये हैं कि गांवों में बच्चों को पढ़ाई के लिए अच्छे स्कूल नहीं हैं. लोगों के इलाज की बुनियादी सहूलियतें नहीं हैं. रातदिन खेतों में काम करने वाले किसानमजदूरों की खूनपसीने की कमाई का एक बड़ा हिस्सा ऐसे कार्यक्रमों में खर्च हो जाता है.

धर्म के पुजारी पापपुण्य का डर दिखा कर कथा, प्रवचन और भंडारे के नाम से उन का पैसा ऐंठने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं.

पत्रकार बृजेंद्र सिंह कुशवाहा बताते हैं कि गांवदेहात में आएदिन ढोंगी संतमहात्मा यज्ञ और मंदिर बनाने के नाम पर लोगों से चंदा वसूली करने आते हैं. धर्म की महिमा बता कर चंदे की मोटी रकम लूटने वाले ये पाखंडी बाबा आलीशान गाडि़यों में घूम कर चंदे का कारोबार करते हैं.

कोई भी धर्म आदमी को कर्मवीर बनने की सीख नहीं देता. धर्म के स्वयंभू ठेकेदारों द्वारा लिखी गई धार्मिक कहानियों में यही बताया गया है कि देवीदेवताओं की कथापूजन करने से बिना हाथपैर चलाए सभी काम पूरे हो जाते हैं.

पंडेपुजारी, मौलवी और पादरियों ने भी लोगों को इस कदर धर्मांध बना दिया है कि लोग उन की बातों पर आंखें मूंद कर अमल करने में ही अपनी भलाई सम झते हैं, तभी तो लोग धार्मिक कार्यक्रमों में बढ़चढ़ कर चंदा देने में संकोच नहीं करते हैं.

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जनता के चुने गए प्रतिनिधि, जो बड़े पदों पर बैठे हैं, वे धर्म के ठेकेदारों को मौज करने की छूट दिए हुए हैं. हमारे द्वारा चुनी गई सरकारें भी धार्मिक पाखंड में बराबर की भागीदार हैं. सरकारें भी यही चाहती हैं कि लोग इसी तरह धर्म के मसलों में उल झे रहें. ये धर्म की कहानियां इतनी बार इतने सारे लोगों के मुंह से कही जाती हैं कि ये ही सच लगने लगती हैं.

देश के बड़ेबड़े मठों, मंदिरों वगैरह में रखी गई दानपेटियों से निकली धनराशि और भगवान को चढ़ावे में भेंट किए बेशकीमती धातु के गहने चंदे का गुणगान करते नजर आते हैं. इन नौजवानों को यह बात सम झ में क्यों नहीं आती कि आज तक पूजापाठ कर के न तो किसी को नौकरी मिली है और न ही इस से किसी का पेट भरा है. जिंदगी में कुछ करगुजरने के लिए जीतोड़ मेहनत करनी पड़ती है.

मौजूदा दौर में जरूरत इस बात की है कि धर्म के आडंबरों में पैसा फूंकने के बजाय लोग बच्चों की पढ़ाईलिखाई में पैसा खर्च कर उन्हें इस काबिल बनाएं कि वे आजीविका के लिए नौकरी पा सकें या उन्नत तरीकों से खेतीकिसानी या दूसरे कामधंधे कर पैसों की बचत करना सीखें. धर्म के नाम पर दी गई चंदे की रकम से केवल धर्म के ठेकेदारों का ही भला होता है.

धर्म के दुकानदार तो बहुत हैं, पर कर्म के दुकानदारों का टोटा है. वे यदाकदा ही दिखते हैं, इसीलिए धर्म की जयजयकार होती है.

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Bigg Boss 13: खतरे में पड़ी सिद्धार्थ की कैप्टेंसी, असीम ने चली ये चाल

टेलीविजन इंडस्ट्री के सबसे पौपुलर शो बिग बौस सीजन 13 काफी रोमांचक होता दिखाई दे रहा है. जहा एक तरफ दर्शकों को लड़ाई झगड़े देखने को मिल रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ घर में होते मस्ती मजाक भी खूब एंटरटेन कर रहे हैं. बीते एपिसोड में घर के अंदर 3 वाइल्डकार्ड एंट्रीज का स्वागत हुआ है जिसमें मधुरिमा तुली, अरहान खान और शेफाली बग्गा शामिल हैं. अरहान खान और शेफाली बग्गा को तो आप जानते ही होगे पर आपको बता दें, मधुरिमा तुली विशाल आदित्य सिंह की एक्स गर्लफ्रेंड हैं और दोनो के बीच 36 का आंकड़ा है.

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असीम सिद्धार्थ की कैप्टेंसी को करेंगें boycott…

हाल ही में बने घर के नए कैप्टन सिद्धार्थ शुक्ला की कैप्टेंसी पर काफी सवाल खड़े हो रहे हैं. जैसे जैसे असीम रियाज सिद्धार्थ के खिलाफ जाते जा रहे हैं वैसे वैसे वे एक भी मौका नहीं छोड़ रहे सिद्धार्थ के खिलाफ चाल चलने के लिए. बीते एपिसोड में असीम विशाल आदित्य सिंह को ये कहते हैं कि अगर सिद्धार्थ हमारा लग्जरी बजट नहीं लौटाते तो वे सब मिलकर घर का कोई भी काम नहीं करेंगे यानी कि सब मिलकर सिद्धार्थ की कैप्टेंसी को boycott कर देंगे.

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असीम के फैंस ने किया सपोर्ट…

जैसे ही असीम रियाज ने सिद्धार्थ की कैप्टेंसी को boycott करने का फैसला लिया तभी से ही असीम के फैंस उन्हें उनके इस फैसले पर पूरी तरह से सपोर्ट करते दिखाई दिए. असीम के फैंस ने ट्वीट के जरिए उन्हें सपोर्ट किया, चलिए आपको दिखाते हैं कुछ ट्वीट्स…

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अहरान खान ने किया रश्मि देसाई को प्रोपोज…

बता दें, बीते एपिसोड में हुईं वाइल्डकार्ड एंट्रीज के चलते अहरान खान ने रश्मि देसाई को प्रोपोज किया और अपने दिल की बात बोली तो वहीं दूसरी तरफ शेफाली बग्गा ने घर में आते ही शहनाज गिल से माफी मांगी और शहनाज ने भी बिग बौस का इग्नोर करने का आदेश भूलकर शेफाली बग्गा को गले लगा लिया.

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Bigg Boss 13: घर में एंट्री के साथ ही शुरू हुई विशाल और मधुरिमा की लड़ाई, देखें Video

जैसा कि आप सब जानते हैं कि बिग बौस का सीजन 13 बाकी सीजन के मुकाबले काफी सफल रहा है और इस बात की घोषणां किसी और ने नहीं बल्कि खुद बिग बौस ने कुछ दिन पहले ही की थी. बिग बौस शो के फैंस के लिए एक और खुशखबरी है कि बिग बौस सीजन 13 को 5 हफ्तों का एक्सटेंशन मिल गया है. बीते एपिसोड में आपने देखा घरवालों ने 3 वाइल्डकार्ड एंट्रीज का स्वागत काफी अच्छे से किया जिसमें से अहरान खान, शेफाली बग्गा और मधुरिमा तुली शामिल थे.

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अहरान खान ने किया रश्मि देसाई को प्रोपोज…

इन तीनों की एंट्री से पहले बिग बौस ने सभी घरवालों को एक टास्क दिया था जिसमें सभी कंटेस्टेंट्स को इन 3 वाइल्डकार्ड एंट्रीज को इग्नोर करना था. इसी के चलते अहरान खान ने रश्मि देसाई को प्रोपोज किया और अपने दिल की बात बोली तो वहीं दूसरी तरफ शेफाली बग्गा ने घर में आते ही शहनाज गिल से माफी मांगी और शहनाज ने भी बिग बौस का इग्नोर करने का आदेश भूलकर शेफाली बग्गा को गले लगा लिया. खैर, अरहान खान और शेफाली बग्गा तो पहले बिग बौस के घर में रह चुके हैं पर सभी दर्शकों की नजर इस समय मधुरिमा तुली पर टिकी हुई है.

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विशाल मधुरिमा को देख हुए काफी हैरान…

दरअसल, मधुरिमा तुली कंटेस्टेंट विशाल आदित्य सिंह की एक्स गर्लफ्रेंड रह चुकी हैं और दोनो ने साथ में डांस रिएलिटी शो नच बलिए सीजन 9 में हिस्सा लिया था. इस दौरान दोनो में काफी लड़ाइयां हुईं और यही वजह है कि दर्शक ये देखने के लिए एक्साइटिड थे कि विशाल आदित्य सिंह मधुरिमा को देख कैसे रिएक्ट करेंगे. पहले पहले तो दोनो ने एक दूसरे से कोई बात नहीं की, वो बात अलग है कि विशाल उन्हें देख काफी हैरान हे गए थे और बिग बौस से बात करने की गुजारिश कर रहे थे.

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मैं घर में खुद के लिए आई हूं, तुम्हारे लिए नहीं…

इसके बाद खुद मधुरिमा तुली विशाल से बात करने आती हैं और उनसे कहती हैं कि घर में आने से पहले उन्होनें मीडिया के सामने उनके बारे में गलत क्यों बोला. इसी के चलते दोनो की काफी बहस हो जाती है और विशाल कहते हैं कि उन्हें उनसे फर्क नहीं पड़ता तो वहीं, मधुरिमा कहती हैं कि वो घर में खुद के लिए आई हैं न कि उनके लिए. अब देखने वाली बात ये होगी कि क्या ये दोनो अपने बीते झगड़े सुलझा पाएंगे या फिर दोनो के बीच लड़ाई और बढ़ जाएगी.

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गहरी पैठ

अपने कैरियर की शुरुआत से ठाकरे परिवार ने यदि कोई सही फैसला लिया है, तो अब भारतीय जनता पार्टी के साथ बिना मुख्यमंत्री बने सरकार न बनाने का फैसला लिया है. वरना तो यह पार्टी बेमतलब में कभी दक्षिण भारतीयों, कभी बिहारियों, कभी हिंदू पाखंडवादियों के नाम पर हल्ला मचाती रहती थी. शिव सेना का असर महाराष्ट्र में गहरे तक है. महाराष्ट्र की मूल जनता जो पहले खेती करती थी, छोटी कारीगरी करती थी, बाल ठाकरे की नेतागीरी में ही अपना वजूद बना पाई थी.

अफसोस यह है कि 1966 में जन्म से ही शिव सेना भगवा दास की तरह बरताव कर रही है. उस ने वे काम किए जो भारतीय जनता पार्टी सीधे नहीं कर सकती थी. उस ने तोड़फोड़ की नीति अपनाई जिस से वह भगवा एजेंडे का दमदार चेहरा बनी, पर हमेशा भारतीय जनता पार्टी की हुक्मबरदार थी. महाराष्ट्र के मराठे लोग खेती करने वालों में से आते हैं. उन्होंने ही महाराष्ट्र को ऊंचाइयों पर पहुंचाया था. शिवाजी ने ही औरंगजेब से तब दोदो हाथ किए थे, जब उस की सत्ता को चुनौती देने वाला कोई न था. मुगल राज को खत्म करने में मराठों की सेना का बड़ा हाथ था.

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लेकिन शिवाजी के बाद मराठों की नेतागीरी फिर पुरोहितपेशवाओं के हाथों में आ गई. वे ही मराठा साम्राज्य को चलाने लगे थे. 1966 में बाल ठाकरे ने जिस भी वजह से शिव सेना बनाई हो, उस को इस्तेमाल किया गया. उस के लोग महाराष्ट्र के गांवगांव में हैं. वे ही कारखानों की यूनियनों में  झंडा गाड़े रहे. कम्यूनिस्ट आंदोलन को उन्होंने ही हराया, लेकिन वे हरदम चाह कर या अनजाने में सेवक बने रहे. जब मुख्यमंत्री पद एक बार मिला था तो भी भाजपा की कृपा से.

अब 2019 में उद्धव ठाकरे अड़ गए कि वे अपनी कीमत लेंगे. वे केवल मजदूर नहीं हैं जो भाजपा की पालकी उठाएंगे. वे खुद पालकी में बैठेंगे. शिव सेना का मुख्यमंत्री पर हक जमाना सही है, क्योंकि भाजपा की जीत शिव सेना की वजह से हुई है. 2014 में भी भाजपा और शिव सेना अलगअलग लड़ीं, पर भाजपा को 122 सीटें मिली थीं और शिव सेना को 63. भाजपा ने 2019 में मई में लोकसभा चुनावों के बाद एक फालतू का सा मंत्रालय दिल्ली कैबिनेट में दे कर बता दिया था कि उद्धव ठाकरे या नीतीश कुमार की हैसियत क्या है.

