ममता बनर्जी का “कांग्रेस” उखाड़ो अभियान

पी .के . अर्थात प्रशांत किशोर जिन्हें आज भारतीय राजनीति की शतरंज का बाजीगर या चाणक्य कह सकते हैं- विक्रम और बेताल किस्से की तरह  आज देश की बहुचर्चित महिला नेत्री मुख्यमंत्री पश्चिम बंगाल की पीठ पर बैठकर राजनीतिक सत्ता के प्रश्नों में ममता बनर्जी को कुछ इस तरह उलझाने कहें सुलझाने में लगे हैं कि देश में एक उथल-पुथल का दौर चल पड़ा है.

प्रशांत किशोर के सानिध्य में ममता बनर्जी अब देश की सबसे बड़ी राजनीतिक हस्ती बतौर विपक्ष का केंद्र बनना चाहती हैं. प्रशांत किशोर का सीधा साधा गणित  है कि 2014 के बाद जिस तरह अधिकांश चुनाव में कांग्रेस खेत रही है ऐसे में कांग्रेस का विकल्प आज के समय में तृणमूल कांग्रेस ही है. जिस तरीके से पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को सत्ता से हटाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने शतरंज की बाजी बतौर राजनीतिक खेल खेला था उसमें ममता बनर्जी का जीतकर के सामने आना अद्भुत चमत्कारी कहानी जैसा है.

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हर कोई यही मान रहा था कि नरेंद्र मोदी के चक्रव्यूह में फंसकर के ममता बनर्जी राजनीति से हाशिए में जाना तय है. भाजपा हर हालात में पश्चिम बंगाल पर अपना  झंडा फहराएगी. ममता बनर्जी के तेवर  कुछ देश के मिजाज के कारण भाजपा तिनके की तरह उखड़ कर उड़ गई.

आज के हालात में आगामी 2024 के संसदीय चुनाव के मद्देनजर ममता बनर्जी कि यह राजनीतिक महत्वाकांक्षा जागृत हो चुकी है की कांग्रेस का विकल्प सिर्फ तृणमूल कांग्रेस है. और भाजपा को सीधी चुनौती सिर्फ और सिर्फ ममता बनर्जी इस देश में दे सकती हैं.

इस महत्वपूर्ण विषय पर आज हम इस रिपोर्ट में कुछ ऐसे प्रश्नों को आपके समक्ष रख रहे हैं जिसकी बिनाह पर आप यह तय कर सकते हैं कि क्या सचमुच ममता बनर्जी नरेंद्र दामोदरदास मोदी और भाजपा के कद को बौना साबित करने में सफल हो सकती है. अथवा ममता बनर्जी की महत्वकांक्षा के कारण एक बार फिर नरेंद्र दामोदर दास मोदी को सफलता मिल जाएगी.

सुब्रमण्यम स्वामी का सर्टिफिकेट!

ममता बनर्जी ने जिस तरीके से अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी को चुनौती दी है वह अपने आप में प्रासंगिक  है.

यही कारण है कि जहां उन्हें सुब्रमण्यम स्वामी जैसे उथल-पुथल मचाने वाले राष्ट्रीय व्यक्तित्व ने एक तरह से छवि बनाने में मदद की है, वहीं महाराष्ट्र में राजनीति के शरद पवार ने भी साथ खड़ा होने का संकेत दे दिया है.

दरअसल, कांग्रेस आज जिस तरीके से अपने ही मकड़जाल में उलझी हुई है वह एक संक्रमण का समय कहा जा सकता है. कांग्रेस राहुल और सोनिया गांधी के बीच झूल रही है, राहुल गांधी किसी पद पर नहीं होने के बावजूद हर एक मुद्दे पर बोल रहे हैं और अपना डिसीजन दे रहे हैं. प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में कुछ नया करना चाहती है. दूसरी तरफ कांग्रेस के  बड़े चेहरे कपिल सिब्बल, गुलाम नबी आजाद जैसे 23 नेता अपना एक अलग राग अलाप रहे हैं डफली बजा रहे हैं. परिणाम स्वरूप कांग्रेस की स्थिति लंबे राजनीतिक समय काल में सबसे कमजोर स्थिति में आ चुकी है कांग्रेस कुछ थकी हुई और उलझी हुई दिखाई दे रही है. भाजपा को जिस तरीके से घात प्रतिघात एक विपक्ष के द्वारा दिया जाना चाहिए कांग्रेस उसमें कमतर बनी हुई है.

ऐसे में निसंदेह राजनीतिक महत्वाकांक्षा  जागृत होनी ही है और यह समय की मांग भी कही जा सकती है. ममता बनर्जी ने जिस तरीके से विपक्ष के गठबंधन पर सवाल उठा दिया है और ताल ठोक के भाजपा और नरेंद्र दामोदरदास मोदी के खिलाफ बिगुल बजाया है उससे सबसे ज्यादा सकते में कोई है तो वह कांग्रेस पार्टी ही है. क्योंकि यह सीधे-सीधे उसे चुनौती मिल रही है की सत्ता सिंहासन खाली करो की ममता बनर्जी आ रही है!

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शायद यही कारण है कि कांग्रेस आज मुखर हो करके ममता बनर्जी पर हमला कर रही है. मगर आने वाले समय में अगर कांग्रेस ने अपने आप को अपनी जमीन पर मजबूती से खड़े होकर के अपनी “ताकत” नहीं दिखाई तो उसे उखड़ कर ममता बनर्जी को अथवा अरविंद केजरीवाल को रास्ता देना होगा, यह समय की मांग बन जाएगी.

देश की राजनीति में कई कई बार उथल-पुथल मचाने वाले और एकला होते हुए भी अपने अस्तित्व को एक राष्ट्रीय पार्टी की ताजा प्रदर्शित करने वाले सुब्रमण्यम स्वामी ने एक बड़ी गहरी बात कही है की राजनीतिक इतिहास में उन्होंने – जयप्रकाश नारायण, चंद्रशेखर, राजीव गांधी पीवी नरसिम्हा राव और मोरारजी  भाई देसाई जैसा कथनी और करनी में आज की राजनीति में किसी को पाया है तो वह ममता बनर्जी है.

सुब्रमण्यम स्वामी का यह सर्टिफिकेट ममता बनर्जी के लिए बहुत काम आने वाला है. क्योंकि आज की राजनीति में सबसे बड़ा संकट कथनी और करनी का ही है. ममता बनर्जी जिस तरीके से सादगी पूर्ण जीवन जी रही है वह देश की जनता को अपील करता है और अपनी और आकर्षित करता है उनमें महात्मा गांधी और इंदिरा गांधी जैसे व्यक्तित्व की छाप दिखाई देती है. आने वाले समय में जिस तरीके से तृणमूल कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पैठ बनाने में लगी हुई है उसका सकारात्मक परिणाम भी आ सकता है कि भारतीय जनता पार्टी केंद्र से उखड़ जाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

Anupamaa: अनुपमा पर हमला करेगी काव्या तो वनराज उठाएगा ये कदम

टीवी का पॉपुलर सीरियल अनुपमा में इन दिनों फुल ऑन ड्रामा चल रहा है. जिससे फैंस को एंटरटेनमेंट का डबल डोज मिल रहा है. शो में अब तक आपने देखा कि काव्या ने शाह हाउस अपने नाम किया और वनराज के पूरे परिवार को खरी-खोटी सुनाई. तभी से वनराज काव्या से दूर होने लगा और उसने अनुपमा से बताया भी कि काव्या का मेरे दिल में अब कोई जगह नहीं है. शो के आने वाले एपिसोड में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है.

शो के लेटेस्ट एपिसोड में आपने देखा कि बा-बापूजी की मैरिज एनिवर्सरी मनाया जा रहा है. इसी बीच काव्या अनुपमा की बेइज्जती करती है. और वो दोनों बात करने के लिए कमरे में जाते हैं. अनुपमा उसे समझाती है.

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शो के अपकमिंग एपिसोड में दिखाया जाएगा कि काव्या, बा और बापूजी के लिए शादी के गिफ्ट के रूप में शाह हाउस उनके नाम करने वाली है. वह अपनी गलती को सुधारने की कोशिश करेगी और पूरे घर से मांफी मांगेगी.

 

शो में आप ये भी देखेंगे कि वह कहेगी कि उसे परिवार चाहिए ना कि पॉपर्टी. वह कहेगी कि अनुपमा की बात से उसे समझ आ गया है कि परिवार ही जरूरी है.तो दूसरी तरफ वनराज का गुस्सा शांत नहीं होगा और काव्या को तलाक के कागज देगा. ऐसे में काव्या अपना आपा खो देगी. और हर बार की तरह वह अनुपमा को ही दोषी बताएगी.

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वह कहेगी कि उसने ही वनराज को भड़काया है. वह अनुपमा पर आरोप लगाएगी कि अपने तलाक का बदला लेने के लिए वह काव्या-वनराज का तलाक करा रही है. शाह हाउस में खूब तमाशा होगा. वनराज काव्या को रोकने की कोशिश करेगा फिर भी काव्या नहीं मानेगी. वनराज कहेगा कि काव्या से शादी करना उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी. शाह हाउस में खूब तमाशा होगा.  इसके बाद डॉली अनुपमा से कहेगी कि वह वनराज को समझाए. अब देखना ये होगा कि क्या अनुपमा वनराज को मना पाएगी?

मेरे पति उदास रहते हैं, मैं क्या करूं?

सवाल

मेरी अभी हाल ही में शादी हुई है. अरेंज मैरिज है और हम दोनों परिवार से दूर बेंगलुरु में रहते हैं क्योंकि पति की जौब यहीं पर है. थोड़े दिन तो सब ठीक रहा लेकिन अब पति मुझे कुछ बुझे बुझे से नजर आते हैं. मैं समझ नहीं पा रही कि आखिर कैसे पति के साथ अपने रिश्ते को प्यारभरा और खुशहाल बनाऊं?

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जवाब

आप के पति परिवार से दूर रह रहे हैं, इसलिए यह कारण भी हो सकता है उन के उदास रहने का. वे वहां अपने परिवार को मिस कर रहे होंगे. लेकिन सवाल नौकरी का है तो स्थिति को स्वीकारना होगा.

लेकिन समझ नहीं आता, आप की नईनई शादी हुई है. आप को तो अपने प्यार में पति को ऐसे डुबो देना चाहिए कि उन्हें उदासी दूरदूर तक न घेरे. अभी तो आप के शादी के शुरुआती दिन हैं. अपने रिश्ते में स्पार्क बना कर रखें. वक्त के साथसाथ देखिएगा रिश्ता और प्यारभरा होता जाएगा. आप एकदूसरे के साथ वक्त बिताने के अलगअलग तरीके खोजें और साथ ही उन्हें मस्ती से भरपूर बनाएं. आप यह देखने की कोशिश करें कि ऐसी कौन सी चीज है जो आप के रिश्ते को स्पाइसअप करती है.

अपने पति की तारीफ करने में कंजूसी न करें. उन्हें बताएं कि आप को उन में क्या अच्छा लगता है. इस से न सिर्फ उन्हें अच्छा लगेगा बल्कि रिलेशन में प्यार भी बढ़ता है. अपनेआप को आकर्षक बना कर रखें. पति के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताएं. साथ में घूमने जाएं, खाना बनाएं, घर के काम करें, ऐसा करने से रिश्ते और मजबूत बनते हैं. ये सब बातें फौलो करें, फिर देखिएगा कैसे आप के पति खुश रहते हैं.

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अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
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क्या अंतरिक्ष यात्री कभी स्पेस में सेक्स करते हैं ?

हालांकि अभी तक न सिर्फ दुनिया की तमाम अंतरिक्ष कार्यक्रम एजेंसियां जैसे नासा आदि इस सवाल से बचती रही हैं बल्कि अंतरिक्ष यात्री भी अव्वल तो सीधे कभी मीडिया से टकराते नहीं रहे और अगर कभी टकराये भी तो ऐसे सवालों से कन्नी काट जाते रहे हैं. लेकिन यकीन मानिये लोगों में यह जानने की हमेशा से सहज जिज्ञासा रही है कि अंतरिक्ष में  जाने वाले महिला और पुरुष एस्ट्रोनाॅट महीनों साथ-साथ रहते हैं तो क्या इस दौरान वे एक दूसरे के साथ स्पेस में सेक्स भी करते हैं? अगर नहीं करते तो क्यों नहीं करते? क्या उनमें इस तरह की इच्छा नहीं होती या कोई और कारण है?

लेकिन ऐसे सवालों से अंतरिक्ष एजेंसियां और अंतरिक्ष यात्री दोनो ही यह कहकर कन्नी काट जाते रहे हैं कि वे अंतरिक्ष इस सबके लिए नहीं जाते, अंतरिक्ष जाने का मिशन बहुत बड़ा होता है, उस सबमें इस सबका न ख्याल आता है और न ही जरूरत महसूस होती है. लेकिन हम सब जानते हैं कि यह एक रूटीन में बोला गया झूठ है.

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सच तो यह है कि ऐसा जवाब देने वाले भी इस बात को जानते हैं कि यह झूठ है. बहरहाल इस सोशल मीडिया के दौर में तमाम अंतरिक्ष यात्री तमाम आम लोगों से भी सोशल मीडिया में जुड़े हुए और लोग उनसे ऐसे तमाम सवालों की निजी रूप से बौछार करते रहते हैं. इसलिए न सिर्फ अंतरिक्ष यात्री बल्कि अंतरिक्ष एजेंसियां भी अब इस और इस जैसे कई दूसरे सवालों का जवाब देने लगे हैं. लेकिन हम यहां सिर्फ इसी सवाल को ले रहे हैं कि क्या अंतरिक्ष यात्री स्पेस में सेक्स करते हैं?

थाॅट कंपनी डाॅट काॅम वेबसाइट में मशहूर साइंस लेखक पीएचडी, जाॅन पी मिल्स ने पिछले दिनों लिखा है कि आने वाले दिनों में इस सवाल की आवृत्ति और ज्यादा इसलिए बढ़ जायेगी क्योंकि साल 2028 और उसके बाद से तमाम स्पेस एजेंसियां लंबे-लंबे अंतरिक्ष, चांद और मंगल मिशन भेजने वाली हैं. इनमें पुरुष भी होंगे, महिलाएं भी होंगी. जाहिर है वो महीनों महीनों तक एक साथ रहेंगे, एक जगह रहेंगे, एक दूसरे को छूने की दूरी में रहेंगे. ऐसे में क्या वे कभी एक दूसरे के साथ अतंरंग होने यानी सेक्स के बाबत नहीं सोचेंगे?

चूंकि स्पेस स्टेशन में तो ऐसे मिशन सालों के लिए जाते हैं, यहां रहते हुए तो यह सहज जिज्ञासा और भी परेशान करेगी. बहरहाल अब बड़ी ईमानदारी और सहजता से न सिर्फ अंतरिक्ष एजेंसियों ने इस सवाल का जवाब देने की कोशिश की है बल्कि कई अंतरिक्ष यात्रियों ने भी व्यक्तिगत रूप से लोगों को ऐसा ही कुछ बताया है. दरअसल अंतरिक्ष में शून्य गुरुत्वाकर्षण होता है, जिसके चलते सैंद्धांतिक रूप से यह तय है कि आप ‘हुक अप’ नहीं कर सकते यानी एक दूसरे से चिपककर सेक्स नहीं कर सकते. क्योंकि अंतरिक्ष में शरीर के हर हिस्से पर खून की मौजूदगी एक सी नहीं होती. इसलिए पुरुष इंद्री में इरेक्शन संभव नहीं होता.

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हालांकि यह लिखते हुए जॉन पी मिल्स ने यह भी कहा है कि यह उनका अनुमानभर है और विज्ञान के नियम के चलते बुनियादी सच्चाई का तर्क. अगर किसी का व्यक्तिगत अनुभव कुछ और हो तो कहा नहीं जा सकता. हालांकि उनके इस चर्चित हुए लेख के बाद से अब तक किसी भी अंतरिक्ष यात्री ने उनके इस लिखे हुए का खंडन नहीं किया. लेकिन न सिर्फ लेखक जाॅन पी मिल्स बल्कि कई दूसरे सेक्सोलाॅजिस्ट और कार्डियोलाजिस्ट ने भी यही बात दोहरायी है.

भौतिक विज्ञान के नियमों के मुताबिक देखें तो सेक्स के लिए पुरुष जननांग में रक्तप्रवाह का तीव्र होना जरूरी है. चूंकि कम गुरुत्व बल के कारण अंतरिक्ष में खून पूरे शरीर में बहता ही नहीं, जैसे वह धरती में बहता है, इसलिए अंतरिक्ष में सिद्धांततः संभोग असंभव है. लेकिन सेक्स महज यौन गतिविधि भी नहीं होती, उसके कई दूसरे रूप भी होते हैं, जो कि हर हाल में संभव हैं.

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Crime Story: लिव इन रिलेशनशिप में मिली मौत

एक – लिव इन रिलेशनशिप में रहते हुए बिलासपुर में रमा को रमेश ने छोड़ दिया 1 साल बाद जब रिश्ता टूट गया तो रमा के जीवन में अंधकार था क्योंकि वह स्वयं को लूटी हुई महसूस कर रही थी परिणाम स्वरूप उसने आत्महत्या कर ली.

दो- रायपुर के निकट सिमगा में राजेश और रजनी लिव इन रिलेशनशिप में लंबे समय तक साथ थे. एक दिन रजनी से प्रताड़ित होकर, एक अंतिम चिट्ठी लिखकर, राजेश ने आत्महत्या कर ली.

तीन- राजनांदगांव में आज के आधुनिक लिव इन रिलेशनशिप के फेरे में पड़कर, सुमित्रा और मोहन कीजिंदगी ऐसे तबाह हुई की एक दिन सुमित्रा कि मोहन ने हत्या कर दी और जेल चला गया.

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लिव इन रिलेशनशिप की ऐसे ही अनेक किस्से आज हमारे आस-पास घटनाक्रम के रूप में सामने हैं. युवा पीढ़ी क्या इससे सबक लेगी या क्षणिक आवेग में अपनी जिंदगी बर्बाद करते रहेंगे. आइए देखिए एक ऐसे ही रिपोर्ट-

छत्तीसगढ़ के रायपुर में लिव-इन रिलेशन में रहने वाली एक युवती की हत्या का मामला सामने आया है. युवती से पीछा छुड़ाने के लिए आरोपी प्रेमी ने दूध में चूहा मारने का दवाई डालकर  मौत की सौगात दे दी.

घटना राजधानी रायपुर के  डीडी नगर थाना क्षेत्र की है. डीडी नगर थाना प्रभारी मंजूलता राठौर ने संवाददाता को  बताया – मृतिका रीना बंसोड़ और आरोपी नीरज सेन लंबे समय से  “लिव-इन रिलेशनशिप” में थे. मृतका रायपुरा स्थित एक निजी अस्पताल में प्राइवेट जॉब करती थी, उससे  आरोपी नीरज सेन का  गहरा सम्बन्ध जांच मे उजागर हुआ है .

6 महीने पहले किसी बात को लेकर दोनों के मध्य विवाद हुआ, जिसकी वजह से आरोपी नीरज ने सुबह  मृतका के दूध में चूहे मारने की दवाई डालकर पिला दी. हालत बिगड़ने पर मृतका को पडोसी ने अस्पताल में भर्ती कराया .  इलाज के दौरान रीना की मौत हो गई.  मृतका ने अपने अंतिम  बयान में बताया था कि आरोपी नीरज  ने उसे दूध में जहर मिला कर  पिला दिया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद 5 फरवरी 2020, बुधवार को आरोपी नीरज सेन की गिरफ्तारी की गई है.

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‘इश्क’ के साइड इफेक्ट!

लिव इन रिलेशनशिप के इस मामले मे  कहानी कुछ इस तरह की है -धमतरी के तरसिंवा निवासी रीना बंसोड़ रायपुर  में नर्सिंग की पढ़ाई कर रही थी. पढ़ाई के साथ ही एक प्राइवेट नर्सिंग होम में वह जाॅब भी करने लगी  थी। इस दरम्यान  रीना  बंसोड का धमतरी कंडेल के रहवासी  नीरज सेन के साथ परिचय  हुआ  धीरे धीरे  संबंध  गहराते  गये .नीरज अपनी प्रेमिका से मिलने उसके घर पहुंच जाता था.18 जून 2019  की  रात भी नीरज अपनी प्रेमिका रीना बंसोड  से मिलने डीडी नगर आया . रीना यहां किराये के मकान में रहा करती थी.  दोनों साथ बैठकर बातें कर रहे थे, इसी बीच विवाद हुआ और विवाद इतना बढ़ा कि नीरज  बेकाबू हो गया. फिर जैसा कि  अक्सर होता है  रीना नीरज का विवाद थोड़े समय पश्चात शांत  हो गया.दोनों  ने रात साथ  बितायी .सुबह मानो  नीरज के दिमाग में मर्डर की सनक सवार हो गयी.

19 जून 2019की सुबह आरोपी नीरज सेन  ने दुध में चुहा मारने दवा मिला कर प्रेमिका रीना  को पिला दी.जहर के सेवन से, रीना को उल्टी होने लगी हालत  बिगड़ गयी उसे  गंभीर अवस्था में  अस्पताल दाखिल किया गया, जहां पर उसकी मौत हो गयी. पुलिस ने अस्पताल में रीना का बयान लिया था, जिसमें उसने कहा था कि घटना वाले दिन प्रेमी ने उसे दुध दिया था. इसी के बाद से उसकी तबियत खराब हुई .

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आठ माह बाद इस मामले में मृतिका की पोस्ट मार्टम  रिपोर्ट सामने आयी, जिसके बाद पुलिस को साक्ष्य मिल गया  कि रीना  की मौत दूध में जहर मिलाकर पिलाने से हुई थी. इस प्रकरण में खास बात यह रही कि पुलिस को आरोपी तक पहुंचने के लिए 8 महीने का लंबा समय लग गया यह बताता है कि  पुलिस किस बेतरतीब तरीके से काम कर रही है.

सजा किसे मिली- भाग 1: आखिर अल्पना अपने माता-पिता से क्यों नफरत करती थी?

लेखिका- सुधा आदेश

अल्पना की आंखें खुलीं तो खुद को अस्पताल के बेड पर पाया. मां फौरन उस के पास आ कर बोलीं, ‘‘कैसी है, बेटी. इतनी बड़ी बात तू ने मुझ से छिपाई… मैं मानती हूं कि अच्छी परवरिश न कर पाने के कारण तू अपने मातापिता को दोषी मानती है पर हैं तो हम तेरे मांबाप ही न…तुझे दुखी देख कर भला हम खुश कैसे रह सकते हैं…’’

‘‘प्लीज, आप इन से ज्यादा बातें मत कीजिए…इन्हें आराम की सख्त जरूरत है,’’ उसी समय राउंड पर आई डाक्टर ने मरीज से बातें करते देख कर कहा तथा नर्स को कुछ जरूरी हिदायत देती हुई चली गई.

अल्पना कुछ कह पाती उस से पहले ही नर्स आ गई तथा उस ने उस के मम्मीपापा से कहा, ‘‘इन की क्लीनिंग करनी है, कृपया थोड़ी देर के लिए आप लोग बाहर चले जाएं.’’

नर्स साफसफाई कर रही थी पर अल्पना के मन में उथलपुथल मची हुई थी. वह समझ नहीं पा रही कि उस से कब और कहां गलती हुई…उसे लगा कि मातापिता को दुख पहुंचाने के लिए ऐसा करतेकरते उस ने खुद के जीवन को दांव पर लगा दिया…अतीत की घटनाओं के खौफनाक मंजर उस की आंखों के सामने से किताब के एकएक पन्ने की तरह आ- जा रहे थे.

वह एक संपन्न परिवार से थी. मातापिता दोनों के नौकरी करने के कारण उसे उन का सुख नहीं मिल पाया था. जब उसे मां के हाथों का पालना चाहिए था तब दादी की गोद में उस ने आंखें खोलीं, बोलना और चलना सीखा. वह डेढ़ साल की थी कि दादी का साया उस के ऊपर से उठ गया. अब उसे ले कर मम्मीपापा में खींचतान चलने लगी, तब एक आया का प्रबंध किया गया.

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एक दिन ममा ने आया को दूध में पानी मिला कर उसे पिलाते तथा बचा दूध स्वयं पीते देख लिया. उस की गलती पर उसे डांटा तो उस ने दूसरे दिन से आना ही बंद कर दिया…अब उस की समस्या उन के सामने फिर मुंहबाए खड़ी थी. दूसरी आया मिली तो वह पहली से भी ज्यादा तेज और चालाक निकली. उसे अकेला छोड़ कर वह अपने प्रेमी के साथ गप लड़ाती रहती…पता लगने पर ममा ने उसे भी निकाल दिया…

वह 2 साल की थी, फिर भी उस के जेहन में आज भी क्रेच की आया का बरताव अंकित है. उस के स्वयं खाना न खा पाने पर डांटना, झल्लाना, यहां तक कि मारना…पता नहीं और भी क्याक्या… दहशत इतनी थी कि जब भी मां उसे क्रेच में छोड़ने के लिए जातीं तो वह पहले से ही रोने लगती थी पर ममा को समय से आफिस पहुंचना होता था अत: उस के रोने की परवा न कर वह उसे आया को सौंप कर चली जाती थीं.

जब वह पढ़ने लायक हुई तब स्कूल में उस का नाम लिखवा दिया गया. स्कूल की छुट्टी होती तो कभी ममा तो कभी पापा उसे स्कूल से ला कर घर छोड़ देते तथा उस से कहते कि उन के अलावा कोई भी आए तो दरवाजा मत खोलना और न ही बाहर निकलना. देखने के लिए दरवाजे में आई पीस लगवा दिया था.

एक दिन वह पड़ोस में रहने वाले सोनू की आवाज सुन कर बाहर चली गई तथा खेलने लगी तभी ममा आ गईं. खुला घर तथा उसे बाहर खेलते देख वह क्रोधित हो गईं…दूसरे दिन से वह उसे बाहर से बंद कर के जाने लगीं…एक दिन उसे न जाने क्या सूझा कि घर की पूरी चीजें जो उस के दायरे में थीं, उस ने नीचे फेंक दीं…उस दिन उस की खूब पिटाई हुई और मम्मीपापा में भी जम कर झगड़ा हुआ.

ममा की परेशानी देख कर सोनू की मम्मी ने स्कूल के बाद उसे अपने घर छोड़ कर जाने के लिए कहा तो वह बहुत खुश हुई…साथ ही मम्मीपापा की समस्या भी हल हो गई. 4 साल ऐसे ही निकल गए. पर तभी सोनू के पापा का तबादला हो गया. फिर वही समस्या.

बड़ी होने के कारण अब उस के स्कूल का समय बढ़ गया था तथा अब वह पहले से भी ज्यादा समझदार हो गई थी. उस ने अपनी स्थिति से समझौता कर लिया था, ममा के आदेशानुसार वह उन के या पापा के आफिस से आने पर उन की आवाज सुन कर ही दरवाजा खोलती, किसी अन्य की आवाज पर नहीं. एकांत की विभीषिका उसे तब भी परेशान करती पर जैसेजैसे बड़ी होती गई उसे पढ़ाने और होमवर्क कराने को ले कर मम्मीपापा में तकरार होने लगी.

अभी वह 10 वर्ष की ही थी कि उसे बोर्डिंग स्कूल में डाल दिया गया. वहां मम्मीपापा हर महीने उस से मिलने जाते, उस के लिए अच्छीअच्छी गिफ्ट लाते, पूरा दिन उस के साथ गुजारते पर शाम को उसे जब होस्टल छोड़ कर जाने लगते तो वह रो पड़ती थी. तब ममा आंखों में आंसू भर कर कहतीं, ‘बेटा, मजबूरी है. जो मैं कर रही हूं वह तेरे भविष्य के लिए ही तो कर रही हूं.’

वह उस समय समझ नहीं पाती थी कि यह कैसी मजबूरी है. सब के बच्चे अपने मम्मीपापा के पास रहते हैं फिर वह क्यों नहीं…पर धीरेधीरे वह अपनी हमउम्र साथियों के साथ घुलनेमिलने लगी क्योंकि सब की

एक सी ही

कहानी थी…वहां अधिकांशत: बच्चों को इसलिए होस्टल में डाला गया था क्योंकि किसी की मां नहीं थी तो किसी के घर का माहौल अच्छा नहीं था, किसी के मातापिता उस के मातापिता की तरह ही कामकाजी थे तो कोई अपने बच्चों के उन्नत भविष्य के लिए उन्हें वहां दाखिल करवा गए थे.

छुट्टी में घर जाती तो मम्मीपापा की व्यस्तता देख उसे लगता था कि इस से तो वह होस्टल में ही अच्छी थी. कम से कम वहां बात करने वाला कोई तो रहता है. धीरेधीरे उस के मन में विद्रोह पैदा होता गया. उसे मम्मीपापा स्वार्थी लगने लगे. जिन्होंने अपने स्वार्थ के लिए उसे पैदा तो कर दिया पर उस की जिम्मेदारी उठाना नहीं चाहते.

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आखिर एक बच्चे को अच्छे कपड़ों, अच्छे खिलौनों के साथसाथ और भी तो कुछ चाहिए, यह साधारण सी बात वह क्यों नहीं समझ पा रहे हैं या जानतेबूझते हुए भी समझना नहीं चाहते हैं. एक बार उस ने पूछ ही लिया, ‘मैं आप की ही बेटी हूं या आप कहीं से मुझे उठा तो नहीं लाए हैं.’

उस की मनोस्थिति समझे बिना ही ममा भड़क कर बोलीं, ‘कैसी बातें कर रही है…कौन तेरे मन में जहर घोल रहा है?’

मम्मा आशंकित मन से पापा की ओर देखने लगीं. पापा भी चुप कहां रहने वाले थे. बोल उठे, ‘शक क्यों नहीं करेगी. कभी प्यार के दो बोल बोले हैं. कभी उस के पास बैठ कर उस की समस्याएं जानने की कोशिश की है…तुम्हें तो बस, हर समय काम ही काम सूझता रहता है.’

‘तो तुम क्यों नहीं उस से समस्याएं पूछते…तुम भी तो उस के पिता हो. क्या बच्चे को पालने की सारी जिम्मेदारी मां को ही निभानी पड़ती है.’

दोनों में तकरार इतनी बढ़ी कि उस दिन घर में खाना ही नहीं बना. ममा गुस्से में चली गईं. लगभग 10 बजे पापा हाथ में दूध तथा ब्रैड ले कर आए और आग्रह से खाने के लिए कहने लगे पर उसे भूख कहां थी. मन की बात जबान पर आ ही गई, ‘पापा, अगर किसी को मेरी आवश्यकता नहीं थी तो मुझे इस दुनिया में ले कर ही क्यों आए? मेरी वजह से आप और ममा में झगड़ा होता है…मुझे कल ही होस्टल छोड़ दीजिए. मेरा यहां मन नहीं लगता.’

पापा ने प्यार से उस के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, ‘ऐसा नहीं कहते बेटा, यह तेरा घर है.’

‘घर, कैसा घर, पापा…मैं पूरे दिन अकेली रहती हूं. आप और ममा आते भी हैं तो सिर्फ अपनीअपनी समस्याएं ले कर. मेरे लिए आप दोनों के पास समय ही नहीं है.’

पापा उदास मन से आफिस चले गए थे पर उस दिन उसे अपने मन में बारबार उमड़ती बात कहने पर बहुत संतोष मिला था…

घर का भूला- भाग 2: कैसे बदलने लगे महेंद्र के रंग

वह रोती हुई अपने कमरे में घुस गई. अमित के समझाने पर भी वह मन का संदेह नहीं दबा पा रही थी. उस का अब पढ़ने में रत्ती भर भी मन नहीं लगता था. उस ने घबरा कर अपनी नानी को खत लिख दिया. नानाजी तो थे नहीं, सोचा, नानी यहां घर पर रह कर सब संभाल लेंगी. तब तक उस की परीक्षा भी निबट जाएगी.

हफ्ते भर के अंदर नानी आ गईं. महेंद्र अचानक उन्हें देख कर चौंके जरूर परंतु ज्यादा कुछ कहा नहीं, ‘‘अरे अम्मांजी, आप…अचानक कैसे आ गईं?’’

‘‘भैया महेंद्र, 6 मास से बच्चों को नहीं देखा था. इसलिए नरेंद्र को ले कर चली आई. यह तो कल लौट जाएगा, मैं रहूंगी.’’

‘‘अच्छा किया आप ने, बच्चों की परीक्षाएं भी पास हैं. आभा को भी कुछ राहत मिलेगी. वैसे मालती बहुत अच्छी औरत हमें मिल गई है. सुबहशाम काम कर के चली जाती है. काम भी सफाई से करती है.’’

‘‘ठीक है  भैया, अब तो अमित का एम.ए. फाइनल होने जा रहा है. आभा भी बी.ए. कर लेगी. अमित के लिए लड़की और आभा के लिए अच्छा घरवर देख कर दोनों को निबटा दो. बहू आने से घर- गृहस्थी की समस्याएं सुलझ जाएंगी.’’

‘‘अम्मांजी, अमित अपने पैरों पर तो खड़ा हो ले, तभी तो कोई अपनी बेटी देगा उसे. आभा के लिए भी अभी देर है. वह एम.ए. करना चाहती है. 2 साल और सही. अभी तो सब काम चल ही रहा है.’’

‘‘ठीक है भैया, जैसा तुम चाहो. पर एक बात पर और ध्यान दो, माया के सब सोनेचांदी के जेवर लाकर में रख दो. घर पर रखना ठीक नहीं है. तुम तीनों घर से बाहर रहते हो, बडे़ नगरों में चोरियां बहुत होती हैं, इसलिए कह रही हूं.’’

‘‘हां, यह ठीक कहा आप ने. अब बैंक में लाकर ले ही लूंगा.’’

बहुत बार कहने पर भी वह लापरवाही बरतते रहे. तब अलमारी के लाकर की चाबी आभा अपने पास रखने लगी थी. जब से उस ने मालती के पैरों में मां की पायल देखी थीं, तभी दोनों भाईबहनों ने बैंक में चुपचाप एक लाकर ले कर सारे जेवर उस में रख दिए थे. पिता से इस की चर्चा नहीं की. सोचा, समय आने पर बता देंगे. बस कुछ नकली जेवर ही उन्होंने घर पर छोड़ रखे थे.

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नानी एकडेढ़ माह के पश्चात चली गईं. आभा ने कम्प्यूटर क्लास ज्वाइन कर ली थी, इस से वह पापा के नानी के साथ जाने के आग्रह को टाल गई. अमित भी कंप्यूटर कोर्स के साथ ही कोचिंग कर रहा था.

उस दिन आभा जल्दी लौट आई थी, क्योंकि सर के किसी निकट संबंधी की मृत्यु हो गई थी. घर आ कर उसे आश्चर्य हुआ क्योंकि मालती घर पर मौजूद थी, जबकि घर की दूसरी चाबी केवल पापा के पास रहती थी.

‘‘अरे, आज तुम समय से पहले कैसे आ गईं?’’ वह पूछ बैठी.

‘‘साहब आ गए हैं न, उन की तबीयत कुछ ठीक नहीं है,’’ वह कुछ घबराहट में अटकअटक कर बोली.

‘‘तो तुम्हें किस ने बतलाया कि उन की तबीयत ठीक नहीं है. क्या पापा तुम्हें लेने गए थे तुम्हारे घर?’’

‘‘अरे नहीं, वह सुबह कह रहे थे. इस से मैं यों ही चली आई.’’

आभा लपक कर पापा के कमरे में घुस गई, देखा वह अपने बेड पर आंखें बंद किए चुपचाप लेटे हैं.

‘‘पापा, आप ने सुबह हम लोगों को क्यों नहीं बतलाया कि आप की तबीयत ठीक नहीं है. मैं आज नहीं जाती,’’ वह उन के माथे पर हाथ रख कर बोली तो उन्होंने पलकें खोलीं, ‘‘अरे, ऐसी खराब नहीं है. थोड़ा सिरदर्द था सुबह से, सोचा ठीक हो जाएगा, इस से आफिस चला गया, पर दर्द कम नहीं हुआ तो लौट आया. सुबह मालती से यों ही कह दिया था तो वह चली आई.’’

परंतु टेबिल पर जूठी पड़ी प्लेटों में समोसेरसगुल्लों के टुकड़े और ही कहानी कह रहे थे. 2 प्लेटें, 2 चाय के मग, क्या यह सब नित्य उन के जाने के बाद होता है? मन के किसी कोने में शंका के अंकुर सबल पौध से सिर उठाने लगे. उस ने देख कर भी अनदेखा कर दिया और कुछ क्षण वहां बैठ कर रसोई की ओर आई तो देखा, मालती गैस के नीचे कोई पालिथीन की थैली छिपा रही है.

‘‘यह गैस के नीचे कचरा क्यों ठूंसा तुम ने?’’ उस ने झपट कर थैली को बाहर घसीटा तो  2 रसगुल्ले, 2 समोसे जमीन पर आ गिरे. मालती का मुंह सफेद पड़ गया.

‘‘अरे, ये कहां से आए?’’

‘‘ये…ये बचे थे, साहब ने कहा कि रख लो, बच्चों को दे देना. इसलिए रख लिए.’’

आभा कुछ भी न बोल पाई. उस का मन किसी भावी आशंका की चेतावनी दे रहा था. शाम को जब अमित घर आया तो आभा ने उसे सब बता दिया. उस के ललाट पर भी चिंता की गहरी रेखाएं खिंच गईं.

जब से उन की मां नहीं रहीं पापा खाना प्राय: अपने कमरे में ही मंगा कर खाते थे. मालती 1-1 फुलके के बहाने कई चक्कर उन के कमरे के लगा लेती थी. यह आभा को बहुत अखर रहा था. एक दिन वह बोली, ‘‘मालती, तुम जल्दी खाना बना कर घर चली जाया करो.’’

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‘‘साहब को गरम फुलके पसंद हैं और आप लोगों को भी तो. देरसवेर की क्या बात है. बना खिला कर चली जाया करूंगी. आप क्यों परेशान हो, मुझे तो आदत है.’’

‘‘नहीं, तुम कल से हम दोनों का खाना कैसरोल में बना कर रख दिया करो और आटा सान कर रख देना, मैं पापा को खुद सेंक कर खिला दूंगी. जैसा मैं ने कहा है वैसा करो, समझी,’’ उस ने जरा सख्त लहजे में कहा तो वह चुप रह गई. परंतु थोड़ी देर पश्चात ही उस की चुप्पी का कारण सामने आ गया. पापा ने आभा को आवाज दी.

‘‘तुम ने मालती को शाम का खाना बनाने से क्यों मना किया?’’

‘‘मना कहां किया, पापा. यह कहा कि हम दोनों का खाना बना कर कैसरोल में रख दे, अगर आप गरम फुलके चाहेंगे तो मैं सेंक कर आप को खिला दूंगी, तो वह आप से शिकायत कर गई?’’ आभा को गुस्सा आ गया.

‘‘शिकायत क्यों, बस कह रही थी कि कल से बेबी आप की रोटियां सेंकेगी. बेकार में तुम क्यों गरमी में मरो, बनाने दो उसे.’’

भोजपुरी एक्ट्रेस Neha Shree का फेसबुक अकाउंट हुआ हैक, पढ़ें खबर

भोजपुरी एक्ट्रेस नेहा श्री (Neha Shree) अक्सर सुर्खियों में छायी रहती हैं. वह अपनी फोटोज और वीडियो सोशल मीडिया पर फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं. अब खबर आ रही है कि एक्ट्रेस का फेसबुक अकाउंट हैक कर लिया गया है.

रिपोर्ट के अनुसार, एक्ट्रेस का फेसबुक पेज हैक कर लिया गया है. उन्होंने याचिका दायर की है,  जिसमें एक्ट्रेस ने आरोप लगाया कि उनके पेज को हैक करने के बाद उस पर अश्लील कंटेंट और कमेंट्स पोस्ट किए जा रहे हैं.

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बताया जा रहा है कि जस्टिस रजनीश भटनागर ने इस मामले को लेकर फेसबुक को नोटिस जारी किया है. नेहाश्री ने अपने फेसबुक अकाउंट होने के बाद याचिका दाखिल की थी.

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नेहा श्री ने आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग की गई है. उन्होंने ये भी कहा है कि उनके पेज पर लगाई गई तस्वीरें और कमेंट्स को हटाए जाएं और उनका फेसबुक पेज फिर से एक्टिव किया जाए.

 

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फेसबुक पेज पर नेहाश्री के 40 लाख फॉलोअर्स हैं. वर्कफ्रंट की बात करे तो नेहाश्री भोजपुरी और राजस्थानी फिल्मों के साथ ही कई टीवी सीरियल्स में भी काम कर चुकी हैं.

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GHKKPM: रिसेप्‍शन के दौरान विराट ने छुए इस एक्ट्रेस के पैर, देखें Video

स्‍टार प्‍लस का टीवी सीरियल ‘गुम है किसी के प्‍यार में’  लीड एक्टर नील भट्ट( विराट) और ऐश्वर्या शर्मा (पाखी) ने शादी के बंधन में बंध गए हैं. विराट और पाखी अपनी शादी को लेकर खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं.

शो में विराट और पाखी का रिश्ता देवर भाभी का हैं लेकिन असल जिंदगी में अब वो दोनों पति पत्‍नी बन गए हैं. उन्होंने हाल ही में एक दूसरे से शादी की है. शादी में उनके करीबी रिश्तेदार और दोस्त शामिल हुए थे.

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विराट और पाखी ने गुम है किसी के प्‍यार में की टीम के लिए रिस्पेशन पार्टी रखी. इस पार्टी में बॉलीवुड की हस्तियां भी शामिल हुई थी. इस रिस्पेशन में खास मेहमान बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा रेखा रहीं.

 

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जब रेखा नील भट्ट और ऐश्‍वर्या शर्मा के रिसेप्‍शन में स्टेज पर पहुंची तो उनकी खूबसूरती के आगे सब फिका लगने लगा. और वहां मौजूद सभी लोग सरप्राइज हो गए. विराट और पाखी ने रेखा का तहेदिल से स्वागत किया और उनके पैर छुए.

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गुम है किसी के प्‍यार में की टीम के कई सदस्य इस पार्टी में शामिल हुए. आयशा सिंह (Ayesha Singh) यानी सई  भी काफी दिलकश अंदाज में नजर आईं. सई रिसेप्‍शन में काफी मस्‍ती करती नजर आई. उन्होंने डिजाइनर लहंगा पहना था. सई बहुत प्यारी लग रही थी. तो वहीं सम्राट का किरदार निभाने वाले योगेंद्र विक्रम सिंह भी शामिल हुए थे.

 

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शो में इन दिनों दिखाया जा रहा है कि सई और विराट एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं. तो वहीं विराट मिशन पर गया है, सई विराट को काफी मिस कर रही है. शो के आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि विराट जल्द ही मिशन से वापस लौटेगा. विराट को देखते ही सई खुशी हो जाएगी और उसे अपने दिल की बात बता देगी कि  वह उसे प्यार करने लगी है.

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