शादी के लाल जोड़े में नजर आईं भोजपुरी एक्ट्रेस रानी चटर्जी, फैंस ने दी बधाई

भोजपुरी सिनेमा (Bhojpuri Cinema) जगत में हर समय सुर्खियों में रहनें वाली एक्ट्रेस रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) फिल्मों के साथ-साथ सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी काफी एक्टिव रहती हैं जिस पर वह आए दिन अपनी फोटोज और वीडियो शेयर करती रहतीं हैं. रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) की फैन फौलोविंग इस कदर है कि उनके फैंस इस इंतजार में रहते हैं कि कब रानी अपनी कोई फोटो और वीडियो अप्लोड करे और कब उनके फैंस उन फोटोज और वीडियोज को वायरल करें.

 

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I am music lover #90s #lovesongs #romenticsongs #shrimanshrimati

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ऐसे में इन दिनों रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) की कुछ फोटोज सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही हैं जिन्हें देख उनके फैंस उनकी तारीफ तो कर ही रहे हैं पर साथ ही उन्हें बधाई भी दे रहे हैं. अब आप ये सोच रहे होंगे कि इस फोटोज और वीडियोज में ऐसा क्या है जिसे देख उनके फैंस उन्हें बधाई दे रहे हैं तो आपको बता दें कि इन फोटोज में एक्ट्रेस रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) शादी के लाल जोड़े में एक्टर आदित्य ओझा (Aditya Ojha) के साथ खड़ी दिखाई दे रही हैं.

दरअसल रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) और आदित्य ओझा (Aditya Ojha) की यह फोटोज उनकी आने वाली फिल्म “श्रीमान vs श्रीमती” के सेट पर से है जिसमें वे दोनों एक साथ बेहद अच्छे लग रहे हैं. फैंस रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) की तो तारीफ करते नहीं थक रहे. रानी चटर्जी ने यह फोटो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है कि, “अपने श्रीमान जी के साथ #shrimanshrimati #movie #onset #shooting #familydrama हर घर की कहानी… श्रीमान vs श्रीमती”.

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Indian Beauty ❤️❤️❤️

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जैसा कि हम सब जानते हैं कि एक्ट्रेस रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) दिखने में बेहद ही खूबसूरत हैं और अक्सर वे अपनी हॉट और ग्लैमरस फोटोज अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर शेयर करती रहती हैं जिन्हें देख उनके फैंस के दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं. एक्ट्रेस रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) को समय समय पर अपने फैंस को खुश करना और उनके एंटरटेनमेंट का खयाल रखना अच्छे से आता है फिर चाहे वे अपने गानों से करें या फिर अपनी अदाओं से.

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This beauty 😍🤩😍❤️ #shrimanshrimati #onset🎥🎬

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मेरी पत्नी पोर्न मूवी देख कर मुझ से ऐसे ही स्टैप्स सेक्स के दौरान करने को कहती है, मैं क्या करूं?

सवाल-

मैं 32 साल का विवाहित पुरुष हूं. दांपत्य जीवन सुखमय है, पर अब कुछ महीनों से परेशान हूं. मेरी पत्नी पोर्न मूवी देख कर मुझ से ऐसे ही स्टैप्स सेक्स के दौरान करने को कहती है. शुरुआत में तो मुझे भी आनंद आया पर कई स्टैप्स ऐसे उलटेसीधे हैं कि मुझे कुछ समझ में नहीं आता. बताएं मैं क्या करूं?

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जवाब-

विवाहोपरांत सेक्स संबंध में एकदूसरे का खयाल रखना औरपूर्ण संतुष्टि का भाव दांपत्य जीवन का मूल आधार है और फिर सेक्स तो कुदरत का दिया एक बेजोड़ तोहफा है. अगर पत्नी की इच्छा सेक्स संबंध के दौरान विभिन्न आसनों का प्रयोग कर इसे और भी आनंददायक बनाने की है तो इस के लिए आप को प्रैक्टिस करनी पड़ेगी.

आप इस के लिए ‘कामसूत्र’ साहित्य की मदद ले सकते हैं. इस में रतिक्रीड़ा के विविध आसनों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया है. सेक्स संबंध के दौरान पत्नी से खुल कर बातचीत करें और एकदूसरे का सहयोग करें. रात को बिस्तर पर जाने से पहले हलका, मगर पौष्टिक खाना लें. इस से सेक्स क्रिया में स्फूर्ति बनी रहेगी.

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जमीन जायदाद के लालची हत्यारे रिश्तेदार !

कहते हैं, जर जोरू और जमीन खून खराबे हत्या के सबसे बड़े कारण होते हैं और यह कहावत गलत भी नहीं है. अक्सर धन दौलत की लालच में लोग अपने ही “रिश्तेदारों” का “कत्ल” कर देते हैं अथवा करवा देते हैं. और जब कानून के लंबे हाथ उनकी गर्दन तक पहुंचते हैं तो जिंदगी भर जेल के सीखचों के पीछे चक्की पीसकर अपनी जिंदगी और परिजनों का जीवन नर्क बना देते हैं. हाल ही में छत्तीसगढ़ के आदिवासी जिला पेंड्रा में एक युवक ने अपनी सगी नानी को जमीन जायदाद  के कारण लालच के फेर में स्वयं गला दबा कर मार दिया और सोचा कि आगे की जिंदगी ऐश में कटेगी. मगर वह आज जेल में अपनी उस सोच पर सर पीट रहा है जो उसने अपनी नानी को मारने का दुष्कर्म किया था.

मामला गौरेला थाना क्षेत्र के मेडुका गांव का है, जहां रहने वाली कौशल्या बाई थाना पहुंचकर अपराध दर्ज कराया कि उनकी नानी सास ललिया बाई काशीपुरी 10 सितंबर के सुबह 7 बजे घर से खेत देखने के लिए जाने को कह कर घर से निकली थी. रात तक नानी सास घर वापस नहीं आई तो यह अपने नाना ससुर चंदन काशीपुरी को और गांव के अन्य रिश्तेदारों को बताया. आस-पास रिश्तेदारी में पता किए लेकिन  वह नहीं मिली.

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18 सितंबर  को सुबह कोटवार ने बताया कि रेंजराभार रतनजोत प्लाट में मानव हड्डी और साड़ी, कपड़ा पड़ा है, जो ललिया बाई के जैसे लग रही है. तब यह अपने परिवार सहित प्लाट में जा कर देखी, जो साड़ी, कपड़ा, हाथ की चूड़ीवाला, चप्पल आदि देखकर पहचाने कि यह उसके नानी सास ललिया बाई की ही है. रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने शव के बचे अवशेष को पोस्टमार्टम और जांच के लिए भेज दिया. पुलिस जांच में जब आगे बढ़ने लगी तो जो तथ्य सामने आए वे बहुत चौकानेवाले निकले.

और नानी का गला दबा दिया

पुलिस ने हमारे संवाददाता को जानकारी दी कि प जांच में मृतका के शव का निरीक्षण पर प्रथम दृष्टया हत्या का अपराध होना पाया गया. पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर के द्वारा मृतका की मृत्यु गला दबाने से होना बताया. थाना गौरेला में अपराध कायम कर विवेचना में लिया गया. पुलिस जांच में पता चला कि मृतका का नाती राज कुमार उर्फ अमृत लाल  उसी दिन से लापता था  पुलिस ने उसे संदिग्ध माना और हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की.

पूछताछ में उसने सनसनीखेज जानकारी दी की शिवप्रसाद निवासी गोरखपुर के यहां से 10 सितंबर को खेत देखने के बाद नानी आई थी. जिसे साइकिल से गोरखपुर से लेकर कियोस्क बैंक लालपुर गया, ललिया बाई के खाता जांच में पता चला कि खाते में सिर्फ 39 रुपया ही था. तब उसे घर लेकर जाते समय रेंजराभार के रतनजोत प्लाट में कहै कि सब पैसा खाते से निकाल के खा गई और जमीन भी नहीं बेच रही है, उसी गुस्से में साइकिल से गिरा कर गला दबा दिया और प्लॉट में ले जाकर अपने पास में रखे अंगोछे से गला दबा कर हत्या कर दी और झाड़ियों में लाश छिपाकर फरार हो गया. पुलिस ने आरोपी की निशान देही से घटना में प्रयुक्त कपड़ा, साइकिल बरामद कर ली . आरोपी राजकुमार उर्फ अमृतलाल उम्र  40  निवासी मेडुका को गिरफ्तार कर जिला जेल भेज दिया है.

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लालच बुरी बला

पंचतंत्र हो या हितोपदेश अथवा जीवन की हर पढ़ाई में यही शिक्षा मिलती है कि लालच बुरी बला होती है मगर अक्सर लोग लोभ में आकर कानून को अपने हाथ में उठा लेते हैं और यही नहीं लोभ लालच में आकर के स्वयं अपने हाथों से अपने ही चिर परिचित रिश्तेदारों का मर्डर कर देते हैं या फिर करवा दिया करते हैं और अंततः भंडाफोड़ होने पर जेल जाकर अपनी जिंदगी को नष्ट कर देते हैं। पुलिस अधिकारी इंद्र भूषण सिंह बताते हैं कि उनके 20 वर्ष के कार्यकाल में अनेक प्रकार ऐसे सामने आए हैं जिसमें रिश्तेदारों ने रिश्तेदारों का लालच में खून बहाया दिया और छोटी सी बात को लेकर अपने सुखद जीवन को नर्क बना लिया, मेरी तो सदैव यही सलाह है कि लोग अपनी मेहनत पर भरोसा रखें, दूसरों की संपत्ति पर कुदृष्टि डालने वाले अंततः दुखी होते हैं.

दक्षिण अफ्रीका के खेल वैज्ञानिक श्यामल वल्लभजी कर रहे हैं प्रीति जिंटा की तारीफ, पढ़ें खबर

दक्षिण अफ्रीका के खेल वैज्ञानिक, सेलिब्रिटी कोच और ‘ब्रीथ बिलीव बैलेंस’ पुस्तक के लेखक श्यामल वल्लभजी (Shayamal Vallabhjee) इंडियन प्रीति जिंटा (Preity Zinta) की तारीफ करते हुए नहीं थक रहे हैं. मजेदार बात यह है कि वह प्रीति जिंटा (Preity Zinta) की तारीफ उस वक्त कर रहे हैं जबकि आईपीएल के क्रिकेट मैचों की शुरुआत हो चुकी है. वह यह भी मानते है कि इनके पास प्रत्येक व्यक्ति के लिए जीवन की योजना है तथा उनका सर्वश्रेष्ठ आना अभी बाकी है.

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जी हां! दक्षिण अफ्रीका के खेल वैज्ञानिक वल्लभजी (Shayamal Vallabhjee) ने कहते हैं “मुझे  प्रीति  जिंटा की कार्यशैली बहुत अच्छी लगी. मैंने उनकी टीम और उनकी ताकत जानने में उनके शोध की गहराई की प्रशंसा की है. मेरे लिए किंग्स इलेवन के साथ काम करना एक शानदार अनुभव था.

सहवाग, हॉज, गेल, अश्विन, वेंकटेश प्रसाद और अन्य से सीखना अविश्वसनीय था. उन्होंने मुझे खेल मनोविज्ञान में नए विचारों और दृष्टिकोण का परीक्षण करने का अवसर दिया.  मुझे लगता है कि एक मंच के रूप में आईपीएल में प्रदर्शन के मामले में वृद्धि की उल्लेखनीय क्षमता है. क्योंकि हमने अभी तक कुछ विज्ञानों की सतह को खरोंचने की शुरुआत नहीं की है. जो शिखर प्रदर्शन की ओर ले जाते हैं – नींद विश्लेषण, द्रव निगरानी, बायोमैकेनिक्स, उपकरण संशोधन, मनोविज्ञान जैसे विज्ञान, मांसपेशी शरीर क्रिया विज्ञान और अधिक.”

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कोरोना वायरस के चलते Bigg Boss 14 के फॉर्मेट में आए ये बदलाव, नही होंगे फिजिकल टास्क

पिछले कुछ दिनों से बिग बॉस सीजन 14 (Bigg Boss 14) के लिए फैंस के दिलों में काफी एक्साइटमेंट देखने को मिल रही है और तो और कुछ नाम ऐसे सामने आ चुके हैं जो इस बार बिग बॉस के घर में एंट्री लेंगे. जैसा कि हम सब जानते हैं कि कोरोना वायरस (Corona Virus) की वजह से सभी लोग काफी डरे हुए हैं लेकिन डरे होने के साथ साथ सभी अपने अपने कामों पर भी निकल गए हैं.

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तो ऐसे में मुंबई फिल्म सिटी में भी ज्यादातर शोज़ की शूटिंग शुरू हो चुकी है. हालांकि सभी लोग कोरोना वायरस (Corona Virus) के बचने के लिए सभी गाइडलाइंस को फौलो कर रहे हैं लेकिन फिर भी आए दिन किसी ना किसी व्यक्ति के कोरोना पॉजिटिव होने की खबर सामने आ जाती है. ऐसे में टेलीविजन के सबसे बड़े रिएलिटी शो बिग बॉस 14 (Bigg Boss 14) के प्रीमियर को बस अब कुछ ही दिन बचे हैं.

शो के मेकर्स फैंस के एंटरटेनमेंट के साथ साथ इस बात का भी पूरा ध्यान रख रहे हैं कि बिग बॉस (Bigg Boss) के घर में सभी कंटेस्टेंट कोरोना से बचे रहें. इसी के चलते मेकर्स ने इस बार शो के फॉर्मेट में थोड़े बदलाव किए हैं. जी हां आपको बता दें कि इस बार बिग बॉस के घर में कोई डबल बेड नहीं होगा यानी कि सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) को ध्यान में रखते हुए सभी कंटेस्टेंट कोफो अलग अलग ही सोना पड़ेगा.

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इस बार बिग बॉस (Bigg Boss) के घर में कोई भी फिजिकल टास्क परफॉर्म नहीं करेगा जिससे कि इस बार टास्क थोड़े से अलग तरीके के हो सकते हैं. हर हफ्ते कंटेस्टेंट का कोरोना टेस्ट होगा जिससे कि अगर कोई पॉजिटिव हो तो पहले ही पता लगाया जा सके. इस बार कोई भी कंटेस्टेंट किसी का भी झूठा खाना या कोई भी ऐसी चीज़ नहीं खा सकता जिससे कि सभी लोग सेफ रह सकें.

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इस बार बिग बॉस के घर के अंदर कंटेस्टेंटस के एंटरटेनमेंट का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा और तो और सभी कंटेस्टेंट्स के लिए मॉल (Mall), रेस्टोरेंट कॉर्नर (Restaurant Corner), मिनी थिएटर (Mini Theatre) और स्पा (Spa) जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी.

इस हॉट एक्ट्रेस ने पति के साथ ‘लिप लॉक’ करते हुए की फोटो शेयर, फैंस ने की खूब तारीफ

एक्ट्रेस श्रेया सरन (Shriya Saran) आज किसी पहचान की मोहताज नही हैं और तो और इन दिनों श्रेया सरन (Shriya Saran) काफी चर्चाओं मे हैं. जैसा कि हम सब जानते हैं कि श्रेया सरन (Shriya Saran) की खूबसूरती इस कदर है कि उनकी फोटोज देख ही उनके फैंस दीवाने हुए रहते हैं. यही वजह है कि एक्ट्रेस के इंस्टाग्राम अकाउंट पर करीब 2.8 मिलियन से भी ज्यादा फौलोवर्स हैं.

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एक्ट्रेस श्रेया सरन (Shriya Saran) आए दिन अपनी खूबसूरत फोटोज अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर करती रहती हैं जो कि उनके फैंस को काफी पसंद आती हैं. उनकी हर फोटो, हर वीडियो पर उनके फैंस कमेंट्स कर उनकी खूब तारीफ करते हैं और जमकर लाइक्स बरसाते हैं. हाल ही में एक्ट्रेस श्रेया सरन (Shriya Saran) का जन्मदिन था और अपने जन्मदिन के अवसर पर उन्होनें अपने पति आंद्रेई कोसचीव (Andrei Koscheev) के साथ खूब मस्ती की.

 

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Thank you for a beautiful birthday @andreikoscheev Thank you for all your wishes .

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इस दौरान श्रेया और आंद्रेई ने एक दूसरे के साथ रोमांटिक पल बिताए और तो और उन पलों की फोटोज भी फैंस के साथ इंस्टाग्राम के जरिए शेयर की. इस दौरान एक्ट्रेस श्रेया सरन (Shriya Saran) ने अपने पति आंद्रेई कोसचीव (Andrei Koscheev) के साथ खूब रोमांस किया और ऐसे में दोनों ने एक दूसरे को लिप किस की जिसकी फोटो भी उन्होने शेयर की.

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Hot summer day…. Sending you guys love and happiness 😊 ❤

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श्रेया सरन (Shriya Saran) और आंद्रेई कोसचीव (Andrei Koscheev) की ये लिप किस वाली फोटो फैंस को खूब लुभा रही हैं. इन फोटोज को शेयर करते हुए श्रेया सरन (Shriya Saran) ने कैप्शन में लिखा कि, “Thank you for a beautiful birthday @andreikoscheev Thank you for all your wishes.” आपको बता दें 12 मार्च 2018 को एक्ट्रेस श्रेया सरन ने अपने रशियन बौयफ्रेंड (Russian Boyfriend) आंद्रेई कोसचीव (Andrei Koscheev) से मुंबई में ही शादी की थी.

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पीछा : भाग 3

लेखक- अंजुम फारुख

शेख मजीद बोला, ‘‘इंसपेक्टर साहब, आप के आने से 10 मिनट पहले अफजाल बेग ने दरवाजे पर दस्तक दी थी. मैं ने अपनी जगह बैठेबैठे उसे अंदर आने की इजाजत दे दी. मैं समझा था कि वेटर होगा. अफजाल बेग अंदर दाखिल होते ही चाकू लहराता हुआ मेरी ओर बढ़ा. संयोग से आप ने मुझे पहले ही सचेत कर दिया था, इसलिए मैं पिस्तौल हाथ में लिए बैठा था.’’

‘‘बेचारा अफजाल.’’ सबइंसपेक्टर सलीम की आवाज में दुख और अफसोस था.

‘‘आप उसे बेचारा कह रहे हैं..?’’ शेख मजीद ने सबइंसपेक्टर सलीम को घूर कर देखा और कहा, ‘‘क्या मतलब है आप का?’’

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‘‘मेरा मतलब है, हमें यहां आने में देर हो गई वरना हम उसे बचा लेते.’’

सबइंसपेक्टर सलीम ने रहस्यमय अंदाज में कहा, ‘‘लेकिन इस का कातिल कानून की गिरफ्त से बच नहीं सकता.’’

शेख मजीद ने नागवारी से कहा, ‘‘मैं आप को बता चुका हूं कि यह आदमी मुझे कत्ल करने के लिए चाकू लहराता हुआ मेरी ओर लपका था. मैं ने अपनी सुरक्षा के तहत इस पर गोली चला दी. यह कत्ल नहीं, बचाव का कदम था.’’

इंसपेक्टर जावेद कुछ बेचैनी महसूस कर रहा था. वह कोई बात कहना चाहता था कि सबइंसपेक्टर सलीम ने हाथ उठा कर उसे रोक दिया और बोला, ‘‘सर, हमें बताया गया है कि मकतूल अफजाल बेग पिछले 2 महीनों से शेख मजीद का पीछा कर रहा था. मेरा सुझाव है कि यह मामला जरा उलट कर के तो देखें. यह भी संभव है कि शेख मजीद ही अफजाल बेग का पीछा कर रहा हो.’’

इंसपेक्टर जावेद ने सहमति के अंदाज में अपना सिर हिलाया. शेख मजीद का चेहरा सफेद पड़ गया.

सबइंसपेक्टर सलीम ने मजीद से कहा, ‘‘संभव है कि वे पत्र तुम्हें अफजाल बेग ने भेजे हों. लेकिन यह संभावना ज्यादा ठीक लगती है कि पत्रों का चक्कर तुम्हारी अपनी कारस्तानी हो. क्योंकि मैं समझता हूं कि अफजाल बेग तुम्हारा पीछा नहीं कर रहा था, बल्कि तुम उस का पीछा कर रहे थे.’’

‘‘क्या बकवास है?’’ शेख मजीद के गले से गुर्राहट निकली, ‘‘अगर वे पत्र मैं ने खुद लिखे होते तो मुझे पुलिस की मदद लेने की क्या जरूरत थी.’’

‘‘मैं बताता हूं,’’ सबइंसपेक्टर सलीम ने उस के चेहरे पर अपनी नजरें जमा दीं, ‘‘20 अगस्त को तुम ने स्ट्रीट लेन में साफिया नाम की एक लड़की का कत्ल किया था.

उस लड़की ने तुम्हें धोखा दिया होगा, बेवफाई की होगी या उस से तुम्हारी दुश्मनी रही होगी, इसलिए तुम उस का कत्ल करने को मजबूर हो गए होगे. अफजाल बेग ने तुम्हें कत्ल करते या उस गली से निकलते देख लिया होगा.’’

शेख मजीद गुस्से से सबइंसपेक्टर सलीम को घूरने लगा. उस की बड़ीबड़ी सुर्ख आंखें स्थिर सी हो गई थीं.

सबइंसपेक्टर सलीम ने अपनी बात जारी रखी, ‘‘संभव है, अफजाल बेग ने तुम्हें हत्या करते न देखा हो, लेकिन तुम समझे कि वह तुम्हें देख चुका है, इसलिए तुम ने उस का पीछा करना शुरू कर दिया. शाम के समाचार पत्रों में साफिया के कत्ल की खबर छपी थी और अफजाल बेग का उस में ऐसा कोई बयान नहीं था कि यह कत्ल उस के सामने हुआ है. लेकिन तुम इस संबंध में अपने दिमाग से शक न निकाल सके.

‘‘तुम्हें यह डर सताने लगा कि कभी न कभी अफजाल बेग पुलिस को सूचना अवश्य देगा, इसलिए उस का जिंदा रहना तुम्हारे लिए खतरनाक था. जब तुम्हें मालूम हुआ कि अफजाल बेग देश की सैर करने जा रहा है तो तुम ने भी एक योजना बना ली. तुम ने खुद अपने नाम से पत्र भेजे और देश भर में उस का पीछा करना शुरू कर दिया.

‘‘तुम शक्की आदमी हो, तुम्हें ख्वाब में भी अफजाल बेग दिखाई देता होगा. तुम ऐसी स्थिति पैदा करना चाहते थे कि अगर वह तुम्हारे हाथों मारा जाए तो तुम उस कत्ल को अपने बचाव की कोशिश साबित कर सको.’’

‘‘दिलचस्प कहानी है.’’ शेख मजीद ने कुटिल स्वर में कहा, ‘‘अगर मैं ने किसी लड़की का कत्ल किया होता तो क्या तुम्हें अफजाल बेग तक पहुंचने का मौका देता, क्योंकि तुम्हारे अनुसार वह मेरे अपराध का चश्मदीद गवाह था.’’

‘‘तुम्हें थोड़ाबहुत तो खतरा मोल लेना ही था.’’ सबइंसपेक्टर सलीम ने कहा, ‘‘लेकिन तुम्हारे लिए सब से ज्यादा खतरनाक बात यह थी कि कहीं अफजाल बेग तुम्हें पहचान न ले. उस का पीछा करते समय तुम ने इस बात का खयाल रखा था कि उस के सामने न आने पाओ.

‘‘तुम बराबर उसे कत्ल करने का मौका तलाशते रहे. लेकिन तुम्हें शायद यह मालूम नहीं था कि अफजाल बेग की दूर की नजर बहुत कमजोर थी. उस ने तुम्हें गली में नहीं देखा होगा. अगर देखा भी होगा तो पहचाना नहीं होगा.’’

शेख मजीद ने खुद को संभालते हुए कहा, ‘‘तुम्हारे पास इस इलजाम का कोई ठोस सबूत है?’’

सबइंसपेक्टर सलीम ने उस से पूछा, ‘‘तुम ने लाश को छुआ तो नहीं…’’

‘‘नहीं.’’ शेख मजीद बोला.

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‘‘बहुत अच्छे. अब मैं तुम्हें बताता हूं कि यह सब कुछ कैसे हुआ?’’ सबइंसपेक्टर सलीम ने उस की आंखों में आंखें डाल दीं, ‘‘तुम ने किसी तरह अफजाल बेग को अपने कमरे में बुलाया और उसे कुरसी पेश की. फिर जैसे ही वह कुरसी पर बैठा, तुम ने उस पर गोली चला दी और उस के हाथ में चाकू पकड़ा दिया.’’

शेख मजीद जोर से चीखा, ‘‘नहीं, यह झूठ है.’’ उस के होंठों तथा माथे पर तनाव की लकीरें खिंच गई थीं.

सबइंसपेक्टर सलीम ने इंसपेक्टर जावेद से कहा, ‘‘सर, याद करें जब अफजाल बेग थाने में आया था तो उस ने कुरसी पर बैठते समय अपने पतलून की दोनों मोरी ऊपर खींच ली थीं. बिलकुल यही बात यहां भी दिखाई दे रही है और…’’

फिर उस ने वाक्य को पूरा किए बिना उछल कर शेख मजीद की कलाई पकड़ ली. शेख मजीद मेज पर पड़ा पिस्तौल उठाने की कोशिश कर रहा था.

सबइंसपेक्टर सलीम ने शेख मजीद की कलाई मरोड़ते हुए कहा, ‘‘तुम खतरनाक आदमी हो, तुम्हें आजाद नहीं छोड़ा जा सकता. वैसे अगर तुम पिस्तौल उठाने में सफल हो जाते तो भी मेरा कुछ न बिगड़ता. इंसपेक्टर जावेद तुम्हें पहले ही शूट कर देते. लेकिन यह सजा तुम्हारे लिए ठीक नहीं होती. इस तरह अफजाल बेग को इंसाफ नहीं मिलता.’’

इंसपेक्टर जावेद ने कहा, ‘‘हां, अब तुम अफजाल बेग की हत्या करने की बात स्वीकार करोगे, फिर तुम्हें इसलामाबाद भेज दिया जाएगा. वहां साफिया नाम की लड़की और अफजाल बेग की हत्या के आरोप में तुम पर मुकदमा चलेगा. तुम्हारा बचना नामुमकिन है.’’ इंसपेक्टर जावेद की बात सुन कर शेख मजीद का चेहरा धुआंधुआं हो गया और उस का सिर झुक गया.

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प्रस्तुति: कलीम उल्लाह

पीछा : भाग 2

लेखक- अंजुम फारुख

शेख मजीद थाने से चला गया. फोन पर बात करने के बाद इंसपेक्टर जावेद ने सबइंसपेक्टर जाकिर से कहा, ‘‘आप तत्काल रौयल होटल चले जाएं. वह मोटा आदमी अफजाल बेग होटल की लौबी में बैठा हुआ है. आप उसे यहां ले आएं. अभीअभी मेरी उस होटल के मैनेजर से बात हुई है.’’

आधे घंटे बाद सबइंसपेक्टर जाकिर, अफजाल बेग नाम के उस आदमी को अपने साथ ले आया, जो देखने में मोटा और गोलमटोल सा था. उस ने स्टील के फ्रेम वाला चश्मा लगा रखा था. उस के शरीर पर कीमती कपड़े थे, जो बहुत ढीलेढाले थे.

इंसपेक्टर जावेद ने उसे कुरसी पर बैठने का इशारा किया. उस ने कुरसी पर बैठने से पहले अपनी पतलून की दोनों मोरी ऊपर खींची ताकि आराम से बैठ सके. अफजाल बेग ने इंसपेक्टर जावेद से पूछा कि उसे यहां क्यों बुलाया गया है.

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इंसपेक्टर जावेद, शेख मजीद द्वारा दिए गए पत्रों से तिथिवार उन स्थानों की सूची बना चुका था, जहांजहां मजीद गया था. वह अफजाल बेग से बोला कि आप इन तिथियों को क्वेटा, कराची, हैदराबाद, मुलतान और लाहौर गए थे.

‘‘जी हां,’’ अफजाल बेग की आंखें आश्चर्य से फैल गईं.

‘‘क्या आप बता सकते हैं कि आप ने ये सफर किस उद्देश्य से किए?’’ सबइंसपेक्टर सलीम ने उस से पूछा.

अफजाल बेग के दोनों हाथ उस की तोंद पर थे. वह बिलकुल शांत भाव से कुरसी पर बैठा था. लेकिन जब वह बोला तो उस के स्वर में थोड़ी सी लड़खड़ाहट थी, ‘‘सर, मैं इसलामाबाद की अफजाल ऐंड कंपनी का मालिक हूं. यह फर्म मेरे सहयोगी अच्छी तरह चला रहे हैं. मैं ने शादी नहीं की है, इसलिए मुझ पर परिवार की कोई जिम्मेदारी नहीं है. अत: मैं आजकल अपने देश की सैर करने के लिए निकला हूं. क्या अपने देश की सैर करना कोई अपराध है?’’

‘‘बिलकुल नहीं जी. लेकिन हमें शिकायत मिली है कि आप एक युवक का पीछा कर रहे हैं.’’ सबइंसपेक्टर सलीम, जोकि एक जासूस भी था, ने उस का चेहरा गौर से देखते हुए पूछा.

‘‘पीछा..? नहीं सर, मैं किसी का पीछा नहीं कर रहा हूं. क्या उस युवक ने कोई वजह बताई है कि मैं उस का पीछा क्यों कर रहा हूं. मेरे पास रुपएपैसे की कोई कमी नहीं है. मुझे किसी का पीछा करने की क्या जरूरत है?’’  वह हलकी सी नाराजगी के साथ बोला.

सबइंसपेक्टर जावेद भी अफजाल बेग का बारीकी से निरीक्षण कर रहा था. उस ने शेख मजीद द्वारा दिए गए पत्रों में से एक पत्र निकाल कर उस की ओर बढ़ा दिया और उस के चश्मे के शीशों को घूरता हुआ बोला, ‘‘आप ने यह पत्र उसे क्यों भेजा था?’’

‘‘यह पत्र मैं ने नहीं भेजा, आप को गलतफहमी हुई है.’’ अफजाल बेग के स्वर में आत्मविश्वास था.

वह खड़ा हो कर थोड़ा सा आगे झुका, फिर बोला, ‘‘आप ने बेवजह मेरा समय बरबाद किया. अब मुझे इजाजत दीजिए.’’

इंसपेक्टर जावेद ने उसे रोकने की कोशिश नहीं की. वह दरवाजे की तरफ बढ़ गया.

अफजाल बेग के जाने के बाद इंसपेक्टर जावेद, सबइंसपेक्टर सलीम से बोला, ‘‘आप इस मामले में क्या कहते हैं?’’

‘‘मैं इसे इत्तफाक समझने के लिए तैयार नहीं हूं. कोई आदमी मात्र इत्तफाकन पूरे देश में किसी का पीछा नहीं कर सकता.’’ सबइंसपेक्टर सलीम ने कहा.

‘‘पत्रों की धमकियों से स्पष्ट होता है कि यह कत्ल आदि का मामला है.’’ सबइंसपेक्टर जाकिर बोला.

‘‘मेरा भी यही खयाल है.’’ इंसपेक्टर जावेद ने कहा, ‘‘मैं इसलामाबाद पुलिस को ईमेल कर रहा हूं. संभव है, हमें वहां से शेख मजीद या अफजाल के बारे में कोई अच्छी सूचना मिल जाए.’’

‘‘एक बात खासतौर से मालूम करना.’’ सबइंसपेक्टर सलीम ने मेज पर पड़े पत्रों की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘20 अगस्त को इसलामाबाद की किसी गली में कोई कत्ल तो नहीं हुआ था.’’

ईमेल का जवाब 2 घंटे बाद ही आ गया. उस में लिखा था— अफजाल बेग एक बहुत बड़ी व्यापारिक कंपनी का मालिक है. उस की उम्र 53 साल है. वह स्टील के फ्रेम वाला चश्मा लगाता है और अविवाहित है. उस की कंपनी काफी उन्नति कर चुकी है. कारोबार की देखभाल अब उस के कर्मचारी करते हैं. आजकल वह देश भ्रमण पर निकला है. पुलिस के पास उस के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है.

शेख मजीद का इसलामाबाद में टेक्सटाइल्स का कारोबार है. वह अकसर अपने कारोबार के सिलसिले में एक जगह से दूसरी जगह आताजाता रहता है. उस की उम्र 27 साल है. उस के पास काफी पैसा है. वह इधरउधर पैसे खर्च करता रहता है. मजीद के खिलाफ भी इसलामाबाद पुलिस के पास कोई शिकायत नहीं है.

20 अगस्त को दोपहर ढाई बजे स्ट्रीट लेन में साफिया नामक एक लड़की का कत्ल कर दिया गया था. उस घटना का न तो कोई चश्मदीद गवाह मिला और न ही कातिल का पता चल पाया.

अफजाल बेग और शेख मजीद का इस मामले से कोई संबंध नजर नहीं आता. अगर आप को कुछ पता चला हो तो सूचना दें.

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तभी शेख मजीद का फोन आ गया. उस की आवाज लरज रही थी, ‘‘मुझे अभीअभी एक पत्र और मिला है. उस में सिर्फ इतना लिखा है ‘आखिर तुम ने पुलिस को बता ही दिया.’ अब बताइए, क्या करूं?’’

‘‘मजीद साहब, आप वह पत्र संभाल कर रखिए और यह बताइए कि आप ने इसलामाबाद में स्ट्रीट लेन का नाम सुना है?’’ इंसपेक्टर जावेद ने पूछा.

‘‘जी हां, स्ट्रीट लेन वहां की एक गली है. वहीं के एक गैराज में मैं अपनी कार खड़ी करता हूं. स्ट्रीट लेन से तो मैं रोजाना गुजरता हूं.’’ शेख मजीद ने फोन पर कहा.

‘‘क्या 20 अगस्त को भी आप वहां से गुजरे थे? याद कर के बताइए.’’

‘‘एक मिनट…हां, याद आया. पहला पत्र मिलने से एक दिन पहले की बात है. मैं उधर से ढाई बजे के करीब गुजरा था.’’

इंसपेक्टर जावेद ने कहा, ‘‘ओह! अब समझ में आया कि अफजाल बेग आप का पीछा क्यों कर रहा है. आप होटल के कमरे से बाहर मत निकलिएगा. मैं आ रहा हूं.’’

रौयल होटल के अहाते में कार मोड़ते ही इंसपेक्टर जावेद और सबइंसपेक्टर सलीम को किसी गड़बड़ का अहसास हो गया. होटल के अंदर से किसी की चीखें सुनाई दे रही थीं. बहुत से लोग होटल के प्रवेशद्वार पर एकत्र हो गए थे. वेटर आदि कर्मचारी भी भीड़ में शामिल थे. होटल के मैनेजर ने इंसपेक्टर जावेद से कहा, ‘‘अच्छा हुआ, आप आ गए इंसपेक्टर साहब. कमरा नंबर 77 में एक आदमी का कत्ल कर दिया गया है.’’

पुलिस इंसपेक्टर जावेद, होटल का मैनेजर और सबइंसपेक्टर सलीम लोगों को एक तरफ हटाते हुए आगे बढ़ गए.

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कमरा नंबर 77 में शेख मजीद मौजूद था. वह उन्हें देखते ही उठ खड़ा हुआ. उस के चेहरे से बदहवासी झलक रही थी. मजीद के ठीक सामने कालीन पर अफजाल बेग औंधा पड़ा हुआ था. उस की पतलून की दोनों मोरी ऊपर उठी हुई थी.

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

पीछा : भाग 1

लेखक- अंजुम फारुख

इंसपेक्टर जावेद पेशावर के एक थाने में अपने 2 सहयोगियों सबइंसपेक्टर सलीम और सबइंसपेक्टर जाकिर के साथ बैठा किसी केस पर बातें कर रहा था, तभी एक युवक थाने में दाखिल हुआ. उस के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं. वह बहुत परेशान दिखाई दे रहा था. इंसपेक्टर जावेद ने युवक से पूछा, ‘‘कहिए जनाब, मैं आप की क्या सेवा कर सकता हूं.’’

युवक बोला, ‘‘जी, मेरा नाम शेख मजीद है. मैं इसलामाबाद में रहता हूं और मेरा टेक्सटाइल्स का कारोबार है. मैं अपने कारोबार के सिलसिले में अकसर एक जगह से दूसरी जगह आताजाता हूं.’’

‘‘वो तो ठीक है, मजीब साहब. आप पहले अपनी समस्या बताएं.’’ सबइंसपेक्टर जाकिर ने शेख मजीद से पूछा.

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शेख मजीद कुरसी पर बैठते हुए बोला, ‘‘मैं इसी पौइंट पर आ रहा हूं. मैं जहां कहीं भी आताजाता हूं, एक आदमी मेरा पीछा करता रहता है.’’

सबइंसपेक्टर सलीम ने कागजकलम संभाल लिया था, वह शेख मजीद से बोला, ‘‘उस का हुलिया बताइए?’’

‘‘वह छोटे कद का गोलमटोल सा आदमी है और स्टील के फ्रेम का चश्मा लगाता है. वह पिछले 2 महीने से किसी भूत की तरह मेरा पीछा कर रहा है. मुझे उस से बचा लीजिए इंसपेक्टर साहब.’’

शेख मजीद की बातें सुन कर इंसपेक्टर जावेद ने कहा, ‘‘आप बिलकुल परेशान मत होइए. सब ठीक हो जाएगा. आप अपनी बात जारी रखें.’’

शेख मजीद बोला, ‘‘इंसपेक्टर साहब, अगर वह आदमी सिर्फ मेरा पीछा कर रहा होता, तो मुझे ज्यादा परेशानी नहीं होती. लेकिन मेरा पीछा करने के साथसाथ उस के पत्रों का सिलसिला भी जारी है. मेरा खयाल है, वह कोई बहुत खतरनाक आदमी है और कभी भी मौका पा कर मुझे नुकसान पहुंचा सकता है.’’

‘‘आप शुरू से पूरी बात बताएं.’’

‘‘सर, इस मामले की शुरुआत तब हुई, जब मैं एक दिन अपने मकान की दूसरी मंजिल पर बैठा मोबाइल फोन पर किसी से बात कर रहा था. अचानक एक पत्थर खिड़की का शीशा तोड़ता हुआ मेरी मेज के निकट आ गिरा. मैं ने घबरा कर पत्थर की ओर देखा, तो मेरी नजरें उस से चिपक कर रह गईं. क्योंकि पत्थर के साथ कागज की एक पर्ची भी बंधी थी.’’ फिर शेख मजीद ने अपनी जेब से वह पर्ची निकाल कर इंसपेक्टर जावेद की ओर बढ़ा दी.

इंसपेक्टर जावेद ने पर्ची को बहुत गौर से देखा. पर्ची किसी सस्ती नोटबुक से फाड़ी गई थी और उस के अक्षरों को किसी समाचार पत्र से काटकाट कर शब्दों का रूप दिया गया था. पर्ची में सिलवटें पड़ी हुई थीं. उस पर्ची पर दिनांक 20 अगस्त भी अंकित था, जो समाचार पत्र से काट कर चिपकाया गया था.

पर्ची पर लिखा था ‘कल तुम ने गली में जो कुछ देखा है, उसे भूल जाओ. तुम्हारी याद्दाश्त तुम्हारे लिए हानि की वजह बन सकती है. मैं तुम्हारी निगरानी करता रहूंगा.’

उस पर्ची को देखने के बाद इंसपेक्टर जावेद ने उसे दोनों सबइंसपेक्टरों की ओर बढ़ा दिया.

सबइंसपेक्टरों ने पूछा, ‘‘मजीद साहब, आप ने गली में क्या देखा था?’’

‘‘कुछ नहीं, मैं ने कुछ देखा हो तभी न. इसीलिए पत्र का मतलब मेरी समझ में नहीं आया.’’ शेख मजीद बोला, ‘‘पहले मुझे लगा था कि किसी बच्चे की शरारत होगी. मगर जब मैं ने खिड़की से झांक कर बाहर देखा तो कोई बच्चा नजर नहीं आया. हां, गली में एक युवक और युवती जरूर आपस में बातें कर रहे थे.

‘‘उन से कुछ ही दूरी पर एक पुलिस वाला टहलता हुआ जा रहा था और एक खंभे के पास छोटे कद का एक गोलमटोल सा आदमी खड़ा था. उस ने स्टील के फ्रेम का चश्मा लगा रखा था. उस के हाथ में चहलकदमी करने वाली छड़ी थी. मेरी निगाहें उसी आदमी पर जम कर रह गईं.’’

शेख मजीद कुछ देर के लिए रुका, फिर बोला, ‘‘उस आदमी का चेहरा मेरे दिलोदिमाग में इस तरह बैठ गया कि मुझे घबराहट होने लगी. मुझे लगा कि मैं खतरे में हूं, इसलिए मुझे यह शहर छोड़ देना चाहिए. इसी के मद्देनजर मैं ने हवाई जहाज से क्वेटा जाने की सीट बुक करवा ली.

‘‘अगले दिन मैं हवाई जहाज में सवार हुआ और अपनी सीट पर सो गया. एयरपोर्ट पर हवाई जहाज से उतरते समय मैं ने देखा कि वह गोलमटोल सा आदमी भी उतर रहा है. यह देखते ही मेरी सांस रुक गई. पहले तो मैं ने समझा कि यह इत्तफाक हो सकता है, लेकिन जब दूसरे दिन होटल के कमरे में दरवाजे के नीचे से एक पत्र फेंका गया तो मुझे कुछ सोचना पड़ा.’’

शेख मजीद ने वह पत्र इंसपेक्टर जावेद की ओर बढ़ा दिया. यह पत्र भी अखबार से अक्षरों को काट कर, फिर कागज पर चिपका कर तैयार किया गया था. पत्र में लिखा था ‘खामोशी में ही भलाई है.’

इंसपेक्टर जावेद उस पत्र को मेज पर रख कर बोला, ‘‘आप अपनी बात जारी रखें, मजीद साहब.’’

‘‘इस वाक्य ने मुझे बुरी तरह डरा दिया था.’’ शेख मजीद बोला, ‘‘मैं जल्दीजल्दी होटल बदलता रहा. क्या बताऊं कहांकहां भटकता फिरा. मैं ने कराची के एक होटल में कमरा ले लिया. वहां एक हफ्ता आराम से रहा. मैं ने समझा था कि मुझे उस आदमी से छुटकारा मिल गया.

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‘‘लेकिन यह मेरी गलतफहमी थी. जल्द ही मुझे कुरियर से एक पत्र मिला. यह पत्र भी पहले के 2 पत्रों जैसा था. उस में लिखा था ‘याद रखो, तुम्हें वह सब भूलना है.’ उस पत्र से मैं दहल गया.’’

शेख मजीद कुछ क्षण के लिए रुका, फिर इंसपेक्टर जावेद की ओर देखते हुए आगे बोला, ‘‘उसी दिन डाइनिंग हाल में नाश्ते के समय वह आदमी मुझे फिर दिखाई दिया. वह मेरी मेज से 10 फुट दूर एक मेज पर बैठा था. मेरे बैठते ही वह उठ कर बाहर जाने लगा. मैं ने उस आदमी के बारे में पूछा कि वह कौन है तो पता चला कि उस का नाम अफजाल है और वह कमरा नंबर 402 में ठहरा हुआ है.

‘‘नाश्ता करने के बाद मैं रिसैप्शन पर गया और कस्टमर्स का रजिस्टर देखा. मुझे पता चला कि उस ने 10 मिनट पहले होटल छोड़ दिया है.’’ शेख मजीद अपनी कहानी सुना रहा था या दर्द बयां कर रहा था, उस के चेहरे से समझना मुश्किल था.

‘‘मजीद साहब, इन पत्रों को ले कर आप ने पुलिस से संपर्क तो किया होगा.’’ इंसपेक्टर जावेद ने पूछा.

‘‘नहीं.’’ शेख मजीद ने कहा.

‘‘क्यों?’’ सबइंसपेक्टर सलीम ने उस के चेहरे पर नजरें गड़ा दीं.

‘‘मैं इन पत्रों को उस आदमी का पागलपन समझ रहा था. मैं सोच रहा था कि वह एक दिलचस्प खेल खेल रहा है कि क्या मैं उस से पीछा छुड़ा पाता हूं या नहीं. इसलिए मैं ने तब पुलिस से संपर्क नहीं किया. लेकिन जब देखा कि मामला गंभीर हो रहा है तो मैं ने आज थाने की शरण ली.’’

शेख मजीद ने आगे बताया, ‘‘उस के बाद मैं हैदराबाद, मुलतान और लाहौर गया. हर जगह हर शहर में उस आदमी की शक्ल दिखाई दी. कई बार तो मैं जिस होटल में ठहरता था, वह वहां भी नजर आ जाता था. यही नहीं, उस के द्वारा भेजे जाने वाले पत्रों का सिलसिला भी जारी रहा.

‘‘कई पत्रों में सिर्फ उस दिन की तारीख लिखी होती. मैं चाहता था कि उस आदमी से मिल कर साफसाफ बात कर लूं. लेकिन फिर मैं ने सोचा कि अगर उस ने पत्रों के बारे में इनकार कर दिया तो मैं क्या कर लूंगा. इसी तरह अगर उस ने पीछा करने की बात भी नकार दी तो क्या होगा. शेख मजीद की बात जारी थी.

उस ने कहा, ‘‘कल मैं यहां (पेशावर) के रौयल होटल में ठहरा. मुझे यहां भी अपने कमरे में पहले जैसा एक पत्र मिला, जिस में लिखा था, ‘तुम दुनिया के किसी भी कोने में चले जाओ, मेरी नजरों से छिप नहीं सकते.’ ऐसी स्थिति में मुझे आप के पास आना पड़ा.’’

‘‘क्या तुम्हें अफजाल बेग होटल में दिखाई दिया?’’ सबइंसपेक्टर जाकिर ने शेख मजीद से पूछा.

‘‘अभी तक मैं ने उसे रौयल होटल में नहीं देखा है, लेकिन मैं ने एक वेटर से मालूम किया है कि अफजाल बेग नाम का आदमी वहीं ठहरा है. आप मेहरबानी कर के मुझे उस आदमी से बचाएं.’’ शेख मजीद ने अपने दोनों हाथ जोड़ते हुए निवेदन किया.

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‘‘ठीक है, हम देखते हैं, आप की क्या मदद की जा सकती है.’’ इंसपेक्टर जावेद ने कहा और फोन उठा कर कहीं बात करने लगा.

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

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