कांग्रेस के लिए इस हालत में शिव सेना से समझौते का फैसला करना आसान नहीं है, क्योंकि भाजपा हर तरह से शिव सेना को फुसला सकती है. 6-8 महीने में शिव सेना को मजबूर कर सकती है कि वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी या कांग्रेस से किसी बात पर  झगड़ कर फिर भाजपा के खेमे में आ जाए. 11 दिसंबर को कांग्रेस ने फैसले में देर लगाई तो शिव सेना को निराशा हुई, पर जो यूटर्न शिव सेना ले रही है वह आसानी से पचने वाला नहीं है. शिव सेना को यह जताना होगा कि अब तक उस को गुलामों की तरह इस्तेमाल किया गया है. वह महाराष्ट्र की राजा नहीं थी, केवल मुख्य सेवक थी. उम्मीद करें कि यह अक्ल उन और पार्टियों को भी आएगी जो भाजपा के अश्वमेध घोड़े के साथ चल कर अपने को चक्रवर्ती सम झ रही हैं. वे केवल दास हैं, जैसे उन के वोटर हैं.

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देश के सामने असली परेशानी मंदिरमसजिद नहीं है, बेरोजगारी है. यह बात दूसरी है कि आमतौर पर धर्म के नाम पर लोगों को इस कदर बहकाया जा सकता है कि वे रोजीरोटी की फिक्र न कर के अपनी मूर्ति के लिए जान भी दे दें और अपने पीछे बीवीबच्चों को रोताकलपता छोड़ जाएं. जब देश के नेता मंदिर की जीत पर जश्न मना रहे थे, उस समय 15 साल से 35 साल की उम्र के 58 करोड़ लोगों में नौकरी की फिक्र बढ़ रही थी.

इन में से काफी नौकरी के लिए तैयार से हैं और काफी नौकरी पाए हुए हैं. जिन के पास नौकरी है उन्हें पता नहीं कि यह नौकरी कब तक टिकेगी. जिन के पास नहीं है वे अपना पैसा या समय गलियों, खेतों में बेबात गुजारते हैं. इस देश में हर साल 1 से सवा करोड़ नए जवान लड़केलड़कियां पहले नौकरी ढूंढ़ते हैं. क्या इतनी नौकरियां हैं?

देश में बड़े कारखानों की हालत बुरी है. सरकार की सख्ती से बैंकों ने कर्ज देना बंद सा कर दिया है. कभी प्रदूषण के मामले को ले कर, कभी टैक्स के मामले को ले कर कभी सस्ते चीनी सामान के आने से भारतीय बड़े उद्योग न के बराबर चल रहे हैं, लगना तो दूर. अखबार हर रोज उद्योगों, बैंकों, व्यापारों के घाटे के समाचारों से भरे हैं.

छोटे उद्योगों, कारखानों और दुकानों में काफी नौकरियां निकलती हैं. देश के 6 करोड़ छोटे कामों में 14 करोड़ को रोजगार मिला हुआ है, पर इन में से 5 करोड़ लोग तो अपना रोजगार खुद करते हैं. ये खुद काम करने वाले हर तरह की आफत सहते हैं. इन के पास न तो काम करने की सही जगह होती है, न ही कोई नया काम करने का हुनर. इन 6 करोड़ छोटे काम देने वालों में 10 से ज्यादा लोगों को काम देने वाले सिर्फ 8 लाख यूनिट हैं.

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इन 14 करोड़ लोगों को जो काम मिला है वह बड़ी कृपा है पर उन के पास न नया हुनर है, न उन की कोई खास तमन्ना है. वे जेल व कैदियों का सा काम करते हैं. वे इतना न खुद कमा पाते है, न कमा कर मालिक को दे पाते हैं कि कुछ बचत हो, बरकत हो, काम बड़ा हो सके. 50 करोड़ लोग जहां नौकरी पाने के लिए खड़े हों वहां ये 6 करोड़ काम देने वाले क्या कर सकते हैं?

सरकारी नौकरियां देश में कुल 3-4 करोड़ हैं. इस का मतलब हर साल बस 30-40 लाख नए लोगों को काम मिल सकता है. आरक्षण इसी 30-40 लाख के लिए है और उसी को खत्म करने के लिए मंदिर का स्टंट रचा जा रहा है, ताकि लोगों का दिमाग, आंख, कान, मुंह बेरोजगारी से हटाया जा सके और जो नौकरियां हैं, वे भी ऊंचे लोग हड़प जाएं और चूं तक न हो.

दलितों को तो छोडि़ए वे बैकवर्ड जो भगवा गमछा पहने घूम रहे हैं, यह नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर कोई भी मंदिर उन की नौकरी को पक्का कैसे करेगा. उन्हें लगता है कि भगवान सब की सुनेगा. भगवान सुनता है, पर उन की जो भगवान की झूठी कहानी बनाते हैं, सुनाते हैं, बरगलाते हैं.

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‘भाभीजी’ ड्रग्स बेचती हैं

जीहां, ये ‘भाभीजी’ ड्रग्स, ब्राउन शुगर और अफीम बेचती हैं. पटना के जक्कनपुर इलाके की रहने वाली राधा देवी ड्रग्स के धंधेबाजों के बीच ‘भाभीजी’ के नाम से मशहूर हैं. पटना, मुजफ्फरपुर, बोधगया से ले कर रांची तक में ‘भाभीजी’ का धंधा फैला हुआ है. पटना के स्कूलकालेजों, कोचिंग सैंटरों और होस्टल वाले इलाकों के चप्पेचप्पे पर ‘भाभीजी’ के एजेंट फैले हुए हैं.

बच्चों और नौजवानों को नशे का आदी बनाने में लगी ‘भाभीजी’ और उन के गुरगे पिछले 6 सालों से इस गैरकानूनी और खतरनाक धंधे को चला रहे थे. 16 अक्तूबर, 2019 को पुलिस ने ‘भाभीजी’, उन के शौहर और 6 गुरगों को दबोच लिया.

जक्कनपुर पुलिस ने 16 अक्तूबर, 2019 को राधा देवी उर्फ ‘भाभीजी’ और उन के शौहर गुड्डू कुमार को उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वे आईसीआईसीआई बैंक से रुपए निकाल रहे थे. दोनों के पास से 9 लाख, 67 हजार, 790 रुपए और 20 ग्राम ब्राउन शुगर और 6 स्मार्ट फोन बरामद किए गए. उस 20 ग्राम ब्राउन शुगर की कीमत 5 लाख रुपए आंकी गई.

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पटना के सिटी एसपी जितेंद्र कुमार ने बताया कि राधा देवी उर्फ ‘भाभीजी’ और गुड्डू कुमार ब्राउन शुगर के स्टौकिस्ट हैं. पुलिस पिछले कई सालों से इन दोनों को रंगे हाथ पकड़ने की कोशिश में लगी हुई थी, पर वे हर बार पुलिस को चकमा दे कर भाग निकलते थे.

गुड्डू कुमार ने पुलिस को बताया कि ब्राउन शुगर के सप्लायर को 12 लाख रुपए देने के लिए वह बैंक से पैसे निकाल रहा था. उसी दिन सप्लायर ब्राउन शुगर की खेप ले कर आने वाला था. सप्लायर नेपाल और खाड़ी देशों से आता था.

‘भाभीजी’ और गुड्डू कुमार को आईसीआईसीआई बैंक के जिस खाते से रुपए निकालते पकड़ा गया था, उस खाते में अभी 17 लाख, 46 हजार रुपए और हैं. कंकड़बाग के आंध्रा बैंक के खाते में भी उन दोनों के 9 लाख, 94 हजार रुपए जमा हैं. इन दोनों ने ब्राउन शुगर के धंधे से करोड़ों रुपए की कमाई की है और कई मकान और फ्लैट भी खरीद रखे हैं.

राधा देवी उर्फ ‘भाभीजी’ और गुड्डू कुमार को दबोचने में लगी पुलिस की टीम 16 अक्तूबर को जक्कनपुर इलाके में ब्राउन शुगर की खरीदार बन कर पहुंची.

जक्कनपुर के इंदिरानगर इलाके के रोड नंबर-4 में शिवपार्वती कम्यूनिटी हाल से सटे किराए के मकान में जब पुलिस पहुंची, तो वहां 5 लोग ब्राउन शुगर की पुडि़या बनाने में लगे हुए थे.

पुलिस ने उन पांचों को ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार कर लिया. करीमन उर्फ राजेश यादव, सोनू, गणेश कुमार, संतोष कुमार और पप्पू को पुलिस ने पकड़ा. सभी की उम्र 22 से 30 साल के बीच है.

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पिछले चंद महीनों के दौरान ड्रग्स का धंधा करने वाले 14 लोगों को पुलिस जक्कनपुर, मालसलामी, गर्दनीबाग, कंकड़बाग, रामकृष्णानगर वगैरह इलाकों से गिरफ्तार कर चुकी है. 14 सितंबर, 2019 को भी जक्कनपुर इलाके में पुलिस ने 65 लाख रुपए की ब्राउन शुगर के साथ 5 लोगों को पकड़ा था.

गिरफ्तार किए गए सभी लोग ‘भाभीजी’ के ही गुरगे थे. तब ‘भाभीजी’ और गुड्डू कुमार पुलिस की आंखों में धूल  झोंक कर भाग निकलने में कामयाब हो गए थे.

‘भाभीजी’ की देखरेख में ही ब्राउन शुगर खरीदने, उस की पुडि़या बनाने और बेचने का धंधा चलता था. एक पुडि़या 500 रुपए में बेची जाती थी. नारकोटिक ड्रग्स ऐंड साइकोट्रौपिक सब्सटैंस ऐक्ट की धारा 22 सी के तहत केस दर्ज किया गया है.

करोड़ों की दौलत होने के बाद भी ये मियांबीवी खानाबदोश की जिंदगी जीते थे. वे किसी एक जगह टिक कर नहीं रहते थे. पुलिस को चकमा देने के लिए अपना ठिकाना और मोबाइल नंबर बदलते रहते थे. पुलिस साल 2012 से ही दोनों शातिरों को पकड़ने में लगी हुई थी, पर कामयाबी नहीं मिल रही थी. साल 2012 में ही दोनों के खिलाफ गर्दनीबाग थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी.

‘भाभीजी’ ने पुलिस को बताया कि पश्चिम बंगाल और  झारखंड से ब्राउन शुगर पटना लाई जाती है. एक किलो ब्राउन शुगर की कीमत 3 करोड़ रुपए होती है. घटिया क्वालिटी की ब्राउन शुगर एक करोड़ रुपए में एक किलो मिलती है.

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल और  झारखंड में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती होती है. अफीम से ही ब्राउन शुगर बनाई जाती है.

ड्रग करंसी का इस्तेमाल, खतरनाक: डीजीपी

बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे मानते हैं कि ड्रग को करंसी के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. जिस्म के कारोबार में भी ड्रग करंसी खूब चल रही है. ड्रग्स के खिलाफ समाज को जहां जागरूक होने की जरूरत है, वहीं नशा मुक्ति मुहिम को मजबूत बनाना होगा.

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नशा दिल और दिमाग दोनों पर खतरनाक असर डालता है और उस के बाद बलात्कार, हिंसा जैसे कई अपराध करने के लिए उकसाता है.

पुलिस ड्रग्स के खिलाफ आएदिन धड़पकड़ करती रहती है, लेकिन समाज के सहयोग के बगैर ड्रग्स के धंधे को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता है.

अफीम की खेती छोड़ी, गेंदा लगाया

झारखंड राज्य के नक्सली एरिया खूंटी के लोगों ने अफीम की खेती से तोबा कर गेंदा के फूल उपजाने शुरू किए हैं. तकरीबन 200 परिवार गेंदे की खेती कर मुनाफा कमा रहे हैं.

आजकल धर्म का व्यापार अफीम के व्यापार की तरह रातदिन बढ़ रहा है और वहां गेंदे के फूलों की खपत बहुत होती है.

कुछ साल पहले तक इस इलाके में पोस्त की गैरकानूनी खेती होती थी और पोस्त से ही अफीम बनाई जाती है. नक्सली बंदूक का डर दिखा कर गांव वालों से जबरन अफीम की गैरकानूनी खेती कराते थे. पिछले साल अगस्त महीने में खूंटी में 14 लाख गेंदे के पौधे लगाए गए थे. आज उन से तकरीबन सवा करोड़ रुपए मुनाफा होने का अंदाजा है. सुनीता नाम की महिला किसान ने 2,000 रुपए में गेंदे के 5,000 पौधे खरीदे थे. एक पौधे से 35 से 40 फूल निकलते हैं.

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Bigg Boss 13: वाइल्डकार्ड एंट्री ले अरहान ने किया प्यार का इजहार, रश्मि ने किया इंग्नोर

जैसा कि आप सब जानते हैं कि बिग बौस का सीजन 13 बाकी सीजन के मुकाबले काफी सफल रहा है और इस बात की घोषणां किसी और ने नहीं बल्कि खुद बिग बौस ने कुछ दिन पहले ही की थी. बिग बौस शो के फैंस के लिए एक और खुशखबरी है कि बिग बौस सीजन 13 को 5 हफ्तों का एक्सटेंशन मिल गया है. हाल ही में आ रही खबरों के अनुसार विशाल आदित्य सिंह की गर्लफ्रेंड मधुरिमा तुली, शेफाली बग्गा और अरहान खान शो में वाइल्डकार्ड एंट्री लेने वाले थे. लेकिन बिग बौस ने खुद इस खबर को हकीकत में बदल दिया है.

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बिग बौस के घर में होगी धमाकेदार वाइल्डकार्ड एंट्री…

जी हां, बिग बौस शो के मेकर्स ने आज के एपिसोड का एक प्रोमो रिलीज किया है जिसमें मधुरिमा तुली, शेफाली बग्गा और अरहान खान बिग बौस के घर में धमाकेदार एंट्री लेंगे. इस दौरान घरवालों को भी एक टास्क दिया गया है कि घर में रह रहे सदस्यों को इन तीनों को इग्नोर करना है. इसी के चलते विशाल आदित्य सिंह मधुरिमा तुली को और शहनाज गिल शेफाली बग्गा को इग्नोर नहीं कर पाएंगे पर रश्मि देसाई अहरान खान को इग्नोर करने में कामयाब रहेंगी.

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अरहान खान करेंगे रश्मि देसाई को प्रोपोज…

इन सब के चलते सबसे खास बात जो सामने आई है वो ये है कि अरहान खान घर के अंदर एंट्री मारते ही रश्मि देसाई को प्रोपोज करने वाले हैं और वे खुद रश्मि देसाई को बताते दिखाई दे रहे हैं कि वे उनके लिए एक रिंग लेकर आए हैं. ये सब देखने के बाद इतना को तय है कि आने वाले एपिसोड्स में घर के अंदर खूद हंगामे नजर आने वाले हैं.

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कैसे करेंगे दर्शकों को एंटरटेन…

अब देखने वाली बात ये होगी कि ये तीन वाइल्ड कार्ड एंट्रीज यानी मधुरिमा तुली, शेफाली बग्गा और अरहान खान कैसे दर्शकों को एंटरटेन करेंगे और घर के अंदर क्या क्या बदलाव लाएंगे. एक और बात जो गौर करने वाली है वो ये है कि क्या रश्मि देसाई अरहान खान के प्यार को अपना पाएंगी और इस पर सिद्धार्थ शुक्ला क्या रिएक्ट करेंगे.

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Bigg Boss 13: सिद्धार्थ और असीम ने किया शहनाज का मुंह काला, देखें वीडियो

बिग बौस के घर में आए दिन कुछ ना कुछ नया होता दर्शकों को दिखाई दे रहा है और यही वजह है कि बिग बौस के इतिहास में बिग बौस का सीजन 13 बाकी सीजन के मुकाबले काफी आगे पहुंच गया है और इसका खुलासा खुद बिग बौस ने शो के चलते किया था. बीते वीकेंड के वौर में जहां एक तरफ शो के होस्ट सलमान खान ने सभी कंटेस्टेंट की क्लास लगाई तो वहीं दूसरी तरफ उन्होनें सभी घरवालों के साथ खूब मस्ती मजाक भी किया. इसी के चलते बिग बौस के घर में फिल्म ‘पति पत्नी और वो’ की स्टार कास्ट यानी कार्तिक आर्यन, भूमी पेडनेकर और अनन्या पांडे ने भी घर के अंदर एंट्री मारी और खूब मस्ती की.

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सिद्धार्थ और असीम ने किया शहनाज का मुंह काला…

इस दौरान घर के अंदर खूब हंगामा होता दर्शकों को देखने को मिला और वे इसलिए क्योंकि सभी कंटेंस्टेंट को बिग बौस द्वारा एक टास्क दिया गया था जिसमें कार्तिक आर्यन घरवालों से कुछ सवाल करेंगे और इसमें से दो लोगों को आपसी सहमति से फैसला लेते हुए किसी एक सदस्य का मुंह काला करना था. इस टास्क में सबसे चौंका देने वाला सीन ये था कि सिद्धार्थ शुकला और असीम रियाज दोनो ने मिलकर आपसी सहमती से पंजाब की कैटरीना कैफ यानी शहनाज गिल को गद्दार कहकर उनका मुंह काला कर दिया.

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सिद्धार्थ ने क्यों मानी असीम की बात…

किसी को भी इस बात की उम्मीद नहीं थी कि सिद्धार्थ शुक्ला असीम रियाज की बात मानते हुए अपनी इतनी अच्छी दोस्त शहनाज गिल का मुंह काला कर देंगे. सिद्धार्थ और शहनाज की खट्टी-मीठी नोंक झोंक दर्शकों को खूब एंटरटेन कर रही थीं पर ऐसे में सिद्धार्थ का असीम की बात मान शहनाज को गद्दार कह उनका मुंह काला करना किसी को भी पसंद नहीं आया. शहनाज खुद इस बात से हैरान थीं कि सिद्धार्थ ऐसा कैसे कर सकते हैं.

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शहनाज कैसे देंगी सिद्धार्थ को जवाब…

दरअसल, जैसे ही कार्तिक आर्यन ने घर के अंदर एंट्री मारी तो शहनाज गिल तो जैसे सांतवे आसमान पर थीं और ऐसे में कार्तिक आर्यन के सामने ही सिद्धार्थ शुक्ला और असीम रियाज ने शहनाज गिल का मुंह काला कर दिया. अब देखने वाली बात ये होगी कि शहनाज कैसे सिद्धार्थ और असीम के इस हरकत का जवाब देंगी.

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शादी: भाग 3

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उन की बातें सुन कर सुरेश मुसकरा दिए कि दोनों मियांबीवी एक ही थैली के चट्टेबट्टे हैं. मियां ज्यादा पी कर होश खो बैठा है और बीवी मीनमेख के बावजूद खाए जा रही है.

सुरेश ने सुकन्या से कहा, ‘‘खाना शुरू हुआ है, तो थोड़ा खा लेते हैं, नहीं तो निकलने की सोचते हैं.’’

‘‘इतनी जल्दी क्या है, अभी तो कोई भी नहीं जा रहा है.’’

‘‘पूरे दिन काम की थकान, फिर फार्म हाउस पहुंचने का थकान भरा सफर और अब खाने का लंबा इंतजार, बेगम साहिबा घर वापस जाने में भी कम से कम 1 घंटा तो लग ही जाएगा. चलते हैं, आंखें नींद से बोझिल हो रही हैं, इस वाहन चालक पर भी कुछ तरस करो.’’

‘‘तुम भी बच्चों की तरह मचल जाते हो और रट लगा लेते हो कि घर चलो, घर चलो.’’

‘‘मैं फिर इधर सोफे पर थोड़ा आराम कर लेता हूं, अभी तो वहां कोई नहीं है.’’

‘‘ठीक है,’’ कह कर सुकन्या सोसाइटी की अन्य महिलाआें के साथ बातें करने लगी और सुरेश एक खाली सोफे पर आराम से पैर फैला कर अधलेटे हो गए. आंखें बंद कर के सुरेश आराम की सोच रहे थे कि एक जोर का हाथ कंधे पर लगा, ‘‘सुरेश बाबू, यह अच्छी बात नहीं है, अकेलेअकेले सो रहे हो. जश्न मनाने के बजाय सुस्ती फैला रहे हो.’’

सुरेश ने आंखें खोल कर देखा तो गुप्ताजी दांत फाड़ रहे थे.

मन ही मन भद्दी गाली निकाल कर प्रत्यक्ष में सुरेश बोले, ‘‘गुप्ताजी, आफिस में कुछ अधिक काम की वजह से थक गया था, सोचा कि 5 मिनट आराम कर लूं.’’

‘‘उठ यार, यह मौका जश्न मनाने का है, सोने का नहीं,’’ गुप्ताजी हाथ पकड़ कर सुरेश को डीजे फ्लोर पर ले गए जहां डीजे के शोर में वर और वधू पक्ष के नजदीकी नाच रहे थे, ‘‘देख नंदकिशोर के ठुमके,’’ गुप्ताजी बोले पर सुरेश का ध्यान सुकन्या को ढूंढ़ने में था कि किस तरीके से अलविदा कह कर वापस घर रवानगी की जाए.

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सुकन्या सोसाइटी की महिलाओं के साथ गपशप में व्यस्त थी. सुरेश को नजदीक आता देख मिसेज रस्तोगी ने कहा, ‘‘भाई साहब को कह, आज तो मंडराना छोड़ें, मर्द पार्टी में जाएं. बारबार महिला पार्टी में आ जाते हैं.’’

‘‘भाभीजी, कल मैं आफिस से छुट्टी नहीं ले सकता, जरूरी काम है, घर भी जाना है, रात की नींद पूरी नहीं होगी तो आफिस में काम कैसे करूंगा. अब तो आप सुकन्या को मेरे हवाले कीजिए, नहीं तो उठा के ले जाना पड़ेगा,’’ सुरेश के इतना कहते ही पूरी महिला पार्टी ठहाके में डूब गई.

‘‘क्या बचपना करते हो, थोड़ी देर इंतजार करो, सब के साथ चलेंगे. पार्टी का आनंद उठाओ. थोड़ा सुस्ता लो. देखो, उस कोने में सोफे खाली हैं, आप थोड़ा आराम करो, मैं अभी वहीं आती हूं.’’

मुंह लटका कर सुरेश फिर खाली सोफे पर अधलेटे हो गए और उन की आंख लग गई.

नींद में सुरेश ने करवट बदली तो सोफे से नीचे गिरतेगिरते बचे. इस चक्कर में उन की नींद खुल गई. चंद मिनटों की गहरी नींद ने सुरेश की थकान दूर कर दी थी. तभी सुकन्या आई, ‘‘तुम बड़े अच्छे हो, एक नींद पूरी कर ली. चलो, खाना शुरू हो गया है.’’

सुरेश ने घड़ी देखी, ‘‘रात का 1 बजा था. अब 1 बजे खाना परोस रहे हैं.’’

खाना खाते और फिर मिलते, अलविदा लेते ढाई बज गए. कार स्टार्ट कर के सुरेश बोले, ‘‘आज रात लांग ड्राइव होगी, घर पहुंचतेपहुंचते साढ़े 3 बज जाएंगे. मैं सोचता हूं कि उस समय सोने के बजाय चाय पी जाए और सुबह की सैर की जाए, मजा आ जाएगा.’’

‘‘आप तो सो लिए थे, मैं बुरी तरह थक चुकी हूं. मैं तो नींद जरूर लूंगी… लेकिन आप इतनी धीरे कार क्यों चला रहे हो?’’

‘‘रात के खाली सड़कों पर तेज रफ्तार की वजह से ही भयानक दुर्घटनाएं होती हैं. दरअसल, पार्टियों से वापस आते लोग शराब के नशे में तेज रफ्तार के कारण कार को संभाल नहीं पाते. इसी से दुर्घटनाएं होती हैं. सड़कों पर रोशनी पूरी नहीं होती, सामने से आने वाले वाहनों की हैडलाइट से आंखों में चौंध पड़ती है, पटरी और रोडडिवाइडर नजर नहीं आते हैं, इसलिए जब देरी हो गई है तो आधा घंटा और सही.’’

पौने 4 बजे वे घर पहुंचे, लाइट खोली तो रोहिणी उठ गई, ‘‘क्या बात है पापा, पूरी रात शादी में बिता दी. कल आफिस की छुट्टी करोगे क्या?’’

सुरेश ने हंसते हुए कहा, ‘‘कल नहीं, आज. अब तो तारीख भी बदल गई है. आज आफिस में जरूरी काम है, छुट्टी का मतलब ही नहीं. अगर अब सो गया तो समझ लो, दोपहर से पहले उठना ही नहीं होगा. बेटे, अब तो एक कप चाय पी कर सुबह की सैर पर जाऊंगा.’’

‘‘पापा, आप कपड़े बदलिए, मैं चाय बनाती हूं,’’ रोहिणी ने आंखें मलते हुए कहा.

‘‘तुम सो जाओ, बेटे, हमारी नींद तो खराब हो गई है, मैं चाय बनाती हूं,’’ सुकन्या ने रोहिणी से कहा.

चाय पीने के बाद सुरेश, सुकन्या और रोहिणी सुबह की सैर के लिए पार्क में गए.

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‘‘आज असली आनंद आएगा सैर करने का, पूरा पार्क खाली, ऐसे लगता है कि हमारा प्राइवेट पार्क हो, हम आलसियों की तरह सोते रहते हैं. सुबह सैर का अपना अलग ही आनंद है,’’ सुरेश बांहें फैला कर गहरी सांस खींचता हुआ बोला.

‘‘आज क्या बात है, बड़ी दार्शनिक बातें कर रहे हो.’’

‘‘बात दार्शनिकता की नहीं, बल्कि जीवन की सचाई की है. कल रात शादी में देखा, दिखावा ही दिखावा. क्या हम शादियां सादगी से नहीं कर सकते? अगर सच कहें तो सारा शादी खर्च व्यर्थ है, फुजूल का है, जिस का कोई अर्थ नहीं है.’’

तभी रोहिणी जौगिंग करते हुए समीप पहुंच कर बोली, ‘‘पापा, बिलकुल ठीक है, शादियों पर सारा व्यर्थ का खर्चा होता है.’’

सुकन्या सुरेश के चेहरे को देखती हुई कुछ समझने की कोशिश करने लगी. फिर कुछ पल रुक कर बोली, ‘‘मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा है. आज सुबह बापबेटी को क्या हो गया है?’’

