Dr P K Jain: कोरोना से लड़ाई में डॉक्टर पी के जैन की नई पहल

देश में कोरोना तेजी से फैल रहा है, इसी बीच यूपी के आयुष विभाग ने लोगों की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए एक खास काढ़ा तैयार किया है, जिससे लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ सके और वो कोरोना से लड़ सके.

डॉ पी के जैन भी दे रहे हैं उपयोग की सलाह…

लखनऊ के डॉ पी के जैन और उनकी टीम भी लोगों को इस खास औषधीय आर्युवेदिक गुणों वाले काढ़े को पीने की सलाह दे रहे हैं. क्योंकि ये केमिकल फ्री हैं और अपने आस-पास और घर में मौजूद चीजों से बनाया गया है. मतलब आपकी सेहत पर इसका कोई बुरा असर नहीं होगा.

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जानें डॉक्टर पी के जैन के बारे…

अंतर्राष्ट्रीय ख्याति एवं मान्यता प्राप्त लखनऊ के डॉक्टर पी. के. जैन पिछले 40 सालों से सेक्स समस्याओं का बेहतर इलाज कर रहे हैं. लेकिन मौजूदा कोरोना संकट में वो अपनी टीम के साथ मिलकर ऐसी चीजें पर काम कर रहे हैं जो लोगों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सके. ताकी वो कोरोना वायरस के सामने कमजोर न पड़ें.

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काढ़े की खासियत…

कोरोना के संक्रमण से लोगों में प्रतिरोधकता बढ़ाने के लिए काढ़े के सेवन को बढ़ावा देने की योजना है. डॉक्टरों ने काफी शोध के बाद आसपास मौजूद आयुर्वेदिक गुणों वाली तुलसी, दालचीनी, काली मिर्च, सोंठ, गिलोए एवं मुनक्का के चूर्ण को मिलाकर काढ़ा का पाउडर तैयार किया है.

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इस काढ़ा का प्रयोग आम लोगों के बीच बढ़ाने के लिए भी सरकार योजना बना रही है जिसमें आयुष के अस्पतालों से भी इसे वितरित करने पर विचार किया जा रहा है.

आयुष विभाग द्वारा वितरित इस काढ़े के द्वारा कई कोरोना मरीजों का सफलता पूर्वक इलाज भी किया गया है वो भी मरीज को कोई हानि हुए बगैर. कई गंभीर मरीज मात्र इस काढ़े को पीकर ही ठीक हुए हैं. इस काढ़े का कोई साइड इफेक्ट नहीं है. ये काढ़ा आपको कोरोना से तो बचाता ही है लेकिन अगर आपको कोरोना हो जाए ये कोरोना वायरस को जल्द से जल्द खत्म भी करता है और आपकी इम्युनिटी को बढ़ाता है.

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कुछ इस तरह रहा Neha Kakkar का इतने सालों का सफर, Photos देख उड़ जाएंगे होश

बौलीवुड व पंजाब इंडस्ट्री की बेहद पौपुलर सिंगर नेहा कक्कड़ (Neha Kakkar) आज यानी कि 6 जून को अपना 32वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं. नेहा कक्कड़ ने इतनी जल्दी सफलता की सीढियां चड़ी हैं कि अब वे किसी पहचान की मोहताज नहीं है बल्कि उनका नाम आते ही उनके फैंस के दिलों में हलचल पैदा हो जाती है. नेहा कक्कड़ को आज हर कोई जानता है लेकिन एक समय वो भी था जब वे अपनी लाइफ में सफलता पाने के लिए स्ट्रगल (Struggle) कर रही थीं.

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वो कहते हैं ना कि बिना मेहनत किसी को भी सफलता हासिल नहीं होती तो उनका जीता जागता उद्धारण है नेहा कक्कड़ (Neha Kakkar). जी हां, नेहा ने अपनी जिंदगी में खूब मेहनत की है और उस मेहनत का फल भी उन्हें मिला है कि वे आज की तारीख में एक सफल सिंगर है जिसे पूरा विश्व जानता है.

जैसा कि हम सब जानते हैं कि नेहा कक्कड़ (Neha Kakkar) दिखने में काफी सुंदर और खूबसूरत हैं. उनकी स्माइल इतनी क्यूट है कि कोई भी उनकी स्माइल देख कर उनसे प्यार कर बैठे. तो आज हम आपको दिखाएंगे नेहा कक्कड़ का वो हसीन सफर जब नेहा ने अपने करियर की शुरूआत की थी. आपको ये फोटोज देख कर जरूर हैरानगी होगी क्योंकि पहले की नेहा कक्कड़ और अब की नेहा कक्कड़ में काफी फर्क आ गया है.

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यह बात तो हर कोई जानता है कि शुरूआत में नेहा कक्कड़ (Neha Kakkar) ने इंडस्ट्री में आने से पहले जगरातों और कीर्तनों में गाना शुरू किया था. तभी से ही लोगों को उनकी गायिकी काफी पसंद आने लग गई थी.

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नेहा कक्कड़ (Neha Kakkar) ने अपने करियर की शुरूआत पौपुलर सिंगिंग रिएलिटी शो इंडियन आइडल (Indian Idol) से की थी जिसमें वे एक कंटेस्टेंट के रूप में नजर आई थी लेकिन अब वे इस रिएलिटी शो में जज की भूमिका निभाती दिखाई देती हैं. इस फोटो में नेहा अनु मलिक (Anu Malik) और फराह खान (Farah Khan) के साथ पिंक कलर के सूट में खड़ी दिखाई दे रही हैं.

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बचपन से ही नेहा कक्कड़ (Neha Kakkar) की स्माइल काफी क्यूट रही है और इस बात का अंदाजा आप ये फोटो देख लगा सकते हैं कि छोटी नेहा कक्कड़ कितनी ही स्वीट नजह आती थीं.

तो ये थीं नेहा कक्कड़ की कुछ चुनिंदा फोटोज जिसे देख आप जरूर हैरान हो गए होंगे कि आखिर नेहा कक्कड़ कितनी पहले से मेहनत करती आ रही हैं और आज की तारीख में तो जैसे उनसे ग्लैमरस कोई नहीं. नेहा कक्कड़ की लेटेस्ट फोटोज की बात करें तो वे इतनी ग्लैमरस और हॉट फोटोज शेयर करती है कि कोई भी उनकी फोटोज देख उन्हें दिल दे बैठे.

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Monalisa के इस Tik-Tok वीडियो ने सोशल मीडिया पर मचाया धमाल, साथ ही शेयर की हॉट Photos

भोजपुरी इंडस्ट्री (Bhojpuri Industry) की जानी मानी एक्ट्रेस मोनालिसा (Monalisa) इन दिनों काफी सुर्खियों में है. ऐसा लगता है कि मोनालिसा को सुर्खियां बटोरना बेहद अच्छे से आता है तभी तो वे कभी अपनी फोटोज को लेकर तो कभी वीडियोज को लेकर सुर्खियों में बनी ही रहती हैं. इसी कड़ी में एक बार फिर मोनालिसा अपनी एक टिक-टॉक वीडियो (Tik Tok Video) को लेकर लाइमलाइट में आ गई है.

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इस वीडियो में मोनालिसा (Monalisa) काफी खूबसूरत दिखाई दे रही हैं. अपने क्यूट अंदाज में मोनालिसा बौलीवुड डायलॉग पर एक्टिंग करती नजर आ रही हैं. इस वीडियो के कैप्शन में भी मोनालिसा ने लिखा है कि,- “Full on Over Acting…” इसी के साथ ही उन्होनें अपने कैप्शन में कुछ हैशटैग्स भी इस्तेमाल किए है जैसे कि- #love #acting #passion #comedy #fun #masti #laughter.

 

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Aapka Kya Tha? Haan Namak 🧂… 😃😃🤪… Full On Over Acting… #love #acting #passion #comedy #fun #masti #laughter

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इस वीडियो को देखने के बाद मोनालिसा (Monalisa) के फैंस के अलग अलग रिएक्शन्स (Reactions) देखने को मिल रहे हैं. हर बार की तरह इस बार भी मोनालिसा के फैंस उनकी इस वीडियो की भी बेहद तारीफ कर रहे हैं. इस टिक टॉक (Tik Tok) वीडियो को मोनालिसा ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट (Official Instagram Account) से शेयर किया है और इस वीडियो को अब तक 1 लाख 21 हजार से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है.

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On world environmental day, lets pledge to make this planet sustainable. #Coexist #worldenvironmentday2020

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इतना ही नहीं बल्कि मोनालिसा को नेचर के प्रति भी काफी लगाव है और ऐसा उनकी लेटेस्ट फोटोज को देख कर कहा जा सकता है. हाल ही में मोनालिसा ने अपनी लेटेस्ट फोटोज इंस्टाग्राम पर शेयर की है जिसके कैप्शन में उन्होनें लिखा है कि, On world environmental day, lets pledge to make this planet sustainable. #Coexist #worldenvironmentday2020.

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आस पूरी हुई : सोमरू और कजरी की क्या थी इच्छा

रमेश्वर आज अपनी पहली कमाई से सोमरू के लिए नई धोती और कजरी के लिए  चप्पल लाया था. अपनी मां को उस ने कई बार राजा ठाकुर के घर में नईनई लाललाल चप्पलों को ताकते देखा था. वह चाहता था कि उस के पिता भी बड़े लोगों की तरह घुटनों के नीचे तक साफ सफेद धोती पहन कर निकलें, पर कभी ऐसा हो न सका था.

कजरी ने धोती और चप्पल संभाल कर रख दी और बेटे को समझा दिया कि कभी शहर जाएंगे तो पहनेंगे. गांव में बड़े लोगों के सामने सदियों से हम छोटी जाति की औरतें चप्पल पहन कर नहीं निकलीं तो अब क्या निकलेंगी.

कजरी मन ही मन सोच रही थी कि इन्हीं चप्पलों की खातिर राजा ठाकुर के बेटे ने कैसे उस से भद्दा मजाक किया था और घुटनों से नीचे तक धोती पहनने के चलते भरी महफिल में सोमरू को नंगा किया गया था. कजरी और सोमरू धौरहरा गांव में रहते थे. सोमरू यानी सोनाराम और कजरी उस की पत्नी.

सोमरू कहार था और अपने पिता के जमाने से राजा ठाकुरों यहां पानी भरना, बाहर से सामान लाना, खेतखलिहानों में काम करना जैसी बेगारी करता था.

राजा ठाकुरों की गालीगलौज, मारपीट  जैसे उस के लिए आम बात थी. कजरी भी उस के साथसाथ राजा ठाकुरों के घरों में काम करती थी.

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कजरी थी सलीकेदार, खूबसूरत और फैशनेबल भी. काम ऐसा सलीके से करती थी कि राजा ठाकुरों की बहुएं भी उस के सामने पानी भरती थीं.

एक दिन आंगन लीपते समय कजरी घर की नई बहू की चमचमाती नईनई चप्पलें उठा कर रख रही थी कि राजा ठाकुर के बड़े बेटे की नजर उस पर पड़ गई. उस ने कहा, ‘‘कजरी, चप्पल पहनने का शौक हो रहा है क्या…? बोलो तो तुम्हारे लिए भी ला दें, लेकिन सोमरू को मत बताना. हमारीतुम्हारी आपस की बात रहेगी.

‘‘तुम्हारे नाजुक पैर चप्पल बिना अच्छे नहीं लगते. सब के सामने नहीं पहन सकती तो क्या हुआ… मेरा कमरा है न… रात को मेरे कमरे में पहन कर आ जाना. कोई नहीं देखेगा मेरे अलावा.’’

कजरी का मन हुआ कि चप्पल उस के मुंह पर मार दे, पर क्या करती… एक भद्दी सी गाली दे कर चुप रह गई. कजरी आंगन लीप कर हाथ धोने बाहर जा रही थी तभी देखा कि राजा साहब सोमरू को बुला रहे थे.

सोमरू घर के बाहर झाड़ू लगा रहा था. राजा ठाकुर भरी महफिल के सामने गरजे, ‘‘अबे सोमरू, बहुत चरबी चढ़ गई है तुझे. कई दिन से देख रहा हूं तेरी धोती घुटनों से नीची होती जा रही है. राजा बनने का इरादा है क्या?

‘‘जो काम तुम्हारे बापदादा ने नहीं किया, तुम करने की जुर्रत कर रहे हो? लगता है, जोरू कुछ ज्यादा ही घी पिला रही है…’’ और राजा साहब ने सब के सामने उस की धोती खोल कर फेंक दी.

भरी सभा में यह सब देख कर लोग जोरजोर से हंसने लगे. एक गरीब आदमी सब के सामने नंगा हो गया था. सोमरू को तो जैसे काठ मार गया.

सोमरू इधरउधर देख रहा था कि कहीं कजरी उसे देख तो नहीं रही. दरवाजे के पीछे खड़ी कजरी को उस ने खुद देख लिया. वह जमीन में गड़ गया.

कजरी दरवाजे की ओट से सब देख रही थी. शरीर जैसे जम सा गया था. वह जिंदा लाश की तरह खड़ी थी.

कजरी और सोमरू एकदूसरे से नजरें नहीं मिला पा रहे थे. आखिर क्या कहते? कैसे दिलासा देते? दोनों अंदर ही अंदर छटपटा रहे थे.

कजरी ने सोमरू की थाली जरूर लगाई, पर वह रातभर वैसी ही पड़ी रही. दोनों पानी पी कर लेट गए, पर नींद किस की आंखों में थी? उन का दर्द इतना साझा था कि बांटने की जरूरत न थी.

कजरी का दर्द पिघलपिघल कर उस की आंखों से बह रहा था, पर सोमरू… वह तो पत्थर की मानिंद पड़ा था. कजरी के सामने बारबार अपने पति का भरी सभा में बेइज्जत किया जाना कौंध जाता था और सोमरू को कजरी की डबडबाई आंखें नहीं भूल रही थीं.

कजरी और सोमरू की जिंदगी यों ही बीत रही थी. बेटे रमेश्वर को उन्होंने जीतोड़ मेहनतमजदूरी, कर्ज ले कर पढ़ाया लिखाया था.

सोमरू चाहता था कि उस के बेटे को कम से कम ऐसी जलालत भरी जिंदगी न जीनी पड़े. जिंदा हो कर भी मुरदों जैसे दिन न काटने पड़ें.

रमेश्वर पढ़लिख कर एक स्कूल में टीचर हो गया था और शहर में ही रहने लगा था. सोमरू चाहता भी नहीं था कि वह गांव लौटे. उन का बुढ़ापा जैसेतैसे कट ही जाएगा, पर बेटा खुशी और इज्जत से तो रहेगा.

सोमरू की एक आस मन में ही दबी थी कि वह और कजरी साथ घूमने जाएं.  कजरी अपनी मनपसंद चप्पल पहन कर उस के साथ शहर की चिकनी सड़क पर चले, जो रमेश्वर उस के लिए लाया था.

सोमरू अपने मन की आस किसी के सामने कह भी नहीं सकता था और कजरी को तो बिलकुल भी नहीं बता सकता था. कहां खाने के लाले पड़े थे और वह घूमने के बारे में सोच रहा है.

जमुनिया ताल के किनारे कजरी एक दिन बरतन धो रही थी. सोमरू भी वहीं बैठा था. उस दिन सोमरू ने अपने मन की बात कजरी को बताई, ‘‘बुढ़ापा आ गया  कजरी, पर मन की एक हुलस आज तक पूरी न कर पाया. चाहता था कि कसबे में चल रहे मेले में दोनों जन घूम आएं.’’

सोमरू एक बार उसे चप्पल पहने देखना चाहता था, जैसे नई ठकुराइन अपने ब्याह में पहन कर आई थीं.

रमेश्वर कितने प्यार से लाया था अपनी पहली कमाई से, पर इस गांव में यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी. जिंदगी बीत गई. अब जाने कितने दिन बचे हैं. एक बार मेला भी देख लें. कितना सुना है उस के बारे में. यह इच्छा पूरी हो जाए, फिर चाहे मौत ही क्यों न आ जाए, शिकायत न होगी.

कजरी को लगा कि सोमरू का दिमाग खिसक गया है. यह कोई उम्र है चप्पल पहन कर घूमने की. सारी जिंदगी नंगे पैर बीत गई. जब उम्र थी तब तो कभी न कहा कि चलो घूम आएं. अब बुढ़ापे में घूमने जाएंगे. उस समय तो कजरी ने कुछ न कहा, पर कहीं न कहीं सोमरू ने उस की दबी इच्छा जगा दी थी.

रात में कजरी सोमरू को खाना खिलाते समय बोली, ‘‘कहते तो तुम ठीक ही हो. जिंदगीभर कमाया और इस पापी पेट के हवाले किया. कुछ पैसा जोड़ कर रखे थे कि बीमारी में काम आएगा, पर लगता है कि अब थोड़ा हम अपने लिए भी जी लें, खानाकमाना तो मरते दम तक चलता ही रहेगा. पेट ने कभी बैठने दिया है इनसान को भला?’’

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दोनों ने अगले महीने ही गांव से डेढ़ सौ किलोमीटर दूर ओरछा के मेले में जाने की योजना बनाई.

पूरे महीने दोनों तैयारी करते रहे. पैसा इकट्ठा किया. कपड़ेलत्ते संभाले. गांव वालों को बताया. बेटों को बताया. नातेरिश्तेदारों को खबर की कि कोई साथ में जाना चाहे तो उन के साथ चले. आखिर कोई संगीसाथी मिल जाएगा तो भला ही होगा. जाने का दिन भी आ गया, पर कोई तैयार न हुआ.

गांव से 4 किलोमीटर पैदल जा कर एक कसबा था, जहां से ओरछा के लिए सीधी ट्रेन जाती थी. दोनों बूढ़ाबूढ़ी भोर में ही गांव से पैदल चल दिए.

स्टेशन तक पहुंचतेपहुंचते सूरज भी सिर पर आ गया था. 11 बजे दोनों ट्रेन में खुशीखुशी बैठ गए. आखिर बरसों की साध पूरी होने जा रही थी.

कजरी घर से ही खाना बना कर लाई थी. दोनों ने खाया और बाहर का नजारा देखतेदेखते जाने कब सफर पूरा हो गया, पता ही न चला.

रात में दोनों एक धर्मशाला के बाहर ही सो गए. अगले दिन सुबह मेले में शामिल हुए. पूरा दिन वहीं गुजारा. कजरी ने एकसाथ इतनी दुकानें कभी न देखी थीं. हर दुकान के सामने खड़ी हो कर वह वहां रखे चमकते सामान को देखती और अपनी गांठ में बंधे रुपयों पर हाथ फेरती. दुकान में घुस कर दाम पूछने की हिम्मत न पड़ती.

एक दुकान में दुकानदार के बहुत बुलाने पर सोमरू और कजरी घुसे. कजरी वहां रखी धानी रंग की चुनरी देख कर पीछे न हट सकी.

सोमरू ने उस के लिए डेढ़ सौ रुपए की वह चुनरी खरीद ली और दुकान से बाहर आ गए. अब सोमरू के पास कुछ ही पैसे बचे थे. वह सोच रहा था कि कजरी के पास भी कुछ रुपए होंगे. उस ने पूछा तो कजरी ने हां में सिर हिला दिया.

कजरी ने जातबिरादरी में बांटने के लिए टिकुली, बिंदी, फीता, चिमटी के अलावा और भी बहुत सा सामान खरीदा. आखिर वह इतने बड़े मेले में आई थी. पासपड़ोसी, नातेरिश्तेदार सब को कुछ न कुछ देना था. खाली हाथ वापस कैसे जाती.

कजरी आज जब चप्पल पहन कर चल रही थी, सोमरू को रानी ठाकुराइन के गोरेगोरे महावर सजे पैर याद आ गए. कजरी के पैर आज भी गोरे थे और सुहागन होने के चलते महावर उस के पैरों में हमेशा लगा रहता था.

