1997 में बॉलीवुड इंडस्ट्री के बादशाह कहे जाने वाले एक्टर शाहरूख खान (Shahrukh Khan) के साथ फिल्म ‘परदेस’ (Pardes) से अपने फिल्मी करियर की शुरूआत करने वाली एक्ट्रेस महिमा चौधरी (Mahima Chaudhary) ने अपनी फिल्मों से हम सबको काफी एंटरटेन किया है. भले ही एक्ट्रेस महिमा चौधरी इन दिनों फिल्मों से गायब हैं लेकिन हम आपके लिए लेकर आए हैं उनके कुछ ऐसे लुक्स जिसे देख आप सभी को होश उड़ जाएंगे.

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एक्ट्रेस महिमा चौधरी (Mahima Chaudhary) ने अपनी पहली ही फिल्म परदेस के लिए ‘बेस्ट फीमेल डेब्यू’ (Best Female Debut) का अवार्ड हासिल किया था और उसके बाद उन्होनें एक से बढ़कर एक बेहतरीन फिल्में करनी शुरू कर दी थीं. ‘परदेस’ (Pardes), ‘धड़कन’ (Dhadkan), ‘दीवाने’ (Deewane), ‘ओम जय जगदीश’ (Om Jai Jagdish), ‘बाघबान’ (Baghban), ‘लज्जा’ (Lajja) जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में काम कर महिमा चौधरी अपने फैंस की फेवरेट बन चुकी थीं.

आपको बता दें कि एक्ट्रेस महिमा चौधरी (Mahima Chaudhary) की पहले की फोटोज और अब की फोटोज में काफी बदलाव आया है. महिमा चौधरी पहले से और भी ज्यादा खूबसूरत हो गई हैं और वे आए दिन अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अपनी लेटेस्ट फोटोज फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं जिन्हें उनके फैंस काफी प्यार देते हैं.
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आप सब को यह जानकर हैरानी होगी कि जिस समय एक्ट्रेस महिमा चौधरी (Mahima Chaudhary) एक से एक सुपरहिट फिल्में कर रही थीं उस समय उनकी कार का एक ट्रक से एक्सीडेंट हो गया था जिसकी वजह से उनके चेहरे पर काफी जख्म आ गए थे. जख्म आने की वजह से उनका चेहरा काफी बिगड़ गया था. एक इंटरव्यू के दौरान एक्ट्रेस ने बताया कि एक्सीडेंट के बाद जब उन्होनें अपना चेहरा देखा तो वे खुद बुरी तरह से डर गई थीं.

अब जो कि महिमा चौधरी ने अपने चेहरे की सर्जरी करवा ली है तो उन्होनें बताया कि डॉक्टर्स ने उनके चेहरे में से 68 कांच के तुकड़े निकाले थे. सर्जरी के बाद उन्हें डॉक्टर्स ने धूप में निकलने से मना कर दिया था जिसके चलते वे फिल्मों से दूर हो गई थीं. अब आप सबको यह जानकर काफी खुशी होगी कि एक्ट्रेस अब पूरी तरह से ठीक हो चुकी हैं.
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बॉलीवुड इंडस्ट्री के ‘खलनायक’ कहे जाने वाले एक्टर संजय दत्त (Sanjay Dutt) की तबियत इन दिनों काफी खराब है. हाल ही में आई खबरों के अनुसार संजय दत्त (Sanjay Dutt) को लंग कैंसर (Lung Cancer) है और तो और उनका ये कैंसर तीसरे स्टेज का है. हाल फिलहाल संजय को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है लेकिन वे जल्द ही अपने इलाज के लिए अमेरिका जाने वाले हैं. इसी के चलते सभी फैंस उनके जल्द से जल्द ठीक होने की दुआ कर रहे हैं.
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सबसे पहले तो संजय दत्त (Sanjay Dutt) को सांस लेने में दिक्कत आई जिसके लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और अस्पताल में भर्ती होने के बाद पता चला कि उन्हें लंग कैंसर है. हाल ही में आई ताजा खबरों की माने तो बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट (Alia Bhatt) और एक्टर रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) संजय दत्त के घर उनका पता लेने पहुंचे थे. इसी के चलते आलिया भट्ट और रणबीर कपूर की फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी.
जहां एक तरफ रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) को ब्लैक कलर की टी-शर्ट के ऊपर ब्लू कलर की शर्ट और जींस पहने देखा गया तो वहीं आलिया भट्ट (Alia Bhatt) ने ग्रे कलर की टी-शर्ट और पैंट पहनी हुई थी. संजय दत्त (Sanjay Dutt) की तबियत को देखते हुए उनकी पत्नी मान्यता दत्त (Manyata Dutt) ने फैंस से गुजारिश की है कि वे संजय के लिए दुआ करें. मान्यता दत्त का कहना है कि,- ‘मैं उन सभी का शुक्रिया अदा करती हूं जिन्होंने संजय के जल्द ठीक होने की दुआ की है. हमें इस समय से गुजरने के लिए हिम्मत और दुआओं की जरूरत है. हमारा परिवार पहले बहुत सी मुश्किलों से गुजर चुका है लेकिन मुझे यकीन है कि यह समय भी गुजर जाएगा. संजू के फैंस से मेरी गुजारिश है कि वो अनुचित अफवाहों पर ध्यान ना दें बल्कि प्यार और समर्थन कर हमारी मदद करें. संजू और हमारा परिवार हमेशा से फाइटर रहे हैं. भगवान ने एक बार फिर इन चुनौतियों से गुजरने के लिए हमें चुना है. हम सभी आपकी प्रार्थना और आशीर्वाद चाहते हैं, और हम जानते हैं कि हम हमेशा दूसरी तरफ विजेता बनकर उभरेंगे. हम इस अवसर का उपयोग पॉजिटिविटी फैलाने के लिए करें.’
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बात करें संजय दत्त (Sanjay Dutt) की आने वाली फिल्म की तो उनकी आने वाली फिल्म ‘सड़क 2’ (Sadak 2) का ट्रेलर बीते दिन की रिलीज किया गया. इस फिल्म में संजय दत्त के साथ आलिया भट्ट (Alia Bhatt) और आदित्य रॉय कपूर (Aditya Roy Kapur) भी दिखाई दे रहे हैं.
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I miss them so much❤️ To everyone who is with their families right now, cherish them!
डाक्टर ने शालू का चैकअप किया और बोला कि परेशानी की कोई बात नहीं है. कमजोरी की वजह से इन को चक्कर आ गया था. दवा पिला दीजिए और इन का ध्यान रखिए. ये मां बनने वाली हैं और ऐसी हालत में लापरवाही ठीक नहीं है.’’
डाक्टर के मुंह से मां बनने की बात सुन कर रामबरन हक्केबक्के रह गए. डाक्टर के जाते ही सब से सवालों की झड़ी लगा दी.
दीपा बूआ ने पूरी बात रामबरन को बताई और बोलीं, ‘‘भैया, गौने की तारीख जल्दी से पक्की कर के आइए. अभी कुछ नहीं बिगड़ा है. सब ठीक हो जाएगा.’’
उधर होश में आते ही शालू रोने लग गई. रोतेरोते वह बोली, ‘‘बाबूजी, मुझे माफ कर दीजिए. मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गई.’’
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रामबरन शालू के सिर पर हाथ रख कर लंबी सांस ले कर बाहर चले गए.
अगले दिन वे फिर शालू की ससुराल गए. घर पर दीपा और शालू बेचैन घूम रही थीं कि न जाने क्या खबर आएगी.
रामबरन दिन ढले थकेहारे घर आए और आते ही सिर पर हाथ रख कर बैठ गए. उन को इस तरह बैठे देख सब का दिल बैठा जा रहा था. सब सांस रोक कर उन के बोलने का इंतजार कर रहे थे.
रामबरन रुंधे गले से बोले, ‘‘मेरी बेटी की जिंदगी बरबाद हो गई. उन लोगों ने गौना कराने से साफ मना कर दिया. रमेश बोल रहा था कि वह कभी मिलने नहीं आता था. दीपा, वे लोग मेरी बेटी पर कीचड़ उछाल रहे हैं. तू ही बता कि अब क्या करूं मैं?’’
दीपा बूआ और शालू दोनों रोने लगीं. किसी की समझ में कुछ नहीं आ रहा था. उस रात किसी ने कुछ नहीं खाया और सब ने अपनेअपने कमरे में करवटें बदलबदल कर रात बिताई.
सुबह हुई. शालू ने उठ कर मुंह धोया और बहुत देर तक खुद को आईने में देखती रही. मन ही मन एक फैसला लिया और बाहर आई.
रामबरन बरामदे में बैठे थे और शालू उन के पैरों के पास जमीन पर बैठ गई और बोली, ‘‘बाबूजी, मुझ से एक गलती हो गई है. लेकिन इस बच्चे को मारने का पाप मुझ से नहीं होगा. मुझ से यह पाप मत करवाइए.’’
रामबरन ने शालू का हाथ पकड़ लिया और बोले, ‘‘बेटी, क्या चाहती है बोल? मैं तेरे साथ हूं. मैं तेरे लिए सारी दुनिया से लड़ने के लिए तैयार हूं.’’
रामबरन की बात सुन कर शालू बोली, ‘‘बाबूजी, इस नन्ही सी जान को मैं सारी दुनिया से लड़ कर इस दुनिया में लाऊंगी और उस रमेश को नहीं छोडं़ूगी. अपने बच्चे को उस के बाप का नाम और हक दोनों दिलाऊंगी. रमेश बुजदिल हो सकता?है लेकिन मैं नहीं हूं. मैं आप की बेटी हूं, हार मानना नहीं सीखा है.’’
अपनी बेटी की बातें सुन कर रामबरन की आंखें भर आईं. वे आंसू पोंछ कर बोले, ‘‘हां बेटी, मैं हर पल हर कदम पर तेरी लड़ाई में साथ हूं.’’
अगले दिन शालू और रामबरन दोनों जा कर वकील से मिले और उन को सारी बातें समझाईं. वकील ने शालू को इतना बड़ा कदम उठाने के लिए सब से पहले शाबाशी दी और बोले, ‘‘बेटी, तुम परेशान न हो. हम यह लड़ाई लड़ेंगे और जरूर जीतेंगे.’’
धीरेधीरे समय बीतने लगा. रमेश पर केस दर्ज हो गया था. शालू हर पेशी पर अपने बाबूजी के साथ अदालत में अपने बच्चे के हक के लिए लड़ रही थी तो बाहर दुनिया से अपनी इज्जत के लिए. उस का बढ़ता पेट देख कर गांव वालों में कानाफूसी शुरू हो गई थी.
लोग कई बार उस के मुंह पर बोल देते थे, ‘देखो, कितनी बेशर्म है. पहले मुंह काला किया, अब बच्चा जनेगी और केस लड़ेगी.’
शालू सारी बातें सुन कर अनसुना कर देती थी. समय बीतता गया और शालू ने समय पूरा होने पर एक खूबसूरत से बेटे को जन्म दिया.
अदालत की तारीखें बढ़ रही थीं और रामबरन का बैंक बैलैंस खत्म हो रहा था. खेत बेचने तक की नौबत आ गई थी. लेकिन बापबेटी ने हिम्मत नहीं हारी, लड़ाई जारी रखी.
वे कई सालों तक लड़ाई लड़ते रहे. एक दिन रामबरन को एक रिश्तेदार ने एक रिश्ता बताया. वे लोग शालू की सारी सचाई जानते थे. लेकिन जब तक केस खत्म नहीं हो जाता, तब तक शालू अपनी जिंदगी के लिए कोई भी फैसला लेने को तैयार नहीं थी.
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इधर रमेश और उस के घर वाले अदालत के चक्कर लगालगा कर परेशान हो चुके थे. वे लोग चाहते थे कि समझौता हो जाए. शालू उन के घर आ जाए और वे बच्चे को भी अपना खून मानने के लिए तैयार थे, लेकिन शालू ने सख्ती से मना कर दिया और लड़ाई जारी रखी.
आखिरकार शालू की जीत हुई. अदालत ने रमेश को सजा सुनाई और उसे जेल भेज दिया गया. वहीं उसे और उस के बेटे को रमेश की जायदाद में हिस्सेदारी भी दी गई.
शालू ने हिम्मत दिखा कर अपना खोया हुआ मानसम्मान व अपने बेटे का हक सब वापस जीत लिया था. शालू इस जीत पर बेहद खुश थी. इधर शालू की शादी के लिए भी वे लोग जोर देने लग गए थे.
एक दिन रामबरन ने शालू और योगेश की शादी करा दी. योगेश शालू को ले कर मुंबई चला गया. डेढ़ साल बाद शालू और योगेश मुंबई से वापस आए तो शालू की गोद में 6 महीने की एक प्यारी सी बच्ची भी थी.
शाम को रामबरन जब घर आए तो देखा कि आंगन में शालू और योगेश अपने दोनों बच्चों के साथ खेलने में मगन थे. वे अपनी बेटी के उचित फैसले पर मुसकरा कर अंदर चले गए.
शालू को रमेश के साथ बिताए ये चंद पल जिंदगी के सब से हसीन पल लग रहे थे. उसे इस नई छुअन का एहसास बारबार हो रहा था जो उस के साथ पहली बार था.
उस दिन की मुलाकात के बाद शालू और रमेश अकसर रोजाना मिलने लगे. कभी घंटों तो कभी मिनटों की मुलाकातों ने सारी हदें पार कर दीं. प्यार की आंधी इतनी जोर से चली कि सारे बंधन टूट गए और वे दोनों रीतिरिवाज के सारे बंधन तोड़ कर उन में बह गए.
छुट्टियां खत्म होते ही रमेश वापस होस्टल चला गया. इधर शालू उस के खयालों में दिनरात खोई रहती थी. शालू की रातें अब नींद से दूर थीं. उसे भी तकिए की जरूरत और रमेश की यादें सताने लगी थीं.
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कुछ दिनों से शालू को कमजोरी महसूस होने लगी थी. पूरे बदन में हलकाहलका दर्द रहता था.
एक दिन शालू सुबह सो कर उठी तो चक्कर आ गया और उबकाई आने लगी. उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था. वह आ कर अपने कमरे में चुपचाप लेट गई.
शालू को इतनी देर तक सोता देख दीपा बूआ उस के कमरे में चाय ले कर आईं और बोलीं, ‘‘तबीयत ज्यादा खराब हो तो डाक्टर के पास चलते हैं.’’
शालू ने मना कर दिया और बोली, ‘‘नहीं बूआ, बस जरा सी थकावट लग रही है. बाकी मैं ठीक हूं.’’
दीपा बूआ बोलीं, ‘‘ठीक है, फिर चाय पी लो. आराम कर लो, फिर बाजार चलते हैं. कुछ सामान ले कर आना?है.’’
शालू चाय पीने लगी तो उसे फिर से उबकाई आने लगी. वह भाग कर बाहर गई और उसे उलटियां आनी शुरू हो गईं. दीपा बूआ उसे उलटी करती करते देख परेशान हो गईं और शालू से पूछने लगीं, ‘‘शालू, सच बता, तुझे यह सब कब से हो रहा है? कहीं तू पेट से तो नहीं है?’’
शालू बोली, ‘‘अरे नहीं बूआ. पेट में गैस बनी होगी इसलिए उलटी हो रही है. ऐसा कुछ नहीं है.’’
दीपा बूआ का दिल नहीं माना. वे शालू को ले कर नजदीक के सरकारी अस्पताल में गईं तो पता चला कि शालू सच में पेट से थी. यह सुन कर दीपा बूआ सन्न रह गईं.
घर आ कर दीपा बूआ शालू को झकझोरते हुए पूछने लगीं, ‘‘यह क्या किया शालू तू ने? कहा था कि तेरा अभी गौना नहीं हुआ है. रमेश से मिलने मत जाया कर. कुछ ऊंचनीच हो गई तो क्या होगा. लेकिन तेरी अक्ल पर तो पत्थर पड़े थे. अब बता कि हम क्या करें?’’
शालू सिर्फ रोए जा रही थी क्योंकि गलती तो उस से हुई ही थी, लेकिन अभी भी सुधर सकती थी. उस ने दीपा बूआ से कहा, ‘‘बूआ, आप बाबूजी से बात करो कि वे मेरा गौना करा दें और मैं रमेश से बात करती हूं. मैं उसे बताती हूं. वह जरूर कुछ करेगा.’’
सुबह सब लोग चाय पी रहे थे तब दीपा बूआ ने रामबरन से शालू के गौने की बात छेड़ी तो रामबरन बोले, ‘‘हां, मुझे भी पता है कि अब गौना निबटा देना चाहिए. बेटी राजीखुशी अपनी ससुराल में रहे. मैं उन लोगों से कल ही बात करता हूं.’’
यह सुन कर दीपा और शालू दोनों ने चैन की सांस ली. शालू जब सिलाई सैंटर गई तो सब से पहले जा कर उस ने पीसीओ से रमेश को फोन किया और सारी बात बताई जिसे सुन कर रमेश शालू पर बुरी तरह बरस पड़ा, ‘‘यह क्या बेवकूफों वाली हरकत की तुम ने, अभी तो मैं पढ़ रहा हूं और इतनी जल्दी बच्चा नहीं चाहिए मुझे. जा कर डाक्टर से इस को गिराने की दवा ले आओ.
‘‘मैं अभी इस की जिम्मेदारी नहीं उठाऊंगा. और लोग सुनेंगे तो क्या कहेंगे. पूरे गांव में मेरी बदनामी होगी.
‘‘सब मेरा मजाक उड़ाएंगे कि गौने से पहले बाप बन गया. नहींनहीं शालू, यह बच्चा नहीं चाहिए मुझे,’’ यह बोल कर रमेश ने फोन रख दिया और शालू ‘हैलोहैलो’ कहती रह गई.
उस दिन शालू का मन सिलाई सैंटर में भी नहीं लगा. वह जल्दी घर वापस आ गई और अपने कमरे में जा कर अंदर से दरवाजा बंद कर औंधे मुंह बिस्तर पर गिर गई. उस के कानों में रमेश की बातें गूंज रही थीं, ‘दवा खा लो, बच्चा गिरा दो…’ उस ने दोनों हाथों से कान बंद कर लिए और जोर चीख पड़ी, ‘नहीं…’
शालू की चीख सुन कर दीपा बूआ दौड़ कर आईं और दरवाजा जोरजोर से पीटने लगीं.
दरवाजा खोलते ही शालू दीपा बूआ के गले लग कर जोरजोर से रो पड़ी. काफी देर तक रो लेने के बाद जब उस का जी हलका हुआ तब दीपा ने उस के आंसू पोंछते हुए प्यार से पूछा, ‘‘क्या हुआ, क्यों रो रही है? रमेश से बात हुई? क्या बोला उस ने?’’
दीपा ने पुचकार कर पूछा तो शालू फिर बिलख पड़ी और बोली, ‘‘बूआ, रमेश ने कहा है कि उसे यह बच्चा अभी नहीं चाहिए. वह बोल रहा है कि मैं दवा खा लूं और इस बच्चे को गिरा दूं.’’
‘‘तू ने क्या जवाब दिया? तू क्या करने वाली है?’’ दीपा बूआ ने उस का कंधा पकड़ कर पूछा.
शालू बोली, ‘‘बूआ, उस ने मेरी बात ही नहीं सुनी. उस ने फोन काट दिया.
‘‘बूआ, अब आप ही बताओ कि मैं क्या करूं?’’
दीपा बूआ ने शालू को अपनी छाती से लगा लिया और उस के सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए बोलीं, ‘‘तू परेशान मत हो. आज तेरी ससुराल बात करने भैया गए हैं. एक बार तेरा गौना हो गया तो सब ठीक हो जाएगा. और देखना, रमेश भी इस बच्चे को अपना लेगा.’’
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दीपा बूआ की बातें सुन कर शालू को थोड़ी राहत मिली. उस का मन थोड़ा शांत हो गया.
शाम को रामबरन घर आए तो शालू का दिल जोरजोर से धड़कने लगा. वह सुनने के लिए परेशान थी कि उस की ससुराल वालों ने कब की तारीख पक्की की है.
दीपा बूआ पानी ले कर रामबरन के पास गईं और पानी दे कर उन से पूछने लगीं, ‘‘शालू की ससुराल वाले क्या बोल रहे हैं?’’
शालू भी दरवाजे के पीछे खड़ी हो कर दिल थाम कर सारी बातें सुन रही थी.
‘‘शालू की ससुराल वाले बोल रहे हैं कि रमेश की पढ़ाई का अभी एक साल और है इसलिए वे लोग नहीं ले जाएंगे. अभी हमारी शालू एक साल हमारे पास और रहेगी,’’ रामबरन मूंछों पर ताव देते हुए मुसकरा कर बोले.
रामबरन की बातें सुन कर दीपा बूआ के हाथ से गिलास छूट कर गिर गया.
रामबरन चौंक कर दीपा की तरफ देखने लगे. इस से पहले कोई कुछ बोलता, दरवाजे के पास खड़ी शालू बेहोश हो कर गिर पड़ी.
वे दोनों दौड़ कर शालू के पास गए और उसे उठा कर उस के कमरे में ले गए. डाक्टर को बुलाया गया.
शालू बड़ी सावधानी से घर में दाखिल हुई. इधरउधर देख कर वह दबे पैर अपने कमरे के तरफ बढ़ी, लेकिन दरवाजे पर पहुंचने से पहले ही दीपा बूआ ने उस का हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया.
दीपा बूआ तकरीबन धकेलते हुए दीपा को कमरे के अंदर ले गईं और अंदर जाते ही सवालों की झड़ी लगा दी, ‘‘कहां गई थी? इतनी देर कहां थी? तू आज फिर रमेश से मिलने गई थी?’’
‘‘हां, मैं रमेश से मिलने गई थी,’’ शालू खाऐखोए अंदाज में बोली.
दीपा बूआ शालू की हालत और उस के हावभाव देख कर परेशान हो कर समझाने लगीं, ‘‘देख शालू, तू रमेश के प्यार में पागल हो गई है, लेकिन तेरा इस तरह उस से मिलनाजुलना ठीक नहीं है. अगर कुछ ऊंचनीच हो गई तो गांव में भैया की क्या इज्जत रह जाएगी…’’
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दीपा बूआ काफी देर तक समझाने की नाकाम कोशिश करती रहीं लेकिन शालू तो जैसे रमेश के प्यार में बावली हो गई थी. उस को ऊंचनीच, सहीगलत कुछ नजर नहीं आ रहा था.
शालू के पिता रामबरन गांव के रसूखदार किसान माने जाते थे. 2 जोड़ी बैल, 4-5 भैंसें, ट्रैक्टरट्रौली, पचासों बीघा खेत, सभी सुखसुविधाओं से भरा बड़ा सा पक्का मकान. सबकुछ उन्होंने अपनी मेहनत से बनाया था.
रामबरन के घर में उन की पत्नी, एक बेटा और बेटी थी. पति से अनबन होने की वजह से उन की छोटी बहन भी उन के साथ ही रहती थी. बड़ा बेटा अजय अभी पढ़ रहा था जबकि बेटी शालू सिर्फ 8वीं जमात तक पढ़ने के बाद पढ़ाई छोड़ कर घर पर मां के साथ घर के कामों में हाथ बंटाती थी.
शालू जब 8वीं जमात में पढ़ रही थी तभी बगल के गांव में ही उस की शादी कर के रामबरन ने बेटी की जिम्मेदारी से छुटकारा पा लिया था.
शादी के समय शालू का होने वाला पति 10वीं जमात में पढ़ता था. दोनों शादी के समय छोटे थे इसलिए शादी के बाद गौने में विदाई तय थी.
शालू और रमेश का गांव अगलबगल में ही था इसलिए बाजार में या किसी दूसरे काम से आनेजाने पर कभीकभार दोनों का सामना हो ही जाता था.
समय बीतता गया. रमेश और शालू दोनों बड़े हो गए थे. रमेश 10वीं जमात पास करने के बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए शहर में अपने चाचा के पास चला गया था और उस के बाद होस्टल में रहने लगा था. वह घर पर बहुत कम आता था और अब उस को शहर और होस्टल की हवा लग गई थी.
शालू घर के कामों में बेहद माहिर हो गई थी. यह देख कर रामबरन ने उसे सिलाई सीखने की इजाजत दे दी थी इसलिए अपनी कुछ सहेलियों के साथ वह सिलाई सीखने जाती थी.
शालू को ऊपर वाले ने बड़ी ही फुरसत से बनाया था. साफ चमकता हुआ बेदाग चेहरा, दूध और गुलाब की पंखुड़ी जैसे गुलाबी गालों का रंग, बड़ीबड़ी कजरारी झील जैसी गहरी आंखें, तोते सी नाक, गुलाबी होंठ, कमर तक लहराते काले घने रेशमी बाल, भरा हुआ बदन, आंखों पर काजल ऐसा लगता था जैसे किसी ने चांद पर कालिख की बिंदी लगा दी हो.
सुबह जब शालू तैयार हो कर सिलाई सीखने के लिए साइकिल ले कर सिलाई सैंटर जाती थी तो उस को देख कर गांव के न जाने कितने मनचलों की नीयत खराब हो जाती थी.
शालू को देखते ही तरहतरह की बातें करते हुए लड़के अपने होंठों पर जीभ फेरने लगते थे, जिस का अंदाजा शालू को भी होता था लेकिन वह किसी को भी घास नहीं डालती थी क्योंकि उसे अपने और रमेश के रिश्ते का मतलब पता था.
दीवाली आ रही थी. कालेज बंद हो रहे थे. रमेश के साथ होस्टल में रहने वाले सभी लड़के घर चले गए थे और रमेश की मां ने भी इस बार घर आने के लिए बहुत दबाव बनाया था इसलिए वह इस दीवाली पर अपने?घर आया था.
अगले दिन रमेश गांव के दोस्तों के साथ एक पान की दुकान पर खड़ा था तभी बगल से शालू साइकिल ले कर निकली. रमेश ने जब उसे देखा तो उसे देखता ही रह गया. एक पल को तो उसे लगा जैसे आसमान से कोई परी जमीन पर आ गई है लेकिन थोड़ी ही देर बाद उसे लगा कि यह चेहरा जानापहचाना सा है. वह उसे याद करने की कोशिश करने लगा कि इसे कहां देखा है, लेकिन काफी दिन बीत जाने व कोई मेलजोल न होने की वजह से याद नहीं आ रहा था.
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शालू की तरफ एकटक निहारते देख उस के दोस्त ने कुहनी मारी और बोला, ‘‘क्या रमेश भाई, भाभी को देख कर कहां खो गए?’’
रमेश अचकचा कर बोला, ‘‘अरे कहीं नहीं यार, कौन भाभी, किस की भाभी?’’
तब रमेश के दोस्त ने उसे बताया कि वह जिस हसीना को इतने गौर से देख रहा था वह उस की ही बीवी शालू है.
दोस्त के मुंह से यह सुन कर रमेश का मुंह खुला का खुला रह गया. वह शालू की खूबसूरती व गदराया बदन देख कर हैरान रह गया था. अब उस को एकएक पल काटना भारी पड़ने लगा था.
जैसेतैसे रात कटी तो सुबहसुबह रमेश ने किसी तरह जुगाड़ लगा कर शालू को मिलने के लिए संदेशा भिजवाया.
संदेशा सुनकर शालू सोच में पड़ गई थी क्योंकि इस संदेशे में रमेश ने मिलने को कहा था लेकिन वह सोच रही थी कि अगर रमेश से मिलते हुए किसी ने देख लिया तो बदनामी होगी और अगर न मिलने गई तो रमेश के नाराज होने का डर था.
शालू का मन भी रमेश से मिलने के लिए बेताब था. डरतेडरते शालू ने आने का वादा कर लिया. शाम को दिन ढलने के बाद वह सब से छिप कर दबे पैर गांव के बाहर आम के बगीचे में गई जहां पर रमेश पहले से आ कर उस का इंतजार कर रहा था.
गांव वाले बगीचे में गन्ने की सूखी पत्तियों व पुआल का ढेर लगा कर रखते थे. दोनों उसी की ओट में बैठ कर बांहों में बांहें डाले बातें करने लगे.
थोड़ी देर रमेश के साथ गुजार कर शालू घर आ गई. घर आ कर अपने कमरे में बिस्तर पर गिर गई. उस के हाथपैरों में कंपन हो रही थी. उसे अपने हाथों में रमेश के हाथों की गरमाहट अब तक महसूस हो रही थी.
टिकटौक स्टार बनते ही शिवानी के तेवर बदल गए. वह जानती थी आरिफ उस के प्यार में पागल है. उस ने आरिफ को झांसा दे कर उसे अपने प्यार का धोखे वाला रसगुल्ला खिला दिया. मतलब दिखाने या कहने को शिवानी भी उस से प्यार करती थी पर हकीकत में उसे धोखे में रखे थी, वह भी अपना उल्लू सीधा करने के लिए.
इसी बीच जब शिवानी ने अपना ब्यूटी पार्लर खोलने की योजना बनाई तो आरिफ ने पार्लर खोलने के लिए थोड़ाथोड़ा कर के उसे लाखों रुपए दिए. चाहे दिन हो या रात, उस की एक आवाज पर वह एक पैर पर खड़ा रहता था. जबकि शिवानी उस की भावनाओं से खेल रही थी.
शिवानी के दीवाने आरिफ को इस बात की जरा भी भनक नहीं थी कि वह उस से प्यार नहीं करती, बल्कि दिखावे के लिए उस की भावनाओं से खेल रही है, पैसों के लिए उस का इस्तेमाल कर रही है. आरिफ ने शिवानी के सामने निकाह करने का प्रस्ताव रखा तो शिवानी ने शादी से साफ इनकार कर दिया.
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उधर आरिफ की शादी के लिए रिश्ते आ रहे थे. उस ने शिवानी से निकाह के चक्कर में घर आए कई रिश्ते ठुकरा दिए थे. बता दें कि शुरुआती दिनों में शिवानी ने आरिफ मोहम्मद के खिलाफ छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज करवा कर उसे जेल तक भिजवा दिया था. जेल से बाहर आने के बाद आरिफ का प्यार और जुनूनी हो गया था. उस के जुनून को देखते हुए शिवानी ने आरिफ से फिर दोस्ती कर ली.
आरिफ शिवानी से इतना प्यार करता था कि उस ने अपने दाहिने हाथ पर उस का नाम गुदवा लिया था. जब शिवानी ने शादी करने से इनकार कर दिया तो उस ने अपने हाथ की नस काट कर आत्महत्या करने की कोशिश की थी. इस पर भी शिवानी का दिल नहीं पसीजा. उस ने आरिफ के प्यार को ठुकरा दिया. उस की यह बात आरिफ को पसंद नहीं आई और उस ने उसी समय फैसला कर लिया कि अगर शिवानी उस की नहीं हो सकती तो वह किसी और की भी नहीं होगी.
घटना से 15 दिन पहले की बात है. कल तब जो शिवानी आरिफ से हंसहंस कर बातें करती थी, वो उसे देख क र मुंह मोड़ने लगी. शिवानी की यह बात आरिफ के दिल में शूल बन कर चुभने लगी थी. उसे शिवानी से ऐसी उम्मीद नहीं थी कि उसे देख कर वह अपना मुंह मोड़ लेगी. आरिफ ने पता लगाया कि वह उसे देख कर आखिर मुंह क्यों मोड़ रही है तो जो बात पता चली, उसे जान कर उस के दिल को गहरा धक्का लगा. शिवानी किसी लड़के से बातचीत करती थी. वह लड़का उस का बौयफ्रैंड था. यह जान कर आरिफ तिलमिला उठा. फिर भी शिवानी को पाने के लिए आरिफ ने ऐड़ीचोटी एक कर दी.
20 जून, 2020 को आरिफ ने शिवानी को मनाने के लिए उस के पार्लर के लिए हजारों रुपए का सामान खरीद कर दिया था. नानुकुर करने की बजाय उस ने सामान ले भी लिया था. आरिफ सोच रहा था कि वह एक न एक दिन उस का दिल जीत कर ही रहेगा. लेकिन हुआ इस के विपरीत.
22 जून को शिवानी ने आरिफ के नंबर को ब्लैकलिस्ट में डाल दिया. इस से आरिफ और भी पागल हो गया. वह उस की आवाज सुनने के लिए तरस गया था. शिवानी को देखने के लिए जब भी वह उस के पार्लर पहुंचता, उसे देख कर शिवानी पार्लर का दरवाजा बंद कर लेती थी. कई दिनों तक ऐसा ही होता रहा.
शिवानी का व्यवहार ही बना दुश्मन
26 जून की दोपहर में आरिफ शिवानी से मिलने उस के ब्यूटी पार्लर पहुंचा. वह जानता था दोपहर के समय ग्राहक कम ही आते हैं. यह समय उस से बात करने के लिए ठीक था. उस के पार्लर की देखभाल करने वाला नीरज दोपहर में खाना खाने घर चला जाता था.
बहरहाल, आरिफ जब ब्यूटी पार्लर पहुंचा, तो उसे देख कर शिवानी ने पार्लर का दरवाजा बंद कर लिया. उस समय वह फोन पर बात कर रही थी. यह देख आरिफ गुस्से के मारे पागल हो गया. उस ने बलपूर्वक दरवाजे पर जोर लगा कर दरवाजा खोल लिया और जबरन पार्लर के भीतर घुस गया. उस ने भीतर से दरवाजे पर सिटकनी लगा दी. आरिफ की हिमाकत देख कर शिवानी गुस्से से पागल हो गई और चिल्लाने लगी.
उसी समय मोबाइल पर शिवानी की छोटी बहन श्वेता का फोन आ गया. दोनों के बीच गरमागरम बहस चल रही थी. शिवानी ने ही श्वेता को बताया कि आरिफ दुकान में घुस आया है. उस से झगड़ा कर रहा है. तुम फोन रखो, उसे यहां से भगाने के बाद फोन करती हूं. इस के बाद श्वेता ने फोन काट दिया.
शिवानी फिर चिल्लाने लगी. उस के चिल्लाने से आरिफ डर गया और उस के सामने हाथ जोड़ कर चुप रहने के लिए कहने लगा. वह बारबार यही कहता रहा कि तुम चुप हो जाओ, चुप हो कर मेरी बात सुन लो. मैं वापस चला जाऊंगा, फिर तुम से मिलने भी नहीं आऊंगा. लेकिन शिवानी उस की बात सुनने के लिए तैयार नहीं थी.
काफी मिन्नतों के बावजूद जब शिवानी उस की बात सुनने के लिए तैयार नहीं हुई तो वह अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाया और उस ने दोनों हाथ शिवानी की गर्दन पर कस गए. कुछ ही पलों में शिवानी की सांस रुक गई और वह फर्श पर गिर गई.
शिवानी मर चुकी थी. यह देख कर आरिफ के होश उड़ गए. उसे जेल की सलाखें नजर आने लगीं. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि लाश का क्या करे, उसे कहां ठिकाने लगाए.
तभी उस की निगाह दुकान में पड़े बैड पर गई. आरिफ ने बैड का ढक्कन उठाया और शिवानी की लाश आड़ीतिरछी उस में डाल कर ढक्कन बंद कर दिया. साक्ष्य मिटाने के लिए शिवानी का फोन वह अपने साथ लेता गया. उस ने फोन का स्विच औफ कर दिया था. फिर पार्लर पर ताला लगा कर घर चला गया.
कुछ देर बाद जब नीरज दुकान पहुंचा तो ताला बंद देख उस ने सोचा शिवानी पार्लर बंद कर किसी काम से चली गई होगी. उस ने शिवानी के फोन पर काल किया तो फोन बंद था. यह देख कर नीरज कुछ परेशान हुआ जरूर, लेकिन बाद में उस ने इस बात को दिमाग से निकाल दिया.
देर शाम पार्लर से जब शिवानी घर नहीं पहुंची तो घर वालों को थोड़ी चिंता हुई. पिता विनोद खोबियान ने छोटी बेटी श्वेता से कहा कि शिवानी को फोन कर के पूछो कि कहां है. घर लौटने में इतनी देर क्यों लगा दी. श्वेता ने जब शिवानी के फोन पर काल की तो उस का फोन स्विच्ड औफ था. उस ने उस के फोन पर कई बार काल की, लेकिन हर बार एक ही आवाज आई कि फोन स्विच्ड औफ है.
बात न हो पाने की दशा में श्वेता ने उस के वाट्सऐप पर मैसेज दे कर पूछा कि वह कहां है. घर कब तक लौटेगी. घंटों बाद आरिफ ने शिवानी का फोन औन कर के जांच किया कि कहीं उस के फोन पर किसी का मैसेज तो नहीं आया है.
उस ने फोन औन किया तो उस ने श्वेता का मैसेज देखा. उस ने शिवानी की ओर से श्वेता के वाट्सऐप पर मैसेज भेज दिया कि वह हरिद्वार आई है. मंगलवार तक घर लौट आएगी.
मैसेज भेज कर आरिफ ने फोन बंद कर दिया. श्वेता ने जब शिवानी का मैसेज पढ़ा तो उसे थोड़ी हैरानी हुई. उस ने मम्मीपापा को बता दिया कि वह हरिद्वार गई है, मंगलवार तक घर लौट आएगी. इस से घर वाले निश्चिंत हो गए.
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28 जून, 2020 को जब नीरज पार्लर की सफाई करने वहां पहुंचा और पार्लर खोली तो टिकटौक स्टार शिवानी खोबियान की हत्या के राज से परदा उठा. कानून की आंख में धूल झोंकने के लिए आरिफ ने जिस चालाकी का परिचय दिया था, उस की चालाकी धरी की धरी रह गई और वह जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गया.
– कथा पुलिस सूत्रों पर आधार
घर वालों के बयानों से शक की कोई गुजाइश नहीं बची थी. आरिफ ही संदिग्ध लग रहा था, लेकिन वजह अभी भी साफ नहीं हो पा रही थी कि आखिर उस ने शिवानी की हत्या क्यों की? इस सवाल का जवाब उस के पकड़े जाने के बाद ही मिल सकता था.
उसी दिन शाम को मृतका शिवानी के पिता विनोद खोबियान ने एसओ रविंदर को आरिफ मोहम्मद को नामजद करते हुए एक लिखित तहरीर दी. तहरीर के आधार पर कुंडली थाने की पुलिस ने आरिफ मोहम्मद के खिलाफ धारा 302, 201 भादंवि एवं एससीएसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया. इस के साथ ही आरोपी की खोजबीन शुरू हो गई. इस मामले की जांच डीएसपी वीरेंद्र सिंह को मिली थी. वीरेंद्र सिंह ने अपनी काररवाई शुरू कर दी. आरिफ मोहम्मद कुंडली थाना क्षेत्र के प्याऊ मनियारी का रहने वाला था. पुलिस ने अपना तंत्र चारों ओर बिछा दिया था. मुखबिर ने पुलिस को सूचना दी आरोपी आरिफ अपने घर में छिपा हुआ है.
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मुखबिर की सूचना पर डीएसपी वीरेंद्र सिंह ने 29 जून की दोपहर में पुलिस टीम के साथ आरिफ के घर पर दबिश दी. पुलिस टीम में थानाप्रभारी रविंदर भी शामिल थे. प्याऊ मनियारी पहुंच कर पुलिस ने आरिफ के घर को चारों ओर से घेर लिया. पुलिस को देख कर आरिफ ने भागने की कोशिश की लेकिन वह अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सका. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.
आरिफ मोहम्मद को गिरफ्तार कर के पुलिस थाना कुंडली ले आई. डीएसपी वीरेंद्र सिंह ने आरिफ को इंट्रोगेशन रूम में ले जा कर पूछताछ शुरू की.
पुलिस के सवालों के सामने वह ज्यादा देर नहीं टिक सका. पुलिस के सवालों की बौछार से आरिफ ने घुटने टेक दिए. उस ने अपना जुर्म कबूल कर लिया.
उस ने पुलिस के सामने कहा कि शिवानी ने उस के साथ बेवफाई की थी, धोखा दिया था उसे. आरिफ ने बताया, उस के प्यार में लाखों रुपए पानी की तरह बहाने के बाद भी शिवानी ने मेरे प्यार का ऐसा सिला दिया कि मैं खुद को ठगा महसूस कर रहा था.
पिछले 5 दिनों से वह मुझ से बात नहीं कर रही थी. उस ने दूसरा प्रेमी ढूंढ लिया था. मैं उस से मिलने गया तो उस ने मुझे देख कर भीतर से दरवाजा बंद करने की कोशिश की. शिवानी का यह व्यवहार मुझे अच्छा नहीं लगा, मुझे गुस्सा आ गया. मैं ने उसे धक्का दे कर दरवाजा खोल दिया. वह मुझ पर भड़क गई और चिल्लाने लगी, यह देख मैं आपे से बाहर हो गया. मेरे दोनों हाथ उस की गर्दन तक पहुंच गए. मैं ने जोर से उस का गला दबा दिया. शिवानी मर गई. मैं समझ गया कि मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गई. दिमाग को शांत कर सोचा तो लगा, मुझे वहां से निकल जाना चाहिए.
बाद में शिवानी के मोबाइल पर श्वेता का वाट्सऐप मैसेज आया तो मैं ने शिवानी की ओर से मैसेज का जवाब दे दिया ताकि घर वालों को यकीन हो जाए कि शिवानी हरिद्वार गई है. इस के बाद आरिफ ने पूरी कहानी विस्तार से सुना दी. आरिफ से पूछताछ के बाद पुलिस ने देर शाम उसे अदालत के सामने पेश कर जेल भेज दिया. कहानी की बुनियाद कुछ इस तरह थी –
उत्तर प्रदेश के जिला बागपत के सोरपा निवासी विनोद खोबियान सालों पहले हरियाणा के जिला सोनीपत के कुंडली के प्याऊ मनियारी मोहल्ले में किराए का मकान ले कर परिवार सहित आ बसे थे. पत्नी और 2 बेटियां यही उन का घरसंसार था. दोनों बेटियों में शिवानी बड़ी, खूबसूरत और समझदार थी. श्वेता छोटी थी.
मामूली परिवार था शिवानी का
विनोद खोबियान शहर की एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करते थे. वो इतना कमा लेते थे जिस से उन के परिवार का भरणपोषण हो जाता था. साथ ही बच्चों की जरूरतें भी पूरी हो जाती थीं. 18 साल की हो चुकी शिवानी अल्हड़पन और मदमस्त किस्म की लड़की थी. एक तो जवान ऊपर से सुंदर व चंचल, वह किसी के भी मन को भा सकती थी.
शिवानी 12वीं में पढ़ती थी. उस ने अमीरी के जो ख्वाब आंखों में संजो रखे थे, वह महंगाई के जमाने में पिता के लिए पूरे करना मुमकिन नहीं था. ख्वाब चाहे खुली आंखों से देखा गया हो या सोते में, ख्वाब ही होता है. ख्वाब पूरे करने के लिए साधन, मेहनत की जरूरत होती है. शिवानी यह बात जानती थी, इसलिए ख्वाबों को साकार करने के लिए वह लगातार कोशिशों में जुटी हुई थी. सुंदर तो वह थी ही, उस में अभिनय प्रतिभा भी थी. फिल्मी दुनिया में किस्मत आजमाने के लिए उसे मायानगरी मुंबई जाना पड़ता, जो उस के लिए मुमकिन नहीं था.
पिछले 2-3 सालों से चाइनीज ऐप टिकटौक प्लेटफौर्म पीक पर था. लोग अपने वीडियो बना कर टिकटौक पर पोस्ट कर देते थे. इस तरह उन के अभिनय का शौक तो पूरा हो ही जाता था, फालोअर बढ़ने पर लाखों की कमाई भी होती थी.
शिवानी को यह बात पता थी. सो उस ने भी टिकटौक प्लेटफार्म पर अपने पांव जमाने शुरू कर दिए. सितारा बनने के लिए उस ने दिनरात एक कर दिया. फालोअर्स को रिझाने के लिए वह मनमोहक अदाओं के वीडियो बना कर टिकटौक पर पोस्ट करने लगी. इस से शिवानी खोबियान को तमाम लोग पसंद करने लगे. अपनी चंचल अदाओं से उस ने थोडे़ ही समय में लाखों फालोअर्स बना लिए और पैसे भी कमाने लगी. शिवानी के टिकटौक अभिनय से घर वाले परिचित थे. बेटी के इस काम से उन्हें कोई ऐतराज नहीं था. परिवार की ओर से मिले समर्थन के बाद शिवानी खुल कर टिकटौक प्लेटफार्म पर उतर आई.
टिकटौक की बदौलत आरिफ आया जिंदगी में
शिवानी खोबियान के लाखों फालोअर्स में से एक फालोअर ऐसा भी था जो अपने परिवार के साथ उसी के पड़ोस में रहता था. उस नाम था आरिफ मोहम्मद. 25 वर्षीय आरिफ मोहम्मद मध्यमवर्गीय परिवार से था. उस के पिता का खुद का छोटामोटा बिजनैस था. उसी की कमाई से परिवार का खर्च चलता था. आरिफ के भी 2 भाई और एक बहन थी. भाई बहनों में वह सब से बड़ा था. आरिफ पढ़ाई के साथसाथ पिता के व्यवसाय में भी अपना हाथ बंटाता था.
करीब 6 साल पहले विनोद खोबियान जब सपरिवार बागपत से सोनीपत आए थे तो उन्होंने कुंडली के मोहल्ला प्याऊ मनियारी में रहने के लिए मकान लिया था. आरिफ का मकान उन के पड़ोस में था. बात 4 साल पहले की है. घर से बाहर जातेआते एक दिन आरिफ की नजर शिवानी पर पड़ गई. उसे देखा तो वह देखता रह गया. वह शिवानी को तब तक देखता रहा जब तक वह उस की आंखों से ओझल नहीं हो गई. उस दिन के बाद से आरिफ शिवानी की एक झलक पाने के लिए अपने घर के बाहरी दरवाजे पर खड़ा हो जाता था. जब तक वह शिवानी का दीदार नहीं कर लेता था तब तक वहां से हटता नहीं था.
आरिफ शिवानी से एकतरफा प्यार करने लगा था. उस के इस प्यार में पागलपन था. वह शिवानी को अपने दिल का हाल बताने के लिए बेताब था. लेकिन उसे ऐसा कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था जिस से शिवानी तक पहुंच जाए.
आखिरकार आरिफ ने शिवानी तक पहुंचने का रास्ता बना ही लिया. जब भी वह शिवानी के पिता को देखता तो उन्हें अदब के साथ नमस्कार करता ताकि उन की निगाहों में आ जाए. पड़ोसी तो वह था ही, इसलिए वह त्यौहारों वगैरह पर विनोद खोबियान और उन के परिवार को निमंत्रित करने लगा.
इस तरह वह शिवानी तक पहुंचने में कामयाब हो गया. शिवानी के घर वाले उस के व्यवहार के कायल थे. वे लोग उसे अपने यहां जबतब चाय पर बुलाने लगे.
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इस आनेजाने से शिवानी और आरिफ के बीच नजदीकियां बनती गईं. शिवानी जल्दी ही जान गई कि आरिफ उस से एकतरफा प्यार करता है लेकिन वह प्यार के पचड़े में नहीं पड़ना चाहती थी. वह सच्चे दोस्त की तरह व्यवहार करती थी. तब शिवानी टिकटौक प्लेटफौर्म से दूर थी. वह बाद में टिकटौक स्टार बनी थी.