‘‘बहुत आसान सी बात है, शादी में सारे रिश्तेदारों को, यारों को, पड़ोसियों को, मिलनेजुलने वालों को न्योता दिया जाता है कि शादी में आ कर शान बढ़ाओ. सब आते हैं, कुछ कामधंधा तो करते नहीं…उस पर सब यही चाहते हैं कि उन की साहबों जैसी खातिरदारी हो और तनिक भी कमी हो गई तो उलटासीधा बोलेंगे, जैसे कि नंदकिशोर के बेटे की शादी में देखा, हम सब जम कर दावत उड़ाए जा रहे थे और कमियां भी निकाल रहे थे.’’

तभी रोहिणी जौगिंग का एक और चक्कर पूरा कर के समीप आई और बोलने लगी तो सुकन्या ने टोक दिया, ‘‘आप की कोई विशेष टिप्पणी.’’

यह सुन कर रोहिणी ने हांफते हुए कहा, ‘‘पापा ने बिलकुल सही विश्लेषण किया है शादी का. शादी हमारी, बिरादरी को खुश करते फिरें, यह कहां की अक्लमंदी है और तुर्रा यह कि खुश फिर भी कोई नहीं होता. आखिर शादी को हम तमाशा बनाते ही क्यों हैं. अगर कोई शादी में किसी कारण से नहीं पहुंचा तो हम भी गिला रखते हैं कि आया नहीं. कोई किसी को नहीं छोड़ता. शादी करनी है तो घरपरिवार के सदस्यों में ही संपन्न हो जाए, जितना खच?र् शादी में हम करते हैं, अगर वह बचा कर बैंक में जमा करवा लें तो बुढ़ापे की पेंशन बन सकती है.’’

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‘‘देखा सुकन्या, हमारी बेटी कितनी समझदार हो गई है. मुझे रोहिणी पर गर्व है. कितनी अच्छी तरह से भविष्य की सोच रही है. हम अपनी सारी जमापूंजी शादियों में खर्च कर देते हैं, अकसर तो उधार भी लेते हैं, जिस को चुकाना भी कई बार मुश्किल हो जाता है. अपनी चादर से अधिक खर्च जो करते हैं.’’

‘‘क्या बापबेटी को किसी प्रतियोगिता में भाग लेना है, जो वहां देने वाले भाषण का अभ्यास हो रहा है या कोई निबंध लिखना है.’’

‘‘काश, भारत का हर व्यक्ति ऐसा सोचता.

सुरक्षित चलें और सुरक्षित रहें

हमारे देश में यातायात के साधनों में नित्य प्रगति आ रही है, जीवन में  शहरों से गाँव की दूरियां निरंतर घाट रही है ,लेकिन इसके साथ यातायात में होने वाले दुर्घटनाओं की संख्या में भी निरंतर वृद्धि हो रहा है.  हमें समाज में जागरूपता लेकर तय समय के अंदर इस दुर्घटनाओं को रोकना होगा.  ताकि हम सुरक्षित चले और  सुरक्षित रहे. सड़क सुरक्षा के लिए यातायात पुलिस तो अपना काम कर रही रही है , हमें भी जगरूप रहना होगा. यातायात नियमों और कानूनों का पालन करें और सड़क दुर्घटनाओं से खुद को और अपने परिवारों को बचाएं. अन्य लोगों को भी सड़क सुरक्षा नियमों से अवगत कराना हमारी सड़कों को सुरक्षित बना सकता है.

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यातायात नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि हर मनुष्य की जान अपने परिवार के लिए बहुत जरूरी है देश के लिए जरूरी है कई सारी सड़क दुर्घटनाओं में हमारे देश के ऐसे महान व्यक्तित्व भगवान को प्यारे हो गए हैं. जिनकी क्षतिपूर्ति आज तक कोई नहीं कर पाया है . इसलिए सड़क दुर्घटनाओं में प्रत्येक महा कई हजार की संख्या में इंसानों की जान जा रही है .

तेज गति से वाहन चलाना शराब पीकर वाहन चलाना सीट बेल्ट ना लगाना दो पहिया वाहन पर हेलमेट ना लगाना यातायात नियमों का पालन करना इन सब कारणों से कई घरों के दिए बुझ गए हैं . जो मनुष्य के लिए पश्चाताप के अलावा कुछ नहीं छोड़ जाते इसलिए मेरा अपना मानना है. यातायात नियमों का पालन कानून से डर के नहीं बल्कि स्वयं की जिम्मेदारी समझकर अपना फर्ज समझते हुए ,ठीक उसी प्रकार करना चाहिए जैसे मनुष्य भगवान की भक्ति अपना फर्ज समझकर करता है.

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ड्रिंक और  ड्राइव

हमारे देश में शराब पी कर गाड़ी चलना आम बात लगता है. लेकिन इससे होने वाले दुर्घटनाओं का आकंड़ा चौकाने वाला  हैं. आंकड़ों से पता चलता है कि‍ एक्‍सि‍डेंट का सबसे प्रमुख कारण शराब पीकर ड्राइविंग करना है. भारत में इसका आंकड़ा दुनि‍या में सबसे ज्‍यादा है, जहां हर साल करीबन डेढ़ लाख लोग रोड एक्‍सि‍डेंट में मारे जाते हैं. इसमें से 70 फीसदी  मामलों में इसकी वजह शराब पीकर गाड़ी चलाना रहता है.

ड्रिंक करने के उपरांत मनुष्य का मस्तिष्क एवं उसका शरीर ड्राइव करने के लायक नहीं रहता हैं , डिसबैलेंस रहता है ,इसलिए दुर्घटना के प्रबल चांस रहते हैं.  मुख्य कारण यही है, कि  इंसान को जब अपनी जान प्यारी है ,तो उसे सामने वाले की जान की भी उतनी ही वैल्यू समझनी चाहिए. इसलिए कभी भी ड्रिंक करने के उपरांत ड्राइवर नहीं करनी चाहिए.  मनुष्य की जान अनमोल हैं.

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सीट बेल्ट और सुरक्षित ड्राइव

सीट बेल्ट लगाना वाहन चलाते समय नितांत आवश्यक है, जिससे वाहन में बैठे चालक एवं सवारियों की जान सुरक्षित है यदि सड़क दुर्घटना होती है तो मनुष्य अर्थात उसमे बैठा व्यक्ति सीट बेल्ट के कारण सीट से ही चिपका रहता है अचानक से झटका लगने के कारण वह व्यक्ति आगे डेस्क बोर्ड अथवा सीसे में नहीं लगता उसके सीने एवं सिर में चोट आने से बस जाती है जिससे मनुष्य की जान सड़क दुर्घटना में बचने के प्रबल चांस रहते हैं

ओवर स्पीड से बचे

ओवर स्पीड से बचना कोई लापरवाही नहीं बल्कि समझदारी का परिचायक हैं.  समझदार इंसानों ने कहा है ,दुर्घटना से देर भली अर्थात हम अपने मंजिल पर कुछ समय विलंब से पहुंच जाएं,  परंतु सुरक्षित पहुंच जाएं.  यह जरूरी है ,सुरक्षित पहुंचना बहुत आवश्यक हैं.  दुर्घटना ओवर स्पीड के कारण अक्सर होती हैं.  जिनसे वाहन में बैठे व्यक्तियों की जान तक चली जाती है.

अपना वाहन क्षतिग्रस्त हो जाता है , सामने वाले व्यक्ति की जान को भी खतरा रहता है. उनकी भी जान चली जाती है,  हर  इंसान के जान की वैल्यू है.   इसलिए ओवर स्पीड चलना, स्वयं की जान को खतरे में डालना एवं दूसरों की जान से खेलना बिल्कुल अनुचित है.

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वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग न करे

वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग करना अपनी और  सामने वाले की जान से खेलना है. किसी भी सूरत में वाहन चलाते समय मोबाइल फोन पर बातें न करे और नहीं  ईयर फोन लगाकर सॉन्ग सुनने.  इससे मनुष्य अथवा वाहन चालक अपनी सामने वाले की जान से खेलता है, क्योंकि ईयर फोन लगाने से मनुष्य का ध्यान उस सॉन्ग के वर्णन एवं ख्यालों में रहता है, पीछे वह सामने से आने वाले वाहन के होरन पर ध्यान नहीं रहता है . जिससे सड़क दुर्घटनाएं बढ़ती है.  जान तक चली जाती हैं.

वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करने से भी मनुष्य का ध्यान वाहन चलाने से हट जाता है एवं मोबाइल पर चल रही बातों एवं सामने से जो दूसरा व्यक्ति दूसरी तरफ से मोबाइल पर बात कर रहा होता है. उस पर चला जाता है,उसकी बातों पर ध्यान चला जाता है चालक वाहन तो चला रहा होता है, परंतु हमारा मस्तिष्क पूर्णरूपेण हमारे शरीर के साथ नहीं रहता है, इसलिए सड़क दुर्घटना होने के प्रबल चांस रहते हैं और ऐसी घटनाएं बहुत सारी हुई है. जिनका उदाहरण भारतीय इतिहास में लिखा जा चुका है.

अभी हाल में ही  उत्तरप्रदेश के सहारनपुर में बस ड्राइवर द्वारा मोबाइल पर बात करते समय, बस को खाई में गिरा देना.  जिससे कई व्यक्तियों की मृत्यु हुई.  ऐसी कई सारी उत्तर प्रदेश में अन्य राज्यों में दुर्घटनाएं हुई है मात्र एक व्यक्ति चालक की लापरवाही से कई सारे जाने चली गई है प्रत्येक जान अनमोल है इसलिए कभी भी स्वयं की व अन्य व्यक्ति की जान से ना खेले. वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग बिलकुल न करें.

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(हर एक जीवन का महत्व हैं. सड़क सुरक्षा उपायों का अभ्यास करना पूरे जीवन में सभी लोगों के लिए बहुत अच्छा और सुरक्षित है. सड़क पर चलते या चलते समय सभी को दूसरों का सम्मान करना चाहिए और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए. -उत्तर प्रदेश पुलिस  के सब इंस्पेक्टर वरुण पँवार )

फांसी से बचाने के लिए सालाना खर्च करते हैं 36 करोड़ रुपए

हर देश का अपना अलगअलग कानून होता है. कहींकहीं, खासतौर पर अरब देशों में कानून बहुत सख्त है. पाकिस्तान को ही ले लीजिए, वहां एक बच्ची से रेप और हत्या के दोषी को 2 महीने में फांसी की सजा सुना दी गई, लेकिन हमारे यहां देश के सब से चर्चित मामले निर्भया रेप और हत्या के मामले में दोषी साबित हो जाने के बाद भी मुजरिमों को जेल में पाला जा रहा है.

अगर ऐसा अरब देशों में हुआ होता तो मुजरिमों को अब से 6 साल पहले फांसी हो चुकी होती. सख्त कानून के चलते अरब देशों में यह भी कानून है कि अगर कोई व्यक्ति किसी की हत्या कर देता है और शरिया कानून के अंतर्गत उसे फांसी की सजा हो जाती है तो फांसी से बचने के लिए उस के पास एक ही उपाय होता है, पीडि़त परिवार से सौदेबाजी.

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अगर पीडि़त परिवार उस से इच्छित रकम ले कर उसे माफ कर देता है तो अदालत फांसी की सजा को रद्द कर देती है. लेकिन सौदेबाजी की यह रकम इतनी बड़ी होती है, जिसे चुकाना आसान नहीं होता. इस रकम को वहां ब्लड मनी कहा जाता है.

दुबई में रहने वाले भारतीय मूल के बड़े बिजनैसमैन एस.पी.एस. ओबराय ऐसे व्यक्ति हैं, जो लोगों को फांसी से बचाने के लिए प्रतिवर्ष 36 करोड़ रुपए खर्च करते हैं. यानी फांसी पाए लोगों को बचाने के लिए ब्लड मनी खुद देते हैं. अब तक वह 80 से ज्यादा युवाओं को फांसी से बचा चुके हैं, जिन में से 50 से ज्यादा भारतीय थे. ये ऐसे लोग थे, जो काम की तलाश में सऊदी अरब गए थे और हत्या या अन्य अपराधों में फंसा दिए गए.

2015 में भारत के पंजाब से अबूधाबी जा कर काम करने वाले 10 युवकों से झड़प के दौरान पाकिस्तानी युवक की हत्या हो गई. अबूधाबी की अल अइन अदालत में केस चला, जहां 2016 में दसों युवकों को फांसी की सजा सुनाई गई. बाद में जब इस सिलसिले में याचिका दायर की गई तो अदालत ब्लड मनी चुका कर सजा को माफी में बदलने के लिए तैयार हो गई.

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सौदेबाजी में मृतक का परिवार 6 करोड़ 50 लाख रुपए ले कर माफी देने को तैयार हुआ. यह ब्लड मनी चुकाई एस.पी.एस. ओबराय ने.

इस तरह दसों युवक फांसी से बच गए. ओबराय साहब यह काम सालों से करते आ रहे हैं और उन के अनुसार जीवन भर करते रहेंगे.

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