लेखक- निखिल अग्रवाल

भारत में भले ही आजादी के बाद राजशाही खत्म हो गई, लेकिन दुनिया के कई देशों में आज भीराजशाही कायम है. थाईलैंड भी ऐसा ही देश है. वहां चुनावों के बावजूद राजशाही की ताकत ज्यादा है. थाईलैंड में राजा को पिता के समान माना जाता है. थाईलैंड और वहां की राजधानी बैंकाक का नाम आते ही जेहन में रंगीनियत और मस्ती का चित्र उभरने लगता है. यह देश दुनिया भर में पर्यटन का सब से बड़ा केंद्र है, साथ ही सैक्स टूरिज्म के लिए भी मशहूर है. यहां की रंगीन रातों के जलवे अलग ही होते हैं, जिन की वजह से दुनियाभर के सैलानी खिंचे चले आते हैं. यहां का पर्यटन और नाइट लाइफ  जितनी रंगीन होती हैं, उतनी ही रंगीनियत से भरी है वहां के राजा महा वजीरालौंगकोर्न की कहानी.

मौजूदा राजा महा वजीरालौंगकोर्न की अंतिम प्रेम कहानी प्रेम कहानी 10 साल पुरानी है. इसी प्रेम कहानी के चलते राजा ने बीती एक मई को सुथिदा तिदजई से शादी कर पूरी दुनिया को चौंका दिया. खास बात यह है कि राजा वजीरालौंगकोर्न 66 साल के हैं और सुथिदा 40 साल की. दोनों की उम्र में 26 साल का अंतर है. सुथिदा इस से पहले राजा की बौडीगार्ड थीं. लेकिन शादी के बाद उन्हें थाईलैंड की क्वीन का दरजा मिल गया. राजा वजीरालौंगकोर्न की यह चौथी शादी है. इस से पहले वे 3 शादियां रचा चुके हैं. तीनों पत्नियों से उन का तलाक हो चुका है. तलाकशुदा पत्नियों से राजा के 7 बच्चे हैं.

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3 जून 1978 को बैंकाक में जन्मी सुथिदा तिदजई एसंपशन यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएट हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में कम्युनिकेशन आर्ट्स की डिग्री हासिल की थी. पढ़ाई पूरी करने के बाद सुथिदा ने थाई एयरवेज में फ्लाइट अटेंडेंट के रूप में नौकरी शुरू की. कहा जाता है कि थाईलैंड के राजकुमार वजीरालौंगकोर्न ने सुथिदा को किसी सफर के दौरान देखा था और वे उन पर मोहित हो गए थे. हालांकि उस समय तक राजकुमार के अपनी तीसरी रानी सिरीरास्म सुवादे से अच्छे संबंध थे.

राजा ने धीरेधीरे बढ़ाया अपने प्यार को

माना जाता है कि राजकुमार वजीरालौंगकोर्न के कहने पर 5 फुट 4 इंच लंबी सुथिदा ने थाई एयरवेज की नौकरी छोड़ दी और 14 मई 2010 में रौयल थाई आर्मी में सेकंड लेफ्टिनेंट के पद पर नई नौकरी जौइन कर ली. वजीरालौंगकोर्न के कारण सुथिदा को जल्दीजल्दी पदोन्नतियां मिलने लगीं.

नवंबर 2010 में उन्हें फर्स्ट लेफ्टिनेंट बना दिया गया. एक अप्रैल 2011 को वे कैप्टन और एक अक्तूबर 2011 को मेजर बन गईं. 6 महीने के अंतराल में इस के अगले साल ही उन्हें लेफ्टिनेंट कर्नल और कर्नल के पद पर पदोन्नति दे दी गई. यह सब वजिरालोंगकोर्न के प्रेम की वजह से हुआ.

उधर राजकुमार वजीरालौंगकोर्न का 2014 में अपनी तीसरी रानी सिरीरास्म से 13 साल पुराना दांपत्य जीवन टूट गया. दोनों ने तलाक ले लिया. तीसरी रानी से तलाक के बाद 61 साल के वजीरालौंगकोर्न के जीवन में सूनापन आ गया.

इसी दौरान सुथिदा से राजकुमार की मुलाकातें बढ़ गईं. दोनों एकदूसरे को प्यार करने लगे. भले ही दोनों के बीच उम्र का बड़ा फासला था, लेकिन प्यार में ना अमीरीगरीबी की बंदिश होती है और ना ही उम्र की. इसलिए दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा.

इस बीच, राजकुमार वजीरालौंगकोर्न ने वर्ष 2014 में सुथिदा को अपनी निजी बौडीगार्ड यूनिट का डिप्टी कमांडर नियुक्त कर दिया था. निजी बौडीगार्ड यूनिट में नियुक्ति मिलने से वजीरालौंगकोर्न और सुथिदा की मुलाकातें बढ़ गईं. दोनों एकदूसरे के ज्यादा करीब आ गए, तो अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी इन के किस्से चर्चा में आने लगे.

