धीरेधीरे मुझे सेक्स टौएज की लत लग गई, कृपया बताएं कि सेक्स टौएज कितना सुरक्षित है?

सवाल-

मैं 21 वर्षीय युवती हूं और होस्टल में रहती हूं. मेरी रूममेट मेरी बहुत अच्छी दोस्त बन चुकी है. हम कभीकभी मोबाइल पर एकसाथ पोर्न मूवी भी देखते हैं. अभी कुछ दिनों पहले मेरी रूममेट सैक्स टौएज ले कर आई. उस ने इस का उपयोग मुझे भी करने को कहा. पहले तो मुझे संकोच हुआ पर धीरेधीरे मुझे इस की लत लग गई. कृपया बताएं कि सैक्स टौएज कितना सुरक्षित है? कहीं मैं कुछ गलत तो नहीं कर रही?

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जवाब-

अगर हाइजीन का ध्यान रखा जाए तो सैक्स टौएज के इस्तेमाल से कोई गंभीर खतरा नहीं है. मगर बाजार में चोरीछिपे मिलने वाले सैक्स टौएज के कई रेंज भारत सहित और कई देशों में प्रतिबंधित और गैरकानूनी है.

बेहतर तो यही होगा कि अभी आप अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें. मोबाइल पर पोर्न मूवी देखने की लत भी आप की छूट सकती है, बशर्ते सुबह उठने की आदत डालें और अच्छा साहित्य, पत्रपत्रिकाएं पढ़ें. संभव हो तो अपनी रूममेटसे भी दूरी बनाने के लिए कमरा बदल लें.

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झाड़ – फूंक और ‘पागल’ बनाने वाला बाबा!

आज भी 21 वी शताब्दी के इस समय में झाड़-फूंक तंत्र मंत्र पर लोग आस्था रखते हैं और अनपढ़ बाबाओं के चक्कर में आकर अपनी अस्मत, पैसे दोनों लुटा बैठते हैं. छत्तीसगढ़ आदिवासी ग्रामीण बाहुल्य प्रदेश है और यहां जागरूकता के अभाव में यही खेल चल रहा है. सरकार और समाज को जागरूक करने वाले चुनिंदा लोग प्रयासरत है. मगर यह सब ऊंट के मुंह में जीरे के समान है. छत्तीसगढ़ में घटित कुछ मामले ऐसे रहे हैं-

पहला मामला-

जिला कवर्धा कबीरधाम में एक महिला एक तंत्र मंत्र के साधक के चक्कर में पड़कर अपनी इज्जत गंवा बैठने के बाद होश में आई तब तक बहुत देर हो चुकी थी परिजनों ने घर से निकाल दिया महिला ने आत्महत्या कर ली.

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दूसरा मामला-

सरगुजा के अंबिकापुर में एक एक शिक्षित महिला तंत्र-मंत्र के चक्कर में पड़कर लाखों रुपए लुटा बैठी बाद में पुलिस ने तांत्रिक को गिरफ्तार किया.

तीसरा मामला-कोरबा जिला के कदौरा थाना अंतर्गत ग्राम रामपुर में एक तांत्रिक आया और महिलाओं को तंत्र मंत्र के नाम ठगने लगा गांव के जागरूक लोगों ने तांत्रिक को पकड़कर उस की पोल खोल दी और पुलिस के हवाले किया.

एक नाबालिक की दास्तां

छत्तीसगढ़ के न्यायधानी बिलासपुर में‌ “झाड़फूंक” के नाम पर नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले आरोपी बाबा को पुलिस ने आखिरकार दबोच लिया है. जैसे ही उसके खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ उसे पता चला कि मेरे खिलाफ अपराध दर्ज हो गया है आरोपी बाबा अपने ठिकाने से फरार हो गया, और लगातार बिलासपुर जिले के अलावा पड़ोसी चांपा जांजगीर जिले के गांव में जाकर अपना ठिकाना बना ले रहा था. जगह लगातार बदल रहा था. पुलिस भी तत्परता पूर्वक पुलिस  टीम  बना जांच में जुटी थी. लोकेशन ट्रेस करने पर आरोपी का पता चला. इसके बाद कोटमी सोनार, जिला चांपा जांजगीर में  घेराबंदी कर कथित बाबा को गिरफ्तार किया गया.

बताते हैं कि यह बाबा झाड़-फूंक के नाम पर कथित रूप से नाबालिक लड़कियों पर निगाह रखता था और उनका अध्यक्षता करने में यकीन रखता था जाने कितने लोगों की अस्मत के साथ खेलने वाला या बाबा आज जेल के सीखचों कों के पीछे है.

पुलिस ने हमारे संवाददाता को बताया कि यह घटनाक्रम जुलाई 2019 का है जब  तबीयत खराब रहने पर नाबालिग अपने परिजनों के साथ बलौदा, जांजगीर-चांपा स्थित सैय्यद मीरा अली दातार मजार में झाड़ फूंक कराने पहुंची थी, यहां पर आरोपी ने नाबालिग को “झाड़ फूंक” कर जल्दी ठीक हो जाने की बात कहकर विश्वास में लिया और ग्राम लुतरा, जिला बिलासपुर में डरा धमका कर करीब एक महीने तक इलाज के नाम पर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता रहा उसका दैहिक शोषण करता रहा. जब नाबालिक लड़की विरोध करती तो किसी परिजन को बताने पर झाड़ फूंक कर “पागल” करने की धमकी दिया करता था तथा परिवार को बदनाम करने एवं जान से मारने की धमकी भी देता रहा, जिससे पीड़िता डर कर दुष्कर्म की बात किसी को नही बताने में अपना भला समझ रही थी.

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तन पिपासु बाबा!

कुछ समय बाद  जब वह अपने घर ले जायी गई तब  “आरोपी” उसके घर में आकर झाड़ फूंक करने के बहाने मौका पाकर शारीरिक शोषण करता रहा.

अंततः हिम्मत कर पीडिता ने बाबा का संपूर्ण चरित्र और घटना के बारे में अपने परिजनों को बताया, जिसके बाद परिजनों ने उसकी खूब पिटाई की तो वह भाग खड़ा हुआ परिजनों ने थाना में आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई. जिस पर आरोपी के विरूद्ध छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला के थाना सीपत में अपराध कमांक 396/2020  धारा 376,506 भादवि व 4, 6 पोक्सो एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया. ऐसे बाबाओं की दस्तान  को जानने समझने वाले और मामले के गंभीरता को महसूस करते हुए थाना प्रभारी जे.पी. गुप्ता ने बाबा को जेल के सीखचों में भेजने के लिए एक टीम गठित कर आरोपी का खोजबीन प्रारंभ कराई. मगर आरोपी अपने ठिकाने से फरार हो गया. आरोपी का मोबाईल नंबर प्राप्त कर साईबर सेल के माध्यम से लोकेशन पता किया गया जो आरोपी जगह बदल-बदल कर अलग-अलग गांव में छिप रहा था तथा भागने के फिराक में था, जिसे कोटमी सोनार जिला चांपा जांजगीर के पास के गांव से घेराबंदी कर पकड़ा गया. आरोपी शाकीर अंसारी बाबा उर्फ हब्बू मौलवी से पूछताछ करने पर उसने बालिका के साथ अपराध घटित करना स्वीकार किया. आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायायिक रिमाण्ड पर  जेल भेजा गया है.

चाइल्ड पॉर्नोग्राफी का संजाल

छत्तीसगढ़ राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के शहरों में लगातार “चाइल्ड पोर्नोग्राफी” के मामलों मैं आश्चर्यजनक रूप से तेजी देखी जा रही है. पुलिस द्वारा भी लगातार कार्रवाई की जा रही है. छत्तीसगढ़ के रायपुर में चाइल्ड पोर्नोग्राफी का एक और वीडियो अपलोड किया गया . इस पर गोल बाजार थाना, रायपुर पुलिस ने प्राथमिक रपट दर्ज की है. खास बात यह कि इस दफा वीडियो वाईफाई के जरिये अपलोड किया जा रहा है. परिणाम स्वरूप आरोपियों की तलाश करने में पुलिस के पसीने निकल रहे हैं . छत्तीसगढ़ की राजधानी  रायपुर में “चाइल्ड पोर्नोग्राफी” के अब तलक बारह प्रकरण दर्ज हो चुके हैं, जिसमें से दस कथित आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार करके कड़ी कार्रवाई की है.

छत्तीसगढ़ में चाइल्ड पोर्नोग्राफी का संजाल कुछ इस तरह फैला है कि आरोपी  लगातार हाईटेक टेक्नोलॉजी का उपयोग कर वीडियो अपलोड कर रहे है. खास तकनीक की बात यह है कि इसमें कभी वीडियो शेयर कर तो कभी वाईफाई का इस्तेमाल कर वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड किया जा रहा है. परिणाम स्वरूप अपराधियों को पता लगाने में पुलिस हलाकान परेशान ज्यादा होती है.

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हमारे पुलिस सूत्रों के अनुसार छत्तीसगढ़ में 30 से ज्यादा मामलों में गिरफ्तारी ऐसे मामलों में की गई है. उपरोक्त मामले में बंजारी मार्केट के एक युवक ने इंटरनेट कनेक्शन से अश्लील वीडियो सोशल मीडिया में पोस्ट किया . इसे कई लोगों को फॉरवर्ड भी किया गया. इसमें एक “बालिका” की अश्लील क्लिपिंग है. चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामले में  प्रदेश में कार्रवाई की जा रही है. पुलिस  प्रदेश में 30 से ज्यादा मामलों में गिरफ्तारी भी कर चुकी है.

यहां यह जानना जरूरी होगा कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने छत्तीसगढ़ पुलिस को 80 पोर्न वीडियो की रिपोर्ट भेजी थी,जो सोशल मीडिया में वायरल हुई थी. इन 80 वीडियो को राज्य के नंबर से पोस्ट किया गया था. इसमें 12 मोबाइल नंबर रायपुर के थे, जबकि 40 मोबाइल नंबर दूसरे राज्य के पाए गए उन्हें संबंधित राज्यों की पुलिस को भेज दिया गया है. पुलिस जहां इस मामले में गम भी दिखाई देती है वही उसके सामने चुनौतियां दोहरी हो जाती हैं जब समाज में जागरूकता की कमी के कारण कानून के भय के ना होने के कारण निरंतर चाइल्ड पोर्नोग्राफी जारी दिखाई देती है.

किशोरों की संदिग्ध भूमिका

छत्तीसगढ़ की राजधानी में एक छात्र को अश्लील वीडियो अपलोड करने के आरोप में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया  है. उसने  एक बच्चे की अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड की थी. जिसे बहुतेरे लोगो द्वारा देखा और शेयर किया गया. बताया जा रहा है की पुलिस ने यह कार्रवाई नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो से मिली जानकारी के आधार पर की है.

पुलिस द्वारा बताए गए तथ्यों के अनुसार, टाटीबंध, राय पुर निवासी युवक रवि कुमार ( बदला हुआ नाम)   खरोरा स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी में बीबीए द्वितीय वर्ष का छात्र है.उसने  एक बच्चे का अश्लील वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड किया था.जो काफी वायरल हुआ था.

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एनसीआरबी की टीम ऐसे लोगों पर नजर रखे हुए थी और उनके आईपी अड्रेस ट्रैक कर रही थी. टीम ने प्रदेश में लगभग 40 लोगों को चिन्हित किया है जिन्होंने पोर्नोग्राफी को वायरल किया है. गिरफ्तार युवक के फ़ोन के आईपी एड्रेस से ही उसके लोकेशन का पता लगाकर उसे गिरफ्तार किया गया. अब पुलिस बाकी के मामलों की भी छानबीन कर रही है. इस तरह कुल मिलाकर के युवाओं का इसमें शामिल होना उनकी वर्कर संदिग्ध भूमिका का सामने आना दोनों ही चिंता का सबब है.

सोशल मीडिया का दुरुपयोग जारी आहे

दरअसल, जबसे सोशल मीडिया का आगाज हुआ है चाइल्ड पॉर्नोग्राफी के मामलों में तेजी आ गई है जिसे रोक पाना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने है.

छत्तीसगढ़ की रायपुर पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म में अश्लील वीडियो  अपलोड करने वाले एक आरोपी को  गिरफ्तार किया है. आरोपी पर यह कार्रवाई एनसीआरबी (NCRB) से मिले मोबाइल नंबर के आधार पर रायपुर की कोतवाली पुलिस ने की है.आरोपी का नाम पुलिस अधिकारियों द्वारा कैलाशपुरी निवासी प्रकाश राज (बदला हुआ नाम) है. आरोपी ने  सोशल मीडियो में वीडियो अपलोड किया था.

यह है पूरा मामला

एनसीआरबी ने सोशल मीडिया में अश्लील वीडियो अपलोड करने वाले मोबाइल नंबर धारको की डिटेल सभी प्रदेशों को भेजी थी. छत्तीसगढ़ पुलिस को 80 मोबाइल नंबरों का पता चला था, जिससे सोशल मीडिया में अश्लील वीडियो अपलोड किया गया था. प्रदेश में इन नंबरों के आधार पर 11वीं कार्रवाई हुई है.  गिरफ्त में आए आरोपी ने बच्चे का अश्लील वीडियो  सोशल मीडिया में अपलोड किया था. चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर सामाजिक कार्यकर्ता इंजीनियर रमाकांत श्रीवास विश्लेषण करते हुए बताते हैं कि किशोर जो युवा होने की दहलीज पर पांव रखने की अवस्था मैं होते हैं उन्हें ऐसे समय में उन्हें शिक्षित एवं कानून की जानकारी देना अनिवार्य है. सरकार को चाहिए कि पाठ्यक्रम में सोशल मीडिया और अन्य महत्वपूर्ण मसले पर विधि सम्मत सामग्री शामिल करें. अन्यथा युवा वर्ग यह गलती करता रहेगा और समाज में चाइल्ड पोर्नोग्राफी जैसा नासूर बना रहेगा.

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बने ‘नीरो कोरोना’ : रिपोर्ट पॉजिटिव भी नेगेटिव भी!

कोरोना जैसी वैश्विक महामारी को लेकर, आपने लापरवाही का ऐसा घटनाक्रम कहीं नहीं देखा होगा. आइए! आपको ले चलते हैं आज छत्तीसगढ़ – जहां भूपेश बघेल की सरकार है. जहां कोरोना नाम मात्र को नहीं था और आज कोरोना जयपुर, इंदौर, भोपाल रांची से भी आगे निकल रहा है.

जी हां! यह कमाल यहां डॉक्टरों ने दिखाया है की एक पेशेंट की दो रिपोर्ट आ गई – एक में बताया कोरोना नेगेटिव और दूसरे में कोरोना पॉजिटिव. है ना कमाल की बात.

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यहां छत्तीसगढ़ में सब कुछ संभव है.क्योंकि यहां मुखिया भूपेश बघेल का प्रशासनिक अश्व कहे जाने वाली व्यवस्था पर जरा भी अंकुश नहीं है. एक समय में जब छत्तीसगढ़ में कोरोना वायरस दूर-दूर तक दिखाई नहीं देता था. तब की हुई लापरवाही ने आज छत्तीसगढ़ को कोरोना वायरस की खंदक की लड़ाई के बीच ला खड़ा किया है. इसका खामियाजा यहां की आवाम झेल रही है. और सरकार केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखकर के रुपए पैसों की मदद मांग रही है. यह दृश्य देखकर बेहद कोफ्त होती है कि छत्तीसगढ़ किस तरह लूज पुंज हाथों में आकर तबाही की ओर बढ़ रहा है. जिसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है यह एक मामला -जब एक युवक की कोरोना पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों रिपोर्ट आज सार्वजनिक हो करके सुर्खियों में है. और आम जनता सवाल पूछ रही है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी! छत्तीसगढ़ में यह क्या हो रहा है और आप इस पर क्या एक्शन करने जा रहे हैं?

बेवजह मारा गया युवक!

सबसे दुखद स्थिति यह है कि बिलासपुर के “अपोलो अस्पताल” ने पॉजिटिव बताकर उसी के मुताबिक़  उपचार  किया और युवा मरीज की अंततः  तड़प-तड़प कर मौत हो गई.

दूसरी तरफ उसी युवक को-

“सिम्स” ने बताया निगेटिव. संपूर्ण घटनाक्रम इस प्रकार है कि अपोलो अस्पताल बिलासपुर में मनेंद्रगढ़ निवासी शुभम कुमार यादव नामक जिस युवक का कोविड-19 के पॉजिटिव मरीज के रूप में इलाज किया जा रहा था. उसी मरीज के कोरोना वायरस कोविड-19 की कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट को सिम्स द्वारा नेगेटिव बताया  है . अब, किस रिपोर्ट को सही मानें और किसे गलत…यह सवाल मनेंद्रगढ़ के मृतक शुभम कुमार यादव के परिजनों को हैरान कर रहा है. और हैरानी की बात ही है की अपोलो जैसा प्रतिष्ठित अस्पताल उस मरीज को कोविड-19 का पॉजिटिव बताकर इलाज कर रहा था जिसकी टेस्ट रिपोर्ट को छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस (सिम्स) अपनी रिपोर्ट में नेगेटिव बता रहा है.

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यह एक उदाहरण है जो साफ बता रहा है कि  छत्तीसगढ़ में कोरोनावायरस कोविड-19 के नाम पर मरीजों के साथ इस तरह का जानलेवा खिलवाड़ किया जा रहा है. चिंता की स्थिति यह है कि सिम्स के द्वारा नेगेटिव बताए गए जिस शुभम यादव  को पॉजिटिव बता कर अपोलो अस्पताल के द्वारा पता नहीं कौन सा उपचार किया जा रहा था? जिससे उसकी मौत हो गई. प्रदेश शासन और जिला प्रशासन तथा सीएमएचओ बिलासपुर को इस मामले को गंभीरता से लेकर पूरी जांच करनी चाहिए मगर सभी विभाग मौन है, अगर जांच की जाती है तो  दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है.  क्या  प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग इसे भी गंभीर आपराधिक चूक का मामला नहीं मानता..?

क्या दोषी लोगों पर सख्त कार्रवाई नहीं होनी चाहिए ताकि आगामी समय में कोरोना वायरस जैसे महामारी को लेकर के चिकित्सा प्रबंधन स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारी मुस्तैद रहें. यहां ऐसी अफरा-तफरी मची हुई है जिसे देखकर शर्म आती है क्योंकि शासन प्रशासन की नाक के नीचे किसी  एक की लाश, किसी को दे दी जाती है यहां कोरोना मरीज के मरने के बाद “शव” अदला बदली का खेल भी आंखें बंद करके जारी है. और शासन किसी पर कोई एक्शन नहीं ले रहा था गाज नहीं गिरा रहा.

नामी राजधानियां  पीछे हुईं

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कोरोना का जबरदस्त विस्फोट हुआ है.यहां हालात देश के गंभीर संक्रमण वाले शहरों से कहीं आगे निकल चुकी है राजधानी‌ रायपुर में कोरोना संक्रमण के वर्तमान के आंकड़ों को देखा जाए तो  रायपुर में जितने मरीज प्रतिदिन सामने आ रहे हैं और जितने अस्पतालों में भर्ती हैं, उतने कभी कोरोना संक्रमण के लिए चर्चित जयपुर, जोधपुर, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रांची, लखनऊ और कानपुर में नहीं है.जबकि रांची को छोड़कर बाकी सभी शहर आबादी के लिहाज से रायपुर से दो और तीन गुना ज्यादा बड़े हैं.

यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि भोपाल, जयपुर और लखनऊ जैसे बड़े महानगरों के साथ-साथ बड़े राज्यों की राजधानी भी है. हां राहत  की खबर यह है कि है कि रायपुर में मौतों का आंकड़ा कम है, इस मामले में भोपाल, इंदौर और जयपुर से रायपुर पीछे है.

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साथ ही यह भी सच है कि राजधानी रायपुर में मरीजों के स्वस्थ होने की दर यानी रिकवरी रेट भी इन शहरों से कम है.

विशेषज्ञों के अनुसार रायपुर में लगातार बढ़ रहे मरीजों में वे लोग ज्यादातर हैं जो प्राइमरी कांटेक्ट में आए हैं, इस कारण एक मोहल्ला या एक घर से बड़ी संख्या में लोग कोरोना से संक्रमित निकल रहे हैं.

छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल

सरकार अपने सिस्टम को दुरूस्त करने में लगातार  फ्लॉप सिद्ध  हुई है, यही कारण है कि रायपुर समेत छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण नगरों के के हालात लगातार बदतर होते जा रहे है.

