एक लड़की टिकटौक वाली : भाग 1

17 वर्षीय शिवानी खोबियान 24 जून, 2020 को भी रोजाना की तरह नियत समय पर अपने ब्यूटी पार्लर टच एंड फेयर पहुंच गई थी. उस का यह पार्लर कुंडली थाने के पौश एरिया टीडीसी सिटी में था. शिवानी ने पार्लर की देखरेख के लिए अपनी छोटी बहन श्वेता के दोस्त नीरज को जौब पर रख लिया था. वह सुबह साढ़े 10 बजे तक पार्लर की साफसफाई कर के रेडी रखता था. शिवानी 11 बजे तक पार्लर आती थी.

सुंदर और गुणी शिवानी टिकटौक स्टार थी. उस के लाखों फौलोअर्स थे. दीवाने उस की मोहक अदाओं पर मर मिटे थे. कई तो उसे प्रेम निवेदन भी भेज चुके थे, लेकिन शिवानी पागल दीवानों की अनदेखी कर टिकटौक प्लेटफार्म पर वीडियो बना कर पोस्ट करती रहती थी. वह सोनीपत के कुंडली में अपने मांबाप और 3 बहनों के साथ रहती थी.

24 जून दोपहर 2 बजे की बात है. शिवानी ने ग्राहकों से फारिग हो कर पार्लर का मुख्य द्वार बंद कर दिया और टिकटौक के लिए वीडियो शूट करने लगी. उस ने वीडियो बना कर टिकटौक पर पोस्ट कर दी और फिर अपने काम में जुट गई.

ये भी पढ़ें- नशे की लत ने बनाया हत्यारा

रात के 8 बज गए. लेकिन शिवानी घर नहीं लौटी तो उसे ले कर घर वालों को थोड़ी चिंता हुई. छोटी बहन श्वेता ने उस के फोन पर काल किया. लेकिन उस का फोन स्विच्ड औफ  था. शिवानी कभी फोन औफ नहीं रखती थी. श्वेता ने अपने फोन से उस के वाट्सऐप पर मैसेज किया, ‘‘दी, तुम कहां हो? तुम्हारा फोन औफ क्यों आ रहा है? मम्मीपापा और हम सभी तुम्हारे लिए परेशान हैं, जल्दी बताओ.’’

श्वेता के मैसेज भेजने के कुछ देर बाद शिवानी ने श्वेता के वाट्सऐप पर जवाब दिया, ‘‘श्वेता, मैं जरूरी काम से हरिद्वार जा रही हूं. 3-4 दिन बाद घर लौटूंगी, तुम लोग परेशान मत होना, तब तक मम्मीपापा का ध्यान रखना.’’

शिवानी का मैसेज पढ़ कर श्वेता ने यह बात मम्मीपापा को बता दी. सुन कर सभी ने चैन की सांस ली.

शिवानी के पिता विनोद खोबियान बेटी की ओर से इसलिए भी निश्चिंत हो गए, क्योंकि वह अकसर पार्लर से ही बाहर चली जाती थी लेकिन कहीं जाने से पहले वह घर पर बता देती थी. इस बार उस ने बाहर जाने की बात घर में नहीं बताई थी.

26 जून की सुबह साफसफाई करने नीरज 11 बजे ब्यूटी पार्लर पहुंचा. उसे शिवानी के हरिद्वार जाने की बात पता चल गई थी, इसलिए वह शिवानी के हरिद्वार से लौटने वाले दिन आया था.

दुकान खोल कर नीरज जैसे ही अंदर गया, दुकान के भीतर से  किसी चीज के सड़ने की इतनी तेज दुर्गंध आई कि वह उल्टे पांव बाहर आ गया.

उस ने सोचा कि दुकान कई दिनों से बंद थी, हो सकता है कोई चूहा मर गया हो और उसी के सड़ने की बदबू आ रही हो. फिर वह नाक पर रूमाल बांध कर दुकान के अंदर गया. दुकान के भीतर ग्राहकों के मसाज के लिए एक बैड बिछा था. कई मामलों में शिवानी बैड पर लेटा कर अपने ग्राहकों को मसाज किया करती थी. उस ने महंगे क्रीम पाउडर रखने के लिए एक बड़ी अलमारी भी रखी हुई थी.

हो गया शिवानी का कत्ल

नीरज ने फौरी तौर पर कमरे का निरीक्षण किया. अलमारी भी देख ली. उसे कहीं भी कोई ऐसी चीज नहीं मिली जिस में से दुर्गंध आ रही हो. लेकिन जब वह बैड के पास पहुंचा तो वहां से तेज बदबू आई. उसे लगा जैसे बदबू के मारे अभी उल्टी हो जाएगी. वह नाकमुंह दबा कर तेजी से बाहर निकल आया. बाहर आ कर उस ने ताजा सांस ली.

उस के बाद वह फिर दुकान के अंदर गया और बैड पर लगे कुंडे को पकड़ कर बैड का बड़ा ढक्कन उठाया. ढक्कन उठाते ही वह बुरी तरह चौंका. उस के हाथ से ढक्कन तेजी से छूट गया और वह एक बार फिर तेजी से बाहर की ओर भागा. बैड के भीतर टिकटौक स्टार और ब्यूटी पार्लर की मालकिन शिवानी खोबियान की लाश पड़ी हुई थी. बदबू उसी बैड में से आ रही थी.

शिवानी का शव देख कर नीरज के हाथपांव थरथर कांपने लगे. एक पल के लिए उस के दिमाग ने काम करना बंद कर दिया. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे? थोड़ी देर बाद जब वह सामान्य हुआ तो उस ने सब से पहले अपनी दोस्त श्वेता को फोन कर के शिवानी दीदी की लाश के बारे में जानकारी दी और पार्लर पर आने को कहा. यह 28 जून की बात है.

शिवानी की लाश मिलने की जानकारी होते ही घर में कोहराम मच गया था. श्वेता, उस की मम्मी और पापा तथा कुछ परिचित तत्काल पार्लर पहुंच गए, जहां शिवानी की लाश बैड के अंदर पड़ी थी. मौके पर पहुंचे मृतका के पिता विनोद खोबियान ने फोन कर के घटना की जानकारी कुंडली थाने को दे दी. सूचना मिलते ही कुंडली थाने के थानेदार रविंदर पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. तब तक वहां भारी भीड़ जमा हो गई थी. पुलिस को आया देख भीड़ छंट गई.

ये भी पढ़ें- प्रेम की पुड़िया में 9 दिन का राज : भाग 1

सभी को इस बात पर ताज्जुब हो रहा था कि शिवानी ने मैसेज से जब हरिद्वार जाने की बात कही थी तो उस की लाश बैड के भीतर कैसे आई?

थानाप्रभारी रविंदर ने भीड़ को हटाया और टीम के साथ दुकान के भीतर गए. उन्होंने सरसरी निगाह से एकएक चीज की जांचपड़ताल की. दुकान के भीतर रखे ब्यूटी प्रसाधन और अन्य चीजें अपनी जगह थीं. हत्यारे ने किसी चीज को छुआ तक नहीं था. इस से एक बात तय थी कि हत्यारे की मंशा लूटपाट करने की नहीं थी. उस का लक्ष्य सिर्फ शिवानी थी और उस ने उस के प्राण लिए थे.

शिवानी की हत्या कर के लाश को बैड के अंदर छिपाया ही नहीं गया था, बल्कि बाहर से दुकान का ताला भी बंद कर दिया गया था. इस से साफ पता लग रहा था कि इस घटना में उस का कोई जानने वाला जरूर शामिल था. एसओ रविंदर ने लाश का मुआयना किया. लाश बैड के भीतर आड़ीतिरछी पड़ी हुई थी. शरीर पर एक खरोंच तक नहीं थी. लाश से बदबू उठ रही थी, इस से अनुमान लगाया गया कि शिवानी की मौत 2 से 3 दिनों के बीच हुई होगी.

घटनास्थल और लाश का मौकामुआयना करने के बाद एसओ रविंदर ने डीएसपी वीरेंद्र सिंह और एसपी जे.एस. रंधावा को फोन कर के घटना की सूचना दे दी. थोड़ी देर बाद डीएसपी सिंह मौके पर आ गए. लाश के परीक्षण से यह बात साफ हो गई कि शिवानी की हत्या गला दबा कर की गई थी. उस के गले पर निशान मौजूद थे.

पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल सोनीपत भेज दिया और आगे की कार्रवाई में जुट गई. एसओ रविंदर ने मृतका के पिता विनोद से उस की किसी से दुश्मनी अथवा लड़ाईझगड़े की बात पूछी तो उन्होंने ऐसी किसी भी बात से इनकार किया लेकिन इतना जरूर बताया कि आरिफ नाम का एक लड़का सालों से शिवानी को परेशान कर रहा था, उसी पर शक है.

पिता की बात सुन कर श्वेता को याद आया कि 26 जून की दोपहर में जब शिवानी से उस की बात हुई थी तो उस ने बताया कि आरिफ पार्लर पर आया है और परेशान कर रहा है. इस के बाद उस ने यह कहते हुए फोन काट दिया था कि वह बाद में बात करेगी. लेकिन शिवानी ने कालबैक नहीं किया. ऐसा पहली बार हुआ था कि शिवानी देर रात तक घर नहीं लौटी थी.

श्वेता ने आगे बताया कि जब उस ने शिवानी के फोन पर काल लगाई तो फोन बंद आने था. तब मैं ने उस के वाट्सऐप पर मैसेज दिया तो थोड़ी देर बाद उस के फोन से रिप्लाई आया कि जरूरी काम से हरिद्वार आई हूं. मंगलवार तक घर लौट आऊंगी.

ये भी पढ़ें- चार बीवियों का पति : भाग 1

इंसपेक्टर रविंदर ने श्वेता की बातें बड़े गौर से सुनीं. उस की बातें सुन कर वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि शिवानी की हत्या में कहीं न कहीं आरिफ का हाथ जरूर है. संभव है शिवानी की हत्या उसी ने की हो और वहां से भागते समय शिवानी का फोन अपने साथ ले गया हो. फिर घर वालों को गुमराह करने के लिए उसी फोन से शिवानी की ओर से मैसेज का जवाब दिया हो.

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

भारत में बैन चीनी वीडियो ऐप टिकटौक

कहते हैं जब इंसान जिंदगी से हताश और हर ओर से निराश हो जाता है तो वो मौत को गले लगाने की सोचने लगता है. सिया कक्कड़ ने कम उम्र में शोहरत और दौलत कमाने की उन ऊंचाइयों को छू लिया था, जहां तक कम लोग ही पहुंच पाते हैं.

दिल्ली के गीता कालोनी इलाके की रहने वाली 16 साल की सिया कक्कड़ ने 24 जून, 2020 को अपने घर में फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली. सिया कक्कड़ वह लड़की थी, जिस ने कम उम्र में टिकटौक के कारण न सिर्फ शोहरत बटोरी थी बल्कि हर महीने कम से कम एकडेढ़ लाख रुपए कमा लेती थी.

सिया कक्कड़ ने जिस दिन खुदकुशी की उस से एक दिन पहले ही 23 जून को टिकटौक पर एक वीडियो अपलोड किया था, जिस के बाद परिजनों ने देखा कि वह बेहद खुश नजर आ रही है. उसी रात को सिया की अपने मैनेजर अर्जुन सरीन से भी एक गाने के सिलसिले में बात हुई थी. उस समय वह अच्छे मूड में और एकदम नौर्मल थी. अर्जुन को भी समझ नहीं आया कि आखिर क्या हुआ, जिस की वजह से सिया ने आत्मघाती कदम उठाया.

ये भी पढ़ें- “शिक्षा नीति” की “ढोल और ढोंग” की पोल

सिया ने 20 घंटे पहले ही इंस्टाग्राम पर टिकटौक के अपने डांस की वीडियो स्टोरी पोस्ट की थी. इंस्टाग्राम पर उस ने जो स्टोरी अपलोड की थी, उस में सिया ने टिकटौक के लिए फेमस पंजाबी रैप सिंगर बोहेमिया के गाने पर अपने डांस का वीडियो बनाया था. सिया की उस पोस्ट को देख कर कोई नहीं कह सकता था कि वह किसी तनाव या परेशानी से जूझ रही थी.

सिया कक्कड़ ने मरने से पहले कोई सुसाइड नोट नहीं छोड़ा था, इसलिए उस की खुदकुशी की जांच करने वाली प्रीत विहार थाने की पुलिस को तत्काल उस की आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल सका.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिया के शरीर पर किसी तरह की भी चोट के निशान नहीं पाए गए और यह भी साफ हो गया कि उस की मौत गले में पड़े फंदे के कारण दम घुटने से ही हुई. हालांकि पुलिस ने सिया के कमरे से उस का मोबाइल, लैपटौप और कुछ दस्तावेज जांच के लिए कब्जे में जरूर लिए लेकिन उस से कोई ज्यादा मदद नहीं मिल सकी.

tik-tok

टिकटौक वीडियो से सिया ने सोशल मीडिया पर धूम मचा रखी थी. लोग उसे काफी पसंद करते थे. वह करीब 3 साल से वीडियो बना कर टिकटौक पर अपलोड करती थी और लाखों रुपए कमा रही थी. इंस्टाग्राम पर उसे 91 हजार लोग फौलो करते थे. टिकटौक पर सिया के 1.1 मिलियन फौलोअर्स थे. टिकटौक व इंस्टाग्राम के अलावा सिया, स्नैपचैट और यूट्यूब पर भी सक्रिय थी.

ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी था कि आखिर सिया कक्कड़ ने खुदकुशी क्यों की? पुलिस ने इस मामले के हर बिंदु पर गहराई से पड़ताल की तो लगा कि लौकडाउन की वजह से कुछ महीनों से घर में थी और पिछले कुछ दिन से भविष्य को ले कर डिप्रेशन में थी.

लेकिन इतनी कम उम्र में शोहरत और पैसा कमाने वाली सिया इस तरह दुनिया छोड़ जाएगी, किसी ने सोचा भी नहीं था. सिया को जानने वाले उस के दोस्तों का कहना है कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद से सिया काफी उदास रहने लगी थी.

परिवार वालों को भी उस के डिप्रेशन में होने के बारे में पता चल गया था. क्योंकि उस के दादा और पिता पेशे से डाक्टर हैं, इसलिए सिया के डिप्रेशन को भांपना उन के लिए मुश्किल नहीं था. लेकिन उन्हें इस बात का एहसास बिलकुल भी नहीं था कि सिया डिप्रेशन के चलते इतना बड़ा कदम उठा लेगी.

दरअसल अब तक जो तथ्य सामने आए हैं उस के मुताबिक सिया कक्कड़ भारत में टिकटौक पर बैन लगने के बाद से ज्यादा डिप्रेशन में थी, क्योंकि टिकटौक के जरिए पैसा कमाना और कैरियर बनाने को उस ने अपना लक्ष्य बना लिया था. अचानक हुए बैन से उस के मन में अपने भविष्य को ले कर इतना अवसाद भर गया कि उस ने मौत को गले लगा लिया.

यहां यह बताना जरूरी है कि भारत और चीन के बीच लगातार चल रहे सीमा विवाद और सैन्य झड़प के बाद भारत सरकार ने टिकटौक समेत 59 चाइनीज ऐप को भारत में प्रतिबंधित कर दिया था. लेकिन इस में सब से ज्यादा लोकप्रिय टिकटौक ऐप था, जो न सिर्फ इस के यूजर्स को शोहरत दिलाता था बल्कि उन की कमाई का भी जरिया बन गया था.

सिया कक्कड़ की तरह ही कुछ रोज बाद मेरठ के पल्लवपुरम स्थित ग्रीन पार्क में रहने वाली टिकटौक की एक और स्टार संध्या चौहान ने डिप्रेशन के कारण फांसी लगा कर अपनी जान दे दी. एक पुलिस सबइंस्पेक्टर की 22 साल की बेटी संध्या चौहान दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ती थी. लौकडाउन होने की वजह से वह अपने घर आई हुई थी, उस ने 6 जुलाई, 2020 को खुदकुशी का कदम उठाया.

संध्या के पास से भी पुलिस को सुसाइड नोट नहीं मिला. लेकिन परिजनों ने जो बताया, उस के मुताबिक संध्या पिछले 2-3 महीने से डिप्रेशन में थी और उदास रहती थी. पुलिस ने संध्या का फोन जब्त करने के साथ उस के टिकटौक एकाउंट की जो छानबीन की, उस से इस बात की संभावना ज्यादा है कि संध्या अचानक भारत में टिकटौक बैन होने से अपसेट थी.

टिकटौक का बैन होना उन कलाकारों के लिए बड़ा झटका साबित हुआ जिन्होंने इसे अपनी कमाई और कैरियर का जरिया बनाने का मन बना लिया था. ऐसे में अपना सपना टूटता देख उन्हें सदमा लगा.

ये भी पढ़ें- मुसहर : व्यवस्था का दंश झेलता एक समुदाय

सिया कक्कड़ हो या संध्या चौहान, ऐसी तमाम किशोरियां जो टिकटौक पर वीडियो अपलोड कर के शोहरत और पैसा कमाने की हसरत रखती थीं, उन के लिए टिकटौक पर बैन मानो किसी हसीन सपने के टूट जाने जैसा था. इसलिए टिकटौक के दूसरे साइड इफैक्ट को जानने से पहले यह समझना जरूरी है कि आखिर टिकटौक क्या बला है जो युवा पीढ़ी इस पर बैन लगने के बाद अवसाद में घिरती जा रही है.

टिकटौक आखिर क्या है?

टिकटौक एक सोशल मीडिया ऐप्लिकेशन है, जिस के जरिए स्मार्टफोन यूजर छोटेछोटे वीडियो (15 सेकेंड तक के) बना और शेयर कर सकते हैं. इस के स्वामित्व वाली कंपनी बाइट डांस है जिस ने सितंबर, 2016 में चीन में टिकटौक लौंच किया था. साल 2018 में टिकटौक की लोकप्रियता बहुत तेजी से बढ़ी और अक्तूबर 2018 में यह अमरीका में सब से ज्यादा डाउनलोड किया जाने वाला ऐप बन गया.

गूगल प्ले स्टोर पर टिकटौक का परिचय शार्ट वीडियो फौर यू (आप के लिए छोटे वीडियो) कह कर दिया गया है.

टिकटौक मोबाइल से छोटेछोटे वीडियो बनाने में बनावटीपन नहीं है, ये रियल है और इस की कोई सीमाएं नहीं हैं. चाहे आप सुबह ब्रश कर रहे हों या नाश्ता बना रहे हों, आप जो भी कर रहे हों, जहां भी हों, टिकटौक पर आइए और 15 सेकेंड में दुनिया को अपनी कहानी बताइए.

टिकटौक के साथ आप की जिंदगी और मजेदार हो जाती है. आप जिंदगी का हर पल जीते हैं और हर वक्त कुछ नया तलाशते हैं. आप अपने वीडियो को स्पेशल इफैक्ट फिल्टर, ब्यूटी इफैक्ट, मजेदार इमोजी स्टिकर और म्यूजिक के साथ एक नया रंग दे सकते हैं.

शोहरत और कमाई का जरिया बन गया टिकटौक

भारत में टिकटौक के डाउनलोड का आंकड़ा 10 करोड़ से ज्यादा है. एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार इसे हर महीने लगभग 2 करोड़ भारतीय इस्तेमाल करते हैं. भारतीयों में टिकटौक की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 80 लाख लोगों ने गूगल प्ले स्टोर पर इस का रिव्यू किया है.

दिलचस्प बात यह है कि टिकटौक इस्तेमाल करने वालों में एक बड़ी संख्या गांवों और छोटे शहरों के लोगों की है. इस से भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह भी है कि टिकटौक की दीवानगी 7-8 साल की उम्र के छोटेछोटे बच्चों तक के सिर चढ़ कर बोल रही थी.

इतना ही नहीं, लोकप्रियता के कारण अब यह इतना पसंद किया जाने लगा था कि श्रद्धा कपूर, टाइगर श्रौफ और नेहा कक्कड़ जैसे अधिकांश बौलीवुड सितारे भी टिकटौक पर आ गए थे.

अब जरा जान लेते हैं कि टिकटौक की क्या खास बातें हैं. टिकटौक से वीडियो बनाते वक्त आप अपनी आवाज का इस्तेमाल नहीं कर सकते. आप को लिप सिंक करना होता है. जहां फेसबुक और ट्विटर पर ब्लू टिक पाने यानी अपना अकाउंट वेरिफाई कराने के लिए आम लोगों को खासी मशक्कत करनी पड़ती है, वहीं टिकटौक पर वेरिफाइड अकाउंट वाले यूजर्स की संख्या बहुत बड़ी है.

tik-tok-stars

इस में ब्लू टिक नहीं बल्कि औरेंज टिक मिलता है. जिन लोगों को औरेंज टिक मिलता है, उन के अकाउंट में पौपुलर क्रिएटर लिखा दिखाई पड़ता है. साथ ही अकाउंट देखने से यह भी पता चलता है कि यूजर को कितने दिल मिले हैं, यानी अब तक कितने लोगों ने उसके वीडियो पसंद किए हैं.

गांव से ले कर खेत खलिहान तक पहुंच

टिकटौक की लोकप्रियता का अहम कारण यह था कि गांव से ले कर छोटे शहरों में रहने वाले प्रतिभाशाली गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों के लिए यह प्लेटफौर्म बौलीवुड के समानांतर बन कर उभरा था जो उन्हें न केवल शोहरत दिलाता था, बल्कि उन की कमाई का जरिया भी बन गया था.

गांव, कस्बे से ले कर छोटे शहरों तक के लोग टिकटौक के चलते फेमस ही नहीं हुए, बल्कि लाखों रुपए महीना कमाने भी लगे थे. उन लोगों के लिए टिकटौक अपनी प्रतिभा दिखाने को बड़ा जरिया बन चुका था, जो सिनेमा के सुनहरे परदे पर अपना हुनर दिखाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिलता.

मसलन अगर कोई अच्छी कौमेडी करता है या अच्छा डांस करता है तो उस के लिए टिकटौक अपनी प्रतिभा को दिखाने का अच्छा मंच था. ऐसे बहुत से प्रतिभाशाली लोग इस के जरिए खूब पैसे भी कमा रहे थे.

हरियाणा जैसे छोटे राज्य के रहने वाले एक ग्रामीण मजदूर साहिल के टिकटौक पर 3,03,200 फालोअर थे. उसे अपने वीडियो के जरिए हर महीने 3,000-5,000 रुपए तक मिल जाते थे, जो साहिल के लिए बड़ी रकम थी. लेकिन साहिल इस कोशिश में था कि उन का अकाउंट वेरिफाई हो जाए और उस के फौलोअर्स 10 लाख तक पहुंच जाएं. लेकिन इसी दौरान भारत सरकार ने टिकटौक पर भारत में प्रतिबंध लगा दिया.

लेकिन सिया कक्कड़ और संध्या चौहान की तरह हर कोई डिप्रेशन में नहीं गया. कुछ ऐसे भी स्टार हैं जिन्होंने टिकटौक से बतौर कलाकार अपनी पहचान बनाने के बाद अपनी तरक्की के लिए दूसरे दरवाजे तलाश कर लिए. समीक्षा सूद भी एक ऐसा ही नाम है.

ये भी पढ़ें- एससी तबके पर जोरजुल्म : बाढ़ की तरह बढ़े हैं मामले

प्रोफैशनल मौडल और टीवी एक्ट्रैस बन चुकी समीक्षा सूद टिकटौक पर बेहतरीन वीडियो क्लिप और कौमेडी के जरिए अपनी खास पहचान रखती थी. उन्होंने टीवी सीरियल बाल वीर में अपने एक्टिंग के जौहर दिखाए हैं. टिकटौक पर उन के कुल सवा करोड़ फौलोअर्स हैं.

जबकि इंस्टाग्राम पर उन के फौलोअर्स की संख्या 0.2 करोड़ है. वह हर महीने 8 से 10 लाख रुपए भी कमाती थीं. रानो निक नाम से टिकटौक पर पहचान बनाने वाली समीक्षा आज एक जानीमानी मौडल, फैशन ब्लौगर, यूट्यूबर और टिकटौक स्टार हैं.

इन दिनों वह कई टेलीविजन धारावाहिकों और विज्ञापनों में काम कर रही हैं. लेकिन समीक्षा सूद टिकटौक के बैन होने से निराश नहीं हैं क्योंकि उन्होंने पहचान बनाने के अब बहुत से रास्ते तलाश लिए हैं.

दरअसल, टिकटौक ऐसा प्लेटफौर्म है, जहां कई आम यूजर्स ने बौलीवुड सेलेब्स से भी ज्यादा फैन फौलोइंग बना रखी है. कई ऐसे यूजर्स हैं, जिन के फौलोअर्स करोड़ों में हैं और उन के लाइक्स की संख्या अरबों में पहुंच गई है. वे हर माह लाखों रुपए कमाते थे.

ऐसे में उन के लिए टिकटौक का भारत में बैन हो जाना किसी सदमे से कम नहीं है. लेकिन टिकटौक की इन सेलिब्रिटीज को अब इतनी पहचान मिल चुकी है कि बतौर कलाकार खुद को स्थापित करने में उन्हें ज्यादा मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा.

सिर्फ फायदे नहीं, खतरे भी हैं

भले ही टिकटौक पर अब प्रतिबंध लगा हो लेकिन अश्लील वीडियो के कारण टिकटौक पर बैन लगाने की मांग कई बार उठ चुकी थी. अलगअलग राज्यों के उच्च न्यायालयों में वीडियो ऐप टिकटौक पर प्रतिबंध लगाने की मांग की जा चुकी थी. इस ऐप पर बेरोकटोक अश्लील विषयवस्तु अपलोड किए जाने से ले कर टिकटौक को अपराध के बढ़ावे की वजह बताया गया.

ऐसा नहीं है कि टिकटौक में सब अच्छा ही है इस के कुछ दूसरे नुकसानदायक पहलू भी हैं.

गूगल प्ले स्टोर पर कहा गया है कि इसे 13 साल से ज्यादा उम्र के लोग ही इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन इस का पालन होता नहीं दिखा. भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में टिकटौक के जरिए जो वीडियो बनाए जाते हैं, उस में एक बड़ी संख्या 13 साल से कम उम्र के बच्चों की है.

इस के अलावा प्राइवेसी के लिहाज से भी टिकटौक खतरों से खाली नहीं है. क्योंकि इस में सिर्फ 2 प्राइवेसी सेटिंग की जा सकती है- पब्लिक और ओनली. यानी आप वीडियो देखने वालों में कोई फिल्टर नहीं लगा सकते. या तो आप के वीडियो सिर्फ आप देख सकेंगे या फिर हर वो शख्स जिस के पास इंटरनेट है.

अगर कोई यूजर अपना टिकटौक अकाउंट डिलीट करना चाहता है तो वह खुद ऐसा नहीं कर सकता. इस के लिए उसे टिकटौक से रिक्वेस्ट करनी पड़ती है. चूंकि यह पूरी तरह सार्वजनिक है, इसलिए कोई भी किसी को फौलो कर सकता है, मैसेज कर सकता है.

ऐसे में आपराधिक या असामाजिक प्रवृत्ति के लोग छोटी उम्र के बच्चे या किशोरों को आसानी से गुमराह कर सकते हैं और आपत्तिजनक कमेंट कर सकते हैं. कई टिकटौक अकाउंट अडल्ट कंटेंट से भरे पड़े हैं. चूंकि इन में कोई फिल्टर नहीं है, इसलिए हर टिकटौक यूजर इन्हें देख सकता है, यहां तक कि बच्चे भी.

टिकटौक जैसे चीनी ऐप्स के साथ सब से बड़ी दिक्कत यह है कि इस में किसी कंटेंट के लिए रिपोर्ट या फ्लैग का कोई विकल्प नहीं है. इसलिए सुरक्षा और निजता के लिहाज से यह खतरनाक हो सकता है.

टिकटौक में दूसरी बड़ी समस्या साइबर बुलिंग की है. साइबर बुलिंग यानी इंटरनेट पर लोगों का मजाक उड़ाना, उन्हें नीचा दिखाना, बुराभला कहना और ट्रोल करना. इसी वजह से टिकटौक पर कोई काबू नहीं था.

जुलाई, 2018 में इंडोनेशिया ने इसीलिए टिकटौक पर बैन लगा दिया था, साथ ही वहां किशोरों की एक बड़ी संख्या इस का इस्तेमाल पोर्न सामग्री अपलोड और शेयर करने के लिए कर रही थी. बाद में कुछ बदलावों और शर्तों के बाद इसे दोबारा लाया गया था.

ट्रोलिंग के अलावा टिकटौक पर पिछले कुछ समय से फेक न्यूज के वीडियो भी तेजी से फैल रहे थे, जिसे देखते हुए टिकटौक देश के लिए खतरा बन गया था. इस के अलावा यह ऐप हमारे डाटा की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन गया था.

मसलन, जब हम टिकटौक या उस जैसा कोई ऐप डाउनलोड करते हैं तो प्राइवेसी की शर्तों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते. बस, यस और अलाउ पर टिक करते चले जाते हैं. हम अपनी फोटो गैलरी, लोकेशन और कौंटैक्ट नंबर, इन सब का एक्सेस दे देते हैं. इस के बाद हमारा डेटा कहां जा रहा, इस का क्या इस्तेमाल हो रहा है, हमें कुछ पता नहीं चलता.

यह बात अब जगजाहिर है कि आजकल ज्यादातर ऐप्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से काम करते हैं. ऐसे में अगर आप इन्हें एक बार भी इस्तेमाल करते हैं तो ये आप से जुड़ी कई जानकारियां हमेशा के लिए अपने पास रख लेते हैं, इसलिए इन्हें ले कर ज्यादा सतर्क होने की जरूरत है.

जब अपराध की वजह बना

टिकटौक अपराधों की वजह बना जैसे आरोपों में सच्चाई भी है, क्योंकि टिकटौक कई तरह के अपराध की कुछ घटनाओं की वजह बना है. जरूरी नहीं कि टिकटौक से सभी को शोहरत व दौलत ही मिली हो, कुछ लोगों को इस के कारण जान भी गंवानी पड़ी.

ये भी पढ़ें- पंजाब जहरीली शराब कांड : ले डूबा नशे का सुरूर

दिसंबर 2019 में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र के अंतर्गत गोदावरी नगर स्थित एक निजी हौस्टल में हुई 2 बहनों की हत्या इसी का परिणाम थी.

इसी शहर की एक लड़की मंजू सिदार जो टिकटौक पर वीडियो बनाने के कारण चर्चित हुई थी, उसे शहर के राजगढ़ में रहने वाले अपने एक फैन शोएब अहमद अंसारी उर्फ सैफ से इश्क हो गया. 21 मई, 2019 को दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली. लेकिन यह शादी मंजू के परिवार को मंजूर नहीं थी. इस के बाद दोनों के बीच अलगाव हो गया.

लेकिन बात तब बिगड़ी जब चंद रोज बाद ही मंजू ने एक दूसरे युवक के साथ टिकटौक में वीडियो बना कर फेसबुक पर अपलोड किया. इस वीडियो के कारण दोस्तों और परिचितों में हुई अपनी बदनामी के कारण सैफ बदले की आग में जलने लगा. उस ने अपने 2 दोस्तों को पैसे का लालच दे कर मंजू की हत्या करने की योजना बनाई.

सैफ ने मंजू को काल कर मिलने की इच्छा जताई, फिर गुलाम के साथ हौस्टल के कमरे में जा कर करीब घंटे भर बातचीत करता रहा. इस दौरान मंजू ने सैफ के साथ रहने से साफ इनकार कर दिया. तब सैफ ने गुस्से में रोटी पकाने वाले लोहे के तवे से मंजू के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए.

मंजू को बचाने के लिए उस की बहन मनीषा सिदार पर भी सैफ के साथी काली ने उसी तवे से हमला कर दिया. फिर आरोपितों ने गंभीर रूप से घायल बहनों का गला दबा कर हत्या कर दी. बाद में पुलिस ने इस हत्याकांड का परदाफाश करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था.

इसी तरह की एक घटना गाजियाबाद की है. दरअसल, टिकटौक पर चंद वीडियो डाल कर खुद को स्टार समझ लेने वाले कम उम्र के नौजवान इस ऐप के कारण खुद को फिल्मी हीरो और फिल्मी दुनिया का स्टार मानने की भूल करने लगते हैं.

फिल्मी प्रेमकथाओं की तरह वे कभीकभी प्यार की दीवानगी में ऐसी जिद पर उतर जाते हैं, जो न सिर्फ उन की तबाही का सबब बन जाती है बल्कि उस से दूसरों की जान भी चली जाती है.

मामला गाजियाबाद के टीला मोड़ थाना क्षेत्र का है, जहां 17 जून, 2020 को बीच सड़क पर एकतरफा प्यार में एक टिकटौक स्टार ने युवती को चाकू से गोद कर मौत के घाट उतार दिया. टिकटौक पर उस के चार लाख से अधिक फौलोअर्स थे.

घटनाक्रम कुछ यूं है कि टीला मोड़ थाना क्षेत्र के तुलसी निकेतन में बलदेव सिंह पत्नी और बेटी नैना (19) के साथ रहते थे. नैना 2019 में दिल्ली की सुंदर नगरी स्थित स्कूल से 12वीं पास कर नर्सिंग का प्रशिक्षण ले रही थी. 22 जून को उस की शादी थी. 17 जून, 2020 की रात करीब साढ़े 8 बजे नैना अपने मातापिता के साथ घर के पास ही दुकान से नया सिमकार्ड ले कर लौट रही थी.

रास्ते में मांबेटी फास्टफूड खाने के लिए रुक गईं. इसी दौरान पीछे से आया सुंदर नगरी, दिल्ली निवासी शेरखान उर्फ शेरू नैना को खींच कर एक दुकान के किनारे ले गया और चाकुओं से गोद कर उस की हत्या कर दी. नैना की मां मदद के लिए चिल्लाती रहीं लेकिन लोग तमाशबीन बने रहे.

बाद में पुलिस ने शेरखान को गिरफ्तार कर लिया. पता चला वह टिकटौक सेलिब्रिटी है. टिकटौक पर शेरखान के 4 लाख से अधिक फौलोअर्स हैं और वह टीम-02 जिंदा जहर के नाम से अपना यूट्यूब अकाउंट भी चलाता है. नैना भी टिकटौक पर थी, लेकिन शेरखान और नैना एकदूसरे को फौलो नहीं करते थे.

दोनों के बीच 2 साल पहले दोस्ती हुई. शेरखान का नैना के घर भी आनाजाना था. वह नैना से एकतरफा प्यार करने लगा था लेकिन नैना सिर्फ उसे अपना दोस्त मानती थी.

इस बीच नैना के परिवार ने उस की शादी तय कर दी, जो 22 जून को होनी थी. शेरखान को गवारा नहीं था कि नैना किसी और की हो जाए. इसलिए उसने नैना से मिल कर अनुरोध किया कि वह शादी तोड़ दे. लेकिन नैना ने इनकार कर दिया.

नैना को अपनी बनाने के धुन में पहले तो उस ने फेसबुक पर नैना की फोटो डाल कर उसे बदनाम करना चाहा, लेकिन जब इस से भी बात नहीं बनी तो उस ने अपने एक दोस्त के साथ मिल कर नैना की हत्या कर दी.

प्रेम अपराध भी

नैना और मंजू की हत्या महज उदाहरण भर हैं. अगर खोज करें तो टिकटौक के कारण बहुत से घर तबाह हो रहे थे. क्योंकि कहीं पर पत्नी के टिकटौक वीडियो बनाने के जुनून से पति तलाक दे रहा था, तो कहीं लड़कियों के इस जुनून से परिवार की बदनामी हो रही थी.

कुल मिला कर बच्चे हों या बूढ़े, आम हो या खास, पुलिस वाला या बस का चालक टिकटौक का नशा सभी के सिर चढ़ कर बोल रहा था.

कई राज्यों में महिला और युवा पुलिसकर्मियों को वरदी में टिकटौक वीडियो बना कर अपनी वरदी से हाथ धोना पडा. टिकटौक के जूनून में कुछ लोगों ने एडवेंचर वीडियो बनाने के चक्कर में कहीं अपनी तो कहीं दूसरे की जान तक दांव पर लगा दी.

ये भी पढ़ें- पैसे कम फिर भी नंबर ज्यादा

अब जबकि सरकार ने टिकटौक को बैन कर दिया है तो ऐसे में इस के जरिए लाखों कमाने वाले लोग भी सरकार के फैसले के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वे टिकटौक की तरह ही ऐसा कोई प्लेटफौर्म चाहते हैं, जहां उन के टैलेंट को मौके मिलते रहें, कमाई भी होती रहे और चीन की दखलअंदाजी भी न हो. ज्यादा चिंता सिर्फ उन लोगों को है, जिन की रोजीरोटी टिकटौक बन गया था.

लोगों का मानना है कि हमारे देश में टैलेंट भरा पड़ा है, लेकिन ऐसे लोगों को कोई प्लेटफौर्म तो मिले. टिकटौक ने ऐसे सभी लोगों को एक मंच दया था.

भारत में प्रतिबंधित किए जाने के बाद टिकटौक ऐप को सब से ज्यादा नुकसान हुआ है, इसलिए हो सकता है आने वाले दिनों में टिकटौक संचालित करने वाली बाइटडांस लिमिटेड चीन से ही अपना नाता तोड़ ले. क्योंकि कंपनी ने कहा है कि टिकटौक कारोबार के कारपोरेट ढांचे में परिवर्तन करने के बारे में सोचा जा रहा है.

जिस तरह से इस ऐप के मूलरूप से चीनी ओरिजिन को ले कर पूरे विश्व में इस के खिलाफ प्रतिबंध का माहौल बना है, उस के बाद टिकटौक के लिए एक नया प्रबंधन बोर्ड बनाने और चीन के बाहर ऐप के लिए एक अलग मुख्यालय स्थापित करने जैसे विकल्पों पर काम शुरू हो जाए. लेकिन फिलहाल तो यही सच है कि गरीबों के लिए सिनेमा का रूपहला परदा बन कर उन्हें शोहरत और कमाई देने वाला मंच उन से छिन गया है.

– कथा विभिन्न स्रोतों से संकलित

नशे की लत ने बनाया हत्यारा

समाज में फैली क‌ई बुराइयों की लत लोगों में इस कदर हावी है कि उन्हें अच्छे बुरे कामों में अंतर नहीं दिखता. जुआं,सट्टा और लाटरी का खेल हो या शराब, गांजा, स्मैक का नशा हो, इनकी लत जिसे पड़ जाए, उसे इंसान से शैतान बनने में देर नहीं लगती. नशे के आदी हो चुके लोगों को यदि नशा करने नहीं मिलता,तो उसे पाने के लिए वे किसी भी हद तक चले जाते हैं. नशे की लत का शिकार हुए लोगों को अपने घर परिवार या रिश्तों की  कोई फ़िक्र नहीं होती.नशे के लिए अपने घर के वर्तन और बहु वेटियों की इज्जत तक नीलाम कर देते हैं.

एक यैसी ही घटना हाल ही में मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले में  हुई है, जिसमें नशे की आदत के चलते कर्ज में डूबे एक जीजा ने अपने सगे साले का कत्ल कर दिया.

ये भी पढ़ें- प्रेम की पुड़िया में 9 दिन का राज : भाग 1

नरसिंहपुर जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर  छोटे से गांव भैंसा पाला में रहने वाले किसान सुरेश पटेल के पास भी 20 एकड़ ज़मीन है. अपनी जमीन पर गन्ना,धान और गेहूं जैसी फसलों का उत्पादन करने वाले सुरेश की माली हालत भी अच्छी है. सुरेश के छोटे से परिवार में  28 साल का  एक लड़का विनय और एक 25 साल की वेटी का बिबाह आज से 4 साल पहले पास के ही नबलगांव के प्रदीप कुमार लोधी के साथ हुआ था. 30 साल का प्रदीप ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना के तहत  रोजगार सहायक की नौकरी करता था.लेकिन शराब पीने ,  और जुआं खेलने के शौक की वजह से अपनी महिने भर की पगार उसे कम पड़ने लगी थी.  प्रदीप के जब बच्चे  हो गये तो यैसे में उसकी पत्नी उसे शराब छोड़ने और दो पैसे बचाकर रखने की नसीहत देने लगी .,लेकिन प्रदीप शराब और कबाब को छोड़ने तैयार नहीं था.

गरीब मजदूरों को काम देने के लिए चलने वाली मनरेगा योजना की निगरानी के लिए नियुक्त प्रदीप ने करीब एक साल पहले फर्जी अगूंठा लगाकर मजदूरों की लाखों रुपए की मजदूरी हड़प ली थी . गांव के मजदूरों ने  इसकी शिकायत जनपद और जिला पंचायत में कर दी .जिला पंचायत के अधिकारियों ने जांच में प्रदीप को सरकारी रकम के गबन के आरोप में नौकरी से निकाल दिया. सरकारी नौकरी से निकाले जाने के बाद वह परेशान रहने लगा.

भैंसा पाला  गांव से महज 5 किमी दूर नबलगांव में रहने वाले प्रदीप लोधी के पिता एक छोटे से किसान है,जिनके पास 5-6 एकड़ जमीन  है.रोजगार सहायक के पद पर कार्यरत प्रदीप लोधी पर गबन का मामला कायम होने से जब नौकरी हाथ से चली गयी तो शराब और जुआं का शौकीन प्रदीप गांव के लोगों से कर्ज लेकर अपने शौक पूरे करने लगा. नौकरी से बहाली के लिए गबन की रकम भरने के लिए लाखों रुपए की उसे जरूरत थी. वह रात दिन इसी उधेड़बुन में लगा रहता कि  पैसों का इंतजाम किस तरह करे और नौकरी से बहाल हो जाए. एक दिन अपने दोस्त पवन के साथ शराब पी रहे प्रदीप  के शातिर दिमाग में एक आइडिया आया.

ये भी पढ़ें- चार बीवियों का पति : भाग 1

प्रदीप का साला विनय ग्राम भैसा से लगी करीव 20 एकड कृषि भूमि का अकेला मालिक था. जिसकी कीमत आज करोड़ों रुपए है. प्रदीप ने सोचा कि यदि विनय को रास्ते से हटा दिया जाए, तो  ससुराल की 20 एकड़ जमीन में से आधा हिस्से की 10 एकड़ जमीन उसकी पत्नी को मिल  जाएगी और उसकी तंगहाली हमेशा हमेशा के लिए दूर हो जायेगी. प्रदीप ने इस काम में मदद के लिए अपने मित्र पवन को तैयार कर लिया . पवन नबलगांव में ही एक छोटी सी दुकान चलाता था. लेकिन मंहगे मोबाइल और शराब ,कबाब के शौकीन पवन के शौक उस दुकान की आमदनी से पूरे नहीं हो रहे थे. प्रदीप ने  पवन सेन को 20 लाख रूपये देने का लालच दिया तो वह इस काम के लिए जल्द ही तैयार हो गया. दोनों ने उसी रात विनय की  हत्या करने की प्लानिंग बनाई. पहले तो पवन ने अपने एक परिचित से  एक देशी कट्टा (पिस्टल)का जुगाड  किया.फिर 22 जुलाई 2020 को अचानक प्रदीप ने साले विनय को फोन करके बताया कि आज   पार्टी होगी ,तुम अपने खेत पर मिलना . चूंकि इसके पहले भी इस तरह की पार्टियां होती रहती थी, इसलिए विनय ने भी जीजा की खातिरदारी के लिए हामी भर दी.घटना वाले दिन शाम को प्रदीप और पवन मोटरसाइकिल पर सवार होकर नरसिंहपुर गये, जहां  शराब की दुकान से दो  बोतल और मीट मार्केट से मटन लेकर सीधे विनय के खेत पर बने नलकूप पर पहुंच गये.

योजना के अनुसार वहां   शराब  पीने और मीट खाने के बाद बातों के दौरान ही प्रदीप ने पहले से लोड किये गये देशी कट्टे से  गोली चला दी,जो विनय को नाक और आंख के बीच लगी.

गोली लगते ही कुछ समय वह तड़फड़ाता रहा. जब दोनों को यकीन हो गया कि विनय की मौत हो चुकी है,तो दोनों रात के अंधेरे में  ही मोटर साइकिल से अपने गांव बापस आ गये.

सुबह जब विनय की मौत की खबर ससुराल से मिली तो पत्नी को लेकर ससुराल पहुंच गया. प्रदीप ससुराल में विनय की मौत पर दुखी होने का ढोंग करता रहा और पोस्ट मार्टम से लेकर अंतिम क्रिया कर्म में शामिल रहकर पुलिस की गतिविधियों पर नजर भी रखता रहा.

कहते हैं कि कानून के लंबे हाथ अपराधी को पकड़ ही लेते हैं , इसलिए प्रदीप भी पुलिस की निगाह से बच न सका.पुलिस को गांव वालों से पूछताछ में पता चला कि वह घटना वाले दिन विनय के खेत पर दिखा था.

ये भी पढ़ें- ये कैसी सजा

विनय की मौत के बाद  प्रदीप अपनी पत्नी के साथ अपनी ससुराल में ही मौजूद था.इसलिए पुलिस ने जब उससे पूछताछ की तो पहले तो वह पूरी घटना से अनजान बना रहा.लेकिन  पुलिस थाने में बुलाकर  जब प्रदीप और पवन से कड़ाई से पूछताछ की गई तो दोनों ने विनय की हत्या करने का जुर्म कबूल कर लिया . जमीन हड़पने और रूपए पैसों के लालच में अपने इकलौते साले  विनय की हत्या  का मास्टर माइंड विनय की बहिन का सुहाग प्रदीप लोधी ही निकला. जिसने  भी इस खुलासे को सुना, वह अबाक  रह गया.  एक भाई ने जिस बहिन को हंसी खुशी  बैंण्ड-बाजों के साथ अपने पति के घर विदा किया था, उसी पति ने अपनी पत्नी के भाई को हमेशा के लिए मौत की नींद सुला कर  दिया.

यह कहानी बताती है कि शराब और कबाब के शौक ने किस तरह दो युवकों को अपराधी बना दिया.      एक  शराबी पति के द्वारा  अपने ससुराल की जमीन पाने के लिए अपने इकलौते साले की हत्या कर दी ग‌ई .वह भी उस समय जब कि महज कुछ दिन बाद भाई बहिन के पवित्र रिश्ते को रेशम की डोर से कई जन्मों तक बांधे रखने के लिए बहिन अपनी रक्षा की कामना भाई से करते हुऐ उसे राखी बांधती है और इस रेशम की डोर से अपनी रक्षा की दीवार को मजबूत करने का भरोसा भाई से रखती है. लेकिन रक्षाबंधन आने के पहले ही लोभ की सारी हदें पार करते हुए अपनी गंदी हसरतों, नशा की लतों को पूरा करने के लिए खुद अपनी ही पत्नी के इकलौते भाई  का ही खून कर दिया.

आज भी समाज का एक बड़ा तबका दिन रात हाड़ तोड़ मेहनत,मजदूरी करके रूपए तो कमाता है, लेकिन घर पहुंचने के पहले आधे रूपयों की शराब पी जाता है. घर में बीबी , बच्चे इंतजार करते हैं कि परिवार का मुखिया राशन पानी लेकर आयेगा, लेकिन नशे में धुत ये मुखिया घर जाकर बीबी , बच्चों के साथ मारपीट करता है. नशे की लत में पड़े हुए यैसे लोग जघन्य अपराध करके जेल पहुंच जाते हैं और बीबी बच्चों को यतीम होकर रहना पड़ता है.

दरअसल यैसे लोगों को नशा परोसने में सरकार चलाने वाले नेताओं का योगदान कम नहीं है. चुनाव के बक्त वोट हासिल करने के लिए इन्हें मुफ्त में शराब , कबाब और रूपए बांटने वाले नेता ही इन्हें आगे के लिए मुफ्त खोरी की लत लगा देते हैं.

आज भी समाज में कुछ लोग जो नशे की लत से दूर हैं,वे अपना जीवन खुशियों के संग जी रहे हैं.नशे का जहर पूरे परिवार के जीवन को तहस नहस कर देता है और पूरी उम्र रुपए पैसों की तंगहाली झेलना पड़ती है.

ये भी पढ़ें- मनगढ़ंत अपराध का दंड

Bhojpuri एक्ट्रेस रानी चटर्जी ने कराया 18 किलो के लहंगे में फोटोशूट, Photos देख फैंस के उड़े होश

भोजपुरी सिनेतारिका रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) अपनी खूबसूरती के चलते फैन्स के दिलों पर राज करती हैं. वह आये दिन अपने खुबसूरत तस्वीरों को सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं. लॉक डाउन के चलते वह फोटोशूट से एकदम दूर सी हो गई थी और वे  सिर्फ अपनी डेली रूटीन वाली तस्वीरें ही शेयर करती नजर आ रहीं थीं.

ये भी पढ़ें- प्रमोद प्रेमी यादव के इस नए भोजपुरी गाने ने 3 दिन में किए 5 मिलियन व्यूज पार, देखें Video

रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) के फैन्स के लिए एक खुशखबरी है और वे ये है की उन्होंने हाल ही में अपने कई फोटोज सोशल मीडिया पर शेयर किये हैं, जिसमें वह कयामत ढाती नजर आ रही हैं. रानी ने जो तस्वीरें शेयर की हैं वह एक फोटोशूट की हैं. शेयर की गई तस्वीरों में वह अलग अलग लुक  में नजर आ रहीं हैं.

रानी चटर्जी द्वारा शेयर की गईं फोटोज में गुलाबी रंग का खूबसूरत लहंगा पहना है, इसमें सफेद और गुलाबी बॉर्डर की नेट की चुनरी भी है. उन्होंने अपने पोस्ट में इस लहंगे का वजन 18 किलो बताया है. रानी चटर्जी ने फोटोशूट से जुडी तस्वीरों को अलग शेयर करते हुए उस पर अलग अलग कैप्शन भी लिखें हैं जिसमें शेयर किये एक तस्वीर के साथ कैप्शन लिखा है, “दुल्हन बनूं मै तेरी” तो वहीं एक दूसरी तस्वीर के कैप्शन में लिखा है “जब दिल खूबसूरत हो तो हर लिबास आप पर खूबसूरत लगता है” एक तस्वीर में तो वह बिजलियाँ गिराती नजर आ रहीं हैं जिसमें रानी लाल ड्रेस पहन रखा है इस तस्वीर के कैप्शन में उन्होंने लिखा है “रेड हॉट क्वीन और लाल मिर्ची”

ये भी पढ़ें- भोजपुरी स्टार खेसारीलाल यादव और काजल राघवानी के इस गाने ने मचाया धमाल, देखें Video

रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) ने इन तस्वीरों को इन्स्टाग्राम के साथ-साथ अपने फेसबुक पेज पर भी शेयर किया है जिनको लाखों लाइक्स और शेयर मिल चुके हैं. इसी के साथ ही फोटोशूट के दौरान का एक वीडियो भी शेयर किया है जिसे उन्होंने अपने ऑफिसियल यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया है.

ये भी पढ़ें- सुपर स्‍टार खेसारीलाल यादव, प्रदीप और पराग के साथ मिलकर बनाएंगे फिल्‍म ‘लिट्टी चोखा’

इस वीडियों में वह फोटोशूट के लिए सेलेब्रेटीज मेकअप और हेयर आर्टिस्ट राधिका ठक्कर (Radhika Thakkar) से मेकअप कराती हुई नजर आ रही हैं. इस दौरान रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) ने अपने फैन्स को जानकारी देते हुए बताया की “स्किन ड्राइ हो गई है और यह लॉकडाउन का असर है”. उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में मैंने घर पर झाड़ू-पोछा किया था, इसलिए स्किन ऐसी हो गई है.

रानी ने वीडियों में मजाकिया लहजें में कहा की “आज मुझे झाड़ू-पोछा से छुट्टी मिली है”. “उन्होंने कहा कि एक चीज मैंने महसूस की है कि शादी में लड़कियां बहुत वजन लेकर चलती हैं”. रानी ने अपने फैन्स से यह भी पूंछा कि “मैं कैसी लग रही हूं”

जिम में एक्सरसाइज करती नजर आईं Shilpa Shetty, इंस्टाग्राम पर शेयर की वीडियो

बॉलीवुड इंडस्ट्री की सबसे फिटेस्ट एक्ट्रेसेस में से एक शिल्पा शेट्टी (Shilpa Shetty) अपनी फिटनेस के लिए काफी पौपुलर हैं. शिल्पा शेट्टी (Shilpa Shetty) अक्सर अपनी फिटनेस का राज सोशल मीडिया पर फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं और तो और अपने फैंस को फिट रहने के लिए मोटिवेट भी करती हैं. शिल्पा मां बनने के बाद भी इतनी फिट नजर आती हैं कि हर कोई उन्हें देख हैरान रह जाता है और सबके मन में बस एक की सवाल रहता है कि आखिर वे इतनी फिट कैसे हैं.

 

View this post on Instagram

 

Indian handlooms sarees are such a treasure to own! The artistry involved, their uniqueness, and the efforts invested make each piece so incredibly special. Our culture & heritage are so richly woven into them that owning & wearing one makes you feel extremely special. Sharing a glimpse of one of my all-time favourite sarees with you. It looks & feels so regal & elegant, but is light as a feather & so easy to handle. On National Handloom Day today, I salute all the weavers who make hand woven garments look so effortless. I am #VocalForHandmade, are you? ❤️ @narendramodi, @smritiiraniofficial, @ministryoftextilesgoi . . . . . #NationalHandloomDay #VocalForLocal #handlooms #IndianHandlooms #MadeInIndia

A post shared by Shilpa Shetty Kundra (@theshilpashetty) on

ये भी पढ़ें- Bigg Boss 13 फेम असीम रियाज और हिमांशी खुराना का नया गाना हुआ वायरल, देखें Video

45 साल की उम्र में भी शिल्पा शेट्टी (Shilpa Shetty) इतनी फिट हैं कि उनकी फिटनेस से उनकी उम्र का पता ही नहीं चल पाता. अक्सर हमने शिल्पा शेट्टी की फिटनेस का राज योगा को ही माना है और वे खुद भी यही बोलती हैं कि योगा ही उनकी फिटनेस का राज है. वे आए दिन अपनी योग करते हुए फोटोज और वीडियोज अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर करती रहती हैं जिससे कि उनके फैंस उन्हें देख मोटिवेट हो सकें.

 

View this post on Instagram

 

The world around us is gradually opening up and we’re all gearing up to get ‘back’ to our lives. So, today’s workout was dedicated to strengthening the back muscles and enhancing the upper body strength. But, it’s always good to be safe than to be sorry. So, I tried the ‘assisted band pull-ups’ to ease into the flow. It helps you to gradually build your back muscles and further helps you achieve pull-ups without any other assistance. Additionally, it strengthens & tones the back muscles and improves form. I would suggest you to start slow and ensure professional supervision, if you’re doing this for the first time. Tag someone who should get started today 💪🏼 @simplesoulfulapp Miss you, @thevinodchanna! . . . . . #MondayMotivation #SwasthRahoMastRaho #fitness #GetFit2020 #WorkoutAtHome #SSApp #homefitness #pullups #exercise

A post shared by Shilpa Shetty Kundra (@theshilpashetty) on

शिल्पा शेट्टी अपनी फिटनेस को लेकर इतनी पौपुलर हैं कि उन्होनें अपनी खुद की पावर योगा डीवीडी (Power Yoga DVD) भी लॉन्च की है. इसी कड़ी में शिल्पा ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी एक वीडियो शेयर की है जिसमें वे जिम में शोल्डर्स और बैक की एक्सरसाइज करती नजर आ रही हैं. यह वीडियो शिल्पा ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया पर अप्लोड की थी.

ये भी पढ़ें- रिया चक्रवर्ती के सपोर्ट में उतरे आयुष्मान तो भड़कीं कंगना रनौत, केआरके के साथ ऐसे लगाई क्लास

 

View this post on Instagram

 

Our bodies are getting rusty without the same movement, agility, and exercise we were accustomed to; before this pandemic hit us. Daily travels have drastically reduced for a majority of us, leaving us with very little physical activity. For me, carrying my 5-month baby is affecting my lower back… So, I’ve been practicing a combination of yoga asanas like Vyaghrasana, Marjariasana, and Utthana Vyaghrasana. This combination gives my body some much-needed stretches & flexes, strengthens my back, and stretches the abdominal muscles. It also improves mobility in the hips, relieves stiffness in the lower back, and improves the body’s balance. Ah! A great way to start my day. How have you begun yours, tell me in the comments? Tag someone who needs #exercise #strengthening. ~ @simplesoulfulapp . . . . . #MondayMotivation #SwasthRahoMastRaho #SimpleSoulful #SSApp #yoga #yogasehihoga #yogi

A post shared by Shilpa Shetty Kundra (@theshilpashetty) on

इस वीडियो के कैप्शन में शिल्पा ने अपने फैंस के लिए एक बहुत ही बढ़िया मैसेज देते हुए लिखा कि, “हमारे आस-पास की दुनिया धीरे-धीरे खुल रही है और हम अपनी जिंदगी में वापस लौटने की पूरी तैयारी कर रहे हैं. इसलिए, आज की कसरत पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने और शरीर की ऊपरी शक्ति बढ़ाने के लिए हैं. लेकिन सॉरी बोलने की तुलना में सुरक्षित रहना अच्छा है.”

 

View this post on Instagram

 

Time is a luxury for me. On days when I’m engulfed with work, responsibilities, duties, travels and trying to be the best mother, wife, professional… with so much happening simultaneously, it sometimes leaves me scrounging for time. While I try to motivate people to focus on their health, tending to my own health and fitness becomes tough sometimes (believe it or not). It ain’t as easy as it seems…😅So, I’ve been making the best of this precious time to focus on my health… because health is wealth. Investing in yourself is the best investment you’ll ever make… it’ll reap benefits to last you a lifetime, quite literally! So, choose to make time and take good care of yourself. Swasth Raho, Mast Raho💪 @shilpashettyapp . . . . . #SwasthRahoMastRaho #MondayMotivation #FitIndia #fitness #time #luxury #health #wellbeing #yoga #fitness

A post shared by Shilpa Shetty Kundra (@theshilpashetty) on

ये भी पढ़ें- ‘नागिन 5’ में हिना खान के साथ नजर आने वाली हैं Bigg Boss 13 फेम देवोलीना भट्टाचार्जी, पढ़ें खबर

Bigg Boss 13 फेम असीम रियाज और हिमांशी खुराना का नया गाना हुआ वायरल, देखें Video

बिग बॉस सीजन 13 (Bigg Boss 13) के सबसे पौपुलर और सबसे पसंदीदा कंटेस्टेंट्स में से एक असीम रियाज (Asim Riaz) एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं. आपको बता दें कि असीम रियाज (Asim Riaz) बिग बॉस सीजन 13 के पहले रनर-अप रह चुके हैं. भले ही असीम इस शो के विजेता ना रहे हों लेकिन असीम फैंस का भरपूर प्यार और इज्जत कमा कर बाहर निकले थे.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Asim Riaz 👑 (@asimriaz77.official) on

ये भी पढ़ें- रिया चक्रवर्ती के सपोर्ट में उतरे आयुष्मान तो भड़कीं कंगना रनौत, केआरके के साथ ऐसे लगाई क्लास

बिग बॉस (Bigg Boss) के घर से निकलने के बाद असीम कई म्यूजिक वीडियोज में नजर आ चुके हैं और तो और असीम और हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) की जोड़ी को जितना प्यार बिग बॉस के घर में मिलता था उतना प्यार फैंस ने दोनों की म्यूजिक वीडियोज को भी दिया है. ऐसे में हाल ही में आया असीम रियाज और हिमांशी खुराना का नया म्यूजिक वीडिया ‘दिल को मैने दी कसम’ (Dil Ko Maine Di Kasam) रिलीज हुआ है.

आप सब असीम रियाज (Asim Riaz) की फैन फौलोविंग का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हो सिर्फ 2 दिन में ही इस म्यूजिक वीडियो पर 20 मिलियन से भी ज्यादा व्यूज आ चुके हैं और यूट्यूब पर यह वीडिया लगातार ट्रेंडिंग नंबर 1 पर बनी हुई है. हर बार की तरह ही इस म्यूजिक वीडियो में भी असीम रियाज (Asim Riaz) और हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) की जबरदस्त कैमिस्ट्री देखने को मिल रही है.

ये भी पढ़ें- ‘नागिन 5’ में हिना खान के साथ नजर आने वाली हैं Bigg Boss 13 फेम देवोलीना भट्टाचार्जी, पढ़ें खबर

 

View this post on Instagram

 

“DISTANCE” ✨✨Track is out now guys show some love and support to @iamhimanshikhurana @tseries.official

A post shared by Asim Riaz 👑 (@asimriaz77.official) on

इस म्यूजिक वीडियो से पहले भी असीम रियाज और हिमांशी खुराना के 2 म्यूजिक वीडियोज आ चुके हैं जिसे फैंन ने खूब पसंद किया था. इससे पहले आए दोनों म्यूजिक वीडियोज पंजाबी थे जिनका नाम था ‘कल्ला सोहणा नहीं’ (Kalla Sohna Nai) और ‘ख्याल रखेया कर’ (Khyaal Rakhya Kar).

ये भी पढ़ें- जल्द ही दुल्हन बनने जा रही हैं मिहीका बजाज, राणा दग्गूबाती के साथ शेयर की Photos

रिश्तों की डोर : भाग 3- सुनंदा की आंखों पर पड़ी थी पट्टी

बेटे को मन ही मन शर्मिंदगी का एहसास हुआ. मां को उस ने अपने आने की बात इस डर से नहीं बताई थी कि शायद सुनंदा तैयार न हो और सुनंदा की मम्मी ने अपनी मजबूरी जता दी.

‘‘अच्छा मां, मैं सुनंदा से पूछता हूं.’’

विनय ने सुनंदा से बात की. सुनंदा को बुखार में पड़े हुए 5 दिन हो गए थे. बहुत अधिक कमजोरी आ गई थी. विनय चाहते हुए भी उस की वैसी देखभाल नहीं कर पा रहा था जैसी होनी चाहिए थी.

सुनंदा ने भी सोचा कि कौन सा वह हमेशा के लिए रहने जा रही है. जब ठीक हो जाएगी तब वापस आ जाएगी. यह सोच कर उस ने हामी भर दी. अपने फ्लैट में ताला लगा कर विनय, सुनंदा को ले कर मां के पास रहने चला गया.

ये भी पढ़ें- कचरे वाले : कचरा फैलाने वाले लोग हैं कौन

सुनंदा का बुखार अगले कुछ दिनों में और बिगड़ गया. ब्लड टैस्ट हुए. उसे टायफायड हो गया था. मांबेटी ने सुनंदा की देखभाल में रातदिन एक कर दिया. परीक्षा होते हुए भी वानिया, सुनंदा की देखभाल में मां का पूरा साथ देती. मां बहू के सिरहाने बैठ कर उस का सिर सहलाती रहतीं, ठंडे पानी की पट्टियां करतीं. सुनंदा इस समय इतनी दयनीय स्थिति में थी कि मांबेटी अपना सारा वैमनस्य भूल कर उस की देखभाल कर रही थीं.

सुनंदा अर्धबेहोशी में सबकुछ महसूस करती. मां उसे अपने हाथ से खिलातीं, वानिया सूप, जूस व दलिया बना कर लाती. भाई भी निश्ंिचत हो कर नौकरी पर जा पा रहे थे. धीरेधीरे सुनंदा की तबीयत ठीक होने लगी. अभी कमजोरी बहुत ज्यादा थी. वानिया भाभी को सहारा दे कर कुरसी पर बिठा देती, उस का बिस्तर ठीक कर देती, स्पंज कर कपड़े बदल देती. सुनंदा की कमजोरी भी ठीक होने लगी. उसे पता था कि उस की मम्मी ने अपनी मजबूरी जता दी थी और जिस सास के साथ उस ने कभी सीधे मुंह बात नहीं की, हर समय उस का व्यवहार उस के साथ तना हुआ ही रहा, उसी सास ने अपना सारा बैरभाव भूल कर, कितने प्यार व अपनेपन से उस की देखभाल की.

सुनंदा सोचने लगी कि अगर उस की भाभी की तबीयत खराब होती तो क्या मम्मी मजबूरी जता देतीं…शायद नहीं, भाभी उन की जिम्मेदारी हैं और भाभी भी तो कितनी अच्छी हैं. उस के मातापिता का कितना खयाल करती हैं. दूसरे शहर में रहते हुए भी उस के मम्मीपापा के प्रति पूरी जिम्मेदारी समझती हैं. सुनंदा के प्रति भी उन का व्यवहार कितना प्यार भरा है पर उस ने क्या जिम्मेदारी समझी अपनी सासननद के प्रति, जोकि एक तरह से उस के ऊपर ही निर्भर थे. क्या पढ़ने वाली कुंआरी ननद के प्रति उस का कोई फर्ज नहीं था? उस की देखभाल व उस का भविष्य निर्धारित करने का जिम्मा पिता के न होने पर क्या बड़े भाईभाभी का नहीं था. वृद्ध मां आखिर किस की जिम्मेदारी हैं. उन के रवैए से परेशान हो कर ही मां ने उन्हें जाने के लिए कहा था. बीमारी के बाद बिस्तर पर लेटी सुनंदा खुद से ही सवालजवाब करती रही. जब इनसान पर परेशानियां पड़ती हैं तभी अपनों का महत्त्व समझ में आता है और आदमी की विचारधारा भी बदलती है.

सुनंदा ठीक हो गई. एक दिन सुबह नहाधो कर मां के पास बैठ गई और बोली, ‘‘मांजी, मैं अब ठीक हूं…सोचती हूं परसों से आफिस जाना शुरू कर दूं.’’

‘‘ठीक है,’’ मां संक्षिप्त सा जवाब दे कर चुप हो गईं क्योंकि उन के दिल के घाव पर पपड़ी तो जम गई थी पर घाव सूख नहीं पाया था. बीमार सास के प्रति बहू ने भले ही अपना फर्ज नहीं निभाया था पर उन्होंने अपने फर्ज का पालन किया था. उन्होंने मन ही मन सोचा कि सुनंदा अब अपने घर जाने की सोच रही है इसीलिए वह भूमिका बांध रही है. तो जाए…उन्हें एतराज भी क्या हो सकता है.

सुनंदा कोमल स्वर में बोली, ‘‘सोचती हूं…मैं आफिस चली जाती हूं…मुझे भी इतना समय नहीं मिल पाता कि सुबहशाम खाना बना सकूं इसलिए खाना बनाने वाली का प्रबंध कर देते हैं और साफसफाई करने वाली कपड़े धोने का काम भी कर लिया करेगी, उस की तनख्वाह बढ़ा देंगे.’’

‘‘नहीं, इस की जरूरत नहीं है,’’ मां सपाट स्वर में बोलीं, ‘‘मुझे इस की आदत नहीं है और मेरे पास इतने पैसे भी नहीं हैं…फिर हम मांबेटी का काम ही कितना होता है. तुम ऐसा प्रबंध अपने घर पर कर लो,’’ मां अपनी बात स्पष्ट करती हुई बोलीं.

सुनंदा ठगी सी चुप हो गई. थोड़ी देर बाद बोली, ‘‘क्या यह मेरा घर नहीं है, मांजी?’’

‘‘यह घर तुम्हारा था…तुम ने इसे अपना घर नहीं समझा…इसलिए यह सिर्फ मेरा और वानिया का है.’’

ये भी पढ़ें- कल्लो : क्या बचा पाई वो अपनी इज्जत

सुनंदा मां के शब्दों से आहत तो हुई पर उसे आत्मसात करती हुई बोली, ‘‘आप का गुस्सा जायज है, मांजी. मैं आप से माफी मांगती हूं.’’

‘‘मेरे मन में तुम्हारे लिए गुस्सा, माफी, प्यार कुछ भी नहीं है…तुम अपने घर में खुश रहो, मैं अपने घर में खुश हूं.’’

‘‘मां, आप झूठ बोल रही हैं…आप हमें बहुत प्यार करती हैं पर हमारी गलतियों पर आए गुस्से ने आप के प्यार को ढक दिया है.’’

इस बात का मां से कोई जवाब नहीं दिया गया. उन की आंखों में आंसू झिलमिला गए. सुनंदा ने हिम्मत कर के मां के दोनों हाथ पकड़ लिए.

‘‘मां, मुझे अपनी गलतियों का एहसास है…सिर्फ हमारे गलत विचार ही हमारी सोच को गलत तरफ मोड़ देते हैं. मुझे माफ कर दीजिए, मैं अपने घर वापस लौटने की इजाजत चाहती हूं लेकिन इस बार आप की बेटी बन कर.’’

सुनंदा के शब्दों की कोमलता, पश्चात्ताप व ग्लानि से मां के मन का गुबार बहने लगा. उन्होंने बहू को गले लगा लिया और बोलीं, ‘‘अपने बच्चों से किस को प्यार नहीं होता सुनंदा…दिलदिमाग जुडे़ हों, अपनों पर विश्वास हो तो हर रिश्ते की बुनियाद मजबूत होती है. आपस में सहज बातचीत है तो कुछ भी खराब नहीं लगता. गलतफहमियां नहीं पनपतीं…यह तुम्हारा घर है, आज ही जा कर सामान ले आओ.’’

सुनंदा मांजी के गले लगे हुए सोच रही थी, ‘आखिर ऐसा क्या था जो उन दोनों सासबहू के बीच में से बह गया और सबकुछ पारदर्शी हो गया. शायद उस की गलत सोच, गुमान, पराएपन का भाव, अपना न समझने का भाव, उस का अहम, यही सबकुछ बह गया था.

रिश्तों की डोर : भाग 2- सुनंदा की आंखों पर पड़ी थी पट्टी

वानिया मां को दवा देने के बाद जूठे बरतन उठा कर कमरे से बाहर चली गई. मां विचारमग्न हो चुपचाप लेट कर सोचने लगीं कि दोनों अच्छा कमाते हैं, जब अपने पास समय नहीं है तो जरा भी जिम्मेदारी महसूस करें तो खाना बनाने के लिए किसी कामवाली का प्रबंध कर सकते हैं, लेकिन पैसे भी नहीं खर्च करना चाहते, समय भी नहीं है, भावना भी नहीं है. दूसरा दिन भर खटता रहे तो उस के लिए तुम्हारे पास दो मीठे बोल भी नहीं हैं.

वानिया ठीक कहती है, जब अपनी भाषा सामने वाले की समझ में नहीं आए तो उस की भाषा में उसे समझाने की कोशिश तो करनी ही चाहिए. आखिर उसे अपनी गलती और दूसरे के महत्त्व का एहसास कैसे हो? मां कई तरह से सोचती रहीं. बेटे को रहने के लिए कंपनी की ओर से अच्छाभला किराया मिलता है. यह घर उन का है, उन के पति ने बनाया था. आधा घर किराए पर उठा कर भी वह और वानिया अपनी जीविका चला सकते हैं. पति का जो थोड़ाबहुत पैसा उन के नाम जमा है वह वानिया के विवाह व शिक्षा आदि के लिए काफी है.

ये भी पढ़ें- आ अब लौट चलें : भाग 1

ऐसा सोच कर कुछ निश्चय कर मां निश्ंचिंत हो कर सो गईं. थोड़े दिन बाद मां ठीक हो गईं. बेटेबहू का रवैया जैसा चल रहा था चलता रहा. एक दिन मौका देख कर मां बहू को सुनाते हुए बेटे से बोलीं, ‘‘विनय, तुम्हें तो कंपनी से अच्छाखासा किराया मिलता है…कहीं अपने लिए किराए का अच्छा सा फ्लैट देख लो.’’

‘‘क्यों, मां?’’ विनय अवाक् सा मां का चेहरा देखता रह गया. सुनंदा की भी त्योरियां चढ़ गईं.

‘‘बात सीधी सी है, बेटा. वानिया अब बड़ी हो रही है…उस की शादी के लिए भी पैसा चाहिए. मैं चाहती हूं कि आधा घर किराए पर दे दूं और वह पैसा वानिया की शादी के लिए जोड़ दूं, वरना तो सारा भार तुम्हारे ऊपर ही पड़ जाएगा,’’ मां कोमल स्वर में बोलीं.

सुनंदा की समझ में चुपचाप बात आ गई. विनय भी थोड़ी देर चुप खड़ा रहा फिर अपने कमरे में चला गया, लेकिन सुनंदा के दिल में उथलपुथल मच गई. अलग रहने पर इन दोनों की जिम्मेदारी भी धीरेधीरे कम हो जाएगी, फिर खत्म भी हो सकती है. साथ रहने पर वानिया की शादी उन्हें अपने स्तर के हिसाब से करनी पड़ेगी, पैसा खर्च होगा. अलग रह कर दोनों जैसा चाहे गरीबी में रहें और जैसी चाहें शादी करें, अगर चाहेंगे तो वे दोनों भी बस, शामिल हो जाएंगे. ऐसा सोच कर वह विनय के पीछे पड़ गई. विनय पहले तो नहीं माना फिर कई तर्कवितर्क के बाद मान गया.

3-4 दिन की मेहनत के बाद आखिर विनय को 2 बेडरूम का खूबसूरत सा फ्लैट मिल गया और दोनों खुशीखुशी नए फ्लैट में चले गए. वानिया तो बहुत खुश हुई पर मां का दिल टीस गया. 1-2 दिन वह थोड़ा असमंजस की दशा में रहीं फिर धीरेधीरे उन्हें भी अच्छा लगने लगा.

मकान का नीचे का हिस्सा किराए पर दे कर मांबेटी ऊपरी हिस्से में चली गईं. किरायेदार आने से जहां उन को सुरक्षा का आभास हुआ वहीं पैसा आने से आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो गई. वानिया अपनी पढ़ाई पर अच्छी तरह ध्यान दे रही थी. मां की देखभाल तो वह वैसे भी खुद ही कर रही थी.

उधर सुनंदा की खुशी चार दिन भी नहीं रही. दिन भर घर बंद रहने की वजह से कामवाली काम करे तो कैसे. पैसा होते हुए भी अपने लिए सुविधा जुटाना उन के लिए मुश्किल हो रहा था. समय के अभाव में घर अस्तव्यस्त रहता था. खाने का कोई ठिकाना नहीं था. घरबाहर संभालते- संभालते सुनंदा को 24 घंटे भी कम लगने लगे. सुनंदा पर काम का दबाव बढ़ा तो विनय भी कहां अछूता रहता. घर के कुछ काम उस के भी हिस्से में आ गए. जिस की वजह से आफिस में भी कार्यक्षमता पर असर पड़ने लगा. जहां एक तरफ मांबेटी की जीवनशैली सुधर गई वहीं दूसरी तरफ विनय और सुनंदा की जीवन- शैली गड़बड़ा गई. आराम व निश्चिंतता खत्म हो गई थी.

अति व्यस्त दिनचर्या से सुनंदा की तबीयत गड़बड़ा गई. 1-2 दिन तो किसी तरह से विनय ने देखभाल की लेकिन ज्यादा छुट्टी लेना उस के लिए मुश्किल था. थकहार कर उस ने मां को फोन किया. मजबूरी के चलते सुनंदा चुप रह गई. उस ने मां से कहा कि वह थोड़े दिन उन के पास रहने को आ जाएं.

‘‘कैसे आ सकती हूं, बेटा,’’ मां बेटे की बात सुन कर बोलीं, ‘‘तू तो जानता है कि वानिया के पेपर चल रहे हैं…इस के अलावा बच्चे उस से ट्यूशन पढ़ने आते हैं इसलिए वह मेरे साथ आ नहीं सकती और उसे अकेला छोड़ कर आना मेरे लिए संभव नहीं है.’’

‘‘सुनंदा की तबीयत खराब है, मां.’’

मां थोड़ी देर चुप रहीं, अपनी बीमारी के दौरान बेटेबहू का रवैया याद आया. दिल ने चाहा कि कोई कड़वा सा जवाब दे दें लेकिन फिर अपने को संयत कर के बोलीं, ‘‘बेटा, मजबूरी है, नहीं तो मैं आ ही जाती. सुनंदा की मम्मी को बुला लो थोड़े दिन के लिए…उन के साथ ऐसी मजबूरी नहीं है.’’

मजबूर हो कर विनय ने सुनंदा की मम्मी को फोन किया. उन्होंने भी अपनी न आ पाने की मजबूरी जता दी, ‘‘सुनंदा के पापा को छोड़ कर कैसे आ सकती हूं बेटा, उन की तबीयत भी ठीक नहीं रहती है.’’

ये भी पढ़ें- कचरे वाले : कचरा फैलाने वाले लोग हैं कौन

विनय सोच में पड़ गया. मां के पास जाने को सुनंदा तैयार नहीं होगी लेकिन अपनी मम्मी के पास चली जाएगी. यही सोच कर बोला, ‘‘ठीक है मम्मी, फिर मैं सुनंदा को आप के पास छोड़ देता हूं क्योंकि यहां दिन भर फ्लैट में अकेले कैसे रहेगी. मैं भी अब छुट्टी नहीं ले सकता हूं.’’

सुनंदा की मम्मी चुप हो गईं. बीमार बेटी की देखभाल तो करनी ही पड़ेगी. साथ में दामाद भी तो यहीं आएगा. 2 लोगों का काम बढ़ जाएगा. नौकर छुट्टी पर गया था. उन के खुद के बस का था भी नहीं.

‘‘बेटा, नौकर तो इन दिनों छुट्टी पर है…मुझ से तो अपने ही दोनों का काम मुश्किल से हो पा रहा है, तुम अपनी मां को क्यों नहीं बुला लेते,’’ कह कर उन्होंने फोन रख दिया.

क्या करे अब…एक दिन की और छुट्टी लेनी पड़ेगी. उधर मां का मन शांत नहीं हो पा रहा था इसलिए शाम होतेहोते उन्होंने बेटे को फोन कर ही दिया, ‘‘कोई इंतजाम हुआ बेटा. नहीं तो अगर सुनंदा तैयार हो तो तुम लोग थोड़े दिनों के लिए यहां आ जाओ…जब सुनंदा ठीक हो जाए तब चले जाना.’’

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

प्रेम की पुड़िया में 9 दिन का राज : भाग 3

रंजीत का शव 23 जून को तड़के साढ़े 3 बजे बरामद हो गया था. उस के बाद से 25 जून शाम साढ़े 6 बजे तक वैशाली ने 6 बयान बदले. उस ने पुलिस को खूब छकाया. बारबार बयान बदल कर पुलिस को उलझाने की कोशिश करती रही.

उस ने पहला बयान 21 जून की दोपहर 12 बजे दिया था, जिस में उस ने कहा कि रंजीत और उस के प्रेम संबंध थे, जो एक साल पहले खत्म हो चुके थे. अब उस से उस की बात नहीं होती. उस ने दूसरा बयान 22 जून को रात 12 बजे दिया. मोबाइल की काल डिटेल्स आने के बाद पुलिस ने उसे दोबारा चौकी बुलाया. तब उस ने बताया कि रंजीत की मौत हो चुकी है. उस की लाश खेत में पड़ी है. उस ने आत्महत्या की है.

ये भी पढ़ें- मासूम किशोरी के साथ वहशीपन का नंगा नाच

तीसरा बयान 23 जून की सुबह 6 बजे दिया. जिस में उस ने कहा कि 30 जून को रंजीत की शादी थी. हम दोनों ने आत्महत्या करने का फैसला किया था. 14 जून की सुबह रंजीत ने उसे काल कर के गन्ने के खेत में बुलाया था, जहां रंजीत ने खुद को गोली मार ली थी. इस के बाद मुझे भी गोली मारनी थी, लेकिन मैं घबरा कर घर भाग आई.

उस ने चौथा बयान उस ने 24 जून की दोपहर 11 बजे दिया, जिस में कहा कि रंजीत ने मेरे खेत में पहुंचने से पहले ही आत्महत्या कर ली थी. मैं ने रंजीत के भाई को काल की थी, पर उस ने काल रिसीव नहीं की तो मैं ने अपनी मां को फोन कर के मौके पर बुला लिया और मां के साथ वहां से घर चली गई.

9 दिन अपने प्रेमी की मौत का राज सीने में दफन करने और 117 घंटे में 7 बार बयान बदलने वाली वैशाली ने आखिरकार शुक्रवार सुबह सच उगल ही दिया. थाना सिविल लाइंस के थानाप्रभारी नवल मारवाह ने वैशाली के 7वें बयान के आधार पर 11 दिन बाद रंजीत की हत्या का खुलासा कर दिया. पुलिस के अनुसार वैशाली और उस की मां ने रंजीत की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मौके से मिला तमंचा, कारतूस और सिर में मिले गोली के 2 टुकड़े, फोटोग्राफी और वीडियो फुटेज, फोरैंसिक लैब की रिपोर्ट और बैलिस्टिक एक्सपर्ट की राय जैसे सबूत मांबेटी के खिलाफ काफी थे.

पुलिस ने पूछताछ के लिए वैशाली के भाई और उस के पिता को भी हिरासत में लिया था. दोनों से पूछताछ की गई, लेकिन उन की कोई भूमिका सामने नहीं आई. फरार शुक्ला के कमरे की तलाशी के बाद पुलिस ने उस का बैंक खाता फ्रीज करा दिया.

पुलिस को गुमराह करने की कला के बारे में वैशाली ने बताया कि उस ने अभिनेता अजय देवगन की फिल्म ‘दृश्यम’ एक महीने में 5 बार देखी थी. इसी से प्रेरणा ले कर रंजीत की हत्या का राज अपने सीने में दफन करने की सोची.

फिल्म की तरह ही उन्होंने भी रंजीत की हत्या करने के बाद किया. साथ ही वैशाली ने अपनी मां व मामा को भी यही बताया था कि हो सकता है पुलिस को रंजीत की लाश मिल जाए, लेकिन उन्हें अपने बयान पर अड़े रहना है. रंजीत अपने घर एक डायरी रख कर आया था, जिस में उस ने आत्महत्या के बारे में लिख दिया था. इस से हमें उस का लाभ मिल सकता है. बस उन्हें अपनी तरफ से कोई ऐसी हरकत नहीं करनी है कि पुलिस को कोई शक हो.

वैशाली और उस की मां गुड्डी ने इस हत्याकांड की जो कहानी बताई, वह कुछ इस तरह थी—

रंजीत फैक्ट्री में नौकरी करने से पहले गांव में परचून की दुकान चलाता था. वैशाली अकसर उस की दुकान सामान लेने जाती थी. दोनों का दुकान पर ही संपर्क हुआ, जो धीरेधीरे प्यार में बदल गया. इस की भनक गांव वालों के साथ दोनों के घर वालों को भी लग गई.

रंजीत वैशाली से शादी करना चाहता था. लेकिन वैशाली के घर वाले तैयार नहीं थे. इस बात को ले कर गांव में पंचायत भी हुई. इस के बाद रंजीत के घर वालों ने उस की शादी थाना छजलैट के गांव भीनकपुर की एक युवती से तय कर दी. शादी 30 जून, 2020 को होनी थी.

लेकिन रंजीत इस शादी से खुश नहीं था. इस बीच उस की और वैशाली की मोबाइल पर बातचीत जारी रही. रंजीत अपनी प्रेमिका वैशाली को जीजान से चाहता था. उस के बिना वह जीने की कल्पना भी नहीं कर सकता था. उस ने वैशाली से कह दिया था कि वह शादी करेगा तो उसी से, नहीं तो जान दे देगा.

रंजीत वैशाली पर दबाव बना रहा था कि उस के साथ शादी कर ले या फिर दोनों साथसाथ आत्महत्या कर लें. रंजीत वैशाली को बारबार काल कर के टौर्चर करने लगा तो वह तंग आ गई. घटना वाले दिन रंजीत ने उसे आत्महत्या के लिए गन्ने के खेत में बुलाया था.

ये भी पढ़ें- चार बीवियों का पति : भाग 1

योजना के मुताबिक वह खेत में पहुंच गई. कुछ ही देर में वैशाली की मां गुड्डी और उस का मुंहबोला मामा शुक्ला भी वहां आ गए. इस के बाद मामा ने पीछे से रंजीत के हाथ पकड़ कर उसे जमीन पर गिरा दिया. पहली गोली वैशाली ने रंजीत की कनपटी पर मारी. जबकि दूसरी गोली उस की मां ने रंजीत की दाहिनी आंख और नाक के बीच सटा कर मारी. मुंहबोला मामा अपने साथ तमंचा और कारतूस ले कर आया था. लेकिन दोनों गोलियां रंजीत के तमंचे से ही मारी गई थीं.

रंजीत की हत्या करते समय मांबेटी दोनों के हाथ खून से सन गए थे, जिन्हें उन्होंने खेत में ही घास से पोंछ दिया था. रंजीत की हत्या कर के तीनों घर आ गए. घर आने के बाद तीनों ने चाय पी और नाश्ता किया.

वैशाली की मां उस की शादी अपनी जाति के किसी अच्छे घर में करना चाहती थी. समझाने पर वैशाली भी मान गई थी. लेकिन रंजीत वैशाली का पीछा नहीं छोड़ रहा था. तब उस ने शुक्ला के साथ मिल कर उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाई. 14 जून को उन्हें मौका मिल गया.

26 जून को पुलिस ने वैशाली और उस की मां गुड्डी को कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

प्रेम की पुड़िया में 9 दिन का राज : भाग 2

उसी दिन शाम को 5 बजे पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई. इस रिपोर्ट ने पुलिस की सोच बदल दी. पता चला कि रंजीत के सिर में एक नहीं, 2 गोलियां मारी गई थीं, जो 3 टुकड़ों में बंट कर सिर में फंस गई थीं. इन में से एक गोली कनपटी पर तो दूसरी आंख में मारी गई थी. जाहिर है आत्महत्या करने वाला व्यक्ति खुद को 2 गोली कभी नहीं मार सकता.

निस्संदेह रंजीत को दोनों गोलियां किसी और ने मारी थीं. इस के बाद पुलिस ने हत्या वाली थ्योरी पर जांच करनी शुरू की. वैशाली की घुमावदार बातों से साफ लग रहा था कि अगर काल डिटेल्स न होती तो यह भी पता नहीं चलता कि रंजीत की लाश गन्ने के खेत में पड़ी है. हैरत की बात यह थी कि वैशाली ने इस घटना के बारे में अपने घर वालों को भी कुछ नहीं बताया था. यानी उस ने अपने प्रेमी की मौत की बात 9 दिन तक अपने सीने में दफन रखी थी.

ये भी पढ़ें- मनगढ़ंत अपराध का दंड

मंगलवार को पूरे दिन रंजीत की मौत को खुदकुशी बताने वाली सिविल लाइंस पुलिस ने देर रात मृतक के पिता भोपाल सिंह की तरफ से वैशाली, उस के पिता भूपेंद्र, मां गुड्डी, भाई विक्की और मुंहबोले मामा शुक्ला के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया.

मृतक के घर वाले पुलिस की अब तक की जांच से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे. रंजीत की मौत के मामले में घर वालों ने समानांतर जांच की थी, जिस ने पुलिस पड़ताल की पोल खोल कर रख दी थी. पुलिस शुरू से इस मामले को आत्महत्या मान कर चल रही थी, पुलिस ने गन्ने के उस खेत में 20-25 कदम दूर तक भी पड़ताल करना मुनासिब नहीं समझा था. बुधवार यानी 24 जून को रंजीत के घर वालों ने मामले से जुड़ी कुछ अहम चीजें ढूंढ निकाली थीं.

पुलिस ने वैशाली की बातों पर तो विश्वास किया, लेकिन रंजीत के घर वालों की बातों पर नहीं. इसलिए 24 जून की सुबह चमन सिंह, विमल और उन के पिता घर के अन्य लोगों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने उसी गन्ने के खेत में खोजबीन शुरू की, जहां से रंजीत का शव मिला था.

खोजबीन में घटनास्थल से 20-25 कदम की दूरी पर एक थैली रखी मिली, जिस में 4 कारतूस रखे थे. उस के पास ही रंजीत का बनियान और जूते मिले.

यह जानकारी जब गांव में फैली तो मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई. इस के बाद पुलिस को सूचना दी गई. सूचना मिलने पर अगवानपुर पुलिस चौकी की पुलिस पहुंच गई. पुलिस ने कारतूस, बनियान, जूते और हड्डियों के अवशेष सील कर दिए.

जबकि 23 जून को पुलिस ने गन्ने के खेत से रंजीत का शव बरामद किया था. लेकिन तब यह सामान बरामद नहीं हुआ था. जिस तरह मामले से जुड़ी अहम चीजें खोज निकाली गईं, उस से पुलिस पड़ताल पर गंभीर सवाल भी उठने लगे.

एएसपी दीपक भूकर के अनुसार रंजीत के घर वालों को 4 कारतूस मिले थे. कारतूस चमकीले हैं, जबकि 23 जून को मिला कारतूस इतना चमकीला नहीं था. शव की कुछ हड्डियां गायब थीं. पोस्टमार्टम में भी 10 फीसदी कम हड्डियां बताई गई थीं. कई दिनों तक शव जंगल में पड़ा होने से संभव है जानवरों ने शव खा लिया हो. इसी से कुछ हड्डियां इधरउधर हो गई हों.

पुलिस ने मामले की जांच को गंभीरता से लेते हुए वैशाली से फिर से पूछताछ करने का फैसला किया. वैशाली किसी थ्रिलर फिल्म जैसी कहानियां बना रही थी. 9 दिन प्रेमी की मौत का राज सीने में छिपाए रखने वाली वैशाली ने 24 घंटे पुलिस को छकाने के बाद फिर अपनी कहानी की स्क्रिप्ट बदल दी थी.

पुलिस ने उस से पूछताछ की तो उस ने बताया कि गन्ने के खेत में उस के पहुंचने से पहले ही रंजीत ने खुद को गोली मार ली थी. तब उस ने रंजीत के मोबाइल से उस के भाई को काल किया था. लेकिन उस ने काल रिसीव नहीं की. फिर उस ने अपनी मां को फोन किया.

उस ने बताया कि मां से उस की करीब 9  मिनट बात हुई. वह फोन पर रो रही थी, उस की मां ने काल जारी रखी और बात करतेकरते उस के पास पहुंच गई. मां उसे ले कर घर लौट आई. पुलिस जांच में अब तक यह भी सामने आ चुका था कि रंजीत की लाश गन्ने के खेत में पड़ी होने की जानकारी वैशाली के मांबाप को भी थी.

24 जून की दोपहर पुलिस ने वैशाली की मां गुड्डी को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने मांबेटी को आमनेसामने बैठा कर पूछताछ की. पता चला कि पिछले 7 साल से वैशाली के घर एक व्यक्ति शुक्ला रहता था, जो घटना के बाद से फरार है. उस का मोबाइल भी बंद था. वैशाली ने उसे मुंहबोला मामा बताया.

ये भी पढ़ें- दगाबाज दोस्त, बेवफा पत्नी

शुरू में पुलिस जांच में वैशाली के बयान और रंजीत के घर मिली उस की पर्सनल डायरी आत्महत्या की ओर इशारा कर रहे थे. डायरी में रंजीत ने इस बात पर खेद प्रकट किया था कि उस का विवाह उस की मरजी के खिलाफ हो रहा है. डायरी में उस ने परिवार वालों को नसीहत दी थी कि छोटे भाई की शादी उस के मनमुताबिक करें. उस ने डायरी में अपनी एफडी छोटे भाई को देने की बात भी की थी. पुलिस ने इसी आधार पर आत्महत्या की कड़ी से कड़ी जोड़ने का प्रयास किया था.

वारदात की एकलौती चश्मदीद वैशाली ने प्रेमी रंजीत की मौत को ले कर अब तक जो दावे किए थे, उन में काफी विरोधाभास था. उस के रोजरोज बदल रहे बयानों ने पुलिस को चक्कर में डाल दिया था.

उस ने 105 घंटे में 6 बार अपने बयान बदले. हर बार उस का नया बयान सामने आ रहा था. पुलिस उस की इस स्वीकारोक्ति पर चौंकी, जब उस ने कहा कि गन्ने के खेत में उस ने खुद रंजीत को 2 गोलियां मारी थीं, क्योंकि वह उस पर शादी करने का दबाव बना रहा था.

वैशाली के साथ उस की मां ने भी कबूलते हुए कहा कि वह खुद और वैशाली का मामा शुक्ला वैशाली के साथ गए थे. चूंकि दोनों अलगअलग बिरादरी के थे, इसलिए शादी नहीं हो सकती थी. उस ने बहाने से वैशाली को गन्ने के खेत में बुलाया. वहां वैशाली ने मां और मामा के सामने ही 2 गोलियां मार कर रंजीत की हत्या कर दी.

हालांकि पुलिस सारी कडि़यों को आपस में जोड़ रही थी. पुलिस ने फरार आरोपी शुक्ला के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई. उस की लोकेशन गोरखपुर की आ रही थी. पुलिस की एक टीम उस की तलाश में जुटी थी. यह जानकारी मिलने पर वह टीम गोरखपुर के लिए रवाना हो गई.

ये भी पढ़ें- मासूम किशोरी के साथ वहशीपन का नंगा नाच

दूसरी टीम वैशाली और उस की मां से लगातार पूछताछ कर रही थी. जबकि तीसरी टीम लड़की के पिता व भाई से पूछताछ में जुटी थी. चौथी टीम सबूत जुटाने में लगी थी. पुलिस को लग रहा था कि वैशाली के मामा शुक्ला की इस मामले में अहम भूमिका रही होगी.

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें