दिल का तीसरा कोना: भाग 2

पहला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- दिल का तीसरा कोना: भाग 1

कुहू एकदम से चौंक कर बोली, ‘‘क्यों? वह कोई डरावनी फिल्म तो नहीं थी जो अंधेरे में डर के मारे मेरा हाथ पकड़ लेता.’’

मोनिका को खूब हंसी आई, जबकि वह थोड़ाथोड़ा समझ गई थी. जब उस ने कहा, ‘‘यार मोनिका, आरव की वकालत नहीं चली तो वह अच्छा गायक बन जाएगा. आज उस ने मुझे फिर एक गाना सुनाया, आप की आंखों में कुछ महके हुए से राज हैं… आप से भी खूबसूरत आप के अंदाज हैं…’’

मोनिका ने हंसते हुए उसे हिला कर कहा, ‘‘कहीं, उसे तुम से प्यार तो नहीं हो गया?’’

कुहू थोड़ी ढीली पड़ गई. उस ने हंसते हुए कहा, ‘‘देख मोनिका, ये प्यारव्यार कुछ नहीं होता, बस एक कैमिकल लोचा होता है. तू छोड़ उस को…चल खाना खाने चलते हैं.’’

इस के बाद हम पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी में लग गए, कुहू के पेपर पहले हो गए तो वह घर लौटने की तैयारी करने लगी. उस की सुबह 7 बजे की बस थी. मेरे साथ मेरी एक सहेली बिंदु भी उसे बस स्टौप पर छोड़ने आई थी. आरव भी उसे बस पर बिठाने आया था. जातेजाते उस का कुछ अलग ही अंदाज था. उस ने आरव से खुद तो हाथ मिलाया ही बिंदु का हाथ पकड़ कर उस से मिलवाया.

‘‘मोनिका, सही बात तो यह कि मैं वहां से जा नहीं सकी, अभी भी उस का हाथ पकड़े वहीं खड़ी हूं. जब मैं ने उस की ओर हाथ बढ़ाते हुए उस की आंखों में झांका तो उन में जो दिखाई दिया, उसे उस समय तो नहीं समझ सकी. उस की बातें, उस के सुनाए गीत कानों में गूंज रहे थे. उस ने मेरी सगाई की बात सुनी तो उस का चेहरा उतर गया था. मेरा शरीर कहीं भी रहा हो, आत्मा अभी भी वहीं है.’’ आंसू पोंछते हुए कुहू ने कहा और चाय बनाने के लिए किचन में चली गई.

उस के पीछेपीछे मोनिका भी गई. उस ने कहा, ‘‘उस के बाद तुम फेसबुक पर आरव के संपर्क में आई थीं क्या?’’

ये भी पढ़ें- बड़ी लकीर छोटी लकीर: भाग 1

कुहू ने हां में सिर हिलाया और कहने लगी, ‘‘हौस्टल से घर आने के बाद कुछ ही दिनों में उमंग से मेरी शादी हो गई. उमंग बहुत ही अच्छा और नेक आदमी था. उस के जीवन का एक ही ध्येय था जियो और जीने दो. पार्टी के शौकीन उमंग को खूब घूमने और घुमाने का शौक था. वह जहां भी जाता, मुझे अपने साथ ले जाता. बेटे की पढ़ाई में नुकसान न हो, इस के लिए उसे हौस्टल में डाल दिया. पर मेरा साथ नहीं छोड़ा.’’

बात सच भी थी. कुहू जब भी मोनिका को फोन करती, यही कहती थी, ‘शादी के 15 साल बाद भी उमंग का हनीमून पूरा नहीं हुआ है.’

कभीकभी हंसती, मस्ती में डूबी कुहू की आंखों के सामने एक जोड़ी थोड़ी भूरी, थोड़ी काली आंखें आ जातीं तो वह खो जाती. ऐसे में ही एक रोज उमंग ने कहा, ‘‘चलो अपना फेसबुक पेज बनाते हैं और अपने पुराने मित्रों को खोजते हैं. अपने पुराने मित्र से मिलने का यह एक बढि़या रास्ता है.’’

इस के बाद दोनों ने अपनेअपने मोबाइल पर फेसबुक पेज बना लिए.

एक दिन कुहू अकेली थी और अपने मित्रों को खोज रही थी. अचानक उस के मन में आया हो सकता है आरव ने भी अपना फेसबुक पेज बनाया हो. वह आरव को खोजने लगी. पर वहां तो तमाम आरव थे उस का आरव कौन है, कैसे पता चले. तभी उस की नजर एक चेहरे पर पड़ी तो वह चौंकी. शायद यही है आरव.

उस के पास उस की कोई फोटो भी तो नहीं. बस, यादें ही थीं. उस ने उस की प्रोफाइल खोल कर देखी. उस की जन्मतिथि और शहर भी वही था. उस ने तुरंत उस के मैसेज बौक्स में अपना परिचय दे कर मैसेज भेज दिया. अंत में उस ने यह भी लिख दिया, ‘क्या अभी भी मैं तुम्हें याद हूं?’

बाद में उसे संकोच हुआ कि अगर कोई दूसरा हुआ तो वह उसे कितना गलत समझेगा. कुहू ने एक बार फिर उस की प्रोफाइल चैक की और उस के फोटो देखने लगी तो उस के फोटो देख कर कुहू की आंखें नम हो गईं. यह तो उसी का आरव है.

ये भी पढ़ें- आप भी तो नहीं आए थे: भाग 1

फोटो में उस के हाथ पर वह काला निशान यानी ‘बर्थ मार्क’ था. अगले ही दिन आरव का संदेश आया, ‘हां’. अब इस ‘हां’ का अर्थ 2 तरह से निकाला जा सकता था. एक ‘हां’ का मतलब मैं आरव ही हूं. दूसरा यह कि तुम मुझे अभी भी याद हो. पर कुहू को दोनों ही अर्थों में हां दिखाई दिया.

कुहू ने इस संदेश के जवाब में अपना फोन नंबर दे दिया. थोड़ी देर में आरव औनलाइन दिखाई दिया तो दोनों ही यह भूल गए कि उन की जिंदगी 15 साल आगे निकल चुकी है. कुहू एक बच्चे की मां तो आरव 2 बच्चों का बाप बन चुका था. इस के बाद दोनों में बात हुई तो कुहू ने कहा, ‘‘आरव, तुम ने अपने घर में मेरी बात की थी क्या?’’

आरव की मां को कुहू के बारे में पता था कि दोनों बातें करते हैं. जब उस ने अपनी मां से कुहू की सगाई के बारे में बताया था तो उस की मां ने राहत की सांस ली थी. कुहू को यह बात आरव ने ही बताई थी. आरव पर इस का क्या असर पड़ा, यह जाने बगैर ही कुहू खूब हंसी थी. और आरव सिर्फ उस का मुंह देखता रह गया था.

ये भी पढ़ें- प्यार की पहली किस्त

हां, तो जब कुहू ने आरव से  पूछा कि उस ने उस के बारे में अपने घर में बताया कि नहीं? इस पर आरव हंस पड़ा था. हंसी को काबू में करते हुए उस ने कहा, ‘‘न बताया है और न बताऊंगा. मां तो अब हैं नहीं, मेरी पत्नी मुझ पर शक करती है. इसलिए मैं उस से कुछ भी बताने की हिम्मत नहीं कर सकता.’’

जाने आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

10 दिन का खूनी खेल: भाग 2

पहला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- 10 दिन का खूनी खेल: भाग 1

अश्विनी के पिस्तौल की 7 गोलियां लगने के बाद निकिता दूसरे गेट की ओर भागी, लेकिन गिर पड़ी. जातेजाते उस ने धमकी दी कि वह पूरे परिवार को खत्म कर देगा.

निकिता पर गोलियां बरसाने के बाद अश्विनी दूसरे गेट से बाहर निकल कर पास ही सड़क पर जाते हुए एक बैटरी रिक्शा में बैठ गया. थोड़ा आगे जा कर वह उतरा और गन्ने के खेत में घुस गया.

निकिता 2 महीने पहले ही शादी के लिए दुबई से घर लौटी थी. उस की शादी मुरादाबाद के मोहल्ला कांशीराम नगर में रहने वाले नीतीश कुमार से तय हुई थी. नीतीश सीआईएसएफ में सबइंसपेक्टर हैं और विशाखापट्टनम में तैनात हैं. नीतीश के कहने पर निकिता ने अपनी नौकरी से भी इस्तीफा दे दिया था.

निकिता के पिता हरिओम शर्मा श्योहारा के विदुर ग्रामीण बैंक में नौकरी करते थे. घर वालों ने  इस घटना की सूचना हरिओम शर्मा को दी. शर्माजी की बैंक के पास ही थाना था. उन्होंने थाने जा कर यह बात थानाप्रभारी उदय प्रताप को बताई. उदय प्रताप उसी समय पुलिस टीम के साथ दौलताबाद के लिए रवाना हो गए.

बुरी तरह घायल निकिता को श्योहारा के एक प्राइवेट डाक्टर को दिखाया गया. उस डाक्टर ने निकिता को तुरंत बड़े अस्पताल ले जाने की राय दी. इस के बाद उसे मुरादाबाद के मशहूर कौसमोस अस्पताल ले जाया गया.

भरती होने के बाद अस्पताल के मशहूर डाक्टर अनुराग अग्रवाल ने निकिता का इलाज शुरू किया. उसे 7 गोलियां लगी थीं, जिन में गले में फंसी एक गोली घातक थी. बहरहाल, डा. अनुराग अग्रवाल के तमाम प्रयासों के बावजूद रात 9 बजे निकिता ने दम तोड़ दिया.

दूसरी ओर पुलिस ने ईरिक्शा के ड्राइवर द्वारा बताए गए गन्ने के खेत के साथसाथ आसपास के सभी गन्ने के खेतों में कौंबिंग की. लेकिन अश्विनी का कोई पता नहीं चला. उसी दिन आईजी (मुरादाबाद जोन) रमित शर्मा ने अश्विनी उर्फ जौनी को पकड़ने या पकड़वाने पर 50 हजार रुपए का ईनाम घोषित कर दिया.

पुलिस ने आसपास के शहरों के बसअड्डों, रेलवे स्टेशनों के अलावा अन्य तमाम जगहों के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखीं. लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला.

जब 2 दिन और बीत गए तो मुरादाबाद, बरेली परिक्षेत्र के एडीजे अविनाश चंद्र ने अश्विनी पर ईनाम राशि 50 हजार से बढ़ा कर एक लाख कर दी. इस के बाद पुलिस ने जौनी से जुड़ी छोटी से छोटी जानकारियां जुटानी शुरू कर दीं. उस के फोन की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की गई. लेकिन उस का फोन 26 सितंबर से ही बंद था.

जब पुलिस की सभी कोशिशें बेकार गईं तो बिजनौर के एसएसपी संजीव त्यागी ने जिले के सभी पुलिस अफसरों के साथ मीटिंग की, जिस में तय हुआ कि बसअड्डों, रेलवे स्टेशनों और आटोरिक्शा, ईरिक्शा के अड्डों पर विशेष रूप से नजर रखी जाए. इस अभियान में संजीव त्यागी खुद भी शामिल हुए.

