मेरा गांव हरियाणा के जींद जिले में है और नाम है रत्ता खेड़ा. वहां से जुड़ा बचपन का एक किस्सा आज भी मेरे जेहन में घूमता रहता है. चूंकि गांव है और वहां आज भी खेतीबारी व पशुपालन से रोजीरोटी चलती है, तो ज्यादातर किसान घर के पास ही अपनी खाली पड़ी जमीन पर पशुओं के चारे तूड़ी को सालभर जमा कर के रखने के लिए सरकंडे और दूसरी लचीली लकड़ियों से गुंबदनुमा कमरा बना लेते हैं. उस कमरे में एक सुराखनुमा छोटे दरवाजे से तूड़ी निकाली जाती है तो उसे कूप कह दिया जाता है.

Digital Plans
Print + Digital Plans

साथ ही मिलेगी ये खास सौगात

  • अनगिनत लव स्टोरीज
  • मनोहर कहानियां की दिलचस्प क्राइम स्टोरीज
  • पुरुषों की हेल्थ और लाइफ स्टाइल से जुड़े नए टिप्स
  • सेक्सुअल लाइफ से जुड़ी हर प्रॉब्लम का सोल्यूशन
  • सरस सलिल मैगजीन के सभी नए आर्टिकल
  • भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री की चटपटी गॉसिप्स
  • समाज और देश से जुड़ी हर नई खबर
Tags:
COMMENT