छोटेछोटे गुनाहों पर भारी रकम वसूल करना आज किसी भी कोने में खड़े वरदीधारी के लिए वैसा ही आसान हो गया है जैसा पहले सूनी राहों में ठगों और डकैतों के लिए हुआ करता था.

ट्रैफिक को सुधारने की जरूरत है, इस में शक नहीं है पर ट्रैफिक सुधारने के नाम पर कागजों की भरमार करना और किसी को भी जब चाहे पकड़ लेना एक आपातकाल का खौफ पैदा करना है. नियमकानून बनने चाहिए क्योंकि देश की सड़कों पर बेतहाशा अंधाधुंध टेढ़ीमेढ़ी गाडि़यां चलाने वालों ने अपना पैदायशी हक मान रखा था पर जिस तरह का जुर्माना लगाया गया है वह असल में उसी सोच का नतीजा है जिस में बिल्ली को मारने पर सोने की बिल्ली ब्राह्मण को दान में देने तक का विधान है.

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