वो 6 घंटे : भाग 2

पहला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें-वो 6 घंटे: इस रेप कांड से हिल गई थी झारखंड की बुनियाद

अब आगे…

आठों कलाकारों के साथ घटना घटे 24 घंटे बीत गए थे. खूंटी की रहने वाली सीमा को भीतर ही भीतर बुरी तरह घुटन महसूस हो रही थी. उन लोगों द्वारा दी गई यातना उस से बरदाश्त नहीं हुई तो उस ने अपने मांबाप से आपबीती सुना दी और फफकफफक कर रोने लगी.

बेटी के साथ हुई घटना को मांबाप ने सुना तो सन्न रह गए. बात कोई छोटीमोटी नहीं थी. बेटी की मानमर्यादा को तारतार कर के उस के गुप्तांगों को सिगरेट से जलाया गया था. उन दरिंदों ने यातना की सारी सीमाएं लांघ दी थीं. सीमा और उस के बाकी साथियों के साथ क्याक्या हुआ था, उस ने मांबाप को पूरी बात विस्तार से बता दी.

दरअसल, बीते 19 जून को खुद को बुरुडीह का मुखिया बता कर जो युवक गांव में नुक्कड़ नाटक कराने की बात कह कर आठों कलाकारों को अपने साथ ले गया था, वह उन्हें गांव न ले जा कर एक घने जंगल में ले गया था. वाहन चला रहे आशा किरण संगठन के चालक संजय शर्मा को मारपीट कर बीच रास्ते में उतार दिया गया था.

गाड़ी के पीछे चल रहे मोटरसाइकिल सवारों में से एक नीचे उतरा और संजय की जगह ड्राइविंग सीट पर सवार हो कर वाहन चलाने लगा. वे लोग जिस जंगल के बीच वाहन को ले गए, वहां पहले से ही कई लोग मौजूद थे. उन के पास खतरनाक हथियार थे.

मुखिया ने सभी युवक और युवतियों को वाहन से निकलने का आदेश दिया. फरमान जारी होते ही सभी एकएक कर के वाहन से नीचे उतर आए और एक कतार में खडे़ हो गए. उन के कतार में खड़े होते ही हथियारबंद युवकों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया.

उन लोगों के हाथों में हथियार देख कर आठों कलाकार कांपने लगे. मुखिया आगे बढ़ा और पांचों युवतियों में से सीमा के नजदीक पहुंचा. पहले तो उस ने सीमा को खा जाने वाली नजरों से घूरा, फिर एकाएक उस के बालों को अपनी मुट्ठी में भर कर खींचा. सीमा दर्द के मारे बिलबिला उठी. वह चिल्लाया, ‘‘हरामजादी कुतिया, और चिल्ला.’’

मुखिया की आंखों से क्रोध के अंगारे बरसने लगे, ‘‘तुम्हारा चीखनाचिल्लाना सुन कर मेरे दिल को सुकून मिला.’’

‘‘पर आप हो कौन?’’ सीमा ने साहस जुटा कर सवाल किया, ‘‘और इस तरह हमारे साथ जंगली जानवरों जैसा व्यवहार क्यों कर रहे हो? आखिर हम ने किया क्या है?’’
‘‘बहुत नाटक करती है हरामजादी और मुझ से पूछती है कि तेरा दोष क्या है?’’ मुखिया दांत भींचते हुए बोला.
‘‘लेकिन हमारे नाटक से आप का क्या संबंध है?’’

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‘‘है. तुम्हारे नाटक करने से हमारा बहुत गहरा संबंध है. तुम जो नाटक कर के समाज के लोगों को जागरूक करने की कोशिश कर रहे हो, वही तुम्हारा सब से बड़ा दोष है. तुम्हें और तुम्हारे साथियों को इस दोष की ऐसी सजा दी जाएगी, जो जीवन भर नासूर बन कर तुम्हारे जमीर को चुभेगी.’’

‘‘प्लीज हमें छोड़ दीजिए, हमें हमारे घर जाने दीजिए.’’ सीमा दोनों हाथ जोड़ कर उस के सामने गिड़गिड़ाई, ‘‘अगर हमारे नाटक करने से आप को परेशानी है तो आज के बाद हम नाटक नहीं करेंगे. प्लीज, हमें छोड़ दीजिए.’’

‘हम तुम्हें और तुम्हारे बाकी साथियों को छोड़ भी देंगे, घर भी जाने देंगे लेकिन सजा देने के बाद, समझी?’’ इतना कह कर मुखिया ने उस के बाल छोड़ दिए. फौरी तौर पर सीमा को थोड़ी राहत मिली.

दरिंदगी की इंतहा

सीमा को यातना देते देख बाकी साथियों की सांस गले में अटक गई थी. उन के मुंह से एक बोल तक नहीं फूटा. इस के बाद मुखिया ने अपने साथियों को इशारा किया.

उस का इशारा पाते ही 5 युवक, जिस में मुखिया भी शामिल था, पांचों लड़कियों को खींच कर वहां से थोड़ी दूर जंगल के भीतर ले गए और एकएक कर के उन के साथ अपना मुंह काला किया. उन के साथ एक युवक और भी था, जो अपने और लड़कियों के मोबाइल से दुष्कर्म के समय की वीडियो बना रहा था.

इन दरिंदों का जब इतने पर भी दिल नहीं भरा तो उन्होंने उन के गुप्तांगों को सिगरेट से दाग दिया. सिगरेट की जलन से वे बुरी तरह बिलबिला उठीं. वे दरिंदों के सामने हाथ जोड़ कर भीख मांग रही थीं कि वीडियो न बनाएं लेकिन उन हैवानों पर उन की याचनाओं का कोई असर नहीं हुआ.

दरिंदे सिगरेट से गुप्तांग के जलाए जाने का भी नजदीक से वीडियो बना रहे थे. हैवानों ने उन के साथ कई बार अपना मुंह काला किया. इतना ही नहीं, उन्होंने लड़कों को भी नहीं छोड़ा. लड़कों के साथ भी अप्राकृतिक दुष्कर्म किया गया. इतना ही उन्हें अपना पेशाब पिलाया और इस कृत्य की भी वीडियो बनाई.

उन नरपिशाचों ने 6 घंटों तक आठों युवकयुवतियों के साथ यातनाओं का घिनौना खेल खेला. जब शाम ढलने लगी तो सभी युवकयुवतियों को उन्हीं के वाहन में डाल कर स्कूल पहुंचा दिया गया. स्कूल पहुंच कर उन्होंने फादर अल्फोंस आइंद से आपबीती सुनाई. लेकिन फादर आइंद ने मदद करने की बजाए उन्हें डराधमका कर चुप करा दिया.

बहरहाल, सीमा की दिलेरी से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई तो उस के मांबाप ने आशा किरण की संस्थापिका जेम्मा ओएसयू को पूरी बात बताई, जिन की जिम्मेदारी पर बच्चियां नुक्कड़ नाटक करने गई थीं. बच्चियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संगठन की थी, लेकिन उन की सुरक्षा नहीं की गई थी.

सिस्टर जेम्मा ने दिल दहला देने वाली घटना सुनी तो भौचक रह गईं. उन्हें ताज्जुब तो इस बात पर हो रहा था कि 24 घंटे बीत जाने के बाद भी मामला पुलिस तक नहीं पहुंचा, बल्कि उसे दबा दिया गया था. लेकिन वे खुद चुप बैठने वालों में से नहीं थीं.

21 जून, 2018 की दोपहर को सिस्टर जेम्मा अड़की थाने पहुंचीं और पुलिस को घटना की लिखित तहरीर दी. तहरीर पढ़ कर एसओ विपिन सिंह के होश उड़ गए. इतनी बड़ी और शर्मनाक घटना की पुलिस को सूचना तक नहीं मिली थी.

सिस्टर जेम्मा की तहरीर पर आननफानन में अड़की पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया. एसओ विपिन सिंह जानते थे, जेम्मा कोई ऐसीवैसी महिला नहीं हैं, उन की पहुंच ऊपर तक है. सो उन्होंने त्वरित काररवाई की.

अज्ञात बदमाशों के खिलाफ भादंवि की धारा 341, 342, 323, 363, 365, 328, 506, 201, 120बी के तहत केस दर्ज कर लिया गया. मुकदमा दर्ज होते ही इस घटना की जानकारी पूरे जिले में फैल गई. यह बात जब शहर के एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा तक पहुंची तो आननफानन में वे अड़की थाना पहुंचे और मामले की पूरी जानकारी ली.

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घटना छोटीमोटी नहीं थी. साथ ही मानवाधिकार से भी जुड़ी हुई थी. एसपी अश्विनी ने अपनी गरदन बचाते हुए यह सूचना आईजी नवीन कुमार और डीआईजी अमोल वी. होमकर को दे दी. हकीकत सुन कर पुलिस अधिकारी सकते में आ गए. उसी दिन शाम होतेहोते यह मामला पुलिस महानिदेशक डी.के. पांडेय, एडीजी आर.के. मल्लिक से होते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास तक जा पहुंचा.

22 जून को मुख्यमंत्री रघुबर दास ने प्रदेश के पुलिस प्रमुख डी.के. पांडेय को अपने औफिस बुला कर उन के साथ आपात बैठक की. बैठक में उन्होंने मामले की गहन जांच के आदेश दिए और साजिश का परदाफाश करने को कहा. यही नहीं, उन्होंने दोषियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के भी आदेश दिए.

मुख्यमंत्री के आदेश के बाद डीजीपी डी.के. पांडेय ने आईजी नवीन कुमार को निर्देश दिया कि अविलंब सभी पीडि़तों की सुरक्षा बढ़ा दी जाए और उन से आरोपियों के बारे में पूछताछ की जाए. उन से जानकारी जुटा कर आरोपियों के स्कैच बनवाए जाएं.

आईजी नवीन कुमार का फरमान जारी होते ही एसपी अश्विनी कुमार ने आठों पीडि़तों को पूछताछ के लिए सुरक्षा घेरे में ले लिया. उन के रहने की व्यवस्था थाना अड़की में की गई. सुरक्षा की दृष्टि से उन से किसी की भी बात कराने पर पाबंदी लगा दी गई थी, ऐसा इसलिए किया गया था कि इस मामले की जानकारी बाहर न जा सके.

थाने में हुई पीडि़तों से पूछताछ के आधार पर 3 आरोपियों के स्कैच बनवा कर शहर में जगहजगह चस्पा करा दिए गए. उन पर ईनाम भी घोषित किया गया. उस के बाद सभी पीडि़तों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया. मैडिकल रिपोर्ट में उन सभी के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई.

खैर, 5 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस को कोई खास सफलता नहीं मिली. लेकिन छठे दिन अचानक ही पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिल गई. शहर में लगाए गए पोस्टरों में से स्कैच वाले 2 युवकों की पहचान हो गई. दोनों आरोपियों के नाम अजूब सांडी पूर्ती और आशीष लुंगा थे. वे खूंटी जिले के पश्चिम सिंहभूम गांव के रहने वाले थे.

अगले और आखिरी भाग में पढ़िए पुलिस को किसका डर था?

हरियाणा में खोखले महिला सुरक्षा के दावे

सोमवार, 26 अक्तूबर को राजधानी नई दिल्ली से सटे राज्य हरियाणा के बल्लभगढ़ (फरीदाबाद) इलाके से एक दिल दहला देने वाली हत्या की वारदात सामने आई है. अग्रवाल कालेज से बीकौम फाइनल ईयर की 21 साल की छात्रा निकिता तोमर को 2 नौजवानों तौसीफ और रेहान ने दिनदहाड़े पिस्तौल से शूट कर के जान से मार डाला.

यह कालेज बल्लभगढ़ के नाहर सिंह मैट्रो स्टेशन से महज एक किलोमीटर की दूरी पर है. यह वारदात तब हुई जब निकिता अपना बीकौम फाइनल ईयर का एग्जाम दे कर घर लौट रही थी. आरोपियों ने उसे कालेज के बाहर ही घेर लिया. कुछ देर चली जोरजबरदस्ती और किडनैप करने की नाकाम कोशिश के बाद आरोपी ने देशी तमंचे से 2 फुट की दूरी से निकिता के माथे पर गोली मार दी.

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गोली लगने के तुरंत बाद घायल निकिता को बल्लभगढ़ के ‘मानवता अस्पताल’ में ले जाया गया जहां डाक्टरों ने उसे मरा हुआ बता दिया.

इस घटना के बाद सिर्फ बल्लभगढ़ में ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य में सन्नाटा पसर चुका है और यह मामला एक बार फिर पूरे देश में लचर होती महिला सिक्योरिटी पर सवालिया निशान लगा गया है.

आरोपी और पीड़िता की जानपहचान

हत्या का मुख्य आरोपी तौसीफ खानपुर इलाके से संबंध रखता है. यह इलाका मेवात जिले की नूह तहसील में पड़ता है. मेवात जिला भारत के कुल 739 जिलों में से सब से ज्यादा पिछड़े जिलों में आता है. यहां की बहुसंख्यक आबादी अल्संख्यक समुदाय से है व यहां के वर्तमान विधायक आफताब अहमद हैं जो खुद आरोपी के खास रिश्ते में लगते हैं. कहा जाता है कि आरोपी परिवार के लोगों का राजनीतिक और सामाजिक तौर पर खासा दबदबा है. वहीं, इस हत्याकांड में मारी गई निकिता तोमर का घर ‘अपना घर सोसाइटी’ में था. यह सोसाइटी बल्लभगढ़ के सैक्टर 52 के पास सोहना रोड़ बनी है. इस इलाके के भीतर कई निजी अपार्टमैंट्स हैं, जो पूरी तरह से लोगों के रहने के लिए बनाए गए हैं.

इस वारदात के सामने आने के बाद कुछ लोगों से बात कर के पता चला कि आरोपी और पीड़िता एकदूसरे को पहले से जानते थे. दोनों ने एक ही स्कूल में पढ़ाई की थी. तौसीफ स्कूल समय से ही कथिततौर पर पीड़िता को परेशान करता रहा था. निकिता और आरोपी तौसीफ दोनों की स्कूली पढ़ाई बल्लभगढ़ में सोहना रोड पर बने एक प्राइवेट ‘रावल स्कूल’ से हुई थी. स्कूल के समय में साल 2018 में एक दफा तौसीफ पर निकिता के अपहरण और परेशान करने का मामला भी दर्ज हुआ था, जिसे बाद में दोनों पक्षों की आपसी रजामंदी के बाद मामला पंचायत में ही निबटा दिया गया. हालांकि इस मामले को ले कर पीड़ित पक्ष का कहना है कि उस दौरान आरोपी के राजनीतिक रसूख और इलाकाई दबदबे के दबाव में उन्हें यह फैसला लेना पड़ा.

गिरफ्त में आरोपी

यह पूरी वारदात सीसीटीवी में कैद हुई है, जो काफी तेजी से वायरल भी हो रही है. वीडियो के बाहर आने के बाद स्थानीय जनाक्रोश भड़कता दिखाई दे रहा है. इसी का नतीजा यह रहा कि मंगलवार, 27 अक्तूबर को पीड़ित परिजन और स्थानीय लोगों ने सैकड़ों की तादाद में जमा हो कर मथुरा नैशनल हाईवे पर फ्लाईओवर के नजदीक चक्का जाम किया. उसी दिन देर शाम अधिकारियों द्वारा मिले आश्वासन के बाद ही लोग वहां से हटे और हाईवे का रास्ता खोला गया. निकिता के पार्थिव शरीर का देर शाम बल्लभगढ़ के सैक्टर 55 के श्मशान घाट पर किया गया.

वारदात के बाद ही उसी दिन देर रात तक पुलिस द्वारा मुख्य आरोपी 21 साला तौसीफ को गिरफ्तार कर लिया गया था. उस के सहयोगी आरोपी रेहान को 24 घंटों के भीतर गिरफ्तार किया गया. इन हुई गिरफ्तारियों को पुलिस और राज्य सरकार अपनी मुस्तैदी से जोड़ कर बता रही हैं.

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पुलिस द्वारा बताई जानकारी के मुताबिक आरोपी तौसीफ गुरुग्राम के सोहना रोड का रहने वाला है, जबकि रेहान हरियाणा के नूह जिले का रहने वाला है. गिरफ्तारी के बाद तौसीफ ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया है, जिस के बाद आगे की जांच जारी रखी गई है. हालांकि राज्य सरकार द्वारा यह मामला एसआईटी को सौंपा जा चुका है और इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में भी भेजा जा चुका है, जिस के चलते दोनों आरोपियों को फिलहाल हाईकोर्ट ने 2 दिन की पुलिस रिमांड पर रखने को कहा है.

इलाके में दहशत व गुस्सा

इस वारदात के बाद से इलाके में दहशत और गुस्से दोनों तरह का माहौल बना हुआ है. मैट्रो स्टेशन से बाहर निकलते ही लोगों के बीच दबी जबान में इस मामले को ले कर बातें होने लगीं. उसी कालेज से बीएससी सैकंड ईयर की पढ़ाई कर रहे हिमांशु बताते हैं, ‘अग्रवाल कॉलेज की 2 ब्रांच हैं. यह वारदात कालेज के मेन गेट से थोड़ी सी दूरी पर हुई थी. मुझे इस वारदात के बारे में रात को तब पता चला, जब मेरे फोन पर यह वायरल वीडियो आया था. मैं पूरी तरह घबरा गया था, क्योंकि यह मेरे कालेज का मामला था. अब उस एरिया के आसपास जाने में अजीब सी कसमसाहट होने लगी है. मेरे मातापिता को जब इस बारे में पता चला तो वे भी घबरा गए. दिनदहाड़े इस तरह की वारदात होना किसी भी छात्र के लिए डरने वाली बात है.’

हिमांशु के साथ आई उन की दोस्त अनु (बदला नाम) का कहना है, ‘इस तरह की वारदात अगर घटेगी तो कोई लड़की कैसे पढ़ पाएगी. वैसे ही लड़कियां बहुत कम बाहर निकल कर पढ़ाई या काम कर पाती हैं, ऊपर से अगर इस तरह की वारदातें सामने आती हैं तो हम तो उन परिवारों में से हैं जहां मांबाप सीधे पढ़ाई छुड़वा देते हैं.’

जहां एक तरफ इस वारदात से दहशत का माहौल पनपा है, वहीं दूसरी तरफ लोगों में इसे ले कर गुस्सा भी देखने को मिला. काफी तादाद में लोगों ने बल्लभगढ़ नैशनल हाईवे को पूरे दिन जाम कर के रखा था. कांग्रेस व भाजपा के कई स्थानीय नेता इस में शामिल हुए थे. मौजूदा हरियाणा के कैबिनेट मंत्री मूल चंद शर्मा भी थे, पर उन्हें भी नाराज प्रदर्शनकारियों ने वहां से जाने को कह दिया. इन्हीं के बीच पीड़ित परिजन दोषियों को तुरंत फांसी दिए जाने या एनकाउंटर की बात कर रहे थे.

लव जिहाद का आरोप

धरने पर बैठी निकिता की मां से जब पूछा गया कि उन की सरकार से क्या मांग हैं, तो उन का साफ कहना है, ‘जो मेरी बेटी के साथ हुआ है उन का (आरोपियों) भी पुलिस वाले एनकाउंटर करें मेरे सामने. मैं बेटी को अग्नि तब दूंगी जब उस का एनकाउंटर हो जाएगा.’

निकिता के भाई ने कहा, ‘2018 में पहले भी आरोपी तौसीफ के खिलाफ हम ने शिकायत दर्ज करवाई थी. उस समय मामला निकिता के अपहरण का था. पुलिस ने उस समय आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था. लेकिन उस के बाद हमारा (दोनों पक्षों का) बैठ कर पंचायत में समझौता हो गया था. हम ने केस वापस ले लिया था.’

2 अगस्त, 2018 को पीड़ित परिजन (पिता) द्वारा आरोपी के खिलाफ पुलिस में पहले भी शिकायत दर्ज की गई थी, जिस में निकिता को आरोपी द्वारा लगातार परेशान किए जाने और लड़की के लापता होने की बात आई थी. कुछ ही समय में पुलिस ने लड़की को छुड़वा लिया था.

हालांकि अब निकिता की हत्या के बाद पीड़ित परिजन ने आरोपियों पर यह आरोप भी लगाया है कि निकिता की हत्या लव जिहाद और धर्मांतरण को नकारने के चलते की गई है.

निकिता के मामा अदल सिंह ने इस मामले पर हम से बात करते हुए कहा, ‘यह लव जिहाद है. वह लड़की से जबरदस्ती शादी कर रहा था, तो क्या इस का मतलब है, बताइए आप? इन का (मुसलिमों) यह है कि हिंदुओं की लड़की को खत्म करो, हिंदुओं की लड़कियों को भगाओ, फिर बाहर विदेशों में बेच देते हैं.’

जारी राजनीतिक उठापटक

मामले के चर्चा में आने के बाद दक्षिणपंथी संगठन इस मामले पर सक्रिय हो गए हैं. इसे ले कर वहां शामिल धार्मिक संगठन, देव सेना, के कथित राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजभूषण सैनी, जिन के कंधे पर सवा फुट की कृपाण टंगी थी, का कहना है, “यह कोई पहला मामला नहीं है इस देश में, बल्कि हर राज्य और है जिले में हिंदुओं को टारगेट किया जा रहा है. बेटी हिंदुओं की अपहरण करने वाले, लव जिहाद करने वाले सारे जिहादी हैं. पूरे देश में साजिश के तहत इन की लौबी काम कर रही है, जिस में हिंदुओं को अपहरण कर के ले जाने की कोशिश थी मेवात में’

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‘सरकार चाहे भाजपा की हो या कांग्रेस की, तुष्टिकरण की नीति हर कोई अपनाता है. वोट इन्हें हिंदुओं के चाहिए, लेकिन काम इन्हें मुसलमानों के करने हैं.’

इस मसले पर फरीदाबाद पुलिस कमिश्नर ओपी सिंह ने अधिकारिक तौर पर जो बयान दिया, उस में उन्होंने कहा, ‘इस मामले को ले कर हम काफी संजीदा हैं. एक युवती के साथ घिनौना अपराध हुआ है, जिस कारण इसे क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है. इस के ऊपर एक एसआईटी बनाया है और एक राज्यपद अधिकारी इस की जांच करेंगे, जिस में तमाम सुबूतों को जमा कर जिस में वीडियो फुटेज, चश्मदीद गवाह, डिजिटल व फोरैंसिक सुबूतों को जमा कर के केस बनाया जाएगा.’

फिलहाल इस मामले को ले कर आरोपी पक्ष की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक जो बात सामने आई है वह यह कि उस ने निकिता तोमर की हत्या बदला लेने के मकसद से की था, जिस में पुलिस जांच के दौरान आरोपी ने बताया कि उस ने बदला इसलिए लिया, क्योंकि 2018 की घटना के बाद वह अपनी पढ़ाई नहीं कर पाया था और निकिता किसी और से शादी करने जा रही थी.

आरोपियों के खिलाफ फिलहाल सैक्शन 302 (हत्या), 34 (क्रिमिनल ऐक्ट डन बाई सैवेरल पर्सन) आईपीसी और सैक्शन 25 (गैरकानूनी हथियार रखने) के तहत मामला दर्ज किया गया है. हालांकि पीड़ित परिजन एफआईआर में कुछ बातें शामिल करने की बात कर रहे हैं, जिन में लव जिहाद का पहलू जुड़वाना शामिल है.

राजनीति गरमाने लगी

इस हत्याकांड के आरोपी तौसीफ के दादा कबीर अहमद 2 बार  विधायक रह चुके हैं. दादा के भाई खुर्शीद अहमद हरियाणा से गृह मंत्री भी रह चुके हैं. वहीं चचेरा भाई भी विधायक रहे हैं, साथ ही हुड्डा सरकार में परिवहन मंत्री भी रहे हैं. चाचा जावेद अहमद ने इस साल बसपा से चुनाव लड़ा था, पर वे हार गए थे.

जहां एक तरफ कांग्रेस पार्टी के आरोपी के परिवार से राजनीतिक संबंध के चलते वह रडार पर है, वहीं भाजपा राज में बढ़ते गुंडाराज और खराब होती कानून व्यवस्था से भी लोग खासा नाराज हैं.

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस मसले पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाने का आश्वासन दिया. उन्होंने अपना बचाव करते हुए कहा, ‘अपराधी को पूरी सजा दी जाएगी. अपराध होने के बाद पुलिस ने 24 घंटे में ही आरोपी को पकड़ लिया.’

कांग्रेस के हरियाणा के मुख्य नेता व प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला इस मसले पर मुख्यमंत्री पर जम कर बरसे. उन्होंने हरियाणा में महिलाओं की सुरक्षा को ले कर सवाल किए, ‘क्या बेटियां इसी प्रकार से सुरक्षित रहेंगी खट्टर साहब? हरियाणा में पिछले 2 साल में महिला अपराधों में 45 फीसदी बढ़ोतरी हुई है. हरियाणा गैंगरेप में नंबर 1 पर है.’

इस के अलावा उन्होंने दोषियों को 30 दिन के सीमित समय में सजा दिए जाने की बात कही.

फिलहाल इस मामले में एसीपी अनिल कुमार की अगुआई में एसआईटी का गठन किया गया है, जो पीड़ित परिवार से मिलने उन के घर पहुंचा. फरीदाबाद के सांसद और मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर भी पीड़ित परिवार से मिले थे.

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पुलिस ने अपराध के दौरान इस्तेमाल की गई कार का भी पता लगा लिया है जिस का लिंक दिल्ली से बताया जा रहा है. अपराध के दौरान इस्तेमाल किए गए हथियार को भी बरामद कर लिया गया है.

चिंता की बात

खैर, अब यह देखना है कि पीड़ित परिजन को इस मामले में कितने दिन में इंसाफ मिलता है. भले सरकार में बैठे पदाधिकारी अपनी पीठ यह कह कर ठपथपा रहे हों कि उन्होंने आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ने की कोशिश की है, पर सवाल यह है कि आखिर ऐसी नौबत आई ही क्यों? आखिर क्यों जब पुलिस के संज्ञान में यह मामला 2018 से आ चुका था, तो निकिता को सुरक्षा मुहैया करने में कोताही क्यों की गई?

2018 की एनसीआरबी की रिपोर्ट बताती है कि हरियाणा में क्राइम रेट पहले से 45 फीसदी बढ़ा है. पहले जो आंकड़े 9,839 थे वे बढ़ कर औसतन 15,336 हो गए हैं. हरियाणा उन 4 टौप राज्यों में है जहां रैप के बाद मर्डर की अधिकाधिक वारदातें हुई हैं. ‘हरियाणा स्टेट कमीशन फौर वीमेन’ की इस साल की रिपोर्ट अनुसार लौकडाउन में हरियाणा के अंदर रिकौर्ड 78 फीसदी महिला विरोधी अपराधों में वृद्धि हुई है.फिर सवाल यह कि महिला सुरक्षा के नाम पर सरकारें बेदम क्यों हैं? जगह बदल जाती है, पर अपराध वही रहता है और शिकार भी औरत समाज ही बनता है. यह देश के रहनुमाओं लिए शर्मनाक बात है.

भोजपुरी स्टार पवन सिंह का रिलीज हुआ नया सुपरहिट गाना, मिला धमाकेदार रिस्पॉन्स

भोजपुरी इंडस्ट्री के जाने माने एक्टर और सिंगर पवन सिंह (Pawan Singh) एक बार फिर अपने नए गाने के चलते सुर्खियों में आ गए हैं. इस गाने में सुपरस्टार पवन सिंह (Pawan Singh) बिल्कुल अलग अवतार में नजर आ रहे हैं और तो और उनका स्वैग देख तो उनके फैंस हैरान हो गए हैं. आपको बता दें पवन सिंह (Pawan Singh) के इस सुपरहिट गाने का नाम है “यार 75” (Yaar 75) और लगभग 2 हफ्तों में इस गाने को जबरदस्त रिस्पौंस मिला है.

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इस गाने को यू-ट्यूब पर अब तक 5.5 मिलियन से भी ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं और तो और इस गाने पर अब तक 1 लाख 25 हजार से भी ज्यादा लाइक्स आ चुके हैं. पवन सिंह (Pawan Singh) के इस धमाकेदार गाने को सुनते ही आपके पांव खुद ब खुद नाचने लगेंगे. इस गाने को पवन सिंह (Pawan Singh) ने बहतरीन रूप से गाया है और इस भोजपुरी सुपरहिट गाने के लीरिक्स लिखे हैं आशुतोश तिवारी (Aashutosh Tiwari) ने.

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बात करें सुपरस्टार पवन सिंह (Pawan Singh) की फैन फौलोविंग की तो पवन सिंह (Pawan Singh) के औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट (Official Instagram Account) पर करीब 9 लाख फौलोवर्स हैं जो कि उन्हें बहुत पसंद करते हैं. इसी के साथ ही पवन सिंह (Pawan Singh) के फैंस उनके हर गाने पर जमकर प्यार बरसाते हैं और बहुत ही जल्द वायरल कर देते हैं.

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Bigg Boss 14 में कविता कौशिक ने एजाज खान पर लगाया गंभीर आरोप, देखें प्रोमो

जैसे जैसे दिन बीत रहे हैं वैसे वैसे ही टीवी के सबसे पौपुलर रिएलिटी शो बिग बॉस के सीजन 14 (Bigg Boss 14) में एंटरटेनमेंट भी बढ़ता जा रहा है. बिग बॉस 14 का हर एपिसोड किसी ना किसी मुद्दे को लेकर चर्चा में आने लगा है. बात करें आने वाले एपिसोड की तो बिग बॉस 14 (Bigg Boss 14) के अपकमिंग एपिसोड में एजाज खान (Eijaz Khan) और कविता कौशिक (Kavita Kaushik) के बीच जमकर हंगामा देखने को मिलने वाला है.

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दरअसल कविका कौशिक (Kavita Kaushik) एजाज खान (Eijaz Khan) पर एक गंभीर आरोप लगाती दिखाई देंगी जिसे सुन एजाज खान (Eijaz Khan) टूट जाएंगे. शो के मेकर्स ने अपकमिंग एपिसोड का एक प्रोमो रिलीज किया जिससे कि हमें ये साफ दिखाई दे रहा है कि दर्शकों को कविता कौशिक (Kavita Kaushik) और एजाज खान (Eijaz Khan) के बीच घमासान देखने को मिलने वाला है. बात की जाए बिग बॉस के घर में रिश्तों की तो यहां कंटेस्टेंट्स के बीच रिश्ते पल पल में बदलते हैं.

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प्रोमो में कविता कौशिक (Kavita Kaushik) ने एजाज खान (Eijaz Khan) पर ये आरोप लगाया है कि उनकी वजह से घर में मेरा कोई कनेक्शन नहीं बन पा रहा है. ये बात सुनकर एजाज खान (Eijaz Khan) हैरान हो जाते हैं. इसके आगे कविका कौशिक (Kavita Kaushik) ने एजाज खान (Eijaz Khan) पर हमला बोलते हुए कहा है कि एजाज खान (Eijaz Khan) ने ‘बिग बॉस 14’ के घर में मेरा इस्तेमाल किया है. मुझे देखते ही उन्होंने मुझे अपना दोस्त बता दिया. जबकि मैं एजाज खान से ज्यादा अभिनव शुक्ला (Abhinav Shukla) को जानती हूं.

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ये सब सुनने के बाद एजाज खान (Eijaz Khan) कविका कौशिक (Kavita Kaushik) को खूब समझाने की कोशिश करेंगे लेकिन वे उनकी एक भी नहीं सुनेंगी. इस वजह से एजाज खान (Eijaz Khan) कैमरे के आगे फूट फूट कर रोते नजर आएंगे. प्रोमो में एजाज खान कहते दिख रहे हैं कि मुझे नहीं पता कि कौन मेरा दोस्त है और कौन नहीं…. लेकिन मैं कविता कौशिक को अपनी अच्छी दोस्त मानता था.

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प्यार की त्रासदी : फिर तेरी कहानी याद आई..!

प्यार की पींगे भरकर  एक व्यक्ति ने एक युवती को ऐसा धोखा दिया कि वह युवती ने घर की रही न घाट की. जैसा कि अक्सर होता है एक बार फिर वही सब कुछ घटित हो गया. जी हां! प्रेम के अगले पायदान में युवक ने विवाह का प्रस्ताव रखा और चालाकी से शारीरिक संबंध स्थापित कर लिया . आगे बड़ी नाटकीयता के साथ नोटरी के शपथपत्र के माध्यम से विवाह रचाकर धोखा देता रहा और अंत में पल्ला झाड़ लिया. युवती को जब एहसास हुआ कि वह तो बर्बाद हो चुकी है, तब प्रेमी युवक के खिलाफ प्रेमिका की शिकायत पर पुलिस द्वारा अपराध दर्ज कर आरोपी को  जेल भेज दिया गया .जी हां! मगर थोड़ा रूकिए पीड़ित लड़की की आपबीती अभी खत्म नहीं हुई है.आगे कहानी में एक बार फिर ट्विस्ट है.

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जमानत पर जेल से छूटने के बाद आरोपी पुनः युवती को मीठी चुपड़ी बातें करके अपनी हवस का शिकार बनाता है. वह अपनी गलतियां स्वीकार करता है और आश्वस्त करता है कि मैं विवाह तो तुम्हीं से करूंगा, युवती उसके प्रेम जाल के भुलावे में फंस जाती है. मगर जब सच्चाई खुलती जाती है तो वह अपने को पुनः लूटा हुआ पाती है.पीड़िता की दोबारा शिकायत पर पुलिस “बलात्कार” का अपराध दर्ज करती है. अब आज की हकीकत यह है कि युवक फरार हो गया है और युवती को फोन पर लगातार जान से मारने की धमकी दे रहा है.पीडिता अपनी आपबीती पुलिस को बताती है थाने के लगातार चक्कर लगा रही है लेकिन पुलिस आरोपी की खोजबीन कर गिरफ्तार करने की कागजी कोशिश कर रही है.भयभीत व परेशान युवती का  कहना है कि यदि पुलिस एक सप्ताह के भीतर आरोपी को गिरफ्तार नही करती है तो वह आत्महत्या करने को मजबूर रहेगी.जिसकी सारी जवाबदारी पुलिस प्रशासन की होगी.

युवती ने “वीडियो” जारी किया

अक्सर इस तरह की घटनाएं सुर्खियों में रहती हैं. युवा वर्ग प्रेम प्यार और शारीरिक आकर्षण में फंस कर एक ऐसे भंवर जाल में फंसते चले जाते हैं कि आगे जीवन में सिर्फ अंधकार होता है. और ताजिंदगी अवसाद के अलावा कुछ नहीं मिलता. अक्सर फिल्मों में कहानियों में यही तथ्य और कथ्य रहता है जिसमें विस्तार से बताया जाता है कि किस तरह कोई युवक ठाट बाट और पैसों की झलक दिखा कर युवतियो को अपने जाल में फांस लेता है और  धोखा देकर शारीरिक संबंध बनाता है. और फिर गायब हो जाता हैं. “हरि अनंत हरि कथा अनंता” की तरह यह बानगी वर्षों वर्षों से चली आ रही है. मगर अब समय आ गया है कि इस आधुनिक 21 वी शताब्दी के समय में जब ज्ञान के अनेक स्रोत हमारे पास हैं पुस्तकें हैं, नेट है अगर आज भी स्त्री और पुरुष का यह छलावा चल रहा है तो ठहर कर सोचने की बात है कि आखिर चूक कहां है?

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भ्रम और मानसिक यंत्रणा की कहानी

ऊपर वर्णित घटनाक्रम छत्तीसगढ़ जिला के कोरबा के कटघोरा थानांतर्गत ग्राम कसनिया का है. जहाँ निवासरत युवती रजनी (बदला हुआ नाम) को  कटघोरा पुरानी बस्ती निवासी आसीम खान पिता अकरम सेठ अपने प्रेमजाल में फंसा लेता है और शादी करने का झांसा देते हुए लगातार लंबे समय तक शारीरिक संबंध स्थापित करता है.इस बीच रजनी द्वारा शादी का दबाव बनाए जाने पर तीन दिसंबर 2019 को आरोपी द्वारा शपथपत्र करके विवाह का भ्रमजाल फैलाया गया. लेकिन शादी के तीन दिन पश्चात छः दिसंबर 2019 को शारीरिक एवं मानसिक यातना देते हुए नाटकीय ढंग से पुनः शपथपत्र के माध्यम से दबावपूर्वक संबंध विच्छेद कर लेता है. पीड़िता इस मामले की शिकायत कटघोरा थाना में करती है. शिकायत के आधार पर पुलिस आरोपी के विरुद्ध भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं के तहत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करती है जहां से आरोपी को जेल चला जाता है.

आरोपी जमानत पर जेल से छूटने पश्चात पीड़िता को बार-बार फोन करके अश्लील गाली-गलौज व मारने- पीटने की धमकी देने लगता है और एक रात  आरोपी प्रेमी, युवती के घर आ धमकता है तथा अकेलेपन का फायदा उठाकर जेल भेजे जाने की बात कहते हुए गाली-गलौज के अलावा मारपीट करते हुए बलपूर्वक शारीरिक संबंध स्थापित करता है.पीड़िता द्वारा  कटघोरा थाना पहुँचकर इस बाबत लिखित शिकायत दी जाती है.लेकिन पुलिस कोई कार्यवाही नही करती. आगे एक जुलाई 2020 को पीड़िता पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँचकर अपनी शिकायत पत्र सौंप उचित कार्यवाही एवं न्याय की मांग करती है.जिसके बाद आरोपी युवक के विरुद्ध  कटघोरा पुलिस द्वारा  धारा 376, 506 के तहत अपराध दर्ज किया गया है.

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लेकिन अपराध दर्ज होने के बाद आरोपी फरार हो जाता है.जिसे पुलिस अभी तलक फरार बता रही है.जबकि पीड़िता का कथन है कि आरोपी आए दिन फोन पर जान से मारने की धमकी दे रहा है.धमकी से भयभीत हो इस बीच कई बार वह कटघोरा थाना पहुँचकर पुलिस को अपनी आपबीती सुनाते हुए आरोपी की जल्द गिरफ्तारी की मांग भी कर चुकी है.लेकिन फरार आरोपी की खोजबीन कर उसे गिरफ्तार करने की प्रक्रिया को लेकर पुलिस सुस्त बनी  है.मामले में पुलिस के सुस्ती भरे रवैये को लेकर भय के माहौल में जीवन व्यतीत कर रही पीड़िता ने  अब एक वीडियो क्लिप  जारी कर‌ सनसनी  पैदा कर कहा है कि फरार आरोपी कभी भी उसके साथ गंभीर घटना को अंजाम दे सकता है.यदि पुलिस एक सप्ताह के भीतर आरोपी की तलाश कर गिरफ्तार नही करती है तो वह “आत्महत्या” के लिए मजबूर  होगी, जिसकी सारी जवाबदारी  पुलिस प्रशासन की रहेगी.

अनोखा रिश्ता : भाग 4

उस रात खाना खाने के बाद मुझे मिसेज दास ने अपने कमरे में बुलाया. वह चारपाई पर बैठी अपनी चप्पलों को पैर से इधरउधर सरका रही थीं. पास  ही जयशंकर एक कुरसी पर चुपचाप बैठा छत के पंखे को देखे जा रहा था. मिसेज दास ने इशारे से अपने पास बुलाया और मुझे अपने बगल में बैठने को कहा. बड़ा समय लिया उन्होंने अपनी चुप्पी तोड़ने में.

‘जयशंकर बता रहा था कि तुम्हारे परिचित ने तुम्हें आज 600 रुपए दिए थे, यह बताओ कि हम पर तुम ने कितने पैसे खर्च कर डाले?’

‘करीब 300 रुपए.’

‘बाकी के 300 रुपए तो तुम्हारे पास हैं न?’

मैं ने शेष 300 रुपए जेब से निकाल कर उन के सामने रख दिए.

अब मिसेज दास ने अपना फैसला चंद शब्दों में मुझे सुना दिया कि तुम कल सुबह जयशंकर के साथ जा कर धनबाद के लिए किसी भी ट्रेन में अपना आरक्षण करवा लो. तुम्हारी मां घबरा रही होंगी. अपने परिचित का पता मुझे लिखवा दो. जब तुम्हारे बाबा का पैसा आ जाएगा तब मैं जयशंकर के हाथ यह 600 रुपए वापस करवा कर शेष रुपए तुम्हारे बाबा के नाम मनीआर्डर कर दूंगी. तुम्हें हम पर भरोसा तो है न?’

मुझे पता था कि यह मिसेज दास का अंतिम फैसला है और उसे बदला नहीं जा सकता. अपने एक झूठ को छिपाने के लिए मुझे मिसेज दास को एक मनगढ़ंत पता देना ही पड़ा.

दूसरे दिन मुझे एक टे्रन में आरक्षण मिल गया. मेरी टे्रन शाम को 7 बजे थी. मैं बुझे मन से घर वापस लौटा. खाना खाने के बाद मैं मिसेज दास की चारपाई पर लेट गया और मिसेज दास जयशंकर को साथ ले कर मेरी विदाई की तैयारी में लग गईं. वह मेरे रास्ते के लिए जाने क्याक्या पकाती और बांधती रहीं. हर 10 मिनट पर जयशंकर मुझ से चाय के लिए पूछने आता था पर मेरे मन में एक ऐसा शूल फंस गया था जो निकाले न निकल रहा था.

ट्रेन अपने नियत समय पर आई. मैं मिसेज दास के पांव छू कर और जयशंकर के गले मिल कर अपनी सीट पर जा बैठा.

कुछ दिनों के बाद बाबूजी का भेजा रुपया धनबाद के पते पर वापस आ गया. मनीआर्डर पर मात्र मिसेज दास का पता भर लिखा था.

मेरा यह अक्षम्य झूठ 25 वर्षों तक एक नासूर की तरह आएदिन पकता, फूटता और रिसता रहा था.

सोच के इस सिलसिले के बीच जागतेसोते मैं गुवाहाटी आ गया. रिकशा पकड़ कर मैं मिसेज दास के घर की ओर चल दिया. घर के सामने पहुंचा तो उस का नक्शा ही बदला हुआ था. कच्चे बरामदे के आगे एक दीवार और एक लोहे का फाटक लग गया था. छोटे से अहाते में यहांवहां गमले, बरामदे की छत तक फैली बोगनबेलिया की लताएं, एक लिपापुता आकर्षक घर.

मुझे पता था कि मिस्टर दास का अधूरा सपना बस, जयशंकर ही पूरा कर सकता है और उस ने पूरा कर के दिखा भी दिया.

फाटक की कुंडी खटखटाने में मुझे तनिक भी संकोच नहीं हुआ. मैं यहां किसी तरह की कोई उम्मीद ले कर नहीं आया था. बस, मुझे मिसेज दास से एक बार मिलना था. खटका सुन कर वह कमरे से बाहर निकलीं. शायद इन 25 सालों के बाद भी मुझ में कोई बदलाव न आया था.

उन्होंने मुझे देखते ही पहचान लिया. बिना किसी प्रतिक्रिया केझट से फाटक खोला और मुझे गले से लगा कर रोने लग पड़ीं. फिर मेरा चेहरा अपनी आंखों के सामने कर के बोलीं, ‘‘तुम तो बिलकुल अंगरेजों की तरह गोेरे लगते हो.’’

मैं उन के पांव तक न छू पाया. वह मेरा हाथ पकड़ कर घर के अंदर ले गईं. कमरों की साजसज्जा तो साधारण ही थी पर घर की दीवारें, फर्श और छतें सब की मरम्मत हुई पड़ी थी. मिसेज दास रत्ती भर न बदली थीं. न तो उन की ममता में और न उन की सौम्यता में कोई बदलाव आया था. बस, एक बदलाव मैं उन में देख रहा था कि उन के स्वर अब आदेशात्मक न रहे.

मेरे लिए यह बिलकुल अविश्वसनीय था. एम.एससी. करने के बाद जयशंकर अपनी इच्छा से एक करोड़पति की लड़की से शादी कर के डिब्रूगढ़ चला गया था. उस ने मां के साथ अपने सभी संबंध तोड़ डाले, जिस की मुझे सपनों में भी कभी आहट न हुई.

मिसेज दास की बड़ी बहन अब दुनिया में न रहीं. वह अपनी चल और अचल संपत्ति अपनी छोटी बहन के नाम कर गई थीं जो तकरीबन डेढ़ लाख रुपए की थी. जिस का

एक भाग उन्होंने अपने घर की मरम्मत में लगाया और बाकी के सूद और

अपनी सीमित पेंशन से अपना जीवन निर्वाह एक तरह से सम्मानित ढंग से कर रही थीं.

अब वह मेरे लिए मिसेज दास न थीं. मैं उन्हें खुश करने के लिए बोला, ‘‘मां, आप के हाथ की बनी रोहू मछली खाने का मन कर रहा है.’’

यह सुनते ही उन की आंखों से सावनभादों की बरसात शुरू हो गई. वह एक अलमारी में से मेरी चिट्ठियों का पूरा पुलिंदा ही उठा लाईं और बोलीं, ‘‘तुम्हारी एकएक चिट्ठी मैं अनगिनत बार पढ़ चुकी हूं. कई बार सोचा कि तुम्हें जवाब लिखूं पर शंकर मुझे बिलकुल तोड़ गया, बेटा. जब मेरी अपनी कोख का जन्मा बेटा मेरा सगा न रहा तो तुम पर मैं कौन सी आस रखती? फिर भी एक प्रश्न मैं तुम से हमेशा ही पूछना चाहती थी.’’

‘‘कौन सा प्रश्न, मां?’’

‘‘तुम्हें वह 600 रुपए मिले कहां से थे?’’

अब मुझे उन्हें सबकुछ साफसाफ बताना पड़ा.

सबकुछ सुनने के बाद उन्होंने मुझ से पूछा, ‘‘और एक बार भी तुम्हारा मन तुम्हें पैसे पकड़ने से पहले न धिक्कारा?’’

‘‘नहीं, क्योंकि मुझेअपने मन की चिंता न थी. मुझे आप के अभाव खलते थे पर अगर मुझे उन दिनों यह पता होता कि मैं अपने उपहारों के बदले आप को खो दूंगा तो मैं उन पैसों को कभी न पकड़ता. आप से कभी झूठ न बोलता. आप का अभाव मुझे अपने जीवन में अपनी मां से भी अधिक खला.’’

मिसेज दास चुपचाप उठीं और अपने संदूक से एक खुद का बुना शाल अपने कंधे पर डाल कर वापस आईं.

‘‘आओ, बाजार चलते हैं. तुम्हें मछली खानी है न. मेरे साथ 1-2 दिन तो रहोगे न, कितने दिन की छुट्टी है?’’

मैं उन के साथ 4 दिन तक रहा और उन की ममता की बौछार में अकेला नहाता रहा.

5वें दिन सुबह से शाम तक वह अपने चौके में मेरे रास्ते के लिए खाना बनाती रहीं और मुझे स्टेशन भी छोड़ने आईं. पूरे दिन उन से एक शब्द भी न बोला गया. बात शुरू करने से पहले ही उन का गला रुंध जाता था.

अब जब भी बर्लिन में मुझे उन की चिट्ठी मिलती है तो मैं अपना सारा घर सिर पर उठा लेता हूं. कई दिनों तक उन के पत्र का एकएक शब्द मेरे दिमाग में गूंजता रहता है, विशेषकर पत्र के अंत में लिखा उन का यह शब्द ‘तुम्हारी मां मनीषा.’

मैं उन्हें जब पत्र लिखने बैठता हूं अनायास मेरी भाषा बच्चों जैसी नटखट  हो जाती है. मेरी उम्र घट जाती है. मुझे अपने आसपास कोहरे या बादल नजर नहीं आते. बस, उन का सौम्य चेहरा ही मुझे हर तरफ नजर आता है.

अनोखा रिश्ता : भाग 3

खाने के बाद मैं ने मिसेज दास को अपनी गढ़ी कहानी सुना दी कि आज अचानक शहर में मुझे मेरे ननिहाल का एक आदमी मिला. स्टेशन के पास ही उस का अपना एक निजी होटल है. मुझे उस से मिलने 9 बजे जाना है.

मिसेज दास चौंकीं, ‘इतनी रात में क्यों?’

इस सवाल का जवाब मेरे पास था…‘होटल के कामों में वह दिन भर व्यस्त रहते हैं. उन के पास समय नहीं होता.’

‘ठीक है, तुम जयशंकर को साथ ले कर जाना. वह यहां के बारे में ठीक से जानता है. गुवाहाटी इतना सुरक्षित नहीं है. मैं इतनी रात में तुम्हें अकेले कहीं भी जाने की अनुमति नहीं दे सकती.’

मैं ने इस बारे में पहले सोच लिया था अत: बोला, ‘मिसेज दास, मैं बच्चा थोड़े ही हूं जो आप इतना घबरा रही हैं. हो सकता है कि अगला कुछ खानेपीने को कहे, ऐसे में अच्छा नहीं लगता किसी को बिना आमंत्रण के साथ ले जाना.’

मेरी बात सुन कर मिसेज दास की पेशानी पर बल पड़े पर उन्हें सबकुछ युक्तिसंगत लगा.

‘ठीक है, समय से तैयार हो जाना. मैं एक रिकशा तुम्हारे लिए तय कर दूंगी. वह तुम्हें वापस भी ले आएगा.’

ठीक साढ़े 8 बजे मिसेज दास एक रिकशे वाले को बुला कर लाईं. मैं उस पर बैठ कर स्टेशन की ओर चल पड़ा. स्टेशन के सामने वह मुझे उतार कर बोला, ‘मैं अपना रिकशा स्टैंड पर लगा कर स्टेशन

के सामने आप का इंतजार करूंगा.’

9 बजने में अभी 5 मिनट बाकी थे. अंदर से मैं थोड़ा घबरा रहा था. प्लेटफार्मों को जोड़ने वाले पुल पर आधी गुवाहाटी अपने चिथड़ों में लिपटी सो रही थी. घुप अंधेरा था. यह शर्मा कहीं किसी षड्यंत्र में मुझे फंसाने तो नहीं जा रहा, सोचते ही मेरी रीढ़ की हड्डी तक सिहर गई थी. अचानक मुझे पुल पर एक आदमी लगभग भागता हुआ आता दिखा. इस घुप अंधेरे में भी शर्माजी की आंखें मुझे पहचानने में धोखा न खाईं… ‘ये हैं 600 रुपए. इन्हें संभालो और फटाफट अपना रास्ता नाप लो.’

मैं आननफानन में सारे रुपए अपनी जेब में ठूंस कर वहां से चल दिया. बाहर आते ही मेरा रिकशा वाला मुझे मिल गया. मैं ने एक घंटे का समय ले रखा था. हम घर की तरफ वापस लौट पड़े. रास्ते भर पुलिस की सीटियों और चोरचोर पकड़ो का स्वर मेरे कानों में गूंजता रहा.

घर पर मेरी असहजता कोई भी भांप न पाया. मिसेज दास और जयशंकर दोनों जागे हुए थे. बरामदे के सामने रिकशे के रुकते ही दोनों बरामदे में आ गए, ‘क्या हुआ, इतनी जल्दी वापस क्यों आ गए?’

वह बिहारी होटल में था ही नहीं तो मैं उस के नाम एक परची पर यहां का पता लिख कर वापस आ गया. कब तक मैं उस का इंतजार करता. आप भी देर होने पर घबरातीं.

‘चाय पीओगे,’ बड़ी आत्मीयता से मिसेज दास बोलीं.

मैं यह भी नहीं चाहता था कि मिसेज दास मेरी असहजता भांप लें. थकावट का बहाना बना कर बरामदे में आ गया और अपनी चौैकी पर लेट कर एक पतली सी चादर अपने चेहरे तक तान ली. नींद तो मुझे आने से रही.

रात भर बुरेबुरे खयाल तसवीर बन कर मेरी आंखों के सामने आते रहे और एक अनजाने भय से मैं रात भर बस, करवटें ही बदलता रहा. रात में 2-3 बार मिसेज दास मेरी मच्छरदानी ठीक करने आईं. मैं झट अपनी आंखें मूंद लेता था. ये शर्माजी के 600 रुपए अभी तक मेरी दाईं जेब में ठुंसे पड़े थे जिन्हें सहेजने की मेरे पास हिम्मत न थी.

सुबह होते ही रात का भय जाता रहा. रोज की तरह अपनी दिनचर्या शुरू हुई. 10 बजे के बाद मैं अकेला था.

मैं बाहर निकला तो नुक्कड़ पर मुझे वही रिकशे वाला टकरा गया जो स्टेशन ले गया था. उस के रिकशे पर बैठ कर मैं पास के एक बाजार में गया. 2 घंटे की खरीदारी में मिसेज दास के लिए मैं ने एक ऊनी शाल खरीदी और एक जोड़ी ढंग की चप्पल भी.

जयशंकर के लिए एक रेडीमेड पैंट और कमीज खरीदी. इस के अलावा मैं ने तरहतरह की मौसमी सब्जियां, सेब, नारंगी, मिठाइयां और एक किलो रोहू मछली भी खरीदी. इस खरीदारी में 300 रुपए खर्च हो गए पर रास्ते भर मैं बस, यही सोच कर खुश होता रहा कि इतने सारे सामानों को देख कर मिसेज दास और जयशंकर कितने खुश होंगे.

जयशंकर कालिज से वापस घर आया तो सामान का ढेर देखते ही पूछा, ‘बाबा, का पैसा आ गया क्या?’

मैं ने उसे बताया कि मेरे ननिहाल वाला आदमी आया था. जबरदस्ती मेरे हाथ पर 600 रुपए रख गया. मेरे नाना से वापस ले लेगा. तुम मिठाई खाओ न.

जयशंकर बिना कोई प्रतिक्रिया दिखाए अपने कपड़े बदल कर दोपहर का खाना लगाने लगा. मैं उसे कुरेदता रहा पर वह बिना एक शब्द बोले सिर झुकाए खाना खाता रहा.

जब मैं थोड़ा सख्त हुआ तो वह कहने लगा. बस, तुम ने हमारा स्वाभिमान आहत किया है. इतने पैसे खर्च करने से पहले तुम्हें मां से बात कर लेनी चाहिए थी. मां को उपहारों से बड़ी घबराहट होती है.’

मिसेज दास के आने तक घर में एक अजीब सन्नाटा छाया रहा. जयशंकर चुपचाप उदास अपनी पढ़ाईलिखाई की मेज पर जा बैठा और मैं अपना अपराधबोध लिए बरामदे में आ कर चुपचाप तखत पर लेट गया.

करीब साढ़े 4 बजे मिसेज दास आईं और मुझे बरामदे में लेटा देख कर बोलीं, ‘इस गरमी में तुम बरामदे में क्यों लेटे हो? जयशंकर वापस नहीं आया है क्या?’

कमरे से अब सिर्फ जयशंकर की आवाज आ रही थी. वह असमी भाषा में पता नहीं क्याक्या अपनी मां को बताए जा रहा था. मैं अपनेआप को बड़ा उपेक्षित महसूस कर रहा था.

मिसेज दास कमरे से बाहर निकलीं. मैं अपना सिर नीचा किए रोए जा रहा था. उन्होंने बढ़ कर मेरा चेहरा अपने दोनों हाथों में ले कर पेट से लगा लिया और पीठ सहलाने लगीं. फिर अपने आंचल से मेरी आंखें पोंछ कर मुझे कमरे में ले गईं और पीने को एक गिलास पानी दिया. उस के बाद वह सारे सामान को खोल कर देखने लगीं. उन के इशारे पर जयशंकर भी अपने कपड़े नापने उठा. पैंट और कमीज दोनों उस के नाप के थे. शाल और चप्पल भी मिसेज दास को बड़े पसंद आए. वह सब्जियां और मिठाइयां सजासजा कर रखने लगीं. बारबार मुझे बस इतना ही सुनने को मिलता था, ‘इतना क्यों खरीदा? गुवाहाटी के सारे बाजार कल से उठने वाले थे क्या?’

मैं खुश था कि कम से कम घर का तनाव थोड़ा कम तो हुआ.

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

अनोखा रिश्ता : भाग 2

दूसरे दिन सुबह मैं जयशंकर के साथ पोस्टआफिस गया. मैं ने घर पर एक टेलीग्राम डाल दिया. जब हम वापस आए, मिसेज दास बरामदे में खाना बना रही थीं. मैं ने उन के हाथ पर टेलीग्राम की रसीद और शेष पैसे रख दिए. मैं इस परिवार में कुल 6 दिन रहा था. इन 6 दिन में एक बार मिसेज दास ने मीट बनाया था और एक बार मछली.

एक दिन शाम को जयशंकर ने ही मुझे बताया कि बाबा के गुजरने के बाद मेरे चाचा एक बार मां के पास शादी का प्रस्ताव ले कर आए थे पर मां ने उसे यह कह कर ठुकरा दिया कि मेरे पास जयशंकर है जिसे मैं बस, उस के बाबा के साथ ही बांट सकती हूं और किसी के साथ नहीं. जयशंकर को अगर आप मार्गदर्शन दे सकते हैं तो दें वरना मुझे ही सबकुछ देखना होगा. मैं अपने पति की आड़ में उसे एक ऐसा मनुष्य बनाऊंगी कि उसे दुनिया याद करेगी.

मिसेज दास का असली नाम मनीषा मुखर्जी था और उन के पति का नाम प्रणव दास. जब मैं उन से मिला था तब मेरी उम्र 21 साल की थी और वह 42 वर्ष की थीं. उन के कमरे की मेज पर पति की एक मढ़ी तसवीर थी. मैं अकसर देखता था कि बातचीत के दौरान जबतब उन की नजर अपने पति की तसवीर पर टिक जाती थी, जैसे उन्हें हर बात की सहमति अपने पति से लेनी हो.

यह गुवाहाटी में मेरा तीसरा दिन था. मिसेज दास स्कूल जा चुकी थीं. जयशंकर भी कालिज जा चुका था. मैं घर पर अकेला था सो शहर घूमने निकल पड़ा. घूमतेघूमते स्टेशन तक पहुंच गया. अचानक मेरी नजर एक होटल पर पड़ी, जिस का नाम रायल होटल था. कभी  बचपन में अपने ममेरे भाइयों से सुन रखा था कि बगल वाले गांव के एक बाबू साहब का गुवाहाटी रेलवे स्टेशन के समीप एक होटल है. मैं बाबू साहब से न कभी मिला था और न उन्हें देखा था. मैं तो उन का नाम तक नहीं जानता था. पर मुझे यह पता था कि शाहाबाद जिले के बाबू साहब अपने नाम के पीछे राय लिखते हैं.

होटल वाकई बड़ा शानदार था. मैं ने एक बैरे को रोक कर पूछा, ‘इस होटल के मालिक राय साहब हैं क्या?’

‘हां, हैं तो पर भैया, यहां कोई जगह खाली नहीं है.’

‘मैं यहां कोई काम ढूंढ़ने नहीं आया हूं. तुम उन से जा कर इतना कह दो कि मैं चिलहरी के कौशल किशोर राय का नाती हूं और उन से मिलना चाहता हूं.’

थोड़ी देर बाद वह बैरा मुझे होटल के एक कमरे तक पहुंचा आया, जहां बाबू साहब अपने बेड पर एक सैंडो बनियान और हाफ पैंट पहने नाश्ता कर रहे थे. गले में सोने की एक मोटी चेन पड़ी थी. बड़े अनमने ढंग से उन्होंने मुझ से कुछ पीने को पूछा और उतने ही अनमने ढंग से मेरे नाना का हालचाल पूछा.

मुझे ऐसा लग रहा था कि जग बिहारी राय को बस, एक डर खाए जा रहा था कि कहीं मैं उन से कोई मदद न मांग लूं. अब उस कमरे में 2 मिनट भी बैठना मुझे पहाड़ सा लग रहा था. संक्षेप में मैं अपने ननिहाल का हालचाल बता कर उन्हें कोसता कमरे से बाहर निकल आया.

जयशंकर के पास बस, 2 जोड़ी कपड़े थे. बरामदे के सामने वाले कमरे की मेज उस के पढ़नेलिखने की थी पर उस की साफसफाई मिसेज दास खुद ही करती थीं. मैं उन्हें मां कह कर भी बुला सकता था पर मैं उन की ममता का एक अल्पांश तक न चुराना चाहता था. वैसे तो जयशंकर थोड़े लापरवाह तबीयत का लड़का था पर उसे यह पता था कि उस की मां के सारे सपने उसी से शुरू और उसी पर खत्म होते हैं. मिसेज दास हमारी मसहरी ठीक करने आईं. मैं अभी भी जाग रहा था तो कहने लगीं. ‘नींद नहीं आ रही है?’

‘नहीं, मां के बारे में सोच रहा था.’

‘भूख तो नहीं लगी है, तुम खाना बहुत कम खाते हो.’

मैं उठ कर बैठ गया और बोला, ‘मिसेज दास, मेरा मन घबरा रहा है. मैं आप के कमरे में आऊं?’

‘आओ, मैं अपने और तुम्हारे लिए चाय बनाती हूं.’

फिर मैं उन्हें अपने और अपने परिवार के बारे में रात के एक बजे तक बताता रहा और बारबार उन्हें धनबाद आने का न्योता देता रहा.

अगले दिन गुवाहाटी के गांधी पार्क में मेरी मुलाकात एक बड़े ही रहस्यमय व्यक्ति से हुई. वह सज्जन एक बैंच पर बैठ कर अंगरेजी का कोई अखबार पढ़ रहे थे. मैं भी जा कर उन की बगल में बैठ गया. देखने में वह मुझे बड़े संपन्न से लगे. परिचय के बाद पता चला कि उन का पूरा नाम शिव कुमार शर्मा था. वह देहरादून के रहने वाले थे पर चाय का व्यवसाय दार्जिलिंग में करते थे. व्यापार के सिलसिले में उन का अकसर गुवाहाटी आनाजाना लगा रहता था.

2 दिन पहले जिस ट्रेन में सशस्त्र डकैती पड़ी थी, उस में वह भी आ रहे थे अत: उन्हें अपने सारे सामान से तो हाथ धोना ही पड़ा साथ ही उन के हजारों रुपए भी लूट लिए गए थे. उन्हें कुछ चोटें भी आईं, जिन्हें मैं देख चुका था. डकैतों का तो पता न चल पाया पर एक दक्षिण भारतीय के घर पर उन्हें शरण मिल गई जो गुवाहाटी में एक पेट्रोल पंप का मालिक था.

मैं ने उन की पूरी कहानी तन्मय हो कर सुनी. अब अपने बारे में कुछ बताने में मुझे बड़ी झिझक हुई. यह सोच कर कि जब मैं उन की बातों का विश्वास न कर पाया तो वह भला मेरी बातों का भरोसा क्यों करते? उन्हें बस, इतना ही बताया कि धनबाद से मैं यहां अपने एक दोस्त से मिलने आया हूं.

वह मुझे ले कर एक कैफे में गए जहां हम ने समोसे के साथ कौफी पी.  वहीं उन्होंने मुझे बताया कि जिस दक्षिण भारतीय के घर वह ठहरे हैं वह लखपति आदमी है. मैं घर से बाहर निकला नहीं कि जेब में 200 रुपए जबरन ठूंस देता है.

‘तुम अपने दोस्त से मिलने आए हो?’ उन्होंने पूछा तो मैं ने हां में अपनी गरदन हिला दी.

‘क्या करता है तुम्हारा दोस्त?’

‘बी.एससी. कर रहा है, सर.’

‘उस के मांबाप मालदार हैं?’

‘नहीं, वह विधवा मां का इकलौता बेटा है. मां एक प्राइमरी स्कूल में पढ़ाती हैं. फिर मैं ने उन्हें मिसेज दास के बारे में थोड़ाबहुत संक्षेप में बताया. कैफे के बाहर अचानक शर्माजी ने मुझ से पूछा, ‘आज शाम को तुम क्या कर रहे हो?’

‘कुछ खास नहीं.’

‘तुम 9 बजे के आसपास मुझ से शहर में कहीं मिल सकते हो?’

‘पर कहां? यहां तो मैं पहली बार आया हूं.’

वह कुछ सोचते हुए बोले, ‘ऐसा करो, तुम आज मेरा इंतजार रात के 9 बजे गुवाहाटी स्टेशन के पुल पर करना जो सारे प्लेटफार्मों को जोड़ता है. तुम समय से वहां पहुंच जाना क्योंकि मेरे पास शायद तब उतना समय न होगा कि तुम्हारे  किसी सवाल का जवाब दे सकूं.’

आशंकाओं की धुंध लिए मैं घर वापस आया. मिसेज दास खाना बना रही थीं. जयशंकर उन की मदद कर रहा था. मुझे देखते ही जयशंकर कहने लगा, ‘अगर तुम आने में थोड़ा और देर करते तो मां मुझे तुम्हारी खोज में भेजने वाली थीं. दोपहर का खाना भी तुम ने नहीं खाया.’

मैं माफी मांग कर हाथमुंह धोने चला गया. मेरे दिमाग में बस, एक ही सवाल कुंडली मारे बैठा था कि मिसेज दास को कौन सी कहानी गढ़ के सुनाऊं ताकि वह निश्ंिचत हो कर मुझे शर्माजी से मिलने की अनुमति दे दें.

हाथमुंह धो कर मैं बरामदे में आ गया और आ कर चौकी पर चुपचाप बैठ गया. इस शर्मा से मेरा कोई कल्याण होने वाला है, यह भनक तो मुझे थी पर मैं मिसेज दास को कौन सा बहाना गढ़ कर सुनाऊं, यह मेरे दिमाग में उमड़घुमड़ रहा था.

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

करंट से मौत, बनाम 24 हत्यारे!

छत्तीसगढ़ आदिवासी बाहुल्य अंचल है जहां जंगल है, वन्य प्राणी है . और जंगल के दंतैल प्राणियों से बचने के लिए गांव में अक्सर ग्रामीण कुछ ऐसे गैरकानूनी और खतरनाक हथकंडे अपनाते हैं कि वन्य प्राणी के साथ-साथ इंसान भी अपनी जान खो बैठते हैं.

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ऐसे में यह कल्पना बेहद मुश्किल  है कि कोई इंसान इन के फंदे में फंस जाता है और बेवजह बेमौत मारा जाता है. आइए! आपको बताते हैं एक सच्चा घटनाक्रम जिसमें जंगली सूअर को मारने के लिए ग्रामीणों ने बिजली के नंगे तार गांव में बिछा दिया और गांव के 24 लोग अपराधी बन गए. इसमें  मारा गया एक  युवक आनंद अपनी प्रेमिका से मिलने जा रहा था…..! आगे क्या हुआ, शायद इसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते! हम आपको आगे वह सारा घटनाक्रम बता रहे हैं.

पहली घटना-

जिला कोरबा के बालको नगर के निकट दोंदरो में एक ग्रामीण ने अपने फसल को बचाने के लिए चारों तरफ विद्युत करंट बिछा दिया. एक हाथी आया और करंट के चपेट में आकर मारा गया.

दूसरी घटना-

जिला रायगढ़ के धर्मजयगढ़ वन मंडल में ग्राम हाटी में एक ग्रामीण ने हाथी से बचने के लिए घर के आस-पास करंट के तार बिछा दिए. जिसमें एक व्यक्ति चपेट में आकर हलाक हो गया.

तीसरी घटना-

अंबिकापुर के एक ग्राम में ग्रामीणों ने हाथियों से बचने के लिए आसपास करंट बिछा दिया जिसमें दो व्यक्ति आकर मृत्यु का ग्रास बन गए. अनेक ग्रामीणों को इस कारण पुलिस ने जेल भेजा है.

आनंद राठिया की मौत का रहस्य

आनंद राठिया नामक एक युवक की मौत के रहस्य से पर्दा उठाते हुए  हुए एडिशनल एसपी कीर्तन राठौर ने बताया कि प्रार्थी मनबहाल राठिया निवासी ग्राम बेहरचुवा द्वारा थाना करतला में रिपोर्ट दर्ज कराई  कि प्रार्थी का  सुपुत्र आनंद राठिया  8 सितंबर 2020 के रात्रि करीब 8 बजे घर से बिना बताये कहीं चला गया है. काफी खोजबीन करने पर भी पता नहीं चल रहा है. मामले में थाना करतला में गुम इंसान कायम कर आनंद राठिया का पतासाजी की जा रही थी. प्रथम दृष्टया मामला प्रेम संबंध का प्रतीत हुआ एवं आनंद राठिया के संदिग्ध परिस्थितियों में गायब होने के कारण पुलिस अधीक्षक कोरबा अभिषेक मीणा द्वारा इस प्रकरण को गभीर मामला मानकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक  कीर्तन राठौर के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन कर आनंद राठिया के  तलाश करने हेतु निर्देशित किया गया था . पुलिस अधीक्षक कोरबा अभिषेक मीणा को मुखबीर के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई कि दिनांक 8 सितंबर 2020 को ग्राम सुमरलोट के जंगल में ग्रामीणों द्वारा जंगली सुअर मारने हेतु विद्युत करंट प्रवाहित तार बिछाया गया था जिसकी चपेट में आने से आनंद राठिया की मृत्यु हो गई थी. ग्रामीणों द्वारा मृतक आनंद राठिया के मौत को छिपाने के उद्देश्य से आनंद राठिया के शव को ग्राम सुअरलोट दमक पहाडी धोरा डोगरी में मोहलाईन पेड़ के नीचे जंगल में ही गाड़ दिया गया है . पुलिस अधीक्षक  अभिषेक मीणा द्वारा उपरोक्त सूचना के तस्दीक हेतु अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक  कीर्तन राठौर को तत्काल मौके पर भेजा गया.

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करंट से मौत का खुलासा

मुखबीर से प्राप्त सूचना के आधार पर कार्यपालिक दण्डाधिकारी करतला के उपस्थिति में मृतक आनंद राठिया के शव को उखड़वाकर मर्ग पंचनामा कार्यवाही किया गया . संपूर्ण जांच पर पाया गया कि आरोपीगण मयाराम राठिया एवं उसके अन्य 23 साथियों द्वारा जंगली सुअर का शिकार करने के उद्देश्य से दिनांक 8 सितंबर 2020 को रात्रि में ग्राम खुंटाकुड़ा से ग्राम सुअरलोट के बीच पहाड़ी में लगभग 1.5 किलोमीटर दूरी तक नंगा जीआई तार में बिजली करंट जोड़ा गया था. रात मे  आनंद राठिया जंगल में आरोपीगण द्वारा जोड़े गये बिजली करंट प्रवाहित तार के चपेट में आ गया जिससे मौके पर उसकी मौत हो गई आरोपीगण द्वारा मृतक आनंद राठिया के मौत को छिपाने के उद्देश्य से रात्रि में ही मृतक के शव को एक प्लास्टिक के चटाई में लपेटकर नईखार पहाड़ी के पास झाड़ी में छिपाकर रख दिये एवं दूसरे रात्रि में सभी लोग मृतक के शव को ग्राम सुअरलोट दमक पहाड़ी मे एक पेड़ के नीचे जंगल में गड्ढा खोदकर दफन कर दिया  .मामले में आरोपी मयाराम राठिया सहित कुल 24 आरोपीगण के  खिलाफ मामला पंजीबद्ध हुआ है. प्रकरण में अब तक 14 आरोपी गिरफ्तार कर लिये गये है शेष 10 आरोपी फरार है, जिन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जायेगा.

हत्या का सच छुपाने गांव वालों ने ली शपथ

पुलिस जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि सुअरलोट के कुछ ग्रामीणों द्वारा  जंगली सुअर फंसाने के लिए खूंटकुडा से सुअरलोट के मध्य डेढ़ किलोमीटर लंबा जीआई तार खींच करंट प्रवाहित किया गया. घटना की रात प्रेमिका से मिलने आया आनन्द टॉर्च की रोशनी को समझा कि प्रेमिका के परिजन जान गए हैं और उसे मारने आ रहे हैं.इसी भय में भागते वक्त करेंट के तार की चपेट में आ गया जबकि उसका दोस्त  दूसरी दिशा में भाग निकला .इधर तार के सम्पर्क में आते ही स्पार्क हुआ और सुअरमारने वालों को लगा कि सुअर फंस गया, तब मौके पर पहुंचे तो युवक का शव देखकर सभी भयभीत हो गए.

लाश देख कर सुअर मारने वाले शव को चटाई में लपेटकर नरईखार पहाड़ी के पास झाड़ी में छिपा दिया दूसरी रात 5 -7 लोग करीब साढ़े 5 किलोमीटर दूर पहाड़ के ऊपर ले जाकर लकड़ी के सहारे गड्ढा खोदकर शव को लकड़ी सहित दफना दिया. आनन्द का मोबाइल, मेमोरी चिप, सिम कार्ड को बंद बोर के गड्ढे में डाल दिया व फेंक दिया. मृतक के कपड़े भी जला दिए. तत्पश्चात गांव में बैठक कर  राज छिपाए रखने की शपथ ली गई.पुलिस ने मुख्य आरोपी सहित शव को ठिकाने लगाने और जान कर भी नहीं बताने वाले कुल 24 लोगों पर जुर्म दर्ज हुआ है पुलिस के  अनुसार सुअरलोट करीब 100 परिवारों का  छोटा सा गांव है जिनमें आधे परिवार से कोई न कोई सदस्य आरोपी है.

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यह घटना एक सबक है!

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला के करतला थाना अंतर्गत यह घटना  बताती है कि किस तरह ग्रामीण अंचल में आज भी समझदारी के अभाव में “विद्युत करंट” जैसे माध्यमों का उपयोग जंगली जानवरों के आखेट करने के लिए  नासमझी का खेल जारी   है. पुलिस अधिकारी विवेक शर्मा बताते हैं कि ग्रामीण अंचल में पहले ग्रामीण गड्ढे खोदकर के वन्य प्राणियों को अपना शिकार बनाया करते थे अथवा खाने में जहर देकर के भी वन्य प्राणियों को मारा जाता रहा है मगर अब जिस तरीके से “करंट” का उपयोग किया जा रहा है’, वह अपने आप में बहुत ख़तरनाक और चिंता का सबब है.

सामाजिक कार्यकर्ता इंजीनियर रमाकांत श्रीवास के अनुसार ग्रामीणों को यह समझ दे जा रही है की किसी भी हालत में  “करंट फैलाना” एक गंभीर अपराध है. वहीं इसका शिकार उनके अपने परिजन, बच्चे अभी भी हो सकते हैं. अतः ऐसे कृत्य से ग्रामीणों को बचना चाहिए.

डॉक्टर जी आर पंजवानी कहते हैं सुअरलोट गांव की यह घटना यह संदेश देती है कि सरकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं को ग्रामीण अंचल में विद्युत के खतरनाक खेल से बचने के लिए  जागरूकता प्रसारित करना अपरिहार्य  है. एक व्यक्ति की हत्या में 24 लोगों का अपराधी बनना समाज के लिए चिंता का विषय है.

अनोखा रिश्ता : भाग 1

जयशंकर से गले मिल कर जब मैं अपनी सीट पर जा कर बैठा तो देखा मनीषा दास आंचल से अपनी आंखें पोंछे जा रही थीं. उन के पांव छूते समय ही मेरी आंखें नम हो गई थीं. धीरेधीरे टे्रन गुवाहाटी स्टेशन से सरकने लगी और मैं डबडबाई आंखों से उन्हें ओझल होता देखता रहा.

इस घटना को 25 वर्ष बीत चुके हैं. इन 25 वर्षों में जयशंकर की मां को मैं ने सैकड़ों पत्र डाले. अपने हर पत्र में मैं गिड़गिड़ाया, पर मुझे अपने एक पत्र का भी जवाब नहीं मिला. मुझे हर बार यही लगता कि श्रीमती दास ने मुझे माफ नहीं किया. बस, यही एक आशा रहरह कर मुझे सांत्वना देती रही कि जयशंकर अपनी मां की सेवा में जीजान से लगा होगा.

मेरे लिए मनीषा दास की निर्ममता न टूटी जिसे मैं ने स्वयं खोया, अपनी एक गलती और एक झूठ की वजह से. इस के बावजूद मैं नियमित रूप से पत्र डालता रहा और उन्हें अपने बारे में सबकुछ बताता रहा कि मैं कहां हूं और क्या कर रहा हूं.

एक जिद मैं ने भी पकड़ ली थी कि जीवन में एक बार मैं श्रीमती दास से जरूर मिल कर रहूंगा. असम छोड़ने के बाद कई शहर मेरे जीवन में आए, बनारस, इलाहाबाद, लखनऊ, दिल्ली, देहरादून फिर मास्को और अंत में बर्लिन. इन 25 वर्षों में मुझ से सैकड़ों लोग टकराए और इन में से कुछ तो मेरी आत्मा तक को छू गए लेकिन मनीषा दास को मैं भूल न सका. वह जब भी खयालों में आतीं  मेरी आंखें नम कर जातीं.

मां की तबीयत खराब चल रही थी. 6 सप्ताह की छुट्टी ले कर भारत आया था. मां को देखने के बाद एक दिन अनायास ही मनीषा दास का खयाल जेहन में आया तो मैं ने गुवाहाटी जाने का फैसला किया और अपने उसी फैसले के तहत आज मैं मां समान मनीषा दास से मिलने जा रहा हूं.

गुवाहाटी मेल अपनी रफ्तार से चल रही थी. मैं वातानुकूलित डब्बे में अपनी सीट पर बैठा सोच रहा था कि यदि श्रीमती दास ने मुझे अपने घर में घुसने नहीं दिया या फिर मुझे पहचानने से इनकार कर दिया तब? इस प्रश्न के साथ ही मैं ने मन में दृढ़ निश्चय कर लिया कि चाहे जो हो पर मैं अपने मन की फांस को निकाल कर ही आऊंगा.

मेरे जेहन में 25 साल पहले की वह घटना साकार रूप लेने लगी जिस अपराधबोध की पीड़ा को मन में दबाए मैं अब तक जी रहा हूं.

मैं गुवाहाटी मेडिकल कालिज में अपना प्रवेश फार्म जमा करवाने गया था. रास्ते में मेरा बटुआ किसी ने निकाल लिया. उसी में मेरे सारे पैसे और रेलवे के क्लौक रूम की रसीद भी थी. इस घटना से मेरी तो टांगें ही कांपने लगीं. मैं सिर पकड़ कर प्लेटफार्म की एक बेंच पर बैठ गया.

इस परदेस में कौन मेरी बातों पर भरोसा करेगा. मुझे कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था. तभी एक लड़का मेरे पास समय पूछने आया. मैं ने अपनी कलाई उस की ओर बढ़ा दी. वह स्टेशन पर किसी को लेने आया था. समय देख कर वह भी मेरे बगल में बैठ गया. थोड़ी देर तक तो वह चुप रहा फिर अपना परिचय दे कर मुझे कुरेदने लगा कि मैं कहां से हूं, गुवाहाटी में क्या कर रहा हूं? मैं ने थोड़े में उसे अपना संकट सुना डाला.

थोड़ी देर की खामोशी के बाद वह बोला, ‘धनबाद का किराया भी तो काफी होगा.’

‘हां, 100 रुपए है.’ यह सुन कर वह बोला कि यह तो अधिक है. पर

तुम  अपना जी छोटा न करो. मां को आने दो उन से बात करेंगे.

तभी एक टे्रन आने की घोषणा हुई और वह लड़का बिना मुझ से कुछ कहे उठ गया. उस की बेचैनी मुझ से छिपी न थी. ट्रेन के आते ही प्लेट-फार्म पर ऐसी रेलपेल मची कि वह लड़का मेरी आंखों से ओझल हो गया.

15 मिनट बाद जब प्लेटफार्म से थोड़ी भीड़ छंटी तो मैं ने देखा कि वह लड़का अपनी मां के साथ मेरे सामने खड़ा था. मैं ने उठ कर उन के पांव को छुआ तो उन्होंने धीरे से मेरा सिर सहलाया और बस, इतना ही कहा, ‘जयशंकर बता रहा था कि तुम्हारा सूटकेस क्लौक रूम में है जिस की रसीद तुम गुम कर चुके हो. सूटकेस का रंग तो तुम्हें याद है न.’

मैं उन के साथ क्लौक रूम गया. अपना पता लिखवा कर वह सूटकेस निकलवा लाईं. जयशंकर ने अपनी साइकिल के कैरियर पर मेरा सूटकेस लाद लिया और मैं ने उस की मां का झोला अपने कंधे से लटका लिया. पैदल ही हम घर की तरफ चल पड़े.

आगेआगे जयशंकर एक हाथ से साइकिल का हैंडल और दूसरे से मेरा सूटकेस संभाले चल रहा था, पीछेपीछे मैं और उस की मां. जयशंकर का घर आने का नाम ही न ले रहा था. रास्ते भर उस की मां ने मुझ से एक शब्द तक न कहा, वैसे जयशंकर ने मुझे पहले ही बता दिया था कि मेरी मां सोचती बहुत हैं बोलती बहुत कम हैं. तुम इसे सहज लेना.

रास्ते भर मैं जयशंकर की मां के लिए एक नाम ढूंढ़ता रहा. उन के लिए मिसेज दास से उपयुक्त कोई दूसरा नाम न सूझा.

आखिरकार हम एक छोटी सी बस्ती में पहुंचे, जहां मिसेज दास का घर था, जिस की ईंटों पर प्लास्टर तक न था. देख कर लगता था कि सालों से घर की मरम्मत नहीं हुई है. छत पर दरारें पड़ी हुई थीं. कई जगहों से फर्श भी टूटा हुआ था पर कमरे बेहद साफसुथरे थे. दरवाजों और खिड़कियों पर भी हरे चारखाने के परदे लटक रहे थे. इन 2 कमरों के अलावा एक और छोटा सा कमरा था जिस में घर का राशन बड़े करीने से सजा कर रखा गया था.

मिसेज दास ने मुझे एक तौलिया पकड़ाते हुए हाथमुंह धोने को कहा. जब मैं बाथरूम से बाहर निकला तो संदूक पर एक थाली में कुछ लड्डू और मठरी देखते ही मेरी जान में जान आ गई.

मिसेज दास ने आदेश देते हुए कहा, ‘तुम जयशंकर के साथ थोड़ा नाश्ता कर लो फिर उस के साथ बाजार चले जाना. जो सब्जी तुम्हें अच्छी लगे ले आना. तब तक मैं खाने की तैयारी करती हूं.’

नाश्ता करने के बाद मैं जयशंकर के साथ सब्जी खरीदने के लिए बाजार चला गया. वापस लौटने तक मिसेज दास पूरे बरामदे की सफाई कर के पानी का छिड़काव कर चुकी थीं. दोनों चौकियों पर दरियां बिछी हुई थीं और वह एक गैस के स्टोव पर चावल बना रही थीं. घर वापस आते ही जयशंकर अपनी मां के साथ रसोई में मदद करने लगा और मैं वहीं बरामदे में बैठा अपनी वर्तमान दशा पर सोचता रहा. कब आंख लग गई पता ही न चला.

जयशंकर के बुलाने पर मैं बरामदे से कमरे में पहुंचा और दरी पर पालथी मार कर बैठ गया. मिसेज दास सारा खाना कमरे में ही ले आईं और मेरे सामने अपने पैर पीछे की तरफ मोड़ कर बैठ गईं. जहां हम बैठे थे उस के ऊपर बहुत पुराना एक पंखा घरघरा रहा था. खाने के दौरान ही मिसेज दास ने कहना शुरू किया, ‘बेटा, हम तो गुवाहाटी में बस, अपनी इज्जत ढके बैठे हैं. 100-200 रुपए की सामर्थ्य भी हमारे पास नहीं है. मुझे दीदी को लिखना होगा. पैसे आने में शायद 8-10 दिन लग जाएं. तुम कल सुबह जयशंकर के साथ जा कर अपने घर पर एक टेलीग्राम डाल दो वरना तुम्हारे मातापिता चिंतित होंगे.’

मेरा मन भर आया. सहज होते ही मैं ने उन से कहा, ‘इतने दिनों में तो मेरे घर से भी पैसे आ जाएंगे. आप अपनी दीदी को कुछ न लिखें. मैं तो यह सोच कर परेशान हूं कि 8-10 दिन तक आप पर बोझ बना रहूंगा…’

‘तुम ऐसा क्यों सोचते हो,’ मिसेज दास ने बीच में ही मुझे टोकते हुए कहा, ‘जो रूखासूखा हम खाते हैं तुम्हारे साथ खा लेंगे.’

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

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