कजरी लाललाल चप्पल पहन कर जैसे आसमान में उड़ रही थी. आज उसे किसी के सामने चप्पल उतारने की जरूरत न थी. लोग उसे देख रहे थे और वह लोगों को.

सोमरू ने आज घुटनों तक धोती पहनी थी. वह आज इतना खुश था, जितना अपनी शादी में भी न हुआ था.

आज 70 बरस की कजरी उस के साथसाथ पक्की सड़क पर सब के सामने लाललाल चप्पल पहने, धानी रंग की चुनरी ओढ़े ठाट से चल रही थी, मानो किसी बड़े घर की नईनई बहू ससुराल से मायके आई हो.

सोमरू आज अपनेआप को दुनिया का सब से रईस आदमी समझ रहा था. दोनों घर वापस जाने के लिए स्टेशन आ गए. रात स्टेशन पर ही बितानी थी. ट्रेन सवेरे 5 बजे की थी. दोनों ने पास में बंधा हुआ खाना खाया और वहीं स्टेशन पर आराम करने लगे.

सोमरू सुबह टिकट लेने के लिए उठा. कजरी से बोला, ‘‘पैसे निकाल. टिकट ले लिया जाए. ट्रेन के आने का समय भी हो रहा है.’’

दोनों ने अपनेअपने पैसे निकाले और गिनने लगे. टिकट के लिए 40 रुपयों की जरूरत थी और दोनों के पास कुलमिला कर 38 रुपए ही हुए. अब वे क्या करें?

दोनों बारबार कपड़े, झोले को झाड़ते, सामान झाड़झाड़ कर देखते, कहीं से 2 रुपए निकल जाएं. पर पैसे होते तब न निकलते.

दोनों ऐसे भंवर में थे कि न डूब रहे थे, न निकल रहे थे. धीरेधीरे लोग उन के आसपास इकट्ठा होने लगे थे.

दरअसल, रात को सोमरू ने 2 रुपए का तंबाकू खरीदा था और अब टिकट के लिए पैसे कम पड़ रहे थे.

कजरी की आंखों से आग बरस रही थी. उस ने सोमरू को गुस्से में कहा, ‘‘अब क्या करोगे? टिकट के लिए पैसे कम पड़ गए. अब घर क्या उड़ कर जाएंगे? तुम्हारी तंबाकू की लत ने…’’

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बेचारा सोमरू क्या करे. जिस दर्द को वह पूरी जिंदगी ढोता रहा, उस ने आज इतनी दूर आ कर भी उस का पीछा नहीं छोड़ा था. कभी अपने आसपास लगी भीड़ को देखता, तो कभी अपनी बूढ़ी पत्नी को.

सोमरू का मन पछतावे से इस तरह छटपटा रहा था जैसे वह पूरे समाज के सामने चोरी करता पकड़ा गया हो. आज फिर 2 रुपयों ने सब के सामने उसे नंगा कर दिया था.

Short Story : बीवी या बौस

मैंने अपनी जिद पर लव मैरिज की थी, इसीलिए विदाई के वक्त ससुरजी ने कहा था, ‘‘जमाई बाबू, अभी तो मैं अपनी बेटी की शादी नहीं करना चाहता था, लेकिन आप के प्यार के आगे मुझे झुकना पड़ा. खैर, बेटी को मैं ने अच्छे संस्कार दिए हैं, इसलिए आप की जिंदगी की बगिया हमेशा गुलजार रहेगी.’’

मैं ने ससुरजी के चरण छू कर कहा था, ‘‘जब तक मेरी इन बाजुओं में दम है, आप की बेटी राज करेगी.’’

और इस तरह बिना एक फूटी कौड़ी दिए ससुर साहब ने अपनी सुपुत्री मुझे सौंप दी और मैं अपनी बीवी को ले कर दिल्ली की एक बस्ती में आ गया.

जब मेरी मासूम सी बीवी ने मेरे घर में पहला कदम रखा था, तो मैं बहुत खुश हुआ था. सोचा था कि अब मुझे कष्ट नहीं होगा. समय पर नाश्ताखाना मिलेगा. जब दफ्तर से लौट कर आऊंगा तो बीवी मुझे प्यार करेगी. लेकिन मेरे सपने धरे के धरे रह गए.

एक दिन मैं ने दफ्तर से लौटते समय अपनी बीवी को फोन किया, ‘‘क्या कर रही हो?’’

‘कुछ नहीं, लेकिन आप कब आ रहे हैं?’ उधर से आवाज आई.

मुझे बहुत भूख लगी थी. मैं ने सोचा कि वह खाना बना कर रखेगी, इसीलिए मेरे आने के बारे में पूछ रही है. मैं ने कहा, ‘‘प्रिये, कुछ लजीज खाना बनाओ. मैं दफ्तर से निकल रहा हूं. एक घंटे में पहुंच जाऊंगा.’’

‘ठीक है,’ वह बोली.

मैं रास्तेभर गाना गुनगुनाते हुए घर पहुंचा. मैं खुश था कि घर पहुंचते ही गरमागरम लजीज खाना मिलेगा. मैं ने घंटी बजा दी लेकिन दरवाजा नहीं खुला. फिर 1-2 बार बजा कर इंतजार किया. फिर भी दरवाजा नहीं खुला तो कई बार घंटी बजाई. तब जा कर दरवाजा खुला.

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‘‘क्यों, क्या हो गया? देर क्यों हुई दरवाजा खोलने में,’’ मैं ने पूछा.

वह अपने चेहरे पर लटक रहे बालों को समटते हुए बोली, ‘‘कुछ नहीं, जरा आंख लग गई थी.’’

घर का सामान सुबह जिस हालत में था वैसे ही अभी भी पड़ा था. सुबह जिस प्लेट में मैं ने नाश्ता किया था वह वैसे ही जूठी डाइनिंग टेबल पर पड़ी थी. धोने के लिए गंदे कपड़ों का ढेर एक कोने में मुंह चिढ़ा रहा था. फर्श पर धूल की परत थी. रसोईघर में जूठे बरतनों का ढेर लगा था.

लजीज खाना खाने का मेरा सपना चकनाचूर हो गया था. वह मासूमियत से हुस्न के हथियार के साथ अनमने ढंग से मुझे देख रही थी. मैं खून का घूंट पी कर रह गया.

कुछ दिनों के बाद एक सुबह मैं दफ्तर के लिए निकल रहा था, तो वह बोली, ‘‘सुनिएजी, मेरे मोबाइल फोन में बैलेंस खत्म हो गया है. बैलेंस डलवा दीजिएगा.’’

मैं ने चौंक कर कहा, ‘‘बैलेंस कैसे खत्म हो गया… कल ही तो 2 सौ रुपए का रीचार्ज कराया था?’’

‘‘कल मैं ने मम्मीपापा से बात की थी और बूआ से भी बात की थी…

2-3 सहेलियों से भी बात की थी…’’ वह थोड़ा अटकते हुए बोली.

‘‘तो इतनी ज्यादा बात करने की क्या जरूरत थी? सिर्फ हालचाल पूछ लेती और बात खत्म कर देती,’’ मैं ने कहा.

‘‘हालचाल ही तो पूछा था,’’ वह बोली.

मुझे दफ्तर के लिए देर हो रही थी. मैं ने कहा, ‘‘अच्छा, ठीक है, बैलेंस डलवा दूंगा,’’ कह कर मैं घर से निकल गया. मेरे सपनों का महल टूटता जा रहा था.

इसी बीच उसे एक नया शौक सूझा. अब वह टैलीविजन का रिमोट हाथ में लिए सीरियल देखती रहती थी. कुछ कहता तो भी सीरियल में ही खोई रहती. जोर से बोलने पर वह मेरी तरफ देख कर पूछती, ‘‘क्या हुआ?’’

‘‘दफ्तर से थकाहारा आया हूं. पानी और नाश्ते के लिए भी नहीं पूछती और कहती हो कि क्या हुआ…’’

‘‘अच्छा, अभी 5 मिनट में लाती हूं. सीरियल अब खत्म होने ही वाला है,’’ टैलीविजन पर से आंखें हटाए बिना वह जवाब देती.

उस के वे 5 मिनट कभी खत्म नहीं होते. मजबूरन मैं खुद ही रसोईघर में जा कर कुछ खाने को ले आता. खुद भी खाता और अपनी बीवी को भी खिलाता.

महीनों सीरियल प्रेम दिखाने के बाद मेरी बीवी का पासपड़ोस की औरतों के घरों में आनेजाने और गपबाजी का दौर शुरू हुआ.

मैं दफ्तर से आ कर दरवाजे की घंटी बजाता रहता लेकिन दरवाजा नहीं खुलता. जब फोन करता तो पता चलता कि वह किसी पड़ोसन के घर बैठी है.

जल्द ही मेरी बीवी का पड़ोसन के घरों में जाने का साइड इफैक्ट भी शुरू हो गया. दूसरों के घरों में कुछ नई और अच्छी चीजें देख कर आती और मुझे भी वे चीजें लाने को कहती. कुछ तो अपनी जरूरत और पैसे की सीमा को देखते हुए मैं ले भी आया लेकिन अकसर ऐसी डिमांड होने लगी.

कुछ मेरी चादर से बाहर होता तो मैं मना कर देता. वह मुंह फुला कर बैठ जाती. खाना जैसेतैसे बना कर लाती, जो खाया न जाता.

एक दिन मैं ने उसे समझाया, ‘‘प्रिये, सब की जरूरत और औकात अलग होती है और उसी के मुताबिक सब काम करते हैं. दूसरों को देख कर हमें परेशान नहीं होना चाहिए.’’

‘‘हां, मेरी किस्मत ही खराब है, तभी तो सारी अच्छी चीजें दूसरों के घर देखती हूं. अपने घर में नसीब कहां?’’ वह बुझी आवाज में बोली.

‘‘निराश क्यों होती हो? समय आने पर हमारे यहां भी सबकुछ हो जाएगा. सब एक दिन में तो अमीर नहीं हो जाते. इस में समय लगता है,’’ मैं ने कहा.

‘‘मैं बोझ हो गई थी, इसीलिए मेरे मम्मीपापा ने जल्दी मेरी शादी करा दी,’’ यह कहते ही उस की आंखों से आंसू टपकने लगे.

‘‘लेकिन यह शादी तो हम दोनों के बीच प्यार होने के चलते हुई थी.’’

‘‘तो क्या हुआ? मैं नादान थी, लेकिन मेरे मम्मीपापा को तो अक्ल थी. मुझे बोझ समझ कर उन्होंने मेरा निबटारा कर दिया.’’

‘‘खैर, देर से शादी होती तो क्या कोई टाटा, बिरला या मुकेश अंबानी का बेटा आ जाता रिश्ता ले कर?’’ गुस्से में मेरे मुंह से निकला.

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‘‘कोई भी आता लेकिन आप से अच्छा आता,’’ उस ने जवाब दिया.

मैं ने चुप रह जाना ही ठीक समझा.

रविवार का दिन था. मैं ने सोचा कि आज आराम करूंगा. रोज अपने दफ्तर में बौस की और्डरबाजी से परेशान रहता हूं. कम से कम आज तो आराम कर लूं.

मैं ने बीवी से कहा, ‘‘जानेमन, आज कुछ अच्छा खाना बनाओ ताकि खा कर मजा आ जाए. मैं आज टैलीविजन पर फिल्म देखूंगा और आराम करूंगा.’’

लेकिन मेरी बीवी का खयाल कुछ और ही था. वह बोली, ‘‘चलिए न आज कहीं बाहर घूमने चलते हैं और होटल में खाना खाते हैं.’’

मैं ने घबरा कर कहा, ‘‘कहां घूमने चलेंगे? कोई अच्छी जगह नहीं है. भीड़भाड़ और गाडि़यों के जाम में ही फंसे रहे जाते हैं और होटल का खाना तो ऐसा होता है कि खाने के बाद पछतावा होने लगता है कि क्यों खाया.

‘‘खाने का कोई स्वाद नहीं होता. सिर्फ ज्यादा पैसे और टिप दो. शाम को हैरानपरेशान हो कर घर लौटो.’’

‘‘आप तो हमेशा ऐसे ही बोलते हैं. शादी के बाद हनीमून पर भी बाहर नहीं ले गए,’’ वह बिस्तर पर लेट कर आंसू बहाने लगी.

छुट्टी का मजा खराब हो चुका था. मैं खुद रसोईघर में जा कर कुछ स्वादिष्ठ खाना बनाने की कोशिश करने लगा.

एक बार पड़ोस में शादी थी. मुझे भी सपरिवार न्योता मिला था. दफ्तर से आ कर मैं ने अपनी बीवी से कहा, ‘‘जल्दी तैयार हो जाओ. सब इंतजार कर रहे होंगे.’’

लेकिन बहुत देर बाद भी वह अपने कमरे से बाहर न निकली. मैं कमरे में गया तो देखा कि वह तकिए में मुंह छिपा कर रो रही थी.

‘‘अरे, क्या बात हो गई… रो क्यों रही हो?’’ मैं ने घबरा कर पूछा.

वह कुछ न बोली. मैं ने जबरदस्ती उसे खींच कर बैठाया और फिर वजह पूछी.

‘‘न्योते में जाने लायक मेरे पास कपड़े नहीं हैं. मैं क्या पहन कर जाऊंगी?’’ वह सुबकते हुए बोली.

मैं हैरान रह गया. मैं रोज दफ्तर आताजाता हूं. लेकिन मेरे पास सिर्फ 2 जोड़ी ढंग के कपड़े थे, जबकि मेरी बीवी के पास कई जोड़ी कपड़े थे. 2 महीने पहले भी उस ने एक सूट खरीदा था, फिर भी वह रो रही थी.

मैं ने अलमारी में से उस के कई कपड़े निकाले और उस के आगे फैलाते हुए कहा, ‘‘ये सारे तो नए सूट हैं, फिर क्यों रो रही हो?’’

‘‘ये सब तो मैं पहले पहन चुकी हूं,’’ वह मुंह फेर कर बोली.

‘‘तुम कहना क्या चाहती हो? जो कपड़ा एक बार पहन लिया, वह पुराना हो गया क्या?’’ मैं ने पूछा.

‘‘ये कपड़े पहने हुए मुझे सब औरतें देख चुकी हैं.’’

‘‘मतलब, हर मौके लिए तुम्हें नए कपड़े चाहिए?’’ मैं ने उसे समझाते हुए कहा, ‘‘कोई कपड़े से बड़ा या छोटा नहीं होता. देखो तो, यह सूट कितना अच्छा है. तुम पहन कर तो देखो. जो इस सूट में तुम्हें देखेगा, तारीफ करेगा,’’ मैं ने पुचकारते हुए कहा.

उस दिन मैं बड़ी मुश्किल से अपनी बीवी को मना पाया था.

लेकिन अब मेरी सीधीशांत दिखने वाली बीवी बातबात पर गुस्सा करने लगी थी. सीरियल देखने से मना करता तो रिमोट पटक देती. पासपड़ोस में ज्यादा जाने से मना करता तो गुस्से में अपने को कमरे बंद कर लेती.

फोन पर ज्यादा बात करने से मना करता तो कई दिन तक मोबाइल फोन नहीं छूती. इतना ही नहीं, अगर मैं उस के बने खाने की शिकायत करता तो मुझे पर ही चीखने लगती और खाना बनाना छोड़ देती.

मैं तंग आ गया था. सोचता कि शादी से पहले कितनी सीधी और प्यारी थी मेरी बीवी, पर अब तो ज्वालामुखी बन गई है और गुस्सा तो जैसे इस की नाक पर बैठा रहता है.

दफ्तर में मेरा बौस काम में कमी निकाल कर मुझ पर बातबात पर गुस्सा करता था. लेकिन नौकरी तो करनी ही थी, उसी से घर का गुजारा चलता था, इसीलिए बौस का गुस्सा सहना पड़ता था.

घर आता तो बीवी भी मुझ पर ही बातबात पर गुस्सा करती. समझ में नहीं आता कि वह मेरी बीवी है या बौस.

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मेरी बीवी और मेरे बौस ने मेरी जिंदगी दूभर कर दी थी. पता नहीं, इन दोनों के चक्रव्यूह से मैं कभी निकल पाऊंगा भी या नहीं.

अंधविश्वास को बढ़ावा : बिहार में ‘कोरोना माई’ की पूजा

तकरीबन हर साल जूनजुलाई  महीने में बिहार के गांवों में कोई न कोई अफवाह फैलती है. किसी साल कोई ‘लकड़सुंघवा’ बच्चों को लकड़ी सुंघा कर बेहोश कर के चुराता है, तो किसी साल कोई ‘मुंहनोचवा’ छत पर या बाहर सोए लोगों का रात में आ कर मुंह नोच लेता है, तो किसी साल ‘चोटीकटवा’ का हल्ला होता है, जिस में सोई हुई लड़कियों के रात में बाल कट जाते हैं और लड़की बेहोश हो जाती है.

इस साल ‘कोरोना माई’ के बिगड़ने की अफवाह उतरी, बिहार के छपरा, गोपालगंज और सिवान जिले में यह अफवाह फैलाई गई. इस सिलसिले में वीडियो बना कर एंड्रायड मोबाइल फोन से वायरल किया गया. नतीजतन, दलित और निचले तबके की औरतें ‘कोरोना माई’ की पूजा कर रही हैं. लोगों को यकीन है कि इस से बिगड़ी ‘कोरोना माई’ का गुस्सा शांत होगा और इस बीमारी में कमी आएगी.

इस संबंध में एक औरत वीडियो के जरीए एक कहानी बताती है कि एक खेत में 2 औरतें घास काट रही थीं. वहीं बगल में एक गाय घास चर रही थी. कुछ देर के बाद वह गाय एक औरत बन गई. इस के बाद घास काट रही औरतें डर कर भागने लगीं.

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तब गाय से औरत ने कहा, ‘तुम लोग डरो नहीं. हम कोरोना माता हैं. अभी हम नाराज हैं, जिस का ही प्रकोप आजकल कोरोना के रूप में देखा जा रहा है. देश में मेरा प्रचारप्रसार करो और सोमवार और शुक्रवार को मेरी पूजा करो. इस से हम खुश हो जाएंगे. अगर इसे कोई मजाक में लेता है या हंसता है, तो इस का अंजाम बहुत ही बुरा होगा…’

वीडियो में पूजा करने की पूरी विधि भी बताई गई. इस वीडियो के वायरल होते ही कई गांवों में औरतें पूजा करते देखी गईं.

एक तरफ कोरोना के इस संकट से निकलने के लिए पूरी दुनिया में इस का इलाज ढूंढ़ने के लिए वैज्ञानिक रातदिन लगे हुए हैं, वहीं बिहार के गांवों में ‘कोरोना माई’ की पूजा की जा रही है और इस तबके को विश्वास है कि इस से कोरोना जरूर खत्म हो जाएगा. इस दौरान सोशल डिस्टैंसिंग का भी खयाल नहीं रखा जा रहा है. मास्क का भी इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है.

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिस में एक औरत बता रही है कि कोरोना कोई वायरस नहीं, बल्कि देवी का एक रूप है. रजंती देवी, मालती देवी, संगीता देवी जैसी औरतें बताती हैं कि अगर ‘कोरोना माई’ की पूजा की जाएगी तो इन का प्रकोप कम हो जाएगा और देवी खुश हो कर लौट जाएंगी. इस अफवाह ने इतना जोर पकड़ा कि छपरा, गोपालगंज और सिवान से  औरतों की पूजा करने की खबरें आने लगीं. ऐसी औरतें 9 लड्डू, उड़हुल के 9 फूल और 9 लौंग से ‘कोरोना माई’ की पूजा कर रही हैं. औरतें पहले एक फुट गड्ढा खोद रही हैं और उस में 9 जगह सिंदूर लगाया जा रहा है और फिर 9 लड्डू, 9 लौंग और उड़हुल के 9 फूल उस में डाल कर मिट्टी से भर दिया जा रहा है.अगरबती जलाई जा रही है. कहींकहीं तो लड्डू की माँग इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि दुकान में लड्डू तक नहीं मिल रहे हैं.

पहले अफवाह एकदूसरे से बातचीत के जरीए फैलती थी, पर आजकल अफवाहें सोशल मीडिया के जरीए फैलाई जा रही हैं. डिजिटल इंडिया का इस्तेमाल इन अफवाहों को फैलाने में किया जा रहा है. डिजिटल इंडिया पर हम गर्व तो नहीं पर इस तरह की घटनाओं से शर्म ही कर सकते हैं. सरकार और हुक्मरान चाहते तो वीडियो बनाने वाली औरत को गिरफ्तार किया जा सकता था. अफवाह फैलाने के जुर्म में उसे सजा दी जा सकती थी, लेकिन सरकार भी यही चाहती है कि इस देश का निचला तबका इन्हीं चीजों में उलझा रहे, दूसरी समस्याओं की तरफ उस का ध्यान नहीं जाए. पढ़ेलिखे लोग भी इन औरतों को समझा नहीं रहे हैं. इस की वजह से इस अंधविश्वास का रूप और बढ़ता जा रहा है.

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सरकार विज्ञान को बढ़ावा देने का झूठा राग जितना भी अलाप ले, उस का अंतिम हश्र यही होता है कि जनता झाड़फूंक और अंधविश्वास में ही लिप्त हो जाती है. इस कोरोना काल में इन देवीदेवताओं और मंदिरमसजिद से बहुत लोगों का विश्वास जब उठने लगा तो सरकार की तरफ से तत्काल मंदिरों को खोलने का आदेश जारी किया गया. पूरे देश के कई हिस्सों में कोरोना से नजात पाने के लिए हवन और पूजा करने की भी खबरें आ रही हैं. मौलाना लोग नमाज पढ़ कर कोरोना के खत्म होने की दुआ मांग रहे हैं. और ये लोग ही बोलते हैं कि जब पूजापाठ और हवन से ही इस बीमारी से मुक्ति मिल सकती है तो दवा की बात क्यों करते हो? इस देश में लोगों को अंधविश्वास और धार्मिक जाल में उलझा कर देश के हुक्मरान अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने में कामयाब हो रहे हैं.

सामाजिक सरोकारों से जुड़े गालिब साहब ने कहा कि हम जैसा समाज बनाएंगे, वैसा ही उस का नतीजा भी सामने आएगा. वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की तो बात छोड़ ही दीजिए. सरकार द्वारा अंधविश्वास और धार्मिक नफरत फैलाने की साजिश बड़े पैमाने पर लगातार जारी है.

वे लमहे : भाग 2

पिछले अंक में आप ने पढ़ा

राजेश पानी के जहाज पर ट्रेनिंग अफसर था. वह दूर देशों की यात्रा करता था. एक बार वह अपने सफर में आस्ट्रेलिया पहुंचा. वहां उस की मुलाकात 16 साल की लड़की मारिया से हुई. थोड़े ही वक्त में उन की दोस्ती बहुत गहरी हो गई.

अब पढि़ए आगे…

जहाज खुलने ही वाला था, इसलिए राजेश नीचे नहीं जा सका. मारिया तब तक हाथ हिलाती रही, जब तक कि जहाज तट से दूर नहीं चला गया.

जहाज सागर की ऊंची लहरों पर हिचकोले खा रहा था. राजेश के मन में भी उथलपुथल मची थी. वह सोच रहा था कि मारिया से अब मिलना मुमकिन होगा भी या नहीं, क्योंकि मन ही मन वह उसे चाहने लगा था. खैर, डेढ़ महीने बाद आस्ट्रेलिया के अलगअलग बंदरगाहों से होता हुआ जहाज अब वापसी के सफर पर था.

एक दिन राजेश मैलबौर्न के तट पर खड़ा था. वहां उसे 2 दिन रुकना था. पहले दिन शाम को राजेश क्लब गया. वहां उसे हिंदी गाने सुनने को मिले और उन्हीं गानों पर आस्ट्रेलियन लड़की के साथ डांस किया. पर उस का मन सोच रहा था कि कहीं मारिया मिल जाती, तो यहां एकांत में कुछ मन की बात कह सकता था. पर फिलहाल ऐसा नहीं हुआ और वह जहाज पर लौट गया.

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राजेश की शिफ्ट सुबह 4 बजे से ले कर 8 बजे तक की थी, पर जब वह सुबह 8 बजे अपने केबिन में लौटा, तो अंदर भीनीभीनी जानीपहचानी खुशबू का एहसास हुआ. उसे लगा, जैसे मारिया आसपास है.

5 मिनट बाद बाथरूम का दरवाजा खुला, तो राजेश हैरान रह गया. मारिया उस के सामने खड़ी थी. राजेश को हैरान होते देख मारिया बोली,  ‘‘क्या हुआ? कहां खो गए? मुझे पहले नहीं देखा क्या?’’

मारिया ने सवालों की झड़ी लगा दी. इस से पहले कि राजेश कुछ बोलता, मारिया ही बोली,  ‘‘न जाने क्यों मेरा मन तुम से मिलने को हो रहा था.’’

राजेश बोला, ‘‘तुम्हें शायद यकीन न हो, पर एडिलेड से विदा होने के बाद से ही मेरे मन में भी अजब सी तड़प हो रही थी और कल रात तो यहां क्लब में मेरी आंखें तुम्हें ही ढूंढ़ रही थीं, पर अचानक तुम यहां…?’’

मारिया बोली,  ‘‘तुम शायद भूल गए हो. मैं ने कहा था कि मेरी आंटी यहां रहती हैं और वे बीमार हैं. सो, यहां चली आई. पेपर में पढ़ा कि तुम्हारा जहाज यहां लगा है, तो सुबहसुबह भागी आई.’’

राजेश बोला, ‘‘बहुत अच्छा किया.’’

‘‘मुझे तुम पर पूरा भरोसा है. पर मैं यहां इसलिए आई हूं कि कुछ खानेपीने को दोगे?’’ मारिया बोली.

राजेश ने फोन पर 2 लोगों के लिए नाश्ता केबिन में मंगवा लिया और उस से बोला, ‘‘मैं फ्रैश हो कर आ रहा हूं, तब तक कौफी मेकर से कौफी निकालो और कुछ बिसकुट ले लो. आधा घंटे के अंदर नाश्ता आ जाएगा.’’

15 मिनट बाद राजेश फ्रैश हो कर निकला, तो मारिया बोली, ‘‘मुझे भी एक तौलिया देना. मैं भी फ्रैश हो लेती हूं.’’

राजेश ने कहा, ‘‘वहां वार्डरोब में रखा है, ले लो.’’

मारिया तौलिया ले कर बाथरूम में चली गई और जब थोड़ी देर बाद निकली, तो एक बार फिर राजेश की आंखें हैरानी से उसे कुछ देर तक देखती रह गईं. तौलिया उस के गोरे बदन को ढकने में नाकाम हो रहा था.

राजेश के जेहन में मारिया की मां की बात कि ‘उस का पति भारतीय होगा’ बैठ गई थी, जो बारबार उसे झकझोर कर रख देती थी.तभी मारिया ने कहा, ‘‘कहां खो गए? अब तुम 2 मिनट के लिए बाथरूम में जाओ, तब तक मैं कपड़े बदल लेती हूं.’’

इतना बोल कर मारिया छोटा सा बैग, जो वह अपने साथ लाई थी, उस में से अपनी ड्रैस निकाल कर बदली और राजेश को आवाज दे कर बुलाया. तब तक नाश्ता आ चुका था. दोनों नाश्ता करने लगे.

‘‘आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो. मुझे तो कुछकुछ होने लगा है,’’ राजेश बोला.

‘‘अरे वाह, गजब तो तुम लग रहे हो. इस के पहले तो तुम्हें बोलना भी नहीं आता था…’’ बोलते हुए मारिया ने उस के करीब खिसक कर उस का हाथ  अपने हाथ में ले लिया और कहा, ‘‘यहां के आगे जहाज का क्या प्रोग्राम है? मैं तो बस इसी बैग में 2 कपड़े ले कर घर से निकल पड़ी थी. अब मुझे एडिलेड अपने घर ही जाना है. अपने जहाज पर ले चलो न, मैं ने अभी तक जहाज पर सफर नहीं किया है, बस एक दिन का तो सफर है,’’ बोलते हुए मारिया उस से लिपट गई थी.

राजेश ने हलके से उस की पीठ सहलाते हुए कहा,  ‘‘तुम्हारा साथ तो मुझे भी बहुत अच्छा लगता है, पर एडिलेड तक तुम्हारा जहाज से जाना बहुत मुश्किल है.

‘‘तुम्हें इस की इजाजत नहीं मिलेगी. वैसे भी हम पहले जीलांग जा रहे हैं, वहां कुछ घंटे रुक कर फिर एडिलेड जाना होगा.’’

‘‘जीलांग तो बिलकुल पास ही है. करीब सवा घंटे की दूरी है. वहीं तक मुझे ले चलो न, फिर मैं ट्रेन पकड़ कर अपने घर चली जाऊंगी,’’ मारिया बोली.

राजेश उस का हाथ पकड़ कर बोला, ‘‘इस के लिए भी मुझे इजाजत लेनी होगी. मैं बौस से बात करूंगा. पर अभी उठो. चलो, डैक पर मौसम अच्छा है. बाद में तुम्हें इंजनरूम दिखाता हूं. खाना केबिन में मंगा लेते हैं.’’

और दोनों बाहर डैक पर दूर एक किनारे खड़े हो कर बातें करने लगे. कुछ देर बाद इंजनरूम घुमा कर मारिया को केबिन में बैठा कर राजेश बोला, ‘‘मैं थोड़ी देर में आता हूं.’’

राजेश जल्द ही अपने केबिन में लौट आया और मुसकराते हुए बोला, ‘‘तुम्हारे लिए खुशखबरी है. तुम जीलांग तक हमारे साथ चल सकोगी. दोपहर 2 बजे हम रवाना होंगे और 4 बजे से पहले ही वहां पहुंच जाएंगे. तब तक हम यहीं आराम करते हैं. तुम बैड पर जाओ, मैं यहीं सोफे पर रहूंगा.’’

इस के बाद वे दोनों अपनीअपनी जगहों पर चले गए. पर थोड़ी देर में मारिया बैड से उठ खड़ी हुई, रेडियो औन किया और कहा,  ‘‘चलो, एक ड्रिंक बनाते हैं, लंच के पहले.’’

‘‘पर तुम तो जानती हो कि मैं नहीं पीता,’’ राजेश बोला, ‘‘तो मैं कौन सा पीती हूं, बस आधा गिलास लेते हैं,’’ फिर दोनों ने बीयर पी.

मारिया ने राजेश का हाथ पकड़ कर कहा  ‘‘चलो, डांस हो जाए. रेडियो पर अच्छी धुन बज रही है.’’

राजेश बोला, ‘‘पर, मुझे तो डांस आता नहीं.’’

वह पलट कर बोली,  ‘‘इसीलिए तो कह रही हूं. कुछ बेसिक स्टैप्स जान लो. तुम्हारे लिए अच्छा होगा. आगे काम आएगा. सेलर्स के लिए डांस जरूरी है.’’

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दोनों थोड़ी देर तक डांस करते रहे और बीचबीच में बातें भी. डांस के दौरान दोनों एकदूसरे की कमर में हाथ डाले हुए कभी इतने करीब होते कि तनमन में एक सिहरन दौड़ जाती और पीड़ा सी उठती, जिसे दोनों ने एकदूसरे की आंखों में देखा था.

फिर थोड़ी देर बाद लंच आया, जो दोनों ने साथ लिया. दोनों ने कुछ देर तक केबिन में आराम किया. थोड़ी देर में ही जहाज खुलने वाला था, तभी मारिया बोली, ‘‘चलो, बाहर डैक पर चलते हैं. मैं जहाज को सागर की लहरों पर चलते हुए देखना चाहती हूं.’’

राजेश बोला,  ‘‘5 मिनट बैठो. तुम से कुछ बातें करनी हैं. अभी जहाज के खुलने में कुछ समय है,’’ और वह आगे बोला, ‘‘तुम्हारी मां ने बताया था कि तुम्हारा पति कोई भारतीय ही होगा, तो फिर मैं क्या बुरा हूं?’’

‘‘मां ने सही कहा था. तुम तो मेरे अनुमान से भी अच्छे हो, पर तुम्हीं सोचो कि अभी मेरी उम्र शादी की है क्या? अभी तो मैं 17 साल की भी नहीं हुई हूं, पहले कालेज की पढ़ाई पूरी कर लूं. भारतीय पति का इंतजार जरूर करूंगी.

‘‘हो सकता है कि वह तुम ही हो. पर यह पता नहीं कि तुम कहां होगे. जब लौटते समय एडिलेड आओ, तब मैं वहां नहीं रहूं. उस समय शायद मैं पढ़ाई के सिलसिले में सिडनी में रहूं और तुम से मिल न सकूं. मेरे यहां आने की एक वजह यह भी है,’’ मारिया एकसाथ बिना रुके बोली.

‘‘चलो, मुझे यह जान कर खुशी हुई कि तुम भारतीय पति का इंतजार करोगी. तो एक चांस मैं भी ले सकता हूं,’’ राजेश बोला.

मारिया ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘अच्छा रहेगा, टेक ए चांस. फिलहाल तो एक अच्छे दोस्त की तरह दोनों चिट्ठी लिखते रहेंगे.’’

अब दोनों डैक पर आ कर जहाज का खुलना देखते रहे, जब तक वह बीच सागर में नहीं पहुंचा. अब फुल स्पीड में लहरों पर जहाज हिचकोले खा रहा था.मारिया को संतुलन बनाए रखने में कुछ दिक्कत हो रही थी और वह राजेश को जोर से पकड़ लेती.

कुछ देर बाद मारिया को थकान महसूस हुई, तो दोनों वापस केबिन में आ गए. दोनों खामोश थे और मारिया सोफे पर लेटी थी. तब राजेश ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा, ‘‘अब तो जीलांग आने ही वाला है. उठो, तैयार हो जाओ. तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है, इसे रख लो,’’ और उस ने एक पर्स पकड़ा दिया.

मारिया ने पर्स खोला, तो बहुत खुश हुई. उस में उन देशों के सिक्के और नोट थे, जहां से हो कर उस का जहाज आया था. उस ने राजेश को भी सोफे पर बैठाते हुए अलसाई सी आवाज में कहा  ‘‘ठीक है, जल्दी क्या है? तैयारी कैसी? बस, एक किलो का बैग ही तो है. शिप को तट पर लगने दो,’’

वे दोनों केबिन की खिड़की से जहाज का तट पर लगना देख रहे थे. जब जहाज लगा, तो अपना बैग उठाया, राजेश को गले लगाया और नीचे उतरी. राजेश भी छोड़ने आया. आखिर में दोनों ने हाथ मिलाया.मारिया के जाने के बाद राजेश जहाज पर चला गया. जहाज वापस करीब एक महीने बाद भारत पहुंचा.

राजेश की आस्ट्रेलिया में मारिया से आखिरी मुलाकात थी. भारत आने पर उस का तबादला दूसरे रूट के जहाज पर हुआ. इस की सूचना उसे दे रखी थी, ताकि मारिया उस के जहाज के पते पर ही चिट्ठी लिखे.

तकरीबन एक साल बाद राजेश ने यह नौकरी छोड़ दी, क्योंकि उस का मन नहीं लग रहा था और उस के मातापिता की भी यही इच्छा थी.राजेश का मन तो मारिया से मिलने के लिए बेचैन रहता था, पर उस के मातापिता उस की शादी करना चाहते थे.

राजेश कुछ महीने तक तो अच्छी नौकरी मिलने का बहाना बना कर टालता रहा. पर अब तो उसे अच्छी नौकरी भी मिल चुकी थी. राजेश अपने मातापिता का कहना टाल न सका.

इस बीच राजेश मारिया को चिट्ठी लिखता रहा और मारिया भी राजेश की चिट्ठियों का जवाब देती रही. यहां तक कि राजेश ने अपनी शादी की सूचना भी दे रखी थी. मारिया ने उसे बधाई दी थी और न आने के लिए माफी भी मांगी थी.

कुछ दिनों बाद उन का पत्राचार भी बंद हो गया. राजेश भी अपनी शादी और नौकरी दोनों से संतुष्ट था. अपनी शादी के तकरीबन ढाई साल बाद उसे पत्नी के साथ आगरा जाने का मौका मिला. दोनों ने ताजमहल में फोटो खिंचवाए. फोटोग्राफर ने एक घंटे बाद आ कर फोटो लेने को कहा.

जब वे अपना फोटो लेने पहुंचे, तो फोटोग्राफर एक जोड़े का फोटो ले रहा था, इसलिए वे थोड़ी दूर ही रुक गए थे. जब वे फोटोग्राफर के निकट आए, तो राजेश को अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था. उस ने पत्नी को बताया, ‘‘यह तो मारिया है और सचमुच इंडियन पति ले आई है.’’

इस बीच मारिया फोटोग्राफर से बात करने में बिजी थी, इसलिए वह उन को नहीं देख सकी थी.राजेश ही उस के पास जा कर बोला  ‘‘मारिया, तुम यहां…’’

मारिया ने नजर उठा कर देखा, तो राजेश को गले लगाया और कहा, ‘‘कितनी हैरानी हो रही है. मैं तो सोच रही थी कि यहीं कहीं तुम मिल जाते. हम यहां हनीमून पर हैं.’’राजेश ने पत्नी से उस का परिचय कराया और मारिया ने भी अपने पति को बुला कर परिचय कराया. फिर चारों ने एक कैफे में बैठ कर कौफी पी.

राजेश ने चुटकी लेते हुए कहा, ‘‘तो आखिर तुम ने भारतीय दूल्हा चुन ही लिया.’’

मारिया के पति ने भी चुटकी लेते हुए कहा, ‘‘इस ने तुम्हारा बहुत इंतजार किया था. तुम न मिले, तो मुझे ही मुरगा बना लिया.’’

‘‘मैं तो आस्ट्रेलिया में ही सैटल हूं, इसे ढूंढ़ने में दिक्कत नहीं हुई.’’

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यह सुन कर चारों एकसाथ हंस पड़े.मारिया ने बताया कि आज रात ही वे आस्ट्रेलिया लौट रहे हैं. चारों ने एक साथ होटल में डिनर किया. राजेश ने पत्नी के साथ एयरपोर्ट जा कर मारिया को विदा किया.

मारिया ने जाते हुए कहा, ‘‘तुम दोनों भी जल्दी आस्ट्रेलिया आओ. मुझे बहुत खुशी होगी.’’

मारिया के पति ने कहा,  ‘‘मुझे भी खुशी होगी.’’इस के बाद वे दोनों हाथ हिलाते हुए हवाईजहाज की ओर बढ़ गए.

जानिये इस Lockdown में क्या कर रहीं है लोक गायिका मैथिली ठाकुर

सोशल मीडिया को जरिया बना कर बेहद ही कम उम्र में लोक गायन में छा जानें वाली मैथिली ठाकुर (Maithili Thakur) को आज देश का बच्चा –बच्चा जानता हैं. मैथिली नें देश के लगभग सभी बड़े मंचों और कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुति दी है. मैथिली जब मंच पर लोक गायन कर रहीं होती हैं तो लोग मंत्रमुग्ध से हो उनके गानों में खो जाते हैं, या यह कह लिया जाए की उनके गाने की शैली के लोग मुरीद हैं.

मैथिली ठाकुर की आज जो भी पहचान है वह उन्हें केवल सोशल मीडिया (Social Media) के जरिये मिली है. शुरूआती दौर में मैथिली ठाकुर और उनके भाई मैथिली के गाये गानों को अपने मोबाइल से रिकार्ड कर फेसबुक पर अपलोड करते थे. जिस पर उनके वीडियोज को पसंद करनें वालों की तादाद इस कदर बढ़ी की आज मैथिली ठाकुर (Maithili Thakur), और उनके दोनों भाइयों  ऋषभ ठाकुर (Rishabh Thakur) व  अयाची ठाकुर (Ayachi Thakur) के लाखों फालोवर  है. मैथिली के साथ उनके दोनों भाई ऋषभ ठाकुर (Rishabh Thakur) तबले पर और ठाकुर (Ayachi Thakur) ताली व कोरस के जरिये सपोर्ट करते हैं. इन तीनों की जोड़ी ही मैथिली के सफलता का कारण हैं.

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लौक डाउन (Lockdown) के पहले मैथिली ठाकुर का सेड्यूल इतना व्यस्त रहता था की वह अपने कार्यक्रमों के सिलसिले में अक्सर बाहर ही रहा करतीं थी. लेकिन इन दिनों जब लौक डाउन है तो निश्चित ही मैथिली के शो पर लगाम लग गया है. ऐसे में मैथिली ठाकुर फिर से घर बैठ सोसल मीडिया के जरिये लोगों का अपने लोक गायन के जरिये मनोरंजन करती नजर आ रहीं हैं. इस दौरान उनकी इंटरनेट लोकप्रियता और भी रहीं हैं. लौक डाउन (Lockdown) के दौरान मैथिली द्वारा अपलोड किये जा रहें वीडियोज उनके यूट्यूब (YouTube), फेसबुक (Facebook) और इन्स्टाग्राम (Instagram)पर लाखों बार देखें जा रहें हैं. वह हर रोज एक से दो वीडियोज अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर अपलोड कर रहीं हैं.

इस लौक डाउन में मैथिली लोक गायन के साथ ही भजन, गजल, कव्वाली, सहित तमाम विधाओं से जुड़े गीत अपलोड कर रहीं हैं जिस पर उन्हें काफी तारीफ भी मिल रही हैं. उनके द्वारा सोशल मीडिया और यूट्यूब पर अपलोड किये जा रहे इन वीडियोज पर लाखों लाइक्स और ब्युअर्स मिल रहें हैं.

कोरोना पर गीत के जरिये जागरूक कर बटोर चुकीं हैं सुर्खियां

दूसरे चर्चित गायकों की तरह मैथिली ठाकुर नें भी जानलेवा कोरोना वायरस पर बना पैरोडी सॉंग गाकर लोगों को कोरोना से बचाव के लिए जागरूक किया. यह गाना उन्होंने फिल्म ‘कुर्बानी’ के ‘लैला ओ लैला’ की तर्ज पर गाया. 46 सेकंड के इस विडियो में अंत में मैथिली ने लोगों से सुरक्षित रहने और घर पर रहने की सलाह भी दी.

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कोरोना पर मैथली का गाया –

इन्स्टाग्राम पर अपलोड किये गए वीडियोज के लिंक-

 

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New Video on Rishav’s YouTube Channel. Link in my Story.

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Is Shaan-E-Karam ka Kya kehna. Full Video on YouTube.🙏 @rishavthakur.official @ayachithakur

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Ekla cholo re ❤️ . #maithilians

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बताब पहुना, फेर कहिया ले अइब 🙏 . . #maithilians #maithilithakur

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खतरनाक मंसूबे की चपेट में नीलम

4अप्रैल, 2019 गुरुवार का दिन था. सुबह के लगभग साढ़े 4 बजे थे. सिपाही नीलम शर्मा की सुबह 5 बजे से दोपहर एक बजे तक मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर ड्यूटी थी. नीलम ने तैयार हो कर अपना लंच बौक्स पिट्ठू बैग में रखा और दामोदरपुरा के मुख्यद्वार पर प्याऊ के पास पहुंच गई. यहीं पर रोजाना उसे लेने के लिए पुलिस की बस आती थी. प्याऊ के पास खड़ी हो कर वह स्टाफ की बस का इंतजार करने लगी. बस आने के लगभग 5 मिनट पहले एक कार नीलम शर्मा से लगभग 200 मीटर की दूरी पर आ कर रुकी. उस समय नीलम का ध्यान अपनी बस के आने की तरफ था. अचानक आगे बढ़ी कार नीलम के पास आई. झटके से रुकी कार से उतर कर एक युवक तेजी से नीलम की ओर बढ़ा. जबकि कार में बैठे अन्य युवकों ने कार स्टार्ट रखी.

कार से उतरे युवक ने नीलम से कुछ बात की, इस के बाद उस ने नीलम के ऊपर तेजाब फेंक दिया. नीलम ने अपना बैग उस के मुंह पर मारा तो वह फुरती से कार में जा कर बैठ गया. कार वहां से कुछ दूर जा कर खड़ी हो गई.

अचानक हुए एसिड अटैक से झुलसी 26 वर्षीय नीलम घबरा गई. वह तेजाब की जलन से तड़पने लगी. उस ने शोर मचाया. मदद के लिए वह इधरउधर भागने लगी. जो भी उसे मिला, उस ने उसी से मदद की गुहार लगाई.

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इस बीच अखबार के एक हौकर ने महिला सिपाही को बचाने का प्रयास किया. तभी हमलावरों ने उन दोनों पर कार चढ़ाने की कोशिश की. लेकिन हौकर महिला सिपाही को ले कर एक तरफ हट गया, जिस से दोनों बच गए. हौकर ने उस कार पर पत्थर भी फेंके पर कार रुकी नहीं, तेज गति से चली गई.

रोतेबिलखते वह सिपाही एक दुकान के आगे गिर गई और दर्द की वजह से चीखने लगी. तेजाब से नीलम के कपड़े भी जल गए थे. यह देख दुकानदार ने मौर्निंग वाक पर निकली महिलाओं को बुलाया और उन की चुन्नी से नीलम को ढंका. उसी समय किसी ने इस घटना की जानकारी फोन द्वारा पुलिस को दे दी.

नीलम ने किसी तरह अपनी सहकर्मी सिपाही नीतू को फोन कर दिया था. थोड़ी देर में पुलिस मौके पर पहुंच गई और नीलम को जिला अस्पताल में भरती करा दिया.

जानकारी मिलते ही एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज, एसपी (सिटी) राजेश कुमार सिंह, एसपी (क्राइम) अशोक कुमार मीणा, एसपी (सुरक्षा) ज्ञानेंद्र कुमार सिंह भी अस्पताल पहुंच गए. फोरैंसिक टीम ने भी घटनास्थल पर पहुंच कर साक्ष्य जुटाए. यह घटना विश्वप्रसिद्ध धार्मिक नगरी मथुरा में घटी थी.

नीलम पिछले एक साल से थाना सदर बाजार क्षेत्र के दामोदरपुरा में प्रधान सुरेंद्र सिंह के यहां अपनी सहकर्मी नीतू के साथ रह रही थी. नीलम के मकान मालिक सुरेंद्र सिंह भी नीतू के साथ अस्पताल पहुंच गए.

महिला सिपाही नीलम पर एसिड अटैक की घटना से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. पूछताछ में नीलम ने पुलिस को बताया कि इस वारदात को संजय नाम के युवक ने अपने साथियों के साथ अंजाम दिया था.

वह संजय को पहले से जानती थी. नीलम ने सदर बाजार थाने में संजय सिंह उर्फ बिट्टू निवासी नेमताबाद, खुर्जा (बुलंदशहर) व सोनू सहित 4 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी. भादंवि की धारा 326(ए), 332 व 506 के तहत मुकदमा दर्ज कर पुलिस हमलावरों की तलाश में जुट गई.

नीलम की हालत थी नाजुक

जिला अस्पताल के डाक्टरों ने बताया कि नीलम तेजाब से लगभग 45 फीसदी झुलस गई है. एसिड से उस का चेहरा, एक आंख, हाथ व शरीर के अन्य हिस्से जल गए थे. नीलम की नाजुक हालत को देखते हुए उसी दिन शाम को उसे आगरा के सिकंदरा क्षेत्र स्थित सिनर्जी अस्पताल रेफर कर दिया गया. एसपी (सिटी) राजेश कुमार सिंह खुद उसे ले कर सिनर्जी अस्पताल में भरती कराने पहुंचे.

सिनर्जी अस्पताल के डाक्टर नीलम के इलाज में जुट गए. उन्होंने बताया कि नीलम की हालत स्थिर बनी हुई है. जब नीलम के घर वालों को बेटी के साथ घटी दिल दहलाने वाली घटना की जानकारी मिली तो उन के होश उड़ गए. वे भी सीधे सिनर्जी अस्पताल पहुंच गए.

आगरा के सिनर्जी अस्पताल में भरती नीलम इस हादसे से बेहद डरी हुई थी. कहने को अस्पताल में पर्याप्त सुरक्षा लगाई गई थी लेकिन पीडि़ता के परिजनों ने पुलिस अधिकारियों से और कड़ी सुरक्षा की मांग की. उन्हें डर था कि फरार संजय उसे जिंदा नहीं छोड़ेगा.

इस पर एसएसपी ने पीडि़ता व उस के घर वालों को हरसंभव सुरक्षा देने का वायदा किया. घर वालों के अलावा अन्य किसी को भी अस्पताल में पीडि़ता से मिलने पर रोक लगा दी गई.

महिला सिपाही पर एसिड अटैक की यह दुस्साहसिक घटना पुलिस के लिए सिरदर्द बन गई थी. हर कोई पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा था. इलैक्ट्रौनिक और प्रिंट मीडिया में यह खबर सुर्खियां बन गई थीं. इस से पुलिस की किरकिरी हो रही थी.

अभियुक्तों के फरार होने को ले कर उस दिन सोशल मीडिया पर भी सवाल खड़े होते रहे. लोगों का कहना था कि जब पुलिस वाले ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो भला आम आदमी का क्या होगा.

उत्तर प्रदेश पुलिस के मुखिया ओ.पी. सिंह ने मथुरा के एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज से महिला कांस्टेबल नीलम शर्मा पर हुए एसिड अटैक की पूरी जानकारी ली. उन्होंने निर्देश दिए कि हमलावरों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए. इस एसिड अटैक के लिए जिम्मेदार कहीं भी हों, उन्हें ढूंढ निकाला जाए.

मथुरा में पुलिसकर्मी नीलम पर हुए एसिड अटैक के बाद महिला संगठनों के साथसाथ छात्राओं ने भी आक्रोश व्यक्त किया. वात्सल्य पब्लिक स्कूल, राधाकुंड, चरकुला ग्लोबल पब्लिक स्कूल और गौड़ शिक्षा निकेतन में शिक्षिकाओं एवं छात्रछात्राओं ने पीडि़ता के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की.

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उन्होंने एसिड फेंकने वाले दोषी लोगों को फांसी देने की मांग की. वहीं आगरा के सिनर्जी अस्पताल में भरती नीलम को देखने के लिए महिला शांति सेना की सदस्याएं पहुंची. संरक्षिका कुंदनिका शर्मा ने आरोपियों को शीघ्र पकड़ने व कड़ी सजा दिलाने की मांग की.

पकड़ा गया मुख्य आरोपी

एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने आरोपियों को पकड़ने के लिए अलगअलग थानों के तेजतर्रार पुलिस अफसरों की 5 पुलिस टीमें बनाईं. ये टीमें मथुरा के अलावा खुर्जा और बुलंदशहर जा कर आरोपियों को तलाशने लगीं. इस बीच पुलिस को हमलावरों की कार नंबर डीएल 2पीए8381 घटनास्थल से कुछ दूर लावारिस हालत में खड़ी मिली. कार पुलिस ने जब्त कर ली. पुलिस टीम ने अगले दिन 5 अप्रैल को शाम 5 बजे मुखबिर की सूचना पर एक आरोपी सोनू को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उस ने बताया कि नीलम शर्मा के ऊपर तेजाब संजय सिंह ने डाला था. सोनू की निशानदेही पर रात करीब 11 बजे घटना के मुख्य आरोपी संजय सिंह को मुठभेड़ के बाद यमुनापार इलाके के राया रोड स्थित राधे कोल्डस्टोरेज के पास से गिरफ्तार कर लिया गया.

मुठभेड़ के दौरान संजय के बाएं पैर में गोली लग गई थी. पुलिस ने इलाज के लिए उसे अस्पताल में भरती करा दिया था. संजय के कब्जे से पुलिस ने एक तमंचा और एक बाइक बरामद की. पुलिस ने संजय सिंह से जब सख्ती से पूछताछ की तो सिपाही नीलम शर्मा पर एसिड अटैक करने की जो कहानी सामने आई, वह प्यार की चाशनी में डूबी हुई निकली—

नीलम शर्मा मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला बुलंदशहर की कोतवाली शिकारपुर के गांव आंचरू कलां की रहने वाली थी. उस के पिता का नाम सुंदरलाल शर्मा था. जबकि मुख्य आरोपी संजय सिंह खुर्जा में एक कंप्यूटर सेंटर चलाता था. जब नीलम पढ़ाई कर रही थी, तब उस का संजय सिंह की दुकान पर आनाजाना लगा रहता था.

संजय और नीलम की मुलाकात कंप्यूटर सेंटर में हुई जो बाद में दोस्ती में बदल गई थी. दोस्त बन जाने के बाद दोनों फोन पर भी बातें करने लगे. दोस्ती बढ़ी तो संजय नीलम को एकतरफा प्यार करने लगा, जबकि नीलम

उसे केवल अपना दोस्त ही समझती थी.

एक दिन संजय ने अपने मन की बात नीलम के सामने जाहिर कर दी तो नीलम ने उसे झिड़क दिया और उस से दूरी बना ली. इस पर संजय ने इस बारे में नीलम के घर वालों से बात की. चूंकि संजय उन की बिरादरी का नहीं था, इसलिए नीलम के पिता सुंदरलाल शर्मा ने नीलम की शादी संजय से करने को मना कर दिया.

इस के बाद नीलम की सन 2016 में उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के पद पर नौकरी लग गई. नौकरी लगने के बाद भी संजय ने उसे परेशान करना बंद नहीं किया. और कोई रास्ता न देख नीलम ने अपना फोन नंबर बदल दिया. लेकिन इस के बावजूद संजय ने उसे ढूंढ निकाला और परेशान करने लगा.

संजय लगातार उस पर शादी के लिए दबाव डाल रहा था. इस से परेशान हो कर नीलम के घर वालों ने उस की शादी कहीं दूसरी जगह तय कर दी.यह बात संजय को बुरी लगी. उसे लगने लगा कि उस की प्रेमिका अब किसी और की हो जाएगी.

सन 2017 में नीलम की पोस्टिंग मथुरा में हो गई. कुछ दिनों वह पुलिस लाइन में रही, इस के बाद सन 2018 में उस की तैनाती श्रीकृष्ण जन्मस्थली की सुरक्षा में हो गई. इस पर नीलम मथुरा के दामोदरपुरा में प्रधान सुरेंद्र सिंह के यहां किराए पर रहने लगी. उस ने अपनी बैचमेट और सहेली नीतू को भी उस कमरे में अपने साथ रख लिया था.

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पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में संजय सिंह ने बताया कि वह नीलम से प्यार करता था. उस से उस की पिछले 10 सालों से जानपहचान थी. वह उस से शादी करना चाहता था, लेकिन उस ने बात तक करनी बंद कर दी थी. जब उसे पता चला कि नीलम की शादी कहीं और तय हो गई है, तब उस ने तय कर लिया था कि वह अपनी प्रेमिका को किसी और की हरगिज नहीं होने देगा.

खतरनाक इरादे

उस की शादी रोकने के लिए उस ने नीलम के ऊपर तेजाब डालने का फैसला कर लिया. इस काम के लिए उस ने अपने दोस्तों हिमांशु ठाकुर, बौबी, किशन शर्मा और सोनू को भी तैयार कर लिया. ये सब उस की प्रेम कहानी को जानते थे.

सब से पहले इन लोगों ने नीलम के आनेजाने के मार्ग की रेकी की. इस से पता लग गया कि उस की ड्यूटी श्रीकृष्ण जन्मस्थली की सुरक्षा पर लगी है और वह सुबह पैदल ही दामोदरपुरा के प्याऊ पर पहुंचती है. वहां से वह पुलिस की बस में बैठ कर जाती है.

उन्होंने प्याऊ के पास ही योजना को अंजाम देने का फैसला कर लिया. यह भी तय कर लिया था कि यदि नीलम बच गई तो उसे गोली मार देंगे. और अगर उस के साथ उस की सहेली नीतू हुई तो उसे भी जिंदा नहीं छोड़ेंगे.

सभी ने बौबी की कार से घटना को अंजाम देने की बात तय कर ली. योजना बनाने के बाद संजय ने खुर्जा में पाहसू रोड स्थित दुकानदार पुनीत शर्मा के यहां से तेजाब खरीद लिया. फिर 4 अप्रैल, 2019 की सुबह उन्होंने वारदात को अंजाम दे दिया.

संजय की निशानदेही पर पुलिस ने तेजाब विक्रेता पुनीत शर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया. इस के बाद पुलिस ने संजय सिंह, सोनू और पुनीत शर्मा को कोर्ट में पेश कर संजय का रिमांड मांगा. गोली लगने की वजह से संजय अस्पताल में भरती था. अदालत ने पुलिस की मांग मंजूर कर सोनू और पुनीत शर्मा को जेल भेज दिया और गोली से घायल संजय को पुलिस कस्टडी में सौंप दिया.पुलिस को अभी कई आरोपी गिरफ्तार करने थे. संजय की निशानदेही पर 6 अप्रैल को पुलिस ने बौबी और किशन शर्मा को गोकुल बैराज मोड़ से गिरफ्तार कर लिया. शाम 6 बजे के करीब वे दोनों मथुरा आए हुए थे. पुलिस के अनुसार, उन का अपराध इसलिए भी गंभीर हो गया क्योंकि उन्होंने संजय को रोकने के बजाए उकसाया था.

पुलिस ने दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रविवार को जेल भेज दिया. एसिड अटैक के अब तक 5 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके थे. अभी एक आरोपी हिमांशु ठाकुर पुलिस की गिरफ्त से दूर था. पुलिस को 9 अप्रैल, 2019 को पता चला कि फरार आरोपी हिमांशु मथुरा आ रहा है. इस के बाद स्वाट टीम प्रभारी राजीव कुमार, थाना सदर बाजार प्रभारी लोकेश भाटी और छाता कोतवाली प्रभारी हरवेंद्र मिश्रा ने घेराबंदी कर के गोकुल बैराज पर उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह फायर कर के बाइक से भागने लगा. उसे पकड़ने के लिए पुलिस ने भी गोली चलाई. गोली उस की दाहिनी टांग में लगी थी. घायल आरोपी वहीं गिर गया. इस के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेने के बाद जिला अस्पताल में भरती करा दिया.

अपराध में हिमांशु भी था बराबर का हिस्सेदार

हिमांशु की सीधे हाथ की अंगुलियां तेजाब से जल गई थीं. पुलिस ने उस के पास से बाइक व तमंचा भी बरामद कर लिया. पूछताछ में उस से काम की कई बातें पता चलीं. हिमांशु को भी अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

उधर मुख्य आरोपी संजय सिंह जिस की बाईं टांग में गोली लगी थी, उस का औपरेशन किया गया. उसे 2 यूनिट खून भी चढ़ाया गया.

प्रैस कौन्फ्रैंस में एसएसपी ने बताया कि आरोपी संजय ने जबरन शादी के लिए इस घटना को अंजाम दिया था. महिला पुलिसकर्मी पर एसिड अटैक की दिल दहला देने वाली घटना में शामिल सभी 6 आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए.

इन में से 4 को जेल भेज दिया गया, जबकि 2 घायल आरोपी अस्पताल में भरती हैं, जहां उन का उपचार चल रहा है. सभी पर एनएसए भी लगाया जाएगा. एसिड अटैक से घायल महिला पुलिसकर्मी नीलम की हरसंभव सहायता की जाएगी.

कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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