जानकारी के अनुसार रायपुर में संक्रमण की जांच के लिए  जांच सेंटरों में कलेक्ट किए गए प्रभावितों के सैम्पल भी “गुम” हो रहे हैं.जिसके कारण भी सिर्फ चक्कर काटते पीड़ितों का संक्रमण बढ़ रहा है. वहीं उनकी जान जाने का खतरा बढ़ता जा रहा है.

रायपुर के सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम गुप्ता के अनुसार सरकार  से अपेक्षा है कि सिर्फ चापलूस अधिकारियों के द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के बाद खुश हो जाने वाले प्लान से वे बाहर आएं वहीं

राजस्थान के “भीलवाड़ा” या मध्यप्रदेश के “इंदौर मॉडल” को अपनाते हुए, कोरोना संक्रमण की रोकथाम में विफल रायपुर के प्रशासनिक सिस्टम पर अपनी तीव्र प्रखर दृष्टि डालें.

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पौपुलर सिंगर Hardy Sandhu ने मैनचेस्टर जर्सी में शेयर की फोटोज, फैंस ने की जमकर तारीफ

लोकप्रिय गायकों में से एक हार्डी संधू (Hardy Sandhu) जो अब तक अपने गीतों और आवाज से लोगों को मंत्रमुग्ध करते आए हैं, वही हार्डी संधू (Hardy Sandhu) अब आधिकारिक तौर पर दुनिया के जाने-माने फुटबॉल क्लब मैनचेस्टर सिटी (Manchester City) से जुड़ गए हैं.

मैनचेस्टर सिटी (Manchester City) ने छह प्रीमियर लीग (Premier League) खिताब जीते हैं. यह मैनचेस्टर में स्थित एक अंग्रेजी फुटबॉल क्लब (International Football Club) है और दुनिया भर में उनके प्रशंसक और अनुयायी हैं.

 

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What 🎵 X ⚽️ looks like. @mancity @pumaindia #mancity #football #music

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हाल ही में, कलाकार हार्डी संधू (Hardy Sandhu) ने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट सांझा की, जिसने उनके फैंस और फुटबॉल क्लब के प्रशंसकों को पागल कर दिया. फोटो में हार्डी संधू (Hardy Sandhu) मैनचेस्टर क्लब (Manchester Club) की जर्सी पहने हुए दिखाई देते है. उन्होंने कैप्शन में लिखा है, “What ‘X’ looks like. @mancity @pumaindia #mancity #football #music”

 

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Your imperfections make you beautiful. #loveyourself

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इस कैप्शन पर मैनचेस्टर सिटी क्लब (Manchester City Club) के आधिकारिक हैंडल ने टिप्पणी करते हुए कहा “क्या बात आय!” जो कि सिंगर हार्डी संधू के पौपुलर गाने का नाम है. प्रशंसक इस पल की खूब खुशी मना रहे है. हार्डी अपनी जर्सी को देख रहे है, जिस पर उनक नाम छपा है और नंबर 6 है और तीसरी छवि में, हम दूसरी जर्सी देख सकते है.

 

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एक्ट्रेस निया शर्मा की बर्थडे पार्टी की फोटोज हुईं वायरल, केक की शेप देख भड़के फैंस

हाल ही में टेलिवीजन इंडस्ट्री की जानी मानी एक्ट्रेस निया शर्मा (Nia Sharma) ने अपना 30वां जन्मदिन सेलिब्रेट किया. इस दौरान उन्होनें कई फोटोज और वीडियोज अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट (Official Instagram Account) पर शेयर की. इस दौरान उनके कई दोस्त पार्टी में शामिल हुए. एक्ट्रेस निया शर्मा (Nia Sharma) अपनी बर्थडे पार्टी में बेहद ही खूबसूरत दिखाई दे रही थीं. इन वीडियोज में वे बहुत सारे केक काटते हुए नजर आईं.

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इस दौरान टेलिवीजन के मशहूर एक्टर अर्जुन बिजलानी (Arjun Bijlani) ने देर रात निया शर्मा (Nia Sharma) के घर जाकर उन्हें सर्प्राइज दिया और उनके लिए केक लेकर पहुंचे. अपने इस केक के लिए निया शर्मा (Nia Sharma) को काफी ट्रोल किया गया क्योंकि केक की शेप देखकर फैंस को काफी शर्मिंदगी महसूस हुई.

जी हां, इस दौरान निया शर्मा (Nia Sharma) नें ‘मेल प्राइवेट पार्ट’ (Male Private Part) शेप का केक कट किया और उसकी वीडिया अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर की. तभी से लोगों ने निया शर्मा की इस वीडियो को लेकर ट्रोल करना शुरू कर दिया. इस वीडियो के कैप्शन में निया शर्मा (Nia Sharma) ने लिखा कि, “Safely the best dirty 30th of my life. Short of words … overwhelmed, and happiest at the moment. Appreciate the efforts madeeeee by you all….. @gautam.sharma13 @iam_reyhna @rrahulsudhir @arjunbijlani @amrin15 @shagun08 @shurabhavinofficial @cashmakeupartistry @savantsinghpremi @bhavin.chudasama.98 Thankkk youuu all for making this our first and the most memorable one…”

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I reflected on my actions, And I realised they’re bling.. not impulsive!

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इस कैप्शन के जरिए उन्होनें अपने सभी दोस्तों का शुक्रीया अदा किया. बात करें एक्ट्रेस निया शर्मा (Nia Sharma) की फैन फौलोविंग की तो इंस्टाग्राम पर उनके 4.7 मिलियन से भी ज्यादा फैंस है तो ऐसे में उनके बर्थडे के अवसर पर उनके लाखों फैंस के उनको जन्मदिन की बधाई और शुभकामनाएं दी.

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Bigg Boss 14 में नजर आ सकते हैं सिद्धार्थ शुक्ला, शूटिंग के दौरान वायरल हुई फोटो

पिछले कुछ दिनों से बिग बॉस सीजन 14 (Bigg Boss 14) के लिए फैंस के दिलों में काफी एक्साइटमेंट देखने को मिल रही है और तो और कुछ नाम ऐसे सामने आ रहे हैं जो इस बार बिग बॉस के घर में एंट्री ले सकते हैं. बात करें बिग बॉस के बीते सीजन यानी की सीजन 13 (Bigg Boss 13) की तो वह सीजन बिग बॉस के इतिहास का सबसे सफल सीजन रहा था तो ऐसे में फैंस के दिलों में बिग बॉस के अगले सीजन के लिए और भी ज्यादा उम्मीदें जाग गई हैं.

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जैसा कि हम सब जानते हैं कि बिग बॉस सीजन 14 (Bigg Boss 14) 3 अक्टूबर से ऑन एयर होने जा रहा है. ऐसे में इस बार दर्शकों को शो में खूब सारे बदलाव देखने को मिलने वाले हैं. खबरों की माने तो बिग बॉस सीजन 13 (Bigg Boss 13) के विनर और सबके फेवरेट कंटेस्टेंट सिद्धार्थ शुक्ला (Siddharth Shukla) इस बार दुबारा नजर आने वाले हैं. जी हां, सिद्धार्थ शुक्ला इस बार सलमान खान (Salman Khan) के साथ शो होस्ट कर सकते हैं.

यह बात बिग बॉस (Bigg Boss) के फैंस के लिए बहुत ही बड़ी खुशखबरी है. आपको बता दें कि इस बार भी बिग बॉस का सेट मुंबई के फिल्मसिटी में ही लगा है और हाल ही में बिग बॉस के सेट के बाहर सिद्धार्थ शुक्ला (Siddharth Shukla) को देखा गया. सिद्धार्थ इस दौरान ब्लैक कलर की शर्ट और ट्राउसर पहने नजर आए. खबरे ये भी हैं कि मेकर्स ने सिद्धार्थ शुक्ला के साथ एक प्रोमो शूट किया है जो कि जल्द ही रिलीज होगा.

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आपको बता दें कि शो के होस्ट सलमान खान (Salman Khan) के ऊपर जो काला हिरण शिकार केस चल रहा है उसके लिए जोधपुर कोर्ट ने उन्हें 28 सितम्बर को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा है जिसकी वजह से शो के मेकर्स काफी परेशान हैं. शो के मेकर्स इस बात से परेशान है कि कहीं सलमान खान (Salman Khan) के खिलाफ कोई फैसला ना आ जाए जिससे कि शो के दौरान कुछ गड़बड़ हो.

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क्यों, आखिर क्यों : भाग 3- मां की ममता सिर्फ बच्चे को देखती है

हमारे पड़ोस में ही निर्मल परिवार रहता है जिन की बड़ी बेटी प्रियंका  करिश्मा की खास सहेली है. दोनों एकसाथ 7वीं कक्षा में पढ़ती हैं.

पता चला कि प्रियंका ने मिट्टी का तेल छिड़क कर खुद को जलाने की कोशिश की थी जिस में उस का 80 प्रतिशत बदन आग की लपेट में आ गया था. मेरा दिमाग सुन्न हो गया. मेरी नजरों के सामने प्रियंका का चेहरा उभर आया. इतनी कम उम्र और इतना भयानक कदम…? इतना सारा साहस उस फू ल सी बच्ची ने कहां से पाया होगा? न जाने किस पीड़ादायी अनुभव से वह गुजर रही होगी जिस से छुटकारा पाने के लिए उस ने यह अंतिम कदम उठाया होगा? लगातार रोए जा रही करिश्मा को बड़ी मुश्किल से चुप करा कर उसे स्कूल के गेट तक छोड़ दिया. फिर मैं प्रियंका को देखने अस्पताल के लिए चल पड़ी.

अस्पताल के गेट पर ही मुझे मेरी एक अन्य पड़ोसिन ईराजी मिल गईं. उन से जो हकीकत पता चली उसे जान कर तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए, कल्पना से परे एक हकीकत जिसे सुन कर पत्थर दिल इनसान का भी कलेजा फट जाएगा.

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प्रियंका की मम्मी को एक के बाद एक कर के 4 बेटियां हुईं. जाहिर है, इस के पीछे बेटा पाने की भारतीय मानसिकता काम कर रही होगी. धिक्कार है ऐसी घटिया सोच के साथ जीने वाले लोगों को…मेरे समग्र बदन में नफरत की तेज लहर दौड़ गई.

उन की आर्थिक स्थिति कुछ ठीक नहीं चल रही थी. इस महंगाई के दौर में 4 बेटियां और आने वाली 5वीं संतान की, सही ढंग से परवरिश कर पाना उन के लिए मुश्किल था. ऐसे में राजनजी के किसी मित्र ने उन की चौथी बेटी सोनिया को गोद लेने का प्रस्ताव रखा, जिसे उन्होंने मान लिया. क्या सोच कर उन्होंने ऐसा निर्णय किया यह तो वही जानें लेकिन प्रियंका इस बात के लिए हरगिज तैयार नहीं थी. उस ने साफ शब्दों में मम्मीपापा से कह दिया था कि यदि उन्होंने सोनिया को किसी और को सौंपने की बात सोची भी  तो वह उन्हें माफ नहीं करेगी.

प्रियंका बेहद समझदार और संवेदनशील बच्ची थी. वह उम्र से कुछ पहले ही पुख्ता हो चुकी थी. घर के उदासीन माहौल ने उसे कुछ अधिक ही संजीदा बना दिया था. बचपन की अल्हड़ता और मासूमियत, जो इस उम्र में आमतौर पर पाई जाती है, उस के वजूद से कब की गायब हो चुकी थी.

अपने को आग की लपटों के हवाले करने से पहले उस ने अपने हृदय की सारी पीड़ा शब्दों के माध्यम से बेजान कागज के पन्ने पर उड़ेल दी थी, अपने खून से लिखी उस चिट्ठी ने सब का दिल दहला दिया :

‘‘श्रद्धेय मम्मीपापा,

अब मुझे माफ कर दीजिए, मैं आप सब को छोड़ कर जा रही हूं. वैसे मैं आप के कंधों से अपनी जिम्मेदारी का कुछ बोझ हलका किए जा रही हूं ताकि आप के कमजोर कंधे सोनिया का बोझ उठाने में सक्षम बन सकें. अपनी तीनों बहनों को मैं अपनी जान से भी ज्यादा चाहती हूं. किसी को भी परिवार से अलग होते हुए मैं नहीं देख पाऊंगी. सोनिया न रहे उस से अच्छा है कि मैं ही न रहूं…अलविदा.’’

आप की लाड़ली बेटी,
प्रियंका.’’

4 दिन तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करती हुई प्रियंका आखिर हार गई और जिंदगी का दामन छोड़ कर वह मौत के आगोश में हमेशा के लिए समा गई पर वह मर कर भी एक मिसाल बन गई. उस की कुरबानी ने हमारे परंपरागत, दकियानूसी समाज पर हमेशा के लिए कलंक का टीका लगा दिया, जिसे अपने खून से भी हम कभी न मिटा पाएंगे.

प्रियंका की मौत के ठीक एक हफ्ते बाद मेरे भतीजे तेजस ने भी बेहोशी की हालत में ही दम तोड़ दिया. तेजस हमारे परिवार का एकमात्र जीवन ज्योति था, जो अपनी उज्ज्वल कीर्ति द्वारा हमारे परिवार को समृद्धि के उच्च शिखर पर पहुंचाता. हमारे समाज के फलक पर रोशन होने वाला सूर्य अचानक ही अस्त हो गया फिर कभी उदित न होने के लिए.

दिनरात मेरी नजर के सामने उन दोनों के हंसते हुए मासूम चेहरे छाए रहते. हर पल अपनेआप से मैं एक ही सवाल करती, क्यों? आखिर क्यों ऐसा होता है जिसे हम चाह कर भी स्वीकार नहीं कर पाते? उन की मौत क्या हमारे समाज के लिए संशोधन का विषय नहीं?

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दादीमां की पीढ़ी से ले कर प्रियंका के बीच कितने सालों का अंतराल है? दादीमां 85 वर्ष की हो चली हैं. तेजस सिर्फ 20 वसंत ही देख पाया और प्रियंका सिर्फ 12. इस लंबे अंतराल में क्या परिवर्तन की कोई गुंजाइश नहीं थी?

दादीमां औरत थीं फिर भी मानती थीं कि संसार पुरुष से ही चलता है. हर नीतिनियम, रीतिरिवाज सिर्फ पुरुष के दम से है फिर मालती का पति तो पुरुष है. उस का यह मानना लाजमी ही था कि जो पुरुष बेटा न पैदा कर पाए वह नामर्द होता है. प्रियंका के मातापिता भी तो इसी मानसिकता का शिकार हैं कि वंश की शान और नाम आगे बढ़ाने के लिए बेटा जरूरी है. क्या सोनिया की जगह अगर उन्होंने बेटा पैदा किया होता तो उसे किसी और की गोद में डालने की बात सोच सकते थे? या उस के बाद और बच्चा पैदा करने की जरूरत को स्वीकार कर पाते? नहीं, कभी नहीं….

भला हो मालती का जिस ने मेरी आंखें खोल दीं वरना जानेअनजाने मैं भी इन तमाम लोगों की तरह ही सोचती रह जाती. अपनी कुंठित मान्यताओं के भंवर से बाहर निकालने वाली मालती का मैं जितना शुक्रिया अदा करूं कम ही है.

तेजस की अकाल मौत ने दादी मां को यह सोचने पर मजबूर किया कि जिस कुलदीपक की चाह में उन्होंने अतीत में एक मासूम बच्ची के साथ अन्याय किया था उस कुलदीपक की जीवन ज्योति को अकाल ही बुझा कर नियति ने उन की करनी की सजा दी थी.

प्रियंका भी पुकारपुकार कर पूछ रही है, हर नारी और हर पुरुष यही सोचे और चाहे कि उन के घर बेटा ही पैदा हो तो भविष्य में कहां से लाएंगे हम वह कोख जो बेटे को पैदा करती है?

क्यों, आखिर क्यों : भाग 2- मां की ममता सिर्फ बच्चे को देखती है

डोरबेल बजने पर जब मैं ने दरवाजा खोला तो दरवाजे के बाहर मालती को खड़ा पाया. उसे सामने देख कर मेरा सारा गुस्सा हवा हो गया क्योंकि उस की सूजी हुई आंखें और चेहरे पर उंगलियों के निशान देख कर मैं समझ गई कि वह फिर अपने पति के जुल्म का शिकार हुई होगी.

‘‘क्या हुआ, मालती? तुम्हारे चेहरे पर हवाइयां क्यों उड़ रही हैं?’’ लगातार रो रही मालती उत्तर देने की स्थिति में कहां थी. मैं ने भी उसे रोने दिया.

मालती ने रोना बंद कर बताना शुरू किया, ‘‘भाभी, मैं तुम से माफी मांगती हूं. बंसी ने मुझे इतना पीटा कि मैं 3 दिन तक बिस्तर से उठ नहीं पाई.’’

‘‘लेकिन क्यों?’’ मुझे रहरह कर उस के पति पर गुस्सा आ रहा था. मन कर रहा था कि उसे पुलिस के हवाले कर दूं. पर अभी तो अस्पताल जाना ज्यादा जरूरी है.

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‘‘मालती, मेरे खयाल से तुम काफी थकी हुई लग रही हो. थोड़ी देर आराम कर लो. मुझे अभी अस्पताल जाना है,’’ मैं ने उसे संक्षेप में सब बता दिया और बोली, ‘‘मेरे लौटने तक तुम्हें यहीं रुकना पड़ेगा. हम बाद में बात करेंगे…करिश्मा स्कूल से आए तो उस के लिए नाश्ता बना देना.’’

मैं अस्पताल पहुंची. मुझे देखते ही अंजलि मेरे कंधे से लग कर बेतहाशा रोने लगी. मेरी भी आंखें छलछला आईं. मेडिकल कालिज का मेधावी छात्र, लेकिन पिछले 6 महीनों से दूरदर्शन के एक मशहूर धारावाहिक में प्रमुख किरदार निभा रहा था. अभी तो उस के कैरियर की शुरुआत हुई थी, लोग उसे जानने, पहचानने और सराहने लगे थे कि शूटिंग से लौटते वक्त लोकल टे्रन से गिर कर ब्रेन हैमरेज का शिकार हो गया. मां, पिताजी और मैं भाभी को संभालतेसंभालते खुद भी हिम्मत हारने लगे थे. सभी एकदूसरे को ढाढ़स बंधाने का असफल प्रयास कर रहे थे.

काफी रात हो चुकी थी. बच्चोें के कारण मुझे बेमन से घर जाना पड़ा. मालती की गोद में ऋचा तथा होम वर्क के दिए गए गणित के समीकरण को सुलझाने का प्रयास करती हुई करिश्मा को देख मेरी आंखें भर आईं.

मैं निढाल सी सोफे पर लेट गई. मेरे दिल और दिमाग पर तेजस की घटना की गहरी छाप पड़ी थी. थोड़े समय बाद जब कुछ सामान्य हुई तो यह सोच कर कि आज जितने हादसों से साक्षात्कार हो जाए अच्छा होगा, कम से कम, कल का सूरज आशाओं की कुछ किरणें हमारे उदास आंचल में डालने को आ जाए. यही सोच कर मैं ने मालती से उस की दर्दनाक व्यथा सुनी.

‘‘भाभी, मैं चौथी बार पेट से हूं. बंसी मेरे पीछे पड़ गया है कि मैं जांच करवा लूं और लड़की हो तो गर्भपात करा दूं. मैं इस के लिए तैयार नहीं हूं, इस बात पर वह मुझे मारतापीटता और धमकाता है कि अगर इस बार लड़की हुई तो मुझे घर से निकाल देगा, वह जबरदस्ती मुझे सरकारी अस्पताल भी ले गया था लेकिन डाक्टर ने उसे खूब डांटा, धमकाया कि औरत पर जुल्म करेगा, जांच के लिए जबरदस्ती करेगा तो पुलिस में सौंप दूंगी क्योंकि गर्भपरीक्षण कानूनी अपराध होता है. मैं ने तो उसे साफ बोल दिया कि वह मुझे मार भी डालेगा तो भी मैं गर्भपात नहीं कराऊंगी.’’

‘‘तो क्या तुम यों ही मार खाती रहोगी? इस तरह तो तुम मर जाओगी.’’

‘‘नहीं, भाभी, मैं ने उस को बोल दिया कि बेटा हुआ तो तुम्हारा नसीब वरना मैं अपनी चारों बच्चियों को ले कर कहीं चली जाऊंगी. हाथपैर सलामत रहे तो काम कहीं भी मिलेगा, वैसे भी बंसी तो सिर्फ नाम का पति है, वह कहां बाप होने का धर्म निभाता है? उस को भी तो मैं ही पालती हूं. मैं मां हूं और मां की नजर सिर्फ अपने बच्चे को देखती है, बेटी, बेटे का भेद नहीं. फिर लड़का या लड़की पैदा करना क्या मेरे हाथ में है?’’

कितनी कड़वी मगर सच्ची बात कह दी इस अनपढ़ औरत ने. एक मां अपने बच्चे के लिए बड़ी से बड़ी कुरबानी दे सकती है पर शायद यह पुरुष प्रधान भारतीय समाज की मानसिकता है कि वंश को आगे बढ़ाने के लिए और अर्थी को कांधा देने के लिए बेटे की जरूरत होती है…अत: अगर परिवार में बेटा न हो तो परिवार को अधूरा माना जाता है.

मेरी दादी मां क्यों औरत की कदर करना नहीं जानतीं? वह क्यों भूल गईं कि वह खुद भी एक औरत ही हैं? दादी की याद आते ही मेरा हृदय कड़वाहट से भर उठा. लेकिन अगले ही पल मेरे मन ने मुझे टोका कि तू खुद भी संकुचित मानसिकता में दादी मां से कम है क्या? अगर मालती चौथी बार मां बनने वाली है तो तेरे उदर में भी तो तीसरा बच्चा पल रहा है. तीसरी बार गर्भधारण के पीछे तेरा कौन सा गणित काम कर रहा है…? 2 बेटियों की मां बन कर तू खुश नहीं? क्या जानेअनजाने तेरे मन में भी बेटा पाने की लालसा नहीं पनप रही?

मैं सिर से पैर तक कांप उठी. यह मैं क्या करने जा रही हूं? दादी को कोसने से मेरा यह अपराधबोध क्या कम हो जाएगा? नहीं, कदापि नहीं. उसी वक्त मैं ने फैसला ले लिया कि तीसरे बच्चे के बाद मैं आपरेशन करवा लूंगी. यह फैसला करते ही मेरे दिमाग की तंग नसें धीरेधीरे सामान्य होती चली गईं.

चैन से सो रही मालती के चेहरे पर निर्दोष मुसकान खेल रही थी. जल्द ही मैं भी नींद के आगोश में समा गई. सुबह जब आंख खुली तब मैं अपने को हलका महसूस कर रही थी.

मालती पहले ही उठ कर घर के कामों को पूरा कर रही थी. उस ने करिश्मा को नाश्ता बना कर दे दिया था और वह स्कूल जाने को तैयार थी.

मैं ने करिश्मा के कपोल चूमते हुए उसे विश किया तो लगा कि वह कुछ बुझीबुझी सी थी.

‘‘क्यों बेटी, क्या आप की तबीयत ठीक नहीं?’’

‘‘नहीं मम्मी, ऐसी कोई बात नहीं.’’

‘‘मम्मी आप के चेहरे की हर रेखा पढ़ सकती है, बेटा, जरूर कोई बात है… मुझ से नहीं कहोगी?’’ सोफे पर बैठ कर मैं ने उसे अपनी गोद में खींच लिया.

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ममता भरा स्पर्श पा कर उस की आंखें भर आईं. मैं ने सोचा शायद पढ़ाई में कोई मुश्किल सवाल रहा होगा, जिस का हल वह नहीं ढूंढ़ पा रही होगी.

‘‘बेटा, क्या मैं आप की कोई मदद कर सकती हूं?’’

‘‘नो, थैंक्स मम्मा,’’ उस के शब्द गले में ही अटक गए.

‘‘चलो, मैं प्रियंका को फोन कर देती हूं. वह आप की समस्या का कोई हल ढूंढ़ पाएगी, क्या उस से झगड़ा हुआ है?’’ मैं फोन की ओर बढ़ी, ‘‘उसे मैं कह देती हूं कि वह जल्दी आ जाए ताकि मैं आप दोनों को स्कूल में ड्राप कर दूं.’’

‘‘मम्मा,’’ वह चीख उठी, ‘‘प्रियंका अभी नहीं आ सकेगी.’’

‘‘क्यों…?’’ मुझे धक्का लगा.

‘‘सौरी, मम्मा,’’ वह धीरे से बोली, ‘‘प्रियंका लाइफ लाइन अस्पताल में है.’’

आश्चर्य का इतना तेज झटका मैं ने महसूस किया कि मैं संभल नहीं पाई, ‘‘क्या हुआ है उसे?’’

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

क्यों, आखिर क्यों : भाग 1- मां की ममता सिर्फ बच्चे को देखती है

आज लगातार 7वें दिन भी जब मालती काम पर नहीं आई तो मेरा गुस्सा सातवां आसमान छू गया, खुद से बड़बड़ाती हुई बोली, ‘क्या समझती है वह अपनेआप को? उसे नौकरानी नहीं, घर की सदस्य समझा है. शायद इसीलिए वह मुझे नजरअंदाज कर रही है…आने दो उसे…इस बार मैं फैसला कर के ही रहूंगी…यदि वह काम करना चाहे तो सही ढंग से करे वरना…’ अधिक गुस्से के चलते मैं सही ढंग से सोच भी नहीं पा रही थी.

मालती बेहद विश्वासपात्र औरत है. उस के भरोसे घर छोड़ कर आंख मूंद कर मैं कहीं भी आजा सकती हूं. मेरी बच्चियों का अपनी औलाद की तरह ही वह खयाल रखती है. फिर यह सोच कर मेरा हृदय उस के प्रति थोड़ा पसीजा कि कोई न कोई उस की मजबूरी जरूर रही होगी वरना इस से पहले उस ने बिना सूचित किए कभी लंबी छुट्टी नहीं ली.

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मेरे मन ने मुझे उलाहना दिया, ‘राधिका, ज्यादा उदार मत बन. तू भी तो नौकरी करती है. घर और दफ्तर के कार्यों के बीच सामंजस्य बनाए रखने की हरसंभव कोशिश करती है. कई बार मजबूरियां तेरे भी पांव में बेडि़यां डाल कर तेरे कर्तव्य की राह को रोकती हैं…पर तू तो अपनी मजबूरियों की दुहाई दे कर दफ्तर के कार्य की अवहेलना कभी नहीं करती?’

दफ्तर से याद आया कि मालती के कारण मेरी भी 7 दिन की छुट्टी हो गई है. बौस क्या सोचेंगे? पहले 2 दिन, फिर 4 और अब 7 दिन के अवकाश की अरजी भेज कर क्या मैं अपनी निर्णय न ले पाने की कमजोरी जाहिर नहीं कर रही हूं?

तभी धड़ाम की आवाज के साथ ऋचा की चीख सुन कर मैं चौंक गई. मैं बेडरूम की ओर भागी. डेढ़ साल की ऋचा बिस्तर से औंधेमुंह जमीन पर गिर पड़ी थी. मैं ने जल्दीजल्दी उसे बांहों में उठाया और डे्रसिंग टेबल की ओर लपकी. जमीन से टकरा कर ऋचा के माथे की कोमल त्वचा पर गुमड़ उभर आया था. दर्द से रो रही ऋचा के घाव पर मरहम लगाया और उसे चुप कराने के लिए अपनी छाती से लगा लिया. मां की ममता के रसपान से सराबोर हो कर धीरेधीरे वह नींद के आगोश में समा गई.

फिर मुझे मालती की याद आ गई जिस की सीख की वजह से ही तो मैं अपनी दोनों बेटियों को स्तनपान का अधिकार दे पाई थी वरना मैं ने तो अपना फिगर बनाए रखने की दीवानगी में बच्चियों को अपनी छाती से लगाया ही न होता…सोच कर मेरी आंखों से 2 बूंदें कब फिसल पड़ीं, मैं जान न पाई.

ऋचा को बिस्तर पर लिटा कर मैं अपने काम में उलझ गई. हाथों के बीच तालमेल बनाती हुई मेरी विचारधारा भी तेजी से आगे बढ़ने लगी.

मां से ही जाना था कि जब मेरा जन्म हुआ था तब मां के सिर पर कहर टूट पड़ा था. रंग से तनिक सांवली थीं. अत: दादीजी को जब पता चला कि बेटी पैदा हुई है तो यह कह कर देखने नहीं गईं कि लड़की भी अपनी मां जैसी काली होगी, उसे क्या देखना? चाचीजी ने जा कर दादी को बताया, ‘मांजी, बच्ची एकदम गोरीचिट्टी, बहुत ही सुंदर है, बिलकुल आप पर गई है…सच…आप उसे देखेंगी तो अपनेआप को भूल जाएंगी.’

‘फिर भी वह है तो लड़की की जात…घर आएगी तब देख लूंगी,’ दादी ने घोषणा की थी.

मेरे भैया उम्र में मुझ से 3 साल बड़े थे…सांवले थे तो क्या? आगे चल कर वंश का नाम बढ़ाने वाले थे…अत: उन का सांवला होना क्षम्य था.

ज्योंज्यों मैं बड़ी होती गई, त्योंत्यों मेरी और भैया की परवरिश में भेदभाव किया जाने लगा. उन के लिए दूध, फल, मेवा, मिठाई सबकुछ और मेरे लिए सिर्फ दालचावल. यह दादी की सख्त हिदायत थी. वह मानती थीं कि लड़कियां बड़ी सख्त जान होती हैं, ऐसे ही बड़ी हो जाती हैं. लड़के नाजुक होते हैं, उन की परवरिश में कोई कमी नहीं होनी चाहिए. आखिर वही हमारे परिवार की शान में चार चांद लगाते हैं. बेटियां तो पराया धन होती हैं… कितना भी खिलाओपिलाओ, पढ़ाओ- लिखाओ…दूसरे घर की शोभा और वंश को आगे बढ़ाती हैं.

मम्मी और चाचीजी दोनों ही गांव की उच्चतर माध्यमिक पाठशाला में शिक्षिका थीं. वे सुबह 11 बजे जातीं और शाम साढ़े 6 बजे लौटतीं. मेरी देखभाल के लिए कल्याणी को नियुक्त किया गया था, लेकिन दादी उस से घर का काम करवातीं. बहुत छोटी थी तब भी मुझे एक कोने में पड़ा रहने दिया जाता. कई बार कपड़े गीले होते…पर कल्याणी को काम से इतनी फुर्सत ही नहीं मिलती कि वह मेरे गीले कपड़े बदल दे. एक बार इसी वजह से मैं गंभीर रूप से बीमार भी हो गई थी. बुखार का दिमाग पर असर हो गया था. मौत के मुंह से मुश्किल से बहार आई थी.

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इस हादसे की बदौलत ही मम्मी को पता चला था कि दादी के राज में मेरे साथ क्या अन्याय किया जा रहा था. तब मां दादी से नजरें बचा कर एक कोने में छिप कर खूब रोई थीं…पापा 1 महीने के दौरे पर से जब लौटे तब मां ने उन्हें सबकुछ बता दिया. अपनी बच्ची के प्रति मां द्वारा किए गए अन्याय ने उन्हें बहुत दुख पहुंचाया था किंतु मम्मीपापा के संस्कारों ने उन्हें दादी के खिलाफ कुछ भी करने की इजाजत नहीं दी.

कुछ समय बाद पता चला कि मां ने सूरत के केंद्रीय विद्यालय में अर्जी दी थी. साक्षात्कार के बाद उन का चयन हो जाने पर पापा ने भी अपना तबादला सूरत करवा लिया. मैं मम्मी के साथ उन के स्कूल जाने लगी और भैया अन्य स्कूल में.

दादी मां द्वारा खींची गई बेटेबेटी की भेद रेखा ने मुझे इतना विद्रोही बना दिया था कि मैं अपने को लड़का ही समझने लगी थी. शहर में आ कर मैं ने मर्दाना पहनावा अपना लिया. मेरी मित्रता भी लड़कों से अधिक रही.

मम्मी कहतीं, ‘बेटी, तुम लड़की बन कर इस संसार में पैदा हुई हो और चाह कर भी इस हकीकत को झुठला नहीं सकतीं. मेरी बच्ची, इस भ्रम से बाहर आओ और दुनिया को एक औरत की नजर से देखो. तुम्हें पता चल जाएगा कि दुनिया कितनी सुंदर है. सच, दादी की उस एक गलती की सजा तुम अपनेआप को न दो, अभी तो ठीक है, लेकिन शादी के बाद तुम्हारे यही रंगढंग रहे तो मुझे डर है कि पुन: तुम्हें कहीं मायका न अपनाना पड़े.’

मम्मी के लाख समझाने के बावजूद मैं चाह कर भी अपनेआप को बदल नहीं पाती. सौभाग्य से मुझे वेदांत मिले जिन्हें सिर्फ मुझ से प्यार है, मेरी जिद से उन्हें कोई सरोकार नहीं. उन्होंने कभी मेरे लाइफ स्टाइल पर एतराज जाहिर नहीं किया.

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टेलीफोन की घंटी कानों में पड़ते ही मैं फिर वर्तमान में आ पहुंची. दूसरी तरफ अंजलि भाभी थीं. उन्होंने बताया कि तेजस लोकल टे्रन से गिर गया था. इलाज के लिए उसे अस्पताल में दाखिल करवाया गया है. मैं ने उसी वक्त वेदांत को एवं आलोक भैया को फोन द्वारा सूचित तो कर दिया लेकिन मैं अजीब उलझन में पड़ गई. न तो मैं ऋचा को अकेली छोड़ कर जा सकती थी और न ही उसे अस्पताल ले जाना मेरे लिए ठीक रहता. अब क्या करूं…एक बार फिर मुझे मालती की याद आ गई…उफ, इस औरत का मैं क्या करूं?

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

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