राजकुमार वजीरालौंगकोर्न इस दौरान सुथिदा से डेटिंग करते रहे, सुथिदा के साथ वह विदेशों में घूमते रहे. राजकुमार काफी समय जर्मनी में भी रहे. जर्मनी में वजीरालौंगकोर्न का अपना महल है. पिछले साल राजा जर्मनी में एक बनियान पहने हुए नजर आए, साथ में उन की प्रेमिका सुथिदा भी थीं. थाईलैंड में इस की काफी आलोचना भी हुई थी.

अक्तूबर 2016 में वजीरालौंगकोर्न के पिता भूमिवोल अदुलयादेद का निधन हो गया. भूमिवोल 70 साल से थाईलैंड के राजा थे. उन के निधन पर थाईलैंड में 50 दिन तक शोक छाया रहा. पिता के निधन से राजकुमार वजीरालौंगकोर्न दुखी थे, लेकिन संवैधानिक तौर पर उन का राजा बनने का रास्ता साफ  हो गया था.

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सुथिदा ने वजीरालौंगकोर्न को पिता के निधन से शोक से उबरने में काफी मदद की. वजीरालौंगकोर्न जब शोक से उबरे, तो अपने प्यार पर इतने आसक्त हो चुके थे कि उन्होंने दिसंबर 2016 में सुथिदा को लेफ्टिनेंट जनरल का पद दे कर राजा की गार्ड की स्पैशल औपरेशन यूनिट का मुखिया बना दिया. बाद में अक्तूबर 2017 में सुथिदा को रौयल थाई आर्मी का जनरल नियुक्त कर दिया गया.

संवैधानिक तौर पर वजीरालौंगकोर्न को पिता के निधन के बाद 1 दिसंबर, 2016 को राजा की उपाधि और राजगद्दी मिल गई थी, लेकिन उन का राज्याभिषेक समारोह इस साल मई के पहले सप्ताह में बैंकाक में शुरू हुआ. राजा बनने पर वजीरालौंगकोर्न को लोग 10वें किंग रामा के नाम से जानने लगे.

राज्याभिषेक से पहले ही एक मई को राजा वजीरालौंगकोर्न ने सुथिदा से शादी कर अपनी करीब 9 साल पुरानी प्रेम कहानी को विराम दे दिया. शादी के बाद राजा ने सुथिदा को थानपुइंग यानी क्वीन की उपाधि दे दी.

परंपराओं में बंधा देश

थाईलैंड की परंपरा के मुताबिक शादी की रस्मों के लिए सुथिदा रेंग कर शाही दरबार में सोने के सिंहासन पर बैठे राजा वजीरालौंगकोर्न के सामने पहुंचीं. राजा के पैरों में नतमस्तक हो कर सुथिदा ने उन्हें उपहार दिया. राजा ने पवित्र जल छिड़क कर सुथिदा को टीका लगाया. उस समय वह सिल्क की परंपरागत सुनहरी पोशाक पहने हुए थीं.

राजा की शादी की रजिस्ट्री पर हस्ताक्षर करने के लिए रौयल कोर्ट के रजिस्ट्रार और अन्य सदस्यों को दरबार में बुलाया गया. वे भी रेंग कर दरबार में पहुंचे. इस दौरान अन्य सभी लोग पेट के बल जमीन पर बैठे रहे. बाद में राजा को शादी की बधाई देने के लिए लोग रेंगते हुए दरबार में पहुंचे. थाईलैंड में इस शाही शादी को टेलीकास्ट भी किया गया.

66 साल के वजीरालौंगकोर्न का राजतिलक समारोह 4 मई को बौद्ध और ब्राह्मण रीतिरिवाज से हुआ. बैंकाक में आयोजित इस समारोह की शुरुआत चकाचौंध भरे कार्यक्रम से शुरू हुई. 3 दिवसीय इस कार्यक्रम पर करीब 25 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है.

प्राचीन परंपराओं के तहत राजतिलक समारोह के पहले दिन सुबह राजा सब से पहले राजमहल पहुंचे. उन्होंने बौद्ध धर्म के गुरु से उपदेश लिया. इस के बाद उन्होंने सफेद राजकीय पोशाक बदल कर सोने के तारों से सिली हुई राजा की पोशाक पहनीं. सुबह 10 बज कर 9 मिनट पर राजा को थाईलैंड की विभिन्न जगहों से लाया गया पवित्र जल सौंपा गया. यह पवित्र जल राजा ने ग्रैंड पैलेस परिसर के भीतर स्थित पवित्र स्थान पर अपने चेहरे पर छिड़का. इस मौके पर राजा को तोप चला कर सलामी दी गई. बौद्ध महंतों ने मंत्रोच्चार किया. इस दौरान हिंदू ब्राह्मण भी मौजूद थे.

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राजा को पवित्र किए जाने के बाद राजसिंहासन पर बैठाया गया. ब्राह्मणों ने उन्हें राज चिह्न, सोने का राजदंड और कीमती पत्थर से बनी तलवार सौंपी. इस के बाद राजा वजीरालौंगकोर्न को साढ़े 7 किलो सोने से बना मुकुट पहनाया गया. इस मुकुट पर प्राचीन भारत का हीरा जड़ा है. इस मौके पर नए राजा ने ‘धर्म और न्याय’ के साथ शासन करने की प्रतिबद्धता जताई.

राजतिलक के बाद दूसरे दिन 5 मई को राजा वजीरालौंगकोर्न ने नगर भ्रमण किया. वे सोने की पालकी में सवार थे. यह पालकी शाही सेना के 16 सिपाहियों ने कंधों पर उठा रखी थी. राजा की सवारी का नेतृत्व लाल रंग की वरदी में बाएं चल रही महारानी जनरल सुथिदा कर रही थीं.

यह सवारी दिवंगत राजा भूमिवोल द्वारा कंपोज कराई गई धुन पर आगे बढ़ रही थी. सड़क किनारे राजा की सवारी देखने की इजाजत केवल उन लोगों को ही थी, जो पीले कपड़े पहन कर आए थे. इस से पहले बैंकाक में 1963 में तत्कालीन राजा भूमिवोल की शाही सवारी निकली थी.

राजतिलक के जश्न पर खर्च हुए 25 करोड़

3 दिवसीय राजतिलक समारोह के आखिरी दिन 6 मई को थाईलैंड के नए राजा वजीरालौंगकोर्न के सम्मान में बैंकाक के ग्रेंड पैलेस के सामने सफेद रंग के 11 हाथी लाए गए. इन हाथियों ने राजा के सम्मान में घुटने टेके. हाथियों के दांतों पर मालाएं लगी थी.

हाथियों के अलावा राजा और उन के परिवार को देखने आए लोगों ने भी नतमस्तक हो कर प्रणाम किया. नए राजा ने बालकनी से हाथ हिला कर लोगों का अभिवादन किया. थाईलैंड में हाथी को शाही ताकत का प्रतीक माना जाता है.

राजा वजीरालौंगकोर्न चक्री वंश के 10वें सम्राट हैं. थाईलैंड में इस वंश का 1782 से शासन है. पहले शासक बुद्ध योद्फ  चुललोक थे. उन्हें किंग रामा प्रथम के नाम से जाना जाता था. उन का शासनकाल 1782 से 1809 तक रहा.

किंग रामा द्वितीय के नाम से जाने गए थाईलैंड के दूसरे राजा बुद्ध लोएत्ल नभले का कार्यकाल 1809 से 1824 तक रहा. तीसरे राजा नंगलव ने 1824 से 1851 तक शासन किया. मोंग्कुट चौथे राजा बने, उन का कार्यकाल 1851 से 1868 तक रहा.

पांचवें राजा चुललंगकरण को किंग रामा-5 के नाम से जाना गया. उन का राज 1868 से 1910 तक रहा. वाजिर्वुध छठे राजा हुए, उन्होंने 1910 से 1925 तक शासन किया. थाईलैंड के सातवें राजा प्रजाधिपोक का शासनकाल 1925 से 1935 तक रहा. आठवें राजा आनंद महिदोल ने 1935 से 1946 तक शासन किया.

इस के बाद 1946 में भूमिवोल थाईलैंड के 9वें राजा बने. उन्हें किंग रामा-9 के नाम से जाना जाता था. उन का राजतिलक 1950 में किया गया था. भूमिवोल का निधन अक्तूबर 2016 हुआ. वे 70 साल तक थाईलैंड के राजा रहे.

28 जुलाई 1952 को बैंकाक में क्वीन सिरीकिट की कोख से जन्मे राजकुमार वजीरालौंगकोर्न की पहली शादी 3 जनवरी, 1977 में उन की ममेरी बहन सोमसावली से हुई थी. इन की 7 दिसंबर, 1978 को एक बेटी हुई. वजीरालौंगकोर्न का सोमसावली से जुलाई 1993 में तलाक हो गया.

इसी बीच राजकुमार वजीरालौंगकोर्न ने दूसरी शादी अभिनेत्री युवहिदा पोलप्रेजर से की. उन से राजा के 5 बच्चे हुए. बाद में दोनों का तलाक हो गया और रानी युवहिदा रहने के लिए ब्रिटेन चली गईं.

रंगीनियों में डूबे देश का सनकी राजा

राजकुमार वजीरालौंगकोर्न की तीसरी शादी 10 फरवरी 2001 को श्रीरास्मी सुवादे से हुई. इनसे 29 अप्रैल, 2005 को राजा का एक बेटा हुआ. वर्ष 2014 में श्रीरास्मी और वजीरालौंगकोर्न का तलाक हो गया. इस के बाद राजकुमार वजीरालौंगकोर्न ने अब सुथिदा से चौथी शादी की है.

राजा वजीरालौंगकोर्न के बारे में एक किस्सा मशहूर है. किस्सा यह है कि उन्होंने एक बार अपने प्रिय डौग फू फू  को रौयल थाई एयरफोर्स का चीफ मार्शल नियुक्त कर दिया था. लोगों को उन के इस फैसले पर काफी आश्चर्य हुआ था.

बाद में जब उस डौग की मौत हो गई, तो थाईलैंड में राष्ट्रीय शोक मनाया गया. जल्दी ही गुस्से में आ जाने वाले वजीरालौंगकोर्न ने अपनी तीसरी बीवी श्रीरास्मी को एक बार करीबकरीब टौपलेस कर के फोटो खिंचवाई थी. पता चलने पर इस की काफी आलोचना हुई थी.

अब बात करते हैं थाईलैंड के बारे में. दक्षिण पूर्वी एशिया के इस देश का प्राचीन नाम स्याम है. थाईलैंड की सीमाएं लाओस, कंबोडिया, मलेशिया और म्यांमार से सटी हुई हैं. वर्ष 1238 में थाईलैंड में सुखोथाई राज्य की स्थापना हुई. इसे पहला बौद्ध थाई राज्य माना जाता है.इस के एक सदी बाद अयुध्या के राजा ने सुखोथाई पर अपना राज कायम कर लिया. वर्ष 1767 में बर्मा द्वारा अयुध्या के पतन के बाद थोंबुरी राजधानी बनी. सन 1782 में थाईलैंड में चक्री राजवंश की स्थापना हुई. इसे ही आधुनिक थाईलैंड का आरंभ माना जाता है. वर्ष 1992 में थाईलैंड को नया संवैधानिक राजतंत्र घोषित कर दिया गया. यहां मुख्य रूप से बौद्ध धर्म है.थाईलैंड की राजधानी बैंकाक है. थाईलैंड में वैसे तो प्रौस्टीट्यूशन गैरकानूनी है, लेकिन इसे रोकने के लिए कभी सख्ती नहीं हुई. यही कारण रहा कि बैंकाक पूरी दुनिया में सैक्स टूरिज्म के नाम से चर्चित होता गया. एचआईवी और एड्स के आंकड़े जुटाने वाली संस्था एवीईआरटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक थाईलैंड में करीब एक लाख 23 हजार सैक्स वर्कर हैं.

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बैंकाक के साथ थाईलैंड के शहर फुकेट, पटाया और फीफी आइलैंड को नाइट लाइफ  के लिए जन्नत माना जाता है. दुनिया भर के हजारों सैलानी रोजाना थाईलैंड आते हैं. यहां आने वाले सैलानियों को खासतौर से बार और मसाज पार्लर लुभाते हैं.

अकेले पटाया शहर में ही एक हजार से ज्यादा बार और मसाज पार्लर हैं. थाईलैंड की जीडीपी में पर्यटन उद्योग की भागीदारी करीब 10 फीसदी है. थाईलैंड में डांस वैध है, लेकिन इस की आड़ में जिस्मफरोशी का कारोबार चलता है.

बैंकाक में बार और मसाज पार्लर के अलावा जुआखाने भी हैं. बौडी मसाज और बार में बीयर परोसने के बहाने यहां की लड़कियां सैक्स के अनैतिक धंधे में लिप्त हैं. पोल डांस भी सैलानियों को लुभाता है. पटाया की सड़कों पर हाथ में बार रेस्तरां के पोस्टर लिए खड़ी लड़कियां सैलानियों को रिझाती हैं.बहरहाल, थाईलैंड में जितनी रंगीनी है, वहां के राजा भी उतने ही रंगीनमिजाज हैं. थाईलैंड भले ही छोटा सा देश है, लेकिन यहां शाम होते ही रंगीनियत छा जाती है. दुनिया भर से आने वाले सैलानी आधी रात के बाद तक रंगीनियों में खोए रहते हैं. भारत से सब से ज्यादा सैलानी थाईलैंड जाते हैं. इन में अधिकांश सैलानियों का मकसद मौजमस्ती होता है. बैंकाक से अब भारत में सोने की तस्करी भी बड़े पैमाने पर होने लगी है.

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