ये भी पढ़ें- 11 साल बाद: भाग 2

3 अक्तूबर को किसी मुखबिर ने पुलिस को सूचना दी कि अश्विनी उर्फ जौनी को नगीना के तुलाराम हलवाई की दुकान पर रसगुल्ले खाते देखा गया है. तुलाराम के रसगुल्ले जिला भर में मशहूर हैं.

सूचना मिलते ही पुलिस चौराहे के पास स्थित तुलाराम की दुकान पर पहुंच गई, लेकिन तब तक जौनी वहां से जा चुका था. पूछताछ में पता चला कि जौनी ने वहां बैठ कर 8 रसगुल्ले खाए थे. बाद में वह बराबर में स्थित मोहन रेस्टोरेंट में भी गया था, जहां वह काफी देर बैठा रहा.

पुलिस ने रात में ही तुलाराम हलवाई की दुकान के आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखीं. इस से यह जानकारी मिली कि चौराहे से जौनी हरिद्वार जाने वाली बस में सवार हुआ था. पुलिस ने हरिद्वार वाली बस को रुकवा कर चैक किया.

साथ ही पूरे नगीना को भी छान मारा. लेकिन अश्विनी का कोई सुराग नहीं मिला. वह एक बार फिर पुलिस को चकमा दे गया था. अश्विनी को पकड़ने के लिए बिजनौर पुलिस जो भी कर सकती थी, उस ने किया. फिर भी रही खाली हाथ ही.

5/6 अक्तूबर की रात को बढ़ापुर के थानाप्रभारी कृपाशंकर सक्सेना ने बढ़ापुर की ओर आने वाले वाहनों की चैकिंग के लिए बैरिकेड लगा रखे थे. रात करीब 12 बजे पुलिस ने दिल्ली से आ रही एक बस को रोका. ड्राइवर ने बस सड़क किनारे लगा दी. बस में करीब एक दरजन यात्री थे.

10 दिन के खेल के बाद

कृपाशंकर सक्सेना ने 2 सिपाहियों मोनू यादव और बादल पंवार से बस की चैकिंग करने को कहा. चैकिंग के दौरान यात्री अलर्ट हो कर बैठ गए. कंडक्टर के आगे वाली सीट पर एक व्यक्ति मुंह पर कपड़ा लपेटे बैठा था. बस के किसी यात्री, यहां तक कि पुलिस ने भी नहीं सोचा था कि वह एक लाख का ईनामी अश्विनी उर्फ जौनी हो सकता है.

मुंह पर कपड़ा लपेटे बैठा युवक नींद में था, नींद में उस का सिर एक ओर को झुका हुआ था. सिपाही मोनू और बादल ने उस के कंधे पर हाथ रख कर मुंह से कपड़ा हटाया तो वह चौंक कर जागा. वह अश्विनी ही था.

सामने पुलिस को देख अश्विनी को लगा कि उस का खेल खत्म हो गया है. उस ने बिना देर किए कमर से पिस्तौल निकाली और दाईं कनपटी पर रख कर ट्रिगर दबा दिया. एक धमाके के साथ खून का फव्वारा छूटा और वह एक ओर को लुढ़क गया. पुलिस वाले समझ गए कि वह अश्विनी उर्फ जौनी ही था.

आंखों के सामने एक युवक को सुसाइड करते देख पूरी बस के यात्री सन्न थे. वैसे असलियत यह थी कि अगर अश्विनी के चेहरे पर कपड़ा न होता तो निस्संदेह पुलिस वाले उसे पहचान ही नहीं पाते. वजह यह कि वह पिछले 10 दिनों से छिपताछिपाता घूम रहा था, न खानापीना और न आराम. नहानाधोना तो दूर की बात थी.

बहरहाल, बस खाली करा कर पुलिस ने कंडक्टर से पूछताछ की. उस ने बताया कि जौनी नगीना रेलवे फाटक पर पैट्रोलपंप चौराहे से बस में सवार हुआ था. वह कंडक्टर से आगे वाली सीट पर बैठ गया. उस के पास केवल एक छोटा सा बैग था. कंडक्टर से टिकट लेते समय उस ने कहा था कि उसे बढ़ापुर से पहले उतरना है. इस पर कंडक्टर ने कहा, ‘‘जहां उतरना हो, उतर जाना लेकिन टिकट बढ़ापुर का ही लगेगा.’’

ये भी पढ़ें- साजिश का शिकार प्रीति: भाग 2

कंडक्टर से टिकट लेने के बाद उस ने मुंह पर सफेद कपड़ा लपेट लिया था.

पुलिस ने जौनी की लाश की तलाशी ली तो उस के पास यूएस मेड पिस्तौल के अलावा एक बैग मिला. उस के बैग में जैकेट व एक जोड़ी कपड़े थे. साथ ही सैमसंग का मोबाइल, 67 रुपए, 16 कारतूस, आधार कार्ड, पैन कार्ड और इनकम टैक्स का एक सर्टिफिकेट भी बैग में मिले.

दरअसल, जौनी कहीं से पिस्तौल हासिल कर के अकेला ही अपने दुश्मनों को खत्म करने निकला था. लेकिन उस के सामने 2 दिन में ही कई समस्याएं आ खड़ी हुई थीं. न उस के पास खाना खाने को पैसा था और न सोनेछिपने की जगह. किसी से उसे कोई मदद भी नहीं मिल पा रही थी. 26 सितंबर के बाद से उस ने अपना मोबाइल फोन भी इस्तेमाल नहीं किया था. कह सकते हैं कि वह किसी के भी संपर्क में नहीं था.

बहरहाल, जौनी की मौत के बाद पुलिस ने चैन की सांस ली. यह रहस्य ही रहा कि जौनी ने अपनी बेइज्जती के मामले को इतनी लंबी अवधि तक क्यों पाले रखा. जाहिर है जरूर कोई ऐसी बात रही होगी जो उस के दिल में कांटे की तरह नहीं चुभी, बल्कि छुरी बन कर दिल में उतरी होगी. वरना उच्चशिक्षा प्राप्त जौनी इतना बड़ा खूनी खेल नहीं खेलता.

जो भी हो, जौनी ने 3 कत्ल किए थे. पकड़ा जाता तो निस्संदेह या तो उस की पूरी जिंदगी जेल में बीतती या फिर उस के गले में फांसी का फंदा पड़ता.

लगता है कि इस बात को जौनी अच्छी तरह समझता था और उस ने अपनी मौत की राह पहले ही तय कर ली थी.

जौनी के 2 पत्र

26 सितंबर को राहुल और कृष्णा की हत्या के बाद भीमसेन कश्यप की शिकायत पर पुलिस ने अश्विनी उर्फ जौनी के अलावा उस के पिता, भाई और अन्य को भले ही केस में शामिल कर लिया था, लेकिन हकीकत यह थी कि जौनी खुद अपने घर वालों के व्यवहार से आहत था.

पुलिस को जौनी के लिखे 2 पत्र मिले थे, जिन में से एक उस की पैंट की जेब से मिला था और दूसरा उस के घर से. घर से मिले पत्र में यह बात साफ हो गई कि घर वाले उसे पसंद नहीं करते थे. उसे इस बात का दुख था कि घर वालों ने भी उस की भावनाओं को नहीं समझा.

घर से मिले पत्र में जौनी ने लिखा, ‘मेरी बहन को एक युवक ने छेड़ा तो मैं ने उसे सबक सिखाया. डांस करते हुए बहन की वीडियो बना ली गई तो मैं वीडियो बनाने वाले से भिड़ गया. बहन की शादी में जो बाइक दी गई, वह मैं ने अपने पैसों से, अपने नाम से खरीदी थी. बहन ने दूसरी जगह शादी की तब भी मैं ने पूरी तरह उस का साथ दिया. इस के बावजूद बहन ने मुझे गलत ठहराया.’

इस पत्र में जौनी ने और भी कई मामलों का जिक्र करते हुए घर वालों के गिलेशिकवों का जिक्र किया था. जबकि वह शुरू से ही उन की मदद करता आया था. जौनी की जेब से जो पत्र मिला, उस पत्र को वह पुलिस थाने तक पहुंचाना चाहता था. इस पत्र में उस ने लिखा कि वह जानता है कि उस ने 3 हत्याएं की हैं. लेकिन इस अपराध के लिए वह सरेंडर करना चाहता है.

ये भी पढ़ें- बंगलों के चोर

उस ने आगे लिखा, बढ़ापुर थाने के कुछ पुलिसकर्मी बहुत अच्छे हैं. उन की वह इज्जत करता है. वह सरेंडर करना चाहता है, लेकिन उस के साथ मारपीट न हो, बेइज्जत न किया जाए. पुलिस अच्छा काम कर रही है, मुझे ढूंढ रही है. मैं सरेंडर करने को तैयार हूं.

लेकिन वह अपने इस पत्र को पुलिस तक पहुंचा नहीं पाया. हो सकता है, सुसाइड वाली रात वह सरेंडर करने के लिए ही बढ़ापुर जा रहा हो.

जो भी हो, मामला पत्रों का हो या फेसबुक का, अश्विनी उर्फ जौनी ने स्वयं को पीडि़त साबित करने की कोशिश की. लेकिन पीडि़त होने का मतलब यह नहीं है कि अपराधों की राह पर उतर जाओ.

कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां

दिल का तीसरा कोना: भाग 3

दूसरा भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- दिल का तीसरा कोना: भाग 2

आरव ने कहा, ‘‘एक बात पूछूं, पर अब उस का कोई मतलब नहीं है और तुम जो जवाब दोगी, वह भी मुझे पता है. फिर भी तुम मुझे बताओ, अगर मैं तुम्हारी तरफ हाथ बढ़ाता तो तुम मना तो नहीं करती. पर आज बात कुछ अलग है.’’

और सचमुच इस सवाल का कुहू के पास कोई जवाब नहीं था. और कोई भी…

एक दिन आरव ने हंस कर कहा, ‘‘कुहू कोई समय घटाने का यंत्र होता तो हम 15 साल पीछे चले जाते.’’

‘‘अरे मैं तो कब से वहीं हूं, पर तुम कहां हो.’’ कुहू ने कहा.

‘‘अरे तुम मेरे पीछे खड़ी हो,’’ आरव ने हंस कर कहा, ‘‘मैं ने देखा ही नहीं. तुम बहुत झूठी हो.’’ इस के बाद उस ने एक गाना गाया, ‘बंदा परवर थाम लो जिगर…’

कुहू भी जोर से हंस कर बोली, ‘‘तुम्हारी यह गाने की आदत गई नहीं. अब इस आदत का मतलब खूब समझ में आता है, पर अब इस का क्या फायदा?’’

दिल की सच्ची और ईमानदार कुहू को थोड़ी आत्मग्लानि हुई कि वह जो कर रही है गलत है. फिर उस ने सब कुछ उमंग से बताने का निर्णय कर लिया और रात में खाने के बाद उस ने सारी सच्चाई उसे बता दी. अंत में कहा, ‘‘इस में सारी मेरी ही गलती है. मैं ने ही आरव को ढूंढा और अब मुझ से झूठ नहीं बोला जाता. अब जो सोचना हो सोचिए.’’

ये भी पढ़ें- दिल का तीसरा कोना: भाग 1

पहले तो उमंग थोड़ा परेशान हुआ, उस के बाद बोला, ‘‘कुहू तुम झूठ बोल रही हो, मजाक कर रही हो. सच बोलो, मेरे दिल की धड़कनें थम रही हैं.’’

‘‘नहीं उमंग, यह सच है.’’ कुहू ने कहा. उस ने सारी बातें तो उमंग को बता ही दी थीं, पर गाने सुनाने और फिल्म देखने वाली बात नहीं बताई थी. शायद हिम्मत नहीं हुई.

उमंग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. उस ने कहा, ‘‘जाने दो, कोई प्राब्लम नहीं, यह सब तो होता रहता है.’’

अगले दिन कुहू ने आरव को सारी बात बताई तो उसे आश्चर्य हुआ. उस ने हैरानी से कहा, ‘‘कुहू, तुम बहुत भाग्यशाली हो, जो तुम्हें ऐसा जीवनसाथी मिला है. जबकि सुरभि ने तो मुझे कैद कर रखा है.’’

‘‘इस में गलती तुम्हारी है, तुम अपने जीवनसाथी को विश्वास में नहीं ले सके.’’ कुहू ने कहा.

‘‘नहीं, ऐसी बात नहीं है, मैं ने बहुत कोशिश की. सुरभि भी वकील है. पर पता नहीं क्यों वह ऐसा करती है.’’ आरव ने कहा.

इस के बाद एक दिन आरव ने कुहू की बात सुरभि को बता दी. उस ने कुहू से तो खूब मीठीमीठी बातें कीं, पर इस के बाद आरव का जीना मुहाल कर दिया. उस ने आरव से स्पष्ट कहा, ‘‘तुम कुहू से संबंध तोड़ लो, वरना मैं मौत को गले लगा लूंगी.’’

अगले दिन आरव का संदेश था, ‘कुहू मैं तुम से कोई बात नहीं कर सकता. सुरभि ने सख्ती से मना कर दिया है.’

उस समय कुहू और उमंग खाना खा रहे थे. संदेश पढ़ कर कुहू रो पड़ी. उमंग ने पूछा तो उस ने बेटे की याद आने का बहाना बना दिया. कई दिनों तक वह संताप में रही. फोन की भी किया, पर आरव ने बात नहीं की. हार कर कुहू ने संदेश भेजा कि अंत में एक बार तो बात करनी ही पड़ेगी, जिस से मुझे पता चल सके कि क्या हुआ है.

इस के बाद आरव का फोन आया. उस ने कहा, ‘‘मेरे यहां कुछ ठीक नहीं है. 3 दिन हो गए हम सोए नहीं हैं. सुरभि को हमारी नि:स्वार्थ दोस्ती से सख्त ऐतराज है. अब मैं आपसे प्रार्थना कर रहा हूं कि मुझे माफ कर दो. मुझे पता है, इन बातों से तुम्हें कितनी तकलीफ हो रही होगी. यह सब कहते हुए मुझे भी. विधि का विधान यही है. हम इस से बंधे हुए हैं.’’

कुहू बड़ी मुश्किल से सिर्फ इतना ही बोल सकी, ‘‘कोई प्राब्लम नहीं, अब मैं तुम से मिलने के लिए 15 साल और इंतजार करूंगी.’’

‘‘ठीक है.’’ कह कर आरव ने फोन काट दिया.

ये भी पढ़ें- बड़ी लकीर छोटी लकीर: भाग 2

कुहू ने भी उस का नंबर डिलीट कर दिया, अपनी फ्रैंड लिस्ट से उसे भी बाहर कर दिया.

कुहू ने मोनिका का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘यार मोनिका मैं ने उस का नंबर तो डिलीट कर दिया, पर जो नंबर मैं पिछले 15 सालों से नहीं भूल सकी, उसे इस तरह कैसे भूल सकती हूं. वजह, मुझे पता नहीं, मुझे उस से प्यार नहीं था, फिर भी मैं उसे भूल नहीं सकी. उस के लिए मेरा दिल दुखी है और अब मुझे यह भी पता नहीं कि इस दिल को समझाने के लिए क्या करूं. मेरी समझ में नहीं आता उस ने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? जब उसे पता था तो उस ने ऐसा क्यों किया? बस, जब तक उसे अच्छा लगता रहा, मुझ से बातें करता रहा और जब जान पर आ गई तो तुम कौन और मैं कौन वाली बात कह कर किनारा कर लिया.’’

कुहू इसी तरह की बातें कह कर रोती रही और मोनिका ने उसे रोने दिया. उसे रोका नहीं. यह समझ कर कि उस के दिल पर जितना बोझ है, वह आंसुओं के रास्ते बह जाए तो अच्छा है.

वैसे भी मोनिका उस से कहती भी क्या? जबकि वह जानती थी कि वह प्यार ही था, जिसे कुहू भुला नहीं सकी थी, एक बार उस ने आरव से कहा था, ‘‘हम औरतों के दिल में 3 कोने होते हैं. एक में उस का घर, दूसरे में उस का मायका होता है, और जो दिल का तीसरा कोना है, उस में उस की अपनी कितनी यादें संजोई होती हैं, जिन्हें वह फुरसत के क्षणों में निकाल कर धोपोंछ कर रख देती है.’’

मोनिका सोचने लगी, जो लड़की प्यार को कैमिकल रिएक्शन मानती थी और दिल को मात्र रक्त सप्लाई करने का साधन, उस ने दिल की व्याख्या कर दी थी और अब भी वह कह रही थी कि आरव से प्यार नहीं है.

मोनिका ने उसे यही समझाया और वह खुद भी समझतीजानती थी कि उसे जो भी मिला है, अच्छा ही मिला है. जिसे कोई भी विधि का विधान बदल नहीं सकता.

ये भी पढ़ें- आप भी तो नहीं आए थे: भाग 2

अग्निपरीक्षा: भाग 1

लेखिका- रेणु गुप्ता

भाग-1

स्मिता आज बहुत उदास थी. उस की पड़ोसिन कम्मो ने आज फिर उसे टोका था, ‘‘स्मिता, यह जो राज बाबू तुम्हारे घर रोजरोज आते हैं और तुम्हारे पास बैठ कर रात के 12-1 बजे घर जाते हैं, पड़ोस में इस बात की बहुत चर्चा हो रही है. कल रात सामने वाले वालियाजी इन से पूछ रहे थे, ‘यह स्मिता के घर रोज रात को जो आदमी आता है, उस का स्मिता से क्या रिश्ता है? अकेली औरत के पास वह 2-3 घंटे क्यों आ कर बैठता है? स्मिता उसे अपने घर रात में क्यों आने देती है? क्या उसे इतनी भी समझ नहीं कि पति की गैरहाजिरी में अकेले मर्द के साथ रात के 12 बजे तक बैठना गलत है.’ ’’

कम्मो के मुंह से यह सब सुन कर स्मिता का चेहरा उतर गया था. उफ, यह पासपड़ोस वाले, किसी के घर में कौन आताजाता है, सारी खोजखबर रखते हैं. उन्हें क्या मतलब अगर कोई उस के घर में आता भी है तो. क्या ये पासपड़ोस वाले उस का अकेलापन बांट सकते हैं? वे क्या जानें कि बिना एक मर्द के एक अकेली औरत कैसे अपने दिन और रात काटती है? फिर राज क्या उस के लिए पराया है? एक वक्त था जब राज के बिना जिंदगी काटना उस के लिए कल्पना हुआ करती थी और यह सब सोचतेसोचते स्मिता कब बीते दिनों की भूलभुलैया में उतर आई, उसे एहसास तक नहीं हुआ था.

स्मिता की मां बचपन में ही चल बसी थी. उस के बड़े भाई उसे पिता के पास से अपने घर ले आए थे. तब वह 7 साल की थी और तभी से वह भाईभाभी के घर रह कर पली थी. भैयाभाभी के 2 बच्चे थे और वे अपने दोनों बच्चों को बहुत लाड़दुलार करते थे. उन के मुंह से निकली हर बात पूरी करते लेकिन स्मिता की हमेशा उपेक्षा करते. भाभी स्मिता के साथ दुर्व्यवहार तो नहीं करतीं, लेकिन कोई बहुत अच्छा व्यवहार भी नहीं करतीं. उन को यह एहसास न था कि स्मिता एक बिन मां की बच्ची है. इसलिए उसे भी लाड़प्यार की जरूरत है.

ये भी पढ़ें- बड़ी लकीर छोटी लकीर: भाग 2

भाई भी स्मिता का कोई खास खयाल न रखते. भाई के बेटाबेटी स्मिता की ही उम्र के थे. अकसर कोई विवाद उठने पर भाईभाभी स्मिता की अवमानना कर अपने बच्चों का पक्ष ले बैठते. इस तरह निरंतर उपेक्षा और अवमानना भरा व्यवहार पा कर स्मिता बहुत अंतर्मुखी बन गई थी तथा उस में भावनात्मक असुरक्षा घर कर गई थी.

राज भाभी का भाई था जो अकसर बहन के घर आया करता. उसे शुरू से सांवलीसलोनी, अपनेआप में सिमटी, सकुचाई स्मिता बहुत अच्छी लगती थी और वह जितने दिन बहन के घर रहता, स्मिता के इर्दगिर्द बना रहता. उस की स्मिता से खूब पटती तथा अकसर वे दुनिया जहान की बातें किया करते.

स्मिता को जब भी कोई परेशानी होती वह राज के पास भागीभागी जाती और राज उसे उस की परेशानी का हल बताता. वक्त बीतने के साथ स्मिता व राज की मासूम दोस्ती प्यार में बदल गई थी तथा वे कब एकदूसरे को शिद्दत से चाहने लगे थे, वे खुद जान न पाए थे.

लगभग 3 साल तक तो उन के प्यार की खबर स्मिता के भैयाभाभी को नहीं लग पाई और वे गुपचुप प्यार की पेंग बढ़ाते रहे थे. अकसर वे अपने हसीन वैवाहिक जीवन की रूपरेखा बनाया करते. लेकिन न जाने कब और कैसे उन की गुपचुप मोहब्बत का खुलासा हो गया और भैयाभाभी ने राज के स्मिता से मिलने पर कड़ी पाबंदी लगा दी थी और स्मिता के लिए लड़का ढूंढ़ना शुरू कर दिया.

राज और स्मिता ने भैयाभाभी से लाख मिन्नतें कीं, उन की खुशामद की कि उन का साथ बहुत पुराना है, उन को एकदूसरे के साथ की आदत पड़ गई है और वे एकदूसरे के बिना जिंदगी काटने की कल्पना तक नहीं कर सकते, लेकिन इस का कोई अनुकूल असर भाई व भाभी पर नहीं पड़ा.

स्मिता की भाभी का परिवार शहर का जानामाना खानदानी रुतबे वाला अमीर परिवार था तथा भाभी सुरभि के मातापिता को राज के विवाह में अच्छे दानदहेज की उम्मीद थी. इसलिए उन्होंने सुरभि से साफ कह दिया था कि वे राज की शादी स्मिता से किसी हालत में नहीं करेंगे. इसलिए उन्हें स्मिता का विवाह जल्दी से जल्दी कोई सही लड़का ढूंढ़ कर कर देना चाहिए.

राज के मातापिता ने राज से साफ कह दिया था कि यदि उस ने स्मिता से अपनेआप शादी की तो वे उस को घर के कपड़े के पुराने व्यापार से बेदखल कर देंगे और उस से कोई संबंध भी नहीं रखेंगे. राज के परिवार की शहर के मुख्य बाजार में कपड़ों की 2 मशहूर दुकानें थीं. राज महज 12वीं पास युवक था और अगर वह मातापिता की इच्छा के विरुद्ध स्मिता से शादी करता तो कपड़ों की दुकान में हिस्सेदारी से बाहर हो जाता.

ये भी पढ़ें- आप भी तो नहीं आए थे: भाग 2

इधर स्मिता के भैयाभाभी ने उस से साफ कह दिया था कि अगर उस ने अपनेआप शादी की तो वह न तो उस की शादी में एक फूटी कौड़ी लगाएंगे, न ही शादी में शामिल होंगे. इस तरह राज और स्मिता ने देखा था कि यदि वे घर वालों की इच्छा के विरुद्ध शादी कर लेते हैं तो उन का भविष्य अंधकारमय होगा.

स्मिता के पास भी कोई ऐसी शैक्षणिक योग्यता नहीं थी जिस के सहारे वह अपने परिवार का खर्च उठा पाती. अत: बहुत सोचसमझ कर वह दोनों अंत में इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि उन्हें अपने प्यार का गला घोंटना पड़ेगा तथा अपने रास्ते जुदा करने पड़ेंगे. उन के सामने बस, यही एक रास्ता था.

सुरभि स्मिता के लिए जोरशोर से लड़का ढूंढ़ने में लगी हुई थी. आखिरकार सुरभि की मेहनत रंग लाई. उसे स्मिता के लिए एक योग्य लड़का मिल गया था. लड़के का अपना स्वतंत्र जूट का व्यवसाय था तथा वह अच्छा कमा खा रहा था. लड़के का नाम भुवन था तथा उस ने पहली ही बार में स्मिता को देख कर पसंद कर लिया था. उन की शादी की तारीख 1 माह बाद ही निश्चित हुई थी.

शादी तय होने के बाद जब स्मिता राज से मिली तो उस के कंधों पर सिर रख कर फूटफूट कर रोई थी. उस ने राज से कहा था, ‘राज, 15 तारीख को तुम्हारी स्मिता पराई हो जाएगी. किसी गैर को मैं अपनेआप को कैसे सौंपूंगी? नहीं राज नहीं, मैं यह शादी हर्गिज नहीं करूंगी.’

राज ने स्मिता को समझाया था, ‘व्यावहारिक बनो स्मिता, यही जिंदगी की वास्तविकता है. क्या करें, हर किसी को अपनी मंजिल नहीं मिलती, यही सोच कर तसल्ली दो अपने मन को. मैं तुम्हें ताउम्र प्यार करता रहूंगा, कभी शादी नहीं करूंगा. तुम शांत मन से शादी करो, भुवन बहुत अच्छा लड़का है, अच्छा कमाता है, तुम्हें बहुत खुश रखेगा,’ यह कहते हुए डबडबाई आंखों से राज ने स्मिता का माथा चूमा था और चला गया था.

ये भी पढ़ें- दिल का तीसरा कोना: भाग 2

स्मिता की शादी की तैयारियां जोरशोर से चल रही थीं. सुरभि ने भाई से साफसाफ कह दिया था, ‘राज, मुझ से एक वादा करो, स्मिता की शादी तक तुम घर नहीं आओगे. स्मिता को अपने सामने देख तुम सामान्य नहीं रह पाओगे तथा बेकार में लोगों को बातें करने का मौका मिल जाएगा.’

‘दीदी, मेरे साथ इतना अन्याय मत करो,’ राज गिड़गिड़ाता हुआ बोला, ‘मैं कसम खाता हूं, शादी होने तक मैं किसी के सामने स्मिता से एक शब्द नहीं बोलूंगा. उस की शादी का काम कर के मुझे बहुत आत्मिक संतोष मिलेगा. प्लीज दीदी, तुम ने मुझ से सबकुछ तो छीन लिया, अब यह छोटा सा सुख तो मत छीनो.’

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

19 दिन 19 कहानियां : मां बेटी – कौन थे उन दोनों के जिस्म के प्यासे

मालती काम से लौटी थी… थकीमांदी. कुछ देर लेट कर आराम करने का मन कर रहा था, पर उस की जिंदगी में आराम नाम का शब्द नहीं था. छोटा वाला बेटा भूखाप्यासा था. वह 2 साल का हो गया था, पर अभी तक उस का दूध पीता था.

मालती के खोली में घुसते ही वह उस के पैरों से लिपट गया. उस ने उसे अपनी गोद में उठा कर खड़ेखड़े ही छाती से लगा लिया. फिर बैठ कर वह उसे दूध पिलाने लगी थी.

सुबह मालती उसे खोली में छोड़ कर जाती थी. अपने 2 बड़े भाइयों के साथ खोली के अंदर या बाहर खेलता रहता था. तब भाइयों के साथ खेल में मस्त रहने से न तो उसे भूख लगती थी, न मां की याद आती थी.

दोपहर के बाद जब मालती काम से थकीमांदी घर लौटती, तो छोटे को अचानक ही भूख लग जाती थी और वह भी अपनी भूखप्यास की परवाह किए बिना या किसी और काम को हाथ लगाए बेटे को अपनी छाती का दूध पिलाने लगती थी.

तभी मालती की बड़ी लड़की पूजा काम से लौट कर घर आई. पूजा सहमते कदमों से खोली के अंदर घुसी थी. मां ने तब भी ध्यान नहीं दिया था. पूजा जैसे कोई चोरी कर रही थी. खोली के एक किनारे गई और हाथ में पकड़ी पोटली को कोने में रखी अलमारी के पीछे छिपा दिया.

मां ने छोटू को अपनी छाती से अलग किया और उठने को हुई, तभी उस की नजर बेटी की तरफ उठी और उसे ने पूजा को अलमारी के पीछे थैली रखते हुए देख लिया.

मालती ने सहज भाव से पूछा, ‘‘क्या छिपा रही है तू वहां?’’

पूजा चौंक गई और असहज आवाज में बोली, ‘‘कुछ नहीं मां.’’

मालती को लगा कि कुछ तो गड़बड़ है वरना पूजा इस तरह क्यों घबराती.

मालती अपनी बेटी के पास गई और उस की आंखों में आंखें डाल कर बोली, ‘‘क्या है? तू इतनी घबराई हुई क्यों है? और यहां क्या छिपाया है?’’

‘‘कुछ नहीं मां, कुछ नहीं…’’ पूजा की घबराहट और ज्यादा तेज हो गई. वह अलमारी से सट कर इस तरह खड़ी हो गई कि मालती पीछे न देख सके.

ये भी पढ़ें- एक हसीना एक दीवाना : पहला भाग

मालती ने जोर से पकड़ कर उसे परे धकेला और तेजी से अलमारी के पीछे रखी पोटली उठा ली.

हड़बड़ाहट में मालती ने पोटली को खोला. पोटली का सामान अंदर से सांप की तरह फन काढ़े उसे डरा रहे थे… ब्रा, पैंटी, लिपस्टिक, क्रीम, पाउडर और तेल की शीशी…

मालती ने फिर अचकचा कर अपनी बेटी पूजा को गौर से देखा… उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ. उस की बेटी जवान तो नहीं हुई थी, पर जवानी की दहलीज पर कदम रखने के लिए बेचैन हो रही थी.

मालती का दिल बेचैन हो गया. गरीबी में एक और मुसीबत… बेटी की जवानी सचमुच मांबाप के लिए एक मुसीबत बन कर ही आती है खासकर उस गरीब की बेटी की, जिस का बाप जिंदा न हो. मालती की सांसें कुछ ठीक हुईं, तो बेटी से पूछा, ‘‘किस ने दिया यह सामान तुझे?’’

मां की आवाज में कोई गुस्सा नहीं था, बल्कि एक हताशा और बेचारगी भरी हुई थी.

पूजा को अपनी मां के ऊपर तरस आ गया. वह बहुत छोटी थी और अभी इतनी बड़ी या जवान नहीं हुई थी कि दुनिया की सारी तकलीफों के बारे में जान सके. फिर भी वह इतना समझ गई थी कि उस ने कुछ गलत किया था, जिस के चलते मां को इस तरह रोना पड़ रहा था. वह भी रोने लगी और मां के पास बैठ गई.

बेटी की रुलाई पर मालती थोड़ा संभली और उस ने अपने ममता भरे हाथ बेटी के सिर पर रख दिए.

दोनों का दर्द एक था, दोनों ही औरतें थीं और औरतों का दुख साझा होता है. भले ही, दोनों आपस में मांबेटी थीं, पर वे दोनों एकदूसरे के दर्द से न केवल वाकिफ थीं, बल्कि उसे महसूस भी कर रही थीं.

पूजा की सिसकियां कुछ थमीं, तो उस ने बताया, ‘‘मां, मैं ले नहीं रही थी, पर उस ने मुझे जबरदस्ती दिया.’’

‘‘किस ने…?’’ मालती ने बेचैनी से पूछा.

‘‘गोकुल सोसाइटी के 401 नंबर वाले साहब ने…’’

‘‘कांबले ने?’’ मालती ने हैरानी से पूछा.

‘‘हां… मां, वह मुझ से रोज गंदीगंदी बातें करता है. मैं कुछ नहीं बोलती तो मुझे पकड़ कर चूम लेता है,’’ पूजा जैसे अपनी सफाई दे रही थी.

मालती ने गौर से पूजा को देखा. वह दुबलेपतले बदन की सांवले रंग की लड़की थी, कुल जमा 13 साल की… बदन में ऐसे अभी कोई उभार नहीं आए थे कि किसी मर्द की नजरें उस पर गड़ जाएं.

हाय रे जमाना… छोटीछोटी बच्चियां भी मर्दों की नजरों से महफूज नहीं हैं. पलक झपकते ही उन की हैवानियत और हवस की भूख का शिकार हो जाती हैं.

मालती को अपने दिन याद आ गए… बहुत कड़वे दिन. वह भी तब कितनी छोटी और भोली थी. उस के इसी भोलेपन का फायदा तो एक मर्द ने उठाया था और वह समझ नहीं पाई थी कि वह लुट रही थी, प्यार के नाम पर… पर प्यार कहां था वह… वह तो वासना का एक गंदा खेल था.

इस खेल में मालती अपनी पूरी मासूमियत के साथ शामिल हो गई थी. नासमझ उम्र का वह ऐसा खेल था, जिस में एक मर्द उस के अधपके बदन को लूट रहा था और वह समझ रही थी कि वह मर्दऔरत का प्यार था.

वह एक ऐसे मर्द द्वारा लुट रही थी, जो उस से उम्र में दोगुनातिगुना ही नहीं, बाप की उम्र से भी बड़ा था, पर औरतमर्द के रिश्ते में उम्र बेमानी हो जाती है और कभीकभी तो रिश्ते भी बदनाम हो जाते हैं.

तब मालती भी अपनी बेटी की तरह दुबलीपतली सांवली सी थी. आज जब वह पूजा को गौर से देखती है, तो लगता है जैसे वही पूजा के रूप में खड़ी है.

मालती बिलकुल उस का ही दूसरा रूप थी. जब वह अपनी बेटी की उम्र की थी, तब चोगले साहब के घर में काम करती थी. वह शादीशुदा था, 2 बच्चों का बाप, पर एक नंबर का लंपट… उस की नजरें हमेशा मालती के इर्दगिर्द नाचती रहती थीं.

चोगले की बीवी किसी स्कूल में पढ़ाती थी, सो वह सुबह जल्दी निकल जाती थी. साथ में उस के बच्चे भी चले जाते थे. बीवी और बच्चों के जाने के बाद मालती उस घर में काम करने जाती थी.

चोगले तब घर में अकेला होता था. पहले तो काफी दिनों तक उस ने मालती की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया और कभी कोई ऐसी बात नहीं कही, जिस से लगे कि वह उस के बदन का भूखा था.

शायद वह उसे बच्ची समझता था. वह काम करती रहती थी और काम खत्म होने के बाद चुपचाप घर चली आती थी.

पर जब उस ने 13वें साल में कदम रखा और उस के सीने में कुछ नुकीला सा उभार आने लगा, तो अचानक ही एक दिन चोगले की नजर उस के शरीर पर पड़ गई. वह मैलेकुचैले कपड़ों में रहती थी.

झाड़ूपोंछा करने वाली लड़की और कैसे रह सकती थी. कपड़े धोने के बाद तो वह खुद गीली हो जाती थी और तब बिना अंदरूनी कपड़ों के उस के बदन के अंग शीशे की तरह चमकने लगते थे.

ऐसे मौके पर चोगले की नजरों में एक प्यास उभर आती और उस के पास आ कर पूछता था, ‘‘मालती, तुम तो गीली हो गई हो, भीग गई हो. पंखे के नीचे बैठ कर कपड़े सुखा लो,’’ और वह पंखा चला देता.

मालती बैठती नहीं खड़ेखड़े ही अपने कपड़े सुखाती. चोगले उस के बिलकुल पास आ कर सट कर खड़ा हो जाता और अपने बदन से उसे ढकता हुआ कहता, ‘‘तुम्हारे कपड़े तो बिलकुल पुराने हो गए हैं.’’

‘‘जी…’’ वह संकोच से कहती.

‘‘अब तो तुम्हें कुछ और कपड़ों की भी जरूरत पड़ती होगी?’’ मालती उस का मतलब नहीं समझती. बस, वह उस को देखती रहती.

वह एक कुटिल हंसी हंस कर कहता, ‘‘संकोच मत करना, मैं तुम्हारे लिए नए कपड़े ला दूंगा. वे वाले भी…’’

मालती की समझ में फिर भी नहीं आता. वह अबोध भाव से पूछती, ‘‘कौन से कपड़े…’’

चोगले उस के कंधे पर हाथ रख कर कहता, ‘‘देखो, अब तुम छोटी नहीं रही, बड़ी और समझदार हो रही हो. ये जो कपड़े तुम ने ऊपर से पहन रखे हैं, इन के नीचे पहनने के लिए भी तुम्हें कुछ और कपड़ों की जरूरत पड़ेगी, शायद जल्दी ही…’’ कहतेकहते उस का हाथ उस की गरदन से हो कर मालती के सीने की तरफ बढ़ता और वह शर्म और संकोच से सिमट जाती. इतनी समझदार तो वह हो ही गई थी.

चोगले की मेहनत रंग लाई. धीरेधीरे उस ने मालती को अपने रंग में रंगना शुरू कर दिया.

ये भी पढ़ें- माध्यम: भाग 1

चोगले की मीठीमीठी बातों और लालच में मालती बहुत जल्दी फंस गई. घर का सूनापन भी चोगले की मदद कर रहा था और मालती की चढ़ती हुई जवानी. उस की मासूमियत और भोलेपन ने ऐसा गुल खिलाया कि मालती जवानी के पहले ही प्यार के सारे रंगों से वाकिफ हो गई थी.

तब मालती की मां ने उस में होने वाले बदलाव के प्रति उसे सावधान नहीं किया था, न उसे दुनियादारी समझाई थी, न मर्द के वेष में छिपे भेडि़यों के बारे में उसे किसी ने कुछ बताया था.

भेद तब खुला था जब उस का पेट बढ़ने लगा. सब से पहले उस की मां को पता चला था. वह उलटियां करती तो मां को शक होता, पर वह इतनी छोटी थी कि मां को अपने शक पर भी यकीन नहीं होता था. यकीन तो तब हुआ जब उस का पेट तन कर बड़ा हो गया.

मां ने मारपीट कर पूछा, तब बड़ी मुश्किल से उस ने चोगले का नाम बताया. बड़े लोगों की करतूत सामने आई, पर तब चोगले ने भी उस की मदद नहीं की थी और दुत्कार कर उसे अपने घर से भगा दिया था. बाद में एक नर्सिंगहोम में ले जा कर मां ने उस का पेट गिरवाया था.

अपना बुरा समय याद कर के मालती रो पड़ी. डर से उस का दिल कांप उठा. क्या समय उस की बेटी के साथ भी वही खिलवाड़ करने जा रहा था, जो उस के साथ हुआ था? गरीब लड़कियों के साथ ही ऐसा क्यों होता है कि वे अपना बचपन भी ठीक से नहीं बिता पातीं और जवानी के तमाम कहर उन के ऊपर टूट पड़ते हैं?

मालती ने अपनी बेटी पूजा को गले से लगा लिया. जोकुछ उस के साथ हुआ था, वह अपनी बेटी के साथ नहीं होने देगी. अपनी जवानी में तो उस ने बदनामी का दाग झेला था, मांबाप को परेशानियां दी थीं. यह तो केवल वह या उस के मांबाप ही जानते थे कि किस तरह उस का पेट गिरवाया गया था. किस तरह गांव जा कर उस की शादी की गई थी.  फिर कई साल बाद कैसे वह अपने मर्द के साथ वापस मुंबई आई थी और अपने मांबाप के बगल की खोली में किराए पर रहने लगी थी.

आज उस का मर्द इस दुनिया में नहीं था. 4 बच्चे उस की और उस की बड़ी बेटी की कमाई पर जिंदा थे. पूजा के बाद 3 बेटे हुए थे, पर तीनों अभी बहुत छोटे थे. पिछले साल तक उस का मर्द फैक्टरी में हुए एक हादसे में जाता रहा.

पति की मौत के बाद ही मालती ने अपनी बेटी को घरों में काम करने के लिए भेजना शुरू किया था. उसे क्या पता था कि जो कुछ उस के साथ हुआ था, एक दिन उस की बेटी के साथ भी होगा.

जमाना बदल जाता है, लोग बदल जाते हैं, पर उन के चेहरे और चरित्र कभी नहीं बदलते. कल चोगले था, तो आज कांबले… कल कोई और आ जाएगा. औरत के जिस्म के भूखे भेडि़यों की इस दुनिया में कहां कमी थी. असली शेर और भेडि़ए धीरेधीरे इस दुनिया से खत्म होते जा रहे थे, पर इनसानी शेर और भेडि़ए दोगुनी तादाद में पैदा होते जा रहे थे.

मालती के पास आमदनी का कोई और जरीया नहीं था. मांबेटी की कमाई से 5 लोगों का पेट भरता था. क्या करे वह? पूजा का काम करना छुड़वा दे, तो आमदनी आधी रह जाएगी. एक अकेली औरत की कमाई से किस तरह 5 पेट पल सकते थे?

मालती अच्छी तरह जानती थी कि वह अपनी बेटी की जवानी को किसी तरह भी इनसानी भेडि़यों के जबड़ों से नहीं बचा सकती थी. न घर में, न बाहर… फिर भी उस ने पूजा को समझाते हुए कहा, ‘‘बेटी, अगर तू मेरी बात समझ सकती है तो ठीक से सुन… हम गरीब लोग हैं, हमारे जिस्म को भोगने के लिए यह अमीर लोग हमेशा घात लगाए रहते हैं. इस के लिए वे तमाम तरह के लालच देते हैं. हम लालच में आ कर फंस जाते हैं और उन को अपना बदन सौंप देते हैं.

‘‘गरीबी हमारी मजबूरी है तो लालच हमारा शाप. इस की वजह से हम दुख और तकलीफें उठाते हैं.

‘‘हम गरीबों के पास इज्जत के नाम पर कुछ नहीं होता. अगर मैं तुझे काम पर न भेजूं और घर पर ही रखूं तब भी तो खतरा टल नहीं सकता. चाल में भी तो आवाराटपोरी लड़के घूमते रहते हैं.

‘‘अमीरों से तो मैं तुझे बचा लूंगी. पर इस खोली में रह कर इन गली के आवारा कुत्तों से तू नहीं बच पाएगी. खतरा सब जगह है. बता, तुझे दुनिया की गंदी नजरों से बचाने के लिए मैं क्या करूं?’’ और वह जोर से रोने लगी.

पूजा ने अपने आंसुओं को पोंछ लिया और मां का हाथ पकड़ कर बोली, ‘‘मां, तुम चिंता मत करो. अब मैं किसी की बातों में नहीं आऊंगी. किसी का दिया हुआ कुछ नहीं लूंगी. केवल अपने काम से काम रखूंगी.

‘‘हां, कल से मैं कांबले के घर काम करने नहीं जाऊंगी. कोई और घर पकड़ लूंगी.’’

‘‘देख, हमारे पास कुछ नहीं है, पर समझदारी ही हमारी तकलीफों को कुछ हद तक कम कर सकती है. अब तू सयानी हो रही है. मेरी बात समझ गई है. मुझे यकीन है कि अब तू किसी के बहकावे में नहीं आएगी.’’

पूजा ने मन ही मन सोचा, ‘हां, मैं अब समझदार हो गई हूं.’

मालती अच्छी तरह जानती थी कि ये केवल दिलासा देने वाली बातें थीं और पूजा भी इतना तो जानती थी कि अभी तो वह जवानी की तरफ कदम बढ़ा रही थी. पता नहीं, आगे क्या होगा? बरसात का पानी और लड़की की जवानी कब बहक जाए और कब किधर से किधर निकल जाए, किसी को पता नहीं चलता.

पूजा अभी छोटी थी. जवानी तक आतेआते न जाने कितने रास्तों से उसे गुजरना पड़ेगा… ऐसे रास्तों से जहां बाढ़ का पानी भरा हुआ है और वह अपनी पूरी होशियारी और सावधानी के साथ भी न जाने कब किस गड्ढे में गिर जाए.

वे दोनों ही जानती थीं कि जो वे सोच रही थीं, वही सच नहीं था या जैसा वे चाह रही हैं, उसी के मुताबिक जिंदगी चलती रहेगी, ऐसा भी नहीं होने वाला था.

दिन बीतते रहे. मालती अपनी बेटी की तरफ से होशियार थी, उस की एकएक हरकत पर नजर रखती. उन दोनों के बीच में बात करने का सिलसिला कम था, पर बिना बोले ही वे दोनों एकदूसरे की भावनाओं को जानने और समझने की कोशिश करतीं.

ये भी पढ़ें- Short Story : फेसबुकिया प्यार

पर जैसेजैसे बेटी बड़ी हो रही थी, वह और ज्यादा समझदार होती जा रही थी. अब वह बड़े सलीके से रहने लगी थी और उसे अपने भावों को छिपाना भी आ गया था.

इधर काफी दिनों से पूजा के रंगढंग में काफी बदलाव आ गया था. वह अपने बननेसंवरने में ज्यादा ध्यान देती, पर इस के साथ ही उस में एक अजीब गंभीरता भी आ गई थी. ऐसा लगता था, जैसे वह किन्हीं विचारों में खोई रहती हो. घर के काम में मन नहीं लगता था.

मालती ने एक दिन पूछ ही लिया, ‘‘बेटी, मुझे डर लग रहा है. कहीं तेरे साथ कुछ हो तो नहीं गया?’’

पूजा जैसे सोते हुए चौंक गई हो, ‘‘क्या… क्या… नहीं तो…’’

‘‘मतलब, कुछ न कुछ तो है,’’ उस ने बेटी के सिर पर हाथ रख कर कहा.

पूजा के मुंह से बोल न फूटे. उस ने अपना सिर झुका लिया. मालती समझ गई, ‘‘अब कुछ बताने की जरूरत नहीं है. मैं सब समझ गई हूं, पर एक बात तू बता, जिस से तू प्यार करती है, वह तेरे साथ शादी करेगा?’’

पूजा की आंखों में एक अनजाना सा डर तैर गया. उस ने फटी आंखों से अपनी मां को देखा. मालती उस की आंखों में फैले डर को देख कर खुद सहम गई. उसे लगा, कहीं न कहीं कोई बड़ी गड़बड़ है.

डरतेडरते मालती ने पूछा, ‘‘कहीं तू पेट से तो नहीं है?’’

पूजा ने ऐसे सिर हिलाया, जैसे जबरदस्ती कोई पकड़ कर उस का सिर हिला रहा हो. अब आगे कहने के लिए क्या बचा था.

मालती ने अपना माथा पीट लिया. न वह चीख सकती थी, न रो सकती थी, न बेटी को मार सकती थी. उस की बेबसी ऐसी थी, जिसे वह किसी से कह भी नहीं सकती थी.

जो मालती नहीं चाहती थी, वही हुआ. उस की जिंदगी में जो हो चुका था उसी से बेटी को आगाह किया था. ध्यान रखती थी कि बेटी नरक में न गिर जाए. बेटी ने भी उसे भरोसा दिया था कि वह कोई गलत कदम नहीं उठाएगी, पर जवानी की आग को दबा कर रख पाना शायद उस के लिए मुमकिन नहीं था.

मरी हुई आवाज में उस ने बस इतना ही पूछा, ‘‘किस का है यह पाप…?’’

पूजा ने पहले तो नहीं बताया, जैसा कि आमतौर पर लड़कियों के साथ होता है. जवानी में किए गए पाप को वे छिपा नहीं पातीं, पर अपने प्रेमी का नाम छिपाने की कोशिश जरूर करती हैं. हालांकि इस में भी वे कामयाब नहीं होती हैं, मांबाप किसी न किसी तरीके से पूछ ही लेते हैं.

पूजा ने जब उस का नाम बताया, तो मालती को यकीन नहीं हुआ. उस ने चीख कर पूछा, ‘‘तू तो कह रही थी कि कांबले के यहां काम छोड़ देगी?’’

‘‘मां, मैं ने तुम से झूठ बोला था. मैं ने उस के यहां काम करना नहीं छोड़ा था. मैं उस की मीठीमीठी और प्यारी बातों में पूरी तरह भटक गई थी. मैं किसी और घर में भी काम नहीं करती थी, केवल उसी के घर जाती थी.

‘‘वह मुझे खूब पैसे देता था, जो मैं तुम्हें ला कर देती थी कि मैं दूसरे घरों में काम कर के ला रही हूं, ताकि तुम्हें शक न हो.’’

‘‘फिर तू सारा दिन उस के साथ रहती थी?’’

पूजा ने ‘हां’ में सिर हिला दिया. ‘‘मरी, हैजा हो आए, तू जवानी की आग बुझाने के लिए इतना गिर गई. अरे, मेरी बात समझ जाती और तू उस के यहां काम छोड़ कर दूसरों के घरों में काम करती रहती, तो शायद किसी को ऐसा मौका नहीं मिलता कि कोई तेरे बदन से खिलवाड़ कर के तुझे लूट ले जाता. काम में मन लगा रहता है, तो इस काम की तरफ लड़की का ध्यान कम जाता है. पर तू तो बड़ी शातिर निकली… मुझ से ही झूठ बोल गई.’’

पूजा अपनी मां के पैरों पर गिर पड़ी और सिसकसिसक कर रोने लगी, ‘‘मां, मैं तुम्हारी गुनाहगार हूं, मुझे माफ कर दो. एक बार, बस एक बार… मुझे इस पाप से बचा लो.’’

मालती गुस्से में बोली, ‘‘जा न उसी के पास, वह कुछ न कुछ करेगा. उस को ले कर डाक्टर के पास जा और अपने पेट के पाप को गिरवा कर आ…’’

‘‘मां, उस ने मना कर दिया है. उस ने कहा है कि वह पैसे दे देगा, पर डाक्टर के पास नहीं जाएगा. समाज में उस की इज्जत है, कहीं किसी को पता चल गया तो क्या होगा, इस बात से वह डरता है.’’

‘‘वाह री इज्जत… एक कुंआरी लड़की की इज्जत से खेलते हुए इन की इज्जत कहां चली जाती है? मैं क्या करूं, कहां मर जाऊं, कुछ समझ में नहीं आता,’’ मालती बोली.

मालती ने गुस्से और नफरत के बावजूद भी पूजा को परे नहीं किया, उसे दुत्कारा नहीं. बस, गले से लगा लिया और रोने लगी. पूजा भी रोती जा रही थी.

ये भी पढ़ें- माध्यम

दोनों के दर्द को समझने वाला वहां कोई नहीं था… उन्हें खुद ही हालात से निबटना था और उस के नतीजों को झेलना था.

मन थोड़ा शांत हुआ, तो मालती उठी और कपड़ेलत्ते व दूसरा जरूरी सामान समेट कर फटेपुराने बैग में भरने लगी. बेटी ने उसे हैरानी से देखा. मां ने उस की तरफ देखे बिना कहा, ‘‘तू भी तैयार हो जा और बच्चों को तैयार कर ले. गांव चलना है. यहां तो तेरा कुछ हो नहीं सकता. इस पाप से छुटकारा पाना है. इस के बाद गांव में रह कर ही किसी लड़के से तेरा ब्याह कर देंगे.’’

Dr Pk Jain: यहां मिलेगा सेक्सुअल लाइफ से जुड़ी हर प्रॉब्लम का सोल्यूशन

आलोक के सासससुर व मातापिता परेशान हो गए. आलोक की बीवी उसके घर आने को तैयार नहीं थी. उसे बहुत समझाया, मगर वह मानी नहीं. इसकी पूरी पड़ताल की गई. तब सचाई का पता चला कि आलोक को शीघ्रपतन की समस्या है, जिसकी वजह से वो अपनी बीवी को सतुंष्ट नहीं कर पा रहा है, इस कारण उस की बीवी उस के पास रहना नहीं चाहती थी.

आलोक के शब्दों में- मुझे काफी सालों ये समस्या थी. जिसकी वजह से मैं काफी परेशान हुआ. मैंने कई लोगों से संपर्क किया और कई जगह इलाज कराया, लेकिन कोई भी मेरा सही तरीके से इलाज नहीं कर पाया.

 ऐसे मिले डॉक्टर पी के जैन…

मेरे एक दोस्त को मेरी इस समस्या के बारे में पता चला तो उसने मुझे डॉक्टर पीके जैन के बारे में बताया. जो 40 सालों से इन्हीं समस्याओं का इलाज कर रहे हैं. मेरे दोस्त ने मुझे डॉक्टर पी के जैन के कई सफल केसेस के बारे में बताया, जिसके बाद में बिना देर किए डॉक्टर पी के जैन से मिलने पहुंचा.

डॉक्टर पी के जैन ने की मदद…

डॉक्टर पी के जैन ने मुझे बताया कि मेरी प्रॉब्मल कोई बड़ी बात नहीं है. पहले भी उनके पास ऐसे कई पेशेंट आ चुके हैं. डॉक्टर पी के जैन की देखरेख में कुछ ही वक्त में मेरी बीमारी ठीक हो गई और मुझे अपनी शादीशुदा जिंदगी वापस मिल गई. मैं तो यही कहूंगा कि आपकी सेक्स लाइफ में भी अगर कोई समस्या है तो बिना यहां वहां भटकने के बजाय सीधे डॉक्टर पी के जैन से मिले और अपना इलाज करवाएं.

लखनऊ के डॉक्टर पी. के. जैन, जो पिछले 40 सालों से इन सभी समस्याओं का इलाज कर रहे हैं. तो आप भी पाइए अपनी सभी  सेक्स समस्या का बेहतर इलाज अंतर्राष्ट्रीय ख्याति एवं मान्यता प्राप्त डॉ. पी. के. जैन द्वाराृ.

ज्यादा जानकारी के लिए यहां क्लिक करें…

नई नवेली दुल्हन के रूप में नजर आईं Bigg Boss की ये एक्स कंटेस्टेंट, देखें Photos

टेलिवीजन इंडस्ट्री के सबसे बड़े रिएलिटी शो बिग बौस (Bigg Boss) के सीजन 12 में 2 कंटेस्टेंट्स के रिलेशन ने खूब सुर्खियां बटोरी थी और उन 2 कंटेस्टेंट्स का नाम है अनूप जलोटा (Anup Jalota) और जसलीन मथारू (Jasleen Matharu). जी हां, जब इन दोनों ने शो के दौरान एक दूसरे के साथ अपना रिश्ता कुबूल किया था जब इनके फैंस और दर्शक काफी हैरान हुए थे क्योंकि अनूप जलोटा की उम्र जसलीन से काफी बड़ी है तो फैंस इस बात से काफी हैरान थे कि जसलीन जैसी खूबसूरत व जवान लड़की ने अनूप जलोटा के साथ क्या सोच कर रिश्ता बनाया.

ये भी पढ़ें- सोशल मीडिया पर वायरल हुई इन Hot एक्ट्रेसेस की Kissing Photos

 

View this post on Instagram

 

Im the Queen 👸🥰 of my own little world 🌍❤️

A post shared by Jasleen Matharu ਜਸਲੀਨ ਮਠਾੜੂ (@jasleenmatharu) on

लेकिन जैसा जैसा बिग बौस सीजन 12 (Bigg Boss 12) खतम होता गया वैसे वैसे ही इन दोनो का कौन्ट्रोवर्शियल (Controversial) रिश्ता भी खतम हो गया. इन दोनो ने बिग बौस सीजन 12 के दौरान अपने झूठे रिश्ते से फैंस का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था और खूब सुर्खियां बटोरी थी. हाल ही में जसलीन एक और रिएलिटी शो में दिखाई दी थीं जिसका नाम था “मुझसे शादी करोगे” (Mujhse Shadi Karoge).

ये भी पढ़ें- Rishi Kapoor और Irrfan Khan से पहले इन बौलीवुड एक्ट्रेसेस की भी हुई अचानक मौत

 

View this post on Instagram

 

❤️❤️

A post shared by Jasleen Matharu ਜਸਲੀਨ ਮਠਾੜੂ (@jasleenmatharu) on

इस शो में जसलीन मथारू (Jasleen Matharu) बिग बौस सीजन 13 (Bigg Boss 13) के कंटेस्टेंट पारस छाबड़ा (Paras Chhabra) का दिल जीतने आई थी जिसमें वे पूरी तरह से असफल रहीं और जल्द ही शो से भी निकल गईं. एक बार फिर जसलीन मथारू चर्चा का विषय बन गई हैं और इस बार उनके चर्चा में बनने का कारण है उनकी इंस्टाग्राम पर शेयर की गई कुछ फोटोज और वीडियोज.

ये भी पढ़ें- तुम बहुत याद आओगे इरफान

 

View this post on Instagram

 

Chupke se ❤️🤫🤫

A post shared by Jasleen Matharu ਜਸਲੀਨ ਮਠਾੜੂ (@jasleenmatharu) on

हाल ही में जसलीन मथारू ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट (Official Instagram Account) से अपनी कुछ ऐसी फोटोज शेयर की है जिसे देख उनके चाहने वालों को काफी बड़ा झटका लगा है. दरअसल, जसलीन ने नई नवेली दुल्हन की तरह लाल चूड़ा पहने और मांग में सिंदूर लगाए अपनी फोटो इंस्टाग्राम पर शेयर की है जिसे देख उनके फैंस के दिल टूट गए हैं. ऐसा देखने में आ रहा है कि लौकडाउन (Lockdown) के चलते जसलीन ने बिना किसी को बताए शादी कर ली है.

ये भी पढ़ें- इस TV Actress ने मुंबई छोड़ कर गोवा में रहने का किया फैसला, शेयर की Hot Photos

 

View this post on Instagram

 

Coz i love this picture 🌶🌶

A post shared by Jasleen Matharu ਜਸਲੀਨ ਮਠਾੜੂ (@jasleenmatharu) on

जसलीन ने इस फोटो के साथ एक वीडियो भी शेयर की है जिसमें वे ‘साथिया’ (Sathiya) फिल्म के रोमांटिक गाने ‘चुपके से’ (Chupke Se) पर पर्फोर्म कर रही हैं. आपको बता दें, इम फोटोज और वीडियोज देख जैसा आप सोच रहे हैं वैसा बिल्कुल भी नहीं है. जसलीन मथारू द्वारा दिए गए एक इंटर्वयू में उन्होनें बताया है कि- ‘मैंने शादी नहीं की है. जिस दिन मैं शादी करुंगी, पूरी दुनिया को पता चल जाएगा. मैंने अपने अपकमिंग प्रोजेक्ट के लिए ये मेकअप किया था, जिसका खुलासा मैं आप लोगों के सामने जल्द ही करुंगी.’

ये भी पढ़ें- Lockdown में अपने बौयफ्रेंड के साथ गोवा में फंसी रश्मि देसाई की ये को-एक्ट्रेस, शेयर की Hot Photos

जसलीन ने अपने ड्रीम ब्वौय को लेकर भी बात की और इस दौरान उनका कहना ये था कि,- ‘मुझे ऐसा इंसान नहीं चाहिए कि जिसके पास बहुत पैसा हो या वो कोई प्रिंस चार्मिंग हो… मुझे कोई ऐसा इंसान चाहिए जो हमेशा मेरे साथ रहे. मेरे पिता हमेशा मुझसे कहते हैं कि ऐसे इंसान से शादी करना जो तुम्हारे बच्चों का अच्छा पिता बन सके. और मैं इसी चीज पर सबसे ज्यादा फोकस करती हूं. जिससे मुझे फील आए कि ये शख्स मेरे बच्चों का ख्याल रखने के लायक है. मुझे ऐसे ही इंसान की तलाश है, क्योंकि मैं भी एक अच्छी मां बनना चाहती हूं.’

ये भी पढ़ें- रश्मि और अरहान की Controversy के चलते देवोलीना ने कही ये बड़ी बात, पढ़ें खबर

सोशल मीडिया पर वायरल हुई इन Hot एक्ट्रेसेस की Kissing Photos

जैसा कि हम सब जानते हैं कि कोरोना वायरस (Corona Virus) के चलते पूरे भारत में लौकडाउन (Lockdown) चल रहा है और हम कोई अपने-अपने घरों में कैद है. ऐसे में हर कोई अपने एंटरटेन्मेंट (Entertainment) के लिए अलग अलग तरीके ढूंढ रहा है. इसी के चलते नई नई वेब सीरीज (Web Series) और मूवीज (Movies) भी ओ.टी.टी प्लेटफोर्मस (OTT Platforms) जैसे कि नेट्फ्लिक्स (Netflix), अमेजन प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video), आदी. पर रिलीज की जा रही हैं जो कि दर्शकों के एंटरटेन्मेंट का पूरा पूरा खयाल रख रही हैं.

ये भी पढ़ें- Rishi Kapoor और Irrfan Khan से पहले इन बौलीवुड एक्ट्रेसेस की भी हुई अचानक मौत

four-more-shots

अमेजन प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) की ओरिजनल वेब सीरीज (Original Web Series) “फोर मोर शॉट्स प्लीज” (Four More Shots Please) के पहले सीजन जो कि 25 जनवरी 2019 को रिलीज की गई थी ने खूब सुर्खियां बटोरी थी. हाल ही में 17 अप्रैल 2020 को इस वेब सीरीज का दूसरा सीजन रिलीज किया गया था और यह सीजन भी लोगो की वाहवाई लूटने में काफी सफल रहा. इस वेब सीरीज में कीर्ति कुल्हारी (Kirti Kulhari), सयानी गुप्ता (Sayani Gupta), मानवी गागरू (Manvi Gagroo), लीजा रे (Lisa Ray) और बानी जे (Bani J) ने अहम भूमिकाएं निभाई हैं.

ये भी पढ़ें- तुम बहुत याद आओगे इरफान

Lisa-ray-kissing

इस वेब सीरीज की कहानी 4 लड़कियों (कीर्ति कुल्हारी, सयानी गुप्ता, मानवी गागरू, और बानी जे) के इर्द गिर्द घूमती है जो कि एक दूसरे की फीलिंग्स अच्छे से समझती हैं और एक दूसरे का काफी साथ देती हैं. ऐसे में एक्ट्रेस लीजा रे और बानी जे ने काफी बोल्ड किरादार निभाया है और दोनो एक लेस्बियन पार्टनर्स (Lesbian Partners) के रूप में नजर आई हैं.

ये भी पढ़ें- इस TV Actress ने मुंबई छोड़ कर गोवा में रहने का किया फैसला, शेयर की Hot Photos

Lisa-Ray

अब जो कि लीजा रे और बानी जे ने लेस्बियन पार्टनर्स (Lesbian Partners) का रोल निभाया है तो ऐसे में इन दोनो के कुछ इन्टेंस सीन्स (Intense Seens) भी इस वेब सीरीज में दिखाई दिए हैं जो कि सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुए हैं. दरअसल इस वेब सीरीज में लीजा रे और बानी जे के कुछ किसिंग सीन्स (Kissing Seens) हैं जो दर्शकों ने काफी पसंद किए हैं. ना सिर्फ किसिंग सीन्स बल्कि इन दोनो के बीच के रोमांटिक पल भी दर्शकों ने वायरल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

ये भी पढ़ें- Lockdown में अपने बौयफ्रेंड के साथ गोवा में फंसी रश्मि देसाई की ये को-एक्ट्रेस, शेयर की Hot Photos

आपको बता दें, कि इस वेब सीरीज का पहला सीजन अनु मेनन (Anu Menon) ने डायरेक्ट किया था जब कि दूसरा सीजन नुपुर अस्थाना (Nupur Asthana) द्वारा डायरेक्स किया गया है.

एक हसीना एक दीवाना : पहला भाग

जिस कामिनी को पूरे 3 साल तक कहांकहां नहीं ढूंढ़ा, वह एक दिन अचानक खुद सामने आ जाएगी, प्रभात ने ऐसा कभी नहीं सोचा था. प्रभात एक सरकारी बैंक में अफसर था. उस दिन वह अपने काम में मसरूफ था कि किसी औरत की आवाज कानों में सुनाई पड़ी, तो उस ने मुड़ कर देखा. कामिनी बोली, ‘‘कैसे हो प्रभात?’’

प्रभात ने सिर उठा कर देखा, तो वह खुशी से झूम उठा. उस के  सामने उस की प्रेमिका कामिनी खड़ी थी. प्रभात का दिल हुआ कि वह लोकलाज की परवाह न करते हुए कामिनी को बांहों में भर ले, मगर वह ऐसा न कर सका. उस से पूछा, ‘‘मुझे छोड़ कर तुम कहां चली गई थीं?’’

‘‘मेरे लिए तुम अब भी तड़प रहे हो? क्या तुम ने अब तक शादी नहीं की?’’ कामिनी ने पूछा.

‘‘तुम अच्छी तरह जानती हो कि मेरी चाहत तुम हो, फिर मैं किसी और के साथ शादी कैसे कर सकता हूं?’’

‘‘ऐसी बात है, तो मैं तुम्हारी चाहत जरूर पूरी करूंगी. मैं यहां एक काम से आई थी. तुम्हें देख कर तुम्हारे पास आ गई. मेरा घर पास में ही है. तुम ऐसा करो कि अपना काम खत्म कर के मेरे साथ चलो. वहां पर आराम से बातें करेंगे. बैंक में मेरा जो काम है, वह किसी दूसरे दिन कर लूंगी.’’

प्रभात ने कामिनी को ऊपर से नीचे तक बडे़ ही गौर से देखा. गुलाबी रंग की साड़ी और मैचिंग ब्लाउज में वह बड़ी खूबसूरत दिख रही थी. प्रभात का उसे पाने के लिए मन मचल गया.

प्रभात ने कहा, ‘‘तुम कहो, तो मैं अभी छुट्टी ले कर चलूं?’’

यह सुन कर कामिनी मुसकरा उठी, फिर बोली, ‘‘इतने उतावले क्यों हो रहे हो? अब तो तुम्हारी चाहत पूरी हो ही जाएगी. फिलहाल तो तुम अपना काम निबटा लो. मैं कहीं बैठ जाती हूं.’’

‘‘अच्छा यह बताओ कि तुम बैंक में किस काम से आई थीं?’’

‘‘अपना काम शुरू करने के लिए मुझे इस बैंक से अच्छाखासा लोन लेना है. मगर अभी तो तुम मेरे घर चलो.’’

इस के बाद कामिनी सोफे पर जा कर बैठ गई. प्रभात अपना काम खत्म करने में लग गया.

प्रभात बिहार के एक गांव का रहने वाला था. गांव के स्कूल से 12वीं जमात पास करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए वह शहर के कालेज में दाखिल हुआ, तो वहां कामिनी से उस की मुलाकात हुई.

कामिनी भी 12वीं जमात पास करने के बाद 2 दिन पहले ही कालेज में दाखिल हुई थी. कामिनी इतनी ज्यादा खूबसूरत थी कि प्रभात अपने दिल पर काबू न रख सका. उस ने मन ही मन निश्चय किया कि वह हर हाल में उस से शादी करेगा. फिर तो उसी दिन से वह उस के आगेपीछे लट्टू की तरह नाचने लगा था.

ऐसी बात नहीं थी कि कामिनी की खूबसूरती पर सिर्फ प्रभात ही मरता था. कालेज के ज्यादातर लड़के उस पर अपनी जान छिड़कते थे, मगर बाजी प्रभात के हाथ लगी. 6 महीने बाद प्रभात को लगा कि अगर उस ने अपने दिल की बात कामिनी से नहीं कही, तो कोई दूसरा लड़का बाजी मार ले जाएगा.

आखिरकार हिम्मत कर के एक दिन प्रभात ने कामिनी से कहा, ‘‘मैं तुम्हें प्यार करता हूं. ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद मैं तुम से शादी करना चाहता हूं.’’

‘‘मैं जानती हूं कि तुम मुझे प्यार करते हो. मैं भी तुम्हें प्यार करती हूं, मगर शादी मैं तभी करूंगी, जब मुझे कोई अच्छी सी नौकरी मिल जाएगी.’’

‘‘मैं भी अपने मांबाप का एकलौता बेटा हूं. मेरी कोई बहन नहीं है. हमारे पास खेती के लिए 80 एकड़ से ज्यादा की जमीन है. उस से हमारा गुजारा मजे से हो जाएगा, फिर तुम्हें नौकरी की क्या जरूरत है?’’ प्रभात ने पूछा.

‘‘मैं गुजारा नहीं करना चाहती, शानशौकत की जिंदगी जीना चाहती हूं. फिर तुम जिस जमीन की बात कर रहे हो, वह तुम्हारी नहीं तुम्हारे पुरखों की है. मैं चाहती हूं कि मेरा होने वाला पति अपने पैरों पर खड़ा हो.’’

‘‘ठीक है, मैं किसानी नहीं करूंगा. गे्रजुएशन होने के बाद मैं कहीं नौकरी कर लूंगा. मगर तुम क्यों नौकरी करना चाहती हो?’’

‘‘मैं अपने पति पर निर्भर नहीं रहना चाहती. मैं खुद पैरों पर खड़ी हो कर अपनी जरूरतें पूरी करना चाहती हूं, इसलिए मैं ने तय किया है कि मैं उसी से शादी करूंगी, जो मेरे रास्ते में दीवार नहीं खड़ी करेगा.’’

‘‘अगर तुम मुझ से प्यार करते हो और मुझ से शादी करना चाहते हो, तो तुम्हें मेरी नौकरी मिलने तक इंतजार करना होगा.’’

प्रभात कामिनी की बात सुन कर राजी हो गया. उस दिन के बाद से प्रभात ने शादी की बात कभी नहीं की. पहले की तरह दोनों एकदूसरे से मिलते रहे. इस तरह ढाई साल बीत गए.

इस के बाद प्रभात मुसीबत में फंस गया. हुआ यह कि एक दिन अचानक उस के पिता ने उसे एक लड़की दिखा कर उस से शादी करने के लिए कहा.

प्रभात कामिनी के सिवा किसी और से शादी नहीं करना चाहता था, इसलिए लड़की के घर से अपने घर आते ही उस ने पिता को कामिनी के बारे में सबकुछ बता दिया.

प्रभात ने अपने पिता को यह चेतावनी भी दी कि अगर कामिनी से उस की शादी नहीं हुई, तो वह खुदकुशी कर लेगा.

प्रभात के पिता ज्यादा पढ़ेलिखे नहीं थे, मगर समझदार थे. वे बेटे का जुनून समझ गए. 2-3 दिनों तक सोचने के बाद उन्होंने प्रभात से कहा, ‘‘पहले कामिनी से मुझे मिलाओ. उस से बात करने के बाद ही उस के घर वालों से बात करूंगा.’’

यह सुन कर प्रभात खुश हो गया. वह उसी दिन कामिनी से बात कर लेना चाहता था, मगर उस दिन कामिनी कालेज नहीं आई थी. प्रभात ने फोन किया, लेकिन उस का मोबाइल फोन स्विच औफ था.

प्रभात परेशान हो गया. उस ने बारबार कामिनी को फोन किया, मगर उस का फोन नहीं लगा. अगले दिन भी कामिनी कालेज नहीं आई, तो उस की परेशानी और बढ़ गई.

प्रभात ने कामिनी की 3-4 सहेलियों से बात की. सभी ने यही कहा कि कामिनी का फोन स्विच औफ है, इसलिए पता नहीं कि वह कालेज क्यों नहीं आ रही है.

तीसरे दिन भी कामिनी कालेज नहीं आई, तो प्रभात उस के घर चला गया.

कामिनी का अपना घर दूरदेहात में था. शहर में वह बूआ के साथ रहती थी. बूआ का घर कालेज से 5 किलोमीटर दूर था. कामिनी बस से कालेज आतीजाती थी.

कामिनी की बूआ से प्रभात बहाने से मिला. बूआ ने बताया कि कामिनी की मां की तबीयत अचानक खराब हो गई थी, इसलिए उसे गांव आना पड़ा.

कामिनी को देखे बिना प्रभात को चैन नहीं मिलने वाला था, इसलिए बूआ से गांव का पता ले कर अगले दिन ही वह मोटरसाइकिल से उस के गांव चला गया.

कामिनी का गांव शहर से 60 किलोमीटर दूर था. गांव की एक बुजुर्ग औरत की मदद से प्रभात कामिनी से एक सुनसान जगह पर मिला.

कामिनी के आते ही प्रभात उस पर बरस पड़ा था, ‘‘फोन पर असलियत बता दी होती, तो मुझे इतना परेशान नहीं होना पड़ता. जानती हो कि एक दिन भी मैं तुम्हें नहीं देखता हूं, तो बेचैन हो जाता हूं. तुम ने अपना फोन भी बंद कर रखा है.’’

कामिनी ने समझाबुझा कर पहले प्रभात का गुस्सा शांत किया, उस के बाद कहा, ‘‘मैं ने फोन बंद नहीं किया था. शहर से गांव आते समय हाथ से छूट कर मोबाइल फोन जमीन पर गिर जाने के चलते खराब हो गया था. तब से बंद पड़ा है. अब शहर जा कर ही फोन को ठीक कराऊंगी.’’

‘‘अच्छा… अब तुम जाओ. यह शहर नहीं गांव है. अगर किसी ने तुम्हारे साथ मुझे देख लिया और मेरे घर वालों को बता दिया, तो मेरी पढ़ाई बंद कर दी जाएगी. तब मेरा सपना भी पूरा नहीं होगा.

‘‘अगर मेरा सपना पूरा नहीं होगा, तो मैं तुम से शादी नहीं कर पाऊंगी. 3-4 दिन बाद मां की तबीयत बिलकुल ठीक हो जाएगी, तो मैं कालेज आ जाऊंगी.’’

कामिनी वहां से चली जाना चाहती थी, लेकिन प्रभात ने उसे जाने नहीं दिया. उस ने कहा, ‘‘दरअसल, मैं तुम्हें एक बात बताने आया हूं.’’

‘‘क्या?’’

‘‘मैं ने तुम्हारे बारे में अपने मातापिता को बता दिया है. वे तुम से मिलना चाहते हैं. तुम से बात करने के बाद ही वे तुम्हारे घर वालों से शादी की बात करेंगे.’’

‘‘क्या बकवास कर रहे हो तुम? मैं ने पहले ही तुम्हें बताया था कि मैं शादी तभी करूंगी, जब मुझे कोई अच्छी नौकरी मिल जाएगी.’’

‘‘अभी शादी करने के लिए मैं कहां कह रहा हूं. तुम मेरे पिता से मिल लो, बात कर लो. शादी तभी करना, जब तुम्हें नौकरी मिल जाए.’’

‘‘मैं अभी तुम्हारे घर वालों से नहीं मिलूंगी. तुम भी मेरे घर वालों से मिलने की कोशिश मत करो. अगर ऐसा करोगे, तो मैं तुम से संबंध तोड़ लूंगी.

‘‘तुम नहीं जानते कि हम कितने गरीब हैं. मेरे पिता बड़ी मुश्किल से मेरी पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं. मेरे पिता के पास कुछ नहीं है. वे मजदूरी कर के परिवार को पाल रहे हैं. मेरी 3 और बहनें हैं. वे तीनों मुझ से छोटी हैं. उन के प्रति भी मेरी जिम्मेदारी है.’’

उस के बाद कामिनी रुकी नहीं. प्रभात ठगा सा वहीं खड़ा रह गया. उस रात प्रभात को नींद नहीं आई. कामिनी की बात से उसे एहसास हो गया था कि वह 4-5 साल से पहले शादी नहीं करेगी.

कामिनी के घर से लौटने के बाद प्रभात ने शादी करने की उस की शर्त पिता को बता दी.

पिता ने बगैर देर किए अपना फैसला प्रभात को सुना दिया था. उन्होंने कहा, ‘‘अब तुम कामिनी को हमेशाहमेशा के लिए भूल जाओ.

‘‘जिस लड़की को मैं ने तुम्हें दिखाया है, 5-6 महीने में उस से शादी कर लो और गे्रजुएशन के बाद खेती में जुट जाओ. अपनी जमीन रहते तुम्हें नौकरी करने की कोई जरूरत नहीं है.’’

प्रभात कामिनी से ही शादी करना चाहता था, मगर पिता का विरोध भी नहीं करना चाहता था. वह कोई ऐसा रास्ता निकालना चाहता था, जिस से सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे.

कामिनी से शादी करने का प्रभात को  जब कोई रास्ता दिखाई नहीं पड़ा, तो उस ने कामिनी से जिस्मानी रिश्ता बनाने का फैसला किया. उसे लगा कि रिश्ता हो जाने के बाद कामिनी अपनी शर्त भूल जाएगी और उस से शादी कर लेगी.

(क्रमश:)

क्या प्रभात कामिनी के साथ जिस्मानी रिश्ता बना पाया? इतने साल बाद कामिनी और प्रभात का इश्क क्या रंग लाया? पढि़ए अगले अंक में…

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें